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टैलेंट निखार करें कमाई

राधिका को कुकिंग का शौक था पर विवाह के बाद घर के कामकाज में ऐसी उलझी कि उस का शौक पीछे छूट गया. वह अकसर कहती रहती थी कि उस की इच्छा तरहतरह के फ्यूजन, थाई कौंटीनेंटल व्यंजन बनाने की होती है, पर क्या करे फुरसत ही नहीं मिलती है. घर का वही रोजमर्रा का खाना बनातेबनाते समय बीत जाता है.

रोहिनी शर्मा का भी कुछ ऐसा ही हाल है. शादी के पहले उस ने एमसीए का कोर्स किया था और अच्छी कंपनी में नौकरी भी लग गई थी. शादी के बाद वह अपने पति के साथ लखनऊ से रांची आ गई. उस ने सोचा कि कुछ महीने बाद कोई नौकरी ढूंढ़ लेगी. मगर समय बीतता गया और उस ने जौब के लिए ट्राई ही नहीं किया. उस के पति ने कई दफा कहा कि जौब ढूंढ़ने की कोशिश करे, पर वह हर बार काम का बहाना बना कर टालती रही.

इस बीच उसे 2 बच्चे भी हो गए. उस की सहेली ने कहा कि वह घर के बाहरी हिस्से में कंप्यूटर ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट खोल ले. इस से वह घर और इंस्टिट्यूट दोनों को आसानी से मैनेज कर सकेगी. मगर रोहिनी हर बार घर के काम और बच्चों की देखभाल का रोना रोती रही.

ज्यादातर घरेलू महिलाएं यही सोच कर अपनी उम्र और समय बरबाद करती रहती हैं कि वे बहुत कुछ करना चाहती हैं पर कैसे करें? घर और परिवार के काम से ही कहां फुरसत मिलती है? अगर वे नौकरी या अपना बिजनैस करने लगीं तो उन के पति और बच्चों को कौन देखेगा? वे टीवी सीरियल देख कर और इधरउधर की गप्पें लड़ा कर अपना समय बेकार कर देती हैं और चाह कर भी अपने पैरों पर खड़े होने और अपनी मेहनत से घर के खर्च में हाथ बंटाने का मौका गंवा देती हैं.

स्कूल की प्रिंसिपल डाक्टर नीना कुमार कहती हैं कि औरतों को काम करने के मौके हमेशा रहे हैं, पर घरपरिवार की वजह से वे खुद की प्रतिभा को खुद ही दबा कर बैठ जाती हैं, जबकि ज्यादातर हाउसवाइफ खाली समय में अपने शौक को निखार कर खासी कमाई कर सकती हैं.

समय का सदुपयोग

पति के दफ्तर और बच्चों के स्कूल जाने के बाद खाली समय का बढि़या इस्तेमाल किया जा सकता है. घर का कामकाज निबटाने के बाद औरतें अपनी हौबी को डैवलप कर सकती हैं. रश्मि जैसी कई औरतें इस की मिसाल हैं. रश्मि के पति पुलिस में नौकरी करते हैं. वे अकसर घर से बाहर ही रहते हैं. बच्चों के स्कूल चले जाने के बाद खाली बचे समय में उस ने कपड़े की सजावटी डौल मेकिंग का काम शुरू कर दिया. अपने उत्पाद को वह आसपास की दुकानों में देने लगी. 3 साल में उस के वर्क की डिमांड इतनी बढ़ गई कि सारे और्डर को अकेले पूरा कर पाना मुमकिन नहीं रहा. शुरू में उस ने अपनी 2 सहेलियों को काम में शामिल किया. आज उस के साथ 12 औरतें जुड़ी हुई हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता अनिता सिन्हा कहती हैं कि घरेलू महिलाएं टाइम मैनेजमैंट सीख कर अपने खाली समय का बेहतर उपयोग कर अपने शौक को डैवलप ही नहीं कर सकती हैं, बल्कि अच्छी कमाई भी कर सकती हैं. पति और बच्चों के घर से जाने के पहले वे खाना वगैरह तो बना ही लेती हैं. उन के जाने के बाद घर के छोटेमोटे काम निबटा कर नहाधो लें. उस के बाद उन के पास समय ही समय है. 12 बजे से शाम के 5 बजे तक वे घर में रह कर ही कोई काम कर सकती हैं.

पेंटिंग, ऐप्लिक, डौल मेकिंग, कंप्यूटर जौब वर्क, जैम, जैली, अचार आदि बनाने का काम कर के अपने समय का बेहतर इस्तेमाल कर सकती हैं. घर के काम का बहाना बनाने वाली महिलाओं को यह समझना चाहिए कि वे अपने खाली समय का उपयोग कर के अपने घर की माली हालत को बेहतर बनाने में बहुत बड़ी मददगार साबित हो सकती हैं.

निवेश एक नहीं कई जगह

आज रिश्ते से ऊपर पैसे की अहमियत हो गई है, तो बचत भी बहुत जरूरी है. महिलाएं आर्थिक तौर पर अब किसी पर निर्भर नहीं रहीं, खुद कमाने, खुद खर्च करने के लिए स्वतंत्र हैं. आमतौर पर कहा जाता है कि महिलाएं बहुत खर्चीली होती हैं लेकिन अब जब उन्हें आफिसों में दिनरात खटना पड़ता है, कड़ी मेहनत करनी पड़ती है तो पैसे की वैल्यू भी वे अच्छी तरह जानती हैं.ताजा बजटों में हालांकि निवेश में महिलाओं को अलग से कोई फायदा नहीं दिया गया है.

निवेश संबंधी मामलों की सलाहकार एवं एक्समार्ट इंटरनेशनल की डायरेक्टर प्रीति जैन कहती हैं कि कमाई के साथसाथ महिलाओं को अपनी बचत का निवेश कई जगह करना चाहिए. ताकि वे अपना और परिवार का भविष्य सुरक्षित तथा चिंतारहित बना सकें. निवेश के लिए कई फैक्टर हैं. आप अविवाहित हैं या विवाहित, बच्चे और आश्रित कितने हैं, इन सब बातों को देखते हुए निवेश की प्लानिंग करनी चाहिए. सब से महत्त्वपूर्ण बात यह है कि आप केवल एक ही जगह नहीं, कई जगह निवेश करें ताकि कम से कम आप अपना और परिवार का भविष्य सुरक्षित बना सकें.

पी.पी.एफ, पी.एफ (लौंग टर्म निवेश)

आप चाहे वेतनभोगी हों या बिजनेस विमन, अपनी बचत का करीब 25% लौंग टर्म योजनाओं में निवेश कर सकती हैं. दीर्घकालीन निवेश में पब्लिक प्रोविडेंट फंड, प्रोविडेंट फंड और लाइफ इंश्योरेंस में 15 से 25 साल तक का निवेश किया जाना चाहिए.

पी.पी.एफ और पी.एफ योजनाओं में मौजूदा समय में 8% वार्षिक रिटर्न मिल रहा है.

एल.आई.सी

एल.आई.सी. में महिलाओं के लिए कई स्कीमें हैं. इन में बीमारी, एक्सीडेंट, लोन सुविधा कवर होने के साथसाथ परिपक्वता में मोटी राशि मिल जाती है. एल.आई.सी. में 5 से 7% रिटर्न मिलता है. यह सेल्फ इनवेस्टमेंट है. प्रीति जैन बताती हैं कि इस से आप खुद और आप की फैमिली सुरक्षित रहती है. परिवार पर दबाव नहीं पड़ता. मुसीबत के समय बच्चों की पढ़ाई, बीमारी, विवाह जैसे काम रुकते नहीं.

इक्विटी (शेयर मार्केट)

इस के बाद अगर आप के पास सरप्लस मनी बचती है तो हाई रिस्क और हाई रिटर्न के लिए इक्विटी सेक्टर यानी शेयर मार्केट है. यहां आप के धन में गुणात्मक बढ़ोतरी होती रहती है. लेकिन इस में रिस्क को ध्यान में रखना होगा. इस में फंडामेंटल स्ट्रोंग कंपनियां हैं जैसे बैंकिंग सेक्टर, पावर सेक्टर, आई.टी. सेक्टर, आटो सेक्टर, मेटल सेक्टर, टेक्सटाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर आदि.

– बैंकिंग में सब से पौपुलर और विश्वसनीय है एस.बी.आई, एच.डी.एफ.सी, आई.सी.आई.सी.आई, आई.डी.बी.आई आदि.

– पावर सेक्टर में एन.टी.पी.सी. यह पब्लिक के लिए सब से भरोसेमंद है.

– आई.टी में इनफोसिस, विप्रो, टी.सी.एस प्रमुख हैं.

– मेटल में हिंडालको, सेल, टिस्को हैं.

– आटो सेक्टर में मारुति, हीरो होंडा महत्त्वपूर्ण हैं.

– टेक्सटाइल में रिलायंस इंडस्ट्रीज, ग्रासिम आदि तथा इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में डी.एल.एफ, यूनिटेक का नाम आता है.

गोल्ड में निवेश

महिलाओं को आभूषणों से अधिक ही लगाव होता है. लिहाजा वे गोल्ड, सिल्वर  आदि में निवेश कर सकती हैं. लेकिन इस में अधिक नहीं, क्योंकि एक हद से अधिक फायदा इस में नहीं मिलता. इस में अपनी बचत का 15 से 25% ही निवेश करें तो ज्यादा ठीक रहेगा. सोनेचांदी जैसी धातुओं में उतारचढ़ाव चलता रहता है.

एन.एस.सी में निवेश

एन.एस.सी एक लौंग टर्म व सेफ निवेश योजना है. यह भी आप के लिए फायदेमंद रहेगी.

प्रौपर्टी में निवेश

अपनी बचत के हिसाब से प्रौपर्टी में भी निवेश किया जा सकता है. अगर इक्विटी में आप को अच्छा प्रोफिट मिलता है तो उस हिस्से को डाइवर्ट कर के रीयल एस्टेट में ट्रांसफर कर देना चाहिए. प्रीति कहती हैं कि मान लीजिए, आप ने इक्विटी में 15 हजार रुपए लगा रखे हैं और 2-3 साल में वह 15 गुणा हो जाता है. यह राशि दोढाई लाख हो जाती है तो उसे रीयल एस्टेट में शिफ्ट कर देना समझदारी है. अन्यथा क्या पता आप की यह राशि दोढाई लाख से कब 5-10 हजार रुपए पर आ लुढ़के.

