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स्मार्टफोन कैमरे के ये फायदे जानते हैं आप

आपके पास स्मार्टफोन तो होगा ही, और देश के लगभग हर घर में कम से कम एक स्मार्टफोन तो होगा ही. सभी लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल अपने-अपने स्तर पर कर रहे हैं. कोई सेल्फी के लिए स्मार्टफोन खरीदता है, वहीं कोई स्टेटस दिखाने के लिए आईफोन खरीदता है. वैसे आपके पास जो भी फोन होगा उसमें कम या ज्यादा पावर का कैमरा भी होगा, लेकिन उस कैमरे का आप अभी तक फायदा नहीं उठा रहे हैं. क्या आप जानते हैं स्मार्टफोन के कैमरे के ये जबरदस्त फायदे.

स्कैनर

कई बार आपको किसी डॉक्यूमेंट को कहीं भेजना होता है लेकिन देर रात होने या साइबर कैफे खुला नहीं होने के कारण आप अपने डॉक्यूमेंट को स्कैन नहीं करा पाते हैं. ऐसे में CamScanner ऐप आपकी मदद कर सकता है. इस ऐप की मदद से आप किसी भी डॉक्यूमेंट को स्कैनर जैसा स्कैन कर सकते हैं और उसे अपने हिसाब से साइज में भी बदल सकते हैं.

टेक्स्ट को ट्रांसलेट

कई बार हम किसी अनजान जगह पर जाते हैं और वहां लगे नेमप्लेट पर लिखी बातों को हम समझ नहीं पाते हैं. ऐसे में आपका कैमरा गाइड का काम करेगा. गूगल ट्रांसलेटर ऐप को फोन में डाउनलोड करें और जिस भाषा में अनुवाद चाहते हैं उसे सेलेक्ट करें. इस ऐप की मदद से आप फोन में मौजूद फोटो या फोटो क्लिक करके उस पर लिखे टेक्स्ट का अनुवाद कर सकते हैं.

बार कोड रीडर

क्या आप जानते है कि आप अपने फोन के कैमरे की मदद से बारकोड और QR code स्कैन करके किसी भी प्रोडक्ट की डिटेल जान सकते हैं जैसे-वह प्रोडक्ट कब बना है, उसकी एक्सापायरी तारीख क्या है, किस कंपनी ने बनाया है. इसके लिए प्ले-स्टोर से QR code या बार कोड स्कैनर डाउनलोड कर सकते हैं.

चीजों को पहचानें

अगर आपके पास कोई फोटो है और आप उसे नहीं पहचानते हैं कि वह फोटो किसकी है या किस जानवर की है या फिर किस पेड़-पौधे की है तो इसमें आपके फोन का कैमरा आपकी मदद कर सकता है. इसके लिए गूगल प्ले-स्टोर से Google Goggle डाउनलोड करें. इसके अलावा कैमरे को किसी चीज के सामने ले जाकर भी आप डिटेल जान सकते हैं.

फाइनल में टीम इंडिया के सामने मुश्किलें खड़ी कर सकता है पाकिस्तान

भारतीय फैन्स बेशक फाइनल में टीम इंडिया के एकतरफा जीत की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन टीम इंडिया या जानकार पाकिस्तान टीम को हल्का नहीं आंकना चाहते. कल यानी की 18 जून, 2017 को भारत और पाकिस्तान की टीमें इंग्लैंड में चैंपियंस ट्रोफी का खिताबी मुकाबला खेलेंगी.

वैसे तो भारत पाकिस्तान को लीग मैच में 124 रन से हरा चुका है, लेकिन बावजूद इसके जानकारों की मानें तो ऐसी कई वजहें हैं जिससे पाकिस्तान टीम में एक अलग मजबूती नजर आ रही है. ऐसे में फाइनल यकीनन लीग मुकाबले से ज्यादा रोमांचक होगा.

