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विश्वरूप 2 : आतंकवाद की समस्या पर उलझी हुई फिल्म

कमल हासन 2013 की अपनी सर्वाधिक विवादास्पद फिल्म ‘‘विश्वरूप’’ का सिक्वअल ‘‘विश्वरूप 2’’ लेकर आए हैं, जो कि आतंकवाद की समस्या पर उलझी हुई फिल्म है.

फिल्म ‘‘विश्वरूप 2’’ की कहानी वहीं से शुरु होती है, जहां ‘विश्वरूप’ की कहानी खत्म हुई थी. कहानी के केंद्र में रॉ एजेंट विशाम अहमद कश्मीरी (कमल हासन) व उनकी पत्नी डा. निरूपमा (पूजा कुमार) और उनकी सहयोगी अस्मिता (एंड्यिा जेरेमिया) हैं. विशाम जब अलकायदा  के मिशन से बाहर निकलता है, तो उसे पता चलता है कि आतंकवाद का जनक उमर कुरेशी (राहुल बोस) अब आतंकवाद को फैलाने के लिए भारत पहुंच चुका है.

इस बार विशाम का मकसद उमर कुरेशी का खात्मा करना है. कहानी आगे बढ़ती है तो विशाम की मुलाकात कई किरदारों से होती हैं. उन्हे भारत सरकार में कार्यरत राजेश मेहता (अनंत महादेवन) पर शक होता है और उनका शक सही निकलता है. आखिरकार कर्नल जगन्नाथ (शेखर कपूर) के हाथों राजेश मेहता मारे जाते हैं. पर राजेश मेहता ने उमर कुरेशी के साथ मिलकर जो चक्रव्यूह रचा था, उसी के चलते विशाम की मुलाकात सलीम (जयदीप अहलावत) से होती है.

फिर अचानक अल्माइजर की बीमारी की शिकार और वृद्धाश्रम में रह रही विशाम की मां (वहीदा रहमान) भी आ जाती हैं. खैर, कहानी कई उतार चढ़ाव व मोड़ के साथ आगे बढ़ती है. अंततः विशाम को उमर कुरेशी के आतंकवाद का सफाया करने में सफलता मिलती है. अंत में अस्पताल में मरणासन्न पड़े उमर कुरेशी के सामने विशाम उमर की पत्नी व दोनो बेटों को खड़ा करता है, जिन्हे अलकायदा मिशन के समय विशाम ने बचाकर सुरक्षित जगह पहुंचवाया था.

कमजोर पटकथा और कहानी के बार बार अतीत व वर्तमान में आते जाते रहने के चलते फिल्म दर्शकों को दुविधा में डालती रहती है. बार बार कहानी अतीत में जाती रहती है और दर्शक उन कड़ियों को जोड़ने के प्रयास में सिरदर्द करा बैठता है. पूरे डेढ़ घंटे तक एक्शन व कई तरह के दूसरे फ्लैशबैक दृश्यों के बाद जब इंटरवल होता है तो दर्शक सोच में पड़ जाता है कि कमल हासन कहना या बताना क्या चाहते हैं.

इंटरवल के बाद कहानी इतनी तेजी से मोड़ लेती है कि सब कुछ बड़ा अजीबोगरीब सा हो जाता है. पटकथा के स्तर पर इतनी कमियां हैं कि फिल्म का विलेन भी ठीक से स्थापित नहीं हो पाता. फिल्म का मुख्य नायक रॉ का एजेंट है, मगर फिल्म में जासूसी का रंग भी नजर नहीं आता.

फिल्म के लेखक, निर्माता, निर्देशक व अभिनेता कमल हासन हैं, इसलिए उन्होंने सिर्फ अपने किरदार पर ही ध्यान दिया है. उनके अलावा कोई किरदार ठीक से विकसित नहीं हुआ.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो कोई भी कलाकार प्रभावित नही करता. फिल्म में एक्शन के सीन अच्छे बन पड़े हैं. लोकेशन ठीक ठाक है. कैमरामैन सनु वर्गीस ने बधाई वाला काम किया है. अन्यथा फिल्म कहीं से भी अपनी तरफ नहीं खिंचती है.

दो घंटे 25 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘विश्वरूप 2’’ का निर्माण कमल हासन व उनके भाई चंद्र हास हासन ने किया है. लेखक व निर्देशक कमल हासन, कैमरामैन सनु वर्गीस, संगीतकार घिबरन तथा फिल्म को अभिनय से संवारने वाले कलाकार हैं – कमल हासन, पूजा कुमार, राहुल बोस, शेखर कपूर, राजेंद्र गुप्ता, जयदीप अहलावत, अनंत महादेवन, वहीदा रहमान, एंड्यिा जेरेमिया व अन्य.

करुणानिधि की मृत्यु, तमिलनाडु की राजनीति में आएंगी नई करवटें

तमिलनाडु के 5 बार मुख्यमंत्री रहे करुणानिधि की 94 वर्ष की आयु में मृत्यु के बाद अब तमिलनाडु की राजनीति में नई करवटें आएंगी. दोनों दिग्गज नेता करुणानिधि और जयललिता की मृत्यु के बाद वहां अगर नेता बचे हैं तो करुणानिधि के परिवार के ही पर स्टालिन दयानिधि मारन और अन्य बाकी द्रविड़ मुनेत्र कषगम का रथ साथसाथ खींचेंगे इस में शक है.

फिलहाल परिवार सत्ता से बाहर है और अब उस के परिवार को फिर सत्ता मिलती है तो साइड में इंतजार कर रहे रजनीकांत और कमलहासन जैसे सितारे खाली हुए स्थान को भर पाएंगे कहा नहीं जा सकता.

तमिलनाडु की राजनीति अब केवल हिंदी विरोध या उत्तर भारत विरोध पर नहीं टिकी है. कांग्रेस का वजूद समाप्त सा है और भारतीय जनता पार्टी लाख कोशिशों के बावजूद जम नहीं पा रही पर क्या नेताओं की नई पीढ़ी या नई पौध जनता को वोट देने के लिए आकर्षित कर पाएगी कहा नहीं जा सकता.

मूलत: तमिलनाडु का प्रबंध उत्तर भारत के राज्यों से ज्यादा अच्छा है. पेरियार, अन्नदुरै, करुणानिधि के धर्म विरोधी होने के बावजूद वहां खासे अंधविश्वास पनपते हैं और धर्म का बोलबाला पर लोग ज्यादा उत्पादक हैं पर साथ ही ज्यादा उग्र भी. इस विरोधाभासी माहौल में नए नेता अपनी जगह बना पाएंगे, इस में संदेह है.

करुणानिधि और उन के पुराने मित्र एम जी रामचंद्रन ने अन्नादुरै की विरासत का पूरा लाभ उठाया था और जयललिता के एम जी रामचंद्रन को विरासत पूरी की पूरी मिल गई थी. एक तरह से वहां अब तक 1967 में कांग्रेस के पलायन के बाद एक सोच की राजनीति चल रही थी जो अब समाप्त हो गई है. कई दशकों से इस सोच में तीखापन नहीं रह गया था पर फिर भी खंडहरों से किले तो मौजूद थे. अब ये किले भी ध्वस्त हो गए हैं.

नेताओं का अभाव कई पार्टियों को समाप्त कर देता है और बड़ी बात नहीं होगी कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम और अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम अपना अस्तित्व जल्दी ही खो बैठें.

समाजवादी पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी, हिंदू महासभा, रिपब्लिकन पार्टी जैसी पार्टियां वारिसों के न होने कारण ही शून्य में विलीन हो गई. भारतीय जनता पार्टी एक अपवाद है पर यह जिस सिद्धांत पर जिंदा है वह कब निरर्थक हो जाए पता नहीं.

करुणानिधि का अभाव किसी को कैसे नहीं खलेगा क्योंकि अरसे से उन्होंने सामाजिक राजनीतिक आंदोलन नहीं शुरू नहीं कर रखा था.

 

गूगल ने पेश किया नया औपरेटिंग सिस्टम, ये हैं शानदार 9 फीचर्स

गूगल ने मई में अपना नया औपरेटिंग सिस्टम पेश कर दिया था. अब इसके असली नाम और फीचर्स का भी पता चल गया है. इस औपरेटिंग सिस्टम का नाम पाई (Pie) है. इसमें कुछ फीचर्स भी जोड़े गए हैं जो फोन में काम को और आसान कर देंगे. यह नया औपरेटिंग सिस्टम iPhone X की डिस्प्ले की तरह आने वाले स्मार्टफोन्स को भी सपोर्ट करेगा.

नोटिफिकेशन एंड स्मार्ट रिप्लाई: नोटिफिकेशन में ही अब और फीचर जोड़ दिए हैं. नए औपरेटिंग सिस्टम में स्मार्ट रिप्लाई का विकल्प दिया गया है. इसके अलावा नोटिफिकेशन में ही फोटो भी दिखाई दे जाएगी. अभी, यूजर्स को नोटिफिकेशन में मौज़ूद अटैचमेंट को देखने के लिए नोटिफेकिशन को खोलना पड़ता है.

