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फरेब के जाल में फंसी नीतू : नीतू के साथ उस के ससुर ने क्या किया

लाश की हालत देख कर पुलिस वाले तो दूर की बात कोई भी आम आदमी बता देता कि हत्यारा या हत्यारे मृतका से किस हद तक नफरत करते होंगे. साफ लग रहा था कि हत्या प्रतिशोध के चलते पूरी नृशंसता से की गई थी और युवती के साथ बेरहमी से बलात्कार भी किया गया था.

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को जोड़ते जिला शहडोल के ब्यौहारी थाने के इंचार्ज इंसपेक्टर सुदीप सोनी को भांपते देर नहीं लगी कि मामला उम्मीद से ज्यादा गंभीर है. 25 मार्च की सुबहसुबह ही उन्हें नजदीक के गांव खामडांड में एक युवती की लाश पड़ी होने की खबर मिली थी. वक्त न गंवा कर सुदीप सोनी ने तुरंत इस वारदात की खबर शहडोल से एसपी सुशांत सक्सेना को दी और पुलिस टीम ले कर खामडांड घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए.

गांव वाले जैसे उन के आने का ही इंतजार कर रहे थे. पुलिस टीम के आते ही मारे उत्तेजना और रोमांच के उन्होंने सुदीप को बताया कि लाश गांव से थोड़ी दूर आम के बगीचे में पड़ी है. पुलिस टीम जब आम के बाग में पहुंची तो लाश देखते ही दहल उठी. ऐसा बहुत कम होता है कि लाश देख कर पुलिस वाले ही अचकचा जाएं.

लाश लगभग 24 वर्षीय युवती की थी, जिस की गरदन कटी पड़ी थी. अर्धनग्न सी युवती के शरीर पर केवल ब्लाउज और पेटीकोट थे. ब्लाउज इतना ज्यादा फटा हुआ था कि उस के होने न होने के कोई माने नहीं थे. दोनों स्तनों पर नाखूनों की खरोंच के निशान साफसाफ दिखाई दे रहे थे.

पेटीकोट देख कर भी लगता था कि हत्यारे चूंकि उसे साथ नहीं ले जा सकते थे इसलिए मृतका की कमर पर फेंक गए थे. युवती के गुप्तांग पर जलाए जाने के निशान भी साफसाफ नजर आ रहे थे. गाल पर दांतों से काटे जाने के निशान देख कर शक की कोई गुंजाइश नहीं रह गई थी कि मामला बलात्कार और हत्या का था.

खामडांड छोटा सा गांव है जिस में अधिकतर पिछडे़ और आदिवासी रहते हैं इसलिए पुलिस को लाश की शिनाख्त में दिक्कत पेश नहीं आई. लाश के मुआयने के बाद जैसे ही सुदीप सोनी गांव वालों से मुखातिब हुए तो पता चला कि मृतका का नाम नीतू राठौर है और वह इसी गांव के किसान बाबूलाल राठौर की बहू और रामजी राठौर की पत्नी है.

सुदीप ने तुरंत उपलब्ध तमाम जानकारियां सुशांत सक्सेना को दीं और उन के निर्देशानुसार जांच की जिम्मेदारी एसआई अभयराज सिंह को सौंप दी. चूंकि लाश की शिनाख्त हो चुकी थी इसलिए पुलिस के पास करने को एक ही काम रह गया था कि जल्द से जल्द कातिल का पता लगाए.

कागजी काररवाई पूरी कर  के नीतू की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी गई. नीतू की हत्या की खबर उस के मायके वालों को भी दे दी गई थी जो मऊ गांव में रहते थे.

मौके पर अभयराज सिंह को कोई सुराग नहीं लग रहा था. अलबत्ता यह बात जरूर उन की समझ में आ गई थी कि कातिल उन की पहुंच से ज्यादा दूर नहीं है. छोटे से गांव में मामूली पूछताछ में यह उजागर हुआ कि नीतू के घर में उस के ससुर बाबूलाल और पति रामजी के अलावा और कोई नहीं है.

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नीतू और रामजी की शादी अब से कोई 4 साल पहले हुई थी. बाबूलाल का अधिकांश वक्त खेत में ही बीतता था और इन दिनों तो फसल पकने को थी इसलिए दूसरे किसानों की तरह वह खाना खाने ही घर आता था. फसल की रखवाली के लिए वह रात में सोता भी खेत पर ही था.

इसी पूछताछ में जो अहम जानकारियां पुलिस के हाथ लगीं उन में से पहली यह थी कि रामजी एक कम बुद्धि वाला आदमी है और आए दिन नीतू से उस की खटपट होती रहती थी. दूसरी जानकारी भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं थी कि 2 साल पहले 2016 में इन पतिपत्नी के बीच जम कर झगड़ा हुआ था. झगड़े के बाद नीतू मायके चली गई थी और उस ने ससुर व पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था, पर बाद में सुलह हो जाने पर नीतू वापस ससुराल आ गई थी.

ब्यौहारी थाने में पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया और नीतू का शव उस के ससुराल वालों को सौंप दिया. दूसरे दिन ही उस का अंतिम संस्कार भी हो गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि उस की हत्या धारदार हथियार से गला काट कर की गई थी.

ये जानकारियां अहम तो थीं लेकिन हत्यारों तक पहुंचने में कोई मदद नहीं कर पा रही थीं. गांव वाले भी कोई ऐसी जानकारी नहीं दे पा रहे थे जिस से कातिल तक पहुंचने में कोई मदद मिलती.

नीतू के अंतिम संस्कार के बाद पुलिस ने उस के मायके वालों से पूछताछ की तो उन्होंने सीधेसीधे हत्या का आरोप बाबूलाल और रामजीलाल पर लगाया. उन का कहना था कि शादी के बाद से ही बापबेटे दोनों नीतू को दहेज के लिए मारतेपीटते रहते थे.

लेकिन नीतू की हत्या जिस तरह हुई थी उस से साफ उजागर हो रहा था कि हत्या बलात्कार के बाद इसलिए की गई थी कि हत्यारा अपनी पहचान छिपा सके. वैसे भी आमतौर पर दहेज के लिए हत्याएं इस तरह नहीं की जातीं.

रामजी राठौर के बयानों से पुलिस वालों को कुछ खास हासिल नहीं हुआ, क्योंकि बातचीत करने पर ही समझ आ गया था कि यह मंदबुद्धि आदमी कुछ भी बोल रहा है. पत्नी की मौत का उस पर कोई खास असर नहीं हुआ था. अभयराज सिंह को वह कहीं से झूठ बोलता नहीं लगा. मंदबुद्धि लोगों को गुस्सा आ जाए तो वे हिंसक भी हो उठते हैं पर इतने योजनाबद्ध तरीके से हत्या करने की बुद्धि उन में होती तो वे मंदबुद्धि क्यों कहलाते.

बाबूलाल से पूछताछ की गई तो उस ने अपने खेत पर व्यस्त होने की बात कही. लेकिन हत्या का शक बेटे रामजी पर ही जताया. इशारों में उस ने पुलिस को बताया कि रामजी चूंकि पागल है इसलिए गुस्से में आ कर पत्नी की हत्या कर सकता है.

बाबूलाल ने अपनी बात में दम लाते हुए यह भी कहा कि मुमकिन है कि नीतू रामजी के साथ सोने से इनकार कर रही हो, इसलिए रामजी को उसे मारने की हद तक गुस्सा आ गया हो और इसी पागलपन में उस ने नीतू की हत्या कर डाली हो.

यह एक अजीब सी बात इस लिहाज से थी कि हत्या के मामले में किसी भी पिता की कोशिश बेटे को बचाने की रहती है. लेकिन बाबूलाल इस का अपवाद था. हालांकि संभावना इस बात की भी थी कि वह वाकई सच बोल रहा हो क्योंकि रामजी घोषित तौर पर मंदबुद्धि वाला था और गुस्सा आ जाने पर ऐसा कर भी सकता था. लेकिन इस थ्यौरी में आड़े यही बात आ रही थी कि कोई मंदबुद्धि इतनी प्लानिंग से हत्या नहीं कर सकता.

अभयराज सिंह ने नीतू के बारे में जानकारियां इकट्ठी करने के लिए एक लेडी कांस्टेबल को काम पर लगा दिया था. अलबत्ता अभी तक की जांच में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई थी जिस से यह लगे कि नीतू के चालचलन में कोई खोट थी. ये सब बातें अभयराज ने जब आला अफसरों से साझा कीं तो उन्होंने बाबूलाल को टारगेट करने की सलाह दी.

महिला कांस्टेबल की दी जानकारियों ने मामला सुलझाने में बड़ी मदद की. पता यह चला कि नीतू दूसरी महिलाओं के साथ मजदूरी करने ब्यौहारी जाती थी और शाम तक लौट आती थी. 25 मार्च को यानी हादसे के दिन भी वह मजदूरी करने गई थी. लेकिन लौटते वक्त वह गांव के बाहर से ही अपने ससुर बाबूलाल से मिलने खेत की तरफ चली गई थी.

