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विकेट का जश्न मनाते वक्त घायल हुआ यह पाकिस्तानी खिलाड़ी

गेंदबाजों के दमदार प्रदर्शन के बाद सलामी बल्लेबाज फखर जमान (नाबाद 117) की बेहतरीन शतकीय पारी के दम पर पाकिस्तान ने क्वींस स्पोटर्स क्लब मैदान पर खेले गए दूसरे मैच में जिम्बाब्वे को नौ विकेट से हरा दिया. इसी के साथ पाकिस्तान ने पांच वन-डे मैचों की सीरीज में 2-0 की बढ़त ले ली है. पाकिस्तान ने चार विकेट लेने वाले उस्मान खान और तीन विकेट लेने वाले हसन अली की धारदार गेंदबाजी से जिम्बाब्वे को 48.2 ओवरों में 194 रनों पर ही औल आउट कर दिया और फिर जमन के शतक के दम पर इस आसान से लक्ष्य को 36 ओवरों में एक विकेट खोकर हासिल कर लिया है. पाकिस्तान के तेज गेंदबाज हसन अली ने पिछले 14 महीनों में जबरदस्त परफौर्मेंस से सभी को हैरान किया है. विकेट लेने के बाद मैदान पर उनका जश्न मनाने का तरीका भी बेहद अनोखा है, जो उनके फैन्स को भी खूब भाता है.

हसन अली का मैदान पर विकेट लेने के बाद जश्न मनाने का अंदाज बौम्ब एक्सप्लोजन (Bomb Explosion) के नाम से जाना जाता है. इस मैच में 3 विकेट लेने वाले हसन अली ने एक बार फिर अपने अंदाज में विकेट लेने का जश्न मनाया, लेकिन इस बार उनका जश्न उनपर ही भारी पड़ गया है.

कंधे में आई चोट

दरअसल, हसन अली ने बल्लेबाज की गिल्लियां उड़ाने के बाद एक बार फिर अपने ही अंदाज में जश्न मनाया, लेकिन इस जश्न में उनका कंधा चोटिल हो गया. जश्न मनाने के दौरान उनके कंधे में अकड़न आ गई और वो मैदान पर ही दर्द से कराह उठे. सोशल मीडिया पर उनके इस जश्न का वीडियो वायरल हो रहा है.

24 साल के हसन अली एक शानदार गेंदबाज बनकर उभर रहे हैं. हसन अली 32 वन-डे मैचों में अबतक 66 विकेट अपने नाम कर चुके हैं. अगस्त 2016 में आयरलैंड के खिलाफ वन-डे में डेब्यू करने वाले हसन अली पाकिस्तान के प्रमुख विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं. अपनी इस कामयाबी पर हसन अली का कहना है कि, ये किसी सपने के साकार होने जैसा है. मैं बचपन में बहुत से लक्ष्य तय किए थे, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं टौप गेंदबाजों में शामिल हो पाऊंगा. आईसीसी की वन-डे रैंकिंग में हसन अली 711 अंकों के साथ तीसरे नंबर पर हैं.

बता दें कि हसन ने श्रीलंका के खिलाफ 4-0 की जीत में अहम भूमिका निभाई थी. दुबई में हुई इस सीरीज में हसन ने 12 विकेट लिए थे. पिछले साल जून में इंग्लैंड में हुई चैंपियंस ट्रौफी में भी हसन अली ने 13 विकेट लेकर सभी को हैरान कर दिया था. उन्हें ‘प्लेयर औफ दिन टूर्नामेंट’ का खिताब दिया गया था.

आखिर कौन जीतेगा टाटा और रिलायंस ग्रुप के बीच चल रही बादशाहत की जंग

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी एशिया के सबसे रईस शख्स बन गए हैं. वहीं, उनकी कंपनी भी लगातार अच्छा परफौर्म कर रही है. जियो के दम पर रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 7 लाख करोड़ की मार्केट कैप को पार कर लिया है. साथ ही रिलायंस इंडस्ट्रीज ने मुकेश अंबानी को चार साल के लिए चेयरमैन नियुक्त किया है. उनका वेतन भी बढ़ाया गया है. अब उनके साथ एक चुनौती है. ये चुनौती है फिर से नंबर वन बनने की. लेकिन, उन्हें चुनौती से पार पाने के लिए सामना करना होगा टाटा का. यह एक ऐसा नाम है जो लोगों के जहन में बसा है. पिछले 5 साल से यह जंग जारी है. लेकिन, कौन सी है यह जंग?

बादशाहत की जंग’

शेयर बाजार में मुकेश अंबानी और टाटा के बीच एक अनोखी जंग चल रही है. दरअसल, यह जंग है बाजार की बादशाहत की. मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के बीच नंबर वन बनने की जंग जारी है. पिछले पांच साल में दो बार ये कंपनियां एक दूसरे को आगे-पीछे करती रही हैं. शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यही लगता है कि मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की जंग आगे भी जारी रहेगी.

मौजूदा समय में टाटा की टीसीएस नंबर एक पर है तो मुकेश अंबानी की आरआईएल दूसरे नंबर पर है. अब आरआईएल इस रेस में फिर तेजी से आगे बढ रही है. टीसीएस टाटा ग्रुप की कंपनी है और रतन टाटा, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन हैं. टाटा ट्रस्ट की टाटा संस में 66 फीसदी हिस्सेदारी है.

रतन टाटा और अंबानी में कौन जीतेगा?

बादशाहत की इस जंग में दो दिग्गज शामिल हैं. पहले मुकेश अंबानी और दूसरे रतन टाटा. क्योंकि, इन दोनों की कंपनियां ही एक दूसरे को टक्कर दे रही हैं. मौजूदा समय में टीसीएस और रिलायंस इंडस्ट्रीज की मार्केट कैप 7 लाख करोड के पार पहुंच चुकी है. टीसीएस की मार्केट कैप 7.61 लाख करोड रुपए है तो आरआईएल की मार्केट कैप भी 7 लाख करोड के पार पहुंच चुका है.

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दोनों के बीच महज 60 हजार करोड रुपए का फासला है. अगर रिलायंस इंडस्ट्रीज में यह तेजी जारी रहती है तो अगले कुछ दिनों में वह टीसीएस को पीछे छोड़ सकती है. वहीं, टीसीएस भी अच्छे तिमाही नतीजों के दम पर आगे बढ़ रही है. कंपनी का आउटलुक बेहतर है. यही वजह है कि बादशाहत की यह जंग कौन जीतेगा कहना मुश्किल है.

