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2018 में नहीं 2020 में होगा टी20 वर्ल्ड कप

विश्व टी20 चैंपियनशिप के 7वें टूर्नामेंट को रद्द करने की तैयारी लगभग पूरी हो गई है और इसे 2020 में आयोजित किया जा सकता है क्योंकि 2018 में अधिकांश टॉप सदस्य देश द्विपक्षीय प्रतिबद्धताओं में व्यस्त हैं.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के शीर्ष पदस्थ सूत्रों के अनुसार आईसीसी विश्व टी20 के अगले टूर्नामेंट का आयोजन 2020 में ही होगा लेकिन अभी इसके लिए स्थल तय नहीं किया गया है.

इस संदर्भ में आईसीसी के एक प्रभावशाली सूत्र ने कहा, हां, यह सही है कि हम 2018 में विश्व टी20 टूर्नामेंट को आयोजित नहीं कर रहे. किसी स्थल पर फैसला नहीं किया गया है. मुख्य कारण यह है कि सदस्य देशों के बीच काफी द्विपक्षीय सीरीज होनी है. 2018 में टूर्नामेंट का कार्यक्रम तय करने की संभावना नहीं है. हालांकि पूरी संभावना है कि 2020 में इस टूर्नामेंट की वापसी होगी.

सूत्र ने कहा, हां, 2020 में टूर्नामेंट की वापसी होगी. यह दक्षिण अफ्रीका या ऑस्ट्रलिया में हो सकता है. द्विपक्षीय सीरीज के अलावा अन्य कारण यह है कि काफी आईसीसी टूर्नामेंट होने के कारण सदस्य देशों का मानना है कि उन्हें भी समय की जरूरत है. अब तक दक्षिण अफ्रीका (2007), इंग्लैंड (2009), वेस्टइंडीज (2010), श्रीलंका (2012), बांग्लादेश (2014) और भारत (2016) में विश्व टी20 टूर्नामेंट का आयोजन हुआ है.

द्विपक्षीय सीरीज से सभी देशों को कमाई होती है जिसका बड़ा हिस्सा प्रसारण करार से आता है. विशेषकर जब भारत किसी देश का दौरा करता है तो मेजबान बोर्ड टीवी प्रसारण अधिकार से लाखों डॉलर की कमाई करता है.

यह पूछने पर कि क्या विश्व टी20 का आयोजन नहीं होना आईसीसी के लिए झटका होगा, सूत्र ने कहा, बिलकुल भी नहीं. पर्याप्त टी20 लीग मौजूद हैं और प्रशंसकों के लिए काफी क्रिकेट मौजूद है. भारतीय टीम अगले साल अधिकांश समय दौरे पर रहेगी जिसकी शुरुआत दक्षिण अफ्रीका से होगी जिसके बाद टीम इंडिया को इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया भी जाना है.

सेकंड हैंड मोबाइल लेने से पहले पढ़ लें ये खबर

सेकंड हैंड स्मार्टफोन खरीदना जेब के लिए फायदेमंद रहता है. मगर जब भी सेकंड हैंड फोन खरीदने की सोचें, कुछ बातों का ध्यान रखें. इससे न सिर्फ आप अच्छा फोन खरीद पाएंगे, बल्कि अन्य तरह की मुश्किलों से भी बच सकेंगे.

कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए सेकंड हैंड स्मार्टफोन खरीदते वक्त.

बिल, बॉक्स और एसेसरीज जरूर लें

बिल मांगकर आप यह क्लियर कर सकते हैं कि फोन बेचने वाला आपको चोरी की डिवाइस नहीं दे रहा है. बिल है तो आगे भी इस फोन को बेचने या रिप्लेस करने में आसानी होती है. फिर अगर आप वेरिफिकेशन करना चाहें तो बॉक्स पर आपको IMEI नंबर भी मिल जाता है. अगर आपको ऑरिजनल एसेसरीज नहीं मिली है तो आप बेचने वाले को और पैसे कम करने के लिए भी कह सकते हैं.

ध्यान दें, कहीं चोरी का न हो फोन

कई बार सेकंड हैंड फोन बेचने वाले आपको चोरी का फोन बेच देते हैं. अगर ऐसा हो तो उन्हें फोन का बॉक्स देने के लिए कहें. किसी चोर ने बॉक्स के साथ फोन चोरी किया हो इसके चांस कम ही होते हैं. अगर बॉक्स नहीं हो तो *#06# डायल कर फोन का IMEI नंबर चेक करें. इसके बाद इस नंबर को IMEIdetective.com जैसे वेबसाइट्स पर चेक करें. अगर डिवाइस चोरी का हुआ और उसके मालिक ने उसका नंबर ट्रैकिंग के लिए डाला हुआ तो आप चोरी का फोन खरीदने से बच जाएंगे.

रैम और प्रोसेसर पर दें ध्यान

अब तो 10,000 रुपये से नीचे भी 2जीबी रैम वाले फोन मिलने लगे हैं. इसलिए जरूरी है कि जो भी यूज किया हुआ फोन आप खरीदने जा रहे हैं उसमें कम से कम 2 जीबी रैम हो. लेकिन अगर आपका बजट ही 5000 से 6000 रुपये है तो 1 जीबी रैम वाला फोन ही मिल सकेगा. फोन का प्रोसेसर भी चेक करें. मीडियाटेक प्रोसेसर करीब सालभर पुराने हो गए हैं और इन प्रोसेसर के साथ आने वाले फोन अच्छी परफॉर्मेंस नहीं देते. क्वॉलकॉम स्नैपड्रैगन चिप वाला सेकंड हैंड स्मार्टफोन ढूंढें, वह लंबा चलेगा. इंटेल पावर्ड स्मार्टफोन्स भी अच्छे रहेंगे, लेकिन बैटरी के मामले में दिक्कत हो सकती है.

