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इस फोन और ऐप का करेंगे इस्तेमाल तो आसपास नहीं भटकेंगे मच्छर

अगर आपको मच्छर अगरबत्ती के धुएं से एलर्जी है या लिक्विड की गंध से दिक्क्त है तो मच्छरों को भगाने का जिम्मा अपने स्मार्टफोन पर छोड़ दें. आज की दुनिया में तकनीक इतना तरक्की कर चुका है कि महज एक स्मार्टफोन या ऐप से आप मच्छर को भगा सकते हैं. आपको केवल एक स्मार्टफोन खरीदना होगा या फिर अपने गूगल प्ले स्टोर पर जाकर अपनी पसंद का एक एंटी मौस्किटो रीपलेंट एप डाउन लोड कर सोते समय इसे औन करना होगा.

एंड्रायड फोन के लिए ऐसे कई ऐप्स उपलब्ध हैं जो मच्छरों को पास भटकने नहीं देते. बहुत कम स्पेस घेरने वाले ये ऐप्लीकेशन औफलाइन काम करते हैं. एक बार औन करने पर इनसे निकलने वालीं ध्वनि तरंगें मच्छरों और मक्खियों को भागने पर मजबूर कर देती हैं. सबसे खास बात ये है कि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है और न ही कोई खर्चा.

सिर्फ ऐप ही नहीं LG ने एक नया स्मार्टफोन K7i पेश कर दिया है जो मच्छरों को आपके आसपास फटकने नहीं देता. एलजी इलेक्ट्रोनिक्स इंडिया के एक अधिकारी ने बताया कि इस फोन में मच्छर भगाने वाली टेक्नोलाजी है जो कि हमारे कुछ टीवी और एसी में पहले से ही आ रही है. कंपनी इस फोन के प्रति ग्राहकों के रुख के मुताबिक अपने बाकी स्मार्टफोन्स में इसे शामिल करने के बारे में फैसला करेगी.

उन्होंने कहा कि इस टेक्नोलाजी में अल्ट्रासोनिक फ्रिक्वेंसी का इस्तेमाल होता है जो कि इंसानो के लिए सुरक्षित है लेकिन मच्छरों को दूर भगाती है. उन्होंने दावा किया कि इसका दायरा लगभग एक मीटर का है और इसमें कोई हानिकारक एमीशन नहीं होता.

कंपनी के इस k7i स्मार्टफोन की कीमत 7,990 रुपये है. इसमें 2GB रैम, 16GB इंटरनल स्टोरेज दिया गया है. इसमें 8 मेगापिक्सल रियर कैमरा और 5 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा मौजूद है. साथ ही पावर के लिए इसमें 2500mAh की बैटरी दी गई है.

यह फोन क्वाड कोर प्रोसेसर पर काम करता है.  इससे पहले LG ने स्मार्टफोन LG V30 लान्च किया है. इसे बर्लिन में चल रहे IFA 2017 इवेंट में लान्च किया गया है. LG V30 में 6 इंच की डिस्प्ले दी गई है. इसके अलावा इस स्मार्टफोन में कंपनी ने Bang & Olufsen  आडियो फीचर दिया है.

अब इस भारतीय क्रिकेटर के नाम पर अमेरिका में खोला गया स्टेडियम

क्रिकेट इतिहास के सर्वश्रेष्ठ टेस्ट बल्लेबाजों में शुमार किए जाने वाले पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान और सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर की उपलब्धियों में एक और अध्याय जुड़ गया है. अमेरिका के केंटकी में बन एक क्रिकेट स्टेडियम का नाम इस महान भारतीय बल्लेबाज के नाम पर “सुनील गावस्कर फील्ड” रखा गया है.

लुईसविले में स्थित इस स्टेडियम से पहले मुंबई के  वानखड़े स्टेडियम में “लिटिल मास्टर” के नाम से मशहूर गावस्कर के नाम पर दर्श दीर्घा का नाम रखा गया था. एक रिपोर्ट के अनुसार गावस्कर ऐसे तीसरे क्रिकेट खिलाड़ी हैं जिसके नाम पर पूरे स्टेडियम का नाम रखा गया है. रिपोर्ट के अनुसार इससे पहले एंटीगुआ में सर विवियन रिचर्ड्स के नाम पर और सेंट लूसिया में डैरेन सैमी के नाम पर नेशन क्रिकेटर स्टेडियम का नाम रखा गया था. हालांकि रिचर्ड्स और सैमी के नाम पर उनके अपने देश में स्टेडियम बने जबकि गावस्कर के नाम पर विदेश में.

गावस्कर ने इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए रिपोर्ट में कहा, “ये बहुत ही सम्मान की बात है और खासकर ऐसे देश में जहां क्रिकेट प्रमुख खेल नहीं.” भारत में क्रिकेट स्टेडियम के नाम नेताओं के नाम पर रखने के सवाल पर गावस्कर ने कहा कि खिलाड़ियों के अलावा भी खेलों के विकास और बेहतरी के लिए बहुत से लोग काम करते हैं और उनके नाम पर स्टेडियम के नाम रखे जा सकते हैं. हालांकि गावस्कर ने ये भी कहा कि आदर्श तौर पर खेल के मैदानों के नाम उन्हीं लोगों के नाम पर रखे जाने चाहिए जिन्होंने उसमें योगदान दिया है.

गावस्कर ने अपने क्रिकेट करियर में 125 टेस्ट मैचों की 214 पारियों में 34 शतक और 45 अर्ध-शतकों की मदद से कुल 10122 रन बनाए. उनका औसत 51.12 रहा. उनका अधिकतम स्कोर नाबाद 236 रन रहा. गावस्कर ने टेस्ट की तुलना में वनडे मैच कम खेले. उन्होंने कुल 108 वनडे मैच खेले जिनकी 102 पारियों में 3092 रन बनाए. वनडे में उनका बल्लेबाजी औसत 35.12 रहा. वनडे में उनका अधिकतम स्कोर नाबाद 103 रहा. वनडे मैचों में गावस्कर ने एक शतक और 27 अर्ध-शतक बनाए.

अंधश्रद्धा की ओर तेजी से दौड़ रहा देश, ये है धर्म के पाखंडियों का नया शगूफा

रात को सोती महिलाओं की चोटियां किसी परलौकिकता के कारण काट लेने पर कुछ लिखना व कहना बेकार है. 21वीं सदी में भी यह देश उलटा जा रहा है और तर्क, वैज्ञानिकता, स्वाभाविकता, संभव के सत्य को गहरे गड्ढे में फेंक कर छद्म इतिहास, चमत्कारों, अंधविश्वासों, पूजापाठों, हवनों, दानपुण्य में भारी विश्वास कर रहा है.

आदिम युग में भी आदमी तर्क और उपलब्ध जानकारी के अनुसार जीवित रहा है और उसी आधार पर उस ने अपने खाने का जुगाड़ किया, जानवरों से सुरक्षा की और प्रकृति का मुकाबला किया. आज समझदारी को छोड़ कर पूरा देश, राष्ट्रपति से ले कर अनपढ़, दलित तक एक लहर में डूब रहा है जिस में विज्ञान और तर्क की गुंजाइश ही नहीं.

चोटी काटने का मामला गणेश को दूध पिलाने की तरह है, जिस के पागलपन में हजारोंलाखों लोगों को बहकाया जा सकता है. खिलंदरी को दुष्ट आत्मा का नाम दे कर धर्म के दुकानदारों ने हवन, पूजापाठ, मंत्रजंतर का उपाय बताया और अपना उल्लू सीधा कर लिया. हैरानी की बात तो यह है कि देश की उच्चशिक्षित जनता भी इस का शिकार है.

जहां चंद्रयान भेजने वाला इसरो का मुख्य अधिकारी तिरुपति का आशीर्वाद मांगने जाए, जहां गणेश के सिर की तुलना आधुनिक सर्जरी कला से की जाए, जहां लंबे पुलों का निर्माण वास्तु के आधार पर और

2 करोड़ रुपए की गाड़ी की सुरक्षा के लिए लालकाले कपड़े टंगे हों, वहां चोटी काटने की घटनाओं पर क्या आश्चर्य किया जा सकता है.

यह देश अंधश्रद्धा की ओर तेजी से दौड़ रहा है. इस बार कांवडि़यों को आदेश दिया गया कि वे भगवे तिकोने झंडे न फहराएं, तिरंगा राष्ट्रीयध्वज फहराएं यानी यह घोषित कर दिया गया है कि भारत इसलामिक स्टेट के काले झंडे वाला नहीं, तिरंगे झंडे वाला भगवा देश है. इस देश में कोई भी अगर भगवा से भिन्न विचार रखता है, तो वह देशद्रोही है.

ऐसे वातावरण में चोटी काटने पर उन्माद फैलाने का काम बहुत कारगर होता है. इस के नाम पर हवनकर्ताओं की बन आती है और इस में मंदिरों के दुकानदार ही सब से आगे होते हैं. ये पाखंड और अंधविश्वास ही राजनीति को आज विटामिन दे रहे हैं. गौरक्षा का एक रूप ही चोटी काटना है, जिस के चलते किसी निरीह महिला के नाम पर गलीगली, गांवगांव में आतंक का वातावरण फैलाया जा रहा है. यह जनता के प्रति द्रोेह है जबकि इसे राष्ट्रभक्ति, देशभक्ति, धर्मभक्ति के सुनहरे वरकों में लपेट कर प्रस्तुत किया जा रहा है. नतीजा अंधविश्वास और पक्की सरकार दोनों हैं.

