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कुछ कहती हैं तसवीरें

मस्ती के लमहे : नमक के कारोबार में चीन व अमेरिका के बाद भारत तीसरे नंबर पर आता है और भारत के कुल उत्पादन का 77 फीसदी गुजरात सूबे से आता है. कड़ी मेहनत करने वाले नमक के मजदूर फुरसत के लमहों में पूरी मस्ती करते हैं. ये नजारे कुछ ऐसे ही पलों के हैं.

कुंबले की कोचिंग में टीम इंडिया ने रचा ये कीर्तिमान

टीम इंडिया के हेड कोच अनिल कुंबले ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. कुंबले को 1 साल के लिए टीम इंडिया का कोच नियुक्त किया गया था. बीते एक साल में कोहली-कुंबले की जोड़ी क्रिकेट के हर फॉर्मेट और हर मोर्चे पर लगातार सफल हो रही थी.

एक साल पहले संभाली थी कमान

पूर्व कप्तान और अपने दौर के दिग्गज लेग स्पिनर अनिल कुंबले को 23 जून 2016 को टीम इंडिया का कोच नियुक्त किया गया था. उन्हें शुरुआत में 1 साल के लिए कोच बनाया गया. उनकी कोचिंग में टीम इंडिया अपने पहले दौरे पर वेस्ट इंडीज रवाना हुई.

वेस्ट इंडीज दौरा

वेस्ट इंडीज दौरे पर टीम इंडिया ने 4 टेस्ट और 2 टी20 मैच खेले. 4 टेस्ट मैच की इस सीरीज में भारत 2-0 से जीता. दो अन्य टेस्ट ड्रॉ रहे.

वहीं दो टी20 मैच की सीरीज को भारत ने 1-0 से गंवा दिया. पहला मैच भारत 1 रन से हार गया, जबकि दूसरा मैच बारिश ने धो दिया.

होम सीजन में टीम इंडिया ने किया कमाल

वेस्ट इंडीज दौरे के बाद सितंबर से भारत का घरेलू सत्र शुरू हो गया. सिंतबर-अक्टूबर में भारत ने न्यूजीलैंड के साथ टेस्ट और वनडे मैच खेला. भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 3-0 से टेस्ट अपने नाम किया. इसके बाद वनडे में भारत ने कीवी टीम को 3-2 से हराकर यह सीरीज भी अपने नाम कर ली.

भारत-इंग्लैंड के बीच मुकाबला

नवंबर में भारतीय टीम का मुकाबला इंग्लैंड की टीम  से हुआ. दोनों ने 5 टेस्ट, 3 वनडे और 3 टी20 मैच खेले. भारत ने पहले 5 टेस्ट की यह सीरीज 4-0 से अपने नाम की. इसके बाद 2-1 वनडे सीरीज पर अपना नाम लिखा और फिर 2-1 से टी20 सीरीज भी जीत लिया.

बांग्लादेश को भी हराया

इंग्लैंड टीम के दौरे के बाद बांग्लादेश की टीम भारत में एकमात्र टेस्ट मैच खेलने आई. इस मैच को भी भारत ने अपने नाम किया.

यह टेस्ट मैच जीतकर टीम इंडिया ने 19 टेस्ट मैचों तक अजेय रहने का रिकॉर्ड बनाया. इस जीत के साथ भारतीय कप्तान विराट कोहली ने सुनील गवासकर के रिकॉर्ड को तोड़ा था. गवासकर के नेतृत्व में टीम इंडिया 18 टेस्ट मैच तक अजेय रही थी.

ऑस्ट्रेलिया को भी दी मात

ऑस्ट्रेलिया की टीम इस दौरे पर कमजोर नजर आ रही थी. लेकिन कंगारू खिलाड़ियों ने अपने स्वभाव के अनुकूल खेल दिखाते हुए टीम इंडिया को सीरीज में पूरी टक्कर देकर क्रिकेट पंडितों को हैरान कर दिया.

ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज के पहले ही टेस्ट में 19 टेस्ट मैचों से हार से दूर खड़ी इंडिया को हराया था. हालांकि 4 टेस्ट की यह सीरीज भारत ने 2-1 अपने नाम की.

चैंपियंस ट्रॉफी में उपविजेता

हाल ही में भारत ने कुंबले की कोचिंग में चैंपियंस ट्रॉफी का दौरा खत्म किया है. टीम इंडिया ने इस दौरे पर 5 वनडे मैच खेले, जिसमें उसने 3 मैच में वह विजेता रही.

लीग स्टेज में भारतीय टीम को श्रीलंका हार मिली तो वहीं फाइनल में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान ने हराकर यह खिताब छीन लिया.

करण जौहर कैंप में होगी करीना की वापसी

‘‘कभी खुशी कभी गम’’ से लेकर ‘एक मैं और एक तू’ तक करण जौहर की प्रोडक्शन कंपनी ‘‘धर्मा प्रोडक्शन’’ के लिए करीना कपूर का नाम घरेलू अभिनेत्री के रूप लिया जाता रहा है. यानि कि करीना कपूर हमेशा से करण जौहर की पसंदीदा अदाकारा रही हैं, लेकिन करण जौहर कैंप में आलिया भट्ट के प्रवेश करते ही करण जौहर व करीना कपूर के बीच दूरियां बढ़ गयी थीं. करण जौहर की प्रोडक्शन कंपनी ‘‘धर्मा प्रोडक्शन’’ की फिल्मों मे आलिया भट्ट नजर आने लगी थीं. बौलीवुड में भी चर्चाएं होने लगी थीं कि करण जौहर कैंप में करीना कपूर का स्थान आलिया भट्ट ने ले लिया है.

