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स्लिम दिखना है तो ये टिप्स आप के लिए ही हैं

फैट के कारण फिगर तो खराब होती ही है, हैल्थ पर भी इस का बुरा असर पड़ता है. बढ़ते फैट से शरीर के जो हिस्से सब से ज्यादा प्रभावित होते हैं, वे हैं पेट, कमर व जांघें. फैट को काबू में कर खोई फिटनैस दोबारा पाने के लिए अपनी लाइफस्टाइल और खानपान में ये बदलाव लाना जरूरी है:

– लो फैट डाइट स्नैक को अवौइड करें. ये सभी प्रीपैक्ड प्रोडक्ट होते हैं, जिन में भरपूर मात्रा में कैमिकल्स, रिफाइंड शुगर, साल्ट, प्रिजर्वेटिव्स मिलाए जाते हैं ताकि उस में फ्लेवर आ सके.

– जो भी खाएं फ्रैश खाएं. फिर चाहे वह फिश हो, अंडा हो, स्लाइस मीट हो या फिर ग्रिल्ड चिकन.

यदि पेट पर ज्यादा फैट जमा हो गया है और खाना भी सही समय पर नहीं पचता तो इन टिप्स को आजमाएं:

– ज्यादातर महिलाओं के सोने का तरीका हमेशा गलत होता है, जिस की वजह से भूख को नियंत्रित करने और पाचनक्रिया को ठीक रखने वाले हारमोन गड़बड़ा जाते हैं. यही वजह है कि जब वे थकी होती हैं तो बहुत ज्यादा भूख महसूस करती हैं और खूब खा लेती हैं, जिस की वजह से बेवजह फैट बढ़ता है. इसलिए रात को सोने से पहले चायकौफी न पीएं और अच्छी नींद के लिए कुछ रिलैक्सेशन जैसे लंबी गहरी सांसें लेना जैसी ऐक्सरसाइज करें और सही पोस्चर के साथ नींद लें.

– मैग्नीशियम से भरपूर हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं. नट्स और साबूत अनाज खाएं. मैग्नीशियम दिमाग को शांत रखता है और स्ट्रैस को रिलीज करता है, इसलिए अपने भोजन में मैग्नीशियम को जगह जरूर दें.

– बैलेंस डाइट और नियमित ऐक्सरसाइज करने से आप अपना वजन कंट्रोल कर सकती हैं.

– रोज एक ही तरह का भोजन न लें. उस में बदलाव करती रहें. यहां तक कि एक ही औयल लंबे समय तक यूज न करें. तेल का ब्रैंड बदलती रहें.

– डब्बाबंद जूस के बजाय घर पर ही फ्रैश गाजर, अनार, मौसंबी का जूस निकाल कर पीएं.

– पेट के निचले भाग के फैट को घटाने के लिए रोज 7-8 गिलास पानी पीएं. इस से शरीर की गंदगी बाहर निकलेगी और आप का मैटाबोलिज्म बढ़ेगा.

– भोजन में नमक की मात्रा कम करें.

– चीनी की जगह शहद का सेवन करें.

– सुबह की चाय या कौफी में दालचीनी पाउडर डाल कर शुगर को कंट्रोल कर सकती हैं.

– भूख लगने पर संतरे खाएं. इस से भूख भी खत्म होगी और आप मोटी भी नहीं होंगी.

– अपने दिमाग से यह निकाल दें कि जितनी ज्यादा ऐक्सरसाइज करेंगी उतनी जल्दी पतली होंगी. ज्यादा नहीं बल्कि सही ऐक्सरसाइज करनी जरूरी है.

– फैट कम करने के लिए सिर्फ ऐक्सरसाइज करना ही काफी नहीं है, बल्कि उस के साथ अपनी डाइट पर भी ध्यान देना जरूरी है.

– सुबह के नाश्ते में ओट्स विद वैजीटेबल आप के लिए सब से अच्छा नाश्ता है, क्योंकि इससे पेट भी भरेगा और बहुत सा फाइबर भी बौडी में जाएगा.

ब्रेकअप के बाद जब उस की याद सताए, तो ये टिप्स आजमाएं

स्वधा का अपने बौयफ्रैंड राहुल से ब्रेकअप हुए कई महीने हो चुके हैं पर वह अभी भी उस के बारे में ही सोचती रहती है. वह राहुल को अभी तक अपने दिमाग से नहीं निकाल पाई.

स्वधा का कहना है, ‘‘हर सुबह जब मैं सो कर उठती हूं, पहला खयाल मुझे राहुल का ही आता है. फिर याद आता है कि अब हम साथ नहीं हैं और मैं रोने लगती हूं. तब मैं उस का इंस्टाग्राम पेज देखती हूं. उसे अपने जीवन में आगे बढ़ते देखती हूं, तो और ज्यादा दुख होता है. मेरी फ्रैंड्स मुझे भी आगे बढ़ने के लिए कहती हैं पर मैं क्या करूं. वह हर समय मेरे दिमाग में रहता है. उस के बिना मुझे चैन ही नहीं है.’’

कई महीनों के बाद भी स्वधा इस ब्रेकअप से बाहर नहीं आ पाई है. हम में से कई लोग ब्रेकअप के बाद भी अपने एक्स को भुलाने के लिए संघर्ष करते हैं. जिस व्यक्ति को चोट पहुंची हो, जिस ने दिल तोड़ा हो उस से रिश्ता टूटने के बाद भी उसी के बारे में सोचते हैं, उस की इतनी ज्यादा जरूरत महसूस करते हैं कि बारबार उस के मैसेज, फोटो देखते हैं. ऐसा लगता है कि हम उस के बिना कुछ नहीं.

प्यार भी नशा है

रिसर्च बताती है कि प्यार का भी नशे की तरह दिमाग पर प्रभाव होता है. जब कोई रोमांटिक रिश्ता खत्म होता है, तब वैसा ही असर होता है जैसा हेरोइन या कोई और नशा ले रहे व्यक्ति का तब होता है जब वह अचानक कोई नशा लेना बंद करता है.

स्वधा का मस्तिष्क भी वैसी ही प्रतिक्रिया दे रहा था जैसा किसी नशाखोर का देता है, क्योंकि स्वधा को अपना एक्स (जैसे हेरोइन) मिल नहीं पा रहा था. वह खुद को उस की यादों में ही जकड़ कर रख रही थी. ये यादें थोड़े समय के लिए ही उसे आराम पहुंचा सकती थीं, पर एक्स से मिलने के लिए उस की इच्छा को और बढ़ा रही थीं.

