Download App

लोकेशन औफ होने के बाद भी गूगल रख रहा आप पर नजर

आप चाहें या न चाहें लेकिन दिग्गज कंपनी गूगल आपकी हर गतिविधि पर नजर रखती है. आप कहां जाते हैं कहां नहीं वह इसका पूरा रिकौर्ड रखती है. एक न्यूज एजेंसी की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि एंड्रायड और आईफोन में गूगल की कई ऐसी सेवाएं हैं जो पर्सनल सेटिंग्स का इस्तेमाल करने के बावजूद आपकी लोकेशन का रिकौर्ड रखती हैं.

इसका सीधा सा मतलब है कि अगर आपकी लोकेशन सेटिंग बंद भी है तो भी गूगल आप पर नजर रखता है. एक्सपर्ट्स निजता के लिए इसे जोखिम बता रहे हैं. प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस से रिसर्च कर रहे शोधार्थियों ने इसकी पुष्टि की है. गूगल का कहना है कि इससे कंपनी को यह रिकौर्ड रखने में सुविधा होगी कि यूजर इस वक्त कहां है.

गूगल ने अपने सपौर्ट पेज पर इस बारे में लिखा, ‘लोकेशन हिस्ट्री औफ करने के बाद भी आप कहां जा रहे हैं इसे गूगल में स्टोर नहीं किया जा सकता. यह सच नहीं है. लोकेशन हिस्ट्री पौज होने की स्थिति में भी गूगल के कुछ ऐप्स के जरिए औटोमैटिकली लोकेशन डेटा सुरक्षित रखा जा सकता है.’

इस नई व्यवस्था के बाद लाखों लोगों की निजता जरूर प्रभावित होने जा रही है. लाखों यूजर्स जो गूगल एंड्रायड का प्रयोग करते हैं और आईफोन में गूगल मैप का प्रयोग करते हैं उन पर इसका असर पड़ेगा. प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के पूर्व फेडल कमिशन इन्फौर्समेंट ब्यूरो के चीफ टेक्नोलाजिस्ट का कहना है, ‘यूजर्स द्वारा लोकेशन डेटा औफ करने के बाद भी उसका ट्रैक रखना गलत है. अगर आप यूजर को लोकेशन हिस्ट्री टर्न औफ की सुविधा देते हैं तो यह पूरी तरह से रिकौर्ड के बाहर ही होना चाहिए.’

गूगल का इस बारे में कहना है, ‘गूगल अपने यूजर्स को बेहतर सुविधा देने के लिए लोकेशन का प्रयोग अलग तरीके से कर सकता है. इसमें लोकेशन हिस्ट्री, वेब ऐंड ऐप ऐक्टिविटी और दूसरे डिवाइस लेवल लोकेशन सर्विस हैं.’

सिंधु बनी 56 साल में एशियाड फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी

पीवी सिंधु एशियाड में बैडमिंटन के 56 साल के इतिहास में खिताबी मुकाबले में जगह बनाने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं. उन्होंने 18वें एशियाई खेलों में सोमवार को सेमीफाइनल में जापान की अकाने यामागुची को 21-17, 15-21, 21-10 से हरा दिया. फाइनल में सिंधु का मुकाबला चीनी ताइपे की ताई जू युंग से होगा. युंग ने सेमीफाइनल में भारत की साइना नेहवाल को 21-17, 21-14 से हराया. हालांकि, साइना हारने के बावजूद बैडमिंटन के महिला एकल में पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गईं. बैडमिंटन में सेमीफाइनल हारने वाले खिलाड़ी को कांस्य पदक दिया जाता है.

तीनों गेम 22 मिनट तक चले : सिंधु और यामागुची का मुकाबला एक घंटे 6 मिनट तक चला. सिंधु ने पहला गेम 22 मिनट में अपने नाम किया. हालांकि, दूसरे गेम में जापानी खिलाड़ी ने बेहतर खेल दिखाया. उन्होंने 8-10 से सिंधु से पिछड़ने के बावजूद 16-12 से बढ़त बना ली. इससे सिंधु पर दबाव बढ़ा. यामागुची ने इसका फायदा उठाया और 22 मिनट तक चले दूसरे गेम को 21-15 से अपने नाम किया. तीसरा गेम रोमांचक रहा. इसमें यामागुची ने एक समय सिंधु के खिलाफ 7-3 से बढ़त बनाई. लेकिन भारतीय शटलर ने लगातार अंक बनाए और 16-10 से स्कोर अपने पक्ष में किया. इसके बाद यामागुची एक भी अंक नहीं बना पाईं और सिंधु ने 21-15 से गेम जीतने के साथ ही मुकाबला जीत लिया.

