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ये तरीके अपनाएं, डैंड्रफ से छुटकारा पाएं

रसायनों से युक्त हेयर केयर उत्पादों का प्रयोग बालों के लिए नुकसानदायक होता है. ऐसी स्थिति में उन हेयर केयर उत्पादों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, जिन में रसायनों का प्रयोग किया जाता है. ऐसे में बालों के प्राकृतिक उपचार के लिए अरोमाथेरैपी सब से बेहतर विकल्प है. बालों से जुड़ी सब से प्रमुख समस्या डैंड्रफ यानी रूसी की है. अत: सब से पहले यह जानना जरूरी है कि रूसी होती क्या है? कंधों पर जो व्हाइट स्कैल्प दिखते हैं वे दरअसल शैंपू से सही तरीके से बालों को न धोने पर होते हैं. इस का मतलब है कि असलियत में रूसी बैक्टीरियल इन्फैक्शन या जीवाणु संक्रमण का एक प्रकार है. इस के बढ़ने में थोड़ा समय लगता है और यह गरमी के मौसम में भी मौजूद रहती है. इस संक्रमण के उपचार में कम से कम 6 महीनों से 1 साल तक का वक्त लगता है. बाल धोने के लिए गरम पानी का प्रयोग करने से व्हाइट स्कैल्प की मात्रा बढ़ जाती है.

ऐसा माना जाता है कि शैंपू बालों के लिए अच्छा होता है जोकि सच नहीं है. शैंपू के बजाय साबुन ज्यादा अच्छा होता है, क्योंकि शैंपू की तुलना में यह बालों से जल्दी निकल जाता है. शैंपू विभिन्न रसायनों का संयोजन है. यदि आप शैंपू का इस्तेमाल करना चाहती हैं, तो ऐसे शैंपू का चुनाव करें, जो सल्फेट रहित डिटर्जैंट बेस हो और पैराबेन प्रिजर्वेटिव्स से भी मुक्त हो.

ध्यान दें

यदि आप शैंपू को अच्छी तरह नहीं धोती हैं, तो आप के बालों की चमक और खूबसूरती खत्म हो जाएगी. बालों को सही आकार में बनाए रखने के लिए तेल लगाना भी बहुत जरूरी है. इस के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल करना अच्छा विकल्प है. लेकिन इस का प्रयोग गरमी के मौसम में ज्यादा अच्छा रहता है.

रूसी त्वचा के अंदर होती है, इसलिए बालों की देखभाल नियमित रूप से करें. अरोमाथेरैपी का प्रयोग करने से त्वचा के रोमछिद्रों पर प्रभाव पड़ता है. बालों की अच्छी सेहत के लिए इन टिप्स पर गौर फरमाना न भूलें:

– बालों पर तेल लगाना उन्हें मजबूती प्रदान करने और उन की क्वालिटी सुधारने का एक बेहतर तरीका है. लेकिन आप को सही तकनीक और सही समय की जानकारी होनी चाहिए. कई महिलाएं सुबह के समय बालों में तेल लगाना पसंद करती हैं. लेकिन यह सही नहीं है. सुबह के समय कभी भी तेल न लगाएं. यदि आप अपने बालों की क्वालिटी बेहतर बनाना चाहती हैं, बालों को लंबा करना चाहती हैं, उन्हें समय से पहले सफेद होने से रोकना और दोमुंहे बालों से छुटकारा पाना चाहती हैं, तो रात के समय बालों पर तेल लगाना उचित होता है. इस के लिए सुबह बालों को कुनकुने पानी से धो लें.

– तेल बालों की जड़ों में लगाना चाहिए, बालों पर नहीं.

– नारियल का तेल बालों से जुड़ी कई समस्याओं का समाधान है. नारियल तेल का प्रयोग सिर पर तौलिया लपेट कर भाप के रूप में करना चाहिए. इस के लिए 15-20 मिनट का समय उपयुक्त होता है.

अरोमाथैरेपी का फौर्मूला

– 1 छोटा चम्मच बेस औयल में 2 बूंदें विटामिन ई औयल,1 बूंद टी ट्री औयल, 1 बूंद पचौली औयल और 1 बूंद तुलसी का तेल मिला लें. इस का प्रयोग आप के बालों की बनावट को बेहतर बनाने में मदद करेगा और साथ ही उन्हें मजबूत भी बनाएगा.

– आप चाहें तो बालों को भाप भी दे सकती हैं, लेकिन अगले दिन उन्हें धोना न भूलें.

– बालों की देखभाल में कंडीशनर की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यह तौलिए से होने वाली क्षति से बालों को बचाता है, इसलिए जरूरत हो तो कंडीशनर का प्रयोग करें.