हार्टब्रेक एक ऐसा नशा है, जिस से छुटकारा पाना आसान नहीं. हार्टब्रेक से उबरना वैसा ही है जैसे ड्रग्स, सिगरेट, अलकोहल या जुआ खेलना जैसी लतों से छुटकारा पाना. आप का दिमाग आप पर उस नशे या उस व्यक्ति या फिर उस ऐक्टिविटी से संपर्क रखने का प्रैशर बनाता है. आप को उस से उबरने के तरीके ढूंढ़ने ही होंगे:

– अपने एक्स को अपने दिमाग से निकालने के लिए कौंटैक्ट के सारे रास्तों को बंद कर दें, अपने फोन से उस का नंबर डिलीट कर दें, अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर उसे ब्लौक कर दें.

– ब्रीदिंग ऐक्सरसाइज पर बहुत ध्यान दें. तब तक मैडिटेट करें जब तक आप उस तक पहुंचने की इच्छा काबू में नहीं कर लेतीं. ऐसी इच्छाएं कुछ ही पलों में खत्म भी हो जाती हैं.

– खुद को बिजी रखें. अपनी सोच का रुख एक्स से हटा कर किसी और दिशा में मोड़ कर इतनी व्यस्त हो जाएं कि उस के लिए सोचने का समय ही न रहे. जो आप कर सकती हैं, जो करने में आप माहिर हैं वही करना इस समय सब से अच्छा रहता है.

– बीचबीच में भी अपने एक्स के साथ अच्छे समय में खींची गई तसवीरें न देखें. इस से आप आगे नहीं बढ़ पाएंगी. फिर एक्स के पास ही जाने की इच्छा बढ़ती रहेगी जो आप के लिए सही नहीं होगा.

– जब आप साथ थे, आप का एक्स आप के लिए खुशी और सेफ्टी का कारण था. अब वह समय बीत चुका है. अब उस ने आप का दिल तोड़ा है. अब वह कुछ और है-एक नशा. इस नशे से दूर रहें. अब इस से आप को कोई खुशी नहीं मिल सकती.

हार्टब्रेक से उबरने का रास्ता यही है कि आप समझ लें कि आप को अपने एक्स का नशा है और आप को इस नशे की लत से छुटकारा पाना ही है. एक्स को अपने दिमाग से निकालने के लिए वैसी ही दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है जैसीकि और नशों से छुटकारा पाने के लिए होती है. मजबूत बनें, पक्का इरादा रखें और आगे बढ़ें. जीत आप की ही होगी.

हमदर्द (अंतिम भाग) : कावेरी की जिंदगी में शेष रह ही क्या गया था

पूर्व कथा

पति की मृत्यु के बाद एकमात्र सहारा बचा था, बिल्लू. बेटे को पालपोस कर बड़ा करना यही एकमात्र ध्येय रह गया था कावेरी के लिए.

लेकिन ज्योंज्यों बिल्लू बड़ा होता गया कावेरी ने महसूस किया कि उस के मन में मां के लिए कोई लगाव, प्यार नहीं है.

बेटा जैसा भी व्यवहार करे लेकिन मां होने के नाते वह उस का बुरा सोच भी नहीं सकती थी. अब मन में यही आशा शेष बची थी कि बहू के आने से शायद उस के घर की वीरानी दूर हो जाएगी लेकिन उस पर तब वज्रपात हुआ जब बिल्लू ने बताया कि वह कोर्ट मैरिज कर के बहू घर ला रहा है. घर की नौकरानी जशोदा जो कावेरी का पूरा ध्यान रखती थी, वह भी बिल्लू के इस रवैए को गलत ठहराती है.

बिल्लू अपनी नवब्याहता को घर लाता है. जींस टीशर्ट पहने बहू अनजान सी कमरे में घुस जाती है. कावेरी हैरान होती है कि किस तरह की लड़की है. तमीज, संस्कार कुछ भी नहीं हैं. रोज बेटाबहू नाश्ता करते और आफिस निकल जाते.

अब आगे…

सासबहू दोनों उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के निवासी हैं तो निकटता आएगी कहां से? जो भी हो समय रुकता नहीं, हर रात के बाद तारीख बदलती है और हर महीने के बाद पन्ना पलट जाता है. कलर बदल कर दूसरा लगा और उस के भी कई पन्ने बदल गए. तभी अचानक एक दिन कावेरी को लगा कि कहीं कुछ गड़बड़ है. जो गाड़ी सीधी सपाट पटरी पर दौड़ रही थी वह अब झटके खाने लगी है.

जशोदा कमरे में थाली दे आती है. बेटा तो अब भी घूमने निकल कर जाता तो रात में खा कर आता है पर बहू घर में ही रहती है. कभीकभार गई तो जशोदा से बोल जाती है कि उस का खाना न रखे. बहू में कोई भी अच्छाई नहीं थी, औरतों में जो सहज गुण होते हैं वह भी उस में नहीं थे पर एक बात अच्छी थी जो कावेरी को पसंद थी. वह यह कि बहू बहुत मीठा बोलती थी. एक तो वह बोलती ही कम थी, कभी पति या जशोदा से बोली भी तो इतनी धीमी आवाज में कि अगले को सुनने में कठिनाई हो. पर अब कभीकभी बंद दरवाजे के उस पार से उस की आवाज बाहर आ कर कावेरी के कानों से टकराती. शब्द तो समझ में नहीं आते पर वह उत्तेजित है, गुस्से में है यह समझ में आता है. यह झल्लाहट भरा स्वर सीधेसीधे मनमुटाव का संकेत है. कावेरी इतना अवश्य जान जाती.

कावेरी चिंता में पड़ गई. शादी को थोड़े दिन ही हुए हैं और अभी से आपसी झगड़ा. यह कोई अच्छी बात तो नहीं है. बेटा बदमिजाज के साथ स्वार्थी भी है यह तो जानती है पर मां के साथ जैसा किया वैसा पत्नी के साथ नहीं चल सकता, इतनी सी बात वह न समझे इतना तो मूर्ख नहीं.

अरे, मां से जन्म का बंधन है, हजार अपमान सह कर भी बेटे को छोड़ कर जाने के लिए उस के पैर नहीं उठेंगे लेकिन पत्नी तो औपचारिकता के बीच बंधा रिश्ता है, जब चाहे तोड़ लो. उस पर अपना रौबदाव चलाने का प्रयास करेगा तो वह क्यों सहेगी, उस पर बराबर की कमाने वाली पत्नी.

