पर्यावरण संरक्षण, बिजली व पानी बचाओ, शिक्षा आदि की बात करने वाली बाल फिल्म ‘‘हमारी पलटन’’ कमजोर पटकथा व निर्देशन के चलते उतनी बेहतरीन फिल्म नहीं बन पाई, जितनी बन सकती थी. फिल्म ‘‘हमारी पलटन’’ की शुरुआत होती है बड़ी संख्या में हरे भरे पेड़ों के काटे जाने व पृथ्वी पर पानी के अभाव में सूखा पड़ने के दृश्यों के साथ. फिर कुछ वर्ष पहले बारिश के मौसम में उत्तराखंड में हुइ तबाही के टीवी समाचार के साथ फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है. एक शिक्षिका नंदिता गांव के बच्चों को इकट्ठा कर उन्हें पढ़ाती हैं. वह समाज सेविका हैं. जबकि मास्टरजी (टौम आल्टर) के नाम से मशहूर उनके पति भी नंदिता के बच्चों के लिए स्कूल की किताबें व नोटबुक आदि उपलब्ध कराते रहते हैं.

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