जनवरी के दिन थे. कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी. दीवार घड़ी ने थोड़ी देर पहले ही रात के 12 बजने की घोषणा की थी. कामरान और सुलतान अभी अभी सोए थे. कामरान इस वर्ष 12वीं में था और सुलतान 10वीं में. दोनों की बोर्ड की परीक्षाएं थीं. मैं ने आरंभ से ही उन में प्रतिदिन 1 घंटा अभ्यास करने की आदत डाल रखी थी.

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