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बिना बैट के ही बल्लेबाजी करने चल दिया यह क्रिकेटर

ऑस्ट्रेलिया में इन दिनों घरेलू क्रिकेट सीरीज 'शैफील्ड शील्ड' खेली जा रहा है. इस सीरीज के एक मैच में एक ऐसा वाकया हुआ, जिसे देख क्रिकेट फैन्स की हंसी नहीं रूक रही है. ये घटना विक्टोरिया और वेस्टर्न ऑस्ट्रेलियाई टीमों के बीच हुए मैच में हुई. इस मैच में ऐसा कुछ हो गया, जो शायद क्रिकेट इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ.

विक्टोरिया के फवाद अहमद ने ऐसा किया जिसे शायद ही किसी बल्लेबाज ने किया होगा. पूर्व ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर फवाद मैच में बल्लेबाजी करने जाते वक्त बैट लेकर जाना ही भूल गए.

फवाद क्रीज तक पहुंचते इससे पहले ही अचानक उन्हें ध्यान आया कि उन्होंने बैट तो साथ में लाया ही नहीं, इसके चलते वे वापस बाहर लौटे. इसी दौरान उनका एक साथी बल्ला लेकर उन्हें देने आया. यह देखकर बाकी खिलाड़ी और मैदान पर मौजूद दर्शक हंस रहे थे. फवाद की इस हरकत को कैमरों में कैद कर लिया गया और वह वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया.

35 वर्षीय फवाद दो सत्रों तक विक्टोरिया की तरफ से सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे. लेकिन वे पिछले कुछ मैचों से प्लेइंग इलेवन से बाहर थे और इसी मैच से उन्होंने वापसी की. शायद इसी तनाव में वे बल्लेबाजी के लिए जाते वक्त बल्ला लेकर जाना भूल गए.

अब आएगा 10 रुपए का नया नोट

बीते कुछ महीनों से सरकार जबरन कैशलेस बनने की आदत डलवा रही है. अब तो आलम यह है कि 60 रुपए का पेमेंट भी कार्ड से करने लगे हैं…! 500 और 1000 के नए नोट लाने, 1000 के नोटों को दफनाने और 100 के नए नोट लाने की घोषणा के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक ने 10 रुपए के नए नोट लाने की घोषणा की है. पर 10 रुपए के पुराने नोट बंद नहीं होंगे. यही नहीं 10 रुपए के नोट में सुरक्षा की दृष्टि से कई तरह के नए फीचर्स जोड़े जाएंगे.

रिजर्व बैंक ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि 10 रुपए के नए नोट महात्मा गांधी सीरीज-2005 के ही होंगे और नंबर पैनल पर 'L' छपा होगा. इसके अलावा नोटों पर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के हस्ताक्षर होंगे और छपने का साल 2017 होगा.

अन्य फीचर्स

– नोट के पैनल में बायं से दायं तरफ अंक छोटे से बड़े आकार में लिखे होंगे.

– पहले तीन अल्‍फा-न्‍यूमेरिक वर्ण (उपसर्ग) एक ही आकार के बने रहेंगे.

– भारतीय रिजर्व बैंक ने एक अधिसूचना में कहा कि बैंक द्वारा जारी किए गए पुराने 10 रुपए के नोट भी मान्‍य होंगे.

इन 5 बल्लेबाजों ने किया कुछ ऐसा कि हैरान रह गए दर्शक

गेंद को 6 रनों के लिए मैदान के बाहर भेजने की कला में हर बल्लेबाज निपुण होना चाहता है. काफी कम बल्लेबाज हैं जिन्होंने लगातार 6 गेंदों में 6 छक्के जमाये है. हालांकि क्रिकेट बॉल को मैदान से बाहर भेजना कोई बड़ी बात नहीं है पर 6 बार लगातार काफी मुश्किल है.

6 गेंदों पर 6 छक्के लगाने वाले बल्लेबाजो में युवराज सिंह और हर्शल गिब्स के बारें में तो आप जानते ही होंगे. लेकिन क्या आपको पता है कि इन दोनों क्रिकेटर के अलावा भी कुछ ऐसे क्रिकेटर हैं जिन्होंने लगातार 6 गेंदों पर 6 छक्के लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है.

वैसे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की बात करें तो अभी तक सिर्फ 2 बल्लेबाज ये कारनामा कर पाए हैं. तो आइए जानते हैं उन 5 बल्लेबाजों के बारें में जिन्होंने क्रिकेट का सबसे मुश्किल रिकॉर्ड अपने नाम किया है.

गैरी सोबर्स, वेस्टइंडीड

वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज गैरी सोबर्स दुनिया के पहले ऐसे बल्लेबाज थे जिन्होंने 6 गेंदों में 6 छक्के लगाने का कारनामा किया. सोबर्स ने 1968 में नाटिंघमशायर के लिए खेलते हुए स्पिन गेंदबाज मैलकम नैश की 6 गेंदों पर 6 लगातार छक्के जड़ दिए. दुनिया के महानतम ऑलराउंडर्स में एक गिने जाने वाले सोबर्स को डॉन ब्रेडमैन ने फाइव इन वन क्रिकेटर कहा था.

रवि शास्त्री, भारत

भारतीय बल्लेबाज रवि शास्त्री दुनिया के दूसरे ऐसे बल्लेबाज थे जिन्होंने 6 लगातार गेंदों में 6 छक्के लगाए. शास्त्री ने 1984 में रणजी ट्रॉफी मैच में बड़ौदा के स्पिनर तिलक राज की 6 गेंदों पर 6 छक्के लगाकर ये मुकाम हासिल किया. इस मैच में शास्त्री ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट का सबसे तेज दोहरा शतक भी बनाया था.