सीधे सेटों में हारीं साइना: ताई जू युंग ने सेमीफाइनल में भारत की साइना नेहवाल को 21-17, 21-14 से हराया. हालांकि, साइना सेमीफाइनल में हारने के बावजूद बैडमिंटन के महिला एकल में पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गईं. बैडमिंटन में सेमीफाइनल हारने वाले खिलाड़ी को कांस्य पदक दिया जाता है. साइना का एशियाड में एकल स्पर्धा में यह पहला पदक है. उन्होंने 2014 इंचियोन एशियाई खेलों में महिला टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था. साइना और ताई जू युंग के बीच अब तक 17 मुकाबले हुए. इनमें साइना पांच और युंग 12 जीतने में सफल रहीं. साइना नवंबर 2014 के बाद से युंग के खिलाफ कोई मुकाबला नहीं जीत पाईं हैं.

शाहरुख से मिल के लगा कि मैंने जिन्दगी में कुछ तो हासिल किया है: जस्सी गिल

गायक-अभिनेता जस्सी गिल, जिन्होंने अपने बौलीवुड करियर की शुरुआत आनंद एल. राय की हैप्पी फिर भाग जाएगी से की है, कहते हैं कि सुपरस्टार शाहरुख खान से मिलने के बाद उन्हें पौजिटिव महसूस हो रहा है. हाल ही में 29 वर्षीय गायक-अभिनेता ने शाहरुख़ खान के साथ खुद की तस्वीर ट्वीटर पर साझा की.

तस्वीर के साथ, उन्होंने लिखा: “आज मेरे लिए बहुत खुशी का दिन है. शाहरुख सर से शुभकामनाएं और प्यार मिला. कभी सोचा नहीं था कि मैं उनसे मिलूंगा. आज मुझे लगा कि कुछ हासिल किया है. शुक्रिया आनंद एल. राय सर और मुदस्सर अजीज. ”


सोनाक्षी सिन्हा अभिनीत हैप्पी फिर भाग जाएगी हैप्पी भाग जाएगी की अगली कड़ी है जिसमें डायना पेंटी, अली फजल, अभय देओल और जिमी शेरगिल इत्यादि सितारे शामिल हैं।

 

इन 5 तरीकों से करें मनी मैनेजमेंट, नहीं होगी पैसे की किल्लत

यदि आपकी सैलरी आपको आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने का अहसास दिलाती है. जब आपकी आय  ही एकमात्र स्रोत हो, तो आपको आर्थिक मजबूती के लिए योजना बनाने की जरूरत है.

बचत और निवेश की शुरूआत कभी भी की जा सकती है. जितना पहले आप शुरू करेंगे उतना ही अधिक आप अपने पैसे पर ब्याज का फायदा उठा सकते हैं. जानें वो फाइनेंशियल स्टेप्स जो आपको जल्दी लेने की जरूरत है:

बजट बनाएं और बचत करें

बजट बनाने से पहले हमेशा यह सोचें कि आपके पास कितना पैसा है, आपके खर्च क्या हैं और बचत के लिए आपका दायरा क्या है. एक निश्चित अनुपात में खर्च और बचत के अनुसार अपनी मासिक आय को बांटने की कोशिश करें’ और खर्चों के बाद जो कुछ बचे उसे महीने की शुरुआत में ही बचत वाले हिस्से में डाल दें. इस तरीके से आपको बचत करने की आदत बनाने में मदद मिलेगी.

सही जगह निवेश करें

सिर्फ अंधाधुंध पैसे बचाने से प्रभावी रिटर्न नहीं मिलता है. इसलिए, यह जरुरी है कि आप लक्ष्य निर्धारित करें और इन लक्ष्यों में से हरेक तक पहुंचने के लिए वक्त का निश्चित करें. निवेश के वक्त को देखते हुए, जोखिम और लिक्विडिटी की जरुरत निर्धारित होती है.

