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इस ऐप से आपके फोन में भी होगा कंप्यूटर की तरह रीसायकल बिन

कंप्यूटर में रीसायकल बिन की सुविधा दी जाती है. यहां पर अगर गलती से कुछ डिलीट हो जाता है तो हम उसे रीसायकल बिन में जाकर वापस से रीस्टोर कर लेते हैं. वहीं अगर हमारे फोन से कुछ डिलीट किया जाता है तो हम उसे वापस से रीस्टोर नहीं कर पाते हैं. उस समय हम सोचने लगते हैं कि काश हमारे मोबाइलफोन में भी कंप्यूटर की तरह ही रीसायकल बिन होता और काश हम अपने डिलीट किये गये डेटा को वापस से रीस्टोर कर पाते.

अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो आज इस खबर को पढ़ने के बाद आपकी यह सोच हकीकत में बदल जाएगी. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि कैसे आप अपने स्मार्टफोन में कंप्यूटर की तरह ही रीसायकल बिन बना सकते हैं.

स्मार्टफोन में रीसायकल बिन बनाने के लिए आपको सबसे पहले अपने फोन में Dumpster नाम का एक ऐप डाउनलोड करना होगा.

Dumpster डाउनलोड करने के बाद इसे ओपन करें. ऐसा करते ही यह ऐप सबसे पहले आपका स्वागत करेगा, इसके बाद आपको डेमो के लिए सुझाव देगा.

उसके सुझाव के अनुसार कार्य करने पर आपके फोन में कंप्यूटर की तरह रीसायकल बिन बनकर तैयार हो जाएगा. अब आप इसका इस्तेमाल अपने फोन पर बड़ी आसानी से कर सकते हैं.

जब आप अपने फोन पर बने रीसायकल बिन को ओपन करेंगे तो इसमें कुछ भी नजर नहीं आएगा, क्योंकि आपने अभी कुछ भी डिलीट नहीं किया है.

इसे चैक करने के लिए आप अपने फोन से कोई फोटो या वीडियो डिलीट करके देख सकते हैं.

जब आप फोन में से कुछ डिलीट करेंगे तो डिलीट की गई फाइल यहां इसमें दिखाई देने लगेगी. अब आप चाहें तो इसे रीस्टोर कर सकते हैं या फिर यहां पर से भी डिलीट कर सकते हैं.

इस ऐप की खास बात यह है कि आप अपनी आवश्यकतानुसार इसमें टाइम भी सेट कर सकते हैं. ताकि ज्यादा दिन बितने के बाद इसमें से पुरानी फाइल खुद ब खुद डिलीट हो जाएं. आप चाहें तो इस ऐप में पासवर्ड भी सेट कर सकते हैं, ताकि डिलीट की गई फाइल आपके अलावा कोई और न देख सके.

तो इस तरह से आप फोन पर भी रीसाइकल बिन बना सकते हैं और गलती से की गई किसी भी फाइल को आसानी से रिस्टोर कर सकते हैं.

अनिल कुंबले के लिये जब सौरभ गांगुली ने की चयनकर्ताओं से बगावत

बात साल 2003-2004 का है जब भारतीय क्रिकेट चयन कमेटी ने अनिल कुंबले को आस्ट्रेलिया दौरे पर ना भैजने का मन बना लिया था तब सौरभ गांगुली ने जैसे तैसे कर कुंबले पर अपना दाव खेला और चयन कमेटी को राजी कर लिया की वो आस्ट्रेलिया दौरे पर कुंबले को भेजे.

सौरभ गांगुली ने एक प्रचार कार्यक्रम के दौरान खुद इसका खुलासा किया, उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपको अनिल कुंबले का उदाहरण देता हूं जो कि संभवत: पिछले 20-25 वर्षों में भारत के सबसे बड़े मैच विजेता रहे हैं.

मुझे याद है कि आस्ट्रेलिया के 2003 के दौरे से पहले मैं चयनसमिति की बैठक में था. मैं टीम का कप्तान था और जानता था कि चयनकर्ता अनिल को दौरे पर भेजने के इच्छुक नहीं हैं.

“गांगुली ने कहा, ‘‘मैं जैसे ही चयन समिति की बैठक में पहुंचा तो समझ गया कि चयनकर्ताओं ने अनिल कुंबले को बाहर करने का मन बना लिया है. मैंने उनसे आग्रह किया और कहा कि वह मैच विजेता हैं और उन्होंने भारतीय क्रिकेट के लिये बहुत कुछ किया है. उन्हें आस्ट्रेलिया दौरे की टीम में होना चाहिए और चयनकर्ता इसके लिये तैयार नहीं थे.

