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वियना में इस तरह 5 दिन आप भी बनाएं यादगार

आस्ट्रिया की राजधानी और यहां की सांस्कृतिक, आर्थिक व राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र वियना पर्यटन के लिहाज से हर उम्र के सैलानियों के लिए आदर्श डैस्टिनेशन है.

अपनी नैसर्गिक प्राकृतिक खूबसूरती, शाही महलों, ऐतिहासिक धरोहरों, भव्य संग्रहालयों, दिलकश गार्डंस, संगीत के दिलचस्प ठिकानों, झरनों व फैंसी रैस्तरां से लैस वियना दुनियाभर से घूमने आए लोगों से हर सीजन में गुलजार रहता है.

20 लाख से ज्यादा की आबादी वाले इस शहर में वैश्विक महत्त्व की कई संस्थाएं – संयुक्त राष्ट्र संघ, ओपेक आदि के कार्यालय मौजूद हैं. यहां की नाइट लाइफ रंगीन, रोमांचक और शानदार है.

आप वियना जा कर 5 दिनों की सैर करना चाहते हैं तो इन दिनों में यहां ऐक्सप्लोर करने के सभी बेहतरीन विकल्प हम आप को बताते हैं.

युवाओं के लिए वियना है खास

पहले दिन की सैर :  वियना की शानदार सुबह और टैस्टी नाश्ते के बाद निकलिए सिटी सैंटर के लिए. यहां आने के लिए युवा सेगवे (एक खास तरह का इलैक्ट्रिक स्कूटर) लेना पसंद करते हैं. सेगवे के साथ वियना के मुख्य आकर्षण एक ही रूट पर एंजौय किए जा सकते हैं.

यहां स्टेट ओपेरा, वर्गगार्टन, होफबर्ग, सिटीहौल, पार्लियामैंट, बर्ग थिएटर, यूनिवर्सिटी, कोहले मार्केट, सैंट स्टीफन चर्च जैसी जगहें घूम सकते हैं. 12 साल से अधिक उम्र का कोई भी सैलानी किराए पर सेगवे ले सकता है.

आप को अगर सेगवे पसंद न आए तो वियना का ‘फ्री टूअर्स’ विकल्प भी है. इस में सर्टिफाइड टूरगाइड एक फिक्स्ड पौइंट पर पर्यटकों को मिलते हैं और ये शहर की प्रमुख जगहों की मनोरम सैर कराते हैं. यात्रा के आखिर में आप उन्हें भुगतान कर सकते हैं. मजे की बात यह है कि आप को टूर पसंद आए या न आए, पेमैंट की कोई पाबंदी नहीं है.

म्यूजियम क्वार्टियर : दोपहर के खाने के बाद वियना के सब से बड़े सांस्कृतिक अड्डे म्यूजियम क्वार्टियर का रुख कीजिए. यहां के बौल्स एरिया में गैस्ट गार्डन है जो संगीतमय माहौल से रंगा रहता है. यहां आप रिलैक्स महसूस करेंगे.

ग्लैसिस बाइसिल : गरमी में म्यूजियम क्वार्टियर में सब से खूबसूरत रैस्तरां गार्डन है ग्लैसिस बाइसिल. यहां खानापीना व पार्टी और्गेनाइज करना यादगार अनुभव होता है. ऐतिहासिक वियना की सिटी वाल्म का यह हिस्सा हैटिटेज ऐक्सपीरिएंस देता है.

सिटी हौल स्क्वायर की संगीतमय शाम : जो म्यूजिकल एंबिएंस में फूड व कल्चर का फ्यूजन पसंद करते हैं, उन के लिए सिटी हौल स्क्वायर बैस्ट ठिकाना है शाम गुजारने का. स्वादिष्ठ खाना, संगीतमय माहौल, पौप से ओपेरा तक कई ऐसे आकर्षण यहां मिलते हैं जो फ्री प्रवेश के जरिए आप का दिन खूबसूरत अंदाज में खत्म करते हैं.

दूसरे दिन की सैर

कैमरे में करें कैद : यदि फ्री में पोलारौयड कैमरा वियना की खूबसूरती को कैद करने के लिए मिल जाए तो घुमक्कड़ी को भला और क्या चाहिए. सोनब्रुन पैलेस, सिटी सैंटर व प्रैटर की खूबसूरती को अपने कैमरे की कलात्मक एंगलगीरी से सुबहसुबह कैद करने का आनंद लीजिए.

प्रैटर अम्यूजमैंट पार्क, विशाल फेरिस व्हील्स का रोमांच : इस विशाल पार्क में मौडर्न ऐडवैंचर के 250 से भी ज्यादा आकर्षण केंद्र हैं. वहां 117 मीटर का विशाल फेरिस व्हील (झूला), इंडोर रोलरकौस्टर आप को रोमांच की नई दुनिया में ले जाएंगे. यदि आप अपनी गर्लफ्रैंड के साथ हैं तो एक प्राइवेट वेगन कर के रोमांटिक डेट का भी मजा ले सकते हैं.

इस के अलावा यदि आप को वियना को आसमान से देखना है तो स्पैशल फ्लाइट ‘फ्लाई बोर्ड’ का औप्शन भी है. यह एक तकनीकी रोमांच है जिस का 5डी सिनेमा से जीवंत अनुभव कर सकते हैं. इसी तरह के कई और रोमांचक राइड्स, झूले, फ्री फौल, स्काइड्राइविंग विंड टनल जैसे विकल्प भी मौजूद हैं.

रात के शिकारी : यदि आप 18 साल से ज्यादा उम्र के हैं और रात में घूमने का रोमांचक अनुभव लेना चाहते हैं तो आप के लिए प्रैटर डोम के दरवाजे खुले हैं. कई डांस फ्लोर्स, 12 अलगअलग थीम्स के बार्स, म्यूजिक की अनलिमिटेड डोज, साल्सर लैटिनो डांस का क्रेज, लेजर शोज आप की रात को हसीन व यादगार बनाने के लिए काफी हैं.

तीसरे दिन की सैर

स्कोनबु्रन पैलेस : किंग हैब्सबर्ग का एक समय समर रेसिडैंस रह चुका यह महल अपने रौयल टच, शाही कमरों व आकर्षक बगीचों से हर किसी का मन मोह लेता है. मारिया थेरेसा, किंग फ्रैंज जोसेफ, रानी एलिजाबेथ जैसे कई बड़े नाम इसे अपना ठिकाना बना चुके हैं. अपने ऐतिहासिक महत्त्व के चलते इसे विश्व धरोहर की सूची में स्थान मिला है.

महल के पार्क में घूमने के लिए कोई फीस नहीं देनी पड़ती. चूंकि यह जगह सैलानियों से भरी रहती है, इसलिए अन्य अटै्रक्शंस के लिए एडवांस बुकिंग करवा लें.

स्कोनब्रुन की भूलभुलैया और कैफे ग्लोरिएटे : एक दौर में शाही मनोरंजन का अड्डा रही यहां की भूलभुलैया में जहां छिपनेखोेजने का आनंद है तो वहीं ग्लोरिएटे कैफे में लजीज पैस्ट्रीज चखना न भूलें. इसे 1775 में राजा जोसेफ व रानी मारिया थेरेसिया के दौर में बनवाया गया था.

डैन्यूब कनाल में करें धमाल : गरमी में वियना की खुली हवा में सैरसपाटे से अच्छा कुछ भी नहीं. वियना के पुराने शहर से कुछ ही दूरी पर बने इस कनाल में चिल करने के लिए बार्स, रैस्तरां, म्यूजिक, स्वादिष्ठ खाना, कौकटेल, सैंडी बीचेज का फील आप को यहीं रहने के लिए मजबूर कर देगा. तेल अवीव बीच, समर स्टेड, पूल बोट, फ्लेक्स कैफे, क्लब यहां के मुख्य आकर्षण हैं.

चौथे दिन की सैर

नैशमार्किट की चहलपहल : वियना के इस मशहूर बाजार में करीब 120 मार्केट स्टैंड्स, रैस्तरां और खरीदारी के ढेरों विकल्प मिलते हैं. शनिवार को यहां के खुले बाजार का अलग ही आकर्षण है. कई लोगों के लिए यह मीटिंग पौइंट भी है़

वोलपैंसन में लंच डेट : मार्केट घूम कर यदि थक गए हैं तो पास में ही वोलपैंसन चले आइए. यह एक पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाला रैस्तरां है, जो आज भी अपनी विंटेज वैल्यूज के चलते पर्यटकों को लुभाता है. इस जगह के आसपास और भी कई खानेपीने के दिलचस्प ठिकाने हैं.

कालेनबर्ग फौरेस्ट रोप पार्क : जंगल, पेड़पौधे व रोमांच का शौक रखने वालों के लिए यह सब से मुफीद जगह है.

यह वियना का सब से बड़ा पार्क है जो 1.8 किलोमीटर व 30 हजार स्क्वायर मीटर तक फैला है. सैलानियों के लिए  फन ऐंड ऐक्शन, नाइट विजन रोमिंग, रोप ब्रिज जैसे कई थ्रिलिंग औप्शंस मौजूद हैं. रात 11 बजे तक यहां रोमांचक ट्रिप की जा सकती है.

5वें दिन की सैर

ओल्ड डैन्यूब नदी के किनारे : बीच का मजा लेना है और वह भी शहर के बीचोंबीच, तो फिर ओल्ड डैन्यूब का रुख कीजिए. यहां का माहौल इस तरह से रिक्रिएट किया गया है कि यह पैराडाइज आइलैंड का भ्रम देता है. करीब 500 बोट्स, इलैक्ट्रिक पैडलर बोट्स, आउटडोर पूल्स, बीच, रैस्तरां से सजी यह जगह अप्रैल से अक्तूबर के बीच घूमी जा सकती है.

सिटीमैप वियना यंग ऐंड फ्लेवर : युवाओं को वियना घूमने हेतु जो खास जगहें रह जाती हैं उन्हें जानने के लिए सिटी मैप ले सकते हैं. इस में यहां की विशेष इमारतें, ट्रैंडी रैस्तरां, डांस, प्लस, बार्स आदि के नाम पूरी जानकारी के साथ मिल जाते हैं.

वियना सिटीकार्ड के फायदे : वियना सिटीकार्ड के कई फायदे हैं. मसलन, 210 से भी ज्यादा म्यूजियम, सिनेमाहौल, थिएटर, कौंसर्ट, शौप्स, कैफे व रैस्तरां में डिस्काउंट के साथ यहां के पब्लिक ट्रांसपोर्ट में फ्री सवारी भी मिलती है.

बड़ेबुजुर्गों की पहली पसंद वियना

पहला दिन

वियना रिंग ट्राम : पहले दिन वियना में घूमने की शुरुआत आरामदेय ट्रिप से करें. वरिष्ठ नागरिकों के लिए रिंग ट्राम से बेहतर और क्या हो सकता है. वियना की वास्तुकला विरासत रिंग स्ट्रासे एक 67 मीटर चौड़ी सड़क है जो शहर के पहले जिले का घेरा बनाती है. रिंग स्ट्रासे, बूलवर्ड, पार्क और पुराना वियना शहर यूनेस्को की वर्ल्ड कल्चरल हैरिटेज सूची का हिस्सा है. बुजुर्गों के लिए वियना रिंग ट्राम में मल्टीलिंगुअल औडियोवीडियो टूर कराया जाता है. इस रूट में वियना स्टेट, ओपेरा, वर्ग थिएटर, सिटी हौल, कुस्थहिस्टोरीस्च म्यूजियम व नैचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के दीदार होते हैं.

इस रिंग जर्नी का एक राउंड करीब 25 मिनट का है. इस के टिकट ट्राम में ही मिल जाते हैं. अगर आप वियना सिटी कार्डधारक हैं तो डिस्काउंट भी मिलेगा.

होफबर्ग इंपीरियल पैलेस: सिटी सैंटर से टहलते हुए आप होफबर्ग इंपीरियल महल की सैर कर सकते हैं. इतिहास में रुचि रखने वालों को यह पसंद आएगा. 12वीं शताब्दी से अब तक यह अपने निर्माण व स्थापत्यकला के साथ अपग्रेड भी हुआ है. 1918 तक यह महल हैब्सवर्ग शासन का गवाह रहा है. यह कई अनोखे संग्रहालयों का संगम स्थल भी है. इस के साथ ही इंपीरियल अपार्टमैंट के करीब 24 कमरों की सैर आप को उसी शाही दौर का जीवंत नजारा पेश करती है.

पाम हाउस : वियना के खूबसूरत कौफी हाउसेस में शुमार पाम हाउस में अच्छा खाना व कौकटेल भी सर्व किया जाता है. स्टील और कांच से बने इस शानदार स्थल में मनोरंजन व रिलैक्स होने का हर विकल्प मौजूद है.

बर्ग गार्डन व वोक्सगार्टन पार्क्स : वियना के बीचोंबीच स्थित इन पार्कों में वरिष्ठ नागरिकों का जमावड़ा देखते ही बनता है. मोजार्ट्स के फैन्स इस की अहमियत जानते हैं जब वे म्यूजिकल जीनियस की स्टैच्यू का दीदार करते हैं. एक दौर में ये पार्क फैंज जोसेफ (प्रथम) के निजी पार्क थे. 1919 में ये सार्वजनिक भ्रमण के लिए खोल दिए गए. 400 से भी ज्यादा वैरायटीज के गुलाबों की खुशबू से महकता बर्ग गार्डन आप के दिल में बस जाता है.

स्टेट ओपेरा : गंभीर स्वभाव के दर्शकों को ओपेरा देखने का खास शौक रहता है. ऐसे में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ओेपेराज में शुमार स्टेट ओपेरा अपने फर्स्ट क्लास प्रोडक्शन क्वालिटी के चलते एक बार देखना जरूरी हो जाता है. यहां हर दिन करीब 50 ओपेरा, बैले शोज होते हैं. अप्रैल, मई, जून, सितंबर, दिसंबर में

इन की ओपेरा बिल्डिंग में 50 स्क्वायर मीटर की स्क्रीन पर लाइव स्क्रीनिंग भी गजब का अनुभव प्रदान करती है.

दूसरा दिन

बूलवर्ड : आस्ट्रिया के सब से महत्त्वपूर्ण आर्ट वर्क्स कलैक्शन को संजोए बूलवर्ड

में गुस्ताव क्ल्मिट, ईगन शील, औस्कर-कोकोस्का के कलैक्शन बड़ेबजुर्गों के विशेष आकर्षण का केंद्र हैं. एक दौर में प्रिंस यूजीन की मनपसंद सैरगाह रही यह जगह आज आस्ट्रियन कला की धरोहर संजोए हुए है खास आप के लिए.

अपर व लोअर 2 हिस्सों में बंटे इस पार्क में कई भारतीय शादियों की यादगार शामें आयोजित हुई हैं. भारतीय कपल्स हनीमून व वैडिंग के लिए यहां आना पसंद करते हैं.

वियनीज क्विजीन (खानपान) का खजाना : इस ऐतिहासिक शहर में बड़े बच्चों और बुजुर्गों, सब के लिए कुछ न कुछ खास वियनीज क्विजीन मौजूद हैं. यह एकमात्र ऐसी क्विजीन है जो किसी शहर के नाम पर बनी है. वियना के कौफी हाउस काफी पौपुलर हैं जहां एपल स्टूडल, सैचर केक, गुगेलहफ जैसी लजीज डिशेज परोसी जाती हैं. यहां भारतीय रैस्तरां भी हैं.

एक मिनीवैन आप को शहर के अलगअलग रैस्तरां, कौफी हाउस व बार्स का टूर भी कराती है. दोपहर की सैर आप पेट के हवाले कर दीजिए.

तीसरा दिन

हीयूरीन ऐक्सप्रैस का सुहाना सफर : वियना की बेहतरीन कौफीज, पैस्ट्रीज व कला केंद्रों का लुत्फ उठाते हुए तीसरे दिन की सैर में दीजिए कुछ ट्विस्ट और हीयूरीन ऐक्सप्रैस में सवार हो वियना की अनदेखी जगहों का विंडो सीट से नजारा लीजिए. बड़ेबजुर्गों के लिए यह जर्नी बेहद खास होती है.

इस ऐक्सप्रैस के सफर में आप को यहां के पुराने वाइन टाउंस, वाइन यार्ड्स, पुराने विंटर हाउस, वाइन बनाने के ठिकानों की रोचक झलक मिलती है.

नसडोर्फ स्टेशन से कालनेबर्ग तक की इस रेलयात्रा में हरियाली से लैस वादियां, घने जंगल, फार्महाउस, बीथोवेन म्यूजियम के नयनाभिरामी दृश्य देखने को मिलेंगे.

यह अकेली जगह है जहां 700 हैक्टेयर में हजारों घंटों व 230 विंटनर्स करीब 95 वाइन टेवरन्स में आपूर्ति करते हैं.

आप भले ही वाइन न पीते हों पर यहां का नशीला माहौल आप के दिल में बस जाएगा.

चौथा दिन

लिप्पीजैंस घोड़ों की शानदार परफौर्मेंस : यूरोप की सब से पुरानी घोड़ों की नस्ल लिप्पीजैंस, जो स्पैनिश, इटैलियन व अरेबिक नस्ल का नतीजा है, अपनी कदकाठी, रोबीले तेवर से सब को आकर्षित करती है. चौथे दिन आप स्पैनिश राइडिंग स्कूल के घोड़ों की शानदार परफौर्मेंस देखे बिना नहीं रह पाएंगे.

विशाल फेरिस व्हील्स की राइड्स : ऐसा नहीं है कि यह विशाल झूले/व्हील्स सिर्फ युवाओं के लिए ही रोमांचकारी हैं, बड़ेबुजुर्गों को भी यहां समय बिताने के कई ठिकाने मिल जाते हैं. ‘जेम्स बौंड’, ‘द थर्ड मैन,’ सरीखी कई बड़ी हौलीवुड फिल्मों में फीचर हो चुकी यह जगह आप को स्पैशल डिनर, कौकटेल रिसैप्शन व शादी समारोहों के लिए बुकिंग का विकल्प देती है.

5वां दिन

सिटी क्रूज और समंदर की सैर : घुमक्कड़ी का आखिरी दिन इतना शानदार होना चाहिए कि यह जर्नी एक हैप्पीएंडिंग वाली हो. सुबह की शुरुआत समंदर के नजारे से करने से बेहतर भला और क्या हो सकता है. अप्रैल से अक्तूबर तक यहां डैन्यूब कैथल व नदी पर 6 बड़ी बोट्स के जरिए साइटसीइंग का प्रबंध होता है.

इस पैकेज में आप को शानदार बोट में घुमाने के साथ ही लजीज वियनीज क्वीजीन का लुत्फ उठाने को मिलता है. इस के अलावा यहां सालभर सिटी क्रूज का विकल्प भी रहता है.

अगर स्लोवाकियन कैपिटल, ब्राटिस्लावा घूमने का मन करे तो हाईस्पीड बोट्स में 75 मिनट की एक शहर से दूसरे शहर की समुद्रीयात्रा का अनुभव ही अलग होगा.

मोटो एएम फ्लस में क्लासिक डिनर : दिनभर की समुद्री मस्ती से निकल कर शाम को शानदार बनाने के लिए मोटो एएम फ्लस से रोचक व जानदार जगह कोई और नहीं है. पुरातन शैली में बने इस रैस्तरां में जब आधुनिक लाइट्स का इफ्रैक्ट पड़ता है तो नजारा बेहद रंगीन व मोहक हो जाता है. पहली नजर में बिल्डिंग देख कर आप को लगेगा कि एक विशाल बोट में आ गए हैं.

पहले तल पर बने रैस्तरां की साजसज्जा, फर्नीचर 50 के दशक का विंटेज लुक देता है. यहां की रीजनल डिशेज का लुत्फ इस जगह से अच्छा कहीं और मिल ही नहीं सकता. यहां खाने के साथ टेकअवे का विकल्प भी है. साथ में, बार भी है. दूसरे तल पर मोटो कैफे है जिस का विशाल टैरेस शहर का अलग ही नजारा पेश करता है.

आप की शाम व रात यादगार बनाते इस ठिकाने पर आ कर आप की वियनीज जर्नी खूबसूरत अंजाम तक पहुंच जाती है.

वियना में है सब के लिए कुछ खास

मध्य यूरोप के आल्पस पर्वत के अंचल में बसे इस खूबसूरत शहर में हर उम्र, मूड, मिजाज, स्वाद या इच्छा के लोगों के लिए कुछ न कुछ दिलचस्प मिल ही जाता है. शानदार आवास, मोटेल, विलाज, हौलिडेज होम्स अच्छे बजट में मिलते हैं. चमकीले नृत्य क्लबों, रोशन पबों, फैंसी रैस्तरां व ऐडवैंचरस ऐक्टिवटीज युवाओं का दिल जीतती हैं, तो नायाब महल, संग्रहालय, कौफी हाउस, लाइब्रेरी, ललित कला संस्थान, शीश महल, सिटी क्रूज, सिटी हौल, ड्रामा व थिएटर आदि बड़ेबुजुर्गों को यहां बारबार बुलाते हैं.

कैसे पहुंचें : आस्ट्रियन एयरलाइंस की उड़ान, वियनादिल्ली रूट की सेवा देती है. एयर इंडिया की फ्लाइट भी है. मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद व बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों से तुर्किश एयरलाइंस, एमिरेट्स, एयरइंडिया, लुफ्तहांसा व ब्रिटिश एयरवेज के माध्यम से वनस्टाप फ्लाइट से भी वियना जा सकते हैं.

VIDEO : नेल आर्ट

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चुनाव आयोग बना सरकारी, साख को लगा गहरा धक्का

पहले गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए नरेंद्र मोदी के कहने पर तारीखें देने में ढीलढाल कर और उस से पहले दिल्ली के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने में जल्दबाजी दिखा कर चुनाव आयोग ने अपनी साख को गहरा धक्का लगा लिया है. सरकार की आंखों का तारा बने रहने की इच्छा हरेक

की होती है और अकसर लोग अपने महत्त्वपूर्ण पद की गरिमा का ध्यान न रखते हुए भी किसी पक्ष का साथ दे देते हैं.

चुनाव आयोग ने 2016 में दिल्ली के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी थी कि अरविंद केजरीवाल की सरकार ने उन्हें संसदीय सचिव नियुक्त कर दिया था. चुनाव आयोग के इस फैसले से भाजपा को लाभ होना था क्योंकि नरेंद्र मोदी की 2014 के लोकसभा चुनाव में भारी जीत के तुरंत बाद अरविंद केजरीवाल ने 67-3 से विधानसभा चुनाव जीत कर भाजपा के रंग में भंग डाल दिया था.