आपकी जेब पर होगा इन 5 बड़े बदलावों का असर

एक अक्टूबर से देश में कई बड़े बदलाव होने वाले हैं. ये सारे बदलाव हमारे रोजमर्रा के जीवन से जुड़े हुए हैं. इन बदलाव की जानकारी रखकर आप न सिर्फ एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएंगे, बल्कि आपको भी इसका फायदा होगा.

अगले महीने से एसबीआई के सेविंग बैंक अकाउंट पर नया नियम लागू हो जाएगा. साथ ही, कोई भी दुकानदार पुराने एमआरपी पर सामान नहीं बेच पाएंगे. इसके अलावा अक्टूबर में आपको सस्ते काल रेट्स की सौगात भी मिल सकती है. जानिए ऐसे 5 नियम, जो 1 अक्टूबर से बदल जाएंगे.

पुराने एमआरपी पर नहीं बिकेगा सामान

कोई भी दुकानदार 1 अक्टूबर से पुराने एमआरपी पर सामान नहीं बेच सकेगा. 1 तारीख से सभी को नई एमआरपी के साथ सामान बेचना होगा. ऐसा न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

दरअसल सरकार ने पुराने एमआरपी पर सामान बेचने की आखिरी तारीख 30 सितंबर तय की थी. अब सरकार ने साफ कर दिया है कि इसके बाद नए एमआरपी पर सामान बेचना होगा और ऐसा न करने वालों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा.

एसबीआई का नया नियम होगा लागू

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने हाल में सेविंग अकाउंट पर न्यूनतम चार्ज घटाने का ऐलान किया था. बैंक ने अब मिनिमम बैंलेंस लिमिट 5000 से 3000 रुपये कर दी है. यह नियम 1 अक्टूबर से लागू हो जाएगा.

इन बैंकों के चेक नहीं होंगे वैध्य

एसबीआई के सहयोगी बैंकों का एसबीआई के साथ मर्जर हुआ है. 1 अक्टूबर से उन बैंको के चेक नहीं चलेंगे. इन सहयोगी बैंकों के ग्राहकों को एसबीआई के नए चेक लेने होंगे. अगर आपने ऐसा अभी तक नहीं किया है तो 1 अक्टूबर से पहले-पहले इस काम को जरूर निपटा लें.

काल रेट हो सकते हैं कम

1 अक्टूबर से आपको सस्ते काल रेट्स की सौगात भी मिल सकती है. टेलिकाम रेग्युलेटर ट्राई ने 1 अक्टूबर से इंटरकनेक्शन चार्जेस (आईयूसी) घटाने की घोषणा की है. 1 अक्टूबर से इस फैसले के लागू होने पर टेलिकाम कंपिनयां आपको सस्ते काल का तोहफा दे सकती है. दरअसल यह वह चार्ज होता है, जो एक टेलिकाम कंपनी उस कंपनी को पे करती है, जिसके नेटवर्क पर काल खत्म होती है.

खाता बंद करने के लिए चार्ज नहीं

अगर एसबीआई में आपका खाता है और आप इसे बंद करवाना चाहते हैं, तो 1 अक्टूबर से इसके लिए आप से कोई चार्ज नहीं वसूला जाएगा. हालांकि यह सुविधा खाता खोलने के 14 दिन तक और 1 साल बाद खाता बंद करने पर मिलेगी. 14 दिन के बाद और 1 साल से पहले बंद करने पर 500 रुपये प्लस जीएसटी लगेगा.

इस तरह से धरा गया चैक क्लोनिंग का मास्टरमाइंड

साइप्रस में वह नूरुद्दीन के नाम से जाना जाता था, तो जौर्डन में चार्ल्स ब्रोकलिन. माल्टा में उस की पहचान बिट्टू के रूप में थी, तो दुबई में रेहान खान. तुर्की में वह सफी अहमद के नाम से जाना जाता था. वह इन देशों में बेरोकटोक आताजाता था.

लेकिन उस शख्स का असली नाम प्रसन्नजीत था और वह चैक क्लोनिंग का माहिर खिलाड़ी था. चैक क्लोनिंग कर के उस ने कई कंपनियों को करोड़ों रुपए का चूना लगाया और उस पैसों से वह विदेशों में ऐशमौज करता रहता था.

प्रसन्नजीत की धोखाधड़ी का खुलासा 4 जून, 2017 को तब हुआ, जब पटना के कदमकुआं थाना क्षेत्र के कारोबारी अजीत कुमार जगनानी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उन के खाते से एक लाख, 95 हजार रुपए फर्जी तरीके से निकाल लिए गए हैं. पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की, तो एक के बाद एक खुलासे होने लगे.

अजीत कुमार जगनानी के खाते से निकाली गई रकम चार्ल्स ब्रोकलिन के यूनियन बैंक के खाते में जमा हुई थी. उस के बाद उस रकम को नैटबैंकिंग के जरीए लोहानीपुर की रहने वाली नरगिस के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया था.

पुलिस ने नरगिस को दबोचा, तो उस की निशानदेही पर पहले कदमकुआं इलाके से पिंटू को गिरफ्तार किया गया. उस के बाद पिंटू और नरगिस ने प्रसन्नजीत के नाम का खुलासा कर उसे भी पुलिस के जाल में फंसा दिया.

चैक की क्लोनिंग कर बैंकों से करोड़ों रुपए निकालने वाले प्रसन्नजीत को 5 जुलाई, 2017 को गर्दनीबाग थाना पुलिस ने रात को सरिस्ताबाद इलाके से गिरफ्तार कर लिया. उस के गिरोह के 3 लोगों को भी धरदबोचा गया.

उन के पास से 4 सौ एटीएम कार्ड, 150 सिम कार्ड, अलगअलग बैंकों की 150 मुहरें बरामद की गईं.

इस के अलावा 6 देशों की करंसी, पासपोर्ट और दर्जनों बैंकों की चैकबुक और पासबुक जब्त की गईं. प्रसन्नजीत के खिलाफ पटना के कई थानों में पहले से ही कई केस दर्ज हैं.

पुलिस ने प्रसन्नजीत के मोबाइल फोन को खंगाला, तो किसी इरफान का नंबर मिला. प्रसन्नजीत उस के साथ चैटिंग भी किया करता था. इरफान साइप्रस का रहने वाला है और प्रसन्नजीत ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि इरफान पिछले कुछ दिनों से भारत में ही है.

इरफान को ही इस कारिस्तानी का मास्टरमाइंड माना जा रहा है. पटना में प्रसन्नजीत ने अपने असली नाम के अलावा नूरुद्दीन, चार्ल्स ब्रोकलिन, बिट्टू, रेहान खान और सफी अहमद के नाम से कई सरकारी बैंकों के अलावा प्राइवेट बैंकों में खाते खुलवा रखे हैं. उन्हीं खातों के जरीए वह चैक क्लोनिंग का खेल खेलता रहा.पटना के एसएसपी मनु महाराज कहते हैं कि प्रसन्नजीत से पूछताछ के बाद कई बैंकों के मुलाजिमों के भी इस जालसाजी में फंसने के पूरे आसार हैं.

चैक क्लोनिंग के जरीए करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले प्रसन्नजीत के पास से जब्त लैपटौप को पुलिस ने एफएसएल की जांच के लिए भेजा है.

पटना से तकरीबन 50 किलोमीटर दूर मसौढ़ी ब्लौक के रहने वाले प्रसन्नजीत ने पुलिस को भरमाने के लिए पहले बताया था कि वह केवल मुहरा है, असली सरगना कंकड़बाग का रहने वाला शाह नाम का आदमी है.

पुलिस प्रसन्नजीत के बताए पते पर गई, तो पता चला कि वहां शाह नाम का कोई आदमी नहीं रहता है. पुलिस अब उसे ही मास्टरमाइंड मान कर छानबीन कर रही है.

शुरुआती जांच में ही पता चला है कि प्रसन्नजीत ने तकरीबन 2 सौ लोगों के नाम से बैंक खाते खुलवा रखे हैं. चैक से उड़ाई गई रकम को इन्हीं खातों में डाला जाता रहा है. अकाउंट में रुपए ट्रांसफर होने के बाद एटीएम कार्ड के जरीए उन्हें निकाल लिया जाता था.

प्रसन्नजीत ने बताया कि 3 साल पहले उसे एक चिट्ठी मिली थी. उस चिट्ठी में लिखा था कि धर्म प्रवचन और धर्म की बातों को कहने के लिए उसे साइप्रस से बुलावा आया है.

चिट्ठी पढ़ने के बाद वह साइप्रस जाने के लिए तैयार हो गया. उसे गिरजाघर जाना था, इसलिए उस ने अपना नाम चार्ल्स ब्रोकलिन रख लिया. उस नाम से उस ने फर्जी आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसैंस और पहचानपत्र भी बनवा लिया. गिरजाघर जा कर उस ने प्रवचन देना चालू कर दिया. इतना ही नहीं, मोहम्मद नूरुद्दीन के नाम से वह साइप्रस की एक मसजिद में भी जाने लगा था.

