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नमस्ते बिहार : अपराध और राजनीतिक गठजोड़ पर बेहतरीन फिल्म

अपराध और राजनेताओं के गठजोड़ को एक मनोरंजक कहानी के साथ बिहार की पृष्ठभूमि में पेश करने वाली फिल्म का नाम है – ‘‘नमस्ते बिहार’’. जिसमें अपराध जगत के साथ साथ मिड डे मील में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर काफी बातें की गयी हैं. फिल्म में बिहार को उर्वरक प्रदेश बताते हुए बिहार के योगदान की गौरव गाथा का भी चित्रण है.

फिल्म की शुरुआत एक गाने के साथ होती है, जिसमें फिल्म के नायक बिहार की गौरव गाथा गाते हुए बिहार की शिक्षा, संस्कृति व बिहार में पैदा हुए महानुभावों व शहीदों की बात करता है. उसके बाद कहानी शुरू होती है पटना से दूर नदी किनारे बसे एक कस्बे में रह रहे निडर व बेबाक नवयुवक डब्लू (राजन कुमार) से. डब्लू अपनी मौसी के साथ रहता है और उसकी मौसी एक स्कूल में मिड डे मील बनाने व बच्चों को खिलाने का काम करती है.

डब्लू के माता पिता भी इसी कस्बे में रहते हैं. मगर वह डब्लू से नाराज चल रहे हैं. उसी कस्बे की लड़की शांति, डब्लू से प्यार करती है. डब्लू तेज दिमाग का प्रतिभाशाली युवक है. मगर कुछ सफेदपोश व दबंग किस्म के लोग उसे अपराध की दुनिया से जोड़ लेते हैं.

डब्लू एक आपराधिक गतिविधियों से जुड़ संगठन ‘‘जय त्रिशूल जय नाग’’ से जुड़ा हुआ है. जिसका मुखिया गेंदा है और गेंदा एक राजनेता प्रभू यादव के लिए काम कर रहा है. एक दिन प्रभू यादव, गेंदा को सभासद बनवा देता है, तो गेंदा डब्लू को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर देते हैं.

डब्लू एक गुमराह युवक जरुर है, लेकिन उसके भी अपने कुछ उसूल व आदर्श हैं. गुंडागर्दी के क्षेत्र में रहते हुए भी उसके अंदर अपने कुछ अच्छे गुण हैं, जिसके चलते समाज में लोग उसकी इज्जत भी करते हैं. इतना ही नहीं खुद डब्लू, रेशमी सिन्हा (भूमिका कलिता) की इज्जत करता है. रेशमी सिन्हा बिहार से प्यार करने वाली बिहार के बेबाक अखबार ‘‘नमस्ते बिहार’’ में कार्यरत इमानदार पत्रकार है. जो कि बिहार को अपराधमुक्त बनाने के मकसद के साथ दिल्ली से बिहार आयी है. डब्लू उनकी लेखनी का दीवाना है.

एक दिन नए सभासद बने गेंदा की हरकतों के चलते स्कूलों में पहुंचने वाला मिड डे मील का अनाज प्रभू यादव के गोदाम में पहुंचने लगता है और सड़ा गला अनाज स्कूल में पहुंचाया जाने लगता है. एक दिन सडे़ गले अनाज की वजह से डब्लू की मौसी के स्कूल कुछ बच्चे मौत के मुंह में समा जाते हैं. इससे डब्लू और रेशमी सिन्हा काफी दुःखी होते हैं. पर गेंदा व प्रभू यादव खुद को, अपने अन्य साथियों व सरकारी अफसरों को बचाने के लिए लिए ऐसा चक्रव्यूह रचते हैं कि डब्लू की मौसी की गिरफ्तारी हो जाती है. उन पर आरोप है कि भोजन में मरी छिपकली की अनदेखी की.

इस पर डब्लू को यकीन नहीं होता. क्योंकि वह स्वयं हर रोज उन्ही स्कूली बच्चों के साथ बैठकर मिड डे मील खाया करता था. पर उस दिन वह देर से पहुंचा था. इसी बीच शांति, रेशमी सिन्हा को असलियत बताती है.      डब्लू सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है, लेकिन जब बात बिहार की अस्मिता की हो, तो वह किसी भी खतरे को मोल लेने के लिए तैयार रहता है. इसीलिए वह बिहार के दुश्मनों के खिलाफ मोर्चा खोल देता है.

अब रेशमी सिन्हा और डब्लू स्कूलों के मिड डे मील के मामले में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर करना शुरू करते है. पहले प्रभू व गेंदा, रेशमी सिन्हा को धमकाते हैं. फिर उसे मारने का ऐलान कर देते हैं. तब डब्लू, रेशमी का साथ देते हुए गेंदा व प्रभू के खिलाफ खड़ा हो जाता है. अब यह दोनों मिड डे मील के भ्रष्टाचार के सबूत पटना जाकर मुख्यमंत्री को देने के लिए निकलते हैं. गुंडे उनके पीछे हैं. पटना में मुख्यमंत्री आवास के पास डब्लू मारा जाता है, पर रेशमी सिन्हा मुख्यमंत्री को सबूत का पेन ड्राइव देती है. सारे अपराधी पकड़े जाते हैं.

