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होम लोन लेने से पहले करें होमवर्क

हर किसी का सपना होता है कि उसका अपना एक घर हो. ऐसे में अगर आप घर खरीदने की सोच रहे हैं, वो भी लोन लेकर तो होम लोन लेने से पहले होमवर्क जरूर कर लें. इसके लिए केवल बैंक के भरोसे न रहें. कभी भी होम लोन से जुड़े फैसले जल्दबाजी में न लें. आज के दौर में बाजार में कई विकल्प मौजूद हैं. होम लोन में आप फिक्स्ड, फ्लोटिंग या फ्लैक्सी विकल्प को भी चुन सकते हैं.

लोन अप्लाई से पहले या फिर बैंक चयन से पूर्व अलग-अलग बैंकों के औफर और ब्याज दर की तुलना करें, फिर जो सबसे सस्ता लगे उसका चयन करें. होम लोन से पहले बैंकर से ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, लोन अवधि को लेकर विस्तार से जानकारी लें, ताकि कुछ कंफ्यूजन न रह जाएं. कई बार लोग जल्दबाजी के चक्कर में किसी भी बैंक से लोन ले लेते हैं और फिर बाद में उन्हें लगता है कि थोड़ी कोशिश की जाती तो इससे कम ब्याज दर में दूसरे बैंक से लोन मिल सकता था.

कभी भी लोन को लेकर कागजी कार्रवाई से नहीं घबराएं, क्योंकि बैंकर आपसे वहीं कागजात मांगते हैं जो जरूरी होते हैं. ऐसे में कुछ लोग कागजात के डर से बैंक की बजाय एनबीएफसी से होम लोन लेते हैं, लेकिन जब आप दोनों की ईएमआई की तुलना करेंगे तो फिर आपको लगेगा कि बैंक से होम लोन लेना बेहतर साबित होता. हालांकि एनबीएफसी से लोन लेने पर कागजी कार्रवाई कम करनी पड़ती है, लेकिन सौदा हमेशा महंगा पड़ता है.

बैंक लोन देने से पहले आवेदक का सिबिल स्कोर जांचता है. अगर कोई बैंक नहीं जांचता है कि ऐसी स्थिति में आवदेक खुद अपने सिबिल स्कोर के बारे में बैंक को बताएं. हालांकि सिबिल स्कोर अच्छा न होने की स्थिति में लोन मिलने में परेशानी हो सकती है. लेकिन अगर बेहतर क्रेडिट स्कोर है तो फिर निश्चित तौर पर बैंक आपसे वसूली जाने वाली ब्याज दर में कुछ कमी कर देगा.

बता दें, लोन के लिए किसी भी बैंक की कोई तय ब्याज दर नहीं होती, यह हर ग्राहक की प्रोफाइल के हिसाब से बदलती रहती है. अगर आपकी प्रोफाइल बेहतर है तो फिर संभव है कि आपको उस ग्राहक के मुकाबले कम ब्याज दर की पेशकश की जाए, जिसकी प्रोफाइल आपसे कमजोर है.

यही नहीं, होम लोन लेने के बाद आपको लगे कि बैंक आपसे अधिक ब्याज वसूल रहा है तो आप दूसरे बैंक में लोन को ट्रांसफर करा सकते हैं. हालांकि, लोन स्विच करने से पहले प्रोसेसिंग फीस और ब्याज दर को अच्छी तरह से समझ लें, इसके बाद ही कदम उठाएं.

इसके अलावा अगर होम लोन लेने के बाद इनकम बढ़ गया हो तो आप लोन से जल्द छुटकारा पा सकते हैं. आप प्री-पेमेंट औप्शन को चुन सकते हैं. आप एकमुश्त रकम लोन के खाते में डालकर ईएमआई की बोझ को कम कर सकते हैं. इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क बैंक को नहीं देना पड़ता है. एक बार में भुगतान किए जाने वाली रकम से आप लोन की मूल राशि को घटा सकते हैं. इसका सीधा फायदा ये होता है कि एक तो ईएमआई कम हो जाती है और लोन समय से पहले खत्म हो जाता है.

भारतीय महिला क्रिकेटर झूलन गोस्वामी ने T-20 से लिया संन्यास

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी ने टी-20 अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है. वह नवंबर में वेस्ट इंडीज में होने वाले आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप में भी नहीं खेलेंगी. 35 साल की झूलन ने 68 टी20 इंटरनैशनल मैच खेले हैं जिनमें उन्होंने कुल 56 विकेट अपने नाम किए हैं. 35 वर्षीय महिला पेसर अब केवल वनडे क्रिकेट ही खेलेंगी.

पश्चिम बंगाल की झूलन गोस्वामी के नाम 169 वनडे में 200 विकेट दर्ज हैं और वह दुनिया की सबसे ज्यादा वनडे विकेट लेने वाली महिला गेंदबाज हैं. झूलन ने इस साल जून में बांग्लादेश के खिलाफ अपना अंतिम टी20 इंटरनैशनल मैच खेला था. झूलन ने इंटरनैशनल क्रिकेट में पदार्पण इंग्लैंड के खिलाफ 2002 में चेन्नै में खेले गए वनडे मुकाबले से किया था.

एशिया कप में झूलन 4 मैचों में केवल 1 विकेट ही ले पाई थीं और उनकी गति भी खास नहीं रही थी. भारतीय महिला टीम को इस टूर्नमेंट में बांग्लादेश के खिलाफ 2 बार शिकस्त झेलनी पड़ी. झूलन गोस्वामी ने टी-20 में अपनी सफलता के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और टीम साथियों को धन्यवाद दिया है. बीसीसीआई और पूरी महिला क्रिकेट टीम ने क्रिकेट में उनके योगदान के लिए उनका शुक्रिया अदा किया है और भविष्य के लिए उन्हें अपनी शुभकामनाएं दी है.

