2 जी स्पैक्ट्रम घोटाले के मामले में सीबीआई के फैसले से एक बात साफ हो गई है कि एक सरकारी संस्था की जांच की रिपोर्ट का मतलब कोई यह न निकाले कि दोषी वास्तव में अपराधी हैं. जयललिता और लालू प्रसाद यादव यदि अदालतों द्वारा अपराधी माने गए तो इसलिए ज्यादा कि उन के वकीलों की सफाई कमजोर थी, न कि मामला वास्तव में गंभीर था.
बिहार-झारखंड के चारा घोटाले में फंसेबंधे और अपराधी घोषित हुए लालू प्रसाद यादव का अपराध अभी पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया से नहीं गुजरा है. सरकारी कामकाज आमतौर पर इस तरह होते हैं कि मंत्री, अफसर और नौकरशाही अपने को बचा कर चलते हैं. अदालतें, खासतौर पर पहली ट्रायल कोर्ट, मामले को किस तरह देखती हैं और अपील में क्या होता है, इस के हजारों नमूने फैसलों की रिपोर्टों में दबे हैं.
सुप्रीम कोर्ट हर साल बीसियों मामलों में ट्रायल कोर्ट द्वारा अपराधी घोषित किए लोगों को अपराधमुक्त करती है क्योंकि बयानों से स्पष्ट हो जाता है कि ट्रायल के समय माहौल कुछ और होता है जब अभियुक्त भी ज्यादा गंभीर नहीं होता. एक बार अपराधी घोषित हो जाने के बाद उसे होश आता है और वह बचाव के उपाय ढूंढ़ता है. लालू प्रसाद यादव का चैप्टर अभी बंद नहीं हुआ है.
लालू प्रसाद यादव दूध के धुले हैं, यह नहीं कहा जा रहा पर यह जरूर है कि देश का सामाजिक गठन इस तरह का है कि अदालतों को जीभर के राजनीतिक स्वार्थ के उपयोग में लाया जाता है.
लालू प्रसाद यादव ने बिहार के विकास में कोई उल्लेखनीय काम किया है, ऐसा नहीं. पर उन के बाद आए नीतीश कुमार अपनी साफसुथरी छवि
के बाद भी ढीलेढाले और भाजपा की पैरोकारी करते नजर आ रहे हैं. वे जिन नरेंद्र मोदी से उन्हें हाथ तक मिलाना पसंद नहीं था, उन के सान्निध्य में रहने के बहाने ढूंढ़ने में लगे हैं.
बिहार को अब नई पीढ़ी के नेता चाहिए. लालू और नीतीश दोनों अब निरर्थक हो गए हैं. राजनीति को नए चेहरे चाहिए युवा बिहार के लिए, उसे सदियों की दलदल से निकालने के लिए.
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‘पार्टी विद अ डिफरैंस’ की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी अब बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी की तर्ज पर रंगों को ले कर राजनीति कर रही है. भाजपा केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश को भगवा रंग में रंगा देखना चाहती है. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार के हर काम में भगवा रंग छाया है.
सरकारी प्रचारप्रसार से ले कर सरकारी बिल्डिंग तक के रंग बदलने लगे हैं. मुख्यमंत्री आवास, मुख्यमंत्री सचिवालय, सूचना विभाग की प्रचार सामग्री से ले कर थाने की इमारत के रंग यहां तक कि परिवहन महकमे की बसों के रंग भी बदले गए हैं.
उत्तर प्रदेश में इस से पहले समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने भी पार्टी के रंग में प्रदेश को रंगने का काम किया था. उस समय भाजपा इस बात की बुराई करती थी. अब वह खुद पार्टी के भगवा रंग में पूरे प्रदेश को रंग रही है तब उस का कहना यह है कि भगवा ऊर्जा का रंग होता है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संत समाज से हैं. वे भगवा कपड़े पहनते हैं. जब वे मुख्यमंत्री बने तो उन के सरकारी आवास को उन के रहनसहन के हिसाब से बनाया जाने लगा. हवनपूजन कर के मुख्यमंत्री आवास ही नहीं, बल्कि उस के सामने की सड़क तक को शुद्ध किया गया. इस के लिए गोरखपुर से खासतौर पर पुजारी बुलाए गए.
योगी आदित्यनाथ संत हैं, ऐसे में यह बात जनता ने स्वीकार कर ली. इस के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय और सरकारी बसों के रंग बदले गए. सरकारी प्रचार और दूसरे आयोजनों की कलर स्कीम बदल दी गई. इस के बाद हर सरकारी काम में भगवा रंग का असर पड़ने लगा. जहां भी नया रंगरोगन शुरू हुआ, भगवा रंग छा गया.
बुराई से बदल गया रंग
उत्तर प्रदेश के विधानसभा भवन के एक तरफ भाजपा का प्रदेश कार्यालय है, जिस की बाहरी दीवार भगवा रंग में रंगी है. बीच में विधानसभा का नया लोकभवन है, जो राजस्थानी पत्थर से बना है. इस के आगे उत्तर प्रदेश हज कमेटी का भवन है, जिस की दीवार सफेद रंग से रंगी थी. 3 जनवरी, 2018 को नए साल में इस की दीवार को भगवा रंग में रंग दिया गया. हज कमेटी का संबंध मुसलिम समाज से है. ऐसे में भगवा रंग रंगने की बुराई होने लगी.
