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बड़ों के संघर्ष से लें प्रेरणा

सफलता और असफलता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जीवन में इन दोनों का खासा महत्त्व है. असफलता से अधिकतर लोग घबरा कर अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं. ऐसे में हमें बड़ों के संघर्ष से प्रेरणा मिलती है, जिस के सहारे हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ते हैं. महात्मा गांधी से ले कर अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन, लाल बहादुर शास्त्री और राजेंद्र प्रसाद जैसे बहुत से ऐसे महापुरुष हुए हैं, जिन के जीवन से प्रेरणा ली जा सकती है. ये लोग भी कई बार बचपन से ले कर पढ़ाई और बाकी जीवन में असफल हुए पर हार न मानी.

बड़े लोगों की आत्मकथा या उन के संघर्ष के बारे में जान कर पता चलता है कि सफलता मेहनत के बाद ही मिलती है. इन बड़े लोगों की कहानियों से हमें प्रेरणा मिलती है. उन की राह पर चल कर हम भी सफल हो सकते हैं. युवावस्था में कैरियर से ले कर निजी संबंधों तक कई बार असफलता हाथ लगती है. काफी मेहनत से पढ़ाई करने के बाद भी कंपीटिशन में सफलता नहीं मिलती. खेल, ऐक्टिंग, डांस और सिंगिंग जैसे कैरियर में भी असफलता ज्यादा और सफलता कम मिलती है.  ऐसे में जब हम बड़े लोगों के संघर्ष को देखते हैं तो मन मजबूत हो जाता है. हम नए सिरे से मेहनत करने लग जाते हैं. इस के बाद हम दोहरी मेहनत से सफलता के लिए जुट जाते हैं. सही दिशा में किए गए प्रयास से सफलता मिलनी तय है.

असफलता में छिपी सफलता

असफलता में ही सफलता छिपी होती है. जरूरत इस बात की है कि हम यह अवश्य देखें कि किन कारणों से असफलता मिली है. अगर हम सही माने में विचार करेंगे तो साफ पता चल जाता है कि हम क्यों असफल हुए? कई बार अपनी सफलता के लिए हम खुद को जिम्मेदार न मान कर दूसरे पर दोषारोपण करते हैं, जो सही नहीं है. जब तक हम खुद का सही तरह से आत्मविवेचन नहीं करेंगे तब तक हमें असफलता के कारण का पता ही नहीं चलेगा और उसे दूर कर हम सफलता की राह पर आगे नहीं बढ़ सकते. ऐसे में जरूरी है कि हम खुद अपना आत्मविवेचन सही तरह से करें, इसी से सफलता का रास्ता निकलता है. शिमला में पहचान विमन वैलफेयर सोसाइटी चलाने वाली मनोविज्ञानी बिंदू जोशी कहती हैं, ‘‘जिंदगी की तपिश को मुसकरा कर झेलिए, ‘धूप कितनी भी तेज हो समंदर सूखा नहीं करते.’ असफलता से घबराने की जरूरत नहीं है. बड़े लोग हमारे प्रेरणास्रोत हैं, उन के जीवन के संघर्ष से पता चलता है कि सफल होने से पहले वे कितने प्रयास करते हैं.

‘‘आमतौर पर युवाओं को लगता है कि हम पहली बार में ही सफल क्यों नहीं हो गए. यह सोच ठीक नहीं होती. यही हमें डिप्रैशन का शिकार बना देती है. बी पौजिटिव छोटा शब्द जरूर है, पर इस का असर गहरा है. यह आगे बढ़ने की राह दिखाता है.’’

जरूरी है लगातार प्रयास

 ‘‘लाइफ इज नौट द बैड औफ रोज यानी जीवन सदा खुशहाल नहीं रहता,’’ यह कहती हैं टीचर दीपिका चतुर्वेदी. लखनऊ निवासी दीपिका आगे कहती हैं, ‘‘बिना संघर्ष के सफलता नहीं मिलती. देश को आजाद कराने में हमारे स्वतंत्रता सैनानियों ने लंबे समय तक लड़ाई लड़ी. उन की कहानियों को पढ़ कर हमें पता चलता है कि उन्हें महान बनने में कई बार असफलता मिली और लंबा संघर्ष करना पड़ा. आज की युवापीढ़ी कम मेहनत में सफलता पाना चाहती है, इसीलिए उसे निराशा भी जल्दी मिलती है. यह सोच रखना बहुत जरूरी है कि सफलता आसानी से नहीं मिलती और असफलता से घबराना नहीं चाहिए.‘‘

परिवार का साथ मददगार

एकल परिवारों के बच्चे अपने मन की बात खुल कर नहीं कह पाते, क्योंकि वे दब्बू बन जाते हैं. मातापिता के पास उन के लिए समय की कमी होती है. वे बच्चों के मन का हाल नहीं जान पाते. ऐसे में असफल हो रहे बच्चों को भावनात्मक मदद नहीं मिलती. कहानीकार प्रिया सिंह कहती हैं, ‘‘हमारे घरपरिवार में ही ऐसे तमाम उदाहरण मौजूद हैं, जिन्हें असफलता के बाद सफलता मिली है. संयुक्त परिवारों में दादादादी या नानानानी ऐसी बातें बच्चों को बताती थीं.

‘‘अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘बागवान’ में दिखाया गया था कि बच्चे अपने मातापिता के बजाय दादादादी के ज्यादा करीब थे. वे दादादादी को अपने मन की बात आसानी से बताते थे. इसी तरह सामान्य घरों में भी होता था. एकल परिवारों में बच्चे ज्यादा हतोत्साहित होते हैं. संयुक्त परिवारों में यह हालात कम दिखते हैं. परिवार का साथ और देखरेख भी बहुत मददगार होती है.’’

सफलता का ताला खोलती है संघर्ष की चाबी

मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रैजुएट दीपाली श्रीवास्तव का मानना है, ‘‘जीवन में सफलता संघर्ष के बाद ही मिलती है. संघर्ष के दौर में जो बातें निराशाजनक होती हैं, सफलता मिलने के बाद वही सब अच्छा लगने लगता है. उस की यादें सुखद हो जाती हैं. हम जब तमाम फिल्म स्टारों की चकाचौंध भरी जिंदगी देखते हैं तो सोचते हैं कि इन लोगों का रहनसहन कितना अच्छा है, लेकिन हमें उस समय यह पता नहीं होता कि यह सफलता उन्हें कितने संघर्ष के बाद मिली है. ‘‘ये लोग जब अपने बारे में बताते हैं तो पता चलता है कि इन का जीवन भी संघर्ष भरा था. वे सड़क पर खड़े हो कर खाना खाते थे, एक छोटे से घर में रहते थे, बस और ट्रेन से सफर करते थे. कई लोगों ने तो यहां तक बताया कि वे संघर्ष के दिनों में कईकई दिन भूखे रहे. संघर्ष के जरिए ही सफलता का ताला खुलता है. बड़े लोगों के संस्मरण हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देने के साथसाथ निराशा भरे जीवन से बाहर निकालने का काम भी करते हैं.’’

बड़ों की जीवनी प्रेरणादायक

बड़े लोगों का जीवनपरिचय सदा हमारी शिक्षा व्यवस्था का अंग रहा है. इस की सब से बड़ी वजह यह थी कि इस से बच्चों को पता चल जाता था कि महान लोग कैसे सफल हुए. पहले लोगों के पास अवसर कम और साधन सीमित होते थे. ऐसे में सफलता बड़ी मुश्किल से मिलती थी. समाजसेवी शिवा पांडेय कहती हैं, ‘‘प्रेरक प्रसंग, जीवनी और मार्गदर्शक कहानियों का जीवन में काफी महत्त्व होता है. इन्हें पढ़ने के बाद उत्साह का संचार होता है और निराशा का भाव खत्म हो जाता है.