SIP करें

अपने दिमाग में रिटायरमेंट या रिटायरमेंट के बाद की पैसों की जरुरत का ख्याल जरुर रखें. आप जितना जल्दी निवेश करना शुरू करेंगे उतनी ही जल्दी आपका निवेश बड़ा होगा. आप अपने मासिक आय का बहुत छोटा सा हिस्सा SIP म्यूच्यूअल फंड में निवेश कर सकते हैं. यह रकम 500 रुपये का भी हो सकता है. और जब आपका वेतन बढ़े या आप निवेश के रकम को बढ़ाना चाहते हैं तो आप हमेशा समय के साथ योगदान की मात्रा बढ़ा सकते हैं. बेहतर रिटर्न पाने के लिए जल्दी निवेश शुरू करना जरुरी है.

Emergency के लिए तैयार रहें

हो सकता है कि आप खूब बचत करते हों. लेकिन किसी भी इमरजेंसी में आपकी सारी जमा-पूंजी समाप्त हो सकती है, यह इमरजेंसी स्वास्थ्य, एक्सिडेंट, नौकरी खोने पर हो सकती है. ऐसे में यदि आपके पास बचत न हो तो आपको बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. इमरजेंसी के हालात में आपके पास आय का अतिरिक्त साधन ईएमआई भरने, दैनिक खर्चों आदि के लिए होनी चाहिए. आपके पास 3 महीने से लेकर 6 महीने या उससे अधिक के लिए इमरजेंसी फंड होना चाहिए. इमरजेंसी फंड के लिए आपको हर महीने आय का कुछ फीसदी हिस्सा अलग निवेश करना चाहिए जहां एग्जिट लोड का कोई दबाव न हो.

अब स्मार्टफोन में हिन्दी टाइपिंग करना हुआ आसान, यह है तरीका

आज हर कोई स्मार्टफोन का इस्तेमाल करता है. अब इसमें हिंदी टाइपिंग का विकल्प मिलने से हिंदी में लिखने का चलन बढ़ा है. खासकर, सोशल मीडिया पर लोग हिंदी में लिखने लगे हैं. यदि आपके स्मार्टफोन में हिंदी टाइपिंग का विकल्प नहीं है, तो इन ऐप को इंस्टौल करें.

गूगल इंडिक कीबोर्ड : इसमें हिंदी सहित कई भाषाएं मौजूद हैं. यह कीबोर्ड कई मोड सपोर्ट करता है. ट्रांसलिटरेशन मोड में आप हिंदी में लिखने के लिए अंग्रेजी के अक्षरों से टाइप करेंगे, तो स्क्रीन पर टाइपिंग हिंदी में होगी. नेटिव मोड में नेटिव स्क्रिप्ट में टाइप कर सकते हैं. हैंडराइटिंग मोड में आप अपने फोन की स्क्रीन पर उंगली की मदद से टाइप कर सकते हैं. इसके अलावा हिंग्लिश मोड का भी विकल्प मिलेगा. यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर मुफ्त में मौजूद है.

स्विफ्टकी कीबोर्ड : यह ऐप आपके राइटिंग स्टाइल को जानने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करता है. इससे आपको ऑटोकरेक्ट और प्रिडिक्टिव टेक्स्ट की सुविधा मिलती है. इस कीबोर्ड में इमोजी और 89 से ज्यादा कलर्स आदि के विकल्प मिलते हैं. यह ऐप भी गूगल प्ले स्टोर पर मुफ्त में मौजूद है.

लिपिकार हिंदी कीबोर्ड : इस ऐप की मदद से आप आसानी से हिंदी में ई-मेल, फेसबुक पोस्ट और वॉट्सऐप मेसेज टाइप कर सकते हैं. यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है. अभी तक इसे करीब दस लाख लोग डाउनलोड कर चुके हैं. उन्होंने इसको 4.2 रेटिंग दी है.

हिंदी फौर गो कीबोर्ड-इमोजी : यह ऐप डिक्शनरी के साथ आता है, जिससे आपको स्पेलिंग सही करने में भी मदद मिलती है. इसके अलावा यह बड़ी संख्या में स्थानीय भाषा को सपोर्ट करता है और उन्हें ट्रांसलेट करता है. इसमें आपको 800 से ज्यादा इमोजी के विकल्प मिलेंगे.

ये 5 तरीके दिलाएंगे आपको आर्थिक आजादी

आपको ऐसा देखने को मिला होगा कि दो लोग एक ही औफिस में काम करते हैं और एक समान सैलरी पाते हैं, लेकिन उनमें से एक आरामदायक जिंदगी जी रहा है जबकि दूसरा आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा है. ऐसा क्यों? ऐसा उनके आर्थिक फैसलों में अंतर होने के कारण होता है. इसलिए आर्थिक आजादी हासिल करने और तनाव मुक्त जीवन जीने के लिए सही समय पर सही आर्थिक फैसले लेना बहुत जरूरी है. आर्थिक आजादी हासिल करने और एक सुखी जीवन जीने के पांच तरीकों पर नजर डालते हैं…

आर्थिक आजादी हासिल करने के लिए अपने आर्थिक उद्देश्यों के अनुसार निवेश करना जरूरी है. कुछ लोगों की यह गलत धारणा है कि एक बार में एकमुश्त निवेश करना काफी है और उन्हें दोबारा निवेश करने की जरूरत नहीं है. जो गलत है. निवेश करना और अपने निवेश की देखरेख करते रहने की एक निरंतर प्रक्रिया होनी चाहिए. आपके आर्थिक उद्देश्य आपकी जिंदगी के हर नए पड़ाव के साथ बदल सकते हैं. 20 साल की उम्र में आपकी जो प्राथमिकताएं थीं, वे 30 या 40 साल की उम्र की प्राथमिकताओं से अलग हो सकती हैं.

मसलन, जब आप 20 साल के होते हैं उस समय आपके जोखिम उठाने की भूख काफी अधिक हो सकती है और इसलिए आप अधिक रिटर्न की उम्मीद के साथ निवेश कर सकते हैं. लेकिन उम्र बढ़ने पर आपके जोखिम उठाने की भूख कम हो जाती है और इस तरह आपके रिटर्न की उम्मीद भी कम हो जाती है. इसलिए, रिटायर होने की उम्र तक पहुंचने पर आप कम जोखिम और कम रिटर्न वाले किसी इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट में निवेश करना पसंद कर सकते हैं. इसलिए यदि आप आर्थिक आजादी पाना चाहते हैं तो अपनी जिंदगी के हर पड़ाव में निवेश करने की कोशिश करें और सही निवेश प्रोडक्ट चुनने के लिए अपने आर्थिक उद्देश्यों पर फोकस करें.

समझदारी के साथ उधार लें

जब आप किसी काम के लिए पैसे उधार लेते हैं तो उधार की शर्तों के अनुसार उसे चुकाना आपका कानूनी, आर्थिक और नैतिक कर्तव्य है. आर्थिक दृष्टि से अनुशासनहीन व्यक्ति अंधाधुंध उधार लेता है, उसे समय पर चुका नहीं पाता है. ऐसे में सिर्फ अपने क्रेडिट स्कोर को ही नहीं, बल्कि अपनी आर्थिक सेहत को भी नुकसान पहुंचाता है. उधार काफी सोच-समझकर और अच्छी तरह प्लानिंग करके ही लेना चाहिए और सिर्फ तभी लेना चाहिए जब आपके पास कोई जरूरी चीज खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे न हों. एक सही प्लान की मदद से आप अपने अन्य आर्थिक मामलों के साथ ईएमआई के बोझ को आसानी से बैलेंस कर सकते हैं और आराम से कर्ज चुका सकते हैं. आर्थिक आजादी की दृष्टि से खास तौर पर किसी ऐसी चीज के लिए उधार लेना चाहिए जिसकी कीमत बढ़ने की उम्मीद हो. कोई प्रोपर्टी खरीदने के लिए पैसों का इंतजाम करने के लिए होम लोन लेने पर विचार करें.

विभिन्न जोखिमों के लिए इंश्योरेंस लें

जब आप जोखिम रहित जीवन जीते हैं तो आर्थिक आजादी अपने आप मिल जाती है. अचानक अस्पताल में भर्ती होने का खर्च, आंशिक या सम्पूर्ण विकलांगता, परिवार में कमाने वाले एकमात्र सदस्य की मौत आदि किसी व्यक्ति के जीवन में कभी भी अचानक आ जानेवाले खतरे हैं. इस तरह के जोखिम से सामना होने पर आपकी सारी बचत और सारा निवेश समाप्त हो सकता है. इस तरह के जोखिम से सुरक्षित रहने के लिए उपयुक्त इंश्योरेंस कवर लेना जरूरी है तभी आप टेंशन फ्री रह सकते हैं. आपको अपनी आर्थिक आजादी के साथ-साथ अपने परिवार के लोगों की आर्थिक आजादी को सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त हेल्थ इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस, एक्सीडेंटल इंश्योरेंस और कोई अन्य संबंधित प्रोटेक्शन लेकर रखना चाहिए.

पर्याप्त इमर्जेंसी फंड का इंतजाम करें

कामकाजी जीवन के दौरान आप यह कभी जान नहीं पाते हैं कि आपको भविष्य में कठिन परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ सकता है, जैसे नौकरी छूटना या अचानक एक बड़ी रकम की जरूरत पड़ना. जब ऐसी कठिन परिस्थिति में आपके पास पैसे नहीं होते हैं तो आपके पास दोस्तों और रिश्तेदारों से पैसे उधार लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं रह जाता है. इस तरह आपको अपनी आर्थिक आजादी से हाथ धोना पड़ सकता है. इस तरह की परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आप एक पर्याप्त इमर्जेंसी फंड तैयार करके रखें, जिससे आपको आर्थिक संकट की घड़ी में पर्याप्त आर्थिक मदद मिल सके. आप एक एफडी में या एक लिक्विड म्यूच्यूअल फंड में थोड़े-थोड़े पैसे निवेश करके या ज्यादा इंट्रेस्ट देने वाले सेविंग्स अकाउंट में पैसे डालकर इस तरह का फंड तैयार कर सकते हैं ताकि इमरजेंसी में आप जल्दी से पैसों का इंतजाम कर सके.

समझदारी के साथ अपने टैक्स को मैनेज करें

आप जितना ज्यादा कमाएंगे, आपको उतना ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है. लेकिन, आप समझदारी के साथ अपने टैक्स को मैनेज करके काफी पैसे बचा सकते हैं. आप इनकम टैक्स अधिनियम की उपयुक्त धाराओं के तहत पैसे निवेश करके डिडक्शन का फायदा उठाते हुए काफी टैक्स बचा सकते हैं. धारा 80C, 80D, 80CCD, 80E आम तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली कुछ ऐसी धाराएं हैं जो टैक्स डिडक्शन की सुविधा प्रदान करती हैं. लंबे समय में एक बड़ी रकम तैयार करने के लिए अपने टैक्स को मैनेज करना बहुत जरूरी है. एक समान इनकम करने वाले दो लोगों में से जो अपने टैक्स को सही तरीके से मैनेज करता है, वह ज्यादा पैसे बचा पाएगा और ज्यादा बड़ी रकम तैयार कर पाएगा.

धाविका दुती ने 100 मी. महिला दौड़ में 20 वर्ष बाद दिलाया देश को पहला पदक

भारतीय फर्राटा धाविका दुती ने 18वें एशियाई खेलों में महिला 100 मीटर दौड़ में सिल्वर जीता. जो देश का इन खेलों में 20 साल में पहला पदक है. भारत ने एशियाई खेलों की 100 मीटर महिला दौड़ में पिछली बार 1998 में पदक जीता था, जब ऋचा मिस्त्री कांस्य पदक जीतने में सफल रही थीं.

बता दें कि आईएएएफ ने 2014 में अपनी हाइपरएंड्रोगेनिजम नीति के तहत दुती को निलंबित कर दिया था जिस वजह से उन्हें उस साल के कौमनवेल्थ गेम्स के भारतीय दल से बाहर कर दिया गया था. ओडिसा की रहने वाली 22 साल की दुती ने आईएएएफ के फैसले के खिलाफ खेल पंचाट में अपील दायर की और इस मामले में जीत दर्ज करते हुए वापसी की. दुती ने कहा, ‘2014 मेरे लिए बहुत बुरा साल था. लोग मेरे बारे में कई तरह की बात कर रहे थे. उसी लड़की ने आज वापसी की और देश के लिए पदक जीतने में सफल रही. यह मेरे लिए बड़ी सफलता है.’

उन्होंने कहा, ‘सेमीफाइनल के शुरुआती 20 मीटर में मैं तेज नहीं दौड़ी थी. मेरे कोच ने मुझे इस बारे में बताया और कहा कि मुझे तेज शुरुआत करनी होगी. फाइनल में शुरुआती 40 मीटर में मैं काफी तेज दौड़ी. मैं आंखे बंद करके दौड़ रही थी. पदक के बारे में सोचे बिना मैं अपने समय को बेहतर करना चाह रही थी.’

दुती ने कहा, ‘जब मैंने आंखें खोलीं, दौड़ पूरी हो चुकी थी. मुझे नहीं पता था कि क्या हुआ. लोगों ने कहा कि मैं पदक जीत गई हूं लेकिन मुझे विश्वास नहीं हुआ, मैंने स्क्रीन पर नतीजा देखने के बाद ही झंडा उठाया.’

गौरतलब है कि सातवें नंबर की लेन में दौड़ रहीं दुती ने 11.32 सेकेंड का समय लिया, जो 11.29 सेकेंड के उनके राष्ट्रीय रिकौर्ड से मामूली रूप से कम है. बहरीन की ओडियोंग एडिडियोंग ने करीबी मुकाबले में 11 .30 सेकेंड के समय के साथ सोने का तमगा जीता जबकि चीन की वेई योंगली ने 11 .33 सेकेंड के समय से कांस्य पदक हासिल किया. भारत ने एशियाई खेलों की 100 मीटर महिला दौड़ में पिछली बार 1998 में पदक जीता था जब रिचा मिस्त्री ब्रॉन्ज पदक जीतने में सफल रही थी.

म्यूचुअल फंड में निवेश करते वक्त ना हों ऐसी गलतियां

आज हर कोई अच्छे से अच्छा निवेश चाहता है. जिसका फायदा कंपनियां भी रोजाना नयी नयी स्कीम लाकर उठाती हैं. पर कम समय में ज्यादा मुनाफा देने की वजह से शेयर बाज़ार आज भी सबकी पहली पसंद है .

कुछ शेयर जहां रेकॉर्ड ऊंचाई पर हैं, वहीं कई शेयर पीक वैल्यूएशन से काफी नीचे हैं. ऐसे में निवेशक भ्रमित होते हैं, जिसके कारण निवेशक अक्सर बड़ी गलतियां करते हैं. यहां हम कुछ ऐसी ही गलतियों के बारे में बता रहे हैं, जो निवेशकों को भारी पड़ सकती है :

बॉन्ड फंड से एफडी में जाना

चार साल के बाद ब्याज दरों में फिर से बढ़ोतरी हो रही है. हाल के महीनों में बॉन्ड फंड्स के रिटर्न बहुत खराब रहे हैं. पिछले एक साल में बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के चलते कुछ कैटिगरी के डेट फंड्स ने 2% से भी कम रिटर्न दिया है. इसकी तुलना में बैंक एफडी पर ब्याज कहीं ज्यादा है. ऐसे में निवेशक सकता बैंक एफडी और रेकरिंग डिपॉजिट में पैसा लगा सकते हैं. जिसके लिए वे बॉन्ड फंड्स से एग्जिट कर सकते हैं.

रिटर्न कम या नेगेटिव होने पर SIP रोकना

इस साल मिड और स्मॉल कैप शेयरों में जो गिरावट आई है. उसके कारण मिड और स्मॉल कैप फंड्स का रिटर्न प्रोफाइल बिगड़ गया है. जिन लोगों ने पिछले साल एसआईपी शुरू किया था, अभी उनका रिटर्न बहुत कम होगा. कुछ का रिटर्न नेगेटिव भी होगा. ऐसे हालात में अक्सर निवेशक एसआईपी बंद कर देते हैं.

​शॉर्ट टर्म गोल के लिए नई SIP शुरू करना

पिछले एक साल से लार्ज कैप फंड्स बढ़िया रिटर्न दे रही है. कुछ लोग इसमें नया एसआईपी शुरू करने की सोच रहे होंगे. लार्ज और मिड कैप सेगमेंट में कई शेयर अभी भी ऊंचे वैल्यूएशन पर हैं. विश्लेषकों का कहना है कि इस वजह से इनसे शॉर्ट टर्म में अच्छा रिटर्न मिलने की उम्मीद नहीं . इसलिए जो लोग शॉर्ट टर्म के लिए इस तरह का निवेश करेंगे, उन्हें झटका लग सकता है.

MF के डिविडेंड ऑप्शन में निवेश

इक्विटी ओरिएंटेड फंड्स को रेग्युलर डिविडेंड इन्कम का जरिया बताकर भी बेचा जाता है. हालांकि, अब डिविडेंड पर 10% का टैक्स लगा दिया गया है, इसलिए यह उतना आकर्षक नहीं रहा. जो लोग रेग्युलर डिविडेंड की वजह से इन फंड्स में पैसे लगाना चाहते हैं, उन्हें एक बार फिर से सोचना चाहिए. वैसे भी डिविडेंड का भुगतान एनएवी कम करके ही होता है. इसलिए यह अतिरिक्त आमदनी नहीं. इसकी भी गारंटी नहीं कि म्यूचुअल फंड्स आनेवाले वक्त में पहले की तरह डिविडेंड का भुगतान कर पाएं.