भाजपा के मुसलिम नेताओं ने भी यह कहना शुरू कर दिया कि भगवा रंग ऊर्जा का रंग है. इस में कोई हर्ज नहीं. भाजपा में शामिल तमाम मुसलिम नेता भगवा रंग में रंग चुके हैं. भगवा गमछा और सदरी इन के पहनावे की खास पोशाक बन गई है.
समाज के दूसरे तबके में हज कमेटी के दफ्तर को भगवा रंग में रंगने की बुराई शुरू हो गई. भाजपा के रणनीतिकारों ने भी इस को सही कदम नहीं माना. ऐसे में दूसरे दिन भगवा रंग को वापस सफेद किया गया. सरकार ने इस मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं की. यह कह कर सफाई दी कि रंगरोगन करने वाले ठेकेदार ने गलती से इसे कर दिया था.
यह बात हजम होने वाली नहीं है. लोकसभा चुनाव से ले कर विधानसभा और निकाय चुनाव तक भाजपा को केवल हिंदुत्व का ही साथ काम आया है. यह हिंदुत्व का ही उभार था जिस के दबाव में जनता नोटबंदी, जीएसटी और महंगाई जैसे मुद्दों को छोड़ भाजपा को वोट दे आई. ऐसे में भाजपा पूरे देश में इस भगवा रंग का प्रचार करना चाहती है. यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनावी प्रचार में उत्तर प्रदेश से बाहर प्रमुखता के साथ बुलाया गया. गुजरात, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में वे पार्टी के स्टारप्रचारक बन गए. योगी सरकार में मुख्यमंत्री के प्रभाव का पूरा देश गवाह है, ऐसे में बिना सरकार की जानकारी में आए हज कमेटी की दीवार सफेद से भगवा कैसे हो सकती है? यह विचार का विषय है.
अलग होती हैं पार्टी और सरकार
इस देश का संविधान पार्टी और सरकार को अलग मानता है. संविधान मानता है कि चुनाव लड़ने के बाद जीत कर सरकार बनाने वाले विधानसभा सदस्य देश और प्रदेश की जनता का खयाल रखने वाले होते हैं. उन के लिए पार्टी और गैरपार्टी का कोई मतलब नहीं होता है. उन को सभी को समान नजर से देखना चाहिए. जनता को भी सरकार पर पूरा हक होता है. यही वजह है कि किसी भी सरकार में उस का रंग अलग होता है.
हाल के कुछ सालों में अलगअलग दलों ने पार्टी के रंग में सरकार को रंगने का प्रयास शुरू किया. उस समय उन सरकारों की भरपूर आलोचना भी हुई. भाजपा भी इस बात की समर्थक थी कि सरकार और पार्टी का रंग अलग होना चाहिए.
उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्त और राजनाथ सिंह की सरकारें रही हैं. उन के समय में सरकार पर कभी भगवा रंग नहीं चढ़ा. योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार पर भगवा रंग चढ़ने लगा, जो किसी भी तरह से संविधान के अनुकूल नहीं कहा जा सकता है.
जिस बात के लिए भाजपा कभी सपा व बसपा को गलत बताती थी, आज खुद उसी राह पर है. भाजपा इस बात को समझती है कि देश में केवल एक वर्ग का साथ ले कर वह सरकार कायम नहीं रख पाएगी. इस कारण ही वह मुसलिम कानून में सुधार कर खुद को उदारवादी दिखना चाहती है. तीन तलाक कानून से ले कर मदरसों में शिक्षा के आधुनिकीकरण के पीछे यही सोच साफ दिखती है.
भाजपा एक तरफ हिंदुत्व में पुरानी सनातनी कानून की पक्षधर दिखती है तो दूसरी तरफ मुसलिमों में वह उदारवादी सोच के साथ दिखना पसंद करती है. ये विरोधी काम एकसाथ करना कठिन है. इस को बनाए रखने के लिए ही वह भगवा रंग का सहारा ले रही है, जिस से उसे हिंदुत्व को ले कर कुछ कहना न पड़े और लोगों को भगवा में हिंदुत्व का उभार दिखता रहे.
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कुछ दिन पहले सूत्रों पता चला था कि ‘‘टी सीरीज’’ की दिव्या खोसला कुमार ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए फिल्म ‘‘बत्ती गुल मीटर चालू’’ की सह निर्माण कंपनी ‘‘क्रियाज इंटरटेनमेंट’’ की प्रेरणा अरोड़ा से साफ साफ कह दिया था कि फिल्म से पुलकित सम्राट की तथाकथित प्रेमिका यामी गौतम को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए. और तब माना गया था कि यामी गौतम की फिल्म ‘‘बत्ती गुल मीटर चालू’’ से छुट्टी हो जाएगी.
मगर ऐसा कुछ नहीं हो पाया. वास्तव में फिल्म ‘‘बत्ती गुल मीटर चालू’’ के निर्देशक श्री नारायण सिंह ने यामी गौतम को बचा लिया. श्री नारायण सिंह ने साफ कर दिया कि फिल्म ‘‘बत्ती गुल मीटर चालू’’ में यामी गौतम सेकंड लीड के रूप में जुड़ी रहेंगी. इस फिल्म में शाहिद कपूर के साथ मुख्य हीरोईन श्रद्धा कपूर हैं. बिजली चोरी पर आधारित इस फिल्म में शाहिद कपूर और यामी गौतम वकील की भूमिकाओं में हैं.
