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इन वजहों से अनोखा है आईपीएल

आईपीएल 10 के 27वें मैच में गौतम गंभीर की टीम कोलकाता नाइटराइडर्स और विराट कोहली की टीम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के बीच मुकाबला हुआ. उम्मीद थी कि दोनों के बीच रोमांचक जंग होगी, लेकिन जो हुआ वह वाकई हैरान करने वाला था. विराट कोहली की टीम ने 132 रन के आसान से लक्ष्य के सामने घुटने टेक दिए और 82 रन से मैच हार गई.

केकेआर ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 19.3 ओवर में 131 रन बनाए. इसके जबाव में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की टीम 9.4 ओवर में 49 रन पर ही सिमट गई, जो आईपीएल इतिहास का सबसे कम टोटल रहा. आरसीबी के तीन रन पर ही दो विकेट गिर गए थे. क्रिस गेल (7), विराट कोहली (0) के अलावा मनदीप सिंह (1) और एबी डिविलियर्स (8) सहित सभी ने निराश किया. आरीसीबी का कोई भी बल्लेबाज दहाई के अंक को भी नहीं छू सका. केदार जाधव ने सबसे अधिक 9 रन बनाए.

इस हार के साथ ही विराट कोहली और उनकी टीम आरसीबी के साथ कुछ अनचाहे रिकॉर्ड भी जुड़ गए. तो आईए उन रिकॉर्ड्स पर एक नजर डालते हैं.

किसी बल्लेबाज ने नहीं बनाया 9 से ज्यादा रन

131 रन के स्कोर का पीछा करने उतरी आरसीबी की टीम का कोई भी बल्लेबाज दोहरे अंकों तक नहीं पहुंच सका. यहां तक कि रन मशीन कहे जाने वाले विराट कोहली तो शून्य पर ही चलते बने. वहीं गेल भी कोई खेल नहीं दिखा सके. आरीसीबी का कोई भी बल्लेबाज दहाई के अंक को भी नहीं छू सका. केदार जाधव ने सबसे अधिक 9 रन बनाए.

यह पहला मौका था जब आईपीएल के किसी मैच में टीम का कोई भी बल्लेबाज दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंच सका. वहीं, टी-20 क्रिकेट के इतिहास में ऐसा यह तीसरा मौका था.

आईपीएल इतिहास का सबसे कम स्कोर

49 रन पर सिमटने के साथ ही आरसीबी ने आईपीएल में किसी भी टीम की ओर से अब तक का सबसे कम स्कोर का अनचाहा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया. इससे पहले 2009 में राजस्थान रॉयल्स की टीम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ महज 58 रन पर सिमट गई थी.

दोनों टीमें ऑलआउट

आईपीएल इतिहास में यह दूसरा मौका था, जब दोनों ही टीमें ऑलआउट हो गईं. इससे पहले नागपुर में 2010 में खेले गए मैच में डेक्कन चार्जर्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच खेले गए मैच में भी दोनों टीमों का पुलिंदा बंध गया था.

सबसे छोटी पारी

9.4 ओवर में ही आरसीबी की टीम सिमट गई. किसी भी टीम की ओर से आईपीएल की यह अब तक सबसे छोटी पारी है. इससे पहले मुंबई इंडियंस की टीम 2011 में पंजाब किंग्स XI के खिलाफ 12.5 ओवर में ही सिमट गई थी.

20 रन भी नहीं बना पाए 3 बल्लेबाज

विराट कोहली, एबी डिविलियर्स और क्रिस गेल जैसे धुरंधर बल्लेबाजों की तिकड़ी ने कुल मिलाकर महज 15 रन बनाए. यह पहला मौका था, जब तीनों मिलकर भी 20 रन तक भी नहीं पहुंच सके.

गोल्डन डक आउट हुए कोहली

कोलकाता के खिलाफ विराट कोहली पहली गेंद पर खता खोले बगैर पहली ही गेंद पर आउट हुए. आईपीएल में यह तीसरा मौका था जब विराट गोल्डन डक पर आउट हुए. जिन तीन मैचों में ऐसा हुआ उन सभी रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर का हार का सामना करना पड़ा.

आईपीएल में 23 अप्रैल की तारीख विराट कोहली की अगुवाई वाली टीम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए बेहद अजीब है. यह तारीख आरसीबी के लिए ऐसी है कि वह इसे याद भी करना चाहती है और भूलना भी चाहती है. 23 अप्रैल को आरसीबी ने आईपीएल में सबसे अच्छे दिन देखें हैं और सबसे बुरे भी. ऐसे में इस टीम से जुड़े लोगों के साथ बड़ी दुविधा है कि वे इस दिन को याद रखें या भूल जाएं. यही हालात इस टीम के फैंस के साथ भी है. वे इस दिन को याद कर अपनी टीम पर गर्व करें या सबसे खराब प्रदर्शन को किसी बुरे सपने की तरह भूल जाएं. आइए पहले 23 अप्रैल से जुड़े आरसीबी की यादें.

23 अप्रैल 2013

इस तारीख को आरसीबी की ओर से खेलते हुए क्रिस गेल ने 66 गेंदों में 175 रन बनाये थे. इस मैच में आरसीबी ने 5 विकेट खोकर 263 रन बनाये थे. यह टी20 मैचों में सबसे बड़ा स्कोर है. इस पारी के दौरान गेल ने टी-20 के सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड बनाया था.

साथ ही टी-20 में व्यक्तिगत उच्चतम स्कोर का रिकॉर्ड और एक पारी में सबसे ज्यादा छक्का जड़ने का रिकॉर्ड बनाया था. किसी बल्लेबाज को यहां तक पहुंचने के लिए धमाकेदार खेल दिखाना होगा. इसके अलावा डिविलियर्स ने 12 गेंदों में 31 रन और दिलशान ने गेल के साथ खेलते हुए 33 रन 36 गेंदों में बनाये थे. इसी मैच में सबसे ज्यादा छक्कों का रिकॉर्ड और टी-20 का सबसे तेज शतक भी बना था.

23 अप्रैल 2017

आईपीएल-10 के 27वें मैच में गौतम गंभीर की टीम कोलकाता नाइटराइडर्स और विराट कोहली की टीम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के बीच मुकाबला हुआ. उम्मीद थी कि दोनों के बीच रोमांचक जंग होगी, लेकिन विराट कोहली के टीम ने 132 रन के आसान से लक्ष्य के सामने घुटने टेक दिए और 82 रन से मैच हार गई. केकेआर ने पहले बैटिंग करते हुए 19.3 ओवर में 131 रन पर बनाए थे. इसके जबाव में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की टीम 9.4 ओवर में 49 रन पर ही सिमट गई, जो आईपीएल इतिहास का सबसे कम टोटल रहा.

प्रभास ने इस तरह दिया कमाल आर खान के ट्वीट का जवाब

दक्षिण भारत के सुपर स्टार माने जाने वाले अभिनेता मोहनलाल ने जब घोषणा की कि एम टी वासुदेवन नायक के उपन्यास ‘‘रंदामूजम’’ पर आधारित बनने जा रही फिल्म ‘‘महाभारत’’ में वह भीम का किरदार निभाने वाले हैं और इस फिल्म की कहानी भीम के नजरिए से कही जा जाएगी. तो मोहन लाल की इस घोषणा के बाद हर जगह अपनी टांग अड़ाने के लिए मशहूर कमाल आर खान ने ट्वीटर पर लिखा कि मोहन लाल तो ‘छोटा भीम’ हैं. ‘महाभारत’ में भीम का किरदार फिल्म ‘बाहुबली’ के अभिनेता प्रभास को निभाना चाहिए. उसके बाद मोहन लाल के प्रशंसकों ने ट्वीटर पर कमाल आर खान की जमकर छीछालेदर की. तब कमाल आर खान ने मोहनलाल से माफी मांगते हुए ट्वीटर पर लिखा-‘‘मुझे माफ करें. मुझे नहीं पता था कि आप सुपर स्टार हैं…..’’

पर मामला यहीं शांत नहीं हुआ. जब रविवार को बंगलोर में फिल्म ‘‘बाहुबली’’ के कुछ कलाकारों के साथ प्रभास भी पत्रकारों के सामने पहुंचे तो पत्रकारों ने प्रभास से सीधा सवाल कर दिया कि क्या वह फिल्म ‘महाभारत’ में भीम का किरदार निभाना चाहते हैं? क्या वह कमाल आर खान की इस बात से सहमत हैं कि भीम का किरदार मोहनलाल की बजाय उन्हे निभाना चाहिए? इस पर प्रभास ने बड़ी विनम्रता के साथ कहा-‘‘मोहनलाल सर भीम का किरदार निभा रहे हैं. यदि वह मेरे लिए कोई किरदार छोड़ते हैं, यदि उनकी तरफ से मुझे किसी किरदार को निभाने का प्रस्ताव मिलता है, तो मैं इंकार नहीं करुंगा. मुझे उनके साथ सिनेमा के परदे पर आने में खुशी होगी.’’

ज्ञातब्य है कि सितंबर 2018 में फिल्म ‘‘महाभारत’’ का निर्माण शुरू होगा. दो भागों में बनने वाली यह फिल्म अंग्रेजी, हिंदी, मलयालम, तेलगू, तमिल व कन्नड़ भाषा में बनेगी. उसके बाद इसे विश्व की अन्य भाषाओं में डब किया जाएगा. यह फिल्म 2020 की शुरुआत में पूरे विश्व में एक साथ प्रदर्शित होगी. पहले भाग के प्रदर्शन के नब्बे दिन बाद दूसरा भाग प्रदर्शित होगा.

