Download App

धर्मराज

नहीं बचा सके तुम लाज
अपनी द्रौपदी की
चाहिए आज कितने भीम
पैदा हो गए हैं दुशासन बहुत

द्रौपदी
तुम को तो फिर भी
मिल गया था दुशासन की
छाती का लहू
केश धोने को

आज की द्रौपदियां
विवश हैं रोने को

गर होती तुम आज तो
कोई अर्जुन तुम्हारे लिए
गांडीव नहीं उठाता

नहीं बची अब चेतना
इंद्र के गुनाहों पर
बना दी गई हैं पत्थर की
अहल्याएं कई

आज के रावण के
केवल दस शीश नहीं हैं

वे खड़े हैं
हर गलीनुक्कड़ पर
तुम आज किसी अवतार की
राह मत जोहो
तुम समेट अपनी शक्ति
करो कोशिश पुरजोर

यह जग जंग का
मैदान है

तुम डट जाओ इस पर
कोई आंधी नहीं बुझा सकेगी
तुम्हारी हिम्मत के दीप को
कोई पराजय नहीं बदल
पाएगी तुम्हारी जीत को.
– अनु

VIDEO : गर्मियों के लिए बेस्ट है ये हेयरस्टाइल

ऐसे ही वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक कर SUBSCRIBE करें गृहशोभा का YouTube चैनल.

इन टिप्स को अपनाकर घर की सुंदरता में लगाएं चारचांद

घर ऐसा स्थान है जहां आप का दिल रहता है और इस के लिए हम ऐसा स्थान तैयार करते हैं जो सुंदर, भव्य हो और हमारे व्यवहार को दर्शाता हो. साल में एक बार लोग अपने घर में रहने के स्थान से ले कर खानेपीने की जगह और बैडरूम से ले कर किचेन तक को नया लुक देने की कोशिश करते हैं. लेकिन क्या आप ने कभी अपनी बालकनी, छत, गार्डन और प्रवेशद्वार के बारे में कुछ नया करने की सोची है. कोई भी इन कोनों पर ध्यान क्यों नहीं देता है जो घर का अहम हिस्सा हैं? लाइम रोड स्टाइल काउंसिल ने आप के घर को नया लुक प्रदान करने के लिए घर की सजावट से संबंधित कुछ रुझानों पर ध्यान केंद्रित किया है. ये टिप्स आप के घर की सुंदरता को दोगुना बढ़ा देंगे.

हैंडपेंटेड वाल हैंगिंग : आकर्षक हैंडपेंटेड वाल हैंगिंग को घर की डोरबैल के ठीक ऊपर लटकाएं. शीशम की लकड़ी और पीतल से बनी ढोकरा आकृतियों और बीच में घुंघरू लगा यह ब्राउन वाल हैंगिंग आप के घर के प्रवेशद्वार के दाईं ओर लगाने के लिए आकर्षक एवं स्टाइलिश उत्पाद है.

मोरक्कन मेटालिक लैंटर्न : अपनी बालकनी को मोरक्कन लुक प्रदान करें. मोरक्कन मेटालिक लैंटर्न आप के घर को एक अलग अंदाज में जगमग कर देंगे. मेटालिक लैंटर्न घर को सुंदर ढंग से सजाने के लिए तैयार किए गए हैं.

मल्टी कैनवस वाल हैंगिंग : विंड चाइम्स आप के गार्डन या बालकनी के लिए सुंदर रंगों में कैनवस वाल हैंगिंग के साथ जोड़े गए हैं. इस फिश डैकोरेटिव हैंगिंग में सजावटी घंटियां भी लगी हुई हैं जिन से सुंदरता और बढ़ जाती है.

पाइन वुड मिरर : घर के प्रवेशद्वार को मल्टीकलर्ड पाइन वुड डैकोरेटिव मिरर के साथ आकर्षक बनाएं. यह एथनिक वाल मिरर आकर्षक दिखता है. जरूरत के हिसाब से प्रवेशद्वार या बालकनी में मिरर को लटकाएं और अपने आसपास आकर्षक बदलाव महसूस करें.

पिंक सिरेमिक गुलदस्ते: घर के छोटे गार्डन में खास बदलाव करें. अपने गार्डन में पिंक या ब्लू कलर के आकर्षक सिरेमिक गुलदस्तों का इस्तेमाल करें.

VIDEO : हेयरस्टाइल फौर कौलेज गोइंग गर्ल्स

ऐसे ही वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक कर SUBSCRIBE करें गृहशोभा का YouTube चैनल.

क्यों होता है फोन गर्म? जानिए इसका हल

आज हर किसी के हाथ में स्मार्टफोन है, हर कोई इसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर रहा है. बाजार में हर दिन नए नए फीचर के साथ स्मार्टफोन लौंच किये जा रहे हैं. स्मार्टफोन हर दिन पतले होते जा रहे हैं. उनमे डेटा प्रोसेसिंग की क्षमता बढ़ती जा रही है. स्क्रीन का रिजाल्यूशन बेहतर होने के कारण आपके लिए वीडियो देखना आसान तो हो ही गया है. मतलब की आपके स्मार्टफोन अब दिन पर दिन ज्यादा स्मार्ट होते जा रहे हैं. अब स्मार्टफोन ज्यादा स्मार्ट होगा तो जाहिर सी बात है कि उसके प्रोसेसर को आपकी बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए और मेहनत करनी पड़ेगी. एंड्रायड स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों के बीच फोन के गरम होने जैसी शिकायत की चर्चा कोई नई बात नहीं है, पर फोन गरम क्यों होता है ये समझना जरूरी है.

आइये जानते हैं फोन के गरम होने के कारण

-जब आप अपने फोन को काफी ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो फोन के प्रोसेसर पर इसका असर दिखता है. उसके कारण फोन गरम हो जाता है.

-जब आप अपने स्मार्टफोन को चार्ज करते हैं तब भी फोन गरम हो सकता है. और जब रेडियो सिग्नल, जिसकी मदद से वायरलेस फोन काम करता है, कमजोर होता है तो कनेक्टिविटी के लिए फोन की बैटरी पर जोर पड़ता है.

-अगर हर समय आपका स्मार्टफोन गरम रहता है तो एक बार अपने फोन बनाने वाली कंपनी से बात कर अपने डिवाइस को जरूर दिखा लें. हो सकता है कुछ और खराबी होगी. ऐसे फोन को अगर बनवा लें तो आपकी सुरक्षा के लिए भी ये बढ़िया होगा.

-थोड़ा बहुत गरम हो जाना स्मार्टफोन के लिए कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन ज्यादा गरम होना आपके स्मार्टफोन के लिए अच्छी बात नहीं है. अगर ऐसा होता है तो उसे अपनी जेब से निकाल कर थोड़ी देर के लिए अलग रख देना ठीक होगा.

-चार्ज करते समय अगर फोन काफी गरम हो गया है तो थोड़ी देर तक चार्जिंग बंद कर देना आपके फोन के लिए बढ़िया होगा. लेकिन खराब कनेक्टिविटी के कारण गरम होने वाले स्मार्टफोन का कोई इलाज नहीं है. इन सभी स्थितियों में अगर आप फोन को थोड़ी देर के लिए बंद कर दें तो बढ़िया होगा.

VIDEO : आप भी बना सकती हैं अपने होठों को ज्यूसी

ऐसे ही वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक कर SUBSCRIBE करें गृहशोभा का YouTube चैनल.

अब मोबाइल औपरेटर्स की तरह पोर्ट करा सकेंगे DTH, जानें पांच बड़े फायदे

अगर आप अपने केबल सेवा प्रदाता से संतुष्ट नहीं है या उसके मासिक प्लान्स के लिए आपको अधिक राशि अदा करना पड़ रहा है, तो अब चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि जल्द ही मोबाइल औपरेटर्स की ही तरह आप डीटीएच और केबल औपरेटर्स को भी पोर्ट करा सकेंगे. इससे आपको कोई भी सेवा प्रदाता चुनने की आजादी मिलेगी साथ ही आपको केबल सर्विस बदलवाने के लिए सेट टौप बौक्स आदि बदलवाने की झिक-झिकसे छुटकारा भी मिल जाएगा.

माना जा रहा है की एक महीने के अंदर पोर्टेबिलिटी को लांच किया जा सकता है. पोर्टेबिलिटी को लागू करने से पहले ट्राई सभी स्टेकहोल्डर्स से मुलाकात करेगा. बता दें, ट्राई का सेट टौप बौक्स पोर्टेबिलिटी को लेकर ट्रायल सफल रहा है. यह ट्रायल पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुआ था. वहीं, ट्राई ने फरवरी, 2016 में डीटीएच या केबल सर्विस प्रोवाइडर के पोर्टेबिलिटी के लिए कंस्लटेशन शुरू किया था.

क्या होंगे पांच बड़े फायदे:

– पोर्टेबिलिटी के लौन्च हो जाने से सबसे बड़ा फायदा सहूलियत का होगा. आपको दीसरा DTH लेने के लिए सेट-टौप बौक्स से लेकर सभी एक्सेसरीज को भी बदलवाना पड़ता है. इस झिक झिक से बचने के लिए यूजर खुश ना होने के बावजूद भी एक ही सेवा प्रदाता के साथ बना रहता है.