‘‘आज बड़ी संख्या में युवाओं के आत्महत्या के उदाहरण सुनने को मिलते हैं, अगर वे सही माने में सफलता और असफलता के बीच के महत्त्व को समझ जाएं तो ऐसे हालात से बचा जा सकता है. हर क्षेत्र में असफलता होती है. हर महान आदमी को उस से गुजरना पड़ता है. फेल होने के बाद दोगुनी मेहनत की जरूरत होती है. पूरे उत्साह से किया गया प्रयास सफल जरूर होता है. बस, हिम्मत नहीं हारनी चाहिए.’’

सही दिशा में हो प्रयास

शादी के बाद सौंदर्य प्रतियोगिता में हिस्सा ले कर मिसेज यूपी बनी इलाहाबाद की काजल माधवानी कहती हैं, ‘‘पेरैंट्स को शुरू से ही बच्चों को ये प्रेरणादायक कहानियां पढ़ने की आदत डालनी चाहिए. बड़े लोगों की जीवनी बच्चे खुद न पढ़ सकें तो उन्हें पढ़ कर सुनाएं. केवल राजनीति या फिल्म ही नहीं विज्ञान के क्षेत्र में भी देखें तो पता चलता है कि कितनी बार असफल होने के बाद प्रयोग सफल होते हैं. आविष्कारक कईकई बार असफल होने के बाद अपने प्रयोग में सफल हुए हैं. भाप का इंजन, बिजली का बल्ब, टैलीफोन जैसे बहुत से ऐसे आविष्कार हैं जो धीरधीरे वैज्ञानिकों द्वारा किए गए. आविष्कार पहली बार कम ही सफल होते हैं.

‘‘आविष्कार करने वाला कभी हार नहीं मानता. लगातार प्रयास करने के बाद ही सफलता हासिल होती है. वैज्ञानिकों की जीवनी पढ़ने से पता चलता है कि यदि वे पहली बार मिली असफलता से घबरा कर हिम्मत हार गए होते तो आज इतनी सारी चीजें नहीं मिलतीं. जरूरत इस बात की है कि हम सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें तभी सफलता निश्चित होगी.’’

संघर्ष से मिलती है प्रेरणा

महिला नेता और बिजनैस विमन वंदना प्रसाद कहती हैं, ‘‘महान लोगों के संघर्ष के साथ ही अपने मातापिता, बड़े भाईबहन या आसपास के सफल लोगों की बातें भी हमें प्रभावित करती हैं. कई बार बच्चों को लगता है कि कहानियां काफी पहले की हैं. अब ये उतनी प्रभावी नहीं रहीं. ऐसे में आज के समय में जो लोग अपनी मेहनत से सफल हुए हैं उन को देख कर भी प्रेरणा ली जा सकती है, जो जोखिम लेने को तैयार होता है, वही सफल रहता है.

‘‘जोखिम में असफलता भी मिलती है. जरूरत इस बात की है कि आप असफलता से घबरा कर न बैठें. घरपरिवार के साथ शिक्षा व्यवस्था में यह होना चाहिए कि महान लोगों के विषय में उन की असफलताओं के बारे में बताया जाए. यह भी बताया जाए कि असफलता से किस तरह से बाहर आ कर उन लोगों को सफलता मिली. आमिर खान की फिल्म ‘थ्री इडिएट’ में एक शब्द ‘औल इज वैल’ के महत्त्व को प्रभावी तरह से दिखाया गया. यह सामान्य जीवन में प्रेरणा देता है.’

टिप्स स्वस्थ जीवनशैली के

झड़ते बाल, हड्डियों में दर्द, ब्लडप्रैशर में उतारचढ़ाव, थकावट, बेचैनी, अवसाद, ये सभी बढ़ती उम्र की निशानियां हैं, जिन का सामना हर महिला को करना ही पड़ता है. मगर गंभीर बात यह है कि अब ये सारी समस्याएं वक्त से पहले ही महिलाओं को घेर रही हैं.

इस का कारण बताते हुए मैक्स हैल्थ केयर की सीनियर काउंसलर एवं न्यूट्रिशनिस्ट डाक्टर मंजरी कहती हैं, ‘‘गांवों की अपेक्षा शहर की महिलाओं को ये बीमारियां अधिक होती हैं. इस के 2 कारण हैं. पहला यह कि शहर की महिलाओं में शारीरिक गतिविधियां न के बराबर होती हैं और दूसरा यह कि गांव से शहर तक पहुंचतेपहुंचते अनाज और फल इतनी तकनीकों से गुजर चुके होते हैं कि वे अपनी प्राकृतिक गुणवत्ता खो बैठते हैं. उदाहरण के तौर पर पोषक तत्त्व अनाज की ब्रान में होते हैं, मगर खूबसूरत दिखाने के लिए इन्हें इतना रिफाइन कर दिया जाता है कि ये अपनी सारी गुणवत्ता खो देते हैं.’’

जाहिर है, ऐसे में महिलाएं कितनी ही डाइट प्लान के मुताबिक चलें, पर जिन पोषक तत्त्वों की उन्हें जरूरत होती है वे उन के शरीर में नहीं पहुंच पाते. मगर महिलाओं की इस समस्या को दूर करने के लिए बाजार में ऐसे हैल्थ सप्लिमैंट्स मौजूद हैं, जो महिलाओं को वे सारे पोषक तत्त्व दे सकते हैं, जो उन्हें साधारण आहार से नहीं मिल पाते.

इस बाबत डा. मंजरी कहती हैं, ‘‘महिलाओं को कैल्सियम, विटामिन, प्रोटीन के अलावा कुछ माइक्रोन्यूट्रिएंट्स जैसे जिंक, पोटैशियम, मैग्नीशियम और कौपर की भी जरूरत होती है. फलों और अनाज दोनों में ही इन के बहुत कम स्रोत उपलब्ध हैं. इसलिए इन की भरपाई हैल्थ सप्लिमैंट्स से की जा सकती है.’’

डा. मंजरी महिलाओं के लिए निम्न कुछ जरूरी सप्लिमैंट्स के बारे में बताती हैं:

आयरन: महिलाओं में ऐनीमिया का रोग आम है. इस की बड़ी वजह शरीर में आयरन की कमी होती है. दरअसल, जब शरीर में रैड ब्लड सैल्स बनना बंद हो जाते हैं तो महिला को ऐनीमिया होने का खतरा रहता है. ऐनीमिया में अधिकतर महिलाओं को सांस लेने में दिक्कत और थकावट महसूस होती है. खून की कमी पूरी करने के लिए एलिमैंटरी आयरन, बी6 और बी12 की जरूरत होती है. ये सब एकसाथ एक आहार में नहीं मिल सकते, इसलिए रिवाइटल एच जैसे हैल्थ सप्लिमैंट्स के द्वारा इन्हें खुराक में शामिल किया जा सकता है.

मैग्नीशियम: शरीर से ऐनर्जी रिलीज करने के लिए मैग्नीशियम की जरूरत होती है. डा. मंजरी कहती हैं कि महिलाएं शारीरिक गतिविधियां कम से कम करती हैं, इसलिए शरीर में उतनी ऐनर्जी नहीं रहती. इस वजह से हड्डियां भी कमजोर हो जाती हैं. इस के लिए महिलाओं को मैग्नीशियम की जरूरत पड़ती है. वैसे तो मैग्नीशियम ज्वार, बाजरा, रागी में मौजूद होता है, मगर शहरी महिलाओं को इस तरह का अनाज मुश्किल से ही मिल पता है और जो मिलता भी है वह पैक्ड और प्रिजर्वेटिव वाला होता है. जबकि इस अनाज के ताजा पिसे आटे से बनी रोटियां खाने से ही मैग्नीशियम मिल सकता है. इसलिए इन के स्थान पर मैग्नीशियमयुक्त हैल्थ सप्लिमैंट्स लिए जा सकते हैं.