उधर यामी गौतम ने कहा है- ‘‘मैं श्री नारायण सिंह निर्मित फिल्म ‘बत्ती गुल मीटर चालू’ में शाहिद कपूर के साथ सेकंड लीड कर रही हूं. इस फिल्म में मैं वकील की भूमिका निभाने वाली हूं’’.
फिल्म जुनूनियत और सनम रे में पुलकित और यामी ने एक दूसरे के अपोजिट काम किया था. दोनों फिल्में टी-सीरीज के बैनर तले बनीं थी.
इस दौरान दोनों एक्टर्स के बीच में अफेयर की खबरों ने जोर पकड़ना शुरू किया. इस दौरान यामी ने इस खबर को मात्र अफवाह बताया. वहीं यामी ने एक इवेंट के दौरान इसका जिम्मेदार फिल्म प्रोडक्शन की टीम को ठहराया.
दरअसल, टी सीरीज के हेड भूषण कुमार की पत्नी दिव्या खोसला कुमार और यामी गौतम का सामना साल 2016 में फिल्म ‘सनम रे’ के एक प्रमोशन इवेंट पर हुआ था.
इस प्रमोश्नल इवेंट में यामी से पुलकित सम्राट और उनके अफेयर के बारे में जब सवाल पूछा गया तो यामी ने कहा कि ये खबर फिल्म की प्रोडक्शन टीम की तरफ से आई है. वहीं यामी ने कहा कि इस बारे में उन्हें कुछ नहीं पता.
इसके बाद दिव्या को ये बात अच्छी नहीं लगी कि यामी ने इस खबर के लिए टीम पर सीधे-सीधे उंगली उठाई है. फिल्म रिलीज के बाद टी सीरीज ने यामी को फिर कोई फिल्म औफर नहीं की. इसके बाद साल 2016 में ही आई फिल्म जुनूनियत के दौरान भी एक्ट्रेस यामी फिल्म को ज्यादा प्रमोट करती नजर नहीं आईं थीं. यही वजह है कि टीसीरीज अब यामी से डिमांड कर रहा है कि इस विवाद पर वह उनसे माफी मांगे.
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16 फरवरी को प्रदर्शित हो रही ओनीर निर्देशित फिल्म ‘‘कुछ भीगे अल्फाज’’ से बौलीवुड में बतौर अभिनेता कदम रख रहे अभिनेता जेन खान दुर्रानी मूलतः श्रीनगर के रहने वाले उर्दू भाषी पंजाबी हैं. श्रीनगर में जेन खान दुर्रानी के परिवार के सदस्य प्रशासन व कानून व्यवस्था से भी जुड़े रहे हैं, पर जेन भी आज तक कश्मीर के हालात व उसकी वजह को समझ नहीं पाए.
हाल ही में जब जेन खान दुर्रानी से कश्मीर को लेकर हमारी बातचीत हुई, तो जेन खान ने कहा- ‘‘मेरे नाना जी पुलिस विभाग से अवकाश प्राप्त कर चुके हैं. मेरे दादाजी जज थे. मेरे दूसरे दादाजी आगा खान दुर्रानी वहां पर गर्वनर/राज्यपाल रहे हैं. मेरे एक दादाजी वहां की सर्विस कमीशन के चेयरमैन रहे हैं. मगर वहां पर जो मसले हैं, उसे कौन समझ पाया? मसला चाहे जो हो, मगर नुकसान तो युवा पीढ़ी का हो रहा है. आवाम को नुकसान हो रहा है. सुविधाएं होते हुए भी लोगों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं.
मैं किसी पर दोषारोपण नहीं कर रहा हूं. फिर भी जिस वजह से भी यह हालात रहे हों, वह कीमती समय तो कश्मीरी आवाम व कश्मीरी युवा पीढ़ी के हाथ से चला गया. पढ़ाई का नुकसान हो रहा है. कश्मीर बहुत खूबसूरत जगह है, पर जब मैं वहां जाता हूं, वहां के युवा वर्ग से मिलता हूं, अपने दोस्तों से मिलता हूं, जो हालात देखता हूं, तो मेरा मन अवसाद से भर जाता है. मुझे अपनी उम्र के लोगों की हालत देखकर तकलीफ होती है. कश्मीर के लोगों को काम करने के लिए कश्मीर से बाहर जाना पड़ता है. आलम ऐसा है कि सुबह से शाम हो जाएगी बात करते हुए पर समझ में नही आएगा कि असली मसला क्या है?’’
