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मर्म

हर नजर

तुम रहे

सादगी भी रही

तुम को देखा था कभी

कनखियों से बारबार

जब हर नजर में

तुम ही नहीं थे

असंख्य स्वप्न साथ लिए

हृदय आल्हादित

हुआ करता था

क्या हो तुम

कैसे कहूं

असहज कर्म से

रचित काव्य में छिपे

मर्म से हो तुम.

 

– मनोज शर्मा

श्रीजेश के हवाले हौकी टीम

स्टार गोलकीपर पी आर श्रीजेश को हौकी टीम का कप्तान बनाया गया है. वे मलयेशिया के इपोह में 27 अप्रैल से 6 मई तक होने वाले 26वें सुलतान अजलान शाह कप में 18 सदस्यीय भारतीय हौकी टीम की अगुआई करेंगे. भारतीय हौकी टीम के लिए यह अच्छी बात है कि इस बार 4 युवा चेहरों को मौका मिला है. डिफैंडर गुरिंदर सिंह, मिडफील्डर मनप्रीत और सुमित जूनियर विश्वकप जीतने वाली टीम में थे. वहीं, मुंबई के गोलकीपर सूरज करकेरा को भी मौका दिया गया है. सूरज वर्ष 2016 में जूनियर टीम का हिस्सा थे.

मुख्य कोच रोलैंड ओल्टमैंस का कहना है कि अजलान शाह कप हमारे लिए अहम नहीं है. इस टूर्नामैंट में हमें क्षमता दिखानी है. बड़े टूर्नामैंटों जैसे विश्व लीग सैमीफाइनल, एशिया कप और ओडिशा में पुरुष हौकी लीग फाइनल से पहले हम नई शैली में खेलेंगे. पिछले कुछ महीनों से भारतीय हौकी टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही है और कड़ा अभ्यास भी कर रही है जिस का फायदा पिछले कुछ महीनों में भारतीय हौकी टीम को मिला भी है पर भारतीय टीम को अपना डिफैंस मजबूत करना होगा तभी भारतीय टीम किसी चिंता के बिना प्रतिस्पर्धी टीम पर हमला कर सकती है. उम्मीद है कि युवा खिलाडि़यों को जिस उद्देश्य के लिए मौका दिया गया है वे कड़ी मेहनत कर विश्वकप 2018 और टोक्यो ओलिंपिक 2020 में अच्छा प्रदर्शन कर भारतीय हौकी के अच्छे दिन लाने में सहायक होंगे.

6 सहयोगी बैंकों के विलय के बाद एसबीआई दुनिया के शीर्ष 50 बैंकों में शामिल

देश का सब से बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई दुनिया के 50 शीर्ष बैंकों में शुमार हो गया है. इस के  साथ ही बैंक के ग्राहकों की संख्या 37 करोड़ के पार पहुंच गईर् है. एसबीआई के साथ उस के 6 सहयोगी बैंकों का विलय हुआ है जिन में महिला बैंक, स्टेट बैंक औफ बीकानेर ऐंड जयपुर, स्टेट बैंक औफ हैदराबाद, स्टेट बैंक औफ त्रावणकोर शामिल हैं.

बैंकों का विलय एक अप्रैल से प्रभावी हो गया है. बैंक के कर्मचारियों की संख्या पौने 3 लाख हो गई है जिन में करीब 70 हजार कर्मचारी उस के साथ शामिल हुए बैंकों के हैं. इस विलय के कारण एसबीआई के ग्राहक और कर्मचारी ही नहीं बढ़े हैं, बल्कि उस की शाखाएं भी अब 24 हजार से ज्यादा हो गई हैं और एटीएम बढ़ कर 59,000 हो गए हैं. बैंक की जमा रकम 26 लाख करोड़ रुपए और कर्ज की रकम 18.50 लाख करोड़ रुपए हो गई है. कमाल यह है कि बैंक ने अपने कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की योजना निकाली लेकिन सिर्फ 28 हजार कर्मचारी ही वीआरएस के लिए तैयार हुए हैं. इस सब से बड़े बैंक की अध्यक्ष अरुंधती भट्टाचार्य ने कर्जमाफी को गलत परंपरा करार दे कर किसानों के कर्ज को माफ करने की राजनीति करने वाले नेताओं की भौहें चढ़ा दी थीं. वे रघुराम राजन के बाद रिजर्व बैंक के शीर्ष पद की दौड़ में शामिल रही हैं.