अब दिल्ली उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग का फैसला पलट दिया है और चुनाव आयोग को मनमानी करने पर फटकार भी लगाई है. मामला हालांकि फिर चुनाव आयोग की गोद में चला गया है पर पूरी प्रक्रिया जब तक चलेगी तब तक 2019 के लोकसभा चुनाव आ जाएंगे और 20 विधायकों पर फैसला चाहे जो भी हो, वह बेकार हो जाएगा.

इस मामले में अफसोस इस बात का है कि जिस चुनाव आयोग ने बड़ी मुश्किल से संवैधानिक स्वतंत्रता पाई थी उस ने यह स्वतंत्र छवि अपने हाल के फैसलों से खो दी और लगने लगा है कि यह संस्था अब केंद्र की भाजपाई सरकार के इशारे पर नाच रही है.

सुप्रीम कोर्ट पर आज वैसे भी शक हो रहा है क्योंकि 4 जजों ने खुल्लमखुल्ला प्रैस कौन्फ्रैंस कर के पहली बार न्यायिक तंत्र के अन्यायपूर्ण रवैए को जनता के सामने खोल डाला है.

लोकतंत्र में भारी विजय एक बात है पर इस विजय का दुरुपयोग करते हुए देश की विश्वसनीय संस्थाओं को कमजोर कर रूस और चीन की तरह देश में लोकतंत्र की हत्या करना किसी तरह

से भी ठीक नहीं है. ये संस्थाएं केवल कुशल, लोकप्रिय प्रशासनिक प्रबंध के लिए जरूरी ही नहीं हैं, बल्कि इन्हीं के सहारे देश की प्रगति संभव है.

चुनाव आयोग और न्यायालय जैसी स्वतंत्र संस्थाओं पर सरकार अंकुश लगाएगी तो उन की स्वतंत्रता खत्म हो जाएगी. ऐसे में देशवासी इन संस्थाओं पर भी विश्वास नहीं कर सकेंगे. सो, वे पूरा काम न करेंगे, न पूरा टैक्स देंगे, न भविष्य की सोचेंगे.

जब भी किसी समाज या देश में कल के बारे में संदेह होता है, तो लोग 5, 10 या 15 साल में परिणाम देने वाले काम नहीं करते. सोवियत संघ लगातार पिछड़ता चला गया था क्योंकि भारी जनशोषण के चलते वहां के नागरिक अपनी पूरी क्षमता, पूरे विश्वास से काम न कर सके थे.

चीन का नागरिक फिलहाल मेहनत कर रहा है क्योंकि उसे यह विश्वास है कि सरकार चीन को गरीब, पिछड़े, भिखारी देश के अपमानित स्थान से निकाल रही है. चीनी 10-15 या 20 सालों की सोच रहे हैं क्योंकि उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी की निष्ठा पर भरोसा है. हम भारत में सत्तारूढ़ पार्टी की निष्ठा पर विश्वास नहीं कर सकते कि वह हर नागरिक को बराबर समझती है, बराबर के अवसर देने को तैयार है.

हमारा विश्वास देश की स्वतंत्र संस्थाओं में है और इसीलिए सत्तारूढ़ पार्टी कोशिश कर रही है कि ये संस्थाएं कमजोर हों. यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन, आर्केयोलौजिकल सर्वे औफ इंडिया हो, साहित्य अकादमी हो, चुनाव आयोग हो या अदालतें, आज सब पर प्रश्नचिह्न लग रहा है तो भारत जैसे विविध जातियों वाले देश में असुरक्षा का एहसास होगा ही.

उच्च न्यायालय के फैसले से चुनाव आयुक्त और राष्ट्रपति जैसे सम्मानित पदों की छवि को धक्का लगा है. आज ये दोनों मोहरे नजर आ रहे हैं, अंधे मोहरे.

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बेईमानी पर रोए आस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के खिलाड़ी

मैच के दौरान बौल से छेड़छाड़ के आरोप में आखिरकार आस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के कप्तान स्टीव स्मिथ और उपकप्तान डेविड वार्नर को अपनेअपने पद से हटना पड़ा.

क्रिकेट के इतिहास में यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. इस तरह की घटना खेल पर प्रश्नचिह्न लगाती है. बौल को जानबूझ कर खराब कर रहे हैं तो इस का मतलब आप बेईमानी कर रहे हैं.

हुआ यों था कि मेजबान दक्षिण अफ्रीका से तीसरे मैच के दौरान आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी कैमरन बेनक्राफ्ट ने फील्डिंग करते हुए गेंद से छेड़छाड़ की ताकि उस से रिवर्स स्विंग करा सकें क्योंकि रिवर्स स्विंग से गेंदबाजों को फायदा मिल रहा था.

इस तरह की बेईमानी कोई नई बात नहीं है. खिलाडि़यों पर ऐसे आरोप लगते रहे हैं और इस के बदले में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी ने खिलाडि़यों पर जुर्माना लगाने के साथ साथ उन के खेलने पर भी प्रतिबंध लगाया है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाडि़यों को इस तरह की हरकत कहीं से भी शोभा नहीं देती. खेल को खेल भावना से खेलना चाहिए. बेईमानी से जीत हासिल कर खेल की गरिमा पर चोट करना है.

खेलों को रोमांचक बनाने के लिए जज्बा जरूरी है और खेल में जज्बा दिखाई दे तो जीत निश्चित मानी जाती है. लोग उस जज्बे को सलाम करते हैं लेकिन नीयत में खोट हो तो फिर उस जज्बे को कोई सलाम नहीं करता.

आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी अब अपनी इस करनी पर अफसोस जता रहे हैं, माफी मांग रहे हैं, शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं. रो रहे हैं. बावजूद इस के, उन्होंने जो प्रतिष्ठा हासिल की थी वह प्रतिष्ठा पाने के लिए उन्हें वर्षों लग जाएंगे हालांकि फिर भी यह दाग मिटने वाला नहीं है क्योंकि जबजब बौल से छेड़खानी का मामला आएगा तबतब उन्हें याद किया जाएगा जबकि कोई भी खिलाड़ी नहीं चाहता कि इस तरह की शर्मिंदा करने वाली बात पर उसे याद किया जाए.

आस्ट्रेलियाई टीम वैसे भी हमेशा से मजबूत रही है. कई बार विश्व चैंपियन भी रही है. इस के खिलाडि़यों के अंदर इतना माद्दा है कि वे किसी भी टीम को मात देने में सक्षम है पर जब इस तरह की बात आती है तो फिर महान खिलाड़ी या महान टीम बनने पर सवालिया निशान लग जाता है.

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मुसीबत के दलदल में मोहम्मद शमी

विवाहेतर संबंध, घरेलू हिंसा, पत्नी को जान से मारने की कोशिश, रेप और मैच फिक्सिंग जैसे गंभीर आरोप झेल रहे भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी खबरिया चैनलों पर सफाई दे रहे हैं. ऐसा वे इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन की पत्नी हसीन जहां ने उन पर ये सब आरोप लगाए हैं.

आरोपप्रत्यारोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. हर रोज कुछ न कुछ नया खुलासा हो रहा है. शमी को जहां क्रिकेट पर ध्यान देना चाहिए वहां वे घरेलू विवाद में उलझते जा रहे हैं.

मोहम्मद शमी और हसीन जहां की शादी वर्ष 2014 में हुई थी. इस दंपती की 3 साल की एक बेटी है. हसीन ने यह आरोप लगाया है कि शमी एक बौलीवुड अभिनेत्री से शादी करना चाहते हैं, इसलिए बीते 2 वर्षों से उन पर तलाक के लिए दबाव बना रहे हैं. शादी से पहले से भी शमी के एक महिला से संबंध थे, झूठ बोल कर उन से शादी की, किसी पार्टी में उन्हें नहीं ले जाते, उन्हें पत्नी का अधिकार नहीं दिया आदि. इस तरह के ढेरों आरोप हसीन जहां ने अपने पति पर लगाए हैं.

पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के सिउड़ी में रहने वाले हसीन जहां के पहले पति सैफुद्दीन ने मीडिया के सामने बताया कि 2002 में उन की और हसीन जहां की शादी हुई थी. उन की 2 बेटियां हैं. वर्ष 2010 में दोनों ने तलाक ले लिया था.

इस घरेलू विवाद में मोहम्मद शमी का कैरियर अधर में लटकता दिख रहा है. हाल ही में दक्षिण अफ्रीका में खेले गए टैस्ट मैच में उन का प्रदर्शन शानदार था. इस तेज गेंदबाज ने अब तक 30 टैस्ट मैचों में 28.90 की औसत से 110 विकेट लिए हैं.

पतिपत्नी का झगड़ा दोनों के लिए नुकसानदायक होता है, चाहे वह सैलिब्रिटी हो या खिलाड़ी हो, व्यापारी हो या फिर आम इंसान हो. इसलिए बेहतर है कि घर की चारदीवारी में पतिपत्नी अपने झगड़े को सुलझा लें तो अच्छा है, क्योंकि घर से बाहर निकली बात तूल पकड़ती ही है और बात से बात बढ़ती हुई विकराल रूप ले लेती है.

पतिपत्नी का झगड़ा दोनों के जीवन को प्रभावित करता है. समाज में एक तरफ छवि खराब होती है दूसरी तरफ पदप्रतिष्ठा. व्यक्ति का कैरियर भी बरबाद हो जाता है. ऐसे में कानून की गिरफ्त में पहुंचे पतिपत्नी के झगड़े का यदि अंत भी हो जाता है तो शेष बचता ही क्या है? बदनामी, अवसाद, समाज का तिरस्कृत व्यवहार जो दोनों की जिंदगी को बेजार कर देता है.

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सीबीएसई पेपर लीक, परीक्षा ही हुई फेल

अपने पसंदीदा रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 25 फरवरी को 41वें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के उन छात्रों से रूबरू थे जिन्हें इस साल 10वीं और 12वीं कक्षाओं की बोर्ड की परीक्षाएं देनी थीं. इस कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी ने बोर्ड परीक्षा से संबंधित कई सुझाव देते हुए छात्रों को यह कहते आश्वस्त भी किया था कि वे परीक्षा को ले कर किसी तरह की चिंता न करें, रातरातभर जाग कर उन्होंने जो पढ़ाई की है वह बेकार नहीं जाएगी.  नरेंद्र मोदी ने अपने युवा मित्रों को संबोधित करते यह भी कहा था कि वे परीक्षा का ज्यादा तनाव न पालें और इसे बोझ की तरह न लें.

कुछकुछ आदतन दार्शनिक अंदाज में उन्होंने कार्यक्रम के उत्तरार्ध में हलके लहजे में यह भी कहा था कि महात्मा बुद्ध कहा करते थे, ‘अत्यादीपो भव’ यानी आप अपने मार्गदर्शक बन जाइए. बहैसियत प्रधानमंत्री उन्हें संतोष होगा कि युवा दोस्तों के जीवन के महत्त्वपूर्ण पल पर वे उन के साथ थे और मन की बातें  उन के साथ गुनगुना रहे थे.