कवि हृदय होते हुए जेन खान दुर्रानी कश्मीर के हालात पर कुछ न लिखें, ऐसा तो नही हो सकता. जेन खान दुर्रानी ने कश्मीर को लेकर कुछ कविताएं लिखी हैं. खुद वह बताते हैं- ‘‘मैने कश्मीर को लेकर लिखा है. उर्दू में कश्मीरी पंडितों की स्थिति पर एक कविता लिखी है. मेरी एक ‘मजबूरी’ नामक कविता है. जिसकी कुछ पंक्तियां हैं ‘चाहता तो हूं, तेरे साथ रहना, पर…चाहता तो हूं तुम्हारे दामन में सिर रखकर सोना..’ मुझे पता है कि हर दिन लिखा जा रहा है. जिसे पढ़कर हर इंसान का दिल अवसाद से भर जाता है. ऐेसे मे मैं रोमांस की बातें लिखकर उन्हें अलग सुकून दिलाने की बात सोचता हूं. मैं चाहता हूं कि लोग मेरी कविताएं पढ़कर रोमांस के बारे में सोचें और कुछ वक्त के लिए अपने दर्द को भूल जाएं.’’
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न्यूलैंड में तीसरे वनडे में टीम इंडिया ने मेजबान टीम को करारी शिकस्त दी है, लेकिन मैच से पहले यहां पर देश की प्रतिष्ठा के साथ खिलवाड़ हुआ. दक्षिण अफ्रीका के न्यूलैंड में मैच शुरू होने से पहले तिरंगा को उल्टा फहराया गया था. इस दौरान तिरंगे में हरी पट्टी ऊपर की ओर थी. कई दर्शकों ने सोशल मीडिया पर तुरंत इस मुद्दे को उठाया और दक्षिण अफ्रीकी टीम प्रशासन ने इस बाबत कार्रवाई की मांग की.
आपको यह जानकार हैरानी होगी की टेस्ट मैच के दौरान भी इसी मैदान पर यही गलती दुहराई गई थी. दक्षिण अफ्रीका के साथ पहले टेस्ट में न्यूलैंड में भी यही गलती की गई थी. बावजूद इसके न्यूलैंड के अधिकारियों द्वारा फिर से इसी गलती को दुहराया जाना काफी आश्चर्यजनक है.
एक ही गलती बार-बार दुहराये जाने को खेल प्रेमियों ने लापरवाही से जोड़कर देखा है. भारतीय खेल प्रेमियों ने न्यूलैंड के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
It happened on the eve of the first test match at Newlands. And now yet again it happened on the eve of the third ODI between #INDvSA at the same venue. Hope the tricolour is hoisted correctly before the match gets underway. @BCCI@OfficialCSApic.twitter.com/sFSBoWQOV1
हालांकि टीम इंडिया ने बुधवार (7 फरवरी) को मैदान पर शानदार प्रदर्शन किया. भारत ने कप्तान विराट कोहली (नाबाद 160) के शतक और शिखर धवन (76) के अर्धशतक केबाद कुलदीप यादव तथा युजवेंद्र चहल के दम पर बुधवार को न्यूलैंड्स मैदान पर खेले गए मैच में मेजबान दक्षिण अफ्रीका को 124 रनों से हरा दिया. इसी के साथ भारत ने छह वनडे मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त ले ली है.
भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पूरे 50 ओवर खेलने के बाद छह विकेट के नुकसान पर 303 रन बनाए थे. मेजबान टीम के बल्लेबाजों का बल्ला इस मैच में भी शांत रहा और पूरी टीम 40 ओवरों में 179 रनों पर पवेलियन लौट कर लगातार तीसरी हार को मजबूर हो गई. कुलदीप और चहल ने चार-चार विकेट लिए. जसप्रीत बुमराह को दो सफलताएं मिलीं.
दक्षिण अफ्रीका की तरफ से ज्यां पौल ड्यूमिनी ने सबसे ज्यादा 51 रनों की पारी खेली. चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करने उतरी मेजबान टीम को बुमराह ने दूसरे ओवर की पहली गेंद पर ही बड़ा झटका दे दिया. हाशिम अमला (1) एक के कुल स्कोर पर बुमराह की गेंद पर पगबाधा करार दे दिए गए. हालांकि उनके जाने के बाद कप्तान एडिन मार्कराम (32) और ड्यूमिनी ने टीम को बखूबी संभाला. यह जोड़ी अच्छे से टीम के स्कोर बोर्ड को चला रही थी. स्कोर 79 था और तभी यह साझेदारी टूट गई.
इस मैच में भारतीय कप्तान कोहली ने बल्ले से अपने शानदार फौर्म को जारी रखते हुए अपने वनडे करियर का 34वां शतक जड़ा. उन्होंने धवन के साथ दूसरे विकेट के लिए 140 रनों की साझेदारी की. धवन के आउट होने के बाद भारत ने कुछ विकेट लगातार खो दिए और लग रहा था कि मेहमान टीम बड़े स्कोर से महरूम रह जाएगी, लेकिन कप्तान ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया और एक छोर पर खड़े रहते हुए अपनी टीम को मजबूत स्कोर प्रदान किया.
कोहली ने अपनी नाबाद पारी में 159 गेंदों का सामना किया और 12 चौकों के अलाव दो छक्के लगाए. कोहली ने धवन के जाने के बाद अपना शतक पूरा किया. यह कप्तान के तौर पर उनका 12वां शतक है. इसी के साथ वह सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले भारतीय कप्तान बन गए हैं. कोहली ने साथ ही इस मैच में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे में अपने 1000 रन पूरे किए.