शुरुआत में लड़कों के साथ खेलने वालीं झूलन कोलकाता के विवेकानंद पार्क में ट्रेनिंग करती थीं. वह 16 साल के अपने क्रिकेट करियर में 10 टेस्ट मैच खेली हैं और 40 विकेट लिए हैं. वह 2007 में आईसीसी क्रिकेटर औफ द इयर भी रही थीं. 2010 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार और 2012 में पद्मश्री से नवाजा गया.

शादी की खबरों के बीच सामने आई रणबीर – आलिया की यह फोटो

बौलीवुड के चौकलेटी ब्वाय रणबीर कपूर और अभिनेत्री आलिया भट्ट के प्यार के चर्चों के बाद अब लगातार दोनों की शादी से जुड़ी खबरे सामने आती रहती हैं. दोनों अक्सर ही साथ दिखाई देतें हैं. हालांकि जहां एक ओर दोनों स्टार्स अपने प्यार को लेकर कुछ साफ नहीं करना चाहते वहीं, दूसरी ओर आए दिन दोनों की साथ की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती हैं.

हाल ही में एक बेहद खास तस्वीर सामने आई है जिसमें दोनों ही स्टार्स एक दूसरे के बेहद करीब नजर आ रहे हैं. इस तस्वीर को खुद धर्मा प्रोडक्शन ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. इस तस्वीर में आलिया रणबीर की बाहों में नजर आ रही हैं. जहां रणबीर की चार्मिंग स्माइल और आलिया के क्यूट एक्सप्रेशन से उनके फोटो में चार चांद लग रहे हैं.


वहीं, रिपोर्ट्स के मुताबिक रणबीर कपूर अपनी गर्लफ्रेंड आलिया भट्ट के साथ जल्द ही शादी के बंधन में बंध सकते हैं. एक इंटरव्यू में रणबीर, आलिया के साथ अपने रिश्ते की बात कबूल कर चुके हैं. इसके बाद से ही इन दोनों की शादी की बात एक गरमा-गरम चर्चा का विषय बन गया है.

एक इंटरव्यू में जब रणबीर से आलिया भट्ट के साथ शादी को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि लोग कहानियां बना लेते हैं और फिर एक के बाद एक कहानियां बनती जाती हैं और ये सिलसिला फिर रुकता ही नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि शादी एक ऐसी चीज है जो समय आने पर अपने आप हो जाती है.

हर फिल्म अश्लील नहीं होती : आकांक्षा अवस्थी

लखनऊ की आकांक्षा अवस्थी को जीवन में चैलेंज लेना बहुत पसंद है. आकांक्षा ने लखनऊ के भातखंडे संगीत विद्यालय से म्यूजिक की शिक्षा ली, लेकिन म्यूजिक से अधिक लोगों को उन का अभिनय पसंद आने लगा. आकांक्षा को भी लगा कि वे ऐक्टिंग में कैरियर बना सकती हैं.

आकांक्षा ने मुंबई जा कर प्रयास करना शुरू किया. कुछ ही सालों में आकांक्षा ने अलगअलग चैनलों के लिए 12 से अधिक टीवी सीरियलों में काम किया. इन में ‘घर की लक्ष्मी,’ ‘इश्क में मर जांवा’, ‘डोली सजा के रखना’, ‘राजा की आएगी बरात’ और ‘उतरन’ जैसे नाम प्रमुख हैं.

‘उतरन’ से उन को घरघर में पहचान मिली. टीवी सीरियलों की दुनिया से निकल कर अचानक आकांक्षा ने भोजपुरी फिल्म ‘दबंग सरकार’ में हीरोइन की भूमिका स्वीकार कर ली. सीरियलों से भोजपुरी फिल्म की ओर क्यों? ऐसे कई सवालों को ले कर आकांक्षा के साथ खास बातचीत हुई. पेश हैं प्रमुख अंश :

टीवी सीरियलों से अचानक भोजपुरी फिल्मों का रुख कैसे किया?

काफी सोचविचार के बाद भोजपुरी फिल्म ‘दबंग सरकार’ में काम करने का फैसला लिया. इस फिल्म को स्वीकार करने के पीछे प्रमुख वजह यह है कि मुझे चैलेंज लेने की बहुत आदत है. मैं म्यूजिक सीखने के बाद ऐक्ंिटग करने लगी, यह भी उसी का हिस्सा था.

‘दबंग सरकार’ को बनाने वाले निर्देशक योगेश राज मिश्रा, प्रोड्यूसर राहुल वोहरा और दीपक कुमार ने मुझे बताया कि वे भोजपुरी फिल्मों में चल रहे ट्रैंड से कुछ अलग हट कर एक फिल्म बना रहे हैं. इस फिल्म में गाने, डांस और कहानी के बीच संतुलन देखने को मिलेगा.

फिल्म को लखनऊ में शूट किया जाएगा. ऐसे में मुझे अपने शहर में काम करने का मौका मिल रहा था. मैं ने भोजपुरी फिल्मों के बारे में बहुत सुना था. मुझे लगा कि जिंदगी में यह चैलेंज भी ले कर देखना चाहिए. काफी सोचविचार कर मैं ने इस फिल्म के लिए हामी भर दी.

क्या कुछ तैयारी की इस के लिए?