गोल्ड जीत भारत लौटी विनेश ने सोमवीर से की सगाई

एशियन गेम्स से गोल्ड जीतकर लौटीं रेसलर विनेश फोगाट ने बीती रात सोमवीर राठी से एअरपोर्ट पर ही सगाई कर ली. विनेश महिलाओं के 50 किग्रा वर्ग के खिताबी मुकाबले में जापान की युकी इरी को एकतरफा मुकाबले में हराकर एशियाई खेलों में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं थीं. इंडोनेशिया से भारत लौटने के तुरंत बाद विनेश ने शनिवार रात इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ही सोमवीर को अंगूठी पहनाकर सगाई कर ली.

sports news asian games gold medal winner wrestler vinesh phogat got engaged

रात करीब 10 बजे विनेश हवाई अड्डे से जब बाहरी निकलीं तो वहां काफी संख्या में उनके गांव से लोग उनके स्वागत के लिए पहुंचे थे जिन्होंने फूलों से उनका स्वागत किया.

हवाई अड्डे के बाहर पार्किंग के पास विनेश और सोमवीर की सगाई की रस्म पूरी हुई. शनिवार को ही विनेश का जन्मदिन भी था और उन्होंने हवाई अड्डे पर ही केक भी काटा. चरखी दादरी की 24 साल की विनेश और सोनीपत के सोमवीर ने एक-दूसरे को रिंग पहनाई.

इस दौरान विनेश की मां और सोमवीर के परिजन भी मौजूद थे. विनेश ने सगाई की पुष्टि करते हुए कहा की हम जल्दी ही शादी करेंगे. विनेश के ताऊ महाबीर फोगाट ने कहा, ‘‘बच्चे समझदार हो गए हैं और हमने यह फैसला आपसी सहमति से किया’’.

संघर्ष जीवन के अंत तक चलता रहता है : धर्मेन्द्र

भूमिका चाहे एक सीधे सादे ईमानदार व्यक्ति की हो या एक्शन हीरो या कौमेडियन की, हर किरदार में अपने आपको फिट बैठाने वाले और हिंदी सिनेमा जगत पर लम्बे समय तक राज करने वाले अभिनेता धर्मेन्द की शख्सियत अनूठी है. साल 1960 से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखने वाले धर्मेन्द्र ने करीब 200 फिल्मों में काम किया है. वे स्पष्टभाषी हैं और किसी बात को कभी भी कहने से हिचकिचाते नहीं हैं. फिर चाहे उनकी पहली शादी हो या प्यार, दोनों को उन्होंने सम्मान दिया है. 82 साल के धर्मेन्द्र आज भी अपने आपको जवां समझते हैं. उनके दिल में आज भी वही प्यार और रोमांस का दौर चलता है. अभी उनकी फिल्म ‘यमला पगला दीवाना फिर से’ रिलीज पर है जिसमें उन्होंने अपने दोनों बेटे सनी देओल और बौबी देओल के साथ काम किया है उनसे मिलकर बात करना रोचक था, पेश है अंश.

आप 50 सालों से अधिक समय इंडस्ट्री में बिता चुके हैं, आपके हिसाब से इंडस्ट्री का सुनहरा दौर कौन सा था?

हर दौर अच्छा है, क्योंकि मुझे फिल्मों से मोहब्बत है. आज का दौर भी अच्छा है उस समय भी कुछ अच्छा था और कुछ अच्छा नहीं था. ये सब दर्शकों पर निर्भर करता है, उस समय के दर्शक अलग थे आज अलग हैं और फिल्में भी उसी हिसाब से बन रही हैं. मुझे तो अभी भी लगता है कि कुछ और फिल्में मुझे करनी है, जिसके लिए मैं लगा हुआ हूं.

आप उस दौर की क्या चीज सबसे ज्यादा मिस करते हैं?

वे लोग, मेरे साथी और माहौल जैसा था, जिसमें शाम को यूनिट की टीम के साथ बैठकर भजिया और जलेबी खाना, बातचीत करना आदि सब याद आता है. आज कुछ लोग है और कुछ नहीं है. इसके अलावा जब हम सभी शूट करने जाते थे तो सारे यूनिट के लोग खुश हो जाते थे कि हमें काम के साथ-साथ एन्जौय करने का मौका मिलेगा. मैं एक माध्यम वर्गीय परिवार से आया था इसलिए उस माहौल को बहुत एन्जौय करता था. यूनिट में घर से बना खाना, जिसमें मेरी मां के हाथ का बना खाना भी होता था उन सभी को मिस करता हूं और उसे भूल नहीं सकता. मैं अभी भी वैसा ही हूं,जैसा सालों पहले था.

आप पर्दे पर एक्शन हीरो और रियल लाइफ में एक शायराना अंदाज, इसे कैसे बैलेंस किया?

एक्टिंग एक रिएक्शन है, जो निर्देशक के अनुसार संवाद के साथ करनी पड़ती है. एक जज्बाती इंसान के लिए ये करना मुश्किल नहीं था. शुरू – शुरू में अभिनय करने में थोड़ी मेहनत लगी, पर बाद में सब ठीक हो गया. इमोशनल इंसान का रिएक्शन जल्दी होता है. मेरी औब्जरवेशन अच्छी थी, जिससे सब सही होता गया. औफ स्क्रीन में मैं एक साधारण इन्सान हूं, जो सबका दर्द सुनता है. इसलिए दोनों में कभी मुश्किल नहीं आई. मैंने हर तरह के अभिनय किये कहीं इमोशनल तो कहीं कौमेडी तो कही एक्शन.

आज के दौर के एक्टर्स में किस तरह की खूबियां देखते हैं?

वे बहुत रियलिस्टिक हैं. रणवीर सिंह की पद्मावत को देखकर मैं हैरान हो गया. आमिर खान की ‘दंगल’ देखकर मुझे रोना आ गया था. वे बहुत अच्छा अभिनय करते हैं और मुझसे भी अच्छी उनकी अभिनय क्षमता है.

आप फिल्मों का चयन खुद करते थे या फिल्म खुद आपको चुन लेता था?

मुझे हमेशा अच्छे निर्देशक मिले हैं. जो अच्छी कहानी, पटकथा लेकर सामने आते थे जिससे मुझे चुनना नहीं पड़ता था और फिल्म अच्छी बन जाती थी. गलत कहानी, गलत पटकथा और गलत निर्देशक से फिल्में नहीं चलती.

क्या आप चाहते हैं कि आप पर बायोपिक बने?

कोई बनाएगा, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं. मेरा रोमांस और मेरी लाइफ सबके सामने है, मैंने सबके साथ वफा की है और मुझे कुछ भी कहने से कोई हिचकिचाहट नहीं.

आपने ऋषिकेश मुखर्जी की कौमेडी फिल्में की हैं, क्या आज आप उन फिल्मों से कुछ टिप्स आज की अपनी फिल्मों को देते हैं?

ऋषिकेश मुखर्जी एक महान निर्देशक थे. वे मेरे भाई, दोस्त और मास्टर थे. कभी-कभी मुझे डांट भी देते थे. जब वे बीमार थे, तो उन्हें देखकर मैं बड़ा दुखी हो गया था. उनका काम बहुत अलग था. उनके जैसी सोच रखना आसान नहीं.

आप हमेशा स्पष्टभाषी हैं, इसका प्रभाव आपके कैरियर पर पड़ा?

मैं शुरू से ऐसा ही हूं, जिसे जो बात कहनी होती थी सामने कह देता था. इसे मैं गर्व मानता हूं. मैंने अपने शुरूआती दिनों में बहुत अधिक संघर्ष किया है. सपने भी बहुत देखे थे, लेकिन खुश हूं कि मैं यहां तक पहुंचा हूं.

संघर्ष का दौर आपके जिंदगी में कब तक चला?

अभी भी संघर्ष है, संघर्ष जीवन के अंत तक करना पड़ता है. पहले कुछ और था अभी कुछ अलग, लेकिन ये चलता रहता है. ये आप पर निर्भर करता है कि इसे आप खुशी से लड़ लें या फिर रो-धोकर. मैंने काम को हमेशा एन्जौय किया है और संघर्ष को एक फेज माना है, जो आता और जाता है.

आपको किसी निर्देशक के साथ काम न करने का मलाल है?

निर्देशक महबूब साहब के साथ मैंने काम नहीं किया है और मुझे उसका अफसोस है.

आपने पिता के तौर पर बच्चों को कोई सलाह दी है?

मैंने कभी कोई सलाह बच्चों को नहीं दी है, क्योंकि मैं भी अपनी मर्जी से फिल्म लाइन में आया था. जो जैसे बढ़ा मैंने आगे आने दिया. मैंने किसी को न तो टोका है और न ही रोका है.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें