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ताजमहल है सिर्फ ताजमहल

ताजमहल को किस ने और क्यों बनाया, यह बात आर्किटैक्टों या हिस्टोरियनों के मतलब की हो सकती है, पर आमजन के लिए यह सौंदर्य का अद्भुत नमूना है. ताजमहल उन सैकड़ों मकबरों में से एक है जिन्हें मुगल व अन्य राजाओं ने अपने मरने के बाद शरीर को रखे जाने के लिए बनवाया था, लेकिन इस इमारत की जो वास्तुकला है वह अनूठी है. प्रवेश करते ही चबूतरे पर खड़े हो कर इमारत को देखने के साथ ही जो अनुभूति होती है वह अनूठी होती है.

अफसोस यह है कि देश की भगवा ब्रिगेड जहां इस को भगवा रंग में रंगने में लगी है, वहीं इमारत के आसपास उगते कारखाने इस का रंग फीका कर रहे हैं. देश का पुरातत्त्व विभाग इस की देखभाल करता है पर यह देखभाल खालिस भारतीय तौर पर बेदिल से अधकचरी की जाती है. सरकारी अमले की ताजमहल में रुचि है ही नहीं, यह इस बात से साफ है कि सुप्रीम कोर्ट को कहना पड़ा कि या तो इस की देखभाल करो या फिर इसे गिरा दो.

एक बार एक ब्रिटिश औफिसर ने इसे गिराने का प्रस्ताव रखा भी था ताकि इस ‘खंडहर’ के पत्थर सड़क बनाने में इस्तेमाल किए जा सकें. गनीमत है कि तभी पुरातत्त्व विभाग ने इसे संरक्षित करने का जिम्मा लिया. ताजमहल अब न मकबरा है जिसे किसी मुगल बादशाह ने बनवाया था, न भगवा भाषा में कोई हिंदू मंदिर. यह तो एक भव्य सुंदर इमारत है जिस के हर कोने से शांति और प्रेम टपकता है. यह विशाल होेते हुए भी अपना सा लगता है और जो इस की छावं में होता?है उसे यह बौना नहीं बनाता, यह इस की खासीयत है.

ताजमहल यों ही प्रेम का प्रतीक नहीं बन गया. मुगल राजाओं ने दुनियाभर में इस से बड़ेबड़े निर्माण कराए हैं. मिस्र में पिरामिड हैं, चीन में ग्रेटवाल है, रोम में वैटिकन है, पेरिस में एफिल टावर है पर इन सब से प्रेम का एहसास नहीं टपकता. ये सब खुशी के प्रतीक नहीं हैं जैसे सफेदशुद्ध लगता ताजमहल है.

इस शुद्धसफेद ताज का रंग अब भूरा हो रहा है और सुप्रीम कोर्ट इसीलिए झल्ला रहा है क्योंकि सरकार का कोई अफसर या नेता इसे ठीक करने की जिम्मेदारी नहीं ले रहा है. इसे ठीक करने के लिए पिछले 20-25 वर्षों में इस के 20-30 मील के दायरे में बनीं फैक्टरियां अगर बंद करनी पड़ें, मकानमहल्ले हटाने पड़ें, सड़कें बंद करनी पड़ें तो कोई हर्ज नहीं. इन सब ने जानते हुए भी ताजमहल को नुकसान पहुंचाने का काम किया है. इन से हमदर्दी जताने की जरूरत नहीं है क्योंकि डिज्नीलैंड फिर बनाए जा सकते हैं लेकिन ताजमहल नहीं.

दरोगा की कातिल पत्नी : भाग 2

तभी गुस्से में आ कर अरशद ने जेब से तमंचा निकाल कर सना को गोली मार दी. गोली उस के सीने पर लगी और वह वहीं जमीन पर गिर पड़ी. गोली मारते ही अरशद अपने दोस्त के साथ बाइक से फरार हो गया था.

इधर, बहन को गोली लगते ही जीनत जोरजोर से चीखने लगी. जीनत की चीखपुकार सुन कर कोचिंग सेंटर से अन्य छात्र बाहर आ गए. उन्होंने खून से लथपथ सना को देखा तो तुरंत एंबुलेंस को फोन किया. लेकिन एंबुलेंस के आने से पहले ही कोचिंग के दोस्त सना को मोटरसाइकिल पर बीच में बैठा कर अस्पताल ले गए. लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

जिस इलाके में वारदात हुई वह सदर थाना क्षेत्र में आता है. सना के पिता मेहरबान अली चूंकि पुलिस में ही दरोगा थे, इसलिए थानाप्रभारी डी.सी. शर्मा ने मामले को गंभीरता से लिया. जीनत के बयान के आधार पर सना की हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई.

अरशद नाम के जिस युवक ने सना को गोली मारी थी उस के बारे में जानकारी हासिल करने में पुलिस को ज्यादा वक्त नहीं लगा. अरशद प्रतापगढ़ के थाना कन्हई के कठहार गांव का रहने वाला था. उस के पिता जहीरूद्दीन सिद्दीकी भी उत्तर प्रदेश पुलिस में थे. अरशद के चाचा सौराब खां शाहजहांपुर में ही बतौर कांस्टेबल तैनात थे. अरशद उन्हीं के साथ रहता था. वह पुलिस लाइन में रह कर पुलिस सेना में भरती होने की तैयारी करता था. इसलिए वह रोजाना दौड़ लगाने के लिए पुलिस लाइन के परेड ग्राउंड में जाता था.

