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फेसबुक में आया नया क्रिएट बटन, क्या है खास

Cnet ने अगस्त की शुरुआत में बताया था कि मार्क जकरबर्ग की कंपनी फेसबुक के डेस्कटौप वर्जन पर ‘क्रिएट’ बटन की टेस्टिंग कर रही है.

इस पर बात करते हुए फेसबुक की ओर से कहा गया था कि ‘क्रिएट’ बटन की टेस्टिंग दुनियाभर में की जा रही है. इसे आने वाले समय में दुनियाभर के सभी यूजर्स को उपलब्ध करा दिया जाएगा. फिलहाल इसकी टेस्टिंग की जा रही है.

technology facebook create button

ऐसा प्रतीत हो रहा है कि बटन की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है और इसे सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध करा दिया गया है. फेसबुक पेज पर दिए गए क्रिएट बटन को क्लिक करने पर एक मेन्यू ओपन होता है. यहां यूजर्स को एक ब्रांड पेज एक विज्ञापन पेज, एक ग्रुप, एक इवेंट बनाने का औप्शन मिलता है.

मासाबा गुप्ता और मधु मंटेना की शादी तीन वर्ष भी न टिक सकी

मशहूर अभिनेत्री नीना गुप्ता और वेस्ट इंडीज के क्रिकेटर सर विवियन रिचर्ड की बेटी तथा फैशन डिजायनर 29 वर्षीय मासाबा गुप्ता ने लगभग तीन वर्ष पहले अपनी उम्र से 14 वर्ष बड़े 43 वर्षीय फिल्म निर्माता मधु मंटेना से शादी करने का फैसला किया था, तो लोगां को बड़ा आश्चर्य हुआ था. पर दोनों ने शाहिद कपूर व आलिया भट्ट की मौजूदगी में दो जून 2015 को कोर्ट मैरिज कर ली थी.

जबकि परंपरागत रीति रिवाज के साथ नवंबर माह में शादी हुई. 19 नवंबर को मेंहदी, 20 नवंबर को संगीत समारोह और 21 नवंबर को शादी की रस्में हुई थी. सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था.

bollywood Masaba Gupta announced trial separation with husband Madhu mantena

मगर अचानक दो दिन पहले मासाबा गुप्ता और मधु मंटेना ने सोशल मीडिया इंस्टाग्राम पर अपने अलगाव की घोषणा कर दी. यह एक अलग बात है कि उन्होने इसे फिलहाल अस्थायी कहा है. दोनो ने संयुक्त बयान में कहा है – ‘‘मैने व मधु ने बड़े दुःख के साथ अलग होने का फैसला लिया है. आज परीक्षण के लिए वैवाहिक जीवन में अलग होने का फैसला लिया है. हम दोनो ने यह निर्णय अपने पारिवारिक सदस्यों व कुछ प्रोफेशनल से बातचीत करने के बाद लिया है.

फिलहाल हम यही कहना चाहते हैं कि हम दोनों अपनी अपनी निजी ज़िन्दगी में जो कुछ चाहते हैं, उसको लेकर हम बेवजह विवाह व प्यार पर बोझ डाल रहे थे. इसलिए हम दोनो कुछ समय एक दूसरे से अलग रहकर यह परखना चाहते हैं कि हमें अपनी अपनी जिंदगी में क्या चाहिए. हम चाहते हैं कि जबरदस्ती किसी रिश्तें में बंधकर रहने की बनिस्बत अलग होकर एक दूसरे का सम्मन करें.’’

बौलीवुड में मासाबा गुप्ता और मधु मंटेना के इस अस्थायी अलगाव को फैशन स्टेटमेंट की तरह देखा जा रहा है. बौलीवुड मानकर चल रहा है कि दोनों के बीच सदा के लिए अलगाव हो चुका है.