गलती बहू की ही है यह कौन जाने? और जान कर होगा भी क्या? उन का जीवन वे जी रहे हैं, अपना जीवन कावेरी जी रही है. यही तर्क दे कर अपने मन को शांत करती. पर यह एक कांटा उस के मन को चुभता रहता कि पल्ला झाड़ लेने से समस्या का समाधान नहीं होता…बहू सुंदर एकदम नहीं, उसे पसंद भी नहीं, चेहरामोहरा जैसा भी हो कावेरी को उस की आंखें पसंद थीं. बड़ीबड़ी 2 उजली आंखों में जीवन का सपना भरा रहता था. अब वह आंखें बुझीबुझी सी हो गई हैं. ऐसा क्यों हुआ? यह तो प्रेमविवाह है. एकदूसरे को जांचपरख, समझबूझ कर दोनों विवाह तक पहुंचे हैं. थोपी हुई शादी नहीं थी कि एकदूसरे को समझने का अवसर नहीं मिला. फिर ऐसा क्यों हुआ? 2 साल भी नहीं हुए एकदूसरे के प्रति आकर्षण ही समाप्त हो गया. अभी तो सामने पूरा जीवन पड़ा है. ऐसे क्या ये सारा जीवन काटेंगे. अपनीअपनी धुन पर चलने लगे तो जीवन की गाड़ी चलेगी कैसे? विराग, विद्वेष का कारण क्या है पता चले तो समझाया भी जा सकता है पर अंधेरे में वह तीर चलाएगी किधर?

जशोदा से कुछ कहना बेकार है. वह तो पहले से ही जलीभुनी बैठी है. रोज एक बार यह जरूर कहती है कि आंटी, इन को अपने घर से भगाओ. इन से तो किराएदार भले जो किराया भी देंगे, देखभाल भी करेंगे.

पहले ही दिन से उस ने बहू से एक दूरी बना ली थी और उसे बराबर बना कर रखा था. सोचा था नई बहू है, दूरी को मिटाने के लिए पहल करेगी पर नहीं, अब तक उस ने दूरी मिटाने की पहल करना तो दूर उस दूरी की दीवार पर पक्के पलस्तर की परत चढ़ा दी. लेकिन हालात ने करवट ली, बहू की दूरी मिटाने के लिए उसी को पहल करनी पड़ी. वह रोज सुबह पार्क से घंटे भर में टहल कर लौट आती है पर उस दिन पार्क के लिए श्रमदान का कार्यक्रम चल रहा था इसलिए लौटने में 3 घंटे लग गए. घर के अंदर पैर रखते ही मन धक्क सा कर उठा, एक अनजान आशंका से पीडि़त हो उठी वह. वैसे तो उस का घर शांत ही रहता है पर आज उसे घर के अंदर अजीब सा सन्नाटा लगा.

बेटे के कमरे का दरवाजा पूर्व की भांति बंद है पर जशोदा का पता नहीं कि वह कहां है.

पहले कावेरी ने कमरे में जा कर कपड़े बदले फिर चाय के लिए जशोदा को खोजती हुई पीछे के बरामदे में आई तो देखा जशोदा वहां छोटी चौकी पर सिर पकड़े बैठी थी. उसे देखते ही वह रो पड़ी, ‘‘घर बरबाद हो गया, मांजी.’’

सन्न रह गई कावेरी.

‘‘क्या हुआ? रो क्यों रही है?’’

‘‘भैया घर छोड़ गया.’’

‘‘क्या? क्या दोनों चले गए?’’

‘‘नहीं…केवल भैया गया है. वह रानीजी तो कमरे में सो रही हैं. आंटी, आप के जाने के बाद दोनों में खूब झगड़ा हुआ. भैया अपने कपड़े 2 अटैचियों में भर कर गाड़ी स्टार्ट कर चला गया.’’

अब कावेरी भी उसी चौकी पर बैठ गई.

‘यह घटना तो सोच के बाहर की है. पढ़ने, सुनने और देखने में यही आता है कि बहू को घर से निकाला गया है पर पत्नी को घर में रख कर पति घर छोड़ गया, ऐसी घटना तो कभी देखी या सुनी नहीं.’ जशोदा चाय का पानी रखते हुए बड़बड़ा रही थी, ‘बेचारा करेगा भी क्या? यह औरत है ही पूरी मर्दमार.’

कावेरी ने डांटा, ‘‘चुप कर. यह मर्दमार हो या न हो पर वह पूरा शैतान है.’’

‘‘यह उस का घर है, वह क्यों जाएगा घर छोड़ कर. तुम इसे निकालो घर से तब भैया लौटेगा. न रंग, न रूप, न अदब न कायदा…आसमान पर पैर धर कर चलती है.’’

‘‘अब तू चुप भी करेगी या नहीं? कुछ खाया इन लोगों ने?’’

‘‘नहीं, पहले लड़ते रहे फिर भइया चला गया.’’

‘‘चाय बना कर खाना तैयार कर. 11 बजने को हैं. चाय 2 कप बनाना.’’

टे्र में 2 प्याली चाय ले कर कावेरी अंदर आई और स्टूल पर टे्र रख दी. कावेरी को देखते ही रीटा ने सिर झुका लिया. आज कावेरी ने इतने दिनों में पहली बार बहू को नजर भर देखा. इतने दिन मन में इतना विराग था कि मुंह देखने की इच्छा ही नहीं हुई. आज मैक्सी पहने, सिर झुका कर बैठी बहू बड़ी असहाय और मासूम लग रही थी. कावेरी के मन में टीस उठी. कुछ  भी हो, कैसे भी घर की बेटी हो पर उस का बेटा इसे पत्नी का दर्जा दे कर घर लाया है, उस की पुत्रवधू है और यह परिचय समाज ने स्वीकार भी कर लिया है तो कितनी भी अलगथलग रहे, है तो उस के परिवार का हिस्सा ही…और चूंकि वह इस परिवार की मुखिया है तो परिवार के हर सदस्य के सुखदुख का दायित्व उस का ही है.

कावेरी ने पहली बार बहू के सिर पर अपना हाथ रखा और नरम स्वर में बोली, ‘‘चाय पी लो, बेटी.’’

उस की आंखें डबडबा गईं. रुलाई रोकने के लिए दांतों तले होंठ दबाया, पर चाय उठा ली और धीरेधीरे पीने लगी. कावेरी ने अपना कप उठा लिया और उस के पास बिस्तर पर बैठ गई और बहू की तरह पैर लटका कर वह भी चाय पीने लगी. चाय समाप्त कर दोनों ने कप टे्र में रख दिए. तब कावेरी बोली, ‘‘बताओगी कि तुम दोनों का झगड़ा क्या है?’’

यह सुन कर उस का सिर और झुक गया.

‘‘चिंता मत करो,’’ कावेरी ने बहू को समझाते हुए कहा, ‘‘ऐसा कभीकभी हो जाता है. बिल्लू को गुस्सा जल्दी आता है तो उतर भी जल्दी जाता है. देखना कल ही आ जाएगा.’’