क्रंदन बनी गुनगुनाहट

उबाऊ प्रवचन की तरह के कार्यक्रम ‘मन की बात’ का यह एपिसोड थोड़ाबहुत पसंद किया गया था, क्योंकि यह बोर्ड के छात्रों की कड़ी परीक्षा से संबंधित था. लेकिन देश के शीर्ष पद पर बैठे नरेंद्र मोदी की बातें कितनी खोखली साबित हुईं, यह एक महीने बाद ही 25 मार्च को उजागर हो गया जब यह खबर आई कि केंद्र सरकार के अधीन सीबीएसई (सैंट्रल बोर्ड औफ सैकंडरी एजुकेशन) द्वारा आयोजित 10वीं की परीक्षा का गणित का और 12वीं की परीक्षा का अर्थशास्त्र का परचा दिल्ली में लीक हो गया है. अर्थशास्त्र का पेपर 26 मार्च को और गणित का 28 मार्च को हुआ था.

26 मार्च को अर्थशास्त्र का परचा सोशल मीडिया पर लीक हुआ था तो किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया था. वजह सिर्फ इतनी नहीं थी कि आम लोग सीबीएसई को वैसे ही बहुत विश्वसनीय संस्था मानते हैं बल्कि यह भी थी कि आएदिन देशभर में अब ऐसा कुछ न कुछ होता रहता है जिस में कई महत्त्वपूर्ण जानकारियां और पेपर लीक हो रहे होते हैं. लिहाजा, 12वीं का एक परचा लीक हो गया तो कौन सा पहाड़ टूट गया.

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लेकिन पहाड़ टूटा ही था खासतौर से उन छात्रों और अभिभावकों के सिर पर जो सालभर इस कड़ी परीक्षा के लिए दिनरात एक करते हैं. बोर्ड के इम्तिहान जिंदगी के सब से कड़े इम्तिहान से भी ज्यादा अहम होते हैं. अभिभावक बच्चों की पढ़ाई पर लाखों रुपए खर्च करते हैं इस उम्मीद के साथ कि बच्चा अच्छे नंबरों से पास हो जाएगा और उस का कैरियर व जिंदगी दोनों संवर जाएंगे. पूरी जिंदगी इस परीक्षा में प्राप्त अंकों पर निर्भर रहती है.

12वीं का अर्थशास्त्र का पेपर वाकई लीक हुआ था या यह बात आईगई हो जाती, लेकिन जब 28 मार्च को 10वीं के गणित के पेपर लीक होने की खबर जंगल की आग की तरह फैली तो किसी के असमंजस में रहने की कोई वजह नहीं रह गई थी. यह पेपर भी सोशल मीडिया के जरिए लीक और वायरल हुआ था.  व्हाट्सऐप पर लिए गए स्क्रीनशौट बता रहे थे कि नामुमकिन कुछ नहीं है. सीबीएसई अपनी विश्वसनीयता और गोपनीयता खोते अपनी साख पर बट्टा लगवा चुका है.

28 मार्च को ही जब परीक्षा पेपर लीक मामले को ले कर इन परीक्षाओं में शामिल हुए कोई 28 लाख छात्रों के भविष्य को ले कर आशंकाएं जताई जाने लगीं तो एक और खबर ने पेपर लीक होने की पूरी तरह पुष्टि कर दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को डांट लगाई है और इस मामले में सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं.

अब तक इस गंभीर मसले पर ऊंघ रहे प्रकाश जावड़ेकर को होश आया कि सीबीएसई उन के मंत्रालय के अधीन आता है, लिहाजा, उन्होंने पहली दफा सामने आ कर कहा कि पेपर लीक होने का उन्हें खेद है, पुलिस मामले की जांच कर रही है. प्रकाश जावडे़कर ने यह आश्वासन भी दिया कि आगे की परीक्षा लीकप्रूफ होगी यानी कोई पेपर लीक नहीं होगा. इस तरह का दावा 20 घंटों में उन्होंने कैसे कर दिया, यह उन से किसी ने नहीं पूछा. आजकल मीडिया मंत्रियों से जिरह नहीं करता.

दोबारा पर बिगड़ी बात

28 मार्च को ही दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पेपर लीक मामले की रिपोर्ट धारा 420, 468 और 471 के तहत दर्ज करते गजब की फुरती दिखाई और कुछ कर दिखाने के लिए जगहजगह ताबड़तोड़ छापे मारे. अब तक बात काफी हद तक बिगड़ने लगी थी क्योंकि छात्र व अभिभावक सीबीएसई के कार्यालय के बाहर इकट्ठा हो कर विरोधप्रदर्शन करने लगे थे.

यह विरोध परचों के लीक होने के चलते था जो प्रकाश जावडे़कर की इस घोषणा से और बढ़ा कि लीक हुए परचों की दोबारा परीक्षा कराई जाएगी. देखते ही देखते देशभर में विरोध प्रदर्शन होने लगे.

दिल्ली पुलिस ने कार्यवाही के नाम पर जो किया, वह हास्यास्पद था. चूंकि कुछ करना था, इसलिए छापे कोचिंग सैंटरों पर मारे गए. इस पर भी विरोध कर रहे लोग शांत नहीं हुए तो एक एसआईटी (स्पैशल इंवैस्टिगेशन टीम) का गठन कर दिया गया जिस का मुखिया आर पी उपाध्याय को बनाया गया.

अभिभावकों की इस मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया गया कि सीबीएसई के अध्यक्ष को पकड़ा जाए. मामले को तूल पकड़ते देख प्रकाश जावड़ेकर ने यह कहते उस पर लीपापोती करने की कोशिश की कि वे खुद एक अभिभावक होने के नाते छात्रों और अभिभावकों का दर्द समझते हैं. उधर, एसआईटी जांच करतेकरते एक प्राइवेट ट्यूटर तक पहुंच गई और यह जताने की बचकानी कोशिश करती रही कि पेपर सिर्फ दिल्ली में ही लीक हुए थे.

सीबीएसई की चेयरपर्सन अनीता करवाल भी पहली बार सामने आ कर बोलीं कि पुलिस ऐक्शन में आ गई है और यह शक जाहिर किया है कि इस में कुछ कोचिंग सैंटरों का हाथ हो सकता है. अपना दोष दूसरों पर मढ़ने की यह पौराणिक परंपरा है.

पुलिस और उस की जांचों पर भरोसा लोग क्यों नहीं करते हैं, यह बात इन बयानों से साफतौर पर उजागर हुई. मामूली सा दिमाग रखने वाला भी समझ रहा था कि जब पेपर सीबीएसई बनाता है तो कोचिंग सैंटर वाले उसे कैसे लीक कर सकते हैं.

जाहिर है लीक का सोर्स यानी जरिया सीबीएसई ही है जिस की चेयरपर्सन और मुलाजिमों की मिलीभगत के बिना पेपर लीक होना मुमकिन ही नहीं. ऐसे में कोचिंग वालों को जिम्मेदार ठहराना अपना दागदार दामन छिपाना है. सीधेसीधे यह बात किसी ने नहीं मानी कि सीबीएसई के अधिकारियों ने ही पेपर बेचे होंगे, जिन्हें कोचिंग वालों ने खरीदा.

प्रकाश जावड़ेकर के इस दावे की भी हवा निकल गई कि पेपर लीक मामले में पैसों के लेनदेन की बात सामने नहीं आई है, जबकि दिल्ली सहित पूरे देश में चर्चा यह थी कि 10वीं और 12वीं के पेपर 200 रुपए तक में बिके थे.

सौदेबाजी का खेल

ऐसे घोटालों में लेनदेन का फार्मूला बहुत साफ होता है कि पहले जो लाखों रुपए में परचा खरीदता है वह अपनी लागत वसूलने के लिए उसे कई लोगों को बेच देता है और फिर ये लोग भी अपना पैसा वसूलने उसे और सस्ते में बेच देते हैं. ऐसा होतेहोते एक समय ऐसा भी आता है कि परीक्षाओं के प्रश्नपत्र भाजीतरकारी के भाव में बिकने लगते हैं.

सौदेबाजी के इस खेल में यह बात उजागर हुई कि शुरू में लोगों ने ये पेपर 35 हजार रुपए में खरीदे थे और फिर आखिर में उन का भाव 200 रुपए तक गिर गया था. सीबीएसई के जिस अधिकारी ने भी ये पेपर बेचे होंगे उस ने जाहिर है एक झटके में करोड़ों की चांदी काटी और फिर लोगों ने इसे धंधा बनाते खूब पैसा कमाया.

ऐसे में नरेंद्र मोदी के मन की बात फरेब साबित हुई कि छात्र परीक्षा को ले कर चिंता न करें. अब तक कई चिंताएं छात्र और अभिभावक करने को मजबूर हो गए थे और कई नईनई बातें उधड़ कर सामने आने लगी थीं. जिन में साफ जाहिर हो रहा था कि गड़बड़झाला बहुत बडे़ पैमाने पर हुआ है और इस में बोर्ड के परीक्षा अधिकारियों की मिलीभगत है.  जिन में से जांच के आखिर में एकाध को बलि चढ़ने के लिए तैयार कर लिया जाएगा. सरकार ने नोटबंदी और जीएसटी की तरह परचे को लीक होना और जनता का दुख उठाना देश के विकास के लिए तय मान लिया. कष्ट होगा तो पुण्य मिलेगा न.

लापरवाही की हद

छात्रों के भविष्य की सौदेबाजी किस तरह की गई, यह भी जल्द सामने आ गया यानी छिपाए नहीं छिपा कि 12वीं के अर्थशास्त्र के लीक परचे की जानकारी तो एक दिन पहले ही सीबीएसई को मिल गई थी.

मजाक की बात यह रही कि खुद सीबीएसई ने पुलिस को जानकारी दी थी कि 26 मार्च की शाम 6 बजे किसी अज्ञात शख्स ने हाथ से लिखी 4 पेज की आंसर शीट सीबीएसई की प्रशासनिक इकाई को भेजी थी. इतना ही नहीं, सीबीएसई ने यह भी माना कि 23 मार्च को फैक्स के जरिए उसे खबर मिल गई थी कि पेपर लीक होने जा रहे हैं जिस में एक कोचिंग संचालक और 2 स्कूल संचालक शामिल हैं. यह अज्ञात शख्स, जिसे व्हिसलब्लोअर कहा जा रहा है, ने तो हर माध्यम से पेपर लीक होने की जानकारी प्रमाणों सहित सीबीएसई को भेजी थी.

इन शिकायतों या खबरों पर सीबीएसई ने कान देने की जरूरत क्यों नहीं समझी, इस बात का जवाब शायद ही कभी मिले पर इस की वजह साफ है कि प्रश्नपपत्रों का धंधा जम कर हो, इसलिए इन शिकायतों पर कार्यवाही नहीं की गई. जब एक दिन पहले ही दफ्तर तक आंसर शीट पहुंच गई और इस पर भी सभी खामोश रहे, तो यह माना जा रहा है कि सीबीएसई चाहता है कि जिन्होंने उस से पेपर खरीदे हैं वे अपनी लागत  वसूल लें और वाजिब मुनाफा भी कमा लें. अगर 26 मार्च को ही परचा रद्द करने का ऐलान कर दिया जाता तो खरीदने वाले सीबीएसई के उन अधिकारियों को तुरंत बेनकाब कर देते जिन्होंने उन्हें परचा बेचा था.