हर्शल गिब्स, साउथ अफ्रीका

साउथ अफ्रीका के विस्फोटक सलामी बल्लेबाज हर्शल गिब्स अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 6 लगातार छक्के लगाने वाले पहले बल्लेबाज बने. इससे पहले गैरी सोबर्स और रवि शास्त्री ने घरेलू मैचों में ये कारनामा किया था. गिब्स ने 2007 विश्व कप में नीदरलैंड के गेंदबाज वान बुगें की एक ओवर की सभी गेंदों पर छक्के जड़े.

युवराज सिंह, भारत

भारत के विस्फोटक बल्लेबाज युवराज सिंह ने पहले टी20 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ इस कारनामा को अंजाम दिया. वह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 6 लगातार छक्के लगाने वाले दूसरे बल्लेबाज बनें. युवराज पहले ऐसे बल्लेबाज थे जिन्होंने एक तेज गेंदबाज को लगातार 6 छक्के लगाए. इससे पहले जिन भी बल्लेबाजों ने ये मुकाम हासिल किया था उन्होंने स्पिन गेंदबाजों को निशाना बनाया था, लेकिन युवराज ने इंग्लैंड के तेज गेंदबाज को 6 लगातार छक्के जड़ कर ये मुकाम हासिल किया था.

जॉर्डन क्लार्क, इंग्लैंड

वैसे देखा जाए, तो फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी ऐसे बल्लेबाज हुए है जिन्होंने एक ओवर में 6 छक्के लगाए हैं. और इस लिस्ट में इंग्लैंड के जॉर्डन क्लार्क का नाम भी आता है. ये कारनामा करने वाले वे पहले इंग्लिश क्रिकेटर हैं. खास बात ये रही कि क्लार्क ने सभी छक्के मिडविकेट के ऊपर एक ही तरह का शॉट खेलते हुए लगाए थे.

ये बेहतरीन ऐप्स देंगे आपको मोबाइल पर टीवी का मजा

टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दिन-प्रतिदिन हो रही उन्नति से लोग प्रसन्न तो होते ही हैं और साथ ही दुनिया में पहली बार टेलीवीजन देखकर लोग हैरान तो जरूर रह गए होंगे. एक वक्त आज का है जब लगभग हर घर में टीवी है.

आज की इस डिजीटल दुनिया में आप सबकुछ अपने हाथ में पकड़े हुए अपने छोटे से स्मार्टफोन में ही पा सकते हैं. तकनीकी की दुनिया में इस उपभोक्ताओं की सभी मुश्किलों का हल तकनीकी जगत ने खोज रखा है. मोबाइल टीवी ऐप एक ऐसा जरिया है जिसमें आप टीवी पर आने वाले सभी प्रोग्राम अपने फोन में देख सकते हैं.

यहां एक बात आपको ध्यान रखनी होगी कि ये आप के ऐप पर निर्भर करता है कि वह ऐप आपको कौन-कौन से चैनल देखने की सुविधा प्रदान करता है, तो यदि आप भी अपने फोन पर टीवी देखने का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो हम आपको बताएंगे कुछ ऐसे बेहतरीन ऐप्स के बारें में जिनके जरिए आप अपने स्मार्टफोन पर टीवी का आनंद ले सकते हैं.

हॉट स्टार

पिछले कुछ समय से आप विभिन्न टीवी एवं मैसेजेस विज्ञापनों के जरिए इस ऐप का नाम सुन रहे होंगे. हॉट स्टार ऐप हमेशा काफी चर्चा में बना हुआ रहता है. इस ऐप की विशेषता है कि इसके माध्यम से आप स्टार चैनल के सभी शोज को आसानी से अपने मोबाइल पर देख सकते हैं.

हॉट स्टार एप्लिकेशन मुफ्त है और इस पर आप स्टार चैनल के सभी कार्यक्रमों को भी मुफ्त में देखा जा सकता है. इस ऐप में आप कार्यक्रम को देखते हुए बीच में पौज भी कर सकते हैं और बाद में उसी जगह से वापस प्ले भी कर सकते हैं.

नेक्सजी टीवी

मोबाइल में टीवी देखने के लिए यह एक बेहद पुराना ऐप्लिकेशन है. इस ऐप में 140 से भी ज्यादा लाइव टीवी चैनल्स चलते हैं, जिसमें हिंदी, बंगाली और मराठी से लेकर बॉलीवुड और हॉलीवुड तक के चैनल्स शामिल हैं.

इस ऐप्लिकेशन की सबसे अच्छी बात है कि इसमें टीवी को आप फुल स्क्रीन पर भी देख सकते हैं. इसके अलावा यह ऐप प्ले और पौज की सुविधा प्रदान करती है. साथ ही इसमें कई सीरीयल्स के स्पेशल कवरेज भी उपलब्ध होते हैं. इतना ही नहीं इसमें आप शॉर्ट मूवी भी देख सकते हैं.

सोनी लाइव

जैसे हॉट स्टार ऐप में आप स्टार टीवी के सभी चैनल देख सकते हैं, ठीक उसी तरह सोनी लाइव ऐप्लिकेशन में आप सोनी, सब टीवी और सोनी पल टीवी के सभी कार्यक्रमों को अपने मोबाइल पर देख सकते हैं.

यह ऐप एचडी यानि कि हाई डेफिनेशन में सीरयल उपलब्ध कराता है अर्थात इसमें उच्चतम गुणवत्ता क्के वीडियोज में सभी कार्यक्रम उपलब्ध होते हैं. इस ऐप में आप अपना प्ले लिस्ट बना सकते हैं और वीडियोज को अपनी फैवरेट लिस्ट में भी रख सकते हैं.

