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हवाई जहाज से तेज हाइपरलूप

हमारे देश में ट्रेनों की औसत सुस्त रफ्तार बीते कई दशकों से कायम है, लेकिन उस के साथ ही यह सपना भी आम लोगों को दिखाया जाता रहा है कि भारत में बुलेट ट्रेनें चलेंगी. इधर इस सपने में एक और बढ़ोतरी हुई है.

दावा किया जा रहा है कि नई तकनीक की मदद से दिल्ली से मुंबई का सफर 1 घंटा 10 मिनट में और मुंबई से चेन्नई का सफर सिर्फ 30 मिनट में पूरा हो सकता है. इसी तरह चेन्नई से बेंगलुरु की दूरी महज आधे घंटे में तय हो सकेगी. इन दूरियों को तय करने में वैसे तो हवाईजहाज से ज्यादा समय लगता है, लेकिन फरवरी, 2017 में रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने एक ऐसी टैक्नोलौजी पर चर्चा की, जिसे अगर वास्तविकता में बदला जा सका तो लोग बुलेट ट्रेन से भी तेज सफर कर सकते हैं. यह नई तकनीक है हाइपरलूप, जिस की इन दिनों अमेरिका समेत कईर् देशों में चर्चा है.

ऐसे हुई शुरुआत

हालांकि यह एक मुश्किल काम माना जाता है कि जिस रफ्तार से विमान हवा में उड़ते हैं, उसी गति से ट्रेनें जमीन पर चल सकें. इस बारे में अभी तक सब से अधिक तेजी बुलेट ट्रेनें ही दिखा सकी हैं. अब तक के प्रयोगों में बुलेट ट्रेन अधिकतम 600 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकी है पर सफर के जिस एक नए उपाय की चर्चा दुनिया में हो रही है, इस तकनीक से जमीन पर ही 1,200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन चल सकती है. यह चमत्कार एक नई तकनीक हाइपरलूप के माध्यम से पूरा करने का सपना देखा जा रहा है. हाइपरलूप का संबंध अंतरिक्ष तकनीक से भी जोड़ा जा सकता है. असल में, लोगों को अंतरिक्ष की सैर कराने की तैयारी कर रही प्रसिद्ध स्पेस कंपनी ‘स्पेसऐक्स’ के जनक और टेस्ला मोटर्स के कोफाउंडर व सीईओ एलन मस्क ने ही सब से पहले हाइपरलूप तकनीक से ट्रेन चलाने के बारे में सोचा है. एलन मस्क ने साल 2013 में हाइपरलूप का प्रस्ताव दुनिया के सामने रखते हुए ऐलान किया था कि दुनिया में कोई भी संगठन चाहे तो संसाधन जुटा कर हाइपरलूप प्रोजैक्ट पर काम कर सकता है. यही वजह है कि मस्क के बजाय इस कल्पना को 2 अन्य कंपनियां हाइपरलूप वन और हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टैक्नोलौजीज (एचटीटी) साकार करने में जुटी हुई हैं और ये दुनियाभर में 7 परियोजनाओं के लिए समझौते पर दस्तखत कर चुकी हैं.

हाइपरलूप कंपनी ऐसी टैक्नोलौजी पर काम कर रही है जो लो प्रैशर ट्यूब्स में चुंबकीय उत्तोलन के जरिए एक जगह से दूसरी जगह तक  ले जाने में सक्षम है.

भारत में हाइपरलूप

हाइपरलूप प्रोजैक्ट के तहत भारत में 5 गलियारों पर काम शुरू करने की योजना बनाई जा रही है. इन में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, तिरुअनंतपुरम, चेन्नईबेंगलुरु, मुंबईचेन्नई और 2 बंदरगाहों को जोड़ने की योजना है. फिलहाल कंपनी हाइपरलूप वन अमेरिका के नेवाडा में ऐसे ट्रैक का प्रोटोटाइप (कामकाजी मौडल) बना रही है. एक प्रोजैक्ट आबू धाबी को दुबई से जोड़ने का भी है.

