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आईपीएल में इन 10 प्लेयर्स की पहली बार लगेगी बोली

इंडियन प्रीमियर लीग का दसवां सीजन जल्द ही शुरू होने वाला है. 10वें सीजन के खिलाड़ियों की नीलामी 20 फरवरी को होने वाली है. आईपीएल के इस सीजन में कई नए चेहरे देखने को मिलेंगे. इसमें सबसे बड़ा अट्रैक्शन इंग्लिश क्रिकेटर्स होंगे. वहीं, कुछ दिन पहले टी20 क्रिकेट में 300 रन बनाने वाले दिल्ली के मोहित अहलावत पर भी नीलामी में नजर रहेगी.

आइए जानें ऐसे ही कुछ और प्लेयर्स के बारे में, जो पहली बार आईपीएल ऑक्शन में हो रहे हैं शामिल..

खिलाड़ी

टीम

बेस प्राइस

तस्कीन अहमद

बांग्लादेश

30 लाख

बेन स्टोक्स

इंग्लैंड

02 करोड़

मोहित अहलावत

भारत

10 लाख

नाथन लियॉन

ऑस्ट्रेलिया

1.5 करोड़

क्रिस वोक्स

इंग्लैंड

02 करोड़

पृथ्वी शॉ

भारत

10 लाख

ग्रांट इलियट

न्यूजीलैंड

01 करोड़

जेसन रॉय

इंग्लैंड

01 करोड़

कैगिसो रबाडा

साउथ अफ्रीका

01 करोड़

मिशेल सैंटनर

न्यूजीलैंड

50 लाख

 

फिल्म बेबी के प्रीक्वल का ट्रिपल धमाल

तापसी पन्नू दक्षिण भारतीय फिल्मों का बहुत बड़ा नाम हैं और इस नाम का फायदा 'नाम शबाना' के मेकर्स उठाने जा रहे हैं. बेबी फिल्म के प्रीक्वल को निर्देशक हिंदी के साथ तमिल और तेलुगु में भी डब करके रिलीज करने वाले हैं. तीन भाषाओं के कारण फिल्म ज्यादा जगह प्रदर्शित होगी जिसका सीधा असर फिल्म के कलेक्शन पर होगा. वैसे भी दक्षिण भारतीय फिल्मों के दर्शक एक्शन फिल्में देखना ज्यादा पसंद करते हैं. तापसी ने कई दक्षिण भारतीय फिल्में की हैं. 

फिल्म 'नाम शबाना' का ट्रेलर रिलीज हो चुका है जिसे काफी पसंद किया जा रहा है. ट्रेलर में फुल एक्शन नजर आ रहा है और तापसी ने इन एक्शन दृश्यों को करने के पहले मार्शल आर्ट्स का प्रशिक्षण लिया है. उसके बाद वे इस तरह के खतरनाक स्टंट्स करने में सफल रही हैं. फिल्म में अक्षय कुमार का कैमियो है और अक्षय ने तापसी की अच्छी- खासी मदद भी की है. 

नाम है शबाना से नीरज पांडे और शीतल भाटिया जैसे फिल्ममेकर्स के नाम जुड़े हैं जिन्होंने 'अ वेडनेस डे', 'स्पेशल 26' और 'एमएस धोनी- द अनटोल्ड स्टोरी' जैसी फिल्में दी हैं. शिवम नायर द्वारा निर्देशित 'नाम शबाना' 31 मार्च को प्रदर्शित होगी.

राष्ट्रीय खेल हॉकी को कितना जानते हैं आप!

भारत में क्रिकेट इतना लोकप्रिय है कि लोगों का ध्यान किसी दूसरे खेल की तरफ जाता ही नहीं. फिर चाहे वह देश का राष्ट्रीय खेल ही क्यों न हो. हॉकी, भारत का राष्ट्रीय खेल भारत में ही अपना पहचान खोता जा रहा है. अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए हॉकी में नित्य ही नए नए प्रयोग किए जा रहे हैं. नियम बदले जा रहे हैं, क्रिकेट की ही तरह लीग शुरू किए जा रहे हैं.

राष्ट्रीय खेल होने के बाद भी भारत में हॉकी नहीं क्रिकेट को पूजा जाता है. बेशक हॉकी एक लोकप्रिय खेल है, जिसे भारत में अंग्रेजों ने शुरू किया था. दो टीमों के बीच खेले जाने वाले इस खेल में प्रत्येक टीम में 11-11 खिलाड़ी होते हैं.