कब से जारी है जंग

टीसीएस और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच जंग 2013 से जारी है. दरअसल, साल 2013 से 21 अप्रैल 2017 तक मार्केट कैप के लिहाज से टीसीएस बाजार की दिग्गज कंपनी बनी रही. उस वक्त तक कोई दूसरी कंपनी इसके आसपास नहीं थी. लेकिन, 4 साल की यह बादशाहत रिलायंस ने तोड़ी. 21 अप्रैल 2017 में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने टीसीएस को मार्केट कैप में पीछे छोड़ा.

उस वक्त आरआईएल की मार्केट कैप 4.60 लाख करोड़ थी. 29 जनवरी 2018 के बाद टीसीएस ने बाजार की बादशाहत फिर हासिल की और आरआईएल को पीछे छोड दिया. उस वक्त तक आरआईएल की मार्केट कैप 6.10 लाख करोड रुपए थी. वहीं, टीसीएस 6.11 लाख करोड रुपए की मार्केट कैप के साथ आरआईएल से आगे निकल गई.

मामूली अंतर से पीछे आरआईएल

रिलायंस इंडस्ट्रीज 7 लाख करोड़ के क्लब में शामिल होने वाली टीसीएस के बाद दूसरी कंपनी है. अब दोनों के बीच बाजार के लिहाज है कि 60 हजार करोड़ का मामूली अंतर है. इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि अगले कुछ दिनों में दोनों के बीच कांटे की टक्कर रहेगी. क्योंकि, दोनों ही कंपनियां लगातार अच्छा परफॉर्म कर रही हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज की आगे की प्लानिंग काफी सकारात्मक है. वहीं, टीसीएस भी अच्छी ग्रोथ के साथ कारोबार कर रही है.

रिटर्न के मामले में भी TCS आगे

दोनों कंपनियों ने इस साल में निवेशकों को खूब मालामाल किया है. एक तरह जहां टीसीएस ने इस साल निवेशकों को 49 फीसदी का रिटर्न दिया है. वहीं, आरआईएल ने भी 21.5 फीसदा रिटर्न दिया है. 1 जनवरी 2018 को टीसीएस के एक शेयर की कीमत 1327 रुपए थी, जो 13 जुलाई को 1998 रुपए तक पहुंच चुकी है. उधर, 1 जनवरी 2018 को आरआईएल के एक शेयर की कीमत 911 रुपए थी. जो 13 जुलाई को 1107 रुपए तक पहुंच चुकी है.

ब्रोकरेज हाउस भी हैं बुलिश

रिलायंस इंडस्ट्रीज की नेक्स्ट लेवल प्लानिंग और हाइड्रो-कार्बन बिजनेस में ग्रोथ के आउटलुक को देखते हुए ब्रोकरेज हाउसेज आरआईएल के शेयर पर बुलिश हैं. कई ब्रोकरेज हाउस ने शेयर का लक्ष्य 1300 से ज्यादा का दिया है. वहीं, टीसीएस को लेकर भी ब्रोकरेज हाउसेज की खरीदारी की सलाह है. क्योंकि, कंपनी ने मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं. यही वजह है कि कंपनियों की मार्केट कैप में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा. अब दोनों की मार्केट कैप बढ़ने की स्थिति में कौन आगे निकलेगा यह देखना दिलचस्प होगा.

जान्हवी कपूर को सोशल मीडिया के ट्रोलरों से है यह उम्मीद

एक तरफ जान्हवी कपूर अपने करियर की पहली फिल्म ‘‘धड़क’’ के बीस जुलाई को प्रदर्शित होने को लेकर उत्साहित हैं. तो दूसरी तरफ वह सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग से भी दुःखी हैं. जान्हवी कपूर अपने जन्म दिन से लेकर अब तक कई बार सोशल मीडिया पर ट्रोल हो चुकी हैं.

हाल ही में जब जान्हवी कपूर से हमारी मुलाकात हुई, तो हमने सोशल मीडिया पर उनके ट्रोल होने पर सीधा सवाल करने की बजाय उनसे पूछा कि सोशल मीडिया को लेकर आपकी मम्मी आपके उपर निर्भर हुआ करती थीं. आप खुद सोशल मीडिया पर कितना सक्रिय हैं ?’

इस सवाल पर जान्हवी कपूर ने कहा- ‘‘जहां तक सोशल मीडिया का सवाल है तो यह लोगों से जुड़ने के लिए अच्छी चीज है. आप अपने रूम में बैठे हुए दूसरों से संपर्क रख सकते हैं. आप पूरी दुनिया घूम सकते हैं. लेकिन मैं खुद सोशल मीडिया पर बहुत कम सक्रिय रहती हूं. मेरी मम्मी भी सिर्फ फिल्म के प्रदर्शन के वक्त ही सोशल मीडिया पर सक्रिय होती थीं. मुझे लगता है कि सोशल मीडिया यथार्थ से परे है. वहां बनावटी पन ज्यादा है. हर कोई अपनी एक अलग ईमेज/पहचान चित्रित करने की कोशिश करता है. मैं इस बनावटी पन से दूर रहना चाहती हूं.

मेरी राय में सोशल मीडिया एक नकली दुनिया है. सोशल मीडिया पर लोग कुछ भी कहें, उन्हें कोई रोक नहीं सकता. ऐसे में अपराजकता फैल रही है. कुछ लोग आपके सामने आपसे बहुत अच्छा व्यवहार करते हैं. जबकि सोशल मीडिया पर वही लोग आपके खिलाफ बक बक करते हैं. लोगों को लगता है कि सोशल मिडिया पर उन्हें बोलने की आजादी है, इसलिए वह कुछ भी बोल सकते हैं. मुझे उस वक्त बहुत बुरा लगता है, जब कोई न्यूज वेबपोर्टल या न्यूज चैनल सोशल मीडिया की किसी गलत बात को उठाकर उसे खबर के रूप में पेश करता है. कुछ वेबपोर्टल और न्यूज चैनल मानते हैं कि नकारात्मक चीजों को प्रसारित करने से उन्हें पाठक या दर्शक मिल जाएंगे, जो कि गलत है. पर कुछ लोग लोगों की बुराई करने की आदत को बढ़ाते हैं. इस तरह न्यूज चैनल की खबर से नकारात्मक सोच बढ़ाने वाले लोगों को बढ़ावा मिलता है. जबकि हकीकत यह है कि लोग नकारात्मकता की बजाय सकारात्मक चीजें देखना व पढ़ना चाहते हैं. पर हम कुछ कर नहीं पाते.

