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जब विवाह बोझ बन जाए

एक बीमार विवाह के साथ रहना क्या विवाह को समाप्त करने से अच्छा है? यह सवाल बहुत से पुरुषों और स्त्रियों के मन में कौंधता है. जो पतिपत्नी सदा एकदूसरे को कोसते रहते हैं, एकदूसरे की गलतियां निकालते रहते हैं उन्हें अकसर लगता है कि इस विवाह के चक्कर में पड़े ही क्यों, क्यों नहीं वे विवाह तोड़ कर आजादी को अपनाते?

यह सवाल जीवन के उन चंद उलझे सवालों में से है जिन के उत्तर नहीं होते. विवाह, पहली बात समझ लें कोई संस्कार नहीं, कोई ईश्वरप्रदत्त नहीं, कोई परमानैंट जीवन का हिस्सा नहीं. विवाह हमेशा तोड़ा जाता रहा है. हमारे पौराणिक इतिहास में तो पतिपत्नी हमेशा विवाद से ग्रस्त रहे हैं और शायद ही कोई ऐसा जोड़ा हो, जो आदर्श पतिपत्नी के रूप में रहा हो. जो खुद ईश्वर के अवतार रहे हैं या अवतारों की संतान कहे जाते हैं, आदर्श पतिपत्नी का उदाहरण पेश नहीं कर सके.

इसीलिए किसी को भी विवाह तोड़ने पर कोई विशेष अपराध भाव नहीं पालना चाहिए. विवाह में बच्चे हुए या नहीं हुए, अगर लगने लगे कि इस बीमार काया को ढोने से अच्छा इस से मुक्ति पाना है तो इसे अपना लेना चाहिए.

अगर मुसलमानों का कोई हिस्सा तीन तलाक को मानता है तो यह गलत नहीं, क्योंकि यह एकतरफा होते हुए भी सहज और सुलभ तरीका है एकदूसरे से रंज और रोष भरे संबंध को तोड़ने का.

भारतीय जनता पार्टी तो नहीं कर सकती पर दूसरी पार्टियों को चाहिए था कि वे कहते कि तीन तलाक का यह अधिकार पुरुषों के साथसाथ औरतों को भी मिले ताकि कानूनन बराबरी हो जाए और भेदभाव की आड़ में हिंदू एजेंडे को लागू न करा जा सके.

यह सुविधा हिंदुओं को भी मिलनी चाहिए, क्योंकि एक बोझिल विवाह जितनी जल्दी समाप्त हो जाए उतना ही अच्छा है.

पर यहां सवाल उठता है कि कौन सा विवाह बोझ है, कौन सा विवाह बीमार है. जैसे लाइलाज बीमारी से ग्रस्त बेटे या पिता को मारा नहीं जाता वैसे ही जब तक विवाह जिंदा है, उसे सहना भी चाहिए और स्वीकारना भी. जरूरत उस के इलाज की है, उसे तलाक का जहर देने की नहीं.

असल में विवाह तोड़ना निकटतम संबंधी की मृत्यु के बराबर ही नहीं उस से बढ़ कर है. जब विवाह संक्रमण के कारण अपनेआप मर जाए तभी उसे फूंका जा सकता है. यह संक्रमण एक साथी का दूसरा साथी ढूंढ़ लेना हो सकता है, अलग जा कर रहना हो सकता है, विवाह संबंध पर पुलिस का तेजाब उड़ेल देना हो सकता है, भयंकर मारपीट हो सकती है.

केवल असहमति, ताने देना, जोर से बोलना, गुस्सा होना, रूठना, रोनाधोना, देर से घर आना, डांटफटकार करना आदि विवाह की छोटीबड़ी बीमारियों में गिना जा सकता है. उन्हें विवाह के मरने की संज्ञा नहीं दी जा सकती.

बहुत से युवा केवल असहमति पर विवाह तोड़ देते हैं और यह तुनकबाजी लंबे समय तक कष्ट देती है. अरेंज्ड मैरिज हो या लव मैरिज, बाद में पतिपत्नी में सैक्स के माध्यम से यह संबंध प्रेमी जोड़े का सा ही हो जाता है. एक बार का प्रेम कुछ अरसे बाद इतना कटु हो जाए कि इसे बहुत आसानी से घर बदलने की तर्ज पर तोड़ दिया जाए, गलत है.

यह समझ लेना चाहिए कि जब तक दूसरा दरवाजा खुला न हो अपना बनाबनाया सुरक्षा देता दरवाजा छोड़ देना पति और पत्नी दोनों के लिए बेवकूफी है. विवाह व्यावहारिकता पर टिका होता है. यह धार्मिक या कानूनी बंधन नहीं. दोनों चाहते हैं कि विवाह में विवाद हो ताकि धर्म और कानून के बिचौलियों की बनी रहे.

पतिपत्नी विवाद में बाहरी लोग, दोनों के मातापिता, रिश्तेदार, दोस्त, सहकर्मी, काउंसलर, पंडे, मुल्ला, पुलिस, अदालत जितना न आएं उतना अच्छा है. ये सब पतिपत्नी के झगड़े में अपना उल्लू सीधा करते हैं.

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दिल्ली के चीफ सैक्रेटरी अंशु प्रकाश को मारे गए थप्पड़ का सच

आम आदमी पार्टी के 2 विधायकों प्रकाश जारवाल और अमानतुल्ला खान ने दिल्ली के चीफ सैक्रेटरी अंशु प्रकाश को मीटिंग में आधी रात को थप्पड़ मारे थे या नहीं, उम्मीद की जानी चाहिए कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले अदालत में इस बारे में कोई फैसला हो जाएगा.