सब से पहले तो यह परेशानी थी कि मैं ने कभी भोजपुरी फिल्म नहीं देखी थी. मैं ने भोजपुरी फिल्में देखीं. उन के गाने सुने. ‘दबंग सरकार’ में मेरे हीरो खेसारीलाल हैं. उन के बारे में पता था कि वे भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार हैं. एक डर सा मन में बैठ गया कि पता नहीं कैसा व्यवहार होगा उन का. भोजपुरी फिल्मों के गाने, उन का फिल्मांकन देख मुझे थोड़ा डर लगा कि मेरी इमेज खराब न हो. चैलेंज लेने के अपने स्वभाव के कारण ही मैं ने ‘दबंग सरकार’ में काम करने की हामी भरी. इस फिल्म में अपने रोल के लिए मुझे अपना वजन 8 से 10 किलो बढ़ाना पड़ा.

भोजपुरी फिल्मों को ले कर आप के मन में जो झिझक या डर था वह खत्म हो गया?

शूटिंग शुरू हुई तो फिल्म के हीरो खेसारीलाल ने मेरी काफी सहायता की. मुझे लगा ही नहीं कि वे इतने बड़े कलाकार हैं. फिल्म के लिए मेरे जो सीन या गाने शूट हुए वे काफी अच्छे लगे. फिल्म में खुलेपन और फूहड़पन को ले कर जिन बातों का डर था वह नहीं दिखा. सीरियलों में हम स्टूडियो में ही शूटिंग करते हैं, लेकिन फिल्म के लिए आउटडोर शूटिंग करनी पड़ी. यह अलग अनुभव था.

आप सीरियल या फिल्मों में कैसे रोल पसंद करती हैं?

एक ऐक्ट्रैस के तौर पर जिस किरदार में मुझे कुछ कर दिखाने का मौका मिलेगा वह मुझे पसंद है. निजी तौर पर मैं कौमिक रोल करना पसंद करती हूं. मुझे लगता है कि किसी को हंसाना सब से अच्छा मनोरंजन होता है. अपने किरदार में कई बार कौमेडी के रंग भरती हूं, पर कौमेडी में यादगार रोल करने का बहुत मन है.

भोजपुरी फिल्मों पर अश्लीलता का ठप्पा लगा है. ऐसे में आप की इमेज को कोई खतरा तो नहीं?

भोजपुरी में अच्छी फिल्में भी बनती हैं लेकिन इन की चर्चा कम होती है. अश्लीलता की चर्चा से कुछ फिल्मों को प्रचार मिलता है. इस कारण यह बात होती है. कलाकार अपना रोल पसंद आने के बाद ही फिल्म करता है. ‘दबंग सरकार’ को करने के बाद मैं दावे से कह सकती हूं कि हर फिल्म अश्लील नहीं होती. इस फिल्म से भोजपुरी फिल्मों को ले कर जो सोच बनी है वह बदल जाएगी. इस फिल्म को करने के बाद मैं वापस सीरियलों में शूटिंग करने जा रही हूं. इमेज पर खतरे वाला कोई रोल हम ने नहीं किया है.

फिल्म और टीवी दोनों में अभिनय अलगअलग हैं?

फिल्म और टीवी दोनों अलगअलग माध्यम हैं. खासकर भोजपुरी फिल्मों को ले कर कहें तो यहां पर परिवार एकसाथ जा कर फिल्में नहीं देख रहे हैं. टीवी सब से ज्यादा परिवार के बीच देखा जाता है. ऐेसे में दोनों माध्यम केवल दर्शक के हिसाब से ही अलग नहीं हैं, इन को बनाने से ले कर प्रोडक्शन हाउस तक अलग होते हैं. फिल्म 2 घंटे में सिमट जाती है जबकि टीवी सीरियल सालों साल चलते हैं. दोनों के दर्शक और महत्त्व अलग हैं. इन को आपस में जोड़ कर नहीं देखा जा सकता.

आप की हौबीज क्या हैं?

म्यूजिक के साथसाथ मुझे कुकिंग का भी बहुत शौक है. जब भी मुझे समय मिलता है कुछ स्वादिष्ठ खाना बनाने का प्रयास करती हूं. वैसे तो कई बार मजबूरी में बेस्वाद खाना ही खाना पड़ता है जिस से वजन न बढ़े. इस फिल्म में वजन बढ़ाया, अब आप के घटाना होगा. नारियल पानी से काफी मदद मिलती है.

सुगम कारोबार वाले राज्यों की रैंकिंग में आंध्र प्रदेश प्रथम

कारोबार सुगमता वर्तमान आर्थिक परिवेश में महत्त्वपूर्ण बन गई है. इस की वजह बड़ा निवेश है. निवेशक उन्हीं देशों या राज्यों में पैसा लगाने को उत्साहित रहते हैं जहां कारोबार शुरू करते और फिर उसे चलाने में बेवजह की अड़चनों व औपचारिकताओं का सामना नहीं करना पड़े.

वैश्विक कंपनियां भी दुनिया के उन्हीं देशों में निवेश की इच्छुक रहती हैं जहां सुगमता से कारोबार शुरू किया जा सके. इस क्रम में विश्व रैंकिंग में भारत की स्थिति में जबरदस्त सुधार हुआ है. इधर, देश में भी इस तरह की रैंकिंग राज्यों के आधार पर होती है.

पिछले दिनों विश्व बैंक तथा औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग ने इस संबंध में सर्वेक्षण कराया और देश के विभिन्न राज्यों की रैंकिंग में आंध्र प्रदेश सुगम कारोबार के अवसर उपलब्ध कराने वाले राज्यों में शीर्ष स्थान पर रहा. आंध्र को देश में तकनीकी रूप से अग्रणी राज्य के रूप में देखा गया है.