एक बार फिर दिखेगी राज कुमार राव और कंगना रानौत की जोड़ी

फिल्म ‘‘क्वीन’’ में कगना रानौत के साथ अभिनय कर चुके अभिनेता राज कुमार राव अब कंगना रानौत के साथ तीसरी फिल्म करने जा रहे हैं.

जी हाॅं! अनुराग बसु के निर्देशन में बनने वाली फिल्म ‘‘इमली’’ की शूटिंग नवंबर माह से करने के लिए राजकुमार राव ने हामी भर दी है.

खुद राज कुमार राव कहते हैं – ‘‘हाॅ! यह सच है कि मैं अनुराग बसु के साथ फिल्म ‘इमली’ कर रहा हूं, जिसमें मेरे साथ कंगना रानौत होंगी.

यह फिल्म एक प्रेम कहानी वाली फिल्म है, जिसमें इंसानी रिश्तों को मानवीय धरातल पर रेखांकित किया जाएगा. इसके अलावा कंगना रानौत के साथ मेरी फिल्म ‘मेंटल है क्या’ की शूटिंग भी पूरी हो चुकी है.’’

मजेदार बात यह है कि कंगना रानौत निर्देशक अनुराग बसु के साथ चौथी बार काम करने जा रही हैं. इससे पहले वह अनुराग बसु के निर्देशन में ‘गैंगस्टर’, ‘लाइफ इन मेट्रो’ के अलावा ‘काइट्स’ कर चुकी हैं.

नेहा धूपिया ने कबूली गर्भवती होने की बात

पिछले दो माह से अंगद बेदी की पत्नी और अभिनेत्री नेहा धूपिया के गर्भवती होने की खबरें मीडिया में काफी गर्म रही हैं, मगर खुद नेहा धूपिया इन खबरों का खंडन करती आ रही थी.

यहॉं तक की नेहा धूपिया के पिता प्रदीप धूपिया ने भी मीडिया से बात करते हुए नेहा के गर्भवती होने की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया था.

पर अब नेहा के पति व अभिनेता अंगद बेदी ने आगे बढ़कर सोशल मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम पर तस्वीरें डालते हुए नेहा धूपिया के गर्भवती होने की खबर पर मोहर लगा दी है.

अंगद बेदी ने इंस्टाग्राम पर लिखा है- ‘‘Ha! Turns out this rumor is true’’ यानी कि ‘‘हा….अफवाह सच साबित हुई.’’ ज्ञातव्य है कि नेहा धूपिया और अंगद बेदी ने 10 मई 2018 को गुरूद्वारे में शादी की थी.

ब्लाइंड क्रिकेट के अनोखे नियम से अंजान होंगे आप

क्रिकेट भारत का सबसे लोकप्रिय खेल है. हर आयु वर्ग का यह पसंदीदा खेल बन चुका है. पुरुष और महिला क्रिकेट के अतिरिक्त दृष्टिबाधित लोग भी क्रिकेट खेलते हैं. दृष्टिबाधित लोगों को क्रिकेट खेलते देखना अपने आप में रोमांचक अनुभव होता है. बिना देखे ये खिलाड़ी जिस तरह से क्रिकेट खेलते हैं, वो लोगों को हैरान करने पर मजबूर कर देता है.

ब्लाइंड क्रिकेट है तो सामान्य क्रिकेट की तरह लेकिन इसके नियम आम क्रिकेट से अलग और अनोखे होते हैं. जिन्हें सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे.

टीम में तीन तरह के खिलाड़ी

ब्लाइंड क्रिकेट में भी सामान्य टीम की तरह 11 खिलाड़ी होते हैं. हालांकि, ये खिलाड़ी तीन अलग-अलग श्रेणी के होते हैं. इन्हें बी 1, बी 2 और बी 3 में विभाजित किया जाता है. बी 1 वह खिलाड़ी वे होते हैं जिनको लगभग नहीं के बराबर दिखाई देता है. बी 2 खिलाड़ियों को कम दिखाई देता है. बी 3 खिलाड़ी को बी 1 और बी 2 खिलाड़ियों से ज्यादा दिखाई देता है.