हॉकी सबसे पहले ईरान में खेला गया था. इसके बाद यह बहुत से देशों में खेला गया लेकिन इसके विस्तार का श्रेय भारत और ब्रिटेन की सेना को जाता है. क्या आपको पता है कि दुनिया में हॉकी कई प्रकार से खेली जाती है- फील्ड हॉकी, बर्फ हॉकी, रोलर हॉकी, स्लेज हॉकी, गली हॉकी.

तो आइए जानते हैं भारतीय हॉकी से जुड़ी कुछ रोचक तथ्य

1. इंडियन हॉकी फेडरेशन (IHF) का गठन 7 नवंबर 1925 को ग्वालियर में हुआ था. 1928 में भारत इंटरनैशनल हॉकी फेडरेशन (FIH) से जुड़ा. एफआईएच से जुड़ने वाला भारत पहला एशियाई देश है.

2. भारतीय हॉकी टीम पहली भारतीय खेल टीम थी जिसने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, जापान, अमेरिका जैसे देशों का दौरा किया.

3. हॉकी की टीम पहली ऐसी भारतीय टीम थी जिसने वर्ल्ड टूर किया. 1932 में भारतीय हॉकी टीम ने वर्ल्ड टूर किया था.

4. 1944 से आईएचएफ हर साल नैशनल चैम्पियनशिप का आयोजन करता है.

5. ऑल इंडिया विमेन्स हॉकी फेडरेशन का गठन 1947 में हुआ था.

6. भारत ने 1928 एम्सर्टडम ओलंपिक में पहली बार हॉकी खेला था और गोल्ड मेडल भी जीता था. भारत ने 8 बार ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता है.

7. 1971 में भारतीय टीम ने पहली बार हॉकी वर्ल्ड कप में शिरकत की और पहली ही बार में तीसरे स्थान पर कब्जा किया.

8. 1975 में मलेशिया में हुआ वर्ल्ड कप भारत के नाम था.

9. भारत के नाम हॉकी की सबसे बड़ी जीत है. 1932 ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम ने अमरिका को 24-1 से हराया था.

10. हॉकी पक (जिसे हम आम भाषा में हॉकी गेंद कहते हैं) को खेलने से पहले ठंडा किया जाता है या यूं कहें कि जमाया जाता है ताकि वह खेल के समय फील्ड में उछले ना.

आसानी से मिलेगा सोने पर लोन

आमतौर पर लोन लेने के लिए लोगों को अच्छी खासी मेहनत करनी पड़ती है. बैंक के कई चक्कर लगाने के बाद भी लोन नहीं मिलता. अच्छे खासे क्रेडिट स्कोर के बावजूद बैंक लोन देने से इंकार कर देते हैं, जिसकी वजह लोन के लिए ऐप्लाई करने वाले को नहीं बताई जाती. पर बैंकों ने ग्रामीण क्षेत्रों के निवासीयों के लिए लोन प्रक्रिया को आसान कर दिया है.

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) द्वारा सोने के बदले दिए जाने वाले कर्ज की मात्रा को दोगुना कर दिया है. अब ग्रामीण बैंक सोने के बदले 2 लाख रुपये तक का कर्ज दे सकेंगे. पर यह लोन तभी मिलेगा जब लोन के पुनर्भुगतान की अवधि 12 महीने से ज्यादा नहीं होगी.  रिजर्व बैंक ने इस बारे में अधिसूचना जारी की है.

इससे पहले ग्रामीण बैंकों को एक लाख रुपये तक का स्वर्ण कर्ज देने की अनुमति थी. केंद्रीय बैंक का कहना है कि उसने इस योजना के तहत दिए जाने वाले लोन की राशि को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने का फैसला किया है, हालांकि इसके लिए कुछ शर्तों का पालन करना होगा.