“कुंबले भारत की तरफ से टेस्ट मैचों में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं. उन्होंने 132 टेस्ट मैचों में 619 विकेट लिये हैं. कुंबले ने नयी दिल्ली में पाकिस्तान के खिलाफ 74 रन देकर दस विकेट लिये थे जो उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. उन्होंने इसके अलावा 271 एकदिवसीय मैचों में 337 विकेट लिये.

गांगुली ने कहा, ‘‘चयनकर्ता बायें हाथ के स्पिनर को टीम में रखना चाहते थे क्योंकि आस्ट्रेलियाई बायें हाथ के स्पिनर को अच्छी तरह से नहीं खेल पाते हैं. बैठक दो घंटे तक चली. इसमें देर हो रही थी और जान राइट मेरे पास आये और कहा कि सौरव इसको समाप्त करो और उनकी बात मान लो, मुझे पूरा विश्वास है कि हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे.

“गांगुली ने कोच जान राइट से कहा कि अगर कुंबले को इस दौरे पर नहीं चुना जाता है तो हो सकता है कि वह दोबारा भारत के लिये नहीं खेल पाये.

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने जान से कहा कि कुंबले पिछले दस वर्षों से चैंपियन रहा है और वह अभी अच्छी गेंदबाजी नहीं कर पा रहा है लेकिन यह अस्थायी है. मैंने जान से कहा कि अगर अनिल को बाहर किया जाता है तो हो सकता है कि वह फिर से भारत की तरफ से नहीं खेल पायेंगे. मैंने कहा कि जब तक अनिल को टीम में नहीं रखा जाता है मैं चयन वाली शीट पर हस्ताक्षर नहीं करूंगा.

“गांगुली ने कहा, ‘‘चयनकर्ता मेरे रवैये से परेशान हो गये थे और उन्होंने कहा कि अगर मैं अच्छा नहीं खेलता, अगर टीम अच्छा नहीं खेलती है और अगर कुंबले अच्छा नहीं खेलता है तो सबसे पहले मुझे बाहर किया जाएगा. मैंने कहा कि ठीक है मैं यह जोखिम उठाने के लिये तैयार हूं और देखेंगे कि क्या होता है. ’’

इसके बाद कुंबले को आस्ट्रेलिया दौरे के लिये चुन लिया गया और गांगुली ने कहा कि इस लेग स्पिनर ने फिर शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने कहा, ‘‘अनिल ने उस श्रृंखला में बेहतरीन प्रदर्शन किया. वह साल उनके लिये शानदार रहा. उस साल उन्होंने 80 विकेट लिये जो कि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में एक कैलेंडर वर्ष में किसी स्पिनर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था.

पिता की मौत के कुछ दिन बाद ही प्रियंका चोपड़ा पहुंच गई थी फिल्म के सेट पर

बौलीवुड से हौलीवुड तक का सफर तय करने वालीं ‘देसी गर्ल’ प्रियंका चोपड़ा एक बार फिर से अमेरिकन टीवी सीरीज ‘क्वौन्टिको’ में नजर आएंगी. इसके चलते प्रियंका ने ‘क्वौन्टिको’ सीजन 3 के लिए शूट शुरू कर दिया है. प्रियंका ने इस बात की जानकारी खुद सोशल मीडिया पर दी है.

प्रियंका बौलीवुड के अलावा हौलीवुड की भी चर्चित सेलिब्रिटी हैं. जबरदस्त एक्टिंग की बदौतल प्रियंका को हमेशा सराहना मिलती रही है. वह अपने काम के लिए काफी सीरियस रहती हैं. आइए आज हम आपको उनसे जुड़ा एक वाकया बताते हैं जो साबित करता है कि वह एक बेहतरीन एक्ट्रेस होने के साथ-साथ एक साहसी महिला भी हैं.

आपको साल 2014 में रिलीज हुई प्रियंका चोपड़ा स्टारर फिल्म मैरी कौम तो याद ही होगी. यह फिल्म भारतीय मुक्केबाज मैरी कौम की बायोपिक फिल्म थी. इस फिल्म में मैरी कौम का किरदार प्रियंका चोपड़ा ने निभाया था.

प्रियंका ने इस फिल्म के लिए काफी मेहनत की थी, चाहे वह हार्ड वर्कआउट हो या सिर मुंडाने का सीन. इस फिल्म में वह बहुत हद तक दर्शको को विश्वास दिलाने में कामयाब हुई थीं कि वह खुद मैरी कौम हैं. यह साल की सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी.

