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आइडिया के संग वोडाफोन का विलय, पिछड़ जाएगा एयरटेल

देश की सब से बड़ी दूरसंचार कंपनी भारतीय एयरटेल अब शायद बाजार की हिस्सेदारी में निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनी आइडिया सैल्युलर से पिछड़ जाएगी. संचार बाजार में रिलायंस का जियो आने के बाद से हलचल मची है. सब के समक्ष बाजार में बने रहने की चुनौती है. एयरटेल ने अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए टैलीनौर से समझौता किया, लेकिन अब आइडिया और वोडाफोन का विलय हो रहा है. सरकार ने अपना पैसा वसूल करने की शर्त पर दोनों कंपनियों के विलय को मंजूरी दे दी है.

इस विलय के बाद आइडिया अब एयरटेल से ग्राहक संख्या में आगे निकल जाएगी. वोडाफोन को स्पैक्ट्रम, लाइसैंस शुल्क आदि का सरकार को 9 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान करना है. कंपनी विलय से पहले यह भुगतान करने को तैयार है. आइडिया सैल्युलर ने सरकार को बता दिया है कि वोडाफोन पर जो भी बकाया है वह खुद उस का भुगतान करने पर सहमत है. आइडिया के इस करारनामे के मद्देनजर सरकार से विलय की मंजूरी मिल गई है और दोनों कंपनियों के बीच जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने हैं. इस की भी लगभग सभी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं.

दूरसंचार बाजार में रिलायंस जियो के निशुल्क सेवा देने और बाजार आधार बढ़ाने की रणनीति के बाद हड़कंप मचा हुआ है. एयरटेल के समक्ष बाजार का पहला खिलाड़ी होने का तमगा बचाने की चुनौती थी, इसलिए उस ने टैलीनौर जैसी कंपनियों का खुद में विलय भी किया, लेकिन पिछली कुछ तिमाहियों से कंपनी लगातार घाटे में चल रही है. आइडिया का यह समझौता निश्चितरूप से पहले नंबर की जंग में उसे जिता देगा. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि कारोबारी घरानों की इस जंग में उपभोक्ता संरक्षण बरकरार रहना चाहिए.

विपक्ष हुआ एकजुट

कर्नाटक में एक मंच पर मायावती, अखिलेश यादव, सोनिया गांधी, सीताराम येचुरी, शरद पवार, अरविंद केजरीवाल को देख कर भाजपा को जो धक्का पहुंचा होगा वह 19 मई को रोतेकलपते बीएस येदियुरप्पा को कर्नाटक विधानसभा में देखने से ज्यादा संगीन है. कर्नाटक का हाथ से निकल जाना एक बात है, विरोधी जमा हो जाएं यह बात दूसरी. बड़ी बात है कि ये सब दल जातियों पर आधारित हैं. इन के पास अपनेअपने निचली व पिछड़ी जातियों के वोट बैंक हैं जिन्हें हिंदू हिसाब से अछूत व शूद्र कहा जाता है. इन्हें एकसाथ देख कर एक नए समाज की पहली नींव डलना कहा जा सकता है. यह आज महसूस नहीं हो रहा क्योंकि इस सारे समारोह को सिर्फ कर्नाटक की एक नई सरकार के बनने की तरह पेश किया गया है.

मुट्ठीभर ऊंची जातियों ने सदियों से निचलों और पिछड़ों पर सामाजिक कहर ढा कर अपना ही नुकसान किया है. उन्हें लगता रहा है कि धर्म की चाशनी के सहारे उन्हें बिन पैसे के गुलाम मिलते रहे हैं पर असल में उन्हें सदा खुद से नाराज, बीमार, कमजोर, भूखों के साथ रहना पड़ा जिस का फर्क उन की खुद की अमीरी पर पड़ा. उन से काम तो कराया गया पर वह काम बहुत अच्छा न था क्योंकि वे पढ़ेलिखे समझदार न थे. आज निचलेपिछड़े समझदार हो चले हैं. हां, उन में भी धार्मिक कट्टरता भरी है पर उन्हें समझ आ रहा है कि ऊंचों के देवताओं के दासों या अवैध बच्चों को पूज कर वे कभी ऊंचों के बराबर नहीं बैठ पाएंगे. उन्होंने सोचा था कि नरेंद्र मोदी भाजपा को नया रंग देंगे, बराबरी का घोल पिलाएंगे, पैसा दिलाएंगे, साफ सरकार देंगे पर नरेंद्र मोदी तो खुद ही कट्टरपंथी सोच वालों से घिरे हैं. वे जितना दम भर लें कि फैसले वे लेते हैं पर उन के फैसलों पर कहीं और मुहर लगती है.

निचलों और पिछड़ों की नई पौध अब खरपतवार की तरह नहीं रहना चाहती कि जो चाहे कुचल दे. वह खुद बड़े पेड़ बनना चाहती है जिस में फल लगें, फूल लगें. उसे समझ आ गया है कि भाजपा यह नहीं कर सकती क्योंकि वह पौराणिक सोच से नहीं उबर सकती. यही वजह है कि 3 दिन सरकार में रहने पर भी भाजपा के अमित शाह कांग्रेस और जनता दल (सैक्यूलर) के एक भी विधायक को तोड़ न पाए. अब तक भाजपा दिल्ली राज्य में अरविंद केजरीवाल की पार्टी से एक भी सीट न छीन पाई है न एक भी विधायक तोड़ पाई है. विपक्षी दलों का एक मंच पर आने का मतलब है विपक्ष में सदियों से रह रही जातियों का जातिगत मतभेद भुलाने की कोशिश करना. सोनिया और राहुल गांधी ने इस में अहम रोल अदा किया है और वे हर राज्य में सदियों से एकदूसरे से नफरत करती निचलीपिछड़ी जातियों के नेताओं को एक मेज पर बैठा सकते हैं. अब भाजपा को वे मुद्दे उछालने होंगे जिन से पिछड़ों में आपसी फूट पड़े और निचलों में आपसी. सदियों से फार्मूले चलते आ रहे हैं पर बुरा हो कि कर्नाटक में एक बार तो हर वर्ग के लोग एक पब्लिक मंच पर बराबर की हैसियत से आए.

यह सामाजिक बदलाव की शुरुआत है तो देश को चीन बनते देर न लगेगी. इस देश में चीन से ज्यादा काम करने की ताकत व सूझबूझ है.