तीनों खिलाड़ियों की अलग पहचान

क्रिकेट के नियम के हिसाब से एक टीम में कम से कम चार बी 1 खिलाड़ी होने चाहिए. टीम में तीन बी 2 और ज्यादा से ज्यादा चार बी 3 खिलाड़ी होने चाहिए. अपनी पहचान के लिए यह तीन वर्ग के खिलाड़ी अलग-अलग बैंड पहनते हैं. बी 1 खिलाड़ी दाहिने हाथ में सफेद बैंड पहनते हैं तो वहीं बी 2खिलाड़ी लाल जबकि बी 3नीला बैंड पहनते हैं.

छक्का लगाने पर मिलते हैं 12 रन

ब्लाइंड क्रिकेट में बी 1 बल्लेबाज के द्वारा स्कोर किए गए रन दोगुने हो जाते हैं. अगर बी 1 बल्लेबाज एक रन लेता है तो उसके और टीम के खाते में दो रन जुड़ जाते हैं. दो रन लेने पर चार और तीन रन लेने पर छह रन मिलते हैं. अगर बी 1 बल्लेबाज चौका लगाता है तो उसे आठ रन मिलते हैं, अगर छक्का लगता है तो उसे 12 रन मिलते हैं. लेकिन बी 2 और बी 3 खिलाड़ियों के लिए यह सुविधा लागू नहीं है.

गेंद भी होती है अलग

दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए खेल के मैदान बिलकुल साधारण ग्राउंड की तरह होते हैं. पिच की लम्बाई भी 22 गज होती है और अंपायर भी सभी फैसले साधारण क्रिकेट के नियमों की तरह लेता है. लेकिन ब्लाइंड क्रिकेट में उपयोग की जाने वाली गेंद प्लास्टिक की बनी होती है और उसमें स्टील के घुंगरू डाले जाते हैं.

गेंदबाजी के मजेदार नियम

ब्लाइंड क्रिकेट के नियम के अनुसार एक गेंदबाज मैच के सिर्फ 20 प्रतिशत ओवर में गेंदबाजी कर सकता है. यानी अगर टी 20 मैच है तो एक गेंदबाज ज्यादा से ज्यादा चार ओवर गेंदबाजी कर सकता है. नियम के हिसाब से बी 1 खिलाड़ियों को मैच के 40 प्रतिशत ओवर में गेंदबाजी करना जरूरी है. यानी अगर टी 20 मैच है तो चार बी 1 खिलाड़ियों को कुल मिलाकर आठ ओवर गेंदबाजी करना जरूरी है, लेकिन एक खिलाड़ी चार ओवर से ज्यादा गेंदबाजी नहीं कर सकता है.

नो बॉल के हैं ज्यादा खतरे

अंडरआर्म गेंदबाजी नहीं करने पर नो बॉल होगी. आधे पिच से पहले गेंद का बाउंस होना जरूरी है नहीं तो नो बॉल होगी. इसके लिए पिच के बीच में एक हाफ मार्क बना रहता है. गेंदबाज गेंद फेंकने से पहले बल्लेबाज से पूछता है क्या वह तैयार है और बल्लेबाज के हां में जवाब देने पर ही गेंद की जाएगी, वरना नो बॉल होगी.

गेंद करने के बाद गेंदबाज को बल्लेबाज से प्ले यानी खेलो कहना जरूरी है, नहीं तो नो बॉल होगी. अगर प्ले कहने से पहले या प्ले कहने के बाद गेंद फेंकने में देर हुई तो भी नो बॉल होगी. गेंदबाजी के दौरान कोई भी फील्डर बिना मतलब डाइव मारता है या लेट जाता है तो भी नो बॉल होती है.

