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यह टेक्नोलोजी आपको देती है बेहतर जिंदगी, हवा को करती है साफ

दुनिया बहुत तेजी के साथ टेक्नोलोजी की आदी होती जा रही है और इसी वजह से दुनिया भर में तमाम क्षेत्रों में बड़ी बड़ी कंपनिया तथा व्यवसाय को बढ़ावा मिल रहा है. जहां एक तरफ लोग तकनीक का इस्तेमाल कर अपने जीवन को आसान करते जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर यही तकनीकी इस दुनिया के लिये घातक भी साबित होती जा रही है.

एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर के 2100 शहर तयशुदा प्रदूषण स्तर से पार हैं, हाल ही में हुए एक सर्वें में सामने आया की भारत का कानपुर शहर दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर है. प्रदूषण को कम करने के लिए इस दिशा में हर स्तर पर काम चल रहा है. टेक्नोलोजी की मदद से प्रदूषण को दूर करने नए-नए उपकरण मार्केट में आ रहे हैं. ऐसी ही एक टेक्नोलोजी स्मार्ट प्यूरीफायर के रूप में सामने आई है जो घर और औफिस की हवा को स्वच्छ करती है.

स्मार्ट प्यूरिफायर कैसे करता है काम

– नेचुरल एयर प्यूरीफायर घरों के अंदर की हवा को पौधों की मदद से साफ रखते हैं. स्मार्ट प्यूरिफायर्स पर 2016 से काम शुरू हुआ था. अब ये इको-फ्रेंडली तरीके से भी हवा को साफ रखते हैं.

– इनके सेंसर्स बिल्डिंग की हवा साफ रखने के लिए पौधे की जड़ों का उपयोग करते हैं. इनका वाई-फाई मौड्यूल इनके मालिक को तापमान, नमी सहित तमाम अपडेट्स भेजता रहता है.

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– स्मार्ट प्यूरीफायर ‘NATEDE’ में कभी फिल्टर बदलना नहीं पड़ता है. यह हवा में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और फाइन पार्टिकल्स का 99 फीसद तक सफाया कर देता है. इसे दूसरी स्मार्ट डिवाइसेस से जोड़ा भी जा सकता है और एक ऐप के जरिए ये मालिक तक सारी जानकारी पहुंचा सकता है.

स्मार्ट बिल्डिंग्स में लगाए सेंसर्स

– स्मार्ट बिल्डिंग्स में ब्रेकडाउन कम होते हैं, अगर होते भी हैं तो दिक्कत आसानी से और जल्दी पकड़ में आती है.

– ये सेंसर्स से पता लगा लेती हैं कि हीटिंग और कूलिंग कहां कम और कहां ज्यादा है. इनमें जगह का सदुपयोग होता है और पूरी स्पेस काम में आती है.

– इन बिल्डिंग्स से वेस्ट कम निकलता है और बेवजह चालू रहने वाली हीटिंग और एयरकंडिशनिंग बंद हो जाती है.

रीसाइकल से रीयूजेबल तक

– इलेक्ट्रौनिक रीसाइक्लर्स इंटरनेशनल ने ‘स्टेपलर्स’ और ‘बेस्ट बाय’ जैसे रिटेलर्स से हाथ मिलाया और ये पुरानी इलेक्ट्रौनिक चीजों की रीसाइक्लिंग कर रहे हैं.

– ये ई-कचरे को छांटते-तोड़ते हैं, सुनिश्चित करते हैं कि जहरीले केमिकल प्रकृति से ना मिल पाएं.

– राउटर्स से डीवीडी में लगाई जाने वाली बैटरियां भी रीसाइकल करते हैं. इससे कंपनियां प्रोत्साहित हो रही हैं और रीयूजेबल सामान का उपयोग बढ़ा रही हैं.

इंग्लैंड में स्विंग होगी सबसे बड़ी समस्या : विराट कोहली

इंग्लैंड दौरे से पहले भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली का एक बड़ा बयान सामने आया है. विराट का मानना है कि स्विंग गेंदबाजी सिर्फ भारतीय टीम की ही समस्या नहीं है बल्कि यह तो दुनिया की हर क्रिकेट टीम की समस्या है. विराट का मानना है कि यदि टीम को लय मिल जाए तो आप कुछ भी कर सकते हैं. विराट कोहली आगामी इंग्लैंड दौरे के पर जाने से पहले मीडिया से बात कर रहे थे. उल्लेखनीय ही कि टीम इंडिया इंग्लैंड दौरे पर रवाना हो रही है जहां उसे आयरलैंड से टी20 सीरीज खेलना है जिसके बाद इंग्लैंड से पहले टी20 और उसके बाद वनडे फिर अंत में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेलना है.

यहां बता दें कि टीम इंडिया पर अक्सर भी घर के शेर होने का आरोप लगता रहता है. कहा जाता है कि टीम भारतीय उपमहाद्वीप में बढ़िया प्रदर्शन करती हैं जहां की पिचें धीमी होती हैं और स्पिनर्स के लिए मुफीद मानी जाती हैं. वहीं इंग्लैंड की पिचें तेज और उछाल वाली पिचें होती हैं जहां की गेंद को स्विंग होने में काफी मदद मिलती है. ऐसे में वहां होने वाले दौरे पर जाने से पहले जब विराट से स्विंग गेंदाबाजी से निपटने की रणनीति के बारे में पूछने की कोशिश की गई तो विराट ने यह जवाब दिया.

विराट का जवाब उस रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है जिसके तहत इंग्लैंड को इशारों में ही यह जताने की कोशिश की है कि भारत के तेज गेंदबाज भी इंग्लैंड टीम को स्विंग से परेशान कर सकते हैं.

विराट को एक आक्रमक कप्तान के तौर पर देखा जाता जो मैदान पर साफ दिखाई भी देता है. यहां तक भी कहा जाता है कि अगर विराट को उकसा दिया जाए तो उनका बल्ला ज्यादा ही रन उगलने लगता है. विराट का बयान दर्शाता है कि वे पूरे जोश के साथ इंग्लैंड दौरे का आगाज करना चाहते हैं. विराट ने पिछला विदेशी दौरा दक्षिण अफ्रीका में किया था जहां टीम इंडिया में पहले दो  टेस्ट के बाद शानदार वापसी की थी और तीसरा और अंतिम टेस्ट मैच जीतने के बाद वनडे सीरीज में शानदार कप्तानी प्रदर्शन करते हुए दक्षिण अफ्रीका में पहली बार भारत कोई सीरीज जीत पाया था.

चुनौती होगा इंग्लैंड की परिस्थितियों में टीम इंडिया का ढलना

लेकिन विराट की समस्या टीम इंडिया के इंग्लैंड की परिस्थितियों में ढलने की होगी क्योंकि दक्षिण अफ्रीका का दौरा तो फरवरी में ही खत्म हो गया था जिसके बाद टीम इंडिया भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर नहीं गई है. इससे निपटने के लिए विराट ने जरूर जून में हुए अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच नहीं खेलते हुए काउंटी क्रिकेट खेलने की योजना बनाई थी और वहां की सरे काउंटी से करार भी कर लिया था लेकिन आईपीएल के दौरान लगी गर्दन की चोट की वजह से उन्हें काउंटी में खेलना रद्द करना पड़ा.