– यूं तो शहर बदलने पर कई डीटीएच सेवा प्रदाता अपनी सेवाएं देते हैं. लेकिन फिर भी यह झंझट का काम हो जाता. इसके अलावा हर शहर में किसी ना किसी सेवा प्रदाता की सेवाएं बेहतर होती हैं. ऐसे में शहर बदलने पर आपको पोर्टेबिलिटी का विकल्प मिलने पर अपनी पसंद का केबल या डीटीएच चुनने की भी आजादी मिलेगी.

– दूसरा सबसे बड़ा फायदा यह होगा की पोर्टेबिलिटी के आने के बाद सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. इस प्रतिस्पर्धा का सीधा-सीधा फायदा यूजर्स को होगा. कंपनियां यूजर्स को अपने साथ बनाए रखने के लिए सस्ते प्लान्स बदल पेश कर सकती हैं.

– बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते जिस तरह टेलिकौम कंपनियां नए-नए औफर्स और डिस्काउंट पेश करती रहती हैं. उसी तरह डीटीएच सेवा प्रदाता भी समय-समय पर औफर्स और डिस्काउंट पेश कर सकते हैं, जो फिलहाल देखने को नहीं मिलता. इससे यूजर्स के समक्ष विकल्प खुल जाएंगे.

– अगर आपको किसी सेवा प्रदाता की सेवाएं ठीक नहीं लग रही तो आप इसे अपनी पसंद के अनुसार कभी भी पोर्ट करा पाएंगे. ऐसे में यूजर अनुभव को बेहतर करने के लिए हर कंपनी अधिक सेवाएं देने की कोशिश करेंगी.

VIDEO : ये मेकअप बदल देगी आपके चेहरे की रंगत

ऐसे ही वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक कर SUBSCRIBE करें गृहशोभा का YouTube चैनल.

कोहली और रोहित शर्मा नहीं बल्कि केएल राहुल हैं इस साल के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी

भारतीय टीम रोहित शर्मा की कप्तानी में श्रीलंका में आयोजित निदास ट्रौफी के फाइनल में जगह बनाने में कामयाब रही है. इस टूर्नामेंट की शुरुआत भारत के लिए अच्छा नहीं रहा था, उसे पहले मुकाबले में ही श्रीलंका के हाथों हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इसके बाद से टीम ने लगातार तीन मैच जीतकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है.

इस दौरे पर टीम के साथ टी-20 के बेहद अहम खिलीड़ी माने जाने वाले केएल राहुल भी मौजूद हैं. केएल राहुल को विजडन इंडिया ने साल का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर चुना है. कुछ दिन पहले विजडन इंडिया अलमैनेक का छठा संस्करण रिलीज किया गया, जिसमें इस बात की घोषणा की गई. पिछले कुछ समय से केएल राहुल टी-20 क्रिकेट में लगातार रन बना रहे हैं, ये बात अलग है इसके बावजूद भी उन्हें खेलने का ज्यादा मौका नहीं दिया जाता. निदास ट्रौफी के पहले दो मुकाबलों में केएल राहुल को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं देने पर फैन्स ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी.

sports

केएल राहुल के टी-20 प्रदर्शन पर नजर डाले तो राहुल ने अपने टी-20 करियर में पिछले एक साल के दौरान 50.89 की औसत से बल्लेबाजी की है. राहुल छोटे फौर्मेट में टीम के लिए हमेशा उपयोगी साबित रहे हैं. केएल राहुल रन बनाने के मामले में विराट कोहली से भी आगे हैं, विराट टी-20 50.85 की औसत से बल्लेबाजी करते हैं. केएल राहुल निदास ट्रौफी के दो मैचों में अभी तक कुछ कमाल दिखाने में नाकाम रहे हैं.

sports

राहुल के अलावा भारतीय महिला क्रिकेटर को भी विजडन इंडिया ने इस खास सम्मान से नवाजा है. विजडन इंडिया ने दीप्ति शर्मा को वर्ष के सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटरों में से एक चुना है. वहीं भारतीय कप्तान विराट कोहली सबसे सफल भारतीय और इंटरनैशनल क्रिकेटर रहे लेकिन कोहली को अपनी कप्तानी में इस साल इंग्लैंड और औस्ट्रेलिया दौरे पर जाना है और वहां उनके प्रदर्शन पर एक बार फिर सभी की निगाहें होंगी.

VIDEO : आप भी बना सकती हैं अपने होठों को ज्यूसी

ऐसे ही वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक कर SUBSCRIBE करें गृहशोभा का YouTube चैनल.

माधुरी के गाने ‘एक दो तीन…’ पर थिरकेंगी जैकलिन फर्नांडीज

2018 के शुरुआत से ही बौलीवुड में एक से बढ़कर एक फिल्मों के आने का सिलसिला शुरु हो चुका है और हर बड़े स्टार्स की फिल्म इस साल रिलीज होनी है. इन बड़े स्टार्स की फिल्मों में टाइगर श्रौफ की फिल्म बागी 2 इन दिनों सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रही है. इस फिल्म के आने का लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

टाइगर श्रौफ ने इस फिल्म को लेकर काफी मेहनत भी की है और कई खतरनाक स्टंट से फिल्म भरी हुई है. इस फिल्म के साथ साथ एक बात जो और चर्चा में चल रही है वो है जैकलिन फर्नांडिज का आइटम नम्बर जो आपको इस फिल्म में देखने को मिलेगा.

bollywood

बौलीवुड की बबली गर्ल जैकलीन फर्नांडीज यूं तो इन दिनों अपनी फिल्‍म ‘रेस 3’ की शूटिंग में बिजी हैं. लेकिन इसी बीच जैकलीन ने ‘बागी 2’ में 90 के दशक के सुपरहिट गाने ‘एक दो तीन…’ में नजर आने वाला अपना लुक सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जिसमे उनका एक अलग अंदाज देखने को मिल रहा है. इस गाने के लुक में जैकलीन बेहद खूबसूरत नजर आ रही हैं. जैकलीन ने अपना लुक शेयर करते हुए लिखा, ‘एक दो तीन चार पांच…ये धुन गाने से खुद को रोक ही नहीं पा रही हूं. तैयार हो जाइए… जल्‍द आ रहा है.’

फिल्म में जैकलिन का ये गाना इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि ये ब्लौकबस्टर गाना एक दो तीन का रीमेक वर्जन होगा. ये पहली बार नहीं कि जैकलिन इस तरह का आइटम नम्बर करने जा रही है बल्कि बौलीवुड में उनकी एंट्री ही आइटम नम्बर के साथ हुई थी और गाना ‘अपनी तो जैसे तैसे’ खूब चला था.

बता दें कि ‘एक दो तीन..’ गाना फिल्‍म ‘तेजाब’ का है, जिसमें स्‍टेज पर माधुरी दीक्षित थिरकती हुई नजर आई थीं. माधुरी को बौलीवुड की डांसिंग डीवा कहा जाता है और उस दौरान उनके इस गाने ने सोशल मीडिया पर धूम मचा दी थी. जहां माधुरी को इस गाने में कोरियोग्राफर सरोज खान ने डायरेक्‍ट किया था, तो वहीं इस गाने में जैकलीन कोरियोग्राफर गणेश आचार्य और अहमद खान के स्‍टैप्‍स के साथ थिरकती दिखेंगी. इससे पहले अहमद खान जैकलीन को फिल्‍म ‘रेस 2’ के गाने ‘लत लग गई’ और ‘किक’ के गाने ‘जुम्मे की रात’ के लिए भी कोरियोग्राफ कर चुके हैं.

bollywood

किसी भी सफल फिल्म के लिए उसका गाना भी कहीं ना कहीं जिम्मेदार होता है, इसलिए इस फिल्म के लिए इस गाने का काफी अहम रोल रहेगा. जब आपने माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया ये गाना देखा होगा तो उसमे वो काफी सिंपल सी खूबसूरत कपड़ों में नजर आईं थी जो की मनीष मल्होत्रा ने डिजायन किया था. लेकिन इस गाने में जैकलिन थोड़ा मौडर्न तड़का लगाती हुई नजर आएंगी. इस गाने के बारे में बात करते हुए जैकलिन ने कहा कि इस आइकौनिक गाने को करना उनके लिए काफी मुश्किल है और वो किसी भी तरह से माधुरी दीक्षित और सरोज खान जी की बराबरी नहीं कर सकती.

आपको बता दें टाइगर श्रौफ की बागी के बाद ये इस फ्रंचाइजी की दूसरी एक्शन फिल्म है जो एक्शन के मामले में पहली फिल्म से ज्यादा खतरनाक होगी. इस बात की गारंटी तो फिल्म के ट्रेलर से ही लग चुकी है फिल्म धमाका करने के लिए तैयार है. फिल्म 30 मार्च 2018 को रिलीज की जाएगी.

VIDEO : ये मेकअप बदल देगी आपके चेहरे की रंगत

ऐसे ही वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक कर SUBSCRIBE करें गृहशोभा का YouTube चैनल.