हार्डवेयर करें चैक

फोन की बॉडी पर ज्यादा निशान हैं या नहीं, स्क्रीन ठीक है या नहीं, यह तो आप देखेंगे ही, लेकिन जरूरत है थोड़ा और ध्यान देने की. अगर आप खुद फोन खरीदने जा रहे हैं तो लैपटॉप और एक यूएसबी केबल लेकर जाएं. लैपटॉप को स्मार्टफोन से कनेक्ट करें और देखें कि वह ठीक से चार्ज हो रहा है या नहीं. और यह भी देखें कि डेटा ट्रांसफर करने में कोई दिक्कत तो नहीं आ रही. अपना सिम कार्ड डालकर देखें कि नेटवर्क कैच कर रहा है या नहीं. वेब सर्फिंग करें, कुछ ऐप डाउनलोड करें, फोटो खींचकर कैमरा भी टेस्ट कर लें. हर तरह से दुरुसत होन पर ही खरीदें.

सिक्यॉर पेमेंट करें

अगर आप ऑनलाइन फोन खरीद रहे हैं तो पेमेंट हमेशा सिक्यॉर चैनल से ही करें. इससे आपको फोन लौटाने पर पैसा आसानी से वापस मिल जाएगा.

फेसबुक पर खरीदें

इन दिनों चीजें खरीदने-बेचने के लिए फेसबुक बढ़िया जगह बन गया है. यहां आपको फोन बेचने वाले का प्रोफाइल देखने को मिल जाता है. आप उस ग्रुप में उनकी ऐक्टिविटी देख सकते हैं जहां वे चीजें बेच रहे हैं और उसी स्मार्टफोन के लिए दूसरे कितना ऑफर कर सकते हैं, यह भी देख सकते हैं. अगर आपका अनुभव खराब रहा हो तो आप दूसरों को उसके बारे में बताकर उन्हें उस सेलर का शिकार बनने से भी बचा सकते हैं.

फोन वॉरंटी में हो तो रहेगा अच्छा

कई बार खरीदार अपने फोन को हैंडसेट खरीदने के तुरंत बाद अपग्रेड कर लेते हैं. कई बार तो कुछ ही महीनों में अपग्रेड कर लेते हैं. इसका मतलब यह हुआ कि उन हैंडसेट्स पर ऑफिशियल वॉरंटी अभी भी लागू हो सकती है. इससे आपको बहुत फायदा होगा. इसलिए ऐसे बेचने वालों को ढूंढें जो थोड़ी-बहुत ही सही, वॉरंटी के साथ फोन बेच रहे हों. थर्ड पार्टी वॉरंटी वाले फोन पर भी नजर रखें, इससे कुछ तो डैमेज प्रोटेक्शन मिलेगी ही.

सुपर अर्थ : पृथ्वी के पार नई पृथ्वियां

धरती पर जीवन के लिए बढ़ते खतरों को देखते हुए कहीं और जा बसने की संभावना पर पिछले कई दशकों से विचार किया जा रहा है. जानेमाने खगोलविद और भौतिक शास्त्री स्टीफन हाकिंग भी दावा करते हैं कि आने वाले समय में बाहरी अंतरिक्ष में जीवन संभव है. साथ ही वे एक चेतावनी भी देते हैं कि यह पृथ्वी संसाधनों के हिसाब से हम इंसानों के लिए अब कम या छोटी पड़ रही है, इसलिए नजदीकी अंतरिक्ष में हमें अपने रहने के लिए एक और पृथ्वी का इंतजाम कर लेना चाहिए.

हाकिंग मानते हैं कि जिस बेदर्दी से इंसान पृथ्वी का दोहन कर रहा है, उस वजह से ज्यादा से ज्यादा 1 हजार साल में यह धरती जीवन योग्य नहीं रह जाएगी. ऐसे में यदि इंसानों को बचे रहना है और जीवन को संरक्षित करना है, तो नया ठिकाना ढूंढ़ना ही होगा, पर हमारे इस ग्रह जैसी पृथ्वी है कहां?

यह एक मुश्किल सवाल है पर इस के हल होने का एक संकेत फरवरी, 2017 में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने दिया है. उन्होंने सौरमंडल जैसा एक और सोलर सिस्टम (सौरमंडल) खोजने का दावा किया है, जिस के 7 ग्रह हैं जो अपने सूरज की उसी तरह परिक्रमा करते हैं जैसे पृथ्वी, मंगल, गुरु, शुक्र, बुध आदि करते हैं. इस के सूर्य को ‘ट्रैपिस्ट-1’ नाम दिया गया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां जीवन के  लिए अनुकूल हालात हो सकते हैं क्योंकि इन में से 3 ग्रहों पर पानी की मौजूदगी के संकेत हैं. यही नहीं, इन 3 ग्रहों पर कोई जीवन है या नहीं, पर यदि वहां जीवन नहीं है तो भी यह खोज महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि एक युवा तारे (सूर्य-ट्रैपिसट 1) की वजह से उम्मीद है कि भविष्य में यहां जीवन विकसित हो सकता है.

इस का सूर्य हमारे अपने सूर्य की तुलना में करीब 10 गुना बड़ा है और काफी युवा भी है. वैज्ञानिक इन ग्रहों के वातावरण में मौजूद अणुओं का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं. पता किया जा रहा है कि यहां औक्सीजन है या नहीं और अगर है, तो कितनी मात्रा में? अगर औक्सीजन मिलेगी तो इस से जैविक परिस्थितियों यानी जीवन का संकेत भी मिलेगा.

दूसरी पृथ्वियों की खोज क्यों

सदियों से इंसान पृथ्वी के पार जीवन की तलाश में लगा है. इस खोजबीन में वैज्ञानिकों ने पिछले कुछ अरसे में ठीक वैसे ग्रहों पर ध्यान लगाया है जो आकारप्रकार में पृथ्वी जैसे ही हैं और जिन का हमारी तरह कोई सौरमंडल भी है. नासा की ताजा खोज से पहले वर्ष 2015 में भी यूनिवर्सिटी औफ साउथ वेल्स (आस्ट्रेलिया) के खगोलविदों ने ऐसी ही एक सुपरअर्थ का पता लगाया था.

