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क्या है असुरक्षित गर्भपात, जानने के लिए ये खबर जरूर पढ़ें

किसी भी महिला के जीवन में गर्भपात भावनात्मक रूप से बहुत व्यथित करने वाली घड़ी होती है. इस से जहां एक तरफ वह गर्भपात के कारण मानसिक तौर पर दुखी होती है, वहीं दूसरी तरफ शारीरिक स्तर पर भी उसे पीड़ा झेलनी पड़ती है. दोनों ही हालात में स्थिति चिंताजनक होती है. हालात तब और संजीदा हो जाते हैं जब गर्भपात असुरक्षित तौर पर करवाया गया हो.

ज्यादातर महिलाओं को असुरक्षित गर्भपात के बारे में कोई जानकारी नहीं होती. यहां तक कि उन्हें गर्भपात के बाद होने वाली दिक्कतों का भी पता नहीं होता. गर्भपात प्रसव के समय होने वाले दर्द से कम पीड़ादायक नहीं होता और अगर यह असुरक्षित स्तर पर और किसी नौसिखिए से करवाया गया है तब तो चिंता और बढ़ जाती है.

असुरक्षित गर्भपात वह है, जो किसी अप्रशिक्षित व्यक्ति से करवाया जाता है. उस के पास न तो कोई डिगरी होती है और न ही अनुभव. कानूनी तौर पर भी ऐसा व्यक्ति गर्भपात करने का अधिकार नहीं रखता है. असुरक्षित गर्भपात से दर्द, संक्रमण, संतानहीनता जैसी जटिलताएं पनप सकती हैं. यहां तक कि मौत भी हो सकती है.

1971 में एनटीपी ऐक्ट (गर्भ समाप्ति कानून 1971) को कुछ खास मामलों में मान्यता दी गई. वह भी तब जब महिला या बच्चे के स्वास्थ्य अथवा जान को खतरा हो. परिवार नियोजन की विफलता और बलात्कार के कारण गर्भ होने की स्थिति में भी गर्भपात की इजाजत है. इन निर्धारित सीमाओं के बाहर गर्भपात करवाना अवैध माना जाता है. असुरक्षित गर्भपात का असर महिला के स्वास्थ्य पर पड़ता है और 2 सप्ताह के बाद भी उस के पेट में असहनीय दर्द, बुखार, योनि से रक्त या दुर्गंधयुक्त स्राव जारी रह सकता है.

गर्भपात के कुछ कारण

अकसर कुछ कारणों से गर्भपात की नौबत आती है. फिर चाहे महिला का जीवन बचाने के लिए गर्भपात करवाना जरूरी हो गया हो या गर्भ में पल रहा बच्चा किसी विकार से पीडि़त हो. ऐसे हालात में गर्भपात ही अंतिम उपाय रह जाता है. अकसर बेटे की चाह भी गर्भपात का कारण बनती है. ग्रामीण इलाकों और कुछ अशिक्षित लोगों द्वारा संकोचवश या सस्ते में छूटने की वजह से भी असुरक्षित गर्भपात का सहारा लिया जाता है और इसे आसपास की कोई अप्रशिक्षित महिला या झोलाछाप डाक्टर कम रुपयों में और अकसर घर पर ही कर देता है.

पिछड़े क्षेत्रों में आज भी ज्यादातर गर्भपात इसी तरह के लोग कर रहे हैं, जो किसी अस्पताल या नर्सिंगहोम में कंपाउंडर होते हैं या मरीज की देखरेख आदि का काम करते हैं. यही वजह है कि असुरक्षित गर्भपात के मामले बढ़ते जा रहे हैं.

गर्भवती महिलाओं में से 15% के मामले में कोई न कोई जटिलता उभरने की आशंका रहती है. भारत में दोतिहाई मातृ मृत्यु दर यानी गर्भपात या प्रसव के दौरान होने वाली मृत्यु बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में होती है. यह तथ्य भी चौंकाने वाला है कि

देश में ऐनीमिया और कुपोषण के बाद महिलाओं की मौत का सब से बड़ा कारण असुरक्षित गर्भपात बन रहा है.

गंभीर स्थिति

विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2012 की रिपोर्ट के मुताबिक गांवों में 60 फीसदी महिलाएं दाइयों पर निर्भर हैं. स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण हर साल देश में प्रसव के दौरान 78 हजार महिलाओं की मृत्यु हो जाती है.

गर्भपात करवाना जानलेवा हो सकता है यदि:

अप्रशिक्षित व अनुभवहीन डाक्टर के द्वारा और मान्यताप्राप्त, लाइसैंसशुदा मैटरनिटी होम में न करवाया गया हो.

गंदे या रोशनी व हवा रहित कमरे में और कीटाणुयुक्त उपकरणों के जरीए करवाय गया हो.

12 सप्ताह के भीतर न किया गया हो.

इस के अलावा भी कुछ घरेलू तरीके भ्रूण को समाप्त करने के लिए अपनाए जाते हैं. जैसे दादीमांओं के नुसखों या सुनीसुनाई बातों के आधार पर कुछ विशेष पेड़पौधों का रस योनि में डालना, कोई तार या ठोस वस्तु योनि में डाल कर भ्रूण को समाप्त करने की चेष्टा करना आदि.