पेंशनधारकों के लिये खुशखबरी, न्यूनतम मासिक पेंशन हो सकती है दोगुनी

पेंशनधारकों को जल्द ही खुशखबरी मिल सकती है. सरकार जल्द ही एम्प्लौई पेंशन स्कीम के तहत मिलने वाली न्यूनतम राशि को दोगुना कर सकती है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ के तहत ईपीएस सब्सक्राइबर्स के लिए मासिक पेंशन को दोगुना करके 2,000 रुपए की जा सकती है. इससे करीब 40 लाख सब्सक्राइबर्स को फायदा होगा और सरकार पर सालाना 3000 करोड़ रुपए का बोझ बढ़ेगा. आपको बता दें इस पर अंतिम फैसला अगले साल होने वाले चुनाव से पहले लिया जा सकता है.

सरकार का बोझ भी होगा दोगुना

एक खबर के मुताबिक, सरकार पेंशन को दोगुना करने की प्लानिंग कर रही है. जल्द ही यह खुशखबरी मिल सकती है. कैबिनेट ने 2014 में एक साल के लिए 1,000 रुपए मासिक की न्यूनतम पेंशन को मंजूरी दी थी और 2015 में इसे अनिश्चितकाल तक के लिए बढ़ा दिया था. न्यूनतम पेंशन के लिए सरकार सालाना 813 करोड़ रुपए का योगदान देती है. अगर इसका फायदा अभी 2,000 रुपए मंथली से कम पेंशन पाने वाले सभी लोगों को दिया गया तो सरकार का बोझ भी बढ़कर दोगुने से अधिक हो सकता है.

business

ईपीएफओ कर रहा है योजना पर काम

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि श्रम मंत्रालय ने ईपीएफओ से इस योजना के वित्तीय पहलुओं पर काम करने को कहा है. उसने ईपीएफओ से यह भी पूछा है कि अगर एम्प्लौई पेंशन स्कीम (ईपीएस), 1995 के तहत न्यूनतम पेंशन को 1,000 रुपए से बढ़ाकर 2,000 रुपये मंथली किया जाता है तो ऐसे सब्सक्राइबर्स की संख्या कितनी रहेगी.

बोर्ड औफ ट्रस्टीज के सामने रखा जाएगा प्रस्ताव

ईपीएफओ के एक अधिकारी के मुताबिक, ‘ईपीएफओ जल्द ही ये जानकारियां दे सकता है. इसके बाद सरकार ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड औफ ट्रस्टीज के सामने न्यूनतम पेंशन को दोगुना करने का प्रस्ताव पेश करेगा.’

9000 करोड़ का भुगतान करती है सरकार

ईपीएफ-95 स्कीम के तहत अभी 60 लाख पेंशनर्स हैं. इनमें से 40 लाख को 1,500 रुपए मंथली से कम पेंशन मिल रही है. इनमें से 18 लाख को न्यूनतम 1,000 रुपए की पेंशन योजना का फायदा मिल रहा है. सरकार के पास 3 लाख करोड़ का पेंशन फंड है और ईपीएस के तहत वह सालाना 9,000 करोड़ रुपए का भुगतान करती है.

मासिक पेंशन बढ़ाने का दबाव

सरकार पर ट्रेड यूनियंस और औल इंडिया ईपीएस-95 पेंशनर्स संघर्ष समिति की तरफ से मासिक पेंशन को बढ़ाकर 3,000 से 7,500 रुपए करने का दबाव है. हाल ही में संसदीय समिति ने भी सरकार से ईपीएस-95 स्कीम की समीक्षा करने को कहा था. समिति ने कहा था कि केंद्र को 1,000 रुपए की न्यूनतम पेंशन पर विचार करना चाहिए. श्रम पर संसद की स्थाई समिति की 34वीं रिपोर्ट सदन में पेश की गई थी. समिति का मानना है कि 1000 रुपए की पेंशन बहुत कम है और इससे पेंशनर्स की हर महीने की बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं होती हैं.

VIDEO : आप भी बना सकती हैं अपने होठों को ज्यूसी

ऐसे ही वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक कर SUBSCRIBE करें गृहशोभा का YouTube चैनल.

आज ही के दिन सचिन ने पूरा किया था शतकों का महाशतक

16 मार्च यानि कि आज ही के दिन मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने बांग्लादेश के खिलाफ शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम, मीरपुर में शतकों का महाशतक लगाया था. सचिन ने 147 गेंदों पर 114 रनों की पारी खेली. यूं तो सचिन इससे पहले कई शतक लगा चुके थे लेकिन इसकी बात कुछ और थी. यह सचिन के बल्ले से निकला शतकों का शतक था. सचिन उस पायदान पर खड़े थे जिसे आने वाले वक्त में एक मील के पत्थर के तौर पर देखा जाने वाला था. यह सचिन के बल्ले से निकला 100वां अंतरराष्ट्रीय शतक था और यहां उनसे पहले कोई नहीं पहुंचा था.

sports

साउथ अफ्रीका के खिलाफ 2011 में लगाया 99वां शतक

भारतीय टीम जब वर्ष 2011 के अंत में औस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के साथ खेली जाने वाली चार टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए उसकी धरती पर पहुंची तो सबकी नजरें महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर पर थीं. उस समय तेंदुलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 100वें शतक से एक कदम दूर थे. ऐसे में तेंदुलकर के प्रशंसक चाह रहे थे कि उनका 100वां शतक इसी सीरीज में तो क्या मेलबर्न में खेले जाने वाले पहले टेस्ट मैच में ही पूरा हो जाए.

उस समय एक इंटरव्यू में सचिन तेंदुलकर ने कहा भी था कि वह शतक के बारे में नहीं सोच रहे, हालांकि उनके सौवें शतक के बारे में दुनिया बातें कर रही है पर उनके लिए खेल का मजा लेना ज्यादा जरूरी है. उनका मानना था शतक तो बन ही जाएगा. सचिन का इरादा औस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में खेल का मजा लेना और टीम को जिताना था ना की शतक के बारे में सोचना. लेकिन उनके प्रशंसक बेताब थे कि वह इस ऐतिहासिक उपलब्धि तक जल्द से जल्द पहुंच जाए

sports

एक साल बाद लगा 100वां शतक

सचिन औस्ट्रेलिया दौरे पर शतक नहीं लगा सके. खराब प्रदर्शन के दौर से गुजर रहे सचिन की काफी आलोचना भी हुई. फिर आया एशिया कप जो बांग्लादेश में खेला गया था. एशिया कप में सचिन तेंदुलकर ने आज ही के दिन यानी 16 मार्च 2012 को मीरपुर में बांग्लादेश के खिलाफ अपना 100वां अंतरराष्ट्रीय शतक लगाया. वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले विश्व के एकमात्र बल्लेबाज बने. 99 शतक लगाने के बाद सचिन को इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए एक वर्ष से अधिक समय का लम्बा इंतजार करना पड़ा. उनके 114 रनों के बावजूद बांग्लादेश यह मैच जीत गया था.

sports

अपने 100वें शतक के पहले 80 रन उन्होंने 102 गेंदों पर ही बना लिए थे, लेकिन अगले 20 रन बनाने में उन्हें 36 गेंदें लगी. सचिन का ये वनडे में 49वां शतक था और उन्होंने साथ ही टेस्ट मैचों में भी 51 शतक लगाए थे. इस तरह से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सचिन के नाम 100 शतक बनाने का बेमिसाल रिकौर्ड दर्ज हो गया था. बांग्लादेश के खिलाफ मैच में जैसे ही सचिन ने शतक पूरा किया, पूरा स्टेडियम तालियों से गूंज उठा. मैदान पर मौजूद बांग्लादेश के खिलाड़ियों ने उनसे हाथ मिलाकर उन्हें बधाई दी. उन्होंने 114 रन के लिए 147 गेंदों का सामना किया और अपनी पारी में 12 चौके और एक छक्का लगाया.

लंबा था 100वें शतक का इंतजार

अपने 99वें और 100वें मैच के बीच सचिन ने कुल 11 टेस्ट और 12 वनडे मैच खेले थे. इनमें उन्होंने कुल आठ अर्धशतक लगाए. इस दौरान दो बार तो वह 90 से ज्यादा रन बनाकर आउट हुए थे.

उन्होंने अपने 24 साल के करियर में रिकौर्डों की झड़ी लगाते हुए 463 वनडे में 18426 रन बनाए, जिनमें 49 शतक शामिल थे और 200 टेस्ट मैचों में 51 शतक की मदद से 15921 रन बनाए. सचिन के ये रिकौर्ड आज भी कोई तोड़ नहीं पाया है. उनके नाम वनडे, टेस्ट में सबसे ज्यादा शतक के अलावा सबसे ज्यादा रन बनाने सहित ढेरों रिकौर्ड दर्ज हैं.

sports

तेंदुलकर के नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 34,347 रन हैं. वनडे में उनके नाम 18,426 और टेस्ट में 15,921 रन हैं. टेस्ट में सचिन ने 51 और वनडे में 49 शतक लगाए हैं. सचिन ने औस्ट्रेलिया के खिलाफ सबसे ज्यादा शतक लगाए हैं. सचिन ने मजबूत और धाकड़ औस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे में 11 और टेस्ट में 8 शतक लगाए. इतना ही नहीं सचिन इंटरनैशनल क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाले पहले पुरुष क्रिकेटर भी हैं. सचिन ने अपना आखिरी मैच 16 नवंबर 2013 को वेस्ट इंडीज के खिलाफ खेलकर क्रिकेट को अलविदा कह दिया था.

सचिन के 100 शतकों के रिकौर्ड के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रिकी पोंटिंग (71), कुमार संगकारा (63), जैक कैलिस (62) का नंबर है. मौजूदा दौर में विराट कोहली सचिन के रिकौर्ड  के करीब पहुंचने के सबसे बड़े दावेदार हैं. विराट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 56 शतक लगा चुके हैं. इसमें से 35 तो उन्होंने वनडे इंटरनैशनल में लगाए हैं.

VIDEO : ये मेकअप बदल देगी आपके चेहरे की रंगत

ऐसे ही वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक कर SUBSCRIBE करें गृहशोभा का YouTube चैनल.

खोखले वादों का शुभलाभ उठाते क्रोनी कैपिटलिस्ट

पंजाब नैशनल बैंक में 11,394 करोड़ रुपए के घोटाले के परदाफाश होने से स्तब्ध जनता उबर भी नहीं पाई थी कि 900 करोड़ रुपए के रोटोमैक और फिर ओरिएंटल बैंक औफ कौमर्स से 390 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी से वह और भी सन्नाटे में है. भ्रष्टाचार मुक्त देश, स्वच्छ भारत और ईमानदारी पर बड़ेबड़े दावे करने वाले नेता खामोश हैं. सरकार विपक्ष के निशाने पर है. इन घोटालों से सरकार चौतरफा घिर गई है.

नोटबंदी, जीएसटी जैसे निर्णयों के साथ अर्थव्यवस्था में ईमानदारी व सुधारों के सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं. कहां तो विदेशों में जमा कालेधन को वापस लाने के वादे किए जा रहे थे और आज देश का सफेदधन ले कर भागने वाले कतार में दिख रहे हैं. ऐसे में जनता की ईमानदारी पर सरकार पर सवाल उठाने लगी है.

पीएनबी में घोटाले का यह मामला पिछले 7 वर्षों से चल रहा था लेकिन किसी को भी इस का पता नहीं चल पाया. देश के इस सब से बड़े बैंक घोटाले के बारे में बताया जा रहा है कि लेनदेन में हुए फर्जीवाड़े से कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाया गया है.

हीरों के व्यापार का किंग माना जाने वाला नीरव मोदी और उस के साथियों ने 2011 में बिना तराशे हीरे आयात करने के वास्ते लाइन औफ क्रैडिट के लिए पंजाब नैशनल बैंक की मुंबई स्थित ब्रेडी हाउस ब्रांच से संपर्क किया था. आमतौर पर बैंक विदेश से आयात को ले कर होने वाले भुगतान के लिए लैटर औफ अंडरटेकिंग (एलओयू) जारी करता है. इस का अर्थ है कि बैंक नीरव मोदी के विदेश में मौजूद सप्लायर को 90 दिनों के लिए भुगतान करने पर राजी है और बाद में पैसा नीरव को चुकाना है. पर बैंक के कुछ कर्मचारियों ने नीरव मोदी की कंपनियों को फर्जी एलओयू जारी किए और ऐसा करते वक्त उन्होंने बैंक प्रबंधन को अंधेरे में रखा.

बैंक द्वारा दी गई ऐक्सचेंज फाइलिंग में कहा गया है कि  नीरव मोदी की कंपनियों ने पूर्व डिप्टी जीएम गोकुलनाथ शेट्टी की मिलीभगत से फर्जी तरीके से 11,394 करोड़ रुपए का लैटर औफ अंडरटेकिंग ले लिया था. एलओयू एक तरह की गारंटी होती है जिस के आधार पर दूसरे बैंक कर्ज देते हैं.

घोटाले का परदाफाश

शेट्टी के रिटायर होने के बाद 16 जनवरी, 2018 को नीरव की एक कंपनी ने बे्रडी हाउस ब्रांच से गारंटी (एलओयू) देने का आग्रह किया. तब बैंक अधिकारियों ने एलओयू के बदले 100 प्रतिशत कैश जमा करने को कहा. इस पर कंपनियों ने कहा कि वे बिना कैश मार्जिन के वर्षों से एलओयू लेती रही हैं. जब इस की छानबीन शुरू हुई तो इस घोटाले का परदाफाश हो गया.

दिल्ली और मुंबई में बैंक अधिकारियों के साथ नीरव मोदी और मेहुल चौकसी की कंपनियों के प्रतिनिधियों की कई बैठकें हुईं. उन में कंपनियों से पैसा वापस करने को कहा गया. 15 जनवरी को 280.70 करोड़ रुपए के एक एलओयू की अवधि पूरी हो गई तो आरबीआई और सीबीआई को इस की जानकारी दे दी गई. इस के बाद मेहुल चौकसी की 2 कंपनियों के 65.25 करोड़ रुपए के एलओयू की लायबिलिटी 7 फरवरी को पूरी हो गई. इस की जानकारी भी आरबीआई और सीबीआई को दे दी गई तो छानबीन के बाद 12 फरवरी को पता चला कि कुल 11,394 करोड़ रुपए के एलओयू फर्जी तरीके से जारी किए गए.

गोकुलनाथ शेट्टी मार्च 2010 से मुंबई शाखा में पीएनबी के विदेशी विनिमय विभाग में कार्यरत था. कथित रूप से उस ने मनोज खारत नाम के एक क्लर्क के साथ मिल कर एलओयू जारी किए थे.

साजिश रचने वाले लोगों ने एक और कदम आगे बढ़ कर सोसाइटी फौर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनैंशियल टैलिकम्युनिकेशन (स्विफ्ट) का नाजायज फायदा उठाने का फैसला किया. यह इंटरबैंक मैसेजिंग सिस्टम है जिसे विदेशी बैंक पैसा जारी करने से पहले लोन का ब्योरा पता लगाने के लिए इस्तेमाल करते हैं. बैंक के कर्मचारियों ने अपने बड़े अधिकारियों की जानकारी के बिना गारंटी को हरी झंडी देने के लिए स्विफ्ट तक अपनी पहुंच का फायदा उठाया.

ऐसा करने पर भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं को कोई शक नहीं हुआ और उन्होेंने नीरव मोदी की कंपनियों को फौरैक्स क्रैडिट जारी कर दिया. यह रकम एक विदेशी बैंक के साथ पीएनबी के खाते में दी गई थी जिसे नोस्ट्रो अकाउंट कहते हैं. पैसा इस अकाउंट से मोदी के विदेश में मौजूद बिना तराशे हीरे सप्लाई करने वाले लोगों को भेजा गया. जब ये फर्जी एलओयू परिपक्व होने लगे तो पीएनबी के भ्रष्ट कर्मचारियों ने 7 वर्षों तक दूसरे बैंकों की रकम का इस्तेमाल इस लोन को रिसाइकिल करने के लिए किया.

सीबीआई ने 13 फरवरी को नीरव मोदी ग्रुप, गीतांजलि ग्रुप और चांदरी पेपर ऐंड अलायड प्रोडक्ट्स नाम की कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की. सीबीआई ने नीरव मोदी, उन की पत्नी एमी, भाई निशाल और कारोबारी साझेदार मेहुल चौकसी के खिलाफ मामला दर्ज किया. 14 फरवरी को आंतरिक जांच पूरी होने के बाद पीएनबी ने बौंबे स्टौक ऐक्सचेंज को इस फर्जीवाड़े की जानकारी दी. मामला उजागर होने की भनक लगते ही नीरव मोदी जनवरी में भारत छोड़ कर न्यूयौर्क भाग गया.

15 फरवरी को प्रवर्तन निदेशालय ने मोदी के मुंबई, सूरत और दिल्ली के कई दफ्तरों में छापामारी की और प्रिवैंशन औफ मनी लौड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया.

कौन है नीरव मोदी

नीरव मोदी के पिता हीरा कारोबारी थे जो भारत से बैल्जियम के एंटवर्प चले गए. नीरव मोदी का लालनपालन वहीं पर हुआ लेकिन वह व्यापार के लिए मुंबई आ गया. उस ने अपने चाचा मेहुल चौकसी से व्यापार करना सीखा. पीएनबी घोटाले में मेहुल चौकसी का नाम भी शामिल है. नीरव मोदी 2013 से फोर्ब्स की अमीरों की सूची में अपना नाम बरकरार रखे हुए है. उस के ब्रैंड को अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा, बिपाशा बासु, एंड्रिया डायाकोनु  और रोजी हंटिंगटन प्रोमोट करते हैं. हालांकि, प्रियंका चोपड़ा अब अलग हट गई हैं.

46 वर्षीय नीरव व्हार्टन ड्रौपआउट है. उस के ज्वैलरी शोरूम में एक ज्वैलरी के दाम 5 लाख से 50 करोड़ रुपए तक हैं. नीरव मोदी, उस की पत्नी एमी, भाई निशाल और मेहुल चौकसी डायमंड्स आरयूएस, सोलर ऐक्सपोर्ट्स तथा स्टैलर डायमंड्स में भागीदार हैं. इन कंपनियों की हौंगकौंग, दुबई और न्यूयौर्क में इकाइयां हैं.