इस फिल्म में लाजवाब एक्टिंग के लिए प्रियंका को काफी सराहना मिलती हैं लेकिन फिल्म के पीछे उनके साहस को कम ही लोग जानते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2013 में पिता अशोक चोपड़ा के निधन के कुछ दिन बाद ही प्रियंका ‘मैरी कौम’ की शूटिंग के लिए सेट पर पहुंच गई थीं.

To be serenaded and melting while he sings to me.. Adoring eyes.. Both ways. Miss u dad.

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प्रियंका का यह फैसला वाकई मुश्किल रहा होगा. वहीं उन्होंने पिता के निधन का दर्द किसी को जाहिर नहीं होने दिया और अपना काम पूरा किया. मशहूर एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा बौलीवुड की सबसे ज्‍यादा फीस लेने वाली एक्ट्रेस में से एक हैं. उनके फैंस भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी हैं.

साल 2003 में प्रियंका चोपड़ा ने फिल्म ‘द हीरो: लव स्टोरी औफ ए स्पाई’ से बौलीवुड इंडस्ट्री में कदम रखा था. हालांकि उनका फिल्मी करियर उनके मिस वर्ल्ड बनने के बाद साल 2002 में तमिल फिल्म ‘थमिजान’ से शुरू हो हुआ था.

..तो वीडियो से पहले ऐड प्ले करेगा फेसबुक

यूट्यूब की तरह फेसबुक भी प्री-रोल विज्ञापनों को ‘वाच’ प्लैटफार्म पर टेस्ट करने की योजना बना रहा है. ‘वाच’ फेसबुक का री-डिजाइन्ड प्लैटफार्म है जो क्रिएटर्स और पब्लिशर्स के लिए है.

मीडिया में आई रिपोर्ट्स की मानें तो सोशल मीडिया सेक्टर की यह दिग्गज कंपनी वीडियो शुरू होने के पहले ऐड प्ले करने के फीचर को टेस्ट कर रही है.

हालांकि, फेसबुक ने अभी इस बारे में कोई औफिशियल कामेंट नहीं किया है.

हालांकि, फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग प्री-रोल ऐड्स की खिलाफत करते आए हैं. उनके मुताबिक, फेसबुक कोई ऐसा प्लैटफार्म नहीं है जहां कोई यूजर कोई विशेष वीडियो देखने आता हो. यूजर्स यहां फीड देखते हैं.

इसी साल अगस्त में फेसबुक ने ‘वाच’ प्लैटफार्म पेश किया. इसमें वीडियोज के बीच में ऐड चलते हैं. इन्हें मिड रोल ऐड्स कहते हैं. फेसबुक को इसका अच्छा रिस्पान्स मिला है.

कंपनी के मुताबिक, एवरेज तौर पर हर वीडियो के मिड रोल ऐड को तकरीबन 70 प्रतिशत पूरा देखा जा रहा है. फेसबुक की ‘वाच’ वीडियो सर्विस मोबाइल, डेस्कटाप, लैपटाप और टीवी ऐप्स पर काम करती है.

अब एक सिम से चलाएं दो नंबर, जानिये प्रक्रिया

हम सभी जानते हैं कि स्मार्टफोन में एक सिम कार्ड से आप एक ही नंबर चला सकते हैं. दूसरा नंबर पाने के लिए आपको दूसरी सिम की जरुरत होगी. लेकिन आज हम आपको एक ऐसी ट्रिक बताने जा रहे हैं जिसकी मदद से आप एक सिम से दो नंबर चला सकते हैं. तो आइए जानते हैं कि यह किस तरह काम करेगा.

क्या है तरीका

इस ट्रिक को पूरा करने के लिए आपको सबसे पहले TextMe नाम के एक ऐप को फोन में डाउनलोड करना होगा. इस ऐप को आप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं. ऐप को स्मार्टफोन में इंस्टौल करने के बाद आपसे एक्सेस के लिए कुछ परमिशन मांगी जाएगी जिसे आपको OK करना होगा. इन प्रक्रिया के बाद आपको अपने फेसबुक या गूगल अकाउंट से ऐप के जरिए लौगइन करना होगा. अगर आप चाहे तो नया अकाउंट भी बना सकते हैं.

मिलेगा खास मोबाइल नंबर

इन सभी पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद, आप अपने किसी भी दोस्त को कौल कर सकते हैं. आपके दोस्त के पास एक अलग नंबर से कौल जाएगा जो कि सामान्य मोबाइल नंबर जैसा ही होगा. इसके अलावा, आप चाहें तो अपनी पसंद के नंबर को भी चुन सकते हैं. इसके लिए ऐप की सेटिंग में जाकर Get Number पर टैप करें या स्क्रीन में सबसे नीचे दिए मेन्यू बार में Numbers पर क्लिक कर अपना नंबर चुने. आपको बता दें कि एक से ज्यादा नंबर का इस्तेमाल करने के लिए आपको भुगतान करना होगा.