उसी ग्राउंड में सना खान और उस की बहन जीनत भी दौड़ने आती थी. वह भी पुलिस में भरती होने की तैयारी कर रही थीं. बातों ही बातों में अरशद की उन से दोस्ती हो गई. सना मन ही मन अरशद को पसंद करने लगी और जल्द ही दोनों का अकेले में मिलनाजुलना शुरू हो गया. लेकिन अरशद सना की बहन जीनत को ज्यादा पसंद करता था और उसी के साथ निकाह करना चाहता था. जीनत भी अरशद को चाहने लगी थी.

अरशद जब जीनत के साथ हंसीमजाक करता तो सना को ये बात नागवार गुजरती थी. उस ने इस बात पर अरशद को कई बार झिड़कते हुए कह दिया था कि वह उसे पसंद करती है इसलिए वह उस की बहन जीनत पर गलत नजर न रखे.

सना के कई बार ऐसा कहने पर एक दिन अरशद ने सना से साफ कह दिया कि वह उस से नहीं बल्कि जीनत को पसंद करता है और उस से निकाह करना चाहता है. इस के बाद से सना अरशद के जीनत से मेलजोल का विरोध करने लगी. इतना ही नहीं उस ने अपनी मां जाहिदा और पिता मेहरबान अली को भी यह बात बता दी थी. जिस पर जीनत को घर वालों से डांट भी पड़ी थी.

अरशद ने मारा था सना को

जीनत ने यह बात अरशद को बताई तो अरशद ने सना की हत्या कराने का फैसला कर लिया. उस ने सोचा कि सना के न रहने पर उसे जीनत से मिलने में कोई बाधा नहीं आएगी. इस बारे में अरशद ने अपने गांव के बचपन के दोस्त सलमान से बात की. सलमान अरशद का साथ देने के लिए तैयार हो गया और एक दिन उस ने सना को गोली मार दी.

हत्याकांड की जानकारी मिलने के बाद सदर पुलिस ने अगले 24 घंटे में ही अरशद को गिरफ्तार कर के उस के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त 315 बोर का देशी तमंचा, 2 कारतूस और मोटरसाइकिल बरामद कर ली थी.

अरशद से पूछताछ में पता चला था कि हत्या में मदद करने वाला उस का दूसरा साथी भी प्रतापगढ़ जिले के गांव कढ़ार का रहने वाला सलमान है, तो पुलिस ने सलमान की गिरफ्तारी के प्रयास करते हुए कई बार उस के ठिकानों पर दबिशें दीं, लेकिन सलमान हर बार पुलिस की पकड़ में आने से बचता रहा.

आखिरकार एसपी सुभाष चंद्र शाक्य ने उस की गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपए का ईनाम घोषित कर दिया. जिस के एक हफ्ते बाद सलमान को सदर पुलिस ने रोडवेज बस स्टैंड से गिरफ्तार कर लिया. आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

थानाप्रभारी डी.सी. शर्मा को अनायास सना की हत्या करने वाले कातिल अरशद का वह कबूल नामा भी याद आने लगा जब उस ने बताया था कि सना चाहती थी कि अगर वह उस के पिता मेहरबान अली को मार देने में उस की मदद करे तो अनुकंपा के आधार पर उन की नौकरी उसे मिल जाएगी.

सना ने अरशद से ये भी कहा था कि यदि वह ऐसा कर देगा तो वह उस से शादी कर लेगी. अरशद ने ये भी बताया था कि सना ने उस से कहा था कि उस के पिता उस की मां और सभी बहनों के साथ न सिर्फ मारपीट करते हैं बल्कि सभी बहनों पर पाबंदियां भी लगाते हैं. लेकिन अरशद ने सना का ये औफर इसलिए ठुकरा दिया था, क्योंकि वह सना से नहीं बल्कि उस की बहन जीनत से प्यार करता था.

घर वालों के बयानों में मिला विरोधाभास

उस वक्त तो थानाप्रभारी को लगा था कि अरशद शायद अपने बचाव में और सना को ही दोषी ठहराने के लिए झूठी कहानी गढ़ रहा है. लेकिन अब जबकि दरोगा मेहरबान अली की हत्या हुई तो उन्हें अरशद के उस बयान में सच्चाई नजर आने लगी. उन्हें लगने लगा कि संभव है, मेहरबान अली की हत्या का राज कहीं न कहीं उन के घर में ही छिपा हो.

अगली सुबह सब से पहले उन्होंने पुलिस टीम के साथ मेहरबान अली के घर का दौरा किया. उन्होंने एकएक कर के मेहरबान अली की पत्नी और उस की बेटियों से पूछताछ की. उन्होंने सभी से मेहरबान अली के शनिवार को घर से बाहर जाने का घटनाक्रम पूछा था. तो न जाने क्यों मांबेटियों के बयानों में एक के बाद एक कई विरोधाभास नजर आए.

किसी ने बताया कि वह दोपहर को खाना खा कर ड्यूटी चले गए थे. किसी ने बताया कि वह सुबह 10 बजे ही रात की ड्यूटी कर के घर लौटे थे और शाम को घर से गए थे. यह भी पता चला कि उन्होंने रात को घर न लौटने पर पुलिस लाइन में फोन कर के उन के घर न लौटने के बारे में पूछा था. लेकिन वहां से पता चला कि उस दिन मेहरबान अली ड्यूटी पर आए ही नहीं थे.