क्रेडिट कार्ड पर फायदे की ये हैं 5 बातें

भारत में क्रेडिट कार्ड का प्रचलन तेजी से बढ़ता जा रहा है. ऑनलाइन शॉपिंग हो या रिटेल स्‍टोर से खरीदारी, रेस्‍टोरेंट से लेकर मूवी के टिकट के लिए सभी दिल खोल कर क्रेडिट कार्ड का इस्‍तेमाल करते हैं. यदि आपके पास क्रेडिट कार्ड नहीं है, तो आपके पास कार्ड के लिए दिन भर में दो से तीन फोन आ जाते हैं. वहीं यदि आपके पास कार्ड है तो दूसरी कंपनी के कार्ड, अपनी ही कंपनी का एडिशनल कार्ड जैसे शानदार ऑफर भी मिलते हैं. लेकिन बैंक कई बार क्रेडिट कार्ड से जुड़ी कुछ महत्‍वपूर्ण शर्तें आपसे छिपा लेते हैं.

फ्री ईएमआई स्‍कीम लेने के पहले जाने शर्तें

अक्‍सर बैंक अपने प्रिविलेज कस्‍टमर्स को फ्री ईएमआई या फिर क्रेडिट कार्ड पर जीरो परसेंट पर ईएमआई का वादा करते हैं. लेकिन बैंक शायद ही आपको जीरो ईएमआई से जुड़ी शर्तों को पढ़ने या समझने का समय देते हैं. आपको मालूम होना चाहिए कि जीरो प्रतिशत ब्याज पर ईएमआई पर नियम एवं शर्तें लागू होती हैं. अगर एक भी शर्त का उल्लंघन करते हैं तो 5 या 10 नहीं बल्कि 20 प्रतिशत से भी ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ सकता है.

समय पर प्‍वाइंट रिडीम्‍ड जरूरी

बैंक आपको कभी भी खुद से नहीं बताता है कि आप अपने प्वाइंट्स को कैसे रिडीम कर सकते हैं. ऐसे में जानकारी न होने से लाखों प्वाइंट्स पड़े रह जाते हैं और क्रेडिट कार्ड एक्सपायर हो जाता है. इसके अलावा जब आपके प्वाइंट्स 1000 से 10,000 जैसे लैंडमार्क को क्रॉस करते हैं तब बैंक ये नहीं बताता कि आपके इतने प्वाइंट हो गए हैं और आप उन्हें रिडीम कर कैशबैक लाभ ले सकते हैं.

ड्यू डेट का ध्‍यान

आपने अक्सर देखा होगा कि आपको मोबाइल बिल भरना हो तो टेलीकॉम कंपनियां लगातार एसएमएस भेजती हैं. वहीं बैंक भी आपको मिनिमम बैलेंस के लिए रिमाइंडर भेजती हैं. लेकिन क्रेडिट कार्ड के बिल को जमा करने के लिए आपके पास कोई मैसेज नहीं आता. वास्‍तव में देखा जाए तो बैंक खुद नहीं चाहते कि आप समय पर बिल जमा कर दें. ऐसे में आप खुद ही अपनी ड्यू डेट का ख्‍याल रखें. बैंक तो यही चाहते हैं कि आप लेट करें और बाद में लेट फीस भरें.

कार्ड अपग्रेड का लगता है वार्षिक चार्ज

बैंक आपको अक्‍सर कार्ड अपग्रेड करने का ऑफर देते हैं. अक्‍सर बैं‍क की एक्‍जीक्‍यूटिव आपको फ्री ऑफ कॉस्ट अपने सिल्वर कार्ड को गोल्ड में और गोल्ड को प्लेटिनम में अपग्रेड करवाने का लालच देते हैं. लेकिन ये नहीं बताते कि नए क्रेडिट कार्ड के लिए आपको 500 रुपए से लेकर 700 रुपए तक का शुल्क भी देना पड़ेगा.

लिमिट बढ़ने से बढ़ता है एनुअल चार्ज

क्रेडिट कार्ड धारकों को अक्सर एक कॉल आती है कि आपके क्रेडिट कार्ड की क्रेडिट लिमिट मुफ्त में बढ़ाई जा रही है. बैंक आपको प्रिविलेज कस्‍टमर मानते हुए आपकी लिमिट को दो गुना या इससे अधिक कर देता है. यहां आपसे आपकी सहमति भी नहीं मांगी जाती. लेकिन बैंक आपको कभी ये नहीं बताता कि इसके बाद आपका वार्षिक शुल्‍क बढ़ जाएगा.

मेरे पति का बैस्ट फ्रैंड मुझे न सिर्फ गंदी नजरों से देखता है बल्कि मुझे स्पर्श करने की कोशिश करता है. आप बताएं कि मुझे क्या करना चाहिए.

सवाल
मेरे पति मल्टीनैशनल कंपनी में काम करते हैं. जिस कंपनी में वे पहले थे उस में उन का बैस्ट फ्रैंड अभी भी काम करता है जिस कारण उस का आएदिन हमारे घर में आनाजाना है. लेकिन मैं ने नोटिस किया कि वह मुझे न सिर्फ गंदी नजरों से देखता है बल्कि कभी पानी का गिलास पकड़ने के बहाने या फिर मौका देख कर मुझे स्पर्श करने की कोशिश करता है. और अब तो पति के घर पर नहीं होने पर भी वह आ धमकता है. आप बताएं कि मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब
भले ही वह आप के पति का बैस्ट फ्रैंड है लेकिन फिर भी आप को इस बारे में अपने पति से खुल कर बात करनी होगी ताकि वे भी अवेयर हो जाएं और अपने दोस्त का घर में आनाजाना कम कर दें.

इस बात को भी आप ध्यान रखें कि जब भी वह आप के पति के पीछे घर में आए तो आप उसे बाहर से ही रवाना कर दें. इस से उसे समझ आ जाएगा कि आप उस की हरकतों को पहचान गई हैं. आप पति से भी उस से दूरी बनाने को कहें. आप को काफी सतर्क हो कर रहना होगा.

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सेक्स की चाहत में पत्नी बनी पति की दुश्मन

भागदौड़ भरी जिंदगी में सड़कों पर बढ़ती वाहनों की भीड़, उन से होने वाली दुर्घटनाएं और आए दिन होने वाले अपराधों को देखते हुए अगर घर से निकला कोई आदमी वापस न आए तो घर वाले परेशान हो उठते हैं. नेकीराम का परिवार भी बेटे को ले कर कुछ इसी तरह परेशान था. अध्यापक नेकीराम का परिवार उत्तर प्रदेश के जनपद सहारनपुर के मोहल्ला आनंद विहार में रहता था. उन का एकलौता बेटा अमन परिवार से अलग रहता था. उस के परिवार में पत्नी अनुराधा के अलावा 5 साल का एक बेटा कृष और 4 साल की बेटी अनन्या थी.

नेकीराम को बेटे के लापता होने का उस समय पता चला, जब 28 दिसंबर, 2016 की रात करीब साढ़े 9 बजे उन की बहू अनुराधा का फोन आया. उस ने जो कुछ बताया था, उस के अनुसार रात में उस की तबीयत खराब हो गई तो उस ने अमन से दवा लाने को कहा. वह मोटरसाइकिल से दवा लेने गया तो लौट कर नहीं आया.

अनुराधा ने अमन को फोन किया तो उस का मोबाइल स्विच औफ बता रहा था. इस से वह परेशान हो उठी थी और उस ने सभी को इस बारे में बता दिया था. जब अमन का कुछ पता नहीं चला तो नेकीराम और उन के भतीजे रात में ही स्थानीय थाना सदर बाजार पहुंचे और पुलिस को सूचना दे दी थी.

पुलिस ने उन्हें सुबह तक इंतजार करने को कहा था. पुलिस का अनुमान था कि अमन कहीं अपने यारदोस्तों के पास न चला गया हो. पुलिस ने भले ही सुबह तक इंतजार करने को कहा था, लेकिन घर वाले अपने स्तर से उस की तलाश करते रहे.

इसी का नतीजा था कि आधी रात को शहर के रेलवे स्टेशन परिसर में रेलिंग के पास उस की मोटरसाइकिल खड़ी मिल गई थी. लेकिन अमन का कुछ अतापता नहीं था. घर वालों की रात चिंता में बीती. सुबह शहर से लगे गांव फतेहपुर वालों ने नजर की पुलिया के नीचे किसी युवक का शव पड़ा देखा तो इस की सूचना थाना पुलिस को दे दी.

सूचना मिलते ही थानाप्रभारी मुनेंद्र सिंह मौके पर पहुंच गए. सूचना पा कर सीओ अब्दुल कादिर भी घटनास्थल पर आ गए. मृतक की गरदन पर चोट के निशान थे. इस से अंदाजा लगाया गया कि उस की हत्या गला दबा कर की गई थी. मौके पर मौजूद लोग उस की शिनाख्त नहीं कर सके. शव लापता युवक अमन का हो सकता है, यह सोच कर पुलिस ने उस के घर वालों को वहां बुलवा लिया.

घर वालों ने शव की पहचान अमन की लाश के रूप में कर दी. मामला हत्या का था, इसलिए पुलिस ने लाश का पंचनामा भर कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. साफ था, अमन की हत्या सुनियोजित तरीके से की गई थी, क्योंकि उस की मोटरसाइकिल रेलवे स्टेशन पर खड़ी मिली थी. घटनास्थल और रेलवे स्टेशन के बीच 4 किलोमीटर का फासला था. अंदाजा लगाया गया कि हत्यारे हत्या करने के बाद रेलवे स्टेशन पर पहुंचे होंगे और मोटरसाइकिल खड़ी कर के फरार हो गए होंगे. पुलिस ने अमन के ताऊ के बेटे मुकेश कुमार की तहरीर पर अज्ञात हत्यारों के खिलाफ अपराध संख्या 549/2016 पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था.

पुलिस ने अमन के घर वालों से पूछताछ की तो उन्होंने किसी से भी अपनी रंजिश होने से इनकार कर दिया. उस के घर कोहराम मचा था. उस की पत्नी अनुराधा का रोरो कर बुरा हाल था. वह बदहवाश सी हो चुकी थी. वह इतनी दुखी थी कि बारबार बेहोश हो पा रही थी. पुलिस के सामने बड़ा सवाल यह था कि अमन की हत्या क्यों और किस ने की? इस से भी बड़ा सवाल यह था कि हत्यारों को उस के घर से निकलने की जानकारी किस तरह हुई?

एसएसपी उमेश कुमार श्रीवास्तव ने हत्याकांड का जल्द खुलासा करने का आदेश दिया. एसपी सिटी संजय सिंह ने इस मामले की जांच में अभिसूचना विंग के इंचार्ज पवन शर्मा को भी लगा दिया. उन्हें लगा कि हत्यारों ने अमन से तब संपर्क किया होगा, जब वह घर से निकला होगा. पुलिस ने अमन, उस की पत्नी अनुराधा और अन्य घर वालों के मोबाइल नंबर ले कर सभी नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई. एसपी सिटी के निर्देशन में हत्याकांड के खुलासे के लिए एक पुलिस टीम का गठन किया गया, जिस में क्राइम ब्रांच के अलावा थानाप्रभारी मुनेंद्र सिंह, एसआई मनीष बिष्ट, जर्रार हुसैन, हैडकांस्टेबल विकास शर्मा, कांस्टेबल नेत्रपाल, अरुण राणा और मोहित को शामिल किया गया था.

सभी नंबरों की काल डिटेल्स की जांच की गई तो पता चला कि अनुराधा की एक नंबर पर बहुत ज्यादा बातें होती थीं. घटना वाली रात भी उस की उस नंबर पर बातें हुई थीं. उस नंबर के बारे में पता किया गया तो वह नंबर अंकित का निकला. उस के मोबाइल की लोकेशन पता की गई तो अमन के घर और घटनास्थल की पाई गई.

पुलिस को मामला प्रेम संबंधों का लगा और साथ ही अमन की पत्नी अनुराधा संदेह के दायरे में आ गई. 31 दिसंबर को अनुराधा को हिरासत में ले कर पूछताछ की गई तो जो सच्चाई समने आई, जान कर पुलिस हैरान रह गई, क्योंकि अमन की असली दुश्मन कोई और नहीं, उस की अपनी पत्नी ही थी. प्रेमी से अवैधसंबंधों को बनाए रखने के लिए प्रेमी के साथ मिल कर उसी ने पति की हत्या की योजना बनाई थी. पुलिस ने अनुराधा के प्रेमी अंकित और उस के दोस्त टीनू को गिरफ्तार कर लिया. तीनों से विस्तार से पूछताछ की गई तो उन के चरित्र और गुनाह की सारी परतें खुल गईं, जो इस प्रकार थीं—

दरअसल, अनुराधा ने जैसे ही जवानी की दहलीज पर कदम रखा, तभी उस के प्रेमसंबंध कस्बा नागल के रहने वाले विजयपाल के बेटे अंकित से बन गए थे. जवानी के जोश में दोनों ने मर्यादा की दीवार भी गिराई और हमेशा साथ रहने का फैसला भी किया. लेकिन ऐसा हो नहीं सका. अनुराधा के घर वालों ने उस का विवाह अमन के साथ कर दिया. इस का न तो अनुराधा विरोध कर सकी थी और न ही अंकित. यह बात अलग थी कि अनुराधा अंकित को भूल नहीं सकी. विवाह के कुछ दिनों बाद ही अनुराधा ने अंकित से संपर्क कर लिया था. अंकित इस बात से खुश था कि प्रेमिका अभी भी उसे प्यार करती थी.