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सवाल मैं 45 वर्षीय और 2 बच्चों की मां हूं. मैं जब खांसती हूं या जब किसी कारण पेट पर दबाव पड़ता है, तो मेरा यूरिन लीक हो जाता है. मैं बहुत परेशान हूं. बताएं क्या करूं?
जवाब
इस समस्या को प्रैस इन्कौंटीनैंस कहते हैं. जब किसी कारण से पेट पर दबाव पड़ता है तो यूरिन निकल जाता है. ऐसा इसलिए होता है कि जो मांसपेशियां यूरिन होल्ड करती हैं वे लूज हो जाती हैं. यूरिन लीक होने की समस्या उन महिलाओं में अधिक होती है जिन की सामान्य डिलिवरी होती है. इस से राहत पाने के लिए आप नियमित ऐक्सरसाइज करें और पोषक भोजन का सेवन करें.
डाक्टर द्वारा सुझाई गई ऐक्सरसाइज करें, जिस से ब्लैडर की मांसपेशियां मजबूत बन जाएं. पानी और चाय का सेवन कम करें. 1-2 घंटों में यूरिन पास कर लें, क्योंकि ब्लैडर जितना अधिक भरा होगा, उतनी ज्यादा यूरिन लीक होने की आशंका बढ़ जाएगी.
अगर ये सब उपाय करने के बाद भी समस्या बनी रहती है, तो आप औपरेशन करा लें. औपरेशन के द्वारा टैप मांसपेशियों को टाइट कर दिया जाता है.
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महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन का बढ़ता जोखिम
यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन या यूटीआई (यह ट्रैक्ट शरीर से मुख्यरूप से किडनी, यूरेटर ब्लैडर और यूरेथरा से मूत्र निकालता है) एक प्रकार का विषाणुजनित संक्रमण है. यह ब्लैडर में होने वाला सब से सामान्य प्रकार का संक्रमण है लेकिन कई बार मरीजों को किडनी में गंभीर प्रकार का संक्रमण भी हो सकता है जिसे पाइलोनफ्रिटिस कहते हैं.
यौनरूप से सक्रिय महिलाओं में यह अधिक होता है क्योंकि यूरेथरा सिर्फ 4 सैंटीमीटर लंबा होता है और जीवाणु के पास ब्लैडर के बाहर से ले कर भीतर तक घूमने के लिए इतनी ही जगह होती है. डायबिटीज होने से मरीजों में यूटीआई होने का खतरा दोगुना तक बढ़ जाता है.
डायबिटीज से बढ़ता है जोखिम
– डायबिटीज के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, इसलिए शरीर जीवाणुओं, विषाणुओं और फुंगी से मुकाबला करने में अक्षम हो जाता है. इस वजह से डायबिटीज से पीडि़त मरीजों को अकसर ऐसे जीवाणुओं की वजह से यूटीआई हो जाता है. इस में सामान्य एंटीबायोटिक काम नहीं आते हैं.
– लंबी अवधि की डायबिटीज ब्लैडर को आपूर्ति करने वाली नसों को प्रभावित कर सकती है जिस की वजह से ब्लैडर की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं जो यूरिनरी सिस्टम के बीच सिग्नल को प्रभावित कर ब्लैडर को खाली होने से रोक सकती हैं. परिणामस्वरूप, मूत्र पूरी तरह से नहीं निकल पाता है और इस की वजह से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.
– मेटाबोलिक नियंत्रण खराब होने से डायबिटीज से पीडि़त मरीज में किसी प्रकार के संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है.
– कुछ नई एंटीडायबिटीक दवाओं की वजह से मामूली यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन हो सकता है.
क्या हैं लक्षण
लोअर यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन
– पेशाब करते हुए दर्द होना.
– पेशाब में जलन महसूस होना.
– तत्काल पेशाब करने की जरूरत महसूस होना.
– असमंजस.
– क्लाउडी यूरिन.
– पेशाब में से अजीब सी बदबू आना.
– पेशाब में खून.
– पेट के निचले हिस्से में दर्द.
– पीठ में दर्द.
अपर यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन
– सर्दी के साथ तेज बुखार.
– उलटी होना.
– पेट के निचले हिस्से में दर्द.
– बगल में दर्द.
आमतौर पर इन लक्षणों का मतलब होता है कि संक्रमण किडनी तकपहुंच चुका है. इस गंभीर समस्या से नजात पाने के लिए अस्पताल में भरती होने की जरूरत हो सकती है. तत्काल उपचार से लक्षणों से भी छुटकारा मिल सकता है और संक्रमण के फैलने से भी बचा जा सकता है. कई दुर्लभ मामलों में यूटीआई की वजह से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जैसे किडनी को नुकसान या फिर किडनी फेल होना. यूटीआई का पता लगाने के लिए बैक्टीरिया और पस के लिए एक अत्यंत साधारण मूत्र परीक्षण काफी है. एंटीबायोटिक को ले कर संवेदनशीलता के लिए यूरिन कल्चर, पेट का अल्ट्रासाउंड और गंभीर मामलों में सीटी स्कैन किया जाता है.