अब फेसबुक दिलाएगा रोजगार

दुनिया को डिजिटल बनाने के लिए डिजिटल फीचर का होना बहुत जरूरी है. इसी के चलते एक नया फीचर आया है. फेसबुक सोशल मीडिया साइट ने अमेरिका और कनाडा के बिजनेस हाउस को जॉब वैकेंसी पोस्ट करने की सुविधा दे दी है. अब आने वाले दिनों में आप फेसबुक के जरिए नौकरी पा सकते है. कंपनियां फेसबुक के जरिए नौकरी की उम्मीद रखने वाले व्यक्ति का आवेदन भी प्राप्त कर सकती हैं. फेसबुक के इस नए फीचर को माइक्रोसॉफ्ट के लिंक्डइन के लिए चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है.

यूजर अब फेसबुक के बिजनेस पेज पर हेल्प वांटेंड पोस्ट के जरिए नौकरी के बारे में जान सकेंगे. और मोबाइल ऐप्लिकेशन में नया 'जॉब्स' सेक्शन बुकमार्क में मौजूद रहेगा. फेसबुक ने कहा है कि, "बिजनेस घराने और लोग नौकरी के लिए फेसबुक का इस्तेमाल पहले से करते रहे हैं. इसलिए एक नया फीचर रोलआउट किया है जिसकी मदद से नौकरी की जानकारी और आवेदन का काम सीधे फेसबुक पर किया जा सकेगा."

अगर कंपनियां अपने खाली पदों को फेसबुक पर प्रमोट करने के लिए पैसे देंगी, तो ये जानकारियां न्यूज फीड में भी उपलब्ध होंगी. इस सोशल मीडिया साइट के मुताबिक, "Apply Now" बटन पर क्लिक करने पर एक ऑनलाइन आवेदन फॉर्म खुलेगा जिसमें आवेदन करने वाले शख्स की फेसबुक प्रोफाइल के आधार पर कई जानकारियां पहले से उपलब्ध होंगी."

आवेदक फॉर्म को भेजने से पहले उसमें अपनी सुविधा के हिसाब से बदलाव कर सकते हैं. अगर आवेदक की जानकारी फेसबुक पर सही नहीं है तो वह फॉर्म में सही जानकारी डाल सकता है. इसके बाद कंपनी के बिजनेस पेज पर नजर रखने वाले प्रतिनिधि आवेदक के आवेदन की जांच करेंगे. और अपनी पसंद के उम्मीदवार के साथ फेसबुक मैसेंजर टेक्स्ट कम्युनिकेशन सर्विस के जरिए जुड़ सकेंगे. फेसबुक ने इस नए फीचर की टेस्टिंग अमेरिका में की है. और इसे जल्द ही अन्य देशों में भी उपलब्ध कराया जाएगा.

राजनीति पर नाना पाटेकर का बड़ा बयान

बॉलीवुड में नाना पाटेकर उन कलाकारों में से एक हैं, जो कि हर मसले पर खुलकर बात करते हैं. वे राजनेताओं की आलोचना करने से भी नहीं कतराते हैं. वे पिछले कुछ वर्षों से महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों के किसानों के लिए काफी काम कर रहे हैं. वे खुद ही किसान परिवारों से मिलकर किसानों की विधवाओं के हाथ में धन दे रहे हैं. हाल फिलहाल वे महाराष्ट्र में काफी यात्राएं कर रहे हैं, तो कहीं उनका ईरादा राजनीति से जुड़ने का तो नही हैं.

इस बात पर नाना पाटेकर मुखर होकर कहते हैं कि ‘‘देखिए, मुझे सच बोलने की आदत है, इसलिए हर राजनीतिक पार्टी मुझे दो दिन में अपनी पार्टी से बाहर कर देगी. मैं दूसरी पार्टी में जाउंगा. दो दिन बाद वहां भी यही होगा और एक माह के बाद ऐसी कोई पार्टी नहीं बचेगी, जिसमें मैं जा सकूंगा. सबसे बड़ा सच ये है कि जिस दिन आप किसी राजनीतिक पार्टी के सदस्य बन जाते हैं, उसी दिन आप सच बोलने का हक भी खो देते हैं. यदि आप देखते हैं कि आपकी पार्टी का ही सदस्य कुछ गलत कर रहा हैं, तब भी आपको चुप रहना पडे़गा. आप वास्तव में जो कुछ करना चाहते हैं वह राजनीति व राजनीतिक पार्टी से जुड़कर नहीं कर सकते. मेरे जैसे इंसान के लिए राजनीति से दूरी ही भली है. यह हमारी गलती है कि हम वोट देने के बाद यह सोच लेते हैं कि अब सरकार 5 साल के लिए बन गयी और हम कुछ नहीं कर सकते, जबकि हमने वोट दिया है, तो उनकी जिम्मेदारी होती है कि हम नागरिकों के लिए काम करें.’’