पटकथा लेखक की अपनी कुछ कमियों के चलते बेहतरीन विषय वस्तु वाली फिल्म ‘‘नमस्ते बिहार’’ बेहतरीन फिल्म बनते बनते रह गयी. फिल्म के संवाद भी बहुत सतही स्तर के हैं. फिल्म के निर्देशक भी अपने कलाकारों की प्रतिभा का सदुपयोग करने में विफल रहे हैं.

जहां तक अभिनय का सवाल हैं,तो चार्ली चैप्लीन के किरदार को नाटकों में अभिनय कर सैकड़ों पुरस्कार जीतने के साथ ही ‘चार्ली चैप्लीन द्वितीय’ कहलाने वाले अभिनेता राजन कुमार ने फिल्म में डब्लू का किरदार निभाया है. यूं तो राजन कुमार ने अपनी तरफ से पूरी मेहनत की है. पर कमजोर पटकथा व निर्देशक की कमजोरियों के चलते उनका किरदार पूरी तरह से उभर नहीं पाया.

फिल्म की नायिका भूमिका कलिता को अभी बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है. बिहार की कुछ लोकेशनों को खूबसूरती से फिल्माने के लिए कैमरामैन अनिल वाघेला बधाई के पात्र हैं.

दो घंटे आठ मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘नमस्ते बिहार’’ का निर्माण राजन कुमार ने ‘‘ओमकार फिल्म एंड टेलीविजन’’ के बैनर तले किया हैं. फिल्म कौंसेप्ट राजन कुमार का है. जबकि इसके सहनिर्माता एडवोकेट कल्पना एल वासकर व लक्ष्मण कुमार सिंह हैं. निर्देशक लक्ष्मण एन सिन्हा, कैमरामैन अनिल वाघेला, कला निर्देशक गोविंद साहनी, संगीतकार अमन श्लोक, नृत्य निर्देशक गौरव कौशिक, पटकथा लेखक निहाल अहमद तथा फिल्म के कलाकार हैं – राजन कुमार, भूमिका कलिता, मनोज सिन्हा, सोहेल राना, मोनिका कांति, प्रमोद निराला, राजेश कुशवाहा, शशांक देवनायक दास, जितेन्द्र सिंह, हर्ष कुमार, राजीव राय, नवीन वर्मा, परमानंद कुमार, प्रीतम अधिकारी, मिथलेष साहनी, त्रिशा खान, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सतीश प्रसाद सिंह व अन्य.

गूगल मैप के मार्केटिंग ‘ठग’ के खिलाफ कौन पहुंचा है कोर्ट?

आमिर खान को मनोरंजन उद्योग का मार्केटिंग गुरु यूं ही नहीं कहा जाता है. अपनी हर फिल्म की रिलीज के दौरान आमिर ऐसी मार्केटिंग रणनीति अपनाते हैं कि सिनेमाघरों में पब्लिक आने पर मजबूर हो जाती है. गजनी में जहाँ उन्होंने सरेआम लोगों के बाल काटने का फंडा अपनाया तो पीके फिल्म के प्रचार के दौरान भेष बदलकर घूमें. दंगल और सीक्रेट सुपरस्टार के प्रोमोशन के लिए आमिर कई महीनों तक चीन में डेरा जमाये बैठे रहे. और अब जब इस दीवाली उनकी फिल्म ठग्स ऑफ हिंदोस्तान रिलीज को तैयार है तो उन्होंने एक और मार्केटिंग का दांव खेल दिया है.

गधे पर सवार फिरंगी प्रचार

कहा तो यह जा रहा है कि अपने तरह की यह सबसे अनूठी मार्केटिंग स्ट्रेटेजिक मुहीम है. दरअसल इस फिल्म के प्रचार के लिए आमिर और यशराज ने गूगल मैप के साथ एक डील की है. जिसके तहत आमिर खान अब फिरंगी मल्‍लाह वाले किरदार में गूगल पर रास्‍ता दिखाते नजर आएंगे. यानी अब गूगल मैप पर नेविगेशन ऑप्‍शन में आपको आमिर खान का यह नया किरदार रास्‍ता दिखाता नजर आएगा. जैसे ही आप अपने स्मार्टफोन के गूगल मैप पर डेस्टीनेशन इंटर करेंगे अपने गधे पर सवार फिरंगी देसी अंदाज में आपको अपने पीछे चलने के लिए कहेगा. यानी इस योजना के तहत, यात्री अपने एंड्रॉइड या आईओएस स्मार्टफोन पर फिरंगी के साथ ड्राइव करने का विकल्प चुन सकेंगे. जब आज हर के के फोन पर, कैब वालों और डिलीवरी बॉय के पास गूगल मैप का फीचर है तो जाहिर है आमिर खान इस रणनीति के जरिये घर घर पहुंचकर अपनी फिल्म का प्रचार कर रहे हैं और लोगों को सिनेमाघरों का रास्ता भी सुझा रहे हैं. फिल्म की मार्केटिंग के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है.