म्यूचुअल फंड

यह सिस्टेमैटिकल इनवेस्टमेंट प्लान है. इस में इनवेस्टर पैसा डायरेक्ट न लगा कर फंड मैनेजर के माध्यम से लगाता है. इस में आप हर महीने अपनी सेविंग के हिसाब से धन लगा सकती हैं. इस में 15 से 20% रिटर्न मिल जाता है. यह मार्केट कंडीशन पर निर्भर करता है. यह भी रिस्की है. इस के अलावा आर.डी. अकाउंट में भी निवेश किया जा सकता है. एक खास बात और जरूरी है, वह है आप को कुछ प्रतिशत लिक्विडिटी के लिए सेविंग अकाउंट में इमरजेंसी के लिए रखना चाहिए. यह बचत आप किसी भी वक्त जरूरी काम पड़ने पर निकाल सकती हैं. इस तरह 3-4 या सुविधा के अनुसार ज्यादा योजनाओं में डिवाइड कर के निवेश किया जा सकता है. आप को पोर्टफोलियो बना कर निवेश करना चाहिए.

गैस भरा गुब्बारा लगते हैं नरेंद्र मोदी

राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा इकलौती ऐसी पार्टी है, जिसके पास नरेन्द्र मोदी के अलावा कोई दूसरी सूरत नहीं है. मोदी ऐसे प्रचारित ‘जन नायक’ हैं जो कॉरपोरेट जगत का प्रतिनिधित्व करते हैं. लोकतंत्र के लिये यह जरूरत से ज्यादा बड़ा खतरा हैं कि उसका वजूद आम जनता पर नहीं, राष्ट्रीय-बहुराष्ट्रीय निजी कम्पनियों की मरजी पर निर्भर है. यह कड़वी सच्चाई उभर कर सामने आ रही है, कि चुनी हुई सरकारें ही लोकतंत्र के लिये सबसे बड़ा खतरा हैं. और यह खतरा आपके सामने है. केन्द्र के साथ महत्वपूर्ण राज्यों में भी अब मोदी की सरकार है. 2014 के लोकसभा चुनाव परिणाम को ही दोहराया गया है. केन्द्र सरकार की मजबूती बढ़ा दी गयी है, लोकतंत्र में विपक्ष जिन्दा है, लेकिन मरा-मरा.

चुनाव परिणाम आने और प्रायोजित रुझानों को देखते ही साफ हो गया था, कि क्या होने वाला है? आपसी बहस के दौरान यह कहा गया कि इसमें चौकाने वाली कोई बात नहीं है. यह मोदी सरकार को नोटबंदी का रिटर्न गिफ्ट है. यह ‘गिफ्ट’ आम जनता ने नहीं दिया. हो सकता है, कि उसकी अंगुलियां ईवीएम मशीन पर हो, मगर मोदी सरकार ने पिछले सालों में उद्योग जगत और निजी कम्पनियों के लिये जो किया है, भारतीय अर्थव्यवस्था में जितनी दखल उन्हें दी है और देश को जितना बाजार उन्होंने बनाया है, कांग्रेस ने अपने पूरे कार्यकाल में नहीं किया. नोटबंदी घोषित तौर पर अपने लक्ष्य में असफल और देश की आम जनता पर गहरी मार है और अघोषित रूप से भारतीय मुद्रा पर, उसके लेन-देन पर, कैशलेस ट्रांजक्शन के लिये पेटीएम जैसी निजी कम्पनियों का सशुल्क अधिकार है. जिसका विज्ञापन नरेन्द्र मोदी करते हैं और बड़ी-बड़ी बातें भी. बहकाने वाले बड़े-बड़े वायदे भी. उग्र राष्ट्रवाद और वित्तीय तानाशाही भी. मोदी कॉरपोरेट का गैस भरा गुब्बारा हैं. जिन्हें केन्द्र की लोकसभा ही नहीं राज्यों की विधानसभायें भी इसलिये सौंपी जा रही हैं कि राज्य सभा पर पर उनका अधिकार हो. कि ‘बबुआ ऐसे ही उड़ो.’ जब तक यह उड़ान है, ओहदा और आसमान है.

मीडिया इस बात का भरपूर प्रचार कर रही है कि मोदी बेजोड़ हैं. ‘वन मैन आर्मी’, ‘वन मैन इण्डस्ट्री’ की तरह उन्हें ‘वन मैन पॉलिटिशियन’ बनाया जा रहा है. संघ और भाजपा इस लाईन पर पहले से बढ़ रही हैं और लगे हाथ ‘जन नायक’ भी बता रही हैं. बनारस में ‘हर हर महादेव’ की तरह भाजपाई ‘हर हर मोदी’ कह रहे हैं, जिसकी दिशा ‘हर हिटलर’ की भी हो सकती है. दुनिया भर में वित्तीय ताकतें लोकतंत्र के कंधे पर ऐसे ही प्रायोजित नायकों को बैठा रही हैं.

बाजार में चुनी हुई सरकारों की गिरेबां पर वित्तीय ताकतों का हाथ है और सरकारें आम लोगों का गिरेबां थाम कर खड़ी हैं. सवा सौ करोड़ का मालिक श्रम और मुद्रा के बाजार में है. चुनावी प्रक्रिया इतनी ‘समझदार’ हो गई है कि आम जनता चाह कर भी अपने हितों की लड़ाई लड़ने वाले जनप्रतिनिधियों को संसद या विधान सभाओं में पहुंचा नहीं सकती. कांग्रेस-यूपीए सरकार के मनमोहन सिंह ने अर्थव्यवस्था के जिस उदारीकरण की शुरुआत की, मोदी ने उसे ‘ऑक्शन’ के मुकाम तक पहुंचा दिया है.

क्या ऑनलाइन रहकर सुरक्षित हैं आप?

इंटरनेट चलाते समय कई बार लोगों को हैंकिंग की समस्या का सामना करना पड़ता हैं. ​ऐसे में आज हम आपको कुछ जरूरी टिप्स बताने जा रहे हैं जिनका उपयोग करके आप सुरक्षित इंटरनेट ब्राउजिंग कर सकते हैं.

आज के इस तकनीक के युग में स्मार्टफोन्स के बढ़ते उपयोग के साथ ही उपभोक्ताओं और उपयोगकर्ताओं में इंटरनेट का उपयोग काफी बढ़ा है. ये बात जाहिर है कि आजकल हर छोटे काम के लिए इंटरनेट का उपयोग किया जाता है, फिर चाहे वह टिकट बुकिंग हो या डॉक्टर से अपॉयन्मेंट. अब तो लगभग सभी शिक्षा संस्थानों में भी अधिकतर कार्य इंटरनेट की मदद से ही होते हैं. ऐसे में इंटरनेट सुरक्षा अहम मुद्दा है. अक्सर इंटरनेट चलाते समय करते समय आप कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिनके कारण आप साइबर क्राइम में भी फंस सकते हैं.

लेकिन कुछ बातों को ध्यान में रखकर आप ऑनलाइन सुरक्षित रह सकते हैं. ये हैं ऑनलाइन सुर​क्षित रहने के 5 आसान तरीके..

1. जब भी आप किसी वेबसाइट को खोलकर रखते हैं तो वहां उस वेबसाइट का एड्रेस दिया होता जोकि https से शुरू होता है और यही सुरक्षित भी होती हैं. ये बात आपको ध्यान रखना चाहिए कि यदि किसी वेबसाइट के एड्रेस https में से s हटा हुआ हो तो वहां अपनी निजी जानकारियां बिल्कुल न दें. यहां एड्रेस में s सिक्योरिटी एवं सुरक्षा का संकेत है.

2. किसी भी ब्राउजर पर जो सेटिंग होती है उसके अनुसार वह सभी अपडेट अपने आप ही कर देता है. लेकिन अगर आपने सेटिंग को मैन्युअल कर रखा है तो उसे हर बार अपडेट और बदलने के लिए आपको क्लिक करना पड़ता है, ताकि आपका ब्राउजर नए अपडेट्स के साथ तैयार रहे. अपडेट रहने से आप काफी सुरक्षित रहते हैं.

3. किसी भी साइट को देखने के लिए जहां भी आपके ईमेल की आवश्यता होती है वहां दिए गए सिक्योरिटी फीचर्स का उपयोग जरूर करना चाहिए, खासकर के आपका जीमेल लॉगइन करते समय सिक्योरिटी में जाकर अपनी सुविधा के अनुसार बदलाव करते रहना चाहिए.

इन सभी सिक्योरिटी फीचर्स को एक्टिवेट करना बड़ा आसान है. आपको बस इनकी ‘सेटिंग’ में जाकर 5 से 7 मिनट बिताना होता है. उसके बाद दोबारा फेरबदल करने तक वो सेटिंग आपके अकाउंट पर लागू होगी.

4. आपके ईमेल पर सबसे जरूरी है कि आप वहां टू-फेक्टर-ऑथेंटिकेशन को जरूर लागू करें. इससे जब भी आप लॉगइन करेंगे आपके मोबाइल फोन पर एक वन टाइम पासवर्ड आएगा जो कि आपको वेबसाइट पर डालना होगा, इसके बाद ही आप लॉगइन कर सकेंगे. इसका फायदा यह है कि कोई भी अनजान या गलत व्यक्ति आपके अकाउंट में आपकी अनुमति के बिना लॉगइन नहीं कर सकता.

5. सबसे जरुरी बात जो आपको ध्यान में रखनी चाहिए कि किसी भी ऐसे विज्ञापन पर क्लिक न करें जो आपको ये कहता है कि आपके मोबाइल या कंप्यूटर पर वायरस का खतरा है. ऐसे विज्ञापन अक्सर ही हैकर्स की चाल होती है ताकि उसके वेबसाइट पर आप जाएं और वे आपकी निजी जानकारियां हैक कर उनका गलत उपयोग कर सकें.

मेरी नाक पर दाने के कारण काले निशान रह गए हैं. निशानों को दूर करने का उपाय बताएं.

सवाल

मैं 32 वर्षीय महिला हूं. पिछले दिनों मेरी नाक पर दाने हो गए थे, जो अब ठीक हो चुके हैं पर उन की जगह अब काले निशान रह गए हैं. कृपया इन निशानों को दूर करने का उपाय बताएं?