पाकिस्‍तान के पास उम्दा गेंदबाज

पाकिस्तान की गेंदबाजी अब अपने रंग में नजर आ रही है. पाकिस्तान के युवा तेज गेंदबाज हसन अली दो मैन ऑफ द मैच का खिताब जीत चुके हैं.

इसके अदावा जुनैद खान और मोहम्मद आमिर भी हैं, जो पाकिस्तानी तेज गेंदबाजी आक्रमण को धार देते हैं. अली चार मैचों में 10 विकेट ले चुके हैं. उनके पास रफ्तार और स्विंग का मेल है. साउथ अफ्रीका, श्रीलंका और इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने तीन-तीन विकेट लिए हैं. उनका इकॉनमी भी 3.64 रहा है.

भारत के खिलाफ हालांकि हसन अलनी महंगे रहे थे लेकिन उसके बाद वह काफी अच्छी गेंदबाजी कर रहे हैं.

स्पिनर्स आए रंग में

भारत ने पाकिस्तानी स्पिन गेंदबाजों को सेट नहीं होने दिया. पर भारत के खिलाफ मैच के बाद से पाकिस्तानी स्पिनर्स ने विपक्षी टीमों पर लगाम लगाने में कामयाब हुए हैं.

भारत के खिलाफ इमाद वसीम ने शानदार गेंदबाजी की थी. पर इसके बाद से उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ दो विकेट लिए. इसके अलावा शादाब खान भी बीच के ओवरों में विपक्षी टीम पर लगाम लगाने में कामयाब रहे हैं.

टीम ने की शानदार वापसी 

लीग के पहले मैच में भारत ने पाकिस्तान को डकवर्थ-लुइस नियमों के साथ 124 रनों से हरा दिया और पाक टीम का प्रदर्शन बेहद फीका नजर आया. लेकिन उसके बाद इस टीम ने दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और इंग्लैंड जैसी ताकतवर टीमों को शिकस्त दी है जिससे उसके हौसले बुलंद हो गए हैं. कप्तान विराट कोहली से लेकर सुनील गावस्कर जैसे दिग्गज ऐसा मानने में कोई इंकार नहीं करते.

सुधरी बल्लेबाजी

भारत के खिलाफ बाएं हाथ के इस सलामी बल्लेबाज को खेलने का मौका नहीं मिला था. इसके बाद पाकिस्तान ने अपनी टीम में इस बल्लेबाज को शामिल किया.

3 मैचों में इस बल्लेबाज ने 117.94 के स्ट्राइक रेट से 138 रन बनाए. उनके आने के बाद पाकिस्तानी बैटिंग मजबूत नजर आने लगी है. वह अपनी टीम को आक्रामक शुरुआत देने में कामयाब रहे हैं.

श्रीलंका और इंग्लैंड के खिलाफ हम यह देख चुके हैं. श्रीलंका के खिलाफ मोहम्मद आमिर ने 9वें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए कप्तान सरफराज अहमद के साथ मिलकर 75 रनों की साझेदारी कर पाकिस्तानी टीम को जीत दिलाई थी.

आमिर की बल्लेबाजी में धैर्य नजर आ रहा था. इसके अलावा आउट ऑफ फॉर्म दिख रहे मोहम्मद हफीज और शोएब मलिक जैसे अनुभवी बल्लेबाज कभी भी फॉर्म में लौट सकते हैं.

फाइनल में पाक का बेहतर रिकॉर्ड

आईसीसी या वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में भारत का रिकॉर्ड पाकिस्तान से हमेशा बेहतर रहा है. वर्ल्‍डकप में भारत, पाकिस्तान से कभी नहीं हारा है. लेकिन अगर सिर्फ फाइनल मुकाबलों की बात करें तो पाक टीम बाजी मारती नजर आती है.

1985 से लेकर अबतक दोनों टीमों के बीच 10 फाइनल मैच खेले गए. इनमें पाकिस्तान को 7 जबकि भारत को 3 मैचों में जीत मिली. 