नोच डिस्प्ले: अब काफी एंड्रायड स्मार्टफोन्स में iPhone X की तरह डिस्प्ले दी जा रही है. यह उन सभी स्मार्टफोन्स को सपोर्ट करेगा. इसमें पूरी डिस्प्ले का इस्तेमाल होगा. एंड्राइड पाई आपको डेवलपर मोड इनेबल करने के बाद यह कैसा दिख सकता है इसका एक प्रिव्यू देता है. डेवलपर औप्शन के तहत ड्राइंग सेक्शन पर नीचे स्क्रॉल करें, “कटआउट के साथ डिस्प्ले अनुकरण करें” टैप करें, फिर आकार चुनें.

औफिशियल डार्क मोड: गूगल ने अब सेटिंग्स ऐप में औफिशियल डार्क मोड को भी जोड़ दिया है. डार्क मोड के लिए पहले वॉलपेपर पर भरोसा करने के बजाय, यूजर्स अब तय कर सकते हैं कि हमेशा डार्क मोड, लाइट मोड का उपयोग करना है या फोन को स्वयं तय करना है या नहीं.

स्क्रीन शाट्स: नए एंड्रायड सिस्टम में स्क्रीन शाट लेना और आसान हो जाएगा. अब पावर बटन को होल्ड करके स्क्रीन पर टैप करने से स्क्रीन शाट लिया जा सकेगा. हालांकि स्क्रीनशाट लेने का पुराना तरीका भी जारी रहेगा. स्क्रीनशाट के साथ ही एडिट का भी ऑप्शन आएगा. एडिट को सिलेक्ट करके स्क्रीनशाट को एडिट किया जा सकता है.

डेसबोर्ड: फोन की लत को रोकने के लिए गूगल की योजना अपने वेलबींग प्रोग्राम के माध्यम से है. प्रोग्राम अभी भी व्यापक रोलआउट के लिए तैयार नहीं है, लेकिन पिक्सेल स्मार्टफोन ऑनर डिजिटल वेलबींग बीटा में भाग लेने के लिए साइन अप कर सकते हैं. भाग लेने के लिए आपको एक पिक्सेल डिवाइस एंड्राइड 9.0 पाई चलाने की आवश्यकता होगी.

फोन रोटेशन: अपने फोन पर केवल वर्टिकल या पोर्ट्रेट मोड को लौक करने के बजाय, एंड्राइड पाई स्क्रीन रोटेशन के लिए एक बटन दिखाएगा, इस पर टैप करके स्क्रीन को बदला जा सकता है, यदि यह पता चलता है कि आपके फोन का दिशा बदल गई है.

बैटरी स्टेटस: अगर आपके पास गूगल पिक्सल फोन है तो आप एंबिएंट डिस्प्ले में सबसे नीचे बैटरी का पर्सेंटज देख सकेंगे. हालांकि यह नया नहीं है. पर इस पर क्लिक करके कुछ और जानकारियां भी मिलेंगी.

एक्सट्रा सिक्योरिटी: गूगल एंड्रायड पाई में आपकी जानकारी की सुरक्षा में सुधार करने के लिए बहुत कुछ कर रहा है, लेकिन इनमें से अधिकांश हुड के तहत किया जाता है. हालांकि, बटन प्रेस करने के साथ आपके डिवाइस को लौक कर देता है. सक्षम होने पर, यह आपको फिंगरप्रिंट सेंसर या विश्वसनीय वॉइस अनलौक डिसेबल कर देता है. इसके बाद पिन या पेटर्न पर वापस आ जाता है.

गेस्चर नेविगेशन: एंड्राइड पाई के साथ, अब आपके पास एंड्रायड के पारंपरिक तीन-बटन नेविगेशन को मिटाने का ऑप्शन है और अब यह काम गेस्चर से किया जा सकता है. एक होम बटन, वास्तव में यह एक गोली की तरह दिखता है, यह आपके थंब पर आधारित है. बटन पर टैप करके होम पर जाया जा सकता है, बैक जाने के लिए राइट स्वाइप करें, ऐप्स के बीच स्विच करने के लिए लेफ्ट स्वाइप करें, या हालिया ऐप्स या अपने ऐप ड्रावर को देखने के लिए ऊपर स्वाइप करें.

इस बैंक के नाम से आ रहे हैं मैसेज तो हो जाएं सावधान, एसबीआई ने दी चेतावनी

देश में डिजिटल लेनदेन का चलन तेजी से बढ़ा है. ऐसे में वित्तीय फ्रौड की शिकायतें काफी बढ़ती जा रही हैं. एक नये मामले में सामने आया है कि ग्राहकों को इस तरह एसएमएस भेजे जा रहे हैं जिनमें उनके बैंक खाते से संबंधित जानकारी मांगी जा रही है.

हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक ने ग्राहकों के लिए चेतावनी जारी की है. बैंक ने ग्राहकों को कहा है कि एसबीआई कोई भी एसएमएस भेज किसी तरह की जानकारी की मांग नहीं कर रहा है. अगर ग्राहकों ने अनजाने में ऐसे एसएमएस को रिप्लाई कर अपनी निजी जानकारी साझा कर दी है तो इस बारे में एसबीआई को तुरंत सूचित करें.

यह चेतावनी एसबीआई ने ट्वीट कर जारी की है. इसमें बैंक ने कहा है कि ग्राहकों को फ्रौड मैजेस भेजे जा रहे हैं जिनमें उनसे निजी जानकारी की मांग की गई है. ग्राहकों को इससे सावधान और ऐसे मैसेज भेजने वालों को ब्लौक करने के लिए आगाह किया है. साथ ही कहा है कि अगर ग्राहक जानकारी साझा कर चुके हैं तो इस बारे में एसबीआई से तुरंत संपर्क करें.

ट्वीट में एसबीआई ने उस मैसेज के बारे में बताया है जहां पर ग्राहकों से कहा जा रहा है कि उनके क्रेडिट कार्ड रिवार्ड प्वाइंट्स एक्सपायर होने वाले हैं. प्वाइंट्स को कैश में तब्दील करने के लिए एक लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा गया है. उस लिंक में नाम, ईमेल आईडी, ईमेल पासवर्ड, कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट, कार्ड वैलिड फ्रौम और सीवीवी नंबर की मांग की जा रही है. बैंक ने ग्राहकों से कहा है कि इस तरह के एसएमएस, पौप अप, फोन कौल का रिप्लाई न करें.

एसबीआई ने स्पष्ट किया है कि बैंक कभी भी ग्राहकों से उनकी निजी जानकारी की मांग नहीं करता है. यह एसएमएस फ्रौड है. इन मैसेज को भेजने वालों को तुरंत ब्लौक करें. साथ ही ऐसे मामलों की जानकारी एसबीआई को दें.

सलमान को लेकर बार-बार बयान दे रही हैं ऐश्वर्या, अब किया ये खुलासा

हाल ही में बौलीवुड अदाकारा ऐश्वर्या राय बच्चन की फिल्म ‘फन्ने खां’ रिलीज हुई है. फिल्म बौक्स औफिस पर भी कुछ खास कमाल नहीं कर पा रही है. मालूम हो कि इस फिल्म में ऐश्वर्या ने एक पौप स्टार की भूमिका निभाई है. इस फिल्म में अनिल कपूर और राजकुमार राव भी लीड रोल में हैं.

फिल्म रिलीज हुए 4 दिन हो गए हैं और ऐश्वर्या लगातार ‘फन्ने खां’ का प्रमोशन कर रही हैं. एक इंटरव्यू में ऐश्वर्या से फिल्म ‘जोश’ में शाहरुख खान की बहन का रोल प्ले करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने एक बड़ा खुलासा किया. ऐश्वर्या ने बताया कि शाहरुख से पहले इस फिल्म में सलमान खान को लिया जाना था.

उन्होंने कहा, ‘पहले फिल्म के लिए आमिर और सलमान को अप्रोच किया गया था. लेकिन फिर शाहरुख को ले लिया गया. आमिर को चंद्रचूण सिंह का रोल मिलने वाला था. जब पूरी कास्ट बदल दी गई तो मैंने भी फिल्म के लिए हां कर दी थी. यह फिल्म साल 2000 में आई थी.

फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ के बाद सलमान और ऐश्वर्या के अफेयर की खूब चर्चा हुई थी. फिर ब्रेकअप हुआ तो दोनों ने एक-दूसरे के बारे में बात करना बंद कर दिया. लेकिन अचानक ही ऐश्वर्या, सलमान खान के बारे में बयान देने लगी हैं.