असुरक्षित गर्भपात में गर्भपात के

2 सप्ताह बाद भी पेट में असहनीय दर्द, बुखार, योनि से रक्त या दुर्गंधयुक्त स्राव जारी रह सकता है. यह खतरनाक स्थिति है. हो सकता है कि गर्भपात अपूर्ण हुआ हो और गर्भाशय के भीतर भ्रूण का कोई अंश रह गया हो. इन हालात में जान जाने का खतरा भी बढ़ जाता है.

सुरक्षित गर्भपात

1 माह तक के गर्भ को दवा दे कर समाप्त किया जाता है, क्योंकि यह भ्रूण की शुरुआत होती है, इसलिए यह दवा से भी खत्म हो जाता है, लेकिन इस से अधिक समय के गर्भ की समाप्ति अबौर्शन से ही की जाती है जो कि उपकरणों के माध्यम से होता है.

सुरक्षित गर्भपात वैक्यूम ऐस्पिरेशन विधि से होता है. इस में योग्य डाक्टर द्वारा विशेष प्रकार की ट्यूब योनि के रास्ते गर्भाशय में डाल कर भ्रूण को बाहर खींच लिया जाता है. यह एक सरल और सुरक्षित तरीका है. डाइलेशन और क्यूरेटाज यह खुरच कर गर्भपात का तरीका है. गर्भ के बचेखुचे हिस्से को क्यूरेटर के जरीए निकाल दिया जाता है. क्यूरेटर चम्मच के आकार का एक उपकरण होता है.

दिल्ली की एक घनी बस्ती की 35 वर्षीय आसमां 5वीं पास है. 10 वर्षों से अपने क्षेत्र की महिलाओं का गर्भपात कर रही है. पहले वह किसी मैटरनिटी होम में मरीजों की देखरेख और इंजैक्शन लगाने का काम करती थी. जब काम छोड़ा तो घर पर ही गर्भपात करने को आमदनी का रास्ता बना लिया. वह कहती है, ‘‘अब तक बहुत गर्भपात किए हैं और कोई भी गलत नहीं हुआ. हालांकि कई दिनों तक हलकीहलकी ब्लीडिंग या दर्द की शिकायत कुछ महिलाओं को हुई, लेकिन सब कुछ ठीक रहा.’’

आसमां क्यूरेटर के जरीए गर्भपात करती है. वह दर्द का इंजैक्शन व दवा भी देती है.

असुरक्षित गर्भपात करवा चुकी नौरीन का कहना है, ‘‘मैं ने एक दाई से गर्भपात के लिए एक दवा ली थी. दवा खाने के बाद कई दिनों तक हलकी ब्लीडिंग और पेट में दर्द हुआ. उस के बाद करीब 1 साल तक कभीकभार दर्द की समस्या रही, लेकिन अब वह ठीक है.’’

वहीं अनीता बताती हैं, ‘‘मैं कई बार दाई से गर्भपात करवा चुकी हूं, लेकिन ठीक हूं.’’

डा. अनुराधा खुराना, लाजपत नगर, दिल्ली, कहती हैं, ‘‘एक अनुभवी डाक्टर कई वर्ष पढ़ाई करने के बाद गर्भपात करता है, जबकि अप्रशिक्षित महिलाएं महज दवाओं, इंजैक्शनों के नामों को जानती हैं. उन के पास अनुभव भी हो सकता है, लेकिन गर्भपात के दौरान जो जटिलताएं आती हैं उन्हें एक विशेषज्ञ ही संभाल सकता है. क्यूरेटर आदि उपकरणों का इस्तेमाल अगर अप्रशिक्षित दाई कर रही है, तो उस के हाथ से गर्भाशय को हानि पहुंचने और उस के फटने की आशंका बढ़ जाती है.

जब यही हानि किसी विशेषज्ञ से हो जाती है, तो वह उस स्थिति को काबू करने में प्रशिक्षित होता है और मरीज की जान को खतरा नहीं रहता.’’

इस भारतीय खिलाड़ी की असल कहानी क्या आपको मालूम है

ऋषभ पंत भले आज तक दो ही अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले हों मगर आईपीएल के जरिए क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ने वाले इस खिलाड़ी की तुलना आज महेंद्र सिंह धोनी से होती है. दिल्ली डेयरडेविल्स की ओर से खेलने वाले पंत ने 24 आईपीएल मैचों में 2 बार नाबाद रहते हुए 151.21 की स्ट्राइक के साथ 564 रन बनाए हैं. इस दौरान उन्होंने सर्वश्रेष्ठ 97 रन समेत 3 अर्धशतक भी जड़े हैं. मगर क्या आप जानते हैं कि इस खिलाड़ी ने अपने शुरुआती दिनों में बेहद स्ट्रगल किया है. आलम ये था कि कभी इस क्रिकेटर के पास खाने तक को पैसे नहीं हुआ करते थे.

रुड़की में रहने वाला पंत का परिवार उन्‍हें दिल्‍ली क्रिकेट की टौप एकेडमी में भर्ती कराना चाहता था. ऋषभ के कोच देवेंद्र शर्मा के मुताबिक, 6-7 साल पहले एक कैंप में पंत के पिता ने दोनों को मिलाया था. पंत को दिल्‍ली में कोचिंग लेनी थी, इसलिए वह अपनी मां के साथ राजधानी आ गए. मगर उनके पास रहने की कोई जगह नहीं थी और ना ही खर्च करने को ज्यादा पैसे. इसलिए मोती बाग गुरुद्वारा में मां-बेटे रहते थे.

बेटा जहां पिता के सपनों को पूरा करने में जी-जान से जुटा था, वहीं मां गुरुद्वारे में सेवा किया करती थी. उसी दौर में पंत ने एक अंडर-12 टूर्नामेंट में तीन शानदार शतक जड़े और प्‍लेयर औफ द टूर्नामेंट का खिताब हासिल किया. इसके बाद जल्‍द ही उन्‍हें दिल्‍ली कैंट के एयरफोर्स स्‍कूल में दाखिला मिल गया. फिर ऋ‍षभ ने पीछे मुछ़कर नहीं देखा. अंडर-19 वर्ल्‍ड कप 2016 में नेपाल के खिलाफ 18 गेंदों में हाफ सेंचुरी जड़कर नया रिकौर्ड बना दिया था.

इसी टूर्नामेंट में पंत ने नामीबिया के खिलाफ शतक जड़कर टीम इंडिया को सेमीफाइनल में पहुंचने में मदद की. उसी दिन इंडियन प्रीमियर लीग में पंत को दिल्‍ली डेयरडेविल्‍स ने 1.9 करोड़ रुपए में खरीदा. बेहद आक्रामक अंदाज में बल्‍लेबाजी करने वाले ऋषभ 2016-17 क्रिकेट सत्र में झारखंड के खिलाफ 48 गेंदों में शतक जड़कर तहलका मचा दिया था. उन्‍होंने रणजी ट्रौफी में महाराष्‍ट्र के खिलाफ तिहरा शतक भी जड़ा था. पंत ने 10 प्रथम श्रेणी मैचों की 16 पारियों में 1080 रन बनाए, इसमें 4 शतक और 3 अर्द्धशतक शामिल हैं.

जानिए किस स्किनटोन पर जंचता है कौन से शेड का नेल पेंट

अकसर महिलाएं नेल पेंट का चुनाव आउटफिट के अनुसार करती हैं. नतीजतन उस आउटफिट पर तो नेल पेंट खूबसूरत नजर आता है, लेकिन दूसरे आउटफिट के साथ उस की सारी खूबसूरती गुम हो जाती है. ऐसे में नेल पेंट का चुनाव आउटफिट के अनुसार न कर स्किनटोन को ध्यान में रख कर करें. इस से हाथों की खूबसूरती बरकरार रहती है. किस स्किनटोन पर कौन से शेड का नेल पेंट जंचता है, जानते हैं मेकअप आर्टिस्ट क्रिस्टल फर्नांडिस से:

वैरी फेयर स्किनटोन

बहुत ज्यादा गोरी महिलाओं के लिए पिंक और पिंक शेड से मिलतेजुलते शेड के नेल पेंट्स परफैक्ट चौइस हो सकते हैं.

ऐसी महिलाएं पेस्टल शेड के नेल पेंट्स को भी अपने वैनिटी बौक्स में जगह दे सकती हैं. ये इन की स्किनटोन पर खूब जंचते हैं.

बोल्ड लुक के लिए ऐसी महिलाएं डार्क रैड शेड के नेल पेंट्स को अपनी पहली पसंद बना सकती हैं.

अगर डार्क शेड नेल पेंट्स लगाना चाहती हैं, तो डार्क ब्लू, नेवी ब्लू, मिडनाइट ब्लू जैसे शेड्स ट्राई कर सकती हैं.

सुझाव: शीयर शेड्स के नेल पेंट्स लगाने से बचें. ये आप पर सूट नहीं करेंगे.

फेयर स्किनटोन

गोरी महिलाओं के लिए डार्क रैड और रूबी आइडियल नेल पेंट शेड्स हैं. इन से हाथों की खूबसूरती दोगुनी हो जाती है.

बहुत अधिक गोरी महिलाओं की तरह पेस्टल शेड्स गोरी महिलाओं पर भी सूट करते हैं यानी इन्हें भी अपने वैनिटी बौक्स में रख सकती हैं.

प्लम्स, बरगंडी, पर्पल जैसे डार्क शेड के नेल पेंट्स गोरी महिलाओं को बोल्ड लुक देते हैं.

अगर लाइट शेड के नेल पेंट्स लगाने तो सिल्वर, व्हाइट, पेल जैसे शेड्स चुनें. ये स्किनटोन पर सूट करते हैं.

फ्रैश लुक के लिए ब्लू, औरेंज, पीच शेड के नेल पेंट्स चुन सकती हैं.

सुझाव: ट्रांसपैरेंट या इनविजिबल शेड के नेल पेंट्स लगाने से परहेज करें. ये आप की स्किनटोन के लिए नहीं हैं.

मीडियम स्किनटोन

पीच और पेल शेड के नेल पेंट्स को मीडियम स्किनटोन वाली महिलाएं अपनी पहली पसंद बना सकती हैं.

डार्क के बजाय पिंक, पर्पल, ब्लू और रैड के लाइट शेड्स भी मीडियम स्किनटोन वाली महिलाओं पर सूट करते हैं.

