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कार्ड हैकिंग सतर्कता में बचाव

पिछले साल नवंबर में 1,000 और 500 के नोट बंद होने के बाद नई करेंसी के लिए लोगों को एटीएम और बैंकों के बाहर लाइन लगानी पड़ी. नकदी की किल्लत के चलते रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में भी काफी दिक्कतें आईं. इन सब के बीच औनलाइन बैंकिंग और कार्ड के जरीए होने वाले कैशलैस लेनदेन लोगों के लिए वरदान साबित हुए. पैट्रोल पंप से ले कर राशन की खरीदारी तक दुकानदारों ने कार्ड के जरीए शौपिंग की सुविधा दिलाई. बिलों के भुगतान में औनलाइन बैंकिंग मददगार साबित हुई. हालांकि कैशलैस की ओर बढ़ रहे इन कदमों के साथ जोखिम भी कम नहीं.

कार्ड और बैंक अकाउंट की हैकिंग का खतरा हर वक्त मंडराता है. इन के इस्तेमाल में बरती गई लापरवाही आप को बड़ी चपत लगा सकती है. क्या है हैकिंग औनलाइन या कार्ड के जरीए किए जाने वाले औनलाइन भुगतान के दौरान अकसर हैकर्स फेक वैब पेज या कंप्यूटर वायरस के जरीए लोगों की डैबिट या क्रैडिट कार्ड डीटेल या औनलाइन पासवर्ड आदि चुरा लेते हैं. इसे हैकिंग कहते हैं.

अकाउंट और कार्ड डीटेल की हैकिंग कर के हैकर्स लोगों के  बैंक खातों से औनलाइन चोरी को अंजाम देते हैं. घात में रहते हैं हैकर्स 2016 में देश में कई प्रमुख बैंकों की 32 लाख एटीएम कार्ड डीटेल हैक हो गई. बैंक इस के बाद तत्काल हरकत में आए और उन्होंने उपभोक्ताओं के एटीएम कार्ड ब्लौक कर दिए. 2 सप्ताह के अंदर ही सभी ग्राहकों को नए डैबिट कार्ड जारी किए. जब तक पिन नंबर बदल नहीं गया बैंकों ने इन से जुड़े खातों से रोजाना निकासी की सीमा 5 हजार कर दी थी.

दरअसल, देश और विदेश में हैकर्स दिनरात इसी ताक में रहते हैं कि उपभोक्ता से एक चूक हो और उन की चांदी हो जाए. यही वजह है कि नैट बैंकिंग और कार्ड के इस्तेमाल में सतर्कता बेहद जरूरी है. हैक हो जाए कार्ड या अकाउंट तो क्या करें साइबर ला ऐक्सपर्ट पवन दुग्गल के मुताबिक कैशलैस लेनदेन के बढ़ते चलन के साथ ही हैकिंग की घटनाएं भी बेहद आम हो चुकी हैं. ऐसे में अकाउंट या कार्ड हैक हो जाए तो व्यक्ति को तत्काल हरकत में आना चाहिए और ये कदम उठाने चाहिए: – हैकिंग की सूचना तत्काल बैंक को दें और अपना कार्ड ब्लौक कराएं.

– यदि आप कहीं बाहर हैं तो संबंधित बैंक के कस्टमर केयर नंबर पर फोन कर के अपना कार्ड ब्लौक कराएं.

– बैंक को सूचना दे कर अपने खाते से कार्ड या नैटबैंकिंग को प्रतिबंधित कर दें.

– इस की लिखित शिकायत पुलिस को दें.

– इस दौरान खुद लेनदेन करने के लिए चैक का इस्तेमाल करें.

– जिस बैंक अकाउंट का इस्तेमाल आप नैटबैंकिंग और कार्ड के जरीए भुगतान के लिए करते हैं उस में अधिक पैसे न रखें.

– यदि क्रैडिट कार्ड होल्डर हैं तो क्रैडिट लिमिट कम ही रखें ताकि हैकिंग की स्थिति में ज्यादा नुकसान न हो.

– बैंक करेंगे भरपाई : हैकिंग के बाद यदि उपभोक्ता को नुकसान होता है तो इस की भरपाई का जिम्मा बैंक का होता है. यदि हैकिंग के चलते उपभोक्ता को 10 हजार का नुकसान होता है तो वे बैंक से इस राशि का दावा कर सकते हैं. लेकिन इस के लिए आप को पर्याप्त साक्ष्य देने होंगे कि बैंक की लापरवाही के चलते ऐसा हुआ. अधिकांश उपभोक्ताओं को इस बात की जानकारी नहीं है, जिस की वजह से हैकिंग से हुए नुकसान का दावा वे बैंक से नहीं करते हैं.

– सतर्कता जरूरी : कार्ड या नैट बैकिंग का इस्तेमाल करते वक्त आप को बेहद सतर्क रहना चाहिए. यदि आप गलती से अपना नैट बैंकिंग डीटेल या फिर 16 अंकों का कार्ड नंबर, कार्ड वैलिडिटी अवधि और कार्ड के पीछे मौजूद 3 अंकों का सीवीवी नंबर किसी को बता देते हैं तो वह कभी भी आप के खाते से आप की मेहनत की कमाई में सेंध लगा सकता है.

– अपने एटीएम के पिन को समयसमय पर बदलते रहें. यह काम आप किसी एटीएम पर जा कर कर सकते हैं.