लेकिन विराट कोहली के अलावा चेतेश्वर पुजारा जरूर आईपीएल में नहीं खेल पाने के कारण अप्रैल में ही काउंटी क्रिकेट खेलने चले गए थे जहां उनका मिला जुला प्रदर्शन रहा था, लेकिन उन्हें इंग्लैड की परिस्थिति में ढलने में परेशानी नहीं होगी और उनके अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद भी है. विराट सेना इंग्लैंड में कैसा प्रदर्शन करती है यह तो समय ही बताएगा लेकिन टीम के लिए यह दौरा आसान नहीं होने वाला जिसकी वहां कड़ी परीक्षा होने वाली है.

इसी बीच मीडिया से बात करते हुए एक वक्त ऐसा भी आया जब विराट कोहली को गुस्सा आ गया, हुआ कुछ यूं था की वहां मौजूद पत्रकार बार बार साल 2014 के भारत इंग्लैड दौरे पर सवाल कर रहे थे, जिसे विराट कोहली ने कई बार टालने की कोशिश भी की लेकिन जब सवाल बार बार पूछे जाने पर विराट कोहली इस बात पर नाखुशी भी जताई.

उपासना सिंह भी करेंगी फिल्म का निर्देशन

बौलीवुड में कलाकारों के बीच फिल्म निर्माण व निर्देशन में उतरने की होड़ सी लगी हुई है. ऐसे में हिंदी, पंजाबी व भोजपुरी फिल्मों व सीरियलों की चर्चित अदाकारा उपासना सिंह कैसे पीछे रह जाती. वह भी बहुत जल्द निर्माण व निर्देशन के क्षेत्र में उतरने वाली हैं.

वैसे भी इन दिनों उपासना सिंह के सितारे बुलंदियों पर हैं. कुछ समय पहले उन्हे ‘‘कामेडी नाइट्स विथ कपिल’’ में पिंकी बुआ के किरदार में काफी पसंद किया गया. तो वहीं हाल ही उपासना सिंह के अभिनय से सजी पंजाबी फिल्म ‘‘कैरी आन जट्टा 2’’ ने सफलता के सारे रिकार्ड तोड़े हैं. इसी के साथ इन दिनों वे लेखक व निर्देशक दिनेश दुबे की वेब सीरीज ‘‘प्रौब्लम नो प्रौब्लम’’ में  कम सुनने वाली मिसेस मिश्रा के किरदार में शोहरत बटोर रही हैं.

हाल ही में जब हमसे उपासना सिंह की बातचीत हुई, तो उपासना सिंह ने स्वीकार किया कि वह फिल्म निर्माण के साथ साथ निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखने जा रही हैं. जी हां! उपासना सिंह कहती हैं-‘‘इस साल के अंत तक मैं बतौर निर्माता निर्देशक एक हास्य फिल्म शुरू करने वाली हूं. इसके लिए कहानी पर काम किया जा रहा है. इसके अलावा पंजाबी भाषा की एक फिल्म का सिर्फ निर्माण करने जा रही हूं. इन फिल्मों का निर्माण मेरी मां के बैनर ‘संतोष क्रिएशन प्रायवेट लिमिटेड’ के तहत होगा.’’

उपासना सिंह के पति नीरज भारद्वाज भी एक रहस्य रोमांच पूर्ण फिल्म ‘‘मोक्ष से माया’’ का सह निर्माण कर रहे हैं. मगर उपासना सिंह अपने पति की सोच के विपरीत सोच वाली फिल्मों का निर्माण व निर्देशन करने वाली हैं. खुद उपासना सिंह कहती हैं-‘‘मेरी यह फिल्में मेरी सोच के अनुरूप होंगी. मेरी हर फिल्म हास्य प्रधान और स्वस्थ मनोरंजन देने वाली होंगी. मैं रहस्य रोमांच वाली फिल्में नहीं बनाउंगी. मैं हमेशा लोगों को हंसाना चाहती हूं. मैं चाहती हूं कि लोगों को ज्यादा से ज्यादा खुशी दे सकूं.’’

जब टूटे जबड़े के साथ भी अनिल कुंबले ने खेला क्रिकेट

अनिल कुंबले ने अपने 18 साल के करियर में कई बार भारतीय क्रिकेट के सामने ऐसे उदाहरण रखे, जिनसे हर नया क्रिकेटर प्रेरणा ले सकता है. कुंबले को क्रिकेट से कितना प्यार था और वह क्रिकेट के प्रति कितने ईमानदार थे यह उस वक्त पता चल गया था जब उन्होंने टूटे जबड़े के साथ खेला था.

कुंबले का वो शानदार प्रदर्शन कैसे कोई भूल सकता है जब उन्होंने दर्द को अनदेखा करते हुए चेहरे पर पट्टी बांधकर वेस्टइंडीज के खिलाफ गेंदबाजी की थी.

साल 2002 में भारत और वेस्टइंडीज के बीच एंटिगुआ में टेस्ट मैच खेला जा रहा था. मैच के दौरान मर्वन ढिल्लन की बाउंसर सीधे कुंबले के चेहरे पर आकर लगी और उनके जबड़े से खून बहने लगा. उन्हें मैदान से बाहर ले जाया गया. लेकिन पट्टी बंधवाकर कुंबले वापिस मैदान में आ गए और गेंदबाजी करने लगे.

जबड़े के दर्द को अनदेखा करके उन्होंने आराम ना करने का फैसला लेते हुए देश के लिए खेलना ज्यादा महत्वपूर्ण समझा और जबरदस्त प्रदर्शन दिया. कुंबले ने कुल 14 ओवर गेंदबाजी की और इस दौरान उन्होंने ब्रायन लारा का भी विकेट लिया. मैच के बाद जांच में पता चला कि कुंबले के जबड़े में फ्रैक्चर था.

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कप्तान कुंबले ने 1990 से लेकर 2008 तक लगातार 18 साल तक क्रिकेट खेला. कुंबले ने अपने करियर का पहला एक दिवसीय मैच 25 अप्रैल 1990 में श्रीलंका के खिलाफ खेला था. कुंबले ने अपना आखिरी एक दिवसीय मैच 19 मार्च 2007 में बरमूडा के खिलाफ खेला था.

टेस्ट क्रिकेट में कुंबले ने 9 अगस्त 1990 में पहला मैच इंग्लैंड के खिलाफ खेला था और आखिरी टेस्ट मैच 29 अक्टूबर 2008 में औस्ट्रेलिया के खिलाफ था. भारत की ओर से 500 विकेट लेने वाले वह पहले खिलाड़ी हैं. कुंबले ने टेस्ट क्रिकेट में कुल 619 विकेट लिए और वह तीसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी हैं.

चलते चलते चर्चा फिटनैस के बारे में अंजलि आनंद से

लोग तो वजन घटाते हैं, लेकिन आप को बढ़ाने के लिए बोला गया था?