प्रसन्नजीत के घर वाले उसे ‘गुड्डू’ कह कर बुलाते हैं. उस ने साल 2010 और साल 2013 में पासपोर्ट बनवाया और दोनों में उस का नाम प्रसन्नजीत दर्ज है. वह पटना के साइंस कालेज में पढ़ता था. कालेज में पढ़ने वाली एक लड़की रानी से उसे इश्क हुआ. कुछ दिन बाद उस ने प्रेमिका रानी को बताया कि उस ने अपना धर्म बदल लिया है और अपना नाम रेहान खान रख लिया है.

प्रेमिका को यकीन दिलाने के लिए प्रसन्नजीत ने रेहान खान के नाम का आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसैंस और पहचानपत्र भी बनवा लिया था.

प्रेमिका से वह कहता था कि वह बहुत बड़ा आदमी बन गया है. काम के सिलसिले में वह कई देशों का दौरा कर चुका है.

पुलिस की जांच में पाया गया कि प्रसन्नजीत ने 2 पासपोर्ट बना रखे थे. एक पासपोर्ट उस ने साल 2007 में बनवाया था और दूसरा साल 2010 में. पुलिस ने जब इस बारे में पूछताछ की, तो उस ने बताया कि उस का पासपोर्ट खो गया था, इसलिए दूसरा पासपोर्ट बनवाना पड़ा.

पुलिस ने उस की इस दलील को खारिज कर दिया कि अगर गुम होने के बाद पासपोर्ट बनाया है, तो दोनों पासपोर्ट के नंबर अलगअलग कैसे हो गए? पुलिस ने क्षेत्रीय पासपोर्ट दफ्तर से इस बारे में पता किया, तो प्रसन्नजीत पूरी तरह झूठा साबित हुआ.

ठगी का खेल शुरू करने से पहले प्रसन्नजीत एक प्राइवेट बैंक में नौकरी भी कर चुका था. इस वजह से उसे बैंक की सारी तकनीकों और नियमों के बारे में पता है.

पुलिस ने बताया कि उस के टारगेट पर कंपनी का अकाउंटैंट होता था. बैंक मुलाजिम की मिलीभगत से किसी भी बड़ी कंपनी के खाते का चैक वह आसानी से कैश करवा लेता था.

वह अपने घर से सारी करतूतों को अंजाम देता रहता था. वह चैक की क्लोनिंग करता और बैंक के मुलाजिम को मिला कर उसे भुना लेता.

प्रसन्नजीत के पास तकरीबन हर बैंक की पासबुक और चैकबुक थी. उस के गिरोह में 25 लोग शामिल थे. उस ने सभी लोगों के 8-10 बैंक खाते खुलवा रखे थे. किसी कंपनी को चूना लगाने के बाद वह रुपयों को फर्जी खातों में ही डालता था. इस के लिए वह बैंक मुलाजिम को मोटी रकम देता था.crime story in hindi

बैंक मुलाजिम का यह भी काम होता था कि अगर किसी कंपनी का मुलाजिम पैसे गायब होने की शिकायत करे, तो उसे कैसे चलता करना है. फर्जी दस्तखत और चैक दिखा कर कंपनी के मुलाजिमों को भगा दिया जाता था.

पटना के सिटी एसपी चंदन कुशवाहा ने बताया कि चैक क्लोनिंग कर बैंकों से रुपए निकालने वाले गिरोह को पकड़ लिया गया है. गिरोह का साथ देने वाले कई बैंकों के मुलाजिमों की पहचान की जा रही है.

प्रसन्नजीत ने जब बैंकों के चैक क्लोनिंग के तरीके के बारे में बताया, तो पुलिस की आंखें भी फटी रह गईं. जब किसी कंपनी का स्टाफ अपनी कंपनी की चैकबुक ले कर बैंक के काउंटर पर पहुंचता, तो काउंटर पर बैठा बैंक मुलाजिम उस चैक का फोटो ले कर गिरोह के सरगना प्रसन्नजीत को दे देता था.

चैक पर किए गए दस्तखत को देख कर प्रसन्नजीत उस की नकल करता था. कई दफा प्रैक्टिस करने के बाद वह दस्तखत की हूबहू नकल कर लेता था. उस के बाद पहले से अपने पास रखी गई अलगअलग बैंकों की चैकबुक का सीरियल नंबर फोटो वाले चैक नंबर एकदो डिजिट आगे की डालता.

चैक पर कंपनी के मुलाजिम का दस्तखत कर लेता और चैक नंबर बदल कर अपने फर्जी नाम वाले खाते में डाल देता था. चैक क्लियर होने के बाद वह एटीएम कार्ड से पैसे निकाल लेता था.

पुलिस की जांच में यह भी पता चला है कि प्रसन्नजीत के हर फर्जी खाते से लाखों रुपए का ट्रांजैक्शन हुआ है. उस की प्रेमिका रानी और उस के दोस्तों के खातों को भी खंगाला जा रहा है.

अपनी प्रेमिका का बैंक खाता प्रसन्नजीत ही चलाया करता था. वह साल 2011 में 2 बार और साल 2013 में एक बार साइप्रस घूम चुका है.

आईबी ने प्रसन्नजीत से पूछताछ के बाद यह शक जताया है कि प्रसन्नजीत का आईएसआई से कनैक्शन भी हो सकता है.

शातिर प्रसन्नजीत गिरोह के 2 सौ बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है. उस के और उस के साथियों के पटना समेत दिल्ली, ओडिशा, हैदराबाद, मैसूर, मुंबई, कोलकाता समेत कई शहरों में बैंक अकाउंट हैं.

पुलिस यह जानकारी जुटा रही है कि किसकिस खाते में कबकब कितनी रकम किस खाते से ट्रांसफर की गई और उसे कब निकाला गया.

प्रसन्नजीत के सरिस्ताबाद के घर से सैकड़ों सीडियां भी मिली हैं, जिन में से ज्यादातर ब्लू फिल्मों की हैं.

पटना के सुलतानगंज इलाके की रहने वाली प्रसन्नजीत की प्रेमिका शैली उर्फ शफकत फाखरा ने पूछताछ के दौरान पुलिस को ऐसी बातें बताई हैं, जिस से पुलिस के कान खड़े हो गए हैं. आईबी के बाद एटीएस और एनआईए भी उस से पूछताछ कर सकती है. खातों से धोखाधड़ी पर 10 दिनों में रकम वापस भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्राहकों को यकीन दिलाया है कि अगर वे औनलाइन बैंकिंग की धोखाधड़ी के शिकार होने के 3 दिनों के अंदर शिकायत दर्ज कराते हैं, तो उन्हें नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा.

भारतीय रिजर्व बैंक ने 6 जुलाई, 2017 को साफ किया कि समय सीमा के अंदर शिकायत करने पर 10 दिनों के भीतर रकम वापस कर दी जाएगी. गैरकानूनी लेनदेन में अगर सूचना देने के 4 से 7 दिन की देरी होती है, तो ग्राहकों को 25 हजार रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ेगा.

साथ ही, यह भी कहा गया है कि ग्राहक गोपनीय बैंकिंग जानकारी किसी से साझा करता है यानी खाताधारक की गलती से नुकसान हुआ हो और वह बैंक को सूचना भी नहीं देता है, तो उसे पूरा नुकसान उठाना पड़ेगा.

डेबिटक्रेडिट कार्ड के गैरकानूनी लेनदेन की बढ़ती शिकायतों के बाद आरबीआई ने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं.

गंवाने का का चसका लगने से पहले आप भी हो जाएं सावधान

रिंकू ने कौंट्रैक्ट पर एक नई नौकरी हासिल की थी. 6 महीने में 10 लाख रुपए की आमदनी होनी थी. एक महीना बीततेबीतते रिंकू के बीवीबच्चों ने नई कार की फरमाइश कर डाली. 10 लाख रुपए आने के पहले ही रिंकू ने नौकरी के 2 महीने पूरे होतेहोते 8 लाख रुपए की नई कार ले ली. भले ही कार को फाइनैंस कराना पड़ा.

आज की नई पीढ़ी खर्च करने में माहिर है. आयुष के पुलिस अफसर होने का उस के बच्चों पर यह असर पड़ा कि बेटी कृति ने सिंगापुर जाने का और बेटे ने आस्ट्रेलिया जाने का मन बना लिया.

अब पुलिस अफसर होने के बावजूद आयुष के सामने हमेशा लाखों रुपए कमाने का टारगेट होता है. बच्चों को विदेश भेजना था, तो पुश्तैनी जमीन भी बेच दी. क्या करें, आज की पीढ़ी के पास खर्च करने की लंबीचौड़ी लिस्ट जो होती है.

बच्चा बाद में पैदा होता है, उस के कैरियर की प्लानिंग आज के मांबाप पहले ही कर लेते हैं, इसलिए वे उस की परवरिश अपनी जमापूंजी से भी ज्यादा की हैसियत से करते हैं.