धंधा कितने खुले तौर पर हुआ था, इस की पुष्टि के लिए प्रमाण सामने आ गए थे. लुधियाना की बसंत सिटी में रहने वाली 12वीं कक्षा की एक छात्रा जाह्नवी बहल ने 17 मार्च को ही इस घोटाले से ताल्लुक रखते तमाम सुबूत न केवल सीबीएसई, बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय को भी भेजे थे. दरअसल,  जाह्नवी के पास उस सौदेबाजी का ब्योरा था जो व्हाट्सऐप पर हुई थी.

सीबीएसई और प्रधानमंत्री कार्यालय से जाह्नवी को ज्यादा उम्मीद नहीं थी, इसलिए उस ने सजगता दिखाते पुलिस आयुक्त आर एन ढोके से भी शिकायत की थी और जो शख्स पेपर बेच रहा था उस का मोबाइल नंबर भी मुहैया कराया था.  यह वही जाह्नवी है जिसे पिछले साल 15 अगस्त पर पुलिस ने गिरफ्तार किया था इसलिए कि वह श्रीनगर के लालचौक पर तिरंगा फहराने जा रही थी. वह उस वक्त भी सुर्खियों में आई थी जब उस ने साल 2016 में चर्चित छात्र नेता कन्हैया कुमार को ललकारा था.

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ऐसा लगता नहीं कि पुलिस प्रशासन और सरकार पेपर लीक को ले कर गंभीर थे जबकि ये पेपर काफी पहले बिकने के लिए बाजार में आ चुके थे.

हर्जाना क्यों नहीं

जाह्नवी का कहना यह है कि अगर वक्त रहते पुलिस या कोई और यानी सीबीएसई या प्रधानमंत्री कार्यालय उस की शिकायत पर कार्यवाही करते तो पेपर लीक नहीं होते और सीबीएसई को लाखों का नुकसान नहीं होता.

जाह्नवी या किसी और का यह सोचना ही गलत है कि बोर्ड को किसी तरह का नुकसान हुआ है. असल नुकसान तो परीक्षा में शामिल हुए छात्रों और अभिभावकों का हुआ है. इस में आर्थिक और मानसिक दोनों शामिल हैं. चूंकि परीक्षा की गोपनीयता और विश्वसनीयता की जिम्मेदारी सीबीएसई की होती है, इसलिए इस नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी उसे ही उठानी चाहिए.

पर हुआ उलटा, बवाल बढ़ता देख सीबीएसई ने फैसला यह लिया कि अब ये परीक्षाएं दोबारा आयोजित की जाएंगी.  30 मार्च को यह घोषणा की गई कि अब 12वीं का अर्थशास्त्र का पेपर 25 अप्रैल को और जरूरत पड़ी तो 10वीं का गणित का पेपर भी दोबारा सिर्फ दिल्ली, एनसीआर और हरियाणा में होगा. हालांकि 3 अप्रैल को सीबीएसई ने साफ कर दिया कि 10वीं की गणित की परीक्षा दोबारा नहीं होगी.

हैरत की बात यह भी रही कि मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड से परचे लीक होने के सुबूत सामने आए पर सीबीएसई इस बात पर अड़ा रहा कि परचे दिल्ली में ही लीक हुए हैं. छात्रों और अभिभावकों की इस मांग या बात का ध्यान नहीं दिया गया कि एक या दो नहीं, बल्कि सभी विषयों के परचे लीक हुए हैं.

दोबारा परीक्षा करवाना कोई हल नहीं था जिस से छात्रों और अभिभावकों के नुकसान की भरपाई होना संभव हो.  होना तो यह चाहिए था कि सरकार हरेक छात्र को हर्जाना देती जो किसी भी हाल में 1 लाख रुपए प्रतिछात्र से कम नहीं होता.

इस संबंध में जब कुछ अभिभावकों से बात की गई तो उन्होंने इसे कारगर बताया. भोपाल की एक गृहिणी सबीना खान कहती हैं, ‘‘उन का पूरा घरसालभर बेटे सऊद की परीक्षा की तैयारी में जुटा रहा था, लग ऐसा रहा था कि इम्तिहान सऊद का नहीं, बल्कि हम सब का है. सऊद 12वीं के साथसाथ कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं की भी तैयारी कर रहा था, पर अब सबकुछ खटाई में पड़ गया है.’’

सबीना बताती हैं,’’ एक अनिश्चितता मंडरा रही है कि अब दोबारा परीक्षा होगी. हमें मलाल इस बात का नहीं कि गरमी की छुट्टियों में नैनीताल जा कर घूमनेफिरने का प्रोग्राम रद्द हो गया है, बल्कि डर इस बात का ज्यादा है कि अब फिर हाड़तोड़ मेहनत वाले टाइमटेबल पर अमल करना पड़ेगा.’’

सबीना ही नहीं, बल्कि लाखों अभिभावक संतानों को ले कर चिंता व तनाव में हैं कि दोबारा परीक्षा करवाने के फैसले से उन्हें क्या हासिल हुआ, सिवा इस के कि दुश्वारियां बढ़ गईं.

एक और अभिभावक प्रशांत शुक्ला का कहना है, ‘‘नुकसान तो हमारा हुआ है, जिस की भरपाई नकदी में होना हर्ज की बात नहीं. यह एक हादसा ही है जब सरकार रेल हादसे पर मुआवजा देती है, किसानों को आर्थिक सहायता देती है तो उसे इन छात्रों को भी देना चाहिए और यह पैसा सीबीएसई से ही वसूलना चाहिए.

दोषी कोई भी हो लेकिन पैसा सीबीएसई के अधिकारियों की पगार से काटा जाना चाहिए जिस से उन्हें सबक मिले कि भविष्य में अगर पेपर लीक हुए तो आखिरकार जिम्मेदारी उन की ही बनती है.’’

कोई भी जांच हो, छापे पड़ें, कोई भी पकड़ा जाए इस से परीक्षार्थियों को कुछ नहीं मिलना जिन का डर और नुकसान अब दोगुना हो गया है. भविष्य और कैरियर के लिए बनाई गई छात्रों की योजनाएं और तैयारियां चौपट हो गई हैं.  उन का दर्द न तो सीबीएसई समझ सकता और न ही सरकार महसूस कर सकती है.

खूब गरमाई राजनीति

उम्मीद के मुताबिक, पेपर लीक कांड पर राजनीति खूब गरमाई जिस में दिलचस्प बात यह है कि सत्तारूढ़ दल भाजपा के पास कहने को कुछ नहीं था.  कांगे्रस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मौका भुनाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जम कर तंज कसे कि कितने लीक, डाटा लीक – आधार लीक, एसएससी परीक्षा लीक, चुनाव की तारीख लीक, सीबीएसई पेपर लीक, हर चीज में लीक है, चौकीदार वीक है.

दिल्ली के जंतरमंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्र व अभिभावक प्रकाश जावड़ेकर और अनीता करवाल को हटाए जाने की मांग कर रहे थे, तब मुंबई से मनसे के अध्यक्ष राज ठाकरे अभिभावकों को सलाह दे रहे थे कि वे अपने बच्चों को दोबारा परीक्षा में शामिल न होने दें क्योंकि पेपर लीक होना सरकार की असफलता है.

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री से माफी मांगने की बात कही तो तमाम विपक्षी नेता सरकार, भाजपा, नरेंद्र मोदी, प्रकाश जावड़ेकर और अनीता करवाल को कठघरे में खड़ा करते नजर आए.

इस संवेदनशील मुद्दे को भुनाने के लिए विपक्ष कोई कसर आगे भी छोड़ेगा, ऐसा लग नहीं रहा. 2019 के लोकसभा चुनाव में भी इस बाबत नरेंद्र मोदी को वह बख्शेगा नहीं कि भ्रष्टाचारमुक्त भारत की यह कैसी पहल थी जिस में लाखों छात्रों के सपनों और भविष्य से खिलवाड़ किया गया. गौरतलब है कि कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में हुई धांधलियों पर छात्रों ने लंबा धरना दिल्ली में दिया था पर तब इतना बवाल नहीं मचा था.

सीबीएसई पेपर लीक कांड के असली गुनाहगार कभी पकड़े जाएंगे, इस में सभी को शक है तो इस की एक बड़ी वजह मध्य प्रदेश का व्यापमं महाघोटाला है जिस की सीबीआई जांच और अदालती कार्यवाही अभी तक चल रही हैं. कर्मचारी चयन आयोग के लीक पेपर्स के दोषी भी अभी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आए हैं.

जांचों और पुलिस सहित सरकारी एजेंसियों की कार्यवाहियों से कुछ खास नहीं होता, यही इस पेपर लीक कांड में होना तय दिख रहा है. दोचार लोगों को निलंबित कर सरकार अपनी जिम्मेदारी पूरी हुई मान लेती है और लोग भी भूल जाते हैं कि किस तरह उन का नुकसान हुआ था.

हताशा की वजह

विद्यार्थी और अभिभावक हताशा के शिकार हैं. वे सिर्फ विरोध कर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं. पेपर लीक पर यही हुआ कि लोग न्यूज चैनल्स से ले कर चौराहों पर तक, बस, बहस ही करते रहे जिस का सार यह था कि खामी सिस्टम में है.

सिस्टम में खामी, सरकार की भूमिका और सीबीएसई की संदिग्धता जैसी बातों से परे कम ही लोगों ने घटना पर अपना ध्यान फोकस किया. हर किसी के पास नोटबंदी के वक्त की तरह एक सुझाव था, परीक्षाओं को ले कर एक नया आइडिया था. लेकिन यह हर कभी लीक होते पेपर्स की समस्या का हल नहीं है.  समस्या का इकलौता हल है तुरंत कार्यवाही. जांचें बेमानी साबित होती हैं और वे सरकार की मंशा के अनुरूप होती हैं, इसलिए जिम्मेदार लोगों को ही दोषी मान कर सजा देने की मंशा पर लोग अड़ें तो ही ऐसी करतूतों में कमी आएगी.

नकदी हर्जाना इस का बेहतर विकल्प है जिसे उन लोगों की जेब से निकाला जाए जो इस जिम्मेदारीभरे काम को अंजाम देने के लिए सरकार से पगार लेते हैं. दोबारा परीक्षा करवाना कोई राहत वाला काम नहीं है, बल्कि छात्रों व अभिभावकों की मुसीबतें बढ़ाने वाली बात है.

मुट्ठीभर हाथों में लाखों का भविष्य

10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में शामिल लाखों छात्रों का भविष्य दरअसल, उन 9 से ले कर 17 लोगों के हाथों में रहता है जो प्रश्नपत्र बनाते हैं. आमतौर पर प्रश्नपत्र बनाने की प्रक्रिया स्कूल सत्र शुरू होने के तुरंत बाद अगस्त के महीने से चरणबद्ध तरीके से शुरू हो जाती है.

पहले चरण में देशभर से 9 से 17 शिक्षकों को छांटा जाता है जिन की काबिलीयत के बाबत सीबीएसई के अपने पैमाने हैं. इन शिक्षकों को एकदूसरे के बारे में कोई जानकारी नहीं रहती. और न ही ये एकदूसरे से मिल सकते.