थानाप्रभारी शर्मा ने एसएसआई रामनरेश यादव को पुलिस लाइन में बने वायरलैस कंट्रोल रूम भेजा तो उन्हें पता चला कि मेहरबान अली के बारे में जानकारी लेने के लिए उन की पत्नी जाहिदा ने पुलिस लाइन में कोई फोन नहीं किया था. यह सुन कर थानाप्रभारी का शक यकीन में बदलने लगा कि हो न हो मेहरबान अली के कातिल उन के घर में ही छिपे हैं.

अपने शक को पुख्ता करने के लिए जब उन्होंने वायरलैस औफिस में मेहरबान अली की ड्यूटी का चार्ट निकलवाया तो जानकारी मिली कि मेहरबान अली इस सप्ताह रात की ड्यूटी पर तैनात थे. वह शुक्रवार की रात को ड्यूटी कर के शनिवार सुबह अपने घर आए थे.

डी.सी. शर्मा सोचने लगे कि अगर मेहरबान अली रात की ड्यूटी कर के घर लौटे थे तो दोपहर साढ़े 12 बजे वह भला दोबारा ड्यूटी पर क्यों जाएंगे. अब उन्हें लगने लगा कि मेहरबान अली को ले कर घर वाले झूठ बोल रहे हैं. इस झूठ का परदाफाश करना ही पड़ेगा.

थानाप्रभारी पुलिस टीम और फोरेंसिक टीम को ले कर एक बार फिर मेहरबान अली के घर पहुंचे. उन्होंने जब उन के घर व आसपास के घरों का निरीक्षण किया तो अनायास उन की नजर उन के घर के सामने वाले घर की छत पर लगे सीसीटीवी कैमरे पर पड़ी.

सीसीटीवी कैमरे से मिला क्लू

संयोग से सीसीटीवी कैमरे की दिशा ऐसी थी कि मेहरबान अली के घर आनेजाने वाला हर शख्स वीडियो में कैद हो सकता था. उन्होंने सीसीटीवी की फुटेज देखी तो अचानक मेहरबान अली हत्याकांड का पूरा सच सब के सामने आ गया.

सीसीटीवी वीडियो में 23 जून, 2018 को सुबह 9 बजे दरोगा मेहरबान अली घर के अंदर दाखिल होते दिखे थे. संभवत: वह उस वक्त अपनी ड्यूटी से लौटे थे. लगभग डेढ़ घंटे बाद घर के अंदर 2 अन्य लोग जाते दिखे लेकिन देर रात तक वह दोनों वापस लौटते नहीं दिखे. इस के बाद रात होने तक कोई असामान्य बात नहीं दिखी. लेकिन रात को 10 बजे के बाद अचानक मेहरबान अली की पत्नी व बेटियों की असामान्य गतिविधियां दिखाई पड़ीं.

पुश नोटिफिकेशंस से हैं परेशान? ऐसे पाएं छुटकारा

कई वेबसाइट्स आपके स्मार्टफोन या कम्प्यूटर पर अपने अपडेट्स सीधे भेजने के लिए पुश नोटिफिकेशंस सेवा का इस्तेमाल करते हैं. यूजर अगर इन्हें एक बार सब्सक्राइब कर ले तो वेबासाइट विशेष खबर, इवेंट और एक्टिविटी के अलर्ट्स भेजती रहती हैं. कई दफा जरूरत से ज्यादा नोटिफिकेशंस हमारा ध्यान भटका देते हैं और उलझन का कारण बनते लगते हैं.

कई बार अनजाने में भी ऐसे नोटिफिकेशंस सब्सक्राइब हो जाते हैं और जो फिर सिरदर्दी की वजह बनते हैं. ऐसे में आपके पास दो उपाय हैं, पहला- संबंधित वेबसाइट के नोटिफिकेशंस को ब्लौक कर दें. दूसरा यह कि सभी नोटिफिकेशंस को बंद कर दें.

एंड्रायड स्मार्टफोन और टेबलेट के लिए उपाय

स्मार्टफोन या टेबलेट पर क्राम ऐप खोलिए. सबसे ऊपर दाईं ओर तीन होरिजेंटल डौट्स पर क्लिक करिए. साइट सेटिंग्स औप्शन पर जाइए और नोटिफिकेशंस के विकल्प पर क्लिक करिए. स्क्राल डाउन करके साइट सेक्शन पर आइये और जिस वेबासाइट का नोटिफिकेशन बंद करना है, उसका टोगल टर्न औफ कर दीजिए. आप सेटिंग्स में टर्न औन और औफ वाले टोगल को टर्न औफ कर सभी नोटिफिकेशन को एक साथ भी बंद कर सकते हैं.

डेस्कटौप पर गूगल क्राम के लिए उपाय

अपने पीसी या मैक पर गूगल क्राम खोलिए. सबसे ऊपर दाई ओर बने तीन होरिजेंटल डौट्स पर क्लिक करिए. सेटिंग्स औप्शन में जाइए, नीचे की तरफ स्क्राल करते हुए एडवांस के औप्शन पर जाइए. यहां कंटेंट सेटिंग्स के औप्शन पर जाकर क्लिक करिए.

अब ठीक नीचे माइक्रोफोन औप्शन के पास आपको नोटिफिकेशंस सेटिंग्स का औप्शन मिलेगा. अब नोटिफिकेशन सेटिंग्स पेज पर तब तक नीचे की ओर स्क्राल करिए जब तक कि अलाउ सेक्शन नहीं आता है. अब दाईं ओर तीन होरिजेंटल डौट्स पर क्लिक करें, उसमें ब्लौक, एडिट, रिमूव के औप्शन आएंगे, उनमें से ब्लौक पर क्लिक करें. इस प्रकार आप पर्टिकुलर वेबसाइट के पुश नोटिफिकेशंस से निजात पा सकते हैं. अगर आप सारे नोटिफिकेशंस बंद करना चाहतै हैं तो ऊपर की ओर स्क्राल करके आस्क बिफोर सेंडिंग के सामने वाले टोगल को टर्न औफ कर दीजिए.