1999 में नीरव ने फायरस्टार कंपनी बनाई. फोर्ब्स के मुताबिक, नीरव की नैटवर्थ 11 हजार करोड़ रुपए है. फोर्ब्स की सूची में नीरव 85वें स्थान पर है. उस के ज्वैलरी स्टोर  लंदन, न्यूयौर्क, लास वेगास, हवाई, सिंगापुर, बीजिंग जैसे 16 शहरों में हैं. भारत में दिल्ली और मुंबई में उस के कई स्टोर्स हैं.

जब देश नीरव मोदी के घोटाले पर हैरान था तभी रोटोमैक और सेठ द्वारका दास इंटरनैशनल ज्वैलर का घोटाला भी सामने आ गया. पैनकिंग रोटोमैक कंपनी के प्रमुख विक्रम कोठारी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. कोठारी, उन की पत्नी साधना और पुत्र राहुल कोठारी पर बैंक औफ बड़ौदा समेत 7 बैंकों को 3,695 करोड़ रुपए की चपत लगाने का आरोप है. इसी तरह सीबीआई ने दिल्ली स्थित डायमंड आभूषण निर्यातक द्वारका दास सेठ इंटरनैशनल कंपनी के खिलाफ ओरिएंटल बैंक औफ कौमर्स के साथ 389.85 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज किया है. कंपनी के निदेशकों सभ्य सेठ, रीता सेठ, कृष्णकुमार सिंह और रवि सिंह पर आरोप हैं कि उन्होंने बैंक के साथ धोखाधड़ी की.

घोटालों का घटाटोप

देश में बैंक धोखाधड़ी के आंकड़े चौंकाने वाले हैं. भारतीय बैंकिंग की स्थिति पर इंडियन इंस्टिट्यूट औफ मैनेजमैंट, बेंगलुरु की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद मानते हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में वर्ष 2012 से 2016

के बीच 22,743 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 में पहले 9 महीने में आईसीआईसीआई बैंक में करीब 455, स्टेट बैंक औफ इंडिया में 429, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक में 244 और एचडीएफसी बैंक में 237 मामले पकड़े गए.

नीरव मोदी से पहले भी कई बैंकिंग घोटाले सामने आ चुके हैं. 2014 में कोलकाता के उद्योगपति बिपिन बोहरा पर कथिततौर पर फर्जी दस्तावेज के सहारे सैंट्रल बैंक औफ इंडिया से 1,400 करोड़ रुपए का लोन लेने का आरोप लगा था. उसी साल सिंडिकेट बैंक के पूर्व चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एस के जैन पर रिश्वत ले कर 8,000 करोड़ रुपए का ऋण मंजूर करने का मामला सामने आया था. 2014 में ही यूनियन बैंक ने विजय माल्या को विलफुल डिफौल्टर घोषित कर दिया था. इस के बाद एसबीआई और पीएनबी ने भी यही राह अपनाई.

बाद में सीबीआई ने विजय माल्या के खिलाफ 9,000 करोड़ रुपए की कर्जवसूली के लिए चार्जशीट दाखिल की. 2016 में विजय माल्या देश छोड़़ कर भाग गया. तब से वह ब्रिटेन में रह रहा है. ललित मोदी 6,000 करोड़ रुपए के साथ भाग गया. भारत सरकार उस के प्रत्यर्पण के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है. हर तरफ गजब की सांठगांठ चल रही है.

कुछ समय पहले 7,000 करोड़ रुपए के एक और घोटाले में विनसम डायमंड्स का नाम सामने आया था. जतिन मेहता की विनसम डायमंड्स कंपनी का मामला भी नीरव मोदी जैसा ही था. हर तरफ कोलकाता के कारोबारी नीलेश पारेख का मामला भी सुर्खियों में रहा. सीबीआई ने 2017 में नीलेश को मुंबई एअरपोर्ट से गिरफ्तार किया था. उस पर कम से कम 20 बैंकों से 2,223 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने के आरोप थे. पारेख ने यह पैसा शेल कंपनियों के माध्यम से हौंगकौंग, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात ट्रांसफर कर दिया था.

बढ़ता डूबत ऋण

आंकड़े बताते हैं कि जितना देश में एनपीए यानी डूबत ऋण है दुनिया के 137 देशों की उतनी जीडीपी है. पिछले 5 सालों में बैंकों में 1 लाख से ज्यादा रकम के 5,064 घोटाले हुए. इन में बैंकों को 16,770 करोड़ रुपए की चपत लगी.

कहने को पीएनबी घोटाला 11,300 करोड़ रुपए का बताया जाता है पर नीरव मोदी ने अन्य बैंकों से भी करीब 8 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया है. इस तरह यह घोटाला 15 से 20 हजार करोड़ रुपए का बैठता है.

30 सितंबर, 2013 तक डूबत खातों की कुल राशि 28,416 करोड़ रुपए थी और 30 सितंबर, 2017 तक यानी 4 वर्षों में यह बढ़ कर 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपए हो गई, अर्थात नरेंद्र मोदी की सरकार के दौरान यह लूट तकरीबन चारगुना बढ़ गई.

मजे की बात यह है कि बैंकों को बचाने के लिए सरकार 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा देने की योजना बना रही है यानी साफ है कि सरकार फिर क्रोनी कैपिटलिस्टों के लिए राहत और लूट का इंतजाम कर रही है. सरकार से पूछा जाना चाहिए कि यह पैसा किस का है और इस से वह किसे बचाने की कोशिश कर रही है. जाहिर है आम आदमी, किसान को तो बिलकुल नहीं.

पगपग पर सांठगांठ है. सरकार अपराधियों को विदेश भगा देती है और फिर वर्षों तक जनता का मन बहलाने के लिए प्रत्यर्पण का ड्रामा करती है. 5 साल पहले ललित मोदी को भगाया, 2 साल विजय माल्या को हो रहे हैं, अब नीरव मोदी. यह पक्का है कि यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है. जो पूंजीपति प्रधानमंत्री के विदेश दौरों में बिजनैस डैलीगेट्स के तौर पर नजर आते हैं और फिर प्रधानमंत्री के साथ खिंची तसवीरों  से रुतबा बना कर मोटा धन उगाते हैं, उन पर नजर रखी जानी चाहिए.

जानबूझ कर खेल

जो उद्योगपति रंगेहाथ पकड़े जाते हैं वे दरअसल ऐसे होते हैं कि जो सब नियमकायदों का उल्लंघन कर के करोड़ोंअरबों का कर्ज लेते हैं और उसे डूबत खाते में डलवा देते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि दिवालिया घोषित होने के बाद उन का कुछ नहीं  बिगड़ता. अगर डिफौल्टरों की सूची देखें तो बारबार वही लोग सामने आते हैं जो पहले डिफौल्टर घोषित हो चुके हैं. वे फिर से सरकारी बैंकों तक पहुंचने में कामयाब हो जाते हैं. वे बढ़ाचढ़ा

कर बिजनैस परियोजनाओं के प्रस्ताव पेश करते हैं और लोन लेने में सफल हो जाते हैं. बाद में कर्ज चुकाने में नाकाम रहते हैं. यह बैंक अधिकारियों, बिजनैसमेन व सरकारी तंत्र का मिलाजुला खेल है.

हिम्मत व चोरी कर सीना जोरी का आलम तो देखिए कि नीरव मोदी बैंक को खुलेआम पैसा नहीं चुकाने की चुनौती दे रहा है. बैंक प्रबंधन को लिखे पत्र में नीरव ने कहा है कि उस ने उस की साख खराब कर दी. मामले को तूल दे कर ऋण वापसी के सभी रास्ते बंद कर दिए. उस के ब्रैंड को बरबाद कर दिया गया.

सरकारी बैंकों में नेताओं की चलती है. बड़े पूंजीपतियों और नेताओं की मिलीभगत होती है. सरकारी बैंकों के अफसरों की इतनी हिम्मत नहीं होती कि वे मना कर सकें. 1969 में इंदिरा गांधी ने जब 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था तब कहने को उन का लक्ष्य बैंकों में जमा पूंजी से राष्ट्रीय विकास करना था पर असल में बैंकों पर खुद का नियंत्रण करना था ताकि पूंजीपतियों को मनमरजी से लोन बांटा जा सके और वक्त पड़ने पर उन्हीं से वसूली की जा सके. इस के बाद  संपूर्र्ण बैंकिंग व्यवस्था पर डूबत खातों का घुन लग गया.

डिफौल्टर कंपनियों के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया के लिए शुरुआत में जो मामले नैशनल कंपनी ला ट्रिब्यूनल को भेजे गए उन में इस्पात, बिजली और सीमेंट शामिल हैं. बड़ी मात्रा में कौर्पोरेट कंपनियों द्वारा बैंकों का पैसा दबाया गया. देशभर की दर्जनों कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया में हैं. सरकार ऐसी कंपनियों की संपत्तियों को बेचने की तैयारी कर रही है. एस्सार अपने स्टील कारोबार का बड़ा हिस्सा बेचने को मजबूर है. वह अपने तेल व्यापार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहा है. जिंदल स्टील को अपने रेल व्यापार का 49 प्रतिशत हिस्सा बेचना पड़ रहा है. वह अपना 3,500 मेगावाट का पावर प्लांट भी बेचने को तैयार है.

