पैसा कमाने के लिए लोग अपने परिवार को छोड़ कर बाहर दूसरी जगह भी जाते हैं. कहावत है कि बाप बड़ा न भैया सब से बड़ा रुपैया. पैसा एक ऐसी चाह है जिस के पास ज्यादा हो वह परेशान, जिस के पास कम हो उसे अधिक पाने की लालसा. यही लालसा परिवार और समाज पर भारी पड़ती है. पैसे को ले कर अकसर रिश्तों में दरार आ जाती है.

कभीकभी पैसा ऐसा विवाद बन जाता है जो समाज में रिश्तों को शर्मिंदगी की ओर ढकेलता है, अपनों के बीच खींचातानी, परिवार में लड़ाईझगड़े, मारपीट आदि. यहां तक कि लोग अपनों का खून बहाने में जरा सा भी परहेज नहीं करते हैं. कहा जाता है कि दुनिया में 3 चीजें हैं जो अपनों को आपस में लड़ा देती हैं-जर, जोरू और जमीन. ये ऐसी चीजें हैं जिन से एक हंसताखेलता परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच जाता है.

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अगर सब ठीक न रहा तो रिश्तों की मिठास में ये चीजें जहर का काम करती हैं. इंसान की प्रवृत्ति में बराबरी की चाह सब से खतरनाक बीमारी है. जब लोगों के जेहन में यह चाह बैठ जाती है तो फिर परिवार और रिश्तों में नया मोड़ आता है. वह मोड़ आपसी कलह और विवाद का होता है. एक बार जब आपसी मतभेद शुरू हो जाते हैं तो परिवार के हालात को सुधारना काफी मुश्किल होता है. ऐसे में पारिवारिक रिश्तों को समझना जरूरी होता है. कई परिवारों को सिर्फ पैसे के विवाद को ले कर टूटते देखा गया है. पैसे के विवाद को ले कर अकसर अखबारों और खबरिया चैनलों में खबरें आती हैं, कहीं भाई ने भाई को मारा तो कहीं पुत्र ने पिता को. लोग पैसे को ले कर क्या अपने, क्या पराए का खून बहाने में जरा सा संकोच नहीं करते. पारिवारिक रिश्ते को चलाने और निभाने के लिए दिल में बहुत सहनशक्ति होनी चाहिए.

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