एटीएम से पैसे निकालते समय रहें अलर्ट, स्कीमर फ्रौड से बचें

कोलकाता में एक बड़े एटीएम फ्रौड का खुलासा हुआ है. पांच लोगों के गैंग ने स्कीमर्स के जरिए दर्जनों लोगों को लाखों रुपये की चपत लगा दी. इससे एक बार फिर एटीएम सुरक्षा को लेकर चिंता गहरा गई है. आखिर कैसे होता है स्कीमर्स से फ्रौड और कैसे करें इससे बचाव…

क्या है एटीएम स्कीमिंग?

एटीएम स्कीमिंग असल में डेबिट-क्रेडिट कार्ड की डेटा चोरी है. स्कीमर नाम के एक छोटे डिवाइस को एटीएम से जोड़ दिया जाता है. जैसे ही कार्ड को एटीएम में स्वाइप किया जाता है, इसके मैगनेटिक स्ट्रिप पर स्टोर डेटा को स्कीमर कौपी कर लेता है.

कैसे किया जाता है यह?

चोर स्कीमर को एटीएम कार्ड स्वाइपिंग मेकनिजम से जोड़ देते हैं. हालांकि, केवल स्कीमर ही काफी नहीं है. चोरों को कार्ड डेटा के साथ ही आपके पिन की भी जरूरत पड़ेगी. इसे हासिल करने के लिए वे एटीएम में एक कैमरा लगा देते हैं या पहले से एटीएम में लगे कैमरे को हैक कर लेते हैं. कार्ड डेटा और पिन हासिल करने के बाद कार्ड की क्लोनिंग कर पैसे निकाले जाते हैं या औनलाइन खरीदारी कर ली जाती है.

कैसे पकड़ें स्कीमर?

स्कीमर को पकड़ना आसान है. आपको बस इतना करना है कि एटीएम इस्तेमाल से पहले इसे जरा ध्यान से देख लें. मशीन में कार्ड रीडर और कीपैड पर नजर डालिए. यदि कार्ड रीडर सेक्शन आगे बढ़ा, बिगड़ा, अव्यवस्थित या निकला हुआ दिख रहा है या कीपैड उभरा हुआ है तो समझ लें कुछ गड़बड़ है. यदि मशीन से किसी तरह की छेड़छाड़ का अहसास हो तो इस्तेमाल ना करें.

​​बचाव और उपाय

एटीएम पिन एंटर करते समय हमेशा एटीएम कीपैड को कवर कर लें. अपने बैंक ट्रांजैक्शन का एसएमएस अपडेट पाने के लिए मौजूदा मोबाइल नंबर को रजिस्टर कराएं. यदि आपके कार्ड से कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन होता है तो आपको मोबाइल पर अलर्ट मिल जाएगा.

एटीएम डीटेल चोरी होने पर क्या करें?

फ्रौड की जानकारी जल्द से जल्द बैंक को दें. उदाहरण के तौर पर आपका ‘बैंक ए’ में अकाउंट है और आपने ‘बैंक बी’ के एटीएम से नकदी निकाली. ‘बैंक ए’ को तुरंत शिकायत दें. आरबीआई के मुताबिक, बैंक को जितनी देर से सूचना देंगे, नुकसान का रिस्क उतना ही अधिक होगा.

फ्रौड हो गया तो कौन देगा पैसे?

ऐसे मामलों में कार्ड जारी करने वाले बैंक को पीड़ित को पैसे देने पड़ते हैं. प्राथमिक जांच में यदि यह साबित हो जाता है कि आप स्कीमिंग फ्रौड के शिकार हैं तो बैंक नुकसान की भरपाई करता है. आरबीआई के मुताबिक ऐसी स्थिति में कस्टर की जवाबदेही शून्य है. बैंक और ग्राहक की गलती नहीं होने पर यानी थर्ड पार्टी ब्रीच के मामले में बैंक को भुगतान करना होता है.

जरमेन-कोले की दोस्ती में शेरिल के कारण दरार..!

फुटबौलर जरमेन पेनेट की निजी जिंदगी हमेशा से विवादों में रही. आए दिन उनके अफेयर काफी सुर्खियों में रहते हैं. इस कारण उन्हें इंग्लैंड फुटबौल का बैड ब्वॉय भी कहा जाता है. 35 वर्षीय जरमेन अपनी इस छवि के लिए कई बार अफसोस भी होता है.

बुधवार को एक ब्रिटिश कार्यक्रम के दौरान जरमेन ने अपनी जिदंगी से जुड़े कई चौंकाने वाले अहम खुलासे किए. इस दौरान उन्होंने वह खुलासा भी किया, जिससे उन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ हुई थी. उन्होंने कहा कि 2010 में उनके साथी फुटबौलर एश्ले कोल का अपनी पत्नी शेरिल से काफी विवाद चल रहा था. दोनों के बीच तलाक लेने की खबरें उड़ने लगी थी.