रीयल एस्टेट कंपनी डीएलएफ को अपने रैंटल और भूमि संपत्ति में से 40 फीसदी हिस्सा बेचना पड़ रहा है. उस के दिल्ली स्थित भव्य साकेत मौल तक को बेचने की नौबत आ गई है. जेवीके को बैंकों का पैसा लौटाने के लिए अपने बेंगलुरु और मुंबई एअरपोर्ट में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचनी पड़ रही है और सड़क से जुड़ी अपनी पूरी संपत्ति को वह बेच रहा है.

जीएफआर हाईवे प्रोजैक्ट, साउथ अफ्रीकन कोल माइंस, इस्तांबुल एअरपोर्ट और सिंगापुर पावर प्रोजैक्ट का 70 प्रतिशत, इंडोनेशिया के 2 कोयला खदानों को बेचना चाहता है. जेपी ग्रुप अल्ट्राटैक, यमुना ऐक्सप्रैस वे और जेएसडब्लू में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच रहा है.

टाटा द्वारा यूके में कोरस स्टील प्लांट, धमरा पोर्ट को बेचना पड़ रहा है. वह दक्षिण अफ्रीका में नियोटिल बेच रहा है और मुंबई में उसे अपनी जमीन तक बेचनी पड़ रही है. लैंको ग्रुप आंध्र प्रदेश और उडुपी में अपने बिजली प्लांट बेच रहा है. रेणुका सुगर, ब्राजील पावर, चीनी और बायोफ्यूल के कारोबार को निबटाने में जुटा है. वीडियोकौन 6 सर्किल में अपना टैलीकौम स्पैक्ट्रम बेचने को मजबूर है. मोजांबिक में वह तेल संपत्ति बेच रहा है.

बिड़ला सीमेंट को अपना सीमेंट व्यापार और सड़क से जुड़ी तमाम परियोजनाएं बेचनी पड़ रही हैं.

सहारा समूह की 86 संपत्तियां बिक रही हैं. वह फार्मूला वन में अपना 42 प्रतिशत, मुंबई में सहारा होटल, लंदन के होटल, न्यूयौर्क प्लाजा होटल, द ड्रीम न्यूयौर्क होटल और 4 हवाईर् जहाज बेच रहा है. 9,000 करोड़ रुपए ले कर भागे लिकरकिंग विजय माल्या की सारी संपत्तियां भी बिक रही हैं.

रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के हालात भी बुरे हैं. उसे मुंबई में बिजली कंपनी के उत्पादन और वितरण की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचनी पड़ रही है.

सवाल है कि कंपनियां फेल क्यों हो रही हैं? हमारे यहां कच्चा माल है, श्रमशक्ति है, बाजार है, ग्राहक हैं, संसाधन हैं तो कोई व्यापार फेल क्यों होता है? जब सरकारी बैंक मेहरबान हैं, सरकार टैक्सों में छूट मिल रही है, आयातनिर्यात में भारी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं, तो फिर कंपनियां दिवालिएपन की कगार पर क्यों पहुंच रही हैं. विदेशी कंपनियां कैसे यहां आ कर मालामाल हो रही हैं? स्टील, माइंस, बिजली कंपनियां क्यों फेल हो गईं? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए क्रोनी कैपिटलिज्म को समझना जरूरी है.

क्रोनी कैपिटलिज्म

दरअसल, शासकों और अमीरों ने मिल कर एक भ्रष्ट व्यवस्था बना ली है. सांठगांठ वाली यह व्यवस्था क्रोनी कैपिटलिज्म कहलाती है. इस में कारोबार में कामयाबी व्यापारी और सरकार के आपसी संबंध से तय होने लगती है. इस के तहत सरकारी तंत्र उद्योगपतियों को लीगल परमिट के आवंटन में पक्ष ले कर उन्हें अनुदान दे कर, टैक्स संबंधित सहूलियतें दे कर तथा अन्य आर्थिक अनियमितताओं के जरिए फायदा पहुंचाता है.

पिछली मनमोहन सिंह सरकार ने कौर्पोरेट पर खूब पैसा लुटाया. अब उन का कारोबार चला नहीं तो वे कंपनियां दिवालिया घोषित हो रही हैं. कौर्पोरेट और नेता परस्पर मदद कर एकदूसरे की ताकत बढ़ाते रहे हैं.

स्पैशल इकोनौमिक जोन यानी सेज, निजी अस्पतालों, स्कूलों को मुफ्त जमीन आवंटन, शहरों में औद्योगिक क्षेत्रों के कथित विकास, मशीनरी, कर्ज, सब्सिडी बिना मेहनत किए ज्यादा फायदे के सौदे साबित होते रहे हैं. इस तरह की सहूलियतों का भरपूर दोहन कर मोटा पैसा बनाने की ललक अधिक है.

पिछले कुछ समय से देश में अरबपतियों की बाढ़ और किसी भी तरीके से पूंजी बढ़ाने की प्रवृत्ति ने भारत को क्रोनी कैपिटलिस्ट देशों की सूची में 9वें स्थान पर ला खड़ा किया है.

क्रोनी कैपिटलिज्म में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा नहीं होती. यह मुक्त उद्यमशीलता, अवसरों के विस्तार और आर्थिक वृद्धि के लिए नुकसानदेह है.

राजनीतिक पार्टियां क्रोनी कैपिटलिज्म के लिए एकदूसरे पर आरोप लगाती रही हैं. भाजपा और आम आदमी पार्टी कांग्रेस पर क्रोनी कैपिटलिज्म का यह कहते हुए आरोप लगाती रही हैं कि 2जी घोटाला, कोयला घोटाला के जरिए यूपीए नेताओं के करीबी कारोबारियों को अनुचित फायदा पहुंचाया गया.

उधर, भाजपा के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप है कि वे अडाणी और अंबानी जैसे कुछ करीबी उद्योगपतियों को कौडि़यों के भाव जमीन तथा दूसरी सुविधाएं मुहैया कराते रहे हैं. दूसरी तरफ आम आदमी, किसान, छोटे व्यापारी हैं जो मामूली कर्ज के लिए बैंकों के चक्कर लगातेलगाते थक जाते हैं. पहले तो उन्हें आसानी से कर्ज नहीं मिलता. और अगर कर्ज मिल भी गया तो जरा सी चूक होने पर बैंक 1 लाख रुपए के लोन पर किसान की 25 लाख रुपए की जमीन नीलाम कर देता है.

आम आदमी पर बैंक सख्त

आम आदमी अपनी जिंदगी की आवश्यक जरूरतों के लिए बैंकों से कर्ज लेता है और किस्त चुकाने में यदि उस से चूक हो जाती है तो बैंक उस की कुर्की कर उसे दिवालिया बना देता है, जबकि पूंजीपति सांठगांठ कर के बैंकों का पैसा लूट कर विदेश भाग जाते हैं.

जीवन के लिए अनिवार्य रोटी, कपड़ा और मकान से जुड़े कर्ज को चुकाने में आम आदमी से जरा सी चूक होने पर बैंकों की ज्यादतियां शुरू हो जाती हैं. बैंक आम कर्जदार की संपत्तियां नीलाम कर उसे न घर का छोड़ता है न घाट का. ये वे लोग होते हैं जिन की मंशा बैंक से कर्ज ले कर भागना नहीं होती. क्रोनी कैपिलिस्टों की तरह ये विलफुल डिफौल्टर नहीं होते, पर बैंक इन की संपत्तियां कुर्क कर देता है या फिर नीलाम कर के वसूली कर लेता है. बैंकों की इस नीलामी में कई लोग बेघर हो जाते हैं. उन की अपनी जोड़ी संपत्ति भी बिक जाती है.

हाल ही में अखबारों और बैंकों की वैबसाइट्स पर कुछ लोगों के मकानों की नीलामी के नोटिस देखिए:

28 फरवरी, 2018 को इलाहाबाद बैंक ने हिंदुस्तान समाचारपत्र में कर्ज चूककर्ताओं की संपत्तियों की नीलामी का विज्ञापन दिया है. इस में चंद्रभूषण ठाकुर के गांव सैदुल्लाबाद, लोनी, गाजियाबाद के रिहायशी फ्लैट नं. एसएफ-3, द्वितीय तल की 20.76 लाख रुपए में नीलामी की सूचना दी गई है.

23 फरवरी के दैनिक जागरण में ओरिएंटल बैंक औफ कौमर्स ने गीता सिंह पत्नी अनिरुद्ध सिंह के रिहायशी मकान संख्या ई-26, जवाहर विहार कालोनी, सदर तहसील, रायबरेली पर 9,99,500 रुपए का कर्ज 60 दिनों में न चुकाने पर इस संपत्ति पर कब्जा कर नीलाम कर देने की सूचना दी है.