अगर मीडियम स्किनटोन वाली महिलाएं डार्क शेड लगाना चाहती हैं, तो कोरल औरेंज नेल पेंट्स का चुनाव कर सकती हैं.

पार्टी जैसे मौके के लिए सिल्वर शेड के नेल पेंट्स इन के हाथों की खूबसूरती में चार चांद लगा सकते हैं.

सुझाव: मीडियम स्किनटोन की महिलाओं पर गोल्ड और रस्ट शेड के नेल पेंट्स अच्छे नहीं लगते, इसलिए इन्हें लगाने से बचें.

डार्क स्किनटोन

सांवली रंगत की महिलाएं डार्क के बजाय ब्राइट शेड्स को तवज्जो दें. ये आप की स्किनटोन पर ज्यादा खूबसूरत नजर आएंगे.

ब्राइट औरेंज और ब्राइट मिंट शेड के नेल पेंट्स आप को फ्रैश लुक दे सकते हैं.

अगर ब्लू शेड ट्राई करना चाहती हैं, तो ब्लू के डार्क शेड के चयन के बजाय बेबी ब्लू नेल पेंट चुनें.

अगर पिंक शेड लगाना हो तो पिंक के न्यूड शेड का चुनाव करें. यह डार्क स्किन पर सूट करता है.

सुझाव: पेस्टल शेड के नेल पेंट्स से परहेज करें. ये आप के नाखूनों पर उभर कर दिखाई देंगे.

जानते हैं जावेद अख्तर और शबाना आजमी की शादी किसने करवाई..!

अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्रियों में से एक शबाना आजमी की शादी पहले से शादीशुदा जावेद अख्तर से हुई है. इन दोनों की लव स्टोरी किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है. पहले से शादीशुदा जावेद अख्तर को शबाना आजमी को अपनाना इतना आसान नहीं था.

लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि इन दिनों को मिलाने वाला वही इंसान है जिसकी वजह से ये दोनों एक नहीं हो पा रहे थे. जी हां, वह और कोई नहीं बल्कि जावेद अख्तर की पहली पत्नी हनी ही हैं. आइए बताते हैं आखिर क्या था पूरा मामला.

दरअसल जावेद अख्तर शबाना आजमी को दिल दे बैठे थे और शबाना भी उन्हें चाहने लगी थी. यह उस वक्त की बात है जब 1970 में जावेद अख्तर कैफी आजमी से लिखने की कला सीखते थे. उसी दौरान उनका दिल कैफी आजमी की बेटी शबाना पर दिल आ गया. दोनों के अफेयर की खबरें मीडिया तक पहुंचने में देर नहीं लगी.

जब ये बात हनी को पता चली तो रोज घर में झगड़े होने लगे. लेकिन बच्चों के कारण जावेद, हनी को छोड़ना नहीं चाहते थे. रोज-रोज घर में झगड़े होते देख हनी ने जावेद को शबाना के पास जाने की इजाजत दे दी. उन्होंने जावेद से कहा कि वो शबाना के पास जाएं और बच्चों की चिंता ना करें.

तब जावेद ने हनी को तलाक देकर शबाना से शादी करने का फैसला लिया. दोनों की शादी में मुश्किलें भी आईं क्योंकि कैफी आजमी नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी की शादी किसी शादीशुदा आदमी से हो. प्यार के आगे किसी का जोर नहीं चलता, कैफी आजमी का भी नहीं चला और शबाना ने 1984 में जावेद से शादी कर ली.

आईफोन खरीदने के बाद जरूर करें ये काम

वैसे तो कई लोगों ने आईफोन का इस्तेमाल किया है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो पहली बार आईफोन यूजर बनने जा रहे हैं. अगर आप भी उन यूजर्स में से एक हैं जो पहली बार आईफोन का इस्तेमाल करने जा रहे हैं तो आप इस खबर को जरूर पढ़े.

ऐपल आईडी बनाएं

आईफोन खरीदने के बाद सबसे पहला और जरूरी काम होता है ऐपल आईडी बनाना. यह ऐपल के इकोसिस्टम में आने के लिए और ऐपल का इस्तेमाल करने वाले लोगों में शामिल होने की अनिवार्य शर्त है. ऐपल आईडी के साथ आप ऐपल स्टोर से एप डाउनलोड और खरीद सकते हैं. आप इसकी मदद से म्यूजिक खरीद सकते हैं और iTunes से मूवी खरीद सकते हैं, ऐपल म्यूजिक को सब्सक्राइब कर सकते हैं और अन्य कामों को भी अंजाम दे सकते हैं.

iTunes को इन्स्टाल करें

अगर आपने ऐपल डिवाइस खरीदा है तो आपके लिए अपने कंप्यूटर पर iTunes इन्स्टाल करना जरूरी है. यह आपके कंप्यूटर से आपके फोन को जोड़ने के लिए जरूरी है. ये आपके म्यूजिक औरवीडियो के डेटा को सेव करके रखता है, साथ ही आपको विकल्प देता है कि आप उन म्यूजिक, वीडियो या फिर एप्स को डिलीट कर दें और अपने फोन की मैमोरी को मैनेज कर पाएं.