एक ही सिम से चलाए दो व्हाट्सऐप

ठीक इसी तरह आप अपने फोन में एक ही नंबर से 2 व्हाट्सऐप औपरेट कर सकते हैं. तो चलिए बताते हैं आपको ये ट्रिक.

इसके लिए सबसे पहले आपको 2 Lines for Whatsapp नाम का ऐप डाउनलोड करना होगा. ये ऐप आपको आसानी से प्लेस्टोर में मिल जाएगी. ऐप इंस्टौल होने के बाद इसे अपने एंड्रायड फोन में ओपन करें. आपके पास एक पौपअप आएगा जिसे आपको accept करना होगा. इसके बाद आपको Add a new line for Whatsapp पर क्लिक करना है. फिर आपको इसमें अपना नंबर एंटर करना है. इसके बाद आप एक ही फोन में दो व्हाट्सऐप चला पाएंगे.

उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव परिणाम से राजनीतिक दलों को मिलते सबक

उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव में सभी दलों ने अपने अपने स्तर पर पूरी ताकत से चुनाव लड़ा. निकाय चुनाव में 16 नगर निगम प्रमुख यानि मेयर, 1300 नगर निगम पार्षद, 198 नगर पालिका परिषद चेयरमैन, 2561 नगर पालिका परिषद सदस्य, 438 नगर पंचायत अध्यक्ष और 5434 नगर पंचायत सदस्य के लिये चुनाव हुआ.

भाजपा ने इस चुनाव 16 में से 14 मेयर के पदों पर विजय हासिल की. उत्तर प्रदेश में पहले 14 नगर निगम थे. इनमें से 12 भाजपा के कब्जे में थे. इस चुनाव में 2 नये नगर निगम बने. इस चुनाव में भाजपा ने 14 मेयर जीते और 2 मेयर बसपा के जीते. जिससे नगर निगम चुनाव में भाजपा का परचम लहराता दिखता है.

अगर इसका सही विश्लेषण किया जाय तो मेयर पद के लिये भाजपा को पहली बार कड़ी चुनौती मिली. कई शहरों में मेयर के पद पर भाजपा की जीत बहुत कम मतों से हुई है. बसपा ने भाजपा को सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़, झांसी और मेरठ में कड़ी टक्कर दी. अलीगढ़ और मेरठ में बसपा ने जीत भी हासिल कर ली.

कांग्रेस ने मेयर चुनाव में मथुरा, वाराणसी, गाजियाबाद, कानपुर और मुरादाबाद में भाजपा को कड़ी टक्कर दी. कई शहरी क्षेत्रों में कांग्रेस ने पहली बार शहरी मतदाताओं को विकल्प दिया है. 8 माह पहले उत्तर प्रदेश की जनता ने जिस तरह से भाजपा को अपना समर्थन दिया था वह कमजोर पड़ता दिख रहा है.

उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले थे, इन चुनावों का प्रभाव वहां पड़ सकता है, भाजपा ने इसको ध्यान में रखकर पूरे दम यह चुनाव लड़ा. पहली बार मुख्यमंत्री ने निकाय चुनावों में अलग अलग शहरों पर चुनाव प्रचार किया. भाजपा ने निकाय चुनाव में संगठित होकर चुनाव लड़ा जबकि विपक्ष पूरी तरह से बिखरा हुआ था.

मेयर के बाद नगर पालिका और नगर पंचायत में सपा, बसपा और कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी. शहरी इलाकों में पहली बार बसपा के पक्ष में दलित और मुसलिम गठजोड़ दिखा. कांग्रेस के पक्ष में शहरी मतदाता का झुकाव भी साफ नजर आ रहा था.

राजधानी लखनऊ में मेयर के पद को छोड़ कर केवल बक्शी का तालाब सीट ही भाजपा को मिली. ग्रामीण इलाकों की बाकी सीटों पर समाजवादी पार्टी और निर्दलीय ने जीत हासिल की. अगर सभी पदों की संख्या को देखें, तो भाजपा पहले स्थान पर रही. इसके बाद सपा, बसपा और कांग्रेस रही. भाजपा के खिलाफ जहां लोगों को विकल्प दिखा वहां मतदाताओं ने उसके खिलाफ वोट दिया.