– ऐसे कंडीशनर का प्रयोग करें, जो अच्छी तरह से बालों से धुल कर निकल जाए. साथ ही जिस में प्राकृतिक सामग्री का प्रयोग किया गया हो.

बालों की देखभाल के लिए टिप्स

– 1 चम्मच दही, 1 चम्मच आंवला, 1 चम्मच शिकाकाई, 1/2 चम्मच तुलसी, 1/2 चम्मच पुदीना और 1/2 चम्मच मेथी को अच्छी तरह मिला कर बालों में लगाएं.

– अंडे के सफेद भाग को शैंपू के साथ मिला कर बालों में लगा सकती हैं.

– सही अनुपात में भोजन करने से पर्याप्त विटामिन, खनिज और पोषक तत्त्व मिलते हैं, जिन से शरीर और दिमाग मजबूत व तंदुरुस्त होता है. सही खाने से विभिन्न प्रकार के रोगों से बचने और सेहत को होने वाले नुकसान से बचाव होता है. साथ ही बालों की बनावट को बनाए रखने में भी मदद मिलती है. बालोंके लिए संतुलित भोजन जरूरी है.

– अंडे प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं. इन में कई प्रकार के आवश्यक विटामिन व खनिज होते हैं. साथ ही थोड़ी मात्रा में कैलोरी भी होती है. स्वस्थ बालों के लिए अंडे का सफेद भाग खाएं. यह रूसी दूर करने और रुखे बालों से छुटकारा पाने में मदद करता है. इस में दोमुंहे बालों से लड़ने की भी क्षमता होती है.

– सप्ताह में 2 बार सलाद के साथ अंकुरित अनाज खाएं. सलाद में नमक और कैचअप नहीं होना चाहिए. सलाद लेने के डेढ़ घंटे बाद थोड़ी मात्रा में नीबू का रस और पुदीने की चटनी का सेवन करना काफी फायदेमंद होगा.                    

तलाक एक सामाजिक दुर्घटना है

विवाह बाद तलाक होने पर जिंदगी समाप्त नहीं होती. तलाक लेना घुटन, गालीगलौच, शक, आर्थिक संकट से भरी जिंदगी से ज्यादा अच्छा है, चाहे बच्चे हों या न हों. तलाक एक अंतिम उपाय है पर यह जीवन का अंत नहीं है. तलाकशुदा पुरुष या स्त्री को न तो संदेह की दृष्टि से देखा जाना चाहिए और न ही दया का पात्र बनाना चाहिए. तलाक एक सामाजिक, पारिवारिक दुर्घटना है, एक गंभीर बीमारी है, एक सौदे में घाटा होना है और जीवन की मांग है कि उस के बाद हाथ झाड़ो और फिर नए सिरे से जिंदगी को खोजो.

करिश्मा कपूर ने अभिनेत्री के रूप में खूब नाम कमाया, पैसा भी कमाया होगा और इसलिए जब उन का 2003 में संजय कपूर से विवाह हुआ तो संजय से लोगों को ईर्ष्या हुई होगी कि ऐसी ट्रौफीनुमा पत्नी मिली. पर अफसोस दोनों का विवाह 2 बच्चे होने के बावजूद चल न सका और 6 साल तक अदालती मुकदमों के बाद दोनों का 2016 में तलाक हो गया. अब संजय कपूर फिर विवाह कर रहे हैं. मजेदार बात यह है कि यह संजय की तीसरी शादी होगी और होने वाली पत्नी प्रिया की दूसरी. प्रिया का पहला विवाह अमेरिका के एक अमीर भारतीय होटल मालिक से हुआ था. यानी विवाह और तलाक जीवन को समाप्त नहीं करते. ये जीवन जीने के तरीके हैं और इन को आसानी से ढालना सीखना चाहिए. आज से 75 साल पहले जब तलाक कम होते थे तब भी लड़कियां पति का घर छोड़ कर मायके आ बैठती थीं, चाहे उन्हें तलाक न मिला हो.

1956 के हिंदू विवाह कानून के पहले पति को दूसरा विवाह करने की कानूनी व सामाजिक इजाजत थी पर औरतों को सामाजिक इजाजत बिलकुल न थी. मुसलिम औरतों को तलाक के बाद फिर विवाह करने की सामाजिक आजादी भी थी. तलाक के बाद विवाह कर लेने का अर्थ है कि सिर्फ दोस्ती से काम नहीं चलता और संबंध को कोई कानूनी आवरण तो चाहिए ही ताकि दोनों एकदूसरे के प्रति जिम्मेदार हो सकें. कानूनों की भरमार ऐसी है कि स्त्री व पुरुष यदि चाहें तो भी लंबे समय तक साथ नहीं रह सकते. इसलिए तलाक के बाद विवाह हो तो अच्छा ही है और उसे सामाजिक जबरदस्ती नहीं, व्यक्तिगत पसंद और फैसला समझा जाना चाहिए.