ग्रुप मैच की हार का बदला चुकाने का मौका

इन सबके अलावा पाकिस्तान की टीम पिछले कुछ मुकाबलों से भारत से हार रही है. दोनों टीमों द्वारा खेले गए अंतिम 5 वनडे मैचों की बात करें, तो पाकिस्तान को 4 बार हार मिली है. वह इस बार इस बुरे रिकॉर्ड को हर हाल में पलटना चाहेगा.

इस टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबले में हार के बाद टीम की काफी किरकिरी हुई. यह टीम इस मैच में इन सब शिकायतों से पार पाना चाहेगी. इसके लिए पाकिस्तान की टीम खुद को एकजुट कर रही है.

गीला हो गया है फोन, तो आपके लिए हैं ये टिप्स

स्मार्टफोन यूजर्स अपने पॉकेट कंप्यूटर यानि कि अपने स्मार्टफोन को कितना भी संभाल कर क्यों न रख लें, लेकिन कभी न कभी आप भी अपने स्मार्टफोन को लेकर कभी न कभी, कुछ कॉमन परेशानियों से गुजरते ही हैं. इनमें से एक सबसे खास है, फोन का गीला हो जाना. कभी बारिश की वजह से ऐसा होता है, तो कभी पानी में गिरकर आपका स्मार्टफोन गीला हो जाता है.

अब अगर आपके साथ भी ऐसा हो तो, आप सबसे पहले हमारे द्वारा बताए जा रहे ये काम करें. ये तरीके यकीनन आपकी मदद करेंगे…

1. पानी में भीगने के बाद अगर फोन ऑन है, तो सबसे पहले उसे ऑफ कर दें. फोन के भीगने की हालत में उसे ऑन करने की कोशिश बिल्कुल न करें. फोन के भीगे रहते हुए ऑन रहने/करने पर, पानी आपके फोन के सर्किट्स को खराब कर सकता है.

2. फोन से हेडफोन या चार्जर जैसी चीजें, अगर लगी हुईं तो निकाल दें. इसके बाद फोन का बाहरी हिस्सा कॉटन के साफ कपड़े से पोंछें. अगर वैक्यूम क्लीनर उपलब्ध हो, तो सावधानी बरतते हुए थोड़ी दूर से इस्तेमाल कर सकते हैं.

3. फोन का बैककवर निकाल दें. बैटरी और सिमकार्ड आदि सब निकालें. फोन का भीतरी हिस्सा कपड़े से पोंछें, लेकिन ध्यान रखें कि कपड़े में फोन का कोई पुर्जा अटक कर खिंच न जाए, वरना साथ में दूसरी परेशानी भी खड़ी हो सकती है.

बैटरी का स्टिकर चेक करें. फोन बनाने वाली कंपनियां हैंडसेट के भीगने पर कोई वॉरंटी नहीं देतीं. ज्यादातर फोन्स में बैटरी के नीचे एक छोटा सा स्टीनकर चिपका होगा, जो अधिकतर सफेद रंग का होता है. अगर फोन के अंदर पानी चला गया है, तो यह गुलाबी या लाल रंग में बदल जाता है.

4. फोन को सूखे कच्चे चावलों में रखें. यह फोन के अंदर का पानी या नमी सुखाने के लिए घर में मौजूद सबसे अच्छा तरीका है. बेहतर यही होगा कि एक कटोरे में कच्चे चावल भरें. फोन को इसमें थोड़ा भीतर तक गाड़ें और इसे धूप में रखें.

चावल गर्म होने से फोन के अंदर का पानी सूख जाएगा और सीधे धूप में न रखने की वजह से आपका फोन भी खराब नहीं होगा. लेकिन इसमें भी इस बात का ध्यान रखिएगा कि फोन के ऑडियो पोर्ट जैसे किसी हिस्से में चावल के दाने न घुस जाएं.