– आप की कार्ड डीटेल जानने के लिए कस्टमर केयर बता कर यदि कोई फोन करे तो कभी उस से क्रैडिट या डैबिट कार्ड की जानकारी साझा न करें. याद रहे बैंक कभी किसी उपभोक्ता से उस के कार्ड का नंबर या फिर पासवर्ड नहीं मांगता.

– अपने मोबाइल नंबर को अपने खाते से जुड़वाएं. इस से किसी भी वक्त पैसे की निकासी की स्थिति में आप को तत्काल मैसेज आ जाएगा.

– हर 3 दिनों में अपनी बैंक स्टेटमैंट चैक करें. आजकल ये सेवाएं औनलाइन हैं तो आप कभी भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

– केवल अपने कार्यालय या निजी कंप्यूटर से ही औनलाइन पैसों का लेनदेन करें. इन दोनों ही जगह ऐंटीवायरस का इस्तेमाल होगा. दोनों के सर्वर सुरक्षित होंगे.

– साइबर कैफे में जा कर नैट बैंकिंग या कार्ड के जरीए लेनदेन करने से बचें. इन जगहों पर हैकिंग का खतरा अधिक होता है.

– अपने नैट बैंकिंग पासवर्ड को भी 2-3 महीनों में बदलते रहें.

– यदि आप को मोबाइल मैसेज के जरीए अपने खाते से हुए किसी ऐसे लेनदेन की सूचना मिले जो आप ने नहीं किया है तो तत्काल इस विषय में बैंक को सूचित करें.

– ऐसी स्थिति में अपने खाते से कार्ड या नैट बैंकिंग से होने वाले लेनदेन को तत्काल प्रतिबंधित कर दें.

– ई-मेल पर कई बार ऐसे संदेश आते हैं जिन में लोगों से कहा जाता है कि उन्होंने लौटरी जीती है. ऐसे भुगतान के लिए ऐसे संदेशों में लोगों से उन के खाते आदि की जानकारी मांगी जाती है. ऐसे ई-मेल संदेशों को देखते ही डिलीट कर दें. गलती से भी इन का जवाब न दें.

अबकी बार पूजा पाठ की सरकार

उत्तर प्रदेश में बहुमत की जीत के बाद भाजपा अपने धर्म के एजेंडे को लागू करने के लिये प्रतिबद्व दिख रही है. दिल्ली से लेकर लखनऊ तक नवरात्रि के अवसर पर जिस तरह से मुख्यमंत्री आवास से लेकर लोकसभा तक फलाहार का दौर चला वह शुद्वरूप से धार्मिक एजेंडा है. लोकसभा चुनाव में जिस तरह से वोटों का धार्मिक ध्रुवीकरण हुआ उसके बाद उत्तर प्रदेश में जिस तरह का बहुमत भाजपा को मिला वहां से भाजपा को अब अपने धार्मिक एजेंडे को लागू करने में कोई झिझक नहीं रह गई है. भाजपा अब अपने धर्म के एजेंडें को पार्टी की ‘यूएसपी‘ यानि लोकप्रियता मानकर चल रही है. यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में शुद्व धार्मिक योगी आदित्यनाथ को अपना मुख्यमंत्री बनाया. मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ अपने धर्म के फेस को पूरी तरह से चमकाते दिख रहे हैं.

मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद भी योगी आदित्यनाथ अपने सरकारी आवास 5 कालीदास मार्ग में रहने के लिये नहीं गये. वह वीवीआईपीगेस्ट हाउस में एक पखवारा से अधिक रहे. इस दौरान मुख्यमंत्री के सरकारी आवास में पूजापाठ और शुद्वीकरण जैसे धार्मिक काम किये गये. प्रवेशद्वार पर ओम और स्वास्तिक के निशान बने और सड़क तक को गंगाजल से पवित्र किया गया. एक एक गतिविधि का अप्रत्यक्ष रूप से प्रचार भी किया गया. हालत यह हो गई कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को कहना पड़ा कि जब हमारी सरकार आयेगी हम भी आफिस और घर को शुद्व करेंगे. एक व्यक्ति के रूप में देश का संविधान किसी को भी अपने धर्म के हिसाब से रहने की आजादी देता है. आमतौर पर संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से उम्मीद की जाती थी कि वह धर्म के एजेंडे में बंध कर काम नहीं करेंगे.

धर्म और राजनीति को अलग अलग करके देखा जाता था. 90 के दशक के बाद जब अयोध्या का मंदिर आंदोलन चला तो धर्म और राजनीति एक ही सिक्के के 2 पहलू होकर रह गये. मुसलिम ध्रुवीकरण के लिये जब रमजान के महीनों में रोजा अतार की दावत का जोर चला तो यह मांग भी उठने लगी कि नवरात्रि और दूसरे अवसरों पर इसी तरह किया जाये. नेताओं को अब धर्म का एजेंडा पूरी तरह से पंसद आ गया है. वह जनता का ध्यान दूसरे मुद्दों से हटाकर यही ले आते हैं. जिससे भावनाओं के आधार पर वोट लिये जा सके.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में केवल मुख्यमंत्री और उनके सरकारी आवास पूजापाठ का दौर नहीं हुआ बाकी मंत्रियों ने भी उसी पंरपरा का पालन किया. असल में कुछ सालों से सभी पार्टियां धर्म के सहारे वोट की फसल काटने की राह पर चल रही हैं. ऐसे में कोई दूसरे को बुरा नहीं कहता. पहले धर्म और राजनीति को अलग अलग करके देखा जाता था. वामपंथी और समाजवादी दोनों विचारधारा इस बात की प्रबल समर्थक थी कि धर्म को राजनीति से दूर रखा जाये. धार्मिक कट्टरपंथ का भी खूब विरोध होता था. बसपा ने भी अपने शुरुआती दिनों में इस विचारधारा को बनाये रखा.