अपने पिछले कार्यकाल में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू इस की वजह से बहुत लोकप्रिय रहे और पूरे देश में उन का उदाहरण दिया जाता था. अब सुगम कारोबार की सुविधा वाले राज्यों में आंध्र प्रदेश पहले स्थान पर आ गया है. इस क्रम में तेलंगाना दूसरे और हरियाणा तीसरे स्थान पर रहे. मेघालय सूची में आखिरी स्थान पर है. सूची में चौथा स्थान झारखंड, 5वां गुजरात, उस के बाद छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान हैं. 10वें स्थान पर पश्चिम बंगाल है.

करीम मोहम्मद : देश की अखंडता व भाईचारे का संदेश

‘‘जमीर और जिंदगी के बीच किसे चुनेंगे?’’ के सवाल के साथ आतंकवाद पर तमाचा जड़ने वाली रोड ट्रिप प्रधान फिल्म ‘‘करीम मोहम्मद’’ में कश्मीर के हालातों को निष्पक्ष तरीके से पेश किया गया है. कश्मीर के अंदर आम जनता और आर्मी के बीच जो टकराव है, उसका भी सटीक चित्रण है. एक बालक के नजरिए से उठाए गए सवाल दर्शक को सोचने पर मजबूर करते है.

फिल्म की कहानी जम्मू और कश्मीर की पहाड़ियों पर घुमंतू/ खानाबदोश की जिंदगी जी रहे बकरवाल जाति के लोगों के इर्द गिर्द घूमती है. कहानी शुरू होती है बकरवाल होने पर गौरवान्वित महसूस करने वाले अशिक्षित हामिद (यशपाल शर्मा) से. जो कि अपने बेटे मोहम्मद (हर्षित राजावत) व पत्नी नाजनीन (अलका अमीन) के साथ दो घोड़ों पर अपना सामान बांधकर अपनी भेड़ बकरियों के साथ पहाड़ से नीचे उतर रहा है. क्योंकि ठंड शुरू हो गयी है और ठंड के बर्फीले मौसम में पहाड़ की उंचाईयों पर रहना संभव नहीं है.

हामिद पक्के देशभक्त होने के साथ इंसानियत में यकीन करते हैं. वह निडर हैं. सच के रास्ते पर चलते हैं. रास्ते में मोहम्मद एक नदी देखकर अपने पिता से एक दिन नदी के उस पार यानी कि पाकिस्तान की सीमा में जाने की बात करता है. तब हामिद उससे कहता है कि, ‘नदी के पार पड़ोसी मुल्क है. वहां जाना खतरे से खाली नहीं. इसलिए कभी मत जाना.’ इस पर बेटा मोहम्मद कहता है-‘हमारे यहां कोई पड़ोसी आता है, तो हम उसका स्वागत करते हैं.’ पिता कहता है कि, ‘बेटा तेरी समझ में नहीं आएगा. यह सरहद की लकीरों का मसला है.’’ और उसकी मां उसे डांटकर चुप करा देती है.

हामिद पूरे परिवार के साथ आगे बढ़ता है. रास्ते में मोहम्मद अपने पिता से सवाल करता रहता है और हामिद उसे उसके सवालों के जवाब देता रहता है. एक सवाल पर हामिद अपने बेटे से कहता है कि यह कुदरत ही सब कुछ सिखाती है. यह परिवार गुर्जर बाबा की मजार पर फूल चढ़ाता है और मोहम्मद के कहने पर हामिद, गुर्जर बाबा की बहादुरी की कहानी सुनाते हैं कि किस तरह अकेले ही चार आतंकवादियों को अकेले ही मौत के घट उतारते हुए खुद भी मारे गए थे.

रात्रि विश्राम के बाद परिवार लगातार आगे बढ़ता रहता है. बीच में मोहम्मद के एक सवाल के जवाब में हामिद कहता है कि आतंकवादी शैतान की औलाद हैं. अन्यथा अल्लाह हर इंसान को किसी न किसी मकसद से धरती पर भेजता है. पर यह आतंकवादी उन्हे अल्लाह द्वारा तय समय से पहले ही धरती से विदा कर देते हैं. इस बीच हामिद की पत्नी नाजनीन गर्भवती हो जाती है. तो वह एक जगह बने मकान में डेरा डाल देते हैं. एक दिन रात्रि में रिजवान (राजेश जैस) उस वक्त इस घर में बंदूक के साथ घुसता है, जब हामिद व मोहम्मद घर से बाहर थे. रिजवान बताता है कि वह शरीफ युवक है और कालेज में पढ़ता है. आतंकवादी जबरन उसे अपने डेरे पर उठा ले गए थे और उसे मारपीट कर गलत राह पर ले जाना चाहते थे पर किसी तरह वह भाग आया है.

Yashpal sharma interview for Karim Mohammed

हामिद, रिजवान को उसके माता पिता के पास पहुंचाता है. उसके बाद नाजनीन एक बेटी को जन्म देती है, जिसका नाम जूही रखा जाता है. अब हामिद पूरे परिवार के साथ अपनी बहन के घर की तरफ रवाना होता है. रास्ते में रात्रि में नदी से तीन आतंकवादी आते हैं, वह खुद को श्रीनगर निवासी और सिल्क के व्यापारी बताते हैं. हामिद उन पर यकीन कर लेता है. एक आतंकवादी के अंगूठे पर बह रहे खून को रोकने लिए नाजनीन पट्टी बांधती है. वह आतंकवादी उसे बहन बना लेते हैं. खाना भी खाते हैं. उसके बाद हामिद अपने परिवार के साथ बहन के घर पहुंचता है, जहां उनकी भांजी की शादी है. दिन में हामिद को महसूस होता है कि उसके जीजा ने कुछ आतंकवादियों को शरण दे रखी है. वह विरोध करता है. तो उसके जीजा उसे लेकर पूरे गांव वालों के पास जाते हैं.