सीबीएसई अपने स्तर पर इस बात की भी तसल्ली करता है कि पेपर सैट करने वाले ये शिक्षक प्राइवेट ट्यूशन या कोचिंग न पढ़ाते हों.  देखा यह भी जाता है कि इन के नजदीकी रिश्तेदारों में से कोई इस परीक्षा में शामिल न हो रहा हो. आमतौर पर एक शिक्षक 2 महीने में प्रश्नपत्र बना कर सीलबंद लिफाफे में उसे सीबीएसई को भेज देता है.

इस बार यह रिवाज जरूर तोड़ा गया था कि हर दफा की तरह प्रश्नपत्रों के 3 सैट नहीं बनवाए गए थे. ऐसा क्यों नहीं किया गया, इसे ले कर सीबीएसई और सरकार दोनों कठघरे में हैं. 3 सैट बनवाने का एक बड़ा मकसद यह भी होता था कि कभी पेपर लीक होने की शिकायत मिले तो छात्रों को दूसरा सैट दिया जा सके. तीनों सैट में कोई खास या बड़ा फर्क नहीं होता था, बस प्रश्नों के क्रमांक ऊपरनीचे कर दिए जाते थे और एकाध सैट में कोई नया या दूसरा सवाल पूछ लिया जाता था. इस व्यवस्था का मकसद नकल रोकना भी था.

प्रश्नपत्र तैयार करने वाले को भी नहीं पता होता था कि उस का तैयार किया गया सैट वितरित होगा या नहीं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं था.  जिन 17 लोगों ने अपनेअपने विषय के प्रश्नपत्र बनाए थे उन्हें शायद पता था कि इस बार उन का ही सैट परीक्षा भवन में बंटेगा. अगर ऐसा है तो यह गहरे शक व बड़ी चिंता की बात है.

तैयार प्रश्नपत्र सीधे स्कूल या परीक्षा केंद्र को नहीं दिए जाते, बल्कि इन्हें बैंक में रखा जाता है. ऐसे बैंक को कस्टोडियन बैंक या कलैक्शन सैंटर भी कहा जाता है. यह कस्टोडियन बैंक कौन सा होगा, इस का चयन भी सीबीएसई ही करता है,  लेकिन उस की कोशिश यह रहती है कि कस्टोडियन बैंक परीक्षा केंद्र के नजदीक ही हो. जहां बैंक नहीं होते वहां पोस्टऔफिस को कलैक्शन सैंटर बनाया जाता है.

जिस तारीख को जिस विषय की परीक्षा होती है, उस दिन प्रश्नपत्र बैंक से स्कूल यानी परीक्षा केंद्र तक ले जाए जाते हैं. बैंक लौकर से प्रश्नपत्र निकालते वक्त एक बैंक प्रतिनिधि, एक स्कूल प्रतिनिधि और एक प्रतिनिधि सीबीएसई का मौजूद रहता है. ये तीनों मिल कर सुनिश्चित करते हैं कि प्रश्नपत्र वाले लिफाफे से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है. यानी वह सीलबंद है.  ये तीनों परीक्षा केंद्र तक गाड़ी में आते हैं, जिस में एक सुरक्षा गार्ड भी रहता है.

परीक्षा शुरू होने के आधा घंटा पहले स्कूल प्रिंसिपल, सीबीएसई का एग्जामिनर और परीक्षा में ड्यूटी देने वाले शिक्षकों की मौजदूगी मेें प्रश्नपत्र वाले लिफाफे खोले जाते हैं. इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कर सीबीएसई को भेजी जाती है. इस के बाद शिक्षक परीक्षार्थियों की संख्या के हिसाब से क्लासरूम में जा कर प्रश्नपत्र बांटते हैं.

देखा जाए तो फुलप्रूफ मानी जाने वाली इस प्रक्रिया में कुछ पेंच भी हैं जिन के चलते सेंधमारी असंभव काम नहीं. जब प्रश्नपत्र बैंक लौकर में रखे होते हैं तब इन से छेड़खानी की जा सकती है. दूसरी गड़बड़ रास्ते में संभव है बशर्ते इस में मौजूद चारों लोग मिल जाएं. परीक्षा केंद्र में गड़बड़ी या लीक की आशंकाएं न के बराबर होती हैं क्योंकि वहां कई शिक्षक मौजूद रहते हैं और उन के पास वक्त भी कम रहता है.

गड़बड़ी या लीक की आशंका बैंक में ज्यादा रहती है क्योंकि यहां प्रश्नपत्र कई दिनों तक रहते हैं. 26 और 28 मार्च के लीक हुए प्रश्नपत्रों की खबर अगर जाह्नवी को थी तो साफ दिख रहा है कि पेपर रास्ते में या किसी परीक्षा केंद्र में लीक नहीं हुए. कस्टोडियन बैंक में ऐसा होना संभव है. इन पंक्तियों के लिखे जाने तक इस दिशा में जांच शुरू नहीं हुई थी, यह कम हैरानी की बात नहीं.

प्रश्नपत्र लीक होने की एक आसान और सुविधाजनक जगह प्रिंटिंग प्रैस है जहां ये पेपर छपते हैं. यह जानकारी भी अति गोपनीय होती है जिसे इनेगिने अधिकारी ही जानते हैं. दिल्ली की क्राइम ब्रांच ने सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक से भी 30 मार्च को 4 घंटे पूछताछ की थी जिस में पता चला था कि पेपर छपवाने के लिए सीबीएसई नोटिफाइड प्रिंटिंग प्रैसों के लिए टैंडर जारी करता है.

जिन प्रिंटिंग प्रैसों को छपाई का ठेका मिलता है उन की प्रैसों की बाकायदा सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होती है. इस बाबत एक कमेटी गठित होती है जो पहले प्रश्नपत्र के ब्लूप्रिंट का मुआयना करती है.  यानी सांठगांठ या मिलीभगत हो तो प्रिंटिंग प्रैस से भी पेपर लीक हो सकते हैं.

यह तकनीकी बात है पर व्यावहारिक बात अब यह समझ आ रही है कि चंद शिक्षक लाखों छात्रों का भविष्य तय करें, यह भी एक कमी है. बेहतर तो यह होगा कि हर स्कूल को अपना प्रश्नपत्र बनाने का अधिकार दिया जाए. इस से अगर पेपर लीक भी हुआ तो नुकसान सीमित होगा.

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मेरे पति जब भी मुझ से सहवास की चेष्टा करते हैं तो मैं बिदक जाती हूं. मैं क्या करूं कि मैं पति को दैहिक सुख दे पाऊं.

सवाल
मैं 25 वर्षीया विवाहिता हूं. मेरा दांपत्य जीवन सुखमय नहीं है. इस की वजह भी मैं स्वयं को ही मानती हूं. मेरे पति मुझे बेहद प्यार करते हैं. मैं भी उन्हें चाहती हूं. पर सारा दिन ठीक रहने के बाद रात को मैं पति को उदास और नाराज कर देती हूं. कारण जब भी वह मुझ से सहवास की चेष्टा करते हैं तो मैं बिदक जाती हूं.

सहवास तो दूर उन्हें चुंबन और आलिंगन तक नहीं करने देती. इस से उन का नाराज होना स्वाभाविक है. विडंबना यह है कि जब पति मेरे पास नहीं होते तब मेरा मन उन के लिए व्यग्र हो उठता है. उन से संबंध बनाने का भी मन करता है. मैं क्या करूं कि मैं पति को दैहिक सुख दे पाऊं?

जवाब
आप की समस्या का हल आप के पास ही है. आप को समझना चाहिए कि सैक्स दांपत्य की धुरी है इसलिए पति जब आप के साथ सहवास का प्रयास करे तो इच्छा न होने पर भी आप को उन के प्रति समर्पण रखना चाहिए. स्त्री की शारीरिक संरचना भी ऐसी है कि बिना प्रयास के भी वह पति की कामेच्छा पूरी कर सकती है.

आप को सिर्फ मानसिक रूप से थोड़ा सक्रिय होने की आवश्यकता है और आप से दैहिक सुख लेना आप के पति का अधिकार है. इसलिए आप को उन्हें इस से वंचित नहीं करना चाहिए. सहवास में आप की सक्रियता से आप अनुभव करेंगी कि आप का दांपत्य कैसे महक उठेगा.

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सैक्स प्लैजर है ?

‘‘और्गेज्म क्या होता है? क्या यह सैक्स से जुड़ा है? मैं ने तो कभी इस का अनुभव नहीं किया,’’ मेरी पढ़ीलिखी फ्रैंड ने जब मुझ से यह सवाल किया तो मैं हैरान रह गई.‘‘क्यों, क्या कभी तुम ने पूरी तरह से सैक्स को एंजौय नहीं किया?’’ मैं ने उस से पूछा तो वह शरमा कर बोली, ‘‘सैक्स मेरे एंजौयमैंट के लिए नहीं है, वह तो मेरे पति के लिए है. सब कुछ इतनी जल्दी हो जाता है कि मेरी संतुष्टि का तो प्रश्न ही नहीं उठता है, वैसे भी मेरी संतुष्टि को महत्त्व दिया जाना माने भी कहां रखता है.’’

यह एक कटु सत्य है कि आज भी भारतीय समाज में औरत की यौन संतुष्टि को गौण माना जाता है. सैक्स को बचपन से ही उस के लिए एक वर्जित विषय मानते हुए उस से इस बारे में बात नहीं की जाती है. उस से यही कहा जाता है कि केवल विवाह के बाद ही इस के बारे में जानना उस के लिए उचित होगा. ऐसा न होने पर भी अगर वह इसे प्लैजर के साथ जोड़ती है तो पति के मन में उस के चरित्र को ले कर अनेक सवाल पैदा होने लगते हैं. यहां तक कि सैक्स के लिए पहल करना भी पति को अजीब लगता है. इस की वजह वे सामाजिक स्थितियां भी हैं, जो लड़कियों की परवरिश के दौरान यह बताती हैं कि सैक्स उन के लिए नहीं वरन पुरुषों के एंजौय करने की चीज है.

यौन चर्चा है टैबू

भारत में युगलों के बीच यौन अनुभवों के बारे में चर्चा करना अभी भी एक टैबू माना जाता है, जिस की वजह से यह एक बड़ा चिंता का विषय बनता जा रहा है. दांपत्य जीवन में सैक्स संबंध जितने माने रखते हैं, उतनी ही ज्यादा उन की वर्जनाएं भी हैं. एक दुरावछिपाव व शर्म का एहसास आज भी उन से जुड़ा है. यही वजह है कि पतिपत्नी न तो आपस में इसे ले कर मुखर होते हैं और न ही इस से जुड़ी किसी समस्या के होने पर उस के बारे में सैक्स थेरैपिस्ट से डिस्कस ही करते हैं. पुरुष अपनी कमियों को छिपाते हैं. भारत में लगभग 72% स्त्रीपुरुष यौन असंतुष्टि के कारण अपने वैवाहिक जीवन से खुश नहीं हैं.

मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि जब भी महिलाएं अपनी किसी समस्या को ले कर उन के पास आती हैं और वजह जानने के लिए उन के सैक्स संबंधों के बारे में पूछा जाता है तो 5 में से 1 महिला इस बारे में बात करने से इनकार कर देती है. यहां तक कि अगली बार बुलाने पर भी नहीं आती. कानूनविद मानते हैं कि 20% डाइवोर्स सैक्सुअल लाइफ में संतुष्टि न होने की वजह से होते हैं. पुरुष अपने साथी को यौनवर्धक गोलियां लेने के बावजूद संतुष्ट न कर पाने के कारण तनाव में रहते हैं. पुरुष अपने सैक्सुअल डिस्फंक्शन को ले कर चुप्पी साध लेते हैं और औरतें अपनी शारीरिक इच्छा को प्रकट न कर पाने के कारण कुढ़ती रहती हैं. वैवाहिक रिश्तों में इस की वजह से ऐसी दरार चुपकेचुपके आने लगती है, जो एकदम तो नजर नहीं आती, लेकिन बरसों बाद उस का असर अवश्य दिखाई देने लगता है.

सैक्स से जुड़ा है स्वास्थ्य

एशिया पैसेफिक सैक्सुअल हैल्थ ऐंड ओवरआल वैलनैस द्वारा एशिया पैसेफिक क्षेत्र में 12 देशों में की गई एक रिसर्च के अनुसार एशिया पैसेफिक क्षेत्र में 57% पुरुष व 64% महिलाएं अपने यौन जीवन से संतुष्ट नहीं हैं. इस में आस्ट्रेलिया, चीन, हांगकांग, भारत, इंडोनेशिया, जापान, मलयेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, ताइवान आदि देशों को शामिल किया गया था. यह रिसर्च 25 से ले कर 74 वर्ष के यौन सक्रिय स्त्रीपुरुषों पर की गई थी. सब से प्रमुख बात, जो इस रिसर्च में सामने आई, वह यह थी कि पुरुषों में इरैक्टाइल हार्डनैस में कमी होने के कारण पतिपत्नी दोनों ही सैक्स संबंधों को ले कर खुश नहीं रहते हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि इरैक्टाइल हार्डनैस का संबंध सैक्स के साथसाथ प्यार, रोमांस, पारिवारिक जीवन व जीवनसाथी की भूमिका निभाने के साथ जुड़ा है. जीवन के प्रति देखने का उन का नजरिया भी काफी हद तक सैक्स संतुष्टि के साथ जुड़ा हुआ है.

सिडनी सैंटर फौर सैक्सुअल ऐंड रिलेशनशिप थेरैपी, सिडनी, आस्ट्रेलिया की यौन स्वास्थ्य चिकित्सक डा. रोजी किंग के अनुसार, ‘‘एशिया पैसेफिक के इस सर्वेक्षण से ये तथ्य सामने आए हैं कि यौन जीवन संतुष्टिदायक होने पर ही व्यक्ति पूर्णरूप से स्वस्थ रह सकता है. आज की व्यस्त जीवनशैली में जबकि यौन संबंध कैरियर की तुलना में प्राथमिकता पर नहीं रहे, पुरुष व महिलाओं दोनों में ही यौन असंतुष्टि उच्च स्तर पर है. इस की मूल वजह अपनी सैक्स संबंधित समस्याओं के बारे में न तो आपस में और न ही डाक्टरों से बात करना है. चूंकि सैक्स संबंधों का प्रभाव जीवन के अन्य पहलुओं पर भी पड़ता है, इसलिए सैक्स के मुद्दे पर बोलने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.’’ जीवन के इस महत्त्वपूर्ण पक्ष को नजरअंदाज कर के युगल जहां एक तरफ तनाव का शिकार होते हैं, वहीं संतुष्टिदायक सैक्स संबंध न होने के कारण उन के जीवन के अन्य पहलू भी प्रभावित होते हैं. स्वास्थ्य के साथसाथ उन की सोच व जीवनशैली पर भी इस का गहरा असर पड़ता है. यौन संतुष्टि संपूर्ण सेहत के साथसाथ प्रेम व रोमांस से भी जुड़ी है.

कम होती एवरेज

कामसूत्र की भूमि भारत में, जहां की मूर्तियों तक पर सदियों पहले यौन क्रीडा से जुड़ी विभिन्न भंगिमाओें को उकेरा गया था, अभी भी अपने यौन अनुभव के बारे में बात करना एक संकोच का विषय है. भारतीय पुरुष के जीवन में सैक्स जीवन की प्राथमिकताओं में 17वें नंबर पर आता है और औरतों के 14वें नंबर पर. आज अगर हम शहरी युगलों पर नजर डालें तो पाएंगे कि वे दिन में 14 घंटे काम करते हैं, 2 घंटे आनेजाने में गुजार देते हैं और सप्ताहांत यह सोचते हुए बीत जाता है कि सफलता की सीढि़यां कैसे चढ़ें. इन सब के बीच सैक्स संबंध बनाना एक आवश्यकता न रह कर कभीकभी याद आ जाने वाली क्रिया मात्र बन कर रह जाता है. लीलावती अस्पताल, मुंबई के ऐंड्रोलोजिस्ट डा. रूपिन शाह का इस संदर्भ में कहना है, ‘‘प्रत्येक 2 में से 1 भारतीय शहरी पुरुष में पर्याप्त इरैक्टाइल हार्डनैस नहीं होती, फिर भी 40 से कम उम्र के पुरुष अपनी कमजोरी मानने को तैयार नहीं हैं. 40 से कम उम्र की औरतों की सैक्स की मांग अत्यधिक होने के कारण वे एक तरफ जहां अपनी सैक्स संतुष्टि को ले कर सजग रहती हैं, वहीं वे पार्टनर के सुख न दे पाने के कारण परेशान रहती हैं. नीमहकीमों के पास जाने के बजाय डाक्टर व काउंसलर की मदद से यौन संबंधों में व्याप्त तनाव को दूर किया जा सकता है.’’

ड्यूरैक्स सैक्सुअल वैलबीइंग ग्लोबल सर्वे के अनुसार भारतीय पुरुष व महिलाएं अपने सैक्स जीवन से संतुष्ट नहीं हैं. और्गेज्म तक पहुंचना प्रमुख लक्ष्य होता है और केवल 46% भारतीय मानते हैं कि उन्हें वास्तव में और्गेज्म प्राप्त हुआ है, जबकि ऐसी महिलाएं भी हैं, जो यह भी नहीं जानतीं कि और्गेज्म होता क्या है, क्योंकि एक महिला को इस तक पहुंचने में पुरुष से 10 गुना ज्यादा समय लगता है. पुरुष 3 मिनट में संतुष्ट हो जाता है, ऐसे में वह औरत को और्गेज्म प्राप्त होने का इंतजार कैसे कर सकता है. वैसे भी आज भी भारतीय पुरुष के लिए केवल अपनी संतुष्टि माने रखती है.

संवाद व सम्मान आवश्यक

असंतुष्टि की वजह कहीं न कहीं पतिपत्नी के बीच मानसिक जुड़ाव का न होना भी है. आपस में निकटता को न महसूस करना, सम्मान न करना भी उन की संतुष्टि की राह में बाधक बनता है. सैक्स के बारे में खुल कर बात न करना या किस तरह से उस का भरपूर आनंद उठाया जा सकता है, इस पर युगल का चर्चा न करना या असहमत होना भी यौन क्रिया को मात्र मशीनी बना देता है. अपने साथी से अपनी इच्छाओं को शेयर कर सैक्स जीवन को सुखद बनाया जा सकता है, क्योंकि यह न तो कोई काम है और न ही कोई मशीनी व्यवस्था, बल्कि यह वैवाहिक जीवन को कायम रखने वाली ऐसी मजबूत नींव है, जो प्लैजर के साथसाथ एकदूसरे को प्यार करने की भावना से भी भर देती है. 

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इन फ्री फोटो एडिटर ऐप का इस्तेमाल कर बनाएं अपनी फोटो को शानदार

आज के इसदौर में ज्यादातर लोगों को फोटो क्लिक करना और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करना पसंद होता है. हम सभी समझते हैं कि हर फोटो अच्छी आए ये जरूरी नहीं है. ऐसे में तस्वीर को बेहतर बनाने के लिए हम और आप किसी न किसी फोटो एडिटिंग टूल का इस्तेमाल करते हैं. इसलिए आज हम आपके लिए कुछ बेहतर फोटो एडिटिंग ऐप की जानकारी लेकर आए हैं, जिन्हें इस्तेमाल कर आप भी अपने फोटो को अपने हिसाब से एडिट कर और भी बेहतर बना सकते हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में…

इंस्टाग्राम (Instagram)

इंस्टाग्राम लोकप्रिय सोशल मीडिया माध्यम के साथ-साथ एक फोटो एडिटिंग ऐप भी है. इस ऐप के जरिए सैच्युरेशन, शार्पनेस, कंट्रास्ट और अन्य फिल्टर लागू किए जा सकते हैं.

स्नैपसीड (Snapseed)

गूगल के अधिकार वाला स्नैपसीड फोटो एडिटर जेपीजी और आरएडब्ल्यू, दोनों ही फौर्मेट को सपोर्ट करता है. यह ऐप आपकी डीएसएलआर से खींची गई तस्वीरों में भी मददगार है. इसमें फोटो के लेवल और कर्व्स को एडजस्ट किया जा सकता है. इस ऐप से फोटो में आवश्यकतानुसार ब्लर इफेक्ट भी डाला जा सकता है.

एपीयूएस कैमरा (APUS Camera)

एपीयूएस कैमरा ऐप के जरिए आप कोलाज, मेकअप, फिल्टर जैसे टूल इस्तेमाल कर सकते हैं. साथ ही इसमें कुछ फन फीचर भी हैं, जिसमें आप फोटो डालकर उम्र, लिंग आदि पता कर सकते हैं. इसमें दिये गए फिल्टर्ड सेल्फी के जरिए आप सेल्फी को मजेदार बनाकर पोस्ट कर सकते हैं.

लेंस डिस्टार्शंस (Lens Distortions)

लेंस डिस्टार्शंस ऐप के जरिए आप तस्वीर में कुछ अलग और बेहतरीन इफेक्ट दे सकते हैं. लाइट सोर्स, फौग, बारिश जैसे बैकग्राउंड आप इसके जरिए जोड़ सकते हैं. खास बात यह कि ये इफेक्ट काफी असल मालूम होते हैं.

पिक्सल आर (Pixlr)

पिक्सल आर एक लोकप्रिय फोटो एडिटिंग ऐप है. इस ऐप का इंटरफेस साफ-सुथरा है और इसमें फिल्टर अप्लाई करने के लिए काफी आसान स्टेप हैं. इसमें पिक्सलेट टूल है, जिसके जरिए आप तस्वीर को ब्लर कर सकते हैं. तस्वीर का एक हिस्सा अपने हिसाब से एडिट कर सकते हैं. साथ ही ब्राइट और डार्क भी कर सकते हैं.

एवियरी (Aviary)

एवियरी का यूआई आपको काफी पसंद आएगा. इसमें दिए गए तमाम टूल आसानी से इस्तेमाल किये जा सकते हैं. यहां आप फ्रेम और स्टीकर प्रयोग कर पाएंगे, ब्यूटिफिकेशन और अन्य एडिटिंग करने की भी यहां सुविधा रहेगी. इसमें दिया गया एनहेंस फीचर कलर करेक्शन और बुनियादी ब्राइटनेस और सेच्युरेशन को एडजस्ट करता है. इसमें यूजर को डूडल भी जोड़ने की सुविधा मिलती है.

वस्को (Vsco)

फोटोग्राफी का शौक रखने वालों को यह ऐप पसंद आ सकता है. इंस्टाग्राम और फेसबुक, दोनों के फोटो एडिटिंग फीचर आप इसमें प्रयोग कर सकते हैं. वस्को के फिल्टर आपको खासा पसंद आ सकते हैं.