मंदिर आन्दोलन के बाद सभी दल धर्म के नाम पर वोट की फसल काटने में लग गये. ऐसे में विचारधारा की राजनीति खत्म हो गई. राजनीति में व्यक्तिवाद और अवसरवाद शामिल हो गया. अब धर्म का विरोध खत्म हो गया. ऐसे में धर्म की राजनीति शुरू हो गई. भाजपा ने इसे हिन्दुत्व की शक्ल दे दी. अयोध्या में मंदिर विध्वंस के बाद भाजपा को जनता का बहुत समर्थन नहीं मिला जिससे उसे अपने धर्मिक एजेंडे पर चलने में असमंजस हो रहा था. विरोधी दल यह मान रहे थे कि जैसे ही भाजपा ने हिन्दुत्व या राममंदिर का नाम लिये वह हाशिये पर चली जायेगी.

भाजपा ने बहुत ही चतुराई से राजनीतिक दलों के सामाजिक और जातीय आधार में सेंधमारी लगाई. भाजपा ने पिछडी और दलित जातियों में हिन्दुत्व की भावना को जाग्रत किया. लोकसभा में जीत बाद भाजपा का हौसला बढ़ गया. उत्तर प्रदेश की जीत ने भाजपा में नई चेतना का संचार किया है. अब भाजपा इस राह पर चलने के लिये पूरी तरह से तैयार है. विरोधियो की मजबूरी है कि वह खुद धर्म के एजेंडे पर चले हैं, ऐसे में वह खुलकर भाजपा के धर्म के एजेंडे का विरोध नहीं कर पा रहे हैं. जनता फिलहाल खुश है. पर अगर भाजपा केवल धर्म के एजेंडे पर ही चलती रही तो जनता को मोह भंग हो सकता है क्योकि धर्म के एजेंडे से चल कर देश और समाज का भला नहीं हो सकता है.       

कटप्पा ने खुद बताया क्यों मारा बाहुबली को

सिनेमाई संसार की सर्वाधिक चर्चित और बहुप्रतिक्षित फिल्म बाहुबली-2 के जरिए वैश्विक प्रश्न बन चुका 'कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा' का जवाब अब मिलने वाला है. बिना किसी शक के बाहुबली 2 बहुप्रतिक्षित फिल्मों में से एक है जिसका इंतजार दर्शकों को काफी लंबे समय से है. इस फिल्म को इतना सीक्रेट रखा गया है जैसे कि यह ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के अंतर्गत आती हो. लेकिन अब महिष्मति ने इसके राज बताने शुरू कर दिए हैं.

कटप्पा की भूमिका निभा रहे अभिनेता सत्याराज ने स्वयं अब इस प्रश्न का जवाब दिया है कि ऐसी कौन सी परिस्थिति रही जिसके चलते उसने बाहुबली को मार गिराया. कटप्पा केवल बाहुबली का किरदार नहीं है, वो इंटरनेट मेम्स का स्टार बन चुका है. उस पर मिलियन जोक्स बन चुके हैं और उनसे अमूमन जो सवाल पूछा जाता है वो है कि आखिर कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा.

अगर आप अप्रैल में फिल्म के आने का इंतजार नहीं कर सकते तो हम आपको इसका जवाब बता देते हैं. सत्याराज ने बताया कि उनसे कई बार यह सवाल पूछा जाता है लेकिन इससे वो खीझते नहीं हैं. पूरी दुनिया मुझसे पूछ रही है कि कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा. मुझे अब सवाल के बार-बार पूछे जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता है.

हाल ही में यही सवाल एक पत्रकार ने जब सत्याराज से किया जो फिल्म में कटप्पा का किरदार निभा रहे हैं, तो उन्होंने जो जवाब दिया उसे जानने के लिए आपको वीडियो देखना होगा.

जब प्रेग्नेंसी के बावजूद इस हीरोईन को करना पड़ा रेप सीन

स्टार बन जाना बहुत आसान है लेकिन सीन में ढलना और कहेनुसार सीन करना वाकई टेढ़ा काम है. कई बार शूट करने में सितारों को चोट लग जाती है और कई बार वो असहज हो जाते हैं लेकिन शूटिंग नहीं रुकती. ऐसा ही एक वाक्या अपने जमाने की टॉप की हीरोइन मौसमी के साथ घटा था. मौसमी चटर्जी उस वक्त टॉप की हीरोइनों में शुमार थीं और इसकी वजह थी हर किरदार को तल्लीनता के साथ निभाना. लेकिन अपने करियर में उन्हें एक ऐसा सीन करने को मिला जिसने उन्हें रुला ही दिया.

फिल्म थी 'रोटी कपड़ा और मकान'. मनोज कुमार के लीड रोल वाली इस फिल्म में मौसमी के साथ एक रेप सीन शूट होना था. उस वक्त मौसमी चटर्जी प्रेग्नेंट थीं और तबियत भी ठीक नहीं रहती थी. इसलिए मौसमी इस बात को लेकर चिंता में थीं कि आखिर ये रेप सीन वो शूट कैसे करेंगी. चूंकि सीन फिल्म के लिए बहुत जरूरी था इसलिए मना भी नहीं कर सकतीं थी. इसलिए मौसमी चटर्जी ना चाहकर भी उस रेप सीन को करने के लिए तैयार हो गईं. लेकिन इस सीन की वजह से उनकी हालत खराब हो गई थी.