75 रुपये महीने में मिलेगा अनलिमिटेड 4G डाटा

डाटा युद्ध का हाल यही रहा तो एक दिन वो आएगा जब मोबाइल कंपनियां फ्री डाटा भी देंगी और पैसे भी देंगी. ये भले ही मजाक हो, लेकिन जियो के फ्री प्लान के बाद ये मजाक कुछ कुछ सच सा होने लगा है. कंपनियां एक के बाद एक प्लान लेकर आ रही हैं.

अब नॉर्वे की टेलीकॉम कंपनी टेलीनॉर इंडिया ने अनलिमिटेड 4G पैक लॉन्च किया है. हालांकि कंपनी अभी देश के कुछ सर्कल में ही 4G सर्विस देती है. टेलीनॉर ने FR73 प्लान लॉन्च किया है जो सिर्फ नए यूजर्स के लिए होगा.

टेलीकॉम टॉक की रिपोर्ट के मुताबिक इस प्लान में 25 पैसे प्रति मिनट की दर से एसटीडी वॉयस कॉल है. इसकी वैलिडिटी 90 दिन की होगी इसके अलावा 25 रुपये का फ्री टॉकटाइम भी मिलेगा. इस प्लान में कस्टमर्स को 28 दिन के लिए अनलिमिटेड 4G डाटा दिया जाएगा.

इसके अलावा यूजर्स दूसरे महीने में 47 रुपये से रिचार्ज करके अगले एक महीने तक अनलिमिटेड इंटरनेट चला सकते हैं. हालांकि 73 रुपये के रिचार्ज कराने के 120 दिन तक ही दूसरा रिचार्ज कराना होगा. 120 दिन के बाद रिचार्ज कराने से सिर्फ 400MB ही 4G डाटा दिया जाएगा.

फिलहाल यह ऑफर सिर्फ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सर्कल के लिए ही है. टेलीनॉर के आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सर्कल बिजनेस हेड श्रीनाथ कोटियन ने कहा है कि आज की दुनिया में कस्टमर्स अपने मोबाइल में इंटरनेट ब्राउज करना चाहते हैं. FR 73 एक कंप्लीट वैल्यू पैक है जिसमें अनलिमिटेड इंटरनेट, बेस्ट कॉलिंग रेट्स और फ्री टॉक टाइम भी दिया जा रहा है.

कहीं आप भी तो व्हॉट्सऐप ग्रुप के ऐडमिन नहीं!

व्हाट्सऐप पर आपने एक ग्रुप बनाया है लेकिन इस ग्रुप के मैसेज से बेखबर हैं तो सावधान हो जाईए. हो सकता है की जिन मैसेज को आप नजरअंदाज कर रहे हैं उनके कारण आप गिरफ्तार हो सकते हैं.

दरअसल आपत्तिजनक वीडियो, पोस्ट और फर्जी खबरें ग्रुप्स पर लगातार शेयर की जा रही हैं और इस वजह से सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सकता है. वाराणसी डिस्ट्रिक मजीस्ट्रेट योगेश्वर राम मिश्रा और सीनियर एसपी नितिन तिवारी ने इस मामले में एक ज्वाइंट ऑर्डर जारी किया है.

इस ऑर्डर के मुताबिक किसी फेसबुक और व्हाट्सऐप ग्रुप ऐडमिनिस्ट्रेटर पर एफआइआर दर्ज की जा सकती है अगर ग्रुप में भ्रामक और फर्जी पोस्ट किए जा रहे हैं. एडमिन को ऐसे पोस्ट के खिलाफ एक्शन लेना चाहिए और भ्रामक खबरों को अपने ग्रुप से हटाना चाहिए. इतना ही नहीं जो मेंबर ग्रुप में इसे खबरें पोस्ट कर रहा है तो उसे हटाना चाहिए.

इस ऑर्डर में कहा गया है, ‘अगर ग्रुप ऐडमिन लापरवाही करता है तो ऐसी स्थिति में ऐडमिन को दोषी माना जाएगा और उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. भ्रामक पोस्ट को नजदीकी पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट किया जाना चाहिए.’

गौरतलब है कि भारत में व्हाट्सऐप के 200 मिलियन यूजर्स हैं. अब इस मामले के बाद ग्रुप एडमिन्स पर निश्चित तौर पर जिम्मेदारी बढ़ेगी और उन्हें ज्यादातर उन लोगों को ग्रुप में शामिल करना होगा जिन्हें वो जानते हैं.