असल फसाद आप बनाम एलजी और भाजपा है जो इस बवंडर में दब गया और बेचारे चीफ सैक्रेटरी साहब बेवजह बलि का बकरा बन गए, जिन पर आप का आरोप है कि वे आम लोगों के हितों से जुड़े सवालों व बातों पर गौर ही नहीं कर रहे थे.

अपने साथी की बेइज्जती पर देशभर के आईएएस अधिकारी इकट्ठा हो गए. इस बाबत उन्हें गृहमंत्री राजनाथ सिंह की शह मिली हुई थी जिन्होंने इस कथित थप्पड़ को अफसरशाही के स्वाभिमान से जोड़ दिया था. रिपोर्ट दोनों पक्षों ने लिखाई लेकिन आम राय आप के पक्ष में जा रही है, तो इस की वजह यह थप्पड़ नहीं, बल्कि वे साहब लोग हैं जो सरकार को अपने इशारों पर नाचते देखने के आदी हो गए हैं.

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झूठी तारीफ कर पैसे नहीं कमाता : टैरेंस लुईस

कई हीरो और हीरोइनों को अपनी उंगली पर नचा चुके कोरियोग्राफर टैरेंस लुईस ‘डीआईडी,’ ‘नच बलिए,’ ‘हिंदुस्तान के हुनरबाज’ और ‘चक धूमधूम’ जैसे टीवी रिऐलिटी शोज के जज रहे चुके हैं. टैरेंस की खासीयत यह है कि वे प्रतियोगियों को काफी मोटिवेट करते हैं और अपने कमैंट्स व गाइडैंस से उन का बैस्ट निकलवा लेते हैं. यही वजह है कि आज वे अपनी अलग पहचान रखते हैं. एक माइक्रोबायलौजिस्ट और होटल मैनेजमैंट की पढ़ाई करने के बाद भी डांस में रुचि होने की वजह से टैरेंस ने परंपरागत पेशे को न अपना कर अपने दिल की बात सुनी और अपने लिए वह काम चुना, जिस में उन का मन रमता था. हालांकि, उन को शुरुआत में अपने परिवार से काफी नाराजगी मिली, लेकिन वे यह समझते थे कि उन्होंने अपने लिए बिलकुल सही रास्ता चुना है. टैरेंस की मेहनत और लगन ने उन्हें आज अपने क्षेत्र में काफी ऊंचाई पर ला दिया है. पेश हैं एक शो के दौरान उन से हुई बातचीत के खास अंश :

डांस की लत कैसे लगी?

डांस तो मैं बचपन से ही करता था. 14 साल की उम्र में मैं ने अपने स्कूल की तरफ से डांस इंटरनैशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था. वहां मौजूद जज परवेज शेट्टी ने मुझे डांस करते देखा और आगे बढ़ने को प्रोत्साहित किया क्योंकि उस प्रतियोगिता में मुझे पहला पुरस्कार मिला था. साथ ही, डांस सीखने के लिए स्कौलरशिप भी मिली थी.

जब मैं जैज बैलेट क्लासेज में डांस सीखने गया तो वहां के टीचर मेरा डांस देख कर खुश हो गए. परवेज शेट्टी सर के बाद अमेरिकन मौडर्न कन्टैंपरेरी डांस टीचर जौन फ्रीमैन का मेरी जिंदगी में आना मेरी लाइफ को ट्विस्ट कर गया.

वर्ष 1996-97  में फ्रीमैन मुझे हौटन स्टाइल सिखाने के लिए मुंबई आए थे. उस से पहले मुझे इस डांस स्टाइल के बारे में पता तक नहीं था. इस के बाद मैं डांस में पूरी तरह खो गया.

डांस को कैरियर बनाने की कब सोची?

मेरा परिवार मुंबई की चाल में रहता था. मैं ने वह सबकुछ देखा जो एक आम भारतीय परिवार में होता है. इसलिए परिवार चलाने के लिए जब पैसों की जरूरत हुई तो मैं ने डांस को ही कैरियर बनाने की सोची. सब से पहले मैं ने शुरुआत डांस टीचर के रूप में शुरू की. इस के बाद सैलिब्रिटी माधुरी दीक्षित और गौरी खान जैसी कई हस्तियां को डांस सिखाया.

‘लगान’ फिल्म में मैं ने कोरियोग्राफी की है. मेरी डांस क्लास सही चल रही थी कि एक दिन एलीक पद्मसी का कौल आया. उन्होंने मुझे एक विज्ञापन कोरियोग्राफ करने का मौका दिया. उस विज्ञापन के लिए मुझे कुछ डांसर्स की जरूरत थी. इसलिए कई  कालेजों में मैं ने डांस औडीशंस कराए और यहीं से नींव पड़ी मेरी डांस कंपनी टैरेंस लुईस कन्टेंपरेरी डांस कंपनी की.

क्या यंग जैनरेशन डांस में कैरियर बना सकती है?

बिलकुल बना सकती है. जब से डांस रिऐलिटी शो शुरू हुए हैं तब से तो संभावनाएं और बढ़ गई हैं. मेरा डांस कंपनी शुरू करने का मकसद भी यही था कि मैं इस के माध्यम से डांस को मेन स्ट्रीम कैरियर के रूप में स्थापित कर सकूं. विदेशों में डांसिंग एक फुलफलेज्ड कैरियर है, जबकि भारत में इसे केवल हौबी के रूप में लिया जाता है और इज्जत की नजर से नहीं देखा जाता. हमारा मुंबई में सिर्फ एक डांस इंस्टिट्यूट है. हमारे यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है, सिर्फ उन्हें पहचानने और प्लेटफौर्म देने की जरूरत है.

नए लोगों को क्या संदेश देना चाहेंगे?