महज 14 प्रकाश वर्ष (1 प्रकाश वर्ष वह दूरी है जो प्रकाश की गति से पृथ्वी के एक वर्ष की अवधि यानी 365 दिन में तय की जा सकती है. मौटे तौर पर 1 प्रकाश वर्ष में लगभग 10 खरब किलोमीटर होते हैं.) दूर ‘वुल्फ 1061 सी’ नामक इस ग्रह के बारे में दावा किया गया था कि जीवन की संभावना के मामले में यह हमारी पृथ्वी के करीब हो सकता है. इसे सुपर अर्थ कहने का मतलब यह है कि यह हमारी पृथ्वी से आकारप्रकार में बड़ा हो सकता है.

वुल्फ 1061 सी पृथ्वी से सिर्फ 4 गुना बड़ा है. यहां पृथ्वी के मुकाबले 1.8 गुना ज्यादा गुरुत्वाकर्षण का अनुमान लगाया गया है.

यह अपने तारे (उस सौरमंडल का मुखिया यानी सूरज) की तरफ रहने वाला है. इस का एक पक्ष भयानक रूप से तपता रहता है, लेकिन दूसरी तरफ काफी ठंड है. इन दोनों के बीच कुछ स्थान ऐसा है, जहां जीवन पनपने की संभावना बनती है और इनसान चाहे तो कुछ इंतजाम कर के वहां रह सकता है. इस ग्रह के बारे में वैज्ञानिकों को चिली स्थित टैलीस्कोप से पता चला था.

हमारी धरती से कईर् प्रकाश वर्ष दूर पराए सौरमंडलों में सूरज जैसे तारों के इर्दगिर्द पृथ्वी जैसे ग्रह खोजने की जो कसरत पिछले 2-3 दशकों में शुरू हुई है, वह अब एक मुकाम पर पहुंचती लग रही है. वैसे इस के संकेत 90 के दशक में ही मिलने लगे थे कि सुदूर ब्रह्मांड में कहीं और धरती जैसा ग्रह हो सकता है.

1992 में पहली बार एक पल्सर (धड़कन की तरह तरंगें व विकिरण फेंकने वाला तारा) के आसपास ग्रह जैसा कुछ होने का अनुमान लगाया गया है और इस के अगले 30-35 साल में हाल यह है कि अब तक पृथ्वी जैसे 3,500 ग्रहों की सूची जारी हो चुकी है.

ये ग्रह 2,675 स्टार सिस्टम्स (सौरमंडलों) में फैले हुए हैं. हालांकि इन में से ज्यादातर ग्रह बहुत अजीब हैं. कोई बहुत ज्यादा ठंडा है तो कोई गरम. कहीं जहरीली गैसों की भरमार है तो किसी का सूर्य के अत्यधिक दूर होना जीवन की संभावनाओं के खिलाफ जाता है.

इन में करीब 350 ग्रहों को धरती से मिलताजुलता माना जा सकता है. संभावना है कि इन में से किसी में जीवन हो सकता है. इन में से किसी पर वे बुद्धिमान प्राणी भी हो सकते हैं जिन की हम कल्पना करते हैं.

असल में, वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हमें अंतरिक्ष में किसी एलियन सभ्यता का पता लगाना है, तो सब से पहले पृथ्वी जैसे ग्रहों का पता लगाना होगा. यदि बाह्य अंतरिक्ष में कोई ग्रह पृथ्वी जैसे आकारप्रकार व संरचना वाला मिल जाता है, तो उस की सूक्ष्म पड़ताल कर के जीवन की संभावना का पता लगाया जा सकता है. वहां इस संभावना की खोज के 2 सूत्र होंगे. एक, क्या वहां किसी रूप में पहले से जीवन मौजूद है? दूसरा, क्या वहां इंसान जीवित रह सकता है और अपनी बस्तियां बसा सकता है?

पर कहां है जीवन

यह बात तो संदेह से परे है कि अनंत ब्रह्मांड में पृथ्वी जैसे अनेक ग्रह हो सकते हैं. तकनीकी सीमाओं के कारण वैज्ञानिक अभी उन्हें करीब से नहीं देख पा रहे हैं. रेडियो अथवा स्पेस टैलीस्कोप के माध्यम से भी वे बहुत छोटे दिख रहे हैं. ऐसे में उन पर जीवन की किसी संभावना से इनकार करना सही नहीं होगा. हो सकता है कि पृथ्वी जैसे इन ग्रहों पर पृथ्वी जैसा ही वायुमंडल और पानी से लबालब भरे समुद्र हों. जब ये चीजें होंगी, तो वहां जीवन की मौजूदगी से इनकार नहीं किया जा सकता.

खगोलशास्त्री मानते हैं कि अगर काफी हद तक पृथ्वी जैसे कुछ ग्रहों का और पता लगा लिया जाए, तो इस की बहुत अधिक संभावना है कि अगले 10-15 साल के अंदर हमें जीवन सहित ग्रह का पता चल जाए. अभी तक वैज्ञानिकों को पृथ्वी जैसे जितने ग्रह ब्रह्मांड में मिले हैं, उन में फिलहाल जीवन के मामले में नतीजा शून्य ही निकला है.

नजदीकी सुपर अर्थ

पिछले कुछ अरसे में वैज्ञानिकों ने सुपर अर्थ की कसौटी पर खरे उतरने वाले जिन ग्रहों की खोजबीन की है, उन में से कुछ से काफी उम्मीदें हैं कि वहां जीवन की संभावना बन सकती है. ये कुछ सुपर अर्थ हैं :

ग्लीज 851डी : हमारी पृथ्वी से 20.3 प्रकाश वर्ष दूर और इस से 5.6 गुना भारी इस ग्रह को 2007 में खोजा गया था. इसे सौरमंडल से बाहर पहली सुपर अर्थ कहा गया था. वैज्ञानिकों ने भी इस पर जीवन की संभावना जताई थी, पर बाद में पता चला कि पूरा ग्रह पानी से आच्छादित है और यह पानी भी बेहद ठंडा है. मुमकिन है कि इस पर जीवन हो, पर इस का स्वरूप कुछ अलग ही होगा.