बाबूलाल शक के दायरे में तो पहले से ही था पर इस खुलासे से उस पर शक और गहरा गया था. चूंकि उसे धर दबोचने के लिए कोई पुख्ता सबूत या गवाह नहीं था. इसलिए पुलिस ने बारबार पूछताछ करने का अपना परंपरागत तरीका आजमाया.

इस पूछताछ में उस के साथ कोई जोर जबरदस्ती नहीं की गई और न ही कोई यातना दी गई. पुलिस ने तरहतरह से उसे धर्मग्रंथों का हवाला दिया कि जो जैसे कर्म करता है उसे वैसा ही फल भुगतना पड़ता है. फिर चाहे वह नीचे धरती पर मिले या ऊपर कहीं मिले.

धर्मगुरुओं  की तरह प्रवचन दे कर जुर्म कबूलवाने का शायद यह पहला मामला था. कर्म फल और पाप पुण्य की पौराणिक कहानियों का बाबूलाल पर वाजिब असर पड़ा और उस ने अपना गुनाह कबूल कर लिया.

यह डर था या ग्लानि थी यह तो शायद बाबूलाल भी न बता पाए, लेकिन नीतू की हत्या की जो वजह उस ने बताई वह वाकई अनूठी थी. कहानी सुनने से पहले पुलिस ने उस की निशानदेही पर खेत में छिपाई गई चप्पलें व साड़ी बरामद करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई.

बहू नीतू की हत्या की वजह बताते हुए बाबूलाल का चेहरा सपाट था. बाबूलाल तब किशोरावस्था में था जब उस के पिता संतोषी राठौर की मौत हो गई थी. शादी के बाद पत्नी भी ज्यादा साथ नहीं निभा पाई, लेकिन इन तकलीफों से बड़ी उस की तकलीफ मंदबुद्धि बेटा रामजी था.

जवान होते रामजी को देख बाबूलाल का कलेजा मुंह को आता था कि उस के बाद यह लड़का किस के भरोसे रहेगा. कम अक्ल रामजी को पालतेपोसते बाबूलाल ने कई जगह उस की शादी की बात चलाई लेकिन जिस ने भी रामजी की मंदबुद्धि के चर्चे सुने उस ने बाबूलाल के सामने हाथ जोड़ लिए.

खेतीकिसानी बहुत ज्यादा भी नहीं थी, इसलिए बाबूलाल ज्यादा पैसों के लिए खेतों में हाड़तोड़ मेहनत करता था, जिस के चलते 54 साल की उम्र भी उस पर हावी नहीं हो पाई थी.

फिर एक दिन पागल कहे जाने वाले रामजी की तब मानो लाटरी लग गई, जब बात चलाने पर नीतू के घर वाले रामजी से उस की शादी करने तैयार हो गए. नीतू गठीले बदन की चंचल लड़की थी, जिसे पत्नी बनाने का सपना आसपास के गांवों के कई युवक देख रहे थे.

गोरीचिट्टी नीतू की खूबसूरती के चर्चे हर कहीं थे पर लोग यह जानकर हैरान रह गए कि उस की शादी रामजी से हो रही है, जिसे गांव की भाषा में पागल, सभ्य लोगों की भाषा में मंदबुद्धि और आजकल सरकारी जुबां में मानसिक रूप से दिव्यांग कहा जाता है.

जब नीतू के घर वालों ने रिश्ते के बाबत हां भर दी तो बाबूलाल की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. घर में बहू के पांव पड़ेंगे, अरसे बाद छमछम पायल बजेगी और जल्द ही पोता उस की गोद में होगा जैसी बातें सोच कर वह अपनी गुजरी और मौजूदा जिंदगी के दुख भूलता जा रहा था.

उधर रामजी पर इस का कोई असर नहीं पड़ा था, वह तो अपनी दुनिया में मस्त था, जैसे कुछ हो ही नहीं रहा हो. शादी के नए कपड़े, धूमधड़ाका, बैंडबाजा बारात वगैरह उस के लिए बच्चों के खेल जैसी बातें थीं. पर बाबूलाल का मन कह रह था कि बहू के आते ही वह सुधर भी सकता है.

खुशी से फूले नहीं समा रहे बाबूलाल को आने वाली परेशानियों और दुश्वारियों का अहसास तक नहीं था. नीतू बहू बन कर आई तो वाकई घर में रौनक आ गई. पर यह रौनक चार दिन की चांदनी सरीखी साबित हुई.

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सुहागरात के वक्त नीतू शर्माती लजाती कमरे में बैठी पति का इंतजार कर रही थी कि वह आएगा, रोमांटिक और प्यार भरी बातें करेगा, फिर मन की बातों के बाद धीरे से तन की बात करेगा और फिर… फिल्मों और टीवी सीरियलों में देखे सुहागरात के दृश्य नीतू की जवानी और सपनों को पर लगा रहे थे जिन्हें सोच कर ही वह रोमांचित हुई जा रही थी.

रामजी कमरे में आया और बगैर कुछ कहे सुने बिस्तर पर गया तो नीतू एकदम से कुछ समझ नहीं पाई. उस रात रामजी ने कुछ नहीं किया तो यह सोच कर नीतू ने खुद के मन को तसल्ली दी कि होगी कोई वजह और आजकल के मर्द भी शर्माने में औरतों से कम नहीं हैं.

यह सिलसिला लगातार चला तो शर्म छोड़ते खुद नीतू ने पहल की लेकिन यह जानसमझ कर वह सन्न रह गई कि रामजी मानसिक ही नहीं बल्कि शारीरिक तौर पर भी अक्षम है. एक झटके में आसमान से जमीन पर गिरी नीतू की हालत काटो तो खून नहीं जैसी हो गई थी.

घर के कामकाज करती नीतू को लगने लगा था कि उस की हैसियत एक नौकरानी से ज्यादा कुछ नहीं है और बाबूलाल व रामजी ने उसे धोखा दिया है. यह सोच कर वह चोट खाई नागिन की तरह फुंफकारने लगी. इस पर रामजी ने उसे मारना पीटना शुरू कर दिया तो वह मायके चली गई और दहेज की रिपोर्ट भी लिखा दी. बेटेबहू के बीच अनबन की असल वजह जब बाबूलाल को पता चली तो वह अवाक रह गया.

अब उसे समझ आया कि क्यों बातबात पर नीतू गुस्सा होती रहती है. इधर दहेज की रिपोर्ट तलवार बन कर उस के सिर पर लटक रही थी. रामजी को तो कोई फर्क नहीं पड़ता था लेकिन पुलिस काररवाई से उस का नप जाना तय था.

एक समझदार ससुर की तरह बाबूलाल मऊ नीतू के मायके पहुंचा और दुनिया की ऊंच नीच और इज्जत दुहाई देते उसे मना कर वापस ले आया. यह पिछले साल नवरात्रि की बात है. नीतू दोबारा ससुराल आ गई. पत्नी क्यों मायके चली गई थी और फिर वापस क्यों आ गई और सेक्स से अंजान रामजी को इन बातों से कोई सरोकार नहीं था.

हालात देख बाबूलाल के मन में पाप पनपा और उस ने नीतू से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कर दीं. किसी नएनवेले आशिक की तरह बाबूलाल नीतू की हर पसंदनापसंद का खयाल रखने लगा तो नीतू भी उस की तरफ झुकने लगी.

आखिर उसे भी पुरुष सुख की जरूरत थी, जिसे वह कहीं बाहर से हासिल करती तो बदनामी भी होती और गलत भी वही ठहराई जाती.

देहसुख का अघोषित अनुबंध तो बाबूलाल और नीतू के बीच हो गया लेकिन पहल कौन और कैसे करे, यह दोनों को समझ नहीं आ रहा था. मियांबीवी राजी तो क्या करेगा काजी वाली बात इन दोनों पर इसलिए लागू नहीं हो रही थी कि दोनों के बीच कोई काजी था ही नहीं. दोनों भीतर ही भीतर सुलगने लगे थे पर शायद लोकलाज का झीना सा परदा अभी बाकी था.

यह परदा भी एक दिन टूट गया जब आंगन में नहाती नीतू को बाबूलाल ने देखा. उस के दुधिया और भरे मांसल बदन को देखते ही बाबूलाल के जिस्म में चीटियां सी रेंगी तो सब्र ने जवाब दे दिया. एकाएक उस ने नीतू को जकड़ लिया.

नीतू ने कोई एतराज नहीं जताया. वह तो खुद पुरुष संसर्ग के लिए बेचैन थी. उस दिन जो हुआ नीतू के लिए किसी मनोकामना के पूरी होने से कम नहीं था. बाबूलाल को भी सालों बाद स्त्री सुख मिला था, सो वह भी निहाल हो गया.