पहले के जमाने में भले ही यह फार्मूला अपनाया जाता था कि आमदनी एक रुपया हो, तो अठन्नी ही खर्चना और अठन्नी बचा लेना. पर आज यह सोच जैसे खत्म हो चुकी है. यही वजह है कि बच्चों के खर्चों को दरकिनार करने की हिम्मत आज के मांबाप में नहीं है. हर कोई अपनी औकात से ज्यादा बच्चों पर खर्च कर रहा है.

आज से कुछ साल पहले तक एक केक ला कर और रिकौर्ड प्लेयर पर गाना बजा कर बच्चे का जन्मदिन मना लिया जाता था, पर आज की पीढ़ी के पास होटल बुक करने और पार्टी करने का चसका है. डांस फ्लोर पर थिरके बगैर पार्टी पूरी नहीं होती है. नए कपड़े लिए जाते हैं. मतलब, सबकुछ स्पैशल होता है.

आज ‘सादा जीवन उच्च विचार’ निहायत ही बोरिंग किस्म का विचार है. लोगों में अपनी साख बनाने के लिए ब्रांडैड चीजों का इस्तेमाल जरूरी है. सोडा हब और बीयर पार्टी आम बात है. ‘टी पार्टी’ को तो लोग पुराना फैशन मानते हैं.

नौकरी लगते ही नीलेश ने पहले नई कार का और्डर किया. आखिर फ्लैट से भी पहले कार जरूरी है. जिस के पास कार होगी, उस की ही तो चलेगी.

लोग दूसरे की शानोशौकत से प्रभावित होते हैं. उस के पास अपनी काम की जानकारी कितनी है, इस की किसी को परवाह नहीं है. बैंक बैलैंस हो और आलीशान कोठी हो, तो आप को बोलने की जरूरत नहीं. जिस की खर्च करने की औकात जितनी ज्यादा होगी, वह उतना बड़ा हिट होगा.

किस ने अपने जन्मदिन पर कितनी बड़ी पार्टी दी, इस से उस के रसूख का अंदाजा लगाते हैं लोग. उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं कि आप बैंक में कितना पैसा जमा करते जा रहे हैं. मगर आप की पार्टी करने में दिलचस्पी नहीं है, तो लोगों की आप में दिलचस्पी खत्म होते देर नहीं लगेगी.

एक बेटे ने अपनी नाकामी का ठीकरा मांबाप के सिर पर यह कह कर फोड़ा, ‘‘आप ने तो मुझे कभी ‘पौकेटमनी’ दी नहीं. मैं पैसे खर्च नहीं कर सका, तो मेरे दोस्त नहीं बने. मैं हमेशा अकेला रहा, इसीलिए आज नाकाम हूं.’’

उसी लड़के ने अपनी मां को यह कह कर लताड़ा, ‘‘तुम ने मुझे कभी किसी लड़के के साथ जाने नहीं दिया, दोस्ती करने नहीं दी, पैसे नहीं देती थीं. यहां तक कि मुझे गालियां तक नहीं देने दीं, इसीलिए मैं इंजीनियरिंग नहीं कर सका.’’

आजकल कोई आदर्श नहीं बनना चाहता. सब चाहते हैं कि मांबाप का पैसा खर्च कर अपना स्टैंडर्ड बनाएं. इमेज प्लेबौय की हो. लड़कियों को गिफ्ट दे सकें. दोस्तों को पार्टी दे सकें वगैरह.

होटल, मल्टीप्लैक्स वगैरह के इस जमाने में आप अपने बच्चों को पुराने ढर्रे से आगे नहीं बढ़ा सकते. उन्हें आज की लाइफ स्टाइल से ही कामयाबी मिलती है, इसलिए उन्हें ‘कड़का’ नहीं, बल्कि खर्चे का ‘तड़का’ चाहिए.

हैरान कर देगी ये कहानी : बीवी की जुदाई में जान देते शौहर

मध्य प्रदेश में भोपाल के रातीबड़ इलाके का 24 साला राजू कुशवाहा प्राइवेट स्कूल में टीचर था. इसी साल फरवरी महीने में उस की शादी भोपाल के ही छोला मंदिर इलाके की रहने वाली आस्था नाम की लड़की से हुई थी.

खूबसूरत और पढ़ीलिखी बीवी पा कर राजू बेहद खुश था और आस्था को भी खुश रखने की हरमुमकिन कोशिश करता था.

राजू ने भी शादीशुदा जिंदगी के कई ख्वाब संजो रखे थे, लेकिन ये ख्वाब एक झटके में उस की मौत की वजह भी बन गए.

हुआ यों कि न मालूम किन वजहों के चलते आस्था शादी के कुछ दिन बाद ही मायके चली गई और वापस नहीं आई. राजू ने कई दफा बीवी की बेरुखी की वजह जानने की कोशिश की, पर उस ने कुछ नहीं बताया, तो वह परेशान हो उठा.

अप्रैल महीने की 10 तारीख को राजू घर वालों के कहने पर आस्था को लेने ससुराल पहुंचा, तो भी उस ने साथ जाने से इनकार कर दिया और वजह भी नहीं बताई.

दुखी राजू खाली हाथ घर लौट आया और बीवी के गम में जहर पी लिया. इतना ही नहीं, मरने का जुनून उस के सिर पर इस तरह सवार था कि जहर पीने के बाद उस ने अपने गले में फांसी का फंदा भी लगा लिया.

घर वालों को शक हुआ, तो उन्होंने राजू के कमरे का दरवाजा खटखटाया, पर मरा आदमी भला क्या दरवाजा खोलता, इसलिए घबराए घर वालों ने दरवाजा तोड़ा, तो देखा कि वह फांसी के फंदे पर झूल रहा था. अस्पताल में डाक्टरों ने उस की मौत पर अपनी मुहर लगा दी.

ये करते हैं बीवी से प्यार

राजू जैसे शौहर कितने जज्बाती होते हैं, इस की एक और मिसाल 23 जून, 2017 को मध्य प्रदेश के ही सतना जिले से सामने आई थी, जब 40 साला भगवान सेन ने रेल से कट कर खुदकुशी कर ली थी.

भगवान सेन की तकलीफ यह थी कि कुछ महीने पहले ही उस की बीवी उसे छोड़ कर किसी दूसरे मर्द के साथ रहने लगी थी, जिस से दुखी हो कर उसे अपनी जिंदगी खत्म कर लेना ही बेहतर लगा.

7 जून, 2017 को फैजाबाद के बाबा बाजार के मवई थाना इलाके के गांव दीवाना मजरे भवानीपुर में एक दीवाने रामसूरत ने बीवी के मर जाने पर खुद भी खेत में आम के पेड़ पर फांसी लगा कर अपनी जिंदगी खत्म कर ली.

गांव वालों के मुताबिक, रामसूरत अपनी बीवी को बहुत चाहता था और उस की मौत के बाद गुमसुम रहने लगा था. बच्चा जनने के दौरान हुई बीवी की मौत ने उसे भीतर तक हिला कर रख दिया था.

रामसूरत चाहता तो कुछ दिनों बाद दूसरी शादी कर सकता था, लेकिन बीवी की जगह जो दिल में बन गई थी, उसे किसी और के देने की बात शायद ही उस ने सोची होगी, इसलिए फांसी लगा कर अपना दुख जता दिया.

प्यार और चाहत की ऐसी मिसालें कम ही देखने में आती हैं, जिन में शौहर मरने की हद तक बीवी को चाहता हो. ऐसा ही सोचने के लिए मजबूर कर देने वाला मामला 9 फरवरी, 2017 को बिहार से सामने आया था.

पूर्णिया जिले के गांव रामडेली का लड्डू शर्मा भी अपनी बीवी कोमल पर लट्टू था. राजस्थान की एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले लड्डू शर्मा को कोमल नाम की एक लड़की से मुहब्बत हो गई थी. दोनों ने शादी कर ली, तो जिंदगी मानो जन्नत सी हो गई.

चंद महीने बाद ही कोमल पेट से हो गई, तो लड्डू शर्मा की खुशियों को तो मानो पंख लग गए. पर अकेला लड्डू शर्मा पत्नी की जचगी नहीं करा सकता था, इसलिए उस ने कोमल को रामडेली गांव भेज दिया, जिस से जचगी घर वालों की निगरानी में अच्छे से हो सके.

लेकिन जचगी का वक्त उन दोनों की खुशियों पर ग्रहण बन कर आया. कोमल की मौत हो गई.यह खबर सुन कर लड्डू शर्मा भागाभागा रामडेली गांव पहुंचा. वहां उस ने जहर खा लिया और श्मशान घाट में अपनी जान दे दी, जहां कोमल की लाश जलाई गई थी.

इंदौर, मध्य प्रदेश के 54 साला सोमाजी पटेल ने अपनी बीवी बेबी बाई की मौत के 6 साल बाद फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली थी.

कुलकर्णी का भट्टा इलाके के रहने वाले सोमाजी पटेल अपनी बीवी बेबी बाई की मौत के बाद से ही तनाव में थे और उन की कमी महसूस कर रहे थे. जैसेजैसे वक्त गुजरता गया, वैसेवैसे पत्नी की यादें और ज्यादा बढ़ती गईं. 6 साल तो उन्होंने बेटेबहुओं और नातीपोतों के साथ जैसेतैसे गुजार दिए, पर प्यार को यों ही प्यार नहीं कहा जाता, यह सोमाजी पटेल की खुदकुशी से भी साबित हुआ.