ऐसा पहला व्यावसायिक प्रोजैक्ट 2020 तक पूरा हो जाने की उम्मीद है. बहरहाल, देश में हाइपरलूप का क्या भविष्य हो सकता है, इस के बारे में फरवरी, 2017 में दिल्ली में ‘भारत के लिए हाइपरलूप का विजन’ नामक एक सम्मेलन आयोजित हुआ था, जिस में भाग लेने के बाद रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने कहा, ‘मुंबई और दिल्ली के बीच करीब 60 मिनट और चेन्नई से मुंबई केवल 30 मिनट में जाने के बारे में सोच रहा हूं. हम नजदीक से देख रहे हैं कि यह कैसे हो सकता है.’

उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे आधुनिकीकरण और स्पीड बढ़ाने पर जोर दे रहा है. स्पीड पर हमारा फोकस है. हम सभी ट्रेनों की औसत गति को बढ़ाने में जुटे हुए हैं. हम ने मौजूदा ट्रैक्स पर ही दिल्लीमुंबई और दिल्लीहावड़ा के बीच ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं. इन बातों से लगता है कि अगले कुछ वर्षों में हम बुलेट ट्रेन के साथसाथ कुछ जगहों पर हाइपरलूप तकनीक से चलने वाली ट्रेनें भी देख सकेंगे.

कुछ तथ्य

–       हाइपरलूप को हाई स्पीड ट्रेनों के विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है. इस तकनीक में कम दबाव के स्टील ट्यूब के जरिए पौड्स में सामान और यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह लाना ले जाना संभव हो सकेगा.

–       हाइपरलूप कंपनी माल, यात्री छोटे पार्सल या कूरियर आदि के लिए अलगअलग मौडल के हाइपरलूप डैवलप कर रही है.

–       हाइपरलूप वन में वर्ल्डवाइड बिजनैस डैवलपमैंट के ऐलन जेम्स ने बताया था, ‘10-10 सैकंड के अंतराल पर चल रहे पौड्स प्रत्येक दिशा में हर घंटे 20 हजार यात्रियों को ढो सकते हैं. इसी तरह हरेक मालवाहक पौड 70 टन सामान ढो सकता है.’

बुलेट की रफ्तार

हाइपरलूप तकनीक से पहले हमारे देश में पिछले एक दशक से बुलेट ट्रेन लाने की बात जोरशोर से की जा रही है. हालांकि अभी तक ऐसी कोई ट्रेन देश में नहीं चल सकी है, लेकिन जापानचीन ने इस मामले में कई रिकौर्ड कायम कर डाले हैं. उल्लेखनीय है कि जापान में 60 के दशक में, जबकि फ्रांस, ब्रिटेन और जरमनी में 80 के दशक में बुलेट ट्रेनें दौड़ने लगी थीं.

60 के दशक में जब जापान में बुलेट ट्रेनें चलाई गईं तब वहां ऐसी ट्रेनों को हाई स्पीड ट्रेन कहा जाता था. वहां सब से पहले टोक्यो और ओसाका के बीच हाई स्पीड ट्रेन सेवा शुरू की गई थी. इस के बाद 80 के दशक में फ्रांस, ब्रिटेन और जरमनी ने भी हाई स्पीड रेल नैटवर्क की शुरुआत की. आज यूरोप के ज्यादातर देशों में हाई स्पीड ट्रेनें चलती हैं.

चीन में नई बुलेट ट्रेनें चलाने के बाद वहां का हाई स्पीड रेल नैटवर्क 9,300 किलोमीटर का हो गया. जापान में सब से पहले 1964 में टोक्यो और ओसाका के बीच हाई स्पीड ट्रेन सेवा शुरू की गई थी. जापान में बुलेट ट्रेन को ‘शिनकांसेन’ कहा जाता है. इन ट्रेनों का संचालन जापान रेलवेज ग्रुप करता है जिस में 4 कंपनियां शामिल हैं.

जापान में बुलेट ट्रेनें फिलहाल 2,388 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग पर चलती हैं और इन की औसत गति 240 से 300 किलोमीटर प्रति घंटे रहती है. इस के अलावा एक मिनी शिनकांसेन यानी मिनी बुलेट या हाई स्पीड रेलमार्ग भी है जिस पर 130 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से ट्रेन चलती है.