उन्होंने कहा, मैं और एश्ले काफी अच्छे दोस्त थे. पर, हमारी दोस्ती में उस समय दरार पड़ गई, जब मीडिया ने यह खबरें आने लगी कि मेरे और शेरिल के बीच अफेयर चल रहा है. जरमेन ने कहा कि उनके लिए यह खबर दिल को काफी चोट पहुंचाने वाली थी, क्योंकि उनके और शेरिल के बीच ऐसा कुछ भी नहीं था. ऐसा संभव भी नहीं था क्योंकि शेरिल उनके सबसे अच्छे दोस्त की पत्नी थी.

वह बोले, मैं हमेशा से ही इस तरह के आरोपों के लिए मीडिया के लिए आसान निशाना था. इस कारण मेरी एश्ले के साथ दोस्ती टूटने के कगार पर आ गई थी. हालांकि शुक्र रहा कि हम दोनों के बीच गलतफहमी बाद में खत्म हो गई. 2010 में शेरिल और एश्ले का रिश्ता नहीं टिक सका और दोनों के बीच तलाक हो गया. जरमेन ने लॉरा मर्फी से शादी की थी, लेकिन दोनों एक साल बाद ही अलग हो गए.

सीसीटीवी कैमरा : चाकचौबंद पहरेदार

एक  महिला 19 नवंबर, 2013 को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एटीएम से पैसा निकालने जाती है. पलभर में पहले से घात लगाए बैठा शख्स अंदर दाखिल होता है. इस से पहले कि उक्त महिला खतरे को भांपे, वह शख्स छुरे के बल पर न सिर्फ उसे लूटने की कोशिश करता है बल्कि छुरे से हमला कर उसे घायल भी करता है. यह पूरी घटना एक शटरबंद एटीएम के भीतर घटित होती है. हमलावर इस बात से अंजान था कि एक तकनीकी आंख उसे अपने कैमरे में कैद कर रही है. वह पूरी घटना को अंजाम देता है. लेकिन इस पूरे वाकए को पूरी दुनिया सीसीटीवी की आंख से देखती है. पुलिस भी सीसीटीवी से मिले फुटेज की बदौलत हमलावर की पहचान करती है.

सोचिए अगर सीसीटीवी कैमरा वहां न लगा होता तो इस हादसे की सीधी तसवीरें पुलिस और हम तक कैसे पहुंचतीं. आज के आपराधिक माहौल में बेशक यह तकनीक बेहद मददगार साबित हो रही है.

रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों, शहर के व्यस्त चौराहों, बड़ेबड़े होटलों, संवेदनशील धार्मिकस्थलों, संसद, दफ्तरों, सर्राफा की दुकानों और महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक संस्थानों में दरअसल, सीसीटीवी कैमरे लगा दिए जाते हैं. सीसीटीवी कैमरा आज की दहशतभरी जीवनशैली में सुरक्षा का बड़ा आसरा बन गया है. पुलिस, खुफिया एजेंसियां सब इसी के भरोसे बड़ीबड़ी जिम्मेदारियां छोड़ती हैं. सीसीटीवी कैमरा आज की तारीख में सुरक्षा का एक मुकम्मल पैकेज बन गया है.

हो भी क्यों न? तमाम बढ़ोतरियों के बावजूद देश में न तो इतना पुलिसबल है कि हर जगह पर नजर रखी जा सके और न ही निजी सुरक्षा व्यवस्था का व्यय वहन कर पाना हर किसी के लिए संभव है. इस वजह से देश में तमाम निगरानी का काम इन दिनों एक छोटे से कैमरे के भरोसे हो रहा है. सीसीटीवी कैमरा आज आतंक और अलगाववाद के चरम दौर में सुरक्षा प्रबंधन का एक प्रमुख हथियार बन गया है. बड़े और महत्त्वपूर्ण शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, पुणे, बेंगलुरु और संवेदनशील शहरों जैसे श्रीनगर, अगरतला, शिलोंग, गुवाहाटी आदि में तो ऐसा कोई इलाका नहीं है जो इन दिनों सीसीटीवी कैमरे की निगाह में न हो. सच बात तो यह है कि जैसेजैसे दुनिया का विस्तार हो रहा है, तमाम गतिविधियां बढ़ रही हैं, अपराध की आशंकाएं बढ़ रही हैं वैसेवैसे सीसीटीवी कैमरों की जरूरत और उन की हर जगह मौजूदगी भी बढ़ रही है.

सीसीटीवी कैमरा सिर्फ अपराधियों और आतंकवादियों पर ही नजर नहीं रखता बल्कि ऐसी तमाम आपराधिक घटनाओं को हल करने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है जहां आमतौर पर इंसानी निगहबानी चूक जाती है.

दरअसल, जिस तरीके से आज आधुनिक कामकाज की शैली में कंप्यूटर के बिना हम एक दिन भी नहीं गुजारा कर सकते, ठीक उसी तरह से आज की तारीख में सुरक्षा संबंधी तमाम समस्याओं से हम बिना सीसीटीवी कैमरे के नहीं निबट सकते. सिर्फ हिंदुस्तान में ही नहीं बल्कि आज सीसीटीवी कैमरे पूरी दुनिया के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हो गए हैं. यही वजह है कि दुनिया का हर शहर आज की तारीख में सीसीटीवी कैमरे की जद में है. चाहे न्यूयार्क हो या लंदन, मास्को हो या जोहानेसबर्ग. सभी शहर सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में चौबीसों घंटे रहते हैं.