मल्लाहों ने किया मानहानि का केस

इधर आमिर खान, अमिताभ बच्चन और यशराज फिल्म की रिलीज से पहले नयी नयी टेक्नीक से पब्लिसिटी कर रहै हैं, वहीँ दूसरी तरफ इनके लिए एक और तरह के फ़िल्मी प्रचार का विकल्प खुल गया है. दरअसल इस फिल्म से जाति विशेष की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए उत्तर प्रदेश के जौनपुर में फिल्म के एक्टर आमिर खान, निर्माता और निर्देशक के ख़िलाफ़ मानहानि का केस दर्ज़ कराया गया है. स्थानीय अदालत ने केस दर्ज़ करने वाले वकील हंसराज चौधरी को 12 नवंबर को गवाही के लिए बुला भी लिया है. कहा तो यह भी जा रहा है कि फिल्म का टाइटल बदलने और आमिर खान के किरदार फिरंगी मल्लाह में से फिरंगी शब्द को हटाने के लिए जिले के डीएम के जरिये राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा गया है. वैसे इस मानहानि के केस का आधार यह बताया गया है कि फिल्म में मल्लाह जाति के लोगों के अपमान करने की कोशिश की गई है. और अगर बदलाव नहीं किये अगये तो मल्लाह/निषाद लोगों को ठग समझा जायेगा.

मानहानि के फायदे-नुकसान

वैसे यह केस सिर्फ आमिर के खिलाफ ही नहीं बल्कि निर्माता आदित्य चोपड़ा और निर्देशक विजय कृष्ण आचार्य के ख़िलाफ़ भी दर्ज़ किया है.
लेकिन अच्छी बात यह है कि जब नाई समाज ने बिल्लू बार्बर से बिल्लू शब्द हटवाया था तब भी उस फिल्म को मुफ्त का प्रचार मिला था. ठीक वैसे ही जैसे माधुरी दीक्षित की फ़िल्म आजा नाच ले के गीत से तेली शब्द को हटाने पर हंगामा हुआ था तो  यशराज ने फ्री पब्लिसिटी बटोरी थी. अब यशराज की फ़िल्म ठग्स ऑफ हिंदोस्तान के खिलाफ जब केस हुआ है तो 17 आईएमएएक्‍स और हजारों स्क्रीन्स पर रिलीज होने वाली यह फिल्म एडवांस बुकिंग तो अच्छी पा ही लेगी.

थोक के भाव आहत भावनाएं

पर एक सवाल है जिसे कोर्ट को मुकदमा करने वाले वकीलों से पूछना चाहिए कि आहत भावनाएं जरा दिखाओ तो, ताकि सबको पता चल सके कि भावनाएं आहत होती कैसे हैं.किसी भी जाति, धर्म या समुदाय का व्यक्ति ठग नहीं हो सकता, ऐसा कहाँ लिखा है। ऐसी बेकार की मुकदमेबाजी करने वाले वकीलों को चाहिए कि जज कोर्ट का कीमती समय जाया करने के एवज में फटकार और जुर्माना जरूर लगाएं. वरना इनकी भावनाओं का आहत होना थोक के भाव यों ही जारी रहेगा.

जब प्रियजन या सहेली हो हादसे की शिकार

जिंदगी में कभी भी कोई भी किसी बड़े हादसे का शिकार हो सकता है. सेक्सुअल असाल्ट हो या शारीरिक और मानसिक चोट, एसिड अटैक हो या रेप या. फिर एक्सीडेंट , ऐसे हादसों के बाद इंसान बहुत संवेदनशील और जज्बाती हो जाता है.  अपने साथ हुए हादसे को समझने ,उसे सहने और उस से उबरने की जद्दोजहद में लगा होता है. ऐसे में आप का उसे यह विश्वास जताना बहुत जरूरी है कि आप उस के साथ हैं.

उस की तकलीफ दिल से महसूस कर रहे हैं और उसे इस ट्रोमा से निकालने में हर  मुमकिन साथ देंगे.

कुछ लोग पीड़ित व्यक्ति को हौसला देने के बजाय उस के जख्मों को कुरेदने , अनर्गल बातें बोल कर उसे और भी चोट पहुंचाने का काम कर डालते हैं. ऐसा करने से बचें. आप उस का दर्द दूर नहीं कर सकते मगर  उसे भावनात्मक सपोर्ट  दे कर इस दर्द को सहने के काबिल बना सकते हैं.

आप का कोई प्रिय किसी हादसे का शिकार हो जाए तो कुछ बातों का ख्याल जरूर

रखें.

1. ध्यान रखे कि ट्रोमा बारबार वापस आ सकता है –  कई बार हादसे की एनिवर्सरी या किसी ऐसे शख्स जो अटैक करने वाले शख्स से मिलताजुलता हो, से मुलाकात होना, हादसे का समाचार मीडिया में प्रमुखता से आना या उस घटना से मिलतीजुलती घटनाओं का बारबार होना पीड़िता के दिमाग में उस हादसे की यादें ताजा करती रहती है. ऐसे में उसे सालों बाद भी आप के सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है.