लेकिन पूरे पांच वर्ष बाद करण जौहर कैंप में करीना कपूर की वापसी होने जा रही है. करण जौहर कैंप की माने तो करीना कपूर मां बनने के बाद अपने करियर की शुरूआत करण जौहर की प्रोडक्शन कंपनी ‘‘धर्मा प्रोडक्शन’’ की फिल्म से करने वाली हैं, जबकि कुछ सूत्र दावा कर रहे हैं कि करीना कपूर खान पहले सोनम कपूर के साथ फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ की शूटिंग करेंगी, उसके बाद वह करण जौहर की फिल्म के लिए शूटिंग करेंगी. सूत्रों की माने तो करीना कपूर ने फिल्म की कहानी व पटकथा को पढ़कर हामी भरी है. इस माह के अंत तक अग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हो जाएंगे, पर करीना कपूर खान साल 2018 की शुरूआत में ही शूटिंग शुरू करेंगी.

गरमियों में पीजिए कूलकूल ठंडाई

गरमी के मौसम में ठंडाई का अपना अलग ही मजा होता है. पहले के समय में शादी समारोहों में ठंडाई का इस्तेमाल होता था. अब बहुत सारे लोग कोल्ड ड्रिंक की जगह ठंडाई पीने लगे   हैं. ठंडाई ज्यादातर बादाम के इस्तेमाल से बनती है. बादाम की तासीर गरम होती है, लेकिन उन को पानी में रात भर भिगो दें तो उन की तासीर बदल कर ठंडी हो जाती है. होली के अवसर पर भी लोग ठंडाई पी कर इस का आनंद लेते   हैं.

ज्यादातर बनीबनाई ठंडाई को पानी या दूध में डाल कर इस्तेमाल किया जाता है. मिश्रांबू ठंडाई का बहुत मशहूर ब्रांड है. यह वाराणसी से बनाना शुरू हुआ था. साल 1924 में वाराणसी के रहने वाले सच्चिदानंद दुबे ने मिश्रांबू को तैयार किया. यह मेवों के मिश्रण से तैयार किया जाता है. अब पीढ़ी दर पीढ़ी यह कारोबार चल रहा है. अगर खुद ठंडाई बना कर पीना पसंद करें, तो यह काम काफी आसान होता है.

ठंडाई बनाने की सामग्री

बादाम 50 ग्राम, खसखस 30 ग्राम, तरबूज के छिले हुए बीज 20 ग्राम, खरबूजे के छिले हुए बीज 20 ग्राम, ककड़ी के छिले हुए बीज 20 ग्राम, सौंफ 50 ग्राम, काली मिर्च 10 ग्राम, देसी गुलाब की सूखी पंखुडि़यां 20 ग्राम, केसर 5-6 पत्तियां, हरी इलायची 5, बीज निकाले हुए मुनक्का 8, मिश्री 10 ग्राम, दूध 1 लीटर.

ठंडाई बनाने की विधि

बादाम, खसखस, तरबूज के बीज, खरबूजे के बीज, ककड़ी के बीज, सौंफ, गुलाब की पंखुडि़यां, काली मिर्च, इलायची और मुनक्का को पानी में भिगो दें. सभी सामग्री को रात भर (करीब 5-6 घंटे) पानी में   भीगने दें. सुबह बादाम के छिलके हटा दें और सारी सामग्री पानी सहित अच्छी तरह बारीक पीस लें. सिलबट्टे पर पीस सकें तो बहुत अच्छा है या ग्राइंडर में जितना हो सके उतना बारीक पीस लें. इस का पानी कतई न फेंके. यह पानी बहुत फायदेमंद होता   है. पिसा हुआ तैयार पेस्ट अलग रख लें. दूध में मिश्री व केसर डाल कर उबालें और ठंडा कर लें. पिसी हुई सामग्री में 1 गिलास पानी डाल कर साफ कपड़े या बारीक छलनी से   छान लें. थोड़ाथोड़ा कर के पानी डालते जाएं और छानते जाएं. ये करीब 2 गिलास होना चाहिए. छलनी से निकले पानी में तैयार किया दूध मिला दें. इस तरह आप के पास 6 गिलास स्वादिष्ठ ठंडाई तैयार हो जाएगी. इस स्वादिष्ठ और फायदेमंद ठंडाई का मजा परिवार वालों या दोस्तों के साथ लें.

ठंडाई के फायदे

ठंडाई पीने से गरमी की वजह से शरीर को होने वाले नुकसानों से बचाव होता है. आंखों में जलन व पेशाब में जलन जैसी तकलीफें इस से   ठीक हो जाती हैं. ठंडाई पीने से लू से बचाव होता है. बादामों से भरपूर ठंडाई पीने से दिमाग की कूवत में इजाफा होता है. यह दिल के लिए भी फायदेमंद होती है. ठंडाई पीने से पेट साफ रहता   है और कफ में आराम मिलता है. ठंडाई में मौजूद तरबूज, खरबूज व ककड़ी के बीज किडनी और पेशाब संबंधी तकलीफों में फायदा पहुंचाते हैं.