अब यह रोजरोज का काम हो गया था. दोनों को रोकनेटोकने वाला कोई नहीं था. रामजी जैसे ही बिस्तर पर आ कर सोता था, नीतू सीधे बाबूलाल के कमरे में जा पहुंचती थी.

उम्र और रिश्तों का लिहाज नाजायज संबंधों में नहीं होता और आमतौर पर उन का अंत में किसी तीसरे का रोल जरूर रहता है. पर इन दोनों पर यह बात लागू नहीं थी. ससुर की मर्दानगी पर निहाल हो चली नीतू ने एक दिन बाबूलाल से साफ कह दिया कि अब मुझ से शादी करो नहीं तो…

इस ‘नहीं तो’ में छिपी धमकी बाबूलाल को समझ आ रही थी और मजबूरी भी, लेकिन जो जिद नीतू कर रही थी उसे वह पूरी नहीं कर सकता था. अब जा कर बाबूलाल को समाज और रिश्तों के मायने समझ आए.

समझाने और मना करने पर नीतू झल्लाने लगी थी, जिस से बाबूलाल घबराया हुआ रहने लगा था. नीतू की लत तो उसे भी लग गई थी पर उस पर लदी शर्त उस से पूरी करते नहीं बन रही थी.

साफ है बाबूलाल बहू के जिस्म को तो भोगना चाहता था लेकिन समाज को ठेंगा बता कर उसे पत्नी बनाने की बात सोचते ही उस के पैरों तले से जमीन खिसकने लगती थी. जितना वह समझाता था नीतू उसी तादाद में एक बेतुकी जिद पर अड़ती जा रही थी.

अब बाबूलाल नीतू से बचने के बहाने ढूंढने लगा था, जिन में से एक उसे मिल भी गया था कि फसल पक रही है, इसलिए उसे चौकीदारी के लिए खेत पर सोना पड़ेगा. इस के लिए उस ने खेत में झोपड़ी भी डाल ली थी.

नीतू जब शहर से मजदूरी कर लौटती थी तब तक बाबूलाल खेत पर जा चुका होता था. कुछ दिन ऐसे ही बिना मिले गुजरे तो नीतू का सब्र जवाब देने लगा. वैसे भी वह महसूस रह रही थी कि बाबूलाल अब उस में पहले जैसी दिलचस्पी नहीं लेता. 25 मार्च को नीतू जब सहेलियों के साथ लौटी तो उसे याद आया कि अगले दिन उसे मायके जाना है.

मायके जाने से पहले वह अपनी प्यास बुझा लेना चाहती थी. इसलिए सीधे खेत पर पहुंच गई और बाबूलाल को इशारा किया कि आज रात वह यहीं रुकेगी तो बाबूलाल के हाथ के तोते उड़ गए, क्योंकि रात में दूसरे किसान तंबाकू और बीड़ी के लिए उस के पास आते रहते थे.

समझाने की कोशिश बेकार थी फिर भी बाबूलाल ने दूसरे किसानों के आनेजाने की बात बताई तो नीतू ने खुद अपने हाथों से अपने कपड़े उतार लिए और धमकी देते हुए बोली, ‘‘खुले तौर पर मुझ से बीवी की तरह पेश आओ नहीं तो पुलिस में रिपोर्ट लिखा दूंगी.’’ उस दिन सुबह वह बाबूलाल से कह भी रही थी कि रात में घर पर ही मिलना.

रोजरोज की धमकियों और परेशानियों से तंग आ गए बाबूलाल को कुछ नहीं सूझा तो उस ने बेरहमी से नीतू की हत्या कर दी और स्तनों को खरोंचा, जिस से मामला सामूहिक बलात्कार का लगे. नीतू का गुप्तांग भी उस ने इसी वजह के चलते जलाया था.

नीतू की हत्या पर वह उस की लाश को कंधे पर उठा कर ले गया और आम के बाग में फेंक आया. पुलिस को दिए शुरुआती बयान में वह रामजी को फंसा देना चाहता था जिस से खुद साफ बच निकले. पर ऐसा नहीं हो पाया.

ससुर बहू के अवैध संबंधों का यह मामला अजीब इस लिहाज से है कि इसे और ज्यादा ढोने की हिम्मत नीतू में नहीं बची थी और वह अधेड़ ससुर को ही पति बनाने पर उतारू हो आई थी यानी राजकुमार, हेमामालिनी, कमल हासन और पद्मिनी कोल्हापुरे अभिनीत फिल्म ‘एक नई पहेली’ की तर्ज पर वह अपने ही पति की मां बनने तैयार थी.

बड़ी गलती बाबूलाल की है जिस की सजा भी वह भुगत रहा है. उस ने पहले पागल बेटे की शादी करा दी और जब बेटा बहू की शारीरिक जरूरतें पूरी नहीं कर पाया तो खुद पाप की दलदल में उतर गया.

नीतू रखैल की तरह नहीं रहना चाह रही थी. साथ ही वह दुनियादारी की परवाह भी नहीं कर रही थी, इसलिए उस से छुटकारा पाने के लिए बाबूलाल को उस की हत्या ही आसान रास्ता लगा पर कानून के हाथों से वह भी नहीं बच पाया.

ऐसी बीवी किसी की न हो : संतोष ने कैसे उजाड़ी अपनी गृहस्थी

24  मार्च, 2018 को राजस्थान के जिला चुरू के एडीजे जगदीश ज्याणी की अदालत में और दिन से ज्यादा भीड़ थी. इस की वजह यह थी कि उस दिन माननीय न्यायाधीश द्वारा एक बहुचर्चित मामले का फैसला सुनाया जाना था. फैसला सुनने की उत्सुकता में कोर्ट में वकीलों के अलावा आम लोग भी मौजूद थे.

कोर्ट रूम में मौजूद सभी को लग रहा था कि संतोष ने जिस तरह से अपने दोनों बच्चों की निर्दयतापूर्वक हत्या की थी, उसे देखते हुए उस निर्दयी औरत को फांसी की सजा तो होनी चाहिए. सभी लोग सजा को ले कर उत्सुक थे. आखिर ऐसा क्या मामला था कि संतोष को अपने जिगर के टुकड़ों 2 बेटों और एक बेटी की हत्या के लिए मजबूर होना पड़ा. यह जानने के लिए हमें घटना की पृष्ठभूमि में जाना पड़ेगा.

राजस्थान का एक जिला है चुरू. इसी जिले के थाना राजलदेसर के अंतर्गत आता है एक गांव हामूसर. इंद्रराम इसी गांव में रहता था, जो कबड्डी का खिलाड़ी था. बाद में उस की नौकरी भारतीय सेना में लग गई. उस की पोस्टिंग बरेली की जाट रेजीमेंट में थी. उस की शादी संतोष से हुई थी.

इंद्रराम से ब्याह कर संतोष जब ससुराल आई थी, तब वह बहुत खुश थी. सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. पर धीरेधीरे संतोष का स्वभाव सामने आने लगा. उस ने घर में कलह करनी शुरू कर दी. वह सास, पति, देवर और अन्य पारिवारिक लोगों से लड़ाईझगड़ा करने लगी. बातबात पर गुस्सा हो जाती थी.

इंद्रराम सालभर में दोढाई महीने की छुट्टी पर घर आता था. मगर बीवी की कलह से घर में हर समय लड़ाई होती रहती थी. तब इंद्रराम को लगता कि अगर वह छुट्टी पर नहीं आता तो ठीक रहता. जैसेतैसे छुट्टियां काट कर वह अपनी ड्यूटी चला जाता. इसी तरह कई साल बीत गए और संतोष 2 बेटों और एक बेटी की मां बन गई.

पति के ड्यूटी पर चले जाने के बाद संतोष ससुराल वालों के साथ कलह करती रहती थी. जब इंद्रराम को घर वाले फोन कर के उस की शिकायत करते तो उसे पत्नी पर बहुत गुस्सा आता था.

वह अपना घर टूटते नहीं देखना चाहता था. इसलिए वह चुप रह कर सब कुछ सहने लगा. छुट्टी में इंद्रराम के घर आने पर पत्नी क्लेश करती तो वह घर से बाहर जा कर वक्त काटता.

उस की बड़ी बेटी करुणा 12 साल की हो चुकी थी और बेटे अनीश व जितेंद्र 9 व 7 साल के थे. तीनों बच्चों की पढ़ाई चल रही थी. संतोष ने अपनी ससुराल वालों के साथ कलह करनी बंद नहीं की तो वह परेशान हो गए. उन लोगों ने अपने खेतों में एक मकान बना रखा था. उन्होंने संतोष से कहा कि वह खेतों वाले मकान में रहे, इस के बाद संतोष बच्चों को ले कर खेतों वाले मकान में रहने लगी.