2. उस की बात सुने – पीड़िता के दिमाग से दर्द  निकालने का एक अच्छा तरीका है कि उसे इस बारे में हर बात बोलने का मौका दे.  उस से बारबार  सवाल न पूछे लेकिन वह खुद जो भी कहना चाहती है उसे ध्यान से सुने. उसे अपना  क्रोध, हताशा या पछतावा जाहिर करने दे ताकि उस के अंदर कुछ भी सिसकता  हुआ न रह जाए.

3. गले लगाने से पहले पूछें –  यह मानव स्वभाव है कि आप अपने प्रियजन , जो किसी हादसे से गुजरा है , को गले लगाना या बाहों में भर कर रोना चाहते हैं. मगर कई दफा यह  सही नहीं होता.  खास कर हादसे के तुरंत बाद व्यक्ति फिजिकल टच नहीं चाहता.  उसे डेली रूटीन में वापस आने और सामान्य होने के लिए समय चाहिए होता है.

4. विक्टिम को दोष न दें –   कुछ लोगों की आदत होती है कि किसी हादसे के बाद पीड़िता को ही दोष  देने लगते हैं कि तूने ऐसा क्यों किया, इस तरह के कपड़े क्यों पहने, वहां गई क्यों, उस से फाइट क्यों नहीं, ऐसा होने क्यों दिया वगैरहवगैरह. ऐसा व्यवहार अनुचित है.

5. रिलैक्स होने में मदद करे- जब कोई शख्स ट्रोमा के दौर से गुजरता है और तनाव भरे पल बिता रहा होता है तो उसे फिर से रिलैक्स हो कर जीना सिखाना  जरूरी है. रिलैक्स होने का जरिया अलगअलग होता है.  कोई किताबें  पढ़ कर कोई संगीत सुन कर तो कोई म्यूजिक कंसर्ट्स में जा कर तो कोई बच्चों के साथ खेल कर सुकून पाता है. जरिया कोई भी हो, आप के प्रियजन को जो चीज पसंद हो वह करने को प्रेरित करें.

6. सपोर्ट ग्रुप से मिलवाएं – जब हम अपने जैसे हादसे के शिकार व्यक्तियों से मिलते हैं तो एक अलग ही तरह का कनेक्शन महसूस करते हैं. समाज में बहुत से ट्रॉमा स्पेसिफिक सपोर्ट ग्रुप्स हैं जिन का मेंबर बनने के लिए कोई चार्ज नहीं देना होता.  जैसे चाइल्डहुड एब्यूस और सेक्सुअल एसॉल्ट,  एसिड अटैक आदि.  जितना ही आप का प्रियजन इस ग्रुप के सदस्यों के साथ जुड़ेगा उतनीही  जल्दी ट्रोमा के दर्द से रिकवर होता जाएगा.

7. भूलने को न कहें – हादसे की शिकार पीड़िता से बारबार सब कुछ भूलने को न कहें. वह इतनी सहजता से कुछ भी नहीं भूल सकती. उन्हें जताएं कि आप उन का दर्द समझते हैं और उन की केयर करते हैं.

8. वापस उसी स्थान पर ले जाएं जहां क्राइम हुआ था – अक्सर पीड़िताएं उस जगह पर दोबारा जाने से बचती  है जहां उन के साथ हादसा हुआ था. उस स्थान और परिस्थिति के आते ही वह खौफ महसूस करने लगते हैं.  मगर आप को उन के अंदर का  यह पिता को अपने स्थान पर ले जाएं और कुछ  मीठी और अच्छी यादें क्रिएट करें ताकि उस के दिमाग से कड़वी यादें हल्की पड़ जाए.

मर के जिन्दा हुई सोनम का आखिर क्या था रहस्य

कभीकभी कुछ ऐसी अजीबोगरीब घटनाएं समाज में घट जाती हैं कि सहसा यकीन ही नहीं होता कि ऐसा भी हो सकता है. तकरीबन 6 माह पहले जिस बेटी की अधजली लाश को देख कर पिता दहाड़ें मारमार कर रोने लगा था और मरा समझ कर उस का अंतिम संस्कार तक कर दिया गया था, वह अचानक सामने आई तो सभी के होश फाख्ता हो गए. इतना ही नहीं पिता की तहरीर पर पुलिस ने मामला भी दर्ज कर लिया था और ससुराल वालों को जेल में भी डाल दिया था.

अचानक लापता हो गई थी वह

यह अजीबोगरीब घटना मरका थाना के गौरी ताला गांव की है. इस गांव के रहने वाले कमलेश कुमार की शादी बहादुरपुर निवासी राजकरन यादव की बेटी सोनम से 7 मई, 2014 को हुई. नाजो में पली बिटिया की शादी पिता ने बड़ी धूमधाम से की. शादी के बाद सोनम ससुराल आ गई. पर जैसा कि हर भारतीय घर में होता है, सोनम से ससुराल वाले कुछ ज्यादा ही उम्मीद करने लगे. पिता के घर से ससुराल आई सोनम को माहौल में ढलने में कुछ वक्त लगता, इस से पहले पति कमलेश के साथ उस की लड़ाई होने लगी. इस बीच एक बेटा भी हुआ पर लड़ाई झगड़े कम नहीं हुए. गुस्साई सोनम एक दिन ससुराल छोड़ बाहर निकल गई.
ससुराल वालों ने सोचा मायके गई होगी मगर जब मायके वालों ने भी यहां न आने की बात कही तो हड़कंप मच गया. तब पति ने स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी, जिस में कहा गया कि उस की पत्नी बिना बताए घर छोड़ कर चली गई है.