सौर ऊर्जा से ट्यूबवैल चलें

पानीपत शहर से 7 किलोमीटर पहले दिल्लीचंडीगढ़ हाईवे पर बाएं हाथ पर एक गांव है सिवाह. वहां के एक प्रगतिशील किसान रामप्रताप शर्मा ने आधुनिक तरीके से खेतीबारी कर के न केवल धरती से सोना उगाया है, बल्कि कई अवार्ड भी जीते  हैं. 55 साल के रामप्रताप शर्मा ने कम उम्र में ही खेतीबारी से नाता जोड़ लिया था और आज वे अपनी तकरीबन 30 एकड़ पारिवारिक जमीन पर परंपरागत व आधुनिक दोनों तरीकों से फसलें उगा रहे हैं.

वैसे तो खेतीबारी की इस बैल्ट में  ज्यादातर किसान साल में 3 फसलें जैसे गेहूं, धान व गन्ना अपने खेतों में उगाते  हैं, लेकिन रामप्रताप शर्मा ने कुछ हट कर सोचा. उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र ऊझा, पानीपत के कृषि वैज्ञानिकों डा. राजबीर गर्ग और आरएस दहिया की मदद से 4-5 एकड़ जमीन में खेतीबारी के आधुनिक तरीके अपना कर बैगन, प्याज, हरी मिर्च, टमाटर, घीया, तुरई, सेम, खीरा, आलू, शलगम के अलावा खरबूजा और पपीता की भी खेती की. रामप्रताप शर्मा मल्चिंग तकनीक से आधुनिक खेती करते हैं, जिस में ड्रिप सिंचाई का अहम योगदान होता  है. साथ ही उत्तम किस्म के बीज और उन की बोआई पर भी खास ध्यान दिया जाता  है.

रामप्रताप शर्मा ने बताया, ‘नई तकनीक से खेती करने में ज्यादा मेहनत की जरूरत होती है. आम शब्दों में कहें, तो किसान को एक वैज्ञानिक की सोच अपनानी पड़ती है और ज्यादा से  ज्यादा फसल लेने के लिए उसे खेतीबारी के आधुनिक उपकरणों, खाद और दवाओं की पूरी जानकारी होनी चाहिए. कृषि विज्ञान केंद्र इस के लिए किसानों के सम्मेलन और कार्यशालाएं आयोजित कराते  हैं, जो बहुत उपयोगी साबित होते  हैं.

‘मैं कृषि वैज्ञानिकों से साल 2010 में जुड़ा था और तब से नई तकनीक की खेतीबारी कर रहा हूं. यह कृषि वैज्ञानिकों की हिदायतों और मेरी मेहनत का ही नतीजा  है कि मैं ने साल 2014 में मांगिआना, सिरसा के ‘प्रथम फल मेले’ में पपीता उगाने में पहला इनाम हासिल किया था. इतना ही नहीं, साल 2016 में घरौंडा, हरियाणा के ‘स्वर्ण जयंती मैगा ऐक्सपो’ में प्याज उगाने में पहला और शलगम उगाने में दूसरा इनाम जीता था.’

पिछले 2-3 सालों से ‘सिवाह फलसब्जी उत्पादक संघ’ के प्रधान रामप्रताप शर्मा ने किसानों की समस्याओं पर बात करते हुए चिंता जताई. वे बोले, ‘किसानों की सब से बड़ी समस्या यह  है कि उन्हें अपने उत्पादों की सही कीमत नहीं मिलती  है. मंडी में बिचौलियों का राज  है. वे किसानों से बहुत कम कीमत पर माल खरीदते  हैं, क्योंकि उन्हें पता होता  है कि अगर किसान समय रहते अपनी फसल नहीं बेचेंगे, तो उन की फसल खराब हो जाएगी.’ इस समस्या का क्या हल  है   इस सवाल पर रामप्रताप शर्मा ने बताया, ‘किसानों का भला तभी हो सकता  है, जब उन की फसल सीधी सरकार या निजी कंपनियों के पास जाए. इस के लिए कलेक्शन सेंटर होने चाहिए. आजकल खेतीबारी करना बहुत महंगा सौदा  है. किसान अपने घर से पैसे लगाते  हैं और फसल उगा कर कुदरत के भरोसे रहते हैं.

अगर कुदरत की मार नहीं भी पड़ती  है, तो भी मंडी में सही दाम नहीं मिलने से उन्हें मनचाहा मुनाफा नहीं मिलता  है. ‘किसान अपनी फसल का भंडारण कहां करें, यह  भी बहुत बड़ी समस्या है. निजी भंडारघरों में अपनी फसल रखना हर किसान के बस की बात नहीं  है.

‘आधुनिक तरीके से खेती करने में पहली नजर में तो यही लगता  है कि किसान भरपूर मुनाफा कमाते  हैं, पर यह सब दूर के ढोल सुहाने जैसा है. नई तकनीक में इस्तेमाल होने वाली मशीनें बेहद महंगी होती है. पोटैटो डिगर मशीन 85000 रुपए की आती  है. छोटे किसानों के लिए इस तरह की मशीनें इस्तेमाल करना सपने जैसा  है. ‘किसानों को बिजली भी बहुत सताती  है. सही समय पर फसल को पानी न मिले, तो उस का फसल की उत्पादकता पर बुरा असर पड़ता  है. किसान ट्यूबवैल लगवा भी लें, पर बिजली ही न हो, तो सब बेकार  है.