मैं एक डांस टीचर हूं, लेकिन हमेशा स्टूडैंट बन कर ही रहना चाहता हूं, क्योंकि मैं हमेशा सीखना चाहता हूं. जिंदगी में अनुशासन व अभ्यास 2 ऐसी चीजें हैं जिन्होंने मुझे कभी रुकने नहीं दिया. यही मैं डांस में कैरियर बनाने वालों से कहना चाहता हूं कि वे अपने काम में माहिर बनें. बाजार में क्या स्टाइल चल रहा है, इस पर नजर रखें.

बौलीवुड में कोरियोग्राफी ज्यादा न करने की वजह?

कोई खास वजह नहीं. मैं उन लोगों को डांस नहीं सिखा सकता जो उस की एबीसीडी भी न जानते हों.  दूसरी बात, मैं जो कहना चाहता हूं, सामने बोल देता हूं जो सब को बुरा लगता है. फिल्मों में कई बार ऐसा होता है कि डांस करने वाले को बच्चों की तरह सिखाना पड़ता है. तब मैं कह देता हूं कि तुम से नहीं होगा डांस, इसी वजह से मैं बौलीवुड में कोरियोग्राफी कम करता हूं. मैं सिर्फ डांस सिखाता और जज करता हूं. पैसे की मुझे भी जरूरत होती है लेकिन किसी की झूठी तारीफ कर के मैं पैसा नहीं कमाना चाहता.

सबसे अच्छे डांसर

आज रणवीर सिंह और वरुण धवन सब से अच्छे डांसर हैं. इन्हें ज्यादा सिखाना नहीं पड़ता. क्योंकि आज के कलाकार फिल्म में आने से पहले डांस सीखने और जिम जाने को पहली प्राथमिकता देते हैं. रितिक रोशन जैसे कलाकार के साथ काम करना आसान है. वे डांस में इतने परफैक्ट हैं कि कोरियोग्राफर एकदो नए स्टैप्स खुद सीख लेता है.

काबिलीयत की कदर नहीं

टैरेंस कहते हैं ‘‘मैं रिऐलिटी डांस शोज करता हूं. कई ऐसे लोगों को देखता हूं जो डांस के मामले में जीरो हैं लेकिन उन के प्रशंसकों की तादाद इतनी ज्यादा है कि काबिलीयत न होने पर भी वे ऊपर पहुंच जाते हैं. हमारे यहां टैलेंट की नहीं, चमकदमक और ग्लैमर की कदर है.’’

राइटर भी हैं टैरेंस

टैरेंस एक अच्छे डांसर होने के साथसाथ एक राइटर भी हैं. पिछले दिनों उन्होंने एक विवाहित जोड़े के तनावपूर्ण जीवन पर एक कहानी लिखी. कोरियोग्राफी पेशे से संबद्ध एक पति व पत्नी के रिश्तों में पैदा हुई समस्याओं पर आधारित इस पटकथा पर अगर फिल्म बनती है तो यह संवेदनशील फिल्म साबित होगी.

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कहीं आप भी तो अपने फोन की स्क्रीन साफ करते वक्त नहीं करते हैं ये गलतियां!

आजकल बड़ी टचस्क्रीन वाले स्मार्टफोन का क्रेज लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है. मोबाइल के बाद टैबलेट और टीवी, सभी कुछ टचस्क्रीन में आ चुका है. यूज करने में अच्छी लगने वाली टचस्क्रीन डिवाइस की सेफ्टी का ख्याल रखना भी काफी जरूरी है.

यदि आपके हाथ साफ नहीं हैं तो डिस्पले पर निशान पड़ जाते हैं और डिवाइस देखने में अच्छी नहीं लगती. स्क्रीन पर आने वाले मामूली निशान तो आसानी से साफ हो जाते हैं, लेकिन यदि गंदगी का कोई गहरा निशान बन जाए तो उसे हटाना काफी मुश्किल होता है. टचस्‍क्रीन के सही ढंग से साफ नहीं होने पर यह सही से काम भी नहीं करती है.

महंगे स्मार्टफोन्स और टैबलेट्स की स्क्रीन को सुरक्षित रखने के लिए डायरी कवर, टैम्पर्ड ग्लास, स्क्रीन प्रोटेक्टर जैसी चीजें मार्केट में उपलब्ध हैं. हालांकि, गोरिल्ला ग्लास आने के बाद स्क्रीन डैमेज का खतरा काफी कम हुआ है. लेकिन फिर भी कई बार फोन की स्क्रीन काफी गंदी हो जाती है जिसे साफ करते समय कई बातों का ध्यान रखना बेहद जरुरी है.

जानें स्मार्टफोन की स्क्रीन को साफ करते वक्त किन सावधानियों को बरतना चाहिए.

स्क्रीन साफ करते समय क्या न करें

– स्क्रीन साफ करते समय ग्लास क्लीनर जैसे कैमिकल्स का इस्तेमाल न करें. साथ ही अमोनिया जैसे क्लीनर्स का भी इस्तेमाल करने से बचें. स्क्रीन को आसानी से बिना कैमिकल के भी साफ किया जा सकता है.

– स्क्रीन को साफ करने के लिए कभी भी पानी का इस्तेमाल न करें. यह स्मार्टफोन या टैबलेट को खराब भी कर सकता है. अगर जरुरत हो तो माइक्रोफाइबर कपड़े को हल्का-सा पानी में भिगोएं और उससे फोन की स्क्रीन को साफ करें.

– इसे साफ करने के लिए प्लास्टिक, टिशू पेपर या किसी भी तरह का सख्त कपड़ा इस्तेमाल न करें. इससे स्क्रीन पर स्क्रैच पड़ सकते हैं.

– स्क्रीन साफ करते समय उस पर ज्यादा दबाव न डालें. इससे स्क्रीन टूट भी सकती है.

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बीच मैदान में इस क्रिकेटर को लड़की ने किया किस और फिर..