26/11 की घटना के 1 महीने पहले तत्कालीन केंद्रीय सचिव मधुकर गुप्ता ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि मुंबई शहर को और ज्यादा सीसीटीवी कैमरे की जद में लाया जाए. अगर उस निर्देश पर अमल किया गया होता तो शायद मुंबई शहर इतनी भयावह आतंक की वारदात से बच जाता. अगर 26/11 के खूंखार आतंकवादी आमिर कसाब की तसवीरें बौंबे वीटी स्टेशन में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद नहीं होतीं तो शायद कसाब कानूनी दांवपेंचों के जरिए अपना बचाव करने में कामयाब हो जाता. लेकिन मुंबई के इस सर्वाधिक संवेदनशील रेलवे स्टेशन पर मौजूद सीसीटीवी कैमरे की बदौलत कसाब अपनी पहचान से कभी इंकार करने की स्थिति में नहीं रहा.

चप्पेचप्पे पर नजर

जिस तरह से 26/11 के हमले के बाद भारत के ज्यादातर महत्त्वपूर्ण शहर सीसीटीवी कैमरे की निगहबानी में आ गए ठीक उसी तरह से 9/11 की घटना के बाद से अमेरिका के तमाम छोटेबड़े शहरों का चप्पाचप्पा सीसीटीवी कैमरे के घेरे में समा गया. आज की तारीख में तमाम शहरों में सीसीटीवी कैमरे वहां मौजूद पुलिसवालों से ज्यादा शहर की निगरानी करने में अपनी भूमिका निभाते हैं.

7 जुलाई, 2005 के बाद लंदन भी सीसीटीवी कैमरे की किलेबंदी में तबदील हो गया, क्योंकि इसी दिन लंदन में आत्मघाती आतंकवादियों ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया था. अगर सीसीटीवी कैमरे नहीं होते तो शायद लंदन के उस खौफनाक सुसाइड अटैक को कभी भी बेनकाब नहीं किया जा सकता था, क्योंकि कैमरों के जरिए से लोग उस के लिए जिम्मेदार पाए गए जिन पर पुलिस शक ही नहीं कर रही थी.

दुनिया के तमाम देशों में से इसराईल अकेला ऐसा देश है जिसे आतंकवाद की पीड़ा का सब से ज्यादा अनुभव है. लेकिन इसराईल ही वह देश है जिस ने आतंकवाद से निबटने के तमाम आधुनिक साजोसामान पहले मोरचे पर लगाए हैं. सीसीटीवी कैमरे के इस्तेमाल के मामले में भी वह दुनिया के तमाम देशों से बहुत आगे है. इसराईल के तमाम शहर और महत्त्वपूर्ण मिलिट्री, वित्तीय, राजनीतिक व दूसरे संस्थान 1976 से ही सीसीटीवी की चाकचौबंद निगहबानी में हैं. दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले सीसीटीवी के घनत्व भी इसराईल में कहीं ज्यादा हैं.

सीसीटीवी कैमरा किस तरह आज की तारीख में तमाम सुरक्षाओं के विश्वास का पर्याय बनता जा रहा है, इस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले ब्रिटेन में 18 लाख 50 हजार सीसीटीवी कैमरे मौजूद हैं. अकेले लंदन शहर में 11 हजार सीसीटीवी कैमरे शहर की निगरानी करते हैं. न्यूयार्क में इन की संख्या 8 हजार है और साथ में पुलिस सर्विलांस का भी गहरा पहरा है.

कड़ी सुरक्षा

आज की तारीख में सुरक्षा का पर्याय किस तरह से सीसीटीवी कैमरा हो चुका है, इस का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब लंदन में ओलिंपिक खेल हुए तो पूरा शहर मानो सीसीटीवी कैमरों की जकड़बंदी में घिर गया. सामान्यतौर पर जहां गैर ओलिंपिक समारोह के समय लंदन में महज 11 हजार सीसीटीवी कैमरे थे, वहीं लंदन ओलिंपिक शुरू होने के तकरीबन 1 महीने पहले ही यहां ऐसे कैमरों की भरमार दिखने लगी थी. पूरे खेल समारोह के दौरान अकेला लंदन करीब 65 हजार कैमरों की जद में रहा. शायद लंदन ने सतर्कता का यह सबक चीन से सीखा था, जहां 2008 में बीजिंग ओलिंपिक के दौरान बीजिंग शहर को कैमरों से पाट दिया गया था. बीजिंग ओलिंपिक के दौरान बीजिंग में कुल

3 लाख कैमरे लगाए गए थे. इस से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसे बीजिंग का हर कोना ?कैमरों की जद में रहा होगा. चीन में वैसे 1 करोड़ से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे वर्ष 2011 में ही थे.

एक जरूरत

एक जमाने में कहा जाता था कि सुरक्षाबलों की सतर्कता से यहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता. लेकिन आज यही बात कहनी हो तो कहना पड़ेगा सीसीटीवी कैमरे के चलते किसी इलाके में परिंदा भी पर नहीं मार सकता. वास्तव में जैसेजैसे इंसान ने विकास किया है वैसेवैसे आपराधिक गतिविधियों में बहुत तेज इजाफा हुआ है. हालांकि आवश्यकता आविष्कार की जननी है, इसलिए यह तो नहीं कहा जा सकता कि सीसीटीवी कैमरा इन्हीं बढ़ते अपराधों के चलते अस्तित्व में नहीं आया, लेकिन यह कहना कम महत्त्वपूर्ण नहीं है कि अगर आज सीसीटीवी कैमरा नहीं होता तो देश और दुनिया के तमाम बड़े शहर मौजूदा स्थिति से हजार गुना ज्यादा असुरक्षित होते.