रवीना टंडन की फिल्म ‘‘मातृ’’ भी डूबी

‘मस्त मस्त गर्ल के रूप में मशहूर अभिनेत्री रवीना टंडन ने बलात्कार जैसे घृणित अपराध पर आधारित फिल्म ‘‘मातृ’’ से वापसी की है. अपनी वापसी की इस फिल्म को प्रमोट करने के लिए वह अकेले ही मेहनत करती रहीं. अब ऐसा फिल्म निर्माता की तरफ से किसी योजना के तहत किया गया अथवा दूसरे कलाकारों ने निर्माता के र्दुव्यवहार के चलते फिल्म को प्रमोट करने से मना कर दिया, इसकी ठोस जानकारी नहीं मिल पायी. मगर रवीना टंडन ने टीवी रियालिटी शो ‘‘सबसे बड़ा कलाकार’’ की शूटिंग के साथ ही समय निकालकर फिल्म ‘‘मातृ’’ को प्रमोट करती रहीं. मगर अफसोस की बात यह है कि रवीना टंडन की यह मेहनत रंग ना ला सकी. फिल्म ‘मातृ’ को दर्शकों ने नकार दिया है.

21 अप्रैल को प्रदर्शित फिल्म ‘‘मातृ’’ ने शुक्रवार को 40 लाख, शनिवार को 40 लाख और रविवार को 44 लाख यानी कि तीन दिन उर्फ वीकेंड पर महज एक करोड़ 24 लाख ही कमा सकी. सूत्र दावा कर रहे हैं कि 350 सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई ‘मातृ’ के निर्माता को अब सिनेमाघरों का किराया भी अपनी जेब से देना पड़ सकता है.

फिल्म ‘मातृ’ की असफलता के लिए लोग अब रवीना टंडन को ही दोष दे रहे हैं. बौलीवुड के  बिचौलियों का दावा है कि रवीना टंडन की परवरिश फिल्मी माहौल में हुई. उनके पति मशहूर फिल्म वितरक हैं. उनके पिता मशहूर व सफल फिल्म निर्देशक रहे हैं, इसके बावजूद उन्होंने क्या सोचकर अपनी वापसी वाली फिल्म के रूप में फिल्म ‘‘मातृ’’ को चुना? आखिर रवीना को इस फिल्म की पटकथा में गड़बड़ी क्यों नजर नहीं आयी.

तो वहीं कुछ सूत्र रवीना की इस बात को लेकर आलोचना कर रहे हैं कि उन्हे अपनी वापसी की फिल्म पर पूरा ध्यान देना चाहिए था और इस फिल्म के प्रदर्शन तक टीवी के रियालिटी शो से दूरी बनाए रखना चाहिए था. इससे वह फिल्म को ज्यादा बेहतर ढंग से प्रमोट कर पाती. फिर उन्हे पत्रकारों के सामने समायभाव का रोना न रोना पड़ता. तीसरी कमी यह रही कि रवीना टंडन ने इस बात पर गौर ही नहीं किया कि फिल्म में कहां कमी है. वह तो प्रमोशन के दौरान पत्रकारों के सामने नेताओं की तरह बलात्कार के मुद्दे पर बातें करती रहीं. जबकि फिल्म बलात्कार और नारी शोषण के मुद्दे से भटकी हुई है. बहरहाल, फिल्म में कहानी, पटकथा व निर्देशन के स्तर पर इतनी कमियां हैं कि बाक्स आफिस पर फिल्म के साथ ऐसा होना स्वाभाविक ही है.

राजकुमारियों के सामने झुके शिवराज सिंह

राजमाता विजयाराजे सिंधिया हमारी मां समान थीं. मैं उनकी पूजा करता हूं. वे हम सभी की प्रणेता थीं. वे अकेले माधवराव सिंधिया की मां नहीं थीं. दुख आने पर वे सबसे पहले आगे आती थीं. विदिशा क्षेत्र में बाढ़ आने पर मदद करने वे सबसे पहले आगे आई थीं. वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे सिंधिया लोक नेता हैं. धार जिले के मोहनखेड़ा में आयोजित मध्यप्रदेश भाजपा की कार्यसमिति की बैठक मे उक्त उद्गार जब मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने व्यक्त किए तो उनसे चाटुकारिता की महक आ रही थी.

ऐसा बोलना यानि सिंधिया परिवार की शान में कसीदे गढ़ना उनकी सियासी मजबूरी भी हो गई थी, क्योंकि भिंड जिले की विधानसभा सीट अटेर के उप चुनाव में प्रचार के दौरान इन्ही शिवराज सिंह ने सिंधिया खानदान को गद्दार कहने की जो गुस्ताखी की थी उसके एवज में भाजपा इस सीट पर हार गई थी. राजमाता विजयराजे की बेटी यशोधरा राजे जो शिवराज मंत्री मण्डल मे खेल और युवक कल्याण मंत्री हैं ने अपने पूर्वजों के अपमान को सहज बर्दाश्त न करते राजमाता का योगदान भाजपा को खड़ा करने में गिनाया था तो बात दिल्ली तक पहुंची थी और फिर तब से लेकर अब तक शिवराज सिंह इस मसले को शांतिपूर्वक रफा दफा करने की जुगत में थे.

मोहनखेड़ा में यह मौका मिला तो वे चूके नहीं और वसुंधरा और यशोधरा के सामने नतमस्तक हो गए. इसके पहले राजमाता विजयारजे सिंधिया की ज़िंदगी पर बनी फिल्म एक थी रानी ऐसी भी को वे मध्य प्रदेश में टैक्स फ्री घोषित कर चुके थे और  इसके भी पहले वसुंधरा राजे भोपाल आकर उनसे मिली थीं और एकांत में तकरीबन एक घंटे तक दोनों में चर्चा हुई थी जिसके निष्कर्ष में शिवराज सिंह ने सिंधिया सिस्टर्स को लोक नेता कहा तो समझने वाले समझ गए कि इस तरह उन्हे माफी मांगना पड़ी, हालांकि कांग्रेसी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को खुदगर्ज करार देते शिवराज सिंह ने उन पर सिंधिया ट्रस्ट की जमीनें बेचने का आरोप लगाया, जिसके माने इतने भर थे कि अटेर की जीत की इकलौती वजह ज्योतिरादित्य की सक्रियता थी.

अब स्थिति स्पष्ट है कि शिवराज कभी सिंधिया राजघराने का इतिहास नहीं बांचेंगे, बल्कि वर्तमान यानि वसुंधरा और यशोधरा की स्तुति करेंगे, नहीं अटेर जैसी हारों की तादाद बढ़ भी सकती है. सियासी हल्कों में चर्चा यह भी है कि जिस दिन कांग्रेस ज्योतिरादित्य को सीएम प्रोजेक्ट कर देगी उस दिन से शिवराज सिंह की दुश्वारिया भी बढ़ना शुरू हो जाएंगी. राजे रजबाड़ों का रसूख अब पहले सा राजनीति में नहीं रहा है पर सिंधिया खानदान ने अपनी पकड़ बनाए रखी है, जिसके लिए वे आपस में लड़े भी और अपने अपने शीर्ष नेताओं के इशारों पर नाचे भी, इसके बाद भी कोई बाप दादों को गाली दे तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, यह 2 नई लोक नेत्रियों ने जता दिया है जिससे बट्टा शिवराजसिंह की साख पर लगा है.           

इस वीडियो को अब तक 1 करोड़ लोग देख चुके हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ओर नई योजनाओं को लेकर चर्चाओं से घिरे रहते हैं, तो दूसरी ओर उनके विशेष संबोधन “मित्रों”, मेरे प्रिय भाई-बहनों… जैसे शब्द व वाक्य भी लोगों के बीच मजाक के रूप में लिये जाते हैं. मोदी जी के यह संबोधन शब्द ऐसे लोकप्रिय हो गए हैं कि आजकल रेडियो से लेकर आम आदमी भी पीएम मोदी की नकल बहुत सरल तरीके से कर रहा हैं. जिसे आप सभी सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म में देख सकते हैं .

यूट्यूब के इस वीडियो में एक छोटी सी बच्ची को नरेन्द्र मोदी के भाषणों की नकल करते हुए देखा जा सकता है. बच्ची ने पीएम मोदी की नकल भी ऐसी की जिसे अब तक 80 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं. हालांकि यह बच्ची अमेरिका की है लेकिन मोदी की नकल इस तरह कर रही हैं जिसे देख आप यह नहीं कह सकेंगे कि यह बच्ची अमेरिका निवासी है.

तो चलिए देखते हैं. इस बच्ची की मोदी की नकल और उमदा मिमिक्री.

सोशल वर्क : पैसों के साथ शोहरत भी

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव काफी बढ़ गया है. लोग अपने मकसद में तो आगे बढ़ रहे हैं, पर उन का जीवन काफी समस्याग्रस्त होता जा रहा है. ऐसे में समाजसेवा से जुड़े लोगों से आशा की जाती है कि वे इन समस्याओं से नजात दिलाएं. इसी हुनर ने समाजसेवियों की आवश्यकता को अनिवार्य बना दिया है, जिस से सोशल वर्क में शोहरत और सुकून के साथ पैसा भी मिलने लगा है.

क्या है समाजसेवा

समाजसेवा का अर्थ है, लोगों को अपनी समस्याओं का हल खोजने में मदद करना. लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं का निदान ढुंढ़वाने में जागरूक करना. समाज में व्याप्त अंधविश्वास, कुपोषण, खराब स्वास्थ्य, गरीबी, निरक्षरता आदि ऐसी कई समस्याएं हैं, जो सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा हल की जा सकती हैं. महिला सामाजिक संगठन की राष्ट्रीय महासचिव डा. जया शुक्ला के मुताबिक, समाजसेवा का अर्थ ऐसे कार्यों से है, जिन्हें कर के हम सामाजिक जीवन में व्यापक सुधार ला सकते हैं. सर्वप्रथम हमें समाज में व्याप्त अंधविश्वास व कुरीतियों को दूर करना होगा, तभी हम सही माने में समाजसेवा कर सकते हैं. हमें एक अभियान के माध्यम से सामाजिक बुराइयों को दूर करना चाहिए, तभी हम एक सभ्य समाज की कल्पना कर सकते हैं.