फील्डिंग के भी नियम अलग

मैदान के अंदर चार बी 1 खिलाड़ियों का फील्डिंग करना जरूरी है. जब कोई बी1 खिलाड़ी फील्ड से बाहर जाता है तो उसकी जगह पर स्थानापन्न के तौर पर बी 1 खिलाड़ी ही मैदान के अंदर आता है. बी 2 खिलाड़ी की जगह पर बी 1 या बी 2 खिलाड़ी ही आते हैं. बी 3 खिलाड़ी की जगह पर बी 1, बी 2 या बी 3 कोई भी खिलाड़ी फील्डिंग कर सकता है.

रनर रखने के नियम

बी 1 खिलाड़ी के बल्लेबाजी करने के दौरान एक रनर रखा जाता है. बी 2 खिलाड़ी भी चाहे तो अपने लिए रनर रख सकता है. रनर और बल्लेबाज के बीच 10 फीट की दूरी होनि चाहिए.

इस तरह के कड़े नियम और दिव्यांगता के बाद भी दृष्टिबाधित क्रिकेटर अपनी मेहनत और लगन से अच्छा प्रदर्शन करके सभी को प्रभावित करते हैं.

अब 30,000 फीट की ऊंचाई पर भी कर पाएंगे इंटरनेट का इस्तेमाल

फ्लाइट से यात्रा करने वालों के लिए एक खुशखबरी है. दरअसल डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्यूनिकेशन  ने हवाई यात्रा के दौरान सेल्यूलर सर्विसेज को इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है.

जिससे यात्री फ्लाइट के दौरान भी इंटरनेट और कौल्स का इस्तेमाल कर पाएंगे. यह सुविधा अक्टूबर माह से शुरू होगी.

सारी गाइडलाइन्स डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्यूनिकेशन ने टेलिकॉम रेग्यूलेटरी की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए ही बनाई हैं. प्लान पूरा होते ही इस सर्विस को लौ मिनस्ट्री से  2 हफ्तों में सहमति मिल जाएगी.

भारतीय फ्लाइट ऑपरेटर्स भी फ्लाइट के दौरान इन्टरनेट और कौल सर्विस उपलब्ध कराने के पक्ष में है. हालांकि, इसके लिए कोई अतिरिक्त चार्ज लिया जाएगा या नहीं इसकी फिलहाल कोई जानकारी नहीं है.

यह अनुमान लगाया गया है कि इस सर्विस के लिए सामान्य शुल्क से ज्यादा चार्ज लिया जाएगा. इसके लिए एयरलाइंस शुरुआती दौर में निवेश भी करेंगी.

भारतीय ऑपरेटर्स के लिए यह तकनीक शुरू करना इतना आसान नहीं होगा. एक एग्जीक्यूटिव की मानें तो हर एयरक्राफ्ट को करीब 1 मिलियन डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी. वहीं, सर्विस को फ्लाइट में शुरु करने के लिए लगभग 10 दिनों का समय लगेगा.

बुखार और बीपी के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने बाजी मारी

एशियाई खेलों में शुक्रवार को भारतीय खिलाड़ियों ने गजब की जिजीविषा दिखाई. तेज बुखार, सिर में दर्द और हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) के बावजूद कमाल का प्रदर्शन करते हुए खिलाड़ियों ने नौकायन में एक स्वर्ण समेत तीन पदक जीत लिए.

बुखार से पीड़ित दत्तू भोकानल, ओम प्रकाश, सुखमीत सिंह और स्वर्ण सिंह ने इतिहास रचते हुए स्वर्ण पदक दिलाया. पर खिलाड़ी इतनी तकलीक में थे कि रेस खत्म होते ही फिनिश लाइन पर उन्हें ऑक्सीजन देना पड़ा और व्हीलचेयर से ले जाया गया.

