आमिर खान को मनोरंजन उद्योग का मार्केटिंग गुरु यूं ही नहीं कहा जाता है. अपनी हर फिल्म की रिलीज के दौरान आमिर ऐसी मार्केटिंग रणनीति अपनाते हैं कि सिनेमाघरों में पब्लिक आने पर मजबूर हो जाती है. गजनी में जहाँ उन्होंने सरेआम लोगों के बाल काटने का फंडा अपनाया तो पीके फिल्म के प्रचार के दौरान भेष बदलकर घूमें. दंगल और सीक्रेट सुपरस्टार के प्रोमोशन के लिए आमिर कई महीनों तक चीन में डेरा जमाये बैठे रहे. और अब जब इस दीवाली उनकी फिल्म ठग्स ऑफ हिंदोस्तान रिलीज को तैयार है तो उन्होंने एक और मार्केटिंग का दांव खेल दिया है.

गधे पर सवार फिरंगी प्रचार

कहा तो यह जा रहा है कि अपने तरह की यह सबसे अनूठी मार्केटिंग स्ट्रेटेजिक मुहीम है. दरअसल इस फिल्म के प्रचार के लिए आमिर और यशराज ने गूगल मैप के साथ एक डील की है. जिसके तहत आमिर खान अब फिरंगी मल्‍लाह वाले किरदार में गूगल पर रास्‍ता दिखाते नजर आएंगे. यानी अब गूगल मैप पर नेविगेशन ऑप्‍शन में आपको आमिर खान का यह नया किरदार रास्‍ता दिखाता नजर आएगा. जैसे ही आप अपने स्मार्टफोन के गूगल मैप पर डेस्टीनेशन इंटर करेंगे अपने गधे पर सवार फिरंगी देसी अंदाज में आपको अपने पीछे चलने के लिए कहेगा. यानी इस योजना के तहत, यात्री अपने एंड्रॉइड या आईओएस स्मार्टफोन पर फिरंगी के साथ ड्राइव करने का विकल्प चुन सकेंगे. जब आज हर के के फोन पर, कैब वालों और डिलीवरी बॉय के पास गूगल मैप का फीचर है तो जाहिर है आमिर खान इस रणनीति के जरिये घर घर पहुंचकर अपनी फिल्म का प्रचार कर रहे हैं और लोगों को सिनेमाघरों का रास्ता भी सुझा रहे हैं. फिल्म की मार्केटिंग के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है.

मल्लाहों ने किया मानहानि का केस

इधर आमिर खान, अमिताभ बच्चन और यशराज फिल्म की रिलीज से पहले नयी नयी टेक्नीक से पब्लिसिटी कर रहै हैं, वहीँ दूसरी तरफ इनके लिए एक और तरह के फ़िल्मी प्रचार का विकल्प खुल गया है. दरअसल इस फिल्म से जाति विशेष की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए उत्तर प्रदेश के जौनपुर में फिल्म के एक्टर आमिर खान, निर्माता और निर्देशक के ख़िलाफ़ मानहानि का केस दर्ज़ कराया गया है. स्थानीय अदालत ने केस दर्ज़ करने वाले वकील हंसराज चौधरी को 12 नवंबर को गवाही के लिए बुला भी लिया है. कहा तो यह भी जा रहा है कि फिल्म का टाइटल बदलने और आमिर खान के किरदार फिरंगी मल्लाह में से फिरंगी शब्द को हटाने के लिए जिले के डीएम के जरिये राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा गया है. वैसे इस मानहानि के केस का आधार यह बताया गया है कि फिल्म में मल्लाह जाति के लोगों के अपमान करने की कोशिश की गई है. और अगर बदलाव नहीं किये अगये तो मल्लाह/निषाद लोगों को ठग समझा जायेगा.

मानहानि के फायदे-नुकसान

वैसे यह केस सिर्फ आमिर के खिलाफ ही नहीं बल्कि निर्माता आदित्य चोपड़ा और निर्देशक विजय कृष्ण आचार्य के ख़िलाफ़ भी दर्ज़ किया है.
लेकिन अच्छी बात यह है कि जब नाई समाज ने बिल्लू बार्बर से बिल्लू शब्द हटवाया था तब भी उस फिल्म को मुफ्त का प्रचार मिला था. ठीक वैसे ही जैसे माधुरी दीक्षित की फ़िल्म आजा नाच ले के गीत से तेली शब्द को हटाने पर हंगामा हुआ था तो  यशराज ने फ्री पब्लिसिटी बटोरी थी. अब यशराज की फ़िल्म ठग्स ऑफ हिंदोस्तान के खिलाफ जब केस हुआ है तो 17 आईएमएएक्‍स और हजारों स्क्रीन्स पर रिलीज होने वाली यह फिल्म एडवांस बुकिंग तो अच्छी पा ही लेगी.

थोक के भाव आहत भावनाएं

पर एक सवाल है जिसे कोर्ट को मुकदमा करने वाले वकीलों से पूछना चाहिए कि आहत भावनाएं जरा दिखाओ तो, ताकि सबको पता चल सके कि भावनाएं आहत होती कैसे हैं.किसी भी जाति, धर्म या समुदाय का व्यक्ति ठग नहीं हो सकता, ऐसा कहाँ लिखा है। ऐसी बेकार की मुकदमेबाजी करने वाले वकीलों को चाहिए कि जज कोर्ट का कीमती समय जाया करने के एवज में फटकार और जुर्माना जरूर लगाएं. वरना इनकी भावनाओं का आहत होना थोक के भाव यों ही जारी रहेगा.

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