सोशल मीडिया पर बहकने वालों से मुझे तकलीफ होती है. सोशल मीडिया पर कुछ लोगों की बातें पढ़कर मुझे आश्चर्य होता है कि इस संसार में लोग इतनी नकारात्मक सोच रखते हैं. कभी कभी मुझे लगता है कि उनके मन में कोई फ्रस्टेशन है, जो कि वह मेरे उपर निकाल रहे हैं या शायद मैंने ऐसा कुछ किया है, जिसकी वजह से वह इस तरह की ट्रोलिंग कर रहे हैं. कुछ लोग तो सोशल मीडिया पर मेरे खिलाफ जमकर नकारात्मक बात कर रहे हैं. मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि वह ऐसा क्यों कर रहे हैं? यदि लोग मेरा काम देखने के बाद इस तरह की बातें करते, तो मुझे कम आश्चर्य होता. पर उम्मीद करती हूं कि मेरी फिल्म ‘धड़क’के प्रदर्शन के बाद मेरा अभिनय देखकर यह सच को समझकर मेरे खिलाफ नकारात्मक बातें करना बंद कर देंगे.’’

जब हमने जान्हवी से पूछा कि सोशल मीडिया पर जब ट्रोलिंग होती है, तो उन्हे गुस्सा आता है या नही? इस पर जान्हवी ने कहा- ‘‘मैं कुछ कर नहीं सकती. क्योंकि सामने वाले को खुद ही निर्णय लेना है कि उसे मेरे संबंध में क्या लिखना है. पर मुझे फिल्म ‘धड़क’से अपने आपको साबित करने का मौका मिला है. उम्मीद है कि इस फिल्म के प्रदर्शन के बाद मुझे ट्रोल करने वाले लोग अपनी गलती का अहसास करेंगें.’’

नोटबंदी के दौरान मिले ओवरटाइम का पैसा वापस करें बैंक कर्मी : एसबीआई

सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक स्टेट बैंक औफ इंडिया (एसबीआई) ने 70,000 कर्मचारियों (पूर्व सहयोगी बैंकों के) से कहा है कि वो उस मुआवजे को वापस करें जो उन्हें नोटबंदी के दौरान ओवरटाइम करने के एवज में मिला था. यह जानकारी एक मीडिया रिपोर्ट के जरिए सामने आई है. गौरतलब है कि नोटबंदी की घोषणा 8 नवंबर 2016 को की गई थी.

पब्लिक सेक्टर के इस बैंक ने इन सभी कर्मचारियों को अपने वर्कफोर्स में शामिल कर लिया है क्योंकि साल 2017 में स्टेट बैंक में स्टेट बैंक औफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक औफ हैदराबाद, स्टेट बैंक औफ मैसूर, स्टेट बैंक औफ पटियाला और स्टेट बैंक औफ त्रावणकोर का विलय हो गया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थी, जिसके बाद 9 नवंबर से ही 500 और 1000 रुपये के नोटों को प्रतिबंधित कर दिया गया था. हालांकि सरकार ने लोगों को अपने पुराने नोट बदलवाने के लिए कुछ समय दिया था, जिस वजह से लोगों को अपने नोट बदलवाने के लिए कई दिन तक बैंकों के बाहर लंबी लंबी लाइनें लगानी पड़ी थीं.

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नोटबंदी की अवधि के दौरान बैंक कर्मचारियों को दिन में 14-14 घंटे तक काम करना पड़ा था. यह स्थिति नोटबंदी के बाद अगले तीन महीने तक देखने को मिली थी. इस दौरान काफी सारे कर्मचारियों की छुट्टियां भी कैंसिल कर दी गई थी क्योंकि पुराने नोट बदलवाने के लिए सरकार की ओर से लोगों को सीमित समय दिया गया था.

एसबीआई क्यों कर रहा है ऐसा?

दरअसल नोटबंदी के दौरान ओवरटाइम करने वाले कर्मचारियों से बैंक प्रबंधन ने वादा किया था कि उन्हें ओवरटाइम के लिए भत्ता दिया जाएगा. इन 70 हजार कर्मचारियों को नोटबंदी के दौरान ओवरटाइम ड्यूटी के लिए भुगतान कर दिया गया था, लेकिन अब उसे वापस मांगा जा रहा है. एसबीआई ने अपने सभी जोनल हेडक्वार्टर को भेजे गए एक पत्र में कहा है कि सिर्फ ‘अपने कर्मचारियों (ब्रांच में काम करने वाले)’ को ही अतिरिक्त काम के लिए पैसा दिया जाए, न कि पूर्व एसोसिएट बैंकों के कर्मचारियों को जिनका अब एसबीआई में विलय हो चुका है.

अमीरों का देश से पलायन

भारत से अमीरों के दूसरे देशों में पलायन ने सरकार के सामने गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है. सोचने वाली बात यह है कि पलायन करने वाले अमीरों की संख्या में हर साल लगातार बढ़ोतरी हो रही है. वर्ष 2017 में 7 हजार अमीरों ने देश छोड़ा था. यह संख्या प्रतिशत में वर्ष 2016 से 16 प्रतिशत अधिक है.

न्यू वर्ल्ड वैल्थ की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 में 7 हजार भारतीय अमीरों ने दूसरे देशों की नागरिकता हासिल की. 2016 में यह संख्या 6 हजार थी जबकि वर्ष 2015 में 4 हजार थी.

भारत के ही अमीर देश नहीं छोड़ रहे हैं बल्कि चीन भी इस मामले में अग्रणी है. वर्ष 2017 में चीन के 10 हजार अमीरों ने दूसरे देशों की नागरिकता ली थी. अन्य देशों में तुर्की से 6 हजार, ब्रिटेन से 4 हजार, फ्रांस से 4 हजार और रूस से 3 हजार अमीरों ने 2017 में दूसरे देशों की नागरिकता प्राप्त की.

मौर्गन स्टेनली इन्वैस्टमैंट मैनेजमैंट के चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट और इमर्जिंग मार्केट्स के प्रमुख रुचिर शर्मा के मुताबिक, भारत के 2.1 प्रतिशत अमीरों ने देश छोड़ा है, जबकि फ्रांस के 1.3 प्रतिशत और चीन के 1.1 प्रतिशत अमीरों ने दूसरे देशों में शरण ली है.

कहां है पसंदीदा ठौर

भारतीय अमीर सब से ज्यादा अमेरिका की नागरिकता लेना चाहते हैं.   आंकड़ों से पता चलता है कि इस के बाद उन की प्राथमिकता यूएई, कनाडा, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड आदि देश हैं, जबकि चीन के अमीर अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया आदि देशों की नागरिकता हासिल करना चाहते हैं. गौरतलब है कि भारत और चीन के जितने अमीर हर साल पलायन करते हैं, लगभग उतने ही नए अमीर हर साल पैदा भी हो जाते हैं.

