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रिश्तों का रेतीला महल : भाग 1

अपनी नौकरी के चलते गीता को घर का काम निपटा कर जल्दी सोना होता था और सुबह जल्दी ही उठना पड़ता  था. लेकिन उस दिन उठने में थोड़ी देर हो गई थी. अब उस के पास एक ही रास्ता था कि जल्दी से रसोई का काम निपटाए. काम भी कम नहीं था. सुबह के नाश्ते से ले कर दोपहर का खाना तक बनाना होता था. इस की वजह यह थी कि उस की बेटी सुदीक्षा कालेज जाती थी, जो दोपहर को घर लौटती थी. इसलिए उस का खाना बनाना जरूरी था. साथ ही यह भी कि उसे खुद को और पति कुलदीप को अपना लंच बौक्स साथ ले कर जाना होता था.

दरअसल 37 वर्षीय गीता पंजाबी भाषा की प्रोफेसर थी और पिछले 15 सालों से सिविल लाइंस लुधियाना स्थित एक शिक्षण संस्थान में पढ़ाती थी. उस का पति कुलदीप रेलवे में बतौर इलेक्ट्रिशियन तैनात था.
कुलदीप सुबह साढ़े 8 बजे अपनी ड्यूटी पर चला जाता था और शाम को साढ़े 5 बजे घर लौटता था. कुलदीप के चले जाने के बाद साढ़े 9 बजे गीता भी अपने कालेज चली जाती थी. जबकि सुदीक्षा कालेज के लिए 10 बजे घर से निकलती थी. सब के जाने के बाद घर में कुलदीप का छोटा भाई हरदीप अकेला रह जाता था.

हरदीप नगर निगम लुधियाना की पार्किंग के एक ठेकेदार के पास काम करता था. उस की रात की ड्यूटी होती थी. वह अपने भाईभाभी के पास ही रहता था. हरदीप रात 8 बजे घर से ड्यूटी पर जाता था और सुबह 9 बजे लौटता था. काम से लौट कर वह दिन में घर पर ही सोता था.

कुलदीप, उस की पत्नी गीता, बेटी सुदीक्षा और हरदीप सहित 4 सदस्यों का यह परिवार लुधियाना के अजीत नगर, बकौली रोड, हैबोवाल के मकान नंबर 1751/21 ए की गली नंबर-3 में रहता था. कुलदीप के पिता राममूर्ति की कुछ वर्ष पहले मौत हो चुकी थी.

पिता की मौत के बाद कुलदीप ही घर का एक मात्र बड़ा सदस्य था. कुलदीप को मिला कर परिवार में 3 कमाने वाले थे, सो घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी. सब कुछ ठीकठाक चल रहा था.

पिता की दुश्मन बेटी

उस दिन कुलदीप, गीता और सुदीक्षा घर से जाने की तैयारी कर रहे थे. अपनेअपने हिसाब से सभी को जल्दी थी. गीता ने नाश्ता तैयार कर लिया था. उस ने पति को आवाज दी, ‘‘नाश्ता लग गया है, जल्दी आ जाइए. मुझे कालेज के लिए देर हो रही है.’’

कुलदीप नाश्ते की टेबल पर आ कर बैठ गया तो गीता ने उसे परांठे परोस दिए. कुलदीप नाश्ता करने लगा तो उसे बेटी का ध्यान आया. उस ने गीता से पूछा, ‘‘सुदीक्षा कहां है?’’

‘‘अपने कमरे में होगी, तुम नाश्ता करो.’’

कुलदीप ने वहीं बैठेबैठे सुदीक्षा को आवाज दे कर पुकारा, पर वह नहीं आई. कुलदीप ने 2-3 बार आवाज दी पर सुदीक्षा के कमरे से कोई जवाब नहीं आया. गीता ने एक बार फिर टोका, ‘‘तुम नाश्ता करो, वह आ जाएगी.’’ पर कुलदीप को चैन नहीं आया, क्योंकि उसे सुबह का नाश्ता और रात का खाना पत्नी और बेटी के साथ खाना पसंद था.

पत्नी के मना करने के बावजूद कुलदीप नाश्ता छोड़ कर बेटी के कमरे में गए. सुदीक्षा के कमरे में जा कर उन्होंने देखा कि सुदीक्षा कानों में हैडफोन लगाए किसी से हंसहंस कर बातें कर रही थी. यह देख कर कुलदीप को गुस्सा आ गया. उस ने आगे बढ़ कर देखा तो स्क्रीन पर तरुण का नाम था.

तरुण उर्फ तेजपाल सिंह भाटी, सुदीक्षा का बौयफ्रैंड था, यह बात कुलदीप अच्छी तरह जानता था. तरुण हंसबड़ारोड पर पंज पीर के पास मेहर सिंह नगर में रहता था, उस की मैडिकल शौप थी. पिछले 3 सालों से सुदीक्षा और तरुण के प्रेमसंबंध थे. कुलदीप शुरू से ही इन संबंधों का विरोध करता था. इसे ले कर उस ने सुदीक्षा को कई बार फटकारा भी था. इतना ही नहीं तरुण को ले कर बापबेटी म७ें कई बार कहासुनी भी हुई थी. फिर भी सुदीक्षा ने तरुण का साथ नहीं छोड़ा.

कुलदीप उसे बराबर समझाता था कि फालतू के प्यारव्यार के चक्कर में न पड़ कर अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे. लेकिन सुदीक्षा ने पिता की बात कभी नहीं मानी. वह खुद को आजाद मानती थी और आजाद ही रहना चाहती थी. अपनी जिंदगी में उसे किसी की दखलंदाजी बरदश्त नहीं थी. तरुण के मामले में तो वह किसी की भी नहीं सुनती थी.

