खरगोन शहर के बिस्टान रोड स्थित नाका क्षेत्र में हनुमान जयंती के अवसर पर रात 9 बजे से 2 बजे तक अत्यधिक तेज ध्वनि में भजनों का कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस में विडंबना देखिए कि 10 से 12 लोग भजन मंडली के और 10 से 12 लोगों का ही श्रोता समूह था, जिन्होंने रात्रि 2 बजे तक महल्ले के तमाम लोगों की नींद व शांति भंग कर दी थी. चूंकि धर्म का मामला है, इसलिए किसी में विरोध करने की हिम्मत ही नहीं. धर्म के इन कथित ठेकेदारों को किस धर्म ने, किस कानून ने इस तरह की छूट दे रखी है, यह बात समझ से परे है. लोगों की शांति भंग करने का हक जबरिया हासिल करने वाले ये धर्म के ठेकेदार किसी भी तरह से जबरिया हफ्ता वसूल करने वाले किसी गुंडे, दादा या मवाली से कम नहीं हैं.

अनिल कुमार गुप्ता, खरगोन (म.प्र.)

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मेरे ननिहाल में एक युवक ने भोजन के समय मौनव्रत का नियम बना रखा था. यह क्रम काफी दिनों से चल रहा था. एक दिन वह भोजन पर बैठा. खाना शुरू हुआ. माताजी पंखा झल रही थीं. युवक को नीबू खाने की चाह जगी. भोजन के समय मौनव्रत भंग तो कर नहीं सकता था इसलिए इशारे से वह अपनी इच्छा व्यक्त करने लगा. न तो युवक सही इशारा कर पा रहा था न मां उस के भाव को समझ पा रही थीं. मां कभी टमाटर, कभी लड्डू, कभी अन्य वस्तुएं लाती गईं. युवक एकएक कर फेंकता गया. इसी क्रम में अनावश्यक वस्तुओं का ढेर लग गया. आखिरकार, युवक गुस्से में आ कर बोल पड़ा. सोचने वाली बात है, मौनव्रत के कारण उसे  ‘क्रोध तो खूब पीना पड़ा पर पेट नहीं भरा.’

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