आंखों पर पट्टी बांध छक्के मारता था यह खिलाड़ी

क्रिकेट और करिश्मा का बहुत पुराना और गहरा रिश्ता है. क्रिकेट मैदान पर कई बार अजीबोगरीब कारनामा देखने को मिला है. क्रिकेट में करिश्मे की उम्मीद सबको होती है और क्रिकेटरों ने बहुत से कारनाम कर अपने फैंस को यकीन दिलाया है कि करिश्मे क्रिकेट का अटूट कनेक्शन है. एक ओवर में 6 छक्के, वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक, 31 गेंदों में शतक, 1 गेंद पर 20 रन जैसे उदाहरण हमारे सामने मौजूद हैं.

लेकिन क्या आप उम्मीद कर सकते हैं कि कोई बल्लेबाज आंखों पर काली पट्टी बांधकर बल्लेबाजी करते हुए छक्कों की बारिश कर सकता है. शायद नहीं, कोई भी क्रिकेट फैन इस बात पर यकीन नहीं करेगा. लेकिन इस वीडियो को देखकर आप चौंक जाएंगे. क्योंकि ये कारनामा किया जा चुका है और इस कारनामे को अंजाम दिया है इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज केविन पीटरसन ने. जी हां बिल्कुल ठीक पढ़ा आपने केविन पीटरसन ने आंखों पर पट्टी बांधकर ना सिर्फ बल्लेबाजी की बल्कि छक्कों की बौछार भी की.

केविन पीटरसन ने ब्लाइंडफोल्ड चैलेंज स्वीकार किया. इस चैलेंज के मुताबिक बल्लेबाज को आंखों पर काली पट्टी बांधकर बल्लेबाजी करना होता है. केविन पीटरसन ने बंद आंखों से भी उसी अंदाज में बल्लेबाजी की जैसे वो खुली आंखों से करते हैं. केविन पीटरसन ने आंखों पर काली पट्टी बांधकर कुल पांच गेंद खेली जिसमें उन्होंने 4 गेंदों पर छक्के लगाए.

इस वीडियो में देखें पीटरसन ने कैसे ब्लाइंड फोल्ड क्रिकेट खेला. 

बिना हाथों के क्रिकेट खेलता है यह भारतीय कप्तान

सच ही कहते हैं कि कोशिश करने वालों की कभी हार ही नहीं होती. फिर वह काम आपकी शारीरिक व मानसिक शक्ति के परे ही क्यों ना हों. कोशिश करने वाले को ही सफलता मिलती है. इस मुहावरे की जीती जागती मिसाल को सही मायनों में सही साबित किया है भारत के जम्मू कश्मीर के एक युवा विकलांग क्रिकेटर ने.

आमिर हुसैन नाम के इस क्रिकेटर के हाथ नहीं हैं, लेकिन बिना बाजुओं के भी यह क्रिकेटर गजब की क्रिकेट खेलता है. इसकी हिम्मत लोगों के लिए बड़ी प्रेरणा बनकर उभरी है. 8 साल की उम्र में आमिर को अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े थे.

यह बात साल 1997 की है जब आमिर अपने पिता की आरामशीन में अपने भाई को दोपहर का खाना देने गए थे. इसी दौरान उनके साथ एक दुर्घटना घट गई और उन्हें अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े. इस दौरान आमिर को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा.

इस दुर्घटना की वजह से उनके क्रिकेटर बनने के सपने को गहरा धक्का लगा और साथ ही उनका भविष्य भी अधर में लटक गया. लेकिन आमिर ने हिम्मत नहीं हारी और एक बार फिर से क्रिकेट की ओर कदम बढ़ा दिए.

आमिर अब 26 साल के हैं और वह जम्मू कश्मीर राज्य की पैरा क्रिकेट टीम के कप्तान हैं. आमिर बल्लेबाजी करने के दौरान बैट अपने कंधों और गर्दन के बीच रखते हैं और अपने पैर से गेंदबाजी करते हैं. साथ ही अपने पैरों से ही थ्रो फेंकते हैं. वास्तव में यह देखकर इस क्रिकेटर के जज्बे को सलाम किया जाना चाहिए.

इस दुर्घटना के बाद आमिर के घरवालों ने उनका बखुबी साथ निभाया और साथ ही उन्हें कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया. उनके परिवार ने हमेशा उन्हें प्रोत्साहित किया.

इस खबर को पढ़ते हुए आप जरूर सोच रहे होंगे की बिना हाथ कोई कैसे क्रिकेट खेल सकता है. नीचे इस वीडियो में देखिए आमिर कैसे क्रिकेट खेलते हैं. 