टाटा स्काई

आज हजारों घरों में टीवी नेटवर्क देने वाली कंपनी टाटा स्काई, मोबाइल ऐप के माध्यम से भी लोगों को मनोरंजन प्रदान कर रही है. सबसे खास बात इस एप्लिकेशन के माध्यम से आप अपने फोन पर लाइव टीवी देख सकते हैं.

हम आपको बता देना चाहते हैं कि इस खास ऐप में ऑन डिमांड वीडियोज की सेवा भी दी गई है, जहां आप अपने फोन के लिए सौ से ज्यादा वीडियो लगातार देख सकते हैं. ऑन डिमांड वीडियो का मतलब है कि आप पांच दिन पुराने टेलीविजन एपिसोड्स को अपने मोबाइल पर देख सकते हैं. यानि कि अब आप कुछ भी मिस नहीं करने वाले. तो टीवी गेखने के शोकीन लोगों के लिए है ना ये ऐप्स लाजवाब!

क्या आप जानते हैं यूट्यूब के इन शॉर्टकट्स को

वर्तमान में बहुत से लोग अपना ज्यादा समय यूट्यूब पर वीडियो देखने में बिताते हैं. लेकिन यूट्यूब पर ज्यादा समय बिताने वाले लोगों को यूट्यूब के विभिन्न शॉर्टकट के बारे में जानकारी नहीं होगी. यूट्यूब के कुछ ऐसे शॉर्टकट भी उपलब्ध है जो आपके मनोरंजन में और जान भर देंगे और इन शॉर्टकट की मदद से आपको यूट्यूब पर वीडियो देखने में किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.

टैब से कंट्रोल करें

यूट्यूब में आप टैब बटन का इस्तेमाल कर सकते हैं. टैब बटन का इस्तेमाल आप किसी फीचर को सलेक्ट करने के लिए कर सकते हैं. आप टैब बटन को क्लिक करके आप आगे फीचर्स तक जा सकते हैं. जैसे- प्ले, पाउस, वॉल्यूम, फूल स्क्रीन, शेयर, लाइक और कमेंट, एक-एक कर आप सभी फीचर्स पर जा सकते हैं. यदि आप पीछे के फीचर्स को सलेक्ट करना चाहते हैं तो टैब बटन का उपयोग सिफ्ट बटन के साथ में करें.

प्ले/पॉज

जब भी हम यूट्यूब पर कोई वीडियो देखते हैं तो उसे बीच में रोकने के लिए हम स्पेस को क्लिक करते हैं लेकिन आप 'K' बटन को क्लिक करके भी वीडियो को प्ले/पॉज करने का काम कर सकते हैं.

फॉवर्ड और बैक करना

कीबोर्ड पर बने 'J' और 'L' बटन का इस्तेमाल करके आप वीडियो को फॉवर्ड और बैक कर सकते हैं. 'J' बटन से आप वीडियो को बैक कर सकते हैं. और 'L' बटन से आप वीडियो को फॉवर्ड कर सकते हैं.

5 सेकेंड तक करें फॉवर्ड और बैक

यूट्यूब वीडियो को 5 सेकेंड फॉवर्ड व बैक करना चाहते हैं तो कीबोर्ड पर ऐरो बटन आपकी इस काम में मदद कर सकता है. पीछे करने के लिए बाएं ऐरो और आगे करने के लिए दाएं ऐरो का इस्तेमाल आप कर सकते हैं.

एक ही बार में करें ज्यादा फॉवर्ड और बैक

अगर आप वीडियो को देखते समय काफी आगे या काफी पीछे पहुंच गए हैं तो इसके लिए आप कीबोर्ड के नंबर '1' बटन का इस्तेमाल कर सकते हैं. और कीबोर्ड के नंबर '9' बटन को क्लिक करके आप 90 फीसदी तक वीडियो को आगे कर सकते हैं.

रिस्टार्ट करने के लिए

वीडियो को रिस्टार्ट करने के लिए कीबोर्ड के '0' बटन का इस्तेमाल कर सकते हैं.

वॉल्यूम कंट्रोल करने के लिए

कीबोर्ड में ऐरो के अप और डाउन बटन को प्रेस कर वॉल्यूम को कंट्रोल कर सकते हैं. इसी तरह म्यूट करने के लिए कीबोर्ड के “M” बटन का इस्तेमाल कर सकते हैं.

फुल स्क्रीन

वीडियो को फुल मोड में देखने के लिए आप कीबोर्ड के स्केप बटन का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसी तरह स्केप बटन एक्जिट के लिए भी काम करेगा.

कैप्शन बंद करने के लिए

कैप्शन बंद करने के लिए आप कीबोर्ड के 'B' बटन का इस्तेमाल कर सकते हैं. और कैप्शन के फॉन्ट को घटाने या बढ़ाने के लिए “—” या “+” का उपयोग किया जा सकता है.

ब्रेकअप के बाद इनकी खूबसूरती में लग गए चार चांद

सितारे बॉलीवुड के हों या टीवी के, प्यार, इश्क और मोहब्ब्त में अगर इन लोगों में कोई एक बात कॉमन है तो वो है ‘ब्रेकअप’. कुछ जल्दी जल्दी तो कुछ देर सवेर इसका शिकार होते ही रहते हैं. पर आज बात ब्रेकअप के बाद रोने धोने की नहीं, बल्कि उसके बाद निखरने की. आज हम आपको बताने जा रहे हैं उन सितारों के बारे में जिनकी खूबसूरती में लग गए हैं चार चांद और वो  ब्रेकअप के बाद. जानिए कौन हैं वो…

मलाइका अरोड़ा

वैसे इस बात में कोई दो राय नहीं है कि मलाइका अरोड़ा पहले भी बेहद हॉट थीं. हां, अब अपने पति अरबाज खान से ब्रेकअप के बाद वह और भी ज्‍यादा हॉट हो गई हैं. हाल ही में छुट्टियां मनाने गोवा पहुंची मलाइका की सामने आई तस्‍वीरों को ही ले लीजिए. एक से बढ़कर एक हॉट शॉट में नजर आईं हैं वो.