ओरिएंटल बैंक औफ कौमर्स ने जानकीपुरम, लखनऊ के प्रवीन कुमार वर्मा के मकान नं. बी-1/281 को 2,18,19,000 रुपए न चुकाने पर 22 फरवरी के दैनिक जागरण में नोटिस प्रकाशित किया है.

स्टेट बैंक औफ इंडिया ने मकान, जमीन नंबर 10, बिल्हा ब्लौक, राहंगी, जिला बिलासपुर, छत्तीसगढ़ की मेघा भट्ट को 8 लाख 25 हजार रुपए के लिए इस संपत्ति की नीलामी करने के लिए अपनी वैबसाइट पर नोटिस प्रसारित किया है.

स्टेट बैंक की अमेठी शाखा ने प्रदीप कुमार कौशल के रिहायशी मकान वार्ड नं. 6, रामलीला मैदान, मौजा भनौली, अमेठी के 8.50 लाख रुपए न चुकाने पर नीलामी का विज्ञापन निकाला है.

यूनियन बैंक औफ इंडिया महल्ला किशनपुरा, जालंधर की मधुबाला के मकान नं. 352 के 36 लाख रुपए न चुकाने पर नीलामी की तैयारी कर रहा है.

कैलाश डूडेजा के फ्लैट नं. 201, सैक्टर-सी, लिंबोडी, खंडवा रोड, इंदौर को 18 लाख रुपए में बेचने के लिए सूचना जारी की है. बैंक औफ इंडिया ने चिंचवाड, पुणे के एम पी सिंह के फ्लैट नं. 202 की 59 लाख रुपए में नीलामी की सूचना प्रकाशित की है. देना बैंक ने जयपुर के लखीचंद जैन के घर को 47.75 लाख रुपए में नीलाम करने का नोटिस दिया है.

खोखले वादे

जो देश खोखले दावों के बल पर जीता है, मेहनत के बजाय मंत्रों से सुखी, अमीर बनने की उधेड़बुन में दिनरात लगा रहता है, वहां ऐसे हालात सामने आते हों तो आश्चर्य कैसा?

इस देश में ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा,’ ‘ईज औफ डूइंग बिजनैस में भारत की रैंकिंग सुधरने का ढिंढोरा,’ ‘कालाधन वापस लाएंगे,’ ‘हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख जमा होंगे,’ ‘भारत विश्वगुरु होगा,’ ‘नोटबंदी से कालाधन बाहर निकलेगा,’ ‘जीएसटी से कर चोरी, बेईमानी रुकेगी,’ ‘राष्ट्रवाद,’ ‘मंदिर वहीं बनाएंगे,’ ‘वंदेमातरम’ और ‘गौभक्ति’ जैसे थोथे नारे और वादे प्रचारित किए गए. इन का देश के विकास से कोई लेनादेना नहीं है. स्टार्टअप, स्टैंडअप, मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना अब तक कोई रंग नहीं ला पाई हैं. फिर भी खोखले दावे किए जाते हैं.

ट्रांसपेरैंसी इंटरनैशनल की ताजा रिपोर्ट कहती है कि भारत भ्रष्टाचार के मामले में 2 पायदान और आगे बढ़ गया है. वह 183 देशों में 81वें स्थान पर जा पहुंचा है. 2016 में भारत 79वें नंबर पर था यानी बीते साल के दौरान देश में भ्रष्टाचार और बढ़ा है.

हमारे यहां जितने खोखले वादे, नारे हैं उतनी ही लूट ज्यादा है. व्यवस्था बेईमानों के नियंत्रण में है, वह बेईमानी को उकसाती है. तुम बेईमानी करो ताकि व्यवस्था में बैठे बेईमानों को भी फायदा मिले.

देश थोथे भाषणों, प्रवचनों से नहीं चलता. देश की जनता मेहनत करेगी तो वह अपने खूनपसीने की कमाई को लुटने नहीं देगी.

सरकार मेहनत के बजाय निकम्मापन और बेईमानी के रास्ते दिखाती है. भूमि, भवन मुफ्त, ब्याजमुक्त कर्ज, टैक्सों में छूट, बाजार की उपलब्धता, आयातनिर्यात की सुविधाएं जैसे अनगिनत साधन बैठेबिठाए उपलब्ध कराए जाते हैं. कौर्पोरेटजगत इन सुविधाओं का जम कर शुभलाभ उठाता है. फिर भी कुछ समय बाद पता चलता है कि कंपनियां फायदे के बजाय घाटे में जा रही हैं.

घाटे के बाद भी सरकार की मेहरबानी में कोई कमी नहीं आती. सरकार उन्हें दिवालिया घोषित कर देती है. उन के कर्ज को डूबत ऋण खाते में डाल देती है. कर्जदार का कुछ नहीं बिगड़ता. उस के घर से कुछ नहीं जाता. उलटा, वह सरकारी पैसे से अपनी निजी संपत्ति जोड़ लेता है.

मजे की बात है कि दिवालिया होने के बावजूद सरकार फिर से उन्हीं लोगों को दूसरी दिवालिया कंपनियां खरीदने के लिए कर्ज व सुविधाएं देने को तैयार दिखती है.

मेहनती कंपनियां खुद अपने साधनसुविधाएं जुटा लेती हैं. वे किसी की मुहताज नहीं होतीं, लेकिन जिन का इरादा ही बेईमानी के बल पर पैसा जोड़ना होता है वे इस तरह के फर्जीवाड़े करती रहती हैं.

जिस देश में मेहनतकश ज्यादा होंगे वहां लूट नहीं होगी. मेहनत की कमाई को वे लूटने ही नहीं देंगे. जिन लोगों ने बिना मेहनत पैसा, सुविधाएं पाईं, उन्हें लूट का कोई दुख नहीं होगा. लेकिन मेहनत की कमाई को कोई लूटने नहीं देगा.

असल में हमेशा से यहां काम न करने वाले मिल कर, मेहनत करने वालों की कमाई को लूटने की तिकड़म करते आए हैं. राजामहाराजा अमीरों से कर्ज ले कर उन्हें हर साधनसुविधा प्रदान करते आए थे. आम आदमी, किसानों से टैक्स वसूली चलती आई है.

देश के विकास के लिए सरकार और पूंजीपतियों की सांठगांठ वाली यह व्यवस्था खतरनाक है. इस से आम आदमी की कमाई लुट जाती है. लूटने वाले हमेशा की तरह दानदक्षिणा और घूस दे कर तीर्थयात्रा पर चले जाते हैं, पापों के प्रायश्चित्त करने का उन्हें उपाय जो बताया गया है.

जानबूझ कर कर्ज न चुकाने वाली चुनिंदा कंपनियां

कंपनी/ग्रुप   –    बकाया रकम(करोड़ों रुपए में)

फोरएवर प्रिंसियस ज्वैलरी ऐंड डायमंड्स लि. –  3,466 करोड़

किंगफिशर एयरलाइंस लि.  –  3,097 करोड़

आरईआई एग्रो लि. – 2,730 करोड़

सैंचुरी कम्युनिकेशन, पिक्सियन मीडिया प्रा.लि. –  2,416 करोड़

जूम डैवलपर्स प्रा. लि. –  2,371 करोड़

रेड ऐंड टेलर (इंडिया) लि.,

एस कुमार्स नैशनवाइड लि. –  2,080 करोड़

डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग्स लि. – 2,041 करोड़

सूर्या विनायक इंडस्ट्रीज लि. –  1,853 करोड़

इंडियन टैक्लोइमैक कं. लि. – 1,646 करोड़

बेटा नैफथोल – 1,324 करोड़

रजा टैक्सटाइल लि. – 1,044 करोड़

VIDEO : ये मेकअप बदल देगी आपके चेहरे की रंगत

ऐसे ही वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक कर SUBSCRIBE करें गृहशोभा का YouTube चैनल.

दलित उत्पीड़न से दुनियाभर में धूमिल होती समाज की छवि

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से महज 58 किलोमीटर की दूरी पर उन्नाव शहर है. यहां के वारासगवर इलाके के सथनी गांव में 22 फरवरी को 19 साल की मोनी नामक लड़की को जिंदा जला दिया गया.

मोनी साइकिल से एक दिन अपने गांव से बाजार की तरफ जा रही थी. इतने में कुछ लड़के साइकिल से आए और उसे खेतों में खींच ले गए, फिर उस पर पैट्रोल छिड़क कर आग लगा दी. जान बचाने के लिए लड़की सड़क की ओर भागी पर उस की मदद करने वाला कोई न था. बदमाश लड़की को जलता छोड़ कर भाग गए. लड़की जल कर मर गई.

पुलिस ने 2 दिनों बाद विकास नामक एक लड़के को पकड़ कर जेल भेज दिया. विकास पर आरोप है कि उस की मोनी से दोस्ती थी. दोस्ती में दरार पड़ी तो उस ने यह कांड कर दिया. किसी लड़की को आज के सभ्य समाज में जिंदा जलाने की घटना क्रूर राजाओं और तानाशाहों की याद दिलाती है.

केंद्र और प्रदेश में सरकारें चला रही भारतीय जनता पार्टी के लिए उन्नाव महत्त्वपूर्ण जिला है. भाजपा के साक्षी महाराज यहां से सांसद है. उन के क्षेत्र में दलित लड़की की बर्बर हत्या से पता चलता है कि दबंगों का मनोबल कितना बढ़ा हुआ है.

