आज का युवा औसतन पूरे दिन में लगभग दस से चौदह घंटे मोबाइल फोन, टीवी, कम्प्यूटर, टैबलेट जैसे इलेक्ट्रौनिक डिवाइस के साथ समय बिताता है. इन इलेक्ट्रौनिक चीजों के लगातार इस्तेमाल से सेहत पर बुरा असर पड़ता है. मानसिक तनाव बढ़ने से कई रोग शरीर को घेर लेते हैं. यही वजह है कि आजकल युवाओं में तनाव, डिप्रेशन, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां बढ़ रही है. डौक्टर कहते हैं अगर इलेक्ट्रानिक चीजों के साथ बिताए जा रहे समय को कसरत करने, पढ़ने लिखने, म्यूजिक सुनने जैसी चीजों में खर्च किया जाए तो इससे आपका दिन व्यर्थ नहीं जाएगा और सेहत पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा. सुखी और स्वस्थ रहने के लिए अपने लाइफस्टाइल में थोड़ा सा बदलाव लाएं और देखें कि नतीजे कितने सुखद होते हैं.

लंबी वाक पर जाएं

आप रोज के कई घंटे अपनी सीट पर बैठकर कम्प्यूटर के सामने बिताते हैं, इससे शरीर तो सुस्त पड़ता ही है, साथ ही दिमाग पर भी तनाव बढ़ जाता है. इसलिए ये जरूरी है कि काम से अलग रोज कुछ समय आप वाकिंग को दें. पैदल चलने से हृदय सुचारू रूप से काम करता है जिससे ज्यादा खून और औक्सीजन दिमाग सहित पूरे शरीर में पहुंचता है और आप तरोताजा फील करते हैं.

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संगीत सुनें

मोबाइल और टीवी पर समय व्यर्थ करने से बेहतर है कि आप वह टाइम म्यूजिक सुनने में बिताएं. एक अध्ययन के मुताबिक संगीत सभी तरह के कामों को बेहतर बना देता है. संगीत की धुन दिमाग में तरंगे पैदा करती है जो आपके मूड को ठीक करती है, आपको ऊर्जा देती है, सकारात्मकता और एकाग्रता बढ़ाती है.

एक काम पूरा होने के बाद दूसरा शुरू करें

दिन का सदुपयोग करने का एक तरीका यह भी है कि आप तब तक कोई दूसरा काम शुरू न करें जब तक पहला काम खत्म न हो जाए. एक ही समय पर कई अधूरे टास्क लेने से समय और क्षमता की बर्बादी ही होती है. इसके लिए सबसे बेहतर तरीका है कि रोज अपने कार्यों की लिस्ट बनाएं, जो सबसे मुश्किल से शुरू होकर सबसे आसान पर खत्म होती हो.

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जल्दी उठना शुरू करें

सुबह जल्दी उठना दिन को बेहतर बनाने का सबसे अच्छा उपाय है. इससे आप अपने पूरे दिन को प्लान कर सकते हैं. अपने वर्किंग आवर्स शुरू होने से दो-तीन घंटा पहले उठने से पूरा दिन व्यवस्थित रहता है और किसी भी काम को लेकर हड़बड़ी नहीं होती है. इससे आप हमेशा तनावमुक्त बने रहते हैं.

न कहना सीखें

विशेषज्ञों का माना है कि अगर आप औफिस में हर काम को ‘हां’  कहकर उसे करने की कोशिश करेंगे तो सिर्फ अपना बोझ ही बढ़ाएंगे. इनकार करना, आपकी कमजोरी नहीं दर्शाता है, बल्कि यह अपने काम को प्राथमिकता देने की प्रक्रिया है. इससे आप सही समय पर सही मौकों को चुनते हैं. इसलिए बौस की नजर में अच्छा बनने के लिए फालतू के कामों के लिए ‘हां’  कहने से बचें और वह काम करें जो ज्यादा जरूरी हैं.

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