लाश की शिनाख्त

पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली. इस के कुछ दिनों बाद 21 मई, 2018 को इसी थाना क्षेत्र के नारायनपुर गांव के पास पुलिस को एक अधजली लाश मिली. तब पुलिस ने सोनम के पिता को लाश की शिनाख्त करने के लिए बुलाया. लाश को देखते ही पिता दहाड़ें मारमार कर रोने लगा और लाश को अपनी बेटी सोनम बताया.

इस के बाद सोनम के पति कमलेश, ससुर राजकुमार के साथसाथ सास, देवर और ननद पर दहेज उत्पीडऩ और दहेज हत्या के अंतर्गत धारा 304-बी, 498-ए, 201 आईपीसी व दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 व 4 के तहत पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर दी. पुलिस ने इस पर तुरंत काररवाई करते हुए पति और ससुर को जेल भी भेज दिया.

ससुराल वालों का बुरा हाल

उधर सोनम 3 साल का मासूम बच्चा और ससुराल छोड़ कर दिल्ली भाग गई. यहां वह एक परिचित महिला के सहयोग से नौकरी करने लगी. गुस्से में घर छोड़ कर वह आ तो गई मगर यहां उसे कुछ दिनों बाद घरपरिवार और बच्चे की याद आने लगी.

उधर ससुराल वालों का बुरा हाल था. जमानत पर जेल से बाहर आए तो समाज के लोगों की तिरछी नजरों और पुलिस द्वारा बारबार परेशान करने से एक स्वयंसेवी संस्था की शरण में गए और बताया कि हमें फंसाया गया है. जो लाश मिली थी पुलिस को वह सोनम की लाश नहीं थी यानी उस के जीवित होने की उम्मीद थी. लिहाजा, पति कमलेश कुमार ने बाकियों की मदद से पत्नी सोनम को दिल्ली में ढूंढ़ लिया. इस के बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई.

किए पर पछतावा

सोनम की बरामदगी के बाद मरका थानाध्यक्ष जाकिर हुसैन ने मीडिया से बातचीत में बताया, ”अब चूंकि सोनम जीवित है और उसे अपने किए पर पछतावा है, लिहाजा ससुराल वालों पर दर्ज कराई गई रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.’’

अदालत में बयान दर्ज कराने आई सोनम ने बाद में मीडिया को बताया, ”मेरी वजह से ससुराल वालों के साथ हुई ज्यादती का मुझे दुख है. अब मैं पति और बच्चे के साथ ससुराल में ही रहना चाहती हूं.’’

क्या कानून अंधा होता है

अब सोनम वापस उसी घर में है जहां से वह मामूली लड़ाईझगड़े के बाद भाग गई थी. तब उसे न पति का चेहरा याद आया न 3 साल के मासूम बच्चे की.

उस की नादानी की वजह से 2 परिवारों में गलतफहमी की दीवार खड़ी हो गई और रिश्तेदारी दुश्मनी में बदल गई. पतिपत्नी के बीच के झगड़े में तुनक कर घर से भागने के बाद खुशहाल कोई न रह सका उलटे सब की मुसीबत ही बढ़ गई. ससुराल वालों को इस दौरान कितनी जलालत सहनी पड़ी होगी यह वही बता सकते हैं, जिसे समाज के लोग और रिश्तेदार दोनों अपराधी मान रहे थे. पर जिस कानून के हाथ लंबे होते हैं, पुलिस ने बिना गहरी तफ्तीश के कई बेगुनाहों को जेल भेज दिया. कोई अगर बोलता है कि कानून अंधा होता है, तो क्या यह गलत है?

 

अब व्हाट्सऐप ग्रुप में कर सकेंगे प्राइवेट चैट, नया फीचर लौंच

व्हाट्सऐप ने अपने यूजर्स के लिए नया फीचर जारी किया है. नए अपडेट के बाद व्हाट्सऐप यूजर्स ग्रुप चैटिंग के दौरान भी प्राइवेट मैसेज कर पाएंगे. इस फीचर का नाम कंपनी ने रिप्लाई प्राइवेट रखा है. इसकी मदद से आप किसी भी व्हाट्सऐप ग्रुप में लोगों को प्राइवेट मैसेज भेज सकेंगे.

इस फीचर के आने के बाद ग्रुप में आए किसी मैसेज पर रिप्लाई के लिए क्लिक करने पर व्हाट्सऐप खुद ही आपको प्राइवेट चैटिंग में ले जाएगा और आपके सामने उस व्यक्ति का चैट खुल जाएगा जिससे आप निजी बातचीत करना चाहते हैं, हालांकि इसमें कुछ खास नया नहीं है, क्योंकि अभी भी ग्रुप में आए किसी मैसेज पर क्लिक करके आप प्राइवेट रिप्लाई कर सकते हैं. व्हाट्सऐप के इस फीचर का यह फायदा होगा कि जिस ग्रुप में सिर्फ एडमिन ही मैसेज भेज सकता हैं, उस ग्रुप में आप एडमिन को मैसेज कर सकेंगे.