फौलेट: शरीर में रैड ब्लड सैल्स की संख्या बढ़ाना, मस्तिष्क की कार्यप्रणाली सुधारना और मानसिक सेहत के लिए आहार में फौलेट की उपस्थिति जरूरी होती है. मगर जिन फलों और पत्तों वाली सब्जियों में फोलेट मौजूद होता है उन के शुद्ध होने की गारंटी नहीं होती. इसलिए बाजार में खास महिलाओं के लिए मौजूद रिवाइटल एच जैसे सप्लिमैंट्स से इस की भरपाई की जा सकती है.

जिंक: महिलाओं को अपने आहार में जिंक भी शामिल करना चाहिए, क्योंकि इस की कमी से बालों का झड़ना, मुंह से स्वाद का गायब हो जाना, घाव का देर से भरना जैसी समस्याएं हो जाती हैं. वैसे तो कई अनाजों और फलों में यह मौजूद होता है, मगर ये फल सब्जियां इस की सही मात्र शरीर में पहुंचाने में सक्षम नहीं होतीं. बाजार में कई मल्टीविटामिंस सप्लिमैंट्स मौजूद हैं, जिन में जिंक भी शामिल होता है. इस का सेवन महिलाओं को कैंसर जैसे गंभीर रोग से भी बचाता है.

विटामिंस और कैल्सियम: महिलाओं को अपने आहार में इन्हें शामिल करना जरूरी होता है, क्योंकि ये हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ ही हारमोंस में भी संतुलन बनाए रखते हैं. विटामिंस में महिलाओं को सब से अधिक विटामिन ए, सी और डी की जरूरत होती है. यदि वे कैल्सियम सप्लिमैंट ले रही हैं तो ध्यान रखें कि संतुलित आहार और व्यायाम जरूर करें, क्योंकि कैल्सियम का केवल 1/3 हिस्सा ही शरीर में अवशोषित होता है बाकी हिस्सा हड्डियों या दूसरे और्गंस में जम जाता है. ऐसा न हो इस के लिए व्यायाम जरूरी है.

हैल्थ सप्लिमैंट्स आप को वे सभी पोषक तत्त्व दे सकते हैं, जो आप को भोजन से भी नहीं मिलते. मगर इन का सेवन चिकित्सक से पूछने के बाद ही करें.                                    

कौन सा विटामिन क्यों जरूरी

विटामिन ए: यह आंखों की रोशनी और इम्यून सिस्टम को सुधारता है.

विटामिन बी1: नर्वस सिस्टम की कार्यप्रणाली को सामान्य बनाता है.

विटामिन बी2: यह भी आंखों की रोशनी को बढ़ाने में फायदेमंद है.

विटामिन बी3: यह त्वचा संबंधी दिक्कतों को दुरुस्त करने का अच्छा विकल्प है.

विटामिन बी6: मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है.

फौलिक ऐसिड: यह शरीर में सही रक्तसंचार के लिए आवश्यक है.

बायोटिन: बालों से जुड़ी समस्या को दूर करने के लिए आहार में बायोटिन जरूर शामिल करें.

विटामिन बी12: यह नर्वस सिस्टम और इम्यून सिस्टम की कार्यप्रणाली सुधारता है.

विटामिन सी: त्वचा, बालों और इम्यूनिटी के लिए जरूरी है.

विटामिन डी: यह कैल्सियम के अवशोषण के लिए आवश्यक है.

विटामिन ई: शरीर में मौजूद कोशिकाओं के लिए सुरक्षाकवच है और तनाव को दूर करने में मददगार है.

विटामिन के1: यह शरीर में खून जमने की समस्या को दूर करता है.

विश्वव्यापी दृष्टिकोण विकसित करने की जरूरत

निर्माण, अनुसंधान, सुशासन, मानवीय  स्वतंत्रताओं, संवैधानिक सरकारों, जनता की चाह, निरंकुश मीडिया, गरीबी व बीमारी से लड़ाई की जगह दुनिया भर में नए ट्रैंड उभर रहे हैं, जो जनता को न जाने किस तरफ ले जा रहे हैं. यह सरकारों की जबरदस्ती के कारण हो रहा है या तकनीक की नई खोजों के कारण और उन के बावजूद कहना थोड़ा कठिन होता जा रहा है. इन उदाहरणों को देखिए :

–       फिलीपींस के  राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर देश में नशीली दवाओं की तस्करी नहीं रुकी तो सैनिक शासन लगाया जाएगा. एक बैठक में उन्होंने देश में भयावह होती ड्रग्स की समस्या पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं से देश में 40 लाख लोग प्रभावित हैं. यदि यह समस्या अधिक गंभीर हुई तो मैं मार्शल लौ की घोषणा कर दूंगा. राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट और कांग्रेस का हवाला देते हुए कहा कि हमें इस संबंध में कोई नहीं रोक सकता. मेरे लिए देश सर्वोपरि है. नशीली दवा के तस्करों के खिलाफ चलाए अभियान में गत वर्ष जुलाई से अब तक 6 हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 10 लाख से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है या फिर खुद उन्होंने आत्मसमर्पण किया है.

–       जापान के बुजुर्ग जेल जाना पसंद कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें वहां वे तमाम सुविधाएं मिल रही हैं जो उन के घर में मौजूद नहीं हैं. ये लोग जेल जाने के लिए चोरी जैसे अपराध कर रहे हैं. जेल में समय पर भोजन और चिकित्सकीय सुविधाएं मिलती हैं और बुढ़ापे में इस से ज्यादा इंसान को क्या चाहिए? रोज सुबह पौने 7 बजे उठना, 20 मिनट बाद नाश्ता करना. फिर ठीक 8 बजे काम पर पहुंच जाना. समय पर दोपहर तथा रात्रि का भोजन मिलता है. यह  बुजुर्ग कैदियों की दिनचर्या है.

बुजुर्ग कैदियों की देखरेख के लिए सरकार ने अलग से बजट जारी किया है. वहां की जेलें नर्सिंगहोम बनती जा रही हैं. बुजुर्गों का अकेलापन जेल जाने का एक प्रमुख कारण है. बुजुर्गों को जेल में कई लोगों के साथ रहने का मौका मिलता है. वे घर की तरह अकेलापन व मायूसी महसूस नहीं करते. पुलिस की एक रिपोर्ट में बुजुर्गों के अपराध में वृद्धि के लिए आर्थिक कठिनाई, बुजुर्गों की बढ़ रही आबादी और उन में बढ़ती लालची प्रवृत्ति को जिम्मेदार ठहराया गया है. उत्तरी ब्राजील की एक जेल में 2 गिरोहों के बीच हुई हिंसा में 10 कैदियों के मारे जाने की खबर थी. ब्राजील की जेलें कैदियों के बीच होने वाली हिंसा के लिए विश्व में बदनाम हैं.

–       तालिबान के कब्जे में कैद लोगों के वीडियो में एक अमेरिकी और एक आस्ट्रेलियाई नागरिक दिखाई दिया है. इन दोनों का अपहरण पिछले साल अगस्त में काबुल से किया गया था. वीडियो तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने प्रसारित किया. यह वीडियो इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि ये दोनों जीवित हैं. हिंसाग्रस्त अफगानिस्तान के उत्तरी प्रांत जावजान में सैकड़ों महिलाओं ने आतंकवादी संगठन इसलामिक स्टेट और तालिबान के खिलाफ हथियार उठा लिए हैं.

अपने परिवार पर ढाए जुल्मों से दुखी इन महिलाओं ने यह कदम उठाया है. अफगानिस्तान के  गृह मंत्रालय के उप प्रवक्ता नजीब दानिश ने कहा कि हम किसी भी प्रकार के सशस्त्र समूह का तब तक समर्थन नहीं करेंगे, जब तक वे सेना के अंतर्गत नहीं आते. हम उम्मीद करते हैं कि ये महिलाएं अफगानिस्तान में सुरक्षाबलों में शामिल हों तो उन्हें सेना के हिस्से के रूप में मदद कर सकते हैं. दूसरी ओर, महिलाओं ने सेना पर उन की सुरक्षा करने में असमर्थ रहने का आरोप लगाया है.