फोन की स्क्रीन पर तरुण का नंबर देख कर कुलदीप के तनबदन में आग लग गई. उस ने डांटते हुए सुदीक्षा से कहा, ‘‘हजार बार मना किया है कि इस लफंगे से संबंध नहीं रखना, पर तुम हो कि मानती ही नहीं. क्या मेरी बातें तुम्हारी समझ में नहीं आतीं, या सब कुछ जानसमझ कर अनजान बनने का नाटक करती हो.’’

सुदीक्षा के कमरे से पति के जोरजोर से बोलने की आवाज सुन कर गीता भी वहां आ गई. उस ने भी बेटी को डांट कर चुप रहने के लिए कहा. लेिकन बापबेटी के बीच फोन पर तरुण से बातचीत को ले कर कहासुनी चालू रही. इस बहस में दोनों में से कोई हारने को तैयार नहीं था.

कुलदीप पिता होने का अधिकार समझ कर बेटी को गलत राह पर जाने से रोक रहा था, जो अपनी जगह पर ठीक भी था. जब बच्चे अपना लक्ष्य भूल कर रास्ता भटकने लगते हैं, तो पिता का कर्तव्य बन जाता है कि वह अपनी संतान को गलत राह पर जाने से रोके और अपनी समझ के अनुसार उस का सही मार्गदर्शन करे. यही कुलदीप कर रहा था.

दूसरी ओर कोई तरुण को भलाबुरा कहे यह सुदीक्षा को बरदाश्त नहीं था. यही कारण था कि कुलदीप जब भी बेटी को समझाने की कोशिश करता तो वह हत्थे से उखड़ जाती थी. इस के साथ ही बापबेटी के बीच तरुण को ले कर महाभारत शुरू हो जाता था.

तरुण के मामले में सुदीक्षा अपने पिता को अपना कट्टर दुश्मन मानती थी. उस दिन कहासुनी से शुरू हुई बात अचानक इतनी ज्यादा बढ़ गई कि गुस्से में कुलदीप ने सुदीक्षा के हाथों से मोबाइल छीन कर फर्श पर पटक दिया. इस के बाद वह गुस्से में नाश्ता किए बिना ही घर से निकल गया. खाने का टिफिन भी घर पर ही छोड़ दिया था.

परिवार में किसी तीसरे का  दखल भी बढ़ाता है कलह

कुलदीप के बिना कुछ खाएपीए घर से निकल जाने के बाद गीता और सुदीक्षा भी बिना नाश्ता किए अपनेअपने कालेज चली गईं. रात को कुलदीप ने एक बार फिर बेटी को प्यार से समझाने के लिए खाने की टेबल छत पर लगवाई. कुलदीप का भाई हरदीप खाना खा कर काम पर जाने की तैयारी कर रहा था.
गीता, सुदीक्षा और कुलदीप ने जब तक खाना शुरू किया तब तक हरदीप जा चुका था. मांबाप और बेटी के बीच जो थोड़ा बहुत मनमुटाव था, वह एक साथ खाना खाने से खत्म हो गया. खाना खाने के बाद कुलदीप नीचे अपने कमरे में सोने के लिए चला गया. गीता और सुदीक्षा छत पर ही सो गईं. यह बीती 19 जुलाई की बात है.

कैसे निभाएं जब पत्नी ज्यादा कमाए, ये हैं आसान उपाय

पत्नी कमाऊ और पति बेरोजगार ऐसे उदाहरण पहले बहुत कम मिलते थे, मगर पिछले 10-12 सालों में ऐसे उदाहरणों की संख्या बढ़ती जा रही है. ऐसे में आपसी तालमेल बैठाना मुश्किल होता जा रहा है. इसलिए जरूरत इस बात की है कि अब कमाऊ बहू को मानसम्मान और अधिकार देने के साथसाथ उस के साथ तालमेल बैठाने की भी शुरुआत की जाए. पति को भी पत्नी से तालमेल बैठा कर चलना चाहिए तभी गृहस्थी की गाड़ी चल सकेगी.

मेरठ की रहने वाली नेहा की शादी उस के ही सहपाठी प्रदीप से हुई. शादी के समय से ही दोनों एकसाथ जौब के लिए कई कंपीटिशनों में एकसाथ बैठ रहे थे. मगर प्रदीप किसी भी कंपीटिशन में कामयाब नहीं हुआ, पर नेहा ने एक कंपीटिशन पास कर लिया. वह सरकारी विभाग में औफिसर नियुक्त हो गई. प्रदीप ने इस के बाद भी कई प्रयास किए पर जौब नहीं मिल सकी. इस के बाद उस ने अपना बिजनैस शुरू किया.

शादी के कुछ साल तक दोनों के बीच तालमेल बना रहा पर फिर धीरधीरे आपस में तनाव रहने लगा. नेहा की जो शानशौकत और रुतबा समाज में था वह प्रदीप को खटकने लगा. वह हीनभावना से ग्रस्त रहने लगा. यही हीनभावना उन के बीच दरार डालने लगी. धीरधीरे उन के बीच संबंध बिगड़ने लगे. नतीजा यह हुआ कि 4 साल में ही शादी टूट गई. सर्विस में गैरबराबरी होने से पतिपत्नी के बीच अलगाव के मामले अधिक बढ़ते जा रहे हैं.

पिछले 10 सालों का बदलाव देखें तो पता चलता है कि लड़कों से अधिक लड़कियों ने शिक्षा से ले कर रोजगार तक में अपनी धाक जमाई है. किसी भी परीक्षा के नतीजे देख लें सब से अधिक लड़कियां ही अच्छे नंबरों से पास हो रही हैं.

पहले शादी के बाद लड़कियों को नौकरी छोड़ने के लिए कहा जाता था. सरकारी नौकरियों में बड़ी सुविधाओं के चलते अब शादी के बाद कोई लड़की अपनी सरकारी नौकरी नहीं छोड़ती. अब उन मामलों में तनाव बढ़ रहा है जहां पत्नी अच्छी सरकारी नौकरी कर रही है पर पति किसी प्राइवेट जौब में है.

बड़ी वजह है सामाजिक बदलाव

पहले बहुत कम मामलों में लड़कियां शादी के बाद जौब करती थीं. अब बहुत कम मामलों में लड़कियां शादी के बाद जौब छोड़ती हैं. इस का सब से बड़ा कारण लोगों की सामाजिक सोच का बदलना है. अब शादी के बाद महिला काम करे इसे ले कर किसी तरह का कोई दबाव नहीं होता.

शहरों में रहना, बच्चों को पढ़ाना और सामाजिक रहनसहन के साथ तालमेल बैठाना मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में पति ही नहीं उस का पूरा परिवार चाहता है कि पत्नी भी जौब करे. केवल सर्विस के मामले में ही नहीं, बिजनैस के मामले में भी ऐसा ही हो रहा है.

राहुल प्राइवेट बैंक में काम करता है. उस की सैलरी अच्छी है. बावजूद इस के उस ने अपनी पत्नी को अपनी पसंद का ब्यूटी बिजनैस करने की अनुमति दे दी. राहुल की पत्नी संध्या ने एक ब्यूटीपार्लर की फ्रैंचाइजी ले ली. इस में पैसा तो था ही, साथ ही सामाजिक दायरा भी बढ़ा. अब राहुल से अधिक संध्या को लोग जानने लगे थे.

बिजनैस में सफल होने के बाद संध्या की पर्सनैलिटी में भी बहुत बदलाव आ गया. नातेरिश्तेदारी में पहले जो लोग उस के काम का मजाक उड़ाते थे वही अब उस की तारीफ करते नहीं थकते हैं. पति की सैलरी से ज्यादा संध्या अपने यहां काम करने वालों को वेतन देने लगी है. वह कहती है, ‘‘10 साल पहले मैं ने जब इस बिजनैस को शुरू किया था तब घरपरिवार और नातेरिश्तेदार यह सोचते थे कि मैं ने टाइमपास के लिए काम शुरू किया है. कई लोग सोचते थे कि पति के वेतन से मदद ले कर मैं काम कर रही हूं. मगर जब कुछ ही सालों के अंदर मेरे काम की तारीफ होने लगी तो सब को यकीन हो गया.

‘‘अब वही लोग मेरा परिचय देते हुए गर्व से कहते हैं कि मैं उन की बहू हूं. पति भी मजाकमजाक में कह देते हैं कि मेरे से ज्यादा लोग तुम्हें जानते हैं.’’

महिलाएं पहले भी काम करती थीं, पर तब उन के सामने काम करने के अवसर कम थे. उन में खुद पर भरोसा नहीं होता था. समाज का भी पूरा सहयोग नहीं मिलता था. ऐसे में उन में आत्मविश्वास पैदा नहीं होता था. ज्यादातर संयुक्त परिवार होते थे, जिस से महिला की कमाई पर उस का अधिकार कम ही होता था. मगर अब ऐसा नहीं है. यह बचत किया पैसा महिला में आत्मविश्वास पैदा करता है. इस आत्मविश्वास से ही सही माने में महिलाओं का सशक्तीकरण हुआ है. वे अपने फैसले खुद लेने लगी हैं. इस से उन की अलग पहचान बन रही है.

35 साल की रीना बताती है, ‘‘मुझे केकपेस्ट्री बनाने का शौक बचपन से था. जो भी खाता खूब तारीफ करता था. मैं शादी से पहले प्राइवेट जौब करती थी. शादी के बाद वह छूट गई. कुछ सालों के बाद मैं ने दोबारा अपना काम शुरू करने की योजना बनाई. मेरे पति ने कहा कि जौब कर लो पर मैं ने कहा कि नहीं अब केकपेस्ट्री बनाने का काम करूंगी. पति को यह काम अच्छा नहीं लगा.

‘‘मैं ने मेहनत से काम किया और फिर 3 सालों में ही मेरे बनाए केक शहर के लोगों की पहली पसंद बन गए. मेरे पास अब काफी स्टाफ है. मैं शहर में बिजनैस वूमन बन गई हूं. लोग मेरी खूब तारीफ करते हैं. पति को भी अब लगता है कि मेरा फैसला सही था.’’

इन बदलावों को देखते हुए लड़कियों को पढ़ाने के लिए परिवार पूरी मेहनत करने लगे हैं. 12वीं कक्षा के बाद की पढ़ाई के लिए कालेज, नर्सिंग स्कूल, इंजीनियरिंग कालेज सभी कुछ खुलने लगे हैं. जहां पर स्कूल नहीं हैं वहां की लड़कियां पढ़ाई करने दूर के स्कूलों में जाने लगी हैं. कई मांबाप ऐसे भी हैं जो पढ़ाई के लिए मकान तक बेचने या किराए पर देने लगे हैं. बड़े शहरों में चलने वाली कोचिंग संस्थाओं को देखें तो बात समझी जा सकती है. पढ़ाई और नौकरी के जरीए सही माने में महिलाओं का सशक्तीकरण होने लगा है. यह सच है कि बदलाव की बयार धीरेधीरे बढ़ रही है.

पति को करना होगा समझौता

एक समय था जब शादी के बाद केवल लड़कियों को समझौता करना होता था. पत्नी घर में चौकाचूल्हा करती थी और पति नौकरी करता था. अब हालात बदल गए हैं. इस तरह के समझौते अब पतियों को करने पड़ रहे हैं. जब पत्नी से दिनभर नौकरी करने के बाद घर में पहले की तरह काम करने की अपेक्षा की जाती है तो वहां विवाद खड़े होने लगते हैं. इन विवादों से बचने के लिए पति को समझौता करना होगा. उसे पत्नी का हाथ बंटाना चाहिए.

जिन परिवारों में ऐसे बदलाव हो रहे हैं वहां हालात अच्छे हैं. जहां पतिपत्नी आपसी विवाद में उलझ रहे हैं वहां मामले झगड़ों में बदल रहे हैं. पतिपत्नी के बीच तनाव बढ़ रहा है.

बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित कई प्रदेशों में हाल के कुछ सालों में शिक्षक के रूप में पुरुषों से अधिक महिलाओं को नौकरी मिली है. ऐसे में पति अपनी पत्नी को स्कूल में नौकरी करने जाने के लिए खुद मोटरसाइकिल से छोड़ने जाता है. शहरों में रहने वाली लड़कियां अब सरकारी नौकरी के चक्कर में गावों के स्कूलों में पढ़ाने जा रही हैं. स्कूल का काम खत्म कर के वे शहर वापस आ रही हैं.

पत्नी दोहरी जिम्मेदारी उठाने लगी है. ऐसे में उस का तनाव बढ़ने लगा है. अब अगर पति, परिवार का सहयोग नहीं मिलता तो विवाद बढ़ जाता है.

पहले शादी के समय दहेज ही नहीं, शक्लसूरत को ले कर भी सासससुर कई बार नाकभौंहें सिकोड़ते थे. मगर अब ऐसा नहीं है. लड़की सरकारी नौकरी कर रही है, तो उस में लोग समझौता करने लगे हैं. यही नहीं अब लड़की भी ऐसे ही किसी लड़के के साथ शादी नहीं करती. वह भी देखती है कि लड़का उस के लायक है या नहीं.

कई बार तो शादी तय होने के बाद भी लड़की ने अपनी तरफ से शादी तोड़ने का फैसला किया है. समय के इस बदलाव ने समाज और परिवार में लड़की को अपर हैंड के रूप में स्वीकारना शुरू कर दिया है. यहीं से पतिपत्नी के बीच दूरियां बढ़नी शुरू हो जाती हैं.

कानपुर में एक पति ने पत्नी की हत्या कर दी. मामला यह था कि पत्नी विधि विभाग में अधिकारी थी और पति साधारण वकील. पति को लगता था कि पत्नी उस के साथ सही तरह से व्यवहार नहीं कर रही. वह खुद को बड़ा अधिकारी समझती है. ऐसे में दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं. दोनों ने अलगअलग रहना शुरू कर दिया. फिर परिवार के दबाव में साथ रहने लगे. मगर यह साथ बहुत दिनों तक नहीं चला. ऐसे में दोनों के बीच तनाव बढ़ा और मसला हत्या तक पहुंच गया. पति फिलहाल जेल में है.

शिक्षा और स्वास्थ्य में बढ़े अवसर

पहले लड़कियों के लिए केवल नर्स और बैंकिंग के क्षेत्र में ही अवसर थे. पिछले 10-12 सालों में लड़कियों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सरकारी नौकरियों के बहुत विकल्प आए हैं. इन में कम पढ़ीलिखी महिलाओं से ले कर अधिक शिक्षित महिलाएं तक शामिल हैं. गांवों में जहां स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाली ‘आशा बहू’ के रूप में नौकरी मिली, वहीं शहरों में नर्स के रूप में काम करने के बहुत अवसर आए. शिक्षा विभाग में शिक्षा मित्र से ले कर सहायक अध्यापक तक के क्षेत्र में महिलाओं को सब से अधिक जौब्स मिलीं.

शादी से पहले प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने का काम लड़कियां पहले भी करती थीं. कई दूसरी तरह की निजी नौकरियां भी करती थीं. शादी के बाद किसी न किसी वजह को ले कर उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता था. सरकारी विभाग में नौकरी पाने वाली महिलाओं को शादी के बाद भी नौकरी छोड़ने के लिए कोई मजबूर नहीं करता है.

सरकारी नौकरी में तबादला एक मुश्किल काम होता है. उत्तर प्रदेश में बहुत सारी लड़कियां इस का शिकार हैं. उन की ससुराल और नौकरी वाली जगह में बहुत दूरी है. ऐसे में वे दोनों जगहों को नहीं संभाल पा रही हैं. बड़े पैमाने पर सरकार पर दबाव पड़ रहा है कि लड़कियों को उन की मनचाही जगह तबादला दिया जाए. कई टीचर्स को तो 50 किलोमीटर से ले कर 150 किलोमीटर तक रोज का सफर तय करना पड़ता है.

सरकारी नौकरी में मिलने वाली सुविधाओं के चलते सरकारी नौकरी वाली बहू का मान बढ़ गया है. जरूरत इस बात की है कि पतिपत्नी के बीच तालमेल बना रहे.

पतिपत्नी वैवाहिक जीवन के 2 पहिए हैं. ये साथ चलेंगे तो जीवन की गाड़ी तेजी से दौड़ेगी. अगर इन के बीच कोई फर्क होगा तो जीवन सही नहीं चलेगा.

व्हाट्सएप ग्रुपों से भी भयभीत हो रही है सरकार

सरकार अब व्हाट्सएप ग्रुपों में उतनी ही भयभीत नजर आ रही है जितनी समाचारपत्रों और न्यूज चैनलों से है. ललितपुर जिले के डिस्ट्रीक्ट मजिस्ट्रेट मानवेंद्र सिंह का तुगलकी आदेश कि न्यूज चैनलों व पत्रकारों द्वारा चलाए जा रहे व्हाट्सएप ग्रुपों को अब रजिस्टर कराना पड़ेगा और 31 अगस्त 2018 के बाद उस में कोई नंबर नहीं जोड़ा जाएगा.

ग्रुप एडमिन को अपना नाम, परिचयपत्र, आधारकार्ड, फोटो, घर का पता, दफ्तर का पता आदि फार्म में भर कर देना होगा. कहने को तो यह सांप्रदायिक सौहार्द के लिए किया जा रहा है पर साफ है कि सरकार समाचारपत्रों की तरह व्हाट्सएप गु्रपों से भी डर रही है. इसी तरह की बंदिशें जिला अधिकारियों ने देशभर के भाषाई समाचारपत्रों पर जानबूझ कर लगा रखी है जबकि संबंधित प्रैस एवं रजिस्ट्रेशन औफ बुक्स एक्ट 1807 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.