खटकती है कमी

इन कुछ मामलों से साफ महसूस होता है कि बीवी की अहमियत एक शौहर की जिंदगी में क्या होती है. साथ ही, यह भी साबित होता है कि सिर्फ औरतें ही जज्बाती नहीं होतीं, बल्कि कई मामलों में मर्द भी उन से कहीं ज्यादा जज्बाती होते हैं.

आमतौर पर मर्दों के बारे में कहा यह जाता है कि वे बीवी के मरते ही या अलग होते ही दूसरी शादी कर के चैन से गुजरबसर करने लगते हैं. यह बात पूरी तरह सच नहीं है.

दूसरी शादी कर के वही लोग सुखी रह पाते हैं, जो दूसरी बीवी में पहली बीवी देखते हैं और दूसरी बीवी भी उन्हें पहली बीवी सरीखा प्यार और सहारा देती है.

यह भी होता है

बीवी की जुदाई में जान देने वाले या घुटघुट कर जीने वाले जरूरी नहीं है कि बीवी को बहुत प्यार करते हों. कई मामलों में तो बीवी शौहर की चाहत र जज्बात को नजरअंदाज करती रहती है, पर मर्द उसे चाहना नहीं छोड़ पाता. भोपाल का राजू कुशवाहा इस की मिसाल है.

वैसे, बीवी की ज्यादतियों से तंग आ कर भी जान देने वाले शौहरों की तादाद कम नहीं है. 1 जुलाई, 2017 को राजस्थान के जोधपुर में रहने वाले

30 साला इंजीनियर दिनेश मांकड़ ने अपनी बीवी की धमकियों और ज्यादतियों से तंग आ कर खुदकुशी कर ली थी.

शादी के 7 साल तो ठीकठाक गुजरे, पर एकाएक ही बीवी ने गिरगिट की तरह रंग बदला और दिनेश पर घर से अलग रहने का दबाव बनाने लगी. घर वालों से अलग होने की कोई मुकम्मल वजह नहीं थी, इसलिए दिनेश ने बीवी को समझायाबुझाया, जिस का कोई असर नहीं हुआ. उलटे बात न मानने पर वह मायके जा कर रहने लगी.

यह दिनेश जैसे शौहरों के लिए बेहद मुश्किल वक्त होता है, जब बीवी अलग होने की जिद पर अड़ जाती है. ऐसे में शौहर की पहली कोशिश यह होती है कि वह बीवी को समझाए कि उस की भी अपने घर वालों के प्रति कुछ जिम्मेदारियां बनती हैं.

बीवियां जब इस बात से इत्तिफाक नहीं रखतीं, तो वाकई शौहरों की जिंदगी नरक हो जाती है. कई दफा तो लोग उन की मर्दानगी तक पर भी उंगली उठाने लगते हैं.

बीवी मायके में क्यों है? कलेजे पर नश्तर से चुभते इस सवाल का जवाब दुनिया को न केवल शौहर, बल्कि उस के घर वालों के लिए भी दे पाना मुश्किल हो जाता है.

अकसर बीवी के मायके वाले भी आग में घी डालने का काम करते हुए अपनी लड़की की गलती छिपाते हैं कि उसे ससुराल में दहेज के लिए मारापीटा जाता था या दूसरी तरह की तकलीफें दी जाती थीं, इसलिए वह ससुराल नहीं जा रही है.

ऐसे लोगों को यह समझाने वाला कोई नहीं होता कि बात अकेले पेट की नहीं होती, बल्कि शादीशुदा जिंदगी की जिम्मेदारियां व कुछ उसूल भी होते हैं, जिन्हें उन की बेटी ढंग से नहीं निभा पा रही है, इसलिए वापस जाने से कतरा रही है.

कहने का मतलब यह कतई नहीं है कि बीवियों पर जुल्म नहीं होते. उन पर जुल्म होते हैं और कहर भी ससुराल वाले ढाते हैं, पर रिश्तेदारी और समाज में ऐसी बातें छिपी नहीं रहतीं. कौन गलत और कौन सही के फैसले के लिए अदालतें हैं, जिन में तलाक के करोड़ों मुकदमे चल रहे हैं.

यहां यह कहना भी बेमानी है कि आज की औरतें ससुराल के जुल्मोसितम घूंघट ढक कर बरदाश्त कर लेती हैं. रोजाना लाखोें शिकायतें शौहर और उस के घर वालों के खिलाफ दर्ज होती हैं और उन पर कार्यवाही भी होती है.

दिनेश ने अपने सुसाइड नोट में जो बातें लिखीं, उन से जाहिर होता है कि समाज, धर्म और कानून के फंदे में शौहर की हालत अधर में लटके शख्स जैसी हो जाती है. वह इन तीनों चक्रव्यूहों को नहीं भेद पाता, इसलिए खुदकुशी कर लेता है.

दिनेश ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि अगर सरकार और समाज मर्दों के लिए कोई कानून बनाए, तो कुछ बेकुसूरों की जान बच सकती है. हर बार औरत मासूम नहीं होती. वह अकसर औरतों के लिए बने कानून का फायदा उठाती है और अपनी इच्छा पूरी करने के लिए हमदर्दी हासिल करती है.

शौहर को समझें

दिनेश बहुत कम लफ्जों में अपनी तकलीफ और दर्द बयां कर गया, जिसे हर बीवी को समझना चाहिए कि यह शौहर का प्यार ही है, जो सालोंसाल वह उस के घर वापस लौटने का इंतजार करता रहता है. उस के दिल में एक आस होती है कि आज नहीं तो कल बीवी को अक्ल आ जाएगी.

बीवी के मर जाने और मायके जाने की जुदाई में फर्क इतना भर होता है कि पहले मामले में शौहर एकदम नाउम्मीद हो उठता है, जबकि मायके में रह रही बीवी के मामलों में उसे उम्मीद बंधी रहती है.

इसलिए बीवियों को चाहिए कि वे बेवजह छोटीमोटी बातों, खुदगर्जी या सहूलियत के लिए उन शौहरों की परेशानी का सबब न बनें, जो उन्हें प्यार करते हैं. मियांबीवी गृहस्थी की गाड़ी के दो पहिए बेवजह नहीं कहे जाते, इसलिए अपने हिस्से की जिम्मेदारी बीवी को उठानी आनी चाहिए और इस के लिए कुछ समझौते करने हों, तो करने चाहिए. इस से उन्हें अपने शौहर का सौ गुना प्यार मिलेगा.

क्या आप जानते हैं, फिटनैस के लिए क्या करें और क्या नहीं

करीब 50-60 वर्षों पहले तक हम फिटनैस को ले कर इतने फिक्रमंद नहीं थे, जितने कि आज हैं. उस समय लोग खुद को फिट रखने और हैल्दी रखने के लिए वर्कआउट का सहारा नहीं लेते थे. उन का लाइफस्टाइल और काम ही ऐसा होता था जो उन के शरीर को फिट बनाए रखने के लिए काफी था. इमारत बनाने वाले मजदूर, जहाजों पर काम करने वाले, किसान आदि दिनरात मेहनत कर के पसीना बहाते थे, जिस से उन की मसल्स मजबूत बनी रहती थीं. जो लोग घरों में रहते थे, उन की दिनचर्या उन्हें फिट बनाने में मदद करती थी, जैसे साफसफाई, कपड़ों की धुलाई, खाना बनाना और घर व जानवरों की देखरेख के तमाम काम.

उन दिनों तनाव से मुक्त जीवन था और लोग आज की तरह आरामपरस्त नहीं थे. वे अपने काम खुद करते थे. उस जमाने में लोगों को खुद शेपअप करने के लिए जिम आदि का सहारा नहीं लेना पड़ता था. उस समय फिटनैस कोई समस्या नहीं थी और न ही कोई मुद्दा. उन दिनों मीलों चलने की कवायद थी. ट्रेडमिल के बारे में उन दिनों कोई जानता भी नहीं था.

आज समाज और लोगों के लाइफस्टाइल में काफी फर्क आ चुका है. दुनिया की सब से बड़ी समस्या फिटनैस बन चुकी है. वर्कआउट और ऐसी कई शारीरिक गतिविधियां हैं, जिन के जरिए आप अपनी बौडी फिटनैस बनाए रख सकते हैं.

फिटनैस को ले कर क्रेजी हुए यूथ

आजकल फिटनैस को ले कर युवाओं में जागरूकता स्वाभाविक तौर पर आ गई है. इस की एक खास वजह टीवी और फिल्में भी हैं. फिल्मी हीरो और मौडल्स की परफैक्ट बौडी और माचो लुक युवाओं को खूब पसंद आ रहा है. अपने स्टाइल आइकौन की तरह सिक्स पैक ऐब्स और गठीला बदन पाने की चाहत में आज युवा खासी मशक्कत कर रहे हैं.

युवतियां भी हैं फिटनैस की दीवानी

सिर्फ युवक ही नहीं, बल्कि अब युवतियां भी अपनी फिगर को ले कर काफी कौंशस रहती हैं. वे हीरोइनों की फिटनैस और फिगर की देखादेखी खुद भी तरहतरह के फिटनैस फंडे अपना रही हैं.