–       अगर समुद्र का जलस्तर महज 1 मीटर बढ़ता है तो पर्यटनस्थली माने जाने वाला मालदीव जलमग्न हो जाएगा. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की अर्थ औब्जर्वेटरी रिपोर्ट में यह अंदेशा जताया गया है. मालदीव दुनिया के उन तमाम देशों में से एक है, जिन के अस्तित्व पर जलवायु परिवर्तन का खतरा मंडरा रहा है. मालदीव वास्तव में एक द्वीप समूह है. पर्यटन मालदीव की अर्थव्यवस्था का मूल आधार है. संयुक्त राष्ट्र संघ का कहना है कि समुद्री जलस्तर में बढ़ोतरी से मालदीव अपना बहुत कुछ खोसकता है. मालदीव एशिया का सब से छोटा देश है. इस की कुल आबादी लगभग पौने 4 लाख है.

 

–       पाकिस्तान का कहना है कि भारत की अग्नि-5 जैसी अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें दक्षिण एशियाई इलाके में अमन के लिए खतरा हैं. पाकिस्तान ने यह बात बौखलाहट में उस मिसाइल टैक्नोलौजी कंट्रोल रेजीम (एमटीसीआर) से कही है, जिस के 35 देश हिस्सा हैं और जो खतरनाक मिसाइल टैक्नोलौजी के ट्रांसफर को रोकने का काम करता है.

 

–       चीन ने पाकिस्तान के बीच तैयार हो रहे आर्थिक कौरिडोर की सुरक्षा के नाम पर विशाल लड़ाकू जलपोत पाकिस्तान को सौंपे हैं. इस के अलावा 2 अन्य पोत भी वह आने वाले समय में पाकिस्तान को सौंपेगा. इस के जरिए वह इस आर्थिक कौरिडोर की जौइंट सिक्योरिटी करेगा. पाक नेवी के अधिकारी के मुताबिक पाकिस्तान और चीन के बीच बन रहा यह आर्थिक कौरिडोर पूरे क्षेत्र में गेम चेंजर साबित होगा. अधिकारी के मुताबिक इस कौरिडोर का फायदा बलूचिस्तान को भी समान रूप से मिलेगा और वहां पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे, साथ ही हजारों युवाओं को भी काम मिल सकेगा.

 

–       अमेरिका के लौस एंजिलिस में 15 साल की एक किशोरी जेना को हिजाब पहनने के कारण चालक ने स्कूल बस से 2 बार उतारा. किशोरी के परिवार वालों ने घटना को ले कर केस दर्ज करा दिया है और स्कूल वालों से माफी की मांग की है. बाद में जेना ने एक साक्षात्कार में बताया कि हिजाब मेरे मजहब का हिस्सा है. हर दिन मैं अपने कपड़ों के हिसाब से हिजाब पहनती हूं. उस ने बताया कि ड्राइवर ने बस में स्पीकर से मेरे हिजाब पर कमैंट किया.

 

–       फ्रांस ने लश्करे तैयबा, जैशे मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे भारत को निशाना बनाने वाले पाकिस्तान के आतंकी समूहों के खिलाफ निर्णायक कार्यवाही पर जोर दिया. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जिस आतंकी मसूद अजहर पर प्रतिबंध का प्रस्ताव लाई थी उसे पकड़ने के लिए उस ने भारत के साथ मिल कर काम करने का संकल्प लिया. फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां मार्क एरौल्ट ने कहा, ‘‘खतरे की गंभीरता पर न जाते हुए आतंकवाद से लड़ने की अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी की प्रतिबद्धता हर जगह एक सी होनी चाहिए. ऐसे खतरों के मद्देनजर देश को अपनी रक्षा का अधिकार है. हम आतंकवादियों के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत निर्णायक कार्यवाही होते देखना चाहते हैं.’’ उन्होंने फ्रांस और भारत के बीच आतंक से लड़ाई में सहयोग बढ़ाने का भी जिक्र किया.

 

–       अमेरिका के राष्ट्रपति डौनल्ड ट्रंप ने कहा कि मैक्सिको सरकार के साथ इस मामले में बातचीत अभी लंबित है और उन का प्रशासन जल्द ही दक्षिणी सीमा पर दीवार बनाने की अपनी योजना पर अमल करेगा ताकि अवैध आवर्जनों को बाहर रखा जा सके तथा मैक्सिको इस पर आने वाले खर्च की भरपाई करेगा. मैक्सिको के राष्ट्रपति एनरिक पेना नीतो ने कहा है कि वे दीवार बनाने का खर्च वहन नहीं करेंगे, लेकिन उन्होंने ट्रंप के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने की इच्छा जताई. उन्होंने आगे कहा, ‘‘हम एक देश के तौर पर और मैक्सिको के नागरिक होने के नाते किसी चीज को कभी बरदाश्त नहीं करेंगे जो हमारी प्रतिष्ठा के खिलाफ हो.’’

 

–       अमेरिकी राष्ट्रपति डौनल्ड ट्रंप द्वारा विदेश मंत्री पद के लिए चुने गए रेक्स टिलरसन ने कहा कि वह यात्रा पर आने वाले मुसलिमों पर पूर्ण प्रतिबंध का समर्थन नहीं करते. हालांकि उन्होंने जोर दे कर कहा कि इसलामिक स्टेट आतंकवादियों के खिलाफ अमेरिका को युद्ध मैदान में तो लड़ाई जीतनी ही चाहिए. विचारों का युद्ध भी उसे जीतना होगा. ट्रंप ने देश में मुसलिमों की यात्रा और अप्रवासन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात कही थी.

 

अमेरिका के राष्ट्रपति डौनल्ड ट्रंप ने रूस के पास उन के खिलाफ विवादास्पद दस्तावेज होने के लिए अपने ही देश की खुफिया एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि यह नाजी जरमनी में रहने जैसा है. उन्होंने कहा कि वे सब से बड़े रोजगारसृजक होंगे और मैं सच कह रहा हूं कि इस पर कड़ी मेहनत करने वाला हूं. प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति डौनल्ड ट्रंप के रुख की आलोचना करते हुए जगहजगह रैलियां निकालीं और प्रवासी अधिकारों के प्रति समर्थन जताया. साथ ही यह भी बताया कि मुसलिम तथा अल्पसंख्यकों के प्रति डौनल्ड ट्रंप के चुनाव के दौरान दिए गए बयान संतुलित नहीं हैं.

 

–       अमेरिका के निवर्तमान ओबामा प्रशासन ने कहा कि भारत के एनएसजी सदस्यता की राह में चीन अवरोधक बना हुआ है. यह कम्युनिस्ट देश नई दिल्ली के प्रयास में लगातार बाधा डाल रहा है. चीन इस बात को ले कर भारत का पक्षपातपूर्ण विरोध कर रहा है कि उस ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. उस का कहना है कि बिना एनपीटी पर हस्ताक्षर के भारत को एनएसजी सदस्यता नहीं दी जा सकती. अगर ऐसा किया जाता है तो पाकिस्तान को भी एनएसजी सदस्यता दी जानी चाहिए.

 

हमारा मानना है कि केवल अपने राष्ट्रीय हित की सोच के चलते विश्व को एकमात्र अपनी स्वार्थपूर्ति के तरीके से चलाने की होड़ से विश्व का हर विचारशील व्यक्ति चिंतित है. आज हम ने विश्व में ऐसा कोई अंतर्राष्ट्रीय कानून नहीं बनाया है, जिसे प्रभावशाली ढंग से पूरे विश्व के देशों तथा उस में रहने वाले प्रत्येक नागरिक पर वैधानिक रूप से लागू किया जा सके.

 

उस कानून की कोई मान्यता नहीं होती जिसे न तो वैधानिक रूप से लागू किया जा सके और न ही उसे तोड़ने वाले को दंडित किया जा सके. ऐसे कानून को कानून की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता. वैश्विक दृष्टि से आज कोई अंतर्राष्ट्रीय कानून विश्व में नहीं है, जिस के अभाव में सारा विश्व कानूनविहीन बनता जा रहा है.  