वह इतना सुन कर सुबक उठी और बोली, ‘‘अब वह नहीं आएगा.’’

‘‘ऐसा क्यों कह रही हो?’’ चौंकी कावेरी, ‘‘लौटेगा क्यों नहीं?’’

‘‘झगड़ा तलाक को ले कर हो रहा था.’’

‘‘तलाक, पर क्यों?’’

‘‘वह मांग रहा था और मैं दे नहीं रही थी इसलिए.’’

‘‘क्या कह रही हो? तुम दोनों ने तो अपनी पसंद से शादी की थी. क्या तुम्हारे बीच प्यार नहीं था?’’

‘‘प्यार तो था तभी तो भरोसा किया था. पर उस के आफिस में एक नई रिसेप्शनिस्ट आई है और अब बिल्लू उसे पसंद करने लगा है. कह रहा था कि मुझ से तलाक ले कर उस से शादी करेगा.’’

यह सुन कर जलभुन गई कावेरी.

‘‘शादी मजाक है क्या और मेरा घर भी होटल नहीं कि जब जिसे चाहे ले कर आ जाए. अब गया कहां है.’’

‘‘तलाक नहीं मिला तो किराए पर एक फ्लैट लिया है. वे दोनों वहीं लिव टू गेदर करेंगे.’’

कावेरी के पैरों के नीचे से धरती खिसक गई.

‘‘बिना विवाह किए ही साथ रहेंगे?’’

‘‘आजकल बहुत से युवकयुवतियां इस तरह साथ रह रहे हैं.’’

दोनों देर तक चुप रहीं. फिर रीटा बोली, ‘‘आप से एक प्रार्थना है.’’

‘‘बोलो.’’

‘‘आप मां हैं पर मैं ने आप को कभी सम्मान नहीं दिया. मां कहने का अधिकार भी नहीं लिया पर आप से विनती है कि कुछ दिन मुझे अपने घर रहने देंगी?’’

‘‘यह…यह तुम क्या कह रही हो?’’

‘‘मांजी, मेरे पास रहने के लिए कोई जगह नहीं है. खोजने में थोड़ा समय लगेगा…तब तक…’’

‘‘तुम्हारे मातापिता?’’ कावेरी ने बीच में उस की बात काटते हुए पूछा.

‘‘मैं अनाथ आश्रम में पली हूं. मातापिता कौन हैं? हैं भी या नहीं, मुझे नहीं पता. आश्रम अच्छे स्तर का था. मैं पढ़ने में बहुत अच्छी थी तो ट्रस्ट ने मुझे पढ़ाया. स्कालरशिप भी मिलती थी. बी.एससी. के बाद कंप्यूटर की डिगरी ली. चाहती थी डाक्टर बनना पर ट्रस्ट ने इतनी लंबी पढ़ाई की जिम्मेदारी नहीं ली. इस के बाद मुझे यह नौकरी मिल गई. मुझे 20 हजार रुपए तनख्वाह मिलती है सो कहीं भी किराए पर घर ले सकती हूं पर डर लगता है सुरक्षा कौन देगा. मैं लड़कियों के किसी होस्टल की तलाश में हूं, मिलते ही चली जाऊंगी. बस, तब तक…’’

‘‘कैसी बातें कर रही हो. तुम इस घर में ब्याह कर आई हो. इस घर की बहू हो तो मेरे रहते तुम अकेले किराए के घर में रहोगी?’’

इतनी देर में झरझर रो पड़ी रीटा. कावेरी का मन ममता से भर उठा. उसे लगा कि वह उस की अपनी बेटी है. उस ने रीटा को स्नेह से सीने से लगा लिया और बोली, ‘‘रोना नहीं. कभी मत रोना. आंसू औरत को कमजोर करते हैं और कमजोर पर पूरी दुनिया हावी हो जाती है, चाहे वह पति हो या बेटा. मैं तुम्हारे साथ हूं. तुम मेरे पास ही रहोगी, कहीं नहीं जाओगी.’’

रीटा ने आंसू पोंछे और बोली, ‘‘अगर बिल्लू लौट आया और घर छोड़ने को बोला तो?’’

‘‘बेटी, यह घर मेरा है, उस का नहीं. इस में कौन रहेगा कौन नहीं रहेगा इस का फैसला मैं करूंगी. हां, शराफत के साथ लौटे और हमारे साथ समझौता कर के रहना चाहे तो वह भी रहे.’’

‘‘मांजी, मैं उसे कभी तलाक नहीं दूंगी, यह तो तय है.’’

‘‘कभी मत देना. देखो, उस ने मेरा बहुत अपमान, अनादर किया है पर मैं ने उसे घर से नहीं निकाला. जानती हो क्यों? वह इसलिए कि 2 प्राणियों का परिवार, एक गया तो बचेगा क्या? अब वह खुद घर छोड़ गया है. अब लौटना है तो हमारी शर्तों पर लौटेगा नहीं तो जाए.’’

‘‘पर वह जबरदस्ती…’’

‘‘घर में फोन है और पुलिस थाना भी दो कदम पर है. चलो उठो, नहाधो कर खाना खाओ.’’

रीटा अपनी सास से लिपट गई. आज उसे पहली बार महसूस हुआ कि मां का प्यार व स्नेह क्या होता है.

सर्विस सेंटर पर मोबाइल देते समय ध्यान रखें ये 5 बातें

कई बार हमारे मोबाइल फोन में दिक्कत आ जाती है. ऐसे में हम सर्विस सेंटर की ओर दौड़ पड़ते हैं लेकिन ऐसा करते समय हम कुछ गलतियां कर बैठते हैं जो हमें नहीं करनी चाहिए. आज हम इसी मुद्दे पर बात करेंगे कि सर्विस सेंटर पर मोबाइल को देने से पहले किन-किन बातों को ख्याल रखना चाहिए.

औथराइज्ड सर्विस सेंटर

सबसे पहले इस बात को सुनिश्चित करें कि जिस सर्विस सेंटर पर आप फोन देने जा रहे हैं वह औथराइज है या नहीं, कहीं ऐसा तो नहीं है कि उसने औथराइज सेंटर का फर्जी बोर्ड लगा रखा है. कई बार बड़े-बड़े बाजार में लोकल सर्विस सेंटर वाले औथराइज सर्विस सेंटर का बोर्ड लगा देते हैं. तो ऐसे में जिस कंपनी का फोन की उसकी वेबसाइट या टौल फ्री नंबर पर फोन करके आप सर्विस सेंटर की जानकारी ले सकते हैं.

लिस्ट बनाकर ले जाएं

कई बार फोन में कई प्रकार की दिक्कतें आती हैं, लेकिन सर्विस सेंटर पर जाने के बाद हम उन्हें भूल जाते हैं, इसलिए घर से ही लिस्ट बनाकर सर्विस सेंटर्स पर ले जाएं ताकि कोई जरूर बात छूट ना जाए.

डाटा का बैकअप लें

सर्विस सेंटर पर मोबाइल जमा करने से पहले फोन में मौजूद एक-एक फोटो, नंबर और अन्य चीजों का बैकअप लें. बैकअप आप अपने दूसरे फोन, लैपटौप, हार्ड डिस्क, मेमोरी कार्ड या गूगल ड्राइव या फिर मोबाइल कंपनी के क्लाउड पर ले सकते हैं. क्योंकि सर्विस सेंटर्स से आपका निजी डाटा सार्वजनिक हो सकता है, साथ ही डिलीट भी हो सकता है.

सिम कार्ड, मेमोरी कार्ड और बैटरी अपने पास रखें

सर्विस सेंटर पर हम कई बार जल्दबाजी में सिम कार्ड और मेमोरी कार्ड को छोड़ आते हैं जो कि गलत है. जहां तक बैटरी का सवाल है तो आजकल नौन-रिमूवेबल बैटरी आ रही हैं. सिम छोड़ने का मतलब सर्विस सेंटर वालों को तिजोरी की चाबी देना है.

पक्का बिल लें

सर्विस सेंटर वाले कई बार साफ्टवेयर अपडेट कर देते हैं और आपसे पार्ट्स बदलने का पैसा ले लेते हैं. ऐसे में उनसे पार्ट्स बदलने का पक्का बिल मांगें और साथ ही खराबी का कारण पूछें.

म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले रखें इन बातों का ख्याल

सही प्रकार के म्यूचुअल फंड का चयन करना संपत्ति बनाने की दिशा में पहला कदम है. कई फंड कैटेगरी और भरपूर विकल्प उपलब्ध होने के कारण आप फैसले को लेकर दुविधा में पड़ सकते हैं. देखने पर सभी फंड एक समान और आकर्षक नजर आते हैं.

व्यापक रूप से देखें तो म्यूचुअल फंड को तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है यानी इक्विटी, ऋण और हाइब्रिड में. प्रत्येक श्रेणी एक विशिष्ट लक्ष्य को पूरा करने के लिए है. इसके अलावा प्रत्येक फंड से निवेशक के लिए विभिन्न निहितार्थ होते हैं. आपको केवल फंड की सही श्रेणी में आने के लिए इन तीन मूलभूत सवालों के जवाब तलाशना है.

वित्तीय लक्ष्य

निवेश हमेशा लक्ष्य के अनुरूप होना चाहिए. म्यूचुअल फंड का चयन करने से पहले आपको खुद से पूछना होगा “म्यूचुअल फंड में निवेश के पीछे मेरा मूल उद्देश्य क्या है?”. एक निवेशक विभिन्न वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए म्यूचुअल फंड का उपयोग कर सकता है. सबसे लोकप्रिय लक्ष्य जिसके लिए निवेशक म्यूचुअल फंड का उपयोग करते हैं, उनमें रिटायरमेंट की प्लानिंग, इमरजेंसी फंड बनाने, छुट्टियों पर जाने, घर / कार खरीदने, बच्चों की उच्च शिक्षा की वित्तीय जरूरतें, शामिल हैं.

यदि आप बारीकी से देखें तो प्रत्येक लक्ष्य को उपलब्धि के लिए अलग-अलग राशि की आवश्यकता होती है. तद्नुसार, इस तरह का कार्पस जमा करने के लिए रिटर्न रेट अलग-अलग लगेगा. यदि आपको भविष्य में घर खरीदने के लिए एक बड़ा कार्पस चाहिए, तो इक्विटी फंड डेट फंड से अधिक उपयुक्त होगा. ऋण / हाइब्रिड फंड की तुलना में इक्विटी फंड लंबे समय तक उच्च रिटर्न देते हैं.

इसी प्रकार यदि आप एक इमरजेंसी फंड बनाना चाहते हैं तो यह निकटतम लक्ष्य ही होगा. इसके अतिरिक्त इसे हासिल करने में आवश्यक राशि घर खरीदने के लिए आवश्यक राशि से कम होगी. यहां आपका उद्देश्य हाई रिटर्न पर इन्वेस्टमेंट की सुरक्षा होगा. इस वजह से आप आसानी से ऋण फंड में निवेश कर सकते हैं जो आपको बचत बैंक खाते में अपने धन को रखने की तुलना में बेहतर रिटर्न देगा.

कितना जोखिम उठाया जा सकता है?

जोखिम उठाने का मतलब है “निवेशक फंड मूल्य में कितना परिवर्तन सहन कर सकता है”. इसे किसी व्यक्ति की जोखिम सहनशीलता भी माना जा सकता है. इसमें जोखिम लेने की इच्छा और उसकी क्षमता शामिल है. इच्छा एक व्यवहारिक पहलू है जबकि क्षमता वित्तीय पहलू से जुड़ी है. आप जोखिम लेने के इच्छुक हो सकते हैं, लेकिन यदि आपके पास इसे लेने की क्षमता नहीं है, तो यह आपके जोखिम की सहनशीलता नहीं बनती है. इसके अलावा उम्र और जीवन-चरण के साथ एक व्यक्ति की जोखिम सहनशीलता बदलती जाती है.

आदर्श परिस्थिति में युवा निवेशकों को मध्यम आयु वर्ग के निवेशक की तुलना में अधिक जोखिम की सहनशीलता ज्यादा होती है. इसी तरह किसी ऐसे व्यक्ति जिस पर कुछ लोग आश्रित हैं, के मुकाबले ऐसे युवा जिस पर कोई आश्रित नहीं है, जोखिम सहनशीलता कम होगी.

फंड का चयन अंततः आपकी जोखिम सहनशीलता पर निर्भर करता है. मोटे तौर पर जोखिम की सहनशीलता के आधार पर तीन निवेशक श्रेणियां होती हैं- अर्थात संरक्षणवादी, मध्यम और आक्रामक. संरक्षणवादी निवेशकों के लिए ऋण फंड उपयुक्त निवेश साधन हैं जो पूंजी की सुरक्षा के साथ मध्यम रिटर्न देते हैं.

आक्रामक निवेशक इक्विटी फंड और संबंधित उप-श्रेणियों को चुन सकते हैं जो उच्च जोखिम पर उच्च रिटर्न देते हैं. अपेक्षाकृत कम जोखिम लेने वाले तुलनात्मक रूप से कम जोखिम के साथ शेयर मार्केट को खंगालना चाहते हैं, वे हाइब्रिड/संतुलित फंड्स में पैसा लगा सकते हैं.

निवेश परिदृश्य क्या है?