जवाब

निशानों को हटाने के लिए मेथी के पत्तों को पीस कर पैक बनाएं व नाक पर लगाएं. सूखने पर ठंडे पानी से धो लें. इस के अलावा ऐलोवेरा जैल भी प्रभावित स्थान पर लगा सकती हैं. यह भी निशानों को हलका करने में मदद करेगा.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

ऑनलाइन वीडियो के लिए ये ऐप भी हैं मशहूर

आमतौर पर सभी लोग ऑनलाइन वीडियो देखने के लिए यूट्यूब का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन इस बात का पता कम ही लोगों को होगा कि ऑनलाइन वीडियो देखने के लिए आप दूसरी साइट्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

डेलीमोशन:

अगर आप यूट्यूब के अलावा किसी और साइट पर वीडियो देखना चाहते हैं तो डेलीमोशन अच्छा विकल्प है. इस साइट पर आप अंग्रेजी टीवी शो और फिल्में भी देख सकते हैं. डेलीमोशन साइट 18 भाषाओं में उपलब्ध है. आप अपनी इच्छानुसार अपनी भाषा का चुनाव कर सकते हैं. आप डेलीमोशन साइट पर अपनी कोई वीडियो भी अपलोड कर सकते हैं.

वाइन एप्लिकेशन:

अगर आप अपने एंडरॉयड फोन में ही वीडियो देखना चाहते हैं तो आपके लिए वाइन एप्लिकेशन बेहतर विकल्प है. यहां पर आप कॉमेडी, डांस या स्पोर्ट्स आदि जैसी विभिन्न वीडियो देख सकते हैं. यहां अपने पसंदीदा वीडियो को आप अपने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर, फेसबुक या इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर शेयर भी कर सकते हैं. यह एप्लिकेशन एंडरॉयड उपभोक्ताओं के लिए गूगल प्ले स्टोर पर मुफ्त में उपलब्ध है.

वीमियो एप्लिकेशन:

इस एप्लिकेशन को आप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं. इस एप्लिकेशन में आप किसी भी प्रकार की वीडियो को सर्च कर देख सकते हैं. यहां वीडियो देखने के बाद आप चाहें तो उन वीडियो को शेयर भी कर सकते हैं. यहां पर वीडियो देखते समय आपको किसी भी प्रकार के विज्ञापन परेशान नहीं करेंगे.

टेड डॉट कॉम:

इस साइट पर आप इंटरव्यू या इसी तरह के वीडियो देख सकते हैं. इस साइट में आपको केवल एक्सपर्ट के इंटरव्यू और इससे जुड़े विषय की ही वीडियो मिलेगी. यह वीडियो खासतौर से स्टूडेंट्स और रिसर्च कार्य से जुड़े लोगों के लिए लाभदायक है.

वीयू ​एप्लिकेशन:

इस साइट पर आप किसी भी तरह की वीडियो देख सकते हैं. इसमें आप कोई भी फिल्म या टीवी शो आसानी से सर्च कर सकते हैं. यहां आपको सभी वीडियो मुफ्त उपलब्ध होगी. साथ ही इनकी डाउनलोडिंग भी बिल्कुल मुफ्त है.

नाहिद के खिलाफ फतवे की खबर निकली कोरी अफवाह

कुछ दिनों पहले ये खबर आई थी कि असम की एक लड़की के खिलाफ 46 मौलानाओं ने फतवा जारी कर दिया है. लड़की के नाम और काम से पहले दिमाग में जिस शब्द ने जगह बनाई वो है ‘फतवा’. हर तरफ इस बात को फैलते भी देर नहीं लगी (इंटरनेट की मेहरबानी). आनन फानन में राज्य के मुख्यमंत्री से लेकर लेखकों तक के ट्वीट भी सामने आने लगे. रही सही कसर टीवी ने पूरी कर दी. असम के कई लोकल टीवी चैनलों ने इस मामले की कड़ी निंदा की. कुछ बुद्धिजीवियों ने असम के होजई जिले की तुलना सऊदी अरब से भी कर दी. पर अब जाकर इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आई है.

जैसा की आजकल का चलन है, टीवी और अखबार की पत्रकारिता की गलितयों को वेबसाइट खोज निकालते हैं. कुछ ऐसा ही इस मामले में भी हुआ. कुछ अंग्रेजी वेबसाइट ने अब इस मामले की हकीकत बताई है. इंडियन आइडल जूनियर फेम सिंगर को यह सारा मामला मीडिया से ही पता चला. इसका मतलब 46 मौलानाओं ने उन्हें व्यक्तिगत तौर पर कोई नोटिस या तथाकथित फतवा नहीं भेजा था. ओपीनिय मेकर मीडिया ने नाहिद के लिए भी ओपीनियन तैयार कर दिया था. 

फतवे पर नाहिद ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को एक ही जवाब दिया, "फतवे के बारे में सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ. मै बहुत रोई. पर मुझे लगता है कि मेरा संगीत अल्लाह का तोहफा है. मैं ऐसी धमकियों के आगे झुककर अपना संगीत नहीं छोड़ूंगी." असम में लगा यह तथाकथित फतवा 24 घंटे के अंदर हर मीडिया चैनल पर छा गया. ब्रेकिंग की खबर बन गई वो खबर, जो असल में कोई खबर थी ही नहीं. प्राइम टाइम के गाली-गलौच में  निष्कर्ष यह निकाला गया कि असम में भी तालिबन स्टाइल के फतवे जारी होने लगे हैं, जो लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा हैं.

कुछ अंग्रेजी के अखबारों ने तो यह तक कह दिया कि नाहिद ने आईएसआईएस और आतंकवाद के खिलाफ गाने गाए हैं. और वे इस बात की जांच करेंगे कि क्या फतवा इसी कारण जारी किया गया था. असल में कोई फतवा जारी ही नहीं किया गया था. इसका सबूत है वो लिफलेट जिस पर 46 मुस्लिमों ने दस्तख्त किए हैं. यह असमिया भाषा में छापा गया और इसे होजई और नागांव जिलों में बांटा गया.

गौरतलब है कि इस लिफलेट में 25 मार्च को असम के लंका इलाके के उदाली सोनई बीबी कॉलेज में होने वाले कार्यक्रम का जिक्र किया गया है, पर उसमें कहीं भी नादिरा का नाम नहीं है. लिफलेट के ऊपर ‘गुहारी’ लिखा है और लिफलेट में यह अपील की गई है कि ईदगाह, मदरसों, कब्रिस्तान और मस्जिदों से घिरे उदाली सोनई बीबी कॉलेज में अगर नृत्य-संगीत जैसे कार्यक्रम होंगे तो लोगों को अल्लाह का कहर झेलना होगा. यह शरीया कानून के खिलाफ है.”

ऐसी बातों का कोई तुक नहीं बैठता. पर गलत खबर फैलाने का भी कोई तुक नहीं है. लिफलेट में कुछ दिनों पहले हुए जादूगरी के शो का भी जिक्र किया गया है और बच्चों को ऐसे कार्यक्रमों से दूर रहने की हिदायत दी गई है. जिन 46 लोगों ने लिफलेट पर दस्तखत किए हैं वे मदरसों के शिक्षक और असम स्टेट जमियत उलामा के सदस्य हैं.

मशीन : समय और पैसे की बर्बादी

मशहूर फिल्म निर्देशक जोड़ी अब्बास मस्तान के अब्बास अपने बेटे मुस्तफा बर्मावाला को बौलीवुड में बतौर कलाकार पेश करने के लिए रोमांटिक रोमांचक फिल्म ‘‘मशीन’’ लेकर आए हैं, जो कि उनकी पिछली कई फिल्मों का मुरब्बा है.  फिल्म देखकर नहीं लगता कि एक पिता व चाचा ने अपने बेटे व भतीजे के करियर को संवारने के लिए फिल्म बनायी है.

फिल्म की कहानी के केंद्र में हिमाचल प्रदेश में रहने वाली सारा थापर (कियारा अडवाणी) हैं. सारा थापर दान करने में माहिर हैं. वह एक स्कूल के लिए आवश्यक धन जल्द मुहैया करने का वादा कर अपने घर की तरफ रवाना होती हैं, रास्ते में सड़क पर तेल पड़ा होता है, जिसके चलते सारा की कार खराब हो जाती है. वह रुकती हैं, पीछे से आ रही कार चालक को रुकने के लिए कहती है. यह कार चालक रंश (मुस्तफा बर्मावाला) है. रंश की कार से अपने घर तक पहुंचने के बाद सारा उसे कार रेस में आने का निमंत्रण देती हैं. जब वह कार रेस में जाती हैं, तो पता चलता है कि रंश भी एक प्रतियोगी है. उस दिन वह कार रेस रंश जीत जाता है और सारा हार जाती हैं. रंश, सारा से कहता है कि उसे डर नहीं लगता. क्योंकि उसके पास खोने को कुछ नहीं है. वह ब्रेक पर बिना पैर रखे कार चलाता है. पता चलता है कि रंश भी सारा के ही कालेज ‘वुडस्टाक’ का छात्र है. कालेज में आदित्य (ईशान शंकर) से सारा की अच्छी दोस्ती है. कालेज के एक छात्र विक्की की आदित्य से अनबन है. एक दिन जब प्यार के पुल के पास आदित्य से मिलने सारा जाती है, तभी एक कार आदित्य को कुचल देती है और कार नदी में गिर जाती है. पुलिस को नदी से विक्की की लाश मिलती है.

कालेज में रोमियो ज्यूलिएट नाटक में ज्यूलिएट के किरदार में सारा और रोमियो के किरदार में रंश है. नाटक के अंत में सारा की आंखों में देखते हुए रंश अपने प्यार का इजहार कर देता है. उसके बाद वह सारा व सारा के पिता (रोनित राय) के साथ ही उनके घर जाता है. चट मंगनी पट शादी हो जाती है. दोनों हनीमून के लिए निकलते हैं. हनीमून की रात के बाद सुबह रंश प्यार भरी बातें करते हुए सारा को उठाकर पहाड़ी से नीचे फेंक देता है. रंश व सारा के परिवार के लिए सारा की मौत हो चुकी है, पर उसे आदित्य के हमशक्ल भाई अजय (ईशान शंकर) ने बचा लिया होता है.