सवाल उठना लाजिमी है कि जिस देश में लोग अमीर बने हैं, उसी देश को वे क्यों छोड़ रहे हैं. इस का जवाब जानने के लिए सरकार ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के 5 सदस्यों की एक समिति बनाई है. यह समिति यह पता करेगी कि अमीर भारत छोड़ कर विदेश क्यों जा रहे हैं. साथ ही, इस समिति को यह भी जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह ऐसा माहौल तैयार करें जिस से विदेश गए अमीर स्वदेश वापस लौट आएं और फिर कभी देश से पलायन के बारे में न सोचें.

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अनुसार, अमीरों के दूसरे देशों में पलायन करने से कर संबंधी जोखिम उत्पन्न हो रहे हैं. इस समिति का काम ऐसे सभी पहलुओं पर विचार करना और इस संबंध में समुचित नीति बनाने के लिए सुझाव देना भी है.

ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज कंपनी मौर्गन स्टैनली की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014 से ले कर अब तक 23 हजार अमीर देश छोड़ कर विदेश जा चुके हैं.

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पलायन से विकास प्रभावित

क्या अमीरों को देश में कारोबार करने में परेशानी आ रही है? क्या देश की कर प्रणाली उन के कारोबार के अनुकूल नहीं है? क्या वे सरकार द्वारा किए जा रहे आर्थिक सुधारों से सकारात्मक उम्मीद नहीं रखते हैं? क्या उन के कारोबार में बढ़ोतरी नहीं हो रही है? ऐसे कई प्रश्न हैं जिन के सही जवाब सरकार द्वारा गठित समिति को खोजने होंगे.

वैसे लगता है कि कई अमीर कर से बचने के लिए पलायन विदेश कर रहे हैं, क्योंकि मोदी सरकार ने कर चोरों पर सख्ती करनी शुरू दी है. इस में दोराय नहीं है कि कुछ बड़े कारोबारी जरूर अच्छे कारोबारी माहौल की खोज में दूसरे देश की नागरिकता ले रहे हैं, लेकिन अधिकांश अपने काले कारनामों को छिपाने या जांच एजेंसियों व अदालत की कार्यवाही से बचने के लिए दूसरे देशों में पलायन कर रहे हैं.

देश के विकास के लिए देशी और विदेशी दोनों तरह के निवेश की दरकार है. देश का विकास केवल विदेशी निवेश से नहीं हो सकता. देशी निवेश की भी अहम भूमिका होती है. भारत से बड़े कारोबारियों का अगर इसी तरह से देश से पलायन होता रहेगा तो देश में निवेश कहां से आएगा.

घरेलू निवेश के बिना देश का विकास समुचित तरीके से नहीं हो सकता. बड़े कारोबारी जब देश में कारोबार करेंगे तभी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, कारोबारी गतिविधियों में तेजी आएगी, उद्योगधंधों का विकास होगा, नए उत्पादों का निर्माण होगा, विविध उत्पादों की मांग में इजाफा होगा, कर्ज की मांग बढ़ेगी और बाजार का विस्तार होगा. बड़े कारोबारियों के विदेश जाने से देश का नुकसान हो रहा है, जबकि दूसरे देशों को फायदा.

देशों के खजानों में इजाफा

आजकल भारतीय अमीर डोमिनिका, सैंट लूसिया, एंटीगुआ, ग्रेनाडा, सैंट किट्स, माल्टा या साइप्रस जैसे देशों की नागरिकता ले रहे हैं. कुछ देश 3-4 महीने के लिए नागरिकता की एवज में अमीरों से 1 से 2.4 लाख रुपए वसूल करते हैं. इस तरह से नागरिकता हासिल करने वालों की संख्या में बीते साल 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि जुलाई 2017 से फरवरी 2018 के बीच इस तरह से नागरिकता लेने वाले अमीरों की संख्या में 65 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

कम खर्च में नागरिकता मिलने या ज्यादा परेशानी न होने की वजह से भारतीय अमीर कौमनवैल्थ औफ डोमिनिका और सैंट लूसिया सरीखे कैरिबियाई आइलैंड्स की नागरिकता लेने को इच्छुक रहते हैं. दूसरी बात यह है कि इन देशों के पासपोर्ट से ब्रिटेन, सिंगापुर, मलयेशिया, हौंगकौंग सहित 120 देशों में बिना वीजा के यात्रा की जा सकती है.

हां, इन सुवधिओं के एवज में नए नागरिकों को वहां के सरकारी खजाने में एक लाख डौलर जमा कराना होता है. एंटीगुआ जैसे देश तो ज्यादा कमाई करने के लिए सरकारी खजाने में 50 हजार डौलर यानी रुपए में लगभग 34 लाख, जमा करने वाले अमीरों को फटाफट नागरिकता दे रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि ऐसे देशों में विदेशी आय, कैपिटल गेन, गिफ्ट, उत्तराधिकार में मिली संपत्ति आदि पर कोई कर नहीं लगता है. चीन में जिन अमीर भारतीयों का कारोबार है, वे ग्रेनाडा की नागरिकता हासिल कर रहे हैं, क्योंकि यह एक ऐसा कैरिबियाई देश है जिस का पासपोर्ट रहने पर चीन जाने के लिए वीजा लेने की जरूरत नहीं पड़ती है. ग्रेनाडा भारतीय अमीरों से 2 लाख डौलर ले कर नागरिकता मुहैया करा रहा है.

परिवारों को भी सुरक्षा

चूंकि भारत दोहरी नागरिकता की इजाजत नहीं देता है, इसलिए वैसे भारतीय अमीर, जो अपने परिवार की सुरक्षा चाहते हैं, थाईलैंड और पुर्तगाल की नागरिकता लेने की कोशिश करते हैं, क्योंकि इन देशों में परिवारों को भी सुरक्षा मुहैया कराई जाती है. साइप्रस एक ऐसा देश है जो पूरे परिवार को 6 महीने के भीतर नागरिकता देता है, लेकिन इस के लिए इच्छुक उम्मीदवार को कम से कम 20 लाख डौलर रियल एस्टेट में 3 साल के लिए निवेश करना होता है. हंगरी की नागरिकता सस्ती होने के कारण भारतीय अमीर वहां की नागरिकता लेने में भी रुचि ले रहे हैं.

नियमों और नैतिकता की बात करें तो कोई भी देश वैसे व्यक्ति को नागरिकता नहीं दे सकता है जो बैंक का कर्ज न चुकाने का दोषी है या फिर जिस ने कर चोरी की है या अपराधी है. आमतौर पर दूसरे देश के अधिकारियों को नागरिकता लेने वाले उम्मीदवार के बारे में कोई खास जानकारी नहीं होती है और नागरिकता पाने का इच्छुक उम्मीदवार अपनी कारगुजारियों के बारे में बताता नहीं है. ऐसे में दूसरे देशों को ऐसे तमाम मामलों की जानकारी नहीं हो पाती है और एक बार नागरिकता मिलने के बाद ऐसे मामलों का खुलासा होने पर भी उन के खिलाफ कोई भी कार्यवाही संभव नहीं हो पाती.

वास्तव में अमीरों का पलायन एक गंभीर मसला है जिस के दो पहलू हैं. पहला, अगर कोई बड़ा कारोबारी देश में मौजूदा व्यवस्था से असंतुष्ट हो कर देश छोड़ रहा है तो यह निश्चितरूप से चिंता की बात है. दूसरा, अगर कोई अमीर कर चोरी या धोखाधड़ी या बैंक का लोन चुकाए बिना या फिर कोई अपराध करने के बाद दूसरे देश की नागरिकता हासिल कर रहा है तो यह और भी ज्यादा चिंता की बात है. दोनों स्थितियां देश के लिए अच्छी नहीं हैं. ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह जल्दी से जल्दी अमीरों के पलायन को रोकने की कोशिश करे और जरूरत के अनुसार सुधारात्मक उपायों को लागू करे.

चीन में सेंध लगाता बौलीवुड

तकरीबन 11,500 स्क्रीन्स और रोजाना 56 हजार शो. यह आंकड़ा भारत में रिलीज किसी भी हिंदी फिल्म का आज तक नहीं रहा लेकिन इसी स्क्रीन संख्या और शोज के साथ जब अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म ‘टौयलेट-एक प्रेमकथा’ (चाइनीज टाइटल- टौयलेट हीरो) चीन में रिलीज हुई तो इस ने लोकल चीनी भाषा की फिल्मों समेत कई हौलीवुड फिल्मों को भी कमाई के मामले में पीछे छोड़ दिया.

महज 17 दिनों में चीन में 100 करोड़ रुपए का आंकड़ा छूने वाली यह फिल्म भारत में कुल 100 करोड़ रुपए भी नहीं कमा पाई थी. इतने बड़े पैमाने पर ‘दंगल’, ‘सीक्रेट सुपरस्टार’, ‘बजरंगी भाईजान’ और ‘हिंदी मीडियम’ के बाद चीन में रिलीज होनी वाली यह 5वीं भारतीय फिल्म है.

अब तक ओवरसीज मार्केट में सीमित हैसियत रखने वाले बौलीवुड को इन पांचों फिल्मों की बंपर ओपनिंग ने चीनी बौक्सऔफिस के तौर पर एक नया और बड़ा बाजार उपलब्ध करा दिया है.

भारत में आज भी बड़ी से बड़ी फिल्म 4 से 5 हजार स्क्रीन्स में ही रिलीज हो पाती है, क्योंकि देश में सिनेमाघरों की तादाद कम है. लेकिन चीन में बीते कुछ सालों में करीब चारगुनी गति से सिनेमाघर खुले हैं.

हालांकि अब तक यह बाजार अमेरिकी (हौलीवुड) व अन्य यूरोपियन फिल्मों की गिरफ्त में था लेकिन चंद सालों में हिंदी फिल्मों ने अप्रत्याशित कमाई कर बौक्सऔफिस का ओवरसीज मार्केट पूरी तरह से बदल दिया है.

अमेरिका (नौर्थ अमेरिका) के बाद चीन दुनिया का सब से बड़ा मूवी मार्केट है. ऐसे में वहां बौलीवुड की घुसपैठ बड़ी बात है. आलम यह रहा कि आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ ने चीन में सिर्फ कमाई के ही झंडे नहीं गाड़े, बल्कि लोकल फिल्म समीक्षकों और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तारीफें भी बटोरीं.

बासी माल से ताजा मुनाफा

दिलचस्प बात यह है कि इन 5 हिंदी फिल्मों और ‘बाहुबली-2’ (डब वर्जन) ने चीन में अपनी मूल रिलीज डेट के महीनों बाद इतनी कमाई की है यानी ये सभी फिल्में भारत में प्रदर्शन के साथ चीन में रिलीज नहीं हुईं. मसलन, ‘टौयलेट-एक प्रेमकथा’ भारत में 11 अगस्त, 2017 को रिलीज हुई थी जबकि चीन में 8 जून, 2018 को यानी 10 महीने बाद रिलीज हुई यह फिल्म वहां की लेटैस्ट रिलीज फिल्मों पर भारी है.

ये फिल्में इस लिहाज से भी बासी हैं क्योंकि भारत में रिलीज होने और टीवी सैटेलाइट प्रीमियर के बाद इन का प्रदर्शन चीन में हुआ. इतने अंतराल में हिंदी फिल्में डबिंग और सबटाइटल के साथ देशविदेश के दर्शकों द्वारा देखी जा चुकी होती हैं, जैसे कि भारत में अन्य भाषा की फिल्में औनलाइन डाउनलोड के लिए उपलब्ध होती हैं और रिलीज से पहले ही देख ली जाती हैं.

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बौलीवुड इस मामले में काफी फायदे की पोजिशन में है. देशी माध्यमों (थिएटर राइट्स, म्यूजिक राइट्स, सैटेलाइट राइट्स डिजिटल स्ट्रीमिंग राइट्स और रेडियो आदि) से मोटा मुनाफा कमाने के बाद बौलीवुड चीन में बासी सामान से ताजा मुनाफा कमा रहा है.

बड़े पैमाने पर इस ट्रैंड की शुरुआत का श्रेय आमिर खान को जाता है. उन की फिल्म ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ ने चीनी बौक्सऔफिस पर रिलीज के महज 2 दिनों में 100 करोड़ रुपए का बिजनैस कर लिया था, जबकि भारत में यह आंकड़ा फिल्म द्वारा छुआ ही नहीं गया. यानी फिल्म भारत में 80-80 करोड़ रुपए के लाइफटाइम कलैक्शन पर सिमट गई. फिलहाल इस की कुल कमाई 810 करोड़ रुपए है और अभी गिनती जारी है.

आमिर खान की एक और मनोरंजक फिल्म ‘पीके’ चीन में 4,500 स्क्रीन्स पर रिलीज हुई थी और वह चीन में 100 करोड़ रुपए कमाने वाली पहली फिल्म बनी. जबकि उन की ही फिल्म ‘दंगल’ ने रिकौर्ड तोड़ते हुए 9 हजार स्क्रीन्स पर रिलीज हो कर करीब 1,400 करोड़ रुपए कमाए थे.

इतना ही नहीं, चीन के छोटे हिस्से हौंगकौंग में इस फिल्म ने करीब 5 करोड़ रुपए की कमाई की, जबकि इस से पहले वहां रिलीज होने वाली फिल्में बहुत ज्यादा नहीं कमाती थीं. मसलन, ‘हैप्पी न्यू ईयर’ मात्र 1.68 करोड़, ‘थ्री इडियट्स’ 16.8 करोड़, ‘बाहुबली’ 7.54 करोड़ और ‘धूम-3’ जैसी ब्लौकबस्टर फिल्म महज 24 करोड़ रुपए ही कमा पाई थीं.

चीन का चहेता बौलीवुड

चीन के रिश्ते भारत के साथ हमेशा तल्खीभरे रहे हैं. दोनों देशों के बीच आर्थिक, सामरिक मोरचों पर कड़वाहट आज भी बरकरार है. एक युद्ध 1962 में दोनों ने लड़ा है. दोनों देशों के बीच सीमा विवाद भी जगजाहिर है. ऐसे में बौलीवुड फिल्मों का वहां लोकप्रिय होना थोड़ा तो चौंकाता ही है.

जहां पाकिस्तान में हिंदी फिल्मों को मास लोकप्रियता के बावजूद अकसर वहां के सैंसर बोर्ड के प्रतिबंध का सामना करना पड़ता है वहीं चीन में इन्हें हाथोंहाथ लिया जा रहा है. वहां के फिल्म क्रिटिक्स हों, लोकल मीडिया या शिक्षण संस्थान हों, हर जगह अब हिंदी फिल्मों को ले कर उत्सुकता देखी जा रही है. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर चीन में भारतीय फिल्में इतनी पसंद क्यों की जा रही हैं? चीन भारत को अपना सब से बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानता है. आखिर ऐसा हुआ कैसे?

जिस तरह से चीनी माल के सस्ते और कारगर होने के चलते भारतीय लोगों में चाइनीज माल/ब्रैंड्स के प्रति खास आकर्षण देखने को मिलता है वैसे ही अब तक चीन में रिलीज हुई भारतीय फिल्मों का कथानक काफी हद तक गंभीर, सामाजिक सरोकार से जुड़ा, अर्थपूर्ण और मौजूदा संकट/मसलों को उठाते हुए दिखा. जाहिर है इन में से कई समस्याओं से चीनी समाज भी गुजरता है.

इस के अलावा चीन में ज्यादातर साइंस फिक्शन, ऐक्शन, फैंटेसी व थ्रिलर की हौलीवुड फिल्में दिखाई जाती हैं या देशी भाषा की फिल्में बनती हैं. पारिवारिक फिल्मों का निर्माण वहां न के बराबर होता है. कह सकते हैं कि वहां मुद्दापरक गुणवत्ता वाली पारिवारिक फिल्मों की कमी को हिंदी फिल्मों ने पूरा किया.

‘दंगल’ में खेल को ले कर महिलाओं को बढ़ावा देने का संघर्ष और चलन चीन में ज्यादा है, लिहाजा, ‘दंगल’  वहां हाथोंहाथ ली गई. इसी तरह ‘हिंदी मीडियम’ जिस तरह से अंगरेजी भाषा के प्रभुत्व को नकार कर देशी भाषा को बढ़ावा देने पर जोर देती है, यह सिद्धांत भी चीन में है. इसी के चलते चीन ने तकनीकी तौर पर चाइनीज लैंग्वेज को समृद्ध किया है.

एक हौलीवुड फिल्म ‘जूटोपिया’ ने भी चीन में जबरदस्त कमाई की. इस कार्टून फिल्म में एक छोटे कसबे की लड़की की बड़े शहर में कामयाबी को दिखाया गया था. कुछकुछ ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ जैसा कथानक यहां भी दिखा. जहां ‘थ्री इडियट्स’ को चीन के युवाओं ने खूब पसंद किया, वहीं ‘दंगल’ की कहानी ने चीन के मध्यवर्गीय परिवार को कनैक्ट किया. ‘सीक्रेट सुपरस्टार’, ‘टौयलेट एक प्रेमकथा’ और ‘बजरंगी भाईजान’ भी पारिवारिक व मुद्दापरक फिल्में हैं.

इस तरह से चीन में जिन भारतीय फिल्मों को बाजार मिला है, वे पारिवारिक मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश भी दे रही हैं और यही बात चीन के लोगों को पसंद आ रही है.

ये फिल्में भारतीय समाज की बुराइयों व परेशानियों को बेबाकी से पेश करती हैं. चीनी लोग इन में अपने समाज की झलक भी पाते हैं. हालांकि, भारतीय फिल्म निर्माता व अभिनेताओं की चतुर प्रचार रणनीति भी इस का एक अहम कारण रहा है.

महंगे टिकट का गणित

हिंदी फिल्मों की मोटी कमाई का बड़ा कारण चीन में भारतीय फिल्मों को रिलीज के लिए बड़ी संख्या में  इस के लिए 2020 तक 60 हजार से अधिक स्क्रीन्स बनाने का लक्ष्य तय किया गया है. बढ़ती स्क्रीन्स के अलावा टिकट की कीमतें भी अहम कारक हैं. भारत के मुकाबले चीन में सामान्य टिकट की कीमत लगभग 800 रुपए है जबकि भारत में इन के दाम 50-60 रुपए से शुरू हो कर औसतन 500 रुपए तक सीमित रहते हैं. जाहिर है आने वाले समय में भारत में इन फिल्मों की कमाई का औसत चीन से पीछे ही रहेगा.

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आमिर का मार्केटिंग मंत्र

अगर मनोरंजन जगत में कोई बिजनैस के नए उसूल और ट्रैंड बना रहा है तो वे आमिर खान हैं. गौरतलब है कि बौलीवुड में उन्होंने ही अपनी फिल्मों से 100-200 और 500 करोड़ क्लब की शुरुआत की है. फिल्मों के प्रचार को ले कर वे अनोखे तरीके अपनाते हैं और मीडिया से दूरी भी बनाते हैं. ‘गजनी’ फिल्म के दौरान उन्होंने अलगअलग शहरों में प्रचार के लिए कुछ लोगों के बाल काटे तो कभी प्रचार के लिए उन्होंने भेष बदल कर देश का दौरा किया.

जब विदेशों में फिल्म रिलीज और प्रचार करने की बारी आई तो फिल्म ‘लगान’ के सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म के औस्कर नामांकन के बाद अमेरिका में फिल्म लौबीज के साथ वे महीनों प्रचार करते रहे.

इसी तरह चीन में उन की फिल्मों ‘थ्री इडियट्स’, ‘पीके’, ‘दंगल’, ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ ने अब तक सब से ज्यादा कमाई की हैं तो इस में उन की अपनी फिल्मों के प्रचार को ले कर अपनाई गई विशेष रणनीति की भूमिका रही है.

आमिर अपनी फिल्मों में प्रचार के लिए चीन के कई प्रमुख शहरों में घूमे, स्थानीय पकवान खाते दिखे, वहां की स्थानीय सोशल मीडिया साइट्स वीवो (चाइना का ट्विटर कह सकते हैं) के माध्यम से वहां के नागरिकों से संवाद किया, एजुकेशनल हब्स में विजिट किया. इतना ही नहीं, पहली बार वे चीन के फेमस टीवी शो ‘बाइट मी’ में भी टैलीकास्ट हुए. वहां की आधिकारिक मीडिया से भी उन्हें निमंत्रण मिला. ट्विटर पर उन का चीनी फैन क्लब भी सक्रिय रहा. इस तरह से उन्होंने खुद और फिल्मों के जरिए आम चीनियों से सीधा संवाद रखा.

नतीजतन, आज चीन में हर फिल्मप्रेमी आमिर खान के नाम और चेहरे से अच्छी तरह वाकिफ है. साल 2009 में फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ से चीन में डैब्यू करने वाले आमिर आज वहां वही सितारा हैसियत रखते हैं जो कभी रूस में राज कपूर की थी.

चीन बनाम हौलीवुड

भारत ने भले ही चीनी बौक्सऔफिस में सेंध लगानी अभी शुरू की हो लेकिन हौलीवुड यह काम अरसे से कर रहा है. इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चीन के फिल्म बाजार में पिछले साल हौलीवुड फिल्मों की कमाई का प्रतिशत 45.5 फीसदी था.

फिल्म ट्रेड ऐक्सपर्ट मानते हैं कि चीन उत्तरी अमेरिका (अमेरिका और कनाडा) के फिल्म बाजार को पछाड़ कर दुनिया का सब से बड़ा फिल्म बाजार बन जाएगा. हालांकि चीन हौलीवुड की फिल्मों की घुसपैठ रोकने के लिए खुद बड़े बजट की फिल्में अमेरिका व अन्य यूरोपीय देशों में रिलीज कर रहा है लेकिन अभी भी उस का बाजार, बड़ी आबादी, सर्वाधिक स्क्रीन्स चीन को मेगा मार्केट के तौर पर स्थापित करते हैं.

पिछले वर्ष जहां चीन में सर्वाधिक कमाई करने वाली शीर्ष-10 फिल्मों में 5 फिल्में हौलीवुड की थीं, वहीं इस वर्ष इस सूची में सिर्फ 3 फिल्में ‘फ्यूरियस-7’, ‘एवेंजर्स- एज औफ अल्ट्रौन’, ‘जुरासिक वर्ल्ड’ ही जगह बना पाईं. चीन में इस वर्ष सर्वाधिक कमाई करने वाली फिल्म ‘मौंस्टर हंट’ रही, जिस ने कुल 38.11 करोड़ डौलर की कमाई की. वहीं ‘फ्यूरियस-7’  37.9 करोड़ डौलर की कमाई के साथ दूसरे स्थान पर रही.

हालांकि हौलीवुड ने चालाकी दिखाते कुछ सालों से प्रायोजित तरीके से अपनी फिल्मों में कुछ अहम चीनी  किरदारों को तवज्जुह दी, लेकिन जब बात नहीं बनी तो अब कई हौलीवुड स्टूडियोज लोकल चीनी फिल्म निर्माण कंपनियों से साझेदारी में फिल्म निर्माण कर रहे हैं. मसलन, ‘फ्यूरियस-7’ को चाइनीज फिल्म कौर्प्स ने फंड किया था, जबकि अमेरिकी यूनिवर्सल स्टूडियो ने शंघाई में बाकायदा दफ्तर खोला है.

इतना ही नहीं, चीनी ईकौमर्स कंपनी अलीबाबा और औनलाइन गेम्स ग्रुप टेंसेंट भी हौलीवुड में पैसा लगा रहे हैं. ‘मिशन इंपौसिबल’, ‘स्टार ट्रेक’, ‘निंजा सीरीज’ जैसी बड़ी फिल्में ही चीनी फंड के साथ कोपार्टनरशिप में बनी हैं. अलीबाबा तो हौलीवुड के दिग्गज फिल्मकार स्टीवन स्पीलबर्ग के साथ साझेदारी घोषित कर चुका है. अगर यही हाल रहा तो नौर्थ अमेरिका, जो अब तक फिल्म उद्योग का सब से बड़ा बाजार था, चीन से पीछे रह जाएगा.

ज्यादा खुश न हो बौलीवुड

आज हिंदी की 4-5 फिल्में अगर चीन में कमाई कर रही हैं तो इस में बहुत ज्यादा खुश होने की बात नहीं है, क्योंकि यह काम हौलीवुड सालों से कर रहा है और चीन की फिल्में भारत में कई सालों से प्रदर्शित होती रही हैं. सिर्फ सिनेमाघरों में ही नहीं, बल्कि डीवीडी और सीडी फौर्मेट में चीन और हौलीवुड की फिल्में भारत में मोटी कमाई करती रही हैं. इस लिहाज से बौलीवुड अभी शैशव अवस्था में ही है.

आज जिस तरह से बौलीवुड नृत्य, गीतों पर हजारों चीनी सिनेमाघरों में नाचतेगाते दिख रहे हैं, वह अच्छा लग रहा है लेकिन आने वाले समय में यह भारत की नहीं, चीन की जीत होगी क्योंकि थोड़ी और कमाई बढ़ती देख चीन हौलीवुड वाला फार्मूला भारतीय फिल्ममेकर्स के साथ भी अपनाएगा और भारत के साथ फिल्में बना कर अपने देश में खुद रिलीज करेगा. इस फार्मूले से फिल्म की कमाई के मुनाफे में हिस्सा, डिस्ट्रीब्यूशन, एक्जिबिशन, सैटेलाइट और डिजिटल राइट्स भी चीन की जेब में रहेंगे.

इस के साथ ही भारत में सिनेमाघरों-स्क्रीन्स की कम तादाद और घटी दर वाली टिकट कीमतों के चलते मुनाफा चीन में मिलेगा, भारत में नहीं. ऐसे में हमें सबक लेने की जरूरत है चीन से, जिस तरह उस ने आर्थिक, सामाजिक और मनोरंजन जैसे हर मोरचे पर विकास किया है, अपनी आबादी और संसाधनों का सही इस्तेमाल कर आगे बढ़ा है, हमें भी वही करना होगा, वरना जिस तरह से आज भारतीय बाजार चीनी सामानों से लदे हैं और घरेलू लघु उद्योग खत्म हो रहे हैं, फिल्म उद्योग

भी हौलीवुड व चीनी कौर्पोरेट कंपनियों की पकड़ में आ कर दम तोड़ देगा. ऐसे में मनोरंजन उद्योग को बिना टैक्निकल अपग्रेड के चलाना मुश्किल होगा.

