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ये हैं समर के शौर्ट ट्रेंडी हेयर कट

लंबे हेयर्स का फैशन भले ही स्मार्टी लुक दे लेकिन गर्मियों में लंबे हेयर्स की साज संभाल करना काफी मुश्किल हो जाता है क्योंकि मौसम के कारण उन में आया मौइश्चर हमें परेशान किए रहता है. तो ऐसे में जानिए हेयर ऐक्सपर्ट प्रिसिला से कि समर में कैसेकैसे ट्रेंडी शार्ट हेयर कट आप को देंगे कूल लुक.

द पिक्सी

यह स्टाइल आप को मौडर्न लुक देने का काम करेगा. इस तरह के हेयरकट में आमतौर पर पीछे और सिर के दोनों तरफ से बाल छोटे और फ्रंट से थोड़े बड़े होते हैं. सिर्फ यही नहीं इस स्टाइल के भी कई टाइप हैं. ध्यान देने वाली बात यह है कि यह हर तरह के फेसकट पर सूट नहीं करता. अधिकतर लंबे चेहरे वालों पर जंचता है और आप इसे आसानी से होल्ड करने के लिए बालों में कुछ बूंदे केयोकार्पिन लाइट हेयर आयल की लगाना न भूलें.

द लेयर्ड बौब

इस स्टाइल को विक्टोरिया बेखम द्वारा पॉपुलर किया गया और इन्हें आप साइड बैंग्स या फिर खास स्टाइल जिस में एक साइड दूसरी साइड से लंबी होती है के साथ कैरी कर सकते हैं.

यह स्टाइल ओवल शेप वाले चेहरों के मुकाबले में गोल और स्क्वायर शेप वालों पर ज्यादा जंचते हैं. अगर आप इस स्टाइल को परफैक्टली स्टे रखना चाहते हैं तो मूज के साथ केयोकार्पिन लाइट हेयर आयल की ट्राई जरूर करें.

द क्लासिक बौब

बौब स्टाइल एकदम सदाबहार लुक माना जाता है जिस में एक लंबाई की कटाई वाले बाल कंधे के ऊपर आते हैं. ये लंबे और स्क्वायर दोनों फेसकट पर सूट करते हैं.

इसे और पार्टी लुक देने के लिए जैल में केयोकार्पिन तेल की कुछ बूंदें मिला कर लगाने के बाद बालों को कानों के पीछे सैट कर लें फिर देखिए अमेजिंग लुक.

द स्क्वायर लेयर

जेनिफर एनीसटन द्वारा यह कट हर जनरेशन में पौपुलर रहा है क्योंकि जो लोग न तो बाल ज्यादा छोटे करवाना चाहते हैं लेकिन बालों के साथ चेंज चाहते हैं उन के लिए यह अच्छा चेंज है.

यह स्टाइल वैसे गोल चेहरे वालों के लिए परफैक्ट है क्योंकि फेस लेयर्स से घिरे होने के कारण उन की राउंडनैस में कमी आती है. साथ ही स्टाइल पतले बालों पर भी सूट करता है क्योंकि स्क्वायर लेयर क्राउन एरिया के वौल्यूम को बढ़ाने का काम जो करती है.

द लेडी डायना कट

लेडी डायना कट जिस के दीवाने हैं लोग, कौन नहीं करवाना चाहेगा खास कर वे लोग जो अपने बालों में हलका वेव चाहते हैं उन के लिए लेयर्ड शार्ट स्टाइल बैस्ट है. इसे हैंडिल करना भी काफी आसान है. लेकिन आप चाहे कोई भी स्टाइल करवाएं उस को डिफरैंट गैटअप देने के लिए एक्सैसरीज जरूर कैरी करें.

लैपटौप में स्क्रीनशाट लेने का बेस्ट तरीका

स्क्रीनशाट (Screenshot ) के द्वारा किसी वेबपेज या कंप्‍यूटर की स्‍क्रीन के पूरे हिस्‍से या कुछ हिस्‍से को कैप्‍चर किया जाता है.  आप अपने फोन और टेबलेट में भी स्क्रीनशाट ले सकते हैं, स्क्रीनशाट लेना बहुत ही सरल प्रक्रिया है फिर भी बहुत से यूजर्स कई प्रकार के साफ्टवेयर डाउनलोड करते हैं. लेकिन स्क्रीनशाट लेने के लिये आपको किसी भी अन्‍य साफ्टवेयर को डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है.

आप इन तरीकों से बहुत आसानी से अपने कंप्‍यूटर और लैपटौप की स्‍क्रीन का स्क्रीनशाट ले सकते हैं-

कंप्यूटर में स्क्रीनशाट लेने के तरीके

  • अपने Keyboard पर Print Screen का बटन खोजिये और जिस स्‍क्रीन को कैप्‍चर करना हो, वहां Print Screen को प्रेस करें, अब ms paint या ms word में Ctrl+v प्रेस करें.
  • इसके अलावा Windows 7, 8 और 10 में स्‍क्रीनशाट लेने के लिये एक खास साफ्टवेयर दिया गया है, जिसका नाम है snipping tool, इसकी सहायता से स्‍क्रीनशाट लेना बेहद आसान है, इसके लिये स्‍टार्ट बटन पर क्लिक कीजिये और सर्च कीजिये snipping tool या सीधे “snippingtool” रन कमांड का इस्‍तेमाल कीजिये
  • नया स्‍क्रीन शाट लेने के लिये न्‍यू पर क्लिक कीजिये और माउस से उस ऐरिया को सलेक्‍ट कीजिये.
  • या फिर आपको जिस भी चीज का स्क्रीनशाट लेना है उसपर जाकर Print Screen को प्रेस करें, फिर फोटोशाप पर जाकर ctrl+n फिर ctrl + v करें. इसके बाद आपको जितना हिस्सा चाहिए उसे क्रौप कर लें. इसके बाद उस इमेज को सेव कर लें.

स्कूल की किताब में मिल्खा सिंह की जगह छपी फरहान की फोटो

पश्चिम बंगाल के एक स्कूल की किताब में मिल्खा सिंह के बारे में दिए गए चैप्टर में असली मिल्खा सिंह की जगह पर फिल्म अभिनेता फरहान अख्तर की तस्वीर छाप दी गई है. दरअसल फरहान अख्तर ‘भाग मिल्खा भाग’ में मिल्खा सिंह की भूमिका निभा चुके हैं. पब्लिशर ने शायद इसी धोखे में भारत के दिग्गज एथलीट मिल्खा सिंह की जगह फरहान की तस्वीर छाप दी. हैरानी की बात यह है कि किताब के रिव्यू में यह बात पकड़ में नहीं आई.

