सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से बैड लोन रोकने के लिए मंगलवार को बैंकिंग सिस्टम में बड़े बदलाव करने के लिए कहा. अदालत ने कहा कि सरकार को डिफॉल्टर्स से लोन रिकवरी का काम भी तेजी से करना चाहिए, ना कि यह कहना चाहिए कि सब कुछ ठीक है. देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि अगर ऐसा होता तो सरकारी बैंको को 1,14,000 करोड़ रुपये के बैड लोन को बट्टे खाते में नही डालना पड़ता.

जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस यू यू ललित के साथ बैठे चीफ जस्टिस टी एस ठाकुर ने सॉलिसीटर जनरल रंजीत कुमार से कहा, ‘यह मत कहिए कि मौजूदा सिस्टम सही चल रहा है. आप रिफॉर्म करिए. अगर यह सिस्टम सही होता तो बैंको को इतनी बड़ी रकम को राइटऑफ नहीं करना पड़ता.’ उन्होंने कहा,‘आप इसके लिए एक कमेटी बना सकते हैं, जो सिस्टम में सुधार के बारे में सलाह दे सकती है.’

इस मामले में रंजीत कुमार अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतागी की मदद कर रहे थे. चीफ जस्टिस ठाकुर ने उन पर तंज कसते हुए कहा, ‘मैं उम्मीद करता हूं कि इस मामले में आपका स्टैंड कोहिनूर की तरह नहीं होगा.’ बेंच ने इसके बाद फाइनेंस मिनिस्ट्री, आरबीआई और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन से सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन(सीपीआईएल) की याचिका में उठाए गए मुद्दों का जवाब देने के लिए कहा. मामले में सीपीआईएल की पैरवी वकील प्रशांत भूषण कर रहे हैं.

इसके बाद सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि देश के बैंकरप्शी कोड को बदला गया है. एनपीए को कंट्रोल में करने के लिए कानून में और संशोधन किए जा रहे हैं. हालांकि, चीफ जस्टिस इस मामले में सरकार के रुख से नाखुश दिखे. उन्होंने कहा कि फाइनेंस मिनिस्ट्री बैंकिंग सिस्टम में सुधार के लिए डिबेट करके उपाए करे.

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