हमारे पास नैटफ्लिक्स, अमेजौन जैसा कोई बड़ा स्ट्रीमिंग डिजिटल विकल्प नहीं है. इसलिए थोड़ी सी कमाई देख कर अपनी पीठ थपथपाने से बेहतर है चीन जैसा फिल्म उद्योग विकसित किया जाए और हौलीवुड लैवल का फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रक्चर. तब जा कर बौलीवुड चीन और हौलीवुड के समकक्ष टिक पाएगा.

निराला है यह स्वाद : जुकीनी नाचोज

जुकीनी नाचोज

सामग्री

– 1 जुकीनी

– 2 बड़े चम्मच मैदा

– 1 बड़ा चम्मच कौर्न पाउडर

– 1/2 कप ब्रैडक्रंब्स

– 3 बड़े चम्मच चीज कसा

– तलने के लिए तेल

– 1/4 छोटा चम्मच लालमिर्च

– 1/2 छोटा चम्मच मिक्स हर्ब्स

– 3 बड़े चम्मच टोमैटो चिली सौस

– नमक स्वादानुसार.

विधि

जुकीनी के स्लाइस काट लें. मैदा व कौर्न पाउडर का पेस्ट बना लें. इस में नमक व मिर्च डाल दें. जुकीनी के स्लाइस को इस घोल में लपेट कर ब्रैडक्रंब्स में रोल कर गरम तेल में डीप फ्राई करें. ऊपर से चीज व मिक्स हर्ब्स डालें. टोमैटो चिली सौस के साथ परोसें.

निराला है यह स्वाद : पालक कौर्न टिक्की

पालक कौर्न टिक्की

सामग्री

– 1 कप पालक कटा

– 1/4 कप भुट्टे के दाने

– 1/2 कप पोहा

– 1 कप मूंग दाल

– 1 प्याज कटा

– 1 टमाटर कटा

– 1-2 हरीमिर्चें कटी

– 1/4 छोटा चम्मच गरममसाला

– 1 बड़ा चम्मच मक्खन

– तलने के लिए तेल

– नमक स्वादानुसार.

विधि

कड़ाही में मक्खन गरम कर प्याज भूनें. इस में पालक, टमाटर, कौर्न के दाने, हरीमिर्च व नमक डाल कर ढक कर 3-4 मिनट पकाएं. मूंग दाल को पानी में 2-3 घंटे भिगो कर स्टीम कर लें. पोहा को छलनी में डाल कर अच्छी तरह धो लें व 10-15 मिनट तक रखें. स्टीम की दाल में पोहा मिला कर हरीमिर्च व नमक डाल कर आटा गूंध लें. इस के बराबर भाग करें व पतला कर बीच में पालक का मिश्रण भरें और बंद कर लें. इसी तरह सभी बना लें. फिर तेल गरम कर सुनहरा होने तक तल लें. सौस या चटनी के साथ गरमगरम परोसें.

 

रेपिस्ट को मृत्यु दंड मिलना चाहिए: जौन अब्राहम

पिछले दिनों जौन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमारे देश में रेप और अत्याचार के मामले बढ़े हैं, जिसका असर हर दिन सुर्खियों में दिखता है, इसकी वजह है हमारी कानून व्यवस्था का कमजोर होना, जिसमें अपराधी आसानी से छूट जाते हैं या फिर कानून को फैसला सुनाने में सालों लग जाते हैं. इसके लिए हमरे सिस्टम और कानून व्यवस्था को मजबूत होने की जरुरत है साथ ही सजा भी तुरंत होनी चाहिए, ताकि अपराधी को डर हो और कोई भी ऐसा काम करने से वे डरे.

असल में ये वारदात तब ज्यादा किसी को आघात पहुंचाती है, जब ये वाकया उसके साथ हो. मुझे भी इसका अनुभव हुआ है, क्योंकि मेरे ड्राईवर की बहन की 12 साल की बेटी को हरियाणा से किडनैप कर लिया गया है जिसका अभी तक कुछ अता-पता नहीं है. पुलिस अभी पूछताछ कर रही है ऐसे में डर ये होता है कि वे लोग उसके साथ क्या करेंगे या तो रेप कर छोड़ देंगे, मर्डर कर देंगे या सेक्स वर्कर बना देंगे और इसका असर इतना मुझ पर हुआ है कि मैं पिछले कुछ दिनों से सोया नहीं हूं. मैं कोशिश कर रहा हूं कि बच्ची बच जाये.

इसके आगे जौन कहते हैं कि रेपिस्ट को मृत्यु दंड मिलना चाहिए, क्योंकि ये सबसे बड़ा अपराध है. रेपिस्ट को जेल के अंदर के अपराधी भी पसंद नहीं करते, उसे वहां भी मार दिया जाता है. अगर रेपिस्ट को मरने का डर नहीं होगा, तो वे ऐसा करते रहेंगे. जब आप एक माइनर का रेप करते है, तो अपने आपको कैसे माफ कर सकते हैं ये मुझे समझ में नहीं आता. इसके लिए हर महिला और पुरुष को खड़े होने की जरुरत है. तभी कुछ सही हो सकता है.

देसी मूव्स छोड़ बौलीवुड स्टाइल में डांस करती दिखीं सपना चौधरी

इनदिनों हरियाणवी डांसर सपना चौधरी अपने जलवे हर तरफ बिखेरती दिखाई दे रही हैं. बौलीवुड से लेकर भोजपुरी फिल्मों तक उनके जलवे दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने जिस तरह से खुद का मेकओवर कराया है, उसे देखकर हर कोई हैरान है. इतना ही नहीं अब सपना चौधरी बौलीवुड अदाकाराओं को भी टक्कर देने की तैयारी में नजर आ रही हैं.

सपना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें वो एक इवेंट में डांस करती नजर आ रही हैं. ये डांस वो अपने हरियाणवी नहीं बल्कि बौलीवुड स्टाइल में करती नजर आ रही हैं. इस वीडियो में सपना का स्टाइलिश अवतार और हौट डांस मूव्स ने फैंस के दिलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. वीडियो में सपना चौधरी इस वीडियो में ‘लड़की ब्यूटिफुल कर गई चुल’ और ‘हम्मा-हम्मा’ जैसे हिट बौलीवुड गानों पर डांस करती नजर आ रही हैं.

सपना का ये वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल तो हो ही रहा है साथ में फैंस के रिएक्शन्स भी सामने आ रहे हैं. कुछ फैंस सपना के इस नए डांस की तारीफ करते दिख रहे हैं तो वहीं कुछ का कहना है कि सपना को बौलीवुड के साथ-साथ अपना रागिनियों (हरियाणा लोकगीत) पर डांस करते रहना चाहिए. एक फैन ने कमेंट करते हुए लिखा, कि देसी सपना की बात ही कुछ और है. वहीं, एक और फैन ने कहा कि आप पर हर स्टाइल अच्छा लगता है.

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