निवेश परिदृश्य उस समयावधि से संबंधित है जिसके लिए एक निवेशक म्यूचुअल फंड में निवेश करना पसंद करता है. यह निवेशक के लक्ष्य पर निर्भर करता है. एक निवेश परिदृश्य अल्पकालिक, मध्यवर्ती और दीर्घकालिक हो सकता है. जिन लक्ष्यों को 1 से 3 वर्षों के भीतर हासिल किया जा सकता है जिन्हें अल्पकालिक लक्ष्यों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है. जिन लक्ष्यों को 3 से 7 साल की आवश्यकता होती है उन्हें मध्यवर्ती लक्ष्यों के तहत वर्गीकृत किया जाता है. हालांकि, जिन लक्ष्यों को सेवानिवृत्ति योजना या घर खरीदने जैसे 7 से अधिक वर्षों की आवश्यकता होती है उन्हें दीर्घकालिक लक्ष्यों के तहत वर्गीकृत किया जाता है.

म्यूचुअल फंड की पसंद आपके निवेश परिदृश्य के अनुसार बदलती है. लिक्विडिटी फंड जैसे ऋण फंड अल्पकालिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उपयुक्त हैं. बैलेंस्ड / हाइब्रिड फंड कार खरीदने जैसे मध्यवर्ती लक्ष्यों के लिए अधिक उपयुक्त हैं. इक्विटी फंड की मदद से सेवानिवृत्ति योजना जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है.

सलमान ने यूं सिखाई भांजे को पेंटिंग, वीडियो देख आ जाएगी हंसी

सलमान खान अपनी बहन अर्पिता के बेटे से खास बौन्डिंग रखते हैं. फ्री टाइम मिलने पर वह अपने भांजे आहिल से मिलने जरूर जाते हैं और उसके साथ क्वालिटी टाइम बिताते हैं. इस बार जब वह आहिल से मिलने गए तो उन्होंने अपने भांजे को कैनवस पर पेंटिंग करना सिखाया. लेकिन इस दौरान जो हुआ उसे देख आपको भी हंसी आ जाएगी.

सलमान की बहन अर्पिता खान शर्मा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें उनके बेटे आहिल अपने मामा यानी सलमान के साथ पेंटिंग करते नजर आ रहे हैं. वीडियो शेयर करते हुए अर्पिता ने लिखा, “कैनवस पर आहिल की पहली पेंटिंग अपने मामू के साथ.” आपको बता दें कि सलमान खान अपनी पेंटिंग के शौक के लिए भी जाने जाते हैं. उनका यह हुनर कई बार फैंस को हैरान कर चुका है.

वीडियो में सलमान आहिल से अपने ही खास अंदाज में पेंटिंग करवाते और खेलकूद करते नजर आ रहे हैं. विडियो की शुरुआत कैनवस पर बिखरे रंगो से होती है और फिर नन्हे आहिल पर कैमरा जाता है जो कैनवस पर बैठे हुए ब्रश थामा हुआ है. उसके कपड़ों से लेकर हाथ और पैरों में भी रंग लगे हुए हैं. सलमान अपने भांजे की मदद करते हुए उसे उठाते हैं और रंग लगे पैरों को कैनवस पर छापते जाते हैं. इसके बाद वह जमीन पर लेटकर आगे खिसकते हुए आहिल को भी कैनवस पर ऐसा ही करने को कहते हैं. उन्हें ऐसा करते देख आपको भी हंसी आना तय है.

 

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गौरतलब है कि पहले भी सलमान और आहिल की ऐसी क्यूट तस्वीरें और वीडियो सामने आती रही हैं. लेकिन ऐसा पहली बार है जब मामू और भांजे एक साथ पेंटिंग करते नजर आए हैं. पूरे विडियो में सलमान अपने भांजे को मोटिवेट करते दिख रहे हैं. आहिल भी उनकी कंपनी इंजाय करता नजर आता है. आखिर में आहिल कैनवस पर गिरता है और फिर उसकी पहली पेंटिंग पूरी हो जाती है

ये हैं 10 सबसे पावरफुल हैकिंग ऐप्स

एंड्रॉयड और पीसी यूजर्स के पास कई ऐप्स इंस्टॉल करने की सुविधा होती है, लेकिन कई ऐप्स इतने पावरफुल और खतरनाक होते हैं कि लोगों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं. हम आपको बताने जा रहे हैं टॉप 10 हैकिंग ऐप्स के बारे में. कौन से हैं ये ऐप्स…

इनमें से कई ऐप्स गूगल प्ले पर भी नहीं हैं और कुछ कम्प्यूटर पर काम करते हैं.  इन ऐप्स के गलत इस्तेमाल से आपका डिवाइस भी हैक हो सकता है.

 1. WIFI WPS WPA TESTER

इस ऐप को खास तौर पर सिक्युरिटी और टेस्टिंग के लिए बनाया गया था. ये ऐप ये बताता है कि किस नेटवर्क की सिक्युरिटी कम है और किसकी ज्यादा. वाई-फाई नेटवर्क जो ग्रीन सिग्नल दिखाते हैं उन्हें हैक किया जा सकता है. ये बहुत पावरफुल ऐप है. इसे कोई भी इस्तेमाल कर सकता है जिसके पास एंड्रॉयड फोन हो.

2. Androrat

ये ऐप रिमोट एप्लिकेशन टूल है. ये जावा एंड्रॉयड बेस्ड एप्लिकेशन रिमोटली किसी एंड्रॉयड फोन के कॉन्टैक्स, कॉल लॉग, मैसेज, GPS लोकेशन, फोटो, वीडियो स्ट्रीमिंग जैसे काम करने में मदद कर सकता है. इस ऐप को यूनिवर्सिटी लेवल पर प्रोजेक्ट के तौर पर बनाया गया था. इसे एथिकल हैकिंग ऐप भी कहा जाता है, लेकिन अगर इसका गलत इस्तेमाल किया गया तो ये किसी की जानकारी चुराने के भी काम आ सकता है.

3.  DroidBox

ड्रॉइड बॉक्स एक ऐसा ऐप है जो बाकी एंड्रॉयड ऐप्स को टेस्ट करने के लिए बनाया गया है. इस ऐप से SMS, कॉल डिटेल्स, ऐप डिटेल्स आदि का पता लगाया जा सकता है. इस ऐप में ग्राफ की तरह डाटा शो किया जाता है.

4. Burp Suite

इस ऐप का काम वेब एप्लिकेशन की सिक्युरिटी टेस्टिंग करना है. इसे खास तौर पर सिक्युरिटी के लिए बनाया गया है. इस ऐप के जरिए इंटरनेट हैकिंग भी की जा सकती है. अगर आप एथिकल हैकर हैं तो ये ऐप काम का साबित हो सकता है.