हालांकि किसी ने किताब की यह गलती ट्वीट करके फरहान अख्तर को टैग कर दिया. फरहान ने इस बात को गंभीरता से लिया और ट्वीट करके इस मुद्दे को उठाया और सांसद डेरेक ओ ब्रायन को टैग किया. स्कूल की किताब में मिल्खा सिंह की फोटो छापने में बड़ी गलती कर दी गई है कृपया पब्लिशर को इस बारे में बताएं और किताब को बदलवा दें.

फरहान के इस ट्वीट का रिप्लाई करते हुए पहले तो डेरेक ओ ब्रायन ने इस बात के लिए उनको शुक्रिया कहा और फिर ट्वीट से ये जानकारी दी कि इस प्रकार की कोई भी पुस्तक राज्य सरकार ने पब्लिश नहीं की है. डेरेक ने लिखा,” पुस्तक में मिल्खा सिंह की गलत फोटो को संज्ञान में लाने के लिए शुक्रिया फरहान. राज्य के शिक्षा मंत्री से जानकारी ली है. उन्होंने मुझे बताया है कि यह सरकारी स्कूलों की पाठ्य पुस्तक नहीं है. ना ही इसका प्रकाशन सरकार द्वारा किया गया है.”

सांसद डेरेक ने आगे अपने ट्वीट में कहा, “प्राइवेट पब्लिशिंग कंपनी से इस बारे में जानकारी ले रहा हूं, आने वाले एडिशन में वो गलती को जरूर सुधार लेंगे.”

इसके बाद अभिनेता फरहान अख्तर ने सांसद डेरेक को शुक्रिया अदा किया. अभिनेता ने लिखा कि मुझे विश्वास था कि आप इसका संज्ञान जरूर लेंगे.

रियो ओलंपिक में चोट की कसक एशियाड में पूरी हुई

एशियन गेम्स में सोमवार को 50 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर विनेश फोगाट ने रियो ओलंपिक में नहीं खेल पाने की अपनी कसक को पूरा किया है. चोट लगने के कारण विनेश रियो ओलंपिक में नहीं खेल पाई थी. विनेश की इस जीत पर उसके गांव में जश्न मनाया गया. विनेश के घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. हर कोई इस जीत का श्रेय विनेश के कोच ताऊ महाबीर फोगाट को दे रहा है तो वहीं ताऊ ने इस जीत को विनेश की कड़ी मेहनत बताया.

कई वर्ष पहले पिता राजपाल की मौत के बाद विनेश और उसकी छोटी प्रियंका को उसके ताऊ द्रोणाचार्य अवार्डी पहलवान महाबीर फोगाट ने अपनाया और अपनी बेटियों गीता और बबीता के साथ अखाड़े में उतारा. ताऊ के विश्वास व अंतरराष्ट्रीय पहलवान बहनों गीता-बबीता से प्रेरणा लेते हुए विनेश ने शानदार जीत दर्ज की.

बचपन से ही कुश्ती से लगाव

अगस्त 1994 में गांव बलाली निवासी राजपाल के घर जन्मी विनेश तीन भाई बहनों में सबसे छोटी है. विनेश को बचपन से ही कुश्ती के गुर उसके ताऊ महाबीर पहलवान ने सिखाए. 2003 में पिता के देहांत के बाद मां प्रेमलता ने विनेश का हौसला नहीं टूटने दिया और उसके ताऊ कोच महाबीर पहलवान ने शिक्षा देनी जारी रखी. गांव के ही 8वीं तक की पढ़ाई कर 12वीं कक्षा उसने गांव झोझूकलां स्थित कल्पना चावला मैमोरियल स्कूल से 2014 में प्राप्त की, इसके बाद विनेश ने बीए की पढ़ाई की.

महाबीर को पिता माना

भाई हरविंद्र ने बताया कि विनेश व हमने महाबीर फोगाट को ही अपना पिता माना और उनके दिखाए मार्ग पर चले. प्रेरणा लेते हुए विनेश ने अपने रिकार्ड को बढ़ाते हुए स्वर्ण पदक जीतकर मेडलों की संख्या में इजाफा किया और देश का मान बढ़ाया है. हरविंद्र को उम्मीद है कि 2020 के ओलंपिक में विनेश फिर से गोल्ड जीतकर दोहरी खुशी देगी.

कई अंतरराष्ट्रीय पदक जीते

विनेश ने 2014 ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता. पर, इस साल वह एशियाई खेलों में कांस्य ही जीत पाई. विनेश ने इस साल गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में भी अपना दबदबा कायम रखते हुए सोना जीता. लेकिन इस बार वह 50 किग्रा वर्ग में चैंपियन बनीं. हाल ही में विनेश ने हंगरी में ट्रेनिंग ली थी और इसी महीने, अगस्त में स्पेनिश ग्रैंड प्रिक्स जीता.

डोमिनोज ने कोक को छोड़ इस कंपनी से मिलाया हाथ

पिज्जा बनाने वाली कंपनी डोमिनोज ने एक बड़ा फैसला लिया है. इस फैसले के तहत डोमिनोज का कोका कोला से 20 साल पुराना रिश्ता टूटने जा रहा है. अब कुछ दिन बाद से डोमिनोज के किसी भी आउटलेट पर आपको कोका कोला के कोई भी उत्पाद नहीं मिलेंगे. ऐसा निर्णय कंपनी ने अपनी लागत को कम करने के लिए लिया है.

इस वजह से लिया फैसला

डोमिनोज ब्रांड को चलाने वाली कंपनी जुबिलिएंट फूडवर्क्स लिमिटेड (जेएफएल) ने कहा है कि हम अपने कारोबार को अगले चरण में ले जाना चाहते हैं और इसके लिए एक ऐसे ब्रीवरेज पार्टनर को ढूंढ रहे हैं, जो हमारे पोर्टफोलियो को मजबूती प्रदान करे.

अब पिज्जा के साथ मिलेगा यह सौफ्टड्रिंक

जल्द ही डोमिनोज के ग्राहकों को पिज्जा के साथ कोका कोला की जगह पेप्सी का साथ मिलेगा. कंपनी जल्द ही इसके बारे में घोषणा करने जा रही है. अभी तक पेप्सी प्रतिद्वंदी कंपनी पिज्जा हट के ग्राहकों को मिलती थी, लेकिन अब डोमिनोज के आउटलेट में भी लोगों को पेप्सी ही मिलेगी.