‘मेरा मानना है कि सरकार सौर ऊर्जा से चलने वाले  ट्यूबवैल लगवाए और उन पर सब्सिडी भी दे. एक और बात, सरकार स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करे और उसे लागू करे. ‘खेतीबारी में सरकार को किसानों की हरमुमकिन मदद करनी चाहिए, तभी तो वे करोड़ों भूखे पेटों के लिए अन्न उगा सकेंगे. किसानों के अच्छे दिन लाओ, देश के अपनेआप आ जाएंगे.’ खेती की तकनीकों के बारे में ज्यादा जानकारी लेने के लिए रामप्रताप शर्मा से उन के मोबाइल नंबर 09813300835 पर बात की जा सकती  है.

क्या आपको भी हैं एफडी से जुड़ी ये गलतफहमियां?

मौजूदा समय में भले ही बाजार में शेयर, म्‍यूचुअल फंड, गवर्नमेंट बॉण्‍ड, गोल्‍ड या रियल एस्‍टेट जैसे इंवेस्‍टमेंट इंस्‍ट्रूमेंट्स मौजूद हों. लेकिन फिर भी सबसे सुरक्षित निवेश विकल्‍प के रूप में फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट या एफडी को अभी भी सबसे बेहतर माना जाता है.

यहां निवेश पर रिटर्न भले ही शेयर बाजार या म्‍यूचुअल फंड के मुकाबले कम हो, लेकिन आपको निश्चित रकम हासिल होने की गारंटी मिलती है. इसलिए एफडी सबसे सुरक्षित विकल्‍प भी माना जाता है. वित्‍तीय सलाहकार भी अपनी कुल बचत का एक हिस्‍सा एफडी में निवेश की सलाह देते हैं. लेकिन आज की युवा पीढ़ी के बीच एफडी को लेकर कई भ्रांतियां भी हैं, जिसके चलते वे इसमें निवेश से बचते हैं. आज हम आपको इन्‍हीं उलझनों को सुलझाते हुए एफडी से जुड़ी खास बातें बताने जा रहे है.

केवल बैंक एफडी ऑफर करते हैं ?

लोगों में एफडी को लेकर सबसे बड़ी भ्रांति यह है कि सिर्फ नेशनलाइज्ड और प्राइवेट बैंक या फिर नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां ही आम जनता से एफडी लेने के लिए अधिकृत हैं. लेकिन ऐसा नहीं है, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आप कंपनियों की ओर से जारी होने वाली कॉरपोरेट एफडी ले सकते हैं. यहां डिपॉजिट करने पर आपको ज्यादा ब्याज मिलता है. हालांकि यहां निवेश बैंक जितना सुरक्षित नहीं होता. ऐसे में जब भी आप सुरक्षा और रिटर्न के बीच एक संतुलन बनाना चाहते हैं उस वक्त बैंक डिपॉजिट सबसे उचित विकल्प है.

एफडी के ब्याज पर लगता है टैक्स?

यह बात भी लोगों को परेशान करती है कि एफडी की ब्याज दर पूर्ण रूप से कर योग्य होती है. यह आपकी कुल आय में इनकम फ्रॉम अदर सोर्स के अंतर्गत आती है. लेकिन ऐसा नहीं है. एफडी ब्याज कैल्कुलेटर से हमें यह पता चलता है कि किसी विशेष स्कीम पर आप कितना ब्याज कमा सकते हैं.

यदि आपकी किसी भी फाइनेंशियल ईयर में ब्याज की रकम 10,000 रुपए से अतिरिक्त हो जाती है तो इसपर 10 फीसदी की दर से टीडीएस कटता है. हालांकि इनकम टैक्स का मार्जिनल रेट 20 फीसदी से 30 फीसदी के बीच में रहता है, लेकिन अतिरिक्त टैक्स लाएबिलिटी होने पर रिटर्न फाइल करते समय टैक्स का भुगतान करना होता है. ऐसा जरूरी नहीं है कि टीडीएस सभी एफडी पर लगेगा. अगर आपकी आय शून्‍य है तो आप फॉर्म 15जी या 15एच जमा करवा कर टीडीएस से बच सकते हैं.

सभी एफडी आपको टैक्स बेनिफिट देती हैं?

यह सच है कि एफडी में किए गए निवेश पर सेक्शन 80 सी के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है. हालांकि ये केवल उस स्थिति में है जिनपर लॉक इन पीरियड 5 साल का होता है. तो अगर आप टैक्स बेनिफिट का लाभ उठाना चाहते हैं तो ऐसी स्कीम का चयन करें जो टैक्स सेविंग का विकल्प देता है.

ज्यादा इंटरेस्ट पर ऊंचे रिटर्न्स?

आम तौर पर लोग मानते हैं कि ज्‍यादा ब्‍याज होने पर ही एफडी पर ज्‍यादा रिटर्न मिलता है. लेकिन यह उसी स्‍थिति में है जब आप पूरी अवधि तक निवेशित रहें. बहुत सी एफडी आपको तिमाही या इससे अधिक की अवधि में ब्‍याज को क्रेडिट करने अथवा निकालने का ऑप्‍शन देती हैं. ऐसे में यदि आप आप एफडी का ब्याज तिमाही में क्रेडिट कराते हैं तो आप कंपाउंडिंग पर मिलने वाले लाभ नहीं उठा पाते.