मैं पहले ही 80 किलोग्राम से ज्यादा की थी बावजूद इस के मुझे शो ‘ढाई किलो प्रेम’ के लिए वजन बढ़ाने के लिए कहा गया तो मैं ने मना कर दिया, क्योंकि अगर उस से ज्यादा वेट बढ़ता तो मुझे परेशानी हो जाती. एक बात और कहना चाहती हूं कि मेरा वजन 80 किलोग्राम ही था 108 किलोग्राम नहीं, क्योंकि हर जगह यही प्रचारित हुआ है कि मैं 108 किलोग्राम की थी.

अपनी फिटनैस के लिए क्या करती हैं? 

मैं स्लिम नहीं हूं, यह हमेशा याद रखती हूं. मगर फिटनैस के लिए हमेशा प्रयास करती रहती हूं. मैं बहुत ऐक्टिव लड़की हूं. साइक्लिंग और ऐक्सरसाइज नियमित करती हूं. खाना भी अब डरडर कर खाती हूं. मैं ने अपनी फिटनैस को ले कर बहुत सैक्रीफाई किया, लेकिन मेरी बौडी ही ऐसी है कि जो भी थोड़ाबहुत खाती हूं शरीर पर नजर आने लगता है.

फैटी लोगों के लिए क्या कहना चाहेंगी? 

अगर किसी को मैडिकल प्रौब्लम नहीं है तो मैं उन से कहूंगी कि वेटलौस के लिए हमेशा प्रयास करते रहना चाहिए. लोगों द्वारा आप के मोटापे को ले कर दिए गए कमैंट्स पर ध्यान न दें. अपनी प्रतिभा को इतना ऊंचा करें कि लोगों का ध्यान आप के शरीर पर न जा कर आप की प्रतिभा पर जाए. कभी मोटापे को कैरियर में रुकावट मानने की गलती न करें.

क्या आप को भी कमैंट्स का सामना करना पड़ा?

हमारे यहां लोगों का चेहरा और फीगर देख कर उस की योग्यता का आकलन किया जाता है. कई बार लोग बातोंबातों में कमैंट्स करते हैं, लेकिन मैं इग्नोर कर देती हूं. पहले फील होता था, मगर अब मैं ऐसी बातों को तवज्जो नहीं देती. ओपराह विनफ्रे जैसी कितनी शख्सीयत हैं हमारे यहां जिन्होंने फीगर और रंगरूप से उठ कर अपना नाम बनाया है.

लोग आप की तुलना भूमि से कर रहे हैं?

मैं और भूमि पेडणेकर दोनों बहुत अलग हैं. दोनों की जर्नी अलग है, काम अलग है. मैं नहीं चाहूंगी कि कोई मेरी तुलना किसी दूसरे से करे.

आई एम नौट फैटी

अंजलि मानती हैं कि लोग अपने मोटापे को ले कर दुखी रहते हैं जबकि उन्हें अपने मन से यह बात निकाल देनी चाहिए कि मोटा होने के कारण वे और लोगों से अलग हैं, बल्कि अपने अंदर विश्वास और लोगों को अपना टेलैंट दिखाने की ताकत को विकसित करना चाहिए. वे अपनेआप को कभी मोटा नहीं मानतीं.

किरदार के सभी रंग पसंद

स्टार प्लस के शो ‘कुल्फी कुमार बाजेवाला’ में नैगेटिव किरदार निभा रही अंजलि मानती हैं कि एक ऐक्टर को हर तरह के किरदार निभाने चाहिए.

घर का काम खुद करती हूं

अंजलि कहती हैं कि शूटिंग के चलते वे वर्कआउट नहीं कर पाती थीं, इसलिए उन्होंने अपने घर से मेड को हटा दिया. घर का सारा काम अब खुद करती हैं. उन के अनुसार घर का काम करना सब से बैस्ट ऐक्सरसाइज है.

कपड़ों के लिए विदेश जाना पड़ता है

खाने की शौकीन अंजलि की सब से बड़ी कमजोरी बिरयानी है. वे ऐक्टिंग से पहले प्लस साइज मौडल भी रह चुकी हैं. अंजलि को एक बात की समस्या होती है और वह है उन के कपड़ों की शौपिंग. इस के लिए उन्हें विदेश जा कर शौपिंग करनी पड़ती है, क्योंकि यहां उन के साइज के कपड़े नहीं मिलते.

ब्रेकफास्ट रैसिपीज : अचारी सत्तू परांठा

अचारी सत्तू परांठा

सामग्री

– 1 कप आटा

– 1/2 छोटा चम्मच अजवायन दरदरी कुटी

– 1 बड़ा चम्मच मोयन के लिए तेल

– आटा गूंधने के लिए पर्याप्त कुनकुना पानी

– परांठे सेंकने के लिए थोड़ा सा रिफाइंड औयल

– नमक स्वादानुसार.

सामग्री भरावन की

– 1/2 कप सत्तू

– 1 बड़ा चम्मच आम का अचार गुठलीरहित

– 2 छोटे चम्मच अचार का तेल

– 1/2 छोटे चम्मच लालमिर्च पाउडर

– 2 छोटे चम्मच अदरकलहसुन पेस्ट

– 1 बड़ा चम्मच प्याज बारीक कटा

– 1 बड़ा चम्मच धनियापत्ती कटी

– नमक स्वादानुसार.

विधि

आटे में मोयन, अजवायन और नमक डाल कर गूंध कर 20 मिनट के लिए ढक कर रख दें. अचार को बारीक पीस लें. सत्तू में सारी सामग्री मिला दें. आटे की मीडियम आकार की लोइयां बना कर हाथ से थपथपाएं. बीच में 1 बड़ा चम्मच सत्तू वाला मिश्रण भर कर बंद कर दें. परांठा बेल कर गरम तवे पर तेल लगा कर करारा सेंक लें. दही या चटनी के साथ सर्व करें.

जीजा से जब लड़े नैन : अवैद्य संबंधों के फेर में गई जान

दिल्ली जल बोर्ड में नौकरी करने वाला संजीव कौशिक अपनी पत्नी अंजू कौशिक को हर तरह से खुश रखता था. वह जो भी मांग करती, संजीव उसे जल्द से जल्द पूरी करने की कोशिश करता था. इस के बावजूद भी अंजू उसे पहले की तरह प्यार नहीं करती. आए दिन पति के प्रति उस का व्यवहार बदलता जा रहा था. बेटे के भविष्य को देखते हुए संजीव अपने घर में कलह नहीं करना चाहता था पर अंजू उस की बात को गंभीरता से समझने की कोशिश नहीं कर रही थी.

संजीव फरीदाबाद की ग्रीनफील्ड कालोनी का रहने वाला था. दिल्ली ड्यूटी करने के बाद जब वह घर पर पहुंचता तो घर वाले अंजू के बारे में बताते कि वह बेलगाम हो कर अकेली पता नहीं कहांकहां घूमती है. संजीव इस बारे में जब पत्नी से पूछता तो वह उलटे उस से झगड़ने पर आमादा हो जाती थी. इस के बाद संजीव को भी गुस्सा आ जाता तो वह उस की पिटाई कर देता था. इस तरह उन दोनों के बीच आए दिन झगड़ा होने लगा.

संजीव अपने स्तर से यही पता लगाने की कोशिश करने लगा कि आखिर उस की पत्नी का किस के साथ चक्कर चल रहा है. पर उसे इस काम में सफलता नहीं मिल सकी. आखिर इसी साल जनवरी महीने में जब अंजू घर से भाग गई तो हकीकत सामने आई. पता चला कि अंजू के अपने ही ननदोई यानी संजीव के बहनोई राजू के साथ ही नाजायज संबंध थे.

जबकि संजीव का शक किसी मोहल्ले वाले पर था, लेकिन उसे क्या पता था कि उस का बहनोई ही आस्तीन का सांप बना हुआ है. अंजू जब राजू के साथ भागी थी तो अपने बेटे को भी साथ ले गई थी. तब संजीव ने फरीदाबाद के सेक्टर-7 थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी. इस के करीब एक महीने बाद अंजू को करनाल से बरामद किया गया था.

घर लौटने के बाद अंजू ने अपने किए की पति से माफी मांगी और भविष्य में राजू से न मिलने का वादा भी किया था. संजीव ने उसे माफ कर फिर से स्वीकार कर लिया. लेकिन कहते हैं कि चोर चोरी भले छोड़ दे लेकिन हेराफेरी नहीं छोड़ता. यही हाल अंजू का भी था.

कुछ दिनों तक तो अंजू ठीक रही लेकिन जब उसे अपने ननदोई यानी प्रेमी राजू की याद आती तो वह बेचैन रहने लगी. उधर राजू भी अंजू से मिलने के लिए बेताब था.

दोनों ही जब एकदूसरे से मिलने के लिए मचलने लगे तब वे चोरीछिपे मिलने लगे. संजीव को जब पता चला तो उस ने पत्नी को समझाया पर वह नहीं मानी.

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वैसे भी जब किसी महिला के एक बार पैर फिसल जाते हैं तो वह रोके से भी नहीं रुकते. क्योंकि अवैध संबंधों की राह बड़ी ही ढलवां होती है. उस राह पर यदि कोई एक बार कदम रख देता है तो उस का संभलना मुश्किल होता है. यही हाल अंजू का हुआ.

संजीव अंजू के चालचलन से बहुत परेशान हो चुका था. उस की वजह से उस की रिश्तेदारियों में ही नहीं, बल्कि मोहल्ले में भी बदनामी हो रही थी. पत्नी को समझासमझा कर वह हार चुका था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह ऐसी बदचलन पत्नी का क्या करे. पत्नी की वजह से वह तनाव में रहने लगा.

17 मार्च, 2018 को भी किसी बात को ले कर संजीव का पत्नी से झगड़ा हो गया. उस समय उस का 15 वर्षीय बेटा मनन अपने ताऊ के यहां था. झगड़े के दौरान अंजू ने ड्रेसिंग टेबल से कैंची निकाल कर पति पर हमला कर दिया. बचाव की कोशिश में संजीव की छोटी अंगुली (कनिष्ठा) कट गई. अंगुली कटने पर संजीव के हाथों से खून टपकने लगा.

इस के बाद संजीव को गुस्सा आ गया. उस ने पत्नी से कैंची छीन कर उसी कैंची से उस की गरदन पर ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए. उस ने उस की गरदन पर तब तक वार किए, जब तक उस की मौत नहीं हो गई. इस के बाद उस ने उस की गरदन काट कर अलग कर दी.

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पत्नी की हत्या करने के बाद संजीव ने खून से सने अपने हाथपैर साफ किए और कपड़े बदल कर उस ने कहीं भाग जाने के मकसद से एक बैग में अपने कुछ कपड़े भर लिए. फिर वह अपने बड़े भाई के पास गया. वहां मौजूद बेटे ने बैग के बारे में पूछा तो उस ने बता दिया कि इस में कपड़े हैं जो धोबी को देने हैं. फिर वह वहां से चला गया.

दोपहर करीब एक बजे मनन जब घर पहुंचा तो दरवाजे पर ताला लगा हुआ था. उस ने पड़ोसियों से अपनी मां के बारे में पूछा तो कुछ पता नहीं चला. पिता को फोन मिलाया तो वह भी बंद मिला. तब उस ने फोन कर के अपने ताऊ को वहां बुला लिया.

ताऊ ने शक होने के बाद पुलिस को सूचना दी. पुलिस जब वहां पहुंची तो आसपास के लोग जमा थे. कमरे का ताला तोड़ कर पुलिस जब कमरे में गई तो बैडरूम में अंजू की लाश पड़ी थी, जिस का सिर धड़ से अलग था. फिर पुलिस ने जरूरी काररवाई कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

पत्नी की हत्या करने के बाद संजीव 3 दिनों तक इधरउधर घूमता रहा. बाद में उसे लगा कि चाहे वह कितना भी छिपा रहे, पुलिस एक न एक दिन उसे गिरफ्तार कर ही लेगी. यही सोच कर उस ने खुद ही न्यायालय में आत्मसमर्पण करने का फैसला ले लिया और 21 मार्च, 2018 को फरीदाबाद न्यायालय में पहुंच कर आत्मसमर्पण कर दिया.

कोर्ट ने इस की सूचना डीएलएफ क्राइम ब्रांच को दे दी. तब क्राइम ब्रांच के इंचार्ज अशोक कुमार कोर्ट पहुंच गए. उन्होंने संजीव कौशिक को गिरफ्तार कर पूछताछ की, जिस में संजीव ने अपना अपराध स्वीकार कर पत्नी की हत्या में प्रयुक्त कैंची आदि पुलिस को बरामद करा दी. पुलिस ने संजीव कौशिक से पूछताछ के बाद उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.

डेढ़ सौ करोड़ की ठगी : लालच दे कर ठगना है आसान

जमाकर्ताओं के करीब 150 करोड़ रुपए से ज्यादा हड़पने के आरोपी खेतेश्वर अरबन क्रैडिट सोसाइटी के चेयरमैन विक्रम सिंह राजपुरोजित को लंबे समय बाद आखिर सिरोही पुलिस ने पकड़ ही लिया. पुलिस ने उसे 9 जनवरी, 2018 को जोधपुर से गिरफ्तार कर लिया.

करीब डेढ़ साल पहले सोसायटी में परिपक्व हो चुकी अपनी जमापूंजी लेने निवेशक सिरोही स्थित खेतेश्वर सोसायटी के हैड औफिस पहुंचे तो उस समय उन्हें किसी तरह झांसा दे कर टाल दिया गया था. पर सोसायटी कर्मचारियों की बहानेबाजी ज्यादा दिनों तक नहीं चली.

निवेशकों को जब बारबार टरकाया जाने लगा तो वे परेशान होने लगे. फिर जुलाई 2016 में सोसायटी की सभी शाखाओं में ताले लटक गए तो निवेशकों को अपने ठगे जाने का अहसास हुआ. इस के बाद निवेशकों ने अलगअलग थानों में सोसायटी संचालकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी थीं.