स्टेट बैंक दरों में जो नीति तय करता है, अन्य बैंक लगभग उस का अनुसरण करते हैं. आश्चर्य यह है कि इतनी संपत्ति, ग्राहक और शाखाओं के  बावजूद देश का यह सब से बड़ा बैंक दुनिया के शीर्ष 50 बैंकों में शामिल है जबकि उम्मीद यह थी कि यह शीर्ष 20 बैंकों में पहुंच जाएगा. 

ब्रैंडेड सामान की बिक्री में सैमसंग शीर्ष पर

ब्रैंड की धाक बाजार का रुख बदलती रहती है. इस साल अब तक ब्रैंडेड सामानों की बिक्री में विविध कंपनियों ने अच्छी छलांग लगाई लेकिन उस में सब से जोरदार छलांग मोबाइल निर्माता कंपनी सैमसंग की थी. पिछले वर्ष 18वें स्थान पर रहने वाली कंपनी सैमसंग ने इस साल बिक्री में पहला स्थान हासिल किया है. मतलब लोगों ने मोबाइल उपकरणों में सर्वाधिक विश्वास सैमसंग पर जताया है. 10 ब्रैंडेड वस्तुओं की सूची में सैमसंग पहले स्थान पर है जबकि सोनी के उपकरण पिछले साल की तरह इस बार भी दूसरे तथा एलजी तीसरे स्थान पर बरकरार हैं. ब्रैंडेड सामानों के बारे में विश्लेषण करने वाली वैश्विक फर्म टीआरए रिसर्च के विश्लेषण से हुए खुलासे में ब्रैंडेड सामानों की बिक्री में पिछले वर्ष 16वें स्थान पर रही कंपनी एपल इस साल चौथे स्थान पर है जबकि टाटा कंपनी ने 5वां और होंडा ने अपना छठा स्थान इस बार भी कायम रखा है.

4 पहिए वाले वाहनों की निर्माता कंपनी मारुति सुजूकी पर भी लोगों ने खूब विश्वास जताया और यह 11वें स्थान से 7वें स्थान पर पहुंची है जबकि डेल ने 8वां स्थान बरकरार रखा है. इस क्रम में बजाज 7वें स्थान से गिर कर 10वें स्थान पर पहुंची है जबकि मोबाइल निर्यात तथा अन्य इलैक्ट्रौनिक उपकरण बनाने वाली कंपनी लेनेवो ब्रैंड की बिक्री जम कर हुई और कंपनी 2016 के 27वें स्थान से छलांग लगा कर 2017 में 9वें स्थान पर पहुंची है. यह जबरदस्त छलांग है. इस के बावजूद लोगों का विश्वास सैमसंग पर सब से ज्यादा रहा है. इस कंपनी के मोबाइलों की बिक्री भारत में सर्वाधिक बढ़ी है. उस के मोबाइलों पर लोगों ने इतना भरोसा किया कि यह पहले स्थान पर रही है. हालांकि इस के गैलेक्सी नोट-7 ने पिछले साल कंपनी को झटका दिया था. इस मौडल के आग पकड़ने की घटना से बाजार में इस की साख कम हुई थी.