गांव का सरपंच कहता है कि आतंकवादियों को शरण देने से उनका गांव आबाद है, उनके गांव पर आंच नहीं आती है. पर हामिद इसे गैरकानूनी बताता है. वह पुलिस को सूचना देने की बात करता है. एक युवक आतंकवादियों को खबर कर देता है. आतंकवादी गोलियां बरसाते हैं. जिसमें हामिद व नाजनीन मारे जाते हैं. मोहम्मद अपनी बुआ से कहता है कि वह हमेशा अपने पिता हामिद की तरह जिंदगी की बजाय जमीर को चुनना चाहेगा. उसके बाद मोहम्मद, रिजवान के घर जाकर मदद मांगता है. रिजवान, मोहम्मद की बुआ को समझाता है और फिर पूरा गांव एक साथ इकट्ठा होकर आतंकवादियों के अड्डे पर हमला कर देते हैं.

आतंकवादियों को पुलिस की गिरफ्त मे देते हैं. मोहम्मद को उसकी वीरता के लिए पुरस्कृत किया जाता है. इस बीच गर्मी शुरू हो जाती है. फिर मोहम्मद अपनी बहन जूही को पीठ पर लादकर बकरवालों की तरह पहाड़ पर चढ़ना शुरू कर देता है.

कुछ कमियों के बावजूद फिल्म ‘‘करीम मोहम्मद’’ दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है. हामिद और मोहम्मद के इर्द गिर्द घूमती फिल्म इंटरवल से पहले धीमी गति से चलती है और शुष्क लगती है. पर इंटरवल के बाद फिल्म तेज गति से भागती है. तमाम घटनाक्रम तेजी से घटित होते हैं. मगर पटकथा के स्तर पर इंटरवल के बाद काफी कमियां हैं. यदि कहानी व पटकथा लेखक जीतेंद्र गुप्ता ने थोड़ी सी मेहनत की होती, तो यह एक बेहतरीन फिल्म बन सकती थी.

बतौर निर्देशक पवन कुमार शर्मा का प्रयास सराहनीय है. मगर वह भी वास्तविकता और आदर्शवाद के द्वंद में कुछ जगह उलझे हुए नजर आते हैं. फिल्म का अति आदर्शवादी अंत वर्तमान परिस्थितियों में फिल्म को वास्तविकता से दूर ले जाता है. पर वह अपनी फिल्म के माध्यम से आतंकवाद और हिंसात्मक राजनीति पर तमाचा जड़ते हुए सार्थक संदेश देने में सफल रहते हैं.

हामिद के किरदार में यशपाल शर्मा ने अपने सहज व स्वाभाविक अभिनय से जान फूंकी है. यशपाल शर्मा अपने बलबूते पर पूरी फिल्म को लेकर चलते हैं. मोहम्मद के किरदार में बाल कलाकार हर्षित बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं करते. गीत संगीत ठीक ठाक है. लोकेषन नयनसुख देने वाली कमाल की है. फिल्म के कैमरामैन सुभ्रांष  कुमार दास बधाई के पात्र हैं.

एक घंटे 35 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘करीम मोहम्मद’’ का निर्माण रवींद्र सिंह राजावत ने ‘‘अनहद स्टूडियो प्रा.लिमिटेड’’ के बैनर तले किया है. फिल्म के लेखक जीतेंद्र गुप्ता, निर्देशक पवन कुमार शर्मा, कैमरामैन सुभ्रांष कुमार दास, संगीतकार बाल कृष्ण शर्मा और कलाकार हैं – हर्षित राजावत, यशपाल शर्मा, अलका अमीन, राजेश जैस, रवि जंगू, सुनील जोगी, जुही सिंह व अन्य.

99 पर स्टंप आउट हुआ खिलाड़ी तो फैन की गई जान

यूं तो क्रिकेट में कई रोचक घटनाएं सुनने और देखने को मिलती है. लेकिन टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में आज तक किसी ने ऐसा नहीं सुना होगा. ऐसे कई बल्लेबाज हैं जो 99 पर आउट हो चुके हैं. लेकिन शायद ही ऐसा कभी हुआ होगा कि किसी बल्लेबाज का 99 पर स्टंप होना उसका प्रशंसक बर्दाश्त नहीं कर पाया और इसी सदमे में उसकी मौत हो गई.

आप सोच रहे होंगे की ऐसा कैसे हो सकता है. लेकिन यह घटना बिल्कुल सच है. दरअसल 62 वर्ष पहले ऐसा हो चुका है. जनवरी 1955 में भारत के खिलाफ लाहौर टेस्ट में पाकिस्तान के मकसूद अहमद को सुभाष गुप्ते की गेंद पर विकेटकीपर नरेन तम्हाणे ने स्टंप कर दिया. उस वक्त मकसूद 99 रन पर थे और वे अपने पहले शतक से चूक गए.

यह सदमा रेडिया पाकिस्तान पर कमेंट्री सुन रहा उनका प्रशंसक झेल नहीं पाया और दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई. और इसके बाद वे टेस्ट क्रिकेट में कभी शतक नहीं लगा पाए.

मकसूद ने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत 16 अक्टूबर 1952 को भारत के खिलाफ की थी. आजादी से पहले मकसूद पंजाब की तरफ से खेला करते थें. वह पहले ऐसे पाकिस्तानी खिलाड़ी थे जिसने इंग्लैंड के खिलाफ 1952 में प्रोफेशनल क्रिकेट खेला. कुल 16 टेस्ट मैच खेलते हुए मकसूद ने 507 रन बनाएं.

टेस्ट क्रिकेट में अब तक दो ही बार हुआ है, जब कोई बल्लेबाज 99 रन पर स्टंप हुआ हो. दूसरी बार भारत के कोच रह चुके न्यूजीलैंड के जॉन राइट के साथ ऐसा हो चुका है. 1992 के क्राइस्टचर्च टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ फिल टफनेल की गेंद पर जैक रसेल ने उन्हें 99 रन पर स्टंप कर दिया था.

सोशल नैटवर्क में ईसोशलाइजिंग

सोशल नैटवर्क साइट पर एक राजनीतिक ‘पोस्ट’ पर हुई बहस के दौरान कुसुम का परिचय रमेश से हुआ. सामाजिक या राजनीतिक चाहे कोई भी मुद्दा हो, दोनों हर बहस में भाग लेते थे. अब चूंकि दोनों एक ही शहर से थे, इसीलिए वे दोनों विभिन्न मुद्दों पर निकलने वाले जुलूस, धरनाप्रदर्शन में भी भाग लेने लगे. अब परिचय दोस्ती में बदल गया और फिर दोनों के बीच चैटिंग की शुरुआत हुई. दिन में कई बार दोनों चैट करते. धीरेधीरे यह सिलसिला देर रात तक भी चलने लगा. पहले तो यह सिर्फ टैक्स्ट चैट तक सीमित था, लेकिन बाद में यह मामला वैबकैम चैट तक पहुंच गया. रमेश अब कभीकभार कुसुम के घर भी जाने लगा था. इस बीच दोनों के मन में एकदूसरे के लिए जगह बनने लगी.

एक दिन रमेश ने दोस्तों के साथ 4-5 दिन के लिए शहर से बाहर दीघा घूमने की योजना बनाई और कुसुम को भी साथ चलने को कहा. कुसुम पहले तो तैयार नहीं हुई, लेकिन जब रमेश ने इस ट्रिप में और भी कई लड़कियों, खासतौर पर अपने दोस्त की बहन के भी साथ जाने की बात कही तो कुसुम मान गई. उस ने अपनी मां को भी इस बात के लिए बड़ी मुश्किल से तैयार किया. तय हुआ कि सभी दीघा स्टेशन पर मिलेंगे. कोलकाता से कुसुम और रमेश एकसाथ रवाना हुए, लेकिन 4-5 दिन के बाद भी कुसुम घर नहीं लौटी और लगभग 2 हफ्ते बाद दीघा के झाऊवन से कुसुम की लाश मिली.

कुसुम को नएनए दोस्त बनाने का बड़ा शौक था. जिस किसी से भी वह मिलती, खुल कर मिलती थी. खाली समय में उस का अधिकतर समय सोशल नैटवर्किंग साइट्स पर ही बीतता था. इन सोशल साइट्स पर वह अपनी निजी सूचनाओं को भी बेधड़क शेयर किया करती थी. जाहिर है, उस के निजी जीवन के बारे में रमेश को पूरी खबर थी. कुल मिला कर सोशल साइट्स पर कुसुम का जीवन एक खुली किताब था, लेकिन सोशल नैटवर्किंग के सामान्य नियम की न तो उसे कोई जानकारी थी और न ही इस की उसे परवा थी.

मानव एक सामाजिक प्राणी है. ऊपरी तौर पर इस बारे में शक की कोई गुंजाइश नहीं है. आज लोग सोशल साइट्स के जरिए अपना एक अलग गु्रप बना रहे हैं. क्या बच्चे, बुजुर्ग सभी इन सोशल नैटवर्किंग साइट्स पर अपना नाम लिखवा रहे हैं. एक ही गु्रप में लोग समाज, देशदुनिया के विभिन्न मुद्दों पर बहस कर रहे हैं. इस से सोशल नैटवर्किंग साइट्स की ताकत दिनोदिन बढ़ती जा रही है. कोई भी उत्पाद बनाने वाली कंपनी हो या राजनीतिक पार्टियां सभी एक हद तक सोशल नैटवर्किंग साइट्स पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं, बल्कि सोशल नैटवर्किंग साइट्स आजकल राजनीति का रुख बदलने, सरकारी नीतियों के बननेसुधरने में अहम भूमिका निभा रही हैं और जहां तक आम लोगों का सवाल है तो सोशल साइट्स की बदौलत इन का दायरा भी निसंदेह बढ़ जाता है.

सोशल नैटवर्किंग साइट्स पर लोगों के व्यवहार पर शोध करने वाले अनिर्वान चौधरी का कहना है कि इन तमाम सहूलतों के बावजूद सोशल नैटवर्किंग साइट्स बहुत सारी समस्याएं हैं. सोशल साइट्स के जरिए कोई भी, कहीं भी अपनी ऐंट्री दर्ज कर सकता है, इस से यूजर्स के सामने कई तरह की समस्याएं खड़ी हो जाने का खतरा होता है. इन सब से बचने के लिए सोशल नैटवर्किंग साइट्स के नियमों की पूर्ण जानकारी होना जरूरी है.

कुसुम के संदर्भ में अनिर्वान का कहना है कि आजकल लोगों का सामाजिक होना ईसोशलाइजिंग का पर्याय बन गया है. हो सकता है कि हम अपने आसपड़ोस में किसी को जानतेपहचानते न हों, लेकिन सोशल साइट्स के जरिए हमारे फैंड्स की सूची बहुत लंबीचौड़ी हो सकती है. आज की जीवनशैली और कैरियर इतना बदल चुका है कि पुराने अर्थों के परिपे्रक्ष्य में देखा जाए तो हर 10 में से एक व्यक्ति असामाजिक कहलाएगा और हो भी क्यों न, नौकरीचाकरी की अवधारणा बदल जो गई है. सुबह 10 से 5 बजे तक औफिस समय जैसा अब कुछ रह नहीं गया है. इस के अलावा बहुत सारे लोग हैं जो रात को काफी देर से घर लौटते हैं और सुबह जल्दी चले जाते हैं. ऐसे लोग अपने आसपड़ोस को भला कितना जान पाएंगे.

भीड़ में कैसे चुनें दोस्त
सोशल नैटवर्किंग साइट्स पर पल में दोस्त बन जाते हैं. दोस्ती के मामले में सावधान रहने की जरूरत होती है, लेकिन युवा फ्रैंड्स की संख्या को ज्यादा तवज्जो देते हैं और हर रिक्वैस्ट को कन्फर्म कर देते हैं, जबकि उन्हें सावधानी बरतते हुए दोस्त बनाने चाहिए. हालांकि पेशेवर सोशल नैटवर्किंग साइट पर किसी अनजान व्यक्ति के साथ कनेक्शन बनाना आसान नहीं होता, पर फेसबुक पर यह संभव है. इसलिए युवाओं को यहां सजग रहने की जरूरत है. सवाल है कि किसी अनजान व्यक्ति को दोस्त बनाना कहां तक जायज है? किसी भी साइट पर अनजान व्यक्तियों की भीड़ में से किसी को दोस्त बनाने से पहले उस का प्रोफाइल अच्छी तरह परखना जरूरी है. अगर प्रोफाइल में कहीं कुछ आपत्तिजनक लगे तो संभल जाना चाहिए. थोड़ी सी सावधानी अवांछित परिस्थितियों से हमें बचा सकती है.

कितना और क्या दर्ज करें
सोशल साइट्स का इस्तेमाल जरूर करें, लेकिन सावधानी बरतते हुए. क्योंकि आप की एक लापरवाही आप को मुसीबत में डाल सकती है. इन पर बनाए प्रोफाइल के जरिए आप की एक इमेज तैयार हो जाती है. यहां आप अपने बारे में बुनियादी जानकारी दर्ज कर सकते हैं, लेकिन यहां थोड़ा स्मार्ट होने की जरूरत है यानी अपने निजी तथ्यों को किस हद तक दर्ज करना चाहिए, यह तय करना बहुत जरूरी है. आमतौर पर सलाह यही दी जाती है कि गलत तथ्य देने के बजाय कुछ जगहों को खाली छोड़ दिया जाए. इस में कोई हर्ज नहीं है, वहीं अपने प्रोफाइल में प्रवेश करने की अनुमति की ‘चाबी’ भी आप के ही हाथ में होती है. इसलिए खुद ही तय करें कि आप का प्रोफाइल कौनकौन देख सकता है. यही बात ब्लौग के मामले में भी लागू होती है. बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो अपने ब्लौग में बेबाक हो जाते हैं, अपने पूरे विचार उड़ेल कर रख देते हैं. ऐसे में एक की बेबाकी दूसरे के लिए परेशानी का सबब बन सकती है.

पेशेवर इस्तेमाल
सोशल नैटवर्किंग साइट्स पर शिरकत करने के अनुशासन का जिक्र करते हुए अनिर्वान कहते हैं कि सोशल नैटवर्किंग साइट्स का इस्तेमाल पेशेवर तरीके से भी किया जा सकता है. सोशल नैटवर्किंग साइट्स पर जीवन की अलग धारा बहती है इसलिए यहां भी अनुशासन एक माने रखता है. अनुशासित हो कर सोशल नैटवर्किंग साइट्स का लाभ पेशेवर तौर पर उठाया जा सकता है. बहुत सारी पेशेवर सोशल नैटवर्किंग साइट्स हैं, जहां ‘कनैक्शन’ जुड़ते चले जा सकते हैं और एकदूसरे को प्रमोट करने की भी गुंजाइश है. जाहिर है यहां अपार संभावनाएं हैं. बस, जरूरत है उपयुक्त तलाश की. अगर सही रास्ता मिल गया तो कैरियर को नई दिशा मिल सकती है.         

कमाई के मामले में सिंधु की उड़ान, फोर्ब्स की टौप 10 लिस्ट में हुई शामिल

भारत की बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु कमाई करने के मामले में दुनिया की टौप 10 महिला एथलीट्स में शामिल हो गई हैं. फोर्ब्स की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली महिला एथलीट की लिस्ट में पीवी सिंधु सातवें नंबर पर हैं. उनकी सालाना कमाई 59 करोड़ रुपये है. करीब 1 अरब 26 करोड़ रुपये की सालाना कमाई के साथ सेरेना विलियम्स इस लिस्ट में टौप पर हैं. इस लिस्‍ट में टौप टेन महिलओं में से 8 टेनिस प्‍लेयर हैं.

फोर्ब्स की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली महिला एथलीट में पहले नंबर पर सेरेना विलियम्स का नाम आता है. 14 महीने के प्रेगनेंसी ब्रेक के बावजूद सेरेना विलियम्स की सलाना कमाई 18.1 मिलियन डालर है जिसके चलते वह इस लिस्‍ट में सबसे पहले पायदान पर हैं. इस साल विलियम्स ने अपना एक फैशन लेबल ‘सेरेना’ लौन्‍च किया जो एचएसएन और नाइकी जैसे ब्रांडों ने जगह दी. अन्‍य एथलीट महिलाओं की तुलना में उनका पोर्टफोलियो असाधारण है. उनके करियर में 86 मिलियन की पुरस्‍कार राशि जीती है जो उनकी बहन वीनस की तुलना में दोगुनी है. इस लिस्‍ट में दूसरा  नंबर टेनिस प्‍लेयर कैरोलिन वोजनियाकी का है जिनकी सालाना कमाई 1.3 करोड़ डालर है. इसमें से 60 लाख डालर वह एंडोर्समेंट से कमाती हैं.