फोन को एक्टिवेट करें

ये शुरुआती दो स्टेप फौलो करने के बाद आपको अपने फोन को एक्टिवेट करने की जरुरत होती है. इसलिए आपको फंडामेंटल सेटिंग विकल्प की मदद से बेसिक सेटअप प्रोसेस को एक्टिवेट करना होगा, ताकि आप फेसटाइम, फाइंड माई आईफोन, आईमैसेज और अन्य फीचर्स का आसानी से इस्तेमाल कर पाएं.

अपने डिवाइस को सिंक्रोनाइज करें

ऐपल आईडी और आईट्यून इन्स्टाल करने के बाद आप इसमें कंटेट लोडिंग शुरू करें. इसके लिए आपको अपने फोन को अपने कंप्यूटर के साथ जोड़ना होगा. जैसे ही आप केबिल को प्लग करेंगे आपका फोन सिंक होना शुरू हो जाएगा.

आईक्लाउड को कन्फीगर करें

यह आपके ऐपल डिवाइस में डाटा सेव करने, सिंक करने और अपडेट करने के कई तरीकों में से एक है. यह फीचर ऐपल सर्वर पर आपके डेटा को सेव करने में मददगार होता है.

फाइंड माई आईफोन औप्शन को सेटअप करें

अगर किसी सूरत में आप अगर अपना फोन खो देते हैं तो आप इस फीचर के जरिए अपने फोन की लोकेशन को ट्रैक कर सकते हैं. आप आईक्लाउड से फाइंड माई आईफोन फीचर को ढूंढ सकते हैं. यह आपके आईफोन में जीपीएस नेटवर्क बनाने में मदद करता है ताकि खोने की सूरत में आप मैप के जरिए इसे ट्रैक कर पाएं.

बैकअप को रिस्टोर करें

अपने नए आईफोन में एक बार सभी बेसिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद अपने पुराने आईफोन से नए आईफोन में बैकअप लेना अहम होता है. आप इसे Settings > iCloud > Backup के जरिए कर सकते हैं.

टच आईडी

टच आईडी (फिंगरप्रिंट स्कैनर) को होम बटन में इंटीग्रेट किया गया है, जिसकी मदद से आप मात्र अपनी फिंगर को टच कराकर अपने डिवाइस जो लौक और अनलौक कर सकते हैं. अगर आप टच आईडी बनाना चाहते हैं तो आप इसे Settings > General > Touch ID & Passcode > Touch ID के जरिए कर सकते हैं. अब आप अपना फिंगरप्रिंट जोड़ सकते हैं.

मेरे व मेरी बीवी के गुप्तांगों पर अनचाहे बाल हैं और वहां हमेशा पसीना आता है. हमें क्या करना चाहिए.

सवाल
मेरे व मेरी बीवी के गुप्तांगों पर अनचाहे बाल हैं और वहां हमेशा पसीना आता है. हमें क्या करना चाहिए?

जवाब
आप लोगों के साथ कुछ अनोखा नहीं हुआ है. सभी के गुप्तांगों पर बाल होते हैं. इन बालों को अच्छी कंपनी का हेयर रिमूवर इस्तेमाल कर के हटाया जा सकता है या कैंची से सावधानी से काटा जा सकता है. अंगों की ढंग से सफाई करें, तब पसीना नहीं आएगा.

अपने डेब्यू मैच में ही इस भारतीय खिलाड़ी ने ले लिया था रिटायरमेंट

राहुल द्रविड़ की पहचान एक कलात्मक बल्लेबाज के तौर पर रही है. टेस्ट में बेस्ट और वनडे में भरोसेमंद रहे राहुल ने आक्रामक क्रिकेट कम ही खेली, पर कुछ मौके ऐसे भी रहे जब राहुल के काउंटर अटैक ने सबको चौंका दिया. ऐसा ही एक मौका था द वाल के एकलौते टी-20 इंटरनेशनल का. राहुल ने भारत के लिए एकलौता टी-20 इंग्लैंड के खिलाफ 2011 में मैनचेस्टर पर खेला था.

हालांकि द्रविड़ ने कोई बहुत बड़ी पारी नहीं खेली और न ही भारत वो मैच जीत पाया लेकिन भारतीय पारी के 11वें ओवर में द्रविड़ ने कुछ ऐसा कारनामा कर दिखाया जो किसी ने सोचा भी नहीं था.

इंग्लैंड के खिलाफ टैस्ट सीरीज में शानदार प्रदर्शन करने वाले द्रविड़ को एकदिवसीय क्रिकेट से यादगार विदाई देने के लिए टीम में चुना गया. इस टी20 के बाद उन्होंने अपने आखिरी 5 एकदिवसीय मैच भी इंग्लैंड के खिलाफ खेले.

अपने इस एकमात्र टी20 में पार्थिव पटेल के आउट होने के बाद द्रविड़ बल्लेबाजी करने आये और तब भारत का स्कोर 39/1 था. 11वें ओवर तक द्रविड़ संभल कर खेल रहे थे क्योंकि आखिर पहला मैच तो पहला ही होता है. लेकिन 11वें ओवर में जब समित पटेल गेंदबाजी करने आये तो नजारा ही बदल गया.

अगले 6 गेंदों में जो हुआ वो किसी भी द्रविड़ प्रशंसक के लिए किसी तोहफे से कम नही था. उन्होंने दिखाया कि टी20 में भी वो क्या कर सकते हैं. ओवर की आखिरी तीन गेंदों पर उन्होंने लगातार तीन छक्के लगाये.