5. फोन को 24 घंटे से पहले ऑन करके इस्तेमाल न करें. उम्मीद है कि इसके बाद आपका फोन ठीक काम करेगा. लेकिन अगर अब भी यह ठीक नहीं होता, तो तुरंत ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर पर ले जाना ही बेहतर होगा.

6. फोन पर कभी भी हेयरड्रायर का इस्तेमाल न करें. गर्म हवा फोन को नुकसान पहुंचा सकती है. इसकी जगह थोड़ी देर फोन को एसी के सामने रखने से फायदा हो सकता है.

सोहेल खान और उनका भाई प्रेम

भारतीय संस्कृति में सदियों पुरानी कहावत है कि बरगद का पेड़ काफी विशाल होता है. उसकी तमाम जड़े व टहनियां होती हैं. बरगद का पेड़ लोगों को छांव देता है, मगर बरगद के पेड़ के नीचे कोई भी दूसरा पेड़ पनप नहीं पाता. खैर ये कहावत तो बहुत पुरानी है, पर इन दिनों अचानक यह कहावत एक फिल्मी परिवार के कारण याद आ रही है. यूं तो इस फिल्म परिवार का हर सदस्य सफल है. इसके बावजूद ऐसा कुछ है कि लोग बरगद के पेड़ की बातें करने लगे हैं. यह फिल्मी परिवार है आज के सर्वाधिक सफल अभिनेता सलमान खान का.

सलमान खान के परिवार में उनके दो छोटे भाई अरबाज खान व सोहेल खान भी हैं. सलमान खान व उनके यह दोनों भाई फिल्मी दुनिया से जुड़े हुए हैं. अब 23 जून को प्रदर्शित हो रही फिल्म ‘‘ट्यूबलाइट’’ में सलमान खान और उनके छोटे भाई सोहेल खान एक साथ नजर आने वाले हैं. मगर यह भी सच है कि अभिनय जगत में जो मुकाम सलमान खान को मिला है, वो अभिनय जगत में अरबाज खान व सोहेल को नहीं मिल पाया. इसके बावजूद इन तीनो भाईयों में जो प्यार, अपनापन व लगाव है, वह एक मिसाल है.

जब ‘‘ट्यूबलाइट’’ के प्रचार के ही दौरान सोहेल खान से हमारी मुलाकात हुई और हमने उनसे पूछा कि ‘‘एक कहावत है कि बरगद के पेड़ के नीचे दूसरा पौधा नहीं पनप पाता, क्या सलमान खान के ही कारण आप और अरबाज खान के अभिनय करियर को गति नही मिली?’’ हमारे इस सवाल पर सोहेल खान ने कहा – ‘‘ये कहावत तो है और ये भी सच है कि हमारे खानदान में हम तीन भाई हैं, पर पूरी दुनिया में सलमान खान एक हैं. उनके साथ अभिनय के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करना हमारे लिए मुश्किल है, लेकिन प्रोडक्शन के क्षेत्र में जो कमाल अरबाज भाई ने किया है, वो सलमान भाई नहीं कर पाए. मैंने फिल्म निर्माण व निर्देशन में जो कारनामा किया है, वह सलमान भाई नहीं कर पाए. हमने इवेंट व शोज में जो ऊंचाईयां हासिल की हैं, वो सलमान भाई नहीं कर पाए. सलमान भाई ने जो अभिनय के क्षेत्र में उंचाइयां पायी हैं, उसे हम छू भी नहीं सकते. मैं यह भी मानता हूं कि पूरी दुनिया में जो सम्मान, जो प्राथमिकता कलाकार को मिलती है, वह निर्माता निर्देशक या लेखक को नहीं मिलती है. माशाअल्लाह हमें खुशी होती है कि सलमान भाई इतने बड़े हैं कि पूरे देश में उन्हें इज्जत मिलती है. सलमान भाई को पूरी दुनिया में जो सम्मान मिलता है, वह किसी को नहीं मिलता, पर हम इस बात से खुश हैं कि मुझे और अरबाज को अपने अपने क्षेत्र में कामयाबी मिली हुई है.’’