कोका कोला के लिए खतरा

डोमिनोज के इस फैसले से कोका कोला के लिए खतरा काफी बढ़ गया है, क्योंकि ऐसा होने से बाजार में कंपनी की साख में गिरावट देखने को मिलेगी. इससे कोका कोला की बिक्री पर भी असर पड़ेगा. अब कोका कोला के साथ केवल मैकडोनाल्ड ही जुड़ा हुआ है. जबकि पिज्जा हट, केएफसी और टाको बेल जैसे ब्रांड पेप्सीको के साथ लंबे समय से जुड़े हुए हैं. डोमिनोज के भी पेप्सीको के साथ आने से इसकी साख में और बढ़ोतरी होगी.

देश भर में हैं 1100 से ज्यादा आउटलेट्स

डोमिनोज के पूरे देश में कुल 1144 आउटलेट्स हैं, जो कि पूरे देश में क्विक सर्विस रेस्टोरेंट में सबसे ज्यादा हैं. पिज्जा हट के आउटलेट की संख्या डोमिनोज से काफी कम है. पूरे विश्व में 85 देशों में डोमिनोज के आउटलेट्स हैं और कोका कोला के साथ यह करार पूरे विश्व के लिए है.

न खाना, न सेहत, न छत…हल्ला सूचियों का

विश्व बैंक का कहना है कि फ्रांस को पीछे छोड़ कर भारत अब विश्व की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है. आंकड़ों में दावा किया गया है कि 2017 के अंत में भारत का सकल घरेलू उत्पाद फ्रांस के 2.582 ट्रिलियन डौलर की तुलना में 2.597 ट्रिलियन डौलर पहुंच गया था.

भारत से ऊपर अमेरिका, चीन, जापान, जरमनी और ब्रिटेन हैं. अमेरिका का सकल घरेलू उत्पाद 19.390, चीन का 12.237, जापान का 4.872, जरमनी का 3.677 ट्रिलियन डौलर है. 8वें स्थान पर ब्राजील, 9वें पर इटली और फिर कनाडा है.

इस से पहले ईज औफ डूइंग यानी कारोबार करने की सहूलियत के मामले में भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ बताया गया. इस सूची में भारत 190 देशों में 100वें स्थान पर आ गया. विश्व बैंक ने भारत को कारोबार करने के माहौल में सुधार करने वाले शीर्ष 10 देशों में रखा है.

जनवरी में भारत को उभरती हुई अर्थव्यवस्था में 62वें स्थान पर बताया गया था. वर्ल्ड इकोनौमिक फोरम की रिपोर्ट के अनुसार, भारत तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था वाला देश है. समावेशी विकास सूचकांक पर उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में चीन, पाकिस्तान, नेपाल, बंगलादेश, श्रीलंका को भारत से आगे दिखाया गया है. नेपाल 22वें, चीन 26वें, बंगलादेश 34वें, श्रीलंका 40वें और पाकिस्तान 47वें स्थान पर हैं.

फोरम कुछ मानकों के आधार पर यह रिपोर्ट जारी करता है. मानकों में देश के लोगों के रहने का तरीका, पर्यावरण में ठहराव और भविष्य में पीढि़यों के आगे कर्ज से संरक्षण जैसी बातें शामिल होती हैं.

ट्रांसपैरेंसी इंटरनैशनल की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक भ्रष्टाचार सूचकांक में 180 देशों में भारत 81वें नंबर पर शोभायमान है. पहले स्थान पर न्यूजीलैंड, दूसरे पर डेनमार्क और तीसरे पर स्वीडन है.

वैश्विक लिंग गैप रिपोर्ट 2017-18 में 108 देशों की सूची में भारत 144वें स्थान पर है. वर्ल्ड इकोनौमिक फोरम की इस रिपोर्ट में नार्वे पहले, फिनलैंड दूसरे और रवांडा तीसरे स्थान पर है.

वैश्विक आतंकवाद सूचकांक में 163 देशों की सूची में भारत 8वें नंबर पर है. एक नंबर पर इराक, दूसरे पर अफगानिस्तान और तीसरे पर नाइजीरिया है.

वैश्विक युवा विकास सूचकांक में 183 देशों में हम 133वें नंबर पर हैं. एक नंबर पर जरमनी, दूसरे पर डेनमार्क और तीसरे पर आस्टे्रलिया है.

ग्लोबल पीस इंडैक्स 2018 में 163 देशों की सूची में भारत 137वें स्थान पर है. सीरिया सब से आखिर में है.

ग्लोबल डैमोक्रेसी इंडैक्स में भारत 42वें स्थान पर है. मानव विकास सूचकांक में भारत 140 देशों में 131वें स्थान पर है. प्रथम स्थान पर नार्वे, दूसरे पर आस्टे्रलिया, तीसरे पर स्विट्जरलैंड को दर्शाया गया है.

स्वास्थ्य की देखभाल के मामले में 195 देशों की सूची में 145वें स्थान पर भारत, पाकिस्तान 154, बंगलादेश 132, अफगानिस्तान 191, श्रीलंका 71, नेपाल 149 और भूटान 134वें स्थान पर है. स्विट्जरलैंड पहले, स्वीडन दूसरे, नार्वे तीसरे स्थान पर शीर्ष पर हैं.

प्रैस फ्रीडम इंडैक्स में 180 देशों की सूची में हमारा 138वां स्थान है. पाकिस्तान 139वें और बंगलादेश 146वें स्थान पर है.

वर्ल्ड हैप्पीनैस सूचकांक 2018 की 156 देशों की सूची में भारत को 133वें नंबर पर दिखाया गया है. एक नंबर पर फिनलैंड, दूसरे पर नार्वे जबकि तीसरे पर डेनमार्क है.

इन में कुछ तथाकथित उपलब्धियों वाली सूचियों पर सत्ताधारी दल द्वारा तालियां पीटी जा रही हैं पर भारत में अभी भी करोड़ों लोग भुखमरी के शिकार हैं. करोड़ों लोग छत से वंचित हैं. प्रतिवर्ष बदतर होती स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते लाखों लोग मौत के मुंह में समा रहे हैं.