उपचार
लोअर यूटीआई, जो जटिल नहीं होता है, का उपचार बाहरी रोगी के तौर पर ओरल एंटीबायोटिक के साथ डाक्टर की उचित देखरेख में किया जा सकता है. कोई भी रेनल या कार्डिएक बीमारी न होने पर विभिन्न प्रकार के ओरल फ्लुइड्स लेने की सलाह दी जा सकती है. उपचार करने वाले डाकटर की अनुमति से दर्द में राहत देने वाली सुरक्षित दवाएं दी जा सकती हैं. दर्दनिवारक दवाओं से आमतौर पर बचना चाहिए क्योंकि इन से किडनी को नुकसान हो सकता है.
जटिल यानी अपर यूटीआई के लिए अस्पताल में भरती होने के साथ लंबे समय तक एंटीबायोटिक लेनी पड़ती है.
पौलीस्टिक ओवरियन सिंड्रोम और डायबिटीजका संबंध
यह ऐसी परिस्थिति है जो बच्चे पैदा करने की उम्र की महिलाओं को बड़े पैमाने पर प्रभावित करती है जहां उन के अंडाशय की सतह पर असामान्य छोटे दर्दरहित सिस्ट होते हैं. इस के अलावा उन में असामान्यरूप से अधिक मात्रा में पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरौन होते हैं और अन्य हार्मोन का असामान्य अनुपात होता है जिस के परिणामस्वरूप शरीर में इंसुलिन की मात्रा उच्च होने के साथ ही अनियमित मासिकचक्र होता है.
संकेत
– अनियमित मासिकधर्म.
– ओलिगोमेनोहोयिया यानी मासिकचक्र के दौरान कम रक्तस्राव.
– चेहरे, छाती और निपल के पास अधिक बाल.
– एक्ने.
– बांझपन.
– अधिक वजन.
कारक
इंसुलिन प्रतिरोध और वजन बढ़ना पौलीसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम यानी पीसीओएस के 2 प्रमुख कारक हैं. इंसुलिन प्रतिरोध की वजह से शरीर में सामान्य से अधिक इंसुलिन का उत्पादन होता है जिसे हाइपरइंसुलिनेमिया कहते हैं. अधिक मात्रा में इंसुलिन की वजह से अंडाशय में अत्यधिक मात्रा में टेस्टोस्टेरौन होता है जिस की वजह से सामान्य अंडोत्सर्ग पैदा हो सकता है.
अधिक मात्रा में इंसुलिन की वजह से वजन भी बढ़ सकता है जिसे टाइप 2 डायबिटीज और पीसीओएस से जोड़ा जा सकता है. पीसीओएस से पीडि़त महिलाओं में कम उम्र में डायबिटीज होने का जोखिम चारगुना अधिक होता है.
पीसीओएस से पीडि़त कई मरीजों में मेटाबोलिक सिंड्रोम होते हैं जिन में पेट पर मोटापा, बैड कोलैस्ट्रौल सीरम ट्रिगलीसेराइड्स का बढ़ना, गुड कोलैस्ट्रौल का घटना, सीरम हाई डैंसिटी लिपोप्रोटिन और रक्तचाप बढ़ना शामिल हैं.
पीसीओएस से पीडि़त महिलाओं में कोरोनरी आर्टरी कैल्शिफिकेशन और बढ़ा हुआ कैरोटिड इंटिमा की मोटाई देखने को मिलती है.
बचाव
– जीवनशैली प्रबंधन, खाने पर ध्यान और व्यायाम करें.
– वजन कम करें.
– डाक्टर से सलाह कर इंसुलिन सैंसिटाइजर्स मैडिकेशन मेटफौर्मिन का इस्तेमाल किया जा सकता है.
– हार्मोनली मैडिकेशन.
जेस्टेशनल डायबिटीज मेलिटस
जब गर्भवती मां में गर्भवती होने के दौरान पहली बार ग्लूकोज प्रतिरोध अनियमित पाया जाता है तो उसे जेस्टेशन डायबिटीज कहते हैं. ऐसी महिलाओं में भ्रूण द्वारा अधिक मात्रा में ग्लूकोज लेने के परिणामस्वरूप बड़े आकार के बच्चे को जन्म देने का जोखिम होता है. अधिक ब्लड ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित न करने पर नवजात बच्चे की मौत का खतरा बना रहता है.
जेस्टेशनल डायबिटीजका इलाज
– औब्सेट्रेटीशियन की सलाह के साथ नियमित व्यायाम करें.
– न्यूट्रीशनिस्ट के पास जाएं और कम कार्बोहाइड्रेट अनुपात वाला डाइट चार्ट बनवाएं.
– हर दिन ब्लड ग्लूकोज का स्तर जांचें.
– नियमितरूप से अपने डायबिटीज डाक्टर और औब्सेट्रेटीशियन से मिलें.
– जरूरत पड़ने पर आप को इंसुलिन लेने की सलाह दी जा सकती है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान एंटी डायबिटीक दवाएं नहीं ली जा सकती हैं.
डिलीवरी के बाद क्या करें
– जेस्टेशन डायबिटीज वाली महिलाओं में डायबिटीज होने का जोखिम सामान्य जेस्टेशन वाली महिलाओं के मुकाबले कम रहता है.
– डिलीवरी के 6-12 हफ्तों बाद पोस्ट पारटम ओरल ग्लूकोज टौलरैंस किया जाना चाहिए और उस के बाद प्रत्येक 3 वर्षों में एक बार.