कैश की कमी होने पर एफडी तुड़वाना ही एक मात्र उपाय?

लोगों का मानना है कि एफडी एक निश्चित समय के लिए होती है इसे समय से पहले तुड़वाने से आपको कम रिटर्न मिलता है. लेकिन ऐसा नहीं है. कुछ ऐसे फाइनेंशियल संस्थान होते हैं जहां पर आप पार्शियल विड्रॉल कर सकते हैं. इस पर कोई पैनल्टी भी नहीं लगती है. दूसरा विकल्प यह है कि आप ओवरड्राप्ट कर सकते हैं.

धान की उन्नत खेती से उगा सकते हैं सोना

तमाम कुदरती आपदाओं की वजह से पिछले 1 दशक से मध्य प्रदेश की खास खरीफ की फसल सोयाबीन ने प्रदेश के किसानों की हालत खराब कर दी, नतीजतन किसानों ने धान की खेती शुरू कर दी और रिकार्ड उत्पादन कर के खेती को लाभ का धंधा बना दिया. पहले छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता था, पर अब मध्य प्रदेश में धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाने लगी है. किसान बड़े रकबे में धान की खेती कर के अपने खेतों में सोना उगा सकते हैं.

खेत की तैयारी : गरमी के मौसम में सही समय पर खेत की गहरी जुताई हल या प्लाउ चला कर करें, जिस से मिट्टी उलटपलट जाए. मेंड़ों की सफाई जरूर करें. गोबर की खाद या कंपोस्ट खाद 10 से 12 टन प्रति हेक्टेयर की दर से अंतिम जुताई या बारिश से पहले खेत में फैला कर मिलाएं.

धान की खेती की विधियां

सीधे बीज बोने की विधि : खेत में सीधे बीज बो कर निम्न तरह से धान की खेती की जाती है:

* छिटकवां बोआई.

* नाड़ी हल या दुफन या सीड ड्रिल से कतारों में बोआई.

* बियासी विधि (छिटकवां विधि) से सवा गुना ज्यादा बीज बो कर बोआई के 1 महीने बाद फसल की पानी भरे खेत में हलकी जुताई.

* लेही विधि (धान के बीजों को अंकुरित कर के मचौआ किए गए खेतों में सीधे छिटकवां विधि से बोआई).

रोपा विधि : इस विधि के तहत धान के पौधे सीमित क्षेत्र में तैयार किए जाते हैं. फिर 25 से 30 दिनों के पौधों की खेत में रोपाई की जाती है.

बीजों की मात्रा : अनुविभागीय अधिकारी कृषि केएस रघुवंशी बताते हैं कि धान की बोआई के लिए बीजों की मात्रा बोआई की विधि के मुताबिक अलगअलग रखनी चाहिए.

बीजों का उपचार : बीजों को थायरम या डायथेन एम 45 दवा की 2.5 से 3 ग्राम मात्रा से प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचारित कर के बोआई करें. बैक्टेरियल बीमारियों से बचाव के लिए बीजों को 0.02 फीसदी स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के घोल में डुबा कर उपचारित करना फायदेमंद होता है.

बोआई का सही समय : बारिश का मौसम शुरू होते ही धान की बोआई का काम शुरू करें. मध्य जून से जुलाई के पहले हफ्ते तक बोआई का सब से अच्छा समय होता है. रोपाई के बीजों की बोआई रोपणी में जून के पहले हफ्ते में ही सिंचाई की सुविधा वाली जगहों पर कर दें, क्योंकि जून के तीसरे हफ्ते से मध्य जुलाई तक की रोपाई से अच्छी पैदावार मिलती है.

खाद व उर्वरक

गोबर की खाद या कंपोस्ट : धान की फसल में 5 से 10 टन प्रति हेक्टेयर की दर से अच्छी सड़ी गोबर खाद या कंपोस्ट का इस्तेमाल करने से महंगे उर्वरकों के खर्च में बचत की जा सकती है.

हरी खाद : रोपाई वाले धान में हरी खाद के इस्तेमाल में सरलता होती है. इसे मिट्टी में आसानी से मिलाया जा सकता है. हरी खाद के लिए सनई के करीब 25 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर के हिसाब से रोपाई से 1 महीने पहले बोने चाहिए. करीब 1 महीने की खड़ी सनई की फसल को खेत में मचौआ करते समय मिला देना चाहिए. यह 3-4 दिनों में सड़ जाती है. ऐसा करने से करीब 50-60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उर्वरकों की बचत होगी.

जैव उर्वरकों का इस्तेमाल : कतारों में बोआई वाले धान में 500 ग्राम एजेटोवेक्टर और 500 ग्राम पीएसबी जीवाणु उर्वरक का प्रति हेक्टेयर के हिसाब से इस्तेमाल करने से 15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन और स्फुर उर्वरक बचाए जा सकते हैं.

इन दोनों जीवाणु उर्वरकों को 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर सूखी सड़ी हुई गोबर की खाद में मिला कर बोआई करते समय कूड़ों में डालने से इन का पूरा लाभ मिलता है. सीधी बोआई वाले धान में उगने के 20 दिनों और रोपाई के 20 दिनों की अवस्था में 15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हरीनीली काई का बुरकाव करने से करीब 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन उर्वरक की बचत की जा सकती है. ध्यान रहे कि काई का बुरकाव करते समय खेत में सही नमी या हलकी नमी की सतह रहनी चाहिए.