कुछ दिन पहले भी ऐश्वर्या ने बताया था, ‘संजय लीला भंसाली और मैं एक साथ ‘बाजीराव मस्तानी’ में काम करना चाह रहे थे लेकिन वह मेरे मुताबिक बाजीराव नहीं ढूंढ पाए. इसके बाद भंसाली चाहते थे कि मैं ‘पद्मावत’ में काम करूं लेकिन इस फिल्म में भी मेरे मुताबिक खिलजी नहीं मिला. इस तरह से मैं इन फिल्मों से जुड़ नहीं पाई. संजय लीला भंसाली के साथ दोबारा काम करने में मुझे बेहद खुशी होगी.’ बता दें कि फिल्म ‘पद्मावत’ में भंसाली, ऐश्वर्या के साथ सलमान को कास्ट करना चाहते थे हालांकि ऐसा नहीं हो सका.

इस वीडियो सौंग में दिखी पुनीश – बंदगी की हौट केमेस्ट्री

बिग बौस 11 के लव बर्ड्स पुनीश शर्मा और बंदगी कालरा का एक वीडियो सौन्ग ‘लव मी’ रिलीज हुआ है. वीडियो में बंदगी अपने हौट अदाओं का जलवा बिखेरती दिख रही हैं. पुनीश-बंदगी के इस वीडियो को काफी पसंद किया जा रहा है. दोनों की जोड़ी बहुत हौट रही है. इस गाने में आपको उनके डांस के बजाय रोमांस ज्यादा देखने को मिलेगा. इस गाने को मीत ब्रदर्स और खुश्बू ग्रेवाल द्वारा गाया गया है.

एक इंटरव्‍यू में पुनीश ने मीत ब्रदर्स के बारे में कहा था, ‘मीत ब्रदर्स, बौलीवुड के सबसे कूल ब्रदर्स हैं. वो बौलीवुड में परिवार से दूर रहने वालों के लिए एक परिवार की तरह हैं. वो जितने शानदार गायक हैं और उतने ही शानदार इंसान भी हैं.

बता दें कि पिछले कुछ दिनों से बिग बौस के लास्ट सीजन के ज्यादातर कंटेस्टेंट के एलबम सौन्ग आ चुके हैं. हिना खान, प्रियांक शर्मा, बेनाफ्शा सोनावाला और महजबी भी घर से निकलने के बाद वीडियो सौन्‍ग में नजर आ चुके हैं.

वैसे बिग बौस के घर के अंदर बने कपल ज्यादातर घर से बाहर आने के बाद अलग हो जाते हैं, लेकिन इन दोनों लव बर्ड्स की केमेस्ट्री अभी अच्छी चल रही है. दोनों साथ में पार्टी करते हैं. यहां तक की दोनों सोशल मीडिया पर भी एक दूसरे के साथ तस्वीरें शेयर करते रहते हैं.

दरोगा की कातिल पत्नी : भाग 1

रविवार 24 जून, 2018 की सुबह करीब 9 बजे का वक्त था. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के रहने वाले शरीफुद्दीन और बाबू मियां जलालनगर मोहल्ले के बगल से गुजरने वाले नाले के किनारे होते हुए पैदल ही बस अड्डे की तरफ जा रहे थे. अचानक शरीफुद्दीन की नजर नाले में गिरी पड़ी एक मोटरसाइकिल पर पड़ी, जिस का कुछ हिस्सा नाले के पानी के ऊपर था. यह देखते ही शरीफुद्दीन बोला, ‘‘अरे बाबू भाई, लगता है कोई आदमी नाले में गिर गया है. उस की बाइक यहीं से दिख रही है.’’

शरीफुद्दीन की बात पर बाबू ने जब नाले की तरफ देखा तो वह चौंकते हुए बोला, ‘‘हां शरीफ भाई, लग तो रहा है… चलो चल कर देखते हैं.’’

इस के बाद वह दोनों तेजी से कदम बढ़ाते हुए उधर ही पहुंच गए जहां मोटरसाइकिल पड़ी थी. उन्होंने देखा कि वहां न सिर्फ मोटरसाइकिल थी बल्कि चंद कदम की दूरी पर एक आदमी भी औंधे मुंह पड़ा हुआ था.

ऐसा लग रहा था कि या तो वह शराब के नशे में बाइक समेत नाले में जा गिरा या किसी चीज से टकरा कर वह बाइक समेत नाले में गिर गया है. वह दोनों उस व्यक्ति के करीब पहुंच गए, उस व्यक्ति के शरीर के ऊपर का कुछ भाग नाले के किनारे पर था. उस के सिर से खून बह कर जम गया था. वह व्यक्ति कौन है जानने के लिए दोनों ने जैसे ही उसे पलट कर देखा तो बाबू के मुंह से चीख निकल गई, ‘‘अरे बाप रे, ये तो अपने दरोगाजी भौंदे खान हैं.’’

दरोगा भौंदे खान उर्फ मेहरबान अली उन्हीं के मोहल्ले में रहते थे.

‘‘चल, इन के घर जा कर खबर करते हैं.’’ बाबू ने अपने साथी से कहा और उल्टे पांव अपने मोहल्ले की तरफ चल दिए.

वहां से बमुश्किल 400 मीटर की दूरी पर एमनजई जलालनगर मोहल्ला था. उस मोहल्ले में घुसते ही 20 कदम की दूरी पर दरोगा मेहरबान अली उर्फ भौंदे खान का घर था. चेहरे पर उड़ती हवाइयों के बीच दरोगाजी के घर पहुंचे तो घर के बाहर ही उन्हें दरोगाजी का दामाद अनीस मिल गया. दरोगाजी अपने दामाद के साथ ही रहते थे. शरीफुद्दीन और बाबू मियां ने एक ही सांस में अनीस को बता दिया कि उस के ससुर दरोगाजी अपनी मोटरसाइकिल के साथ नाले में गिरे पड़े हैं.

यह सुनते ही अनीस ने दौड़ कर अपने घर में अपनी सास जाहिदा, पत्नी और सालियों को ये बात बताई. जैसे ही परिवार वालों को भौंदे खान के नाले में गिरने की बात पता चली तो पूरे घर में जैसे कोहराम मच गया. उन की पत्नी जाहिदा और घर में मौजूद तीनों बेटियां अनीस के साथ नाले के उसी हिस्से की तरफ दौड़ पड़ीं, जहां उन के गिरे होने की जानकारी मिली थी. मोहल्ले के अनेक लोग भी उन के साथ हो लिए.

मरने वाला निकला दरोगा भौंदे खान

जाहिदा ने अपने पति को काफी हिलायाडुलाया लेकिन खून से लथपथ पति के शरीर में कोई हलचल नहीं हुई तो कुछ लोगों ने उन की नब्ज टटोली तब पता चला कि उन की मौत हो चुकी है. इस के बाद तो जाहिदा और उन की बेटियां छाती पीटपीट कर रोने लगीं. थोड़ी ही देर में घटनास्थल पर लोगों का हुजूम लग गया. अनीस ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर के दरोगा मेहरबान अली का शव नाले में मिलने की सूचना दे दी.

यह इलाका सदर कोतवाली क्षेत्र में पड़ता था. मामला चूंकि विभाग के ही एक सबइंसपेक्टर की मौत से संबंधित था, इसलिए सूचना मिलते ही सदर कोतवाली थानाप्रभारी डी.सी. शर्मा तथा एसएसआई रामनरेश यादव पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. थानाप्रभारी ने जब मेहरबान अली के शव को नाले से बाहर निकलवा कर बारीकी से उस की पड़ताल की तो पहली ही नजर में मामला दुर्घटना का नजर आया.

ऐसा लग रहा था कि नाले में गिरने पर सिर में लगी चोट के कारण शायद उन की मौत हो गई है. सूचना मिलने पर एसपी का प्रभार देख रहे एसपी (ग्रामीण) सुभाष चंद्र शाक्य, एसपी (सिटी) दिनेश त्रिपाठी और सीओ (सदर) सुमित शुक्ला भी घटनास्थल पर पहुंच गए.

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया. फोरैंसिक टीम ने भी वहां पहुंच कर सबूत जुटाए. घटना की सूचना आईजी और डीआईजी तक पहुंच गई थी लिहाजा अगले 2 घंटे में पुलिस के ये आला अफसर भी घटनास्थल पर पहुंच गए.

पुलिस ने जरूरी काररवाई कर के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. अगले दिन दरोगा मेहरबान अली के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उसे पढ़ कर पुलिस भी हैरान रह गई. क्योंकि उस में बताया गया कि उन की मौत दुर्घटना के कारण नहीं हुई थी बल्कि उन की हत्या की गई थी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि सिर में दाहिनी तरफ चोट लगने के अलावा इस तरह की चोट थी, जैसे किसी ने कई बार भारीभरकम चीज से सिर पर चोट पहुंचाई हो. साथ ही गला भी दबाया गया था. उन की गरदन पर बाकायदा कुछ लोगों की अंगुलियों के निशान थे, मानो उन का गला दबाने की कोशिश भी की गई हो.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट सीधे तौर पर उन की हत्या की ओर इशारा कर रही थी. मृतक दरोगाजी के परिवार वालों से जब पूछा कि उन्हें किसी पर हत्या करने का शक है तो उन्होंने किसी पर शक नहीं जताया. लेकिन उन के दामाद अनीस ने सदर कोतवाली में तहरीर दे कर अज्ञात लोगों के खिलाफ उन की हत्या करने की शिकायत दर्ज करा दी.