सरकार ला रही है मेटल रिसाइक्लिंग पॉलिसी

मेटल रिसाइक्लिंग पॉलिसी आने के बाद लोग अपनी पुरानी कारों और फ्रिज जैसे उत्पादों को पहले से तय कीमत पर स्क्रैप डीलरों को बेच सकेंगे. नीति आयोग और इस्पात मंत्रालय संयुक्त रूप से यह नीति तैयार कर रहे हैं. धातु को रिसाइकिल करने की नीति पर नीति आयोग विभिन्न अंशधारकों से मिल चुका है. इसे अगले कुछ माह में अंतिम रूप दिया जाएगा.

नीति आयोग के सदस्य विजय कुमार सारस्वत ने कहा, मेटल स्क्रैप के रूप में हमारे पास भारी संपदा है. हम इस्पात मंत्रालय के साथ इस पर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा, हम कबाड़ या स्क्रैप का प्रबंधन संगठित तरीके से करना चाहते हैं. हम कई स्क्रैप केंद्र क्यों हीं स्थापित कर सकते. देश के प्रत्येक हिस्से में जहां लोग अपनी पुरानी कार, फ्रिज, वाशिंग मशीन बेचकर उचित मूल्य पा सकें.

इस नीति को बनाते समय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में 15 साल से अधिक पुरारे डीजल और पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध के फैसले तथा उच्चतम न्यायालय द्वारा देश में पहली अप्रैल से भारत-चरण तीन वाहनों की बिक्री पर प्रतिबंध के फैसले को ध्यान में रखना होगा. धातु स्क्रैप के प्रयोग को कई विकसित देशों मसलन जर्मनी, स्वीडन, फिनलैंड, तुर्की, आस्ट्रेलिया और अमेरिका में काफी प्रोत्साहन दिया जाता है.

उद्योग के अनुमान के अनुसार इन देशों में औसत रिसाइक्लिंग की दर 80 प्रतिशत है. भारत में रिसाइक्लिंग की दर 20 से 25 प्रतिशत है.

तो क्या इस आईएएस से बदला ले रहे हैं योगी

आईएएस अधिकारी डॉ. हरीओम से ऐसी क्या गलती हुई जिसका हर्जाना उन्हें आज 10 साल बाद भरना पड़ रहा है? आज से दस साल पहले आईएएस अधिकारी डॉ. हरीओम ने सांसद योगी आदित्यनाथ को भेजा था जेल.  बस…यही थी उनकी खता जिसे आज वह भुगत रहे हैं.

उत्तर प्रदेश में योगी की सरकार बनते ही प्रशासनिक अधिकारियों के ट्रांसफर शुरू हो गए. प्रदेश में 20 बड़े अधिकारियों के तबादले किए गए, जिनमें से 9 को वेटिंग लिस्ट में रखा गया है.  इसी वेटिंग लिस्ट में से एक अधिकारी डॉ. हरिओम भी हैं, जिन्होंने 10 साल पहले वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.

दरअसल, यह घटना 26 जनवरी 2007 की है, जब गोरखपुर में सांप्रदायिक तनाव जोरों पर था और तत्कालीन सांसद योगी जी ने गोरखपुर में धरना करने का ऐलान कर दिया था. पूरे शहर में कर्फ्यू लगे होने की वजह से डीएम डॉ. हरिओम ने उन्हें गोरखपुर में घुसने से पहले ही रोक दिया था. लेकिन सांसद योगी अपनी जिद पर अड़ गए. जिसके बाद प्रशासन ने आखिरकार उन्हें गिरफ्तार करने का निर्णय किया.

इस बारे में खुद तत्कालीन डीएम डॉ. हरिओम ने बताया था कि वह योगी आदित्यनाथ को गिरफ्तार नहीं करना चाहते थे. लेकिन सांसद योगी ने ही उन पर दवाब बनाया था कि उन्हें कारागार में रखा जाए. हालांकि हरिओम सांसद आदित्यनाथ को सर्किट हाउस में रखना चाहते थे जहां अमूनन सांसदों या विधायकों को गिरफ्तारी के बाद रखा जाता है. लेकिन सांसद आदित्यनाथ की जिद के आगे वह नतमस्तक हो गये. इसके बाद गोरखपुर की जिला कारागार में सांसद योगी 11 दिन तक बंद रहे.