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बचाएं अपने स्मार्टफोन को हैक होने से

हममें से कई लोग इस बात से भलीभांति वाकिफ हैं कि कई चोर और हैकर्स हमेशा ऐसे डिवाइस की तलाश करते हैं, जिसे वो आसानी से खोल सकें और आम लोगों की आर्थिक व निजी जानकारियां चुरा सकें. आपके स्मार्टफोन पर भी इस तरह का खतरा मंडरा सकता है. इसलिए इस खतरे से बचना बेहद ही जरूरी है. जिस तरह से मामूली साफ-सफाई से आप कई बीमारियों से बच सकते हैं. ठीक उसी प्रकार से इस डिजिटल युग में ‘साइबर हाइजीन’ की मदद से किसी बड़े खतरे को टाला जा सकता है.

पासकोड से लौक करें फोन

क्या आप अपने घर का दरवाजा अपनी गैरमौजूदगी में खुला छोड़ सकते हैं, नहीं ना. तो फिर फोन को बिना पासकोड कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं. ऐसा करना आपके और आपके फोन दोनों के लिए ही खतरे से खाली नहीं है. इसलिए चार डिजिट के पासकोड का इस्तेमाल और साथ में सेल्फ-डिस्ट्रक्ट फीचर को एक्टिवेट करना बेहद ही सुरक्षित तरीका है. सेल्फ डिस्ट्रक्ट फीचर में आपके फोन में बार-बार गलत पासकोड डालने से फोन का डेटा पूरी तरह से गायब हो जाएगा. 6 डिजिट का पासकोड इस्तेमाल करने पर उसका अनुमान लगा पाना 100 फीसदी ज्यादा मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा लेटर और कैरेक्टर का इस्तेमाल करके इसे और मुश्किल बनाया जा सकता है.

इनक्रिप्शन का करें इस्तेमाल

आईफोन के साथ अच्छी बात यह है कि यह डिफौल्ट में इनक्रिप्शन चलाता है. इसका मतलब है कि फोन पर स्टोर किए गए डेटा को निकाला नहीं जा सकता या फिर उसे दूसरे कंप्यूटर पर पढ़ा नहीं जा सकता. जब तक फोन को अनब्लौक नहीं किया जाए तब तक फोन से ली गई जानकारियां बिखरी हुईं हैं और पठनीय नहीं होती. एंड्रायड में आपको यह सेटिंग्स में जाकर एक्टिवेट करना होगा.

हमेशा साफ्टवेयर को अपडेट करें

साफ्टवेयर अपडेट में हमेशा उन कमियों को दूर किया जाता है जिनका फायदा हैकर उठाकर आपके डिवाइस के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं. आईफोन पर तो ऐप्पल का अपडेट लगातार मिलता रहता है. हालांकि, एंड्रायड सिस्टम पर यह थोड़ा पेंचीदा है. गूगल अपडेट मोबाइल निर्माता कंपनियों के लिए रिलीज करती है. इसके बाद ये कंपनियां अपनी सुविधा अनुसार अपडेट को यूजर तक पहुंचाने के बारे में फैसला करती हैं. लेकिन आपसे जब भी अपडेट के बारे में पूछा जाए तो उसे जरूर इंस्टौल करें.

अपने फोन का बैकअप बनाएं

अगर आप को मजबूरी में रिमोट सिस्टम से फोन का डेटा डिलीट करना पड़े तो फोन का बैकअप बनाते रहना एक अच्छी आदत साबित होगी. ऐसा करने से आप फोटो या फिर कोई महत्वपूर्ण डेटा नहीं खोएंगे. ध्यान रहे कि फाइंड माई आईफोन और एंड्रायड डिवाइस मैनेजर को आपको पहले ही इंस्टौल करना होगा. फोन खो जाने के बाद आप कुछ नहीं कर पाएंगे.

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आईपीएल में 7 टीमों की तरफ से खेलने वाले पहले खिलाड़ी बने एरोन फिंच

औस्ट्रेलियाई बल्लेबाज एरोन फिंच आईपीएल 11 में किंग्स इलेवन पंजाब टीम का हिस्सा हैं. फिंच पिछले सप्ताह ही विवाह के बंधन में बंधे हैं, शादी के बाद उनका पहला मैच कुछ खास नहीं रहा. आरसीबी के खिलाफ फिंच पहली ही गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट हो गएं. इस दौरान वो अपना खाता भी नहीं खोल सके थे, पंजाब की टीम ने इस साल 6 करोड़ 20 लाख रुपए में अपनी टीम में शामिल किया है.

पंजाब के खिलाफ पिंच भले भी बल्ले से कोई कमाल नहीं कर पाए हों, लेकिन उन्होंने इस मैच को खेलते ही एक रिकौर्ड अपने नाम कर लिया. दरअसल, आईपीएल इतिहास में फिंच इकलौते ऐसे बल्लेबाज हैं जो अब तक इस टूर्नामेंट में सात टीमों के लिए खेल चुके हैं. दिनेश कार्तिक, पार्थिव पटेल और थिसारा परेरा को पछाड़ फिंच इस मामले में सबसे आगे निकल गए हैं. दरअसल, दिनेश कार्तिक, पार्थिव पटेल और थिसारा परेरा ने अभी तक आईपीएल में छह टीमों की तरफ से खेल चुके हैं. वहीं फिंच के लिए पंजाब की टीम सांतवीं फ्रेंचाइज है.

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2010 में आईपीएल की शुरुआत करने वाले फिंच को सबसे पहले राजस्थान रौयल्स ने अपने साथ जोड़ा था. इसके अगले साल वो दिल्ली डेयरडेविल्स टीम का हिस्सा थे. दो साल तक दिल्ली में खेलने के बाद साल 2013 में फिंच को पुणे वारियर्स इंडिया ने खरीद लिया. साल 2013 के बाद पुणे की टीम के टूर्नामेंट के बाहर जाने के बाद वह सनराइजर्स हैदराबाद टीम के सदस्य बन गए. अगले ही साल फिंच को मुंबई इंडियंस ने अपनी टीम में शामिल कर लिया.

मुंबई की तरफ से खेलते हुए फिंच कुछ खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए, जिसके बाद उन्हें गुजरात लायंस ने अपनी टीम में शामिल किया. दो साल तक गुजरात के लिए खेलने के बाद इस साल पंजाब ने उन्हें अपनी टीम में शामिल कर लिया है. फिंच औस्ट्रेलिया के ओपनिंग करते हैं और उनका रिकौर्ड भी बेहद अच्छा रहा है, ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि पंजाब की टीम आने वाले मैचों में उन्हें किस जगह पर खेलने का मौका देती है.

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250 रुपये होगा बुलेट ट्रेन का शुरुआती किराया, तेजी से हो रहा निर्माण कार्य

सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन पर तेजी से तैयारियां चल रही हैं. 15 अगस्त 2022 तक इस प्रोजेक्ट को पूरे होने की उम्मीद है. 508 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. बुलेट ट्रेन की शुरुआत होने के बाद मुंबई से अहमदाबाद या अहमदाबाद से मुंबई का सफर महज दो घंटे में तय होगा. जब बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी तो लोगों के बीच इसके किराये को लेकर काफी चर्चा हुई थी. लोगों का मानना था कि इसका किराया आम आदमी की पहुंच से बाहर होगा. लेकिन आपको बता दें कि इसका शुरुआती किराया 250 रुपये होगा.

320 किमी/ घंटा की टौप स्पीड

मुंबई से अहमदाबाद के बीच प्रस्तावित बुलेट ट्रेन में सफर करने के लिए यात्रियों को 250 से 3,000 रुपये तक का किराया देना होगा. यह किराया गंतव्य के हिसाब से अलग-अलग होगा. बुलेट ट्रेन की ‘टौप स्पीड’ 320 किमी/ घंटा होगी. इसका परिचालन 2022 तक शुरू होने की उम्मीद है. सरकार की इस परियोजना के संभावित किराये का पहला आधिकारिक संकेत देते हुए नेशनल हाई स्पीड रेल कौरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के प्रबंध निदेशक अचल खरे ने बताया कि किराये की यह दर मौजूदा अनुमानों और हिसाब पर आधारित है.

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अधिकतम किराया 3000 रुपये

उन्होंने बताया कि मुंबई और अहमदाबाद के बीच का किराया 3,000 रुपये होगा. वहीं बांद्रा-कुर्ला कौम्पलेक्स और ठाणे के बीच किराया 250 रुपये होगा. खरे ने बताया कि एक ‘बिजनेस क्लास’ होगा और इसका किराया 3,000 रुपये अधिक रहने की संभावना है. एक अधिकारी ने बताया कि ठाणे और बांदा – कुर्ला कौम्पलेक्स के बीच हाई स्पीड ट्रेन से यात्रा में 15 मिनट का समय लगेगा और इसका किराया 250 रुपये होगा. जबकि, ट्रैक्सी से करीब डेढ़ घंटे का समय लगता है और 650 रुपये खर्च होते हैं.

एक ट्रेन में 10 डिब्बे होंगे

उन्होंने बताया कि किराया एसी फर्स्ट क्लास के किराये से डेढ़ गुना ज्यादा होगा. एक ट्रेन में 10 डिब्बे होंगे, जिसमें से एक ‘बिजनेस क्लास’ होगा. खरे ने बताया कि परियोजना के तहत निर्माण कार्य इस साल दिसंबर में शुरू हो सकता है क्योंकि उस वक्त तक भूमि अधिग्रहण हो जाने की उम्मीद है. मंत्रालय को परियोजना के लिए 1,415 हेक्टेयर भूमि की जरूरत होगी और इसने अधिग्रहण के लिए 10,000 करोड़ रुपये मंजूर किया है. महाराष्ट्र सरकार भूमि अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी कर चुकी है.

4 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा

अधिकारी ने यह भी बताया कि क्रियान्वयन प्राधिकरण में 3,000 – 4,000 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा. वहीं परियोजना के निर्माण चरण के दौरान 30 से 40 कामगारों को काम पर रखा जाएगा. परियोजना में जापान की अधिक भागीदारी होने की खबरों को खारिज करते हुए खरे ने कहा कि उसकी सिर्फ 18.6 प्रतिशत भागीदारी होगी और उनका योगदान कुछ ही खंडों तक सीमित होगा. जैसे कि अहमदाबाद और वडोदरा के बीच कौरीडोर बनाना और समुद्र के नीचे सुरंग बनाना.

जापान समुद्र के नीचे ट्रैक बनाएगा

उन्होंने बताया कि भारतीय ठेकेदार 460 किमी का काम करेंगे जबकि जापान समुद्र के नीचे सिर्फ 21 किमी का निर्माण कार्य करेगा. खरे ने कहा कि सुरक्षा और समय पालन हाई स्पीड कौरीडोर की विशेषता होगी. उन्होंने बताया कि भारत से 360 लोगों को प्रशिक्षण के लिए जापान भेजा जाएगा. इनमें से 80 लोगों को वहां पर जौब ट्रेनिंग दी जाएगी. उन्होंने बताया कि करीब 80 जापानी नागरिक भारतीय अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं. यह ट्रेन 40 सेकेंड से ज्यादा लेट नहीं होगी. बुलेट ट्रेन रोजाना मुंबई – अहमदाबाद के बीच 70 फेरे लगाएगी.

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