प्रदेश सरकार में महत्त्वपूर्ण पद संभाल रहे विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित का कार्यक्षेत्र भी उन्नाव ही है. एक ओर केंद्र से ले कर प्रदेश तक दोनों सरकारें ‘बेटी बचाव बेटी पढ़ाओ’ की बात कर रही हैं, तो वहीं दूसरी ओर इन्हीं सरकारों के दौर में लड़कियां जलाई जा रही हैं.

उन्नाव की घटना से कुछ ही दिनों पहले उत्तर प्रदेश की शिक्षानगरी कहे जाने वाले इलाहाबाद शहर में एक दलित युवक को एक रैस्टोरैंट में पीटपीट कर मार डाला गया. मारपीट की छोटी सी वजह थी. दोनों घटनाओं में सरेआम लोगों ने अकेले को मारा. उन्नाव की मोनी को पैट्रोल छिड़क कर जलाया गया तो इलाहाबाद के युवक को नाली के किनारे पीटपीट कर मार डाला गया. युवक के मरने के बाद भी उस को पीटा जाता रहा.

society

एनकाउंटर को सही ठहराते हुए उन्नाव और इलाहाबाद की घटनाएं पूरी तरह से बर्बरता से भरी हैं. यह तब है जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते हैं, ‘‘बदमाशों को उन की ही भाषा में जवाब दिया जाए.’’ पुलिस ने कुछ एनकाउंटर्स कर सनसनी फैलाने की कोशिश की पर दबंगों पर असर पड़ता तो ऐसी घटनाएं न घटतीं.

हिंदुत्व के नाम पर दबंगई

योगीराज में ये हिंदुत्व की रक्षा के नाम पर चोला बदल चुके हिंदू रक्षा के नाम पर दबंग और गुंडे सक्रिय हो गए हैं. ये भगवा गमछाधारी बन गए हैं. अब इन को किसी पार्टी के झंडे तक की जरूरत नहीं रह गई है. ऐसे दबंग नेताओं के लिए भीड़ जुटाने में भी आगे हो जाते हैं. जहां अच्छे काम में 5 लोग एकसाथ नहीं खड़े होते वहां ये लोग हत्या जैसे जघन्य अपराध करने पर भी बहुत सारे लोगों को तैयार कर लेते हैं.

उन्नाव और इलाहाबाद दोनों शहरों की ही घटनाओं में दबंगों का साथ देने वाले दूसरे लोग भी थे. कासगंज में हुए दंगे में भी ऐसे ही दबंग शामिल थे.

इन को कानून की परवा नहीं होती. कासगंज में धारा 144 लागू होने के बाद भी तिरंगा यात्रा निकालने की अनुमति लेने की जरूरत नहीं समझी गई.

प्रदेश में अगर कानून का राज होता तो लोगों में जरूर कानून का डर होता और एक के बाद एक बर्बर घटनाएं नहीं घटतीं. गौरक्षा और धर्म के नाम पर कानून तोड़ने वाले जब बचने लगे तो दूसरे दबंगों का भी मनोबल बढ़ने लगा. ये अब उद्दंड हो गए हैं. हर गांव गली में जाति की खाई लगातार गहरी होती जा रही है.

ऐसे में जब लोगों को यह लगता है कि सामने वाला उस से नीची जाति का है तो वह और भी ज्यादा हिंसक हो कर उस को पीटने लगता है. दलितों के साथ हो रही घटनाओं के पीछे पाखंडी सोच का बड़ा हाथ है. इस को रोज बढ़ावा दिया जा रहा है.

धर्म की आड़ में प्रवचनों द्वारा लोगों को लगातार यह बताया जा रहा है कि समाज में अलगअलग खेमे भगवान की देन हैं. यह पिछले जन्मों में किए गए पापों का फल है. दबंगई करनेवाले जानते हैं कि उन पर उंगली नहीं उठाई जाएगी क्योंकि यह समाज का दस्तूर है.

दलितों को आज भी धार्मिक कहानियों में यही समझाया जाता है कि सवर्णों व उच्च जाति की सेवा करो, तभी कल्याण होगा. यही सोच एक दलित लड़की को जिंदा जलाने को प्रेरित करती है. आज तक जिन बाबाओं के आश्रमों का परदाफाश हुआ वहां सब से अधिक दलित लड़कियां ही पाई गईं. इस से भी समाज में ऊंचनीच के अंतर को समझा जा सकता है.

खामोश हैं दलित संगठन

दलितों के संगठन इन घटनाओं पर चुप्पी साधे हुए हैं. बहुजन समाज पार्टी की चुप्पी सब से बड़ी है. इस तरह की घटनाओं पर भाजपा के नेता कौशल किशोर दोनों ही जगहों पर गए और वहां पीडि़त परिवारों की मदद का पूरा भरोसा दिलाया. दलितों के मुखर न होने की प्रमुख वजह यह है कि भाजपा ने हिंदुत्व के नाम पर इन को अपने साथ कर लिया था.

देश और प्रदेश के तमाम बडे़ दलित नेता भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े और अब वे भाजपा के साथ हैं. ऐसे में वे चुप हैं. दलित संख्या में अधिक हैं. ऐसे में नेता उन को साथ रख कर वोट लेने तक उन के साथ रहते हैं. बाद में वे उन की मूल समस्याओं पर चुप हो जाते हैं. दलित अपने से ऊंची जातियों से मेलजोल नहीं रख पाते हैं. ऊंची जातियों वालों का मानना है कि दलितों को वैसे ही रहना चाहिए जैसे वे सदियों से रहते आए हैं.

आज जिस तरह दबंगों के हौसले बुलंद हैं उस से सरकार की छवि खराब हो रही है. इलाहाबाद और उन्नाव की दोनों ही घटनाओं में पुलिस ने पहले मुकदमा दर्ज नहीं किया. इलाहाबाद और उन्नाव की घटनाओं के वीडियो और फोटो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुए तब पुलिस हरकत में आई.

थाना स्तर पर आज भी दलित पीडि़त के पक्ष में कोई कार्यवाही नहीं होती है. सरकार यह कह कर अपना पल्ला झाड़ती रहती है कि वह प्रेमप्रसंग है, वह पारिवारिक विवाद है वगैरहवगैरह. असल में तो यह वर्णवाद है, वह भी सदियों पुराना.

सरकार के संरक्षण से बढ़ रही दबंगई

–आर एस दारापुरी (पूर्व आईपीएस, सदस्य – उत्तर प्रदेश स्वराज समिति)

उत्तर प्रदेश में दलितों के प्रति बढ़ रही हिंसक घटनाओं पर जहां बहुत सारे दलित नेता और दल चुप्पी साधे हैं वहीं अवकाशप्राप्त आईपीएस अधिकारी और उत्तर प्रदेश स्वराज समिति के सदस्य आर एस दारापुरी पूरी तरह से मुखर हैं. वे कहते हैं, ‘‘दलितों पर हिंसक घटनाओं की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शपथ लेते ही शुरू हो गई थी. जब सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में कहा गया, ‘अगर यूपी में रहना है तो योगीयोगी कहना है’. इस नारे में ही बाद में वंदेमातरम भी जोड़ दिया गया. यही नहीं, वहां बाबासाहेब को ले कर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं. इस से हिंदुत्व के नाम पर काम करने वालों का हौसला बढ़ गया.

‘‘सरकार के इस कदम से खुली गुंडई, हिंसा और दबंगई को संरक्षण मिलने लगा. कई तरह की वाहनियां और सेनाएं अपनाअपना विरोध प्रदर्शन करने लगीं. इस से समाज का माहौल खराब हुआ. समाज में कानून का भय खत्म हो गया. समाज में एक हिंसक वातावरण बन गया है जो पूरे समाज के लिए घातक है.’’

दलित आंदोलन की चुप्पी पर दारापुरी ने कहा, ‘‘बसपा के समय से दलित आंदोलन कमजोर हो गया था. बाबासाहेब हमेशा कहते थे कि हिंदूराष्ट्र समाज के लिए घातक होगा. यहां पर शंबूक और बाली की तरह लोगों के वध होंगे. सीता की तरह महिलाओं के साथ अन्याय होगा. वे हमेशा देश में हिंदूराष्ट्र की स्थापना का विरोध करते रहे.

‘‘कांशीराम आंदोलन की जगह उस तरह काम करते थे जिस में दलित कमजोर बन कर उन के पीछेपीछे चलता रहे. जिस वजह से आज भी दलित मुखर हो कर अपनी बात नहीं कह पा रहा है. आज वह फिर से बसपा का साथ छोड़ ऊंची जातियों की अगुआई करने वालों के पीछे खड़ा हो गया है. इस के साथ ही भाजपा ने दलित नेताओं को अपने पक्ष में कर लिया, इसलिए दलित चुप हैं. उन को समझ में ही नहीं आ रहा है कि वे क्या करें?’’

VIDEO : आप भी बना सकती हैं अपने होठों को ज्यूसी

ऐसे ही वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक कर SUBSCRIBE करें गृहशोभा का YouTube चैनल.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें