भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दरों में इजाफा करने के बाद बैंकों की तरफ से ब्याज दरों में की गई बढ़ोतरी जहां आम उपभोक्ताओं को परेशान कर रही हैं वहीं सेविंग्स पर मिल रहा कम ब्याज उनकी इस परेशानी को और बढ़ा रहा है.

सेविंग्स पर मिल रहा कम ब्याज दर बेशक चिंता का कारण हो सकता है, लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया में ऐसी भी जगहें है, जहां बैंकों में रखे पैसे पर ब्याज देना तो दूर, उल्टे उस पर ब्याज का भुगतान करना पड़ता है.

आरबीआई की ही तरह दुनिया के सभी केंद्रीय बैंक एक निश्चित अंतराल के बाद समीक्षा बैठक करते हैं. इस समीक्षा बैठक के दौरान या तो कुछ बेसिस प्वाइंट की कटौती की जाती है या फिर कुछ बेसिस प्वाइंट का इजाफा. हाल ही में आरबीआई ने समीक्षा बैठक में रेपो रेट में इजाफा किया था, जिसके बाद बैंकों ने भी ब्याज दरों में इजाफा किया.

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लेकिन स्विस नैशनल बैंक ने अपनी हालिया बैठक में नेगेटिव पौलिसी रेट को पहले की ही तरह बरकरार रखा है. स्विस नैशनल बैंक (एसएनबी) ने डिपौजिट पर (-) 0.75 फीसदी टैक्स रखा है. जिसका मतलब है कि बैंकों में पैसा रखने के बदले ग्राहकों को ही ब्याज का भुगतान करना होगा. ऐसी स्थिति में बैंक लोगों को ज्यादा खुले तौर पर कर्ज देता है ताकि लोगों को निवेश और खर्च के लिए प्रोत्साहित किया जा सके.

इसके अलावा बैंक औफ जापान ने भी ब्याज दरों को नेगेटिव में बरकरार रखा है. एक नजर दुनिया के उन देशों पर जहां पर पैसे रखने की एवज में या तो ब्याज का भुगतान करना पड़ता है या फिर बेहद न्यूनतम ब्याज मिलता है.

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