जेल से रिहा होने के बाद जब सांसद योगी पहली बार संसद पहुंचे तो वह अपनी गिरफ्तारी की बात बताते-बताते रो पड़े. सांसद योगी का संसद में दिया गया ये भाषण काफी चर्चा में रहा. इसी भाषण में योगी ने सवाल उठाया था कि कैसे किसी सांसद को 11 दिन तक कारागार में रखा जा सकता है जबकि कानूनन किसी सांसद को 24 घंटे से ज्यादा नॉन क्रिमिनल ऑफेंस में कारागार में नहीं रखा जा सकता. गिरफ्तारी के चौबीस घंटे के बाद ही डॉ. हरिओम को सरकार ने सस्पेंड कर दिया और उनकी जगह ड्यूटी संभालने के लिए उस समय सीतापुर के डीएम राकेश गोयल को रातों-रात हेलीकॉप्टर से गोरखपुर भेजा गया. इससे भी दिलचस्प यह है कि डॉ. हरिओम को सस्पेंशन के एक हफ्ते के भीतर ही वापस बहाल कर दिया गया.

फिलहाल हरिओम वेटिंग लिस्ट में है. इससे पहले तक वो संस्कृति विभाग के सचिव के तौर पर कार्यरत थे. डॉ. हरिओम के प्रशासनिक अनुभव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वो उत्तर प्रदेश के 11 जिलों (जैसे कानपुर, गोरखपुर, मुरादाबाद, इलाहाबाद, सहारनपुर आदि) के डीएम रह चुके हैं. वजह चाहे जो भी रही हो लेकिन तब का सांसद आज का मुख्यमंत्री है. मुख्यमंत्री योगी के अगले आदेश के आने तक आला अधिकारियों को इंतज़ार ही करना पड़ेगा.

इस वजह से मीडिया में छाए रहते हैं मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने देश में मीडिया पर प्रचार खरीदने के लिए सौ दो सौ करोड़ रुपये नहीं, पूरे 11 अरब रुपये से ज्यादा खर्च किए. मीडिया को बिकाऊ कहने वाले बीजेपी के समर्थकों के लिए ये खबर झटका देने वाली हो सकती है. आरटीआई के मुताबिक ये जानकारी सामने आई है. नोटबंदी को लेकर विपक्ष के कठघरे में खड़ी भाजपा सरकार इस खुलासे के बाद और घिर सकती है. आरटीआई के मुताबिक मोदी सरकार ने पिछले ढाई सालों के भीतर अपने प्रचार-प्रसार पर 11 अरब रुपए से ज्यादा खर्च किए हैं.

ग्रेटर नोएडा के आरटीआई एक्टिविस्ट रामवीर तंवर ने 29 अगस्त 2016 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से सूचना के अधिकार के जरिए पूछा था कि केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार बनाने से लेकर अगस्त 2016 तक विज्ञापन पर कितना सरकारी पैसा खर्च किया है. तीन माह बाद जब आरटीआई के जरिए मिले इस जवाब को देखकर आप जरूर चौंक जाएंगे. इसमें बताया गया है कि पिछले ढाई साल में मोदी सरकार ने विज्ञापन पर ग्यारह अरब रुपए से भी ज्यादा खर्च कर चुकी है.

आरटीआई के जरिए मंत्रालय से मिले विज्ञापन की जानकारी में बताया गया कि ब्रॉडकास्ट, कम्युनिटी रेडियो, इंटरनेट, दूरदर्शन, डिजिटल सिनेमा, प्रोडक्शन, टेलीकास्ट, एसएमएस के अलावा अन्य खर्च शामिल हैं. इनमें पिछले तीन सालों में मोदी सरकार की ओर से करीब ग्यारह अरब से भी ज्यादा रुपया खर्च किया गया है.

प्रचार प्रसार के इन माध्यमों पर किया गया इतना खर्च

SMS

2014 – 9. 07 करोड़

2015 – 5.15 करोड़

अगस्त 2016 तक – 3. 86 करोड़

इंटरनेट

2014 – 6. 61 करोड़

2015 – 14.13 करोड़

अगस्त 2016 तक – 1.99 करोड़

ब्राडकास्ट

2014 – 64. 39 करोड़

2015 – 94.54 करोड़

अगस्त 2016 तक – 40.63 करोड़

कम्युनिटी रेडियो

2014 – 88.40 लाख

2015 – 2.27 करोड

अगस्त 2016 तक – 81.45 लाख

डिजिटल सिनेमा

2014 -77 करोड़

2015 – 1.06 अरब

अगस्त 2016 तक – 6.23 करोड़

टेलीकास्ट

2014 – 2.36 अरब

2015-2.45 अरब

अगस्त 2016 तक – 38.71 करोड़

प्रोडक्शन

2014 – 8.20 करोड़

2015 – 13.90 करोड़

अगस्त 2016 तक -1.29 करोड़

तीन साल में हर साल इतना किया खर्च

2014 – एक जून 2014 से 31 मार्च 2015 तक करीब 4.48 अरब रुपए खर्च

2015 – 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2016 तक 5.42 अरब रुपए खर्च