क्रिकेट, दुनिया के लोकप्रिय खेलों में से एक है. क्रिकेट और क्रिकेटर्स के लिए दीवानगी किसी से छिपी नहीं है. इस अनोखे खेल में ऐसी कई घटनाएं देखने को मिलती है जो सभी को हक्का बक्का कर देती हैं. कई बार क्रिकेट मैदान पर लड़कियों में क्रिकेटर्स को लेकर विशेष प्रेम देखने को मिलता है.

क्रिकेट मैदान पर कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता. आज हम आपको एक ऐसी ही घटना बताने जा रहे हैं, जिस घटना के बाद एक खिलाड़ी पानी-पानी हो गया था. बात है 1950-60 के दशक की.

1950-60 के दशक में भारतीय क्रिकेटर अब्बास अली बेग विश्व के सबसे खूबसूरत क्रिकेटर्स में शुमार थे. सन 1960 में कानपुर में आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच में दौरान अब्बास अली बेग के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसे वो कभी भुला नहीं सकते.

दरअसल हुई यूं कि गर्ल्स स्टैंड से निकलकर एक लड़की अचानक मैदान पर आ गई और उसने अब्बास अली को किस कर लिया. अब्बास भी अचानक हुई इस घटना से हड़बड़ा गए साथ ही दर्शक भी कुछ नहीं समझ सके. स्टेडियम में एकदम से सन्नाटा छा गया लेकिन इसी बीच वहां मौजूद फैंस तालियां बजाने लगे. एक ओर फैंस इसे एन्जौय कर रहे थे मगर अब्बास अली का चेहरा शर्म से लाल हो गया.

बता दें कि 19 मार्च 1939 को हैदराबाद में जन्मे दाएं हाथ के बल्लेबाज अब्बास अली ने 10 टेस्ट मैचों की 18 पारियों में 1 शतक और 2 अर्धशतक की मदद से 428 रन बनाए थे. इस दौरान उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 112 रहा.

वहीं बात अगर प्रथम श्रेणी की करें तो 235 मैचों में उन्होंने 29 बार नाबाद रहते हुए 12367 रन बनाए थे. इस दौरान अब्बास अली ने 21 शतक समेत 64 अर्धशतक लगाए.

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समझें बच्चों के मन को नहीं तो बढ़ जाएंगी बीच की दूरियां

कृति की मां संगीता अपनी बेटी को अच्छी परवरिश देने के लिए चिंतित रहती हैं. उस की हर छोटीबड़ी जरूरतों का पूरा खयाल रखती हैं लेकिन फिर भी कृति और संगीता के बीच सहजता नहीं बन पा रही थी. संगीता की तरह ऐसी कई मांएं हैं

जो अपने लाड़ले या लाड़ली के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए काफी प्रयास करती हैं पर फिर भी अच्छा मैत्री संबंध बन नहीं पाता. ज्यादातर मामलों में मां का शक्की बरताव, एकदूसरे को न समझ पाने में असमर्थता जैसे कारण पाए जाते हैं.

मुंबई के माइंड मंत्रा के संस्थापक डा. हेमंत मित्तल इस बारे में कहते हैं कि ज्यादातर दंपती अपने बच्चों पर विश्वास होने का दावा तो करते हैं पर मन ही मन उन के भीतर डर बना रहता है, जो स्वाभाविक भी है. लेकिन इस डर को दूर करने के लिए आप क्या करते हैं और किस तरह बच्चों के सामने प्रतिक्रिया देते हैं, उस पर आप का और आप के बच्चे के बीच के रिश्ते का भविष्य टिका होता है.

हर मां के भीतर अपने बच्चे को ले कर असुरक्षा की भावना रहती है. नतीजतन, वह उस की नईनई मांगों पर सीमा से अधिक प्रतिक्रिया दे देती है. स्कूल में पैरेंट्स मीट के दिन उन के स्कूल जाती है और अपनी जासूसी शुरू कर देती है.

बेटी के बौयफ्रैंड को और बेटे की गर्लफ्रैंड को तिरछी निगाहों से देखना, टीचर के शिकायत करने पर सभी दोस्तों के सामने बच्चे को डांट देना, उन के मित्रों पर ऊटपटांग की टीकाटिप्पणी करना, सभी के सामने उन की बुरी आदतों को बतलाना आदि बच्चों को बिलकुल भी नहीं भाता. और यही एक बड़ा कारण बन जाता है बच्चे व आप के बीच दूरियों का.

दोस्तों को चाय पर बुलाएं

कैसा रहेगा अगर आप उन के शिक्षण संस्थानों में जासूसी करने के बजाय बच्चों के दोस्तों, सहेलियों को समयसमय पर चाय, नाश्ते के लिए घर पर बुलाएं. उन के साथ दोस्ताना लहजे में बात कर उन्हें सहज महसूस करवाएं.

फिर उन के बात करने के तरीके, भाषा, व्यवहार पर अपनी हलकी नजर डालें. इस से आप को बच्चों के दोस्तों को अच्छे से जानने का मौका मिलेगा. उन के साथ अपने बच्चे के व्यवहार पर गौर करें. इस से आप के दिए हुए संस्कार उस तक पहुंच रहे हैं या नहीं, समझ में आ जाएगा.

स्कूल या कालेज में टीचर जो कहें, जरूरी नहीं वह सही ही हो. हो सकता है किसी निजी परेशानी के चलते या रोषपूर्वक टीचर ने आप के बच्चे के बारे में गलत बात कह दी हो. इसलिए उस पर बरसने से पहले शांतिपूर्वक ठंडे दिमाग से सोचें और विषय की पूरी जांचपड़ताल कर के ही बच्चे से कुछ कहें. उन्हें सहगलत के बारे में प्यार से समझाएं. अपने बच्चे की पौकेटमनी पर नजर रखें. ध्यान दें कि वह अपने पैसे किन चीजों पर ज्यादा खर्च करना पसंद करता है. इस से आप को बच्चे की अच्छीबुरी आदतों के बारे में समझने में सहायता मिलेगी.