लोगों ने जोधपुर, पाली, सिरोही, पिंडवाड़ा, गुजरात के दमन व दीव समेत कई जगहों पर उस के खिलाफ मामले दर्ज कराए. शुरुआत में संबंधित थानों की पुलिस भी केवल मामले दर्ज कर उन्हें रफादफा कराने की कोशिश में रही, लेकिन जब इस डेढ़ सौ करोड़ की ठगी की बात उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आई तो थाना पुलिस हरकत में आ गई.

विक्रम सिंह ने सन 1992 में सिरोही जिले के पालड़ीएम कस्बे से स्टोन क्रैशर लगा कर व्यवसाय शुरू किया था. जल्द ही उस के दिमाग में मोटा पैसा कमाने का आइडिया आया तो उस ने सन 2003 में खेतेश्वर अरबन क्रैडिट सोसायटी बनाई.

विक्रम सिंह ने अपने एक भाई राजवीर सिंह को सोसायटी का एमडी और दूसरे भाई शैतान सिंह को सोसायटी का पीआरओ बना दिया था. सोसायटी की ओर से वलसाड़, वापी, सेलवास, दमन, सरीगांव, उमरगांव, धरमपुर और चिखली में कुल मिला कर 9 ब्रांच खोली गई थीं.

गुजरात के अलावा उस ने गोवा, दमन, दादर व नगर हवेली में भी सोसायटी की शाखाएं खोली थीं. इन सभी में मैनेजर और अन्य स्टाफ की नियुक्तियां की गईं. इस के बाद आकर्षक जमा योजनाओं के जरिए लोगों से पैसे जमा कराए गए.

लोगों में विश्वास बढ़ाने के लिए इन्होंने स्थानीय लोगों को अपनी शाखाओं में नौकरी पर रखा. हालांकि बीच में जब किसी जमाकर्ता की मियाद पूरी हुई तो उन्हें रकम लौटाई भी गई, लेकिन उसी दौरान दूसरी आकर्षक योजनाएं भी लाई गईं, जिस से ग्राहक अपनी परिपक्व हुई राशि को फिर से सोसायटी में जमा करा दे.

जमा कराए लोगों के पैसों से सोसायटी के अध्यक्ष विक्रम सिंह राजपुरोहित ने सिरोही, पाड़ीव, आबू रोड, तलेटी, नयासानवाड़ा, पिंडवाड़ा, रामपुरा, अहमदाबाद, अंबाजी, मुंबई आदि जगहों पर अपने और रिश्तेदारों के नाम से करोड़ों रुपए की बेनामी संपत्ति खरीदी.

इतना ही नहीं, उस ने अपनी ही सोसायटी से अपने नाम 12 करोड़ का लोन भी लिया था. इस तरह लोगों को करीब डेढ़ सौ करोड़ का चूना लगा कर शातिरदिमाग विक्रम सिंह फरार हो गया.

फरारी के बाद वह नेपाल, गोवा, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा आदि जगहों पर घूमता रहा. कोई उसे पहचान न सके, इस के लिए वह साधु के भेष में रहता था. कभीकभी वह सपेरा भी बन जाता था. जोधपुर में वह महामंदिर इलाके में किराए पर मकान ले कर भी रहा था. वहां वह अपने भतीजे के संपर्क में था.

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पिछले डेढ़ साल से पुलिस पर विक्रम को पकड़ने का दबाव था, लेकिन वह पुलिस को लगातार चकमा दे कर बच निकलता था. उस की गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक चुनौती बनी हुई थी, लेकिन सिरोही के एसपी ओमप्रकाश के निर्देश पर उस की गिरफ्तारी के लिए एक गोपनीय योजना बनाई गई, जिस की जानकारी केवल 2 लोगों को ही थी. एक थाना सिरोही के सीआई आनंद कुमार और दूसरे कांस्टेबल योगेंद्र सिंह को.

उन्हें यह निर्देश दिया गया था कि किसी भी तरह विक्रम सिंह का पता लगा कर उसे गिरफ्तार किया जाए. ये दोनों क्या प्लान कर रहे हैं, कहां आजा रहे हैं, यह बात थाने में किसी को भी पता नहीं रहती थी.

कांस्टेबल योगेंद्र सिंह जब भी विक्रम सिंह की तलाश में बाहर गए, तब उन्होंने जरूरी काम बता कर थाने से छुट्टी ली थी. 3-4 दिन तक तलाश कर के वे वापस लौट आते, दोबारा जाते तो भी छुट्टी ले कर ही जाते थे.

उधर विक्रम सिंह भी इतना शातिर था कि वह कभी मोबाइल से बात तक नहीं करता था. बहुत जरूरी होने पर विक्रम सिंह किसी नए फोन नंबर से बात करता था. इस के बाद वह तुरंत अपनी लोकेशन बदल लेता था. ऐसे में पुलिस के लिए यह चुनौती बन जाती थी कि लोकेशन को कैसे ट्रेस किया जाए.

पुलिस अपने मुखबिरों का भी सहारा ले रही थी. मुखबिरों की सूचनाओं पर काम किया गया. आखिरकार इन दोनों पुलिसकर्मियों की मेहनत रंग लाई. ये दोनों ही उस का करीब एक महीने से पीछा कर रहे थे.

कांस्टेबल योगेंद्र सिंह को पक्की खबर मिली कि आरोपी विक्रम सिंह जोधपुर में ही है. इस पर उन के साथ एक एसआई को भेजा गया. एसआई को यह नहीं पता था कि किस की गिरफ्तारी के लिए निकले हैं.

आखिर 9 जनवरी, 2018 को विक्रम सिंह जोधपुर में पुलिस के हत्थे चढ़ गया. उसे जोधपुर से सिरोही ला कर पूछताछ की गई. फिर पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर के उस का रिमांड लिया और विस्तार से पूछताछ की. सीआई आनंद कुमार 13 जनवरी को विक्रम सिंह राजपुरोहित को सिरोही स्थित खेतेश्वर सोसायटी के कार्यालय पर ले गए.

पुलिस ने कार्यालय की चाबी के बारे में विक्रम सिंह से पूछा तो उस ने चाबी की जानकारी होने से मना कर दिया. इस पर पुलिस ने ताला खोलने वाले एक युवक को बुला लिया. लेकिन वहां उन्हें मुख्य दरवाजे पर लगा ताला कुंदे समेत पहले से ही टूटा मिला.

मुख्य दरवाजे से लगते दूसरे दरवाजे पर इंटरलौक जरूर था, लेकिन वह भी अंदर से तोड़ा हुआ था. अंदर की अलमारी को तोड़ने पर उस में पुराने रेकौर्ड मिले.

इस के साथ ही उसी अलमारी के अंदर एक लौकर और था, उस में एक हजार व 500 का एकएक पुराना नोट मिला. कुछ नोट और पूजा सामग्री भी मिली. पुलिस जब खेतेश्वर सोसायटी के सिरोही कार्यालय पहुंची तो वहां लाइट कनेक्शन कटा मिला. पुलिस को टौर्च व मोबाइल की रोशनी में जांच करनी पड़ी.

काररवाई के दौरान विक्रम सिंह भी साथ था. उस ने खुद पुलिस को फाइलों के बारे में जानकारी दी कि किस से संबंधित कौन सी फाइल है.

