मेंटल डिसऔर्डर को लेकर आज भी भारत में बहुत कम जागरूकता है. इस वजह से अक्सर इलाज तब शुरू हो पाता है, जब स्थिति काफी बिगड़ जाती है. हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह सामने आया है कि घातक बीमारियों की तुलना में दिमागी तनाव ज्यादा खतरनाक है. इस अध्ययन में पाया गया कि लोग एचआईवी, टीबी और डायबिटीज जैसी घातक बीमारियों की वजह से कम, लेकिन डिप्रेसिव डिसऑर्डर के कारण ज्यादा बीमार पड़ रहे हैं और इससे उनकी मौत भी हो रही है. एक अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में बीमारियों की वजह से हो रही मौतों में से 40 प्रतिशत हिस्सेदारी दिमागी डिसऑर्डर से जुड़ी है.

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