बच्चों पर विश्वास रखें

ज्यादातर कामकाजी दंपती अपनी व्यस्तता के चलते बच्चों को समय नहीं दे पाते. ऐसे में जब बच्चे की किसी गलत आदत के बारे में पता लगता है, तो बगैर सोचेसमझे उस पर बरस पड़ते हैं. अपने बच्चे के लिए समय निकालें. कम से कम सप्ताह में एक पूरा दिन उस के साथ गुजारें. किसी भी गलत आदत के पता लगने पर पहले बच्चे से उस बारे में बात करें. उसे भाषण देने के बजाय शांति से उस की पूरी बात सुनें.

बच्चों की पसंद और आदतों को समझने के बाद उन से सहजता से बात करें, समझाएं और यदि फिर भी बात न बने तो आप किसी अच्छे मनो- चिकित्सक की सहायता भी ले सकते हैं. अपने बच्चों पर विश्वास रखें. उन्हें बोल्ड बनाएं, न कि उन पर आप अपने बचपन के नियम और कानून थोपें. बच्चों को स्वतंत्रता बेहद पसंद होती है. उन्हें थोड़ी छूट दें, बर्थडे पार्टी आदि में जाने की इजाजत दें. उन्हें पार्टी में खुद छोड़ने व लेने जाएं या फिर उन के दोस्तों का नंबर ले लें. लेकिन उन्हें बारबार फोन कर अपनी व्याकुलता जाहिर न करें. बदलते जमाने के साथ अपनी परवरिश करने के तरीकों में भी थोड़ा बदलाव और खुलापन लाएं. फिर देखें आप का बच्चा कैसे गर्व से अपने दोस्तों से आप को मिलवाता है.                           द्य

समझें बच्चे की कशमकश

अपने बच्चे की नोटबुक को देखें. अगर लिखावट समझ सकने योग्य न हो या ज्यादा खिंचीखिंची हो, तो इस बारे में काउंसलर से बात करें. बच्चे कभीकभी अपने मन की बात बता नहीं पाते. लेकिन उन की लिखावट से उन की मनोस्थिति के बारे में बहुतकुछ जाना जा सकता है.

बच्चा रात में ठीक से सो पा रहा है या नहीं, इस पर भी एक नजर डालें. यदि वह सोते वक्त बेचैनी महसूस करता हो, बारबार करवटें बदल रहा हो, दांत पीसता हो, तो समझ जाएं कि जरूर उस के मन में किसी न किसी प्रकार की चिंता या डर बैठा हुआ है. उस से इस संदर्भ में जानने की कोशिश करें. बच्चे के खाने पीने की गति- विधियों पर ध्यान रखें. वह पूरा आहार ले रहा है या नहीं, समय पर भूख लग रही है या नहीं. इन सब बातों पर ध्यान रख कर भी आप अपने बच्चे के भीतर चल रही कशमकश को समझ सकते हैं. बच्चा किस प्रकार का खेल खेलना पसंद करता है, आउटडोर या इनडोर, इलैक्ट्रौनिक गैजट्स पर आधारित या साधारण प्रकार के खेल. उन के खेलने के तरीके से ले कर खेल के प्रकार द्वारा आप उन की पसंद और सोच को परख सकते हैं.

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पति कमाए पत्नी उड़ाए : पति की जेब को देख कर ऐसे चलाएं समझदारी से घर

संगीता शुरू से ही ऐशोआराम में पलीबढ़ी थी. उसे मायके में किसी भी चीज की कमी नहीं थी. जब जो चाहती, खरीदती. अपनी मरजी के मुताबिक खर्च करती. लेकिन शादी के बाद उस के खर्च करने की आदतों पर जैसे पाबंदी लग गई.

दरअसल, उस के पति राजीव की कमाई महीने में सिर्फ 35 हजार रुपए ही थी. घर का खर्च और इकलौते बेटे की स्कूल की फीस व पढ़ाईलिखाई पर आने वाले अतिरिक्त खर्च का बोझ ही राजीव बड़ी मुश्किल से उठा पाता था. ऐसे में संगीता आएदिन फालतू के खर्च कर डालती थी. बातबात में राजीव को एहसास दिलाती कि वह अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ 35 हजार रुपए ही कमाता रह जाएगा.

संगीता की तो जैसे अब आदत हो गई थी दूसरों से राजीव की तुलना करने की, ‘‘आज शालिनी ने 5 हजार रुपए की सुंदर साड़ी खरीदी तो कभी हमारे पड़ोसी ने नया म्यूजिक सिस्टम खरीदा, पता नहीं हम कभी कुछ खरीदेंगे भी या नहीं.’’

राजीव कई बार संगीता को समझाता पर उस के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती थी. संगीता वही करती जो उस का दिल करता. संगीता की फुजूलखर्च की आदत से राजीव परेशान रहता, आएदिन उन में बहस होती.

संगीता अकेली ऐसी पत्नी नहीं है बल्कि हर मिडिल क्लास में संगीता जैसी नासमझ पत्नियां मिल जाएंगी जो अपनी सीमाओं से परे जा कर खर्च करती हैं. उन की आदत ही होती है बिना सोचेसमझे शौपिंग करते रहने की, चाहे घर का बजट ही क्यों न गड़बड़ा जाए.

मैरिज काउंसलर नीशू शुक्ला कहती हैं, ‘‘यदि घर में कमाने वाला सिर्फ एक व्यक्ति हो और उस की मासिक आय सामान्य हो तो हर पत्नी का यह फर्ज होता है कि वह सोचसमझ कर ही खर्च करे. किसी को भी अपनी सीमाओं को नहीं भूलना चाहिए, फिर बात कम बजट में घर चलाने की ही क्यों न हो.