उर्वरकों का इस्तेमाल : धान की फसल में उर्वरकों का इस्तेमाल बोई जाने वाली प्रजाति के मुताबिक करना चाहिए.

उर्वरक देने का समय : नाइट्रोजन की आधी मात्रा और स्फुर व पोटाश की पूरी मात्रा आधार खाद के रूप में रोपाई से पहले खेत तैयार करते समय या कीचड़ मचाते समय बुरक कर मिट्टी में मिलाएं. बची नाइट्रोजन की आधी मात्रा अंकुर फूटने की अवस्था में (रोपाई के 20 दिनों बाद) और आधी मात्रा गंभोट की अवस्था में देनी चाहिए. जस्ते की कमी वाले क्षेत्रों में खेत की तैयारी करते समय जिंक सल्फेट

25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 3 साल में 1 बार इस्तेमाल करें. गंधक की कमी वाले क्षेत्रों में गंधक वाले उर्वरकों (जैसे सिंगल सुपर फास्फेट) का इस्तेमाल करें.

सिंचाई : धान की फसल में सिंचाई का बहुत महत्त्व है. रोपाई से अंकुर निकलने की अवस्था तक खेत में पानी की सतह 2-5 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. कंसे (अंकुर) निकलने के बाद से गंभोट की अवस्था तक 10-15 सेंटीमीटर पानी की सतह रखें. धान की फसल में जरूरत से ज्यादा पानी भरना अच्छी पैदावार में बाधक होता है.

लेही के लिए बीज अंकुरित करना : लेही विधि से बोआई करने के लिए खेत की तैयारी के तुरंत बाद अंकुरित बीज मौजूद होने चाहिए. लिहाजा लेही बोआई के तय समय के 3-4 दिनों पहले से ही बीज अंकुरित करने का काम शुरू कर दें. इस के लिए बीजों की तय मात्रा को रात के समय पानी में 8-10 घंटे के लिए भिगोएं. फिर इन भीगे हुए बीजों का पानी निकाल दें. फिर इन बीजों को पक्की सूखी सतह पर रख कर बोरों से ढक दें. ढकने के 24-30 घंटे के अंदर बीज अंकुरित हो जाते हैं. इस के बाद बोरों को हटा कर बीजों को छाया में फैला कर सुखाएं. इन अंकुरित बीजों का इस्तेमाल 6-7 दिनों तक किया जा सकता है.

रोपणी में पौधे तैयार करना : जितने रकबे में धान की रोपाई करनी हो उस के 1/20 भाग में रोपणी बनानी चाहिए. रोपणी में इस प्रकार से बोआई करनी चाहिए कि करीब 3-4 हफ्ते के पौधे रोपाई के लिए समय पर तैयार हो जाएं. रोपणी के लिए 2-3 बार जुताई कर के अच्छी तरह खेत तैयार करें. इस के बाद खेत में 1.5-2.0 मीटर चौड़ी पट्टियां बना लें, जिन की लंबाई खेत मुताबिक कम या ज्यादा हो सकती है. हर पट्टी के बीच 30 सेंटीमीटर की नाली रखें. इन नालियों की मिट्टी नाली बनाते समय पट्टियों पर डालने से वे ऊंची हो जाती हैं.

ये नालियां जरूरत के मुताबिक सिंचाई व जल निकास के लिए मददगार होती हैं. रोपणी में 8 से 10 सेंटीमीटर के अंतर से कतारों में बोआई करने से रखरखाव और रोपाई के लिए पौधे उखाड़ने में आसानी होती है. कम पानी में भी हो सकता है धान का उत्पादन : सूखा प्रतिरोधी धान की खेती करना अब मुमकिन हो गया है. गेहूं की तरह अब चावल उगाने के लिए भी नई तकनीक की खोज हो गई है. अब धान के खेत को हमेशा पानी से भरा हुआ रखे बिना भी इस की खेती की जा सकती है. नई तकनीक से धान की फसल के लिए पानी की जरूरत में 40 से 50 फीसदी तक कमी करने में मदद मिलेगी.

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और फिलीपींस अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) ने संयुक्त रूप से यह तकनीक विकसित की है. इस परियोजना में कटक स्थित केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) की भी भागीदारी है. कटक स्थित संस्थान ने ही धान की वैसी किस्मों की पहचान की है, जिन्हें दूसरी फसलों की तरह कुछ दौर की सिंचाई के जरीए उगाया जा सकता है. संस्थान ने खेती की ऐसी विधियों की भी खोज की है, जिन के जरीए धान की ऐसी किस्मों से करीबकरीब उतनी उपज हो सकती है, जितनी सामान्य तौर पर ज्यादा पैदावार वाली धान की किस्मों से होती है.

तकनीकी तौर पर यह एरोबिक राइस कल्टीवेशन कहलाता है. इस तकनीक में धान के खेत में स्थिर पानी की जरूरत नहीं होती और न ही धान के छोटे पौधे तैयार करने की जरूरत होती है, जैसा कि आमतौर पर होता है. इस तकनीक में कुशलता से तैयार किए गए खेतों में सीधे बीज बो दिए जाते हैं और इस तरह मजदूरी की लागत की भी बचत हो जाती है.