कुछ दिन अस्पताल में रहने के बाद वह स्वस्थ हो जाती है. अजय उसे बताता है कि रंश ने ही आदित्य को कार से कुचला था और विक्की की लाश गाड़ी में रखकर गाड़ी को नदी में गिराया था. यह राज सारा व आदित्य के दोस्त लक्की ने अजय को जो वीडियो भेजा था, उससे पता चलता है. अब अजय का मकसद रंश को सजा देना है. अजय के साथ सारा जब अपने घर पहुंचती है, तो उसकी मुंहबोली मां बताती है कि उसके पिता तो ऋषिकेश गए हैं.

उधर रंश जार्जिया में कार रेस का आयोजन करने वाले अरबपति इंसान क्रिश की बेटी सलीना के साथ रंगरेलियां मना रहा है. जिस तरह सारा को रंश ने अपने प्रेम जाल में फंसाया था, उसी तरह वह सलीना को भी अपने प्रेम जाल में फंसाता है. फिर सलीना के पिता क्रिश (दिलीप ताहिल) से मिलता है. दूसरे दिन क्रिश से उनकी पूरी संपत्ति का नब्बे प्रतिशत हिस्सा अपने नाम कराकर उन्हे मौत के मुंह में सुलाकर दुर्घटना का रंग दे देता है. सलीना इस बात पर यकीन कर लेती है.

फिर रंश अपने पिता(रोनित राय ) से मिलने जाता है. तब पता चलता है कि सारा के पिता वास्तव में रंश के पिता हैं. सारा के नाना थापर के यहां रंश के पिता नौकरी करते थे. थापर की दौलत हथियाने के लिए ही रंश के पिता ने सारा के माता पिता की हत्या करवा दी थी. थापर ने मरने से पहले रंश के पिता को सारा का पिता बना दिया था. पर वसीयत में लिख दिया था कि जब सारा 21 साल की होगी, तो सारी जायदाद उसके नाम हो जाएगी. 21 साल से पहले सारा को कुछ हो गया, तो सारी जायदाद ट्रस्ट में चली जाएगी. इसलिए रंश के पिता ने रंश को प्रषिक्षण देकर सारा से प्रेम करवाया. जिस दिन सारा इक्कीस साल की होती, उससे एक दिन पहले शादी करवा दी और फिर सारा की रंश के हाथों हत्या करवा दी. इतना ही नहीं रंश के पिता कभी क्रिश की बहन से क्रिश की दौलत के लिए प्यार करते थे. पर क्रिश ने रंश के पिता को फंसा दिया था. इसलिए क्रिश से बदला लेने व उसकी जयादाद हड़पने के लिए रंश को काम दिया, जिसे रंश ने पूरा किया. अब रंश के पिता खुश हैं कि वह और उनके बेटे रंश के पास अरबों की जायदाद है.

उधर रेस का फाइनल होना है. सारा व अजय अपनी योजना बनाते हैं. कार रेस में रंश को सारा हराती है. सलीना, रंश को बताती है कि उसे उसकी असलियत पता चल चुकी है. उधर सारा व अजय घर पहुंचकर रंश के पिता को गोली मारने के बाद पूरे मकान में आग लगा देते हैं. रंश अपने पिता को आग से बाहर निकालता है. पर अजय उसे घायल कर देता है. जबकि सारा कहती है कि वह जिससे प्यार करती है, उसे भूल नहीं सकती है. अंततः रंश की भी मौत हो जाती है.

फिल्म ‘‘मशीन’’ देखने के बाद एक ही सवाल उठता है कि अब्बास मस्तान अपने बेटे के लिए भी एक अच्छी फिल्म नहीं बना सके. ‘मशीन’ एक मौलिक फिल्म की बजाय अब्बास मस्तान निर्देशित ‘बाजीगर‘, ‘खिलाड़ी’, ‘रेस’ सहित कई फिल्मों का मिश्रण लगती है. जब फिल्म ‘मशीन’ शुरू होती है, कुछ समय तक वह अब्बास मस्तान की पुरानी फिल्म ‘बाजीगर’ की याद दिलाती है. उसके बाद ‘खिलाड़ी’, ‘रेस’…..इंटरवल से पहले फिल्म को बेवजह खींचा गया है. फिल्म की कहानी व पटकथा में दम नहीं है. फिल्म में जो घटनाक्रम हैं, उनका आपस में तालमेल नहीं है और उन घटनाक्रमों की कोई वजह या लाजिक भी समझ में नही आती. वही घिसी पिटी कहानी, वही पुराने रोमांचक व रहस्य के घटनाक्रम, जो दर्शकों को बोर ही करते हैं और दर्शक सोचता है कि कब तक इसे झेलना पड़ेगा? सिर्फ लोकेशन और कैमरामैन दिलशाद वी ए ही तारीफ के हकदार हैं. फिल्म के संवाद भी बहुत घटिया हैं. फिल्म का गीत संगीत भी अति साधारण दर्जे का है.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो कियारा अडवाणी कई सीन में काफी खूबसूरत लगी हैं. उनका अभिनय भी ठीक ठाक है, मगर वह फिल्म को बेहतर नहीं बना पाती. अभिनेता ईशान शंकर के हिस्से करने के लिए कुछ खास था ही नहीं. मगर जिनके लिए फिल्म ‘मशीन’ बनायी गयी है यानी कि फिल्म के हीरो मुस्तफा बर्मावाला प्रभावित नहीं करते. हर सीन में वह सपाट चेहरे के साथ नजर आते हैं. उनके चेहरे पर कहीं कोई भाव नहीं आता. उनके पिता ने इसीलिए उनके चेहरे पर दाढ़ी रखवा दी है, जिससे लोग यह न भांप सकें कि मुस्तफा का चेहरा हमेशा भावहीन रहता है. पर वह भूल गए कि कैमरा सब कुछ पकड़ लेता है. यदि मुस्तफा को अभिनय में आगे बढ़ना है, तो अभी उन्हे बहुत मेहनत करने व खुद को तैयार करने की जरुरत है. रोनित राय भी निराश करते हैं.

जार्जिया में फिल्मायी गयी फिल्म ‘‘मशीन’’ का प्रचार भी औसत दर्जे से कम रहा. शायद फिल्म के निर्माता व निर्देशक को पहले से ही फिल्म के भविष्य का अहसास था. फिल्म देखने के बाद इस बात का अहसास होता है कि कोई चमत्कार ही इस फिल्म की लागत को वापस दिला सकता है. अन्यथा यह फिल्म घाटे का सौदा है.

दो घंटे 28 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘मशीन’’ का निर्माण ‘‘अब्बास मस्तान प्रोडक्शन’’ और ‘‘पेन मूवीज’’ ने मिलकर किया है. फिल्म के  लेखक संजीव कौल, निर्देशक अब्बास मस्तान, कैमरामैन दिलशाद वी ए, संगीतकार तनिष्क बागची, कोमल शिवान व डां.जियुस तथा कलाकार हैं – मुस्तफा बर्मावाला, कियारा अडवानी, ईशान शंकर, रोनित राय, जानी लीवर व अन्य.

स्वार्थ की राह पर बिखरा खून

उत्तर प्रदेश के जिला कासगंज का एक छोटा सा गांव है अभयपुरा. महावीर सिंह इसी गांव के संपन्न किसान बंसीलाल का बेटा था. इसी जिले के थाना मिरहची के अंतर्गत गांव कल्यानपुर में महावीर की बहन ब्याही थी. 5 अक्तूबर, 2016 को वह अपने घर से बहन के घर जाने के लिए निकला. बहन को उस ने यह खबर फोन कर के दे दी थी कि वह शाम तक पहुंच जाएगा.

जब शाम तक महावीर बहन के घर नहीं पहुंचा तो बहन ने महावीर की पत्नी केला देवी को फोन कर के पूछा, ‘‘भाभी, महावीर भैया आने को कह रहे थे, अभी तक नहीं आए.’’

‘‘वह तो सुबह ही यहां से मिरहची के लिए निकल गए थे. अभी तक नहीं पहुंचे तो कहां चले गए.’’ केला देवी बोली.

‘‘पता नहीं भाभी,’’ बहन बोली, ‘‘आप उन के दोस्तों को फोन कर के देखो. क्या पता दोस्तों के साथ हों.’’

केला देवी ससुर बंसीलाल के पास गई और यह बात उन्हें बता दी. बंसीलाल ने महावीर का फोन नंबर मिलाया तो वह स्विच्ड औफ आ रहा था. बंसीलाल की भी समझ में नहीं आया कि बेटा गया तो गया कहां. उन्होंने उस के दोस्तों को भी फोन कर के पूछा पर कहीं से भी उस के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.

उन का दिल तेजी से धड़कने लगा, चिंता बढ़ने लगी. कुछ नहीं सूझा तो वह मोहल्ले के  1-2 लोगों को साथ ले कर थाना अमोपुर पहुंच गए. थानाप्रभारी विजय सिंह को उन्होंने बेटे महावीर के गायब होने की बात बताई.

थानाप्रभारी ने बंसीलाल को विश्वास दिलाया कि वह महावीर का जल्द पता लगा लेंगे. उस की गुमशुदगी लिखने के बाद पुलिस महावीर की तलाश में जुट गई. महावीर कोई दूध पीता बच्चा तो था नहीं, जिस से यह समझा जाता कि वह कहीं खो गया होगा. वह समझदार और शादीशुदा था.

पुलिस यह मान कर चल रही थी कि या तो किसी ने उस का अपहरण कर लिया होगा या फिर उस के गायब होने के पीछे प्रेम प्रसंग का मामला होगा.

थानाप्रभारी ने सब से पहले महावीर के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. इस के बाद उन्होंने उस के बारे में जांच की कि वह किस तरह का शख्स था. गांव में उस का किसकिस के साथ उठनाबैठना था.

इस जांच में थानाप्रभारी विजय सिंह को एक नई जानकारी यह मिली कि महावीर का बदन सिंह के घर कुछ ज्यादा ही आनाजाना था. उस की बीवी निर्मला के साथ उस के नाजायज संबंध थे. इस जानकारी के बाद वह बदन सिंह के घर पहुंचे तो बदन सिंह घर पर नहीं मिला. उस की पत्नी निर्मला ने बताया कि वह एक दिन पहले ही दिल्ली गए हैं. इस पर पुलिस ने उस का पता लगाने के लिए अपने मुखबिर लगा दिए.