ग्लीज 667 सीसी : पृथ्वी से करीब साढ़े 4 गुना भारी यह ग्रह अपने तारे की एक परिक्रमा 28 दिन में करता है यानी इस का एक साल 28 दिन का है. इस की वजह यह है कि यह अपने तारे के काफी नजदीक है. पृथ्वी से 22 प्रकाश वर्ष दूर स्थित यह ग्रह जीवन के अनुरूप इसलिए माना जाता है, क्योंकि इस का तारा हमारे सूरज के मुकाबले काफी कम गरम है. इस ग्रह पर पानी की मौजूदगी भी बताई गई है, जिस के आधार पर इसे जीवन संभावना वाला ग्रह माना जा रहा है.

एचडी 85512 बी : यह ग्रह पृथ्वी जैसा ही दिखता है और इस का वजन भी धरती से साढ़े 3 गुना ज्यादा ही है, पर इस ग्रह का अत्यधिक तापमान इसे हमारे जैसे जीवन की संभावना से अलग करता है. हालांकि 35 प्रकाश वर्ष दूर स्थित इस ग्रह पर पानी और जीवन की संभावना तब बनती है, जब इस का वातावरण स्थायी रूप से बादलों से भरा हो.

ग्लीज 581 जी : सितंबर, 2010 में अमेरिकी खगोलविदों द्वारा खोजे गए इस ग्रह पर जीवन की सब से अधिक संभावना हो सकती है. यह पृथ्वी से 20.5 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है.

केपलर 22 बी : अगर सूर्य की परिक्रमा अवधि को एक कसौटी माना जाए, तो इस मामले में केपलर 22बी हमारी पृथ्वी के काफी करीब कहा जा सकता है. यह अपने सूरज की 290 दिन में परिक्रमा करता है. पृथ्वी से 620 प्रकाश वर्ष दूर स्थित इस ग्रह का सूर्य भी हमारे सूरज जैसा ही है. इस के अलावा इस ग्रह का काफी बड़ा हिस्सा समुद्र से ढका है. जीवन के मामले में इस की सिर्फ एक समस्या है, वह यह कि यह ग्रह पृथ्वी से 40 गुना ज्यादा वजनी है. इतने वजनी ग्रह पर यदि जीवन होगा, तो उस का स्वरूप हम से काफी भिन्न होगा.

न्यू इंडिया और विध्वंस का कमिटमैंट

जब हाईस्पीड ट्रेन ‘तेजस’ में यात्रियों द्वारा हैडफोन लूटने और तोड़फोड़ करने की खबर आई तो मेरा हृदय श्रद्घा से भर गया. गला रुंधने लगा. माथा सजदा करने की मुद्रा में झुक गया. बड़ी मुश्किल से खुद पर काबू किया. खुशी के आंसूओं पर लाठी चार्ज कर, उन्हें तितरबितर कर के फिर से उन्हें उन के  मंतव्य तक पहुंचाया.

आखिर हम ने एक बार फिर अपनेआप को साबित कर ही दिया. समय और सरकारें चाहे हमें कितनी भी कसौटियों पर क्यों न कसें, हमारा स्कू्र हमेशा ढीला था और ढीला ही रहेगा. हम हर अग्निपरीक्षा में बिना नकल किए सिद्घ कर चुके  हैं कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का हमारा कमिटमैंट किसी भी देश, काल या परिस्थिति में कमजोर होने वाला नहीं है. हमारा यही राष्ट्रीय कमिटमैंट हमें एकसूत्र में बांधता है. सारी विविधताओं के बीच सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने का एक सा देशव्यापी जज्बा हमें एकसूत्र में पिरोता है.

तानाशाह सरकारों ने जबजब हमारी आवाज दबाने की कोशिश की है, हम ने दोगुनी ताकत से पब्लिक प्रौपर्टी का टेंटुआ दबाया है. सरकारी संपत्ति का निर्माण हमारे द्वारा दिए गए कर के धन से होता है, इसलिए उस का विध्वंस भी हमारे करकमलों से ही होना चाहिए. इस मामले में सरकारों की भी सोच यही रही है, ‘तेरा तुझ को अर्पण, क्या लागे मेरा.’

सरकारी संपत्ति को विपत्ति की शक्ल देना हमारा शौक ही नहीं, बल्कि आदत बन चुकी है. इसलिए केवल किसी आंदोलन, प्रदर्शन, दंगे या अन्य किसी विपदा के समय ही हमें संपदा याद नहीं आती है, बल्कि शांतिकाल में भी हम अपने हथियार की धार चैक करते रहते हैं और हाईस्पीड ट्रेन तेजस में अभी हाल में हम ने इस की सफल नैटप्रैक्टिस भी की.

क्षतिग्रस्त संपत्ति ही सरकार को नवनिर्माण की प्रेरणा दे सकती है. इसलिए सरकार को इसे गंभीरता से लेते हुए स्किल इंडिया प्रोग्राम के तहत शामिल करना चाहिए. देश के हर नागरिक के लिए वयस्क होने के बाद साल में कम से कम एक बार अपने महल्ले, कसबे या शहर की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना अनिवार्य किया जाना चाहिए. इस के लिए सरकारी व गैरसरकारी संस्थाओं को अपने स्तर पर प्रशिक्षण केंद्र लगाने चाहिए.

हर व्यक्ति को अपने आयकर विवरण में अपने द्वारा गत वित्तीय वर्ष में नुकसान पहुंचाई गई संपत्ति का ब्योरा देना अनिवार्य करना चाहिए. ऐसा न करने पर या गलत ब्योरा देने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना चाहिए. क्षमता से अधिक संपत्ति डैमेज किए जाने पर संदिग्ध व्यक्तियों के ठिकानों पर सीबीआई और ईडी द्वारा छापामारी की जानी चाहिए.

शहर की नगरपालिका के पास हर व्यक्ति द्वारा ध्वस्त की गई प्रौपर्टी का रिकौर्ड मौजूद होना चाहिए. प्रौपर और अपडेटेड रिकौर्ड न होने पर भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए, ताकि आमजन का सिस्टम पर भरोसा बना रहे. पर्याप्त प्रयासों के बावजूद आमजन अगर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में असमर्थ है तो संपत्ति का निर्माण करने वाले ठेकेदारी की निविदा (ठेका) निरस्त कर उन से विदा लेनी चाहिए ताकि संपत्ति विध्वंसकों का हौसला बना रहे. देशवासियों में सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने के बढ़ते जनून को देखते हुए सरकार को चाहिए कि हौकी की जगह इसे राष्ट्रीय खेल का दरजा दे. खेल मंत्रालय को देश के साथ इस खिलवाड़ को मतलब इस खेल को कौमनवैल्थ और ओलिंपिक गेम्स में शामिल करने के लिए पूरा जोर लगाना चाहिए, ताकि घर फूंक कर तमाशा देखने के साथसाथ हम कुछ पदक भी कमा सकें.     