लेकिन इसके बाद वो अगले ही ओवर में आउट हो गए. फिर भी उनके द्वारा लगाये गये वो 3 छक्के उन्हें सीमित ओवरों में कम आंकने वालों के लिए एक करारा जवाब था.

आपको बता दें द्रविड़ ने अपने करियर में कुल 164 टेस्ट मैच, 344 वनडे मैच खेले हैं. टेस्ट मैच में उन्होंने 52.31 के औसत से 13288 रन बनाये जिसमें उन्होंने 36 शतक और 63 अर्धशतक लगाये. टेस्ट मैच में उनका सर्वाधिक स्कोर 270 रन है. वहीं 344 वनडे मैच में उन्होंने 39.16 के औसत से 10889 रन बनाये जिसमें उन्होंने 12 शतक और 83 अर्ध शतक लगाये. यही नहीं उन्होंने विकेट कीपर की भी भूमिका बखूबी निभाई. उन्होंने टेस्ट और वनडे दोनों मे मिलाकर 406 कैच और 14 स्टंपिंग की है.

एलजी पर जमकर बरसे केजरीवाल, बोले चुना हुआ मुख्यमंत्री हूं आतंकी नहीं

अतिथि शिक्षकों के बहाने दिल्ली सरकार व उपराज्यपाल के बीच खुला टकराव बुधवार को विधानसभा में साफ नजर आया. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैं राज्य का चुना हुआ मुख्यमंत्री हूं, कोई आंतकवादी नहीं. सरकार के मंत्रियों को भी फाइलें देखने का अधिकार नहीं है. अधिकारियों से जब किसी मामले में जवाब मांगा जाता है तो उनका कहना होता है कि उपराज्यपाल के आदेश हैं कि फाइलें नहीं दिखाई जाएं.

मुख्यमंत्री केजरीवाल उपराज्यपाल अनिल बैजल पर जमकर बरसे. उनका कहना था कि यह सब भाजपा के इशारे पर हो रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा से पहले भी ऐसा ही एक पत्र उपराज्यपाल से आया है, जिसमें कहा गया है कि सेवा सीधेतौर पर उपराज्यपाल के अधिकार का मामला है. इस प्रकार के हथकंडों के जरिये ही अधिकारियों को डराया जा रहा है. यदि राजनीति करनी है तो खुलकर सामने आएं.

उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि हम वोट की राजनीति नहीं करते हैं, लेकिन केंद्र सरकार इसे मंजूरी नहीं देती है तो वह भाजपा को हटाने में कोई कसर नहीं छोड़ें. इसमें आम आदमी पार्टी उनके साथ है.

‘सरकार क्यों चुनी, कानून सचिव को ही चुन लेते’

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली की जनता ने आप पार्टी की सरकार को चुना है. यदि सभी काम अधिकारियों को ही करने थे तो चुनी हुई सरकार की जरूरत नहीं. कानून सचिव का भी चुनाव आम जनता द्वारा किया जाता. मुख्यमंत्री ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अतिथि शिक्षकों से संबंधित फाइल को एक बार भी उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को नहीं दिखाया गया. यह जानकारी सरकार को विज्ञापन के माध्यम से मिली. इसी प्रकार मोहल्ला क्लीनिक के मामले में भी कोई फाइल स्वास्थ्य मंत्री को नहीं दिखाई जा रही है.

नेता प्रतिपक्ष से बहस

मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष में सीधे सवाल जवाब हुए. मुख्यमंत्री ने कहा कि वे नेता प्रतिपक्ष को अपना नेता मानने को तैयार हैं. वे इस मामले में सीधे एलजी के पास चलें. सरकार उनके मुताबिक विधेयक में संशोधन भी करने को तैयार है. नेता प्रतिपक्ष का कहना था कि यह विधेयक कानूनी प्रक्रिया के तहत नहीं है.

अफसरों की छवि खराब की जा रही : एलजी

उपराज्यपाल अनिल बैजल की ओर से केंद्रीय गृह सचिव को दिल्ली विधानसभा की कमेटियों को लेकर लिखी गई एक चिट्ठी सामने आई है. चिट्ठी इसी साल 23 जुलाई को लिखी गई है. इसमें आरोप लगाए गए हैं कि दिल्ली विधानसभा की अथॉरिटी का बेजा इस्तेमाल कर अफसरों की छवि खराब की जा रही है.

अनिल बैजल ने केंद्रीय गृह सचिव को चिट्ठी में यह भी लिखा है कि किस तरह विधानसभा की कमेटियों के विशेषाधिकार हनन और विधानसभा की अवमानना का डर अधिकारियों को दिखाया जा रहा है. उन्होंने लिखा कि इस तरह से दिल्ली में सरकारी काम काज ठप हो जाएगा. दरअसल यह चिट्ठी, दिल्ली विधानसभा की नियम संबंधित कमेटी की दूसरी रिपोर्ट में प्रस्तावों के मद्देनजर लिखी गयी है. जिसमें विभागों से संबधित स्थायी समितियों (डीआरएससीएस) को कई अतिरिक्त अधिकार देने का जिक्र है. नियम समिति की रिपोर्ट में सेवा, विजिलेंस, गृह, लैंड एंड बिल्डिंग जो कि रिज़र्व विषय हैं उन्हें भी डीआरएससीएस के अंदर लाने का प्रस्ताव है. अनिल बैजल के मुताबिक ये संविधान की धारा 239एए के खिलाफ है.