इस तरह सासससुर और देवर अलग हो गए. संतोष अपने बच्चों से कहती कि वे दादा के घर न जाएं. फोन पर भी वह पति से भी सीधे मुंह बात नहीं करती थी. 12 जुलाई, 2015 का दिन था. इंद्रराम ने संतोष को फोन किया. किसी बात को ले कर वह पति से फोन पर झगड़ने लगी. झगड़ा बढ़ा तो गुस्से में तमतमाई संतोष ने पति से कहा कि वह अपने तीनों बच्चों के साथ पानी के टांके (कुंड) में डूब कर जीवनलीला समाप्त कर लेगी.

इतना कह कर उस ने फोन काट दिया. इंद्रराम ने उसे दोबारा फोन किया मगर संतोष ने बात नहीं की. इस के बाद वह अपने तीनों बच्चों को ले कर रात में ही कुंड के पास पहुंच गई. तीनों बच्चों को उस ने एकएक कर के कुंड में धकेल दिया. इस के बाद वह स्वयं भी आत्महत्या के इरादे से कुंड में कूद गई.

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कुंड में करीब पौने 5 फुट पानी था, जिस की वजह से तीनों बच्चों की डूबने से मौत हो गई थी. संतोष जब पानी में डूबने लगी तो वह बचने के लिए हाथपैर मारने लगी. वह पानी में बेटी के ऊपर खड़ी हो गई. रात भर वह पानी में बेटी के ऊपर खड़ी रही. पानी संतोष के गले तक था. सारी रात वह ऐसे ही खड़ी रही.

संतोष के ससुराल वाले पास के खेत में रहते थे. उन्होंने जब रात में संतोष और उस के बच्चों को नहीं देखा तो उन्होंने इंद्रराम को फोन किया.

इंद्रराम ने संतोष से हुई लड़ाई वाली बात बताते हुए कहा कि संतोष ने यह कहा था कि वह बच्चों सहित पानी के कुंड में कूद कर मरने जा रही है. मैं ने उस की बात को केवल धमकी समझा था.

इंद्रराम से बात कर के घर के लोग कुंड पर पहुंचे तो संतोष पानी में खड़ी दिखी. तीनों बच्चे दिखाई नहीं दे रहे थे. घर वालों के शोर मचाने के बाद गांव के कई लोग इंद्रराम फौजी के खेत में बने पानी के कुंड पर पहुंच गए. गांव के ही मनफूल टांडी ने राजलदेसर थाने में इस की सूचना दे दी.

तत्कालीन थानाप्रभारी सुभाष शर्मा पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने संतोष को कुंड से जीवित निकाल लिया लिया जबकि तीनों बच्चों की मौत हो चुकी थी. प्रारंभिक पूछताछ में संतोष ने पुलिस को कोई संजोषजनक जवाब नहीं दिया. इस के बजाय उस ने पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया.

घटना के समय खेतों में बनी उस ढाणी में संतोष व उस के 3 बच्चों के अलावा कोई दूसरा नहीं रहता था. पुलिस ने जांचपड़ताल की तो स्पष्ट हुआ कि संतोष ने ही अपनी बेटी करुणा, बेटे अनीश व जितेंद्र को कुंड में धकेला था, जिस से उन की मौत हो गई.

पुलिस ने संतोष के खिलाफ हत्या व आत्महत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया और उसे गिरफ्तार कर लिया. थानाप्रभारी संतोष शर्मा द्वारा की गई जांच में पाया गया कि संतोष व उस के पति इंद्रराम के बीच काफी समय से गृहक्लेश चल रहा था.

इंद्रराम भी छुट्टी ले कर अपने घर आ गया था. पत्नी द्वारा परिवार उजड़ जाने का उसे बड़ा दुख हुआ. उस ने सपने में भी नहीं सोचा था कि उस की बीवी ऐसा भी कर सकती है. बच्चों की मौत ने इंद्रराम को तोड़ कर रख दिया. मगर उस ने भी कसम खा ली कि वह पत्नी को सजा दिला कर ही दम लेगा. संतोष की गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

जांच अधिकारी द्वारा आरोपपत्र दाखिल करने के बाद यह मामला एडीजे कोर्ट में चला. अभियोग को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में 16 गवाह पेश किए, जिन में मृत बच्चों के पिता इंद्रराम, दादी जोरादेवी, ताऊ श्रवण कुमार व सांवरमल भी शामिल थे. बचावपक्ष को भी साक्ष्य पेश करने का मौका दिया गया. लेकिन वह कोई भी साक्ष्य कोर्ट में प्रस्तुत नहीं कर पाया.

13 मार्च, 2018 को कोर्ट ने दोनों पक्षों की अंतिम बहस सुनने के बाद 24 मार्च, 2018 को एडीजे जगदीश ज्याणी ने हत्यारी मां संतोष को धारा 302 यानी हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व 10 हजार रुपए जुरमाना और धारा 309 में एक हजार रुपए के जुरमाने की सजा सुनाई.

बीवी को उम्रकैद की सजा मिलने पर इंद्रराम ने पत्रकारों को बताया कि अपने कलेजे के टुकड़ों को इस तरह पानी के कुंड में डाल कर हत्या कर देने वाली मां को सजा देने के लिए कोर्ट पर पूरा विश्वास था. उसे विश्वास था कि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी और आज फैसला आने के बाद यह स्पष्ट भी हो गया.

वहीं अपर लोक अभियोजक एडवोकेट राजकुमार चोटिया ने मामले को अप्रत्याशित बताते हुए कोर्ट से आरोपी को मृत्युदंड की सजा देने का निवेदन किया था. मगर सजा मिली उम्रकैद.

राजनीति में कास्टिंग काउच

कास्टिंग काउच को ले कर केवल फिल्मों पर ही चर्चा होती है. लेकिन सचाई यह है कि कास्टिंग काउच केवल फिल्मों में ही नहीं बल्कि राजनीति और दूसरे क्षेत्रों में भी होता है. समयसमय पर हर क्षेत्र में काम करने वाले लोग इस पर अपनी राय देते हैं. फिल्मों की तरह राजनीति भी अब कास्टिंग काउच से अछूती नहीं है. यहां लोग इस बात को स्वीकार नहीं करते हैं. गौसिप के रूप में तमाम नेताओं के महिलाओं से संबंधों की चर्चा होती रहती है. इन में राजनीति के अलावा फिल्मी महिलाएं भी शामिल होती हैं.

राजनीति में कास्टिंग काउच नहीं होता तो समयसमय पर नेताओं के संबंधों की कहानियां सामने नहीं आतीं. आंध्र प्रदेश में एन टी रामाराव और उत्तर प्रदेश में नारायण दत्त तिवारी के नाम चर्चित रहे हैं. दूसरे भी बहुत सारे ऐसे नेता हैं जिन के नाम समयसमय पर महिलाओं के साथ सामने आए हैं. यह बात और है कि ये बातें आसानी से दबा दी जाती हैं. अभिनेत्री श्रीरेड्डी के बयान

के बाद कांगे्रस नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य रेणुका चौधरी ने भी कहा कि कास्टिंग काउच केवल फिल्मों में ही नहीं है, यह सभी कार्यस्थलों की कड़वी सचाई है. यहां तक कि संसद भी इस से अछूती नहीं है. विदेशों में अभिनेत्रियों ने इस बात को स्वीकार कर ‘मी टू’ कहने में काफी समय लिया. अब समय आ गया है कि भारत में भी लोग सामने आ कर ‘मी टू’ कहें. चुप रहती हैं पीडि़ताएं

भारत में ‘मी टू’ अभियान के तहत कई औरतों ने बताया कि वे भी कभी न कभी इव टीजिंग का शिकार हुई हैं. कास्टिंग काउच को अभी लोगों ने स्वीकार नहीं किया है. फिल्मी दुनिया में भी वही अभिनेत्रियां सामने आई हैं जो कास्टिंग काउच की शिकार होने के बाद फिल्मों में काम नहीं पा सकी हैं. दक्षिण भारत में एम जी रामचंद्रन और जयललिता का मामला ऐसे उदाहरणों में शामिल है. आंध्र प्रदेश में एन टी रामाराव और लक्ष्मी पार्वती का उदाहरण भी इन में से एक है. एन टी रामाराव और जयप्रदा पर भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेसी नेता एन डी तिवारी के तमाम संबंध चर्चा में रहे हैं. एन डी तिवारी राज्यपाल के पद पर रहते हुए भी सैक्स स्कैंडल को ले कर चर्चा में आए. जिस के बाद उन का राजनीतिक कैरियर खत्म हो गया. इमेज की चिंता

कई नेताओं के सैक्स स्कैंडल चर्चा में रहे हैं. अमरमणि त्रिपाठी मधुमिता हत्याकांड के चलते जेल में हैं. मधुमिता और अमरमणि का मसला ऐसा ही था. मधुमिता की हत्या का गुनाहगार अमरमणि को माना गया और उन को उम्रकैद की सजा दी गई. भाजपा के एक बड़े नेता का एक महिला के साथ संबंध चर्चा में रहा. राजनीति में ऐसे मामलों की फेहरिस्त लंबी है जिन में नेताओं के दूसरी महिलाओं से संबंध रहे. नेता महिलाओं को राजनीति में स्थापित करने का लोभ दिखा कर उन का शारीरिक शोषण करता है. भारत में राजनीति को दूध का धुला माना जाता है. किसी घटना के उजागर होने के बाद हर संभव प्रयास कर के उस को दबा दिया जाता है. इसलिए ऐसे मामले सामने नहीं आते हैं. चर्चा में रहने के बाद भी ऐसे मामले साबित नहीं हो पाते हैं. नेताओं के साथ ही साथ कार्यस्थलों, औफिसों में भी ऐसे मामले चर्चा में नहीं आते. कार्यस्थलों में सब से अधिक मामले शिक्षा संस्थानों के आते रहे हैं. यहां पर महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए अलग से कानून बनाने के अलावा एक सुनवाई सैल का भी गठन किया गया. इस के बाद भी इन कार्यस्थलों पर यौनशोषण की बातें सामने आती हैं.

इमेज की चिंता के कारण ठगी का शिकार होने के बाद भी औरतें ये बातें बाहर नहीं करतीं. ऐसे में इन्हें शिकार बनाने वाले भी बच निकलते हैं. पुलिस और कचहरी में ऐसे कई मामले आते हैं जिन में सालों से यौनशोषण के शिकार होने की बात कही जाती है. इन घटनाओं के बाद रेणुका चौधरी जैसी महिला नेताओं के बयानों से पता चलता है कि कास्टिंग काउच केवल फिल्मों का मुद्दा नहीं है. राजनीति सहित समाज के दूसरे हिस्सों में भी यह खूब प्रचलित है. इस पर तभी विराम लग सकता है जब इस का शिकार होने वाली महिलाएं ‘मी टू’ जैसा अभियान चलाएं.

शिक्षा का भी वर्णभेद

भाजपा सरकारें बारबार यह जताने में लगी हैं कि देश में उन की और ऊंची जातियों की मेहरबानी से पिछड़े (शूद्र) व दलित (अछूत) जिंदा हैं और उन्हें थोड़ीबहुत जगह समाज में दी जा रही है. यह जताने का मतलब सिर्फ इतना समझाना है कि जो मिल रहा है उसे ऊपर वाले और ऊंचों की कृपा समझो वरना वैसी पिटाई होगी जैसी ऊना या राजकोट में हुई.

अभी मध्य प्रदेश के शिक्षा बोर्ड ने 10वीं व 12वीं क्लासों के नतीजे जारी करते हुए कहा कि सवर्ण ऊंचे जनरल कैटीगरी में कितने पास हुए, अन्य पिछड़ी जातियों के कितने और शैड्यूल कास्ट के कितने. यह सोच हर सरकारी विभाग में ठूंसठूंस कर भरी हुई है जबकि हर सरकारी विभाग में काफी पिछड़े व दलित आरक्षण की बदौलत पहुंच चुके हैं. वे इस कदर डरे रहते हैं कि ऐसे जातिवादी फैसले पर विभाग में रोकटोक नहीं कर सकते.

बुरा हो लिबरल मीडिया का जिस ने इस बात को पकड़ लिया और हल्ला मचा दिया. इस पर बोर्ड के अफसर सफाई देते हैं कि इस से तो इन बच्चों को आगे पढ़ने में सहूलियत होगी. उन्हें दाखिले आसानी से मिलेंगे. उन की सोच पर दया आती है कि इन आंकड़ों को इकट्ठा कर के जारी कर के क्याकैसे मिलेगा, यह मालूम न होते हुए भी वे अपनी बात को सही साबित करने में लगे हैं.

असल में ऊंची ही नहीं नीची जातियों के मन में गहरा बैठा है कि यह भेदभाव तो खुद भगवान ने दिया है. बारबार पुराणों का उल्लेख करा जाता है कि आदि पुरुष के मुंह से ब्राह्मण, हाथों से क्षत्रिय, जांघों से वैश्य व पैरों से शूद्र पैदा हुए थे. जो दलित हैं तो वे शायद कहीं पैरों के नीचे की धूल से जन्मे थे क्योंकि उन का पौराणिक साहित्य में न के बराबर जिक्र है. नीची जातियां पीढ़ी दर पीढ़ी इस बात को मानती रही हैं और धर्मकर्म से अपना अगला जन्म सुधारने में लगी रहती हैं. अब वे पढ़नेलिखने लगी हैं पर आमतौर पर पिछड़ी रहती हैं. हालांकि अब बड़े शहरों में, जहां जातिवाद कुछ कम है, वहां के बच्चे बराबरी का दर्जा पाने लगे हैं.

बोर्ड की यह जलील करने वाली हरकत एक आम बात है. पढ़नेपढ़ाने वाले इन वर्गों के लोगों को हिकारत से देखते हैं. भेदभाव रखते हैं. कहीं नौकरी मिल जाए तो भी चूंचूं करने से बाज नहीं आते. पीठ पीछे तो न जाने क्याक्या बोल जाते हैं और वे बातें कई दफा मुंह से निकल आती हैं. जाति का भूत अभी तो दमदार तरीके से सिर पर सवार है.

फिल्म के इस सीन की वजह से कलाकारों की हो गई थी हालत खराब

इन दिनों तो जैसे बॉलीवुड फिल्में लव मेकिंग सीन के बिना कंप्लीट ही नहीं होती हैं. ये सीन दिखने में आपको चाहे कितने भी एंटरटेनिंग लगे, लेकिन एक्टर्स के लिए तो ये बेहद पकाऊ और परेशान करने वाले होते हैं. कुछ ऐसा ही हुआ बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान और फिल्म में उनकी अभिनेत्री के साथ.

हम आपको बता रहे हैं एक सैक्स सीन के दौरान आमिर की हालत कुछ ऐसी हो गई कि खुद के साथ-साथ फिल्म के अन्य लोगों को भी उनकी हालत पर तरस आ गया.

दरअसल, आमिर के करियर के शुरूआती दौर में, उन्हें मिली एक फिल्म में बेहद इंटेंस सेक्स सीन शूट होना था. आमिर का ये इंटीमेट सीन फिल्म में काफी लंबा रखा गया था. इस लंबे इंटीमेट सीन के दौरान आमिर इतने असहज हो गए थे कि वे शूट छोड़ कर एक कमरे में जाकर चुपचाप बैठ गए थे.

आखिर में फिल्म के डायरेक्टर को ये सीन फिल्म से काटना ही पड़ा लेकिन फिल्म के रिलीज होने के कई सालों बाद फिल्म की अभिनेत्री ने आमिर को लेकर ये राज खोला है.

इस फिल्म में शूट होना था इंटीमेट सीन

साल 1995 में आई फिल्म ‘आतंक ही आतंक’ के लिए उन्होंने इतना बोल्ड इंटीमेट सीन दिया था कि उनकी हालत खराब हो गई थी.

एक्ट्रेस भी हुईं परेशान

इतना ही नहीं, इश सीन में उनका साथ दे रहीं अभिनेत्री पूजा बेदी भी इस दौरान मानसिक रूप से बहुत परेशान हो गई थीं. पूजा बेदी ने सीन की शूटिंग के दौरान का किस्सा एक इंटरव्यू में शेयर किया था. उन्होंने कहा था, फिल्म के लिए आमिर और मुझे बारिश में एक लवमेकिंग सीन शूट करना था.

कमरे में अकेले जाकर बैठ गए थे आमिर

पूजा ने बताया कि शूटिंग के बाद मैं और आमिर, दोनों ही इतने असहज हो गए थे कि दोनों एक कमरे में जाकर बैठ गए. हम दोनों नजरें झुकाए करीब 30 सेकंड तक वहीं बैठे रहे. हम वहां नजरें झुकाए चुपचाप बैठे रहे. दोनों के लिए ही वो मूमेंट काफी असहज था.

चेस खेलोगी

तभी अचानक आमिर ने पूजा से कहा कि – चेस खेलोगी? तो पूजा ने हां में सर हिलाते हुए कहा कि ये अच्छा आइडिया है.

हटा दिया गया फिल्म से वो सीन

पूजा ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि बाज में इस सीन को फिल्म से काट दिया गया था. यहां गौरतलब है कि इस फिल्म में पूजा का गेस्ट अपीयरेंस था. उन्होंने गंगा नाम का कैरेक्टर प्ले किया था.

शाहरुख को लेना चाहते थे निर्माता

‘आतंक ही आतंक’ के डायरेक्ट दिलीप शंकर ने भी ये बात बाद में जाहिर की थी कि फिल्म मेकर्स पहले शाहरुख खान और रजनीकांत को लेकर इस फिल्म को बनाना चाहते थे और डेट्स की दिक्कतों के चलते आमिर को अप्रोच किया गया और वे इसके लिए मान भी गए.

कई फिल्मों में दे चुके हैं किसिंग सीन

सुपरस्टार आमिर खान को एक्टिंग के मामले में तो मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहा ही जाता है. पर वे किसिंग सीन भी बिल्कुल परफेक्ट देते हैं. वे साल 1990 में आई फिल्म ‘दिल’, साल 1997 की फिल्म ‘इश्क’, ‘फना’ (2006) और थ्री इडियट्स जैसी फिल्मों में अच्छे खासे किसिंग सीन दे चुके हैं.

अगर आपकी सैलरी कम है तो ऐसे करें निवेश

आप अगर सोच रहे होंगे कि आपकी सैलरी बहुत कम है, तो आप कैसे कहीं पर भी निवेश कर सकते हैं? या फिर आप कैसे कोई म्‍यूचुअल फंड खरीद सकते हैं, तो आप यह एकदम गलत सोचते हैं. अक्‍सर लोग ये सोचते हैं कि कम पैसे से कोई निवेश नहीं किया जा सकता है, ये गलत है.

अब आप बहुत छोटे अमाउंट्स के साथ म्‍यूचुअल फंड में इंन्‍वेस्‍ट कर सकते हैं. लॉन्‍ग टर्म प्रोसेस के अंदर ही आप 500 रुपये तक का म्‍यूचुअल फंड खरीद सकते हैं. हम आपको बता रहे हैं कि कैसे आप म्‍यूचुअल फंड के इस छोटे अमाउंट से बड़ी बचत कर सकते हैं.

जल्‍दी करें निवेश

म्‍यूचुअल फंड आम आदमी से लेकर धनी वर्ग तक के लोगों के लिए है. अगर आप बड़ी बचत चाहते हैं तो आपको म्‍यूचुअल फंड के इस छोटे अमाउंट को निवेश करने में कोई दिक्‍कत नहीं होनी चाहिए. आपकी सैलरी चाहे कितनी भी क्‍यों न हो आपको जल्‍दी निवेश करना शुरू करना होगा.

नियमित निवेश करें

जब भी आप कोई काम शुरू करते हैं तो वह काम आपको नियमित करना होता है. न कि आप दो-चार दिन में उस काम को करके छोड़ देते हैं. हर महीने का पैसा हर महीने इन्‍वेस्‍ट करें चाहे राशि कितनी भी छोटी क्‍यों न हो. जब आप अपने काम में इमानदार होंगे तो आपको उसका रिटर्न भी अच्‍छा ही मिलेगा.

हमेशा धैर्य रखें

इसके लिए आपको धैर्य रखने की आवश्‍यकता होती है. आप ये सोच कर कभी निवेश नहीं कर पाएंगे कि आप ने आज निवेश किया और कल ही आपको ये पैसे मिल जाएं.

करें लॉन्‍ग टर्म के लिए निवेश

अपने निवेश को बढ़ने का अवसर देने के लिए लंबी अवधि के लिए निवेश बनाएं रखें. म्‍यूचुअल फंड समय के साथ प्रत्‍येक निवेशक की अनुकूलता के लिए विकसित हुए हैं. भले ही निवेश राशि कम हो, नियमित और अनुशासित निवेश समय के साथ बड़ी राशि बनाने में आपकी मदद कर सकते हैं.

गर्भ के दौरान इन सेहतमंद आदतों का हमेशा रखें ध्यान

गर्भावस्था के दौरान मां की सेहत का तुरंत और लंबे समय में बच्चे की सेहत पर गहरा प्रभाव पड़ता है. गर्भकाल की डायबिटीज और एनीमिया, यानी कि मां में एनीमिया और डायबिटीज बच्चे की सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं. मां में एनीमिया हो तो बच्चे का जन्म के समय 6.5 प्रतिशत मामलों में वजन कम होने और 11.5 प्रतिशत मामलों में समय से पहले प्रसव की समस्या हो सकती है. गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज की वजह से बच्चे को 4.9 प्रतिशत मामलों में एनआईसीयू (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) में भरती होने और 32.3 प्रतिशत मामलों में सांस प्रणाली की समस्याएं होने का खतरा रहता है.

गर्भावस्था में इन समस्याओं की वजह से पैदा हुए बच्चों में मोटापे, दिल के विकार और टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा उम्रभर रहता है. गर्भावस्था के दौरान हाइपरटैंशन, जो कि 20वें सप्ताह में होता है, पर भी ध्यान देने की आवश्यकता होती है. इस से गर्भनाल (एअंबीलिकल कौर्ड) की रक्तधमनियां सख्त हो जाती हैं जिस से भू्रूण तक औक्सीजन और पोषण उचित मात्रा में नहीं पहुंच पाता. इस वजह से गर्भाशय में बच्चे की वृद्धि में रोक, जन्म के समय बच्चे का कम वजन, ब्लडशुगर में कमी और लो मसल टोन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कुछ मामलों में आगे चल कर किशोरावस्था में बच्चे में हाइपरटैंशन की समस्या भी हो सकती है. मां में मोटापा हो तो गर्भावस्था में डायबिटीज होने की संभावना होती है जिस वजह से समय से पहले प्रसव और बच्चे में डायबिटीज व मोटापा होने के खतरे रहते हैं. गर्भावस्था के दौरान मां के पोषण में मामूली कमी का भी प्रतिकूल असर बच्चे की सेहत पर पड़ सकता है, जैसे कि गर्भावस्था में विटामिन डी की कमी से आगे चल कर जच्चा और बच्चा दोनों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.

डा. संजय कालरा, कंसल्टैंट एंडोक्राइनोलौजिस्ट, भारती हौस्पिटल, करनाल एवं वाइस पै्रसिडैंट, साउथ एशियन फैडरेशन औफ एंडोक्राइन सोसायटीज, कहते हैं कि अगर मां को गर्भावस्था में डायबिटीज या हाइपरटैंशन हो जाए तो बच्चे की सेहत का, खासतौर पर शुरुआती दिनों में, पूरा ध्यान रखना चाहिए. बच्चे के ग्रोथ चार्ट पर नियमित ध्यान देते रहना चाहिए और रोगों की रोकथाम वाली जीवनशैली अपनानी चाहिए. आहार में आयरन, फोलेट और विटामिन बी12 की कमी की वजह से गर्भवती महिलाओं में एनीमिया होने की संभावना काफी ज्यादा होती है. गर्भावस्था में आयरन की अत्यधिक जरूरत होने की वजह से यह समस्या और भी बढ़ जाती है. एनीमिया की वजह से गर्भनाल से भ्रूण तक औक्सीजन जाने में कमी से शिशु के विकास में कमी हो सकती है और एंडोक्राइन ग्रंथि की कार्यप्रणाली पर असर पड़ सकता है.

भारतीय महिलाओं को आयरन और हेमाटोपौयटिक (रक्तोत्पादक) विटामिन देने चाहिए ताकि गर्भावस्था से पहले और गर्भावस्था के दौरान हीमोग्लोबीन का उचित स्तर बना रहे. गर्भावस्था में डायबिटीज और हाइपरटैंशन के  आने वाले जीवन में पड़ने वाले प्रभावों से बचने के लिए मां और बच्चे दोनों को ही रोगों की रोकथाम वाली जीवनशैली अपनानी चाहिए.

सैक्स जानकार कैसोनोवा और क्लियोपेट्रा

29 वर्षीय प्रिया तंदुरुस्त शरीर की आकर्षक युवती है. उस की शादी हुए 3 साल हो चुके हैं, लेकिन 3 साल में उसे एक भी रात वह यौनसुख प्राप्त नहीं हो पाया, जिस की हर युवती को चाह होती है. दूसरी ओर 28 वर्षीय कामकाजी रत्ना सिंह है जिस की शादी को 2 वर्ष हुए हैं. वह अपने पति की कामुकता से परेशान है. रत्ना थकीहारी अपने काम से आती है तो रात को पति कामवर्धक औषधियों का सेवन कर उस के साथ भी नएनए प्रयोग करता है. दोनों ही स्थितियों में किसी को भी सच्चा सुख नहीं मिलता, इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने यौन जीवन में संतुलन बनाएं. अगर किसी में यौन उत्तेजना सामान्य है तो उसे अतिरिक्त दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए. यदि किसी व्यक्ति की यौन उत्तेजना में कमी है तो वह निम्न लवफूड्स का प्रयोग कर वैवाहिक सुख का आनंद ले सकता है.

एफ्रोडाइस संज्ञा एक ऐसा द्रव्य है जो समुद्र से निकली विशाल घोंघा मछली एफ्रौडाइट से प्राप्त होता है. एफ्रोडाइट को कामुकता का प्रतीक माना जाता है. इस के द्रव्य को एफ्रोडाइस कहते हैं. एफ्रोडाइस, यौनशक्तिवर्द्धक द्रव्य है जिस से स्त्रीपुरुष में यौनशक्ति या यौन अभिरुचि उत्पन्न होती है. प्राकृतिक रूप से हम ऐसे कुछ खाद्य पदार्थों से पहले ही परिचित हैं, जो यौन क्षमता बढ़ाते हैं, जिन में ऐसे फल व सब्जियां प्रमुख हैं जिन का आकार स्त्री व पुरुष के गुप्तांगों से मिलताजुलता है. इन फल व सब्जियों के अंदर कुछ ऐसे गुण छिपे होते हैं जो मानव की यौन क्षमता को बढ़ाने में कारगर हैं. ये सभी फल पुरुष की कामुकता से जुड़े हैं, जबकि स्त्री की कामुकता बढ़ाने के लिए चैरी, खजूर, अंजीर, खास प्रकार की मछली और सीप जैसे खाद्य पदार्थ प्रमुख हैं.

केला एक ऐसा फल है, जिस में खनिज द्रव्य और ब्रोमेलिन प्रचुर में उपलब्ध है, जो पुरुष क्षमता को बढ़ाता है और यह फल सर्वसुलभ और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है. सस्ता होने के कारण इस का प्रयोग आम लोग भी आसानी से कर सकते हैं. प्राचीन यूनान में जब अंजीर की फसल की कटाई शुरू होती थी तो रीतिरिवाज के अनुसार रतिक्रीड़ा की जाती थी. क्लियोपेट्रा को भी अंजीर बहुत पसंद थे जिन्हें वह चाव से खाती थी. सब फलों में प्राचीनतम माने गए फल द्राक्ष का संबंध भी कामोत्तेजक गतिविधि से जोड़ा जाता है. वैसे द्राक्ष का फल काफी उत्तेजक है और स्वादिष्ठ होता है.

19वीं शाताब्दी में फ्रांस में सुहागरात से पहले दूल्हे को जो भोजन दिया जाता था उस में शतावरी को विशेष स्थान दिया जाता था, जबकि काफी समय पहले एशिया के मध्यपूर्व देशों के सुलतान व अमीर उमरा गाजर को स्त्रियों की उत्तेजना बढ़ाने में सहायक मानते थे. कुछ व्यंजनों को भी उत्तेजना बढ़ाने में सहायक माना गया है. उदाहरणस्वरूप चौकलेट. चौकलेट को परंपरागत रूप से उत्तेजक माना गया है. इसलिए सदियों पहले ईसाई पादरियों और ननों को चौकलेट खाने की सख्त मनाही थी. कच्चे घोंघों में प्रचुर मात्रा में जस्ता होता है जिस के सेवन से लंबे समय तक संभोगरत रहने की शक्ति बढ़ सकती है. भूमिगत गुच्छी यानी ट्रफल भी ऐसा ही महंगा व सुगंधित पदार्थ है. शैंपेन को भी लंबे अरसे से प्यार का पेय माना गया है, जो शादी के अवसर पर या विजयोत्सव मनाते समय भी ऐयाश लोगों में पानी की तरह बहाया जाता है. कहा जाता है कि व्हिस्की पिलाने से औरत बहस करना बंद करती है. बियर से उसे यौन आनंद मिलता है. रम से वह सहयोग करने लगती है. शैंपेन से होश खो बैठने पर कामुक हो उठती है. केवियर एक ऐसी मछली है जो मनुष्य के शरीर में उत्तेजना बढ़ाती है. यद्यपि निश्चित रूप से यह कहना कठिन है कि ऐसा क्यों माना जाता है.

साधारणातया हम कह सकते हैं कि अधिक शक्ति बढ़ाने वाले पदार्थ दुर्लभ हैं और इन का मूल्य भी काफी है, इसी कारण लोग अधिक आनंद लेने के लिए इन के दीवाने हैं. डामैना को चाय की तरह उबाल कर नियमित एक कप पीने से हारमोंस नियंत्रण में रहते हैं और इस से शारीरिक शक्ति भी प्राप्त होती है. एक प्रकार के लालमिर्च के मसाले से एंडोर्फोंस हारमोंस भी बढ़ाता है. गरम सूप या सौस पर मिर्च छिड़क कर प्रतिदिन खाने से भी लाभ होता है. अगर युवक जिनसेंग का प्रयोग करते हैं तो कामोत्तेजना अधिक होती है. अगर युवतियां इस का प्रयोग करती हैं तो उन की भी पिपासा बढ़ जाती है. जिनसेंग प्रसिद्ध चीनी द्रव्य है जो अश्वगंधा जैसा प्रतीत होता है.

भारत और मध्यपूर्व एशियाई देशों में लहसुन जोकि एक अच्छा विषाणुनाशक भी है, सदियों से युवकों की उत्तेजना बढ़ाने के लिए लोकप्रिय है. इस की अप्रिय दुर्गंध से बचाव के लिए खाने के बाद लौंग या छोटी इलायची का प्रयोग कर सकते हैं. प्याज और शहद का मिश्रण भी उपयोगी है. अदरक, लाल रास्फरी के पत्ते और गुड़हल या जाबा कुसुम कामोत्तेजना बढ़ाने के लिए काफी प्रचलित रहे हैं. शहद से भी यह प्रकट होता है कि इस में भी कामवर्धक गुण हैं, लेकिन ध्यान रहे कि शहद शुद्ध हो. कुछ समाज आज भी  नवविवाहितों को शहद का पान कराते हैं. फिर चांदनी रात हो आशा और अरमानों की अंगड़ाइयां लेती हुई नववधु हो, तत्पश्चात लज्जा और मर्यादा का आवरण धीरेधीरे हट रहा हो और फिर काम और रति का युद्ध शुरू हो, कैसी रोमांटिक कल्पना है? यह भी बता दें कि शहद में विटामिन  ‘बी’ और एमिनो एसिड प्रचुर मात्रा में होने के कारण यह प्राकृतिक रूप से कामोत्तेजक सिद्ध हुआ है.

मिस्र में हड्डियों का सूप यानी पाया का भी काफी चलन है. हलाल की गई भेड़ की टांग की हडिड्यों के साथ ताजा कटी प्याज, लहसुन, पुदीना, लालमिर्च आदि को एकसाथ डाल कर 2 घंटे तक मिश्रण कर जो लुगदी तैयार होती है उस का भक्षण कर न जाने कितने मध्य एशियाई तथा मिस्रवासियों ने महिलाओं पर जुल्म ढाए हैं. कामसूत्र में नीले सूखे कमल का चूर्ण, घी और शहद एकसाथ मिला कर खाने को कहा गया है, जिस से पुरुषों में खोई हुई शक्ति दोबारा लौट आती है. इसी प्रकार भेड़ा या बकरे के अंडकोश को उबाल कर चीनी डाल कर जो पेय बनता है, इसे पीने से भी अधिक शक्ति मिलती है.

इसी तरह इत्र या सुंगधित तेल की मालिश भी सुख के लिए लाभदायक है. ग्रीष्मऋतु की एक गरम शाम को ठंडी हवा का झोंका और प्रिया का उन्मुक्त्त स्पर्श इस से अधिक उत्तेजक और क्या हो सकता है.

एक कथानुसार साम्राज्ञी नूरजहां को पानी में गुलाब की पंखडि़या मिला कर स्नान करना पसंद था. एक दिन नहाने में देर हो गई तो उस ने देखा कि पानी के ऊपर एक तरल पदार्थ तैर रहा है. वह समझ गई कि यह गुलाब की पंखडि़यों से निकला इत्र है जो दालचीनी, तेल की तरह कामोत्तेजक है. इसी तरह वनिला, चमेली, धनिया और चंदन का लेप या इत्र लगाने से भी स्त्रीपुरुष उन्मुक्त होते हैं.

शराब और नशीले द्रव्यों से कुछ हद तक कामोत्तेजना बढ़ती है, लेकिन इन का नुकसान अधिक है. ये कामोत्तेजना द्रव्य नहीं हैं. इन की छोटी खुराक शुरू की शर्म व संकोच दूर करने में सहायक होती है, लेकिन यदि कोई स्त्री या पुरुष इन का अधिक मात्रा में लंबे समय तक सेवन करता है तो आगे चल कर युवक ढीला हो जाता है तथा युवती में चरमोत्कर्ष के आनंद को ले कर कुछ समस्याएं पैदा हो सकती हैं, क्योंकि इन से मस्तिष्क प्रभावित होता है.

इसी प्रकार मारीलुआना व वियाग्रा जैसे पदार्थ भी अस्थायीरूप से यौनसुख की इच्छा या संभोग सुख थोड़ाबहुत बढ़ाते हैं. पर बेहोशी की सी हालत में. आप को  वार्निंग दी जाती है कि कृपया ड्रग्स से दूर रहें, क्योंकि अगर एक बार आप इन के आदी हो गए तो इन से पीछा छुड़ाना मुश्किल है. वियाग्रा जैसी दवाएं डाक्टर के परामर्श के बाद ही प्रयोग करें. युवतियों में भी हारमोंस की कमी को डाक्टर की सहायता से पूरी करें.