उदाहरण के जरिए समझें तो मान लीजिए किसी ग्रुप में महेश नाम का व्यक्ति कोई मैसेज भेजता है लेकिन आप महेश से प्राइवेट बात करना चाहते हैं तो आप महेश के नाम पर क्लिक करेंगे तो आपको वीडियो चैटिंग और मैसेज का विकल्प मिल जाएगा. नए अपडेट में व्हाट्सऐप इसी फीचर को थोड़ा मोडिफाई कर रहा है.

जानकारी के मुताबिक व्हाट्सऐप के एंड्रायड के बीटा वर्जन 2.18.335 पर इस फीचर को देखा जा सकता है. व्हाट्सऐप के इस नए फीचर की टेस्टिंग फिलहाल एंड्रायड के बीटा वर्जन पर हो रही है.

त्यौहारी सीजन में बचें इन लुभावने औफर से वरना लगेगी भारी चपत

दिवाली आने को है ऐसे में इस त्यौहारी सीजन में कंपनियां अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए कई तरह के मार्केटिंग ट्रिक्स का इस्तेमाल करती हैं और कई लुभावने औफर देती हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्राहक उनके सामान को खरीद सके. इस सीजन में सभी तरह के उत्पादों जैसे कि अपैरल, गैजेट्स, कार और घर पर विशेष औफर और भारी छूट दी जा रही है. लेकिन इन औफर और छूट के चक्कर में कई बार लोग अपने बजट से ज्यादा पैसा खर्च कर देते हैं.

आज हम आपको वो ही मार्केटिंग ट्रिक्स बताएंगे, जिनसे बचकर रहना चाहिए क्योंकि इसके चक्कर में आपकी गाढ़ी कमाई बर्बाद नहीं होगी.

पहला : भावनात्मक तरीके से खेलना

विज्ञापनदाता इस सीजन में हमेशा लोगों को भावनात्मक तरीके से सामान खरीदने पर जोर देते हैं. इस समय लाखों ऐसे विज्ञापन और मार्केटिंग कैंपेन हैं जिनके जरिए लोगों को इस तरह से सामान खरीदने का लालच दिया जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि त्योहार के वक्त ही हम ज्यादा पैसा खर्च करके खुशियां मनाने की सोचते हैं. ऐसा करने के लिए समाज भी हमें प्रेरित करता है.

दूसरा : छलावा होती है 50 % छूट

दुकानदारों व ई-कौमर्स कंपनियों द्वारा इस दौरान दी जाने वाली 50 % छूट भी एक तरह का छलावा होती है. क्योंकि बिक्री बढ़ाने के लिए यह छूट कुछ ऐसे उत्पादों पर दी जाती है, जिनको आप खरीदना भी पसंद नहीं करेंगे. वहीं जिन उत्पादों को आप खरीदना चाहते हैं, उन पर किसी तरह की कोई छूट नहीं दी जाती.

बैंक और कंपनियों का होता है सबसे ज्यादा फायदा

ई-कौमर्स कंपनियां, डिपार्टमेंटल स्टोर्स, रिटेल शाप से बैंकिंग और फाइनेंस कंपनियां अपनी सेल बढ़ाने के लिए कैश-बैक औफर को लेकर टाईअप करती है. इसके पीछे जो एजेंडा होता है कि उपभोक्ताओं से अधिक खर्च कराना.

इसके एवज में कंपनियां एक निश्चिचत फीसदी रकम उस बैंक या फिर एनबीएफसी कंपनियों को देती हैं जिससे उपभोक्ता खरीददारी करते हैं. इससे कंपनी और बैंक दोनों का फायदा होता है. कंपनी की अधिक से अधिक खरीददारी होती है और उससे बैंक को एक फिक्स कमीशन मिल जाता है. बैंक इसमें से कुछ भाग कार्ड होल्डर को रिवार्ड प्वाइंट या कैश-बैक के तौर पर पास कर देती है.

चौथा : कैशबैक जैसा लुभावना औफर

कैशबैक के चक्कर में लोग ज्यादा सामान भी खरीद लेते हैं, जिनकी उन्हें जरुरत भी नहीं होती है. उदाहरण के तौर पर 5 हजार रुपये का सामान खरीदने पर 500 का कैशबैक औफर आता है या फिर कंपनियां डिनर सेट और अन्य प्रकार के गिफ्ट भी रखती हैं. इससे लोगों को लगता है कि वो ज्यादा खरीददारी करके एक जरुरत का सामान फ्री में घर ले जा सकेंगे. लेकिन अगर आप उस उत्पाद की वास्तविक कीमत को चेक करेंगे तो हकीकत में उतना सामान खरीदने की जरुरत नहीं पड़ेगी.

तीसरा : त्यौहारों में ही क्यों दिए जाते हैं इस तरह के औफर

साल भर के मुकाबले अक्टूबर से लेकर के दिसंबर के बीच ज्यादा सेल होती है. कंपनियों का साल भर का पूरा ऐवरेज इन तीन महीनों में निकल जाता है. सेल को बढ़ाने के लिए यह औफर निकाले जाते हैं और इसके लिए प्रचार-प्रसार भी खूब किया जाता है.

रिलायंस स्टोर से भी खरीद सकेंगे रियलमी स्मार्टफोन

चीन की स्मार्टफोन  कंपनी रियलमी  ने अपने स्मार्टफोन की औफलाइन बिक्री के लिए ऐलान किया है. रियलमी की औफलाइन बिक्री रिलायंस स्टोर से होगी. अब ग्राहक इस फोन को रिलायंस स्टोर से खरीग सकेंगे. कंपनी अगले साल जनवरी से टौप 10 शहरों में अपने डिस्ट्रिब्यूटर पार्टनर्स का विस्तार करने वाली है.

इस भागीदारी पर खुशी जाहिर करते हुए, रियलमी के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी माधव सेठ ने कहा, ‘रिलायंस स्टोर्स के साथ पार्टनशिप के बाद हमें गर्व है कि अब हमारे पास अपने स्मार्टफोन की डिलिवरी के ज्यादा विकल्प हैं. बाजार से हमें अच्‍छी प्रतिक्रिया मिली है, हम बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपने बिक्री चैनल्‍स का विस्‍तार कर रहे हैं.’

उन्‍होंने कहा, ‘इस भागीदारी के जरिए, हम ऐसे कस्टमर्स की जरूरतों को पूरा करना चाहते हैं, जिनके पास औनलाइन प्‍लैटफॉर्म तक पहुंचने की सुविधा नहीं है और जो कोई भी फोन खरीदने से पहले उसकी तुलना कर, उसके अंतर को समझना चाहते हैं.’

आपको बता दें, ओप्पो की सब-ब्रैंड कंपनी रियलमी अब एक स्वतंत्र ब्रैंड बन चुकी है, जो दुनियाभर के युवाओं को टारगेट कर स्मार्टफोन तैयार करने पर फोकस कर रही है. यूथ ब्रैंड के रूप में रियलमी अपने ग्राहकों को अपने पावर और स्‍टाइल से भरपूर प्रौडक्ट के साथ एक अलग अनभव देना चाहती है.

धोनी खेलेंगे या नहीं 2019 का वर्ल्डकप? कोहली ने दिया जवाब

वेस्टइंडीज और औस्ट्रेलिया सीरीज से बाहर होने के बाद क्रिकेट फैंस और मीडिया में धोनी के करियर और भविष्य को ले कर काफी कयास लगाए जाने लगे थे. बात यहां तक होने लगी थी कि धोनी का क्रिकेट करियर अब खत्म हो गया है. लोगों का मानना था कि शायद धोनी को वर्ल्डकप के लिए भी नहीं चुना जाएगा और वो खुद सन्यास ले लेंगे. इन बातों ने धोनी के फैंस को काफी परेशान किया.

इन तमाम अटकलों और अंदाजों के बीच हम आपको सही सूत्र से सही खबर बताएंगे, जिसपर आप आंख बंद कर के भरोसा कर सकते हैं. खबर है कि धोनी कम से कम 2019 वर्ल्डकप तक तो भारतीय क्रिकेट का हिस्सा रहेंगे.

इस बात की जानकारी खुद कप्तान कोहली ने दी है. विराट ने कहा कि धोनी को ले कर लोग फालतू भरी बातें कर रहे हैं. सारी बातें अफवाह हैं. वो अबी सन्यास नहीं लेंगे. कोहली ने आगे कहा कि धोनी भारतीय क्रिकेट के अभिन्न अंग हैं और 2019 वर्ल्डकप जरूर खेलेंगे.

कोलही ने आगे बताया कि धोनी इसलिए टीम से बाहर हैं क्योकि वो खुद नए और युवा खिलाड़ियों को ज्यादा मौका देना चाहते हैं. अगर कोहली के बयान को समझा जाए तो मतलब धोनी खुद ही टी-20 टीम से बाहर हुए हैं ना कि उन्हें टीम से बाहर किया गया है.

धोनी के हालिया क्रिकेट परफार्मेंस पर गौर करें तो समझ आएगा कि धोनी अपने खेल में जूझ रहें हैं. साल 2018 में उन्होंने 19 मैच खेलें. इस दौरान उन्होंने 25 रनों की औसत और 68.10  की स्ट्राइक रेट से 252 रन बनाए. बता दें कि धोनी के करियर का ये सबसे न्यून्तम स्ट्राइक रेट है.

प्रदूषित हवा के चलते दिल्ली में जौब ठुकरा रहे उच्च स्तर के प्रोफेशनल्स

देश की राजधानी में खतरनाक स्तर के प्रदूषण के चलते उच्च स्तर के प्रोफेशनल्स राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में जौब करने से कतरा रहे हैं. विदेश से लौटने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स भी दिल्ली में काम नहीं करना चाहते.