टीनएज से ही लग रहा यह चस्का

आजकल युवक और युवतियां टीनएज में ही अपने बौडी स्ट्रक्चर पर ध्यान देना शुरू कर देते हैं. जहां युवकों में फिटनैस का लेवल बढ़ाने और मसल्स बनाने का चस्का लग जाता है तो वहीं युवतियां अपने साइज को जीरो करने की कवायद में जुट जाती हैं.

फिटनैस ट्रेनर राजकिशोर का कहना है, ‘‘फिटनैस वर्कआउट किसी अच्छे टे्रनर की निगरानी में ही करें. कोई भी व्यायाम जब जरूरत से ज्यादा कर लिया जाए या फिर अपने बौडी टाइप को पहचाने बिना किया जाए तो वह आप के लिए नुकसानदायक बन सकता है.

फिट रहने के लिए डांस करें

डांस हमारी सभ्यता का अभिन्न अंग है. भारत के हर क्षेत्र में अपने तरीके के नृत्य प्रसिद्ध हैं. ये केवल मनोरंजन के ही नहीं, बल्कि भावनाओं की अभिव्यक्ति भी माने जाते हैं. फिट रहने के लिए आज बहुत से लोग नृत्य का सहारा ले रहे हैं. फिट रहने के ये साधन आप को शरीर के साथ मानसिक तौर पर भी फिट रखते हैं. यदि आप रोजमर्रा के कामों और रोज के वर्कआउट से ऊब चुके हैं तो अपने मनपसंद संगीत को सुन कर थोड़ी देर थिरक लें.

दौड़ना भी है जरूरी

अगर आप को जिम जा कर वर्कआउट करना पसंद नहीं है, तो आप अपने घर के पास ही सुबहशाम दौड़ लगा सकते हैं. दौड़ने से आप के शरीर की अतिरिक्त कैलोरी बर्न होती ही है,  साथ ही, आप चुस्त रहते हैं.

तैराकी और अन्य व्यायाम

तैराकी से भी आप की बौडी को शेप मिलती है और आप फिट रहते हैं. अगर आप बौडी फिटनैस चाहते हैं तो स्विमिंग को अपना शौक बनाइए. बौडी फिटनैस के लिए

आप ऐरोबिक्स ऐक्सरसाइज कीजिए. ऐरोबिक्स ऐक्सरसाइज कैलोरी घटाने और बौडी शेपअप करने में आप की मदद करती हैं.

संगीत के साथ ऐरोबिक्स कर के आप तनाव से भी मुक्ति पाते हैं. हमारे हृदय की रक्त नलिकाओं में चरबी का जमाव होता है. जब यह चरबी नसों में जमा हो जाती है तो हृदय के लिए जाने वाले रक्त का बहाव कम हो जाता है व रक्तचाप और तेजी से बढ़ने लगता है. इसलिए खुद को फिट रखने के लिए रोजाना व्यायाम अवश्य करना चाहिए.

जोगिंग और साइक्लिंग

दिन में कम से कम 30 मिनट तक रोज पैदल चलें. इस से ब्लडप्रैशर नियंत्रित रहता है. रोज पैदल चलने से हृदय में खून का संचार सुचारु रूप से होता है एवं शरीर चुस्तदुरुस्त रहता है. इस के अलावा जौगिंग और साइक्लिंग से आप के पैरों को मजबूती मिलती है. इन दोनों ही कार्यों में आप के पूरे शरीर की मूवमैंट होती है, जो किसी व्यायाम से कम नहीं है.

वर्कआउट

वर्कआउट और पावर बेस्ड ऐक्सरसाइज

से पसीना ज्यादा निकलता है. इस से तन और मन दोनों हलके होते हैं. मन की कुंठा भी निकल जाती है. वर्कआउट करने से पहले जरूरी होता है वार्मअप. इस के बाद कुछ स्ट्रैचिंग ऐक्सरसाइज करें. हर ऐक्सरसाइज के 20-20 सैट करें. इस के बाद 20 मिनट की कार्डियो करें. कार्डियो में किसी एक बौडी पार्ट, जैसे बाइसैप्स को ले कर उस की ऐक्सरसाइज करें. उस के बाद ऐब्स पर काम करें. फिर कूल डाउन के लिए स्ट्रैचिंग ऐक्सरसाइज करें. इस बार हर स्ट्रैचिंग ऐक्सरसाइज को 10 सैकंड के लिए

होल्ड करें.

अपने बौडी टाइप के अनुसार ही कार्डियो करें, जैसे आप मोटे हैं तो वेट ट्रेनिंग करें. कार्डियो में पूरी बौडी की एकसाथ ऐक्सरसाइज करें. अगर आप की बौडी टाइप लीन यानी पतली है तो एकएक बौडी पार्ट का कार्डियो करें और एक सैट से दूसरे सैट में जाने के लिए कम से कम 1 मिनट का आराम लें.

आराम और मनोरंजन

शरीर को रिलैक्स करने का टाइम अवश्य निकालें. स्वस्थ जीवन के लिए तन और मन दोनों का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है. अपने औफिस की थकान और भागदौड़ के काम से खुद को कुछ देर अवश्य रिलैक्स करें. इस के लिए आप संगीत या फिर अपनी किसी मनपसंद हौबी को अपनाएं. कोशिश करें कि आप की हौबी ऐसी हो जो आप के शरीर के लिए फायदेमंद हो, जैसे आप कोई खेल, डांस आदि को खाली वक्त में रिलैक्स करने के लिए इस्तेमाल करें.

संतुलित आहार

फिट रहने के लिए न्यूट्रिशियस डाइट लें. वर्कआउट करने वाले लोगों को खासतौर पर प्रोटीन कौंप्लैक्स कार्बोहाइड्रैट युक्त लेना चाहिए.

आजकल के खाने से प्रोटीन पूरी मात्रा में हमारे शरीर में नहीं जा पाता. प्रोटीन की पूर्ति के लिए आप प्रोटीन पाउडर भी ले सकते हैं, लेकिन इस के सेवन के साथ आप को ऐक्स्ट्रा वर्कआउट करने की जरूरत होती है. दरअसल, प्रोटीन वाली चीजें पचाने के लिए शरीर को अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिस से अधिक कैलोरी खर्च होती है.

हैल्दी लाइफस्टाइल और फिटनैस को ले कर आज हर कोई क्रेजी है, लेकिन गरमी में पसीने और थकान के कारण लोग ऐक्सरसाइज आदि पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते. ऐसे में फिट रहने के लिए वसामुक्त संतुलित आहार स्वास्थ्य के लिए बेहतर रहता है.

हरी पत्तेदार सब्जियां

गरमी में पालक, ब्रोकली आसानी से मिल जाता है. इन में फाइबर के साथ विटामिन सी, के और फौलिक एसिड होता है. ये शरीर में कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन और पोटैशियम की जरूरत को भी पूरा करते हैं.

साबुत अनाज

साबुत अनाजों में अधिकतर फाइबर, विटामिन और जरूरी पोषकतत्त्व होते हैं. गेहूं की रोटी, साबुत अनाज का पास्ता और ब्राउन राइस खाने से वजन भी नहीं बढ़ता है और इन में पोषकतत्त्व भी अधिक होते हैं.

सूखे मेवे

सूखे मेवों को अपने आहार में शामिल करें. सूखे मेवों में प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है. हालांकि इन में फैट भी उच्च मात्रा में होता है, लेकिन ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं होते. एक सप्ताह में लगभग 15-20 बादाम, काजू, अखरोट आदि का सेवन अवश्य करें.

दही

कम वसायुक्त सादा दही विटामिन, प्रोटीन और कैल्शियम का बहुत अच्छा स्रोत होता है. दही के बैक्टीरिया आप के जिस्म में रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं. नतीजतन, आप तमाम रोगों से दूर रहते हैं.

डाइटिंग से रहें दूर

अब युवतियां भी फिटनैस की दौड़ में युवकों के कदम से कदम मिला रही हैं. आम युवतियां भी खुद को स्लिमट्रिम बनाना चाहती हैं, लेकिन सही गाइडैंस न मिल पाने के कारण वे ऐक्सट्रा वर्कआउट और डाइटिंग का सहारा लेती हैं. अल्ट्रा स्लिम बनने के लिए युवतियां खुद को पागलपन की हद तक भूखा रखने और हद से ज्यादा डाइटिंग का सहारा ले कर अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ करने से भी नहीं चूकतीं.

फिटनैस के नाम पर सेहत से न करें खिलवाड़

अगर आप बौडी फिटनैस के लिए वेट लिफ्टिंग को जरिया बनाने की सोच रहे हैं, तो इस से जुड़े बुनियादी नियमों और प्रशिक्षणों को नजरअंदाज करने की भूल न करें.

वेट लिफ्ंिटग को सही तकनीक से न करने पर मांसपेशियों, नसों, तंतु (लिगामैंट) और रीढ़ की हड्डी में भी चोट आने का खतरा हो सकता है. इस वर्कआउट में छोटी से छोटी गलती भी बड़ी भूल में बदल सकती है.