फिर आखिरी सवाल यही है कि क्या सचमुच ऐसी दवा यौनशक्ति में वृद्धि करती है. ऐसी दवा केवल तब ही लाभप्रद होती है, जब आदमी का मन भी कामवासना की तृप्ति करने में सहयोग करे.

औषधि निर्माता व विक्रेता केवल जरूरतमंदों का मात्र आर्थिक शोषण करते हैं. अगर इंसान अपने खानपान व व्यायाम पर विशेष ध्यान देते हुए प्रकृति के नियमों का पालन करे तो उस की यौन क्षमता स्वत: ही बनी रहेगी.

अनुपम खेर ने शेयर किया ‘द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ में अटल बिहारी वाजपेयी का लुक

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बायोपिक द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर में अटल बिहारी वाजपेयी का लुक रिवील हो गया है. अनुपम खेर ट्विटर पर रामअवतार भारद्वाज के साथ एक फोटो शेयर किया है. जिसमें दोनों हाथ मिलाते हुए दिखाई दे रहे हैं. यह फिल्म मनमोहन सिंह के मीडिया एडवाइजर संजय बारू की किताब द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर : द मेकिंग एंड अनमेकिंग औफ मनमोहन सिंह पर आधारित है.

140 से ज्यादा कलाकार : मनमोहन सिंह की बायोपिक में विनोद मेहता, सीताराम येचुरी, ए. राजा, एपीजे अब्दुल कलाम, लालू प्रसाद, मायावती, सुषमा स्वराज, अमर सिंह, कपिल सिब्बल, ज्योति बसु, प्रणब मुखर्जी, नटवर सिंह, पीवी नरसिम्हा राव, अजित पिल्लई, शिवराज पाटिल, अर्जुन सिंह और उमा भारती जैसे नेताओं के किरदार भी शामिल हैं. इन सभी लोगों को मिलाकर इस फिल्म में कुल 140 एक्टर्स नजर आने वाले हैं.

ये एक्टर्स निभा रहे किसका रोल

सुजैन बर्नेट बनी सोनिया गांधी : जर्मन एक्ट्रेस सुजैन बर्नर्ट 2007 में आई फिल्म ‘हनीमून ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड’ में नजर आई थीं. टीवी शो एक हजारों में मेरी बहना है, ये रिश्ता क्या कहलाता है और सीरियल ‘चक्रवर्ती अशोक सम्राट’ में विदेशी खलनायिका (वैम्प) का किरदार निभा चुकी हैं. सुजैन ने इंडियन एक्टर अखिल मिश्रा से 2009 में शादी की थी. आपको बता दें की सुजैन को 8 भाषाओं जर्मन, फ्रेंच, इटैलियन, स्पैनिश, इंग्लिश, हिंदी, मराठी और बंगाली का अच्छा ज्ञान है.

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अर्जुन माथुर बन रहे हैं राहुल गांधी : अर्जुन माथुर ने अपने करियर की शुरुआत असिस्टेंट के रूप में की. बतौर असिस्टेंट वे क्यूं हो गया न, बंटी और बबली, रंग दे बसंती और मंगल पांडे जैसी फिल्मों में काम कर चुके थे. वहीं क्यूं हो गया न में सुमी का रोल भी किया था. अर्जुन की पिछली फिल्म 2017 में आई विद्या बालन स्टारर बेगम जान थी.

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अहाना कुम्रा ने निभाया प्रियंका का रोल : अहाना ने ज्यादा शौर्ट फिल्मों और वेब सीरीज में काम किया है. 2017 में आई फिल्म लिपस्टिक अंडर माय बुर्का में भी अहाना ने लीला का अहम किरदार निभाया था. 2013 में अमिताभ बच्चन के साथ टीवी सीरीज युद्ध में भी काम कर चुकी हैं, जिसमें वे अमिताभ की बेटी बनी थीं. अहाना ने साल 2009 में शौर्ट फिल्म माई से एक्टिंग की दुनिया में पहला कदम रखा था.

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संजय बारू के रोल में अक्षय खन्ना : 2018 में अक्षय द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर के अलाव सेक्शन 375: मर्जी या जबरदस्ती की शूटिंग कर रहे हैं. अक्षय जयललिता को डेट करने का बयान देकर विवादों में भी घिर चुके थे. अक्षय संजय के रोल में नजर आएंगे. साल 2010 में अक्षय एक मनी फ्रौड केस में 50 लाख रूपये का नुकसान उठा चुके हैं. उन्हें कमोडिटी एक्सचेंज के जरिए 45 दिन में इस राशि को दोगुना करने का लालच दिया गया था.

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गुरशरण कौर बनी हमलोग की मझली : दिव्या सेठ शाह फिल्म में मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर का किरदार निभाएंगी. दूरदर्शन के फेमस सीरियल ‘हमलोग’ की ‘मझली’ के रूप में मिली थी. दिव्या जब वी मेट, इंग्लिश-विंग्लिश दिल धड़कने दो और पटेल की पंजाबी शादी जैसी फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं. इंडस्ट्री में आने से पहले वे थिएटर डायरेक्ट बैरी जौन के साथ कई नाटकों में काम कर चुकी हैं.

आपके फोन की सेंटिंग ढूंढ लेगी आपके लापता फोन का पता

आज के दौर में मोबाइल फोन सिर्फ कौलिंग तक के लिए ही नहीं बल्कि बैंकिंग ट्रांजेक्शन करने के लिए भी काम में लिया जाता है. टेक्नोलौजी के क्षेत्र में बढ़ते इनोवेशन्स ने पूरी दुनिया को छोटे से मोबाइल फोन में समेट कर रख दिया है. कहीं भी पैसे ट्रांसफर करने हो तो मोबाइल फोन से ऐप के द्वारा आसानी से कर सकते हैं. ऐसे में हमारी सारी जरूरी जानकारी जैसे पर्सनल फोटोज, वीडियोज के साथ बैंकिंग की भी सारी डिटेल मोबाइल सेव रहती है.

ऐसे में मोबाइल गुम हो जाने पर या चोरी हो जाने पर हमारी जानकारी का गलत इस्तेमाल होने का खतरा बढ़ जाता है जो हमारे लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है. इसलिए हम आपको बता रहे हैं एक ऐसी ऐप के बारें में जिसकी मदद से आप अपने गुम हुए स्मार्ट फोन को आसानी से ढूंढ सकते हैं. आपको बता दें की यह डिवाइस मैनेजर का अपग्रेड वर्जन है जिसका नाम फाइंड माय डिवाइस है.

फाइंड माय डिवाइस

– 2013 में गूगल ने डिवाइस मैनेजर इंट्रोड्यूस किया था जो आपके गुम हुए स्मार्ट फोन को ढूंढ निकालने में आपकी मदद करता था.

– फिर 2017 में गूगल ने कुछ और फीचर्स के साथ डिवाइस मैनेजर को अपग्रेड किया और ‘फाइंड माय डिवाइस’ के नाम से लौन्च किया.

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ऐसे करें सर्च

फाइंड माय डिवाइस

– यह आपके एंड्रौयड स्मार्टफोन जिसमें किटकेट उससे लेटेस्ट वर्जन को औपरेटिंग सिस्टम है पर काम करेगा.

– इसके लिए आपके स्मार्ट फोन में आपकी जीमेल अकौउंट लौगइन होना चाहिए साथ ही लोकेशन का आप्शन औन होना चाहिए. ध्यान रहें इसके लिए आपका डेटा औन होना चाहिए.

फाइंड माय डिवाइस बताएगा लास्ट लोकेशन

– अगर आपका स्मार्टफोन गुम हो गया है तो और उसका इंटरनेट औफ है तो इस कंडिशन में भी फाइंड माय डिवाइस आपके गूगल मैप लोक्शन हिस्ट्री से आपको लास्ट लोकेशन बता देता है जिसके ट्रेस कर आप अपने फोन का पता लगा सकते हैं.

वाई-फाई एक्सेस प्वौइंट भी बता देता है

– फाइंड माय डिवाइस से आप अपने मोबाइल की लास्ट वाई-फाई क्नेक्टिविटी लोकेशन भी पता लगा सकते हैं जो आपके फोन का ढूंढने में आपकी मदद कर सकता है.

कितनी बैट्री थी मोबाइन फोन में

– फाइंड माय डिवाइस से आप अपने गुम हुए मोबइल का बैट्री लेवल भी पता लगा सकते हैं. जिससे यूजर यह अंदाजा लगा सकता है कि उसके मोबाइल और कितनी देर तक औन रह सकता है और उसे अपने मोबाइल तक कितनी देर में पहुंचना होगा.

रिंग, मोबाइल लौक, डेटा डिलीट भी कर सकते हैं

– फाइंड माय डिवाइस से आप आपने मोबाइल फोन पर रिंग भी दे सकते हैं.

– इस ऐप से आप आपने मोबाइल फोन का डेटा डिलिट भी कर सकते हैं.

– साथ ही आप अपने फोन को लौक भी कर सकते हैं.

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