पाक की जीत का मनाया जश्न तो जाना पड़ा जेल

भारतीय पुलिस ने 15 मुस्लिम लोगों को पाकिस्तान टीम की जीत का जश्न मनाते समय देशद्रोह के आरोप के तहत गिरफ्तार कर लिया. ये सभी लोग मध्य प्रदेश के बुरहानपुर गांव के रहने वाले हैं. पुलिस को यह शिकायत मिली कि कुछ लोग पाकिस्तान की भारत के खिलाफ जीत के बाद पाकिस्तान के नारे लगाते हुए पटाखे फोड़ रहे थें. बुराहनपुर के पुलिस अध्यक्ष राजा राम ने बताया कि, “एक स्थानीय व्यक्ति ने इन लोगों पर भारत की हार का जश्न मनाने की शिकायत दर्ज कराई थी.

पुलिस अधिकारी ने आगे कहा कि आरोपियों पर आपराधिक साजिश करने और संवेदनशील इलाके में घंटो तक शोर मचाने का मामला दर्ज किया गया है. इस गांव में बड़ी संख्या में मुस्लिम रहते हैं, साथ ही यहां पहले भी कई बार दोनों पक्षों में भिड़ंत हो चुकी है. भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान दोनों देश के फैंस काफी उत्साहित हो जाते हैं.

हालांकि यह पहला मामला नहीं है जह किसी क्रिकेट की वजह से किसी की गिरफ्तारी हुई है. साल 2014 में पाकिस्तान टीम की जीत का जश्न मानाने पर करीबर 60 छात्रों को गिरफ्तार किया गया था.

ऐसा नहीं है कि इस तरह की घटनाएं भारत में ही होती हैं. पिछले साल पाकिस्तान में एक युवक ने अपने घर की छत पर तिरंगा लगाने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया था. वह युवक विराट कोहली का प्रशंसक था और उसने कोहली के शतक लगाने की खुशी में ऐसा किया था.

इस्तीफे के बाद कुंबले का कोहली पर निशाना

भारतीय क्रिकेट में लंबे समय से चला आ रहा कुंबले-कोहली विवाद कुंबले के इस्तीफे के साथ समाप्त हो गया. यह रिश्ता उस मुकाम पर पहुंच गया जहां से वापसी की अब कोई राह नहीं बची.

कुंबले को वेस्टइंडीज दौरे तक कोच सिलेक्शन कमेटी ने हेड कोच की पोस्ट जारी रखने के लिए कहा था, पर उन्होंने उस से पहले ही इस्तीफा दे दिया. साल भर पहले ही कुंबले जून में कोच बने थें. इस दरमियान टीम इंडिया ने अच्छा प्रदर्शन किया.

कुंबले ने बाद में ट्वीट कर अपनी बात भी रखी. उन्होंने कहा कि बीसीसीआई ने मेरे और कप्तान के बीच गलतफहमियां दूर करने का प्रयास किया लेकिन यह साझेदारी अस्थायी थी और मुझे लगता है कि आगे बढ़ने का यह सही समय है.

विराट से कुंबले के रिश्ते इतने खराब हो गए कि उन्हें कोच पद तक छोड़ देना पड़ा? ट्विटर पर उन्होंने बयान जारी करते हुए अपना 'दर्द' लिखा. उन्होंने अपनी ड्यूटी आईना दिखाने वाली बताई? आखिर कुंबले किसे आईना दिखाने की बात कर रहे हैं?

कुंबले ने कहा, 'सीएसी (कोच अप्वाइंटमेंट कमेटी) का मैं शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मेरे पर विश्वास जताया और मुझे बतौर हेड कोच काम जारी रखने को कहा. मैं पिछले एक वर्ष की उपलब्धियों का श्रेय कैप्टन, पूरी टीम, कोचिंग और स्पोर्टिंग स्टाफ को दूंगा.'

ट्विटर पर जारी बयान में उन्होंने कहा, मुझे कल बीसीसीआई ने पहली बार बताया कि कैप्टन (विराट कोहली) को मेरी 'स्टाइल' और मेरे कोच पद पर बरकार रहने से परेशानी है. इस बात से मैं आश्चर्यचकित था, क्योंकि मैंने हमेशा ही कप्तान और कोच के बीच सीमाओं की भूमिका का सम्मान किया है. हालांकि बीसीसीआई ने कैप्टन और मेरे बीच गलतफहमी को सुलझाने की कोशिश की. पर मैं सोचता हूं कि मेरे लिए यहां से मूव कर जाना ही अच्छा है.

पेशेवर, अनुशासन, प्रतिबद्धता, ईमानदारी, कौशल और विभिन्न विचार महत्वपूर्ण है. मैंने इन्हें सामने रखा. साझेदारी का प्रभाव दिखे, इसलिए इनका मूल्यांकन जरूरी है. मैं सोचता हूं कि कोच की भूमिका है, टीम के हित में आत्म सुधार करने के लिए आईना लेकर खड़ा रहना.

कुंबले ने आगे लिखा, ‘इन्हीं ‘ऐतराज’ के चलते मुझे लगता है इस जिम्मेदारी को क्रिकेट सलाहकार समिति और बीसीसीआई को सौंप देना चाहिए, वे जिसे योग्य समझें उसे ये जिम्मेदारी सौंप दें.’