अर्थव्यवस्था में छठे स्थान पर आने से खुश होने वालों को यह नहीं दिखता कि भारत की आबादी 134 करोड़ के लगभग है जबकि फ्रांस की केवल 6.7 करोड़ ही है. चीन दूसरे नंबर पर क्यों है? आबादी ज्यादा है तो क्या सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि नहीं होनी चाहिए? अधिक आबादी क्या संसाधन का अधिक होना नहीं है? इसी आबादी यानी श्रमशक्ति के बूते चीन अपने उद्योगों व उत्पादन का विस्तार करते हुए उपभोक्ता वस्तुओं के मामले में वैश्विक बाजार में सब से बड़े उत्पादक और निर्यातक देशों में शुमार हो सका है.

भारत फ्रांस जैसे देशों से प्रतिव्यक्ति आय (लगभग 7.060 हजार डौलर) के मामले में भी बहुत पीछे है. चीन की आबादी भारत से ज्यादा है, फिर भी उस की प्रतिव्यक्ति आय 16.760 डौलर है. तुलनात्मक रूप से विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था अमेरिका की प्रतिव्यक्ति आय 60.200 डौलर है.

बदहाली की रिपोर्टें भी समयसमय पर आती रहती हैं. सितंबर 2017 में विश्व बैंक ने घटिया शिक्षा देने वाले देशों की सूची जारी की थी. बदतर शिक्षा देने वाले देशों में भारत दूसरे स्थान पर विराजमान है. पहले स्थान पर मलाया है. यह सूची इस आधार पर तैयार की गई कि जहां दूसरी कक्षा के बच्चे एक छोटे से अध्याय का एक शब्द तक नहीं पढ़ सकते. विश्व बैंक दुनिया के 12 देशों की सूची जारी करता है जहां की शिक्षा व्यवस्था सब से बदतर है.

विश्व बैंक की वर्ल्ड डैवलपमैंट रिपोर्ट 2018 ‘लर्निंग टू रियलाइज एजुकेशन प्रौमिस’ में कहा गया है कि ग्रामीण भारत में कक्षा 3 के छात्र मामूली सवाल भी हल नहीं कर सकते. रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना ज्ञान की शिक्षा से गरीबी को मिटाने और समाज में समृद्धि लाने के सपने को पूरा नहीं किया जा सकता. ज्ञान का यह संकट सामाजिक खाईर् को और बढ़ा रहा है. अगर लोगों को अच्छी शिक्षा दी जाती है तो वे बेहतर नौकरी, आय और स्वास्थ्य लाभ हासिल करते हैं वरना गरीबी में जीवनयापन करते हैं.

ईज औफ डूइंग में भारत की रैंक सुधरी है, ऐसा कहा जा रहा है. सवाल है कि कारोबार करने में सुगमता आईर् है तो विदेशी पूंजी निवेश घट क्यों रहा है? रिपोर्ट बताती है कि देश में पिछले कुछ समय से एफडीआई में कमी आई है.

इसी तरह एक सूची में भारत की फैली भुखमरी की पोल खुलती है. 2017 में जारी अंतर्राष्ट्रीय भुखमरी सूचकांक में भारत 119 देशों की सूची में 100वें नंबर पर था. उस से पिछले साल भारत 97वें स्थान पर रहा यानी 3 नंबर और ऊपर चला गया. अर्जेंटीना पहले, बेलारूस दूसरे, बोस्निया और हर्जेगोविना तीसरे स्थान पर हैं.

सरकारें केवल आंकड़ों के सहारे विकास दिखाना चाहती हैं जबकि हकीकत में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, बिजली, पीने का पानी जैसे बुनियादी मामलों में देश की हालत बदतर है. आज भी देश में कितने ही देशवासी भूखे पेट सोने को मजबूर हैं, कितने ही इलाज की सुविधा मुहैया न होने के चलते मर जाते हैं और कितने ही छत न होने की वजह से खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजार रहे हैं.

जेब्बी सिंह की लंबी उड़ान

20 अगस्त से ‘‘स्टार भारत’’ पर प्रसारित हो रहे हास्य सीरियल ‘‘पापा बाय चांस’’ में 24 वर्षीय युवान का किरदार निभाते हुए जेब्बी सिंह ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत की है.

2015 में ‘मिस्टर इंडिया’ के फायनलिस्ट रहे चंडीगढ़ निवासी जेब्बी सिंह अब तक माडलिंग व रैंप शो में व्यस्त थे. इस बीच उन्होंने नमित कपूर से अभिनय का प्रशिक्षण भी हासिल किया. पर सबसे पहले अनुराग कश्यप ने जेब्बी सिंह को अभिषेक बच्चन, तापसी पन्नू और विक्की कौशल के साथ फिल्म ‘‘मनमर्जिया’’ में छोटा सा किरदार निभाने का मौका दिया. यह फिल्म 21 सितंबर को प्रदर्शित होगी. मगर इस फिल्म की शूटिंग खत्म करते ही जेब्बी सिंह को ‘‘स्टार भारत’’ के सीरियल ‘‘पापा बाय चांस’’ में अभिनय करने का अवसर मिल गया और फिल्म से पहले ही इस सीरियल का प्रसारण शुरू हो गया.

खुद जेब्बी सिंह कहते हैं- ‘‘अभिनय करते हुए मैं इंज्वाय कर रहा हूं. करियर की शुरुआत में  ही ‘पापा बाय चांस’ जैसा सीरियल और 24 वर्षीय पंजाबी युवक युवान का किरदार निभाने का अवसर मिलना मेरे लिए गौरव की बात है. युवान अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने वाला लापरवाह युवक है. उसे प्रतिबद्धता और बच्चों से डर लगता है. पर उसकी जिंदगी में उस वक्त नाटकीय मोड़ आता है, जब उसकी इच्छा के विरुद्ध उसे तीन बच्चों के पिता की जिम्मेदारी दे दी जाती है.’’

सास बहू मार्का सीरियल ठुकराते रहे जेब्बी सिंह के लिए ‘‘पापा बाय चांस’’ का हिस्सा बनना सुखद अहसास है. वह कहते हैं-‘‘मैं सास बहू वाले सीरियल नहीं करना चाहता था. इसलिए जब औडीशन की बारी आयी, तो मैंने इस सीरियल के युवान के किरदार के लिए बहुत जोश के साथ औडीशन दिया था. मुझे यकीन था कि यह किरदार मुझे मिलेगा. क्योंकि युवान पंजाबी है और मैं भी निजी जिंदगी में पंजाबी ही हूं. औडीशन देते समय मुझे लगा था कि यह किरदार मेरे लिए खासतौर पर लिखा गया है.’’

