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ईयू से ब्रिटेन का अलगाव

पति पत्नी के तलाक के फैसले के बाद अदालतों से तलाक का प्रमाणपत्र लेना एक पहाड़ चढ़ने जैसा काम है खासतौर पर तब जब दोनों के नाम संपत्तियां हों और दोनों की कमाई से बहुतकुछ खरीदा गया हो. आपस में न बन पाने पर या एक का किसी और से अफेयर होने पर या फिर स्वतंत्रता की चाह में तलाक मांग लेना तो आसान है पर निर्णय लेने और बच्चों को संभालने के हक तय करने में वर्षों लग जाते हैं.

बड़ी मेहनत से बने यूरोप को एक करने वाले यूरोपीय साझा मार्केट और फिर यूरोपीय यूनियन यानी ईयू पर 28-29 देशों के नेताओं ने 30 साल पहले बहुत मेहनत की थी जिस पर ब्रिटेन के सिरफिरों ने ब्रेक्सिट का जनमत करा कर पानी फेर दिया. अब यूरोप के 27 देश ब्रिटेन के सामने बड़ी कड़ी शर्तें रख रहे हैं और यह पक्का है कि ब्रिटेन को इस तलाक की महंगी कीमत देनी पड़ेगी जो मूर्ख भावना में बह कर वोट देने वाली उस की जनता की समझ में नहीं आई.

यह ठीक है कि यूरोपीय यूनियन की राजधानी ब्रूसैल्स साझी नीतियों को लागू करने में कमजोर देशों को काफी सहूलियतें दे रहा था. इस से संपन्न देशों को लग रहा था कि वे इस की कीमत चुका रहे हैं. असल में यूरोपीय यूनियन के देशों को बिना बाधा का बड़ा बाजार, बिना सीमाबंधनों के मिला हुआ है. अलग होने के चलते ब्रिटेन को अब पकापकाया बाजार खोना पड़ेगा और बाकी उत्पादक देशों को लाभ होगा.

ब्रिटेन के निवासी अब यूरोप में काम नहीं कर पाएंगे. ब्रिटेन के विश्वविद्यालय अब खाली होने लगे हैं क्योंकि यूरोप के लोग सिर्फ अंगरेजी जानने के लालच में वहां प्रवेश नहीं ले रहे. अगर यूरोप के लोग ब्रिटेन में नौकरी करने नहीं आ रहे तो ब्रिटेन के लोगों को, अपने से कई गुना बड़े, यूरोप में नौकरियों के अवसर खोने पड़ गए हैं.

यूरोपीय यूनियन अलगाव के लिए जिम्मेदार ब्रिटेन को एक बड़ा मोटा बिल भेज रहा है. ब्रिटेन के कई शहरों में बने यूरोपीय यूनियन की संस्थाओं के दफ्तर खाली हो जाएंगे और वहां संपत्ति के दाम गिर जाएंगे. यूरोप के लोग अब ब्रिटेन में घर भी नहीं खरीदेंगे. चूंकि यूरोपीय खरीदार ज्यादा हैं, इसलिए लेनदेन में नुकसान ब्रिटेन का ज्यादा होगा.

यह तलाक आसान नहीं. भावना में बह कर ब्रिटेन की जनता ने अपने जूते का सोल खुद ही निकाल फेंका है कि उस का ऊपरी चमक वाला चमड़ा तो उस के पास रहेगा. असलियत यह है कि बिना सोल के जूता बेकार है. ब्रिटेन चप्पल फटकारता हुआ घूमेगा.

चीन यह बात समझ चुका है और वह पूरे यूरोप के साथ जुड़ने के लिए अथक कोशिश कर रहा है. भारत की मूर्खता है कि धर्म के नाम पर वह पाकिस्तान व बंगलादेश को तो भावनात्मक दुश्मन समझता ही है, भूटान और म्यांमार से भी उस के संबंध उसी तर्ज पर खराब हैं जैसे ब्रिटेन के खब्तियों के रहे जो अलगाव को सुनहरा कदम मान रहे हैं. जब विश्व एक होना चाहिए, तो धर्म, राष्ट्रीयता, भाषा, संस्कृति, रेस, जाति का अलाप बंद करो, वरना नुकसान ही होगा.

क्या आपको भी अपना फोन बोरिंग लगने लगा है?

आज के समय में एक स्मार्टफोन को पुराना होने में देर नहीं लगती. आप आज एक स्मार्टफोन लेते हैं, तो कल नया लॉन्च हो जाता है और बस परसों आपका फोन पुराना हो जाता है, लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं होता कि हर दिन अपने फोन को बदल लिया जाए. कई उपयोगकर्ता ऐसे भी होते हैं, जो अपने स्मार्टफोन या अन्य डिवाइस से काफी जुड़ा हुआ महसूस करते हैं, एक लगाव सा उनके बीच होता है और वे नहीं चाहते कि वे अपने पुराने फोन का साथ छोड़ दें.

तो आज हम आपसे कहना चाहते हैं आप अपना फोन, अपने पास ही रखिए. वैसे तो एक स्मार्टफोन, आपके कई काम आता है. लेकिन हां, अगर आप अपने फोन से बोर हो गए हैं, तो आप इससे कुछ मजेदार काम कर सकते हैं. ऐसा करने से आपके साथ-साथ आपके फोन को भी नया सा महसूस होगा.