जापान में बुलेट ट्रेनों की गति बढ़ाने के प्रयोग भी समयसमय पर किए जाते रहे हैं. जैसे वर्ष 1996 में वहां 443 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से एक बुलेट ट्रेन चलाई गईर् थी. इस के बाद 2003 में मैगलेव ट्रेन को 581 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चला कर जापान ने विश्व कीर्तिमान बनाया था. हालांकि तेज गति के रिकौर्ड बनाने के मामले फ्रांस की टीजीवी (ट्रेने ग्रैंडे विटेसे यानी हाई स्पीड ट्रेन) किसी से पीछे नहीं रही है. वर्ष 1972 से 2007 के बीच फ्रांस की इस बुलेट ट्रेन ने कई बार तेज रफ्तार के कीर्तिमान कायम किए.

फ्रांस की राष्ट्रीय रेल सेवा एसएनसीएफ द्वारा संचालित टीजीवी ने यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता किए बगैर 3 अप्रैल, 2007 को 574.8 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलने का रिकौर्ड अपने नाम किया है. खास उल्लेखनीय बात यह है कि टीजीवी आज दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गई है और यूरोप जाने वाले पर्यटक इस से यात्रा करना नहीं भूलते हैं.

ब्रिटेन जरमनी आगे आए

फ्रांस की तरह ही जरमनी और ब्रिटेन की बुलेट ट्रेनें भी वहां के रोजमर्रा के जीवन में शामिल हो चुकी हैं. वे वहां लंबी दूरी की यात्राओं का सुविधाजनक विकल्प साबित हो रही हैं. फ्रांसीसी बुलेट टीजीवी की सफलता देखने के फौरन बाद जरमनी ने भी अपने यहां हाई स्पीड रेल नैटवर्क बनाने और उन पर बुलेट ट्रेनें चलाने का फैसला किया था, लेकिन इस मामले में पैदा हुए कानूनी विवादों के कारण जरमनी की बुलेट ट्रेन इंटरसिटी ऐक्सप्रैस (आईसीई) का संचालन शुरू होने में 10 वर्ष का विलंब हो गया, लेकिन जब जरमन इंटरसिटी ऐक्सप्रैस ने पटरियों पर दौड़ना शुरू किया तो इस ने कार्यकुशलता और विशेष रूप से समय पर ट्रेनों के आवागमन के मामले में उल्लेखनीय सफलता हासिल की. आज जरमनी की ये बुलेट ट्रेनें यूरोप के आरपार रोजाना हजारों यात्रियों का सफर आसान बना रही हैं. जापान, फ्रांस, जरमनी ब्रिटेन समेत आज यूरोप के ज्यादातर देशों में हाई स्पीड ट्रेनें चलती हैं.

मैगलेव भी पीछे नहीं

वर्ष 2013 में जापान ने एक ऐसी रेलगाड़ी का सफल परीक्षण किया था जिस की रफ्तार 500 किलोमीटर प्रति घंटे होती है. खास बात यह रही कि यह ट्रेन लोहे की पटरियों पर नहीं बल्कि पटरी से ऊपर हवा में अदृश्य चुंबकीय ट्रैक पर दौड़ती है. फिलहाल वहां पलक झपकते नजरों से ओझल हो जाने वाली ऐसी 5 ट्रेनें बनाई गई हैं जो वर्ष 2027 में लोगों को रिकौर्ड रफ्तार के साथ बने सफर का आनंद देंगी. इन ट्रेनों को ‘मैगलेव’ नाम दिया गया है, क्योंकि ये चुंबकीय ट्रैक पर हवा में फिसलती हैं.

मैगलेव का मतलब है मैगनेटिक लैविटेशन. इन तेज रफ्तार ट्रेनों को दौड़ने के लिए न पहिए चाहिए, न ऐक्सल, न बियरिंग. मैगलेव तकनीक विद्युतचुंबकीय चमत्कार की देन है. इस के लिए लोहे की परंपरागत पटरियों के बजाय नई तरह की चुंबकजडि़त पटरियां बिछाई जाती हैं. असल में चुंबक के चारों ओर अदृश्य चुंबकीय क्षेत्र होता है. हर चुंबक की शक्ति उस के सिरों पर सब से अधिक होती है. ये सिरे धु्रव कहलाते हैं, उत्तरी धु्रव (एन) और दक्षिणी ध्रुव (एस).