3 हफ्ते बीत गए पर बदन सिंह के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. इस दौरान पुलिस महावीर के बारे में अन्य स्रोतों से भी पता लगाने की कोशिश कर रही थी. 30 अक्तूबर, 2016 को एक मुखबिर ने थानाप्रभारी को बदन सिंह के बारे में एक खास सूचना दी. उस ने बताया कि बदन सिंह आज गांव के बाहर ईंट भट्ठे पर आएगा. इस खबर को सुन कर थानाप्रभारी पुलिस टीम के साथ गांव के बाहर ईंट भट्ठे पर पहुंचे तो वहां पर उन्हें बदन सिंह के साथ एक युवक और मिला.

पुलिस ने उन दोनों को हिरासत में ले लिया. बदन सिंह के साथ जो युवक था, उस ने अपना नाम मान पाल निवासी गांव सामंती बताया. थाने में उन दोनों से पूछताछ की गई तो बदन सिंह ने बताया कि महावीर सिंह उस का जिगरी दोस्त था, पर दोस्ती की आड़ में उस ने उस के साथ ऐसा गुनाह किया जो माफी के लायक नहीं था इसलिए हालात ऐसे हो गए कि उस की हत्या करानी पड़ी.

इस के बाद उस ने महावीर की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

महावीर कासगंज जिले के थाना अमापुर के एक छोटे से गांव अभयपुरा में रहता था. वह दिल्ली में नौकरी करता था, इसलिए उसे दिल्ली की हवा लगी हुई थी. उस के पिता के पास अच्छीखासी जमीन थी पर महावीर का खेती के काम में मन नहीं लगता था, इसलिए वह दिल्ली में नौकरी करता था. पिता ने उस की शादी एटा निवासी केला देवी से कर दी थी. बाद में वह एक बेटे का पिता बना जिस का नाम यशवीर रखा.

महावीर की गांव के कई हमउम्र लड़कों से दोस्ती थी. उन्हीं में से एक था बदन सिंह. बदन सिंह के पिता के पास भी अच्छीखासी खेती की जमीन थी. वह पिता के साथ खेती के काम में हाथ बंटाता था. बदन सिंह की शादी निर्मला से हो चुकी थी. बाद में वह भी 2 बच्चों का पिता बना.

महावीर और बदन सिंह एक तरह से लंगोटिया यार थे. महावीर महीने 2 महीने में जब भी दिल्ली से आता तो उस का ज्यादातर वक्त बदन सिंह के साथ ही बीतता था. घर आने पर बदन सिंह की पत्नी निर्मला महावीर की खूब खातिर करती थी. महावीर के दिल्ली चले जाने के बाद बदन सिंह भी खुद को अकेला महसूस करता था.

एक बार जब महावीर दिल्ली से गांव आया तो कुछ अलग ही घटित हो गया. वह अपने दोस्त बदन सिंह के घर पहुंचा तो उस की पत्नी निर्मला को देखता ही रह गया. वह बहुत सुंदर लग रही थी. महावीर के दिल में अजीब सी हलचल होने लगी.

वह निर्मला के नजदीक आने की ख्वाहिश रखने लगा. लेकिन उस के मन के किसी कोने में यह बात भी उठ रही थी कि क्या दोस्त की बीवी को ले कर ऐसी बातें सोचना सही है? उस ने निर्मला से अपने मन की बात नहीं कही और घर लौट आया. पर बारबार निर्मला की चाहत उसे बेचैन किए जा रही थी. उसे परेशान देख कर पत्नी केला देवी ने उस से परेशानी की वजह पूछी पर उस ने कोई जवाब नहीं दिया.

महावीर ने गांव के कई लड़कों को दिल्ली ले जा कर नौकरी पर लगवाया था. कुछ सोच कर उस ने इस बार बदन सिंह को भी दिल्ली चल कर नौकरी करने को कहा, लेकिन बदन सिंह ने साफ इनकार कर दिया.

मन में अजीब सी कशमकश लिए महावीर दिल्ली चला तो गया लेकिन वहां उस का मन नहीं लगा. निर्मला उस के जेहन में हलचल मचाती रही. 15 दिन बाद उस ने फिर छुट्टी ली और घर आ गया. इतनी जल्दी घर लौटने पर घर वालों ने पूछा तो उस ने तबीयत खराब होने का बहाना बना दिया.

महावीर को मालूम था कि बदन सिंह दोपहर के समय खेतों पर चला जाता है और फिर शाम ढले ही लौटता है. इसी मौके का फायदा उठा कर वह निर्मला का दिल टटोलना चाहता था. अगले दिन दोपहर में वह नहाधो कर तैयार हुआ और पत्नी से यह कह कर घर से निकल गया कि वह डाक्टर के पास दवा लेने जा रहा है. अपने घर से वह सीधा बदन सिंह के घर पहुंचा.

अचानक महावीर को आया देख कर निर्मला बोली, ‘‘अरे देवरजी, तुम इतनी जल्दी दिल्ली से आ गए.’’

‘‘आप को देखने का दिल कर रहा था, इसलिए आ गया.’’ महावीर ने मजाक किया. उस की बात पर निर्मला हंसते हुए बोली, ‘‘आप तो बड़े मजाकिया हो.’’ कह कर निर्मला रसोई में गई और फिर कुछ देर में उस के लिए चाय बना कर ले आई.

महावीर चुपचाप चाय पीने लगा. उस के दिमाग में यही बात घूम रही थी कि अपने मन की बात उस से कैसे कहे. तभी निर्मला ने उस से पूछा, ‘‘चुप क्यों हो, क्या हमारी देवरानी से झगड़ा हुआ है?’’

‘‘नहीं भाभी, ऐसी कोई बात नहीं है. दरअसल, मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं थी पर आप की इस चाय ने मुझे भलाचंगा कर दिया है.’’

‘‘क्यों, हमारी देवरानी को चाय बनानी भी नहीं आती क्या?’’ कहते हुए निर्मला हंसी.

‘‘नहीं भाभी, वो सब तो ठीक है पर बहुत सी बातें हैं जो आप को आती हैं और उसे नहीं आतीं. भाभी, कभी आप ने खुद को आईने के सामने गौर से देखा है. आप जितनी सुंदर हैं, पूरे गांव में इतनी सुंदर औरत कोई नहीं है.’’ महावीर ने तारीफ की.

‘‘ओह देवरजी, बहुत हो गया. अब मुद्दे पर आ जाओ. आखिर इतनी तारीफें क्यों कर रहे हो. कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं है?’’ निर्मला हंसते हुए बोली.

 

इस से महावीर की थोड़ी हिम्मत बढ़ी, तभी उस ने आगे बढ़ कर निर्मला का हाथ पकड़ लिया. महावीर की इस हरकत से निर्मला को झटका सा लगा. उस ने अपना हाथ छुड़ाते हुए कहा, ‘‘ये सब क्या है?’’

‘‘भाभी, मैं खुद को रोक नहीं पा रहा हूं. पर यह सच है कि मैं आप से बहुत प्यार करता हूं.’’

‘‘अजीब आदमी हो, तुम जानते हो कि अगर तुम्हारे दोस्त को पता चल गया तो क्या होगा? लगता है तुम्हारी तबीयत सचमुच ठीक नहीं है इसलिए अभी अपने घर चले जाओ और आराम करो.’’  निर्मला ने नसीहत दी.

महावीर ने तो सोचा था कि वह अपनी मीठीमीठी बातों से निर्मला को बहला लेगा पर पासा उलटा पड़ गया. वह अपमानित सा वहां से चला आया और घर में आ कर सिर पकड़ कर बैठ गया.

केला चाय बना कर ले आई और पूछा, ‘‘दवा ले आए?’’

‘‘नहीं, डाक्टर की दुकान बंद थी.’’

केला कुछ नहीं बोली. महावीर चाय पी कर चादर ओढ़ कर लेट गया. उसे इस बात का डर था कि अगर निर्मला ने अपने पति को उस के बारे में बता दिया तो तूफान आ जाएगा. पर रात तक कुछ नहीं हुआ तो महावीर ने चैन की सांस ली. अगले दिन महावीर दिल्ली चला गया.

बेशक निर्मला ने उस के प्यार को स्वीकार नहीं किया था फिर भी दिल्ली में उस का मन नहीं लगा. आखिर नौकरी छोड़ कर वह घर लौट आया.

सामान सहित घर लौटे महावीर को देख कर घर वाले चौंके. पत्नी ने पूछा, ‘‘ये सब क्या है?’’

‘‘तुम हमेशा कहती थी न कि मैं खेती देखूं. अब हम साथसाथ रहेंगे. सच कहूं केला, तुम्हारे और यशवीर के बिना मेरा दिल्ली में दिल नहीं लगता था इसलिए चला आया.’’ महावीर ने कहा. पर इस की असल वजह उस के अलावा कोई नहीं जानता था.

बदन सिंह ने जब निर्मला को बताया कि महावीर नौकरी छोड़ कर आ गया है तो वह उस के गांव लौटने की असल वजह समझ गई.

निर्मला ने उस दिन महावीर का प्रस्ताव ठुकरा दिया था पर बाद में न जाने क्यों उस का झुकाव महावीर की ओर हो गया था. उसे अब अपने किए का पछतावा हो रहा था. उस का मन कर रहा था कि वह महावीर से इस  के लिए माफी मांगे. इसी तरह के विचार उसे बेचैन कर रहे थे.

आखिर निर्मला को एक तरीका सूझा. उस ने पति का मोबाइल चैक किया तो उसे उस में महावीर का नंबर मिल गया. दोपहर को जब बदन सिंह खेत पर चला गया तो उस ने महावीर का नंबर मिलाया. महावीर ने हैलो कहा तो निर्मला के दिल की धड़कनें तेज होने लगीं. तभी महावीर ने कहा, ‘‘अरे भाई बोलो भी, चुप क्यों हो.’’

तभी निर्मला ने हैलो कहा तो महावीर के दिल में घंटियां सी बजने लगीं. निर्मला अब सीधेसीधे मुद्दे पर आ गई. उस ने कहा, ‘‘आग लगा कर अब दूर क्यों भाग रहे हो?’’

‘‘ये क्या कह रही हो भाभी, मैं ने क्या किया?’’ वह नासमझ बनते हुए बोला.

‘‘ओह, तो यह भी हम ही बताएं कि तुम ने किया क्या है. यहां हम बेचैन हो रहे हैं और तुम वहां मौज कर रहे हो. अच्छा, सुनो आज रात को घर आ जाना. तुम्हारे दोस्त बाहर जा रहे हैं.’’