5. Hackode

इस ऐप को हैकर्स टूलबॉक्स कहा जा सकता है. इस ऐप को टेस्टिंग के लिए भी बनाया गया है. अगर आप एथिकल हैकर हैं या IT एडमिनिस्ट्रेशन पर काम करते हैं तो ये ऐप काम का साबित हो सकता है. इससे एडमिन यूजर नेम और पासवर्ड हैक किया जाता है. अगर आप एथिकल हैकर हैं तो ये आपके काम का साबित हो सकता है, लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो इस ऐप से थोड़ा सावधान रहने की भी जरूरत है.

6. zANTI

बाकी ऐप्स की तरह इस ऐप को भी एक सिक्युरिटी ऐप की तरह बनाया गया है. इस ऐप के जरिए पेनेट्रेशन टेस्ट (किसी अन्य नेटवर्क में बिना यूजर आईडी पासवर्ड या ऑथेंटिक परमीशन के घुसना) के लिए है. अगर इसका इस्तेमाल कुछ लोग वाई-फाई पासवर्ड हैकिंग के लिए भी करते हैं. इस ऐप के इस्तेमाल से ये भी पता लगाया जा सकता है कि कौन सा नेटवर्क कितना सेफ है.

7. Droid Sheep

इस ऐप का इस्तेमाल कोई भी आसानी से कर सकता है जिसके पास कोई एंड्रॉयड डिवाइस है. इस ऐप से वायरलेस नेटवर्क टेस्टिंग, फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और बाकी सोशल मीडिया अकाउंट्स की टेस्टिंग की जा सकती है. इस ऐप को इन सब अकाउंट्स की हैकिंग के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. ये बहुत पावरफुल ऐप है जिसे सिर्फ सिक्युरिटी टेस्टिंग के लिए बनाया गया है.

8. Arpspoof

ये ऐप भी एक नेटवर्क एडिटिंग टूल की तरह बनाया गया था. ये एक खास तरीके के नेटवर्क पैकेज पर काम करता है जो ये बताता है कि किसी नेटवर्क को हैक किया जा सकता है या नहीं? इस ऐप को इस्तेमाल करने के लिए थोड़ी ट्रेनिंग की जरूरत पड़ेगी. ये कम्प्यूटर पर भी चल सकता है.

9.  Nmap for Android

ये ऐप एक नेटवर्क मैपर है. ये ऐप सबसे पहले Unix ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए बनाया गया था और अब ये विंडोज और एंड्रॉयड में भी उपलब्ध है. एंड्रॉयड यूजर्स के लिए ये ऐप फोन में मौजूद बाकी ऐप्स की मैपिंग भी करता है.

10. SSHDroid

सिक्युरीटी तोड़ने के साथ-साथ ये ऐप सिक्युरिटी करने के लिए भी एक अच्छा टूल साबित हो सकता है. ये ऐप कम्प्यूटर में भी काम करता है. इसके अलावा, इस ऐप की मदद से फोन में एडिश्नल कंट्रोल भी किए जा सकते हैं जैसे एक्सटेंडेड नोटिफिकेशन, वाई-फाई ऑटोस्टार्ट विशलिस्ट आदि.

जीवन बीमा से जुड़ी ये बातें जानते हैं आप..!

देश में काफी सारे लोग जीवन बीमा कराते हैं लेकिन उनमें से अधिकांश को यह पता ही नहीं होता है कि जीवन बीमा कितने तरह का होता है. अपने परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिहाज से लाइफ इंश्योरेंस (जीवन बीमा) का चयन काफी बेहतर रहता है.

हम आपको जीवन बीमा से जुड़ी कुछ बातें बता रहे हैं जिनके आधार पर आपको जीवन बीमा से जुड़े प्लान लेने में आसानी होगी.

क्या है जीवन बीमा

जीवन बीमा ऐसा अनुबंध है, जो उन घटनाओं के घटने पर, जिनके लिए बीमित व्यक्ति का बीमा किया जाता है, एक खास रकम अदा करने का वादा करता है. कुल मिला कर जीवन बीमा मृत्यु की वजह से पैदा होने वाली समस्याओं का एक आंशिक समाधान है.

होल लाइफ पॉलिसी

यह इन्श्योरेंस और इन्वेस्टमेंट का दोहरा लाभ प्रदान करता है. होल लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी पूरे जीवन के लिए या 100 वर्ष की उम्र तक के लिए इंश्योरेंस कवर प्रदान करता है. इसके अलावा इंश्योरेंस कंपनी सम एश्योर्ड (एकमुश्त राशि) पर बोनस भी कैलकुलेट करती है, यह राशि बीमाधारक के न रहने पर बीमाधारक के नॉमिनी को दी जाती है.

टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी

यह इंश्योरेंस का सबसे सस्ता और आसान रुप होता है, जिसमें एक विशेष अवधि के लिए आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध करवाई जाती है. यह अवधि 15 से 20 साल हो सकती है. टर्म इंश्योरेंस सुनिश्चित करता है कि आपके न रहने पर आपके परिवार को एकमुश्त राशि मिल जाएगी. वहीं अगर बीमाधारक को पॉलिसी के दौरान कुछ भी नहीं होता है, तो किसी को भी कोई भुगतान नहीं किया जाएगा. इसका प्रीमियम अन्य पॉलिसियों से भी सस्ता होता है.

इनडॉवमेंट पॉलिसी

यह आपको इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट दोनों का लाभ प्रदान करता है. यानि जोखिम से सुरक्षा देने के साथ साथ यह वित्तीय बचत का एक उत्पाद है. बीमाधारक के प्रीमियम को दो हिस्सों मे बांट दिया जाता है. प्रीमियम का एक हिस्सा एक मुश्त राशि के रुप में देने के एवज में सुरक्षित कर लिया जाता है. जबकि दूसरे हिस्से का मार्केट के टूल्स जैसे कि इक्विटी और डेट में निवेश किया जाता है.

इंश्योरेंस कम इन्वेस्टमेंट

यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) में प्रीमियम का एक हिस्सा बीमाधारक को लाइफ कवर उपलब्ध कराने के मद में निवेश हो जाता है, जबकि बाकी बचा हुआ हिस्सा इक्विटी और डेब्ट में निवेश कर दिया जाता है. यूलिप में निवेश से आपमें एक नियमित सेविंग की आदत पड़ जाती है जो कि आपकी पूंजी बढ़ाने में मददगार होती है.