रिपोर्ट दर्ज करने के बाद थानाप्रभारी डी.सी. शर्मा ने जांच अपने हाथ में ले ली. अनीस ने थानाप्रभारी को बताया कि एक दिन पहले शनिवार को भौंदे खान दोपहर करीब साढ़े 11 बजे खाना खा कर मोटसाइकिल ले कर ड्यूटी के लिए गए थे.

पुलिस ने की दरोगा के घर वालों से पूछताछ

वह ड्यूटी से रात 8 बजे तक घर लौटने वाले थे. लेकिन 11 बजे तक भी वह नहीं लौटे तो घर वालों को चिंता होने लगी तब साजिदा ने वायरलैस कंट्रोल रूम में फोन कर के पूछा तो पता चला कि मेहरबान अली तो उस दिन ड्यटी पर पहुंचे ही नहीं थे.

जाहिदा जानती थी कि उस के पति कभीकभी दोस्तों के साथ शराब की पार्टी में बैठ जाते हैं. ऐसे में वह कभीकभी ड्यटी पर भी नहीं जाते थे और देर रात तक घर लौटते थे. उस ने सोचा कि हो सकता है आज भी वह कहीं ऐसी ही किसी पार्टी में शामिल हो गए होंगे और सुबह तक आ जाएंगे. यह सोच कर जाहिदा सो गई.

सुबह हो गई, भौंदे खान तब भी घर नहीं लौटे. अनीस उस रोज शहर से बाहर गया हुआ था. सुबह जब वह घर लौटा तो सास जाहिदा ने उसे यह बात बताई. अनीस ने सास से कहा कि वह कुछ देर बाद पुलिस लाइन जा कर देख आएगा कि आखिर बात क्या है. लेकिन उस से पहले ही उसे भौंदे खान की लाश मिलने की सूचना मिल गई.

सीओ (सदर) सुमित शुक्ला और थानाप्रभारी डी.सी. शर्मा की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ऐसी कौन सी वजह रही होगी जिस के कारण उन की हत्या की गई. मामला लूटपाट का नहीं था क्योंकि उन की मोटरसाइकिल, कलाई घड़ी और जेब में उन का पर्स ज्यों का त्यों बरामद हुआ था. पर्स में आईडी कार्ड से ले कर डेबिट कार्ड तथा कुछ रुपए सहीसलामत पाए गए थे.

थानाप्रभारी डी.सी. शर्मा को लग रहा था कि दरोगा मेहरबान अली की हत्या का मामला उतना सीधा नहीं है, जितना कि नजर आ रहा है. इसलिए उन्होंने एक टीम मेहरबान अली के परिवार और उन के मेलजोल वालों के बारे में जानकारी एकत्र करने के लिए गठित कर दी, जिस में एसएसआई रामनरेश यादव, महिला एसआई ज्योति त्यागी, कांस्टेबल अनूप मिश्रा, माधुरी के साथ एक दरजन पुलिस वाले शामिल थे.

थानाप्रभारी ने यह कदम यूं ही नहीं उठाया, बल्कि उन्हें 2 महीने पहले दरोगा मेहरबान अली के घर में हुई एक ऐसी घटना याद आ गई जिस की तफ्तीश खुद उन्होंने ही की थी.

मेहरबान अली उर्फ भौंदे खान मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला मुजफ्फरनगर की तहसील बुढ़ाना के गांव कसेरवा के रहने वाले थे. वह उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंसपेक्टर के पद पर तैनात थे. उन की नियुक्ति उत्तर प्रदेश के अलगअलग जिलों में रहने के बाद सन 2007 में शाहजहांपुर जिले की पुलिस लाइन में वायरलैस सेल में हुई थी.

वह थाना सदर क्षेत्र के मोहल्ला एमनजई जलालनगर में अपने दामाद अनीस के साथ रहते थे. मकान की दूसरी मंजिल पर अनीस अपनी पत्नी सबा के साथ रहता था. अनीस मशीनरी टूल की ट्रेडिंग का धंधा करता था. जिस के सिलसिले में उसे अकसर शहर से बाहर भी आनाजाना पड़ता था.

जिस दिन मेहरबान अली गायब हुए थे, अनीस उस दिन शहर से बाहर गया हुआ था. मेहरबान अली के परिवार में उन की पत्नी जाहिदा के अलावा 5 बेटियां व एक बेटा था. बड़ी बेटी सबा की शादी अनीस के साथ डेढ़ साल पहले हुई थी. उस से छोटी 4 बेटियां सना, जीनत, इरम, आलिया तथा एक बेटा मोहसिन है, जो परिवार में सब से छोटा है. दूसरे नंबर की बेटी सना खान की 2 महीने पहले हत्या हो गई थी. थानाप्रभारी डी.सी. शर्मा ने ही उस मामले की जांच की थी.

दरोगा की बेटी की हुई थी हत्या

सना जी.एस. कालेज में बीए फाइनल की छात्रा थी. वह यूपी पुलिस परीक्षा की तैयारी कर रही थी. इस के लिए वह रामनगर कालोनी स्थित एक कोचिंग सेंटर, अपनी छोटी बहन जीनत के साथ जाती थी. 7 अप्रैल, 2018 को भी सना जीनत के साथ कोचिंग सेंटर से बाहर निकल कर 200 मीटर दूर पहुंची थी. तभी अरशद वहां आया. वह अपने एक दोस्त के साथ बाइक पर सवार था. उस ने सना से बात करने के लिए दोनों बहनों को रोक लिया.

पाठ्यक्रम में शामिल हुई पुलिस वाली की कहानी

कुछ लोग अपने काम करने के तरीके, काम करने का जज्बा, शैली आदि के द्वारा समाज में ऐसी पहचान बना लेते हैं कि समाज उन्हें लंबे समय तक भुला नहीं पाता, बल्कि ऐसे लोग समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन जाते हैं. रेलवे सुरक्षा बल की सबइंसपेक्टर रेखा मिश्रा भी मुंबई में ऐसा ही काम कर रही हैं कि लोगों के लिए मिसाल बन चुकी हैं. इतना ही नहीं, इस महिला पुलिस अधिकारी के कारनामों को मराठी की 10वीं कक्षा के पाठ्यक्रम में भी पढ़ाया जाएगा.

मुंबई ऐसा शहर है जिस की चकाचौंध से प्रभावित हो कर तमाम बच्चे घर से भाग कर यहां पहुंचते हैं. जब वे बच्चे मुंबई पहुंचते हैं तो उन के मन में कई तरह के सपने होते हैं. लेकिन यहां आने वाले सभी बच्चों के सपने पूरे नहीं होते, बल्कि वे धीरेधीरे गलत लोगों के संपर्क में पहुंच जाते हैं. फिर उन से कई तरह के गलत काम कराए जाते हैं, जिस से उन का भविष्य अंधकारमय हो जाता है.

रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की सबइंसपेक्टर रेखा मिश्रा ने एक शाम रेलवे स्टेशन पर कुछ बच्चों को नशे की हालत में देखा तो उन का मन द्रवित हो गया. वह सोचने लगीं कि जब इन बच्चों का जन्म हुआ होगा तो इन के घर में कितनी खुशियां मनाई गई होंगी. उस समय इन के मांबाप कितने खुश हुए होंगे लेकिन इन के गायब होने के बाद इन के मांबाप के दिल पर क्या गुजर रही होगी, इस दुख को वही जानते होंगे.

रेखा मिश्रा ने सोचा कि अगर इन बच्चों को किसी तरह इन के मांबाप तक पहुंचा दिया जाए तो एक तो उन्हें उन का बच्चा मिल जाएगा और दूसरे उन के बच्चों की जिंदगी भी बरबाद होने से बच जाएगी. समाजसेवा का उन का यह आइडिया था तो अच्छा लेकिन काम इतना आसान नहीं था क्योंकि उन्हें ड्यूटी की और भी जिम्मेदारियां निभानी थी.

जब मन में कोई काम करने का प्रण ले लिया जाए और उसे पूरे जज्बे से किया जाए तो वह पूरा जरूर होता है. रेखा मिश्रा ने यह काम करने की ठान ली थी इसलिए उन्होंने सब से पहले 2 बच्चों से पूछताछ की. पूछताछ के समय बच्चे पुलिस वाली को देख कर डर गए तो रेखा ने पहले बच्चों के दिल से पुलिस का डर निकालने के लिए उन्हें एक टीचर की तरह समझाया. उन्होंने उन के घर से भागने की पूरी कहानी मालूम की. उन्होंने उन्हें समझाते हुए अपने घर वालों के पास जाने के लिए तैयार कर लिया.