महावीर का हाल अजीब था. दिल की धड़कनें बेकाबू हो रही थीं. उस ने अच्छा कह कर फोन काट दिया और सोचने लगा कि क्या सचमुच निर्मला भी उसे चाहने लगी है. दिन भर वह सोच में रहा. न ठीक से खाया न ही खेत पर चैन मिला. वह बड़ी बेसब्री से रात होने का इंतजार करने लगा.

आखिर रात आ ही गई. घर वाले जब सो गए तो महावीर चुपचाप दरवाजा खोल कर बाहर निकल गया. वह बदन सिंह के दरवाजे पर पहुंचा तो दरवाजा भिड़ा हुआ था. हलका का धक्का देते ही वह खुल गया. जैसे ही वह अंदर गया तो निर्मला कमरे से निकल आई. महावीर को देख कर वह खुश हो गई और दरवाजे की कुंडी लगा दी. वह कमरे में महावीर के पास आ कर बोली, ‘‘इस आशिकी के चक्कर में तुम क्यों 2 परिवारों को बरबाद करना चाहते हो. जानते तो हो मेरे 2 बच्चे हैं.’’

‘‘जानता हूं, पर इस दिल का क्या करूं जो मानता ही नहीं है.’’ महावीर ने कहा.

‘‘क्या तुम सचमुच मेरे प्रति गंभीर हो?’’ निर्मला ने पूछा, ‘‘केला का क्या होगा, सोचा है कभी.’’

‘‘हां, बिलकुल गंभीर हूं. उस की चिंता मत करो. वह भी अपने बारे में सोच ही लेगी.’’ कहते हुए महावीर ने निर्मला को खींच कर गले से लगा लिया. महावीर के आगोश में निर्मला ने भी समर्पण कर दिया. उस ने अपनी जिंदगी की नाव को तूफान के हवाले कर दिया.

इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. इस से उन्हें संतुष्टि भले ही हासिल हुई होगी पर यह बात सच थी कि उन्होंने जो काम किया, उस से उन के पारिवारिक रिश्तों की बुनियाद हिलने की शुरुआत हो चुकी थी.

देर रात महावीर घर पहुंचा तो घर में सभी को सोते देख कर उस ने राहत की सांस ली. अब महावीर और निर्मला की आशिकी मोबाइल के जरिए चलने लगी. दोनों मिलने का समय तय कर लेते और समय निकाल कर एकदूसरे की बांहों में खो जाते.

पत्नी के कृत्य से बदन सिंह तो अभी तक बेखबर था पर केला को लगने लगा था कि जरूर कुछ गड़बड़ है. फिर गांव के एक युवक ने केला से कह भी दिया, ‘‘भाभी, महावीर भैया का बदन सिंह के घर ज्यादा आनाजाना ठीक नहीं है. लोग उन के बारे में तरहतरह की बातें करते हैं.’’

केला के पति की बदन सिंह से काफी पुरानी दोस्ती थी. इसी वजह से लोगों ने उस के बारे में कभी कुछ नहीं कहा. वह सोचने लगा कि अब ऐसी क्या बात हो गई जो लोग तरहतरह की बातें करते हैं. यही बात केला के दिमाग में घूमने लगी. एक दिन कपडे़ धोते समय महावीर की जेब में निर्मला का फोटो मिला तो उस का शक और भी गहरा गया. वह सोचने लगी कि पति से कैसे पूछे. उसे अपना और बेटे यशवीर का भविष्य खतरे में नजर आने लगा.

एक रात जब केला की नींद खुली तो महावीर बिस्तर से नदारद था. उस का दिल तेजी से धड़कने लगा. महावीर बाहर से देर रात आया और बिस्तर पर लेटने लगा तो वह बोली, ‘‘आ गए, उस से मिल कर?’’

महावीर के पैरों तले से जमीन खिसकने लगी. वह बात को छिपाते हुए बोला, ‘‘मैं तो बाहर हवा खाने गया था.’’

केला ने कुछ नहीं कहा. इस के पीछे उस की मजबूरी यह थी कि उस के मातापिता का देहांत हो चुका था. एक भाई था. सोचा अगर पति ने छोड़ दिया तो वह बच्चे को ले कर कहां जाएगी. इसलिए वह चुप रही.

अगले दिन सुबह उसे लगा कि पति से उस की दूरी बढ़ चुकी है. खाना खाते समय भी महावीर ने उस से बात नहीं की. महावीर के दिल में भी अपराधबोध था पर वह अपने दिल का क्या करता जो निर्मला के पल्लू में बंधा हुआ था.

काफी देर बाद आखिर केला ही चुप्पी तोड़ते हुए बोली, ‘‘जो तुम कर रहे हो, ठीक नहीं है.’’

‘‘मैं क्या कर रहा हूं. तुम क्या कह रही हो, मैं समझा नहीं.’’ वह बोला.

‘‘लेकिन मैं सब कुछ समझ रही हूं विनाश काल में बुद्धि विपरीत हो जाती है. डरती हूं कि कहीं तुम्हारा भी यही हाल न हो.’’

इस बीच बदन सिंह को भी पता चल गया कि उस की पत्नी के संबंध महावीर के साथ हैं. दोस्त के इस विश्वासघात पर बदन सिंह को बड़ा गुस्सा आया. उस ने महावीर से तो कुछ नहीं कहा पर पत्नी पर निगाह रखने लगा. बदन सिंह एक दिन दोपहर में घर लौटा तो घर में महावीर को देख कर उस के तनबदन में आग लग गई. उस ने महावीर को बाहर का रास्ता दिखाते हुए कहा, ‘‘अब कभी भी मेरी गैरमौजूदगी में मेरे घर मत आना.’’

महावीर घबरा गया, ‘‘यह क्या कह रहे हो दोस्त, मैं तो तुम से मिलने आया था.’’

‘‘तो फिर खेत पर मिलते.’’ कहते हुए बदन सिंह ने महावीर का हाथ पकड़ कर बाहर निकाला और दरवाजा बंद कर दिया.

निर्मला अवाक रह गई. वह बोली, ‘‘ये तुम ने ठीक नहीं किया.’’

बदन सिंह उसे घूरते हुए बोला, ‘‘अगर तुम नहीं संभली तो मैं इस से भी ज्यादा बुरा कर दूंगा.’’

निर्मला ने फोन द्वारा महावीर को सतर्क किया और इस के बाद दोनों अमापुर जा कर मिलने लगे. साथ ही उन्होंने घर से भाग जाने की योजना बना ली. बदन सिंह को पता चल गया कि निर्मला महावीर के साथ भाग जाना चाहती है. यदि ऐसा हो जाता तो उस की समाज में बहुत बदनामी होती. इस से पहले कि वह ऐसा कोई कदम उठाती, बदन सिंह ने महावीर को ही ठिकाने लगाना बेहतर समझा.

वह अपने एक दोस्त मान पाल निवासी गांव सामंती, थाना सोरों से मिला और अपनी परेशानी बताई. मान पाल ने उस का साथ देने का वादा किया. इस के बाद दोनों मौके की तलाश में लग गए. इसी बीच उन्हें पता चला कि 5 अक्तूबर, 2016 को महावीर को कल्याणपुर स्थित अपनी बहन के घर जाना है.

उस दिन बदन सिंह और मानपाल महावीर के घर से बाहर निकलने का इंतजार करने लगे. महावीर जैसे ही घर से निकला, दोनों पीछे लग गए. मानपाल ने महावीर से बात की और उसे बहलाफुसला कर शराब के ठेके पर ले आया. उस ने महावीर को खूब शराब पिलाई. इसी बीच बदन सिंह भी वहां आ गया और दोनों उसे ई-रिक्शा में डाल कर तबल नगला के जंगल में ले गए.

जंगल में पहुंचने पर उन्होंने महावीर को उतार कर ई-रिक्शा चालक को पैसे दे कर भेज दिया और महावीर को मार डाला और लाश को वहीं डाल कर भाग खड़े हुए. जिस अंगौछे से गला घोंट कर उस की हत्या की गई थी, उसे उस के गले में ही रहने दिया.

बदन सिंह दिल्ली चला गया था लेकिन उस के पास पैसे खत्म हो चुके थे. अत: उस ने मान पाल से कहा कि वह पैसों का इंतजाम कर के उसे अमापुर में भट्ठे पर मिले. यह बात मुखबिर को पता लग गई. उसी मुखबिर के इशारे पर दोनों पुलिस के हत्थे चढ़ गए.

बदन सिंह की निशानदेही पर पुलिस ने महावीर का कंकाल और गले में पड़ा अंगौछा बरामद कर लिया. पुलिस ने भादंवि की धारा 346, 302, 201, 120बी और 404 के तहत बदन सिंह और मान पाल को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया. निर्मला की आशिकी में उसे कुछ हासिल नहीं हुआ, 2 परिवार जरूर बरबाद हो गए.  

सपना को नहीं मिला अमन

29 सितंबर, 2016 को उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर के थाना सहजनवा के गांव रहीमाबाद  के पास सड़क के किनारे, एक लाश पड़ी होने की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों के तमाम लोग इकट्ठा हो गए. सूचना पा कर थाना सहजनवा के थानाप्रभारी ब्रजेश यादव भी पुलिस बल के साथ आ गए. उन्हें लाश की शिनाख्त कराने में जरा भी दिक्कत नहीं हुई, क्योंकि वहां जमा भीड़ में मृतक का एक दोस्त था, जिस ने लाश की शिनाख्त ही नहीं कर दी, बल्कि यह भी बताया कि उस ने मृतक के घर वालों को सूचना भी दे दी है.

लाश की शिनाख्त जिला देवरिया के थाना बरहज के गांव नवापार के रहने वाले जितेंद्र सिंह के बेटे अमनप्रताप सिंह के रूप में हुई थी. जितेंद्र सिंह मध्य प्रदेश में रहते थे. गांव में उन के भाई राजू सिंह रहते थे. मृतक अमन के दोस्त ने उन्हें ही फोन कर के उस की हत्या के बारे में बताया था. सूचना मिलते ही वह परिवार के कुछ लोगों के साथ तुरंत चल पड़े थे.

थाना सहजनवा के थानाप्रभारी ब्रजेश यादव ने लाश का निरीक्षण किया तो पता चला कि सिर और सीने में गोली मारी गई थी. इस के अलावा पेचकस जैसी नुकीली चीज से उस के सीने में कई वार किए गए थे. वह घटनास्थल की काररवाई कर रहे थे, तभी मृतक अमन के चाचा राजू सिंह आ गए थे.