आप भी खरीद सकते हैं उड़ने वाली कार

एक उड़ने वाली कार तो हमारे और आपके लिए किसी सपने जैसा ही है. पिछले काफी सालों से हमें सुनने मिलता रहा है कि बहुत जल्द ही उड़ने वाली कार का ये सपना सच में बदलने वाला है. विज्ञान और तकनीक से संबंधित कई कंपनियां आसमान में उड़ने वाली कारों का निर्माण करने की दिशा में काम कर रही हैं. तकनीकी की दृष्टी से बाजार से ऐसी कार खरीदना अभी तक मुमकिन नहीं हो सका था, लेकिन अब आपका उड़ने वाली कार खरीदने का सपना वास्तव में पूरा होगा.

डच की एक कार कंपनी पैल-वी आपकी ये उड़ने वाली कार का सपना सच कर दिखाएगी. कंपनी पैल-वी ने दुनिया की पहली उड़ने वाली कार का निर्माण किया है. इस कार को आप खरीद भी सकते हैं. उड़ने वाली कार की बिक्री शुरू हो चुकी है.

इस कार को 6.60 लाख रुपए देकर बुक किया जा सकता है. इस कार के ज्यादा प्रीमियम वेरियंट को खरीदने के लिए लगभग 16.70 लाख रुपए देने होंगे. वहीं कंपनी ने कार की लिबर्टी स्पोर्ट की कीमत Rs. 2 करोड़ 70 लाख तय की है और लिबर्टी पायनियर वेरियंट की कीमत Rs. 4 करोड़ 1 लाख रखी गई है.

इस उड़ने वाली कार के फीचर्स की बात करें तो ये कार चालू करने का बाद 10 मिनट में उड़ने के लिए तैयार होती है. जमीन पर इसकी रफ़्तार 161 किलोमीटर प्रति घंटे होगी और ऊपर आसमान में या हवा में ये कार 112 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है. एक लीटर ईंधन में ये कार लगभग 11 किलोमीटर चलती है.

यूरोप में इस कार की डिलेवरी साल 2018 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है. 

एग्जाम फोबिया से पड़ सकता है परिणामों पर असर

दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं के दिन जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं वैसे-वैसे स्टूडेंटस के बीच टेंशन और स्ट्रेस बढ़ता जा रहा है. स्टूडेंट्स के ऊपर बोर्ड एग्जाम में अच्छे नंबर लाने का दवाब बढ़ने से उनके दिमाग और सेहत दोनों पर काफी बुरा प्रभाव देखने को मिलता है. परीक्षा की तैयारी में अकसर बच्चे अपनी नींद में कटौती करने लगते हैं, जिस वजह से उन्हें टेंशन और एग्जाम फोबिया जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ता है.

वैदिकग्राम के डॉक्टर अजय सक्सेना कहते हैं “इस समय जरुरी होता है की घर में पॉजिटिव माहौल रहे. इसके साथ ही परीक्षा की तैयारी के बीच रोज आधे घंटे का समय योग और मैडिटेशन पर देना जरुरी है. इस समय हम नस्यं विधि को प्रयोग में ला सकते है जिसमें बच्चों के माथे में मेडिकेटिड तेल के प्रयोग से स्ट्रेस खत्मकर कंसंट्रेशन पॉवर को स्ट्रोंग करने में मदद मिलती है. पदमासन और सर्वांगासन करने से यादाश्त तेज़ होती है और साथ ही शरीर भी तंदरुस्त रहता है. कई बार हमें बच्चों से यह सुनने के लिये मिलता है की उनका ध्यान पढ़ाई से ज्यादा एग्जाम के ऊपर रहता है जिस वजह से वह पूरी तरह से विषयों को याद नहीं कर पाते हैं और समय भी बर्बाद होता है. इसकी वजह ध्यान की कमी है, जिसे बच्चे कपालभारती और अन्लोम बिलोम के द्वारा दूर कर सकते है.”