‘‘दांपत्य रिश्ता इतना नाजुक होता है कि उस में जरा सी अनबन, वैचारिक मतभेद, गलत आदतों के कारण गांठें पड़ने लगती हैं. कई बार बहस, लड़ाईझगड़े का कारण पैसा भी होता है. समस्या तब भी होती है जब पति की इनकम कम हो और पत्नी जरूरत से ज्यादा खर्च करने वाली हो. ऐसे में घर चलाना वाकई मुश्किल हो जाता है.’’

वे आगे कहती हैं, ‘‘जब शादी होती है तो किसी लड़की को यह पता नहीं होता कि जहां वह जा रही है उस घर का कल्चर, विचार या फिर आर्थिक स्थितियां कैसी होंगी. यह भी सच है कि हर घर का रहनसहन, पैसे खर्च करने का तरीका, जीने का अंदाज दूसरों से अलग होता है. इसलिए महिलाओं को कभी भी किसी की बेहतर कमाई, बेहतर जिंदगी की अपने घर से तुलना नहीं करनी चाहिए. महिलाओं को लौजिकल हो कर चीजों को स्वीकार करना चाहिए.

‘‘यदि शादी से पहले आप मायके में ऐशोआराम से रहती थीं तो आप को स्वयं सोचना होगा कि क्या आप पति की सीमित आय में पहले की तरह जी सकेंगी? क्या यह आप का फर्ज नहीं बनता कि आप अपने पति की सीमाओं को समझते हुए उन का साथ दें बजाय फुजूल खर्च करने के?’’

आर्थिक सीमाओं पर ध्यान

बेटीदामाद के रिश्ते या उन के किसी भी मामले में अभिभावकों को दखल नहीं देना चाहिए. खासकर लड़की के मातापिता को अपनी बेटी की फुजूल खर्च की आदत को सही ठहराना बंद कर देना चाहिए. वरना बेवजह उन के रिश्ते में तनाव पैदा होगा.

लड़की को इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि अब वह अपनी मां के घर नहीं रहती जहां वह अपनी मरजी से खर्च करती थी. वह तब खर्च करती थी जब उस के पिता के पास पर्याप्त पैसा था. अब उसे पति के वेतन में ही पूरे महीने का खर्च चलाना है, इसलिए अपनी जरूरतों और इच्छाओं में फर्क करना सीखे.

यह भी रखें ध्यान
– पतिपत्नी दोनों अपने रिश्ते में पारदर्शिता रखें. पत्नी अपने घर, पति और बच्चे के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए खर्च करे.

– घर चलाने की जिम्मेदारी किसी एक की नहीं बल्कि पतिपत्नी दोनों की ही समान रूप से होती है.

– पति की महीनेभर की कमाई जितनी है उसी में खुश रहना सीखें. बातबात में ताना देने से कमाई तो नहीं बढ़ जाएगी.

– किसी की देखादेखी शौपिंग न करें, पहले अपनी जरूरत देखें.

लड़की शादी से पहले यह जानने की कोशिश करे कि होने वाली ससुराल की आर्थिक स्थिति, खानेपीने का स्तर आदि कैसा है. शादी के बाद वहां की परिस्थितियों में वह स्वयं को स्थापित कर पाएगी या नहीं. यदि लड़की को लगता है कि सिर्फ उस के पति की कमाई से घरखर्च या उस की जरूरतें पूरी नहीं हो सकतीं तो वह खुद भी कोई पार्टटाइम काम शुरू कर सकती है.

यदि आप काम भी नहीं कर सकतीं तो पति जितना भी कमा कर लाता है उस में ही ऐडजस्ट करें, उसे स्वीकार करें.

यदि शौपिंग करनी भी है तो दूसरों की देखादेखी कुछ भी न खरीद लें. सोचसमझ कर खर्च करें. थोड़ीबहुत बचत करने की कोशिश करें ताकि 3-4 महीने के इकट्ठे हुए पैसों से आप मनचाहा सामान ले सकें. याद रखें कि हर समय हालात एक से नहीं होते. धैर्य रखें और पति की परेशानियां को बढ़ाने के बजाय कम करें.

कहां, कब और किस चीज पर पैसे खर्च करना जरूरी है, पहले उस का बजट बना लें और लिस्ट तैयार कर लें. शौपिंग करते हुए स्वयं से यह सवाल जरूर करें कि आप को किस चीज की सब से ज्यादा जरूरत है. इच्छाओं की पूर्ति तो बाद में भी होती रहेगी. पैसे खर्च करने में जल्दबाजी न दिखाएं. यह सोचने में समय लगाएं कि क्या आप को किसी महंगे या थोक मात्रा में सामान की वाकई जरूरत है.

जहां सेल लगी हो वहां जाने से खुद को रोकें. वजह, एक तो वहां सामान की क्वालिटी अच्छी नहीं होती और वहां अकसर महिलाएं बिना सोचेसमझे कुछ भी खरीद लेती हैं. जब भी शौपिंग पर जाएं, कैश ले कर जाएं न कि क्रैडिट कार्ड. सिर्फ इमरजैंसी के लिए एक ही क्रैडिट कार्ड अपने पास रखें. पति की आर्थिक सीमाओं की चिंता है तो जब भी शौपिंग करें सामान की लिस्ट तैयार कर लें. लिस्ट में लिखे गए सामान ही खरीदें. बातबात में पति को ताना देना, उन्हें दूसरों से कम आंकना, उन की काबिलीयत पर शक करना बंद करें वरना आप का रिश्ता कमजोर हो कर टूट सकता है.

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स्मार्टफोन के वौल्यूम बटन हैं बड़े काम के, जानें इसके बारे में

आप स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते तो हैं, पर शायद ही आप अपने स्मार्टफोन के सभी फीचर्स के बारे में जानते हों. क्या आप जानते हैं कि स्मार्टफोन के वौल्यूम का बटन दबाते ही आपके फोन की फ्लैश लाइट जल जाएगी. अगर नहीं तो आज हम आपको स्मार्टफोन के वौल्यूम बटन के बारे में कुछ खास जानकारी देने जा रहे हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे आपके वौल्यूम बटन से कई काम किए जा सकते हैं. आप इन बटन से अपने फोन की ब्राइटनेस बढ़ाने, फ्लैश लाइट चालू करने, साउंड प्ले और पोज, स्क्रीन को टर्न औफ जैसे कई काम कर सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि ये कैसे यह संभव है.

सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर पर जाएं. यहां से Button Mapper App डाउनलोड कर इंस्टौल कर लें. इसके बाद जब आप इसे ओपन करेंगे तो आपसे कुछ इजाजत मांगी जाएंगी. इजाजत देने के बाद नेक्सट पर क्लिक करके सबसे आखिर में आने के बाद आपको डिस्प्ले पर सबसे ऊपर Button Mapper  लिखा दिखाई देगा. इसके नीचे भी कई विकल्प दिखाई देंगे. इनमें वौल्यूम अप, वौल्यूम डाउन, हैडसेट बटन आदि होंगे.

यहां स्क्रीन पर सबसे नीचे GO का विकल्प दिखाई देगा, जिसपर क्लिक करने के बाद नया पेज खुलेगा. यहां एक्सेसिबिलिटी को औन कर दें. इसके बाद बैक आ जाएं. अब आपको वौल्यूम अप और वौल्यूम डाउन के बटन दिखाई देंगे. इनमें से जिस पर भी आपको सेट करना हो उसे सिलेक्ट कर लें. इसके बाद आपके फोन के स्क्रीन पर नए विकल्प आ जाएंगे. इनमें सबसे ऊपर आ रहे कस्टमाइज के विकल्प को औन कर लें. इसके नीचे भी 3 विकल्प दिखाई देंगे. सिंग्ल टैप, डबल टैप और लौन्ग प्रेस. इनमें से किसी 1 को सिलेक्ट कर लें. टैप करने के बाद अन्य विकल्प की एक लिस्ट खुल जाएगी.

अब इस वौल्यूम बटन के इस विकल्प पर जो भी शौर्टकट रखना चाहते हों उसे सिलेक्ट कर लें. इस पर आप जो भी सिलेक्ट करेंगे उस पर वही विकल्प काम करेगा. इसके बाद विकल्पों के अनुसार अगर आप वौल्यूम डाउन का बटन दबाएंगे तो फ्लैश लाइट औन हो जाएगी, इसी तरह अन्य विकल्पों का इस्तेमाल कर आप वौल्यूम बटन के और भी इस्तेमाल कर सकेंगे.

VIDEO : लिप्स मेकअप का ये है आसान तरीका

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एमआरपी से ज्यादा दाम वसूलने पर अब हो सकती है सजा

एमआरपी से ज्यादा कीमत वसूलने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं. ऐसे में सरकार अब एक्शन में आ गई है. उपभोक्ता मंत्रालय ने इससे निपटने के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया है. इसके तहत एमआरपी से ज्यादा कीमत वसूलने पर अब पांच लाख के जुर्माने के साथ-साथ दो साल तक जेल भी हो सकती है. बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर केंद्र सरकार कानून में संशोधन करने जा रही है. उपभोक्ता मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मौजूदा हालातों में जो प्रावधान हैं उनमें जुर्माने और सजा का प्रावधान काफी कम है.

लीगल मेट्रोलौजी एक्ट’ में होगा संशोधन

पिछले महीने मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक में यह मुद्दा उठाया गया था. इस बैठक में जुर्माना व सजा को बढ़ाने पर सहमति बनी थी. इसके तहत मंत्रालय ने एमआरपी की अधिक कीमत वसूलने पर सख्ती करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है. इसके लिए ‘लीगल मेट्रोलौजी एक्ट’ की धारा 36 में जल्द संशोधन किया जाएगा.

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अभी कितना है जुर्माना

मौजूदा व्यवस्था को देखें तो पहली गलती पर 25000 रुपए का जुर्माना लगाया जाता है. इसमें संसोधन कर इस राशि को एक लाख रुपए करने का प्रस्ताव है. वहीं, दूसरी गलती पर मौजूदा जुर्माना 50000 रुपए है, जबकि इसे 2.5 लाख रुपए किए जाने का प्रस्ताव है. तीसरी गलती पर 1 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाता है. वहीं, इसमें भी संसोधन कर इसे 5 लाख रुपए करने का प्रस्ताव है.

संशोधित कानून में बढ़ेगी सजा

मौजूदा समय में एमआरपी से ज्यादा कीमत वसूलने पर 1 साल तक की सजा का प्रावधान है. अब इसे 1 साल, 1.5 साल और 2 साल तक की सजा करने का प्रस्ताव दिया गया है. अभी उपभोक्ता मंत्रालय के पास 1 जुलाई 2017 से 22 मार्च 2018 तक 636 शिकायतें मिलीं हैं. पिछले नौ महीने में सबसे ज्यादा शिकायतें महाराष्ट्र से मिलीं हैं. इसके बाद यूपी से 106 और दिल्ली से सिर्फ 3 शिकायतें मिली हैं. केंद्र सरकार के मुताबिक, इस प्रकार के लाखों मामले हो सकते हैं, लेकिन जागरुकता की कमी के कारण बहुत कम लोग शिकायत कर पा रहे हैं.