जीवन की मुसकान

मेरा छोटा बेटा गुंजन जब डेढ़ साल का था, मेरे घर से सट कर मेरे जेठ का घर बन रहा था. वह घर के सामने खेल रहा था, मैं अपने जेठ की लड़की स्नेहा से बोली, ‘‘बाहर गुंजन खेल रहा है उसे ले आओ.’’ वह बाहर ही नहीं, बल्कि पड़ोस में भी खोज आई और बोली, ‘‘गुंजन तो कहीं नहीं है.’’ मैं बोली कि घर बन रहा है कहीं उस में तो नहीं है. और मैं भी चल पड़ी खोजने. 2 दिनों पहले ही उस का लैंटर खुला था, चारों तरफ पटरियां पड़ी थीं.

मैं जब आंगन में घुसी तो देखती क्या हूं कि गुंजन छत पर आंगन के किनारे की तरफ खड़ा है और दूसरा पैर आगे रखते ही वह नीचे गिर जाता. मेरी धड़कनें तेज हो गईं. मगर स्नेहा दौड़ कर बहुत ही स्फूर्ति से ऊपर चढ़ गई और पीछे से गुंजन को पकड़ लिया. मैं आज भी उस समय को सोचती हूं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं.    

– पूनम पांडेय

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पड़ोस में आर्थिक रूप से कमजोर एक विधवा स्त्री मेहनतमजदूरी से अपनी 3 जवान बेटियों का पालन कर रही थी. वह हर समय सभी की मदद करने को तैयार रहती तथा आएदिन थैला लिए कहीं जाती दिखाई देती. कोई नहीं जानता था कि वह कहां जाती है. एक दिन वह उसी तरह बैग लिए जाने लगी तो मैं ने पूछा, ‘‘दीदी, कहां जा रही हो? मैं भी आप के साथ चलूं?’’ उस के ‘हां’ कहने पर मैं उस के साथ गई तो वह मुझे एक अस्पताल में ले गई. वहां आंगन में कुछ महिलाएं बैठ उस की प्रतीक्षा कर रही थीं. वह सीधे उन्हीं के पास जा कर रुकी और थैला खोल कर किसी को जुराबें, किसी को पुराने सूट, किसी को स्कार्फ, मोजे व किताबें, फल आदि देने लगी. मैं हैरान थी.

लौटते समय मैं ने पूछा, ‘‘दीदी, आप इस स्थिति में भी ये सब कैसे कर पाती हैं?’’

वह मुसकरा कर बोली, ‘‘प्रकृति ने कम उम्र में ही मेरा सहारा (पति) छीन लिया. किंतु मैं सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों की आंशिक मदद कर खुश हूं. धन से सेवा न कर पाऊं तो तन से कर देती हूं. जहां भी जाती हूं ऐसे जरूरतमंद लोगों को अपना पता व फोन नंबर दे आती हूं. फिर इसी तरह उन की जरूरत पूरी कर देती हूं.’’

हम लौट आए. मैं उन से इतनी प्रभावित हुई कि आज मैं जहां भी जाती हूं एक अतिरिक्त भराथैला साथ होता है. सच, कुछ करने की चाह हो तो अनेक राहें मिल जाती है.

– सरोज कुमारी

 

सनी लियोन के साथ ये कौन कर रहा है जबरदस्ती..!

सनी लियोन भले ही अपनी एक्टिंग से लोगों का दिल उतना नहीं जीत पा रही हों, लेकिन वो मेहनत कर रही हैं और इस इंडस्ट्री में बहुत ऐसे स्टार्स हैं जिन्हें पहले एक्टिंग नहीं आती थी पर अब आती है. सनी लियोन भी शायद उस लिस्ट में जल्द शुमार हो जाएं, क्योंकि वो मेहनती हैं और अपने काम की कद्र करती हैं. लेकिन हाल ही में एक चर्चित वेबसाइट को दिए एक इंटरव्यू में सनी लियोन ने कहा कि बॉलीवुड उनके साथ जबरदस्ती किए जा रहा है. देखिए उनके सबसे बोल्ड और सच्चे स्टेटमेंट.

बॉलीवुड ने डाला प्रेशर

बॉलीवुड उन पर प्रेशर डाल रहा है कि वो अपने एडल्ट इंडस्ट्री और उससे जुड़ी बातों के बारे में बिल्कुल बात ना करें. ये उस बॉलीवुड के मुंह पर तमाचा है जो एडल्ट कन्टेन्ट परोसता जरूर है पर उसके बारे में बात नहीं करना चाहता!

बॉलीवुड ने किया है अलग

मुझे अभी भी बॉलीवुड में ऐसे ट्रीट किया जाता है जैसे मैं कोई अजनबी दुनिया से आई हूं. खुद के दोस्त परिवार ने भी एक समय पर साथ छोड़ दिया.

लोग एक पॉर्न स्टार को जानते हैं

लोग मुझे जानते ही नहीं है. वो केवल पॉर्न स्टार सनी लियोन या फिर एक्टर सनी लियोन को जानना चाहते हैं.

मैं बिल्कुल अलग हूं

कोई ये मानने को तैयार ही नहीं कि एडल्ट इंडस्ट्री में काम करने वाली लड़की को किताबें पढ़ना या मज़ाकिया और बचकाना होना अच्छा लग सकता है.

मुझे किसी से कोई फर्क नहीं पड़ता

अगर मैं हर बात जो लोग मेरे बारे में बोल रहे हैं उस पर ध्यान देने लगती तो आज यहां नहीं होती…जहां हूं.

मेरे पास बिज़नेस प्लान था और दिमाग भी

मेरे पास एक बिज़नेस प्लान था और एक दिमाग था पैसे कमाने का, शोहरत पाने का. मैंने वो प्लान पर अमल किया. इसमें गलत क्या है.

मीडिया मुझे गिरा देता है

जब भी मैं कुछ अच्छा करती हूं और सोचती हूं कि दो कदम आगे बढ़ गई…कोई ना कोई कुछ ना कुछ ऐसा लिख देता  है कि मैं फिर गिर जाती हूं.

मुझे मेरे काम से कोई शर्म नहीं

जिस काम ने मुझे यहां तक पहुंचाया है उस काम को उसकी पहचान देने में मुझे कोई शर्म नहीं है.

एडल्ट इंडस्ट्री हर जगह होती है

अगर कोई पॉर्न स्टार है तो एक एडल्ट इंडस्ट्री भी हो गई. और कोई भी इंडस्ट्री बिना खरीदार के तो नहीं चल सकती….तो कैसी शर्म. मैं बता के करती हूं कोई बिना बताए!

हर किसी का वन नाईट स्टैंड है

हर किसी का वन नाइट स्टैंड होता है और अगर इस नाम की फिल्म बन रही है तो इतना हंगामा क्यों है.

करारा जवाब सारी औरतों को

सनी लियोन ने कहा था – लेडीज़ मैं आपके हसबैंड को नहीं पाना चाहती हूं, मेरे पास खुद का हसबैंड है.

काम करने में शर्म

मैं जानती हूं कि इंडस्ट्री में कई ऐसे मेल एक्टर हैं जो मेरे साथ स्क्रीन शेयर करने में झिझकते हैं.

भाजपा कार्यसमिति पर छाया रहा ‘भगवा रंग’

भाजपा का झंडा भले ही हरा, सफेद और केसरिया रंग से मिल कर तैयार हुआ हो पर अब भाजपा के हर कार्यक्रम में केसरिया रंग सब पर भारी पड़ गया है. कार्यकर्ता से लेकर नेता तक इस रंग में रंगे नजर आने लगे हैं. केसरिया रंग अब भाजपा की नजर में ‘भगवा रंग’ कहा जाने लगा है. भगवा रंग के बढ़ते चलन का सबसे बड़ा कारण प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भगवा रंग के कपड़े पहनना है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भाजपा की 2 दिन की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में साइंटिफिक कंन्वेशन सेंटर में पूरा भगवा रंग दिखाई दिया. भाजपा के अपने झंडे से अधिक पूरा केसरिया रंग ही छाया हुआ था.

पार्टी के प्रमुख नेता और कार्यकर्ता भगवा रंग की ड्रेस में थे. जो भगवा ड्रेस में नहीं थे वह भगवा गमछा या भाजपा के कमल फूल वाला गले में डाला जाने वाला गमछा पहने हुये थे. भाजपा ने सभा में आने जाने के लिये एंट्री पास बनाया था उसको पहनने के लिये भी भगवा रंग का पट्टा रखा गया था. स्टेज को सजाने में भगवा रंग का कपड़ा कई बार कम पड़ गया. नेताओं के स्वागत के लिये बुके तैयार हुआ तो उसमें भी भगवा रंग की छाप दिख रही थी.

देश के 14 राज्यों में भाजपा की अपनी और 3 राज्यों में सहयोगी दलों के साथ सरकार है. पार्टी इस ताकत को और बढ़ाने की दिशा में काम करने को तैयार है. केन्द्र सरकार ने 3 साल में क्या किया और योगी सरकार ने अपने कम समय में क्या किया इसकी चर्चा खूब हुई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शाकाहार को बढ़ावा देते हुए कहा कि हमारे मंत्रिमंडल में आधे से ज्यादा शाकाहारी हैं. मै खुद प्याज लहसुन नहीं खाता, हमारा स्वास्थ्य तो अच्छा है. हम किसी से कमजोर नहीं. हमारे उम्रदराज मंत्री तक सुबह 9 बजे से लेकर रात का 1-1 बजे तक काम करते हैं.

बड़े नेताओं का इस बात पर जोर रहा कि कार्यकर्ता अनुशासन में रह कर काम करे. कार्यसमिति को सरकारी छाया से दूर रखने की कोशिश की गई. कार्यकर्ताओं के रहने लिये नेताओं के आवास का प्रयोग किया गया. किसी सरकारी गेस्ट हाउस में कार्यकर्ता नहीं रोके गये. होटल के बजाय अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री आवास में मंत्रियों के साथ भेाजन किया. भाजपा का अब पूरा ध्यान निकाय चुनावों को लेकर है. 2017 के लोकसभा में जीत के लिये यह बड़ी कवायद है. इसके लिये भाजपा ने ‘मेरा घर भाजपा का घर’ नामक स्टीकर तैयार कराया है. इसके जरीये ही भाजपा अपना प्रचार करेगी.

मुख्यमंत्री योगी ने कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के लिये अपनी सरकार का बखान किया. अपनी आत्मप्रशंसा में कार्यसमिति डूबी रही. विधानसभा जीत का उत्साह बना हुआ है. सरकार इसे अभी पूरी तरह से हिन्दुत्व के रंग में रंग देना चाहती है. जिससे प्रदेश के लोग दूसरी ओर सोच न पाये. भाजपा निकाय और उसके बाद आने वाले लोकसभा चुनावों को भगवा रंग के सहारे ही जीतना चाहती है. ऐसे में पूरी तरह से भगवा प्रचार प्रसार का ध्यान रखा जा रहा है. हिन्दू वोट बैंक के धुव्रीकरण को तोड़ना विरोधी पार्टियों के लिये चुनौती भरा काम है. भाजपा इसका पूरा लाभ उठाना चाहती है.       

कुछ ऐसा रहा अरुणा ईरानी का फिल्मी सफर

बॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा अरुणा ईरानी आज अपना 65वां जन्मदिन मना रही हैं. अरुणा का जन्म मुंबई में 3 मई 1952 को हुआ था. अरुणा ने अपने फिल्मी करियर में 350 से ज्यादा हिन्दी फिल्मों और कई टीवी सीरियल्स में भी काम किया है.