इस के बाद उन्होंने किसी तरह के उन के घर वालों से संपर्क किया. घर वालों को जब पता चला कि उन का बच्चा ठीक है तो वे खुश हुए. इस तरह रेखा ने उन बच्चों को उन के घर वालों के पास पहुंचा दिया. अपने बच्चों को पा कर घर वाले तो खुश हुए ही, साथ ही रेखा मिश्रा को भी ऐसी आत्मिक संतुष्टि मिली, जिस की उन्होंने कल्पना तक नहीं थी.

दोनों बच्चों को उन के घर भेजने के बाद रेखा ने अपना मिशन तेज कर दिया. उन के इस काम से विभाग की भी वाहवाही होने लगी. उन्होंने अपनी मंशा अधिकारियों के सामने जाहिर की तो अधिकारियों ने भी उन के समाजसेवा के इस काम को पूरा करने के लिए एक एसआई और 4 कांस्टेबल सहायता के लिए दे दिए. इतना ही नहीं रेखा को क्राउड कंट्रोल और महिला यात्रियों की सुरक्षा का प्रभार दे दिया.

अब रेखा की नजर ऐसे बच्चों को टटोलती जो अपने घर से भाग कर मुंबई पहुंच रहे थे. वह ऐसे बच्चों की काउंसलिंग कर उन के घर वालों के पास पहुंचाने लगीं. पिछले 4 सालों में वह 953 युवाओं को उन के घर वालों के पास पहुंचा चुकी हैं. ऐसा कर के उन्होंने इन बच्चों को गलत राह पर जाने से तो बचाया, साथ ही उन के परिवार को भी अमूल्य खुशी दी.

महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक निर्मिती व अभ्यास क्रम संशोधन मंडल की सदस्य डा. शारदा विवाते ने बताया कि हम ने इस साल 10वीं कक्षा के पाठ्यक्रम में ऐसी महिला की कहानी शामिल करने का फैसला किया, जिस ने समाजसेवा का सराहनीय कार्य किया हो और जो अभी सक्रिय हो. तभी रेखा मिश्रा का खयाल आया. उन्होंने उन की कहानी को पाठ्यक्रम में शामिल कर यह बताया है कि रेखा का चेहरा पुलिस का डराने वाला चेहरा नहीं है, बल्कि वह बच्चों और युवाओं को टीचर की तरह समझाती हैं.

कटवा दी जिंदगी की डोर : पत्नी और उस के प्रेमी ने ली जान

भारतीय खुफिया एजेंसी इंटेलीजेंस ब्यूरो यानी आईबी के सहायक तकनीकी सूचना अधिकारी चेतन प्रकाश गलाना बीती 14 फरवरी को 2 दिन की छुट्टी पर दिल्ली से अपने घर कोटा जिले की रामगंज मंडी आए थे. दिल्ली में वह अकेले रहते थे. उन के मातापिता रामगंज मंडी में और पत्नी अनीता 2 छोटे बेटों के साथ झालावाड़ में रहती थी.

चेतन आमतौर पर महीने में 1-2 बार छुट्टी पर घर आ जाते थे. जब भी वह घर आते तो रामगंज मंडी में रहने वाले मातापिता से मिलने जरूर जाते थे. उस दिन भी वह रामगंज मंडी में अपने घर वालों से मिल कर शाम 6 बजे की ट्रेन से झालावाड़ के लिए रवाना हुए थे. उन्हें करीब एक घंटे में झालावाड़ पहुंच जाना चाहिए था. जब रात 8 बजे तक चेतन घर नहीं पहुंचे तो उन की पत्नी अनीता ने अपने रिश्तेदारों को फोन कर के चेतन के बारे में बताया.

अनीता के कहने पर झालावाड़ की गायत्री कालोनी में रहने वाले रिश्तेदार मनमोहन मीणा ने चेतन की तलाश शुरू की. इसी खोजबीन में रात करीब साढ़े 8 बजे चेतन झालरापाटन-भवानी मंडी मार्ग पर रेलवे की रलायता पुलिया के पास बेहोश पड़े मिले. मनमोहन मीणा ने अनीता को चेतन के अचेत पड़े होने की सूचना दी. इस के बाद रिश्तेदार बेहोश चेतन को एआरजी अस्पताल ले गए. जांच के बाद डाक्टरों ने चेतन को मृत घोषित कर दिया.

संदिग्ध मौत का मामला होने की वजह से अस्पताल से पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस ने अस्पताल पहुंच कर शव का निरीक्षण किया, लेकिन शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं मिला.

पुलिस ने रलायता पुलिया के पास उस जगह का भी मौका मुआयना किया, जहां चेतन अचेत पड़े मिले थे. लेकिन ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिस से पता चलता कि चेतन की मौत कैसे हुई. रिश्तेदारों की सूचना पर रामगंज मंडी से चेतन के मातापिता और अन्य घर वाले भी झालावाड़ आ गए.

पिता को था बेटे की हत्या का संदेह

चेतन के पिता महादेव मीणा ने झालावाड़ के थाना सदर में बेटे की संदिग्ध मौत का मामला दर्ज करा दिया. पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 174 में मामला दर्ज कर जांच शुरू की. पुलिस ने 15 फरवरी को चेतन के शव का मैडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया. पोस्टमार्टम के बाद चेतन का विसरा जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया.

खुफिया अधिकारी की मौत का मामला होने के कारण पुलिस हर एंगल से जांच कर रही थी. इन में 3 मुख्य बिंदु थे, पहला हार्ट अटैक, दूसरा आत्महत्या और तीसरा हत्या. चेतन के शरीर पर चोट या हाथापाई के कोई निशान नहीं मिले थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी ऐसा कुछ नहीं बताया गया, जिस से मौत का रहस्य खुलता.

अब पुलिस के सामने सवाल यह था कि चेतन जब ट्रेन से झालावाड़ आ रहे थे तो वह रलायता पुलिया कैसे पहुंचे और उन की मौत कैसे हुई? पुलिस कई दिनों तक इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करती रही, लेकिन कोई ऐसी महत्त्वपूर्ण जानकारी नहीं मिली, जिस से चेतन की मौत के कारणों का पता चल पाता.

इस बीच, चेतन के पिता महादेव मीणा ने अदालत में इस्तगासा दायर कर दिया. इस्तगासे में कहा गया कि चेतन की सुनियोजित तरीके से हत्या की गई है. इस पर अदालत ने पुलिस को चेतन की हत्या का मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए. तब तक चेतन की हत्या को 3 महीने हो चुके थे.

अप्रैल के दूसरे सप्ताह में झालावाड़ के सदर थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ आईबी औफिसर चेतन प्रकाश गलाना की हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. एसपी आनंद शर्मा ने चेतन की हत्या के मामले का खुलासा करने के लिए एडीशनल एसपी छगन सिंह राठौड़ के नेतृत्व में सदर थानाप्रभारी संजय मीणा, एएसआई अजीत मोगा, हैडकांस्टेबल मदन गुर्जर, कुंदर राठौड़, महेंद्र सिंह, हेमंत शर्मा और कुछ कांस्टेबलों की टीम गठित की.

पत्नी को किया गिरफ्तार

पुलिस की इस टीम ने चेतन प्रकाश की दिनचर्या के बारे में पता लगाया. इस के बाद उन के दोस्तों, परिचितों और दुश्मनी रखने वालों को चिह्नित कर के उन से पूछताछ की. इंटेलीजेंस ब्यूरो के दिल्ली कार्यालय में चेतन प्रकाश के साथी कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई.

पुलिस टीम ने रामगंज मंडी, झालावाड़ रेलवे स्टेशन और रलायता पुलिया के आसपास घटनास्थल का कई बार दौरा कर के तथ्यों का पता लगाने का प्रयास किया. साइबर टीम ने कई जगह के मोबाइल टावरों का रिकौर्ड निकलवाया. साथ ही चेतन के घरपरिवार की पूरी जानकारी प्राप्त कर के घर वालों से भी पूछताछ की गई.

जांचपड़ताल में यह बात सामने आई कि चेतन के अपनी पत्नी अनीता के साथ संबंध अच्छे नहीं थे. इस के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच और मुखबिरों की मदद से चेतन की मौत की कडि़यां जोड़नी शुरू कीं. लंबी चली जांचपड़ताल के बाद 25 जून को पुलिस ने आईबी औफिसर चेतन प्रकाश की हत्या के मामले में उन की पत्नी अनीता को गिरफ्तार कर लिया. अनीता से की गई पूछताछ में चेतन की हत्या की पूरी तसवीर सामने आ गई.

जांच में पता चला कि चेतन की हत्या पुलिस कांस्टेबल प्रवीण राठौड़ ने अपने साथियों के साथ मिल कर सुनियोजित तरीके से की थी. चेतन की पत्नी अनीता भी पति की हत्या में शामिल थी. कांस्टेबल प्रवीण के चेतन की पत्नी अनीता से अवैध संबंध थे. इन संबंधों को ले कर चेतन का अपनी पत्नी अनीता से कई बार विवाद भी हुआ था.