कठिनाई यह है कि हमारा देश का आम नागरिक और यहां तक कि पत्रकार, विचारक, इतिहासकार स्वत: ही अपने को सरकार का गुलाम मानते हैं. सरकारी प्रक्रियाएं चाहे जितनी कठिन हों, उन का अवैधानिक व असंवैधानिक होने पर भी विरोध करने की जगह सिफारिशें लगा कर प्रक्रिया पूरी करने में लग जाते हैं.

पुलिस व प्रशासन को आदत पड़ जाती है कि चाहे जैसे कदम वे उठा लेंगे, 90-95 प्रतिशत लोग तो उन की बात पत्थर की लकीर मान कर सहज मान लेंगे. कुछ ले दे कर सिफारिश लगा कर हर तरह की प्रक्रिया पूरी कर डालेंगे चाहे उस से उन की मौलिक स्वतंत्रताएं गिरभी हो जाएं.

आम नागरिक पर लगाई जाने वाली बंदिशों के आदी हो चुके प्रशासन के अफसर आमतौर पर मान कर चलते हैं कि वे राजा हैं, कानूनों के ऊपर है. पूना का प्रकरण उसी का नमूना है. ललितपुर का भी मामला ऐसा ही है. यह पक्का है. अवैधानिक होते हुए भी कुछ तो सिर आंखों पर ले लेंगे.

फेसबुक और व्हाट्सएप पर ट्रैक करें लोकेशन

सोशल मीडिया एक ऐसा माध्यम है जिसके जरिए हम कई लोगों से बात कर सकते हैं कुछ को तो हम जानते हैं लेकिन कुछ ऐसे होते हैं जिन्हें हम नहीं जानते. हो सकता है कि कुछ लोग ऐसे भी हों जो आपकी साथ फेसबुक या व्हाट्सएप पर जुड़े हों और आप उन्हें न जानते हों. ऐसे लोग fake भी हो सकते हैं. तब क्या करेंगे आप. आज हम आपको एक ऐसी ट्रिक बताने जा रहे हैं जिससे महज चैटिंग के जरिए आप ये जान पाएंगे, कि जिससे आप बात कर रहे हैं उसकी सही लोकेशन क्या है. जी हां, ये सच है, अब आप फेसबुक और व्हाट्सएप पर किसी की भी लोकेशन को ट्रैक कर सकते हैं.

फेसबुक और व्हाट्सएप पर कैसे ट्रेस करें लोकेशन

आईपी एड्रेस से लोकेशन ट्रेस करना

1.     इसके लिए जरूरी है कि कंप्यूटर में चल रही सभी एप्स को बंद कर दें. अगर आप फेसबुक यूज कर रहे हैं तो सिर्फ फेसबुक ही यूज करें.

2.     सबसे पहले कीबोर्ड में Win+R दबाइए.

3.     इसके बाद cmd टाइप कर एंटर प्रेस कीजिए.

4.     अब जो विंडो आपके सामने खुलेगी उसमें netstat –a –n –o टाइप करके एंटर दबाएं.

5.     अब आपके सामने उस व्यक्ति का आईपी एड्रेस आएगा उसे नोट कीजिए.

6.     अब आप इस आईपी एड्रेस को http://www.ip-adress.com/ip_tracer/ इसपर जाकर ट्रेस कर सकते हैं.

जर्मनी की एलिसा बनीं दुनिया की सबसे बिंदास एथलीट

जर्मनी की एलिसा स्मिड ने अभी तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा कमाल नहीं किया है, फिर भी सोशल मीडिया पर बिंदास फोटो और वीडियो की बदौलत 18 साल की इस खूबसूरत बाला को इंटरनेट पर सक्रिय सबसे सेक्सी एथलीट चुना गया है.

ब्रिटिश टेबलॉयड ‘द सन’ की रिपोर्ट की मानें तो सुनहरे भविष्य को देखते हुए दुनिया की बड़ी कंपनियां उनसे जुड़ने को बेताब हैं. प्यूमा से तो उन्हें मॉडलिंग करार मिल ही चुका है. सुनहरे बालों वाली एलिसा सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय हैं. आए दिन वह अपने खूबसूरत फोटो और वीडियो इंस्टाग्राम पर डालती रहती हैं, जहां उनके करीब तीस हजार फॉलोअर्स हैं.

इस महीने के शुरू में उन्होंने समुद्र तट पर बिकनी में वीडियो पोस्ट किया तो इसने इंटरनेट पर सनसनी मचा डाली. इसे हजारों बार शेयर किया गया और लाखों लाइक्स मिले. यह ‘बस्टेड कवर’ बेवसाइट के पोल में उनके अव्वल रहने का यह सबसे बड़ा आधार बना.

ट्रैक एंड फील्ड पर भी एलिसा दमदार हैं. उन्होंने इस माह की शुरुआत में अंडर-20 यूरोपीयन चैंपियनशिप में चार गुणा 400 मीटर रिले में जर्मनी को रजत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. वह 200, 400 और 800 मीटर में जूनियर स्तर से दौड़ती रही हैं. इंडोर गेम्स में उन्होंने 60 और 100 मीटर फर्राटा में जूनियर स्तर पर दमदार प्रदर्शन किया है.

2020 के टोक्यो ओलंपिक में वह जर्मनी की बड़ी उम्मीद हो सकती हैं. यह भी संभव है कि वह गोल्फर पेजी स्पीयरनेक, कनाडा की टेनिस सुंदरी जिनी बोकार्ड और ऑस्ट्रेलियाई धावक मिशेले जेनेक की तरह सिर्फ सोशल मीडिया की सनसनी ही साबित हों.