अपनी ही दुश्मन: भाग 1

कविता भी एकदम गजब लड़की थी. उसे हर बात की जल्दी रहती थी. बचपन में उसे जितनी जल्दी खेल शुरू करने की रहती थी, उतनी ही जल्दी उस खेल को खत्म कर के दूसरा शुरू करने की रहती थी. लड़कों को तो बेवकूफ बना कर वह खूब खुश होती थी. युवा होने पर लड़कों की टोली उस के इर्दगिर्द घूमा करती थी. उस टोली में हर महीने एकदो सदस्य बढ़ जाते थे. कविता उन से खुल कर बातें करती थी. लेकिन उस की यही स्वच्छंदता उस के वैवाहिक जीवन में बाधक बन गई थी.

बचपन गया, किशोरावस्था आई, तब तक तो सब कुछ ठीक था. लेकिन जवानी की ड्यौढ़ी पर कदम रखते ही उसे जीवन के कठोर धरातल पर उतरना पड़ा. उस की शादी सुरेश के साथ कर दी गई. भूल या गलती किस की थी, यह तो नहीं पता, लेकिन एक दिन कविता अपने बेटे मोनू को गोद में थामे, हाथ में ट्रौली बैग खींचती आंगन में आ खड़ी हुई.

आंगन के तीनों ओर कमरे बने थे. आवाज सुनते ही तीनों ओर से दादी, बड़की अम्मा, छोटी अम्मा, भाभी, पापा और चचेरे भाईबहन बाहर निकल कर आंगन में एकत्र हो गए. कविता की शादी को अभी कुल डेढ़ साल ही हुआ था. उसे इस तरह आया देख कर सभी हैरत में थे. खुशी किसी के चेहरे पर नहीं थी. मम्मी पापा ने घबरा कर एक साथ पूछा, ‘‘क्या हुआ बिटिया, तू इस तरह…?’’

‘‘इसे संभालो.’’ कविता मोनू को मां की गोद में थमाते हुए बोली, ‘‘मैं अब सुरेश के साथ वापस नहीं जा सकती.’’ इसी के साथ वह ट्रौली बैग को आंगन में ही छोड़ कर एक कमरे की ओर बढ़ गई.

‘‘अरी चुप कर, जो मुंह में आया बक दिया. शर्म नहीं आती अपने मर्द का नाम लेते.’’ दादी ने नाराजगी दिखाई. लेकिन कविता ने उन की बात पर ध्यान नहीं दिया. भाभी ने मोनू को मां की गोद में से ले कर सीने से लगा लिया.

अंदर जाते ही कविता ने इस तरह जूड़ा खोला मानो चैन की सांस लेना चाहती हो. लंबे घने काले बाल उस की पीठ पर इस तरह पसर गए, जैसे उस के आधे अस्तित्व को ढंक लेना चाहते हों. सब लोग बाहर से अंदर आ गए थे. कविता पर सवालों की बौछार होने लगी. लेकिन कविता ने सब को 2 शब्दों में चुप करा दिया, ‘‘मुझे थकान भी है और भूख भी लगी है. पहले मैं नहाऊंगीखाऊंगी, उस के बाद बात करना.’’

चचेरा भाई कविता का ट्रौली बैग अंदर ले आया था. उस ने उठ कर बैग खोला और अपने कपड़े ले कर इस तरह नहाने के लिए बाथरूम में चली गई, जैसे उसे किसी की परवाह ही न हो. इस बीच भाभी और बच्चे मोनू को हंसाने और खेलाने में लग गए थे. जबकि कविता के मातापिता दूसरे कमरे में एकदूसरे पर कविता को बिगाड़ने का दोषारोपण कर रहे थे.

तभी उन की बातें सुन कर दादी अंदर आ गई और आते ही बोलीं, ‘‘अरे चुप करो दोनों. तुम दोनों ने ही बिगाड़ा है इसे. मैं तो इस के लच्छन पहले ही जानती थी. सुरेश शादी न हुई होती तो अब तक पता नहीं क्या गुलखिलाती. न सुनने की तो आदत ही नहीं है इसे. हर जगह मनमानी करती है. देखो 20-22 साल की हो गई और ससुराल से बच्चा लटका कर मायके लौट आई.’’

‘‘अरे अम्मा, बेकार परेशान हो रही हो, सुरेश को यहीं बुला कर दोनों का समझौता करा देंगे.’’ मोहन ने अंदर आते हुए कहा, ‘‘मियांबीबी में छोटेमोटे झगड़े तो चलते ही रहते हैं. कविता को तो जानती ही हो, सुरेश ने कुछ कह दिया होगा और यह तैश में आ कर भाग आई.’’

कविता नहा कर आ गई तो भाभी उस की बांह पकड़ कर छत पर ले गईं. ऊपर जा कर भाभी ने पूछा, ‘‘लाडो, दामादजी से कोई गलती हो गई क्या?’’

‘‘अब तुम से क्या छिपाना भाभी, अब सुरेश मुझ से पहले की तरह प्यार नहीं करते.’’ कहते हुए कविता के आंसू छलक आए.

भाभी का मुंह खुला का खुला रह गया. बोली, ‘‘कहीं और चक्कर तो नहीं चल रहा?’’

‘‘वह बौड़म क्या चक्कर चलाएगा भाभी, फैक्ट्री से आते ही बेदम हो कर पड़ जाता है. बिलकुल बेकार नौकरी है उस की.’’ कविता रोष में बोली, ‘‘2 दिन सुबह की शिफ्ट, फिर 2 दिन शाम की और 2 दिन रात की शिफ्ट.’’

‘‘तो तुझे क्या परेशानी है.’’ भाभी ने कविता को समझाया, ‘‘दामादजी की नईनई नौकरी है. मेहनत कर रहे हैं तो आगे जा कर लाभ मिलेगा.’’

‘‘भाभी, तुम नहीं समझोगी. एक तो वैसे ही फैक्ट्री के उलटेसीधे टाइमटेबल हैं, ऊपर से मोनू को संभालने के लिए इतना वक्त देना पड़ता है. इस सब से ऊब गई हूं मैं. बिलकुल नीरस जिंदगी है, किस से कहूं. क्या कहूं?’’

भाभी आश्चर्य से देखती रह गईं. वह समझ कर भी कुछ नहीं समझ पा रही थीं. 5 फुट 5 इंच लंबी, इकहरे बदन और तीखे नैननक्श वाली उस की ननद कविता में कुछ ऐसा आकर्षण था कि उस के मोहपाश में कोई भी बंध सकता था. सुरेश के साथ भी यही हुआ था.

उस ने छत पर कई बार कविता और सुरेश को नैनों के दांवपेंच लड़ाते देखा था. इस के बाद उस ने ही दादी को समझाबुझा कर सुरेश और कविता की शादी करा दी थी. सुरेश था तो उस के पति का सहपाठी, पर कविता के चक्कर में उन्हीं के घर में घुसा रहता था.

काफी भागदौड़ के बाद सुरेश को एक कंपनी में नौकरी मिली थी. कंपनी की तरफ से ही रहने का भी इंतजाम हो गया था. कविता की नाजायज मांगों के लिए वह अपनी नौकरी खतरे में कैसे डाल सकता था. भाभी कविता की मांग सुन कर हैरत में रह गईं. सुरेश भला उस की चांदतारों की मांग के लिए रोजीरोटी की फिक्र कैसे छोड़ सकता था.

‘‘क्या सोच रही हो भाभी, बडे़ भैया तो अभी भी तुम्हारे आगेपीछे घूमते हैं.’’ भाभी को चुप देख कर कविता ने हल्के व्यंग्य में कहा, ‘‘अच्छा हुआ जो तुम ने अभी बच्चे का बवाल नहीं पाला. अभी तो खूब मौजमजे की उम्र है.’’