खरीदें नया कवर : फोन से बोर होना, यानि कि कुछ हद तक फोन के लुक से बोर हो जाना. ऐसा हमेशा तो नहीं, लेकिन ज्यादातर ऐसा होता है. तो इसके लिए फोन के लुक को बदला जा सकता है. आप अपने फोन के लिए एक खूबसूरत और आकर्षक सा केस खरीदिए. इसके बाद आप खुद ही देखिएगा आप अपने फोन को बार बार यूज करेंगे.

नया लॉन्चर : यदि आप अपने फोन के लुक से खुश हैं और नहीं चाहते कि फोन का लुक बदलें तो शायद आपको यूआई बदलकर अच्छा लगे. एंड्रायड, यूजर्स को होम स्क्रीन कण्ट्रोल करने की अनुमति देता है, लेकिन एक थर्ड पार्टी लॉन्चर इससे कहीं ज्यादा कर सकता है. आप यदि ऐसा करना चाहें तो गूगल प्ले स्टोर में कुछ शानदार ऐप्स मौजूद हैं. ADW, Apex, Nova ये कुछ शानदार लॉन्चर हैं जिनकी आप मदद ले सकते हैं.

कुछ नये मजेदार ऐप्स : आज कल मार्केट में कुछ बहुत ही शानदार ऐप्स मौजूद हैं जो आपका मनोरंजन करने के साथ-साथ, आपका ज्ञान बढ़ाने में भी आपकी मदद कर सकते हैं. जैसे- कुछ नये मजेदार गेम्स, वर्डस अरेंजमेंट्स, एमसीक्यूज आदि. अगर कुछ दिनों से आप अपने फोन से बहोर हो गए है तो आप ये सभी नये-नये ऐप्स अपने फोन में डालकर भी इनका इस्तोमाल कर सकते हैं.

क्यों जरूरी है आपके लिए ट्रैवल इंश्योरेंश

छुट्टियां आते ही हर कोई घूमने की प्लानिंग करने लग जाता है. प्लानिंग देश के भीतर घूमने की हो या फिर देश के बाहर आपको तमाम छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखने की जरूरत होती है. अक्सर देखा जाता है कि ट्रेन छूट जाना, फ्लाइट मिस हो जाना या कैंसिल हो जाना और सामान कहीं खो जाना ऐसी परेशानियां हैं जिनसे लोगों को परेशान होना पड़ जाता है.

ये हमारे सफर का सारा मजा किरकिरा कर देती हैं. हालांकि अगर इस दौरान थोड़ी सावधानी बरतें तो आपका सफर खुशनुमा हो सकता है. ट्रैवल इंश्योरेंस इसका बेहतर उपाय है. यह आपका विशेष ख्याल रखता है. ट्रैवल इंश्योरेंस से जुड़ी कुछ बातें.

क्या है ट्रैवल इंश्योरेंस

ट्रैवल इंश्योरेंस एक विशेष प्रकार का इंश्योरेंस होता है, जो कि यात्रा के दौरान (देश के भीतर या बाहर), मेडिकल खर्चों, ट्रिप कैंसिल होने, सामान खोने, फ्लाइट के दुर्घटनाग्रस्त होने या अन्य नुकसान की सूरत में आपको सुरक्षा प्रदान करता है. ऐसे में यात्रा के दौरान आने वाली तमाम परेशानियों से बचने के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस एक बेहतर विकल्प है. यह न सिर्फ आपको सफर में आने वाली तमाम मुसीबतों से बचाता है, बल्कि यह रास्ते में होने वाली समस्या से हुए नुकसान की भरपाई भी करता है.

क्या ट्रैवल इंश्योरेंस की जरूरत है?

अगर आप यूरोपीय देशों या अन्य किसी खास देश में छुट्टियां बिताने जा रहे हैं, तो आपके लिए ट्रैवल इंश्योरेंस लेना जरूरी है. शॉर्ट डोमेस्टिक ट्रिप में इस तरह के कवर की जरूरत नहीं होती है, लेकिन अगर आप लंबे टूर पर जा रहे हैं, तो चोरी और ट्रिप कैंसलेशन का कवर ले सकते हैं.

अगर आपके मौजूदा मेडिकल इंश्योरेंस में विदेश में भी इलाज का कवर है, होम इंश्योरेंस में ट्रैवलिंग के दौरान आपके सामान का बीमा है और आपके पास पर्सनल एक्सिडेंटल कवर है, तो आपको ट्रैवल इंश्योरेंस लेने की जरूरत नहीं है. लेकिन अगर आपके पास ये सभी इंश्योरेंस नहीं हैं, तो ट्रैवल इंश्योरेंस लें.

कितना कवर है जरूरी?

विशेषज्ञों के मुताबिक आपकी ट्रैवल कॉस्ट का 4-8 फीसद होना चाहिए. इंश्योरेंस कंपनियां आमतौर पर कई कैटेगरी के तहत फिक्स्ड ऑप्शन देती हैं. इसकी रेंज 15,000-5,0000 डॉलर तक होती है, जो यात्रा की अवधि, बेनेफिट्स और ट्रैवल से जुड़े एरिया पर निर्भर करती है.