उन्होंने कहा, 'पिछले एक साल से मुख्य कोच के रूप में सेवा करना एक पूर्ण विशेषाधिकार मिला, इसके लिए मैं शुक्रगुजार हूं. मैं सीएसी, बीसीसीआई, सीओए सभी का धन्यवाद करता हूं. मैं अनुयायों और क्रिकेट फैन्स को भारतीय क्रिकेट टीम के लिए उनके समर्थन के लिए के शुक्रिया अदा करना चाहता हूं साथ ही मैं क्रिकेट की इस परंपरा का शुभचिंतक रहूंगा.'

कुंबले के इस्तीफे के बाद यह बात तो साफ हो गई है कि सीएसी द्वारा कप्तान और कोच में सुलह कराने की कोशिश नाकाम रही है. कोहली पीछे हटने को तैयार नहीं और न ही वह किसी तरह का समझौता ही करना चाहते हैं. ऐसे में कुंबले के पास इस्तीफा देने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा था.

विराट से रिश्ते खराब होने के संभावित कारण

सख्त कोच से दिक्कत

कहा जाता है कि कोच कुंबले टीम इंडिया में अनुशासन को लेकर काफी सख्त थें. कई मौकों पर वह प्रैक्टिस के दौरान खिलाड़ियों को लताड़ भी लगा चुके थें. साथ ही कई दौरों पर वे टीम के खिलाड़ियों की गर्लफ्रेंड, पत्नियों के जाने के भी खिलाफ थे. हालांकि, इस बारे में कभी उन्होंने खुलकर कोई बयान नहीं दिया.

विराट का शास्त्री प्रेम

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो कोच के तौर पर विराट कोहली की पहली पसंद रवि शास्त्री हैं. वह कुंबले से पहले बतौर डायरेक्टर और कोच टीम इंडिया से जुड़े थें.

विराट ने किया खुलकर विरोध

चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान के हाथों हार के बाद कोच कुंबले और कप्तान विराट के बीच सुलझता हुआ मामला फिर उलझ गया था. विराट ने फाइनल से एक दिन पहले क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) के समक्ष कुंबले को लेकर खुलकर आपत्ति जताई थी. जिससे सलाहकार समिति पसोपेश में थी.

इन सबके बावजूद कोच के तौर पर कुंबले की काबिलियत किसी से छिपी नहीं है. अमेरिका में वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज और पाकिस्तान के विरुद्ध चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की हार के अलावा और कोई असफलता कुंबले को खाते में नहीं है.

टेस्ट में 70, वनडे में 61 और टी-20 में 40 प्रतिशत जीत का प्रतिशत कुंबले के नाम पर रहा. साथ ही इस दौरान विराट कोहली ने भी बेहतर प्रदर्शन किया.

तीनों फॉर्मेंट में टीम इंडिया का प्रदर्शन

टेस्ट: 17 मैच, जीते 12, हारे 1, ड्रॉ 4, 70.59% जीत

वनडे: 13 मैच, जीते 8, हारे 5, 61.54% जीत

टी-20: 5 मैच, जीते 2, हारे 2, बेनतीजा 1, 40.00% जीत

चैम्पियंस ट्रॉफी : भारत की हार पर बोला पाकिस्तानी एंकर, डूब मरो नरेंद्र मोदी

क्रिकेट में हार जीत तो लगी रहती है, लेकिन कभी-कभी क्रिकेट फैंस ये भूल जाते हैं और हार पर ऐसे मातम मनाते हैं जैसे किसी ने उनका सब कुछ छीन लिया हो. बात करें चैम्पियंस ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले की जिसमें पाकिस्तान ने भारत को बुरी तरह से हरा दिया. जिसके बाद पाकिस्तानी न्यूज चैनल का एक एंकर इतना अतिउत्साही हो गया कि उसने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पानी में डूब मरने तक की बात कह दी.

पाकिस्तान के न्यूज चैनल के एंकर आमिर लियाकत ने अपनी पाकिस्तानी टीम का गुणगान करते हुए और भारतीयों पर जमकर भड़ास निकालते हुए कहा, नरेंद्र मोदी तुमने जो पाकिस्तान का पानी रोक रखा था जाओ उसी मे डूब मरो. इस पूरे शो के दौरान इस पाकिस्तानी एंकर की भाषा बेहद भड़काऊ और अपमानजनक थी.

बता दें कि रविवार 18 जून को ओवल के मैदान में हुए चैम्पियंस ट्रॉफी के फाइनल में पाकिस्तान ने भारत को 180 रनों से हराकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली. भारत की ओर से कोई भी खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सका. गेंदबाजी से लेकर बल्लेबाजी तक भारतीय टीम ने खराब प्रदर्शन किया जिसके कारण टीम इंडिया को हार का मुंह देखना पड़ा.

चैम्पियंस ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में भारत को भले ही हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन लंदन के ओवल में चैंपियंस ट्रॉफी की खिताबी टक्कर के बीच भारतीय हॉकी टीम ने अपना काम करते हुए अपने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को ली वैली सेंटर में 7-1 से करारी शिकस्त देकर इस हार के गम पर मरहम लगाने का काम किया है.

भारत ने हॉकी वर्ल्ड लीग सेमीफाइनल (वर्ल्ड कप क्वालिफायर) में लगातार तीसरी जीत हासिल की है. लेकिन चैम्पियंस ट्रॉफी में भारत की हार के बाद पाकिस्तानी न्यूज एंकर ने अर्णब गोस्वामी, वीरेंद्र सहवाग और ऋषि कपूर पर निशाना साधा है.

देखिए वीडियो –

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