दोनों के संबंध गुपचुप चलते रहे. यही नहीं, अंकित अनुराधा से मिलने उस के घर भी आने लगा था. अमन चूंकि ट्रक चलाता था, इसलिए अनुराधा को अपने संबंधों को जारी रखने में परेशानी नहीं हो रही थी. अमन कभी शहर में होता था तो कभी शहर से बाहर. अनुराधा 2 बच्चों की मां बन चुकी थी, इस के बाद भी उस के अंकित से संबंध बने रहे. शायद अंकित उस की धड़कनों का हिस्सा था. शादी के 4 साल बाद तक अमन अंधेरे में रहा. पति की आड़ में अनुराधा अपने प्यार को गुलजार रखना चाहती थी. इस तरह के संबंध कभी छिपे नहीं रहते. अनुराधा अकसर फोन पर बिजी रहती थी, जिस से अमन को शक तो होता था, लेकिन वह कोई न कोई बहाना बना कर उसे बेवकूफ बना देती थी.

किसी के मन में अगर शक घर कर जाए तो उस का निकलना आसान नहीं होता. अमन भी इस का शिकार हो गया था. आसपास के लोगों ने भी उसे बता दिया था कि उस की गैरमौजूदगी में कोई युवक अनुराधा से मिलने आता है. पत्नी की करतूतों के बारे में पता चला तो उस ने उसे न सिर्फ जम कर फटकारा, बल्कि उस की पिटाई भी कर दी. करीब 4 महीने पहले एक दिन अमन ट्रक ले कर दूर जाने की बात कह कर घर से निकला जरूर, लेकिन दोपहर में ही वापस आ गया. उस समय अनुराधा अंकित की बांहों में समाई थी. अमन को अचानक सामने पा कर दोनों के होश उड़ गए. अंकित चला गया और अनुराधा ने गलती मान ली. इस के बावजूद उस ने अपनी आदतें नहीं बदलीं.

कुछ दिनों बाद वह फिर अंकित से मिलने लगी. अमन को इस की जानकारी हो गई. इस के बाद अंकित को ले कर घर में आए दिन विवाद होने लगा. एक दिन हद तब हो गई, जब अनुराधा बगावत पर उतर आई. उस ने साफ कर दिया कि वह अंकित से संबंध नहीं तोड़ सकती. पत्नी की बेहयाई से अमन गुस्से में आ गया और उस ने उस की जम कर पिटाई कर दी. अपने साथ होने वाली मारपीट से तंग अनुराधा ने प्रेमी अंकित से कहा, ‘‘मैं तुम्हारे प्यार की खातिर कब तक जुल्म सहती रहूंगी. अगर तुम मेरे लिए कुछ नहीं कर सकते तो मुझे हमेशा के लिए छोड़ क्यों नहीं देते?’’

‘‘ऐसा क्या हुआ?’’

‘‘आज फिर उस ने मेरे साथ मारपीट की. क्या मेरी किस्मत में इसी तरह पिटना ही लिखा है? तुम कुछ करो वरना मैं जान दे दूंगी.’’

‘‘क्या चाहती हो तुम?’’

‘‘हमेशा के लिए तुम्हारी होना चाहती हूं.’’

‘‘चाहता तो मैं भी यही हूं.’’

‘‘सिर्फ चाहने से नहीं होगा, इस के लिए कुछ करना होगा. क्योंकि अमन के रहते यह कभी नहीं हो सकेगा. तुम उसे हमेशा के लिए रास्ते से हटा दो, वरना मुझे भूल जाओ.’’ अनुराधा ने यह बात निर्णायक अंदाज में कही तो गलत संबंधों के जाल में उलझा अंकित सोचने को मजबूर हो गया. उस ने उस से थोड़ा इंतजार करने को कहा.

अंकित का एक आपराधिक प्रवृत्ति का दोस्त था टीनू, जो नजदीक के गांव पंडौली निवासी छोटेलाल का बेटा था. अंकित ने उसे सारी बात बताई और दोस्ती का वास्ता दे कर उस से साथ देने को कहा तो वह तैयार हो गया. इस के बाद दोनों अनुराधा से मिलने उस के घर आए तो तीनों ने मिल कर अमन को रास्ते से हटाने की योजना बना डाली. यह दिसंबर, 2016 के दूसरे सप्ताह की बात थी.

28 दिसंबर की शाम अनुराधा ने अंकित को फोन किया, ‘‘आज तुम आ कर अपना काम कर सकते हो.’’

‘‘ठीक है, मैं समय पर पहुंच जाऊंगा.’’ कह कर अंकित ने फोन काट दिया. इस के बाद वह अपने दोस्त टीनू को ले कर तकरीबन 9 बजे अनुराधा के घर पहुंचा. अनुराधा ने वादे की मुताबिक घर का दरवाजा खुला रखा था. अमन उस वक्त अपने कमरे में था और सोने की तैयारी कर रहा था. तीनों कमरे में दाखिल हुए तो अंकित को वहां देख कर अमन का खून खौल उठा. वह चिल्लाया, ‘‘तुम यहां क्यों आए हो?’’

‘‘अनुराधा से मिलने और तुम्हें जिंदगी से छुटकारा दिलाने.’’ अंकित ने घूरते हुए कहा.

‘‘तेरी इतनी हिम्मत?’’ अमन गुस्से में खड़ा हो गया. वह कुछ कर पाता, उस के पहले ही तीनों उस पर बाज की तरह झपट पड़े. अमन जमीन पर गिर पड़ा. अंकित उस के सीने पर सवार हो गया तो अनुराधा ने उस के हाथों को पकड़ लिया. टीनू ने पैर पकड़ लिए. अमन ने बचाव के लिए संघर्ष करते हुए चिल्लाने की कोशिश की तो अनुराधा ने उस के मुंह को तकिए से दबा दिया, जिस से उस की आवाज दब कर रह गई, साथ ही दम भी घुटने लगा.