आवेदन का समय

ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी की अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन मौजूदा ट्रैवल पॉलिसी की कवरेज समाप्त होने से पहले किया जाना चाहिए. मौजूदा पॉलिसी की अवधि समाप्त होने से 7-10 दिन पहले एक्सटेंशन करवाना बेहतर रहता है. इतना ही नहीं पॉलिसीहोल्डर इसे यात्रा के दौरान भी एक्सटेंड करा सकता है. इसके लिए उसे केवल इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत होगी.

क्या फायदे

1. फ्लाइट डिले होने या कैंसिल होने से अगर आपकी यात्रा में देरी होती है तो ट्रैवल इंश्योरेंस आपके लिए मददगार साबित होता है. इस देरी के कारण इस दौरान होने वाले खर्च जैसे की खाना-पीना या होटल में रुकने का खर्चा भी कवर होता है.

2. यात्रा के दौरान अगर आपका सामान खो जाता है या चोरी हो जाता है, तब भी इंश्योरेंस इसे कवर करने में मददगार होगा है. बैग खोना भी इसमें शामिल होता है.

3. यात्रा के दौरान अगर किसी की आकस्मिक मृत्यु हो जाती है तो उस स्थिति में भी ट्रैवल इंश्योरेंस के पालिसी में तय कवरेज के हिसाब से आपके परिजनों को मदद मिलेगी.

4. यात्रा के दौरान कोई सदस्य अगर बीमार हो जाता है, या किसी का एक्सीडेंट हो जाता है तब हॉस्पिटल का सारा खर्चा ट्रैवल इंश्योरेंस के कवर में आता है.

ट्रैवल इंश्योरेंस के प्रकार

डोमेस्टिक ट्रेवल इंश्योरेंस- डोमेस्टिक ट्रेवल इंश्योरेंस अपने कस्टमर को यात्रा के दौरान किसी भी तरह की इमरजेंसी जैसे दुर्घटना, सामान खो जाना या फिर मृत्यु हो जाने पर आर्थिक सहायता प्रदान करता है.

अंतरराष्ट्रीय यात्रा बीमा- यह बीमा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुविधा प्रदान करता है जैसे विदेश यात्रा के समय आपका पासपोर्ट या अन्य डॉक्यूमेंट खो जाए, आपका प्लेन हाइजेक हो जाए, या ट्रेवल के समय किसी अन्य तरह की परेशानी पेश आए या फिर यात्रा के समय दुर्घटना होने पर विदेश में चिकित्सा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करता है.

कॉर्पोरेट ट्रेवल इंश्योरेंस- इसके अंतर्गत उन कर्मचारियों को कवरेज मिलता है जो कर्मचारी घरेलू यात्रा या फिर विदेश यात्रा पर जाते हैं.

छात्र यात्रा बीमा- इस बीमा के अंतर्गत उन छात्रों को लाभ मिलता है जो उच्च शिक्षा पाने के लिए विदेश जाते हैं ये पालिसी उन छात्रों को कवरेज देती है जो विदेश में प्रॉफेशनल कोर्स करते हैं. इसके साथ ही यह छात्रों को मेडिकल कवरेज, पासपोर्ट खो जाने पर भी मदद करता है.

वरिष्ठ नागरिक यात्रा बीमा- वरिष्ठ नागरिक यात्रा बीमा के अंतर्गत 61 साल से लेकर 70 साल तक के लोग आते है जो इस यात्रा बीमा का लाभ प्राप्त करते है. इस यात्रा बीमा का मुख्य उद्देश्य वरिष्ठ लोगों की यात्रा को खुशनुमा बनाना होता है, जिसमे मेडिकल ट्रीटमेंट और कैशलेस हॉस्पिटल की सुविधा होती है.

परिवार यात्रा बीमा- परिवार यात्रा बीमा में पूरे परिवार का बीमा होता है इसमें यात्रा के समय किसी भी तरह की इमरजेंसी पड़ने पर सुविधा मिलती है पूरे परिवार को यात्रा के समय किसी भी परेशानी में आर्थिक मदद मिलती है.

धोनी की गलती ने दिलाए बांग्लादेश को 5 अतिरिक्त रन

मौजूदा विजेता भारत ने आईसीसी चैंपियंस ट्रोफी के दूसरे सेमीफाइनल में एकतरफा मुकाबले में बांग्लादेश को नौ विकेट से हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया है, जहां उसकी भिड़ंत चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से होगी.

भारतीय टीम ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी और बांग्लादेश को 50 ओवर खेलने के बाद सात विकेट पर 264 रनों पर समेट दिया. इस लक्ष्य को भारत ने शिखर धवन (46), मैन ऑफ द मैच रोहित शर्मा (नाबाद 123) और विराट कोहली (नाबाद 96) की बेहतरीन पारियों की मदद से 40.1 ओवरों में एक विकेट खोकर हासिल कर लिया.

भारत और बांग्लादेश के बीच खेले गए चैंपियंस ट्रॉफी के दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से अनजाने में एक बड़ी गलती हो गई. धोनी की वजह से बांग्लादेश को बिना कुछ किए ही 5 अतिरिक्त रन मिल गए.

बांग्लादेश की पारी का 40वां ओवर चल रहा था और अश्विन गेंदबाजी कर रहे थें. अश्विन ने अपने इस ओवर की तीसरी गेंद फेंकी (39.3) और महमुदुल्ला ने उसे फाइन लेग की तरफ एक रन बटौरा और वो दूसरे रन लेना चाह रहे थे पर उन्होंने लिया नहीं.

इसी बीच धोनी ने अपने स्टाइल में (बिना स्टंप्स देखे) थ्रो पकड़ कर स्टंप्स की तरफ फेंका लेकिन थ्रो को पकड़ने से पहले धोनी ने अपना एक दस्ताना उतार कर फेंक चुके थे और वो गेंद विकेट पर तो नहीं लगी, लेकिन धोनी के दस्ताने से छूते हुआ आगे चली गई. गेंद के विकेटकीपर धोनी के दस्ताने को टच करने की वजह से बांग्लादेश को बिना कुछ किए ही 5 रन मिल गए.

अनजाने में हुई धोनी की इस गलती की वजह से बांग्लादेश को पांच रन तो मिले ही साथ ही साथ इन पांच रन की बदौलत ही बांग्लादेशी टीम ने मैच में 200 रन के स्कोर को भी पार कर लिया था. दरअसल मैच में जब ये घटना घटी थी तब बांग्लादेश का स्कोर 199 रन था, लेकिन ये 5 अतिरिक्त रन मिलते ही उनका स्कोर 200 रन पार कर गया.

हर किसी को नहीं मिलता यहां प्यार जिन्दगी में

सच्चे प्यार की तलाश में लोग शादी करते हैं और जब उन्हें लगता है कि ये उनका सच्चा प्यार नहीं है, तो वो दूसरी शादी करते हैं. क्या आप जानते हैं कि बॉलीवुड में तो कई लोगों ने, तीसरी और चौथी शादी भी की है. पर्दे पर प्यार और मोहब्बत का सिखाने और दिखाने वाले फिल्मी कलाकार, अक्सर निजी जिन्दगी में प्यार की तलाश में भटकते रहते हैं और उनकी जिन्दगी की ये हिस्से, हमें पर्दे पर नहीं दिखते हैं.

आज हम आपको कुछ ऐसे कलाकारों के बारे बता रहे हैं,  जिन्होंने अपने जीवन में तीन या इससे अधिक शादियां की हैं.

किशोर कुमार

क्या आफ जानते हैं कि महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार ने अपने जीवन में चार शादियां कीं. किशोर दा कि पहली शादी साल 1950 में रूमा गुहा से हुई थी और प्रसिद्ध गायक अमित कुमार इन्हीं रूमा के बेटे हैं. ये शादी आठ साल तक चली. किशोर ने दूसरी शादी 'मुगल-ए-आजम' की अनारकली, यानि मधुबाला से की. साल 1960 में हुई ये शादी, मधुबाला के जीवित रहने तक चली. इसके बाद किशोर ने तीसरी शादी योगिता बाली से की, जो उस समय की एक मशहूर अभिनेत्री थीं. ये शादी ज्यादा सफल नहीं हुई और सिर्फ दो साल ही चली. हम आगे आपको बता देना चाहते हैं कि साल 1980 में किशोर दा को फिर खूबबसूरती की मिसाल, सांवली-सलोनी लीना चन्दावरकर से प्यार हो गया और लीना के साथ किशोर दा ने अपनी चौथी शादी की.

कबीर बेदी

बॉलीवुड में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों भूमिकाओं में अपनी छाप छोड़ने वाले कबीर बेदी ने पहली शादी प्रोतिमा बेदी से की. प्रोतिमा एक ओडिसी डांसर थीं और अभिनेत्री पूजा बेदी इन्हीं दोनों की सन्तान हैं. कबीर बेदी ने दूसरी शादी ब्रिटिश में पैदा हुई फैशन डिज़ाइनर सुसैन हम्फ्रेस से की. इस शादी से कबीर को एक बेटा, एडम बेदी हुआ. एडम एक इंटरनेशनल मॉडल है.

इसके बाद साल 1990 में कबीर ने टीवी और रेडियो प्रेजेन्टर निक्की से शादी की. पर दोनों का कोई बच्चा नहीं है. साल 2005 में कबीर ने निक्की से तलाक ले लिया. कबीर ने चौथी शादी अपनी लम्बे समय से पार्टनर रहीं 41 साल की परवीन दुंसाज से, अपने 70वें जन्मदिन के एक दिन पहले.

करन सिंह ग्रोवर

मशहूर टेलीविजन कलाकार और 'अलोन' के अभिनेता करन सिंह ग्रोवर भी अब तक तीन शादियां कर चुके हैं. करन ने पहली शादी साल 2008 में टीवी एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर से की. उसके बाद 2012 में करन ने खूबसूरत टेलीविजन एक्ट्रेस जेनिफर विंगेट से शादी की. ये शादी तीन साल तक चली. इसके बाद साल 2016 में करन ने जेनिफर को तलाक़ दे दिया और बॉलीवुड अभिनेत्री बिपाशा बासु से शादी कर ली.

विनोद मेहरा

अपने समय के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में गिने जाने वाले विनोद ने मेहरा ने भी सही जीवनसाथी की तलाश में कई शादियां की. विनोद की पहली शादी मीना बरोका के साथ हुई थी, जो कि अरेंज मैरिज थी. शादी होने के कुछ दिनों बाद विनोद मेहरा को दिल का दौरा पड़ा. इससे उबरने के बाद विनोद मेहरा ने उस समय की टॉप अभिनेत्रियों में शुमार बिंदिया गोस्वामी से की. बिंदिया से शादी करने के वक्त तक, विनोद ने अपनी पहली बीवी मीना को तलाक नहीं दिया था.

हम आपको बता देना चाहते हैं कि इस शादी से नाराज होकर मीना अपने पिता के पास चली गई. बिंदिया के साथ भी विनोद की शादी ज्यादा दिनों तक नहीं चली. विनोद मेहरा ने अपनी आखिरी शादी 1988 में किरन के साथ की. ये शादी विनोद के जीवित रहने तक चली.

लकी अली

प्रसिद्ध गायक लकी अली ने पहली शादी न्यूज़ीलैंड की Meaghean Jane McCleary के साथ की. ये शादी लकी के हिट एलबम 'ओ सनम' के आने के वक्त हुई थी. इनके इस शादी से दो बच्चे भी हैं. इन्हें तलाक दे कर लकी अली ने, इनाया नाम की लड़की से शादी की. ये शादी भी ज्यादा दिनों तक नहीं चली. इसके बाद लकी ने तीसरी शादी ब्रिटिश मॉडल केट एलिजाबेथ के साथ की और आपको बता दें कि ये शादी अभी तक चल रही है.

अदनान सामी

पाकिस्तान की नागरिकता छोड़कर भारत की नागरिकता लेने वाले अदनान सामी अब तक तीन शादियां कर चुके हैं. अदनान ने पहली शादी साल 1993 में 'हिना' फेम अभिनेत्री जेबा बख़्तियार, जो कि जेबा की भी तीसरी शादी थी, के साथ की थी. ये शादी महज तीन सालों तक चली. इसके बाद अदनान ने दूसरी शादी दुबई की रहने वाली सबाह के साथ की. इन्हें अदनान ने साल 2009 में तलाक दे दिया. अदनान ने साल 2010 में अपनी तीसरी शादी अफगानिस्तान में रहने वाली जर्मन मूल की रोया के साथ की. अदनान फिलहाल इनके साथ भारत में ही रह रहे हैं.

नीलिमा अजीम

नीलिमा अजीम, समान्तर सिनेमा में अपने शानदार अभिनय के लिए जानी जाती हैं. नीलिमा ने अपनी पहली शादी चरित्र अभिनेता पंकज कपूर से की. शाहिद कपूर इन्हीं दोनों के बेटे हैं, लेकिन जब शाहिद सिर्फ तीन साल के थे, तभी पंकज और नीलिमा का तलाक हो गया था. पंकज कपूर से अलग होने के बाद नीलिमा ने दूसरी शादी राजेश खट्टर से की. इस शादी से नीलिमा को एक बेटा हुआ, जिसका नाम ईशान है. राजेश के साथ नीलिमा की शादी साल 2001 में टूट गई. राजेश से तलाक के बाद नीलिमा को आखिर में अपना सच्चा प्यार अपने बचपन के दोस्त, उस्ताद रजा अली खान के रूप में मिला और नीलिमा ने रजा के साथ अपनी तीसरी शादी की.

इन फिल्मी सितारों की निजी जिन्दगी देखने के बाद पता चलता है कि फिल्मी दुनिया, उतनी भी रंगीन और खुश नहीं है, जितना ये दिखाई देती है. फिल्म स्टार भी अपने अन्दर न जाने कितने दर्द लेकर अपने सच्चे प्यार की तलाश में भटकते रहते हैं.

आखिर क्या है कोहली की ताबड़तोड़ बैटिंग का राज

टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली न सिर्फ अपनी कप्तानी से, बल्कि अपनी बल्लेबाजी से लगातार उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं. उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि उनकी बल्लेबाजी पिछले एक-दो साल में काफी निखरी है.

विराट कोहली ने वनडे के सबसे तेज 8000 रन पूरे कर लिए हैं. उन्होंने सेमीफाइनल में बांग्लादेश के खिलाफ 88 रन बनाते ही यह रिकॉर्ड बना डाला. 28 वर्षीय विराट ने 175वीं पारी में यह उपलब्धि हासिल की.

दक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स के बाद विराट ऐसे दूसरे बल्लेबाज हैं, जिन्होंने 200 पारियों से कम में यह कीर्तिमान बनाया है. डिविलियर्स ने महज 182 पारियों में यह रिकॉर्ड अपने नाम किया था. दक्षिण अफ्रीका के कप्तान से पहले यह रिकॉर्ड सौरव गांगुली के नाम था, जिसे 13 साल तक कोई तोड़ नहीं पाया था.

डिविलियर्स ने साल 2015 में न्यू जीलैंड के खिलाफ मैच में यह रिकॉर्ड बनाया था, जिसे दो साल से कम समय में उनके रॉयल चैलेंजर्स टीम के खिलाड़ी ने तोड़ दिया. विराट ने चैम्पियंस ट्रॉफी 2017 के 4 मैचों में 3 अर्धशतक लगाए हैं.

चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में जीत हासिल करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, 'अगर पिछले एक-दो साल में मेरी बल्लेबाजी में काफी मजबूती आई है, तो इसमें दो लोगों का बड़ा हाथ है.'

28 वर्षीय विराट ने संजय बांगड़ और रघु का नाम लेते हुए कहा, 'एक बल्लेबाज की सफलता से पर्दे के पीछे उसके लिए काम करने वालों का ज्यादा तवज्जो नहीं मिलती. लेकिन मैं मानता हूं कि रघु ने मुझे 140 किमी की रफ्तार की गेदों पर प्रैक्टिस कराकर मेरी बल्लेबाजी को बहुत मजबूत कर दिया है.' संजय बांगड़ टीम इंडिया के बल्लेबाजी कोच हैं.

दरअसल, रघु नाम से पुकारे जाने वाला शख्स राघवींद्र हैं. रघु भारतीय टीम के साथ एक खास मकसद से जुड़े हैं. वह प्रैक्टिस के दैरान थ्रो-डाउन (नेट्स पर बल्लेबाजों को गेंदें फेंकते हैं) की जिम्मेदारी निभाते हैं. रघु घंटों गेंद फेंककर टीम इंडिया के बल्लेबाजों को प्रैक्टिस करवाते हैं. विराट कोहली के अलावा वह सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गजों को भी नेट्स पर गेंद डाल चुके हैं.

ऑफिस में है लम्बी बैठक, तो ये ऐप्स हैं जरूरी

अगर आप भी ऑफिस में लंबे समय तक बैठने का काम करते हैं, तो आंखों, गर्दन, पीठ में दर्द की शिकायत जरूर होती होगी. कुछ ऐसे ऐप्स के जिनकी मदद से आप खुद को शारीरिक और मानसिकतौर पर फिट कर सकते हैं.
 
टाइम आउट (Time Out)
लगातार कंप्यूटर पर काम करने से आंखों में तनाव होता है. यह ब्रेक लेने में आपकी मदद करता है. यह धीरे-धीरे आपकी स्क्रीन को फेड कर देता है और ब्रेक पूरा होने के बाद उसे फिर शुरू करता है. यदि आपका काम अच्छी तरह से चल रहा है और आपको ब्रेक लेने की जरूरत महसूस नहीं हो रही है, तो इसे स्किप भी कर सकते हैं.
 
आइलो (Eyelo)
आंखों को तनाव से बचाने के लिए यह ऐप भी काफी उपयोगी है. यह समय-समय पर आपको बताता है कि अब आंखों को आराम देने की जरूरत हैं और इसके लिए यह आपके कंप्यूटर की स्क्रीन को डिम कर देता है. इसके साथ ही आंखों की एक्सरसाइज के लिए आपको आगे बढ़ाता है.
 
अवेयरनेस (Awareness) 
यह ऐप आपको याद दिलाता है कि आप कितनी देर से कंप्यूटर के सामने बैठे हैं. एक घंटे के बाद इससे तिब्बतिएन बाउल (भिक्षु ध्यान लगाने से पहले इसकी आवाज सुनते हैं) की आवाज आती है. यह सुकून देने वाली आवाज आपके काम को बाधित नहीं करती है. यह आपको याद दिलाती है कि आप कितनी देर से कंप्यूटर के सामने बैठे हैं और अब आपको वहां से जाने की जरूरत है.
 
डेस्कएक्टिव (DeskActive)
आप लगातार सीट पर बैठकर काम कर रहे हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप थोड़ा बहुत अपने शरीर को स्टेच भी नहीं कर सकते हैं. डेस्कएक्टिव में 300 से अधिक ऐसे स्टेचेस और एक्सरसाइज हैं, जिन्हें आप बिना सीट से उठे ही कर सकते हैं. इससे आपको काफी शारीरिक और मानसिक राहत महसूस होगी.
 
लुमिनोसिटी (Luminosity) 
फिजिकल एक्सरसाइज पर तो कई बार ध्यान दिया जाता है, लेकिन इस बीच दिमाग को नजरअंदाज कर दिया जाता है. यह ऐप दिमाग पर फोकस करता है और दिमाग की कसरत करके उसे रीचार्ज करता है. इसमें जो टास्क दिए जाते हैं उन्हें न्यूरोसाइंस रिसर्चर्स द्वारा यूज किया जाता है. इन गेम्स को ऐसे बनाया गया है, जिससे याददाश्त में सुधार हो और कॉग्निटिव एबिलिटीज बेहतर हो सकें. हर कुछ दिन में थोड़ा ब्रेक लें और देखें कि इस ऐप ने आपको कितना बदल दिया.
 
हेडस्पेस (Headspace)
यह एक मेडिटेशन ऐप है, जिसे रोजाना मेडिटेशन करने वालों से लेकर बिगनर तक कोई भी शुरू कर सकता है. इस ऐप से मेडिटेशन को रोजाना 10 मिनट में सीखा जा सकता है. सब्सक्राइबर्स अपने मूड और लाइफस्टाइल को सूट करने वाले विभिन्न कलेक्शन के जरिये अपनी यात्रा को शुरू कर सकते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि आप इस ऐप को कहीं भी ले जा सकते हैं और दिन में किसी भी समय इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.
 
पोस्चर मैन पट (Posture Man Pat)
यह ऐप वेबकैम के वाई-एक्सिस के जरिए सिर की ऊंचाई को नापता है. यदि आप सीधे नहीं बैठते हैं और आपका सिर झुकना शुरू होता है, तो यह स्क्रीन को डिम करके अलर्ट करना शुरू कर देता है. इसके साथ ही घंटी भी बजाता है. इससे सही पॉश्चर में बैठने में मदद मिलती है.

लड़के ने बनाया लड़की का ऐसा MMS, जिसे देख हैरान रह जाएंगे आप

बचपन से हमारे माता पिता हमें एक ही बात सिखाते हैं कि कभी हमसे कुछ छुपाना नहीं, कभी भी कुछ गलत न करना. लेकिन अनजाने में आकर हमसे भूल हो ही जाती है. हम अपने पेरेंट्स से छुपा कर अपनी अलग दुनिया बसाने की सोचते हैं.

हम किसी और को अपना दिल दे बैठते हैं, किसी पर इतना विश्वास कर लेते हैं की हमे उसके सिवाए कुछ और दिखता ही नही. हमारी दुनिया उस इंसान तक ही सीमित रहती है. लेकिन किसी पर अंधा विश्वास करना भी गलत है.
क्यूंकि कब कोई हमारी फीलिंग्स के साथ खेल जाए हमे पता नहीं चलता. फिर आखिर में हमारे पास रोने और पछताने के अलावा कुछ और नहीं बचता.

कुछ ऐसा ही हुआ इस लड़की के साथ. एक लड़के ने इस लड़की का ऐसा एमएमएस बना दिया, जिसे देखकर आप दंग रह जाएंगे.

नहाती हुई मौडल के बाथरूम में घुसे शाहरुख खान, वीडियो हुआ वायरल

अक्सर हमें लगता है कि ऐसी अजीब हरकत सिर्फ हम आम लोग ही करते हैं लेकिन ऐसा नहीं है. हमारे बॉलीवुड के स्टार्स को जब मस्ती चढ़ती है तब उनको भी कुछ ऐसी ही अजीब हरकते सूझती हैं. अब आप शाहरुख खान को ही ले लीजिये, इनकी फैली हुई बाहों के लाखों दीवाने हैं, लेकिन इन्होनें कुछ ऐसा किया की इनके फैन्स भी चौंक गये.

दरअसल एक पुराना वीडियो सामने आया है, जिसमें शाहरुख खान एक नहाती हुई लड़की के बाथरुम मे घुस गये, इतना नहीं शाहरुख खान का ये वीडियो सोशल मीडिया पर एक बार फिर से वायरल हो रहा है.

आईये देखते हैं पूरा वीडियो और जानते हैं इस वीडियो के पीछे की पूरी कहानी.

वीडियो के मुताबिक शाहरुख खान कहीं बाहर से आते हैं. अचानक से वॉशरुम में घुसते हैं तो एक लड़की नहा रही होती है. शाहरुख खान बाथरुम की शीशे की दीवार के पास जाते हैं और लड़की को शीशे के अंदर से देखने लग जाते हैं.
अचानक से पता नहीं शाहरुख खान को क्या होता हैं वे बाथरुम का शीशा खोलकर लड़की के पास चले जाते हैं. अंदर जाने के बाद शाहरुख खान मॉडल से शॉवर छीन लेते हैं और बाहर आपके अपने फेस पर मारते हुऐ अवार्ड्स की अनाउंमेंट करने लग जाते हैं.

दरअसल ये वीडियो एक अवार्ड शो के लिये बनाया गया था. जो एक बार फिर से वायरल हो रहा है.

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फुल्लू : सैनेटरी पैड की जरुरत का प्रभावहीन संदेश

ट्विंकल खन्ना, अक्षय कुमार और आर बालकी औरतों द्वारा माहवारी के दौरान सैनेटरी नैपकीन के उपयोग को रेखांकित करने वाली अपनी फिल्म ‘‘पैडमैन’’ लेकर आते, उससे पहले ही निर्देशक अभिषेक सक्सेना सैनेटरी नैपकीन पर हास्य व्यंग युक्त फिल्म ‘‘फुल्लू’’ लेकर आ गए. मगर औरतें सैनेटरी पैड का उपयोग करने की बजाय कपड़ों का उपयोग क्यों करती हैं? के सवाल के साथ औरतों को माहवारी के दौरान सैनेटरी नैपकीन के उपयोग की वकालत करने वाली फिल्म ‘‘फुल्लू’’ अपने इस मकसद में सफल नजर नही आती. यह फिल्म नारी उत्थान व नारी स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर भी बहुत सतही स्तर पर ही बात करती है. जबकि इस तरह के संदेश को शहर व गांव हर जगह पहुंचाने की जरुरत है.

यह कहानी है उत्तर भारत के एक गांव में रहने वाले फुल्लू (शरीब हाशमी) की. जो कि अपनी मां (नूतन सूर्य) और बहन तारा के साथ रहता है. फुल्लू नाम के अनुरूप काफी भोला है. वह कोई काम धाम नहीं करता. जबकि मां गूदड़ी सिलकर बेचती रहती है. फुल्लू अपनी मां के लिए शहर से कपड़ों की कतरने लाकर देता रहता है, जिसकी गूदड़ी सिलकर वह बेचती है. फुल्लू गांव भर की औरतों के लिए शहर से सामान लाकर देता रहता है और दिन भर मटरगश्ती करता रहता है. उसकी मां उसे ताने मारती रहती है. वह कहती है कि उसका बेटा निकम्मा और मौगा हो गया है. वह चाहती है कि फुल्लू शहर जाकर कुछ काम करके चार पैसे कमाकर लाए.

गांव की एक औरत की सलाह पर फुल्लू की मां उसका ब्याह बिगनी (ज्योति सेठी) से करा देती है कि शादी के बाद फुल्लू जिम्मेदारी का अहसास कर सुधर जाएगा. मगर वह तो दिन रात अपनी पत्नी के साथ कमरे में ही घुसा रहता है. एक दिन उसकी पत्नी बताती है कि उसे खरिस हो गयी है. डाक्टर की सलाह पर दवा ली है और फिटकरी से धोया भी है. इसी बीच शहर में दवा की दुकान पर जब फुल्लू गांव की मास्टरनी व कुछ दूसरी औरतों के लिए सामान लेने पहुंचता है, तो उसे वहां मौजूद डाक्टरनी से पता चलता है कि उसके गांव की मास्टरनी ने उससे दवाई नहीं बल्कि सैनेटरी पैड मंगवाया है. जो कि औरतों के लिए बहुत जरुरी है.

सैनीटरी पैड से खरिस नहीं होती. माहवारी के दिनो में इंफेक्शन नहीं होता है. अब फुल्लू के जीवन का एकमात्र मकसद अपनी मां, बहन व गांव की औरतों के लिए सस्ते दाम वाली सैनेटरी पैड बनाना है. शहर जाकर सैनेटरी पैड बनाने वाली कंपनी में नौकरी करने की जुगत में काफी परेशानी उठाता है. बड़ी मुश्किल से एक महिला पत्रकार की मदद से उसे नौकरी मिलती है. वह वहां पर काम करते हुए सैनेटरी पैड बनाना सीखता है और फिर अपने गांव आकर घर के अंदर सैनेटरी पैड बनाना शुरू करता है. फुल्लू सवाल उठाता है कि औरतें सैनेटरी पैड का उपयोग करने की बजाय कपड़ों का उपयोग क्यों करती हैं? जो कि बाद में इंफेक्शन पैदाकर कई बीमारियों को जन्म देता है. इस बीच उसकी पत्नी गर्भवती है, पर बच्चे को जन्म देने से पहले ही मर जाती है. लेकिन तमाम विराधों व उपहासों के बावजूद फुल्लू सस्ता सैनेटरी पैड बनाने में कामयाब होता है.

सस्ते बजट में बनायी गयी फिल्म ‘‘फुल्लू’’ नेक इरादे से बनायी गयी है, मगर कहानीकार व निर्देशक ने पूरी फिल्म को चौपट कर दिया. फिल्म अवसाद से भरी हुई है. फिल्म के कई घटनाक्रम अतिबनावटी हैं. फिल्म मनोरंजन की बजाय बोर करती है. फिल्म का क्लायमेक्स बहुत ही ज्यादा घटिया  है. फिल्म में बेवजह के गाने भरे गए हैं.

फुल्लू का पात्र मासूम है, मगर किरदार को गति नहीं मिलती. फिल्म की गति भी धीमी है. फिल्म में बार बार मां का अपने बेटे फुल्लू को झिड़कते रहना, उसे निकम्मा कहना अजीब सा लगता है. सैनेटरी नैपकीन का विरोध करने वाली बहन तारा का फेशियल करने वाली बात गले नहीं उतरती. पूरी फिल्म शरीब हाशमी के ही कंधों पर है, पर कमजोर पटकथा व निर्देशन के चलते 20 मिनट बाद ही फिल्म हांफने लगती है. उसके बाद रोते रोते किसी तरह फिल्म खत्म होती है. लेखक व निर्देशक ने फिल्म के किसी भी पात्र का चरित्र चित्रण सही ढंग से नहीं किया है. फुल्लू की पत्नी बिगनी के हिस्से भी कुछ करने के लिए नही है. शरीब हाशमी के अभिनय में नवीनता नजर नहीं आती.

96 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘फुल्ल’’ का निर्माण पुष्पा चौधरी व अनमोल कपूर ने किया है. निर्देशक अभिषेक सक्सेना हैं.

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