चुंबक के सिरों के ये नाम पृथ्वी के धु्रवों के अनुसार रखे गए हैं. चुंबक के विपरीत धु्रव एकदूसरे की ओर आकर्षित होते हैं जबकि समान धु्रव यानी उत्तरीउत्तरी या दक्षिणीदक्षिणी धु्रव एकदूसरे से दूर भागते हैं. जब किसी सुचालक चीज जैसे तांबे के तार में बिजली का करंट दौड़ता है तो उस के चारों ओर अदृश्य चुंबकीय क्षेत्र बन जाता है. इस तरह बनाए जाने वाले चुंबक विद्युतचुंबक कहलाते हैं.

चुंबकीय ताकत से चलने वाली मैगलेव ट्रेनों का यही रहस्य है. पटरी पर लगे इलैक्ट्रोमैगनेटों के तीव्र चुंबकीय बल के कारण ये हवा में कुछ सेंटीमीटर ऊपर उठ जाती हैं ओर चुंबकों के कारण ही हवा में सरपट फिसलती हैं. पटरी और ट्रेन में लगे चुंबकों के कारण आकर्षण और विकर्षण बल पैदा होते हैं जिस के कारण रेलगाड़ी हवा में सरकती जाती है.

इलैक्ट्रोमैगनेट क्षणभर के लिए चुंबकीय क्षेत्र को पलट देते हैं तो तेज विकर्षण बल पैदा होता है, इस से रेलगाड़ी हवा में टिकी रहती है. ये एक बार फिर चुंबकीय क्षेत्र को बदल देते हैं और ट्रेन आगे निकल जाती है. हर पल कई बार यही क्रिया लगातार दोहराए जाने पर रेलगाड़ी तेजगति से भागती रहती है. खास बात यह है कि  मैगलेव तकनीक से सामान्य वातावरण में ट्रेन 500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है.                     

क्रिकेट खेलने से पहले फिल्मों में काम करते थें युवी

'सिक्सर किंग' के नाम से मशहूर भारतीय खिलाड़ी युवराज सिंह को आपने ग्राउंड में ताबड़तोड़ बैटिंग करते हुए देखा होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्रिकेट से पहले युवराज फिल्मों में भी काम कर चुके हैं. जी हां, आपको ये जानकर हैरानी होगी कि युवी जब छोटे थे तो उन्होंने एक्टर-सिंगर हंसराज सिंह के साथ पंजाबी फिल्म ‘मेहंदी शगना’ की थी.

बता दें कि आलराउंडर युवराज सिंह ने पाकिस्तान के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में उतरकर शानदार रिकॉर्ड बनाया. युवी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) टूर्नामेंटों में सात फाइनल खेलने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं.

उनसे कम फाइनल ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग और श्रीलंकाई जोड़ी कुमार संगकारा तथा माहेला जयवर्धने ने खेले है. इन खिलाड़ियों ने छह-छह बार आईसीसी टूर्नामेंटों के फाइनल खेले थे.

आपको बताते चलें कि यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि अजहर, धोनी, सचिन के बाद अब युवराज की बायोपिक देखने को मिल सकती है. अब यह तो वक्त ही बाताएगा की युवराज एक बार फिर फिल्मों में दिखेंगे या नहीं.

बौलीवुड का माहौल गरमाने आ रही हैं दुबई की ओदिना

सिनेमा के वैश्वीकरण के चलते पूरे विश्व में रह रहे कलाकारों को बौलीवुड भाने लगा है. अब हर कलाकार बौलीवुड से जुड़ने को प्रयासरत है. इन्हीं में से एक हैं दुबई में रह रही ओदिना, जो कि मूलतः उज्बेकिस्तान की रहने वाली हैं. ओदिना को ‘आदर्श जैन फिल्मस’ और ‘सन आडियो प्रा.लिमिटेड’ द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित की जा रही फिल्म ‘‘फास्ट ट्रैक’’ में मुख्य भूमिका निभाने के लिए अनुबंधित किया गया है.

गायक, नृत्यांगना और माडल ओदिना दुबई में जहां एक तरफ लोगों को नृत्य व गायन की शिक्षा देती हैं, वहीं पिछले 15 वर्षों से वह प्रापर्टी के व्यवसाय से भी जुड़ी हुई हैं. फिलहाल वह मुंबई में हैं.

फिल्म ‘‘फास्ट ट्रैक’’ से जुड़ने की चर्चा करते हुए ओदिना कहती हैं-‘‘मैं लंबे समय से बौलीवुड फिल्म का हिस्सा बनने के लिए प्रयासरत हूं. इसी सिलसिले में कई बार मुंबई आना जाना होता रहा है. एक बार मेरी मुलाकात आदर्श जैन से हुई थी. और उन्होंने मुझसे वादा किया था कि वह अपनी अगली फिल्म में मुझे अच्छा किरदार निभाने का मौका देंगे. जब उन्होंने फिल्म ‘फास्ट ट्रैक’ पर काम शुरू किया, तो उन्हे इस फिल्म में विदेशी और अंग्रेजी बोलने वाली अभिनेत्री की जरुरत थी. इसलिए मुझसे संपर्क किया. किरदार अच्छा है, इसलिए मैंने हामी भर दी. इस संगीतमय एक्शन फिल्म में मैं बिजनेस टायकून का किरदार निभा रही हूं. जो कि बिजनेस के सिलसिले में दुबई से भारत आती है. हम 25 जून से इस फिल्म के लिए नैनीताल में शूटिंग शुरू करने वाले हैं.’’

भोजपुरी अभिनेत्री की आत्महत्या का राज

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर की रहने वाली अंजलि श्रीवास्तव 2011 में भोजपुरी फिल्मों में काम करने मुम्बई गई थी. 6 साल ही मेहनत और मशक्कत के बाद भी वह एक्टिंग के क्षेत्र में अपनी वह पहचान नहीं बना पाई जिसकी उसे दरकार थी. अंजलि के माता पिता उसे रोज फोन कर हालचाल लेते रहते थे. रविवार को जब उसका फोन नहीं उठा तो घर वालों ने अंजलि के मकान मालिक के फोन पर संपर्क किया. जिसके बाद मकान मालिक ने पुलिस की मदद से दरवाजा तोड़ कर कमरे में प्रवेश किया तो अंजलि का शव लटकता मिला. मुम्बई पुलिस के लिये चौंकाने वाली बात यह है कि अंजलि ने कोई सुसाइड लेटर नहीं छोड़ा है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह तय हो पायेगा कि अंजलि की मौत की वजह क्या थी?

फिल्मों में जाकर कैरियर बनाने की चाह रखने वालों को जब असफलता मिलती है तो इस तरह के कदम स्वाभाविक रूप से उठ जाते हैं. अंजलि की सबसे प्रमुख भोजपुरी फिलम कच्चे धागे थी. इसके अलावा उसने कुछ सीरियल और फिल्मों में रोल किये. वह अपनी सफलता से बहुत उत्साहित नहीं थी. वह खुद के लिये लीड रोल चाहती थी. भोजपुरी फिल्मों में अच्छी फिल्में कम बनती हैं. अच्छी फिल्म बनाने वालों की अपनी एक लौबी है. यह लौबी नये कलाकार को आसानी से काम नहीं देती. ऐसे में नये कलाकार का हतोउत्सहित होना स्वाभाविक है. भोजपुरी फिल्मों में ज्यादातर फिल्में कम बजट की होती हैं, उनमें कलाकारों को काम कम और शोषण अधिक होता है.

GST के बाद महंगी हो जाएंगी ये इंश्योरेंस सेवाएं

वस्तु एवं सेवा कर कानून (जीएसटी) लागू होने के बाद इंश्योरेंस से जुड़ी सेवाएं भी महंगी हो सकती हैं. बैंकिंग, इंश्योरेंस और रियल एस्टेट, म्यूचुअल फंड्स इन्वेस्टमेंट पर फिलहाल टैक्स की दर 15 फीसद है. जीएसटी लागू होने के बाद इसमें 3 फीसद का इजाफा हो जाएगा और यह दर 18 फीसद हो जाएगी. ऐसे में जीएसटी आने के बाद इंश्योरेंस सेवाओं का महंगा होना भी तय है.

सामान्य तौर पर तीन तरह के इंश्योरेंस सेवाएं होती हैं- टर्म इंश्योरेंस प्लान, यूलिप और भविष्य निधि. वर्तमान समय में इन तीनों पर टैक्स की अलग-अलग दर लागू होती है. लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में प्रीमियम दो हिस्सों में दिया जाता है, रिस्क कवरेज और सेविंग्स. इसमें से रिस्क कवरेज वाले हिस्से पर ही सर्विस टैक्स लगता है, जबकि सेविंग्स को इससे छूट मिलती है.

जीएसटी लागू होने के बाद इंश्योरेंस पर किस हिसाब से लगेगा टैक्स.

– बीमाधारक चाहे तो उसके ग्रॉस प्रीमियम में से इन्वेस्टमेंट या सेविंग्स के हिस्से को कम किया जाएगा और उसी पर ही जीएसटी लागू होगा.

– साल में एक बार ही जमा किए जाने वाले बीमा प्रीमियम पर 10 फीसद का शुल्क लिया जाएगा.

– इसके अलावा अन्य सभी योजनाओं में पहले साल में प्रीमियम का 25 फीसद और उसके बाद के सालों में 12.5 फीसद की दर से जीएसटी देना होगा. उदाहरण से समझिए अगर आपकी किसी इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम 100 रुपए है तो पहले उस पर 25 फीसद यानी 25 रुपए का जीएसटी देय होगा उसके बाद आपको 12.5 फीसद के हिसाब से कर चुकाना होगा.

– वहीं अगर किसी सूरत में बीमा धारक (पॉलिसी होल्डर) की ओर से प्रीमियम की पूरी राशि रिस्क कवर के लिए ही चुकाई जाती है तो पूरे प्रीमियम पर 18 फीसद का जीएसटी लागू होगा.

मैं शादी के बाद भी अपने प्रेमी के साथ हमबिस्तरी करती हूं. मुझे बहुत मजा आता है. क्या ये सब करना ठीक है.

सवाल

मेरी शादी को 2 साल हो चुके हैं. मैं बचपन से ही एक लड़के से प्यार करती थी. आज भी हम दोनों एकदूसरे से मिलते हैं और हमबिस्तरी भी करते हैं. पति भी मुझे प्यार करते हैं, पर मैं प्रेमी की याद में डूबी रहती हूं. मैं क्या करूं कि वह मुझे मिल जाए?

जवाब

जब आप को प्रेमी से इतना ही प्यार था, तो 2 साल पहले आप किसी दूसरे से शादी करने को क्यों राजी हुईं? दरअसल, इस पार्टटाइम हमबिस्तरी में आप दोनों को ही मजा आ रहा है. अक्लमंदी इसी में है कि आप अपने मासूम पति को और धोखा न दें. अगर उन्हें पता चल गया, तो आप तबाह हो सकती हैं. पति ने अगर आप को छोड़ दिया, तो प्रेमी भी खिसक जाएगा. आप प्रेमी को छोड़ दें.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

 

अब बिना डाटा गूगल पर करें फ्री ब्राउजिंग

स्मार्टफोन में ऐप्स का इस्तेमाल हर कोई करता है. लेकिन बिना इंटरनेट के ज्यादातर ऐप्स चलाना संभव नहीं है. स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाला हर यूजर गूगल ऐप का इस्तेमाल जरुर करता है. जाहिर है कि इसके लिए भी इंटरनेट की आवश्यकता होती है.

लेकिन आज हम आपको एक ऐसी जानकारी देने जा रहे हैं जिसके जरिए आप बिना इंटरनेट के गूगल ऐप चला पाएंगे. दरअसल, गूगल ने एक ऐसा फीचर जारी किया है जिसके जरिए फोन में बिना इंटरनेट के भी गूगल की सभी सेवाओं का फायदा उठाया जा सकता है.

रिपोर्ट की मानें तो गूगल ने एक फीचर पेश किया है जिसका नाम ‘फ्री जोन’ है. यहां यूजर्स बिना डाटा इस्तेमाल किए गूगल ऐप इस्तेमाल कर पाएंगे. इसके लिए यूजर का जीमेल अकाउंट होना अनिवार्य है.

इसके बाद यूजर्स को फोन के ब्राउजर में जाकर “g.co/freezon” टाइप करना होगा. यहां से यूजर बिना डाटा सर्फिंग कर पाएंगे. सबसे अहम बात यह कि जब तक यूजर को फोन में हरे रंग की पट्टी दिखाई देगी तब तक ही वो फ्री सर्फिंग कर पाएंगे.

आपको बता दें कि यह प्रक्रिया केवल गूगल ऐप पर ही काम करेगी. बाकि के ऐप्स चलाने के लिए डाटा की जरुरत होगी. ये फीचर यूजर्स के लिए उपयोगी साबित होगा.

नीले रंग में रंगा ब्रांडेड इवेंट है ‘योग दिवस’

एक माह की तैयारी के बाद केन्द्र सरकार के आयुष विभाग ने योग दिवस को ब्रांडेड इवेंट बना दिया है. करोडों रूपयों के खर्च करने से जनता को क्या मिलेगा यह बात सोचने की फुरसत न तो भाजपा की केन्द्र सरकार को है और न ही किसी विपक्षी दल को. जनता को योग के रंग में रंगने के बहाने आयुष विभाग ने घरघर तक योग की चर्चा करने और उसे फैशनेबल इवेंट बनाने का काम किया है. योग करते समय सभी को नीली सफेद रंग की टी शर्ट पहननी है. काले रंग का ट्राउजर पहनना है. भगवा रंग में रंगे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम में नीले रंग को तरजीह दी गई है. अब तक भाजपा नीले रंग को बसपा पार्टी का रंग मान कर इससे परहेज करती रही है. पिछले योग दिवस में नारंगी रंग की टीशर्ट का रंग दिखा था.

योग करने के लिये अलग अलग रंगों की मैट यानि चटाई का प्रयोग किया जायेगा, इसमें भी नीला रंग प्रमुख रूप से दिखेगा. चटाई और टीशर्ट का रंग अलग अलग न दिखे, इसके लिये यह दोनों ही योग स्थल पर प्रतिभागियों को आयुष विभाग की तरफ से मुफ्त में दी गई. जिस समय योग के लिये रजिस्ट्रेशन शुरू किया गया था उस समय ही किस साइज की टीशर्ट की जरूरत है यह समझ लिया गया था. यही नहीं योग करते समय अपने जूतो को खुले में नहीं रखना इसके लिये आयुष विभाग के द्वारा जूते रखने के लिये एक बैग अलग से दिया जायेगा.

योग करने के लिये मंच से एक जैसी योग के आसन कराये जायेंगे जिससे योग करते समय तालमेल दिखे. हर योगासन करने वाले को वही आसन करने हैं जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे. एकरूपता सा दिखने के लिये यह काम किया जा रहा है. योग को सफल बनाने के लिये बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों को योगासन के लिये बुलाया गया है. योग करने से मुश्किल काम योग स्थल मैदान तक पहुंचने का है, ऐसे में आयुष विभाग ने 20 बिंदुओं के निर्देश पत्र में लिखा है कि जो लोग 2 किलोमीटर पैदल चल सकने की हालत में न हों, वह इसमें हिस्सा न ले. इसलिये यह मत समझें कि योगा बीमार लोगों के लिये है.

योग करने वालों का पहले से तालमेल बना रहे, इसके लिये एक दिन पहले योग का रिहर्सल कराया गया. जिस समय राजधानी में प्रधानमंत्री मोदी बहुत सारे लोगों के साथ योगा करेंगे उसी समय हर जिले में विभिन्न संस्थाओं के द्वारा लोगों को योग कराया जायेगा. इसका पूरा इंतजाम भी आयुष विभाग ने किया है. योग असल में अब पहले कि तरह ऋषि मुनियों वाला योग नहीं रह गया, यह एक ब्रांडेड इवेंट बन गया है. अब केन्द्र सरकार ने इसे अपने प्रचार का जरीया मान कर आयुष विभाग को इसे सौंप दिया है. ऐसे में आयुष विभाग अब योग के प्रचार में लग गया है. आयुष विभाग यह नहीं बता पा रहा कि बीते 3 सालों से योग से क्या लाभ हुआ? बीमारियों में क्या कमी आई? अगर योग से लोगों को लाभ हो रहा तो अस्पतालों में लगी भीड़ कम क्यों नहीं हो रही?  

पाक पर जीत के बाद पुलिस के फंदे में फंसे सरदार सिंह

हॉकी वर्ल्ड लीग सेमीफाइनल में पाकिस्तान को 7-1 से रौंदने के एक दिन बाद ही भारतीय टीम परेशानी में घिर गई है. दरअसल, पूर्व भारतीय कप्तान सरदार सिंह को यॉर्कशायर पुलिस द्वारा सालभर पुराने यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया. सरदार सिंह से इंग्लैंड की पुलिस ने 4 घंटे तक पुछताछ की है. टीम के मनोबल को इससे झटका जरूर लगा होगा.

भारतीय टीम इन दिनों हॉकी वर्ल्ड लीग सेमीफाइनल टूर्नामेंट के लिए लंदन में है. टीम मैनेजमेंट इस बात से खासा परेशान है कि सरदार को बिना किसी पूर्व सूचना के टूर्नामेंट के बीच ही पूछताछ के लिए बुलाया गया. पिछले साल भारतीय मूल की ब्रिटिश हॉकी खिलाड़ी अशपाल भोगल ने अपने मंगेतर और भारतीय हॉकी टीम के कप्तान सरदार सिंह पर 'यौन उत्पीड़न' का आरोप लगाया था.

टीम मैनमेजमेंट की तरफ से बताया गया कि टीम इस वक्त लंदन में है और सरदार को पूछताछ के लिए लीड्स तलब किया गया है. हमें यहां आए 10 दिन से ज्यादा गए, और अगर पुराने मामले में पूछताछ करनी है, तो पुलिस ने इतना इंतजार क्यों किया.

टीम की ओर से बताया गया कि सरदार यहां टीम के साथ बड़ा टूर्नामेंट खेलने आए हैं. दोनों शहरों में 200 मील का फासला है. इसका मतलब है कि इसमें 10 से 12 घंटे का समय लगता है.

उधर, एफआईएच के अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने भारत सरकार से मदद मांगी है. ताकि ब्रिटेन के अधिकारी टीम पर कोई अनावश्यक दबाव न बनाएं. उन्होंने कहा कि भारतीय उच्चायोग को भी आरोपों के बारे में सूचित नहीं किया गया था.

हालांकि हॉकी इंडिया ने आधिकारिक तौर पर इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. जबकि उस महिला खिलाड़ी का कहना है कि वह ब्रिटिश कानून में विश्वास करती है और यहां न्याय किया जाएगा.

महिला ने आरोप लगाया था कि सरदार सिंह ने 2014 में उससे सगाई की. इसके बाद दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने और वह गर्भवती हो गई. आरोप है कि सरदार सिंह ने उन्हें गर्भपात के लिए मजबूर कर दिया. पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, दोनों में एक सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिए दोस्ती हुई और वह 2012 में सरदार सिंह से मिली थी.

पाकिस्तानियों ने विराट कोहली से पूछा, अब बता बाप कौन है, वीडियो वायरल

चैंपियंस ट्रॉफी 2017 के फाइनल में पाकिस्तान ने टीम इंडिया पर विराट जीत दर्ज करके पहली बार खिताब पर कब्जा किया है. लेकिन कहते हैं ना अक्सर जीत लोगों का दिमाग खराब कर देती है और कुछ ऐसा ही दिमाग खराब किया है पाक फैंस का.

दरअसल सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जो कि मैच के बाद का है, जिसमें एक पाकिस्तानी फैंस बुरी तरह से टीम इंडिया के खिलाड़ियों पर छींटा-कशी कर रहा है.

जैसे ही टीम इंडिया के खिलाड़ी विराट कोहली, शमी, युवराज ड्रेसिंग रूम की ओर लौट रहे हैं, वो पाकिस्तानी फैंस कोहली को चिढ़ाते हुए चिल्लाता है, क्यों कोहली, टूट गई अकड़?

वहीं शमी को और देखते हुए कहा कि पता लग गया ना बाप कौन है? जिस पर शमी भी गुस्साते हुए उसकी ओर बढ़े तभी उनके पीछे आते हुए धोनी उन्हें शांत कराते और कहते हैं कि ये सब होता रहता है, शांत रहो.

गौरतलब है कि चैंपियंस ट्रॉफी 2017 के फाइनल में पाकिस्तान ने हरफनमौला खेल का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए भारत को 180 रनों के भारी अंतर से हराया और पहली बार खिताब अपने नाम कर लिया.

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