तभी अंकित ने वहां पड़ा डंडा उठा कर उस के गले पर रख कर पूरी ताकत से दबा दिया. अमन छटपटाया, लेकिन उस पर किसी को दया नहीं आई. कुछ देर में अमन की सांसों की डोर टूट गई. अपने ही सिंदूर को मिटाने में अनुराधा को जरा भी हिचक नहीं हुई. हत्या के बाद उन्होंने शव ठिकाने लगाने की सोची. अंकित और टीनू ने अमन की ही मोटरसाइकिल ली और कंबल ओढ़ा कर लाश को मोटरसाइकिल से ले जा कर पुलिया के नीचे डाल दिया. इस के बाद मोटरसाइकिल स्टेशन पर लावारिस खड़ी कर के दोनों ट्रेन से नागल तक और फिर वहां से अपने अपने घर चले गए. इस के बाद अनुराधा ने अमन के लापता होने की बात उस के घर वालों को बताई और लाश मिलने पर खूब नौटंकी भी की, लेकिन आखिर उस की पोल खुल ही गई. आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त डंडा भी बरामद कर लिया था.

एसपी संजय सिंह ने प्रेसवार्ता कर के हत्याकांड का खुलासा किया. इस के बाद सभी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

अनुराधा ने अपने बहकते कदमों को संभाल कर घरगृहस्थी पर ध्यान दिया होता तो ऐसी नौबत कभी न आती. उस की करतूत से मासूम बच्चे भी मां बाप के प्यार से महरूम हो गए. कथा लिखे जाने तक किसी भी आरोपी की जमानत नहीं हो सकी थी.

रेल यात्रियों के लिये एक और काम की खबर, जरा ध्यान से पढ़ें

2 करोड़ से ज्यादा रेल यात्रियों को रोजाना उनके गंतव्य तक पहुंचाने वाली भारतीय रेलवे लगातार बदल रही है. यात्रियों की आराम के लिए हर रोज कुछ न कुछ बदलाव सामने आ रहे हैं. अब औनलाइन टिकट बुकिंग से जुड़े कुछ नियमों में भी बदलाव किया गया है. ऐसे में अगर आप हाल फिलहाल में ट्रेन टिकट बुक करवाने की सोच रहे हैं तो आपको बदले हुए नियमों की जानकारी होनी चाहिए.

दरअसल भारतीय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कौर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) ने ट्रेन टिकट को औनलाइन बुक कराने से जुड़े नियमों में कई बड़े बदलाव कर दिए है. गौरतलब है कि हाल ही में आईआरसीटीसी की वेबसाइट में कुछ नए फीचर जोड़े गए थे. हालांकि नई साइट का बीटा वर्जन ही पेश किया गया, इसमें यात्रियों के लिए वेट लिस्ट पीरियड का विकल्प भी उपलब्ध करवाया गया है.

इंडियन रेलवे से जुड़े आपके काम के नियम

  • अब रेल यात्री अपना टिकट यात्रा से 120 दिन पहले तक बुक करा सकते हैं. सुबह आठ से दस के दौरान एक आईडी से दो टिकट बुक की जा सकती है.
  • एक आईडी से 6 टिकट बुक किए जा सकते हैं. आधार वेरिफाइड यूजर्स हर महीने 12 टिकट की बुकिंग करा सकते हैं.

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  • शेड्यूल टाइम से तीन घंटा देर होने की सूरत में अब यात्री रिफंड के लिए क्लेम कर सकते हैं.
  • अगर आप औनलाइन माध्यम से टिकट बुक करा रहे हैं, तो आपको फौर्म भरने के लिए सिर्फ 25 सेकेंड का वक्त मिलेगा. इसके अलावा कैप्चा और पेमेंट पेज के लिए 5 सेकेंड का अतिरिक्त वक्त मिलेगा.
  • तत्काल टिकट यात्रा से एक दिन पहले टिकट बुक कराया जा सकता है इसका समय सुबह 10 (एसी कोच) बजे है. वहीं स्लीपर क्लास के लिए यह समय सुबह 11 बजे है. एक आईडी से सुबह 10 से 12 के बीच सिर्फ दो टिकट ही बुक किए जा सकते हैं.
  • तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान एक बार में अधिकतम 6 बर्थ ही बुक की जा सकती है, जो कि दो स्टेशनों के बीच किसी विशेष यात्रा के लिए ही मान्य होगा.
  • रेलवे की क्विक बुक सर्विस सुबह 8 बजे से 12 बजे तक के लिए उपलब्ध नहीं होगी. एक समय में एक व्यक्ति सिर्फ एक ही लौग-इन कर पाएगा.
  • ट्रेन टिकट बुक कराने वाले एजेंट्स को सुबह 8 बजे, 8:30 बजे, 10 बजे 10:30 बजे, 11 बजे और 11:30 बजे ही टिकट बुक कराने की अनुमति है.
  • अधिकृत ट्रैवल एजेंट विंडो ओपन होते ही शुरुआती 30 मिनट में औनलाइन रिजर्वेशन नहीं करा सकते हैं.
  • नेट बैंकिंग के जरिए टिकट का भुगतान करते समय सभी बैंकों के खाताधारकों को खुद को वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) के जरिए खुग को वेरिफाई करवाना होगा.

राजकुमार हिरानी ने सुनाए संजय दत्त के कुछ अनसुने और दिलचस्प किस्से

संजय दत्त गर्लफ्रेंड्स को इमोशनली ब्लैकमेल करते थे. यह हम नहीं कह रहे बल्कि इस बात का खुलासा उनकी लाइफ पर फिल्म ‘संजू’ बनाने वाले डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने एक न्यूज वेबसाइट से बातचीत में किया है. हिरानी ने कहा की जब भी संजू को किसी लड़की से प्यार होता था तो वे उसे किसी भी अनजान कब्र के पास लड़की को ले जाते थे और उससे कहते थे कि वो उस लड़की को अपनी मां से मिलवाने के लिये लाए हैं. इस तरह लड़की सजय दत्त से इमोशनली अटैचमेंट हो जाती थी. लेकिन सच्चाई यह है कि उनकी मां की कब्र कहीं और थी.

गौरतलब है कि ‘संजू’ में यह बताया गया है कि संजय दत्त की 308 गर्लफ्रेंड्स रही हैं और इन्हें मिलाकर करीब 350 महिलाओं के साथ उनके शारीरिक संबंध बने हैं. हिरानी ने संजय दत्त से जुड़े कुछ और किस्से भी सुनाए.

इंटरव्यू के दौरान हिरानी ने संजू की लाइफ के कुछ और किस्से भी सुनाए. मसलन, उन्होंने बताया कि एक बार जब उनका ब्रेकअप हुआ तो वे अपनी कार से गर्लफ्रेंड के घर पहुंचे. उन्होंने घर के बाहर एक अन्य कार खड़ी देखी. इसके बाद संजू ने गुस्से में अपनी कार से उसे टक्कर मार दी. लेकिन बाद में पता चला कि वह लड़की के ब्वौयफ्रेंड की कार नहीं थी. इस घटना में दोनों कारों में टूट-फूट हुई थी.

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हिरानी ने एक अन्य किस्सा उस वक्त का सुनाया, जब संजू ड्रग्स एडिक्ट थे. एक बार वे ड्रग्स के नशे में ही डैड (सुनील दत्त) से मिलने पहुंच गए. तब उन्हें लगा कि डैड का सिर मोमबत्ती से जल रहा है. संजू उसे बुझाने की कोशिश करने लगे. उस वक्त सुनील दत्त भी हैरान थे कि संजू आखिर कर क्या रहे हैं. हिरानी ने यह भी बताया कि संजू अपने डैडी को सर कहकर बुलाया करते थे.

29 जून को रिलीज हो रही संजू

‘संजू’ 29 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है. फिल्म में संजय दत्त के रोल में रणबीर कपूर, उनके पिता सुनील दत्त के रोल में परेश रावल और मां नरगिस के किरदार में मनीषा कोइराला नजर आएंगी. हिरानी की मानें तो फिल्म में उन्होंने संजय दत्त की लाइफ के दो अहम दौर (ड्रग्स और बम ब्लास्ट) पर मुख्य रूप से फोकस किया है. इस फिल्म में सोनम कपूर तथा अनुष्का शर्मा भी मुख्य किरदार में हैं. सोनम कपूर संजय दत्त की पत्नी तथा अनुष्का शर्मा इस फिल्म में एक पत्रकार की भूमिका में नजर आनेवाली हैं. इस फिल्म से संजय दत्त, रणबीर कपूर तथा दर्शकों को काफी उम्मीदे हैं.

सीओए और बीसीसीआई के विवाद में खिलाड़ियों का बढ़ा वेतन भी फंसा

सुप्रीम कोर्ट की बनाई प्रशासकों की समिति (सीओए) और बीसीसीआई के बीच तनातनी में अब भारतीय क्रिकेटरों के वेतन के भुगतान का मामला भी उलझ गया है. भारत के शीर्ष क्रिकेटरों को अपना संशोधित वेतन अब तक नहीं मिला है, जबकि उनके केंद्रीय अनुबंधों पर पांच मार्च को ही हस्ताक्षर करा लिए गए थे और शुक्रवार को सीओए के विरोध में होने वाली बीसीसीआई की विशेष आम बैठक में यह मुद्दा चर्चा का अहम विषय होगा. खिलाड़ी 23 जून को ब्रिटेन (आयरलैंड और इंग्लैंड) के लंबे दौरे के लिए रवाना होंगे जो करीब तीन महीने लंबा होगा. अधिकारी कल यहां बैठक के लिए इकट्ठा होंगे जिसमें 10 मुद्दों के एजेंडे पर चर्चा होगी.

बीसीसीआई के कार्यकारी सचिव अमिताभ चौधरी ने गुरुवार को कहा, ‘‘हां , अनुबंध मेरे पास हैं. अगर बैठक में कल संशोधित वेतन संरचना को मंजूरी मिल जाती है तो मैं इस पर हस्ताक्षर कर दूंगा. अगर वे इसे मंजूरी नहीं देते हैं तो मेरे हाथ बंधे हैं. किसी भी नीतिगत फैसले को आम सभा की मंजूरी की जरूरत होती है और मैं नियम नहीं तोड़ सकता.’’

उच्चतम न्यायालय की ओर से नियुक्त सीओए ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह इस बैठक को मंजूरी नहीं देते. उसने वेतन पाने वाले अधिकारियों को इसमें हिस्सा लेने पर भी रोक लगा दी थी. लेकिन पैनल प्रमुख विनोद राय खिलाड़ियों के भुगतान में हो रही देरी से चिंतित हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे व्यक्तिगत रूप से अच्छा नहीं लग रहा कि खिलाड़ियों को समय पर भुगतान नहीं हो रहा. मुझे जरा भी नहीं पता कि आम सभा का क्या फैसला होगा. लेकिन लंबे समय से वित्तीय समिति के समक्ष प्रस्ताव रखा हुआ था. खिलाड़ियों के हस्ताक्षर के बाद इस अनुबंध की प्रति सचिव को भेज दी गयी थी.’’

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मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल जौहरी इस बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि सीओए ने इसको मंजूरी नहीं दी है. इसी तरह क्रिकेट परिचालन महाप्रबंधक सबा करीम भी इसमें शिरकत नहीं करेंगे. बैठक में कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होगी. बैठक को रोकना हालांकि सीओए के अधिकार क्षेत्र में शामिल नहीं है तो उसने अपने कर्मचारियों को कहा है कि वे सदस्यों के हवाई यात्रा और टीए – डीए का भुगतान नहीं करें. संशोधित अनुबंध प्रणाली के अंतर्गत ए प्लस वर्ग के खिलाड़ियों को सात करोड़ रूपए, ए ग्रुप के खिलाड़ियों को पांच करोड़ रूपये तथा बी और सी वर्ग के खिलाड़ियों को क्रमश: तीन करोड़ और एक करोड़ रूपये दिए जाएं.

केवल अधिकारी के हस्ताक्षर होना है बाकी

पता चला है कि खिलाड़ियों ने नए अनुबंध पर हस्ताक्षर सीओए से गहन चर्चा के बाद ही किए. इसी के हिसाब से सीओए ने सात मार्च को नयी वेतन संरचना के हिसाब से 27 खिलाड़ियों के नाम जारी किए. हालांकि बीसीसीआई के मौजूदा संविधान के अनुसार सचिव अब भी सभी खिलाड़ियों के अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत है. जिससे अनुबंध के हिसाब से भुगतान करने के लिए चौधरी के हस्ताक्षर की जरूरत है.

इसके अलावा बीसीसीआई बैठक में आईसीसी से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा करेगी जिसमें विवादास्पद सदस्य भागीदारी समझौता (एमपीए) शामिल है जिसके अंतर्गत भारत में होने वाली 2021 चैम्पियंस ट्राफी को बदलकर आईसीसी विश्व टी 20 कर दिया गया है.

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के द्विपक्षीय सीरीज के समझौते का सम्मान नहीं करने के लिए सात करोड़ डालर का मुआवजा मांगने के मुद्दे पर भी चर्चा होगी. बीसीसीआई किसी भी हालत में पीसीबी को मुआवजा नहीं देगा. बीसीसीआई के कानूनी प्रतिनिधित्व , विभिन्न नियुक्तियों, राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के नीतिगत फैसलों पर भी चर्चा करने की उम्मीद है.

ये सीक्रेट कोड्स आपके स्मार्टफोन के अनुभव को बनाएंगे और खास

वर्तमान समय में स्मार्टफोन लोगों की दिनचर्या तथा उनके जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है. क्योंकि स्मार्टफोन्स ने रोजमर्रा के कई कार्यों को काफी आसान बना दिया है. फोन पर कौल से लेकर पेमेंट करने तक कोई भी काम बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है. इसी को मद्देनजर रखते हुए हम आपको फोन्स के कुछ सीक्रेट कोड्स बताने जा रहे हैं जो आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं. पर आपको एक बात जरूर बताना चाहेंगे की जरूरी नहीं की ये सभी एंड्रायड डिवाइसों में काम करें पर ज्यादातर में यह काम करता है.

कोड: *#06#

इस कोड के बारे में तो आप सभी जानते होंगे. इस कोड को डायल करने से डिस्प्ले पर फोन का IMEI नंबर दिखाई देता है यह सबसे आसान और सरल कोड है जो लगभग हर किसी को मालूम होता है.

कोड: *#*#4636#*#*

इस कोड को फोन में डायल करने से बैटरी से संबंधित सभी जानकारी मिल जाएगी. इसमें बैटरी की वर्तमान वोल्टेज, बैटरी चार्ज लेवल आदि का पता लगाया जा सकता है. इसके अलावा फोन से संबंधित जानकारी भी इस कोड से मालूम की जा सकती है.

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कोड: *#21#

यूजर्स के लिए उनकी प्राइवेसी बहुत महत्वपूर्ण होती है. वो किसी से भी अपने फोन में मौजूद डाटा को शेयर नहीं करना चाहते हैं. ऐसे में यह कोड आपकी मदद करेगा. इस कोड की मदद से आप पता लगा पाएंगे कि कहीं आपकी वौयस कौल, एसएमएस या अन्य कोई भी डाटा किसी दूसरे जगह फौरवर्ड तो नहीं किया जा रहा है.

कोड: *#*#7780#*#*

इसके जरिए फैक्ट्री रिस्टोर, ऐप्स और डाटा को क्लियर करना, गूगल अकाउंट सेटिंग को रिमूव किए जाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

कोड: *409*<10 डिजिट का जियो नंबर>

यह कोड केवल जियो यूजर्स के लिए है. यह कोड आपकी कौल्स को किसी दूसरे नंबर फौरवर्ड करने में मदद करेगा. इसके लिए जियो यूजर को अपने नंबर से *409*<10 डिजिट का जियो नंबर> डायल करना है. इसके बाद आपको IVR पर जो दिशानिर्देश दिए जाएंगे उन्हें फौलो करना होगा. ऐसा करने से आपकी वौयस कौल्स दूसरे नंबर पर ट्रांसफर कर दी जाएंगी. अगर आप इसे डिएक्टिवेट करना चाहते हैं तो अपने जियो नंबर से *402 डायल करना होगा.

मोबाइल डेटा कम खर्च करने के ये हैं आसान तरीके

बहुत बार ऐसा होता है कि आपका मोबाइल डाटा बहुत ज्यादा ही खर्च होता है. इससे समय से पहले ही आपका डेटा प्लान खत्म हो जाता है. लेकिन कुछ ऐसे उपाय भी हैं, जिससे आपका मोबइल डेटा ज्यादा खर्च नहीं होगा और समय से पहले खत्म भी नहीं होगा.

1. डेटा कंप्रेशन का उपयोग

मोबाइल में वेब ब्राउजिंग में सबसे ज्यादा डेटा इस्तेमाल होता है. कई वेबसाइट पर आने वाले विज्ञापनों की वजह से डेटा सबसे ज्यादा खर्च होता है. इस स्थिति में आप डेटा कंप्रेशन का इस्तेमाल करके इंटरनेट खर्च होने से बचा सकते हैं. इस ऐप के लिए सबसे पहले क्रोम में जाएं. उसके बाद साइड में दिखने वाले 3 डॉट्स पर टैप करें. इसके बाद सेटिंग पर जाएं. यहां दिखने वाले डाटा सेवर ऑप्शन को सिलक्ट कर दें.

2. बैकग्राउंट डेटा को करें बंद

स्मार्टफोन में बहुत से ऐप आपकी मर्जी के खिलाफ आपका डेटा का इस्तेमाल करते हैं. इसके लिए आप अपने इंटरनेट का इस्तेमाल केवल उन ऐप्स के लिए कर सकते हैं जिनका आप इस्तेमाल करते हैं जिन ऐप का आप इस्तेमाल नहीं करते उनका आप बैकग्राउंड डेटा बंद कर सकते हैं. इसके लिए सेटिंग में जाकर डेटा यूस सिलेक्ट करें और जिस ऐप का डेटा रोकना या बंद करना है उसके restrict app background data लेबल को ऑफ कर दें.

3. मोबाइल ऐप्स अपडेटिंग वाई-फाई से  

हमेशा अपने मोबाइल के ऐप्स को अपडेट करने के लिए वाई-फाई का इस्तेमाल करें. इससे आपका मोबइल डेटा खर्च नहीं होगा. इसके लिए आप गूगल प्ले स्टोर में जाकर ऑटो अपडेट के फीचर को ऑफ करना होगा. और फिर update apps wi-fi only के ऑप्शन को सिलेक्ट करें.

4. ऑनलाइन वीडियो और म्यूजिक

मोबाइल के डेटा से ऑनलाइन वीडियो और म्यूजिक स्ट्रीम करने से बचें. आप अपने फोन में भी वीडियो स्टोर कर सकते हैं. इससे डेटा की काफी  की बचत होती है.

5. डेटा मैनेजमेंट ऐप के जरिे बचाएं इंटरनेट

डेटा मैनेजमेंट ऐप्स के जरिए भी आप डेटा बचा सकते हैं. ये मोबाइल ऐप्स डेटा को कंप्रेस करते हैं. ये ऐसे ऐप्स हैं जो इंटरनेट डेटा को यूज करने से रोक देते हैं.

गुड टच और बैड टच ही नहीं, बच्चों को ये बातें बताना भी जरूरी है

नेल्सन मंडेला ने एक बार कहा था कि हिंसा और डर की चपेट में बच्चे सब से ज्यादा आते हैं. ऐसे में हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें हिंसा और डर से मुक्त जीवन प्रदान करें. मगर आज बच्चों को सुरक्षित माहौल देना बहुत मुश्किल काम हो गया है. रोजरोज होने वाली बालशोषण, रेप, किडनैप की घटनाओं ने मातापिता को बहुत चिंतित कर दिया है. टीवी पर ऐसी घटनाओं को देखते रहने के बाद 35 वर्षीय स्नेहा ने महसूस किया कि अपनी 10 वर्षीय बेटी सिया को गुड टच, बैड टच बता देना ही पर्याप्त नहीं है. उन्होंने अपनी बेटी को एक पासवर्ड दिया और कहा कि यदि कोईर् हमारा नाम ले कर उसे कुछ खाने के लिए दे और कहीं चलने के लिए कहे तो वह उस से पासवर्ड पूछे. उस ने अपने पति और बेटी के साथ कई कोडवर्ड बनाए ताकि उन की बेटी सुरक्षित रहे.

स्नेहा की तरह कई मातापिता ऐसा कर रहे हैं. वे अपने बच्चों को अलर्ट रह कर किसी भी मुश्किल से निबटने के लिए ट्रेनिंग दे रहे हैं. इधरउधर घूमते असामाजिक तत्त्वों से निबटने के लिए अब यह आवश्यक भी हो गया है.

ये तरीके अपनाएं

बच्चे मासूम होते हैं. वे किसी पर भी आसानी से विश्वास कर लेते हैं. बेटियों की मां नमिता बताती हैं, ‘‘यदि कोई अजनबी बच्चों को चौकलेट औफर करता है, तो अकसर वे ले लेते हैं. मैं ने बेटियों को समझा दिया है कि उन्हें जो कुछ भी चाहिए मैं उन्हें ले कर दूंगी. उन्हें किसी भी अजनबी से कुछ नहीं लेना है. मैं उन्हें ज्यादा नैगेटिव चीजें नहीं बताती हूं ताकि कहीं उन के मन में डर न बैठ जाए.’’ टीचर पारुल देशमुख ने आवश्यकता पड़ने पर अपने बेटे को ताकत लगाना सिखाया है. उन का कहना है, ‘‘मैं ने अपने बेटे से कहा है कि यदि कोई उसे जबरदस्ती पकड़ने की कोशिश करे तो वह जोर से चिल्लाए. मैं ने घर पर इस की प्रैक्टिस भी करवाई है. उसे बताया है कि वह उस व्यक्ति का हाथ जोर से काट ले और जैसे ही उस व्यक्ति का ध्यान बंटे, वहां से भाग ले.’’

7 वर्षीय बेटे के पिता बिजनैसमैन दीपक शर्मा कहते हैं, ‘‘मैं ने एक वीडियो देखा था जिस में बच्चों को उन में डैंजर पौइंट्स दिखा कर समझाया जाता है कि यदि कोई इन जगहों को छूने की कोशिश करे तो बच्चे जोर से चिल्लाएं और भाग कर भीड़ वाली जगह चले जाएं. इस घटना के बारे में किसी विश्वसनीय बड़े को बताएं. मैं ने यह वीडियो अपने बेटे को भी दिखाया है और हम उस के सामने यह निर्देश समयसमय पर दोहराते रहते हैं.’’ चाहे शिक्षाप्रणाली में यह शामिल हो या नहीं, मातापिता सैल्फडिफैंस का महत्त्व समझने लगे हैं.

2 बच्चों की मां राधा श्रीवास्तव का कहना है, ‘‘आर्ट, म्यूजिक और डांस क्लास की तरह स्कूल में सैल्फडिफैंस की क्लास भी जरूर होनी चाहिए और 5 साल की उम्र से यह ट्रेनिंग मिलनी चाहिए.’’

कराटे या भरतनाट्यम 9 वर्षीय इशिता के मातापिता ने इन में से इशिता को कराटे सिखाना ही ज्यादा जरूरी समझा. उस की मम्मी ने बताया, ‘‘हम इंतजार कर रहे थे कि इशिता 8 साल की हो जाए तो उसे भरतनाट्यम सिखाएंगे पर जब हम उसे क्लास ले कर गए तो पता चला कि वे कराटे भी सिखाते हैं. हम चाहते थे कि बेटी दोनों चीजें सीख ले पर समय कम था तो हम ने आज के वक्त की जरूरत को ध्यान में रखते हुए उसे सैल्फडिफैंस सिखाया. मैं ने देखा है कि कराटे सीखने वाले बच्चे ज्यादा अलर्ट रहते हैं. फिटनैस के प्रति उन का दृष्टिकोण काफी सकारात्मक रहता है. बाद में कभी समय मिलने पर इशिता डांस भी सीख लेगी पर अभी कराटे सीखना ज्यादा जरूरी है.’’

समयसमय पर बात करें जब भी मातापिता को समय मिले, वे बच्चे से जरूर बात करें, उन के स्कूल के बारे में पूछें. 6 साल की गरिमा की मम्मी कहती हैं, ‘‘वे दिन गए जब हम बच्चों से सिर्फ उन की पढ़ाई और होमवर्क के बारे में ही बात करते थे. उन से टीचर्स, चपरासी, बस ड्राइवर के बारे में बात करते रहना चाहिए. वे किसी से असहज तो नहीं हैं, यह पता करते रहना चाहिए, उन्हें किसी से न डरने की सीख देते रहना चाहिए, उन्हें बोल्ड बनाते रहना चाहिए.’’

बच्चों के साथ बातें करते हुए मातापिता को घर में एक स्वस्थ माहौल बनाए रखना चाहिए. उन्हें यह विश्वास होना चाहिए कि मातापिता हर स्थिति में उन की बात सुनेंगे. इस से उन के मन में कोई डर नहीं रहता है. अपने बच्चों की अच्छी हैल्थ और सुरक्षा हर मातापिता की प्राथमिकता होनी चाहिए. मातापिता हर समय बच्चों के साथ नहीं रह सकते पर उन्हें अतिआवश्यक सुरक्षासंबंधी निर्देश दे कर सजग जरूर बना सकते हैं.

मातापिता बच्चों के साथ जितना संभव हो सके बात करते रहें. उन्हें गुड टच और बैड टच के बारे में जरूर बताएं. बच्चों को सैल्फडिफैंस सिखाएं, दिन कैसा रहा, इस से संबंधित प्रश्न पूछते रहें. मातापिता पर विश्वास रख कर वे उन से सब कुछ शेयर कर सकते हैं, यह एहसास बच्चों को करवाते रहें.

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