10वीं कक्षा के छात्रों में हार्मोनल बदलाव भी होते है जिनकी वजह से उनके व्यवहार में काफी बदलाव आता है. कई बार चिड-चिड़ापन बढ़ जाता है खास कर परीक्षार्थियों को इस तरह की काफी चीजों का सामना करना पड़ता है. बदलते मूड से बच्चों में डिप्रेशन ओर डिमोटीवेट होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है. बच्चों में एग्जाम के समय कोर्टीसोल और एपिनेफ्रीन जैसे स्ट्रेस हार्मोन रिलीज़ होते है जिनसे उन्हें विषयों की तैयारी पर ध्यान केन्द्रित करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

इसी विषय पर डीपीएस इंदिरापुरम की प्रिंसिपल मीता राय ने कहा “इस समय बच्चे बहुत जल्दी निराश और हताश हो जाते हैं. इस वक्त घरवालों की भूमिका काफी अहम हो जाती है. यह बहुत जरुरी होता है की अभिवावक अपने बच्चों की दूसरों से तुलना न करें तथा उन पर अनावश्यक दवाब न डाले और बच्चों को जितना हो सके प्रोत्साहित करें, जिससे उनके आत्मविश्वास में कोई कमी न आये.”

‘नोटबंदी से पूर्वांचल के लाखों लोग बेरोजगार’

दिल्ली की राजनीति शुरू से ही पूर्वांचल कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड के लोगों को लुभाने व उन्हें अपने पाले में करने की रही है. इस की वजह यह है कि यहां बड़ी तादाद में इन राज्यों के लोग रहते हैं और दिल्ली में किस की सरकार बनेगी, यह बहुतकुछ इन के डाले गए वोटों पर भी निर्भर करता है. अब चूंकि दिल्ली में नगरनिगम चुनाव होने हैं, इसलिए भारतीय जनता पार्टी ने भी बड़ा दांव खेलते हुए भोजपुरी गायक व उत्तरपूर्व दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी को दिल्ली का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है. उधर कांग्रेस में कद्दावर नेता महाबल मिश्रा की गिनती भी पूर्वांचल नेताओं में होती है.

आम आदमी पार्टी ने तो ‘पूर्वांचल शक्ति’ नाम से एक प्रकोष्ठ बनाया है और इस की बागडोर कभी मौडलिंग और शौर्ट फिल्मों में कलाकार और फिल्मकार की भूमिका निभाने वाले नीरज पाठक को सौंप दी, जो अभी आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, पूर्वांचल शक्ति हैं. नीरज पाठक की पैदाइश बिहार के मधुबनी जिले के एक गांव रांटी की है. इन्होंने स्कूली शिक्षा के बाद की पढ़ाई दिल्ली में रहते हुए की.

पेश हैं, नीरज पाठक से की गई बातचीत के खास अंश:

एक मौडल, कलाकार व फिल्मकार की राजनीति में कैसे ऐंट्री हुई?

अन्ना आंदोलन से प्रभावित हो कर जब मैं इस आंदोलन का हिस्सा बना, तब अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया के संपर्क में आया. यहीं से राजनीति की एबीसीडी शुरू हुई. इस से पहले मैं मौडलिंग करता था. कई शौर्ट फिल्मों में ऐक्टिंग की और डायरैक्शन भी किया.

भाजपा ने हाल ही में भोजपुरी गायक व उत्तरपूर्व दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी को दिल्ली का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. आप क्या कहेंगे?

देखिए, भाजपा हमेशा से दिल्ली में पूर्वांचलियों को सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल कर आम जनता को बरगलाती रही है. यही वजह है कि लोगों ने पिछले चुनावों में भाजपा को नकारा.

मनोज तिवारी को अध्यक्ष बना कर पूर्वांचल वोट को अपनी तरफ करने की कोशिश है, पर दिल्ली की जनता केंद्र और यहां की राजनीति को समझ चुकी है.

नोटबंदी के ऐलान से तो लोगों की कमर ही तोड़ दी गई. उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड वगैरह राज्यों के लाखों लोग जो दिल्ली में रह कर रोजीरोटी कमाते थे, अब मजबूरन बेरोजगार हो कर गांवों में लौट चुके हैं और उन का भविष्य अंधकारमय हो चुका है.

नोटबंदी पर तो आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केंद्र की भाजपा सरकार और नरेंद्र मोदी की तीखी आलोचना भी करते रहे हैं. इस से क्या फायदा होगा?

जी, बिलकुल. 8 नवंबर, 2016 की रात 8 बजे जब नरेंद्र मोदी देश को संबोधित करने वाले थे, तो लगा था कि कुछ अच्छे ऐलान करेंगे, पर उन्होंने तो नोटबंदी का ऐलान कर देश को ही गड्ढे में पहुंचा दिया. देश कई साल पीछे चला गया.

मैं आप को बताना चाहूंगा कि आल इंडिया मैन्यूफैक्चरर्स और्गनाइजेशन (एआईएमओ) के एक अध्ययन के मुताबिक, 8 नवंबर से 12 दिसंबर के बीच लाखों लोगों की नौकरियां चली गई हैं. मैन्यूफैक्चरिंग उद्योग में तो 35 फीसदी नौकरियां खत्म हो गई हैं. कई उद्योगधंधे बंद हो गए हैं और कई बंद होने के कगार पर हैं.

इस कारोबार से पूर्वी क्षेत्र के कई राज्यों के कामगार जुड़े थे, जिन की नौकरी अब जा चुकी है. और तो और इस कदम से न तो भ्रष्टाचार खत्म हुआ, न ही भ्रष्टाचारी पकड़े गए. उलटे, बैंकों और एटीएम में लोग घंटों लाइन में लगे रहे. बैंकों से नोट गायब थे और बाहर नोटों की कालाबाजारी हो रही थी. दुखद बात तो यह है कि इस नोटबंदी से लाइनों में खड़े देशभर में तकरीबन 150 लोगों की मौत भी हो गई.

राजनीतिक पार्टियों के लिए पूर्वांचल के लोग दिल्ली में क्या अहमियत रखते हैं?

देखिए, पहले की सरकारों ने दिल्ली में पूर्वांचल के लोगों के लिए कुछ नहीं किया. उन्हें सिर्फ सब्जबाग दिखा कर उन का वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया. आम आदमी पार्टी ने सब के साथ पूर्वांचल के लोगों को भी तवज्जुह दी. यही वजह है कि पिछले विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल के 12 लोगों को पार्टी ने टिकट दिया और वे सभी जीत भी गए. दिल्ली सरकार में अभी 2 मंत्री पूर्वांचल के हैं.

मैं चाहूंगा कि दिल्ली में पूर्वांचल के लोग सिर उठा कर जीएं और अपने हुनर, अपनी मेहनत से आगे बढ़ें.

आप को लगता है कि मनोज तिवारी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बनाने के पीछे आगामी नगरनिगम चुनाव में भाजपा को खोई इज्जत मिल जाएगी?

ऐसा कुछ नहीं होगा. मनोज तिवारी भोजपुरी में गाते अच्छा हैं. ऐक्टिंग भी ठीकठाक कर लेते हैं, पर यह ऐक्टिंग जनता के बीच काम नहीं आएगी. दिल्ली की जनता विकास चाहती है और खुद मनोज तिवारी उत्तरपूर्व दिल्ली से सांसद रहते हुए अपने इलाके से ही गायब रहे हैं. उन्होंने तो अपने एमपी फंड का भी सही इस्तेमाल नहीं किया है.

केंद्र की जिस भाजपा सरकार ने नोटबंदी से जनता को बरगलाने की कोशिश की है, मैं यह बताना चाहूंगा कि इस में ही घोटाले हुए. हमारे यहां जो नोट छपते हैं, उस के कागज विदेश से आते हैं. इस में ही लाखों करोड़ रुपए के घोटाले हुए. 8 से 12 हजार करोड़ रुपए तक की तो दलाली खाई गई.

जनता की गाढ़ी कमाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खा गए और उधर बड़ेबड़े कारोबारियों में बांट दिए. दिल्ली के नगरनिगम चुनाव में भाजपा का नामोनिशान मिट जाएगा.

एक तरफ तो भाजपा मनोज तिवारी को दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बनाती है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा के बड़े नेता विजय गोयल दिल्ली से बिहारियों को खदेड़ देने की बात करते हैं.

पिछले लोकसभा चुनाव में मनोज तिवारी के दिल्ली की औरतों पर किए गए ट्वीट पर खासा बवाल मचा था. आम आदमी पार्टी इसे महिला विरोधी क्यों मानती है?