वहीं, हाई बीपी के बावजूद दुष्यंत ने लाइटवेट सिंगल स्कल में कांस्य जीतकर तिरंगा लहराया. दुष्यंत जब पानी में उतरे तो काफी बीमार थे. माना जा रहा था कि उनके लिए रेस पूरी करना मुश्किल है पर उन्होंने न सिर्फ इसे पूरा किया बल्कि पदक भी जीता. उन्हें भी स्ट्रेचर पर ले जाना पड़ा.उधर,भगवान सिंह और रोहित की जोड़ी ने भी लाइटवेट डबल स्कल्स में कांस्य जीत कर नाम रोशन किया.

सुनहरा शुक्रवार

– नौकायन में एक स्वर्ण और दो कांस्य जीतकर खिलाड़ियों ने इतिहास रचा.

– महिला कबड्डी में भारतीय टीम को रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा.

– निशानेबाजी में हिना सिद्धू ने कांस्य जीता, यह उनका पहला व्यक्तिगत पदक.

– टेनिस में रोहन बोपन्ना, दिविज शरण को सोना, प्रज्नेश को कांस्य मिला.

टेनिस में बोपन्ना-शरण ने सोना दिलाया

टेनिस में पहली बार जोड़ी बनाकर खेल रहे रोहन बोपन्ना और दिविज शरण ने सोना दिलाया. उन्होंने कजाखस्तान के अलेक्जेंडर बबलिक और डेनिस येवसेयेव को 52 मिनट के संघर्ष के बाद 6-3, 6-4 से हराया.

अगर ये 3 लक्षण हैं तो फौरन फेसबुक से करें तौबा

फेसबुक हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है. कोई पेशेवर नेटवर्किंग के लिये, कोई निजी संबंधों के लिये तो कोई टाइम पास करने के लिये इसका इस्तेमाल करता है. किसी की फ़ोटो या स्टेटस को लाइक करने में तो कोई नुकसान नही है लेकिन कुछ ऐसे लक्षण भी होते हैं जिससे पता चलता है कि आप फ़ेसबुक के बुरी तरह आदी हो चुके हैं बिना इसके आपको अपनी वक़त का अंदाज़ा ही नहीं हो सकता.

हम यहां आपको तीन ऐसे लक्षण बता रहे हैं जिससे आपको सावधान रहना चाहिये.

1. अगर आप नये लोगों से मिलने के लिये फ़ेसबुक का इस्तेमाल करते हैं
एक अध्ययन से पता चला है कि ऐसे लोगों की फ़ेसबुक की लत लग चुकी होती है जो नये लोगों से इसके ज़रिये मिलने की कोशिश करते हैं. एकरॉन यूनिवर्सिटी में संचार माद्यम के सहायक प्रो. एंबर फ़ेरिस के अनुसार ऐसे लोग आमतौर पर  बहिर्मुखी होते हैं जो सोशल मीडिया पर अपनी निजी बातें आसानी से बता देते हैं लेकिन ये बातें हमेशा सही नहीं होतीं.

2. ऐसे लोग जो लोगों का ध्यान खींचने के लिये का इस्तेमाल करते हैं
वो लोग जो फ़ेसबुक का इस्तेमाल लोगों का ध्यान खींचने के लिये करते हैं उनको भी इसकी लत लग चुकी होती है. ऐसे लोग बजाय इसके कि अपने अनुभव या आमने सामने बैठकर बातचीत से ख़ुद अपने बारे में जाने, फ़ेसबुक के दोस्तों के फीडबैक के आधार पर ख़ुद का  आंकलन करते हैं. ऐसे लोग दूसरों की राय से आसानी से सहमत हो जाते हैं और इनमें आत्म-सम्मान बहुत कम होता है.

3. ऐसे लोग जो फ़ेसबुक का इस्तेमाल मनोरंजन के लिये करते हैं
शोध से पता चला है कि वो लोग जो फ़ेसबुक का इस्तेमाल सूचना के लिये करते हैं, जैसे ये जानना कि उन्हें छुट्टियों में कहां जाना चाहिये या कौन सी फ़िल्म देखनी चाहिये, वे भी दरअसल इसके आदी हो चुके होते हैं. आपको बता दें कि सोशल मीडिया अगर आपको वास्तविक दुनियां से काट रहा है तो ये आपके लिये ख़तरनाक हो सकता है क्योंकि ये वास्तविक जीवन-संबंधों का विकल्प नहीं हो सकता.