वैसे तो भारत भी सीसीटीवी कैमरे जैसी आधुनिक सुरक्षा प्रणाली से सुरक्षित है लेकिन दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले और हमारी जनसंख्या को देखते हुए हमारे यहां सीसीटीवी कैमरे अभी बहुत कम संख्या में हैं. मसलन, दिल्ली, जहां कुल आबादी के हिसाब से 30 हजार से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए, वहीं पूरी राजधानी में 15 अगस्त, 2012 के पहले तक महज 1,067 सीसीटीवी कैमरे थे. ये बहुत कम हैं क्योंकि दिल्ली में ही अकेले दिल्ली मैट्रो 5,200 सीसीटीवी कैमरों से लैस है. जिस कारण दिल्ली मैट्रो का हर स्टेशन, स्टेशन में मौजूद तमाम लोग और मैट्रो टे्रन कंट्रोल रूम में बैठे सुरक्षा अधिकारियों की निगाहों में पलपल रहते हैं. मुंबई में

5 हजार से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगे हैं जबकि 100 सीसीटीवी कैमरे सिर्फ मुंबई की ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए हैं. बेंगलुरु में हालांकि अभी हर जगह सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं फिर भी शहर में 379 सीसीटीवी कैमरे मौजूद हैं. कोलकाता में इन की संख्या बेहद कम 36 और चेन्नई में 50 है. हैदराबाद इस सिलसिले में 240 सीसीटीवी कैमरों से लैस है.

सीसीटीवी कैमरा आम पुलिसिया व्यवस्था से कहीं ज्यादा भरोसेमंद और चुस्तदुरुस्त है. इस की 2 वजहें हैं — एक तो सीसीटीवी कैमरा इंसानी स्वभाव से मुक्त है जिस कारण वह भावुक नहीं हो सकता. दूसरी बात यह है कि वह आदमियों के मुकाबले कहीं ज्यादा सतर्क रहता है. इसलिए पुलिस वालों से ज्यादा भरोसा अब सीसीटीवी कैमरों पर किया जाता है.

एनपीए में डूबे बैंकों को उबारने का यह उपाय गलत

भारीभरकम कर्जों के कारण डूब रहे बैंकों की गैर विवादित राशि (एनपीए) लगातार बढ़ रही है और उन के समक्ष अस्तित्व का संकट खड़ा हो रहा है. सरकार भी इस से परेशान है. उस ने पंजाब नैशनल बैंक के प्रमुख नेतृत्व में एक समिति गठित कर दी है, जो एनपीए से निबटने के बारे में उपाय सुझाएगी. सरकार को यह कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि एनपीए लगातार बढ़ रहा है.

पिछले वर्ष यह 11.8 फीसदी था जो इस साल बढ़ कर 12.2 फीसदी तक पहुंच सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक का कहना है कि इस स्थिति से सुधार असंभव है. रिजर्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस साल के अंत तक कुछ बैंकों का एनपीए अत्यधिक बढ़ सकता है. इन में आईसीआईसीआई बैंक, सैंट्रल बैंक, बैंक औफ इंडिया, यूको बैंक, ओवरसीज बैंक, देना बैंक, ओरियंटल बैंक औफ कौमर्स, बैंक औफ महाराष्ट्र, यूनाइटेड बैंक, इलाहाबाद बैंक सहित कुल 11 बैंकों के नाम शामिल हैं. इन बैंकों का एनपीए 21 प्रतिशत से बढ़ कर 23 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. यह एनपीए बैंकिंग क्षेत्र के लिए बड़े संकट का कारण बन सकता है.

सरकारी क्षेत्र के आईडीबीआई बैंक की हालत सब से खराब बताई जा रही है. इस के लिए तो सरकार ने उपाय खोज लिया है. भारतीय जीवन बीमा निगम पर इस के 51 प्रतिशत शेयर खरीदने के लिए दबाव बनाया जा रहा है. यह परंपरा ठीक नहीं है. लूटपाट का शिकार हो रहे सरकारी संसाधनों को इस तरह से बचाना गलत है. सरकार के इस कदम की राजनीतिक स्तर पर खूब आलोचना हो रही है. बीमार इकाइयों को सख्त बनाने की प्रक्रिया से स्वस्थ इकाई को बीमार करने का प्रयास अनुचित होगा.

‘पाखी’ को नहीं मिला सेंसर प्रमाण पत्र

फिल्मकार सचिन गुप्ता अपनी चाइल्ड ट्रैफीकिंग पर आधारित फिल्म ‘‘पाखी’’ को ‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’’ द्वारा प्रमाण पत्र देने से इंकार किए जाने से काफी निराश हैं. इसी के चलते अब फिल्म ‘पाखी’ दस अगस्त को सिनेमाघरों में नहीं पहुंच पाएगी. सूत्रों के अनुसार फिल्म ‘‘पाखी’ ’को ‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’’ की परीक्षण समिति ने देखने के बाद टिप्पणी की है-‘‘यह फिल्म बाल तस्करी और यौन शोषण के इर्द गिर्द घूमती है. पर फिल्म में इस विषय को बहुत ही अपरिष्कृत तरीके से दिखाया गया है.

चाइल्ड ट्रैफीकिंग पर आधारित फिल्म ‘‘पाखी’’ की कहानी के केंद्र में 10 साल की लड़की पिहू की सत्य घटना है, जिसकी शादी एक 60 वर्ष के बूढ़े के साथ होती है और फिर उसे देह व्यापार के लिए बेच दिया जाता है. यह फिल्म मानव तस्करी के व्यापार की दुनिया की हकीकत सामने लाती है. स्वतंत्रता के 73 वर्षों के बाद भी विवाह की आड़ में लड़कियों का व्यापार किया जा रहा है.