काश! सोहेल खान की इस बात में छिपे अमूल्य संदेश को हर आम इंसान समझ जाए, तो दो भाईयों के बीच प्यार व अपनापन कभी खत्म नहीं हो सकता.

आपातकाल की पृष्ठभूमि दर्शाती फिल्म इंदु सरकार

मधुर भंडारकर की आने वाली फिल्म 'इंदु सरकार' का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है. इस ट्रेलर की शुरुआत, 'अब इस देश में गांधी के मायने बदल चुके हैं' डायलॉग के साथ होती है और इसके बाद इमरजेंसी दिखाई गई है.

अभिनेत्री कीर्ति कुल्हारी का रोल बहुत दमदार है वो फिल्म में इमरजेंसी का विरोध करती हैं और संजय गांधी के रोल में नील नितिन मुकेश की एक्टिंग भी शानदार है. फिल्म में नील नितिन मुकेश को हू-ब-हू संजय गांधी का लुक दिया गया है, यहां तक कि उन्हें पहचानना भी मुश्किल हो रहा है.

कीर्ति आखिरी बार फिल्म पिंक में नजर आई थीं और इस फिल्म में उनके रोल की काफी तारीफ की गई थी. 'इंदु सरकार' के ट्रेलर को देखकर भी आप कीर्ति की एक्टिंग की तारीफ किए बिना रह नहीं पाएंगे. फिल्म में सुप्रिया विनोद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के रोल में नजर आएंगी. अनुपम खेर की भी फिल्म में जोरदार एक्टिंग देखने को मिलेगी.

फिल्म ‘इंदु सरकार’ 1975 से 1977 के बीच के उन 21 महीनों की कहानी है जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं और उन्होंने देश में इमरजेंसी की घोषणा कर दी थी. इस फिल्म में बप्पी लहरी और अनु मलिक पहली बार साथ मिलकर म्यूजिक दे रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, यह फिल्म 28 जुलाई को रिलीज की जाएगी.

बैंक चोर : हंसाने में नाकामयाब

इन दिनों एक नए किस्म का सिनेमा बनने लगा है. फिल्मकार चाहते हैं कि दर्शक अपना दिमाग, अपना विवेक सब कुछ घर पर रखकर उनकी फिल्म देखने आएं और उनकी वाहवाही करते हुए चले जाएं, जो कि नामुमकिन सा है. यही वजह है कि हास्य व रोमांचक फिल्म ‘‘बैंक चोर’’ दर्शकों को आकर्षित करने या हंसाने की बजाय बोर करती है.

फिल्म की कहानी तीन बैंक चोरों के इर्द गिर्द घूमती है. एक महाराष्ट्रियन युवक चंपक (रितेश देशमुख) दो दिल्ली के युवकों गेंदा (विक्रम थापा) और गुलाब (भुवनेश अरोड़ा) के साथ बैक में चोरी करने जाता है. फिर एक आफिसर अमजद खान (विवेक ओबेराय), एक टीवी रिपोर्टर गायत्री गांगुली ( रिया चक्रवर्ती), एक दूसरे गैंग का चोर (साहिल वैद्य) के अलावा सिक्यूरिटी फोर्स, अलार्म, टीवी कैमरा और अनावश्यक गीत संगीत के माध्यम से लोगों को हंसाने की कहानी है.

मगर फिल्म का एक भी सीन ऐसा नहीं है, जहां दर्शक को हंसी आ सके. हर किरदार वही घिसे पिटे व सुने सुनाए जोक्स ही सुनाता है. इंटरवल से पहले दर्शक सोचने पर मजबूर हो जाता है कि वह कहां फंस गया. इंटरवल के बाद फिल्म सधती हुई नजर आती है, मगर कुछ समय बाद बिखर जाती है. इतना ही नहीं फिल्म का क्लायमेक्स बहुत निराश करता है.

पटकथा लेखक बलजीत सिंह मारवाह ने पटकथा लेखन में बहुत लापरवाही बरती है. बम्पी का निर्देशन भी उत्साहित नहीं करता. परिणामतः रितेश देशमुख व विवेक ओबेराय जैसे प्रतिभाशाली कलाकार भी फिल्म को संभाल नहीं पाते.

दो घंटे 6 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘बैंक चोर’’ का निर्माण ‘वाय एफ’ फिल्मस के बैनर तले किया गया है. निर्देशक बम्पी हैं. कलाकार हैं-रितेश देशमुख, विवेक ओबेराय, भुवनेश अरोड़ा, विक्रम थापा  व अन्य.

जीवन सरिता : विचारों का तनमन पर प्रभाव

जैसे हमारे विचार होते हैं, कुछ हद तक हमारा तन और मन भी वैसी ही प्रतिक्रिया देता है. हमारे मन में यदि यह बात बैठ गई कि ठंड मुझे बिलकुल बरदाश्त नहीं होती तो तन भी वैसी ही प्रतिक्रिया करनी शुरू कर देगा. मेरी बड़ी बहन न्यूजर्सी में रहती हैं. अक्तूबर के महीने में शाम के समय उन के घर की खिड़की थोड़ी सी खुली रह गई तो उन की पीठ बिलकुल अकड़ गई.

मेरी बड़ी बहन हमारे यहां इलाज करवाने आती थीं तो मैं पूछती थी कि आप को क्या हो गया? शिद्दत के साथ महसूस करने के कारण वे अपना जो रोग बताती थीं, वही रोग मुझे लग जाता था. फिर मैं ने पूछना ही बंद कर दिया. यह बात हर व्यक्ति पर लागू नहीं होती है, पर कुछ हद तक सही भी है. पहले मुझे कार आदि में थोड़ी दूर सफर करने पर भी मोशन सिकनैस की वजह से अकसर उलटी हो जाया करती थी. जब से मैं ने कल्पना चावला के बारे में पढ़ा और मन में कुछ नहीं सोचा तो उलटी आनी बंद हो गई.

मन में यदि क्रोध भरा है, तो इस का असर कमर पर, हाथों व पैरों पर तथा मस्तिष्क आदि पर पड़ सकता है. शांतमन से सोचें कि क्रोध आने के क्या कारण हैं? फिर शांतमन से उन को दूर करने की सोचें. यदि संभव हो, जिस बात पर क्रोध आ रहा है उसे हंस कर टालने की सोचें, या जिस व्यक्ति पर क्रोध आ रहा हो उसे क्षमा कर दें, ऐसा करने से आप कई परेशानियों से बच जाएंगे.

यदि आप ऐसा अनुभव करते हैं कि कोई दर्द आप को सता रहा है तो संभव है कमर आदि में दर्द होना शुरू हो जाए. हम लोग अमेरिका में नएनए आए थे. चिंता आदि के कारण मेरी ब्लीडिंग रुकने का नाम नहीं ले रही थी. कुछ महीनों के बाद मुझे अपने पति, जो डाक्टर हैं, के चीनी मित्र के यहां जाने का मौका मिला. चीनी मित्र की पत्नी रसोई में काफी व्यस्त थीं. उन को परिश्रम करते हुए देख कर मुझे नसीहत मिली कि परिश्रम से सब संभव है और मेरे मन की चिंता जाती रही. उस दिन के बाद से मेरी ब्लीडिंग बिलकुल बंद हो गई.

मैं जब कक्षा 10 में पढ़ती थी तो अंगरेजी की ट्यूशन पढ़ने के लिए एक सहेली के यहां, जो मेरे घर के सामने ही रहती थी, रात्रि में 8 बजे के करीब जाया करती थी. पास में ही नन्हें मास्टर रहा करते थे. मेरे मन में ऐसे ही विचार आया कि ये नन्हें मास्टर क्या सोचेंगे कि पता नहीं, रात्रि में यह लड़की कहां जाती है. मन में इसी डर व चिंता के कारण मुझे टाइफाइड हो गया. जो, कुछ दिनों बाद ही ठीक हुआ. जगह व दिनचर्या बदलने के बाद से ?मुझे कभी टाइफाइड नहीं हुआ.