देखिए, राजनीति अपनी जगह है. पर हम सब को औरतों के प्रति आदर भाव रखना चाहिए. अपने ट्वीट में मनोज तिवारी ने दिल्ली की औरतों को गोलगप्पे खाने वाली और खा कर दोने की तरह फेंकने वाली कहा था. यह दोहरी मानसिकता नहीं तो और क्या है?

क्या मौडलिंग व फिल्मों की ओर आप की फिर लौटने की इच्छा होती है?

फिलहाल तो पार्टी ने मुझे जो जिम्मेदारी दी है, उसी पर ध्यान दे रहा हूं. लेकिन मौडलिंग व फिल्मों से मोह अभी तक गया नहीं है.

और क्याक्या पसंद है आप को?

भारत में केरल बारबार जाना चाहता हूं. वहां की खूबसूरती बेजोड़ है. खाने में कुछ भी खा लेता हूं, बशर्ते पौष्टिक हो. अच्छेअच्छे कपड़े पहनने का शौक रखता हूं.

शराब का कहर

तनाव शराब का कारण या शराब तनाव का कारण है यह तय करना कठिन है, पर जिस तरह तनाव और शराब की वजह से राहुल माटा ने दिल्ली में अपने पिता का गला काट दिया और पड़ोसी के घर में आग लगा दी, इस से साफ है कि शराब को कितना ही आधुनिकता का नाम दे दिया जाए, लेकिन यह एक मादक पेय है जो कब होशोहवाश ले बैठे पता नहीं. शराब को सोसायटी की जान मानने वाले भूल जाते हैं कि सोसायटी को जिंदा रखना पहला फर्ज है और खुद को भुला देने का तरीका पालना उस फर्ज को कम नहीं करता.

राहुल माटा एक आप्रवासी भारतीय का बेटा है और मर्चेंट नेवी में नौकरी करता था पर उसे किसी महिला के साथ शराब पी कर बदसलूकी के कारण नौकरी से निकाल दिया गया था. अब वह दिल्ली में पिता के पैसे से खरीदे फ्लैट में रहता था, पर अकसर वह शराब व दूसरे खर्चों के लिए मां से पैसे मांगता था. पिता ने दिल्ली आ कर बेटे को जायदाद से बेदखल करने का एक विज्ञापन भी दे दिया था. गुस्से में राहुल ने पिता को ही मारने की योजना बना डाली और पिता को सोसायटी फ्लैट में मारने के बाद भागा तो एक पड़ोसी के फ्लैट में जा छिपा, जहां रसोई गैस का सिलैंडर खोल कर उस ने आग लगा डाली. फ्लैट राख हो गया. इस मामले में शराब ने पढ़ेलिखे के हाथों जान ली और ज्यादातर शराब के कारण होने वाली हत्याओं में यही होता है कि सोसायटी के नाम पर पीने वाले कभीकभार बहक जाते हैं और या तो अनर्गल बोल जाते हैं या फिर अपराध कर डालते हैं. दोनों में ही उन को खुद भी कष्ट भोगने पड़ते हैं, दूसरों को भी.

अफसोस यह है कि शराब के स्पष्ट दुर्गुणों के बावजूद उसे भरपूर प्रचार मिलता है. एक तरह से यह चोरडाकुओं की हिमायत सा है. चूंकि चोरियां तो होनी ही हैं तो क्यों न चोरी को कानूनी बना दिया जाए जैसे तर्कों के सहारे शराब को दुनिया भर में पीने पर छूट मिली है और हर देश में हर रेस्तरां में भरपूर शराब मिलती है. यह बात दूसरी है कि हर रात हर रेस्तरां में एकदो जने धुत्त हो ही जाते हैं.

शराब को सोशल मानना ऐसा ही है जैसे कहा जाए कि बेंगलुरु की तर्ज पर महिलाओं के साथ बदसलूकी तो मानव स्वभाव का हिस्सा है और उसे हिंदी फिल्मों की छेड़खानी की तरह स्वीकार कर लो. हिंदी फिल्मों ने अब तो शराब को पूरी तरह स्टेटस दे दिया है और वैंप ही नहीं हिरोइनें भी जम कर पीती हैं और सभ्य कहलाई जाती हैं. नशा स्वाभाविक है पर यह अपराधी परदे के पीछे रहे तो ही काबू में रहेगा, यह राहुल माटा ने साफ कर दिया है.

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