मजहब की शिकार औरतें

इराक और सीरिया में सक्रिय इसलामिक स्टेट जिस धर्म की पुर्नस्थापना का दावा करता है वह औरतों पर तरहतरह के क्रूरतम जुल्म ढाता है. इसलामिक स्टेट के सिपाहियों द्वारा औरतों को बेचना धार्मिक काम माना जाता है. इसलामिक स्टेट हमलों में बहुत सी लड़कियों का अपहरण कर लेता है और फिर उन्हें बेच देता है. एक जानकारी  के अनुसार, 5 साल से 15 साल की लड़की, जिस की कीमत ज्यादा होती है, सिर्फ 132 डौलर में बेच दी जाती है.

इन लड़कियों को यौनसुख के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. जो सहमति न दें या पर्याप्त सुख न दें, उन्हें तरहतरह से दंड दिए जाते हैं और बहुतों को जिंदा डुबो दिया जाता है या जला दिया जाता है. जहां इसलामिक स्टेट के आतंकियों का राज है वहां कोई भी लड़की सुरक्षित नहीं. वे 60 साल तक की औरतों की खरीदफरोख्त का व्यापार खुलेआम करते हैं.

जो लोग मानते हैं कि धर्म सदाचार सिखाता है, उन्हें समझना होगा कि सदियों से धर्म के नाम पर औरतों पर जुल्म किए गए हैं. हिंदू धर्म में विधवाओं को जलाना, बाल मुंडवा कर घर से निकाल देना, वेश्यावृत्ति में धकेल देना आम बात रही है. आदमी चाहे कितनी औरतों के साथ सोए पर जब भी औरत पकड़ी जाए तो उसे मौत तक का दंड दे दिया जाता था. भारत के मंदिरों में देवदासियां रहती थीं तो चर्चों में पूरी जिंदगी कैदखानों की सी जिंदगी जीतीं नन.

21वीं सदी में इसलामिक स्टेट को आज अमीर देशों से इस तरह पैसा और हथियार मिल रहे हैं कि दुनियाभर के उचक्के, लफंगे, लड़ाकू धर्म के नाम पर पश्चिमी एशिया में जमा हो गए हैं और इन के कहर का शिकार यदि सरकारें बनतीं तो बात दूसरी है पर बन रही हैं औरतें, लड़कियां, बीवियां और मांएं. लाखों लोग पश्चिमी देशों में पनाह के लिए सैकड़ों मील चल कर पहुंच रहे हैं.

अफसोस यह है कि धर्म का यह आतंक लगभग हर धर्म में बराबर सा है. जहां वैज्ञानिक चेतना आई है वहां धर्म का जोर कम हुआ है और औरतों की सुरक्षा बढ़ी है पर आमतौर पर जितना कट्टर धर्म, उतनी ही असुरक्षित औरत.

संस्कार, रिवाज, ईश्वर के नाम पर औरतों को उस तरह मतिभ्रम कर रखा गया है कि ज्यादातर औरतें अपनों में से लाई गई औरत के दुखों पर परपीड़ा का मजा लेती हैं. धर्म की अंधी औरतें खुद उन औरतों को सजा दिलवाने में पहल करती हैं जिन्होंने अपने मानवीय हक मांगे हों, स्वतंत्रता चाही हो, पैरों पर खुद खड़े होने की कोशिश की हो. हर धर्म औरत को खिलौना और इस्तेमाल करने की जड़वस्तु मान रहा है. इसलामिक स्टेट आज कट्टर सिरफिरों को धर्म का पुराना खूंखार रूप दिखा रहा है. 

रिऐलिटी शो की दीवानगी

मेरे एक परिचित युवा साहित्यिक हैं. मैं उन्हें सिर्फ परिचित मानता हूं, युवा और साहित्यिक वे अपनेआप को मानते हैं. एक दिन वे मेरे घर पधारे. कहने लगे कि टीवी पर आएदिन अलगअलग विधाओं के रिऐलिटी शो चलते रहते हैं, वैसा ही एक रिऐलिटी शो साहित्य के क्षेत्र का भी होना चाहिए. उन का यह विचार अच्छा था पर कच्चा था. और मैं तो इस क्षेत्र में बिलकुल बच्चा था.

मैं चाह रहा था कि वे किसी तरह विदा हो जाएं, पर वे तो जमने के मूड से आए थे. घर में दाखिल हो कर सोफे पर पसरते हुए बड़े ही अधिकार से टीवी रिमोट ले कर चैनल बदलने लगे. आखिर एक रिऐलिटी शो दिखाने वाला चैनल उन्हें दिखाई दे गया. वे फिर से शुरू हो गए कि हमें किसी चैनल वाले से बातचीत कर के साहित्य के क्षेत्र में भी एक रिऐलिटी शो प्रायोजित करवाने के बारे में सोचना चाहिए.

अब उन्हें टालना असभ्यता के दायरे में आ सकता था, इसलिए बात को आगे बढ़ाते हुए मैं ने कहा, ‘‘आखिर कैसा होगा यह रिऐलिटी शो, क्या विचार पक रहा है आप के दिमाग के प्रैशरकुकर में.’’

मेरे इतना कहते ही वे कुकर की सीटी की तरह बजे. कहने लगे, ‘‘हम रिऐलिटी शो का नाम रख सकते हैं- क ख ग. देश के तमाम छोटेबड़े शहरों में हम साहित्यिकों का औडिशन (लेखन) टैस्ट लेंगे. इस में निर्णायक के तौर पर देश के मशहूर साहित्यिकों, जो हालफिलहाल फुरसत में हैं, को मौका देंगे.

‘‘छोटे शहरों से चुने गए साहित्यिकों को किसी मैट्रो शहर में मेगा औडिशन के लिए आमंत्रित कर उन में से बैस्ट साहित्यिकों को शौर्टलिस्ट करेंगे. इन शौर्टलिस्टेड साहित्यिकों को 2 या 3 या 4 टीमों में बांट देंगे. फिर इन टीमों में कंपीटिशन करवा कर, हर हफ्ते एकएक साहित्यिक को एलिमिनेट करते जाएंगे. यह एलिमिनेशन दर्शकों (पाठकों) द्वारा भेजे गए एसएमएस के आधार पर होगा. अंत में जो एकमात्र साहित्यिक एलिमिनेट होने से बच जाएगा, उसे बैस्ट साहित्यिकार औफ द शो क ख ग घोषित कर शौल व श्रीफल दे देंगे.’

एक ही सांस में उन्होंने पूरे रिऐलिटी शो की दास्तां मुझे सुना डाली.

उन के इस काल्पनिक रिऐलिटी शो के कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में सुन कर मेरे मन में कई शंकाएं उभर आईं. उन में सब से प्रमुख थी कि आखिर साहित्यिक लोग इस रिऐलिटी शो में करेंगे क्या? मेरी इस शंका का समाधान तुरंत उन्होंने यह कह कर किया कि साहित्यिक अपनी मौलिक तथा अप्रकाशित रचनाओं का पाठ (परफौरमैंस) निर्णायकों, दर्शकों, पाठकों के सामने करेंगे.

मेरे मन में और भी कई शंकाएं उठ रही थीं, जैसे, इस प्रकार के कार्यक्रम को प्रसारित करने का जोखिम कौन सा चैनल लेगा. क्या इस शो को प्रायोजक मिलेंगे? क्या दर्शक ऐसे कार्यक्रम को देखने में रुचि लेंगे? क्या विजेता साहित्यिक सिर्फ शौल और श्रीफल में मान जाएंगे (वैसे तो उन्हें इसी की आदत होती है)? इन के अलावा और भी कई सवाल थे.

इस से पहले कि मैं अपनी इन शंकाओं का समाधान उन से पूछता, वे खिसकने की तैयारी करने लगे थे. शायद वे रिऐलिटी शो की रिऐलिटी समझ गए थे.         

सरकार को परेशान करेगा ‘किसान योग’

योगासन के जरीये जनता का मन जीतने में लगी सरकार को ‘किसान योग’ परेशान कर रहा है. मध्य प्रदेश के मंदसौर से लगी आग का धुंआ अब दूसरे प्रदेशों तक पहुंच रहा है. उत्तर प्रदेश में 36 हजार करोड़ की लोन माफी के बाद भी किसान अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. इसके अलावा महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा के किसान भी आंदोलन की राह पर हैं. किसान की आय दोगुनी करने का झांसा भी अब काम नहीं आ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह बढ़ती मंहगाई और बेरोजगारी है. नोटबंदी के बाद छोटे किसान दूसरे शहरों से अपना कामधंधा छोड़ कर अपने गांव आ गये हैं. गांव में खेती में उनको मुनाफा नहीं हो रहा. ऐसे में वह परेशान हो रहे हैं. बढ़ती मंहगाई और बेराजगारी ने किसानों को प्रभावित किया है और वह अब सरकार के खिलाफ गुस्से में है.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 और 21 जून को रहेंगे. 21 जून को वह योग दिवस के मौके पर योग करेंगे. सरकार अलग अलग संस्थाओं के जरीये योग का प्रचार कर रही है. जिसके तहत एक माह के विशेष योग शिविर आयोजित किये गये. इनका समापन भी 21 जून को हो रहा है. जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी योग करेंगे, किसान लखनऊ के हाईवे जाम करेंगे. जिससे वह अपना विरोध प्रधानमंत्री के समक्ष रख सकें. भारतीय किसान यूनियन लखनऊ के मंडल अध्यक्ष हरिनाम सिंह वर्मा कहते है कि ‘21 जून को लखनऊ सहित पूरे मंडल में किसान हाइवे पर सुबह 5 बजे से 9 बजे तक योगासन कर अपना विरोध दर्ज करायेंगे.’

किसानों ने जनता से अपील की है कि वह इस समय हाइवे का प्रयोग न करे. किसानों ने कहा है कि वह इमरजेंसी सेवाओं के आवागमन को नहीं रोकेंगे. किसान इस दौरान अपनी फसलों को भी साथ रखेंगे. भारतीय किसान यूनियन ने पूरे लखनऊ मंडल को घेरने के लिये अपना कार्यक्रम बना लिया है. इसके लिये अपने कार्यकर्ताआ को संदेश दे दिया है. भारतीय किसान यूनियन ने लखनऊ को चारों तरफ से घेरने की योजना बनाई है.

भारतीय किसान यूनियन लखनऊ के मंडल अध्यक्ष हरिनाम सिंह वर्मा कहते हैं कि पूरे देश में किसान परेशान हैं. इसके बाद भी सरकार केवल वादे पर वादे कर रही है. फसल की कीमत पूरी मिले, किसानों के कर्ज माफ हों. किसान की तरक्की की तरफ सरकार ध्यान दे. जब तक सरकार किसानों की मांगे नहीं मानेगी किसान अपना विरोध जारी रखेंगे.

मध्य प्रदेश के बाद प्रधानमंत्री पहली बार किसानों की नाराजगी को झेलने का प्रयास करेंगे. किसान प्रदर्शन को देखते हुये जिला प्रशासन नये तरह के डर से गुजर रहा है. जिससे वह पहले से ही ऐसी व्यवस्था कर लेना चाहता है जिससे किसान प्रधानमंत्री तक न पहुंच सकें. कायदे से प्रधानमंत्री को किसान संगठनों से बात करनी चाहिये. अगर प्रधानमंत्री ऐसा नहीं करते तो किसानों का गुस्सा और भी भड़क उठेगा. ऐसे में प्रधानमंत्री के योग पर ‘किसान योग’ भारी पड़ सकता है.