हालीवुड सिंगर जे सीन के पास है इतने जूते, आप देख हो जाएंगे हैरान

दुनिया में हर किसी का अपना स्टाइल और शौक होता है. ऐसे ही ब्रिटिश गायक जे सीन को जूते रखने का शौक है. उनके पास 300 जोड़ी से अधिक जूते हैं. कौन्टैक्ट म्यूजिक की खबर के अनुसार जे के इन जूतों को रखने के लिए अलग से एक कमरा भी है.

उन्होंन ‘बैंग शोबिज’ को बताया, मेरे जूतों के लिये अलग से एक कमरा भी है. यह एक पूरे कमरे के जैसा है क्योंकि मेरे पास कई जोड़ी जूते हैं. उन्होने कहा की उनके पास 300 से अधिक जूते हैं, और ये दिखने में बेहद प्यारे हैं. राइड इट गीत से चर्चित हुए गायक सीन ने कहा कि उनके पास बहुत सारे जूते हैं क्योंकि उनका मानना है कि पुरूष अपने स्टाइल के मामले में बहुत कुछ नहीं कर सकते हैं.

क्या आप जानते हैं ट्रू कॉलर के ये फीचर्स?

क्या कभी आपको लगता है कि यह पता चल जाए कि अनजान नंबर से कौन कॉल कर रहा है? इसके लिए एक ऐप है ट्रू कॉलर (True Caller), जिसे आपमें से बहुत से लोग यूज़ भी करते होंगे. मगर इस ऐप से कॉल करने वाले का नाम पता लगाने के अलावा और भी कई काम किए जा सकते हैं.

1.कॉल ब्लॉक करें

यह ऐप कुछ खास नंबर्स से आने वाले कॉल ब्लॉक कर सकता है. अगर आपको लगता है कि कोई आपको किसी खास नंबर से परेशान कर रहा है तो उसके नंबर के पहले कुछ नंबर ऐड करके ब्लॉक कर दीजिए. इसके बाद उस नंबर से आने वाले कॉल आपको परेशान नहीं करेंगे.

2. बिना इंटरनेट जानें, कौन कर रहा है कॉल

यह जरूरी नहीं है कि ऐप को हर बार काम करने के लिए इंटरनेट जरूरी है. एक बार नंबर पहचान लेने पर यह बिना इंटरनेट पर भी अगली बार कॉलर के बारे में जानकारी दे देगा.

3. खुद को स्पैमर्स से बचाएं

ट्रू कॉलर आपको स्पैमर्स से भी बचाता है. यह आपको बताता है कि जिस नंबर से कॉल आ रही है, उसे किसी ने स्पैम मार्क किया है या नहीं. इस तरह से आप तय कर सकते हैं कि कॉल उठानी है या नहीं.

4. ट्रू कॉलर का डायलर- ट्रू डायलर

ट्रू कॉलर से आप कॉल ब्लॉक करने के अलावा भी बहुत कुछ कर सकते हैं. इसका एक डायलर ऐप भी है, जिसे आप अपना डिफॉल्ट डायलर बना सकते हैं. True dialer नाम का यह ऐप ट्रू कॉलर के साथ सिंक हो जाता है. इससे आपको अलग से नंबर वगैरह सर्च करने या किसी को ब्लॉक करने की जरूरत नहीं पड़ती.

5. सर्च करके ढूंढें नंबर

ट्रू कॉलर में एक सर्च बार है, जो ऐप खोलने पर दिखाई देती है. इसमें कोई भी नंबर टाइप करके सर्च किया जा सकता है. आप नाम या अड्रेस टाइप करके भी किसी का नंबर तलाश कर सकते हैं.

6. अपनी प्रोफाइल बनाएं

ट्रू कॉलर पर आप अपनी प्रोफाइल बना सकते हैं और उसे अपने हिसाब से कस्टमाइज़ कर सकते हैं. इस तरह से आप तय कर सकते हैं कि अन्य यूज़र्स को आपके बारे में क्या जानकारी मिलेगी. आप अपना पूरा नाम और तस्वीर वगैरह ऐड कर सकते हैं. फेसबुक से भी जानकारी भरी जा सकती है. इसके अलावा आप अपनी वेबसाइट और ईमेल आईडी भी डाल सकते हैं. अपने बारे में छोटी सी डिस्क्रिप्शन भी डाली जा सकती है. इसी तरह से आप अपना पहचान छिपा भी सकते हैं. इसके लिए आपको सेटिंग्स के अंदर प्रिवेसी टैब में जाना होगा.

7. अपना नंबर ट्रू कॉलर के डेटाबेस से हटाएं

ट्रू कॉलर ऐप आपको आपका नंबर अपने डेटाबेस से हटाने का अधिकार देता है. इसके लिए आपको http://www.truecaller.com/unlist पर जाना होगा. इसके बाद कंट्री कोड के साथ अपना मोबाइल नंबर टाइप करें. यहां आपको वजह बतानी होगी कि आप इस नंबर को क्यों हटाना चाहते हैं. इसके बाद Captcha डालना होगा और अनलिस्ट बटन प्रेस करना होगा.

होम लोन लेते समय ध्यान रखें ये खास बातें, होगा ये फायदा

आज हर कोई खुद का घर लेना चाहता है पर महंगाई के इस दौर में घर लेना या खुद का आशियाना लेना आसान नहीं है. ऐसे में आपके घर लेने के सपने को पूरा करता है होम लोन. फाइनैंशियल प्लानर अविनाश दुबे के मुताबिक कार लोन या पर्सनल लोन आप की देनदारी को बढ़ाते हैं, जबकि होम लोन लेने से आप एक संपत्ति के मालिक बनते हैं. कुछ समय तक जरूर इस की ईएमआई भरनी  पड़ती है पर आप को किराया देने से भी तो मुक्ति मिल जाती है. होम लोन लेते वक्त यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो यह यकीनन आप के लिए फायदे का सौदा साबित होगा. आइये जानें होमलोन से जुड़ी कुछ खास बातों के बारें में-

एकसाथ करें आवेदन

अगर आप और आप के कई मित्र एकसाथ होम लोन लें, तो यह लोन आप के लिए सस्ता पड़ेगा. कहने का मतलब है कि जब मिल कर लोन लिया जाता है, तो बैंक या वित्तीय संस्थान को इस की प्रोसैसिंग और कानूनी कार्रवाई पर कम खर्च करना पड़ता है, जिस का फायदा निश्चित तौर पर बैंक ग्राहकों को दिया जाता है. जिसके चलते बैंक आप की प्रोसैसिंग फीस और अन्य शुल्क माफ कर देता है.