वेट लिफ्ंिटग एक ऐसा व्यायाम है, जिसे किसी ट्रेनर की देखरेख में करना चाहिए या इस की तकनीक का सही ज्ञान होने पर ही इसे करना चाहिए. वेट लिफ्ंिटग करते वक्त गलत तकनीक पर चलना जोड़ों पर असामान्य दबाव और मुलायम हड्डियों के लिए मुसीबत बन सकता है. ज्यादातर पीठ के निचले हिस्से में चोट लगने का खतरा सब से अधिक होता है.

वजन उठाने से जुड़ी ट्रेनिंग में यदि चूक होती है, तो आप सर्वाइकल या लुंबर डिस्क हर्निएशन (स्लिप्ड डिस्क) का शिकार हो सकते हैं.

इस बारे में डाक्टरों का मानना है कि वेट लिफ्ंिटग में यह जरूरी नहीं कि व्यायाम ज्यादा किया जाए, जरूरी यह है कि उसे ठीक तरह से किया जाए. भारी व्यायाम के दौरान कम से कम 3 दिनों का आराम अवश्य करना चाहिए. वेट लिफ्ंिटग करने से पहले यह बहुत जरूरी है कि वार्मअप और स्ट्रैचिंग की जाए.

फिटनैस क्रेजी फिल्मी कलाकारों की सेहत का राज जानिए

आजकल बौलीवुड कलाकार फिटनैस पर जोर देने लगे हैं. सभी कलाकारों को अपने शरीर को सुडौल व चुस्तदुरुस्त बनाए रखने की चिंता रहती है. इसी के चलते ज्यादातर कलाकारों ने अपनेअपने घरों में ही जिम बना रखा है. तो कुछ कलाकार मशहूर ट्रेनरों से ट्रेनिंग लेते हैं और उन के जिम का इस्तेमाल करते हैं. स्वस्थ व चुस्तदुरुस्त बने रहने के लिए कलाकारों को किस तरह के पापड़ बेलने पड़ते हैं, यह बात कलाकारों से अधिक कोई नहीं समझ सकता. आइए, जानते हैं यह बात इन्हीं की जबानी.

‘‘अंदर फिट तो बाहर हिट’’

– शिल्पा शेट्टी

फिटनैस आइकौन शिल्पा शेट्टी कहती हैं,‘‘मैं मानती हूं कि फिटनैस से आप खूबसूरत लगने लगते हैं, लेकिन स्किन तभी ज्यादा ग्लो करेगी जब आप अंदर से भी स्वस्थ रहेंगे. यह तभी मुमकिन है जब आप व्यायाम करने के साथसाथ अपना खानपान भी सही रखेंगे. समय की कमी सभी को है, लेकिन इस का मतलब यह नहीं कि कभी भी कुछ भी, खा लें. न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह लें. बेशक, इंटरनैट पर बहुत जानकारी होती है लेकिन यह बहुत कन्फ्यूज वाली होती है. कहीं लिखा होगा कि यह चीज खाने से फायदा होगा, तो दूसरी जगह उसी चीज को खाने के नुकसान गिनाए गए होंगे. इस से लोग कन्फ्यूज्ड हो जाते हैं. इसी को ध्यान में रख कर मैं ने हैल्थ पर एक किताब भी लिखी है.

‘‘बेटे बियान के जन्म के बाद मेरा वजन 32 किलोग्राम बढ़ गया था. बच्चे के लिए डाइट पर ज्यादा कंट्रोल नहीं रख सकती थी, इसलिए मैं ने ऐक्सरसाइज के जरिए अपने वजन को घटाया.  सुबह गरम पानी में नीबू व शहद रैगुलर लिया. हैल्दी डाइट रखी. डिनर टाइम 8 बजे से पहले का रखा.

‘‘शरीर को मेंटेन रखने के लिए 70 फीसदी हैल्दी डाइट लेना और 30 फीसदी ऐक्टिविटी या ऐक्सरसाइज करना जरूरी है.’’

‘‘ट्रेनर की राय ले कर ही वर्कआउट करना चाहिए’’

-जौन अब्राहम

जौन अब्राहम बौलीवुड के उन कलाकारों में से हैं जो कि अपनी फिटनैस के लिए हमेशा चर्चा में बने रहते हैं. जौन अब्राहम फिटनैस से कोई समझौता नहीं करते. उन के लिए स्वस्थ शरीर बहुत माने रखता है. वे हर दिन वर्कआउट करते हैं.

जौन का मानना है,‘‘स्वस्थ शरीर के लिए 3 चीजें महत्त्वपूर्ण होती हैं: अच्छा भोजन, अच्छी नींद और अच्छा वर्कआउट. वर्कआउट शुरू करने से पहले हर इंसान को अपने शरीर के बारे में जानना चाहिए. हर इंसान का शरीर अलगअलग होता है. मेरी राय में इंसान को ट्रेनर की राय ले कर ही वर्कआउट करना चाहिए. दूसरी बात एक स्वस्थ इंसान को कम से कम 6 से 8 घंटे सुकून की नींद लेनी चाहिए. ज्यादा देर तक जागना ठीक नहीं होता. नींद के समय शरीर खुद की रिपेयरिंग करता है. हमें यह याद रखना चाहिए कि मसल्स सिर्फ जिम में वर्कआउट करने से नहीं बनतीं. जिम करने के बाद जब आप आराम कर रहे होते हैं, तब मसल्स बनती हैं.’’

जौन अब्राहम आगे कहते हैं,‘‘जो लोग नियमित रूप से वर्कआउट करते हैं, उन्हें हर दिन वर्कआउट करने के बाद पौष्टिक आहार का सेवन जरूर करना चाहिए. अच्छे व पौष्टिक आहार से मेरा संबंध महंगे खाद्य पदार्थ से नहीं है. मैं नमक, शक्कर, तेल, घी सबकुछ खाता हूं, पर एक सही अनुपात में. कुछ लोग वजन कम करने या अन्य वजहों से चावल, आलू, ब्रैड व पास्ता खाने से परहेज करते हैं. मेरी राय में इन सभी पदार्थों का सेवन किया जाना चाहिए. मैं दोपहर के भोजन में रोटी, दाल व सब्जी, दही, 3-4 मछली पीस और गाजर का सलाद लेता हूं. फिर शाम के नाश्ते में 3-4 सफेद अंडे के अलावा सेब, अनार और पपीता लेता हूं. उस के बाद रात्रि के भोजन में बाजरा, ज्वार या चने की रोटी को प्रधानता देता हूं.’’

‘‘सप्ताह में 5 दिन जिम जाती हूं’’

-कंगना रानौत

कंगना रानौत खुद को चुस्तदुरुस्त रखने के लिए फिटनैस पर काफी ध्यान देती हैं. वे कहती हैं, ‘‘सफल अभिनेत्री बनी रहने के लिए अपने शरीर को भी चुस्तदुरुस्त व सुडौल रखना जरूरी होता है. इसलिए मैं फिटनैस ट्रेनर लीना मोगरे से फिटनैस की ट्रेनिंग लेती रहती हूं. मैं सप्ताह में 5 दिन 1 या 2 घंटे के लिए जिम जाती हूं. जिम के अंदर जाने के बाद मैं स्क्वाट्स, पुलअप्स, पुशअप्स, एब्स वर्कआउट, लोअर बैक ऐक्सरसाइज कार्डियो वर्कआउट करती हूं. स्टेमिना बढ़ाने की भी ट्रेनिंग ली है. डांस करना भी एक ऐक्सरसाइज है.’’

‘‘खाने में हर चीज सही अनुपात में लें’’

-विद्युत जामवाल

विद्युत जामवाल कहते हैं, ‘‘लोग सलाह देते हैं कि फलां बीमारी है तो नमक खाना बंद कर दो, कार्बोहाइडै्रट बंद कर दो या ज्यादा पानी पीना बंद कर दो वगैरा. मैं शरीर को हर चीज की जरूरत होती है. आप हर चीज सही अनुपात में लेंगे तो कभी दिक्कत नहीं आएगी.’’

विद्युत आगे कहते हैं, ‘‘मैं बचपन से ही कलारी पयट्टू नामक मार्शल आर्ट करता आ रहा हूं. इसी से मैं फिट रहता हूं. शरीर सुडौल रहता है. मैं सैल्फ डिफैंस को ले कर तमाम कोर्स करता रहता हूं. बहुत से लोगों को सिखाता रहता हूं.’’

‘‘मार्शल आर्ट ने बनाया मुझे फिट’’

-टाइगर श्रौफ

बौलीवुड में इन दिनों फिटनैस की चर्चा चलने पर टाइगर श्रौफ के फिटनैस की जरूर चर्चा होती है. टाइगर श्रौफ के चुस्तदुरुस्त व सुडौल शरीर की वजहें डांस व मार्शल आर्ट हैं. वे हर दिन कई घंटे मार्शल आर्ट और डांस को देते हैं. वे अपने शरीर को रबड़ की तरह मोड़ सकते हैं.

टाइगर श्रौफ कहते हैं, ‘‘हाल ही में मैं ने फिटविट नामक नया फिटनैस गैजेट खरीदा है. यह एक वायरलैस डिवाइस है. जिसे मैं घड़ी व कलाई बैंड की तरह हाथ में पहनता हूं. इस से मैं ने कितने घंटे नींद ली, कितनी सीढि़यां चढ़ीं, कितने किलोमीटर पैदल चला. ये सारे आंकड़े रिकौर्ड होते रहते हैं.’’

‘‘सुबह उठ कर चेहरे पर बर्फ लगाती हूं.’’

-आलिया भट्ट

चुलबुली गर्ल आलिया कहती हैं, ‘‘सुबह जल्दी उठ कर हर दिन वर्कआउट करती हूं. चेहरे की खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए सुबह उठ कर चेहरे पर बर्फ लगाती हूं. हर्बल वाइप्स से मेकअप साफ करती हूं.’’

‘‘घर के खाने को वरीयता देता हूं’’

-अक्षय कुमार

48 साल की उम्र में भी सदैव चुस्त दुरुस्त नजर आते अक्षय कुमार बताते हैं,‘‘जिम जाता हूं. वर्कआउट करता हूं. हर दिन सुबह साढ़े 4 बजे सो कर उठता हूं और बीच पर टहलने निकल जाता हूं. 1 घंटे मार्शल आर्ट, किक बौक्ंिसग और शैडो बौक्ंिसग करता हूं. समय मिलने पर स्विमिंग भी करता हूं. सप्ताह में कम से कम 3 दिन बास्केटबौल खेलता हूं. मैं सिर्फ मसल्स बनाने में यकीन नहीं रखता बल्कि अपने पूरे शरीर को चुस्तदुरुस्त व तंदुरुस्त रखने में यकीन रखता हूं.’’

वे आगे कहते हैं,‘‘पर कसरत की वजह से लोगों को दूसरी तकलीफें झेलनी पड़ती है, जिस की कई वजहें होती हैं. वास्तव में ट्रेनर की सलाह लेनी चाहिए. दूसरी बात स्टेराइड चीजें या पाउडर का सेवन नहीं करना चाहिए. आप दिनभर चाहे जो खाएं, पर शाम के साढ़े 6 बजे तक वह पच जाए. घी भी खाना चाहिए. असली घी हड्डियों के लिए और जौइंट्स के लिए बहुत उपयोगी है. घी खाने के बाद कसरत नहीं करेंगे, वाकिंग नहीं होगी, मेहनत नहीं करेंगे, तो मोटापा बढ़ना स्वाभाविक है.’’

ग्रीन टी पीने पर जोर देते हुए अक्षय कहते हैं,‘‘बाहर के भोजन के बजाय घर का भोजन ज्यादा स्वादिष्ठ होता है, इसलिए मैं घर के भोजन को प्रधानता देता हूं. ग्रीन टी पीता हूं.’’

‘‘60 दिनों में बन सकते हैं 6 पैक्स’’

-अजय देवगन

अजय देवगन वर्कआउट को अपने काम का हिस्सा बताते हुए कहते हैं, ‘‘मैं हरदिन 1 घंटा 15 मिनट तक वजन उठाने की कसरत करता हूं. उस के बाद कार्डियो करता हूं. खानपान पर नियंत्रण के साथ कार्डियो व अन्य कसरत कर के कोई भी इंसान 60 दिनों में सिक्सपैक बना सकता है.’’

‘‘फिट रहने के लिए खेलना जरूरी’’

-दीपिका पादुकोण

बौलीवुड की सफलतम व हौट अदाकारा दीपिका पादुकोण कहती हैं,‘‘मैं हर दिन सुबह कसरत करने के लिए समय निकालती हूं. मैं एअरकंडीशंड रूम में बैठ कर कसरत करने में यकीन कम रखती हूं.

‘‘मैं तो हर इंसान से कहूंगी कि उन्हें स्पौर्ट्स में रुचि रखनी चाहिए. किसी न किसी खेल को खेलना चाहिए. यदि आप चाहते हैं कि आप के शरीर की हर मसल्स काम करे, तो स्पौर्ट्स से बेहतरीन कोई चीज नहीं हो सकती. यही वजह है कि मैं आज भी बैडमिंटन खेलती हूं.’’

‘‘तेजी से वजन कम करना नुकसानदायक होता है’’

-जैकलीन फर्नांडिस

श्रीलंकन ब्यूटी व बौलीवुड अदाकारा जैकलीन फर्नांडिस कहती हैं, ‘‘खुद को तंदुरुस्त बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम व जिम जा कर वर्कआउट करती हूं. मैं रोज सुबह 6 बजे उठ कर चाय पीती हुई अखबार पढ़ती हूं. फिर 1 घंटे घर पर ही कसरत करती हूं. जब मैं जिम जाती हूं, तो वहां वेट लिफ्टिंग पर ज्यादा ध्यान देती हूं ताकि मेरे पैर ज्यादा मजबूत बने रहें.

‘‘तेजी से वजन कम करना हमेशा नुकसानदायक होता है. वजन कम करने के बजाय हमें अपने शरीर को सुडौल बनाना चाहिए.’’

‘‘8 बजे रात के बाद भोजन नहीं करती.’’

-श्रद्धा कपूर

युवा दिलों की धड़कन श्रद्धा कपूर कहती हैं,‘‘मैं रात 8 बजे के बाद भोजन नहीं करती. मैं फाइबर व प्रोटीन युक्त भोजन ही करती हूं.’’

‘‘सुबह पानी में शहद मिला कर पीती हूं’’

-रवीना टंडन थडानी

रवीना टंडन स्विमिंग को प्रधानता देती हैं. कहती हैं, ‘‘मैं हमेशा खुद को स्वस्थ, चुस्तदुरुस्त व तंदुरुस्त रखने का प्रयास करती हूं. मैं लंबे समय तक एक ही तरह का वर्कआउट नहीं करती.

बौडी फिट रखने के लिए जुंबा डांस भी करती हूं. मुझे लगता है कि अब तक मैं हर तरह के वर्कआउट का प्रयोग कर चुकी हूं. सुबह वाकिंग करना कभी नहीं भूलती. सुबह पानी में शहद मिला कर पीती हूं. स्किपिंग करने के अलावा साइकिल चलाती हूं.’’

‘‘सुबह उठ कर 4 गिलास पानी पीती हूं.’’

-कैटरीना कैफ

कैटरीना कैफ कहती हैं,‘‘मैं हर दिन सुबह उठ कर 4 गिलास पानी पीती हूं. हर दिन जौगिंग और स्वीमिंग करती हूं. उबली सब्जी ज्यादा खाती हूं. फलों का सेवन करती हूं.’’

‘‘खानपान में अति नहीं होनी चाहिए.’’

-तमन्ना भाटिया

तमन्ना भाटिया का कहना है, ‘‘मेरा मानना है कि खानपान में अति नहीं होनी चाहिए. हम जो भी चीज ज्यादा खाएंगे, वह नुकसान करेगी. यहां तक कि ज्यादा पानी पीना भी नुकसानदेह होता है.’’

पासवर्ड जानकर भी कोई नहीं खोल पाएगा आपका फोन

स्मार्टफोन को सुरक्षित रखने के लिए आजकल हर कोई पासवर्ड या फिंगरप्रिंट लौक लगाकर रखता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार आपका पासवर्ड आपकी लापरवाही के कारण भी चोरी हो सकता है. कई बार हम अपने दोस्त या अन्य व्यक्ति के सामने अपना फोन अनलौक करते हैं तो उसे आपका पासवर्ड पता चल जाता है.

इसके बाद आपका दोस्त या दूसरा व्यक्ति आपकी निजी जानकारी को एक्सेस करने की कोशिश कर सकता है. इस स्थिति से बचने के लिए हम आपको एक ट्रिक बताने जा रहे हैं जिससे अगर कोई आपका पासवर्ड जान भी जाता है तो वो आपके फोन की जानकारी एक्सेस नहीं कर पाएगा.

एप करेगी मदद

इस काम में आपकी मदद Screen Lock- Time Password एप कर सकती है. इसके जरिए अगर आपका पासवर्ड कोई देख भी लेता है तो उसे कोई क्रैक नहीं कर पाएगा. इसका इंटरफेस काफी आसान है.

कैसे करती है काम

इसके लिए सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर से आपको Screen Lock- Time Password एप डाउनलोड करनी होगी.

सबसे पहले आपको Change Security Setting पर क्लिक करना होगा. यहां से आप पासवर्ड का कोई भी पैटर्न चुन सकते हैं.

इसके बाद आपको Disable System Lock के तहत पासवर्ड के औप्शन दिए गए होंगे. यहां से आप पासवर्ड का फौर्मेट सेलेक्ट कर सकते हैं.

ध्यान रहे अगर आपने करंट टाइम सेलेक्ट किया है तो आपके मोबाइल का करंट टाइम ही आपका पासवर्ड होगा. जैसे जैसे टाइम चेंज होता रहेगा. वैसे वैसे पासवर्ड भी बदलता रहेगा.

इसके बाद आपको Enable recovery passcode पर क्लिक करना होगा. यहां आपको रिकवरी पासवर्ड एंटर करना है. अगर आप पासवर्ड भूल जाते हैं तो यह पासवर्ड काम आएगा.

इसके बाद enable lock screen पर क्लिक कर दें.

ऐसा करने से आपके फोन में लौक लग जाएगा और करंट टाइम डालकर ही उसे खोला जा सकेगा. इससे किसी को भी आपका पासवर्ड पता नहीं चलेगा.

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