– महिला को सख्त जीवनशैली का पालन अवश्य करना चाहिए और अपना वजन कम करने की कोशिश करनी चाहिए व बीएमआई बरकरार रखनी चाहिए.
– नियमित एरोबिक और मांसपेशियों को मजबूती देने वाले व्यायाम अवश्य करने चाहिए.
– महिलाओं में धूम्रपान अधिक नुकसान पहुंचा सकता है क्योंकि इस से इंसुलिन का स्तर बढ़ता है जिस से इंसुलिन प्रतिरोध पैदा होता है जिस के परिणामस्वरूप डायबिटीज बढ़ सकती है. या इस से ठीक उलट भी हो सकता है क्योंकि डायबिटीज से पीडि़त मरीज, जो धूम्रपान करता है, की बीमारी ठीक करना बहुत मुश्किल होता है.
– धूम्रपान करने वाली महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले कार्डियोवैस्क्यूलर जटिलताएं विकसित होने का खतरा अधिक रहता है.
– धूम्रपान करने वाली महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन का खतरा अधिक रहता है जिस की वजह से समय से रजोनिवृत्ति, हड्डियों में कमजोरी यानी ओस्टियोपोरोसिस जैसी चीजें हो सकती हैं.
– कुछ अध्ययन बताते हैं कि मासिकचक्र में अनियमितता, ओवरियन सिस्ट इंफर्टिलिटी धूम्रपान से जुड़ी हैं.
– गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने वाली महिलाओं में समय से पहले जन्म देने, अस्थानिक गर्भावस्था, मृतबच्चे का जन्म, बच्चे के कम वजन जैसे खतरे होते हैं.
यूटीआई से कैसे बचें
– सख्त ग्लाइकैमिक नियंत्रण.
– अगर कोई रेनल या कार्डिएक समस्या न हो तो अधिक मात्रा में तरल लें.
– अच्छा जेनाइटल हाइजिन बनाए रखें.
– सैनिटरी नैपकिंस को बारबार बदलें.
– ब्लैडर को लगातार खाली करती रहें.
– प्रसूति रोग विशेषज्ञ से चर्चा करने के बाद रजोनिवृत्त हो चुकी महिलाएं एस्ट्रोजेन क्रीम का इस्तेमाल कर सकती हैं.
– यौनसंबंध बनाने के बाद उचित साफसफाई पर ध्यान दिया जाना चाहिए.
– यूटीआई का खतरा पैदा करने वाली एंटीडायबिटीक दवाओं के बारे में डायबिटीक विशेषज्ञ डाक्टर से सलाह लें.
– लैक्स ब्लैडर का उपचार किया जाना चाहिए.
थायरायड और डायबिटीज
– थायरायड विकार एक पैथोलौजिकल स्थिति है जो डायबिटीज नियंत्रण को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है और इस में मरीज के परिणामों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने की क्षमता होती है.
– थायरायड बीमारी डायबिटीज के सब से सामान्यरूप में पाई जाती है और यह अधिक उम्र के साथ जुड़ी होती है. खासतौर पर टाइप 2 डायबिटीज और टाइप 1 डायबिटीज में औटोइम्यून बीमारियां जुड़ी होती हैं.
– थायरायड विकार शरीर के मेटाबोलिक नियंत्रण को प्रभावित करता है और इसलिए ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित करना मुश्किल होता है.
– थायरायड प्रोफाइल मरीजों को औटोइम्यूनिटी पर संशय होने पर थायरायड औटोएंटीबौडी की भी जांच करानी चाहिए.
– ब्लड ग्लूकोज प्रबंधन के साथ उचित ढंग से नजर रखने के साथ ही थायरायड का उचित उपचार किया जाना चाहिए.
जेस्टेशनल डायबिटीज मेलिटस की स्थिति में गर्भधारण के दौरान नवजात को जान का खतरा रहता है.
– डा. अमृता घोष, डा. अनूप मिश्रा
(फोर्टिस अस्पताल, दिल्ली)
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आजकल ज्यादातर लोग एंड्रौयड स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं. आपने अक्सर ही देखा होगा कि कुछ महिनों बाद ही फोन में दिक्कतें आना शुरू हो जाती है, लेकिन कभी सोचा है कि ये दिक्कतें क्यों आ रही हैं, कहीं उसमें वायरस तो नहीं. आप तो जानते ही हैं कि आज के समय में सबसे बड़ी दिक्कत वायरस की है. अगर फोन में वायरस आ जाता है तो फोन में अपने आप कई दिक्कतें आने लगती हैं. चलिए आज हम आपको बताते हैं कि कैसे आप पता कर सकते हैं कि आपके फोन में वायरस है या नहीं है.
फोन गर्म होना
फोन पर इंटरनेट चलाने और वीडियो देखने पर फोन गर्म हो जाता है, लेकिन वायरस आने पर स्मार्टफोन रखे-रखे या वौयस कौल करने पर भी गर्म होने लगता है. अगर आपके फोन के साथ ऐसा हो रहा है तो हो सकता है कि उसमें वायरस हो.