‘दोस्ताना 2’ को लेकर करण जौहर ने तोड़ी चुप्पी

साल 2008 में आई फिल्म ‘दोस्ताना’ लोगों को काफी पसंद आई थी. इस फिल्म में अभिषेक बच्चन, प्रियंका चोपड़ा और जौन अब्राहम नजर आए थे. अब करीब 10 साल बाद इस फिल्म के सीक्वल की चर्चा हो रही है. धर्मा प्रोडक्शन से जुड़े सूत्र ने पहले किसी अखबार को बताया था, ‘करण जौहर हमेशा से ‘दोस्ताना 2’ बनाना चाहते थे, खासकर तब जब इस पहली फिल्म को दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली. अब आखिरकार उनके पास इस फिल्म की स्क्रिप्ट भी रेडी है, जिससे प्रोडक्शन की काम में तेजी आएगी. इतना ही नहीं खबरें आ रही हैं कि करण जौहर ने इसके सीक्वल के लिए लीड स्टार्स को फाइनल कर लिया है.

पिछले काफी समय से करण जौहर की फिल्म ‘दोस्ताना 2’ को लेकर जिस तरह की खबरें चर्चा में है उसे लेकर फैन्स काफी एक्साइडेट नजर आ रहे हैं. कास्ट की बात करें तो करण ने सिद्धार्थ मल्होत्रा और जाह्नवी कपूर को फाइनल कर लिया है और तीसरे मेल लीड रोल के लिए ऐक्टर की तलाश में हैं.

इस तरह की खबरों पर लगाम लगाते हुए आखिरकार करण जौहर ने भी अपनी चुप्पी अब तोड़ दी है और इन खबरों को गलत बताया है.

करण जौहर ने इन्हें अफवाह करार देते हुए ट्वीट किया, ‘हेलो, दोस्ताना 2 से जुड़ी जो भी खबरें चल रही हैं वे गलत हैं. इसे लेकर जो भी अनुमान लगाए जा रहे हैं वे पूरी तरह गलत हैं.’ उनके इस ट्वीट के बाद ऐसा लगता है कि पहले जो भी दोसेताना को लेकर खबरें आ रहीं थी वो महज अफवाह थी. फिलहाल अब एक बात तो साफ है कि तो ‘दोस्ताना 2’ के लिए अभी दर्शकों को लंबा इंतजार करना होगा.

बेलगाम बहू : अवैध संबंधों ने बरबाद कर दिया परिवार

कुछ आहट हुई तो दलजीत सिंह बिस्तर पर उठ कर बैठ गए. बैड पर बैठेबैठे ही उन्होंने अपने चारों ओर नजर दौड़ा कर देखा, वहां कोई नहीं था. अलबत्ता बाहर से कुत्तों के भौंकने की आवाजें लगातार आ रही थीं. वह उठ कर कमरे से बाहर आए तो उन्होंने एक परछाईं को अपनी बहू मनिंदर कौर के कमरे से बाहर निकल कर दीवार फांद कर भागते हुए देखा.

‘कौन था वह? क्या कोई चोर या कोई दुश्मन…’ मन ही मन दलजीत सिंह ने अपने आप से सवाल किया. फिर असमंजस की स्थिति में वह बहू के कमरे के पास पहुंचे तो कमरे का दरवाजा खुला हुआ था.
उन्होंने मनिंदर को जगा कर डांटते हुए कहा, ‘‘यह दरवाजा खुला छोड़ कर क्यों सो रही है. जानती है कोठी में कोई घुस आया था?’’

‘‘गलती हो गई पापाजी, बच्चों को सुलाते हुए न जाने कब मेरी भी आंख लग गई. आइंदा मैं ध्यान रखूंगी.’’ मनिंदर ने अपने ससुर से कहा. बहू का जवाब सुन दलजीत सिंह संतुष्ट हो गए और अपने कमरे में जा कर दोबारा सो गए.

दलजीत सिंह मूलत: जिला टांडा के गांव जग्गोचक के मूल निवासी थे. 65 वर्षीय दलजीत सिंह करीब 12 साल पहले सेना से रिटायर हुए थे. खुद सेना में थे, इसलिए उन्होंने अपने बेटे ओंकार सिंह को भी सेना में भरती करवा दिया था. इन दिनों ओंकार सिंह अपनी रेजीमेंट के साथ श्रीनगर में तैनात था.
दलजीत सिंह की पत्नी का कई साल पहले निधन हो चुका था. बेटे को सेना में भरती करवाने के बाद दलजीत सिंह ने 7 साल पहले उस का विवाह मनिंदर कौर के साथ कर दिया था. ओंकार और मनिंदर कौर के 2 बच्चे हुए. इन की बड़ी बेटी जैसमिन 5 साल की हो चुकी थी.

दलजीत सिंह इस से पहले गांव बहरामपुर में रहते थे. वहां उन की कोठी बनी हुई है, लेकिन ओंकार की शादी के बाद मनिंदर के बारबार कहने पर उन्होंने गुरदासपुर के थाना तिब्बड़ के अंतर्गत आने वाले गांव कोठे घराला बाइपास स्थित कालोनी में एक और कोठी बनवा ली थी. इस कोठी में उन्होंने 2 साल पहले ही शिफ्ट किया था.

दलजीत सिंह का परिवार खातापीता परिवार था. उन के पास खेती की भी जमीन थी. रिटायरमेंट के बाद उन्हें अच्छीखासी पेंशन भी मिलती थी. ओंकार का वेतन भी अच्छा था.

घर में किसी चीज की कमी नहीं थी. उन के परिवार की दिनचर्या भी सामान्य थी, दलजीत सिंह का अधिकांश समय गुरुद्वारे में या घर पर वाहेगुरु का नाम जपते गुजरता था. बहू मनिंदर कौर सुबहसुबह घर का काम निपटा कर दिन भर बच्चों के साथ लगी रहती थी.

मनिंदर कौर के पास वैसे तो किसी चीज की कमी नहीं थी, पर लंबे समय तक पति से दूर रहने की वजह से उस की रातें तनहाई में गुजरती थीं. इसी दौरान उस के पैर बहक गए. लगभग 2 साल पहले उस के संबंध एक 18 वर्षीय युवक राहुल उर्फ ननु के साथ बन गए थे. दूर के रिश्ते में मनिंदर ननु की मामी लगती थी.
ननु बहरामपुर की मंडी कोहलू वाली निवासी रमन शर्मा का बेटा था. रमन शर्मा की मौत के बाद उस की पत्नी स्नेहलता ने ननु को अपने भाई से गोद लिया था. स्नेहलता पंजाब पुलिस में सबइंसपेक्टर है और इन दिनों थाना मुकेरिया में तैनात है.