दक्षिण भारत के शहर बेंगलुरु की एक टेक्नोलौजी कम्पनी में काम करने वाले एनालिटिक्स हेड ने दिल्ली में 40 फीसदी ज्यादा सैलरी वाली नौकरी करने से मना कर दिया. यह इस तरह का एकलौता मामला नहीं है, कई लोग ऐसा पहले कर चुके हैं. उच्च स्तर की नौकरी में प्रदूषण बड़ा मुद्दा बन गया है.

सर्च कंपनियों के मुताबिक़, दिल्ली-एनसीआर में नौकरी ठुकराने वाले ऐसे उच्च प्रोफेशंल्स मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, चेन्नई जैसी साफ़ आबोहवा वाले शहरों में मौके तलाश रहे हैं. कोर्न फेरी, ईएमए पार्टनर्स,  हंट पार्टनर्स, ट्रांसर्च और ग्लोबल हंट जैसी एग्जीक्यूटिव सर्च कंपनियों ने बताया है कि सीईओ-सीएफओ-सीओओ स्तर के जौब औफर के लिए उन से संपर्क करने वाला हर तीसरा शख्स दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषण से चिंतित है.

एग्जीक्यूटिव सर्च कंपनियों ने जानकारी दी है कि कुछ हफ़्तों में दिल्ली-एनसीआर में जिन उच्च अधिकारियों ने नौकरी ठुकराई है, उन में कंज्यूमर मार्केट्स सेगमेंट में मुंबई की एक कंपनी के ग्रुप फाइनेंस हेड, उत्तर प्रदेश की एक दवा कंपनी के एचआर हेड, चेन्नई की एक कंपनी के ओपरेशंस हेड और बेंगलुरु की एक ऑटो कंपनी के क्वालिटी हेड शामिल हैं.

जागरूकता का आलम यह है कि कंपनियों के उच्च अधिकारियों से ज्यादा उन के परिवार वाले दिल्ली-एनसीआर में नहीं आना चाहते.  सर्च कंपनियों का यह भी कहना है कि आने वाले वर्षों में यह समस्या और भी बढ़ सकती है क्योंकि दिल्ली में प्रदूषण की समस्या का कोई हल नहीं दिख रहा है.  यह बहुत गंभीर मसला  बन गया है. ना सिर्फ भारतीय दिल्ली-एनसीआर के जौब औफर ठुकरा रहे हैं बल्कि विदेश से लौटने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स और भारत में काम करने आए विदेशी लोग भी यहाँ नहीं आना चाहते.

भारी प्रदूषण या यों कहें कि जानलेवा स्तर के प्रदूषण के चलते एग्जीक्यूटिव्स यहां शिफ्ट नहीं होना चाहते.  लेकिन जैसेजैसे यहां प्रदूषण कम होता है, उच्च स्तर की नौकरी तलाशने वाले दिल्ली आने को तैयार हो जाते हैं. गर्मी के मौसम में ऐसे जौब औफर्स को स्वीकार करने वालों की कमी नहीं होती क्योंकि तब हवा प्रदूषण को लेकर ऐसी चिंता सामने नहीं होती.

‘बाटला हाउस’ में लीड रोल निभाएंगी दिलबर गर्ल

‘दिलबर गर्ल’ नोरा फतेही ‘बाटला हाउस’ में लीड रोल में दिखेंगी. इस फिल्म में  जौन अब्राहम और नोरा फतेही फिर से एक-साथ दिखाई देंगे. जी हां सही सुना आपने. आपको बता दें, इससे पहले दोनों कलाकार फिल्म ‘सत्यमेव जयते’ के ‘दिलबर दिलबर’ गाने में साथ नजर आ चुके हैं. दरअसल जौन अब्राहम की आने वाली फिल्म ‘बाटला हाउस’ में अभिनेत्री नोरा फतेही अहम किरदार निभाने वाली हैं.

नोरा इस फिल्म में काम करने को लेकर बेहद उत्साहित हैं. फिल्म में लिए जाने की खबर खुद नोरा ने अपने ट्विटर हैंडल के ज़रिए अपने फैंस को सूचित की है. उन्होंने ट्वीट कर बताया कि वो जौन की फिल्म में मुख्य भूमिका निभाएंगी.

नोरा फतेही ने लिखा है कि मुझे ये एलान करते हुए खुशी हो रही है कि मैं ‘बाटला हाउस’ में मुख्य भूमिका निभा रही हूं. मैं जौन अब्राहम, निखिल आडवाणी, भूषण कुमार और फिल्म की टीम के साथ काम करने को लेकर बेहद उत्साहित हूं. आपको बता दें, जौन अब्राहम की ये फिल्म साल 2008 में दिल्ली के बाटला हाउस इलाके में हुए एनकाउंटर पर आधारित है. इस फिल्म का निर्देशन निखिल आडवाणी करेंगे. इस फिल्म की पटकथा रितेश शाह ने लिखी है. फिल्म में जौन और नोरा के अलावा अब्दुल कादिर अमीन, क्रांति प्रकाश झा और आलोक पांडे जैसे कलाकार नज़र आएंगे. फिल्म अगले साल रिलीज़ होगी.

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