महीने के अंत में आवेदन करना बेहतर

अगर आप महीने की 24 तारीख के बाद लोन के लिए आवेदन कर रहे हैं, तो आप को डिस्काउंट मिलने की संभावना ज्यादा होती है. बैंकों की कोशिश होती है कि वे अपने हर महीने का लोन टारगेट पूरा करें. ऐसे में यह संभावना ज्यादा होती है कि इस अवधि में बैंक आप को किफायती दर पर होम लोन उपलब्ध कराएं.

अच्छी क्रैडिट रेटिंग है जरूरी

बैंक अपने पुराने और विश्वसनीय ग्राहकों को किफायती दर पर होम लोन उपलब्ध कराने की कोशिश करते हैं. इसलिए जरूरी है कि आप अपने क्रैडिट कार्ड बिल और बाकी की देनदारियों का भुगतान समय पर करें. इस से आप की क्रैडिट रेटिंग दुरुस्त रहेगी और सस्ता होम लोन मिल सकेगा.

पात्रता का प्रावधान

किसी व्यक्ति को कितना लोन मिलेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उस की ग्रौस सैलरी कितनी है. उदाहरण के तौर पर वेतनभोगी वर्ग को सालाना आय का 4 गुना होम लोन दिया जा सकता है. इस के अलावा चार्टर्ड अकाउंटैंट, डाक्टर जैसे पेशेवरों को उन की सालाना आय का 7 गुना तक लोन दिया जा सकता है.

हालांकि लोन देते वक्त बैंक इस बात का भी खयाल रखते हैं कि व्यक्ति की टेक होम सैलरी या फिर नैट सैलरी ग्रौस सैलरी के 40 फीसदी से कम न हो. इस के अलावा होम लोन के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति की क्रैडिट रिपोर्ट पर भी गौर किया जाता है. अगर कर्ज चुकाने का पुराना रिकौर्ड दागदार है, तो संभव है ऐसे व्यक्ति को लोन मिले ही नहीं या मिले भी तो अपेक्षाकृत अधिक ब्याज दर पर.

बढ़ा सकते हैं होम लोन की पात्रता

आपके लोन की अवधि जितनी लंबी होगी उतना ज्यादा आपको लोन मिल सकेगा. प्रति लाख रुपए पर मासिक किश्त लंबी अवधि के लोन के लिए काफी कम होती है. ऐसी स्थिति में बैंक उसी आय पर ज्यादा लोन दे देते हैं.

अपनी लोन की पात्रता बढ़ाने का दूसरा तरीका यह है कि जिन रिश्तेदारों को बैंक अनुमति देते हैं आप उन की और अपनी आय मिला कर जौइंट लोन ले सकते हैं. इस में आप के जीवनसाथी, बच्चे, माता-पिता या भाई-बहन शामिल हो सकते हैं. एक शादीशुदा महिला भी अपने सास-ससुर या अपने पति की आय मिला कर जौइंट लोन ले सकती है.

हालांकि वह अपने मां-बाप के साथ जौइंट लोन नहीं ले सकती है. अगर आप के पास डाउन पेमैंट देने के लिए पर्याप्त राशि है, तो आप को बड़ा लोन लेने की जरूरत नहीं है. इस से आप पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा नहीं. लोन देते वक्त बैंक आप से किसी पुराने रीपेमैंट की जानकारी मांग सकता है. इस के लिए आप किसी पुराने लोन (कार लोन या फिर किसी अन्य लोन) की रीपेमैंट का प्रूफ दे सकते हैं.

वरिष्ठ नागरिकों को भी है फायदा

आमतौर पर वरिष्ठ नागरिकों को ज्यादा लंबी अवधि वाला लोन नहीं दिया जाता. उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति 60 साल का है, तो उसे ज्यादा से ज्यादा 5 साल तक की अवधि वाला होम लोन ही मिल सकता है. यह समस्या भी जौइंट होम लोन लेने से दूर हो जाती है. अगर कोई वरिष्ठ नागरिक किसी कम उम्र वाले के साथ मिल कर लोन के लिए आवेदन करता है तो उसे लंबी अवधि का लोन भी मिल सकता है.

लोन के लिए आवेदन करने से पहले

क्रैडिट इन्फौर्मेशन ब्यूरो औफ इंडिया लिमिटेड यानी सिबिल से आप अपनी क्रैडिट रिपोर्ट मंगवा कर यह जान सकते हैं कि आप का रिकौर्ड और स्कोर क्या है. साल में एक बार 450 खर्च कर सिबिल से क्रैडिट स्कोर पाने के बाद आप यह जान सकते हैं कि आप का कर्जदाता आप के आवेदन को किस प्रकार देखेगा.

अगर क्रैडिट रिपोर्ट में कोई विसंगति पाई जाती है जैसे आप ने क्रैडिट कार्ड के तमाम बिलों का भुगतान किया हुआ है, लेकिन रिपोर्ट में यह दर्शाया गया है कि आप ने बिलों का भुगतान नहीं किया है और इस कारण आप की क्रैडिट रिपोर्ट प्रभावित हुई है, तो आप भुगतान के सुबूत के साथ संबंधित बैंक से बातचीत कर सकते हैं. ऐसे सुबूत के साथ आप सीधे सिबिल से संपर्क कर अपनी सूचना सही करवा सकते हैं.

इन बातों का रखें खयाल

– नए या फिर जिन कर्जदाताओं के बारे में ज्यादा जानकारी न हो उन से लोन लेने से बचें.

– लोन लेते समय कम से कम 4-5 अलग-अलग कर्जदाताओं की ब्याज दर, लागत, आवेदन प्रक्रिया में सरलता और भुगतान की सरलता तथा पुराने कर्जदारों के अनुभव के बारे में जरूरी  जानकारी ले लें.

– ब्याज दरों और अन्य शुल्क की तुलना के लिए आप औनलाइन पोर्टल का भी सहारा ले सकते हैं.

– कर्जदाताओं के रेट रीसैट, फौर क्लोजर की शर्तों का अध्ययन बेहद जरूरी है.

– ऐसे कर्जदाताओं का चुनाव करें जिन के प्रीपेमैंट के नियम और शर्तें आसान हों.

सोनाली बेंद्रे को क्यों अगवा करवाना चाहते थे शोएब अख्तर

बौलीवुड एक्ट्रेस और क्रिकेटर्स की लव अफेयर की खबरें अक्सर सुर्खियां बटोरने का काम करती है. हाल ही में भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली और अनुष्का शर्मा शादी के बंधन में बंधे हैं. इससे पहले जहीर खान और सगारिका घाटगे ने भी शादी कर अपने प्यार को सही अंजाम तक पहुंचाने काम किया. वहीं स्टार क्रिकेटर युवराज सिंह और हेजल कीच का अफेयर लंबे समय से चल रहा था. दोनों को साथ में कई बार अलग-अलग इवेंट्स पर भी देखा गया और फिर दोनों ने पिछले साल शादी कर ली.

फिल्मी सितारों से अफेयर और उनसे शादी किक्रेटरों का पुराना नाता रहा है. इस लिस्ट में कई पाकिस्तानी क्रिकेटर्स भी रहे हैं जिनका दिल बौलीवुड की हसीनाओं पर ठहर गया था. शोएब अख्तर को दुनिया का सबसे खतरनाक तेज गेंदबाज माना जाता रहा है, लेकिन इस गेंदबाज की रफ्तार भी बौलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे के सामने काफी धीमी पड़ गई थी. दरअसल, एक समय में सोनाली और शोएब की अफेयर को लेकर चर्चाओं का माहौल काफी गर्म था.

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खबरों की मानें तो शोएब अख्तर सोनाली को बेहद पसंद करते थे. वह उनकी तस्वीर को अपने पर्स में लेकर घूमा करते थे. कई बार उनके साथी खिलाड़ियों ने इस बात को नोटिस भी किया. एक इंटरव्यू के दौरान शोएब ने खुद माना था कि उन्हें सोनाली काफी अच्छी लगती है. भारत-पाकिस्तान सीरीज के दौरान इनकी मुलाकात भी हुई थी. लेकिन शोएब का यह प्यार एक तरफा था, क्योंकि सोनाली की तरफ से शोएब के लिए कभी कोई बात सामने नहीं आई.

एक इंटरव्यू के दौरान शोएब ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि अगर सोनाली उनके प्रपोजल को स्वीकार नहीं करेंगी तो वह उन्हें किडनैप कर लेंगे. हालांकि, अब दोनों ही शादीशुदा हैं, सोनाली बेंद्रे ने डायरेक्टर गोल्डी बहल से साल 2002 में शादी की तो वहीं शोएब ने 2014 में रुबाब नामकी एक पाकिस्तानी लड़की से शादी कर अपना घर बसा लिया.

बेहद दिलचस्प है सायरा बानो और दिलीप कुमार की ये कहानी

मधुबाला के अगर बाद हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत अभिनेत्रियों में से अगर किसी का नाम आता है तो वो नाम सायरा बानो का है. अपने जमाने की मशहूर अदाकारा नसीम बानो की बेटी सायरा की पढ़ाई लिखाई विदेश में हुई और पढ़ाई पूरी करने के बाद सायरा बानो फिल्मों मे काम करने का सपना लेकर मुंबई आ गईं.

सायरा बानो आज अपना 72वां जन्म दिन मना रहीं हैं. बौलीवुड की पौपुलर एक्ट्रैस और दिलीप कुमार की पत्नी सायरा बानो आज 72 साल की हो गई हैं. सायरा 1963 से 1969 तक बौलीवुड की तीसरी हाइ पेड एक्ट्रैस रहीं. इसके साथ ही वह 1971 से 1976 तक चौथी हाइएस्ट पेड एक्ट्रैस बनी रही.

अगर दिलीप कुमार और सायरा बानों की लव स्टोरी की बात बात कि जाए तो तो साल 1952 में आई दिलीप कुमार की मूवी “आन” देखकर सायरा उनकी दीवानी हुई, उस समय उनकी उम्र सिर्फ आठ साल थी. सायरा को नहीं पता था कि यह स्टार आगे जाकर उनका जीवनसाथी बनने वाला है. सायरा बानो का परिवार नहीं चाहता था कि वे फिल्मों में काम करें. लेकिन सायरा को अदाकारी का बेहद शौक था. उन्होंने 1961 में फिल्मी “जंगली” से शम्मी कपूर के साथ डेब्यू किया था, उस समय सायरा 16 साल की थी.

खबरों की मानें तो दिलीप ने एक बार सायरा बानो के साथ मूवी करने से मना कर दिया था, क्योंकि उन्हें लगता था कि सायरा उम्र में उनसे बहुत छोटी हैं, उनके साथ रोमांस करना ठीक नहीं. सायरा ने दिलीप को इम्प्रेस करने के लिए एक टीचर से उर्दू और पार्सियन सीखी थी. इतना ही नहीं उन्होंने दिलीप की पसंद और नापसंद के बारे में भी जाना था.

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