मां के ड्यूटी पर चले जाने के बाद ननु अकेला रहता था और इसी कारण वह छोटी उम्र से ही गलत संगत में पड़ गया था. जिस समय उस के मनिंदर कौर के साथ अवैध संबंध बने थे, उस वक्त उस की उम्र केवल 16 साल थी.

बहरहाल, मनिंदर और ननु के बीच संबंध बिना किसी रोकटोक के चलते रहे. उन के संबंधों की किसी को कानोंकान खबर नहीं थी. इस की वजह शायद यह थी कि दोनों के बीच मामीभांजे का रिश्ता था और दोनों की उम्र में भी खासा अंतर था.

ननु का दलजीत के घर काफी आनाजाना था. दलजीत को कभी इस बात का संदेह नहीं हुआ कि मामीभांजे के रिश्ते की आड़ में उन के घर क्या खेल चल रहा है. दलजीत सिंह को बहरामपुर वाली कोठी बदलने के लिए भी मनिंदर ने ही मजबूर किया था.

दरअसल, उस इलाके के लोगों को मनिंदर और ननु के अवैध रिश्तों का पता चल गया था. इसीलिए अपने ससुर और पति से जिद कर के मनिंदर ने वह कोठी बदलने के लिए दबाव डाला था.
दूसरी कोठी नई आबादी में थी. यहां दूरदूर आबादी होने के कारण उसे कोई रोकटोक नहीं थी. धीरेधीरे मनिंदर निडर होती चली गई. अब उस ने अपने ससुर की मौजूदगी में ही अपना खेल खेलना शुरू कर दिया था. उन की मौजूदगी में वह अपने प्रेमी ननु के साथ दूसरे कमरे में बंद हो जाया करती थी.

एक दिन दलजीत को अहसास हुआ कि मनिंदर और ननु के बीच मामीभांजे के रिश्ते के अलावा कुछ और भी है. इस के बाद उन्होंने दोनों पर नजर रखनी शुरू कर दी. इस का नतीजा यह हुआ कि जल्द ही उन के सामने दोनों के रिश्तों की हकीकत खुल गई. उन्होंने एक दिन मनिंदर और ननु को आपत्तिजनक हालत में देख लिया. उन्हें गुस्सा तो बहुत आया. ज्यादा शोरशराबा करने से उन की बदनामी ही होनी थी.

लिहाजा उन्होंने बहू को फटकार लगाने के साथ ननु को भी हिदायत दे दी कि वह उन के यहां न आए. उन्होंने ननु का अपने घर आनाजाना बंद करवा दिया था. दलजीत ने इस बात का जिक्र अपने बेटे ओंकार से भी किया था.

पत्नी की इस हरकत पर ओंकार को बहुत गुस्सा आया. वह छुट्टी ले कर घर आ गया और मनिंदर को प्यार से समझाते हुए कहा, ‘‘मनिंदर, ऐसी बातें तुम्हें शोभा नहीं देतीं. तुम एक अच्छे परिवार की बेटी और बहू हो. अगर यह बात घर से बाहर जाएगी तो समझ सकती हो कितनी बदनामी होगी.’’
मनिंदर ने भी भविष्य में ऐसी कोई गलती न करने का वादा किया. पर पति के नौकरी पर लौटते ही वह सब कुछ भूल गई. उस ने फिर से ननु से मिलना शुरू कर दिया.

बात घटना से करीब डेढ़ महीने पहले की है. दलजीत सिंह ने ननु का अपने घर आना एकदम से बंद करवा दिया था. इतना ही नहीं, वह दिन भर घर पर रह कर खुद ही पहरेदारी करने लगे थे. इस बात से गुस्साए ननु ने एक रात दलजीत के घर आ कर खिड़कियों और गाड़ी पर पथराव किया, जिस से खिड़कियों और गाड़ी के शीशे टूट गए.

दलजीत सिंह ने राहुल उर्फ ननु के खिलाफ थाना तिब्बड़ में रिपोर्ट दर्ज करवाई. दूसरी तरफ मनिंदर ने ननु को घर आने की खुली छूट दे दी. यानी वह ससुर का विरोध करने पर उतर आई. ननु मनिंदर के पास बेरोकटोक जाने लगा. इस बीच ओंकार सिंह छुट्टी पर घर आया था. उस के आने के बाद ननु ने मनिंदर के पास आना बंद कर दिया था.

छुट्टियां पूरी कर के ओंकार 15 जून, 2018 को वापस अपनी ड्यूटी पर चला गया तो मनिंदर ने ननु को फोन कर अपने घर बुला लिया. जिस वक्त ननु वहां पहुंचा, उस समय दलजीत घर पर नहीं थे. जब वह वापस घर आए तो उन्हें ननु के आने का पता चला. पर वह चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे थे. इस के बाद ननु ने मनिंदर के साथ उसी के कमरे में रहना शुरू कर दिया. यह बात दलजीत को बड़ी नागवार गुजरी. उन्होंने जब इस बेशर्मी का विरोध किया तो मनिंदर ने ससुर से लड़नाझगड़ना शुरू कर दिया. बेबसी की हालत में पूर्व फौजी दलजीत सिंह ने अपने बेटे ओंकार को फोन कर के पूरी बात बताई. फोन कर के उन्होंने यह बात अपने रिश्तेदारों और मनिंदर के मायके वालों को भी बता दी.

16 जून की रात ननु को ले कर मनिंदर और दलजीत के बीच काफी झगड़ा हुआ, जो देर रात तक चलता रहा. 17 जून, 2018 की सुबह दलजीत सिंह ने गुरदासपुर के गांव किला नाथूसिंह के रहने वाले अपने साले तरसेम सिंह के बेटे किरपाल सिंह को फोन कर के कहा कि उन की बहू मनिंदर उन के साथ लड़ाईझगड़ा कर रही है. वह आ कर उसे समझाए.

उस समय किरपाल अपने खेतों में पानी लगा रहा था. अपने फूफा का फोन सुनने के बाद उस ने कहा, ‘‘फूफाजी, आप चिंता न करें. थोड़ा सा काम बचा है, उसे निपटा कर मैं जल्द पहुंच जाऊंगा.’’
कहने को तो किरपाल ने अपने फूफा से ऐसा कह दिया था पर वह अपने काम में ऐसा व्यस्त हुआ कि वह फूफा के फोन वाली बात भूल गया.