कविता की बात का कोई जवाब दिए बिना भाभी सोचने लगी, ‘जब तक दादी जिंदा हैं, पूरा परिवार एक डोर में बंधा है, बाद में तो सब को अलगअलग ही हो जाना है. कविता अपना घर छोड़ कर आ गई तो सब के लिए मुसीबत बन जाएगी. अपनी आधी पढ़ाई छोड़ कर शादी के मंडप में बैठ गई थी और अब बच्चे को उठा कर चली आई, वह भी यह सोच कर कि अब वापस नहीं जाएगी. जरूर इस का कुछ न कुछ इलाज करना पड़ेगा.’

‘‘कहां खो गईं भाभी,’’ कविता ने भाभी की आंखों के सामने हाथ हिलाते हुए कहा, ‘‘बड़के भैया की रोमांटिक यादों में खो गईं क्या?’’

‘‘नहीं, तुम्हारे बारे में सोच रही थी. तुम मोनू की वजह से परेशान हो न, ऐसा करो उसे यहीं छोड़ जाओ, हम पाल लेंगे. बस आगे से सावधानी रखना कि कहीं मोनू का भैया न आ जाए. रही बात सुरेश की तो उन की ड्यूटी दिन की हो या रात की, बाकी वक्त तुम्हारे साथ ही रहेंगे, तुम्हारे पास. समय बचे तो अपना ग्रैजुएशन पूरा कर लेना. तुम भी व्यस्त हो जाओगी.’’

भाभी की राय कविता को जंच गई. बात चली तो यह सुझाव घर में भी सब को पसंद आया. बहरहाल 2 दिनों बाद कविता मोनू को मायके में छोड़ कर सुरेश के पास चली गई. उस के जाने से सभी ने राहत की सांस ली.

देखतेदेखते 5 साल गुजर गए. इस बीच कविता कानपुर छोड़ कर लखनऊ आ गई. वहां उसे एक सरकारी स्कूल में नौकरी मिल गई थी. मोनू को भी उस ने अपने पास बुला लिया था. सुरेश शनिवार को उस के पास आता और रविवार को उस के साथ रह कर सोमवार सुबह वापस लौट जाता.

कौन है बेहतर, ग्रैंड आई 10 या इग्निस

मारुति सुजुकी ने हाल ही में अपनी नई कार इग्निस लॉन्च की है. खास बात यह है कि इस कार की सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी मानी जाने वाली हुंडई ग्रैंड आई 10 ने भी अपना नया अपडेटेड वर्जन लांच किया है. जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारतीय बाजार में डीजल वर्जन को ज्यादा पसंद किया जाता है और इसका खास कारण है इसका किफायती होना. तो इग्निस और ग्रैंड आई 10 में से कौनसी कार है आपके लिए बेहतर, हम बताते हैं…

इन पांच कारणों की वजह से इग्निस है एक बेहतर कार :

1. लुक्स की बात की जाए तो इस मामले में मारुति की इग्निस, हुंडई की ग्रैंड आई 10 से बेहतर है और युवाओं के बीच ज्यादा आकर्षक है.

2. इग्निस में डैशबोर्ड के लिए अलग केबिन बनाया गया है जिसमें कई आकर्षक फीचर्स दिये गए हैं.

3. डुअल टोन पेंट, कार के व्हील्स और इन पर चढ़ा हुआ प्लास्टिक आवरण इस कार को सड़क पर दूसरों से अलग बनाता है.

4. इग्निस के डीजल इंजन में ऑटोमेटिक गियरबॉक्स का विकल्प भी दिया गया है.

5. ढलान वाली जगहों पर भी इसे चलाना आसान और सुरक्षित है.

इन पांच कारणों से हुंडई ग्रैंड आई10, सुजुकी इग्निस को पीछे छोड़ सकती है :

1. ग्रैंड आई 10 कार अपने पारंपरिक लुक के साथ आती है, इसलिए समय के साथ ये दिखने में कभी बोरिंग नहीं होती.

2. इस कार का स्मूथ डीजल इंजन अच्छा माइलेज देता है.

3. आई 10 का केबिन इतनी अच्छी तरह से बनाया गया है कि ये आपको बाहरी शोर से भी राहत देता है.

4. हुंडई ग्रैंड आई 10 आपको एक आरामदायक राइड देती है.

5. ग्रैंड आई10, मारुति सुजुकी इग्निस से अपेक्षाकृत सस्ती कार है.

इन दोनों कारों के बारे में ज्यादा जानकारी आप हमारी वेबसाइट motoring.world पर प्राप्त कर सकते हैं. 

किन वजहों से चर्चा में है जस्टिन बीबर का मुंबई कॉन्सर्ट

जस्टिन बीबर आज दुनिया के सबसे बड़े स्टार्स में से एक हैं. उनके फैंस की संख्या करोड़ो में है. उन्हें चाहने वाले हर देश में हैं. महज 23 साल की उम्र में ही बीबर ने दुनिया में बहुत नाम कमाया है. कहते हैं कि बीबर के लिए भारत हमेशा ही एक ड्रीम डेस्टिनेशन रहा है. वे जानते हैं कि यहां उनके कितने फैन्स हैं और वे हमेशा से ही भारत आना चाहते थे.

आइये जानते हैं कि कल यानि कि 10 मई को मुंबई में होने जा रहा जस्टिन बीबर का म्यूजिक कॉन्सर्ट आखिर किन खास वजहों से लगातार चर्चा में बना हुआ है.

सलमान के बॉडीगार्ड शेरा अब करेंगे जस्टिन बीबर की सुरक्षा

कल यानि कि 10 मई को मुंबई में होने जा रहा जस्टिन बीबर का म्यूजिक कॉन्सर्ट कई वजह से चर्चा में है. अगर जस्टिन की सुरक्षा  को लेकर बात करें तो, बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान के बॉडीगार्ड शेरा इसकी जिम्मेदारी निभाएंगे. देखा जाए तो सलमान इस कॉन्सर्ट का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन खबर है कि सलमान के चहेते बॉडीगार्ड शेरा की कंपनी को जस्टिन बीबर के मुंबई में होने वाले कॉन्सर्ट में सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

शेरा ने अब तक सलमान खान के साथ कई ऐसे कॉन्सर्ट में भी अहम भूमिका निभाई है, जो विदेशों में होते रहे हैं. अभी कुछ समय पहले हुए 'द बैंग' टूर में भी शेरा ही सलमान के साथ रहे और उन्हें इस टूर में आवश्यक सुरक्षा भी प्रदान की. खबर है कि उनके इसी टूर में देखे गये परफॉरमेंस की वजह से उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है और शेरा भी इस काम के लिए बिल्कुल तैयार हैं.

शेरा अपनी पूरी टीम को तैनात कर रहे हैं और खास तैयारियों के साथ कन्सर्ट को सफल बनाने की कोशिशों में जुट जायेंगे. हम आपको बता दें कि शेरा के अलावा जस्टिन की सुरक्षा में मुंबई पुलिस, लंदन स्पेशल फोर्स, जस्टिन के अपने स्पेशल गार्ड भी तैनात रहेंगे.

कॉन्सर्ट पर ड्रोन से नजर रखेगी पुलिस

इस कॉन्सर्ट को लेकर व्यापक तैयारियां की गईं हैं. ड्रोन के जरिये कंसर्ट पर नजर रखी जाएगी. साथ ही सुरक्षा में 500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे. केनेडाई सिंगर बीबर कल, 10 मई को मुंबई के पाटिल स्टेडियम में प्रस्तुति देंगे. इसमें 45 हजार लोगों के पहुंचने की उम्मीद है. इस विदेशी कलाकार की सुरक्षा में भी सादे कपड़ों में 25 पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मी स्टेडियम के भीतर तैनात होंगे और निगरानी करेंगे.