डेटा डिलीट और फाइल करप्ट होना
वायरस आने पर स्मार्टफोन का डेटा अपने आप ही डिलीट होने लगता है और फाइल खुद ब खुद करप्ट होने लगती है. फोटो और वीडियो जो पहले खुलते थे अचानक से खाली हो जाते हैं या फाइल फौर्मेट बदल जाने की वजह से खुलते नहीं हैं.
फोन स्लो होना
एंड्रौयड स्मार्टफोन में वायरस आने के बाद फोन स्लो हो जाता है. फोन की मैमोरी फुल होने पर आमतौर पर कैमरा और ब्राउजिंग स्लो हो जाती है, लेकिन वायरस आने पर साधारण कौल, मैसेजिंग और टाइपिंग के दौरान भी फोन की स्पीड कम हो जाती है और कई सारी दिक्कतें भी सामने आने लगती है.
बैटरी वीक होना
एंड्रौयड स्मार्टफोन में वायरस आने का यह भी एक अहम संकेत है. फोन में बैटरी बहुत जल्दी खत्म होने लगती है. फोन की बैटरी पुरानी है और जल्दी वीक हो रही है, तो यह साधारण बैटरी की समस्या है, लेकिन यह दिक्कत अचानक हुई है तो आप सचेत हो जाए क्योंकि आपके फोन में वायरस है .
ज्यादा पौपअप ऐड
आपके फोन में वायरस है तो इंटरनेट ब्राउजिंग या किसी ऐप का इस्तेमाल करते वक्त पौपअप ऐड आएंगे. किसी भी शब्द पर लिंक बन जाएगा या खुद से खुल कर सामने आ जाएंगे.
ज्यादा बिल आना
फोन में वायरस आने का असर आपके बिल में भी दिख सकता है. वायरस फोन में कोई सर्विस एक्टिव कर देता है या इसकी वजह से बैकग्राउंड में कुछ डाउनलोड होता रहता है. यदि आप प्रीपेड यूजर हैं तो बैलेंस खत्म हो जाएगा और पोस्टपेड उपभोक्ता का बिल ज्यादा आ सकता है.
डेटा जल्दी खत्म होना
एंड्रौयड फोन में ज्यादातर वायरस इंटरनेट से ही आते हैं और वायरस अटैक की स्थिति में डेटा जल्दी खत्म होने लगता है. अगर आपका डेटा प्लान पहले एक महीने आराम से चलता था तो वायरस आने की स्थिति में यह 10-15 दिन या इससे भी कम समय में खत्म हो जाएगा.
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अंडर-19 विश्व कप जीतकर भारत आने के बाद कप्तान पृथ्वी शा और कोच राहुल द्रविड़ ने मुंबई के जे मैरियट होटल में आयोजित प्रेस कौन्फ्रैंस में भारतीय क्रिकेट के लिहाज से कई बड़ी अहम बातें कीं. कोच राहुल द्रविड ने टीम के प्रदर्शन को लेकर पूछे जा रहे एक के बाद एक सवालों का बहुत ही सकारात्मक जवाब दिया, तो वहीं, कोच पृथ्वी शा ने भी अपने कोच, सहयोगी स्टाफ और बीसीसीआई का शुक्रिया अदा किया.
प्रेस कौन्फ्रैंस के दौरान राहुल द्रविड़ से एक पत्रकार ने उनके पाकिस्तानी ड्रेसिंग रूम में जाने के बारे में सवाल करते हुए कहा कि वे पाकिस्तान को सेमीफाइनल में हराने के बाद उनके ड्रेसिंग रूम में क्यों गए थे? इस सवाल के जवाब में राहुल द्रविड़ ने उस पत्रकार को बीच में रोका और कहा कि वो पाकिस्तान के ड्रेसिंग रूम में गए ही नहीं थे.
बता दें कि पाकिस्तान अंडर-19 टीम के मैनेजर नदीम खान ने यह कहा था कि राहुल द्रविड़ भारत से करारी हार के बाद पाकिस्तानी ड्रेसिंग रूम में आए थे. नदीम खान ने अपने एक बयान में कहा था कि मैच के बाद राहुल उनके ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने पहुंचे थे. नदीम खान ने कहा था कि राहुल ने खेल भावना का परिचय दिया था. उनके ऐसा करने से हमारे मन में उनका कद और बढ़ गया है.
कोच राहुल द्रविड ने कहा “उनके पास प्रतिभाशाली लेफ्ट आर्म बौलर हैं जिन्होंने टूर्नामेंट में बहुत ही शानदार गेंदबाजी की थी, जिसे देखते हुए मैंने उन्हें बस बधाई दी थी. मैं पाकिस्तान अंडर 19 टीम के मैनेजर से ड्रेसिंग रूम के बाहर मिला था और कहा कि टूर्नामेंट में अच्छा खेला. एक कोच होने के नाते अच्छी प्रतिभा को प्रोत्साहित करना हमारा कर्तव्य है.” इसके बाद राहुल द्रविड ने कहा, पाकिस्तान टीम के कोच कई बार मुझसे कह चुके हैं आपके खिलाड़ी जिस तरह खेलते हैं उनमें क्रिकेट का एक स्टैंडर्ड दिखाई देता है. मैंने यह बात स्वीकार की है कि उनके पास भी बहुत से प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं.”
मालूम हो कि वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने पाकिस्तान को सौ रन पर ही सिमेट कर अपनी जीत दर्ज की थी.
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