17 जून की शाम को करीब 4 बजे ओंकार सिंह ने अपने पिता दलजीत सिंह को फोन किया. फोन की घंटी बजती रही, पर उन्होंने फोन नहीं उठाया. ओंकार ने पिता को कई बार फोन किया, हर बार घंटी बजती रही. इस के बाद उस ने पत्नी को फोन किया. वह भी फोन नहीं उठा रही थी.

वह परेशान हो गया कि ऐसी क्या बात है जो दोनों में से कोई भी फोन नहीं उठा रहा. उस की चिंता लगातार बढ़ती जा रही थी.

काफी देर परेशान होने के बाद ओंकार ने अपने ममेरे भाई किरपाल सिंह को फोन कर के बताया, ‘‘किरपाल, तुम घर जा कर देखो, पापा और मनिंदर कहां हैं. उन दोनों में से कोई भी फोन नहीं उठा रहा.’’
किरपाल सिंह ने उसी समय ओंकार को बताया कि सुबह उस के पास दलजीत फूफा का फोन आया था. उन्होंने मनिंदर के साथ झगड़ा होने की बात बताई थी. बहरहाल, किरपाल ने ओंकार को आश्वासन दिया कि वह अभी जा कर देखता है और फूफाजी से उस की बात करवाता है.

ओंकार सिंह को बच्चों और पिता की चिंता थी. किरपाल के आश्वासन देने के बाद भी वह संतुष्ट नहीं हुआ. उस ने अपने घर के पास बने गुर्जर के डेरे पर फोन कर कहा कि वह उन के घर जा कर देखें कि वहां क्या हो रहा है.

गुर्जर जिस समय दलजीत के घर पहुंचा, उसी समय किरपाल भी वहां पहुंच चुका था. किरपाल और गुर्जर ने दलजीत के कमरे में जा कर देखा तो सामने का दृश्य देख उन के पैरों तले से जमीन खिसक गई. सामने बैड पर दलजीत सिंह का खून से लथपथ शव पड़ा हुआ था.

उन के सिर और दूसरी जगहों पर चोटें लगी थीं, जिन में से खून रिस कर बिस्तर पर जम गया था. पास वाले कमरे में मनिंदर और उस के बच्चे बैठे थे. किरपाल ने मनिंदर से इस बारे में पूछा तो उस ने यह कह कर बात खत्म कर दी थी कि उसे कुछ पता नहीं है.

यह बड़ी हैरानी की बात थी कि घर में इतना बड़ा कांड हो गया और मनिंदर को कुछ पता ही नहीं चला. बहरहाल, किरपाल ने सब से पहले घटना की सूचना थाना तिब्बड़ पुलिस को दी और बाद में अपने भाई ओंकार सिंह को सूचित कर दिया.

सूचना मिलते ही थाना तिब्बड़ के थानाप्रभारी राजकुमार शर्मा, एसआई अमरीक चांद, एएसआई सरबजीत सिंह, मसीह, हवलदार विजय सिंह को साथ ले कर मौके पर पहुंच गए. दलजीत की लाश अपने कब्जे में ले कर उन्होंने काररवाई शुरू कर दी.

घटना का मुआयना करने के बाद थानाप्रभारी को लगा कि यह काम घर के किसी सदस्य या जानने वाले का हो सकता है. क्योंकि हत्या का मकसद केवल दलजीत की हत्या करना था. लूटपाट या अन्य किसी तरह के वहां कोई सबूत नहीं थे.

थानाप्रभारी ने डौग स्क्वायड और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट को भी घटनास्थल पर बुला लिया था. घटना की खबर मिलते ही एसपी हरचरण सिंह भुल्लर, एसपी (देहात) विपिन चौधरी और डीएसपी (स्पैशल ब्रांच) गुरबंस सिंह बैंस भी मौकामुआयना करने वहां पहुंच गए थे. पुलिस ने जरूरी काररवाई कर दलजीत का शव पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया.

मनिंदर कुछ बताने को तैयार नहीं थी. तब थानाप्रभारी ने वहां मौजूद मनिंदर की 5 वर्षीय बेटी जैसमिन को अपने विश्वास में ले कर पूछताछ की तो उस ने सच बताते हुए कहा कि मम्मी और ननु अंकल ने ही दादा को मारा है.

थानाप्रभारी के लिए यह जानकारी महत्त्वपूर्ण थी. उन्होंने उसी समय मनिंदर से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि झगड़े के बाद उस ने और उस के प्रेमी ननु ने मिल कर दलजीत सिंह की हत्या की थी. उस ने बताया कि उस ने अपने ससुर से झगड़े के बाद उन के सिर पर लोहे की रौड से हमला किया था.

चश्मदीद गवाह जैसमिन के बयान और मनिंदर द्वारा अपना अपराध स्वीकार करने के बाद थानाप्रभारी ने भादंवि की धारा 302/34 के तहत मनिंदर और राहुल उर्फ ननु के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मनिंदर को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर 2 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया. साथ ही फरार ननु की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी. ननु को पुलिस ने 20 जून, 2018 को गिरफ्तार कर लिया. उसे भी अदालत में पेश कर के रिमांड पर लिया गया.

रिमांड के दौरान पूछताछ में ननु ने बताया कि मनिंदर के साथ उस के अवैध संबंध पिछले काफी समय से थे और मृतक दलजीत सिंह इस का विरोध करते थे. इतना ही नहीं वह उसे और मनिंदर को बातबात पर जलील कर के धमकाते भी थे.

ननु ने बताया कि 17 जून को जब वह मनिंदर के घर आया तो दलजीत सिंह ने विरोध करना शुरू कर दिया. वह उसे देखते ही गालीगलौज करने लगे. इसी बात को ले कर मनिंदर और दलजीत का आपस में झगड़ा होने लगा, जिस के बाद आरोपी ने मनिंदर के साथ मिल कर दलजीत सिंह के ऊपर तेज धार हथियार और लोहे की रौड से हमला कर के उन्हें मौत के घाट उतार दिया.

रिमांड के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों की निशानदेही पर उन के घर से लोहे की रौड भी बरामद कर ली, जिस से उन्होंने दलजीत की हत्या की थी. पुलिस काररवाई पूरी कर के थानाप्रभारी राजकुमार ने दोनों आरोपियों को पुन: अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथा लिखने तक दोनों आरोपी जेल में बंद थे.
– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

शौचालय साफ रखना जरूरी है

शौचालय और साफसफाई को ले कर फिल्म ‘गांधी’ का एक सीन बरबस याद आता है जहां महात्मा गांधी का अपनी पत्नी कस्तूरबा गांधी से इस बात पर विवाद हो रहा होता है कि दक्षिण अफ्रीका के आश्रम में बनाए गए नियमानुसार सब को इस्तेमाल के बाद अपना शौचालय साफ करना होगा.