करण जौहर के शो 'कॉफी विद करण' में भी नजर आएंगे

पहली बार भारत आ रहे , ग्रैमी अवार्ड विजेता पॉप सिंगर जस्टिन बीबर फिल्मकार करण जौहर के शो 'कॉफी विद करण' में नजर आएंगे. अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो करण अपने शो में बीबर की मेजबानी करते दिखेंगे. इस शो में अमिताभ बच्चन, शाह रुख खान, दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा जैसी बॉलीवुड हस्तियां नजर आ चुकी हैं. इस शो ने पांच सीजन पूरे कर लिए हैं. यह पहली बार होगा जब बीबर किसी भारतीय चैट शो में दिखेंगे.

करण अपने इस शो में रिचर्ड गेरे, मारिया शारापोवा, ह्यूज जैकमैन और क्रिश्चियन लुबोटिन जैसी अंतरराष्ट्रीय हस्तियों की मेजबानी भी कर चुके हैं. सूत्रों के अनुसार 'अगर बीबर अपने व्यस्त कार्यक्रम से शो के लिए वक्त निकालते हैं तो अच्छी चर्चा देखने को मिलेगी.'

जस्टिन बीबर को मिलेंगे इतने सारे तोहफे

जस्टिन बीबर को सरोद से लेकर डिजाइनर कपड़ों तक कई बेहतरीन यादगार चीजें भेंट की जाएंगी. कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि मशहूर सरोद वादक अमजद अली खान अपने हस्ताक्षर वाला सरोद बीबर को देने वाले हैं. डिजाइनर रोहित बल ने बीबर के लिए बाइकर जैकेट तैयार किया है, जबकि अनामिका खन्ना ने उनकी मां के लिए लंबी जैकेट बनाया है. अमित अग्रवाल ने खादी से जैकेट तैयार किया है. इसके अलावा कृष्णा मेहता ने भी बीबर के लिए भारतीय-पश्चिमी शैली में शर्ट बनाई है.

जब शून्य पर आउट हो गई पूरी टीम

क्रिकेट अनिश्चतताओं का खेल है. इसमें कभी भी कुछ भी हो सकता है, लेकिन एक टीम का शून्य के स्कोर पर ऑल आउट हो जाना अजीब लगता है. यह अजीब वाकया हुआ है इंग्लैंड में, जहां एक टीम छह खिलाड़ियों की इंडोर क्रिकेट चैम्पियनशिप में एक भी रन नहीं बना पाई और शून्य के स्कोर पर आउट हो गई.

दरअसल बात साल 2016 की है जब इंग्लैंड के काउंटी क्रिकेट में क्राइस्ट चर्च यूनिवर्सिटी और बैपचाइल्ड क्लब के बीच मैच हुआ. इस मैच में क्राइस्ट चर्च यूनिवर्सिटी ने बैपचाइल्ड क्लब को जीत के लिए 121 रनों का लक्ष्य दिया.

लक्ष्य का पीछा करते हुए बैपचाइल्ड क्लब की पूरी टीम बिना खाता खोले शून्य के स्कोर पर ढेर हो गई. जब इस टीम के 9 बल्लेबाज जीरो पर आउट हुए तो अंतिम बल्लेबाज को यह कहकर मैदान पर भेजा गया कि वह 1 रन बनाकर टीम को दुनिया के सबसे शर्मनाक रिकॉर्ड से बचा ले लेकिन नसीब ने टीम का वहां पर भी साथ नहीं दिया और अंतिम बल्लेबाज भी बिना खाता खोले आउट हो गया.

120 रनों के अंतर से जीता मैच

क्राइस्टचर्च ने यह मैच 120 रनों से जीत लिया. उन्होंने पहले बल्लेबाजी करते हुए एक विकेट के नुकसान पर 120 रन बनाए थे. यह इंडोर क्रिकेट प्रतियोगिता थी जिसमें एक टीम में छह खिलाड़ी ही थे. 1913 में समरसेट की पूरी टीम भी शून्य पर आउट हो गई थी.

20 गेंदें ही खेल सकी बैपचाइल्ड की टीम

क्राइस्टचर्च के 121 रन के लक्ष्य के जवाब में बेपचाइल्ड टीम बगैर खाता खोले पैवेलियन लौट गई. बैट्समैन की टीम सिर्फ 20 बॉल ही खेल सके. चर्च यूनिवर्सिटी के बॉलर्स, खासकर फ्रेसर मैक्विन्नी और फिलिप सेमंस ने घातक गेंदबाजी की. फ्रेसर मैक्विन्नी ने दो ओवर में बिना कोई रन दिए लगातार 3 विकेट लेकर हैट्रिक पूरी की.

पूरी टीम का शून्य पर आउट होना तो अजीब है ही लेकिन इससे भी ज्यादा बड़ी बात यह कि कोई टीम इस स्कोर पर एक बार नहीं बल्कि तीन बार आउट हुई है.

दो और टीम भी शून्य पर हो चुकी है आउट

इस शर्मनाक स्कोर पर कोई टीम पहली बार आउट नहीं हुई है बल्कि इससे पहले भी दो और टीमें इस शर्मनाक रिकॉर्ड में शामिल हैं. 1964 में एक मैच के दौरान केंट विलेज की टीम साल्टवुड क्रिकेट क्लब ने 216 रन बनाये थे जिसके जवाब में खेलने उतरी मार्टिन वाल्टर क्लब की पूरी टीम शून्य पर आउट हो गई थी.

जबकि सबसे पहले इस स्कोर पर आउट होने वाली टीम समरसेट क्लब लैंगपोर्ट है जो 1913 में शून्य पर ऑलआउट हो गई थी. टीम ग्लैसटॉनबरी ने लैंगपोर्ट टीम को 81 रन का लक्ष्य दिया था.

आ रहे हैं दुनिया के सबसे घटिया “बैंक चोर”

सबसे खतरनाक, कूल और स्मार्ट चोर के बाद असली चोर बैंक लूटने आ गया है. रितेश देशमुख अपने दो शागिर्दों के साथ 'बैंक चोर' बन कर आ गए हैं. बहुप्रतीक्षित फिल्म “बैंक चोर” का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है.

फिल्म की शुरुआत होती है फेमस धूम सीरीज के चोरों के साथ. इनके बाद रितेश देशमुख चंपक चंद्रगुप्त चिपलुंकर बनकर आए हैं एक बैंक लूटने. बैंक लूटने के लिए रितेश ने बाबा का भेस धारण किया है वहीं उनके साथी गुलाब और गेंदा ने हाथी और घोड़े का भेस बनाया है. ट्रेलर के हिसाब से ये दुनिया के सबसे घटिया चोर हैं और चोरी के लिए चुना दिन भी इनके लिए अनुकूल नहीं है.

फिल्म में विवेक ओबरॉय और रिया चक्रबर्ती भी हैं. विवेक फिल्म में सीबीआई ऑफिसर अमजद खान बने हैं जो हर हाल में इन चोरों को रोकना चाहते हैं. वहीं रिया फिल्म में क्राइम रिपोर्टर गायत्री गागुंली बनीं है. फिल्म में बाबा सहगल भी हैं जो एक बड़ा ही मजेदार डायलॉग बोलते दिख रहे हैं, 'लिप्स हैं तेरे लाल, काले हैं तेरे बाल, पहले आया अन्ना बाद में केजरीवाल.' फिल्म का ट्रेलर काफी मजेदार है. सभी अपने-अपने किरदार में अच्छे लग रहे हैं.

फिल्म का निर्देशन बंपी ने किया है. 'बैंक चोर' 16 जून को रिलीज होगी. फिल्म का निर्माण यशराज बैनर का यूथ प्रोडक्शन हाउस Y-Films कर रहा है. Y-Films ने इससे पहले 'मैन्स वर्ल्ड', 'बैंग बाजा बारात', और 'लेडिज रूम' जैसे कई हिट वेब सीरीज बनाई हैं.