जरूरी हैं ये आर्थिक फैसलें

आने वाले कल की जरूरतों के लिए आपको आज से ही फाइनेंशियल प्लानिंग कर लेनी चाहिए. हर साल सैलरी में होने वाली बढ़ोत्तरी के साथ ही अगर आप अपने बढ़ापे को खुशहाल बनाने के लिए सेविंग में भी इजाफा करते रहते हैं तो काम न कर पाने की सूरत में आपको आर्थिक रुप से किसी के भी सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं होगी.

तमाम वित्तीय सलाहकार ऐसा सुझाव देते हैं कि हर किसी को 30 वर्ष का होने से पहले कम से कम 6 आर्थिक फैसले जरूर ले लेने चाहिए. कुछ ऐसे 6 आर्थिक फैसलें जो आपके बुढ़ापे में काम आएंगे.

बुढ़ापे के लिए पैसा जुटाना करें शुरू-

अगर आप चाहते हैं कि आपका बुढ़ापा बेहतर तरीके से बीते तो आपको 30 वर्ष की उम्र से पहले ही इसके लिए सेविंग की शुरुआत कर देनी चाहिए. जवानी की बचत बुढ़ापे का सहारा बनने में हमेशा मददगार होती है. कंपाउंड इंटरेस्ट के नजरिए से देखें तो अगर आप 30 की उम्र से पहले ही सेविंग की शुरुआत कर देते हैं तो इससे साल दर साल मिलने वाले ब्याज में भी लगातार इजाफा होता रहता है.

घर खरीदने की योजना-

अगर आप किसी पराए शहर में नौकरी करते हैं और वहां पर किराए के मकान में रह रहे हैं तो आपको 30 वर्ष की आयु से पहले ही उस शहर में मकान लेने की योजना बना लेनी चाहिए. या आप जिंदगी भर किराए के मकान में ही रहना चाहते हैं तो यह भी सुनिश्चित कर लें क्योंकि दोनों ही सूरत में आप पर वित्तीय बोझ पड़ना तय है. अगर आप खुद का मकान लेंगे तो आपको उसकी डाउन पेमेंट और हर महीने ईएमआई चुकानी होगी, वहीं किराए के मकान में भी हर साल आपको बढ़ा हुआ किराया देने के लिए तैयार रहना होगा. ऐसे में अगर इस सूरत से निपटने के लिए सेविंग की आदत डाल लेंगे तो आपके लिए बेहतर रहेगा.

इंश्योरेंस प्लान जरूरी-

नौकरीपेशा लोगों के लिए इंश्योरेंस प्लान लेना बेहद जरूरी होता है. बेहतर होगा कि 30 की उम्र से पहले आप कम से कम एक इंश्योरेंस प्लान अवश्य ले लें. इसके अपने अलग फायदे होते हैं. हालांकि आपको बीमा में पैसा लगाते समय हमेशा ख्याल रखना होगा कि बीमा एक खर्च है, निवेश कतई नहीं. हालांकि सिर्फ जीवन बीमा करवा लेना ही काफी नहीं है, इसीलिए जरूरी है कि आप मेडिकल इंश्योरेंस भी करवाएं. अगर आप ऐसा करवाते हैं तो किसी दुर्घटना की सूरत में आप पर अस्पताल एवं दवाइयों से जुड़े खर्चों का ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा.

आपातकालीन स्थिति की तैयारी-

आमतौर पर कुछ खर्चे अचानक से होते हैं. ये कुछ ऐसे खर्चे होते हैं जिन्हें आप चाहकर भी टाल नहीं पाते. किसी अचानक हुई बीमारी का इलाज और एक्सीडेंट होने की सूरत में अस्पताल में इलाज का खर्चा इत्यादि. ऐसी सूरतों से निपटने के लिए आपको अपने घर में एक आपातकालीन फंड बनाना चाहिए. आप यह सुनिश्चित करें कि इस फंड को छूना नहीं है, इसका इस्तेमाल सिर्फ आपातकालीन जरूरतों को पूरा करने के लिए ही किया जाना है. आप अपनी सालाना या मासिक सैलरी में से कुछ हिस्सा नियमित तौर पर इसमें जमा कर एक बड़ी रकम इकट्ठा कर सकते हैं जो जरूरत पड़ने पर आपके ही काम आएगी.

लक्ष्य निर्धारित करें-

नौकरीपेशा हैं और आपका मन किसी एक जगह डटकर काम करने का नहीं करता है तो आपको खुद पर रिसर्च करने की जरूरत है. आप खुद को समय दें और तय करें कि आपको करना क्या है. आपको उसी जगह और वही नौकरी करनी चाहिए जो आपको खुशी दे सके. इसके साथ ही आप उसी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा को निखारते हुए आगे बढ़ सकते हैं. ऐसा कर आप सेविंग के लिए खुद को तैयार भी कर पाएंगे.

बच्चों के बारे में भी सोचे-

अगर आप शादीशुदा हैं और एक बच्चे के पिता भी हैं, तो आपको 30 की उम्र से पहले ही बच्चे की पढ़ाई, उसके करियर और शादी से जुड़े खर्चों के लिए सेविंग की शुरुआत कर देनी चाहिए. अगर आप 30 की उम्र से पहले ही इस तरह की सेविंग समझदारी के साथ करना शुरू कर देते हैं तो आपको महंगी होती शिक्षा और तेजी से बढ़ती महंगाई के दौर में भी ज्यादा वित्तीय समस्याओं से नहीं जूझना पड़ेगा है.

सितंबर से बंद हो जायेगा मुफ्त में मिलने वाला ट्रैवल इंश्योरेंस

आप जब भी रेलवे की औनलाइन वेबसाइट irctc.co.in से कोई टिकट बुक करते हैं तो साथ में आपको एक ट्रैवल इंश्योरेंस भी मिलता है. लेक‍िन सूत्रों की मानें तो अब ये आपको रेलवे खुद नहीं देगा.

जी हां रेलवे सितंबर से ऑनलाइन टिकट बुक करने वालों के लिए बड़ा बदलाव करने जा रही है. अगले महीने से रेलवे फ्री में मिलने वाली यह सेवा बंद कर देगी.

सूत्रों के मुताबिक एक सितंबर से इंश्योरेंस लेना है या नहीं, ये पूरी तरह से आप पर निर्भर होगा. ई-टिकट बुक करने वाले पैसेंजरों के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस ऑप्शनल होगा.

इसका मतलब यह है कि 1 सितंबर से आप जो भी टिकट बुक करेंगे, तो आपको ‘ऑप्ट इन’ (च‍ाहिए) और ‘ऑप्ट आउट’ (नहीं चाहिए). दोनों विकल्पों में से एक चुनना होगा. उसी हिसाब से आपको प्रीम‍ियम की रकम भी भरनी होगी. हालांकि प्रीमियम की रकम कितनी होगी, इसको लेकर रेलवे ने कुछ भी फिलहाल साफ नहीं किया है.

भारतीय रेलवे की तरफ से मुहैया कराये जाने वाले इस इंश्योंरेंस में अध‍िकतम 10 लाख रुपये की राश‍ि म‍िलेगी. यह रकम यात्री की किसी दुर्घटना में मृत्यु होने पर दी जाती है. इसके अलावा अपंग होने वाले व्यक्त‍ि को 7 लाख रुपये की राश‍ि मिलेगी व घायल होने पर 2 लाख रुपये मिलेंगे.

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