हम सब जानते हैं कि बापू को साफसफाई बहुत पसंद थी और वे ज्यादातर बीमारियों की अहम वजह शौचालयों में फैली गंदगी को मानते थे. आज भी हम घर की साफसफाई और सजावट में चार चांद लगा देते हैं लेकिन शौचालय को चिराग तले अंधेरा वाली तर्ज पर गंदा ही छोड़ देते हैं.

घर के शौचालय की साफसफाई बहुत जरूरी है क्योंकि गंदे शौचालय में बीमारी पैदा करने वाले कीटाणु छिपे होते हैं. इस के अलावा मेहमानों को भी अगर आप का शौचालय गंदा मिलता है तो वे दोबारा आने से बचते हैं या फिर मजाक बनाने से नहीं चूकते हैं.

पूरे घर में बाथरूम ही एक ऐसा हिस्सा है जहां साफसफाई की सब से ज्यादा जरूरत होती है क्योंकि पानी के ज्यादा इस्तेमाल होने की वजह से वहां चिकनाई और कालिख जमा हो जाती है. इस से फर्श और दीवारें दोनों ही गंदी लगती हैं.

जहां शौचालय और बाथरूम एकसाथ बने हों वहां बाथटब, वाश बेसिन, वाटर टैप, फर्श पर लगे पीले धब्बे, जंग और पानी से पड़ने वाले सफेद दागधब्बों को मिटाना बहुत जरूरी होता है. इन्हें हटाने के लिए बाजार में बहुत सारे क्लीनर मुहैया हैं.

अमूमन घरों में देशी शौचालय होते हैं लेकिन शहरों में इंडियन कमोड के साथसाथ वैस्टर्न कमोड भी चलन में हैं. दोनों तरह के शौचालय साफ करना कोई मुश्किल काम नहीं है.

टौयलैट साफ करने के लिए आमतौर पर टौयलैट ब्रश, टौयलैट क्लीनर, कपड़ा या पेपर नैपकिन, दस्ताने, मग, बालटी और पानी की जरूरत होती है. इस तरह का सामान बाजार में आसानी से मिल जाता है.

कमोड या पैर रखे जाने वाली जगह पर किसी अच्छे ब्रांड का टौयलैट क्लीनर डाल कर ब्रश की मदद से फैला दें. कमोड के अंदरूनी हिस्से में भी क्लीनर डालें जिस से यह रिसते हुए पूरे कमोड में फैल जाए. फिर इसे 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें. बाद में ब्रश की मदद से अच्छे से घिस कर शौचालय को चमका दें.

आसपास की दीवारों पर अगर अच्छा मार्बल लगा है तो उस के दाग भी टौयलैट क्लीनर की मदद से आसानी से साफ किए जा सकते हैं.

सफाई के लिए कई तरह के ब्रश बाजार में मिलते हैं जिन में आगे से मुड़ा हुआ अलग तरह का ब्रश या स्टैंड वाले ब्रश ठीक रहते हैं.

सफाई के साथसाथ शौचालय की बदबू से बचने के लिए उस में एग्जोस्ट पंखा जरूर लगवाएं.

हफ्ते में एक बार टौयलैट के अंदर और बाहर बेकिंग सोडा छिड़कने के बाद सिरका और पानी बराबर मात्रा में मिला कर ब्रश से घिस दें, फिर धो दें. इस से सफाई के साथसाथ बदबू भी दूर हो जाएगी.

हाइड्रोजन पैराऔक्साइड का स्प्रे करने के बाद उसे पोंछने से भी सफाई अच्छी तरह से हो जाती है और बदबू भी दूर होती है.

शौचालय इस्तेमाल करने के बाद सिर्फ फ्लश करना काफी नहीं है क्योंकि यह सिर्फ अंदर के हिस्से को साफ करता है जबकि बाहर की तरफ फैली गंदगी बदबू फैलाती है, इसलिए दिन में एक बार सादा पानी डाल कर थोड़ा ब्रश फिरा कर साफ कर देना चाहिए.

टौयलैट के आसपास की उस जगह को साफ करना न भूलें जहां से यह जमीन से जुड़ा होता है. यह जगह काफी गंदी होती है. इस जगह पर बहुत सी धूल जमा होती है, इसलिए इस को साफ करना न भूलें.

शौचालय की सफाई के दौरान कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए. जैसे इस दौरान स्पौंज का उपयोग न करें क्योंकि इस में बैक्टीरिया ज्यादा पनपते हैं. इस के अलावा शौचालय के फर्श पर पानी न जमा होने दें. जिस तरह आप घर का बैडरूम, किचन और बाकी हिस्सा साफ रखते हैं, बाथरूम भी उसी तरह से साफ रखें.

याद रखें कि घर का शौचालय आप के घर का विजिटिंग कार्ड सरीखा होता है. थोड़े में ज्यादा समझ जाइए, क्योंकि यह आप की इज्जत और सेहत दोनों का सवाल है.

सफाई में इन खास बातों का रखें खयाल

* टौयलैट की दीवारें भी साफ करें क्योंकि इन में सीलन आने से बदबू होने का खतरा बना रहता है.

* कमोड और टौयलैट सीट व मार्बल अच्छी कंपनी के हों ताकि उन पर दागधब्बे या गंदगी आसानी से साफ हो सके.

* बच्चे जब फ्लश करें तो एक बार चैक कर लें.

* कभीकभार पानी प्रैशर के साथ डाल देने से आगे तक पाइप साफ हो जाता है और टौयलैट ब्लौक होने की समस्या नहीं आती है.

* फ्लश का ढक्कन खुला न छोड़ें क्योंकि इस से हवा में रोगाणु फैलते हैं जिस से बीमारियां फैलने का डर रहता है.

* टौयलैट को हमेशा टौयलैट क्लीनर से ही साफ करें.

* 6 महीने में टौयलैट ब्रश जरूर बदल लें.

* अच्छी क्वालिटी के नल, पाइप व वाश बेसिन लगवाएं ताकि शौचालय में पानी लीक न होने पाए.

* स्क्रब से रगड़ते समय दस्ताने पहनें. इस से आप के हाथ सूखे रहेंगे और हानिकारक कैमिकल से चमड़ी का बचाव होगा.

* टौयलैट की सफाई वाले खास कपड़े या पेपर टौवल को कहीं दूर फेंक दें. इन्हें फ्लश न करें.

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