महज 9 साल की उम्र में अरुणा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी. उन्होंने साल 1961 में रिलीज हुई फिल्म 'गंगा जमुना' से हिन्दी सिनेमाजगत में कदम रखा और इसके बाद उन्होंने अपने जीवन में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. अरुणा के फिल्मी करियर ने हमें कई ऐसे गानें दिए हैं जो आज भी पसंद किए जाते हैं.

'थोड़ा रेशम लगता है', 'चढ़ती जवानी मेरी चाल मस्तानी', 'दिलबर दिल से प्यारे', 'मैं शायर तो नहीं' जैसे बॉलीवुड फिल्मों के गीतों पर थिरकने वाली अभिनेत्री अरुणा ईरानी को बच्चा-बच्चा पहचाता है. अरुणा ने फिल्मों में अपने बेजोड़ अभिनय से दर्शकों को लुभाया. वे अपने अभिनय के साथ-साथ अपने नृत्य के लिए भी प्रसिद्ध हैं.

अरुणा ने बड़े-पर्दे के बाद छोटे पर्दे का रुख करने से कोई परहेज नहीं किया और वे आज भी टेलीविजन पर सक्रिय हैं, जो अन्य कलाकारों के लिए प्रेरणा हो सकती है. साल 1961 में उन्होंने दिलीप कुमार के साथ फिल्म 'गंगा जमना' से बतौर बाल कलाकार अपने अभिनय करियर की शुरुआत की. तभी ही दिलीप कुमार उनके अभिनय से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने अरुणा के अभिनय को सराहा.

अगर आंकड़ों पर ध्यान दें तो, अरुणा अब तक 357 फिल्मों में काम कर चुकी हैं. फिल्मों में भले ही अरुणा ईरानी ने सह-कलाकार के रूप में अभिनय किया हो, लेकिन अपने अभिनय से उन्होंने दर्शकों के दिलों में जगह बना ली.

आपको ये बात जाननी चाहिए कि अरुणा के पिताजी की एक थिएटर कंपनी थी. उनके दो भाई इंद्र कुमार और आदि ईरानी हैं और ये दैनो भी फिल्म उद्योग से जुड़े हुए हैं. अरुणा ने बाल कलाकार, कॉमेडियन, खलनायिका, हीरोइन व चरित्र अभिनेत्री के रूप में काम किया.

साल 1961 में आई फिल्म 'गंगा जमुना' में उन्होंने चरित्र अभिनेत्री अजरा के बचपन की भूमिका निभाई थी और हेमंत कुमार के गीत 'इंसाफ की डगर पे बच्चों दिखाओ चलके' में अपने गुरुजी के साथ गा रहे बच्चों में भी वे शामिल हुईं. इसके बाद उन्होंने 'जहांआरा', 'फर्ज', 'उपकार' जैसी फिल्मों में छोटे-मोटे किरदार निभाए. फिर कॉमेडी किंग महमूद के साथ उनकी जोड़ी बनी, जो 'औलाद', 'हमजोली', 'नया जमाना' जैसी फिल्मों में खूब सराही गई.

साल 1971 में अरुणा के करियर में महत्वपूर्ण मोड़ उनकी फिल्म 'कारवां' के साथ आया. इस सुपरहिट म्यूजिकल फिल्म में उन्होंने तेज-तर्रार बंजारन की यादगार भूमिका निभाते हुए अपने अभिनय कौशल के साथ-साथ नृत्य की प्रतिभा का भी प्रदर्शन किया. इसके बाद अरुणा को महमूद की साल 1972 में प्रदर्शित फिल्म 'बॉम्बे टू गोवा' में बतौर नायिका अभिनय करने का मौका मिला, इस फिल्म में नायक अमिताभ बच्चन थे. फिल्म 'बॉम्बे टू गोवा' एक बड़ी हिट साबित हुई.

अभिनेता राजकपूर की साल 1973 में आई फिल्म 'बॉबी' में एक संक्षिप्त मगर दिलचस्प भूमिका में उन्होंने अपनी छाप छोड़ी. गुलजार की क्लासिक कॉमेडी 'अंगूर' में देवेन वर्मा की पत्नी के रूप में वह अपने किरदार में पूरी तरह डूबी नजर आईं. इसके बाद वे लगातार एक सशक्त अभिनेत्री के तौर पर हिन्दी सिनेमा में अपना विशेष स्थान बनाती चली गईं. अपने करियर के दौरान अरुणा कई मराठी फिल्में भी कर चुकी हैं.

अरुणा ने बॉलीवुड इंडस्ट्री में आने वाले कई नये अभिनेता और अभिनेत्रियों की मदद की. उन्होंने 'फर्ज' में जितेंद्र, 'बॉबी' में ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया, 'सरगम' में जयाप्रदा, 'लव स्टोरी' में कुमार गौरव और 'रॉकी' में संजय दत्त की काफी मदद की थी, लेकिन दुर्भाग्य ये रहा कि ये सभी सुपरस्टार बन गए और अरुणा सपोर्टिंग एक्ट्रेस बनकर ही रहीं. हालांकि, उन्हें साल 1884 में रिलीज हुई फिल्म 'पेट प्यार और पाप' में शानदार अभिनय के लिए और साल 1993 की फिल्म 'बेटा' के लिए ‘बेस्ट सपोर्टिंग फिल्मफेयर अवॉर्ड’ मिल चुका है. साल 2012 में 57वें फिल्मफेयर में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है.

अरुणा ईरानी ने नब्बे के दशक से 'बेटा' और 'राजा बाबू' जैसी फिल्मों से मां का किरदार निभाना शुरू किया. 'बेटा' में उन्होंने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और फिल्मफेयर अवार्ड जीता. साल 2000 में उन्होंने धारावाहिक 'जमाना बदल गया' से छोटे पर्दे पर अभिनय की शुरुआत की थी. फिल्म 'यार मेरी जिंदगी' (2008) के बाद से वे टेलीविजन धारावाहिकों में अलग-अलग तरह के किरदारों में नजर आ रही हैं.

इसके बाद 'कहानी घर घर की' (2006-2007), 'झांसी की रानी' (2009-2011), 'देखा एक ख्वाब' (2011-2012), 'परिचय' (2013-2013), 'संस्कार धरोहर अपनो की' (2013-14) जैसे कई टेलीविजन धारावाहिकों में अरुणा अहम किरदार निभा चुकी हैं.

खबरों के अनुसार आज के दौर के निर्देशकों में अरुणा, करण जौहर और इम्तियाज अली के साथ काम करना चाहती हैं, क्योंकि उनके मुताबिक ये निर्देशक नए दौर के अनुरूप फिल्में तो बनाते ही हैं और भावनाओं पर भरपूर जोर देते हैं. मनोरंजन जगत में अरुणा का सिक्का कुछ कम नहीं है, उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है. बचपन से काम करती आ रहीं अरुणा ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि वे अपनी अंतिम सांस तक काम करते रहना चाहती हैं.

उनके जन्मदिन पर हम तो यही कामना करेंगे कि वह यूं ही लंबे समय तक दर्शकों का मनोरंजन करती रहें.

“विश्वरूपम 2” का पहला हिंदी और तेलुगु पोस्टर हुआ रिलीज

कमल हसन स्टारर फिल्म 'विश्वरूपम 2' का पहला पोस्टर रिलीज हो गया है. कमल हसन ने अपने ट्विटर पर इस पोस्टर को रिलीज करते हुए लिखा, 'मुझे ये घोषणा करते हुए खुशी हो रही है. “विश्वरूपम 2” का पहला हिंदी पोस्टर और तेलुगु पोस्टर रिलीज किया गया. इस पोस्टर में तिरंगा और घायल कमल हसन नजर आ रहे हैं.

पोस्टर में कमल अपने दिल पर हाथ रखे हुए हैं और उनके चेहरे पर पट्टी बंधी हुई है. ये साल 2013 में आई फिल्म विश्वरूपम का दूसरा भाग है. फिल्म के पहले पार्ट को अपनी रिलीज के समय काफी विरोध का सामना करना पड़ा था. फिल्म पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगा था.

शुरुआत में फिल्म को तमिलनाडु में बैन किया गया था. वहीं देश के दूसरे राज्यों में फिल्म बेहद सीमित स्तर पर रिलीज हुई थी. बाद में फिल्म से बैन हटा लिया गया था. विश्वरूपम 2 की रिलीज डेट को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं हो पाई है. पहले फिल्म की रिलीज डेट 3 अगस्त थी लेकिन बाद में इसे बदल दिया गया. अब फिल्म के 6 अक्टूबर को रिलीज होने की संभावना है.

ये फिल्म करीब 75 करोड़ के बजट में बनी है. फिल्म में पहले पार्ट की स्टारकास्ट दूसरे पार्ट में दिखेगी लेकिन इस पार्ट में वहिदा रहमान भी नजर आएंगी. वहिदा काफी समय बाद बड़े पर्दे पर नजर आएंगी.

जब क्रिकेट इतिहास में लगा 3 मीटर का छक्का

क्रिकेट बल्लेबाजों का खेल माना जाता है. आधुनिक तकनीक और नए नियम गेंदबाजों को इस खेल में काफी हद तक कमजोर साबित करते हैं. ऐसा लगता है मानो गेंदबाज अपनी पिटाई के लिए ही गेंदबाजी कर रहा है.

लेकिन इन सबके बावजूद क्रिकेट के खेल में एक बल्लेबाज को 6 रन हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करती पड़ती है. लेकिन अगर बल्लेबाज गेंद को बिना सीमा रेखा के पार पहुंचाए ही एक गेंद में 6 रन हासिल करे, तो क्या ऐसा मुमकिन है?

जी हां बिलकुल, एक बल्लेबाज गेंद को बिना बाउंड्री पार भेजे भी एक गेंद में 6 रन हासिल कर सकता है. क्रिकेट इतिहास में महज 3 मीटर के एक शॉट में पूरे 6 रन बन गए थे. इसे ‘क्रिकेट का सबसे छोटा सिक्स’ भी कहा जाता है.

ऐसा ही कुछ नजारा 2002 में श्रीलंका में आयोजित हुई आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच एक मैच में देखने को मिला. जब पाकिस्तानी टीम की ओर से उसके विकेटकीपर बल्लेबाज राशिद लतीफ 26वां ओवर खेल रहे थे और श्रीलंका की तरफ से स्पिनर उपुल चंदना गेंदबाजी कर रहे थे उस वक्त एक अजीबोगरीब नजारा देखने को मिला था. जैसे ही उपुल चंदना ने गेंद को लेग साइड की दिशा में डाला तब लतीफ ने स्वीप किया और गेंद विकेटकीपर संगकारा के पीछे रखे हेलमेट पर जा लगी. तब अम्पायर स्टीव बकनर ने पेनल्टी के रूप में 5 रनों का इशारा कर दिया.

वह पांच रन बल्लेबाजी करने वाली टीम पाकिस्तान के खाते में जुड़े, चूंकि दोनों बल्लेबाज गेंद हेलमेट पर लगने से पहले ही एक रन के लिए दौड़ पड़े थे इसलिए बल्लेबाज के खाते में एक रन और पेनाल्टी के पांच अतिरिक्त रन पाकिस्तान के खाते में जुड़े. इस तरह यह 6 रन क्रिकेट इतिहास का सबसे छोटा छक्का बन गया.

आपको बता दें की अगर गेंद के हेलमेट पर लगने से पहले बल्लेबाज़ दौड़कर एक रन पूरा कर लेते हैं तो बल्लेबाज के खाते में 1+5 रन जोड़े जाते हैं.

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