इमरजेंसी फंड है एक अच्छा निवेश

मुसीबतें किसी को बताकर नहीं आती. इसके लिए जरूरी है कि आप पहले से तैयार रहें. भविष्य की जरूरतों के लिए बहुत सारे लोग एक बड़ी राशि इंश्योरेंस, यूलिप, फिक्स डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड जैसे इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते रहते हैं. लेकिन इन सब के बाद भी अक्सर आप कई बार ऐसी मुसीबत से निपटने में असमर्थ हो जाते हैं. पैसों की अचानक जरूरत के लिए हम अपनी एफडी और यूलिप का प्रीमैच्योर विड्रॉल कर लेते हैं, नतीजन पूरी रकम भी नहीं मिल पाती.

ऐसी गलतियां लोग इमर्जेंसी फंड न बनाकर करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक इमर्जेंसी फंड बनाना आपके लिए कितना मददगार होता है.

तुरंत जरूरतों के लिए इमर्जेंसी फंड बनाएं-

आजकल बढ़ती महंगाई के साथ हमारी अन्य जरूरतें भी उसी तेजी से बढ़ रही हैं. ऐसे में बीमारी, नौकरी छूटने या अन्य वजह से अचानक सामने आने वाले बड़े खर्चों से हमारा सारा बजट खराब हो जाता है. ऐसी ही समस्याओं से निपटने के लिए इमरजेंसी फंड बहुत जरूरी होता है. यह फंड ऐसी सेविंग होती है, जिसे अचानक आने वाली जरूरत के समय में आप खर्च कर सकते हैं. साथ ही आपको बता दें कि बैंक स्वैप एफडी की भी सुविधा उपलब्ध कराते हैं. इससे आप अपनी राशि पर फिक्स्ड डिपॉजिट जितना ही ब्याज पाते हैं और इसे आप कभी भी विड्रॉल कर सकते हैं.

कितना होना चाहिए इमर्जेंसी फंड-

विशेषज्ञ मानते हैं कि इमर्जेंसी फंड की राशि उतनी होनी चाहिए जो आपके 6 महीनों के खर्चों को पूरा कर सके. यदि आपके पास हैल्थ इंश्योरेंस पहले से है तो तीन से चार महीने का इमर्जेंसी फंड भी पर्याप्त है. इसके लिए हर महीने अपनी सेविंग का 10 फीसदी हिस्सा इमर्जेंसी फंड के लिए तैयार करें. एक तय सीमा से अधिक बचत होने पर अपनी शेष राशि को अन्य विकल्प में निवेश कर सकते हैं.

लिक्विड फंड में निवेश करें-

इमरजेंसी फंड के लिए बैंक बचत खाता और लिक्विड म्युचुअल फंड में भी निवेश किया जा सकता है. इन फंड्स में लॉक-इन पीरिएड नहीं होता और विड्रॉल में भी ज्यादा समय नहीं लगता. बचत खाते में इमर्जेंसी फंड के तौर पर जमा राशि किसी भी समय एटीएम की मदद से निकाल सकते हैं. इमर्जेंसी के लिए कोशिश करें कि बैंक एफडी या म्यूचुअल फंड में निवेश न करना पड़े. ऐसा इसलिए क्योंकि इनमें लॉकइन पीरिएड होता है, जिसके कारण प्रीमैच्योर फाइन भी भरना पड़ता है. वहीं दूसरी ओर म्युचुअल फंड या बीमा की रकम प्राप्त होने में चार दिन से लेकर कम से कम एक हफ्ते या 15 दिन का वक्त लगता है.

इमरजेंसी में क्रेडिट कार्ड का करें इस्तेमाल-

इमर्जेंसी के लिए आपका क्रेडिट कार्ड भी सहायक बन सकता है. क्रेडिट कार्ड के साथ 50 से 60 दिनों तक का क्रेडिट पीरिएड मिलता है. ऐसे में अस्पताल के खर्चों का भुगतान और दूसरे खर्चों के लिए क्रेडिट कार्ड से भुगतान कर सकते हैं. लेकिन आपको बता दें कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल विड्रॉल के लिए न करें. क्योंकि इससे ब्याज काफी बढ़ जाएगा.

हेल्थ इंश्योसरेंस है जरूरी-

बीमारी या दुर्घटना के दौरान इमर्जेंसी फंड की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है. ऐसे में किसी भी अनिश्चितता से सुरक्षा के लिए अपने और परिवार के लिए एक हेल्थि इंश्योरेंस पॉलिसी होना बहुत जरूरी है. हेल्थ पॉलिसी की मदद से अस्पताल और इलाज के खर्च से बच जाते हैं. कैशलैस प्लान की स्थिति में इलाज के दौरान कोई भी धन राशि देने की जरूरत नहीं होती. लेकिन यदि कैशलैस नहीं है तो कुछ समय के लिए पैसों की जरूरत अवश्य पड़ सकती है.

गोरखपुर मसले में घिरे मुख्यमंत्री योगी

समाजवादी पार्टी सरकार में महिला अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के अधिकारों की रक्षा करने का दावा करने वाली भाजपा अब अपनी सरकार में महिला अधिकारी चारू निगम के स्वभिमान की रक्षा को लेकर बैकफुट पर है. चारू निगम आईपीएस अधिकारी हैं. ट्रेनिंग के समय पर वह गोरखपुर जिले के गोरखनाथ सर्किल की पुलिस सर्किल आफिसर के रूप में काम कर रही हैं. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद गोरखपुर चर्चा मे है. योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से ही सांसद हैं. यहीं के गोरखनाथ मंदिर के महंत के रूप में रहते थे. गोरखनाथ मंदिर गोरखनाथ पुलिस सर्किल में ही आता है. योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से यहां पर बहुत ही भरोसेमंद और तेजतर्रार अफसरों की नियुक्ति की गई थी.

चारू निगम ट्रेनी आईपीएस अधिकारी हैं. शराब बंदी को लेकर धरना प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर पुलिस के द्वारा लाठी चार्ज के मसले पर चारू निगम और गोरखपुर के विधायक डाक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल के बीच नोकझोंक ने बड़ा रूप ले लिया है. महिला आईपीएस अधिकारी के अपमान को लेकर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आईपीएस एसोसिएशन ने अपना विरोध दर्ज कराया है. आईपीएस चारू निगम ने अपनी बात को खुलकर अपने फेसबुक पेज पर लिखा तो विधायक राधा मोहन अग्रवाल ने मीडिया से बात की और अपनी किसी भी तरह की गलती नहीं मानी.

राधा मोहन अग्रवाल-चारू निगम प्रकरण के 3 दिन बीत जाने के बाद भी न सरकार ने इस मसले पर अपना पक्ष रखा और ना ही भाजपा संगठन ने ही अपना पक्ष रखा है. सोशल मीडिया में चर्चा शुरू होने के बाद से यह मसला उलझता जा रहा है. इसे समाजवादी पार्टी के दुर्गा शक्ति नागपाल प्रकरण से जोड़ा जा रहा है. इससे भाजपा के सरकार और संगठन दोनों की छवि धूमिल हो रही है. उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से अधिकारी और नेताओं के टकराव का यह पहला मुद्दा नहीं है. प्रदेश में कम समय में ही कई ऐसी घटनायें घट चुकी हैं जहां असफर और नेता आमनेसामने आ गये.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लगातार सीख के बाद भी भाजपा के नेता और कार्यकर्ता किसी भी तरह से अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे. विद्यार्थी परिषद जैसे भाजपा के संगठन स्कूलों में फीस मुद्दे को लेकर ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे वह सरकार का अंग हो. फर्जी मीट की दुकानों के संबंध में यह बात देखने में आई थी कि पुलिस से अधिक एक्शन में भगवा बिग्रेड थी. उस समय मसला हिन्दुत्व का था ऐसे में बात थम गई. अब भाजपा के नेताओं का कोई गलत सलूक कोई स्वीकार नहीं कर रहा. योगी सरकार की छवि कमजोर पड़ती जा रही है. हर घटना में त्वरित प्रतिक्रिया देने वाले भाजपा संगठन और सरकार की टीम के चुप रहने से विरोधियों को पौ बारह हो रही है. चारू निगम प्रकरण में सरकार फैसला लेने में जितना देर लगायेगी मसला उतना ही उलझता जायेगा.

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