मेरा प्यारा सा परिवार , जिसमें मैं , मेरे हस्बैंड, मेरी मां जैसी सासू मां साथ रहते हैं. पिता सामान ससुर का देहांत हुआ काफी वर्ष हो गए थे. तक से माँ अकेली हो गई थी. मेरी शादी को अभी 3 साल ही हुए हैं , लेकिन परिवार से इतना प्यार मिला कि मुझे अपने मायके की कमी ही महसूस नहीं होती है. बस अफ़सोस इस बात का होता था कि माँ को छोड़कर जब हम नौकरी के लिए रोज़ाना घर से बाहर जाते थे तो वे भले ही कुछ नहीं कहती थी लेकिन उनकी आंखे व चेहरे के हावभाव साफ़ बताते थे कि जैसे वे कहना चाहती हो कि बेटा तुम जल्दी घर आ जाना. लेकिन सब की मजबूरियो व सब पर घर को चलाने की जिम्मेदारियों के चलते किसी को कुछ बोल नहीं पा रही थी. उनके अकेलापन को हम भी समझ रहे थे लेकिन चाहा कर भी कुछ नहीं कर पा रहे थे. क्योंकि घर का लोन चुकाने के लिए दोनों का कमाना बहुत जरूरी था.

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