करिश्‍मा कपूर

फिलहाल अपने पति से अलग हो चुकी हैं बॉलीवुड एक्‍ट्रेस करिश्‍मा कपूर. फैशन गुरुओं का ऐसा मानना है कि अब इनके ड्रेसिंग सेंस में काफी बदलाव आ गया है. किसी भी इवेंट पर देख लीजिए करिश्‍मा आपको बदले हुए स्‍टाइलिश लुक में नजर आएंगी. यही नहीं, पहले की अपेक्षा अब सोशल मीडिया पर भी उनकी मौजूदगी ज्‍यादा नजर आती है.

अंकिता लोखंडे

ये बात तो सभी जानते हैं कि टेलीविजन एक्‍ट्रेस अंकिता लोखंडे काफी लंबे समय से एक्‍टर सुशांत सिंह राजपूत के साथ रिलेशन में थीं. वहीं अब दोनों का ब्रेकअप हो चुका है. इस ब्रेकअप के बाद अब अगर आप सोच रहे हैं कि अंकिता मायूस नजर आएंगी, तो ऐसा नहीं है. अब उन्‍होंने खुद को पहले से कहीं ज्‍यादा बदल लिया है. सिर्फ यही नहीं खुद को बदलने के बाद अब वह अपनी फोटो को इंस्‍टाग्राम पर पोस्‍ट करना बिल्‍कुल नहीं भूलतीं.

श्‍वेता रोहिरा

बॉलीवुड एक्‍टर पुलकित सम्राट से शादी करने के बाद श्‍वेता रोहिरा काफी चर्चा में आईं. दोनों के बारे में लंबे समय तक काफी अच्‍छी बातें सुनने को मिलीं, लेकिन उसके बाद फिर अचानक हालात बदल गए. दोनों के बीच तनाव की स्‍थिति आई और दोनों अलग हो गए. अलग होने के बाद अब श्‍वेता के लुक में काफी चेंज आ गया है. नया हेयर कट लेकर अब उन्‍होंने अपनी फिटनेस पर ध्‍यान देना शुरू कर दिया है. इसी के चलते उन्‍होंने काफी हद तक अपना वजन कम भी कर लिया है.

दलजीत कौर

टीवी एक्‍ट्रेस दलजीत कौर का तो नाम सुना ही होगा आपने. शालीन के साथ शादी करने के बाद दोनों अभी काफी अच्‍छे से एकदूसरे के साथ रिलेशन को मेनटेन कर रहे थे. इतने में अचानक न जाने क्‍या हुआ और दोनों ने एकदूसरे से अलग होने का फैसला ले लिया. अब फिलहाल पति से अलग होने के बाद दलजीत ने अपना वजन कम कर लिया है. सिर्फ यही नहीं अब उन्‍होंने अपने लुक में भी काफी बदलाव कर लिया है.

जेनिफर विंगेट

टेलीविजन एक्‍ट्रेस जेनिफर विंगेट ने करण सिंह ग्रोवर से शादी की. कुछ समय दोनों साथ रहे और उसके बाद दोनों का ब्रेकअप भी हो गया. दोनों एकदूसरे से अलग जरूर हो गए, लेकिन जेनिफर ने खुद को टूटने नहीं दिया. बल्‍कि अब वह पहले से और ज्‍यादा स्‍टाइलिश और खूबसूरत हो गई हैं.

रश्‍मी देसाई

एक और टेलीविजन एक्‍ट्रेस इस क्रम में. ये हैं रश्‍मि देसाई. टेलीविजन एक्‍टर नंदीश संधू से शादी करने के बाद कुछ दिन तो इस फैमिली की गाड़ी पटरी पर चली. फिर उसके बाद इस गाड़ी के पहिए डगमगाने लगे और अचानक इसपर ब्रेक लग गया ब्रेकअप का. फिलहाल अब रश्‍मि देसाई फिर से हो चुकी हैं अकेली, लेकिन पहले से कहीं ज्‍यादा स्‍मार्ट और स्‍टाइलिश.

मैं मां बनने के सुख से वंचित हूं. डाक्टर ने बताया कि मेरे अंडे कमजोर हैं. मुझे क्या करना चाहिए.

सवाल

मेरी उम्र 38 साल है. शादी को 10 साल से अधिक हो गए हैं, लेकिन मां बनने के सुख से वंचित हूं. डाक्टर ने बताया कि मेरे अंडे कमजोर हैं. इसी वजह से एक बार मेरा 3 माह का गर्भ भी गिर चुका है. बताएं कि मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब

इस उम्र में गर्भधारण करना आमतौर पर थोड़ा मुश्किल हो जाता है. आप का 3 माह का गर्भ गिरना भी यही साबित करता है कि आप के अंडे कमजोर हैं. लेकिन आप को निराश होने की आवश्यकता नहीं है. अगर आप के पति में कोई कमी नहीं है तो आप एग डोनेशन तकनीक का सहारा ले सकती हैं. किसी अन्य महिला के अंडे आप के गर्भाशय में ट्रांसप्लांट किए जा सकते हैं. इस के लिए आवश्यक है कि उक्त महिला शादीशुदा हो और बच्चे को जन्म दे चुकी हो.

नारों में बदजबानी

उत्तर प्रदेश की चुनावी सभाओं में अखिलेश राहुल एक तरफ और मोदीशाह दूसरी तरफ नारों की बरसात तो करते रहे हैं, पर उन से इस बड़े राज्य का भला होने वाला है, ऐसा कहीं नहीं दिखता. आमतौर पर चुनावों में सिर्फ वादे किए जाते हैं और नारे लगाए जाते हैं, पर दोनों में आम गरीब जनता का भला करने की बात होती है. इस बार भाजपा, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी तीनों ही एकदूसरे पर लट्ठमार जबान चलाते रहे हैं, जनता के लिए क्या करेंगे, इस की बात तक नहीं कही गई. ठीक है. हमारे देश की ही नहीं, दुनिया के लगभग सारे देशों की जनता ने चुनावों को महज शासकों को टौफी बांटने का खेल बना लिया है. हर 5 या 4 साल बाद कौन बनेगा राजा का खेल होता है और एक आधाअधूरा नेता टौफी को ट्रौफी की तरह ले जाता है और अपने नए मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री निवास में सजा देता है. आम वोटर वहीं का वहीं.

उत्तर प्रदेश की गरीबी को बयान करने की जरूरत नहीं. कहीं से उत्तर प्रदेश में घुसो या आसमान से टपको, ऐसा लगेगा मानो किसी जंगल में आ गए हो. कूड़ों के ढेर, रिकशे की भरमार. सड़कों पर दुकानें, दुकानों में ऊंघते मालिक, खंभों पर टूटे बल्ब, पर नए नेताओं के फ्लैक्सी चेहरे, भीड़भाड़, धूलधक्कड़ सब मिलेगा. कहीं ऐसा नहीं लगेगा कि यहां सरकार नाम की चीज है. इन कामों की जिम्मेदारी वैसे नगरपालिकाओं की होती है, पर वे कौन सी नरेंद्र मोदी, अखिलेश यादव या मायावती से अलग हैं. सभी एक थैली के चट्टेबट्टे और शान से उत्तर प्रदेश की जनता को कहते रहे कि हम से वादे भी न लो, बस दूसरों की बुराई सुनो. हम खराब हैं तो क्या दूसरे तो हम से भी खराब. हम कुछ नहीं करेंगे, तो परेशानी क्या है. दूसरे कहां कह रहे हैं कि वे कुछ करेंगे. नतीजा यह है कि अखिलेशराहुल जोड़ी जीते या न जीते, उत्तर प्रदेश उसी तरह उलटा प्रदेश बना रहेगा, यह पक्का है. यहां कुछ नहीं होगा, क्योंकि न तो वोटर काम करने को राजी है, न नेता काम कराने को. वोटरों को जय हो के नारे लगाने की आदत हो गई है और नेताओं को खादी के कलफ लगे सफेद कपड़े और मोदी जैकेट पहनने की. राज्य की खुशहाली के लिए बस यही काफी है.

ये चुनाव हों, इस से पिछले वाले हों या उस से पिछले वाले, हर बार वही कहानी दोहराई जाती है. कुछ सड़कें बन जाती हैं, कुछ भव्य भवन बन जाते हैं और शासक उन का राग अलापते रहते हैं. पैसा कमाने के लिए जो खेतों में हड्डियां तोड़ते हैं, उन्हें बस जिंदा रहने लायक मिलता है. आधों के घरों से तो कोई न कोई पत्नीबच्चे छोड़ कर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जा कर काम करता है. चुनाव में यह मुद्दा भी कोई नहीं उठाता कि आखिर उत्तर प्रदेश के लोगों को बाहर जा कर काम करने की जरूरत क्यों पड़ती है? बाहर वाले आ कर सत्ता में बैठने को तैयार हैं, पर काम करने को क्यों नहीं?

धार्मिक शोर पर किस का जोर

‘आवाज’ फाउंडेशन की संस्थापक सुमाइरा अब्दुलाली, प्रसिद्ध पर्यावरणविद ने पहली बार भारत में ध्वनि प्रदूषण का डाटा इकट्ठा किया, जिसे सरकार, कोर्ट, पुलिस तथा आम जनता तक पहुंचाया गया. पहली बार यह जाहिर किया गया कि ध्वनि प्रदूषण (पटाखों का शोर, ट्रैफिक का शोर, हवाईजहाज या ट्रेन से उत्पन्न शोर, औद्योगिक उपकरणों व निर्माण आदि से उत्पन्न शोर, लाउडस्पीकरों द्वारा शोर आदि) मनुष्य के लिए बहुत घातक हो सकता है. ऐसे शोर को काबू में करने के लिए नियमकानून भी बने हैं, लेकिन एक और बड़ा स्रोत है

ध्वनि प्रदूषण का- धार्मिक उत्सवों से उठता शोर. इस प्रकार के शोर के सामने जानकार प्राधिकारी भी अपने कान मूंद लेने में होशियारी समझते हैं. धार्मिक स्थलों को साइलेंट जोन माना जाता है, किंतु देखा जाता है कि धार्मिक स्थल बेपरवाही से लाउडस्पीकर लगवा कर मनचाहा शोर मचाते हैं खासकर त्योहारों के समय पर.

हाल ही में दिल्ली और कर्नाटक उच्च न्यायालयों ने धार्मिक स्थलों द्वारा शोर मचाने पर पाबंदी लगाई कि लाउडस्पीकर का मुंह धार्मिक स्थल की ओर होना चाहिए न कि रिहाइशी इलाके की तरफ. सर्वोच्च न्यायालय ने भी कहा है कि धर्म की आड़ में ध्वनि प्रदूषण नियम तोड़ना गलत है. हर प्रकार के धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकरों के उपयोग पर टिप्पणी करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है जैसे भिन्नभिन्न धर्मों के इन स्थलों को भगवान का आशीर्वाद शोर मचाने से ही मिलता है. हर धर्म में प्रार्थना तब से चली आ रही है जब बिजली भी नहीं थी.’’

कानून की दृष्टि से

भारत के संविधान की धारा 21 के अनुसार इस देश के नागरिकों को सभ्य वातावरण, शांतिपूर्ण जीवन, रात को अच्छी नींद और सुकून का हक है अर्थात जीवन जीने का अधिकार. ध्वनि प्रदूषण कानून के अनुसार दिन और रात में ध्वनि को निर्धारित सीमा में ही बजा सकते हैं. मसलन, दिन में 50 डीबी और रात में 40 डीबी. जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त और उपअधीक्षक से उच्च पदवी वाले अधिकारी ही ध्वनि प्रदूषण के नियमकानून को लागू कर सकते हैं. केरल उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि धार्मिक स्थलों द्वारा भजनकीर्तन का शोर ध्वनिप्रदूषण के मानदंडों के अनुसार ही होना चाहिए. सुबह हो या शाम अथवा दिन का कोई भी पहर, ध्वनिप्रदूषण के नियमों का पालन होना चाहिए.

मद्रास उच्च न्यायालय में मंदिर में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल द्वारा ध्वनि प्रदूषण का एक केस आया. कोर्ट ने आदेश दिया कि हर कानून इस देश की संसद में पारित हो कर बनता है और उस का पालन करना अधिकारियों का कर्तव्य है. सामाजिक कार्यकर्ता कुमारवेलु की याचिका पर न्यायाधीश संजय किशन कौल तथा न्यायाधीश एम.एम सुंद्रेश ने ऐसी जगहों के खिलाफ कार्यवाही करने का आदेश दिया जहां लाउडस्पीकरों आदि से ध्वनि प्रदूषण कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.

आम जनता की दृष्टि से

मेरठ में हाईवे नं 8 के पास रहने वाले अंकित कहते हैं कि कांवर शुरू होते ही उन की मुसीबत शुरू हो जाती है. घर में बुजुर्ग मातापिता हैं, छोटा बच्चा है, लेकिन उन के घर से 500 मीटर दूर कांवरियों के लिए एक टैंट लग जाता है, जिस में दिनरात, सुबह के 3 बजे तक कानफोड़ू लाउडस्पीकरों पर भजन बजते रहते हैं. अपने ही घर में बैठे व्यक्ति को धार्मिक शोर से कोई छुटकारा नहीं, फिर चाहे वह कांवरियों के कारण हो अथवा गणपति पंडाल के कारण. इंदौर में रहने वाली मोना को रोज सुबह 5 बजे लाउडस्पीकर पर अजान की आवाज पर जबरन उठना पड़ता है. जालंधर की वृंदा को अल्लसुबह प्रभात फेरी पर बजते पटाखों से खासी परेशानी होती है. दीवाली के समय पर मुंबई के वर्ली सीफेस पर बेहिसाब पटाखों के शोर और धुएं से राहुल परेशान होते हैं, क्योंकि उन की मां को दमे का रोग है. उस पर बहरा कर देने वाला शोर और अगले दिन पूरे सीफेस पर पटाखों द्वारा फैली गंदगी.

मुंबई के अंधेरी ईस्ट इलाके में रह रहे डा. प्रभाकर राव के घर के पास ही बनी झुग्गियों में एक धार्मिक स्थल है. इस स्थल के ऊपर लाउडस्पीकरों से लगातार शोर उठता है. सुबह 5 बजे से प्रार्थना आरंभ होती है, तो सारा दिन चलती रहती है. डा. राव ऐसोसिएशन औफ मैडिकल कंसलटैंट के सदस्य भी हैं और ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ मोरचा चलाते रहते हैं. 2003 में ‘ऐसोसिएशन औफ मैडिकल कंसलटैंट’ तथा डा. सुमाइरा अब्दुलाली ने मिल कर मुंबई उच्च न्यायालय में मुंबई शहर की कुछ जगहों को साइलेंट जोन के अंतर्गत लाने की मांग की. कोर्ट के निर्देशानुसार नगर पालिका ने शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों व धार्मिक स्थलों पर यह नियम लागू किया. किंतु मुंबई पुलिस ने धार्मिक स्थलों को इस नियम के बाहर रख दिया.

स्वास्थ्य की दृष्टि से

मूलचंद अस्पताल से जुड़े प्रसिद्ध सर्जन डा. सचिन अंबेकर आगाह करते हैं कि अधिक ध्वनि से हारमोन पर असर पड़ता है, जिस से हृदय पर स्ट्रैस पहुंचता है और हृदयाघात होने की आशंका में वृद्धि हो सकती है. बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के कारण मनुष्य के स्वास्थ्य में इस के घातक परिणामों की ओर लोगों का ध्यान खींचना आवश्यक है.न्यायाधीश आर. सी. लहौटी और न्यायाधीश अशोक भान ने ध्वनि प्रदूषण के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु इस बारे में बच्चों को स्कूली पुस्तकों में पढ़ाने पर जोर दिया है.  शोर मचाने वाले धार्मिक उत्सवों से पहले इस के दुष्परिणामों को उजागर करते हुए खास कैंपेन चलाई जानी चाहिए. लोगों को इस ओर जाग्रत करना चाहिए ताकि बाकी ध्वनि प्रदूषण के कारणों के साथ धार्मिक कारणों से उठता शोर भी आम इनसान का जीना दूभर न करता रहे वरना धर्म को श्रेष्ठ जताने की होड़ में धर्म के ठेकेदार लोगों को नुकसान पहुंचाते ही रहेंगे.                    

सुंदर पिचाई : दिग्गज सीईओ

देश में तेजी से बढ़ती डिजिटलीकरण की प्रक्रिया उन लोगों के उल्लेख के बगैर अधूरी है जिन्होंने देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में भारत के डिजिटल चेहरे के रूप में अपनी पहचान बनाई है. इन्हीं में से एक नाम है पी सुंदरराजन का जिन्हें प्यार से सुंदर पिचाई कहा जाता है. इस समय वे इंटरनैट कंपनी गूगल के सीईओ हैं. बेशक आज सुंदर पिचाई कैरियर की बेहतरीन ऊंचाई पर हैं पर उन के जीवन की कहानी किसी ऐसे पढ़ेलिखे किशोर से अलग नहीं है जिस की आंखों में परिवार, समाज और देश के लिए कुछ कर गुजरने का एक सपना होता है.

जनवरी, 2017 में जब वे भारत दौरे पर थे तो उस दौरान वे आईआईटी खड़गपुर भी गए थे, जहां कभी उन्होंने पढ़ाई की थी. वहां के छात्रों से उन्होंने कई अनुभव साझा किए और अपनी कालेज लाइफ के दिलचस्प किस्से उन्हें बताए. उन्होंने बताया कि एक समय था जब उन के घर में न टीवी था, न कार और न ही टैलीफोन. तकनीक से उन का परिचय पहली बार 1984 में लैंडलाइन फोन से हुआ था, जो उन के घर पर लगाया गया था. तब सुंदर महज 12 साल के थे लेकिन उस टैलीफोन की बदौलत उन्हें दर्जनों लोगों के टैलीफोन नंबर मुंहजबानी याद हो गए थे. इस से उन्हें तकनीक को ले कर अपने लगाव का भी पता चला था. हालांकि इस में उन के पिता का भी योगदान है जो चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) स्थित एक ब्रिटिश कंपनी जीईसी में इंजीनियर थे.

सुंदर का परिवार 2 कमरे के मकान में रहता था और उस में सुंदर की पढ़ाई के लिए अलग से कोई कमरा नहीं था. वे ड्राइंगरूम के फर्श पर अपने छोटे भाई के साथ सोते थे, पर इन अभावों के बावजूद सुंदर सिर्फ 17 साल की उम्र में आईआईटी की परीक्षा पास कर आईआईटी, खड़गपुर में दाखिला पाने में सफल रहे. वहां इंजीनियरिंग की पढ़ाई (1989-93) पूरी करने के दौरान हर बैच में सुंदर टौपर रहे.

1993 में फाइनल परीक्षा में अपने बैच में टौप करने के साथ ही उन्होंने सिल्वर मैडल हासिल किया. उस के बाद स्कौलरशिप पर आगे की पढ़ाई के लिए वे 1995 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय चले गए.

स्टैनफोर्ड में बतौर पेइंग गैस्ट रहते हुए पैसे बचाने के लिए उन्होंने कई पुरानी चीजें इस्तेमाल कीं, लेकिन पढ़ाई से समझौता नहीं किया. स्टैनफोर्ड में सुंदर पीएचडी करना चाहते थे, लेकिन ऐसा हो न सका. इसी बीच उन्होंने अमेरिका की सिलीकौन वैली में सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनी अप्लाइड मैटीरियल में बतौर इंजीनियर और प्रोडक्ट मैनेजर  काम शुरू कर दिया, लेकिन उन्हें यह नौकरी पसंद नहीं आई, इसलिए उसे बीच में छोड़ कर व्हार्टन स्कूल औफ द यूनिवर्सिटी औफ पेंसिलवेनिया एमबीए करने चले गए. व्हार्टन में पिचाई को साइबर स्कौलर और पामर स्कौलर उपाधियों से सम्मानित किया गया. एमबीए करते ही वे मैंकिजी ऐंड कंपनी में प्रबंध सलाहकार चुन लिए गए.

सफर गूगल का

सुंदर 1 अप्रैल, 2004 को गूगल में आए. यहां उन का पहला प्रोजैक्ट प्रोडक्ट मैनेजमैंट और इनोवेशन शाखा में गूगल के सर्च टूलबार को बेहतर बना कर दूसरे ब्राउजर के ट्रैफिक को गूगल पर लाना था. इस के बाद उन्होंने गूगल गीयर, गूगल पैक जैसे उत्पाद बनाए.

गूगल टूलबार पर काम करते हुए ही सुंदर को यह आइडिया आया था कि गूगल का अपना ब्राउजर होना चाहिए. ब्राउजर असल में इंटरनैट चलाने वाले माध्यम होते हैं जैसे इंटरनैट ऐक्सप्लोरर, फायर फौक्स, मोजिला आदि. हालांकि उस समय गूगल के सीईओ एरिक श्मिट को यह आइडिया पसंद नहीं आया, क्योंकि उन्हें यह एक महंगा काम लगा. लेकिन बाद में सुंदर ने गूगल के सहसंस्थापक लैरी पेज और सरगेई ब्रिन को गूगल का अपना वैब ब्राउजर बनाने के लिए राजी कर लिया.

वर्ष 2008 में गूगल क्रोम के नाम से यह ब्राउजर बन कर दुनिया के सामने आया और इंटरनैट की दुनिया में छा गया. आज सब से ज्यादा इसी का इस्तेमाल होता है.

सुंदर के इस योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 2008 में पहले वाइस प्रैसिडैंट बनाया गया, उस के बाद 2012 में वे सीनियर वाइस प्रैसिडैंट (क्रोम और ऐप्स) बनाए गए. वर्ष 2013 में पिचाईर् को गूगल में ऐंड्रौयड शाखा का मुखिया बनाया गया, जबकि 2014 में उन्हें प्रोडैक्ट चीफ घोषित किया गया.