उन्होंने भी लाश की पहचान अपने भतीजे अमनप्रताप सिंह के रूप में कर दी तो पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था. इस के बाद राजू सिंह की तहरीर पर थाना सहजनवा में अज्ञात के खिलाफ अमन की हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया था.

मृतक का मोबाइल गायब था. पुलिस ने फोन किया तो पता चला कि वह बंद है. पुलिस ने उसे सर्विलांस पर लगवाने के साथ उस के नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि उस के फोन की आखिरी लोकेशन सिंहडि़या के एक पेट्रोल पंप के पास की थी.

काल डिटेल्स के अनुसार आखिरी बार उस के मोबाइल पर जिस नंबर से फोन आया था, वह गोरखपुर के थाना कैंट के मोहल्ला सिंहडि़या के रहने वाले संजय पांडेय उर्फ जगदंबा का था. थाना सहजनवा पुलिस ने थाना कैंट पुलिस से संपर्क कर के पूरी बात बताई तो पता चला कि 2 साल पहले जगदंबा ने मृतक के खिलाफ बेटी के साथ छेड़छाड़ का मुकदमा थाना कैंट में दर्ज कराया था.

इस जानकारी से ब्रजेश यादव को लगा कि इस हत्या में कहीं न कहीं से जगदंबा का हाथ जरूर हो सकता है. शक के आधार पर ब्रजेश यादव ने जगदंबा के घर छापा मारा तो वह अपने घर से फरार मिला. उस के साथ उस की वह बेटी भी गायब थी, जिस के साथ छेड़छाड़ का उस ने मुकदमा दर्ज कराया था. पुलिस ने जब मुखबिरों से बापबेटी के बारे में पता कराया तो पता चला कि बाप के साथ गायब बेटी सपना से मृतक के प्रेमसंबंध ही नहीं थे, बल्कि वह उस के साथ भागी भी थी.

इस के बाद ब्रजेश यादव को समझते देर नहीं लगी कि यह हत्या प्रेमसंबंधों की वजह से हुई है और हत्या भी जगदंबा ने ही बेटी के साथ मिल कर की है.

वह जगदंबा के पीछे हाथ धो कर पड़ गए तो करीब 15 दिनों बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया. जगदंबा और सपना को थाने ला कर पूछताछ की गई तो उन्होंने अमन की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया और सपना से प्रेम से ले कर हत्या तक की पूरी कहानी सुना दी.

इस के बाद उसी दिन यानी 17 अक्तूबर, 2016 की शाम को गोरखपुर के एसएसपी रामलाल वर्मा ने पत्रकारवार्ता कर अमन की हत्या का जो खुलासा किया, उस के अनुसार इस हत्याकांड में जगदंबा का बेटा नितेश पांडेय और साला संजीव द्विवेदी भी शामिल था. लेकिन ये दोनों भी फरार थे, इसलिए इन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका था. इस पूछताछ में सपना और संजय पांडेय उर्फ जगदंबा ने अमन की हत्या की जो कहानी सुनाई थी, वह इस प्रकार थी—

अमन प्रताप सिंह उर्फ सोनू उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के थाना बरहज के गांव नवापार का रहने वाला था. उस के पिता जितेंद्र सिंह मध्य प्रदेश के जबलपुर में सड़क निर्माण विभाग में कंस्ट्रक्शन सेक्शन में इंजीनियर थे. अमन गोरखपुर के थाना कैंट के मोहल्ला रुस्तमपुर में किराए का कमरा ले कर पढ़ाई के लिए अकेला ही रह रहा था.

एकलौता बेटा होने की वजह से अमन के पिता चाहते थे कि बेटा उन्हीं की तरह पढ़लिख कर इंजीनियर बने. इसलिए उस की पढ़ाई पर वह विशेष ध्यान दे रहे थे. लेकिन गोरखपुर में जिस कोचिंग में वह पढ़ रहा था, वहां उस की मुलाकात खूबसूरत सपना से हुई तो वह उसे दिल दे बैठा.

खूबसूरत सपना गोरखपुर के थाना कैंट के मोहल्ला सिंहडि़या के रहने वाले संजय पांडेय उर्फ जगदंबा की बड़ी बेटी थी. वह पढ़ने में अन्य भाईबहनों से ठीक थी, इसलिए प्राइवेट नौकरी कर के गुजरबसर करने वाले जगदंबा ने उस से कह रखा था कि वह जितना चाहे, पढ़ सकती है. लेकिन एक ही कोचिंग में पढ़ रहे अमनप्रताप सिंह उर्फ सोनू ने जब उस से प्यार का इजहार किया तो वह उस के प्रस्ताव को ठुकरा नहीं सकी और उस ने भी मुसकराते हुए कह दिया, ‘‘इट्स ओके, आई लाइक यू वैरी मच.’’

‘‘रियली.’’ अमन ने कहा तो सपना ने आगे बढ़ कर कहा, ‘‘यस, रियली आई लाइक यू वैरी मच. आई लव यू.’’

इस के बाद दोनों की मुलाकातें होने लगीं और हर मुलाकात के बाद उन के बीच प्यार बढ़ता गया. यही नहीं, दोनों प्यार का घरौंदा बनाने के सपने भी देखने लगे. उन का यह घरौंदा बन पाता, उस के पहले ही सपना के घर वालों को उस के प्यार का पता चल गया.

दरअसल, हमेशा गुमसुम रहने वाली सपना का चेहरा अमन से प्यार होने के बाद खिलाखिला रहने लगा था और उस की चालढाल भी बदल गई थी. बेटी में आए बदलाव को देख कर मां को हैरानी होने के साथ संदेह भी हुआ था कि बेटी में अचानक यह बदलाव कैसे आ गया, वह मोबाइल पर घंटों चिपकी किस से बातें करती रहती है? पूछने पर कुछ बताती भी नहीं है.

सयानी हो चुकी बेटी के हावभाव और हरकतों को देख कर मां को संदेह हुआ तो उन्होंने पति से बात करने का विचार किया. दूसरी ओर जगदंबा खुद भी बेटी के बदले व्यवहार से सकते में थे. वह पिता थे, इसलिए बेटी से सीधे कुछ पूछ नहीं सकते थे, इसलिए वह उस पर चोरीछिपे नजर रखने लगे थे.

इस का नतीजा यह निकला कि उन्हें पता चल गया कि सपना अमनप्रताप सिंह नाम के लड़के से प्यार करती है. यह जान कर उन के होश ही उड़ गए, क्योंकि बेटी से उन्हें इस तरह की कतई उम्मीद नहीं थी. उन्होंने यह बात पत्नी से बताई तो उन की शंका सच साबित हुई. उन्होंने चिंता में कहा, ‘‘लड़की कुछ ऐसावैसा कर बैठी तो हम समाजबिरादरी में मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे.’’

पतिपत्नी काफी परेशान थे, जबकि सपना अपनी ही दुनिया में खोई थी. उसे इस बात की भनक तक नहीं लग पाई कि मांबाप को उस के प्यार की खबर लग गई है. उसे पता तब चला, जब जगदंबा ने अचानक उस के कोचिंग जाने पर रोक लगा दी. इस से सपना को समझते देर नहीं लगी कि पापा को उस के प्यार वाली बात का पता चल गया है. जबकि इस के पहले उन्होंने उसे पढ़ने के लिए कहीं भी आनेजाने से मना नहीं किया था.

सपना ने पिता के इस निर्णय के बारे में मां से बात की तो उन्होंने कहा, ‘‘सपना, तुम ने जो किया है, उस की हम लोगों को जरा भी उम्मीद नहीं थी.’’

‘‘मां, मैं ने ऐसा क्या कर डाला कि मेरी पढ़ाई बंद करा दी गई?’’

‘‘तुम ने जो किया है बेटी, उस का तुम्हारे पापा को पता चल चुका है. तुम्हें घर से पढ़ने के लिए भेजा जाता था, न कि किसी लड़के से प्यार करने. तुम ने क्या सोचा था कि तुम बताओगी नहीं तो हमें पता ही नहीं चलेगा.’’

‘‘तो यह बात है. आप लोगों को मेरे और अमन के प्यार के बारे में पता चल गया है.’’ सपना ने बेशर्मी से कहा, ‘‘मां, अमन बहुत अच्छा लड़का है, हम दोनों ही एकदूसरे को बहुत प्यार करते हैं.’’

‘‘मां के सामने यह कहते तुझे शर्म नहीं आई. 4 अक्षर पढ़ क्या लिया, तुम ने खुद को न जाने क्या समझ लिया? हम ने तुम्हें यही संस्कार दिए थे. आज भी हमारे यहां बेटियों के भाग्य का फैसला मांबाप करते हैं. इतनी बेशर्मी ठीक नहीं, अगर तेरी इन बातों को तुम्हारे पापा ने सुन लिया तो तुझे जिंदा गाड़ देंगे.’’

मां की बातें सुन कर सपना की बोलती बंद हो गई. मां ने सपना को काफी देर तक समझाया, लेकिन ऐसे लोगों पर किसी के समझाने का असर कहां होता है. सपना पर भी नहीं हुआ. मौका मिलते ही उस ने अमन को फोन कर के बता दिया कि उस के मांबाप को उन के प्यार का पता चल गया है.

सपना की बात सुन कर अमन को जैसे सांप सूंघ गया. वह बुरी तरह घबरा गया, क्योंकि सपना ने उस से यह भी कहा था कि उस के पापा बहुत गुस्से में हैं. वह उस से मिलने कोचिंग जरूर जाएंगे, इसलिए वह सतर्क रहे.

ऐसा हुआ भी. अपने साले संजीव द्विवेदी को साथ ले कर जगदंबा कोचिंग सेंटर जा पहुंचे थे. कोचिंग सेंटर के गेट पर अमन को रोक कर जब उन्होंने उसे अपना परिचय सपना के पिता के रूप में दिया तो वह परेशान हो उठा.

लेकिन उस समय उन्होंने उसे डांटनेफटकारने के बजाय प्यार से सपना से दूर रहने की चेतावनी देते हुए कहा कि यह उस की पहली गलती मान कर उसे चेतावनी दे कर इस शर्त पर छोड़ रहे हैं कि अब वह कभी सपना से मिलने की कोशिश नहीं करेगा.