कैसे और कहां करें शिकायत

  • 1800-11-4000 उपभोक्ता टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं
  • +918130009809 पर एसएमएस से पूरी जानकारी दे सकते हैं
  • उपभोक्ता मंत्रालय की वेबसाइट gov.in पर भी औनलाइन शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं
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इस खिलाड़ी के बौल टेंपरिंग पोस्ट पर लोगों का हमला, कहा अपने दिन मत भूलो…

औस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों द्वारा स्टीव स्मिथ की कप्तानी में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरे टेस्ट में गेंद के साथ छेड़छाड़ करने से क्रिकेट जगत हैरान है. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरे टेस्ट के तीसरे दिन कैमरन बेनक्रौफ्ट ने गेंद पर पीले टेप का उपयोग किया, जो कैमरे में कैद हो गया. दिन का खेल खत्म होने के बाद प्रेस कांफ्रेंस में स्टीव स्मिथ ने स्वीकार किया कि गेंद के साथ छेड़छाड़ की गई थी, जिसकी जानकारी टीम के अन्य खिलाड़ियों को भी थी.

इसके बाद से औस्ट्रेलिया टीम की चारों तरफ आलोचना हो रही है. स्मिथ को कप्तानी, डेविड वार्नर को उप-कप्तानी से हटा दिया गया. बेनक्रौफ्ट पर मैच फीस का 75 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया और आईसीसी ने उन्हें 3 डिमेरिट अंक दिए हैं. स्मिथ पर एक मैच का बैन और मैच फीस का 100 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया.

बहरहाल, इतने बड़े विवाद के बीच पाकिस्तान के पूर्व कप्तान वकार यूनिस ने लोगों का आकर्षण अपनी तरफ खींचने के लिए एक ट्वीट किया, जिसके बाद वह अपनी ही की गई टिप्पणी से फैंस के निशाने पर आ गए.

वकार का पोस्ट और लोगों का हमला

दरअसल, वकार ने ट्वीट किया कि पिछले औस्ट्रेलियाई मैचों की भी जांच हो. उन्होंने पहले भी ऐसा किया होगा. वकार ने लिखा- ‘मुझे मत बताना कि ऐसा पहली बार हो रहा है… हमें कुछ पुरानी फुटेज भी देखनी चाहिए…’

इस पोस्ट के बाद वकार को तारीफ के बजाय आलोचनाएं ज्यादा झेलनी पड़ी. वह ट्रोल हो गए. वकार के पोस्ट पर जवाब देते हुए फैंस ने वह फोटो भी डाल दी, जिसमें खुद वकार बौल टेंपरिंग करते दिख रहे हैं. याद हो कि 18 साल पहले गेंद से छेड़छाड़ के मामले में वकार यूनिस सस्पेंड हुए थे. तब मैच रेफरी जौन रीड ने ट्राई सीरीज के बीच श्रीलंका के खिलाफ वकार को सस्पेंड कर दिया था.

इस शर्मनाक हरकत के कारण निलंबित होने वाले पहले खिलाड़ी बने थे वकार

जुलाई 2000 में वकार ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट के दौरान गेंद से छेड़छाड़ की थी. बौल टेपरिंग मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निलंबित होने वाले वह पहले खिलाड़ी (एक मैच के लिए) थे. तेज गेंदबाज पर मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना भी लगाया गया था.

इससे पहले भी कई दिग्‍गज खिलाड़ी पर लग चुके हैं बौल टैंपरिंग के आरोप

ऐसा पहली बार नहीं है जब बौल टैंपरिंग की वजह से क्रिकेट जगत में भूचाल आया है. इससे पहले भी कई बार यह मुद्दा उठ चुका है और कई दिग्‍गज खिलाड़ी पर यह आरोप लगाए जा चुके हैं.

फाफ डु प्‍लेसिस (2016)

नवंबर 2016 में औस्‍ट्रेलिया के खिलाफ एडीलेड टेस्‍ट में दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी फाफ डु प्‍लेसिस को बौल टैंपरिंग करते देखा गया. उनके मुंह के मिंट के उपयोग से बौल की कंडीशन को बदलते देखा गया. उनको आईसीसी के सेक्‍शन 42(3) का दोषी पाया गया और दंड स्‍वरूप पूरे मैच की फीस काट ली गई.

शाहिद आफरीदी (2010)

पर्थ में औस्‍ट्रेलिया और पाकिस्‍तान के बीच वनडे मैच हो रहा था. उसमें पाकिस्‍तानी कप्‍तान शाहिद आफरीदी को बाल के एक तरफ के हिस्‍से को दांतों से चबाते हुए देखा गया. इसके बाद उनको दो मैचों के लिए निलंबित कर दिया गया और बाद में उन्‍होंने माफी मांग ली.

सचिन तेंदुलकर (2001)

नवंबर, 2001 में पोर्ट एलिजाबेथ में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्‍ट मैच में सचिन तेंदुलकर के खिलाफ बौल टैंपरिंग का आरोप लगा. मैच रेफरी माइक डेनिस ने उन पर एक मैच का बैन लगा दिया. सचिन ने अपने बयान में कहा कि उन्‍होंने बौल की सीम को प्रभावित करने की कोशिश नहीं की, वह तो केवल बौल पर लगी घास को हटा रहे थे. खेल प्रशंसकों ने डेनिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. आईसीसी ने तेंदुलकर को आरोपों से मुक्‍त कर दिया.

माइकल अथर्टन(1994)

इंग्‍लैंड के इस प्‍लेयर पर 1994 में आरोप लगा कि उन्‍होंने अपनी पौकेट में से कोई चीज निकालकर बौल पर रगड़ी. अथर्टन ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वह अपने पौकेट में जमा मिट्टी से अपने हाथ सुखाने का प्रयास कर रहे थे. उन पर बौल टैंपरिंग का चार्ज नहीं लगाया गया और दो हजार पौंड जुर्माने के साथ छोड़ दिया गया.

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