रोजगार के अवसर

समाजसेवा अब केवल परोपकार की भावना से नहीं की जाती, बल्कि यह तेजी से उभरते हुए रोजगार के रूप में युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही है. समाजसेवा में निपुण युवाओं के लिए यह क्षेत्र सुनहरे अवसर उपलब्ध करा रहा है. प्रशिक्षित छात्रों के लिए सरकारी विभागों, निजी व सरकारी अस्पतालों में रोजगार की अपार संभावनाएं पैदा हो रही हैं.सैकड़ों ऐसी सरकारी व गैरसरकारी संस्थाएं हैं, जो समाजसेवा के कार्यों में रुचि रखने वाले युवाओं को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका देती हैं. मडिकल सोशियोलौजी में विशेषज्ञता प्राप्त कर आप निजी और सरकारी अस्पतालों में सेवा दे कर अच्छी कमाई कर सकते हैं.

 सरकारी कार्यसूची में प्रौढ़ शिक्षा, एड्स जागरूकता, साक्षरता, नशामुक्ति अभियान, स्वास्थ्य पोषाहार, महिला और बाल विकास कल्याण आदि सरकार के ऐसे कार्यक्रम हैं, जहां रोजगार के शतप्रतिशत अवसर हैं. इन के अलावा कुछ औद्योगिक संगठन भी अपने यहां कर्मचारियों के कल्याण व संरक्षण के लिए प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं को रखते हैं. नौकरी के अलावा आप समाज कल्याण मंत्रालय द्वारा संस्था को पंजीकृत करवा कर अपना एनजीओ भी शुरू कर सकते हैं. सरकारी कार्यक्रमों में भागीदारी निभा कर सरकार से अनुदान प्राप्त कर समाजसेवा के साथसाथ अच्छी आमदनी भी अर्जित कर सकते हैं.

हर क्षेत्र में आज सामाजिक कार्यकर्ताओं की आवश्यकता बढ़ती जा रही है. दिल्ली स्कूल औफ सोशल वर्क, टाटा इंस्टिट्यूट आदि ऐसे संस्थान हैं, जो अपने यहां प्रशिक्षण प्राप्त समाज सेवियों को अवसर प्रदान करते हैं.

प्रशिक्षण

समाजसेवा के क्षेत्र में जाने के लिए समाजशास्त्र में स्नातक या स्नातकोत्तर होना अनिवार्य है. देश के कई विश्वविद्यालयों व निजी संस्थानों में सोशल वर्क का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है. 2 वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए समाजशास्त्र के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाती है. कुछ निजी संस्थानों में भी स्नातक स्तर पर पाठ्यक्रम चलाया जाता है.                                      

जिंदगी से जरूरी नहीं मोबाइल

आज तकनीक ने हमारे जीवन को काफी आसान बना दिया है. दुनिया भर के काम अब पलक झपकते ही संपन्न हो जाते हैं. हर कदम पर हम किसी न किसी रूप में तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. इस से जहां हमारा जीवन बहुत सरल और सुविधाजनक हो गया है वहीं दूसरी तरफ इस के दुष्परिणाम जिंदगी में न केवल जहर घोल रहे हैं बल्कि मौत का कारण भी बन रहे हैं. मोबाइल एक ऐसी आधुनिक तकनीक है जिस ने जिंदगी की तमाम नई राहें खोल दी हैं. मोबाइल से आप चंद मिनट में घर बैठे अपने किसी दूरस्थ दोस्त या रिश्तेदार से संपर्क साध सकते हैं. यह सर्वसुलभ व आसान रखरखाव के कारण हरेक के पास मौजूद है और इंसान इस के जरिए एकदूसरे से कनैक्टिड रहता है.

किशोरों में तो मोबाइल का जादू सिर चढ़ कर बोल रहा है. सुबह से शाम तक किशोरों या युवाओं को मोबाइल  से चिपका देखा जा सकता है. आज मोबाइल न सिर्फ बात करने का जरिया है बल्कि यह मनोरंजन का अकूत खजाना भी है. जब से मोबाइल स्मार्ट हुआ और इंटरनैट से जुड़ा है, तब से इस की अहमियत और बढ़ गई है. युवाओं की उंगलियां तो हर समय मोबाइल स्क्रीन पर फिसलती रहती हैं. यह सच है कि मोबाइल आज हर किसी की जरूरत है, लेकिन इस का मतलब यह नहीं कि आप अपना जरूरी काम छोड़ कर हर पल मोबाइल से ही चिपके रहें. जब से व्हाट्सऐप, फेसबुक, गेम्स और संगीत मोबाइल पर उपलब्ध हुए हैं तब से इस का इस्तेमाल और अधिक बढ़ गया है, लेकिन इस के फायदे के साथसाथ नुकसान भी सामने आ रहे हैं. अत: जरूरत है इस के सही इस्तेमाल की.

किशोरियों से धोखाधड़ी

मोबाइल पर किशोर एकदूसरे से घंटों चैटिंग करते हैं. वे फर्जी अकाउंट बना कर एकदूसरे को इंप्रैस करने के लिए गलत जानकारी्र देते हैं. अकसर भोलीभाली किशोरियां मोबाइल पर लड़के का खूबसूरत फोटो देख कर आकर्षित हो जाती हैं और प्यार के सपने बुनने लगती हैं. चैटिंग का यह सिलसिला जब काफी बढ़ जाता है और एकदूसरे पर विश्वास करने का समय आ जाता है तो वे किसी स्थान पर मिलते हैं और साथ मरनेजीने की कसमें खाते हैं. ऐसे में युवती विश्वास कर अपना सबकुछ निछावर कर देती है, लेकिन कई बार युवक वीडियो बना लेते हैं और जब देखते हैं कि लड़की उन के चंगुल से निकलना चाहती है तो वे उसे धमकी देते हैं व इसी वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करने की कोशिश करते हैं.

दिल्ली निवासी सुनीता का भी मोबाइल चैटिंग के दौरान एक लड़के से अफेयर हो गया. दोनों अकसर मैट्रो स्टेशन पर मिलते और घंटों साथ गुजारते. सुनीता को अपने बौयफ्रैंड रमेश पर पूरा यकीन था कि वह दूसरे लड़कों की तरह नहीं है. अब सुनीता रमेश से और भी ज्यादा खुल गई थी. एक दिन रमेश उसे एक होटल में ले गया व उस से कहा कि वह उस की इच्छा पूरी कर दे, वैसे भी अब तो हमारी शादी होनी ही है. सुनीता को रमेश पर पूरा भरोसा था इसलिए उस ने रमेश की इच्छा पूरी कर दी. इस घटना के बाद जब सुनीता ने रमेश से बात करनी चाही तो उस का फोन स्विचऔफ मिला. मन ही मन सुनीता बहुत लज्जित थी. वह यह बात अपने पेरैंट्स को भी नहीं बता सकती थी. आखिरकार वह डिप्रैशन का शिकार हो गई.

सुनीता जैसी कई लड़कियां मोबाइल पर चैटिंग के दौरान बौयफ्रैंड तो बना लेती हैं पर उन्हें धोखा ही मिलता है. इसलिए जरूरी है कि युवतियां मोबाइल का इस्तेमाल तो करें, लेकिन चैटिंग करते समय पूरी सावधानी बरतें.

बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं

जब से मोबाइल का चलन बढ़ा है तब से दुर्घटनाएं भी अधिक हो रही हैं. आज बाइक सवार, साइकिल सवार, स्कूटर सवार, कार चालक व रिकशा चालक भी मोबाइल कान पर लगाए दिखते हैं. अकसर वे कानों में लीड लगा कर बेफ्रिक हो कर सड़क या रेलवे लाइन पार कर जाते हैं जिस का खमियाजा उन्हें अपनी जान दे कर भुगतना पड़ता है. वे इतनी तेज आवाज में म्यूजिक सुनते हैं कि उन्हें अपने आसपास का बिलकुल भी भान नहीं रहता और न किसी गाड़ी आदि का हौर्न सुनाई देता है.वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल करने से ध्यान बंटता है और दुर्घटना की पूरी आशंका रहती है. हालांकि सरकार ने वाहन चलाते समय मोबाइल फोन पर बात करना या फिर लीड लगा कर गाने सुनना गैरकानूनी घोषित किया है, लेकिन फि र भी लोग बेधड़क सड़कों पर मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं.

रोहिणी, दिल्ली में रहने वाली कंचन के पति को कंपनी की तरफ से गाड़ी मिली थी. एक दिन कंचन गाड़ी ले कर शौपिंग के लिए निकली. रास्ते में उस की सहेली का फोन आ गया और वह उस से बातें करने लगी. तभी रैडलाइट हो गईर् और मोबाइल पर बात करते हुए उस ने रैडलाइट जंप कर दी, जिस कारण दूसरी तरफ से आ रही गाड़ी से उस की टक्कर हो गई. हालांकि किसी को चोट नहीं आई और एक बड़ा हादसा होतेहोते टल गया.

मोबाइल से सैल्फी जानलेवा हो सकती है

जब से स्मार्टफोन आए हैं सैल्फी लेने का क्रेज किशोरों के सिर चढ़ कर बोल रहा है. कभीकभी सैल्फी लेना काफी खतरनाक हो जाता है. अकसर अखबारों में सैल्फी लेते समय होने वाले हादसों की खबरें छपती रहती हैं. मैट्रो स्टेशनों व मौल में किशोरकिशोरियां सैल्फी लेते हुए दिख जाएंगे. वे सैल्फी नैट पर अपलोड करते हैं, लेकिन कई बार यह जानलेवा भी बन सकती है. अत: सैल्फी लेते समय पूरी सावधानी बरतें, कहीं आप भी सैल्फी के चक्कर में जान न गंवा बैठें.

मोबाइल से बढ़ती दूरियां

मोबाइल फोन की वजह से रिश्तों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं. पहले लोग एकदूसरे के घर जाते थे, बातचीत करते थे और एक पारिवारिक रिश्ता कायम होता था, पर मोबाइल की वजह से अब रिश्तों में दरार आने लगी है. लोग दिनभर मोबाइल पर ही व्यस्त रहते हैं. आजकल किसी के पास किसी के लिए वक्त नहीं है. यह सच है कि मोबाइल एक उपयोगी वस्तु है मगर जो इसे अपने ऐंटरटेनमैंट का साधन समझते हैं, वे लोग सिर्फ धोखे में जीते हैं और एक दिन ऐसा भी आता है कि वे जिंदगी में अकेले ही रह जाते हैं और फिर अकेलेपन के कारण डिप्रैशन में डूब जाते हैं.ऐसा भी देखने में आया है कि इंसान मोबाइल की लत के चलते अपने जीवनसाथी तक को भी भूल जाता है जबकि फिर यहीं से शुरू होती है झगड़े की शुरुआत. गाजियाबाद में रहने वाले अमर श्रीवास्तव पूरे दिन औफिस में रहते हैं जबकि इन की पत्नी  सौम्या घर पर अकेली रहती हैं लेकिन जब वे देर रात घर आते हैं तो उन्हें अपनी पत्नी के लिए वक्त नहीं मिलता और जितनी देर भी घर पर रहते हैं बस, मोबाइल पर गेम खेलते हैं या फिर व्हाट्सऐप चलाते हैं. इसी अकेलेपन से घुट कर उन की पत्नी बीमार रहने लगी है.

मोबाइल फोन जितना जरूरी है उस के परिणाम कहीं ज्यादा हानिकारक भी हैं इसलिए मोबाइल का इस्तेमाल सोचसमझ करें.

‘लाइक’ के नाम पर 37 अरब की ठगी

दिल्ली के लक्ष्मीनगर के रहने वाले गौरव अरोड़ा नोएडा की एक रियल एस्टेट कंपनी में बढि़या नौकरी करते थे. लेकिन पिछले 2 सालों से वह काफी परेशान थे. इस की वजह यह थी कि जब से केंद्र में भाजपा सरकार आई, तब से रियल एस्टेट के क्षेत्र में मंदी आ गई है. पहले जहां प्रौपर्टी की कीमतें आसमान छू रही थीं, अब वह स्थिर हो चुकी हैं. केंद्र सरकार की नीतियों की वजह से इनवैस्टर भी अब प्रौपर्टी में इनवैस्ट करने से कतरा रहे हैं. इस का सीधा प्रभाव उन लोगों पर पड़ रहा है, जिन की रोजीरोटी रियल एस्टेट के धंधे से चल रही थी.

गौरव को हर महीने अपनी कंपनी का कुछ टारगेट पूरा करना होता था. पहले तो वह उस टारगेट को आसानी से पूरा कर लेता था, लेकिन प्रौपर्टी के क्षेत्र में आई गिरावट से अब बड़ी मुश्किल से घर का खर्च चल रहा था.

बच्चों की पढ़ाई के खर्च के अलावा उसे घर के रोजाना के खर्च पूरे करने में खासी परेशानी हो रही थी. एक दिन बौस ने उसे अपनी केबिन में बुला कर पूछा, ‘‘गौरव, यहां नौकरी के अलावा तुम और कोई काम करते हो?’’

‘‘नहीं सर, समय ही नहीं मिलता.’’ गौरव ने कहा.

‘‘देखो, मैं तुम्हें एक काम बताता हूं, जिसे तुम कहीं भी और दिन में कभी भी कर सकते हो. काम इतना आसान है कि तुम्हारी पत्नी या बच्चे भी घर बैठे कर कर सकते हैं.’’ बौस ने कहा.

‘‘सर, ऐसा क्या काम है, जो कोई भी कर सकता है?’’ गौरव ने पूछा.

‘‘नोएडा की ही एक कंपनी है सोशल ट्रेड. इस कंपनी के अलगअलग पैकेज हैं. आप जो पैकेज लेंगे, कंपनी उसी के अनुसार आप को लाइक करने को देगी. हर लाइक का 5 रुपए मिलता है.’’ बौस ने कहा.

‘‘सर, मैं कुछ समझा नहीं.’’ गौरव ने कहा.

‘‘मैं तुम्हें विस्तार से समझाता हूं.’’ कह कर बौस ने एक खाली पेपर निकाला और उस पर समझाने लगे, ‘‘देखो, कंपनी के 4 तरह के प्लान हैं. पहला है एसटीपी-10, दूसरा है एसटीपी-20, तीसरा है एसटीपी-50 और चौथा है एसटीपी-100.

‘‘एसटीपी-10 का पैकेज 5750 रुपए का है. इस में तुम्हें रोजाना 10 लाइक करनी होंगी. एसटीपी-20 का पैकेज 11500 रुपए का है. इस में तुम को रोजाना 20 लाइक करने को मिलेंगे. एसटीपी-50 के पैकेज में 28,750 रुपए जमा कर के 50 लाइक प्रतिदिन करने को मिलेंगे और एसटीपी-100 के पैकेज में 57,500 रुपए जमा कर के 125 लाइक तुम्हारी आईडी पर करने को आएंगे.

‘‘पैकेज की इस धनराशि में 15 प्रतिशत टैक्स भी शामिल है. यह लाइक शनिवार, रविवार और सरकारी छुट्टियों को छोड़ कर एक साल तक आएंगे. हर लाइक के 5 रुपए मिलेंगे. तुम्हें जो इनकम होगी, उस में से सरकार के नियम के अनुसार टैक्स भी काटा जाएगा.

‘‘तुम्हें फायदे की एक बात बताता हूं. तुम जिस पैकेज में जौइन करोगे, 21 दिनों के अंदर उसी पैकेज में 2 और लोगों को जौइन करा दिया तो तुम्हारी आईडी बूस्टर हो जाएगी. यानी उस आईडी पर दोगुने लाइक आएंगे. अगर और ज्यादा कमाई करनी है तो ज्यादा से ज्यादा लोगों को जौइन कराओ, इस से डाइरेक्ट इनकम के अलावा बाइनरी इनकम भी मिलेगी.’’

बौस ने आगे बताया, ‘‘कंपनी हंडरेड परसेंट लीगल है. बिना किसी डर के तुम यहां काम कर के अच्छी कमाई कर सकते हो. यकीन न हो तो तुम मेरी बैंक पासबुक देख सकते हो.’’ इतना कह कर बौस ने गौरव को अपनी पासबुक दिखाई.

गौरव ने पासबुक देखी तो सचमुच उस में कंपनी की तरफ से कई हजार रुपए आने की एंट्री थी. उसे यह स्कीम अच्छी लगी. उसे लगा कि यह तो बहुत अच्छा काम है, जो घर पर कोई भी कर सकता है. उस ने बौस से कह दिया कि अभी उस के पास पैसे नहीं हैं. जैसे ही पैसों का जुगाड़ हो जाएगा, वह काम शुरू कर देगा.

घर पहुंचने के बाद गौरव के दिमाग में बौस द्वारा दिखाया गया सोशल ट्रेड कंपनी का प्लान ही घूमता रहा. उस ने सोचा कि अगर वह 57,500 रुपए जमा कर देगा तो 625 रुपए प्रतिदिन मिलेंगे. सब कटनेकटाने के बाद 1,33,594 रुपए मिलेंगे यानी एक साल में उस के पैसे दोगुने से अधिक हो जाएंगे.

गौरव ने इस बारे में पत्नी को बताया तो पत्नी ने कहा कि इस तरह की कई कंपनियां लोगों के पैसे ले कर भाग चुकी हैं. इन के चक्कर में न पड़ा जाए तो बेहतर है. वैसे आप की मरजी. गौरव ने पत्नी की सलाह को अनसुना कर दिया. सोचा कि इसे कंपनी के बारे में जानकारी नहीं है, इसलिए यह ऐसी बातें कर रही है. बहरहाल उस ने ठान लिया कि वह यह काम जरूर करेगा. अगले दिन उस के एक नजदीकी दोस्त ने भी सोशल ट्रेड के प्लान के बारे में बताते हुए कहा कि वह खुद पिछले एक महीने से इस प्लान से अच्छी इनकम हासिल कर रहा है.

दोस्त ने गौरव से भी सोशल ट्रेड जौइन करने को कहा. गौरव को सोशल ट्रेड में काम करना ही था, इसलिए उस ने बौस के बजाय दोस्त के साथ जुड़ कर सोशल ट्रेड में काम करना उचित समझा.

गौरव के पास कुछ पैसे बैंक में थे, कुछ पैसे बैंक से लोन ले कर उस ने 1,15,000 रुपए कंपनी के खाते में जमा करा कर 2 आईडी ले लीं. उस की आईडी के बाईं साइड में उस की एक और आईडी लग चुकी थी. अगर उस के दाईं साइड में 57,500 रुपए की एक आईडी और लग जाती तो उस की मुख्य आईडी पर बूस्टर लग सकता था.

इसलिए गौरव इस फिराक में था कि 57,500 रुपए की एक आईडी किस की लगवाई जाए. उस ने अपने बड़े भाई कपिल अरोड़ा को सोशल ट्रेड के प्लान की इनकम के बारे में बताया. लालच में कपिल भी तैयार हो गया और उस ने भी 25 जनवरी, 2017 को 57,500 रुपए जमा करा दिए.

कपिल अरोड़ा की आईडी लगते ही गौरव की मुख्य आईडी बूस्टर हो गई और उस पर 125 के बजाए 250 लाइक आने लगे, जिस से उसे रोजाना 1250 रुपए की इनकम होने लगी. गौरव ने पेमेंट मोड 15 दिन का रखा था. 23 जनवरी, 2017 को उसे पहला पेआउट 4800 रुपए का मिला. कपिल की आईडी लग जाने के बाद उसे अगला पेआउट इस से डबल आने की उम्मीद थी, पर अगले 15 दिनों बाद उस का पेआउट नहीं आया.

यह बात गौरव ने अपने उस दोस्त से कही, जिस ने उसे जौइन कराया था. दोस्त ने उसे बताया कि कंपनी में अपग्रेडेशन का काम चल रहा है, इसलिए सभी के पेमेंट रुके हुए हैं. चिंता की कोई बात नहीं है, जो भी पेमेंट इकट्ठा होगा, वह सारा मिल जाएगा. यही नहीं, उस ने गौरव से कहा कि वह अपनी टीम बढ़ाए, जिस से इनकम बढ़ सके.

गौरव रोजाना अपनी आईडी पर आने वाले लाइक करता रहा. चूंकि उस का पेआउट नहीं आ रहा था, इसलिए उस ने और किसी को सोशल ट्रेड में जौइन नहीं कराया. उस का भाई कपिल भी अपनी आईडी पर आने वाले 125 लाइक रोजाना करता रहा. गौरव और कपिल कंपनी के एफ-472, सेक्टर-63 नोएडा स्थित औफिस भी गए.

उन की तरह अन्य सैकड़ों लोग वहां अपनी इसी समस्या को ले कर आजा रहे थे. सभी को यही बताया जा रहा था कि आईटी एक्सपर्ट सिस्टम को अपग्रेड करने में लगे हुए हैं. सोशल ट्रेड कंपनी से लाखों लोग जुड़े थे. उन में से अधिकांश के मन में इसी बात का संशय था कि पता नहीं कंपनी उन का रुका हुआ पेआउट देगी या नहीं. बहरहाल बड़े लीडर्स और कंपनी की ओर से परेशानहाल लोगों को आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिल रहा था.

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर (नोएडा) के सूरजपुर के रहने वाले दिनेश सिंह और पूर्वी दिल्ली के आजादनगर की रहने वाली पूजा गुप्ता ने भी दिसंबर, 2016 में अलगअलग 57,500 रुपए कंपनी के खाते में जमा करा कर आईडी ली थीं. ये भी रोजाना अपनी आईडी पर 125 लाइक करते थे. जौइनिंग के एक महीना बाद भी इन को इन के किए गए लाइक का पैसा नहीं मिला तो इन्हें भी चिंता होने लगी. न तो इन्हें अपने अपलाइन से और न ही कंपनी से कोई संतोषजनक जवाब मिल रहा था.

थकहार कर दिनेश सिंह ने 31 जनवरी, 2017 को गौतमबुद्धनगर के थाना सूरजपुर में कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी. इस की जांच एसआई मदनलाल को सौंपी गई. पेआउट न मिलने से असंतुष्ट कई लोगों ने पुलिस और जिला प्रशासन से शिकायतें करनी शुरू कर दी थीं. सोशल ट्रेड कंपनी के खिलाफ  ज्यादा शिकायतें मिलने पर पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया.

नोएडा पुलिस ने जांच की तो पता चला कि सोशल ट्रेड कंपनी के नोएडा सेक्टर-63 स्थित कंपनी के औफिस में देश के अलगअलग शहरों से सैकड़ों लोग अपने पेमेंट न मिलने की शिकायत करने आ रहे हैं. तमाम लोगों ने कंपनी में मोटी रकम जमा करा रखी है.

पुलिस को मामला बेहद गंभीर लगा, इसलिए नोएडा पुलिस प्रशासन ने पुलिस महानिदेशक को इस मामले से अवगत करा दिया. पुलिस महानिदेशक ने स्पैशल टास्क फोर्स के एसएसपी अमित पाठक को इस मामले में आवश्यक काररवाई करने के निर्देश दिए.

एसएसपी अमित पाठक ने एसटीएफ के एडिशनल एसपी राजीव नारायण मिश्र के नेतृत्व में एक टीम बनाई, जिस में एसटीएफ लखनऊ के एडिशनल एसपी त्रिवेणी सिंह, एसटीएफ के सीओ आर.के. मिश्रा, एसआई सौरभ विक्रम, सर्वेश कुमार पाल आदि को शामिल किया गया.

टीम ने करीब 15 दिनों तक इस मामले की जांच कर के रिपोर्ट एसएसपी अमित पाठक को सौंप दी. कंपनी के जिस औफिस पर पहले सोशल ट्रेड का बोर्ड लगा था, उस पर हाल ही में 3 डब्ल्यू का बोर्ड लग गया. एसटीएफ को जांच में यह जानकारी मिल गई थी कि सोशल ट्रेड के जाल में कोई 100-200 नहीं, बल्कि कई लाख लोग फंसे हुए हैं.

इस के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर स्पैशल स्टाफ टीम ने सोशल ट्रेड के एफ-472, सेक्टर-63 नोएडा औफिस पर छापा मार कर वहां से कंपनी के डायरेक्टर अनुभव मित्तल, सीओओ श्रीधर प्रसाद और टेक्निकल हैड महेश दयाल से पूछताछ कर के हिरासत में ले लिया. इसी के साथ पुलिस ने उन के औफिस से जरूरी दस्तावेज और अन्य सामान जांच के लिए जब्त कर लिए.

एसटीएफ टीम ने सूरजपुर स्थित अपने औफिस ला कर तीनों से पूछताछ की. इस पूछताछ में सोशल ट्रेड के शुरुआत से ले कर 37 अरब रुपए इकट्ठे करने की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

अनुभव मित्तल उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के पिलखुआ कस्बे के रहने वाले सुनील मित्तल का बेटा था. उन की हापुड़ में मित्तल इलैक्ट्रौनिक्स के नाम से दुकान है. अनुभव मित्तल शुरू से ही पढ़ाई में तेज था. स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद अनुभव का रुझान कोई नौकरी करने के बजाए अपना खुद का कोई बिजनैस करने का था. उस का रुझान आईटी क्षेत्र में ही कुछ नया करने का था, इसलिए वह नोएडा के ही एक संस्थान से कंप्यूटर साइंस से बीटेक करने लगा.

सन 2011 में उस का बीटेक पूरा होना था. वह समय के महत्त्व को अच्छी तरह समझता था, इसलिए नहीं चाहता था कि बीटेक पूरा होने के बाद वह खाली बैठे. बल्कि कोर्स पूरा होते ही वह अपना काम शुरू करना चाहता था. पढ़ाई के दौरान ही वह इसी बात की प्लानिंग करता रहता था कि बीटेक के बाद कौन सा काम करना ठीक रहेगा.

बीटेक पूरा होने के एक साल पहले ही उस ने अपने एक आइडिया को अंतिम रूप दे दिया. सन 2010 में इंस्टीट्यूट के हौस्टल में बैठ कर उस ने अब्लेज इंफो सौल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बना ली और इस का रजिस्ट्रेशन 878/8, नई बिल्डिंग, एसपी मुखर्जी मार्ग, चांदनी चौक, नई दिल्ली के पते पर करा लिया. अनुभव ने अपने पिता सुनील मित्तल को इस का डायरेक्टर बनाया.

बीटेक फाइनल करने के बाद उस ने छोटे स्तर पर सौफ्टवेयर डेवलपमेंट का काम शुरू कर दिया. अपनी इस कंपनी से उस ने सन 2015 तक मात्र 3-4 लाख रुपए का बिजनैस किया. जिस गति से उस का यह बिजनैस चल रहा था, उस से वह संतुष्ट नहीं था. इसलिए इसी क्षेत्र में वह कुछ ऐसा करना चाहता था, जिस से उसे अच्छी कमाई हो.

उसी दौरान सन 2015 में उस ने सोशल ट्रेड डौट बिज नाम से एक औनलाइन पोर्टल बनाया और सदस्यों को जोड़ने के लिए 5750 रुपए से 57,500 रुपए का जौइनिंग एमाउंट फिक्स कर दिया. इस में 15 प्रतिशत टैक्स भी शामिल कर लिया. जौइन होने वाले सदस्यों को यह बताया गया कि औनलाइन पोर्टल पर कुछ पेज लाइक करने पड़ेंगे. एक पेज लाइक करने के 5 रुपए देने की बात कही गई.

शुरुआत में अनुभव ने अपने जानपहचान वालों की आईडी लगवाई. धीरेधीरे लोगों ने माउथ टू माउथ पब्लिसिटी करनी शुरू कर दी. जिन लोगों की जौइनिंग होती गई, उन्हें कंपनी से समय पर पैसा भी दिया जाता रहा, जिस से लोगों का विश्वास बढ़ने लगा और कंपनी में लोगों की जौइनिंग बढ़ने लगी.

कंपनी ने सन 2015 में 9 लाख रुपए का बिजनैस किया. लोगों को बिना मेहनत किए पैसा मिल रहा था. उन्हें काम केवल इतना था कि कंपनी का कोई भी पैकेज लेने के बाद अपनी आईडी पर निर्धारित लाइक करने थे. एक लाइक लगभग 30 सैकेंड में पूरी हो जाता था. इस तरह कुछ ही देर में यह काम पूरा कर के एक निर्धारित धनराशि सदस्य के बैंक एकाउंट में आ जाती थी. शुरूशुरू में लोगों ने इस डर से कंपनी में कम पैसे लगाए कि कंपनी भाग न जाए. पर जब जौइन किए हुए सदस्यों के पैसे समय से आने लगे तो अधिकांश लोगों ने अपनी आईडी बड़े पैकेज में अपग्रेड करा लीं.

सन 2016 में ही अनुभव ने श्रीधर प्रसाद को अपनी कंपनी का चीफ औपरेटिंग औफीसर (सीओओ) बनाया. श्रीधर प्रसाद भी एक टेक्निकल आदमी था. उस ने सन 1994 में कौमर्स से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली के एनआईए इंस्टीट्यूट से एमबीए किया था. इस के बाद उस ने 1996 में ऊषा माटेन टेलीकौम कंपनी में सेल्स डिपार्टमेंट में काम किया. मेहनत से काम करने पर सेल्स मैनेजर बन गया.

सन 2001 में उस की नौकरी विजय कंसलटेंसी हैदराबाद में बिजनैस डेवलपर के पद पर लग गई. इस दौरान वह कई बार यूके भी गया. सन 2005 में उस ने आईबीएम कंपनी जौइन कर ली. इस कंपनी में वह सौफ्टवेयर सौल्यूशन कंसल्टैंट के पद पर बंगलुरु में काम करने लगा. यहां पर उसे कंट्री हैड बनाया गया. आईबीएम कंपनी में सन 2009 तक काम करने के बाद उस ने नौकरी छोड़ कर सन 2010 में ओरेकल कंपनी जौइन कर ली.

कंपनी ने उसे बिजनैस डेवलपर के रूप में नाइजीरिया भेज दिया. बिजनैस डेवलपमेंट में उस का विशेष योगदान रहा. सन 2013 में श्रीधर प्रसाद बंगलुरु आ गया. लेकिन सफलता न मिलने पर वह सन 2014 में वापस नाइजीरिया ओरेकल कंपनी में चला गया.

सन 2016 में श्रीधर प्रसाद की पत्नी ने किसी के माध्यम से सोशल ट्रेड डौट बिज में अपनी एंट्री लगाई. पत्नी ने यह बात उसे बताई तो श्रीधर को यह बिजनैस मौडल बहुत अच्छा लगा. बिजनैस मौडल समझने के लिए वह कई बार अभिनव मित्तल से मिला.

बातचीत के दौरान अभिनव श्रीधर प्रसाद की काबिलियत को जान गया. उसे लगा कि यह आदमी उस के काम का है, इसलिए उस ने श्रीधर को अपनी कंपनी में नौकरी करने का औफर दिया. विदेश जाने के बजाय श्रीधर को अच्छे पैकेज की अपने देश में ही नौकरी मिल रही थी, इसलिए वह अनुभव मित्तल की कंपनी में नौकरी करने के लिए तैयार हो गया और सीओओ के रूप में नौकरी जौइन कर ली.

अनुभव मित्तल ने मथुरा के महेश दयाल को कंपनी में टेक्निकल हैड के रूप में नौकरी पर रख लिया. अनुभव के पास टेक्निकल विशेषज्ञों की एक टीम तैयार हो चुकी थी. उन के जरिए वह कंपनी में नएनए प्रयोग करने लगा. लालच ही इंसान को ले डूबता है. जिन लोगों की सोशल टे्रड डौट बिज से अच्छी कमाई हो रही थी, उन्होंने वह कमाई अपने सगेसंबंधियों व अन्य लोगों को दिखानी शुरू की तो उन की देखादेखी उन लोगों ने भी कंपनी में मोटे पैसे जमा करा कर काम शुरू कर दिया.

बड़ेबड़े होटलों में कंपनी के सेमिनार आयोजित होने लगे. फिर तो लोग थोक के भाव से जुड़ने लगे. इस तरह से भेड़चाल शुरू हो गई और सन 2016 तक कंपनी से 4-5 लाख लोग जुड़ गए. जब इतने लोग जुड़े तो जाहिर है कंपनी का टर्नओवर बढ़ना ही था. सन 2016 में कंपनी का कारोबार उछाल मार कर 26 करोड़ हो गया.

कारोबार बढ़ा तो कंपनी ने आगामी योजनाएं बनानी शुरू कीं. पहला कदम ईकौमर्स में रखना था. इस के जरिए वह जरूरत की हर चीज ग्राहकों को उपलब्ध कराना चाहता था. सोशल ट्रेड डौट बिज के बाद उस ने फ्री हब डौटकौम नाम की कंपनी  बनाई. ईकौमर्स के लिए उस ने इनमार्ट डौटकौम नाम की कंपनी बनाई. इस के जरिए खरीदारी करने पर भी उस ने अतिरिक्त इनकम का प्रावधान रखा.

अभिनव जानता था कि भारत में करोड़ों लोग फेसबुक यूज करते हैं, जिस से मोटी कमाई फेसबुक के ओनर को होती है. फेसबुक की ही तरह भारतीय सोशल साइट बनाने का विचार उस के दिमाग में आया. इस बारे में उस ने अपनी आईटी टीम से विचारविमर्श किया. अपनी टीम के साथ मिल कर अनुभव ने इस तरह की सोशल साइट बनाने पर काम शुरू कर दिया, जिस में फेसबुक से ज्यादा फीचर हों. अपनी इस सोशल साइट का नाम उस ने डिजिटल इंडिया डौट नेट रखा. इस में इस तरह की तकनीक डालने की उन की कोशिश थी कि किसी की आवाज या फोटो डालने पर उस व्यक्ति के एकाउंट पर पहुंचा जा सके.

उधर सोशल ट्रेड में भारत से ही नहीं, विदेशों से भी एंट्री लगनी शुरू हो चुकी थीं. इनवेस्टरों ने भी मोटा पैसा यहां इनवेस्ट करना शुरू कर दिया. अब कंपनी को करोड़ों रुपए की कमाई होने लगी. किसी वजह से कंपनी ने लोगों को पेआउट देना बंद कर दिया. लोगों ने अपने सीनियर लीडर्स और कंपनी औफिस जा कर संपर्क किया तो उन्हें यही बताया गया कि कंपनी के सौफ्टवेयर में अपग्रेडिंग का काम चल रहा है. जैसे ही यह काम पूरा हो जाएगा, सारे पेआउट रिलीज कर दिए जाएंगे.

अब तक कंपनी में करीब साढ़े 6 लाख लोगों ने 9 लाख से अधिक आईडी लगा रखी थीं. कंपनी के पास इन्होंने लगभग 3 हजार 726 करोड़ रुपए जमा करा रखे थे. जब उन्हें कंपनी की तरफ से पैसे आने बंद हो गए तो लोगों में बेचैनी बढ़नी स्वाभाविक थी. कुछ लोगों ने मोटी रकम लगाई थी, उन की तो नींद हराम हो गई.

सीनियर लीडर उन्हें यही भरोसा दिलाते रहे कि उन का पैसा कहीं नहीं जाएगा. जो लोग कंपनी से लंबे समय से जुड़े थे, उन्हें विश्वास था कि कंपनी कहीं जाने वाली नहीं है. अपग्रेडेशन का काम पूरा होने के बाद सभी के पैसे खाते में भेज देगी. लेकिन जिन लोगों को जौइनिंग के बाद फूटी कौड़ी भी नहीं मिली थी, उन की चिंता लगातार बढ़ती जा रही थी. आखिर वे भरोसे की गोली कब तक लेते रहते.

लोगों ने नोएडा के जिला और पुलिस प्रशासन से सोशल ट्रेड की शिकायतें करनी शुरू कर दीं. लोगों ने सोशल ट्रेड के औफिस पर जब 3 डब्ल्यू का बोर्ड लगा देखा तो उन्हें शक हो गया कि कंपनी भाग गई है. कंपनी के अंदर ही अंदर बदलाव की क्या प्रक्रिया चल रही है, इस से लोग अनजान थे.

15 दिनों की गोपनीय जांच करने के बाद पुलिस प्रशासन को भी लगा कि अनुभव मित्तल ने सोशल ट्रेड कंपनी के नाम पर लोगों से अरबों रुपए की ठगी की है. तब पुलिस ने 1 फरवरी, 2017 को अनुभव मित्तल और कंपनी के 2 पदाधिकारियों श्रीधर प्रसाद और महेश दयाल को हिरासत में ले लिया.

अनुभव मित्तल से पूछताछ के बाद पता चला कि उस की कंपनी के गाजियाबाद के राजनगर में कोटक महिंद्रा बैंक में एक एकाउंट, यस बैंक में 2 एकाउंट, एक्सिस बैंक में 2 एकाउंट, केनरा बैंक में 3 एकाउंट हैं. जांच में पुलिस को केनरा बैंक में 480 करोड़ रुपए और यस बैंक में 44 करोड़ रुपए मिले. पुलिस ने इन खातों को फ्रीज करा दिया.

जांच में पुलिस को जानकारी मिली है कि कंपनी ने दिसंबर, 2016 के अंत में सोशल ट्रेड डौट बिज से माइग्रेट कर के फ्री हब डौटकौम लांच कर दिया और उस के 10 दिन के अंदर ही फ्री हब डौटकौम से इनमार्ट डौटकौम पर माइग्रेट किया. इस के बाद 27 जनवरी, 2017 को इनमार्ट से फ्रिंजअप डौटकौम पर माइग्रेट कर लिया.

कंपनी में इतनी जल्दीजल्दी बदलाव करने के बाद अनुभव मित्तल ने गिरफ्तारी के 7 दिनों पहले ही दिल्ली की एक नई कंपनी 3 डब्ल्यू खरीद कर उस का बोर्ड भी अपने औफिस के बाहर लगा दिया. इस के अलावा अनुभव मित्तल ने सोशल ट्रेड डौट बिज के डोमेन पर प्राइवेसी प्रोटेक्शन प्लान भी ले लिया था, ताकि कोई भी व्यक्ति या जांच एजेंसी डोमेन की डिटेल के बारे में पता न लगा सके.

पुलिस को पता चला कि वह फेसबुक पेज लाइक करने के नाम पर लोगों को बेवकूफ बना रहा था. कंपनी द्वारा सदस्यों को धोखे में रख कर उन से पैसे लिए जाते थे और जब अपने पेज को लौगइन करते तो विज्ञापन पेजों के या तो गलत यूआरएल होते थे या उन्हीं सदस्यों के यूआरएल को आपस में ही लाइक कराया जा रहा था. कंपनी द्वारा कोई वास्तविक विज्ञापन या कोई लौजिकल या रियल सर्विस नहीं उपलब्ध कराई जा रही थी.

कंपनी के पास आमदनी का कोई जरिया नहीं था, वह सदस्यों के पैसों को ही इधर से उधर घुमा रही थी, जोकि द प्राइज चिट्स ऐंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स (बैनिंग) एक्ट 1978 की धारा 2(सी)/3 के तहत अवैध है. इस एक्ट की धारा 4 में यह अपराध है.

पुलिस ने अनुभव मित्तल, सीओओ श्रीधर प्रसाद और टेक्निकल हैड महेश दयाल को विस्तार से पूछताछ करने के बाद 2 फरवरी, 2017 को गौतमबुद्धनगर के सीजेएम-3 की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

पुलिस ने लखनऊ की फोरैंसिक साइंस लेबोरैटरी, रिजर्व बैंक औफ इंडिया, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, सेबी, कारपोरेट अफेयर मंत्रालय की फ्रौड इनवेस्टीगेशन टीम को भी जानकारी दे दी है. सभी विभागों के अधिकारी अपनेअपने स्तर से मामले की जांच में लग गए हैं. जांच में पता चला है कि अनुभव मित्तल ने लाइक के जरिए 3700 करोड़ रुपयों की ठगी की है.

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद ने मामले की गहन जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया है. आईजी (क्राइम) भगवानस्वरूप के नेतृत्व में बनी इस जांच टीम में मेरठ रेंज के डीआईजी के.एस. इमैनुअल, एडिशनल एसपी (क्राइम) गौतमबुद्धनगर, एसटीएफ के एडिशनल एसपी राजीव नारायण मिश्रा, सीओ राजकुमार मिश्रा, गौतमबुद्धनगर के 2 इंसपेक्टर, एसआई सर्वेश कुमार पाल, सौरभ आदि को शामिल किया गया है.

टीम ने इस ठगी में फंसे लोगों को अपनी शिकायत भेजने के लिए एक ईमेल आईडी सार्वजनिक कर दी है. मीडिया में यह ईमेल जारी हो जाने के बाद देश से ही नहीं, विदेशों से भी भारी संख्या में शिकायतें आनी शुरू हो गई हैं. कथा लिखे जाने तक एसटीएफ के पास करीब साढ़े 6 हजार शिकायतें ईमेल से आ चुकी थीं. इन में से 100 से अधिक नाइजीरिया से मिली है. केन्या और मस्कट से भी पीडि़तों ने ईमेल से शिकायतें भेजी हैं.

पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि अभिनव ने इतनी मोटी रकम आखिर कहां इनवैस्ट की है. बहरहाल जिन लोगों ने अनुभव मित्तल की कंपनी में पैसा लगाया है, अब उन्हें पछतावा हो रहा होगा.  

– कथा पुलिस सूत्रों और जनचर्चा पर आधारित

राखी सावंत का कपड़े बदलते हुए वीडियो हुआ लीक

बॉलीवुड की बेबाक बाला व अपनी खूबसूरती के जरिये तमाम लड़कों की दिल की धड़कन बनने वाली राखी सावंत का एक नया कारनामा सामने आया है. राखी सावंत का एक एमएमएस लीक हुआ है, जो सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर तेजी के साथ वायरल हो रहा है. इस वीडियो के अंदर राखी सावंत कपड़े बदलती हुई नजर आईं हैं. कुछ मिनट लंबे इस वीडियो में राखी ने केवल ब्‍लैक ब्रा और पेंटी पहनी हुई है.

राखी सावंत की पीठ और कमर पर टैटू खुदवाए हुए नजर आ रहे हैं. राखी वीडियो में बार बार अपने शरीर को देख रही हैं.

हालांकि, एक वेबसाइट से बातचीत के दौरान राखी ने कहा कि मैंने वीडियो देखा और मैं खुद परेशान हूं. मुझे 11 साल हो गए फिल्‍म जगत में और आज तक मैंने ऐसा अनुभव कभी नहीं किया. मुझे नहीं पता यह कौन है, जो हूबहू मेरे जैसी दिखती है. हो सकता है कि यह मेरी डुप्‍लीकेट हो.

वैजिनोप्लास्टी : कौमार्य पाने का नया ट्रैंड

पहले प्लास्टिक सर्जरी फिर कौस्मैटिक और उस के बाद कंस्ट्रक्टिव सर्जरी. ये सभी सौंदर्य में निखार के लिए हैं. ऐसिड अटैक मामले में प्लास्टिक और कौस्मैटिक सर्जरी किसी वरदान से कम नहीं हैं. लेकिन इन दिनों ऐसी ही एक नई सर्जरी की काफी चर्चा है और वह है वैजिनोप्लास्टी. जी हां, आप जो सोच रही हैं वही सच है. यह वैजिनोप्लास्टी यौनांग के सौंदर्य के लिए ईजाद की गई सर्जरी है. महानगरों का यह एक नया ट्रैंड है.

भले ही इस तरह की सर्जरी का विज्ञापन देखने को नहीं मिलता है, लेकिन कौस्मैटिक सर्जन इस तरह की सर्जरी बड़ेबड़े अस्पतालों में करते हैं. बड़े अस्पतालों में इस तरह की सर्जरी के लिए अलग विभाग हैं. कोलकाता के नामी निजी अस्पताल या कौस्मैटिक सर्जन की वैबसाइट में हार्ट सर्जरी के साथसाथ किडनी, स्किन, लिवर ट्रांसप्लांटेशन के पैकेज के साथ वैजिनोप्लास्टी का भी पैकेज देखने को मिल जाता है. वैजिनोप्लास्टी विभाग के अंतर्गत हाइमेनोप्लास्टी और लाबियाप्लास्टी भी शामिल हैं.

आखिर वैजिनोप्लास्टी क्या है? इन दिनों इस तरह की सर्जरी की मांग क्यों बढ़ रही है? किस आयुवर्ग की महिलाओं में यह अधिक लोकप्रिय है? इस तरह की सर्जरी की सफलता दर क्या है और इस में स्किल फैक्टर क्याक्या हैं?

वैजिनोप्लास्टी एक जैनिटल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी है. लेकिन जैनिटल रिकंस्ट्रक्शन में लिंग परिवर्तन भी शामिल है, पर वैजिनोप्लास्टी से योनि में मनचाहा बदलाव पाया जा सकता है. कोलकाता के कौस्मैटिक सर्जन डा. सप्तऋषि भट्टाचार्य का कहना है कि यह एक तरह की रिकंस्ट्रक्टिव प्लास्टिक सर्जरी है. इस का उद्देश्य मनमाफिक वैजाइना को डिजाइन करना या कह लीजिए रिकंस्ट्रक्ट करना यानी योनि का पुनर्निर्माण और वह भी जैसा चाहें वैसा. इस रिकंस्ट्रक्शन थ्यौरी के अंतर्गत भी बहुत तरह की सर्जरी शामिल हैं. हाइमेनोप्लास्टी, लाबियाप्लास्टी वगैरह. वैजिनोप्लास्टी लंबे विवाहित जीवन और बच्चे पैदा करने से ढीली पड़ी योनि की दीवार को टाइट करती है. यह सर्जरी दरअसल कमजोर मांसपेशियों को दुरुस्त भी कर देती है. इस के अलावा रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी के अंतर्गत हिप की मांसपेशियों को टाइट कर बढ़ती उम्र का प्रभाव भी कम किया जाता है.

डा. अरिंदम सरकार कहते हैं कि अधेड़ उम्र की ज्यादातर महिलाएं वैजाइना रिकंस्ट्रक्शन के लिए आती हैं. कम उम्र की लड़कियां आमतौर पर हाइमेनोप्लास्टी के लिए आती हैं. बहरहाल, जो भी इस तरह की सर्जरी के लिए उन के पास आती है वह इस बारे में थोड़ीबहुत जानकारी हासिल कर के ही आती है. इसलिए अलग से कुछ ज्यादा कहने की जरूरत नहीं पड़ती है. हां, अगर इस बारे में उन्हें कोई खास जानकारी अलग से चाहिए या सर्जरी को ले कर किसी तरह की आशंका हो तो पहली सिटिंग में उस का निवारण कर दिया जाता है.

इस सर्जरी की इतनी डिमांड है कि कोलकाता के कई छोटेबड़े निजी अस्पतालों में यह सर्जरी हो रही है. हालांकि सभी निजी अस्पतालों में इस के लिए अलग से विभाग नहीं हैं और न ही इस सर्जरी के लिए विज्ञापन दिए जा रहे हैं, बावजूद इस के इस विशेष अंतरंग सर्जरी का अच्छा बाजार जम चुका है.

वैजाइना सर्जरी की चाह क्यों

विदेश में बार्बी वैजाइना की बहुत मांग है. इस का कारण यह है कि इन दिनों पूरी दुनिया पर खासतौर पर नई पीढ़ी के दिलोदिमाग में वर्चुअल वर्ल्ड का नशा सिर चढ़ कर बोल रहा है. अपने यौनांग में छुरी चलवा कर काटछांट से भी महिलाएं पीछे नहीं हटना चाह रही हैं. कई महिलाओं ने माना कि उन के पति या सैक्स पार्टनर के जोर देने पर इस के लिए वे तैयार हुईं. लेकिन संचिता दास (बदला हुआ नाम) ने अपने पति को सरप्राइज देने के लिए हाइमेनोप्लास्टी करवाने का मन बनाया. अपनी शादी की 10वीं सालगिरह पर वह अपने जीवनसाथी को यह उपहार देना चाहती है.