फोर्ब्स की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली महिला एथलीट की लिस्‍ट में तीसरा नंबर टेनिस प्‍लेयर स्‍लोन स्‍टीफेंस का आता है. उनकी सलाना कमाई 1.12 करोड़ डालर है, जिसमें से 55 लाख रुपये वह एंडोर्समेंट से कमाती हैं. चौथे नंबर पर टेनिस प्‍लेयर गैरबाइन मुगुरुजा आती है जिनकी सलाना कमाई 1.1 करोड़ डालर है. वह 56 लाख डालर एंडोर्समेंट से कमाती हैं.

पांचवे पायदान पर टेनिस स्‍टार मारिया शारापोवा का नाम आता है उनकी सालना कमाई 1.05 करोड़ डालर है. इसके बाद सेरेना विलियम्‍स की बहन वीनस विलियम्स का नाम आता है. इनकी सलाना कमाई 1.2 करोड़ डालर है. छह महिला टेनिस खिलाड़ियों के बाद भारत की बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु का नाम आता है. इस लिस्‍ट में वह ही भारतीय महिला एथलीट हैं. उनकी सालाना कमाई 85 लाख डालर है्.

इस लिस्‍ट में आठवें नंबर पर टेनिस खिलाड़ी सिमोना हालेप हैं, जिनकी सालाना कमाई 77 लाख डालर हैं. भारत की बैंडमिटन खिलाड़ी पीवी सिंधु के अलावा इस लिस्‍ट में टेनिस को छोड़कर दूसरी खिलाड़ी डैनिका पैट्रिक का नाम आता है. वह रेस कार ड्राइविंग करती हैं. उनकी सालाना कमाई 75 लाख डालर है. इस लिस्‍ट में आखिरी नाम टेनिस खिलाड़ी एंजेलिक कर्बर का नाम आता है. इनकी सालाना कमाई 70 लाख रुपये है.

जल्द शुरू होगा पोर्टेबल पेट्रोल पंप, दूरदराज के क्षेत्रों को होंगे ये फायदे

गांव, कस्बों और शहरों में पोर्टेबल पेट्रोल पंपों से पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री जल्दी ही शुरू होने की उम्मीद है. देश में जल्दी ही पोर्टेबल पेट्रोल पंपों का निर्माण शुरू हो जाएगा. एलिंज पोर्टेबल पेट्रोल पंप्स ने कहा है कि उसने देश में 1600 करोड़ रुपये के निवेश से चार निर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए चेक कंपनी पेट्रोकार्ड से समझौता किया है. दूरदराज के ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वालों के लिए पोर्टेबल पेट्रोल पंप वरदान साबित हो सकते हैं.

एलिंज के मैनेजिंग डायरेक्टर इंदरजीत प्रुति ने संवाददाताओं को बताया कि भारत में पोर्टेबल पेट्रोल पंप अभी तक चालू नहीं हुए हैं. देश में जल्दी ही पोर्टेबल पेट्रोल पंप नजर आएंगे, जिन पर कोई कर्मचारी नहीं होगा. वहां खरीदार डिजिटल पेमेंट करके अपने वाहन में फ्यूल खरीद सकेगा. पेट्रोलियम व नेचुरल गैस मंत्रालय ने दस अगस्त को इसकी मंजूरी दी है. इंदरजीत प्रुति ने कहा कि भारत में इसका बाजार तेजी से विकसित होगा. हमने अपने टेक्नोलॉजी पार्टनर चेक फर्म पेट्रोकार्ड से समझौता किया है. हमने बाजार, राज्यों और आयल मार्केटिंग कंपनियों की दिलचस्पी और सहयोग के आधार पर 1600 करोड़ रुपये के निवेश से चार इकाइयां स्थापित करने की योजना बनाई है. इन इकाइयों में पोर्टेबल पेट्रोल पंप मशीनों का निर्माण किया जाएगा. इन पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल, डीजल और केरोसिन उपलब्ध होगा और लोग ई-वॉलेट जैसे कैशलेस मोड से भुगतान करके फ्यूल खरीद सकेंगे.

आमतौर पर किसी पेट्रोल पंप की स्थापना के लिए काफी जमीन की जरूरत होती है जबकि पोर्टेबल पंप सिर्फ 400 मीटर जमीन पर स्थापित किया जा सकेगा. प्रुति के अनुसार लोगों के लिए यह अच्छा कारोबारी अवसर भी है. पोर्टेबल पेट्रोल पंप 90 लाख से 1.20 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित हो जाएगा. बैंक इसमें 80 फीसद तक कर्ज देने के लिए इच्छुक हैं. राज्यों के अधिकारियों और आयल मार्केटिंग कंपनियों से मिली जानकारी के अनुसार राज्य जल्दी ही आयल मार्केटिंग कंपनियों के साथ मिलकर टेंडर आमंत्रित करेंगे. जिसे टेंडर मिलेगा, वह पोर्टेबल पेट्रोल पंप स्थापित करने के लिए पात्र होगा. एलिंज आवंटन पाने वाले लोगों के लिए पेट्रोल पंप स्थापित करेगी. वह 9000 लीटर से 30000 लीटर तक का पंप स्थापित करेगी.

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