चेतन को शक था कि छोटा बेटा उस का नहीं, बल्कि प्रवीण का है. चेतन ने छोटे बेटे का डीएनए टेस्ट कराने की बात कही थी. इस से अनीता और प्रवीण को अपने अवैध संबंधों का राज खुलने का डर था. इसी वजह से उन्होंने चेतन को रास्ते से हटाने का फैसला किया.

कांस्टेबल प्रवीण राठौड़ ने अपने साथियों के सहयोग से चेतन को मौत के घाट उतारने के लिए 5 प्रयास किए थे. 3 बार की असफलता के बाद चौथी बार चेतन को दिल्ली में उन के घर पर मारने की योजना बनाई गई, लेकिन उस में भी कामयाबी नहीं मिली. अंतत: 5वीं बार वे चेतन को मौत की नींद सुलाने में कामयाब हो गए.

कांस्टेबल प्रवीण राठौड़ पहले झालावाड़ पुलिस की स्पैशल टीम में तैनात था. बाद में वह प्रतिनियुक्ति पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी में चला गया. एसीबी में भी वह झालावाड़ में ही तैनात रहा. पुलिस कांस्टेबल होने के कारण प्रवीण को आपराधिक पैंतरों की अच्छी जानकारी थी कि हत्या के मामले को साधारण मौत में कैसे दर्शाया जाए, वह अच्छी तरह जानता था. इस के लिए उस ने चेतन का अपहरण किया और उसे कैटामाइन इंजेक्शन की हैवी डोज दे कर मौत की नींद सुला दिया.

कैटामाइन इंजेक्शन प्रतिबंधित नशीली दवा है. यह बाजार में खुले तौर पर नहीं मिलती. कैटामाइन इंजेक्शन अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में ही काम आता है. खास बात यह कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी इस इंजेक्शन के बारे में पता नहीं चल पाता.

पुलिस ने व्यापक जांचपड़ताल के बाद चेतन की हत्या के मामले में उस की पत्नी अनीता के साथसाथ अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया. इन आरोपियों से की गई पूछताछ और पुलिस की जांच में चेतन की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस तरह है. झालावाड़ में मंगलपुरा रोड पर रहने वाले रमेशचंद का बेटा प्रवीण राठौड़ जब पढ़ता था, तभी से अनीता उसे जानती थी.

बचपन के प्यार ने हिलोरें मारे तो बन गई हत्या की योजना

अनीता भी झालावाड़ में रहती थी. पढ़नेलिखने की उम्र में दोनों एकदूसरे को चाहने लगे थे. सन 2008 में अनीता का चयन अध्यापिका के पद पर हो गया. उसी साल प्रवीण राठौड़ की नौकरी भी राजस्थान पुलिस में लग गई.

सरकारी नौकरी मिल जाने पर प्रवीण का बचपन का प्यार हिलोरें मारने लगा. उस ने अनीता के सामने अपने प्यार का इजहार करते हुए शादी का प्रस्ताव रखा, लेकिन परिस्थितियां ऐसी रहीं कि घर वालों की रजामंदी न मिलने से दोनों की शादी नहीं हो सकी. अनीता से शादी न हो पाने से प्रवीण की हसरत मन में ही रह गई. अपनी अधूरी हसरतों को मन में लिए प्रवीण पुलिस की नौकरी करता रहा और अनीता सरकारी स्कूल में शिक्षिका की.

बाद में जनवरी 2011 में अनीता की शादी चेतन प्रकाश गलाना से हो गई. अनीता सुंदर भी थी और पढ़ीलिखी भी. वह झालावाड़ के पास असनावर गांव के स्कूल में नियुक्त थी. परेशानी यह थी कि चेतन की नियुक्ति दिल्ली में थी और अनीता की घर के पास ही. इसलिए दोनों को अलगअलग रहना पड़ रहा था. उन के बीच झालावाड़ से दिल्ली की लंबी दूरी थी.

चेतन छुट्टी मिलने पर 15-20 दिन बाद 1-2 दिन के लिए घर आते थे, तभी वह अनीता से मिल पाते थे. नईनई शादी और इतने दिनों का अंतराल दोनों को बहुत खलता था. लेकिन दोनों की ही अपनीअपनी नौकरी की मजबूरियां थीं. उन का गृहस्थ जीवन ठीकठाक चल रहा था.

शादी के कुछ महीने बाद ही अनीता के पैर भारी हो गए. चेतन को पता चला तो वह बहुत खुश हुए. सन 2012 में अनीता ने बेटे को जन्म दिया. पहली संतान के रूप में बेटा पा कर चेतन का पूरा परिवार खुश था. बेटे का नाम क्षितिज रखा गया. क्षितिज समय के साथ बड़ा होने लगा.

इस बीच 2011 में ही प्रवीण राठौड़ की भी शादी हो गई. प्रवीण की पत्नी भी पढ़ीलिखी थी. दिसंबर 2014 में प्रवीण की पत्नी का भी सरकारी अध्यापिका के पद पर चयन हो गया. उस की नियुक्ति भी असनावर के उसी स्कूल में हुई, जहां अनीता नियुक्त थी.

प्रवीण कई बार पत्नी को स्कूल छोड़ने या स्कूल से वापस लाने चला जाता था. उसी स्कूल में अनीता भी नियुक्त थी. फलस्वरूप अनीता और प्रवीण की फिर से मुलाकातें होने लगीं. इन मुलाकातों का असर यह हुआ कि उन का बचपन और जवानी का प्यार फिर से अपने पंख फैलाने लगा. जल्दी ही दोनों एकदूसरे के निकट आ गए.

अनीता को डर था कि उसे प्रवीण के साथ देख कर कहीं उस की पत्नी और दूसरे लोग गलत न सोचने लगें, इसलिए अगस्त 2015 में रक्षाबंधन पर अनीता ने प्रवीण को राखी बांधी और पति चेतन प्रकाश से उस का परिचय धर्मभाई के रूप में कराया.

मिलने के लिए बनाया नया आशियाना

प्रवीण की पत्नी और अनीता के एक ही स्कूल में अध्यापिका के पद पर तैनात होने से चेतन को किसी तरह का कोई संदेह नहीं हुआ. वह पहले की तरह ही अनीता पर भरोसा करते रहे. अपनी नौकरी की वजह से चेतन झालावाड़ में नहीं रह सकते थे. प्रवीण ने चेतन की इस मजबूरी का फायदा उठाया.

अनीता और प्रवीण की मुलाकातें गुल खिलाने लगीं. उन दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए. जनवरी, 2017 के बाद वे लगभग रोजाना ही एकदूसरे से मिलने लगे. उस समय अनीता गायत्री कालोनी, झालावाड़ स्थित अपने मातापिता के घर रह रही थी.

जून, 2017 में प्रवीण ने अनीता को झालावाड़ के हाउसिंग बोर्ड में 35 लाख रुपए का नया मकान दिलवा दिया. मकान के पैसे अनीता ने दिए. चर्चा है कि प्रवीण ने अनीता को मकान दिलवाने में दलाली के 10 लाख रुपए खुद रख लिए थे.

अनीता हाउसिंग बोर्ड के नए मकान में रहने लगी. प्रवीण इस मकान में बेरोकटोक आनेजाने लगा. वहां उसे रोकने वाला कोई नहीं था. बेटा 5-साढ़े 5 साल का था. चेतन प्रकाश महीने में एकदो बार ही आते थे.

कभीकभार चेतन के मातापिता भी बहू के पास आ जाते थे. वे भी एकदो दिन रुक कर चले जाते थे. प्रवीण ने अनीता से बातें करने के लिए उसे एक मोबाइल और सिम अलग से दिलवा रखी थी, प्रवीण से वह इसी फोन पर बात करती थी. इसी दौरान अनीता गर्भवती हो गई.

अकेली रह रही बहू के घर में प्रवीण का बेरोकटोक आनाजाना चेतन के मातापिता को अच्छा नहीं लगता था. उन्होंने प्रवीण को साफ कह दिया कि वह तभी आया करे, जब चेतन घर में हो. उन्होंने यह बात चेतन को भी बताई. चेतन ने भी अनीता को प्रवीण के घर आनेजाने और उस से रिश्ता रखने के लिए मना कर दिया. इस बात को ले कर चेतन और अनीता के बीच झगड़ा होने लगा.

अक्तूबर 2017 में अनीता ने एक निजी अस्पताल में बेटे को जन्म दिया. इस दौरान प्रवीण भी अस्पताल में मौजूद रहा. चेतन और उस के घर वालों को ज्यादा शक तब हुआ, जब प्रवीण ने नवजात के नैपकिन बदले. इस पर चेतन के घर वालों ने प्रवीण को फिर टोका, लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ.