निष्कर्ष यह है कि बेकार में मन में इधरउधर की चिंता न पालें और न यह सोचें कि लोग क्या कहेंगे. सो, केवल सकारात्मक विचार मन में रखें और तनमन दोनों से सबल बनें.सकारात्मक सोच हमारे जीवन पर बहुत गहरा असर डालती है. नकारात्मक सोच के व्यक्ति अच्छी चीजों में भी बुराई ही ढूंढ़ते हैं, जैसे गुलाब के फूल को कांटों से घिरा देख कर नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति सोचता है कि इस फूल की इतनी खूबसूर ती का क्या फायदा. इतना सुंदर होने पर भी कांटों से घिरा है. जबकि उसी फूल को देख कर सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति बोलता है कि, यह प्रकृति का कितना सुंदर कार्य है कि इतने कांटों के बीच भी इतना सुंदर फूल खिला दिया.

बात एक ही है लेकिन फर्क है केवल सोच का. इसलिए जरूरी है अपनी सोच को सकारात्मक और बड़ा बनाइए, तभी आप अपने जीवन में कुछ कर सकते हैं. सकारात्मक सोच रख कर आप अपनेआप को नई संभावनाओं के लिए खुला रख सकते हैं और अपनी जिंदगी जीने योग्य बना सकते हैं.       

धर्म की आड़ में राजनीति

इतिहास इस बात का गवाह है कि जमीन के टुकड़े कभी भी किसी एक धर्म, जाति, वर्ण, वर्ग से नहीं बंधे रहे हैं. भारत यानी हिंदुस्तान हिंदुओं का ही है और पाकिस्तान सिर्फ मुसलमानों का व अमेरिका सिर्फ गोरे प्रोटैस्टैंट ईसाइयों का, यह मानना एक भारी गलती है. एक भूभाग में अगर एक सोच, धर्म, वाद के लोग ज्यादा भी रहते हों तो भी वह भूभाग उन्हीं से पट जाए और उस में दूसरों की जगह न रहे, यह गलत होगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका को गोरे ईसाइयों का स्वर्ग बनाने की चाहत में लैटिनों को भी नहीं बख्श रहे जो ईसाई भी हैं और उन में गोरों का खून भी है. मुसलिम देशों और मुसलमानों के खिलाफ मोरचा खोल कर वे गोरे ईसाई कट्टरों को खुश कर वे चुनाव जीत गए हैं पर इस से अमेरिका को ही नहीं, दूसरे देशों को भी इस की कीमत चुकानी पड़ेगी क्योंकि फिलहाल अमेरिका के प्रचार के पांव इस तरह पसरे पड़े हैं कि वे जो करेंगे, दूसरे देशों में दोहराया जाएगा.

भारत में भी अब साफ हो गया है कि धर्म हमारी राजनीति की धुरी में रहेगा और बहुमत के धर्म के बारे में कुछ कहना देशद्रोह तक माना जा सकता है. इस का अर्थ है चाहे अमेरिका हो, अरब देश या भारत, सामाजिक बदलावों पर ब्रेक लग गया है. अमेरिका में स्कूलों में बाइबिल जबरन पढ़ाई जाएगी. अरब देश वहाबी इसलाम के मुरीद होंगे और हम पौराणिककाल को वापस लाएंगे.

200 साल पहले ऐसी ही भयावह स्थिति थी. औरतों के अधिकार बहुत कम थे. पुरुष मनमानी करते थे. दासप्रथा तरहतरह के रूपों में थी. गरीब हो तो न खाना मिलेगा, न इलाज. राज करने वाले चाहे मौज करें पर अधिकांश जनता त्रस्त थी, असहाय थी. राजा या सरकार का हुक्म मानना अनिवार्य था.