परिस्थितियों को देखते हुए अमन ने उस समय दोनों हाथ जोड़ कर माफी मांगते हुए वादा कर लिया कि अब वह कभी भी सपना से नहीं मिलेगा. ऐसा उस ने वक्त की नजाकत देख कर किया था, ताकि जगदंबा को उस पर भरोसा हो जाए कि वह जो भी कह रहा है, सच कह रहा है. जबकि मन ही मन उस ने कुछ और ही तय कर रखा था. बहरहाल अमन के वादे पर विश्वास कर के जगदंबा घर आ गए. सपना का कोचिंग जाना बंद ही करा दिया गया था, इसलिए घर का हर कोई उस पर नजर भी रख रहा था.

प्रेमी से मिलने के लिए सपना ने एक खेल यह खेला कि वह ऐसा व्यवहार करने लगी, जैसे वह पूरी तरह बदल गई हो. अपनी बातचीत और हावभाव से आखिर उस ने मांबाप को भरोसा दिला दिया कि वह अमन को भूल चुकी है. इस के बाद उस पर लगी पाबंदी हटा ली गई तो वह चोरीछिपे अमन से मिलने लगी. क्योंकि शायद वह अमन के बिना खुद को अधूरी समझती थी.

उसी तरह अमन भी सपना को टूट कर प्यार करता था. वह उस की रगों में लहू बन कर दौड़ रही थी. दोनों ही एकदूसरे से अलग रह कर जीने की कल्पना नहीं कर सकते थे. सपना और अमन की ये मुलाकातें ज्यादा दिनों तक सपना के घर वालों से छिपी नहीं रह सकीं. जगदंबा को पता चल गया कि सपना अमन से फिर मिलने लगी है. इस बार उन्होंने खुद सपना को अमन के साथ घूमते देख लिया था. बेटी की हरकतों से वह परेशान हो उठा था. अमन से बेटी का पीछा छुड़ाने के लिए उस ने उस के खिलाफ थाना कैंट में बेटी के साथ छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज करा दिया. थाना कैंट पुलिस ने अमन को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. यह सन 2014 की बात है.

अमन के पिता परिवार सहित जबलपुर में रहते थे. उस के चाचा राजू सिंह गांव में परिवार के साथ रहते थे. वह गांव के प्रधान भी थे. अमन के गिरफ्तार होने के बारे में जब उन्हें पता चला तो वह परेशान हो उठे. इस बात को बड़े भाई यानी अमन के पिता को बताए बगैर वह गोरखपुर पहुंचे और अमन को जमानत दिलवा कर जेल से बाहर निकलवाया.

राजू सिंह को अमन की गिरफ्तारी की वजह का पता चला तो वह वह उसे समझाबुझा कर घर ले आए. चूंकि अमन इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुका था और सरकारी नौकरी के लिए वहां तैयारी कर रहा था, इसलिए चाचा के समझाने पर वह हैदराबाद चला गया, जहां उसे प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिल गई.

हैदराबाद जाने के बाद भी अमन सपना को नहीं भूला. सपना ही उसे कहां भूली थी. दोनों की फोन पर बराबर बातें होती रहती थीं. इसी का नतीजा था कि एक दिन सपना घर से भाग कर अमन के पास हैदराबाद जा पहुंची. वहां मंदिर में दोनों ने शादी कर ली और पतिपत्नी की तरह रहने लगे. दोनों अपने इस फैसले से काफी खुश थे. जबकि दोनों के ही मांबाप उन के इस फैसले से अनजान थे.

सपना के भाग जाने से उस के मांबाप काफी दुखी और परेशान थे. मोहल्ले में उन की काफी बदनामी हुई थी. इस के बावजूद जगदंबा बेटी की खोज में जुटे रहे. आखिर खोजतेखोजते वह हैदराबाद अमन के पास जा पहुंचे, जहां उन्हें सपना मिल गई. सपना को देख कर उन का खून खौल उठा, लेकिन वहां उन्हें गुस्से से नहीं, समझदारी से काम लेना था.

जगदंबा को देख कर अमन और सपना भी हैरान थे. जगदंबा अकेले नहीं थे, उन के साथ उस का साला यानी सपना का मामा संजीव द्विवेदी भी था.

जगदंबा ने बेटी को समझाया कि उसे जो करना था, वह उस ने कर लिया. अब वह घर लौट चले. उन्हें उस के इस फैसले पर कोई ऐतराज नहीं है. वह उन की बड़ी बेटी है, इसलिए वह उस की शादी समाज के सामने धूमधाम से करना चाहते हैं, जिस से उन पर लगा बदनामी का दाग धुल जाए.

पिता की बातें सुन कर सपना का चेहरा शर्म से झुक ही नहीं गया, बल्कि उसे अपने किए पर पछतावा भी हुआ. वह पिता के साथ चलने को तैयार हो गई तो जगदंबा उसे ले कर गोरखपुर आ गए. पर गोरखपुर आने के बाद जगदंबा के तेवर बदल गए. उन्होंने अपना पूरा गुस्सा सपना पर निकाला.

उस की जम कर पिटाई कर के उसे कमरे में बंद कर दिया. इस के बाद सपना को अपनी गलती का अहसास हुआ. जब इस बात की जानकारी अमन को हुई तो उसे भी बड़ा कष्ट हुआ. चूंकि अमन को सपना के बिना वहां अच्छा नहीं लगा तो वह भी नौकरी छोड़ कर आ गया.

उसी बीच अमन की छोटी बहन की शादी तय हो गई तो खरीदारी के लिए वह गोरखपुर आनेजाने लगा कि शायद वहां सपना से उस की मुलाकात ही हो जाए. इस तरह जब सपना से मुलाकात नहीं हो सकी तो उस ने सपना के पड़ोस में ही किराए का एक कमरा ले लिया और वहीं रह कर सपना से मिलने की कोशिश करने लगा. उस की यह कोशिश रंग लाई और जब सपना से उस की मुलाकात हुई तो मांबाप की मानमर्यादा को ताक पर रख कर एक बार फिर सपना उस के कमरे पर आ गई.

सपना और अमन ने मंदिर में विवाह किया था. घर और समाज में अधिकार पाने के लिए घर वालों के सामने या कोर्टमैरिज करना जरूरी था. इसलिए अपना हक पाने के लिए सपना ने अमन से कोर्टमैरिज करने को कहा तो उस ने वादा किया कि बहन की शादी के बाद वह मांबाप से बात कर के कोर्टमैरिज कर लेगा. लेकिन बहन की शादी हो जाने के बाद भी वह शादी करने के बजाय बहाने करने लगा तो सपना को समझते देर नहीं लगी कि वह उस से शादी नहीं करना चाहता.

सपना को जब लगा कि अमन को उस से नहीं, उस के जिस्म से प्यार है तो जिस दिल में उस के लिए प्यार के दिए जलते थे, उस में नफरत की ज्वाला धधकने लगी. उस ने मांबाप से अपने किए की माफी मांगी और वादा किया कि अब वे जो कहेंगे, वह वही करेगी. जिस से शादी करने को कहेंगे, वह शादी भी उसी से करेगी.

बेटी के साथ हुए धोखे से जगदंबा और उस की पत्नी भी दुखी थी. सपना के मातापिता अब उस के साथ थे. अमन ने उस के साथ जो किया था, उस से वह बहुत दुखी थी, इसलिए वह उसे सबक सिखाने के बारे में सोचने लगी. दूसरी ओर बेटी के साथ धोखा करने और इज्जत के साथ खिलवाड़ करने से जगदंबा भी अमन से नफरत करते थे, इसलिए बापबेटी ने मिल कर उसे सबक सिखाने का निर्णय कर लिया.

इस के बाद बापबेटी ने मिल कर अमन को सबक सिखाने के लिए जो योजना बनाई. जगदंबा ने बेटे नितेश पांडेय और साले संजीव द्विवेदी से बात की तो बात इज्जत की थी, इसलिए वे भी हर तरह से साथ देने को तैयार हो गए. उस के बाद 27 सितंबर, 2016 की शाम सपना ने जगदंबा के मोबाइल फोन से अमन को फोन कर के सिंहडि़या पेट्रोल पंप पर मिलने के लिए बुलाया.

प्रेमिका के बुलाने पर अमन वहां पहुंचा तो सफेद रंग की वैगनआर कार में सपना बैठी थी. उस ने इशारा कर के अमन को उस में बैठने का कहा तो बिना कुछ सोचेविचारे वह उस में बैठ गया. उस के बैठते ही पीछे से आ कर जगदंबा और नितेश भी बैठ गए. ड्राइविंग सीट पर संजीव द्विवेदी पहले से ही बैठा था.

चारों के बैठते ही गाड़ी गोरखपुरलखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल पड़ी. अमन को जिस तरह घेर लिया गया था, उस से वह समझ गया कि इन लोगों की नीयत ठीक नहीं है. यह अंदाजा होते ही वह हाथ जोड़ कर उन से जान की भीख मांगने लगा.

वे सभी तो उस की हत्या करने के लिए लाए थे, थाना सहजनवा के गांव रहीमपुर के पास सुनसान पा कर उसे गाड़ी से उतार कर उस के सिर और सीने में गोली मार दी. जगदंबा को गोली मार कर संतोष नहीं हआ था, इसलिए उस ने कार में रखा पेचकस ले कर उस के सीने में कई बार घोंपा. इस के बाद लाश वहीं छोड़ कर सभी घर वापस आ गए.

घर आ कर जगदंबा ने नितेश और संजीव को घर से भगा दिया. लेकिन उन के गिरफ्तार होने के बाद पुलिस ने उन की गिरफ्तारी के करीब 15 दिनों बाद उन दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया था. पुलिस ने पूछताछ के बाद उन्हें भी अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया था. जेल भेजने से पहले पुलिस ने अभियुक्तों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त देशी कट्टा, पेचकस, वैगनआर कार और अमन का मोबाइल फोन बरामद कर लिया था.

अभियुक्तों के पकडे़ जाने के बाद पुलिस ने अज्ञात की जगह संजय पांडेय उर्फ जगदंबा पांडेय, सपना, नितेश और संजीव द्विवेदी को नामजद कर के चारों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर के न्यायालय में दाखिल कर दिया है.

सपना को अपने किए का तनिक भी मलाल नहीं है. उस का कहना था अमन ने उस के साथ जो बेवफाई की थी, उस की उसे यही सजा मिलनी चाहिए थी. लेकिन शायद वह यह नहीं सोच पा रही है उस की इस सजा की वजह से कितने घर बरबाद हुए हैं.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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