अनिल बैजल अपनी चिट्ठी में यह भी लिखते हैं कि दिल्ली विधान सभा की स्थाई समितियों को वो अधिकार देने का प्रस्ताव है जो संसद की ऐसी ही कमेटियों के पास तक नहीं है.

मेट्रो में किराया वृद्धि के खिलाफ प्रस्ताव पास

मेट्रो में किराया बढ़ाने के खिलाफ दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में प्रस्ताव पास किया गया. प्रस्ताव में किराया वृद्धि को आम आदमी के खिलाफ माना गया है. केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रलय से मांग की गई है कि वह हस्तक्षेप कर डीएमआरसी के किराया वृद्धि के फैसले पर रोक लगाए. बुधवार को विधानसभा के विशेष सत्र में भी मेट्रो किराया वृद्धि का असर दिखाई दिया. इस मामले पर एक प्रस्ताव पास किया गया. प्रस्ताव में कहा गया कि दस अक्टूबर से मेट्रो का किराया बढ़ाना जनविरोधी है.

निर्माता निर्देशक अब चपरासी हो गए हैं : पहलाज निहलानी

35 सालों से इंडस्ट्री में फिल्म निर्माता रह चुके पहलाज निहलानी, फिल्म प्रमाण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष होने के साथ-साथ साल 2009 तक पिक्चर्स एंड टीवी प्रोग्राम प्रोड्यूसर्स संघ के अध्यक्ष भी थे. उन्हें नयी-नयी फिल्में बनाने का शौक है. अगर इन फिल्मों से कुछ मेसेज चला जाय तो उन्हें अच्छा लगता है.

स्पष्टभाषी पहलाज निहलानी को फिल्म प्रमाण बोर्ड के अध्यक्ष बनने के बाद काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. उन्हें ‘संस्कारी’ पहलाज निहलानी का नाम दिया गया, जिसे वे गलत नहीं मानते, क्योंकि जैसा वे दिखते हैं, अंदर से भी वैसे ही हैं. सेंसर बोर्ड में चीफ का पद छोड़ने के बाद एक बार फिर वे फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन और निर्माण के क्षेत्र में उतर कर बोल्ड और थ्रिलर फिल्म जुली 2 को लेकर आये हैं. उनसे हुई खरी-खरी बातचीत के अंश इस प्रकार है.

जूली 2 के टाइटल को लेकर कंट्रोवर्सी है कि आपने जूली के निर्माता से बिना पूछे अपनी फिल्म में ले लिया है, इस बारें में आपकी राय क्या है?

आजकल इंडस्ट्री में फिल्म रिलीज से पहले कुछ लोग शोर मचाने के लिए तत्पर रहते हैं. ये गाना, स्क्रिप्ट, कहानी सबके साथ होती है. असल में कार्पोरेट सेक्टर के इंडस्ट्री में आने से ये बवाल पैदा हो रहा है, क्योंकि वे लोग निर्धारित समय पर अपनी फिल्में रिलीज करना चाहते हैं. ऐसे में किसी भी कंट्रोवर्सी को वे कोर्ट में जाकर सेटल कर देते हैं, पर मैं ऐसा नहीं करूंगा. मैं जब सबकुछ ठीक हो जाए तभी फिल्म रिलीज करूंगा. फिल्म की टाइटल किसी की जागीर नहीं होती और उनके पास भी इसकी कोई प्रूफ नहीं है. मैं रिलैक्स हूं और किसी के ब्लैकमेल के ट्रैप में नहीं पड़ना चाहता. कोर्ट के न्याय का मैं इंतजार करूंगा.

पहले भी आपकी ऐसी कई फिल्मों के टाइटल को लेकर समस्या आई, ऐसा आपके साथ ही क्यों होता है?

फ्री टाइटल कोई भी ले सकता है, मैंने जी पी सिप्पी की टाइटल ‘इलजाम’ को लिया था और उन्हें थैंक्स दिया. कोई समस्या नहीं हुई. उस समय हर निर्माता का एक दूसरे से दोस्ताना रिश्ता हुआ करता था, जो अब नहीं है. ‘हथकड़ी’ के साथ भी ऐसा ही हुआ था. तब लोग एक दूसरे को लोग सपोर्ट किया करते थे, क्योंकि इंडस्ट्री को परिवार समझा जाता था, जबकि आज कमेटी में बैठकर लोग एक दूसरे की टांग खीचने पर लगे रहते हैं.

इस तरह की राजनीति से फिल्म इंडस्ट्री कितना ‘सफर’ करती है?