2016 – 1 अप्रैल 2016 से 31 अगस्त 2016 तक 1.20 अरब रुपए खर्च

इस मामले पर आरटीआई एक्टीविस्ट रामवीर तंवर ने कहा कि सुना करते थे कि मोदी चाय के पैसे भी खुद दिया करते थे. ऐसे में मन में विज्ञापन को लेकर सवाल उठने पर आरटीआई लगाई थी. अंदाजा ये था मोदी के विज्ञापनों पर 5 से 10 करोड़ रुपए का खर्चा किया होगा. लेकिन, ढाई साल में 1100 करोड़ रुपए खर्च करने का पता लगने के बाद से निराशा महसूस हुई है. उन्होंने कहा कि जब ढाई साल में 1100 सौ करोड़ का खर्च आया है केवल विज्ञापन पर तो पूरे पांच साल में मोदी जी के विज्ञापनों पर 3000 हजार करोड़ का खर्च आ सकता है. इसकी तुलना उन्होंने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी की और कहा कि वहां सरकार के चुनाव प्रचार में 800 करोड़ रुपए खर्च किए हैं. जबकि हमारे देश में एक केंद्र सरकार इतना पैसा खर्च कर दिया ये बहुत ही निंदनीय है.

9 टिप्स स्मार्ट कुकिंग के

वर्किंग वूमन के लिए घर और औफिस दोनों को एकसाथ संभालना किसी चुनौती से कम नहीं. उन्हें दोनों जगह अपना शतप्रतिशत देने के लिए जल्दबाजी में कभी अपनी सेहत से खिलवाड़ करना पड़ता है तो कभी स्वाद को दरकिनार करना पड़ता है, क्योंकि उन के लिए कम समय में हैल्दी और टेस्टी डिश बनाना आसान नहीं होता. उन की इस उलझन को सुलझाने के लिए और उन के कुकिंग स्टाइल को ईजी बनाने के लिए कुकरी ऐक्सपर्ट एवं शैफ पल्लवी निगम सहाय ने कुछ स्मार्ट टिप्स दिए:

वीकली मील प्लान बनाएं: अगर आप भी डाइनिंग टेबल पर परिवार के साथ हर सुबह इत्मिनान से चाय की चुसकियों का मजा लेना चाहती हैं तो कल क्या बनाऊं की सोच में सारी रात गुजारने के बजाय रविवार की शाम को ही वीकली मील प्लान बना लें. इस लिस्ट में सोमवार से ले कर रविवार तक के ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर में क्या बनाएंगी, यह तय कर के लिख लें और फिर उसी हिसाब से, उसी क्रम में रोजाना ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर बनाएं. इस से आप का काफी समय बचेगा और आप आज क्या बनाऊं, यह सोचने के झंझट से भी मुक्त हो जाएंगी.

वीकैंड में करें शौपिंग: एक बार आप का वीकली मील प्लान तैयार हो जाए तो फिर उसी के अनुसार वीकैंड में एक बार शौपिंग के लिए निकल जाएं. शौपिंग के दौरान सोमवार से ले कर रविवार तक के लंच और डिनर में बनने वाली सब्जियां ला कर फ्रिज में स्टोर कर दें. इसी तरह अगर आप ब्रेकफास्ट में ओट्स, पोहा, उपमा, सैंडविच जैसी आइटम्स बनाने वाली हैं तो ग्रोसरी की शौप से सारी सामग्री की खरीदारी कर के स्टोर कर लें. इस से आप को रोज सब्जी के लिए बाजार जाने की जरूरत नहीं होगी और न ही ग्रोसरी शौप के चक्कर लगाने होंगे, साथ ही समय की भी बचत होगी.

वीकैंड में यों करें तैयारी: अगर आप रोजाना खाना बनाते वक्त इस्तेमाल होने वाली चीजों को रैडी टू कुक कंडीशन में तैयार कर लेती हैं तब भी आप अपना कीमती समय बचा सकती हैं, जैसे:

– प्याजलहसुन का प्रयोग सब तरह के पकवान बनाने में किया जाता है. ऐसे में रोजरोज प्याजलहसुन छीलने के बजाय सप्ताह भर के लिए एक ही दिन में छील कर रख लें.

– आप चाहें तो अदरक और लहसुन का पेस्ट भी बना कर रख सकती हैं. इस से आप का काफी काम आसान हो जाएगा.

– अगर हरीमिर्च का पेस्ट भी रैडी कर के रख लेती हैं, तो इस से रोजाना आप को मिर्च काटने की जरूरत नहीं होगी.