अब जहां तक हाइमेनोप्लास्टी का सवाल है, तो समाज में इन दिनों एक नया बदलाव भी देखा जा रहा है. पुराने जमाने में शादीब्याह के समय लड़कियों के कौमार्य को बहुत महत्त्व दिया जाता था. लेकिन बाद में खेलकूद में भाग लेने या साइकिल आदि चलाने जैसे विभिन्न कारणों की वजह से लड़कियों में कौमार्य की शर्त कम हुई. लेकिन आजकल फिर से समाज में कौमार्य को महत्त्व दिया जाने लगा है. लड़कियां शादी से पहले हाइमेनोप्लास्टी के लिए जा रही हैं. एक विशेषज्ञ सर्जन का दावा है कि उन के पास हाइमेनोप्लास्टी के बहुत सारे मामले आ रहे हैं. इस में कौमार्य झिल्ली का फिर से निर्माण किया जाता है. दावा यह है कि इस सर्जरी में ऊपरी तौर पर किसी तरह की सर्जरी का कोई निशान नहीं होता है. इसीलिए सैक्स पार्टनर को इस का पता नहीं चल पाता है. दावा यह भी है कि झिल्ली निर्माण के बाद संबंध बनाने पर शीलभंग का प्रमाण भी मिलता है. ऐसे मामले के लिए शादी की तारीख से 4 हफ्ते पहले सर्जरी का सुझाव दिया जाता है.

कल्याणी यूनिवर्सिटी से अंगरेजी साहित्य में पीएचडी करने वाली शुभा भट्टाचार्य (बदला हुआ नाम) वैजिनोप्लास्टी करा चुकी है. शुभा बताती है कि इस बारे में उस ने घर पर किसी को नहीं बताया है. 2 महीने बाद मेरी शादी होने वाली है. जैनिटल रिकंस्ट्रक्शन के बारे में मैं ने अपनी एक सहेली से सुना था. इसीलिए 15 दिन की सैर का बहाना बना कर वह कोलकाता चली आई और यह सर्जरी करवा ली. शुभा का कहना है कि इस विषय पर घर पर खुल कर बात करना असंभव था, इसलिए यह चोरीछिपे करवाई.

कोलकाता के एक निजी कालेज में होटल मैनेजमैंट का कोर्स करने वाली रितिका खन्ना (बदला हुआ नाम) ने भी इस सर्जरी का लाभ उठाया है. इस बारे में उस का कहना है कि यह उस का निजी मामला है. किसी डर या आशंका में उस ने यह सर्जरी नहीं करवाई. बस वह एक बार यह कर के देखना चाहती थी. इसीलिए करवाई.

बहरहाल, जिन्होंने भी इस तरह की सर्जरी के बारे में पहली बार सुना, जाहिर है उन के मन में अब इसे ले कर बहुत सारे सवाल उठेंगे. मसलन, आखिर इस तरह की सर्जरी की जरूरत क्यों पड़ रही है या फिर यह कहा जाए कि किसी मानसिकता के तहत इस किस्म की सर्जरी करवाई जाती है? दूसरे कई फैशन या लाइफस्टाइल ट्रैंड की तरह ही यह भी महज एक तरह का ट्रैंड है? किस तरह की महिलाएं यह सर्जरी करवा रही हैं? इस के फायदों के साथ किस तरह के नुकसान की आशंका है? सर्जरी के लिए कितने दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ता है? सर्जरी के बाद स्वाभाविक जीवन में लौटने में कितना समय लगता है?

जोखिम कम नहीं

2007 में योनि संबंधित किसी भी तरह की सर्जरी का नाम डिजाइनर वैजाइना दिया गया. उस समय अमेरिकन कालेज औफ औबस्टेट्रिशियन ऐंड गाइनोकोलौजिस्ट ने इस बढ़ते ट्रैंड के खिलाफ चेतावनी दी थी. रौयल आस्ट्रेलियन कालेज औफ गाइनोकोलौजिस्ट भी इस ट्रैंड के खिलाफ रहा है. 2009 में ब्रिटिश मैडिकल जर्नल और 2013 में सोसाइटी औफ औबस्टेट्रिशियन ऐंड गाइनोकोलौजिस्ट औफ कनाडा ने इसे गैरजरूरत कौस्मैटिक सर्जरी बताते हुए इस ट्रैंड को रोके जाने पर जोर दिया था. बावजूद इस के 2015 में हुए सर्वे से साफ हो गया कि कोई भी चेतावनी काम न आई. दिनोंदिन यह ट्रैंड फूलाफला और इस का विस्तार हमारे यहां भी हो चुका है.

अब जहां तक जोखिम का सवाल है, तो विशेषज्ञों का मानना है कि इस सर्जरी के बहुत सारे जोखिम भी हैं. सब से पहले तो कुछ साइड इफैक्ट देखने को मिलते हैं. बहुत सारे मामलों में पाया गया कि खून का बहाव रोक पाना डाक्टर के लिए कठिन हो जाता है. वहीं संक्रमण भी एक समस्या है. इस तरह की सर्जरी में 1 से ले कर 3 घंटे तक का समय लग सकता है. यह पूरी तरह से निर्भर करता है योनिद्वार और उस के आसपास की मांसपेशियों पर. सर्जरी के 2 से 5 दिनों के भीतर कामकाज पर लौटा जा सकता है. वैसे 6 सप्ताह का समय लग सकता है. इस दौरान डाक्टर यौन संबंध बनाने से बचने की सलाह देते हैं. इस के अलावा सर्जरी के निशान धीरेधीरे ही जाते हैं. ऐसी सर्जरी बहुत ही अनुभवी सर्जन द्वारा करवाई जानी चाहिए.

अन्य जानकारी

इस सर्जरी की सुविधा हर बड़े शहर में है. कोलकाता में अपोलो, आमरी, बेलव्यू, कोलंबिया एशिया हौस्पिटल, डीसान अस्पताल, चाणक्य अस्पताल, फोर्टिस जैसे निजी अस्पतालों के अलावा बहुत सारे कौस्मैटिक सर्जनों के क्लीनिकों में भी यह सर्जरी की जाती है. अगर कौस्मैटिक सर्जनों के पास इस के लिए पूरा सैटअप न हो तो वे निजी अस्पताल या नर्सिंगहोम में इस तरह की सर्जरी करते हैं.

अब जहां तक खर्च का सवाल है, तो यह अस्पताल और नर्सिंगहोम पर निर्भर करता है. वैसे औसतन इस सर्जरी में 35 से 50 हजार तक का खर्च आता है. यह सर्जरी दोनों तरह के लोकल ऐनेस्थीसिया और सामान्य ऐनेस्थीसिया के बाद की जा सकती है. ज्यादातर मामलों में सामान्य ऐनेस्थीसिया पसंद की जाती है, क्योंकि इस तरह की सर्जरी में 1 से 3 घंटे तक का वक्त लग जाता है. कुछ दिनों तक भारीभरकम काम न करने की बंदिश है. 2-4 दिनों में सामान्य चलनाफिरना संभव हो जाता है. लेकिन जहां तक दापंत्य संबंध का सवाल है, तो 2-4 हफ्ते का इंतजार करने की सलाह दी जाती है.

मनोविदों की राय

यह सही है कि अलगअलग कारणों से विभिन्न उम्र की महिलाएं इस तरह की सर्जरी करा रही हैं. वहीं अगर कोई महिला या लड़की पति या अपने सैक्स पार्टनर के दबाव में आ कर इस तरह की सर्जरी के लिए जाती है, तो यह जरूर सोचने वाली बात है. आखिर क्यों? इसे इस तरह देखा जाना चाहिए. शरीर की अंतरिक बनावट में छेड़छाड़ के लिए पति या सैक्स पार्टनर दबाव बना रहा है, तो मान लेना चाहिए कि इस बहुत ही करीबी व आपसी रिश्ते में सब कुछ ठीकठाक नहीं है. यह कहीं किसी तरह की समस्या की ओर ही इशारा करता है, क्योंकि दांपत्य का रिश्ता हो या और कोई भी रिश्ता केवल शरीर के बूते टिक नहीं पाता है. आतंरिकता जरूरी होती है और अगर आतंरिकता है, तो शरीर या उस की बनावट की अहमियत नहीं होती है. ऐसे रिश्ते मजबूत होते हैं.                 

भारत में वैजिनोप्लास्टी का ट्रैंड भले ही हाल ही में शुरू हुआ हो, लेकिन विदेशों में इस का ट्रैंड पुराना है. 2006-07 में इस की शुरुआत हुई थी और आम भाषा में यह बार्बी वैजाइना सर्जरी के नाम से जानी जाती रही है. लेकिन सर्जरी की भाषा में इस तरह की अंतरंग सर्जरी वैजिनोप्लास्टी, लाबियाप्लास्टी और हाइमेनोप्लास्टी के नाम से जानी जाती है. बहरहाल, इस ट्रैंड को ले कर 2015 में एक सर्वे भी कराया गया. उस के अनुसार इस साल विश्व भर में करीब 1 लाख महिलाओं ने बार्बी वैजाइना हासिल करने के लिए लाबियाप्लास्टी करवाई. बताया जाता है कि लगभग 50 हजार महिलाओं ने किशोर उम्र की योनि प्राप्त करने के लिए हाइमेनोप्लास्टी का सहारा लिया.    

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