बचपन की मासूमियत और स्कूल जाने की उम्र में बाल तस्करी के जरिए वेश्यावृत्ति की अंधेरी गुफा में कम उम्र की लड़कियां लगातार फंस रही हैं. पाखी को उसके प्रेमी ने यौन व्यापार में फंसा दिया है. वह खुद को वेश्यावृत्ति की अंधेरे गुफा में पाती है.

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा फिल्म को प्रमाण पत्र देने से इंकार किए जाने पर फिल्म के निर्देशक सचिन गुप्ता कहते हैं-‘‘सामाजिक अपराध पर आधारित फिल्म को प्रमाण पत्र देने से इंकार करने का सेंसर बोर्ड का निर्णय चौंकाने वाला है. फिल्म में हिंसा या अपमानजनक भाषा भी नहीं है. जबकि इससे पहले भी तमाम सामाजिक अपराध के विषय पर आधारित फिल्मों को सेंसर बोर्ड प्रमाण पत्र देता रहा है. फिलहाल हमने सेंसर बोर्ड की पुनः परीक्षण समिति के सामने इसे पास करने का आवेदन किया है.’’

हसीन जहां को महंगा पड़ा दोबारा मौडलिंग करना, शमी ने उठाया ये कदम

भारतीय टीम के तेज गेंदबाज मोहम्‍मद शमी और उनकी पत्नी हसीन जहां के बीच जो विवाद खड़ा हुआ था वह अब तक थमा नहीं है. शमी से कानूनी लड़ाई के बाद हसीन जहां ने एक बार फिर से मौडलिंग की दुनिया में कदम रख बौलीवुड में करियर तलाश रही हैं. उन्‍होंने खुद सोशल मीडिया पर अपनी कई तस्वीरें सांझा कर इसकी जानकारी दी है.

लेकिन इस बीच खबर है कि हसीन जहां को मौडलिंग में वापसी करना महंगा पड़ गया है. अपने पति के साथ विवाद में अब तक हसीन जहां बाउंसर पर बाउंसर फेंक रही थीं, लेकिन इस बार शमी ने हसीन को बोल्‍ड कर दिया है. शमी ने हसीन के मौडलिंग में वापसी को कानूनी रूप से अपना हथियार बना लिया है.

शमी के वकील ने कोर्ट से कहा है कि जब हसीन मौडलिंग करने के साथ ही फिल्में साइन कर रही हैं तो फिर उन्हें किस बात का गुजारा भत्ता दिया जाये. इस पर हसीन जहां के वकील ने विरोध करते हुए कहा है कि अभी सिर्फ बात चल रही है, हसीन न तो मौडलिंग कर रही हैं और न ही उन्होंने कोई फिल्म साइन की है. न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मोहम्मद शमी ने हसीन जहां से संबंधित फोटो व खबरों को बतौर साक्ष्य एकत्र कर लिया है. गौरतलब है कि हसीन जहां ने शमी के खिलाफ कोलकाता कोर्ट में प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने के लिए केस दायर किया है.

फिर जमेगी अर्जुन कपूर और करीना की जोड़ी, इस फिल्म में आएंगे नजर

‘वीरे दी वेडिंग’ की सफलता के बाद अब करीना कपूर खान के लिए तो फिल्मों की लाइन सी लग गई है. उन्होंने अन्य फिल्मों के लिए तैयारी भी शुरू कर दी है. उनकी झोली में अब तक तीन फिल्में हैं. बता दें कि करीना अक्षय कुमार के साथ ‘गुड न्यूज’ में नजर आएंगी. करीना की दूसरी फिल्म की बात करें तो हाल ही में खबर आई कि करण जौहर अपनी अगली फिल्म में रणवीर सिंह के अलावा करीना, आलिया, विकी कौशल और जाह्नवी को कास्ट करने जा रहे हैं.

अब खबर है कि उनके पास एक और तीसरी फिल्म का औफर आ चुका है. खबर है कि करीना ‘लाइफ इन अ मेट्रो’ के सीक्वल के औफर को स्वीकार कर चुकी हैं. खबरों के अनुसार इस फिल्म में रीना के साथ अर्जुन कपूर नजर आएंगे. खबर है कि फिल्म के सीक्वल की स्क्रिप्ट पर काम लगभग पूरा हो चुका है. यदि वाकई इस फिल्म में दोनों नजर आते हैं तो यह फिल्म ‘की ऐंड का’ के बाद एकसाथ उनकी दूसरी फिल्म होगी, जो कि बौक्स औफिस पर काफी सफल रही थी.

मालूम हो कि साल 2007 में आई ‘लाइफ इन अ मेट्रो’ को बौक्स औफिस पर काफी सफलता मिली थी और दर्शकों को यह फिल्म काफी पसंद भी आई थी. बताया जा रहा है कि अब इस फिल्म के सीक्वल की तैयारी शुरू हो चुकी है और फिल्म की एक कहानी का हिस्सा करीना कपूर भी होंगी. रिपोर्ट की मानें तो फिल्म के एक अन्य प्लाट का हिस्सा होंगे अर्जुन कपूर. जहां तक अर्जुन और करीना के ऐक्ट की बात है तो बताया गया है कि दोनों का ट्रैक एक-दूसरे से कनेक्टेड नहीं होगा. फिल्म का निर्देशन अनुराग बासु करने जा रहे हैं.

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