विधानसभा चुनावों में मुसलिम प्रत्याशियों से परहेज करने वाली भाजपा ने निकाय चुनावों में मुसिलम प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा था. निकाय चुनाव एक राजनीतिक संदेश देते नजर आ रहे हैं कि अगर भाजपा को पछाड़ना है तो विपक्षी दलों को तालमेल से चुनाव लड़ना होगा. मुसलिम मतदाताओं ने जिस तरह से सपा को छोड़ बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस का समर्थन किया, उससे समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों को सर्तक हो जाना चाहिये. इन चुनावों में चुनाव आयोग और जिला प्रशासन की खामियों को भी उजागर किया. वोटिंग लिस्ट में नाम न होने की आम शिकायत ने पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया.

भारत में बढ़ता ऑडियो बुक्स का बाजार

देश दुनिया में कहानियों को ऑडियो वर्जन में सुनने की एक परंपरा काफी समय से रही है, लेकिन भारत में अभी इसकी शुरुआत है. कहानियां तो यहां खूब पढ़ी जाती हैं, लेकिन जब ऑडियो फॉर्मेट में इन्हें बाजार में उतार जाता है तो लोगों को शायद पता नहीं चल पाता, इसलिये दिलचस्पी कम दिखती है.

इसी क्षेत्र में कई सालों से काम कर रही कम्पनी स्टोरीटेल अब भारत में इन कहानियों के ऑडियो वर्जन के ट्रेंड को बढ़ाने उतरी है. यूरोप में ऑडियो बुक्स का प्रमुख प्लेटफॉर्म स्टोरीटेल भारत में अपनी सेवाएं शुरू कर रहा है. स्टोरीटेल की स्ट्रीमिंग सर्विस, जिसे कुछ-कुछ ऑडियो बुक्स का नेटफ्लिक्स संस्करण कहा जा सकता है, के यूजर्स अपने मोबाइल फोन पर एप डाउनलोड करके अनलिमिटेड ऑडियो बुक्स सुन सकते हैं. भारतीय भाषाओं पर फोकस करने वाली यह पहली ऑडियो बुक्स सब्सक्रिप्शन सर्विस है.

भारत में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों की बढ़ती हुई संख्या, दूरदराज तक तेज रफ्तार मोबाईल ब्रॉडबैंड की पहुंच और सब्सक्रिप्शन आधारित सर्विसेज के लोकप्रिय उभार ने मिलकर वह माहौल तैयार किया है जिसमें लोगों में और अधिक कहानियों तक पहुंचने की ललक बढ़ी है. स्टोरीटेल का लक्ष्य है भारत में ऑडियो बुक्स इंडस्ट्री में हिस्सेदारी करते हुए उसकी ग्रोथ को संचालित करना. 8 देशों में 5 लाखसब्सक्राइबर्स स्टोरीटेल ऑडियो बुक्स सुनते हैं. भारत नौवां देश है जहां कम्पनी की सर्विसेज लांच हो रही हैं.

भारत में स्टोरीटेल अंग्रेजी, हिंदी और मराठी में शुरुआत कर रहा है. लांच के समय 500 से अधिक किताबें प्लेटफार्म पर होंगी, जिनमें मराठी की 230, हिंदी की 115 और अंग्रेजी की 60 ऑडियो बुक्स शामिल हैं. इसके अलावा कुछ चुनिंदा ई-बुक्स भी प्लेटफार्म पर होंगी. लांच के समय ही मराठी में “मृत्यंजय” और हिंदी में “राग दरबारी” जैसे क्लासिक कैटेलॉग में शामिल हैं.

स्टोरीटेल ‘स्टोरीटेल ओरिजनल’ भी लांच कर रहा है. स्टोरीटेल ओरिजनल खास तौर पर ऑडियो के लिए लिखी गयी 10 एपिसोड की सीरीज होती है. लांच के समय सब्सक्राइबर्स को हिंदी मराठी की 11 ओरिजनल सीरीज डाउनलोड के लिए उपलब्ध होंगी.

स्टोरीटेल के सीईओ योनास टेलेंडर ने बताया कि भारतीय बाजार और ग्राहक को बेहतर समझने के लिए हम सीमित शुरुआत कर रहे हैं. 2018 के आरम्भिक महीनों में हम अपना दायरा फैलाएंगें, बड़े मार्केटिंग कैम्पेन करते हुए. 2018 की पहली तिमाही में ही हम ब्रिटेन और अमेरिका के प्रकाशकों की अंग्रेजी किताबें भी भारतीय सब्सक्राइबर्स को उपलब्ध कराएंगे.

गौरतलब है कि स्टोरीटेल ने 2005 में सर्विस शुरू की और अब तक 2 करोड़ 70 लाख लोग इसके प्लेटफार्म पर ऑडियो बुक्स सुन चुके हैं. स्टोरीटेल एप हर तरह के स्मार्टफोन के साथ काम करती है और इसमें बिना इंटरनेट कनेक्शन के ऑफलाइन सुनने की सुविधा भी है.

2010 से स्टोरीटेल के सब्सक्राइबर बेस में 100% वार्षिक वृद्धि हुई है. अगस्त 2017 में इसका सब्सक्राइबर बेस 5 लाख को पार कर गया. स्टोरीटेल का हेडक्वार्टर स्टॉकहोम में है और अब इसका फैलाव 13 देशों में है. स्वीडन, नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, रूस, स्पेन, पोलैंड, और अब भारत में सर्विस उपलब्ध है जबकि आइसलैंड, बुल्गारिया, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात में जल्द ही शुरू होने वाली है.

यहां देखें सचिन के क्रिकेट करियर का पहला इंटरव्यू

यूं तो खिलाड़ियों द्वारा बनाया गया हर रिकार्ड यादगार होता है. लेकिन कुछ रिकार्ड, कुछ पल बेहद खास होते हैं जो चाह कर भी भुलाए नहीं जा सकते. कुछ ऐसे ही रिकार्ड और यादें मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर की जिंदगी से भी जुड़े हैं.

सचिन के लिए उनका पहला इंटरव्यू उनकी जिंदगी के यादगार लम्हों में से एक है. यह इंटरव्यू टौम औल्टर ने 1989 में भारत-वेस्टइंडीज दौरे से पहले लिया था. 15 साल के सचिन तेंदुलकर का यह पहला वीडियो इंटरव्यू था.

सचिन उस समय टीम इंडिया का हिस्सा नहीं बने थे लेकिन उसी साल पाकिस्तान के दौरे पर सचिन को टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिला था. औल्टर ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू के दौरान बताया था कि सचिन ने बड़ी बेबाकी से उनके सवालों से जवाब दिए थे. उन्होंने कहा, “मुझे वो इंटरव्यू अच्छे से याद है. वो उसका पहला वीडियो इंटरव्यू था. मैं ये नहीं कहूंगा कि वह बहुत शांत था लेकिन वह काफी मासूम और कम बोलने वाला था. वह कैमरे के सामने थोड़ा शर्मा रहा था. उसमें आत्मविश्वास था लेकिन कोई दिखावा नहीं था.”

इंटरव्यू के दौरान सचिन ने कहा कि वह वेस्टइंडीज दौरे पर जाने वाली टीम इंडिया में चुने जाने पर काफी खुश होंगे. जब औल्टर ने उनसे कहा कि उन्हें इस बात का डर नहीं कि वेस्टइंडीज के पास कई दिग्गज तेज गेंदबाज हैं और उन्हें कुछ साल इंतजार करना चाहिए. जवाब में सचिन ने बड़े शांत तरीके से कहा कि उन्हें तेज गेंदबाजों को खेलना ज्यादा अच्छा लगता है क्योंकि उनकी गेंद सीधा बल्ले पर आती है. एक 15 साल के लड़के में इस तरह का आत्मविश्वास देखकर औल्टर भी चौंक गए थे.

यहां देखें सचिन का पहला इंटरव्यू.

फिरंगी : क्या नए अवतार में कपिल शर्मा को पसंद करेंगे उनके प्रशंसक

हमारे देश में मान्यता है कि यदि कोई नस खिंच जाए, तो उलटा पैदा हुए इंसान के पैर मारते ही वह ठीक हो जाता है. पंजाब में इसे उस इंसान की ‘सफा’ कहा जाता है जिसके लिए वह कोई धन नहीं लेता. इसी मान्यता के साथ 1921 के वक्त ब्रिटिश शासन वाले भारत, महात्मा गांधी का अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आंदोलन व पंजाब के गांव में पनपी प्रेम कहानी, अंग्रेजों का अपना स्वार्थ और भारतीय राजाओं का लालच. इन सब का मिश्रण है टीवी जगत के मशहूर कौमेडियन कपिल शर्मा की फिल्म ‘‘फिरंगी’’ में. देसीपना से युक्त एक अति लंबी नीरस फिल्म में दर्शकों को ढाई घंटे से अधिक समय तक बांध कर रखने की क्षमता का अभाव है.

फिल्म की कहानी 1921 में ब्रिटिश शासन काल के दौरान के पंजाब के गांव की है. यह वह दौर था, जब महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आंदोलन चला रखा था. विदेशी कपड़े आदि जलाए जा रहे थे. बलरामपुर गांव निवासी मंगतराम उर्फ मंग्या (कपिल शर्मा) बड़ा हो गया है, पर बेरोजगार है. वह ब्रिटिश पुलिस में भरती होना चाहता है, मगर तीन बार दौड़ में असफल होने की वजह से नौकरी नही पाता. पर मंग्या की खूबी है कि वह उलटा पैदा हुआ था. इसी खूबी के चलते ब्रिटिश अफसर मार्क डेनियल (एडवर्ड सोन्नेब्लिक) को मंग्या की जरूरत पड़ती है और वह खुश होकर मंग्या को अपना अर्दली नियुक्त कर लेते हैं.

इस बीच अपने तांगे वाले मित्र हीरा (इनामुल हक) की शादी में मंग्या हीरा के गांव नकुशा जाने पर मंग्या की नजर सारगी (इशिता दत्ता) पर पड़ती है और वह उसे अपना दिल दे बैठता है. सारगी की रजामंदी मिलने पर मंग्या के परिवार के लोग मंग्या की शादी सारगी से हो, इसकी बात करने सारगी के घर पहुंचते हैं. सारगी के माता पिता (राजेश शर्मा) तो तैयार हैं, मगर सारगी के दादाजी उर्फ लाला जी (अंजन श्रीवास्तव) मना कर देते हैं. क्योंकि लाला जी तो महात्मा गांधी के अंग्रेजों के खिलाफ चलाए जा रहे असहयोग आंदोलन का हिस्सा बने हुए हैं. ऐसे में उन्हें अंग्रेजों की नौकरी करने वाला मंग्या पसंद नही आता.

इधर अंग्रेज अफसर मार्क डेनियल की राजा इंद्रवीर सिंह (कुमुद मिश्रा) से अच्छी दोस्ती है. जिसकी वजह यह है कि मार्क डेनियल, राजा इंद्रवीर सिंह के इलाके में शराब की फैक्टरी खोलना चाहते हैं. इस शराब फैक्टरी के लाभ में राजा का चालिस और डेनियल का साठ प्रतिशत हिस्सा होगा. इतना ही नहीं डेनियल की नजर राजा इंद्रवीर सिंह की बेटी व राजकुमारी श्यामली (मोनिका गिल) पर भी है, जोकि आक्सफोर्ड से पढ़कर वापस आयी है.

शराब फैक्टरी के लिए डेनियल को नदी के किनारे की जगह पसंद आती है. नदी के एक किनारे पर नकुशा गांव है, जिसे खाली करा देने का वादा राजा करते हैं. मंग्या, डेनियल की मदद से गांव को उजड़ने से बचाकर लाला जी का दिल जीतना चाहता है, पर राजा व डेनियल की मिलीभगत के चलते राजा इंद्रवीर सिंह गांव को हर परिवार के मुखिया को अपने जलसाघर में बुलाकर उन्हें शराब में धुतकर जमीन व घर बेचने के कागज पर सभी के अंगूठे लगवा लेता है. अब गांव के लोग मंग्या से नाराज होते हैं, पर मंग्या गांव वालों से कहता है कि उनके जमीन के कागज मिल जाएंगे. अब वह डेनियल के साथ ‘जैसा को तैसा’ वाला कारनामा करना चाहता है.

उधर राजकुमार श्यामली भी मंग्या का साथ देने को तैयार हैं, क्योंकि राजकुमारी श्यामली के पिता व राजा इंद्रवीर ने डेनियल से समझौता किया है कि शराब फैक्टरी के लाभ में साठ प्रतिशत राजा और चालिस प्रतिशत डेनियल का होगा, तो वह श्यामली की शादी डेनियल से कर देंगे. जबकि श्यामली, डेनियल से विवाह नहीं करना चाहती. खैर, श्यामली व मंग्या मिलकर एक योजना बनाकर राजा की तिजोरी से गांव वालों के जमीन के कागजात चुराकर गांव वालों, राजा और डेनियल के सामने फाड़ देता है. डेनियल, मंग्या पर गोली चलाना चाहता है, तभी महात्मा गांधी अपने पीछे भीड़ के साथ पहुंचते हैं. उसके बाद डेनियल को वापस इंग्लैंड बुला लिया जाता है. मंग्या व सारगी की शादी तय हो जाती है. श्यामली उच्चशिक्षा के लिए वापस लंदन चली जाती हैं.

हलकी फुलकी मनोरंजक और उत्कृष्ट कलाकारों वाली फिल्म ‘‘फिरंगी’’ की सबसे बड़ी समस्या इसकी लंबाई व धीमी गति से आगे बढ़ती कहानी है. दूसरी समस्या यह है कि फिल्म की कहानी का मूल बीज 16 साल पुरानी आमीर खान की फिल्म ‘लगान’ से उठायी हुई है और दर्शक को ‘फिरंगी’ देखते हुए बार ‘लगान’ याद आती है. फिल्म कहीं न कहीं जमीन से जुड़ी हुई ‘देसी’ भी है. इसमें फिल्म के कला निर्देशक और कैमरामैन का काफी योगदान है. मगर जब आप किसी कालखंड की फिल्म बनाते हैं, तो उस कालखंड की बारीकी परदे पर नजर आनी चाहिए, उसमें फिल्मकार असफल रहे हैं. फिल्म के कई किरदारों की पोषाकें, उनके बात करने का लहजा वगैरह ब्रिटिश शासन की याद नहीं दिलाता. फिल्म का क्लायमेक्स काफी लंबा और मजाकिया है.