वर्ष 2015 में जब गूगल ने एक और कंपनी अल्फाबेट बनाई तो कामकाज के बढ़ते दायरे को संभालने के लिए 10 अगस्त को सुंदर पिचाई कंपनी के सीआईओ बना दिए गए. गूगल का सीईओ बनने से पहले माइक्रोसौफ्ट के सीआईओ बनने की रेस में भी पिचाई का नाम शामिल था, लेकिन बाद में उन की जगह सत्य नडेला को चुना गया. बीच में ट्विटर ने भी उन को अपने पाले में करने का प्रयास किया था, लेकिन जानकारों के मुताबिक, गूगल ने 10 से 50 मिलियन डौलर का बोनस दे कर उन को कंपनी में बने रहने पर सहमत कर लिया.

नहीं भूलेंगे वे दिन

खुद पिचाई को अपनी किशोरावस्था और जवानी के दिनों की यादें सम्मोहित करती हैं. आईआईटी खड़गपुर के छात्रों से उन का नाता कभी नहीं टूटता और वे जबतब इंटरनैट के जरिए उन से अपने जीवन और कैरियर की बातें साझा करते रहते हैं. उन्होंने बताया कि चेन्नई में स्कूली पढ़ाई के दौरान उन्हें क्रिकेट खेलना बहुत अच्छा लगता था. हाईस्कूल क्रिकेट टीम में कप्तानी करते हुए सुंदर ने तमिलनाडु राज्य का क्षेत्रीय टूरनामैंट जीता था.

अपनी तेज याद्दाश्त के कारण भी पिचाई जाने जाते हैं. करीबी लोग उन से 1984 के दौर से भूले हुए टैलीफोन नंबर पूछते हैं, जो बता कर सुंदर उन्हें अचंभित कर देते हैं.

हां, मैं ने भी बंक मारा

आईआईटी खड़गपुर के छात्रों को सुंदर अपने कालेज जीवन की कई ऐसी बातें भी बता चुके हैं जिन के बारे में सुन कर विश्वास नहीं होता. जैसे, एक बार उन्होंने यह रहस्योद्घाटन किया कि छात्र जीवन में उन्होंने कई बार कालेज की कक्षाओं से बंक मारा. अकसर सुबह की क्लास में से वे गायब हो जाते थे.

सुंदर कहते हैं कि कालेज में पढ़ाई के दौरान ऐसा करना सही लगता था, लेकिन जीवन में कुछ बनना है. इस ध्येय को सामने रखते हुए उन्होंने मेहनत में कोई कमी नहीं आने दी. सुंदर को हिंदी नहीं आती थी, लेकिन स्कूल में हिंदी के बारे में जो कुछ सीखा था, उस से काम चलाने की कोशिश की, जिस में एकाध बार कुछ गड़बड़ी भी हो गई. जैसे, कालेज में अगर साथी छात्र मजे में एकदूसरे को बुलाने के लिए ‘अबे…’ कह कर गाली देते थे, तो सुंदर को लगता था कि यह एक तरह का संबोधन है.

एक बार खुद सुंदर ने इस का इस्तेमाल किया. एक बार कालेज मेस में अपने जानकार को जाते हुए देखा, तो उसे बुलाने के लिए आवाज लगाई ‘अबे…’ बाद में उन्हें पता चला कि यह तो गाली है. इस से वहां बैठे लोग बुरा मान गए और कुछ देर के लिए मैस बंद कर दिया गया.

कालेज मेस में खाने को ले कर सुंदर से जो मजेदार सवालजवाब किए जाते थे, उन में से खुद सुंदर को एक काफी पसंद आता था. यारदोस्त वहां अकसर सुंदर से पूछते थे. ‘बताओ, यह दाल है या सांबर,’ सुंदर कभी इस का सही उत्तर नहीं दे पाते थे.

आसान नहीं था गर्लफ्रैंड से मिलना

सुंदर पिचाई अपनी पत्नी यानी अंजलि से आईआईटी खड़गपुर में ही मिले थे. अंजलि वहीं की छात्रा थीं, पर अंजलि से मिलना आसान नहीं था. तब घर पर कंप्यूटर नहीं था और स्मार्टफोन भी नहीं होते थे. अंजलि आईआईटी के गर्ल्स होस्टल में रहती थी, लेकिन उस से मिलने के लिए होस्टल में जा कर वहां तैनात कर्मचारी से मिन्नतें करनी पड़ती थीं.

वह कर्मचारी तेज आवाज में पुकारता था, ‘अंजलि, आप से मिलने सुंदर आया है.’

यह आवाज सुन कर हरकोई जान जाता था कि कौन किस से मिलने आया है. उस समय इस से बड़ी झिझक होती थी. आईआईटी खड़गपुर के छात्रों को यह किस्सा सुनाते हुए सुंदर ने कहा था कि आज के मोबाइल युग में किसी से दिल की बात कहना कितना आसान हो गया है.

जीवन और कैरियर में सफलता को ले कर भी सुंदर पिचाई का नजरिया बहुत स्पष्ट है. उन का कहना है कि हो सकता है आप कभीकभी फेल भी हो जाएं, पर इस से घबराना नहीं चाहिए. इस के लिए वे खुद गूगल के सहसंस्थापक लैरी पेज का विचार सामने रखते हैं, जो कहा करते हैं कि आप को बड़े काम करने का लक्ष्य रखना चाहिए. ऐसे में यदि आप कभी नाकाम भी हो गए, तो आप कुछ ढंग का सृजित कर पाएंगे जिस से आप काफी कुछ सीखेंगे.                                                  

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