बंगला फिल्म: ‘नेटवर्क’

रेटिंग: 4 स्टार

अवधिः 1 घंटा 52 मिनट

निर्माताः प्रीति बसु और सप्ताश्व बसु

लेखक व निर्देशकः सप्ताश्व बसु

लेखकः रिनी घोष और सप्ताश्व बसु

संगीतकारः डब्बू,राज डे, अविराज और चिरंतन

कलाकार: सास्वत चटर्जी, सव्यसाची चक्रवर्ती, रिनी घोष, इंद्रजीत मजुमदार, कार्तिकेय त्रिपाठी, भास्कर बनर्जी, इरानी घोष, सयोनी घोष,  सप्तरिशि रौय, अक्षय कपूर, रानू बसु ठाकुर

फिल्म व टीवी इंडस्ट्री की पृष्ठभूमि की रोमांचक फिल्म ‘‘नेटवर्क’’ वर्तमान समय में गोपनीयता   अतिक्रमण व निजिता हनन के मुद्दे को मनोरंजक तरीके से उठाती है. आज जब हम सभी कई तरह की निगरानी /सर्विलेंस में है, तब यह फिल्म निजिता हनन व गोपनीयता अतिक्रमण के ज्वंलत मुद्दे पर बात करती है.

कहानीः

फिल्म की कहानी के केंद्र में मशहूर फिल्मकार अभिजीत गांगुली (सास्वत चटर्जी) हैं, जिन्होंने अब अपनी प्रसिद्धि खो दी है. वास्तव में वह अपनी बेटी पूजा की मृत्यु के बाद एक चलती-फिरती परछाई बन कर रह गए थे. धीरे धीरे वह लोगों से कट गए, जिसके चलते अब उन्हें कोई नहीं पहचानता. जब उन्हें अपनी कैंसर की बीमारी के बारे में पता चलता है, और डाक्टर कह देते हैं कि अब उनकी उम्र केवल एक वर्ष के लिए ही रह गयी है, तब वह ईलाज करवाने की बजाय अपने पास मौजूद संसाधनों की मदद से अपने करियर की अंतिम फिल्म बनाकर अपनी खोई हुई शोहरत को पुनः वापस हासिल हासिल करने के लिए प्रयास शुरू करते हैं. उनके पास एक बेहतरीन कहानी है, जिसे एक बहुत बड़े फिल्म निर्माता अरविंदम चक्रवर्ती (सव्यासाची चक्रवर्ती) पैसे के बल पर खरीदना चाहते हैं. मगर अभिजीत गांगुली सीधे मना कर देते हैं. फिर वह राज (इंद्रजीत मजुमदार) और श्रेया (रिनी घोष) जैसे कइ दूसरे प्रतिभाशाली कलाकारों और तकनीशियन के एक समूह के साथ फिल्म का निर्माण शुरू करते हैं. फिल्म का प्रोमो बन जाता है. आधे से अधिक शूटिंग हो जाती है. अभिजीत गांगुली, श्रेया को अपनी बेटी पूजा की तरह मानते हैं. वह श्रेया व राज पर पूरा भरोसा करते हैं. मगर अभिजीत गांगुली को पता ही नही चलता है कि अरविंदम चक्रवर्ती ने राज को खरीद लिया है.राज व श्रेया निजी जीवन में एक दूसरे से प्रेम करते हैं. इसलिए राज के इशारे पर श्रेया, अभिजीत गांगुली से गलत कागज पर हस्ताक्षर करवाकर उनके साथ धोखाधड़ी करती है. जिससे वे बर्बाद हो जाते हैं. पता चलता है कि अरविंदम चक्रवर्ती ने राज और श्रेया के साथ ही नए नाम से उनकी ही कहानी पर फिल्म बनाकर रिलीज कर दी. फिल्म सफल होती है. राज और श्रेया स्टार बन जाते हैं.

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पर अभिजीत गांगुली मरने से पहले हार नहीं मानना चाहते. वह टीवी का एक रियालिटी शो ‘‘देअर लाइफ‘‘ नाम से एक अनोखा शो बनाते हैं. यह टीवी शो नामचीन फिल्म कलाकारों व सेलिब्रिटी की लाइफ स्टाइल से संबंधित है. अर्जुन चटर्जी (सप्तरिशि रौय) को सामने रखकर राज व श्रेया की जिंदगी को अपने टीवी रियालिटी शो में पेश करने के लिए अग्रीमेट करते हैं. फिर इस टीवी शो के माध्यम से वह राज, श्रेया व अरविंदम चक्रवर्ती सहित उन सभी व्यक्तियों से पहर एपीसोड में एक एक करके बदला लेना शुरू करते है, जिन्होंने उन्हें धोखा दिया था.

निर्देशनः

गजब की पटकथा व गजब का निर्देशन. दर्शक पूरे वक्त तक अपनी सीट पर बैठा रहता है. लेखक इस बात के लिए बधाई के पात्र है कि फिल्म देखते समय दर्शक इस बात का अनुमान ही नहीं लगा पाता कि अगले दृश्य में क्या होगा?

‘आई विटनेस’,‘प्रतिंबिंब’, ‘जिआलो’  जैसी कई लघु फिल्में  निर्देशित कर चुके 27 वर्षीय सप्तास्व बसु की बतौर निर्देशक यह पहली फीचर फिल्म है, मगर फिल्म देखकर यह कहना मुश्किल है कि यह किसी कम उम्र के निर्देशक की पहली फिल्म है. वह मूलतः इलेक्ट्रनिक्स और कम्युनीकेशन इंजीनियर हैं, तो उन्होंने अपनी इस योग्यता का भरपूर उपयोग किया है. बौलीवुड के फिल्मकारों को भी यह फिल्म देखकर कुछ तो सीख लेनी चाहिए.

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अभिनयः

जहां तक अभिनय का सवाल है तो अभिजीत गांगुली के किरदार में शाश्वत चटर्जी, अरविंदम चक्रवर्ती के किरदार में सव्यसाची चक्रवर्ती, श्रेया के किरदार में रिनी घोष, राज के किरदार में इंद्रजीत मजुमदार और सुभो के किरदार में कार्तिकेय त्रिपाठी ने शानदार अभिनय किया है. फिल्म के कैमरामैन प्रसेनजीत चौधरी और अंकित सेन गुप्ता बधाई के पात्र है.

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