यह लेखक व निर्देशक की कमजोरी ही है कि फिल्म में प्रदर्शित क्रोध, खुशी, डर, प्यार सहित एक भी भावना दर्शकों के दिलों तक नहीं पहुंच पाती. सब कुछ बहुत ही सतही लगता है.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो कपिल शर्मा ने पूरी फिल्म में यह साबित करने का प्रयास किया कि वह महज हास्य कलाकार नहीं हैं, बल्कि उनके अंदर अभिनय क्षमता है और वह हर तरह के किरदार निभा सकते हैं, पर इसमें वह पूरी तरह से सफल नहीं हो पाए. पूरी फिल्म में उनके चेहरे पर एक जैसा ही भाव बना रहता है. वैसे अब सवाल यह है कि कपिल शर्मा के प्रशंसक उन्हें इस नए अवतार में देखना चाहेंगे या नहीं. जिसका जवाब तो कुछ दिनों बाद ही मिलेगा. इशिता दत्ता बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पाती हैं. इंटरवल से पहले इशिता दत्ता कुछ उम्मीदें जगाती हैं, पर इंटरवल के बाद वह भी सिर्फ बेबस लड़की बनकर रह जाती हैं. पूरे ढाई घंटे तक एक बेबस लड़की के भाव के साथ इशिता को देखते देखते दर्शक बोर हो जाता है. लालची राजा के किरदार में कुमुद मिश्रा व सारगी के पिता के किरदार में राजेश शर्मा ने काफी ठीक ठाक अभिनय किया है.

दो घंटे 41 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘फिरंगी’’ का निर्माण कपिल शर्मा ने किया है. फिल्म के निर्देशक व लेखक राजीव धींगरा, पटकथा लेखक राजीव धींगरा, संगीतकार जतिंदर शाह, कैमरामैन नवनीत मिस्सर व कलाकार हैं- कपिल शर्मा, इशिता दत्ता, मोनिका गिल, अंजन श्रीवास्तव, राजेश शर्मा, एडवर्ड सोन्नेब्लिक, कुमुद मिरा व अन्य.

हाईटेक सुविधाओं के साथ अपग्रेड किये जा रहे हैं राजधानी कोच

भारतीय रेलवे स्वर्ण योजना के तहत राजधानी ट्रेनों में हाईटेक सुविधाएं देने और ट्रेनों में आधुनिक कोच लगाने पर काम कर रही है. आपको बता दें कि हाल ही में दिल्ली-सियालदह स्वर्ण राजधानी शुरू की गई है. इसमें हाईटेक डब्बे जोड़े गए हैं और उनमें आटो-लौकिंग की सुविधा दी गई है. जिससे स्टेशन पर होने वाली गंदगी के रोका जा सके. आटो-लौकिंग सिस्टम के जरिए जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर रुकेगी टायलेट लौक हो जाएगा और ट्रेन के स्टेशन से निकलते ही टायलेट अपने आप अनलौक हो जाएगा.

इस ट्रेन के टायलेट में सिंथेटिक मार्बल और दुर्गंध न आने के लिए परफ्यूम स्प्रे का इस्तेमाल किया गया है. यही नहीं टायलेट में गीजर की सुविधा भी दी गई है और इस ट्रेन के गलियारे भी चमकदार बनाए गए हैं.

रेलवे के मुताबिक ट्रेन के कोच में बर्थ इंडिकेटर और विनायल रैपिंग होगी. हर कोच में सीसीटीवी कैमरे हर कोच में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं. कोच में शीशों के ऊपर एलईडी लाइट और पर्दे लगाए गए हैं.

इस बारे में रेलवे बोर्ड के सदस्य अरुण सक्सेना ने बताया कि स्वर्ण योजना के तहत पुराने कोचों को अपग्रेड कर उनकी सूरत बदल दी गई है. कई छोटे बड़े बदलाव कर कोचों को आरामदायक बनाया गया है. एक कोच को अपग्रेड करने के लिए 50 लाख रुपए की लागत आ रही है. गौरतलब है कि 2018 तक 13 राजधानी और 11 शताब्दी का रंग भी बदल दिया जाएगा. दोनों ट्रेनों पर गोल्डन रंग होगा.

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