मनी बैक लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी

इस पॉलिसी के अंतर्गत बीमा कंपनियां बीमाधारक को समय समय पर कुछ राशि वापस भी करती रहती है. यह क्रम तब तक जारी रहता है जब तक पॉलिसी चलती रहती है. वहीं बीमा धारक की मृत्यु हो जाने पर एकमुश्त राशि उनके परिजनों को दे दी जाती है.

किसी सेलेब्रिटी से कम नही है इस क्रिकेटर की पत्नी

भारतीय क्रिकेटर्स की खूबसूरत पत्नियों का जिक्र तो आपने अक्सर ही सुना होगा. बात चाहे विराट कोहली-अनुष्का शर्मा की हो या रोहित शर्मा और उनकी पत्नी रितिका की. अक्सर ये जोड़े सुर्खियों में छाए ही रहते हैं लेकिन इस दौरान अक्सर मनोज तिवारी की पत्नी सुष्मिता रौय की चर्चा नहीं होती है. सुष्मिता किसी किसी बौलीवुड एक्ट्रेस से कम नहीं हैं. क्या आप जानते हैं कि फैंस उनकी पत्नी की तुलना कैटरीना कैफ तक से करते हैं. तो आइए, हम आपको मनोज तिवारी का पत्नी के बारे में बताते हैं कुछ रोचक बातें.

मनोज तिवारी और सुष्मिता रौय बचपन से ही एक-दूसरे को जानते थे. बचपन की दोस्ती जवानी तक आते-आते कब प्यार में बदल गई, इसका पता ही नहीं चला. जुलाई 2013 में दोनों परिणय सूत्र में बंध गए. सोशल मीडिया पर बेहद एक्टिव नजर आने वाली सुष्मिता अक्सर अपनी फोटो शेयर करती रहती हैं. इन फोटो में वह मनोज तिवारी संग भी नजर आती हैं.

सुष्मिता इंस्टाग्राम (roy_susmita7) पर अपनी तस्वीरों के चलते खूब छाई रहती हैं. उनके इंस्टाग्राम पर 35 हजार से भी ज्यादा फौलोअर्स हैं. वह आईपीएल के दौरान अक्सर अपने पति को चीयर्स करती दिखाई देती हैं.

2016 में जब पति मनोज तिवारी के साथ सुष्मिता ग्रीस छुट्टियां मनाने गईं तो उस दौरान उन्होंने वहां कई हौट और ग्लैमरस फोटोशूट करा अपनी फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड किया की थीं, जिसके बाद उनका ग्लैमरस लुक बेहद चर्चा में आ गया था.

बता दें कि मनोज तिवारी को 15 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में मौका मिला है. जिसमें 12 वनडे के दौरान उन्होंने 1 शतक और 1 अर्धशतक की मदद से 287 रन बनाए, जबकि 3 टी20 मुकाबलों की 1 पारी में 15 रन टीम के खाते में जोड़े. वहीं मनोज तिवारी ने 147 आईपीएल मुकाबलों में 2875 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने 14 अर्धशतक भी जड़े.

कहां गायब हैं ये मशहूर अभिनेत्रियां

बॉलीवुड में बहुत सी ऐसी अभिनेत्रियां हैं जिन्होंने 90 के दशक की फिल्मों में खुब नाम कमाया. लेकिन 90 के दशक की ही कुछ अभिनेत्रियां ऐसी है जो गायब हो चुकी है. वैसे 90 के दशक की कुछ अभिनेत्रियां जल्द ही वापसी करने जा रहीं हैं.

1. मानसी जोशी

लॉन्गटाइम ब्वॉयफ्रैंड रोहित रॉय से शादी के बाद मानसी आखिरी बार 2005 में ‘नच बलिए’ में उन्हीं के साथ नजर आई थीं. हालांकि अब करीब 12 साल के बाद मानसी छोटे पर्दे पर वापसी करने जा रही हैं.

2. रेणुका शहाणे

1994 में राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ में सलमान की भाभी के रोल में नजर आईं रेणुका शहाणे. रेणुका ने शाहरुख खान के सीरियल ‘सरकस’ में काम किया है. इन दिनों रेणुका मराठी फिल्मों में अपना अभिनय दिखा रहीम हैं.

3. अर्चना पूरन

टीवी सीरियल ‘श्रीमान-श्रीमती’ की अर्चना पूरन सिंह तो आपको याद ही होंगी. अर्चना आखिरी बार फिल्म ‘डॉली की डोली’ में नजर आई थीं. हालांकी अर्चना ने कुछ टीवी शो में बतौर जज भी काम किया है लेकिन वे फिल्मों से पुरी तरह से दूर हैं.

4. रीमा लागू

90 के दशक की फिल्में रीमा लागू के मां वाले रोल के बिना अधूरी मानी जाती थीं. रीमा ने “श्रीमानजी-श्रीमतीजी”, “तू-तू मैं-मैं”, “खानदान” व “दो और दो पांच” जैसे सीरियल में काम कर चुकी हैं. लंबे गैप के बाद रीमा लागू फिलहाल महेश भट्ट के सीरियल ‘नामकरन’ में काम कर रही हैं.

5. फरीदा जलाल

वेटरन एक्ट्रैस फरीदा जलाल का ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ में किया गया मां का रोल भला कौन भूल सकता है. फरीदा जलाल ने 2016 में जी टीवी के शो ‘सतरंगी ससुराल’ में दादी का रोल प्ले किया. फिलहाल फरीदा जलाल फिल्म ‘टीना की चाबी’ में काम कर रही हैं.

6. हिमानी शिवपुरी

90 के दशक की फिल्मों में कॉमिक रोल करने वाली हिमानी शिवपुरी ने कई फिल्मों में मां और बुआ के किरदार भी निभाए. हिमानी कुछ फिल्मों में काम कर रही हैं. हिमानी शिवपुरी “उम्मीद-द होप”, “चलता है यार” और “जिद्दी पड़ोसन” जैसी फिल्मों में जल्द ही नजर आएंगी.

7. स्मिता जयकर

फिल्मों में आइकॉनिक मदर का रोल प्ले करने वाली स्मिता जयकर फिल्म देवदास में भी स्मिता मां के रोल में ही नजर आई थीं. फिलहाल स्मिता एक्टिंग से दूर हैं और स्प्रिचुअल एक्टिविटी में ध्यान लगा रही हैं.

8. सुषमा सेठ

कई फिल्मों में मां और दादी के रोल निभा चुकीं वेटरन एक्ट्रैस सुषमा सेठ को आइकॉनिक सीरियल ‘हम लोग’ में दादी वाले कैरेक्टर के लिए जाना जाता है. सुषमा सेठ आखिरी बार फिल्म ‘शानदार’ में नजर आई थीं. फिलहाल सुषमा सेठ के किसी अपकमिंग सीरियल या फिल्म के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

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