स्कूल, कालेजों और दफ्तरों के लंच की भी अपनी अलग अहमियत और सियासत होती है जिस में जम कर धर्म, अर्थ और जाति के आधार पर भेदभाव होता है. जिस से कोई काम होता है या स्वार्थ सिद्ध करना होता है, उस के साथ लंच करने के मौके ढूंढेजाते हैं क्योंकि लंच पर हुई बात में नमकमिर्चमसाला सबकुछ रहता है.

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