– टमाटर, लहसुन, अदरक, पुदीनापत्ती और धनियापत्ती की चटनी पीस कर एअरटाइट कंटेनर में रख दें. इस का इस्तेमाल सप्ताह भर सैंडविच, रैप्स, परांठों आदि के साथ करें.

– अगर आप पेस्टो सौस बना कर किसी एअरटाइट कंटेनर में रख लेती हैं तो सप्ताह भर उस का इस्तेमाल स्नैक्स के साथ बतौर डिप्स, सलाद के ऊपर ड्रैसिंग की तरह और रैप्स, सैंडविच में चटनी की तरह कर सकती हैं.

– आप चाहें तो पास्ता, आलू, नूडल्स, मटर, चना जैसी चीजों को उबाल कर भी रख सकती हैं. इस से उन्हें बनाने में ज्यादा देर नहीं लगेगी.

कुकिंग के बजाय बेकिंग: कम समय में अपना काम जल्दी निबटाने के लिए कुकिंग के बजाय ओवन या माइक्रोवेव में बेकिंग भी कर सकती हैं जैसे चिकन, फूलगोभी, मटर, पनीर, मिक्स वैजिटेबल को बेक कर के आप इन से कोई भी रैसिपी आसानी से बना सकती हैं. बेकिंग के लिए आप को बस टाइम सैट कर के सामग्री को ओवन या माइक्रोवेव में रखना होगा. न तो खड़े रह कर उस की निगरानी करनी होगी और

न ही उस के जलने का डर होगा. इतना ही नहीं, उतनी देर में आप अपना दूसरा काम भी निबटा लेंगी.

बनाएं ड्राई स्नैक्स: शाम में चाय की चुसकियों के साथ खाने के लिए बाजार से स्नैक्स खरीदने या औफिस से आ कर घर पर कुछ बनाने के चक्कर में न पड़ें. वीकैंड में या फिर छुट्टी के दिन सप्ताह भर के ड्राई स्नैक्स बना कर एअरटाइट कंटेनर में रख लें जैसे थेपला, चिड़वा, नमकीन, कुकीज आदि.

बनाएं हैल्दी ड्रिंक्स: बच्चों के स्कूल, पति और खुद के औफिस से आने के बाद चाय या कौफी बनाने के बजाय वीकैंड में कुछ हैल्दी ड्रिंक्स बना कर फ्रिज में स्टोर कर लें. जैसे लस्सी, पीनट बटर स्मूदी, छाछ, लैमन हनी कूलर, नीबू पानी आदि. इसी तरह फ्रैश फ्रूट्स का जूस निकाल कर भी स्टोर कर सकती हैं. यह सेहत के लिए भी फायदेमंद होगा.

टेस्टी भी हैल्दी भी: टेस्ट के साथसाथ अपनी और परिवार की हैल्थ का भी खयाल रखें. ऐसे में जंक फूड के बजाय हैल्दी फूड बनाएं. सैंडविच के लिए मेयोनीज का इस्तेमाल करने के  बजाय दही, प्रोसैस्ड चीज की जगह पनीर, घी की जगह हलका सा तेल यूज करें ताकि स्वाद के साथ सेहत भी बनी रहे. वीकैंड पर रोटी पिज्जा बनाएं. इस के लिए रोटी पर सब्जी फैलाएं और उस के ऊपर चीज स्प्रैड कर हलका सा गरम करें. फिर पिज्जे की तरह काट कर गरमगरम रोटी पिज्जा सर्व करें.

मदद लेने में झिझकें नहीं: ऐसा नहीं है कि आप गृहिणी हैं, इसलिए खाना बनाने का सारा काम आप को ही करना है. आप इस काम में घर के बाकी सदस्यों की भी मदद ले सकती हैं. जैसे रोटी आप खुद बेल कर सेंकें, लेकिन आटा गूंधने के लिए किसी की मदद ले लें. इसी तरह सब्जी खुद छौंकें, लेकिन सब्जी किसी और से कटवा लें. इसी तरह बाकी कामों में भी मदद ले कर आप किचन का काम आधे घंटे में पूरा कर सकती हैं. इसी बहाने परिवार के सदस्यों के साथ थोड़ी गपशप भी हो जाएगी.

किचन गैजेट्स: बाजार में उपलब्ध स्मार्ट किचन गैजेट्स जैसे फ्रूटवैजिटेबल पीलर, वैजिटेबर कटर, वैजिटेबल चौपर, ग्रेटर, जूसर, टोस्टर, कौफी मेकर आदि खरीद लें. इन की मदद से आप का काम और भी आसान हो जाएगा.                               –      

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