प्रसव के बाद अनीता अपने घर आ गई. लेकिन प्रवीण को ले कर उन के घर में आए दिन लड़ाईझगड़े होने लगे. रोजाना की कलह के कारण अनीता ने 7 नवंबर, 2017 को आत्महत्या करने का प्रयास किया, लेकिन उसे बचा लिया गया.

अनीता के घर में होने वाली कलह को ले कर चेतन प्रवीण की आंखों में खटकने लगे. फलस्वरूप उस ने चेतन को रास्ते से हटाने की योजना बना ली. प्रवीण की दोस्ती वाहनों की खरीदफरोख्त करने और आरटीओ एजेंट का काम करने वाले शाहरुख से थी. शाहरुख झालावाड़ के तोपखाना मोहल्ले का रहने वाला था.

प्रवीण ने दिसंबर 2017 में शाहरुख को बताया कि उस की रिश्ते की बहन को उस का पति मारतापीटता है. वह दिल्ली में कंप्यूटर पर काम करता है, उस की हत्या करनी है. इस के लिए प्रवीण ने शाहरुख को 3 लाख रुपए की सुपारी दी. प्रवीण ने शाहरुख को चेतन की शक्ल भी दिखा दी. शाहरुख ने चेतन की हत्या की जिम्मेदारी ले कर इस काम के लिए अपने कुछ साथियों को शामिल कर लिया.

4 बार हत्या के प्रयास रहे विफल

प्रवीण और शाहरुख ने चेतन की हत्या के प्रयास शुरू कर दिए. प्रवीण ने अनीता के जरिए पता कर लिया था कि 25 दिसंबर, 2017 को चेतन छुट्टी बिता कर ट्रेन से दिल्ली जाएंगे. यह जान कर हत्यारों ने ट्रेन में चेतन का पीछा किया, लेकिन सर्दी का मौसम होने के कारण चेतन ने मुंह पर मफलर लपेट रखा था, जिस से वे उन्हें पहचान नहीं पाए और दिल्ली जा कर वापस लौट आए.

इस के बाद 4 जनवरी, 2018 को चेतन छुट्टी ले कर झालावाड़ आए तो उन्हें ट्रक से कुचल कर मारने की योजना बनाई गई. इस के लिए बदमाशों ने झालावाड़ा के नला मोहल्ला निवासी ट्रक चालक शाकिर को 20 हजार रुपए दिए थे.

योजना के मुताबिक शाकिर को प्रवीण राठौड़ द्वारा उपलब्ध कराए गए ट्रक से चेतन की स्कूटी को रामगंज मंडी से झालावाड़ आते समय रास्ते में टक्कर मारनी थी, लेकिन उस दिन ट्रक पीछे ही रह गया जबकि स्कूटी आगे निकल गई. यह प्रयास विफल होने पर तय किया गया कि 5 जनवरी को चेतन जब झालावाड़ से स्कूटी से रामगंज मंडी जाएंगे, तब उन्हें ट्रक से टक्कर मार कर कुचल दिया जाएगा.

उस दिन शाकिर ने पीछा कर के झरनिया घाटी के पास ट्रक से स्कूटी को टक्कर मार कर चेतन को कुचलने का प्रयास किया, लेकिन इस हादसे में चेतन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद बच गए, अलबत्ता उन की स्कूटी जरूर क्षतिग्रस्त हो गई थी.

3 प्रयास विफल होने पर चेतन को दिल्ली में उन के घर में मारने की योजना बनाई गई. इस योजना के तहत झालावाड़ से आए बदमाश दिल्ली की निरंकारी कालोनी गुरु तेगबहादुर नगर स्थित चेतन के मकान पर पहुंच गए, लेकिन वहां पर कैमरे लगे होने के कारण वे वारदात को अंजाम दिए बगैर झालावाड़ वापस लौट आए.

प्रवीण को अनीता से चेतन प्रकाश के आने और जाने की सारी जानकारियां मिलती रहती थीं. अंतिम बार भी प्रवीण को पता चल गया था कि चेतन 14 फरवरी की शाम को ट्रेन से रामगंज मंडी से झालावाड़ आएंगे. उस दिन पुलिस कांस्टेबल प्रवीण राठौड़ ने अपने साथियों शाहरुख, फरहान और एक नाबालिग किशोर के साथ मिल कर योजना बना ली. योजना के अनुसार चेतन का झालावाड़ रेलवे स्टेशन से अपहरण करना था, फिर उन्हें कैटामाइन इंजेक्शन की हैवी डोज दे कर मौत की नींद सुलानी थी.

योजना को ऐसे दिया अंजाम

योजना के तहत नाबालिग किशोर शाहरुख को बाइक से सुकेत छोड़ आया. सुकेत से शाहरुख रामगंज मंडी पहुंचा और ट्रेन से ही चेतन का पीछा करने लगा. ट्रेन के पहुंचने से कुछ समय पहले ही उस ने मोबाइल पर प्रवीण को झालावाड़ पहुंचने के बारे में बता दिया था. इस पर प्रवीण अपनी कार में फरहान और नाबालिग किशोर को साथ ले कर रेलवे स्टेशन पहुंच गया. स्टेशन पर उन्हें शाहरुख मिल गया.

चेतन स्टेशन से पैदल घर जा रहे थे. हाउसिंग बोर्ड के सुनसान रास्ते में चेतन को रोक कर प्रवीण ने अपने तीनों साथियों की मदद से जबरन कार की पीछे वाली सीट पर बैठा लिया. वे लोग चेतन को कार से आकाशवाणी के पीछे की तरफ हल्दीघाटी रोड पर ले गए. वहां प्रवीण और चेतन की अनीता को ले कर नोकझोंक हुई.

प्रवीण ने कहा कि तुम अपनी प्रौपर्टी अनीता के नाम क्यों नहीं करते. उस ने यह भी कहा कि तुम यह क्यों कहते हो कि छोटा बेटा मेरा है. इस पर चेतन ने कहा कि छोटा लड़का तो तुम्हारा ही है. चेतन के यह कहते ही प्रवीण ने अपने साथियों को इशारा किया. उन्होंने चेतन के दोनों हाथ पकड़ लिए.

प्रवीण ने जेब से कैटामाइन के इंजेक्शन निकाले और सिरिंज में हैवी डोज भर कर चेतन की दोनों जांघों में लगा दी. इस के बाद उस ने चेतन की नाक भी दबा दी. इंजेक्शन लगने और नाक दबाए जाने से कुछ ही मिनटों में उन के प्राण निकल गए.

चेतन को मौत की नींद सुलाने के बाद प्रवीण ने उन की जेब से मोबाइल निकाला और पुलिस को गुमराह करने के लिए अनीता को मैसेज किया कि वह औटोरिक्शा से पाटन हो कर घर आ रहे हैं. इस के बाद प्रवीण और उस के साथी चेतन का शव रलायता पुलिया के पास फेंक कर वापस चले गए. रलायता रेलवे पुलिया के पास चेतन के अचेत पड़े मिलने की कहानी आप शुरू में पढ़ चुके हैं.

एडीशनल एसपी छगन सिंह राठौड़ के नेतृत्व में पुलिस ने व्यापक जांचपड़ताल की तो सब से पहले पुलिस शाहरुख तक पहुंची. पुलिस ने उसे 20 जून को गिरफ्तार कर लिया. शाहरुख से पूछताछ में चेतन की हत्या का राज खुल गया. दूसरे ही दिन 21 जून को पुलिस ने उस ट्रक चालक शाकिर को भी गिरफ्तार कर लिया, जिस ने 5 जनवरी को चेतन को ट्रक से कुचलने का प्रयास किया था.

22 जून को पुलिस ने एक निजी अस्पताल के औपरेशन थिएटर इंचार्ज संतोष निर्मल को गिरफ्तार कर लिया. वह पहले अस्थाई रूप से राजकीय हीराकुंवर महिला अस्पताल और एक अन्य निजी अस्पताल में मेल नर्स का काम कर चुका था. उसे औपरेशन प्रक्रिया में काम आने वाली निश्चेतक दवाओं की अच्छी जानकारी थी.

कांस्टेबल प्रवीण के साथ जिम जाने और क्रिकेट खेलने की वजह से दोनों में दोस्ती थी. प्रवीण ने पिछले साल 31 दिसंबर को रेव पार्टी में नशा करने के लिए संतोष निर्मल से कैटामाइन इंजेक्शन मांगा था. संतोष ने दोस्ती के नाम पर उसे अस्पताल के औपरेशन थिएटर के स्टोर से चोरी कर के 500 मिलीग्राम के 2 इंजेक्शन दे दिए थे. ये इंजेक्शन प्रवीण ने संभाल कर रखे और चेतन की हत्या के लिए इन का उपयोग किया. इस इंजेक्शन के सबूत फोरैंसिक जांच में भी नहीं मिलते हैं.