इन बातों का रखें ख्याल, नहीं बढ़ेगा इंश्योरेंस प्रीमियम

जीवन की तमाम असुरक्षाओं से खुद को सुरक्षित रखने के लिए लोग इंश्योरेंस का सहारा लेते हैं. ये इंश्योरेंस आपकी जीवन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी तमाम बातों का ख्याल रखता है. आप खुद को और अपने प्रियजनों को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए मासिक या सालाना तौर पर इसके प्रीमियम का भुगतान करते हैं. लेकिन कुछ असावधानियों के चलते आपके इंश्योरेंस का प्रीमियम बढ़ भी सकता है. इसलिए आपको थोड़ी सावधानी भी बरतनी चाहिए. आप कुछ आसान और अहम बातों का ख्याल रखकर अपने इंश्योरेंस के प्रीमियम को बढ़ने से रोक सकते हैं.

सिगरेट और शराब का सेवन

सिगेरट और शराब का सेवन आपकी सेहत के लिए खतरनाक होता है. क्योंकि इसकी वजह से बीमारी या मृत्यु की संभावना तेज हो जाती है. आपको बता दें कि इंश्योरेंस कंपनियां प्रीमियम तय करने से पहले आवेदक से हमेशा इन आदतों के बारे में पूछते हैं. यदि आप सिगरेट शराब नहीं पीते हैं तो इस स्थिति में कम प्रीमियम देना होता है. वहीं इसके विपरीत अगर आप धूम्रपान के आदि हैं तो प्रीमियम की राशि बढ़ भी सकती है. इसलिए ऐसी आदतों से बचें.

व्यवसाय किस तरह का हो

अगर आप जिस पेशे से जुड़े हैं वो जोखिम वाला है और उसमें आपकी जान जाने की संभावना ज्यादा रहती है तो यह भी आपके इंश्योरेंस का प्रीमियम बढ़ा सकता है. ये पेशे सी डाइविंग, बॉम्ब डिफ्यूसिंग यूनिट, फायर फाइटिंग आदि हो सकते हैं. ऐसे लोगों से इंश्योरेंस कंपनियां आम आदमी की तुलना में ज्यादा प्रीमियम वसूल करती हैं.

आपकी सेहत

आपका स्वास्थ्य यानी आपकी सेहत भी इंश्योरेंस प्रीमियम तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है. अगर आपको हृदय संबंधी कोई बीमारी है या फिर आपको डायबिटीज इत्यादि है तो फिर आपसे इंश्योरेंस कंपनियां आम आदमी की तुलना में ज्यादा प्रीमियम वसूल सकती हैं. इंश्योरेंस कंपनियां ऐसे लोगों को पॉलिसी देने से पहले उनका हैल्थ स्टेटस मांगती हैं.

पॉलिसी का समय और बीमा की रकम

पॉलिसी का पीरियड जितना ज्यादा होता है उसका प्रीमियम उतना ही कम होता है. इसलिए अगर आप कम उम्र में कोई बीमा पॉलिसी लेते हैं तो इसके लिए दिया जाने वाला प्रीमियम भी कम होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इंश्योरेंस कवरेज ज्यादा समय के लिए होती है.

ज्यादा सेहतमंद तो ज्यादा प्रीमियम

अगर आप थोड़ा ज्यादा सेहतमंद हैं, यानी आपका वजन आपकी लंबाई और उम्र के अनुपात में ज्यादा है तो बीमा का प्रीमियम ज्यादा होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि मोटापे की बीमारी से परेशान लोगों में हृदय रोग, डायबिटीज, ब्लड प्रैशर आदि की संभावनाएं आम लोगों की तुलना में थोड़ा ज्यादा होती है.

कैसे करें प्रीमियम भुगतान

आप इंश्योरेंस के प्रीमियम का भुगतान किस तरह से करते हैं यह भी आपके प्रीमियम को तय कर सकता है. प्रीमियम का भुगतान सालाना, साल में दो बार, एक बार में पूरी पेमेंट, तिमाही या फिर मासिक आधार पर किया जाता है. अगर बीमा की कुल राशि की गणना की जाए तो सालाना प्रीमियम बाकी अन्य विकल्पों की तुलना में कम होता है.

राइडर्स के साथ बीमा पॉलिसी

अपनी मौजूदा पॉलिसी पर ज्यादा फायदे पाने के लिए लोग जरूरत के हिसाब से राइडर्स का चयन करते हैं. ज्यादा राइडर्स के साथ ली गई पॉलिसी का प्रीमियम भी साधारण पॉलिसी से ज्यादा होता है. ऐसे में समझदारी इसी में है कि पॉलिसी के साथ केवल अपनी जरूरत के हिसाब से ही राइडर का चुनाव करें.

पॉलिसी ऑनलाइन या ऑफलाइन

ऑनलाइन पॉलीसी ऑफलाइन पॉलिसी की तुलना में सस्ती होती है. ऐसा इसलिए क्योंकि ऑनलाइन खरीदने पर तमाम खर्चे बच जाते हैं. जैसे कि एजेंट का कमिशन, डिस्ट्रीब्युशन चैनल्स, एडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट इत्यादि. साथ ही ऑनलाइन पॉलिसी खरीदते समय आप पॉलिसी को अपने हिसाब से कस्टामाइज भी कर सकते हैं.

महिलाओं के लिए कम प्रीमियम

इंश्योरेंस कंपनियां महिलाओं को खास सुविधाएं देती हैं. यानी आपकी पॉलिसी का प्रीमियम आपके महिला या फिर पुरूष होने पर भी निर्भर करता है. ऐसा माना जाता है कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं की उम्र ज्यादा होती है. ऐसे में इंश्योरेंस कंपनियां महिलाओं के लिए कम प्रीमियम चार्ज तय करती हैं.

आनुवांशिक कारक

आनुवांशिक कारक भी आपकी पॉलिसी के प्रीमियम को प्रभावित करते हैं. सामान्य तौर पर बीमा कंपनी आवेदक से पॉलिसी करवाते वक्त परिवार में पहले से चली आ रही आनुवांशिक बीमारियों के बारे में भी पूछताछ करती है. ऐसा होने की सूरत में कंपनियां आपसे ज्यादा प्रीमियम राशि चार्ज कर सकती है.