ट्रंप भी अमेरिका को ऐसा ही देश बनाने के प्रयत्न में हैं. अरब देशों में नए विचारों को गहरी कब्रों में दफन किया जा चुका है. यूरोप के कई देशों में शरणार्थियों और मुसलिमों के खिलाफ कहानियां गढ़ी जा रही हैं तो अरब देशों में मुसलिमों के अलावा कोई पैर भी नहीं रखना चाहता. धर्म के बहाने वैश्वीकरण की भावना पर जो एकदम प्रहार हुआ है उस के पीछे कट्टर मुसलमानों के आतंकवादी हमले हैं तो अमेरिका और यूरोप, जिस में  रूस शामिल है, में चर्च का फिर से शक्तिशाली बनना. भारत भी इसी रास्ते पर है.

धर्म हर जगह आधुनिक प्रचार साधनों का जम कर इस्तेमाल कर रहा है. उस ने तकनीक को सहारा बना लिया है और घरघर तक पहुंचने के लिए अब उसे दरवाजे खटखटाने वाला मुल्ला, पादरी, संत, महंत नहीं चाहिए बल्कि एयरकंडीशंड कमरे में बैठे सोशल मीडिया में माहिर लोगों की जरूरत है. आम जनता को अब सहीगलत ज्ञान कोई देना चाहे तो उस के पास ये महंगे साधन ही नहीं हैं. इंटरनैटमोबाइल की सुलभता के कारण झूठी कहानियों को तथ्य बना कर जितना मरजी थोप दो, कोई नहीं पूछेगा. इस का नतीजा क्या होगा? सीरिया, इराक, लीबिया की तसवीरें देख लें.

लंच लंच का खेल

स्कूल, कालेजों और दफ्तरों के लंच की भी अपनी अलग अहमियत और सियासत होती है जिस में जम कर धर्म, अर्थ और जाति के आधार पर भेदभाव होता है. जिस से कोई काम होता है या स्वार्थ सिद्ध करना होता है, उस के साथ लंच करने के मौके ढूंढेजाते हैं क्योंकि लंच पर हुई बात में नमकमिर्चमसाला सबकुछ रहता है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोनिया गांधी की अगुआई वाले संयुक्त विपक्ष की लंच वाली मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया और प्रधानमंत्री के लंच पर पहुंच गए तो सब को समझ आ गया कि पहेली अब कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा था की तर्ज पर हल हो चुकी है. दिलचस्पी या सस्पैंस अब इस बात का रह गया है कि दरअसल कटप्पा कौन है और बाहुबली कौन है.

लाइलाज शत्रु

आमतौर पर किसी भी पार्टी के दूसरे और तीसरे दरजे के नेता पार्टी से निकाले जाने पर दुखी रहते हैं पर भाजपा के बड़बोले सांसद अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा का दर्द जरा उलट है कि पार्टी उन्हें बाहर ही नहीं निकाल रही. बस, इस आशय की धमकी दे कर छोड़ देती है. शत्रु के बारे में हर कोई जानता है कि वे कभी भी पार्टी की नीतियों और फैसलों का सार्वजनिक विरोध कर डालते हैं पर आलाकमान कोई कार्यवाही नहीं करता.

दिक्कत उस वक्त और बढ़ जाती है जब वे लालू प्रसाद यादव और अरविंद केजरीवाल सरीखे विरोधी नेताओं के समर्थन में ट्वीट कर डालते हैं. इस पर बिहार के दिग्गज भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने एतराज जताया तो शत्रु ने दोटूक कह डाला कि कृपया धमकी न दें, बल्कि हो सके तो मुझे निष्कासित कर दें. अब बिहार वाले मोदी के पास तो यह हक है नहीं, लिहाजा, वे कसमसा कर रह गए.

 

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