परत दर परत खुलते गए राज

इस के बाद पुलिस ने 24 जून को चेतन की हत्या में शामिल एक नाबालिग किशोर को पकड़ा. उस से वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक और मोबाइल बरामद किए गए. यह किशोर शाहरुख की आरटीओ एजेंट की दुकान पर काम करता था. चालाक कांस्टेबल प्रवीण ने वारदात के दिन खुद का मोबाइल साथ नहीं रखा था.

उस ने शाहरुख से बात करने के लिए उस किशोर के मोबाइल का उपयोग किया था. यह किशोर चेतन की हत्या की योजना में 25 दिसंबर से 14 फरवरी तक शामिल रहा. शाहरुख पहले इस किशोर को 50 रुपए रोजाना देता था, लेकिन चेतन की हत्या के बाद उसे डेढ़ सौ रुपए रोजाना देने लगा था. पुलिस ने इस किशोर को मजिस्ट्रैट के सामने पेश कर के बाल सुधार गृह भेज दिया.

चेतन की हत्या में पत्नी अनीता की भूमिका सामने आने पर पुलिस ने 25 जून को उसे भी गिरफ्तार कर लिया. चेतन को दिल्ली से कब किस ट्रेन से आनाजाना है और दिल्ली में उस का पताठिकाना कहां है, प्रवीण को यह जानकारी अनीता ने ही दी थी. झालावाड़ से रामगंज मंडी आनेजाने की जानकारी भी अनीता ने ही प्रवीण को दी थी.

पुलिस ने अनीता के मोबाइल की जांच की तो उस में चेतन और अनीता के तनावपूर्ण दांपत्य जीवन के बारे में कई वाट्सऐप मैसेज मिले. प्रवीण के कहने पर अनीता ने मोबाइल फौरमेट करवा कर पूरा डेटा नष्ट कर दिया था. चेतन की हत्या के बाद प्रवीण ने अनीता को दी हुई सिम भी वापस ले ली थी.

अनीता से पूछताछ में पता चला कि प्रवीण उस के प्यार में इतना डूब गया था कि चेतन से बेइंतहा नफरत करने लगा था. वह नहीं चाहता था कि अनीता किसी और से बात करे या संबंध रखे. उस ने अनीता से कह कर उस के पति के साथ फेसबुक पर पोस्ट किए हुए फोटो भी हटवा दिए थे.

वह अनीता से कहता था कि अगर उस ने उस का साथ नहीं दिया तो वह आत्महत्या कर लेगा. ऐसे में अनीता सहीगलत का फैसला नहीं कर पाती थी और प्रवीण के कहे मुताबिक उस का साथ देती थी.

चेतन की हत्या के बाद भी अनीता व प्रवीण के संबंध पहले जैसे ही बने रहे. प्रवीण उसे कहता रहा कि पोस्टमार्टम और विसरा की जांच में कुछ नहीं आएगा. इस दौरान दोनों ने कुछ कानूनविदों से भी मशविरा किया था.

अनीता ने पुलिस को बताया कि उस के पति चेतन को छोटे बेटे रिवान पर शक था कि वह उस की पैदाइश नहीं है. इस बात पर घर में कई बार लड़ाई हुई. इस पर चेतन व उस के परिजनों ने बच्चे का डीएनए टेस्ट कराने की बात कही थी. इस से अनीता व प्रवीण के अवैध संबंधों का राज खुलने का डर था, इसलिए उन्होंने चेतन को रास्ते से हटाने का फैसला किया.

पुलिस ने 28 जून को झालावाड़ निवासी फरहान को भी गिरफ्तार कर लिया. वह वारदात के बाद से फरार चल रहा था. फरहान भी चेतन की हत्या के मामले में प्रवीण व शाहरुख के साथ था.

बहुत कुछ खोया अनीता और प्रवीण ने

जांच में प्रवीण के अलावा झालावाड़ के 2 अन्य पुलिस कांस्टेबलों पर भी शक की सुई घूमती रही. ये दोनों प्रवीण के करीबी थे और चेतन की हत्या में इन की भूमिका संदिग्ध थी. इस पर एसपी आनंद शर्मा ने दोनों कांस्टेबलों रवि दुबे और आवेश मोहम्मद को 28 जून को निलंबित कर दिया. ये दोनों कांस्टेबल पुलिस की गोपनीय शाखा में कार्यरत थे. प्रवीण भी एसीबी में प्रतिनियुक्ति से पहले इसी शाखा में रहा था, इसलिए दोनों उस के करीबी थे. इन दोनों कांस्टेबलों के खिलाफ जांच की जा रही है.

कथा लिखे जाने तक पुलिस चेतन की हत्या के मुख्य सूत्रधार कांस्टेबल प्रवीण राठौड़ की तलाश में जुटी थी. वह 14 जून को सरकारी काम से अजमेर जाने की बात कह कर फरार हो गया था. हत्या के मामले में आरोपी होने पर एसीबी ने उस की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर दी. एसपी ने एक जुलाई को उसे निलंबित कर दिया था.

पुलिस ने सरकारी अध्यापिका अनीता के दुराचरण की रिपोर्ट शिक्षा विभाग को भेज कर विभागीय काररवाई के लिए भी लिख दिया है. चेतन की हत्या में गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड अवधि पूरी होने पर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक सभी आरोपी जेल में थे.

यह अनीता का त्रियाचरित्र ही था कि उस ने अपनी हंसतीखेलती दुनिया अपने ही हाथों से उजाड़ ली. चेतन की मौत से महादेव के बुढ़ापे की लाठी टूट गई. चेतन प्रकाश के 6 साल के बड़े बेटे क्षितिज के सिर से पिता का साया उठ गया. 8 महीने का छोटा बेटा रिवान भी मां के साथ जेल में है.

विद्यार्थियों को अच्छा नागरिक बनने की सीख देने वाली अनीता के हाथ पति के खून से न रंगे होते तो वह जल्दी ही स्कूल की प्रिंसिपल की कुरसी पर बैठी होती, क्योंकि उस की पदोन्नति हो गई थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

संजय दत्त और ‘संजू’

फिल्म ‘संजू’ जो अभिनेता संजय दत्त के जीवन पर आधारित है, पैसा तो खूब कमा रही है पर थोड़ी कंट्रोवर्सी भी खड़ी कर रही है. सवाल उठाया जा रहा है कि फिल्म के जरिए संजय दत्त को आखिर क्यों दूध का धुला साबित करने की कोशिश की गई है.

फिल्म उद्योग अपने सितारों को मालाएं पहनाए, यह उस का हक है. वह संजय दत्त की खामियों और गलतियों को नजरअंदाज कर दे और फिल्मों के सहारे उसे चढ़ा दे, यह भी उस का हक है पर आम जनता जिस तरह से फिल्म देखने जा रही है, यह अजीब है. इस फिल्म को देखने का मतलब है कि आप ने फिल्मकार की बात मान ली और संजय दत्त को सर्कम्सटांसेज का शिकार मान लिया.

संजय दत्त कोई बच्चा नहीं था कि वह नशेड़ी बन गया या उस ने एके 47 राइफल हथिया ली कि कहीं हिंदू आतंकवादियों की भीड़, उस के मुताबिक, उस की मां पर हमला न कर दे. संजय दत्त के अभिनेता पिता सुनील दत्त, जो राजनीति में भी रहे हैं, हमेशा कांग्रेस के साथ रहे हैं और दंगों में हिंदू उपद्रवियों ने हर ऐसे को शिकार बनाने की कोशिश की थी जिसे वे कांग्रेसी पिट्ठू समझते थे.

खतरे का अंदेशा होने का अर्थ यह नहीं कि सितारे का कोई बेटा खुद को हमलावर भीड़ को मारने के लायक समझ ले. ऐसा फिल्मों में होता है कि एक हथियारबंद व्यक्ति 100-200 की हमलावर भीड़ का मुकाबला कामयाबी के साथ कर लेता है. संजू को इस अपराध के लिए सजा मिली और सही ही मिली. उस ने चाहे गलती मान ली पर अदालतों ने उसे माफी लायक नहीं माना, यह अदालत का इंसाफ था. ऐसे में उस पर बनने वाली फिल्म का बैलेंस्ड होना जरूरी था. लेकिन ‘संजू’ फिल्म संजय दत्त की पोल नहीं बल्कि उस की गलतियों पर परदा डालने की कोशिश करती नजर आई है.

देशभर में आज यह माना जाने लगा है कि अगर आप के पास पैसा है, भीड़ है, पौलिटिकल सिक्योरिटी है तो कोई कुछ नहीं करेगा. तभी गौरक्षकों की हिम्मत बढ़ी हुई है. भाजपाई सरकारों के मंत्री तक हमलावरों का खुल्लमखुल्ला समर्थन कर रहे हैं. फिल्म निर्मातानिर्देशक राजकुमार हिरानी ने यही संजय दत्त के साथ ‘संजू’ के माध्यम से किया है. लेकिन, गलत तो गलत ही रहेगा.

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