Pollution 2025 : 2013 की सर्दियों में बीजिंग और दिल्ली दोनों शहरों में AQI 500–600 पर था लेकिन 2024–25 में बीजिंग ने अपना AQI लगभग 50-60 कर दिया जबकि दिल्ली आज भी 500–600 के बीच अटकी है.

बीजिंग में 2013 के बाद सरकार ने इसे गंभीरता से लिया और भारी कोयला आधारित पावर प्लांट शहर से बाहर कर दिए, प्रदूषण करने वाले उद्योगों पर कड़ी कार्यवाही की, निर्माण स्थलों पर सख्त धूल नियंत्रण लागू किया, और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को सभी तरह के टैक्स से मुक्त कर इसे आम जनता तक पहुंचा दिया. यही कारण था की 2013 से 2024 के बीच बीजिंग का PM2.5 स्तर लगभग 60% तक घट गया.

बीजिंग में 2013 के बाद चीन ने पावर प्लांट शहर से बाहर धकेल दिए, कोयले को “राष्ट्रीय खलनायक” घोषित कर दिया, गैसीफिकेशन लागू किया, भारी उद्योग शहर से दूर कर दिए गए. यह सारी कवायदें की चमत्कार से कम नहीं थी. सरकार ने सिर्फ बयानबाजी नहीं की बल्कि जिम्मेदारी तय की और शहर को प्रदूषण मुक्त कर दिया.

अब दिल्ली की ओर देखिए. यहां हवा सफाई सरकारी हवाबाजी से चलती है. 2013 में AQI 500–600 था, और 2025 में भी वही है. हर साल धुआं दिल्ली के आसमान को घेर लेता है, लेकिन समाधान? सरकार हर साल नई घोषणाएं करती है, समितियां बनती हैं, ऐप लॉन्च होते हैं पर जमीनी स्तर नतीजा जीरो होता है.

सरकारों के लिए पराली जलाने की समस्या पर ठीकरा फोड़कर किसानों को जिम्मेदार ठहराना सब से आसान होता है जबकि आंकड़ों के अनुसार इस का योगदान औसतन 10–12% तक ही रहता है. बाकी प्रदूषण वाहनों, फैक्ट्रियों, पटाखों और निर्माण कार्यों से उठने वाले धूल धक्कड़ का है.

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