दिन भी आ गया और माहौल भी तैयार किया गया. इस सीन को आटे के एक गोदाम में शूट किया जाना था. सीन के मुताबिक विलेन को मौसमी चटर्जी का ब्लाउज उतारना था जबकि बाकी गुंडे उन्हें पकड़कर रखने वाले थे. इसी खींचा-तानी के दौरान मौसमी के पूरे शरीर पर खूब सारा आटा गिर गया. आटा ना सिर्फ उनके मुंह में भर गया बल्कि बालों में भी चिपक गया.

अब जैसे-तैसे सीन तो शूट हो गया और निर्देशक को भी खूब पसंद आया, लेकिन इसके बाद मौसमी घर जाकर खूब रोईं. आटा मुंह में जाने की वजह से उनकी तबियत बिगड़ गई और खूब उल्टियां हुईं. देर रात तक मौसमी चटर्जी की नौकरानी उनके बालों में चिपके आटे को ही निकालती रही. मौसमी चटर्जी की हालत इतनी बिगड़ गई थी कि फिल्म का जो गाना उन पर फिल्माया जाना था उसे जीनत अमान पर फिल्माया गया. हालांकि मौसमी चटर्जी की मानें तो उनके प्रेग्नेंट होने की वजह से उस गाने में जीनत को लिया गया.

आप भी देखिए उस फिल्म का वो सीन…

क्या भुला दिए गए हैं ये हास्य कलाकार

आज की जेनेरेशन के लिए शायद कामेडी का मतलब है एआईबी, टीवीएफ और अगर और सॉफिस्‍टीकेटेड तरीके से कहें तो शायद वीर दास. ये वो नाम है जो इन दिनों यंग जेनेरेशन की जुबान पर चढ़े हुए हैं, पर क्‍या आप को याद है कुछ बेहद खास बॉलीवुड कॉमेडियन जिन्‍होंने सालों तक कई पीढ़ियों को हंसाया है. जिनकी भूमिका पर पहले अमिताभ बच्‍चन और धर्मेंद्र जैसे लीड स्‍टार्स ने और फिर सलमान खान और शाहरुख खान जैसे सुपरस्‍टार ने कब्‍जा कर लिया.

महमूद

बॉलीवुड के शायद पहले आधिकारिक कॉमेडियन महमूद एक गायक, फिल्‍म निर्देशक और निर्माता भी थे. उन्‍होंने बतौर हास्‍य कलाकार करीब 300 फिल्‍मों में काम किया. वे 15 बार बेस्‍ट कॉमेडियन के रूप में फिल्‍फेयर अवॉर्ड में नॉमिनेट हुए और चार बार विजेता भी रहे.

केश्‍टो मुखर्जी

जैसे ही आप केश्‍टो मुखर्जी का नाम लेते हैं आपकी आंखों के सामने बॉलीवुड में शराबी का रोल निभाते हिचकी लेते एक शख्‍स की तस्‍वीर आ जाती है. अमिताभ बच्‍चन से लेकर ऋषि कपूर और शाहरुख खान तक कई कामयाब कलाकारों ने शराबी का किरदार निभाने के लिए केश्‍टो मुखर्जी से प्रेरणा ली है.

जॉनी वॉकर

सिर्फ चाय के शौकीन जॉनी वॉकर ऐसे एक्‍टर जिन्‍हें कॉमेडी में केश्‍टो से पहले शराबी का रोल निभाने के लिए याद किया जाता था. अपनी महीन मूंछों और चूहे जैसी आवाज के लिए पहचाने जाने वाले जॉनी अच्‍छे करेक्‍टर के एक्‍टर भी थे.

जॉनी लीवर

जॉनी लीवर करीब एक दशक तक बॉलीवुड की फिल्‍मों में कॉमेडी के आसमान पर छाये रहे. इसके साथ ही वे संभवत: भारत के पहले स्‍टैंडअप कॉमेडियन भी थे. उन्‍होंने सैंकड़ों फिल्‍मों में कॉमेडियन का रोल निभाया है. जॉनी लीवर फिल्‍मों में आने से पहले ही फिल्‍म कलाकारों के साथ बतौर कॉमेडियन टुअर्स पर जाते रहे हैं.

राजू श्रीवास्‍तव

जॉनी लीवर की ही तरह राजू श्रीवास्‍तव ने अपना करियर कॉमेडी शोज से शुरू किया और एक कामयाब स्‍टैंडअप कॉमेडियन बनें. राजू के काम में मिमिक्री का भी बड़ा योगदान रहता था. टीवी पर लाफ्टर शोज के आने से उनके करियर को एक नयी दिशा मिली.

जसपाल भट्टी

जसपाल भट्टी अपने कॉमेडी टीवी शो “फ्लॉप शो” से घर-घर में मशहूर हुए. वे अपने सामाजिक राजनीतिक व्‍यंग के लिए काफी पसंद किए जाते थे. बाद में वे निर्माता, निर्देशक और एक्‍टर भी बने. भट्टी को उनके काम के लिए 2013 में पदम भूषण से भी सम्मानित किया गया था.

लक्ष्‍मीकांत बेर्डे

मराठी फिल्‍मों में लक्ष्‍मीकांत बेर्डे को कॉमेडी के सुपरस्‍टार का दर्जा हासिल था. उन्‍होंने सलमान खान की फिल्‍म “मैंने प्‍यार किया” से बॉलीवुड में डेब्‍यु किया और उसके बाद बॉलीवुड में भी एक जाना पहचाना चेहरा बन गए. बहुत कम उम्र में किडनी फेल हो जाने के कारण बेर्डे की मृत्‍यु हो गयी.

जगदीप

अपने पांच दशक लंबे करियर में जगदीप ने अनगिनत फिल्‍में की हैं. उनके फिल्‍म “शोले” के किरदार सूरमा भोपाली पर एक फिल्‍म भी बनी है. इन्‍होंने कई फिल्‍मों में बेहतीन चरित्र भूमिकायें निभाई हैं. जगदीप के बेटे जावेद जाफरी एक हास्‍य कलाकार और बेहतरीन डांसर हैं.

पेंटल

फिल्‍म एंड टीवी इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया से ग्रेजुएट पेंटल पहले एक्‍टिंग टीचर बनना चाहते थे. उन्‍होंने शुरूआत हास्‍य भूमिकाओं से की पर बाद में कई सफल गंभीर भूमिकायें भी निभाईं.

राजपाल यादव

अपने फेमस डायलॉग मंदिर का घंटा फेम राजपाल यादव को कॉमेडियन की इस समर्थ फैमिली का आखिरी सदस्‍य कहा जा सकता है. राजपाल यादव के बाद फिल्‍मों में पूरी तरह से कॉमेडी रोल के लिए किसी कलाकार को शामिल होते कम ही देखा गया है.

जानिए टाटा टिगोर में क्या है खास

8 मिलीमीटर… इतनी सी लंबाई वाली कोई चीज शायद ही हमारे नजरों में पड़ती है. पर हिन्दुस्ताने की कार बनाने वाली कंपनियों के लिए यह छोटा सा नाप बहुत मायने रखता है. खासतौर से उन गाड़ियों के लिए जो ‘स्वेदेशी’ हैं. यहां स्वदेशी शब्द को किसी और मत से न जोड़ा जाए. यहां हम बात कर रहे हैं देश में बनने वाली ‘sub-four-metre-cars’ की. टाटा टिगोर को बनाने वालों ने एक बात का खास ख्याल रखा है. इस 8 मिलीमिटर के डिफ्रेंस के कारण, कार बनाने वालों को भी फायदा होगा और कार खरीदने वालों को भी.

इसी श्रृंखला में सबसे नई कार है टाटा टिगोर, जो आज लॉन्च हो गई है.

आज हम आपको बता रहे हैं टाटा टिगोर के बारे में कुछ खासे बातें. तो अगर आप नई गाड़ी खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो टाटा टिगोर को भी ध्यान में रखें

1. डिजाइन

टाटा टिगोर टियागो से मिलती-जुलती है. साइड प्रोफाइल से लेकर सी-पिलर तक टियागो जैसा ही है. कार की फ्रंट प्रोफाइल व्रैपअराउंड टेल-लैम्प्स, हनीकॉम्ब रेडियेटर ग्रिल, बड़े एयर इनटेक्स और स्क्लप्टेड बम्पर स्पोर्टी लुक देता है. कार का इंटीरियर टियागो से बेहतर है और इसमें इन्फोटेंमेंट सिस्टम जोड़ा गया है.

2. ऑक्युपेन्ट्स के आराम का खास ख्याल

टिगोर के ऑक्युपेन्ट्स के आराम का खास ख्याल रखते हुए इसमें अच्छी स्पीड स्टेबीलिटी है. राइड के दौरान अगर आपने स्पीड को कन्ट्रोल में रखा तो आपको झटके भी कम खाने पड़ेंगे. टाटा के बयान के अनुसार ‘इसके सस्पेंशन को ऐसे बनाया गया है कि यह सेडान जैसा एक्सपीरियंस देगी.’

3. इंजन

टाटा टिगोर में दो ऑप्शन दिए गए हैं, पहला 1047cc/69-bhp डिजल इंजन और 1199cc/83.8-bhp पेट्रोल इंजन. इंजन के ऑप्शन से पता चलता है कि कार को शहरी इलाकों के अनुकूल और फ्यूल-एफीशियेंट बनाया गया है.

4. डायमेंशन

टिगोर में 2490 ma का व्हीलबेस है. यह मॉडल 3992mm लंबी,1677 mm चौड़ी औक 1537 mm ऊंची है. फ्यूल-टैंक कैपासिटी 35 लिटर की है. टिगोर के पेट्रोल वैरियेंट का वजन 1062 kg है और डिजल वैरियेंट का वजन1130 kg है.

5. अन्य फीचर्स

टिगोर में ड्यूल-टोन इंटीरियर अपहोल्स्ट्री, 8 स्पीकर के साथ हरमन टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम भी दिया गया है. इन सबके अलावा निर्माताओं ने खरीदारों का खास ध्यान रखते हुए इसमें मल्टीइंफो सिस्टम, ऑटोमेटिक क्लाइमेट कंट्रोल सिस्टम, ड्यूल एयरबैग, जीपीएस आदि लगाया है.

6. बुक करें टिगोर

टाटा टिगोर दिल्ली के शो रूम पर बुक की जा सकती है. टाटा टिगोर का पेट्रोल वैरियेंट 4.7 लाख से और डिजल वैरियेंट 5.6 लाख से शुरु हो रहा है. अब जल्द से जल्द टिगोर वैरियंट को घर ले जा सकते हैं.

 

टाटा टिगोर के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़ें हमारी वेबसाइट ‘Motoring World’

http://motoring.world/car-reviews/tata-tigor-first-drive-review-specs-expected-prices-launch-kite-sedan/

मेरे पति सेक्स के बाद ब्लू फिल्म देख कर हस्तमैथुन करते हैं. वे दूसरी औरतों की तरफ भी आकर्षित होते हैं. मैं क्या करूं.

सवाल

मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूं, पर उन की गंदी आदत से परेशान हूं. वे मेरे साथ हमबिस्तरी के बाद ब्लू फिल्म देख कर हस्तमैथुन करते हैं. वे दूसरी औरतों की तरफ भी आकर्षित होते हैं. मैं क्या करूं?

जवाब

आप की परेशानी बड़ी नहीं है. जब तक आप को ज्यादा दिक्कत न हो, तब तक चुप रहिए. वैसे आप अपने पति को हस्तमैथुन करने के नुकसान के बारे में बता सकती हैं. हस्तमैथुन पर हुए कई सर्वे में यह बात सामने आ चुकी है कि अक्सर किशोरावस्था या युवावस्‍था में हस्तमैथुन के शुरुआत की सबसे ज्‍यादा संभावना होती है और जब व्यक्ति को एक बार हस्तमैथुन कि लत लग जाती है तो वह हस्तमैथुन करने की बार-बार कोशिश करता है.

कई बार व्यक्ति जल्दीबाजी के चक्कर में बहुत तेजी से हस्तमैथुन करने लगता है. जिस कारण वीर्य से पहले निकलने वाला तरल पानी उसके लिंग की मांसपेशियों में चला जाता है. इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति के लिंग में सूजन आने लगती है और तब तक रहती है जब तक वह वापस खून में न मिल जाये.

कई लोग हस्तमैथुन करते समय अपने लिंग को बहुत ही मजबूती से जकड़ लेते है और उसे दबाने या मोड़ने लगते है. ऐसा करने से आपको गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है. ऐसा करने से आपके लिंग की मांसपेशियां टूट सकती हैं और पायरोनी नाम की बीमारी भी हो सकती है. इस बीमारी से व्यक्ति का लिंग टेढ़ा हो जाता है.

किसी व्यक्ति द्वारा रोजाना हस्तमैथुन करने से उसके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम हो जाती है. इसका सबसे बड़ा नुकसान यह होता है जब व्यक्ति की शादी हो जाती है तब उसके बाद उसके वीर्य में शुक्राणुओं की कमी के कारण वह पिता बनने से भी वंचित रह सकता है.

व्यक्ति हस्‍तमैथुन करते समय हमेशा ही कल्पनाओ में खोया रहता है. इससे उस व्यक्ति कि सेक्स के प्रति चाह में निरंतर बढ़ोतरी होती रहती है. अपनी सेक्स की भूख को शांत करने के लिए वह अवैध संपर्कों की ओर चले जाता है. इससे जाने अनजाने वह कई ऐसी भूल कर देता है जो उसे ज़िन्दगी भर पछतावा देते रहता है. कई बार तो व्यक्ति इससे यौन अपराधो में भी शामिल हो जाता है.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना चाहता है भारत

भारत-पाकिस्तान के तल्ख रिश्तों के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड खेल का रिश्ता बनाए रखना चाहता है. इन दोनों देशों के बीच क्रिकेट मैच के लिए बीसीसीआई एक बार फिर सरकार के पास पहुंचा है. बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर अनुमति मांगी है.

बीसीसीआई ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर दुबई में भारत-क्रिकेट मैच खेलने की मांग की है. बीसीसीआई चाहता है कि दोनों देशों के बीच दुबई में तीन टेस्ट, पांच वनडे और 2 टी-20 मैचों की सीरीज खेली जाए. सीसीआई ने सरकार की अनुमति मांगने के लिए गृह मंत्रालय से संपर्क किया है, ताकि भविष्य में फ्यूचर टूर एंड प्रोग्राम समझौते के तहत अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान के साथ खेलने की अनुमति ली जा सके. अगर मंत्रालय इसकी अनुमति दे देता है तो इस साल के अंत तक दुबई में दोनों देशों के बीच सीरीज होने की संभावना है.

2016 में शशांक मनोहर की अध्यक्षता वाला बोर्ड एक छोटी सी सीरीज के लिए पाकिस्तान की मेजबानी करना चाहता था, लेकिन दोनों देशों में तनाव और भारत में लगातार हुए आतंकवादी हमलों के चलते ऐसा नहीं हो पाया. भारतीय जमीन पर हुए आतंकवादी हमलों के कारण सरकार ने इसकी मंजूरी नहीं दी थी.

2014 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सीरीज खेली जानी थी, लेकिन आतंकवाद के मसले पर दोनों देशों के बीच आपसी रिश्ते बिगड़ते चले गए और क्रिकेट के मैदान पर दोनों देशों की दूरियां बढ़ती चली गई. उस दौरान बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष शहरयार खान की बातचीत से कोई नतीजा नहीं निकल पाया था.

2012 में पाकिस्तानी टीम भारत दौरे पर आई थी. उस दौरान पाकिस्तान के साथ 3 वनडे और 2 टी-20 मैच खेले गए थे. भारत को वनडे सीरीज में हार मिली थी. उस सीरीज को टीम इंडिया ने 2-1 से गंवाई थी, जबकि टी-20 सीरीज 1-1 से ड्रा रहा था. हालांकि, इसके बाद भारतीय टीम ने पाकिस्तान को विश्वकप, टी-20 विश्वकप और एशिया कप के दौरान धूल चटाई.

भारतीय बोर्ड सितंबर या नवंबर में पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने की इजाजत चाहता है. बीसीसीआई ने चैंपियंस लीग टी-20 के लिए सितंबर को रिजर्व किया था, लेकिन इस टूर्नामेंट को बंद कर दिया गया है.

होम लोन लेने से पहले

होम लोन की दरें 9 फीसद से नीचे आ गई हैं. प्रौपर्टी की कीमतें भी 30 फीसद घटी हैं. जो लोग खुद का आशियाना लेने का सपना देख रहे हैं, उन के लिए यह सही वक्त है. वैसे तो हमारे देश में कर्ज लेना अच्छा नहीं माना जाता है पर अगर आप के पोर्टफोलियो में होम लोन शामिल है, तो यह अच्छी निशानी है. दरअसल, होम लोन बाकी कर्ज से बिलकुल अलग है. कारण यह है कि होम लोन लेने का मतलब है कि आप के पास एक संपत्ति बन रही है, जिस की कीमत हमेशा बढ़ेगी.

फाइनैंशियल प्लानर अविनाश दुबे के मुताबिक कार लोन या पर्सनल लोन आप की देनदारी को बढ़ाते हैं, जबकि होम लोन लेने से आप एक संपत्ति के मालिक बनते हैं. कुछ समय तक जरूर इस की ईएमआई भरनी  पड़ती है पर आप को किराया देने से भी तो मुक्ति मिल जाती है. होम लोन लेते वक्त यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो यह यकीनन आप के लिए फायदे का सौदा साबित होगा:

एकसाथ करें आवेदन

अगर आप और आप के कई मित्र एकसाथ होम लोन लें, तो यह लोन आप के लिए सस्ता पड़ेगा. कहने का मतलब है कि जब मिल कर लोन लिया जाता है, तो बैंक या वित्तीय संस्थान को इस की प्रोसैसिंग और कानूनी कार्रवाई पर कम खर्च करना पड़ता है, जिस का फायदा निश्चित तौर पर बैंक ग्राहकों को दिया जाता है. मसलन, इस के चलते बैंक आप की प्रोसैसिंग फीस और अन्य शुल्क माफ कर सकता है.

महीने के अंत में आवेदन करना बेहतर

कर्ज देने के लिए बैंकों का महीने के आधार पर टारगेट होता है. अगर आप महीने की 24 तारीख के बाद लोन के लिए आवेदन कर रहे हैं, तो आप को डिस्काउंट मिलने की संभावना ज्यादा होती है. कहने का मतलब यह है कि बैंकों की कोशिश होती है कि वे अपने हर महीने का लोन टारगेट पूरा करें. ऐसे में यह संभावना ज्यादा होती है कि इस अवधि में बैंक आप को किफायती दर पर होम लोन उपलब्ध कराएं.

अच्छी क्रैडिट रेटिंग है जरूरी

बैंक अपने पुराने और विश्वसनीय ग्राहकों को किफायती दर पर होम लोन उपलब्ध कराने की कोशिश करते हैं. अगर आप भी बैंक के पुराने ग्राहकों में से एक हैं और आप का रीपेमैंट रिकौर्ड अच्छा रहा है, तो अन्य ग्राहकों के मुकाबले आप को कम दर पर लोन मिलने की संभावना ज्यादा है. इसलिए जरूरी है कि आप अपने क्रैडिट कार्ड बिल और बाकी की देनदारियों का भुगतान समय पर करें. इस से आप की क्रैडिट रेटिंग दुरुस्त रहेगी और सस्ता होम लोन मिल सकेगा.

इन बातों का रखें खयाल

– नए या फिर जिन कर्जदाताओं के बारे में ज्यादा जानकारी न हो उन से लोन लेने से बचें.

– लोन लेते समय कम से कम 4-5 अलग-अलग कर्जदाताओं की ब्याज दर, लागत, आवेदन प्रक्रिया में सरलता और भुगतान की सरलता तथा पुराने कर्जदारों के अनुभव के बारे में जरूरी  जानकारी ले लें.

– ब्याज दरों और अन्य शुल्क की तुलना के लिए आप औनलाइन पोर्टल का भी सहारा ले सकते हैं.

– कर्जदाताओं के रेट रीसैट, फौर क्लोजर की शर्तों का अध्ययन बेहद जरूरी है.

– ऐसे कर्जदाताओं का चुनाव करें जिन के प्रीपेमैंट के नियम और शर्तें आसान हों.

पात्रता का प्रावधान

किसी व्यक्ति को कितना लोन मिलेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उस की ग्रौस सैलरी कितनी है. उदाहरण के तौर पर वेतनभोगी वर्ग को सालाना आय का 4 गुना होम लोन दिया जा सकता है. इस के अलावा चार्टर्ड अकाउंटैंट, डाक्टर जैसे पेशेवरों को उन की सालाना आय का 7 गुना तक लोन दिया जा सकता है.

हालांकि लोन देते वक्त बैंक इस बात का भी खयाल रखते हैं कि व्यक्ति की टेक होम सैलरी या फिर नैट सैलरी ग्रौस सैलरी के 40 फीसदी से कम न हो. इस के अलावा होम लोन के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति की क्रैडिट रिपोर्ट पर भी गौर किया जाता है. अगर कर्ज चुकाने का पुराना रिकौर्ड दागदार है, तो संभव है ऐसे व्यक्ति को लोन मिले ही नहीं या मिले भी तो अपेक्षाकृत अधिक ब्याज दर पर.

बढ़ा सकते हैं होम लोन की पात्रता

आपके लोन की अवधि जितनी लंबी होगी उतना ज्यादा आपको लोन मिल सकेगा. प्रति लाख रुपए पर मासिक किश्त लंबी अवधि के लोन के लिए काफी कम होती है. ऐसी स्थिति में बैंक उसी आय पर ज्यादा लोन दे देते हैं.

अपनी लोन की पात्रता बढ़ाने का दूसरा तरीका यह है कि जिन रिश्तेदारों को बैंक अनुमति देते हैं आप उन की और अपनी आय मिला कर जौइंट लोन ले सकते हैं. इस में आप के जीवनसाथी, बच्चे, माता-पिता या भाई-बहन शामिल हो सकते हैं. एक शादीशुदा महिला भी अपने सास-ससुर या अपने पति की आय मिला कर जौइंट लोन ले सकती है.

हालांकि वह अपने मां-बाप के साथ जौइंट लोन नहीं ले सकती है. अगर आप के पास डाउन पेमैंट देने के लिए पर्याप्त राशि है, तो आप को बड़ा लोन लेने की जरूरत नहीं है. इस से आप पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा नहीं. लोन देते वक्त बैंक आप से किसी पुराने रीपेमैंट की जानकारी मांग सकता है. इस के लिए आप किसी पुराने लोन (कार लोन या फिर किसी अन्य लोन) की रीपेमैंट का प्रूफ दे सकते हैं.

वरिष्ठ नागरिकों को भी है फायदा

आमतौर पर वरिष्ठ नागरिकों को ज्यादा लंबी अवधि वाला लोन नहीं दिया जाता. उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति 60 साल का है, तो उसे ज्यादा से ज्यादा 5 साल तक की अवधि वाला होम लोन ही मिल सकता है. यह समस्या भी जौइंट होम लोन लेने से दूर हो जाती है. अगर कोई वरिष्ठ नागरिक किसी कम उम्र वाले के साथ मिल कर लोन के लिए आवेदन करता है तो उसे लंबी अवधि का लोन भी मिल सकता है.

लोन के लिए आवेदन करने से पहले

क्रैडिट इन्फौर्मेशन ब्यूरो औफ इंडिया लिमिटेड यानी सिबिल से आप अपनी क्रैडिट रिपोर्ट मंगवा कर यह जान सकते हैं कि आप का रिकौर्ड और स्कोर क्या है. साल में एक बार 450 खर्च कर सिबिल से क्रैडिट स्कोर पाने के बाद आप यह जान सकते हैं कि आप का कर्जदाता आप के आवेदन को किस प्रकार देखेगा.

अगर क्रैडिट रिपोर्ट में कोई विसंगति पाई जाती है जैसे आप ने क्रैडिट कार्ड के तमाम बिलों का भुगतान किया हुआ है, लेकिन रिपोर्ट में यह दर्शाया गया है कि आप ने बिलों का भुगतान नहीं किया है और इस कारण आप की क्रैडिट रिपोर्ट प्रभावित हुई है, तो आप भुगतान के सुबूत के साथ संबंधित बैंक से बातचीत कर सकते हैं. ऐसे सुबूत के साथ आप सीधे सिबिल से संपर्क कर अपनी सूचना सही करवा सकते हैं.        

दर्शन कुमार ने क्यों छोड़ी फिल्म ‘‘भूमि’’ ?

इन दिनों ‘‘मैरी कॉम’’ फेम निर्देशक उमंग कुमार फिल्म ‘‘भूमि’’ का निर्देशन कर रहे हैं, जिसमें संजय दत्त, अदिति राव हैदरी और सिद्धांत गुप्ता की मुख्य भूमिकाओं में हैं. ये बात बहुत कम लोगों को पता होगी कि उमंग कुमार अपनी इस फिल्म में पहले सिद्धांत गुप्ता की जगह पर दर्शन कुमार को लेना चाहते थे. दर्शन कुमार भी इस फिल्म को करने के लिए उत्सुक थे, क्योंकि वे उमंग कुमार के साथ इससे पहले ‘‘मैरी कॉम’’ जैसी सफल फिल्म कर चुके थे. मगर चाह कर भी दर्शन कुमार फिल्म ‘‘भूमि’’ नहीं कर पाए.

आखिर दर्शन कुमार ने फिल्म ‘‘भूमि’’ करने से क्यों इंकार किया, इस बारे में जब हमने दर्शन कुमार से बात की, तो अभिनेता दर्शन कुमार ने ‘‘सरिता’’ पत्रिका से खास बातचीत में कहा कि -‘‘आपने अच्छा याद दिलाया, मैं तो उस दिन का इंतजार कर रहा हूं, जब मुझे किसी फिल्म में नृत्य करने का अवसर मिलेगा. मैं कई वर्षों से श्यामक डॉवर से नृत्य का प्रशिक्षण ले रहा हूं. मुझे उमंग कुमार ने इस फिल्म ‘भूमि’ में मुख्य किरदार निभाने का ऑफर दिया था. इसमें मुझे नृत्य करने का भी मौका मिल रहा था. इस फिल्म में तीन रोमांटिक गाने हैं और साथ ही एक डांस नंबर भी है, जिसे खुद श्यामक सर ही कर रहे हैं. इसमें मुझे भूमि के प्रेमी के किरदार का ऑफर मिला था, मगर अपनी दूसरी व्यस्तताओं के चलते और फिल्म ‘रीलोड’ के लुक की वजह से, मैं यह फिल्म नहीं कर पाया और मेरा नृत्य कर पाने का अवसर चला गया.’’

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