पुलिस ने कार्यालय में रखी फाइलों और अन्य दस्तावेजों के बारे में जानकारी ली. इन फाइलों में लोगों की एफडी, बैंकों में पूर्व में जमा करवाए गए पैसों का लेखाजोखा था. पुलिस का कहना है कि विक्रम सिंह ने रेकौर्ड के अलावा अन्य दस्तावेज अपने बड़े भाई शैतान सिंह व छोटे भाई राजवीर सिंह के पास बताए होने की बात कही.

पुलिस का कहना है कि ये सभी पुराने लेनदेन का रेकार्ड है, जो सन 2010 से पहले के हैं. उस के बाद के कागजातों के बारे में भी पूछताछ की गई. कार्यालय में मैनेजर के कमरे की टेबल के पास कुछ कागजातों को जलाए जाने के भी सबूत मिले.

जांच से संबंधित तमाम दस्तावेज पुलिस थाने ले आई. पूछताछ में पता चला कि उस ने सोसायटी के माध्यम से हजारों लोगों की खूनपसीने की कमाई से करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपए ठगे थे. यहां एक बात यह भी बता दें कि खेतेश्वर सोसायटी में रुपए जमा करने वाले सब से ज्यादा जमाकर्ता सिरोही जिले के ही थे.

विक्रम सिंह की गिरफ्तारी के बाद जमाकर्ताओं को उम्मीद बंधी है कि शायद उन के खूनपसीने की कमाई उन्हें वापस मिल जाए. विक्रम सिंह और उस की खेतेश्वर सोसायटी के खिलाफ जमाकर्ताओं ने जहांजहां रिपोर्ट दर्ज कराई थी, वहां की पुलिस भी विक्रम सिंह से पूछताछ की तैयारी में थी.

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विक्रम सिंह के एक भाई श्याम सिंह पुरोहित भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं. ठगी का मामला सामने आने पर विक्रम के भाई श्याम सिंह ने मीडिया के सामने आ कर सफाई दी कि पिछले लंबे समय से उन का विक्रम सिंह से कोई वास्ता नहीं रहा. वह घर आताजाता भी नहीं और यहां तक कि उस से बोलचाल तक नहीं है. साथ ही यह भी कि 4 महीने पहले जब उन की पत्नी की मृत्यु हो गई, तब भी वह घर पर नहीं आया था.

पुलिस विक्रम सिंह के उन भाइयों को भी गिरफ्तार करेगी जो सोसायटी में शामिल थे और उन तमाम शाखाओं के मैनेजरों से भी पूछताछ करेगी, जिन्होंने सोसायटी के माध्यम से लोगों को अच्छा रिटर्न देने का वादा कर के उन की खूनपसीने की कमाई हड़प ली थी.

कथा लिखने तक विक्रम सिंह की जमानत नहीं हो सकी थी. कोर्ट के आदेश पर उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया था.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

ओमप्रकाश राजभर ने पीलिया का ही श्राप क्यों दिया

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने लोगों को बड़ा विचित्र सा श्राप दिया है कि जो भी किसी और की रैली में जाएगा उसे पीलिया होगा. और वह राजभर यानी उन की दवाई से ही ठीक होगा. श्राप देना हर कोई जानता है कि पौराणिकवादियों का काम है जो लोगों को भगवान का डर दिखा कर अपनी दुकानदारी चमकाते रहते हैं.

ओमप्रकाश हालांकि घोषिततौर पर पीलिया की दवा नहीं बनाते हैं लेकिन उन के इस दुर्वासाई श्राप से यह बात जरूर सोचने में आती है कि उन्होंने उलटी, दस्त, वायरल, फीवर या डायबिटीज का श्राप क्यों नहीं दिया, पीलिया को ही क्यों चुना. पीलिया पीडि़तों से कई झाड़फूंक वालों की दुकानें चल रही हैं, ऐसे में उन के श्राप से बचने के लिए कई लोग प्रीपीलिया झाड़फूंक के लिए ओझाओं के पास पहुंचने लगे हैं. उत्तर प्रदेश वाकई विचित्र है जहां मंत्री कामकाज करने के बजाय श्राप दे कर सत्ता चला रहे हैं. इन्हें पीलियाश्री का पुरस्कार दिया जाना हर्ज की बात नहीं.

 

खूनी बन गई झूठी मोहब्ब्त : उतरा कमलप्रीत की शराफत का चोला

19 मार्च, 2018 की सुबह कमलप्रीत कौर अपने पति हरजिंदर सिंह से यह कहते हुए घर से निकली थी कि उस के मायके में किसी की तबीयत खराब है, इसलिए वह राहुल को ले कर वहां जा रही है. पत्नी की यह बात सुन र हरजिंदर ने कहा, ‘‘ठीक है, हो आओ. ज्यादा परेशानी वाली बात हो तो तुम मुझे फोन कर देना. मैं भी पहुंच जाऊंगा.’’

‘‘हां, तुम्हारी जरूरत हुई तो फोन कर दूंगी और कोई ज्यादा चिंता वाली बात नहीं हुई तो 2 दिन में वापस लौट आऊंगी.’’ कमलप्रीत बोली.

मूलरूप से पंजाब के जिला पटियाला के गांव बल्लोपुर की रहने वाली थी कमलप्रीत. करीब 12 साल पहले जब वह 19 बरस की थी, तब उस की शादी हरियाणा के गांव गणौली के रहने वाले हरजिंदर सिंह से हुई थी. यह गांव जिला अंबाला की तहसील नारायणगढ़ के तहत आता है.

शादी के ठीक एक साल बाद कमलप्रीत ने एक बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम राहुल रखा गया. इन दिनों वह गांव के सरकारी स्कूल में 5वीं कक्षा में पढ़ रहा था.

हरजिंदर का अपना खेतीबाड़ी का काम था, जिस में वह काफी व्यस्त रहता था. कमलप्रीत घर पर रहते हुए चौकेचूल्हे से ले कर सब कम संभाले हुए थी. जो भी था, सब बड़े अच्छे से चल रहा था. पतिपत्नी में खूब प्यार था. दोनों में अच्छी अंडरस्टैंडिंग भी थी. दोनों अपने बच्च् ों का भी सलीके से ध्यान रखे हुए थे. काफी दिनों से राहुल पिता से कहीं घुमा लाने की जिद कर रहा था तो पिता ने उस से पक्का वादा किया था कि वह उस के इम्तिहान खत्म होने के बाद उसे 2 दिन के लिए घुमाने शिमला ले चलेगा.

मगर पेपर खत्म होने के अगले रोज ही उसे अपनी मां के साथ नानी के यहां जाना पड़ गया. पत्नी के मायके जाने वाली बात पर हरजिंदर को कोई परेशानी वाली बात नहीं थी. पति की निगाह में कमलप्रीत एक सुलझी हुई मेहनती औरत थी, जो ससुराल के साथसाथ अपने मायके वालों का भी पूरा ध्यान रखती थी.

सुखदुख में वह अपने अन्य रिश्तेदारों के यहां भी अकेली आयाजाया करती थी. कुल मिला कर बात यह थी कि हरजिंदर को पत्नी की तरफ से कोई चिंता नहीं थी. इसलिए जब वह 19 मार्च को बेटे के साथ मायके के लिए घर से अकेली निकली तो हरजिंदर ने कोई चिंता नहीं की.

उसी रोज शाम के समय हरजिंदर ने पत्नी को यूं ही रूटीन में फोन कर के पूछा, ‘‘हां कमल, पहुंचने में कोई परेशानी तो नहीं हुई? बल्लोपुर पहुंच कर तुम ने फोन भी नहीं किया?’’

‘‘हांहां…वो ऐसा है कि अभी मैं बल्लोपुर नहीं पहुंच पाई.’’ कमलप्रीत बोली तो उस की आवाज में हकलाहट थी.

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पत्नी की ऐसी आवाज सुन कर हरजिंदर को थोड़ी घबराहट होने लगी. उस ने पूछा, ‘‘बल्लोपुर नहीं पहुंची तो फिर कहां हो?’’

‘‘अभी मैं शहजादपुर में हूं. किसी जरूरी काम से मुझे यहां रुकना पड़ गया.’’ कमलप्रीत ने पहले वाले लहजे में ही जवाब दिया.

‘‘शहजादपुर में ऐसा क्या काम पड़ गया तुम्हें? वहां तुम किस के यहां रुकी हो? सब ठीक तो है न? बताओ, कोई परेशानी हो तो मैं भी आ जाऊं क्या?’’

‘‘सब ठीक है, घबराने वाली कोई बात नहीं है. अच्छा, मैं फ्री हो कर अभी कुछ देर बाद फोन करती हूं. तब सब कुछ विस्तार से भी बता दूंगी.’’ कहने के साथ ही कमलप्रीत की ओर काल डिसकनेक्ट कर दी गई.

लेकिन हरजिंदर की घबराहट बढ़ गई थी. उस ने कमलप्रीत का नंबर फिर से मिला दिया. पर अब उस का फोन स्विच्ड औफ हो चुका था.

अचानक यह सब होने पर हरजिंदर का फिक्रमंद हो जाना लाजिमी था. कुछ नहीं सूझा तो उस ने उसी समय अपनी ससुराल के लैंडलाइन नंबर पर फोन किया. यहां से उसे जो जानकारी मिली, उस से उस के पैरों तले की जमीन सरक गई. ससुराल से उसे बताया गया कि यहां तो घर में कोई बीमार नहीं है और न ही कमलप्रीत के वहां आने की किसी को कोई जानकारी थी.

अब हरजिंदर के लिए एक मिनट भी रुके रहना संभव नहीं था. उस ने अपनी मोटरसाइकिल उठाई और शहजादपुर की ओर रवाना हो गया. रास्ते भर वह कमलप्रीत को फोन भी मिलाता रहा था, पर हर बार उसे फोन के स्विच्ड औफ होने की ही जानकारी मिलती रही.

आखिर वह शहजादपुर जा पहुंचा. पत्नी और बच्चे की तलाश में उस ने उस गांव का चप्पाचप्पा छान मारा मगर पत्नी और बेटे राहुल के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. वहां से वह मोटरसाइकिल से ही अपनी ससुराल बल्लोपुर चला गया. कमलप्रीत को ले कर वहां भी सब परेशान हो रहे थे.

इस के बाद तो हरजिंदर सिंह और उस की ससुराल वालों ने कमलप्रीत व राहुल की जैसे युद्धस्तर पर तलाश शुरू कर दी. मगर कहीं भी दोनों मांबेटे के बारे में जानकारी हाथ नहीं लगी.

19 मार्च, 2018 का दिन तो गुजर ही गया था, पूरी रात भी निकल गई. 20 मार्च को भी दोपहर तक तलाश करते रहने के बाद सभी निराश हो गए तो हरजिंदर शहजादपुर थाने पहुंच गया. थानाप्रभारी शैलेंद्र सिंह को उस ने पत्नी और बेटे के रहस्यमय तरीके से गायब होने की जानकारी दे दी. थानाप्रभारी ने कमलप्रीत और उस के बेटे राहुल की गुमशुदगी दर्ज कर ली. पुलिस ने अपने स्तर से दोनों मांबेटे को ढूंढने की काररवाई शुरू कर दी.

देखतेदेखते इस बात को एक सप्ताह गुजर गया, मगर पुलिस भी इस मामले में कुछ कर पाने में असफल रही.

बात 26 मार्च, 2018 की थी. थानाप्रभारी शैलेंद्र सिंह उस वक्त अपने औफिस में थे. तभी एक अधेड़ उम्र के शख्स ने उन के सामने आ कर दोनों हाथ जोड़ते हुए दयनीय भाव से कहा, ‘‘सर, मेरा नाम ओमप्रकाश है और मैं यमुनानगर में रहता हूं.’’

‘‘जी हां, कहिए.’’ शैलेंद्र सिंह बोले.

‘‘अब क्या कहूं सर, एक भारी मुसीबत आन पड़ी है हमारे परिवार पर.’’

‘‘हांहां बताइए, क्या परेशानी है?’’ थानाप्रभारी ने कहा.

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‘‘सर, मेरा एक भांजा है नीटू. उम्र उस की करीब 21 साल है. किसी बात पर उस का एक औरत से झगड़ा हुआ और हाथापाई में वह औरत मर गई. उस ने उस की लाश को कहीं ले जा कर दफन कर दिया. जब इस की जानकारी मुझे हुई तो हम ने उसे समझाया कि गलती हो जाने पर कानून से आंखमिचौली खेलने के बजाय पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना ही बेहतर होगा.’’ ओमप्रकाश ने बताया.

इस पर एकबारगी तो शैलेंद्र सिंह चौंके. फिर खुद को संभालने का प्रयास करते हुए बोले, ‘‘मतलब यह कि आप के भांजे ने किसी की जान ली, फिर उस की लाश भी ठिकाने लगा दी. अब सरेंडर का प्रस्ताव लेकर आए हो. तो यह भी बता दो कि किन शर्तों पर सरेंडर करवाओगे?’’

‘‘कोई शर्त नहीं सर. लड़का आप के सामने तो अपना अपराध कबूलेगा ही, अदालत में भी ठीक ऐसा ही बयान देगा. भले उसे कितनी भी सजा क्यों न हो जाए. बस आप से हमें सिर्फ इतना सहयोग चाहिए कि थाने में उस पर ज्यादा सख्ती न हो.’’ ओमप्रकाश ने कहा.

‘‘देखो, अगर वह हमें सहयोग करते हुए सच्चाई बयान करता रहेगा तो हमें क्या जरूरत पड़ी है उस से सख्ती से पेश आने की. जाओ, लड़के को ला कर पेश कर दो. यदि वह सच्चा है तो यहां उस के साथ किसी तरह की ज्यादती नहीं होगी.’’

‘‘ठीक है सर, मैं समझ गया. लड़का थाने के बाहर ही खड़ा है. मैं अभी उसे ला कर आप के सामने पेश करता हूं.’’ कहने के साथ ही ओमप्रकाश बाहर गया और थोड़ी ही देर में एक लड़के को ले कर थाने में आ गया.

‘‘यही है मेरा भांजा नीटू, सर.’’ उस ने बताया.

जिस वक्त ओमप्रकाश नीटू को ले कर थानाप्रभारी के औफिस में पहुंचा था, पुलिस वाले बगल वाले कमरे में एक अभियुक्त से गहन पूछताछ कर रहे थे. जरा सी देर में वहां से चीखचिल्लाहट की भयावह आवाजें आने लगी थीं.

ये आवाजें सुन कर नीटू थरथर कांपने लगा. फिर वह दबी सी आवाज में ओमप्रकाश से बोला, ‘‘मामा, ये लोग मेरा भी क्या ऐसा ही हाल करेंगे?’’

‘‘नहीं करेंगे बेटा, मैं ने एसएचओ साहब से सारी बात कर ली है. फिर जब तुम एकदम सच्चाई बयान कर ही रहे हो तो फिर डर कैसा?’’ ओमप्रकाश ने समझाया.

‘‘यही तो डर है मामा, मैं ने आप को भी पूरी सच्चाई नहीं बताई. दरअसल, मैं ने औरत के साथसाथ उस के बेटे का भी मर्डर कर दिया है और दोनों की लाशें एक साथ दफनाई हैं.’’

नीटू की यह बात थानाप्रभारी के कानों तक भी पहुंच गई थी. उन्होंने नीटू को खा जाने वाली नजरों से देखते हुए कहा, ‘‘मुझे पहले ही से शक था कि तुम्हारे अपराध का संबंध गणौली की कमलप्रीत और उस के बच्चे की गुमशुदगी से है.

अब तुम्हारे लिए बेहतर यही है कि तुम अपने घिनौने अपराध की सच्ची दास्तान अपने मामा को बता दो, वरना दूसरे तरीके से सच्चाई उगलवानी भी आती है.’’

थानाप्रभारी के इतना कहते ही ओमप्रकाश नीटू को ले कर एक दूसरे कमरे में ले गया. इस के बाद नीटू ने अपने अपराध की पूरी कहानी मामा को बता दी. नीटू के बताने के बाद ओमप्रकाश ने सारी कहानी थानाप्रभारी को बता दी.

थानाप्रभारी ने ओमप्रकाश के बयान दर्ज करने के बाद उसे घर भेज दिया फिर नीटू को गिरफ्तार कर उसे अदालत में पेश कर 2 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि में उस से व्यापक पूछताछ की गई. इस पूछताछ में उस ने जो कुछ पुलिस को बताया, उस से अपराध की एक सनसनीखेज कहानी कुछ इस तरह सामने आई—

करीब एक साल पहले की बात है. अपनी रिश्तेदारी के एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए कमलप्रीत अकेली नारायणगढ़ के बड़ागांव गई थी. वहां जब वह नाचने लगी तो एक लड़के ने भी उस का खूब साथ दिया. उस ने बहुत अच्छा डांस किया था.

इस डांस के बाद भी दोनों एक साथ बैठ कर बतियाते रहे. लड़के ने अपना नाम सुमित उर्फ नीटू कहते हुए बताया कि यों तो वह शहजादपुर का रहने वाला है, मगर बड़ागांव में किराए का कमरा ले कर एक कंप्टीशन की तैयारी कर रहा है.

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कमलप्रीत उस की बातों से तो प्रभावित हो ही रही थी, उस का सेवाभाव भी उसे खूब पसंद आया. कमलप्रीत तो थकहार कर एक जगह बैठ गई थी, पार्टी में खाने की जिस चीज का भी उस ने जिक्र किया, वह ला कर उसे वहीं बैठी को खिलाता रहा.

इसी तरह काफी रात गुजर जाने पर कमलप्रीत को नींद सताने लगी. नीटू ने सुझाव दिया कि वह उसे अपने कमरे पर छोड़ आता है, जहां वह बिना किसी शोरशराबे के आराम से सो सकती है. थोड़ी झिझक के बाद वह मान गई.

अब तक नीटू को भी नींद आने लगी थी. अत: कमरे में चारपाई पर कमलप्रीत को सुलाने के बाद वह खुद भी जमीन पर दरी बिछा कर सो गया.

आगे का सिलसिला शायद इन के वश में नहीं था. रात के जाने किस पहर में दोनों की एक साथ आंखें खुलीं और बिना आगेपीछे की सोचे, दोनों एकदूसरे में समा गए. कमलप्रीत से नीटू 10 साल छोटा था, अत: उस मिलन के बाद कमलप्रीत उस की दीवानी हो गई.

इस के बाद यही सिलसिला चल निकला. दोनों किसी न किसी तरीके से, कहीं न कहीं मौजमस्ती करने का तरीका निकाल लेते.

देखतेदेखते एक बरस गुजर गया. अब कमलप्रीत ने नीटू से यह कहना शुरू कर दिया था कि वह अपने पति को तलाक दे कर उस से शादी कर लेगी. मौजमस्ती तक तो ठीक था, कमलप्रीत की इस बात ने नीटू को परेशान कर डाला.

नीटू ने इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए आखिर मन ही मन यह निर्णय लिया कि वह कमलप्रीत को अच्छी तरह से समझाएगा. फिर भी न मानी तो वह उस का खून कर देगा. इस के लिए उस ने एक चाकू भी खरीद कर रख लिया था.

19 मार्च, 2018 की सुबह कमलप्रीत उस के यहां आ धमकी. उस के साथ एक लड़का था, जिसे उस ने अपना बेटा बताया. आते ही उस ने कहा कि वह अपने पति को हमेशा के लिए छोड़ आई है. आगे वह उस से शादी कर के अपने लड़के सहित उसी के साथ रहेगी.

नीटू ने उसे समझाने की कोशिश की. लगातार समझातेसमझाते पूरा दिन और सारी रात भी निकल गई. मगर वह अपनी जिद पर अड़ी रही तो 20 मार्च को नीटू ने चाकू से कमलप्रीत की हत्या कर दी.

यह देख कर उस का लड़का राहुल सहम गया. मगर वह इस मर्डर का चश्मदीद गवाह बन सकता था. इसलिए नीटू ने चाकू से उस का भी गला रेत दिया. दोनों लाशों को कमरे में छिपा कर नीटू अमृतसर चला गया.

वहां गोल्डन टेंपल में उस ने वाहेगुरु से अपने इस गुनाह की माफी मांगी. रात में वापस आ कर बड़ागांव के पास से गुजर रही बेगना नदी की तलहटी में दोनों लाशों को दफन कर आया. इस के बाद वह अपने मामा के पास यमुनानगर चला गया, जिन्होंने उसे पुलिस के सामने सरेंडर करने का सुझाव दिया था.

पुलिस ने उस की निशानदेही पर न केवल चाकू बरामद किया बल्कि दोनों लाशें भी खोज लीं, जो जरूरी काररवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दीं. कस्टडी रिमांड की समाप्ति पर नीटू को फिर से अदालत में पेश कर के न्यायिक हिरासत में अंबाला की केंद्रीय जेल भेज दिया गया था.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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