इंडस्ट्री ‘सफर’ करती है. आजकल बहुत सारी समस्याएं फिल्मों के साथ हो रही है. डायरेक्टली और इनडायरेक्टली बहुत सारे लोग इंडस्ट्री से जुड़ चुके हैं, जो पहले पता नहीं चलता था. पहले इंडिविजुअल निर्माता को अंडरवर्ल्ड फंडिंग करती थी, जिससे उनका इन्फ्लुएंस फिल्मों पर था. राजनेताओं की भी दखल अंदाजी थी. इसके अलावा कुछ कंस्ट्रक्शन वाले भी फिल्मों में पैसा लगाते थे. ये तरीका सहजता से चलता रहता था. इसमें जो शक्तिशाली होता था, उसका राज चलता था. इसके अलावा मनोरंजन, जो हिंदी सिनेमा में थी, जिसकी वजह से फिल्मों की छवि विश्व में उसकी डांस और संगीत की वजह से पौपुलर है, वह अब खत्म हो चुका है. पहले निर्देशक के बाद निर्माता आते थे, निर्माता को लोग अन्नदाता कहते थे, जबकि निर्देशक को सबका पालनहार मानते थे, क्योंकि उसे पूरी फिल्म पता होती थी. आज निर्माता, निर्देशक चपरासी हो गए है. वे केवल कूरियर सर्विस कर रहे हैं. एक्टर जो निर्देश देते हैं, उसी तरह से निर्देशक फिल्म बनाता रहता है. इसलिए फिल्मों के कंटेंट खत्म होते जा रहे हैं. बड़े से बड़े कलाकारों की फिल्में भी फ्लाप हो रही है. जबकि साउथ की फिल्म इंडस्ट्री आज भी अच्छी चल रही है. कला को वहां महत्व दिया जाता है, देसी कहानियों पर फिल्में बनती है. इसलिए केवल बाहुबली ही नहीं, कई अच्छी कहानी वाली फिल्में वहां बन रही है. उनकी ‘डब’ की हुई फिल्में यहां भी चलती है.

असल में जिस कहानी को आप ‘फील’ कर सकते हैं, वह चलती है. जिससे दर्शक अपने आप को जोड़ सकते हैं, वही हिट होती है. इसके अलावा जल्दी-जल्दी फिल्म बनाने की होड़ में भी सारे इमोशन आज खत्म होते जा रहे हैं. व्यक्ति की जो सोच होती है, उसी के आधार पर वह फिल्में बनाता है. किसी निर्माता निर्देशक को एक्शन, तो किसी को रोमांटिक फिल्में बनाने की इच्छा होती है. संगीत के साथ भी वैसा ही कुछ हो रहा है. पहले गाने, सिचुएशन के आधार पर होते थे, जिसे निर्माता निर्देशक बैठकर फिर उसे फिल्मों में प्रयोग करते थे. आज प्रीतम और ए.आर. रहमान जैसे संगीतकार अगर गाना बनाते हैं, तो कोई उन्हें पूछने के बजाय उन्हें भगवान मान अपनी फिल्मों में उनके गाने को ले लेते हैं, क्योंकि उनके पास तो आज वौइस ही नहीं है कि कुछ चर्चा वे कर सकें. अभी अच्छे संगीत केवल सोशल मीडिया पर ही आप सुन सकते हैं. इस रैकेट को खत्म करना जरुरी है. प्रोपोजल भी आज एजेंसी बनाती है. एक्टर से भी अधिक स्ट्रोंग कहानी है. वही फिल्म का हीरो होता है.

करेक्टर के आधार पर आज औडिशन नहीं लिए जाते, जो गलत हो रहा है. रियल कास्टिंग के लिए कलाकार को उनका चरित्र पहले देना चाहिए.

आपको फिल्म प्रमाण बोर्ड की अध्यक्ष होते हुए कई सारी आलोचनाओं से गुजरना पड़ा, इस बारें में क्या कहना चाहते हैं?

मैंने वहां कई सारी ऐसी चीजें देखी जो सही नहीं थी, मैंने उसका विरोध किया तो मुझे निकाल दिया. न तो मुझसे पूछकर मुझे रखा गया था न ही मुझसे पूछकर मुझे निकाला गया. अभी भी वैसी ही गाइड लाइन को लोग फौलो कर रहे हैं और निर्माता भी खुश हैं. जबकि मुझे बहुत कुछ कहा गया. सभी फिल्मों के लिए गाइड लाइन एक ही होते है, लेकिन आजकल कुछ फिल्में ट्रिब्यूनल से भी पास होती है. ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ भी इसी वजह से सबकी नजर में आई, नहीं तो इसे देखने वाला कोई नहीं था. ये सब पब्लिसिटी के फंडे हैं. सरकार फिल्म इंडस्ट्री से डर गयी है, इसलिए चेयरमैन बदल दिया. इंडस्ट्री ऐसी ही है, थैंकलेस जौब है और मैं इसका आदि हो चुका हूं.

क्या जिंदगी में कोई मलाल रह गया है?

व्यक्ति जब तक जिन्दा रहता है, उसकी इच्छाएं कम नहीं होती, पर मैं अपने काम से बहुत संतुष्ट हूं. मैंने इंडस्ट्री और समाज के लिए बहुत काम किया है. बचपन से ही मैंने ‘फण्ड रेजिंग’ का काम किया है. जहां भी मेरी जरूरत पड़ी, मैं वहां गया. आज मेरा परिवार है, मेरे तीन बेटे है, मैं अब दादा भी बन चुका हूं. जिसका माइंड स्ट्रोंग होता है, वह अपनी यात्रा जारी रखता है. मेरा उठना, बैठना, खाना सब फिल्म है और इसी में मैं आगे और कई अच्छी फिल्में बनाने की इच्छा रखता हूं.

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