जानिए आपको कितना चाहिए बीमा कवर

किसी अनहोनी की स्थिति में जीवन बीमा आपके अपनों को वित्तीय कठिनाइयों से बचाता है. ये बात तो सभी जानते हैं, अब ऐसे में लोगों को इस बात से तो इन्कार नहीं है कि उनके पास जीवन बीमा योजना होनी चाहिए, लेकिन अधिकांश मामलों में लोग ये तय नहीं कर पाते हैं कि उनके पास कितनी राशि का जीवन बीमा होना चाहिए.

दरअसल कई ऐसे कारक हैं जिनसे यह तय होता है कि आपको कितनी राशि का जीवन बीमा खरीदना चाहिए. आईये जानते हैं वे कौन से कारक हो सकते हैं…

न्यूनतम सुरक्षा की जरूरत

जब परिवार का मुखिया या कहने का मतलब है कि जो व्यक्ति कमाता है या जिसकी आमदनी से घर चलता है, वे न रहे, तब भी यह जरूरी है कि उसके परिवार को हर महीने एक निश्चित राशि मिलती रहे.

मान लीजिए, किसी परिवार का मौजूदा खर्च 25 हजार रुपए प्रति माह है. ऐसी स्थिति में उस परिवार के कमाऊ सदस्य के पास इतनी राशि का जीवन बीमा होना चाहिए कि उससे होने वाली ब्याज आय से उस परिवार को 25,000 रुपए हर महीने मिलते रहें ताकि उनका खर्च चलता रहे.

अब अगर कोई व्यक्ति भविष्य में बढ़ने वाली महंगाई की वजह से रुपए की क्रय शक्ति घटने की संभावना को देखते हुए अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करना चाहता है, तो उसे अधिक राशि के बीमा प्लान्स लेने चाहिए. कहा जाता है अब कहने को तो ये भी कहा जाता है कि आज तक किसी भी विधवा ने यह शिकायत नहीं की कि उसके पति ने इतनी अधिक राशि का बीमा लिया है.

जैसे-जैसे किसी व्यक्ति पर परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ती जाती हैं, जीवन बीमा की जरूरत वैसे-वैसे बढ़ती जाती है. ऐसे में परिवार की स्थितियों और परिस्थितियों को देखते हुए, आपको समय-समय पर बीमा राशि की समीक्षा करते रहना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बीमा राशि पर्याप्त है.

जीवन बीमा राशि की अधिकतम जरूरत मिड-फेज में होती है, जब किसी की शादी होती है और उसके बच्चे होते हैं. दूसरे शब्दों में, आपको तब तक जीवन बीमा खरीदना चाहिए, जब तक उसके एसेट्स उसकी जरूरतों से कम रहें.

ह्यूमन लाइफ वैल्यू (एचएलवी)

आपके अपनों का जीवन अनमोल होता है. लेकिन भविष्य में आर्थिक समस्याएं न आएं, इसके लिए जरूरी है कि उनके जीवन की कीमत रुपयों में तय की जाए. ह्यूमन लाइफ वैल्यू किसी इंश्योर्ड पर्सन या व्यक्ति की संभावित आमदनी होती है. दूसरे शब्दों में कहें तो यह वह आमदनी होती है जो वह व्यक्ति अपनी बाकी कामकाजी जिंदगी में हासिल कर सकता है.

कैसे करें एचएलवी की गणना

सबसे पहले उस व्यक्ति की कुल सालाना आमदनी की गणना करें. उसके बाद उसमें से वह राशि घटा दें जो वह अपने ऊपर खर्च करेगा. जो राशि बचेगी, वही उसकी एचएलवी होगी.

मान लें कोई व्यक्ति हर साल 15 लाख रुपए कमाता है और अपने ऊपर 4.5 लाख रुपए खर्च करता है. ऐसे में वह हर साल अपने परिवार के लिए 10.5 लाख रुपए कमाता है. ऐसे में उसके न रहने की स्थिति में उसके परिवार को हर साल 10.5 लाख रुपयों की जरूरत होगी.

अपने लिए बीमा लेते समय आपको इस गणना को ध्यान में रखना चाहिए.

वायरल हो रहा है टीम इंडिया का भोजपुरी डांस वीडियो

भारत और पाकिस्तान दोनों ही टीमें आइसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पहुंच गई है अब दोनों टीमों के बीच 18 जून को लंदन के केनिंग्टन ओवल मैदान में फाइनल मैच खेला जाएगा. भारत-पाक मैच के दौरान भावनाएं हमेशा चरम पर होती हैं. ऐसे में जब दोनों टीमों का मुकाबला फाइनल में होगा तो खिलाड़ियों पर दवाब अधिक होगा. साथ ही प्रशंसकों को उम्मीदें भी अधिक होगी.

चैंपियंस ट्रॉफी में सेमीफाइनल की जीत और फाइनल में जगह बनाने के बाद टीम इंडिया को बहुत बधाइयां मिल रही हैं. सोशल मीडिया पर कई तरह के मीम बनाकर टीम इंडिया को फैंस बधाई दे रहे हैं.

इसके साथ ही इन दिनों सोशल मीडिया पर एक स्पूफ वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली, शिखर धवन, युवराज सिंह, रोहित शर्मा और रवींद्र जाडेजा भोजपुरी के सुपरहिट गाने जिला टॉप लागेलू पर डांस करते नजर आ रहे हैं.

इस वीडियो में टीम इंडिया के खिलाड़ियों के चेहरों को अमेरिकी सिंगर ब्रूनो मार्स और इंग्लैंड के म्यूजिशियन मार्क रॉनसन के 2014 के सुपर-डुपर हिट गाने अपटाउन फंक के किरदारों के चेहरों पर लगाया गया है. इसके बाद बैकग्राउंड में एटिडिंग के जरिए भोजपुरी गाना डाला गया है. इस वीडियो के टॉप पर लिखा है, टीम इंडिया फाइनल में पहुंची.

इस वीडियो को टीम इंडिया के ओपनर और धाकड़ बल्लेबाज शिखर धवन ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किया है. शिखर को यह वीडियो काफी पसंद आया और उन्होंने इसके कैप्शन में लिखा, जबरदस्त वीडियो मजा आ गया.

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