‘‘रजनीगंधा’’, छोटी सी बात’, ‘इंकार’, ‘मुक्ति’, ‘पति पत्नी और वो’ जैसी कई सफलतम फिल्मों और ‘काव्यांजली’, ‘जारा’,‘हारजीत’,‘कुल्फी कुमार बाजेवाला’ जैसे हिट सीरियलों की अदाकारा विद्या सिन्हा का 71 वर्ष की उम्र में 15 अगस्त, गुरूवार को मुंबई के जुहू इलाके के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. वह फेफड़े की बीमारी से पीड़ित थी और पिछले चार दिनों से वह अस्पताल में वेंटीलेटर पर थी.

नाना ने पाला पोसा

विद्या सिन्हा पूरी जिंदगी कई तरह के झंझावतों से ही जूझती रही. फिल्मी माहौल में परवरिश पाने वाली विद्या सिन्हा ने 18 साल की उम्र में ही ‘मिस बांबे’ का खिताब जीत लिया था. विद्या सिन्हा के पिता राणा प्रताप सिंह फिल्म निर्माता थे, जबकि विद्या सिन्हा के नाना मोहन सिन्हा फिल्म निर्देशक थे. विद्या सिहा के जन्म के साथ ही उनकी मां का निधन हो गया था. तब उनके पिता राणा प्रताप ने दूसरी शादी कर ली थी. और विद्या सिन्हा की परवरिश उनके नाना मेाहन सिन्हा ने की. विद्या सिन्हा के पिता और नाना दोनों चाहते थे कि विद्या सिन्हा फिल्मों से दूर रहें. इसी के चलते विद्या सिन्हा के अभिनय करियर की शुरूआत उनकी शादी के पांच साल बाद हुई थी. वैसे शादी करते समय ही विद्या सिंहा ने कह दिया था कि वह फिल्मों में अपना करियर बनाना चाहेंगी. उनके ससुराल पक्ष को एतराज नहीं था.

शादी के बाद फिल्मों में अभिनेत्री बनी

मगर ‘मिस बांबे’ का खिताब जीतते ही उनके पास विज्ञापन फिल्मों की कतार लग गयी थी. पर उनके फिल्मी करियर की शुरूआत 1974 में फिल्मकार बासु चटर्जी द्वारा साहित्यकार मन्नू भंडारी की कहानी ‘‘यही सच है’’ पर बनी फिल्म ‘‘रजनीगंधा’’ में अमोल पालेकर के साथ हुई थी. इस फिल्म में विद्या सिन्हा ने दीपा का किरदार निभाया था, जो कि दो लड़कों संजय (अमोल पालेकर) और नवीन (दिनेश ठाकुर) से अलग अलग वजहों से प्यार करती है, पर अंत में संजय से शादी करती हैं. फिल्म‘‘रजनीगंधा’ ने कई पुरस्कार बटोरने के साथ साथ बौक्स आफिस पर अच्छी कमायी की और फिर विद्या सिंहा स्टार बन गयी थी. जबकि बौलीवुड मे यह समय ग्लैमरस हीरोईन का माना जाता था. लेकिन दर्शकों ने पहली बार विद्या सिन्हा के सादगी पूर्ण व स्वाभाविक अभिनय को पसंद किया था.

पहली फिल्म के लिए दस हजार रूपए पारिश्रमिक राशि     

विद्या सिन्हा ने एक बार हमसे बातचीत करते हुए कहा था- ‘‘फिल्मों में हीरोईन बनने से पहले मेरी शादी हो चुकी थी. मेरी पहली फिल्म दो लाख रूपए के बजट में बनी थी, जिसके लिए मुझे दस हजार रूपए पारिश्रमिक राशि के तौर पर मिले थे. जबकि मुझे फिल्म व अभिनय के बारे में कुछ नहीं पता था. लेकिन निर्देशक बासु चटर्जी जी ने मुझे सब कुछ सिखाया था. वह मेरे मेंटर थे. अमोल पालेकर की भी यह पहली फिल्म थी.’’

फिल्म‘‘रजनीगंधा’के सफल होते ही विद्या सिन्हा को फिल्में मिलने लगी. विद्या सिन्हा ने राजेश खन्ना, शबाना आजमी, संजीव कुमार, शशिकपूर, विनोद खन्ना सहित उस वक्त के कई मशहूर कलाकारों के साथ फिल्में की.

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सत्यम शिवम सुंदरम करने से किया था इंकार

अपने समय के मशहूर फिल्म निर्देशक व अभिनेता राज कपूर और विद्या सिन्हा के नाना मोहन सिन्हा अच्छे दोस्त थे. राज कपूर ने मोहन सिंहा के निर्देशन में 1947 में फिल्म ‘‘दिल की रानी’’ में अभिनय किया था. इससे पहले राज कपूर के  पिता पृथ्वीराज कपूर भी विद्या सिन्हा के नाना के साथ 1945 में फिल्म ‘‘श्री कृष्णार्जुन युद्ध’’ में काम किया था. वक्त बदला और जब राज कपूर ने फिल्म ‘‘सत्यम शिवम सुंदरम’ बनाने का निर्णय लिया, तो वह अपनी फिल्म ‘‘सत्यम शिवम सुंदरम’’ में जीनत अमान की बजाय विद्या सिन्हा को लेना चाहते थे. लेकिन विद्या सिन्हा के मना करने पर राज कपूर ने जीनत अमान को लेकर यह फिल्म बनायी थी. 2015 में एक मुलाकात के दौरान इस बारे में विद्या सिन्हा ने हमसे कहा था- ‘‘राज जी ने फिल्म ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ का आफर दिया था, पर मैंने मना कर दिया था. क्योंकि मैं उस तरह के कपड़े नही पहनना चाहती थी, जिस तरह के कपड़े जीनत अमान ने इस फिल्म में पहना था. इस निर्णय को करते हुए मैं दुखी भी हुई थी. क्योंकि मैं हमेशा उनके साथ काम करना चाहती थी.’’

दिलीप कुमार के साथ काम करने का सपना रहा अधूरा

विद्या सिन्हा का सपना था कि उन्हे दिलीप कुमार के साथ फिल्म करने का अवसर मिले. मगर उनका यह सपना पूरा न हो पाया. जबकि फिल्मकार नासिर हुसैन दोनों को लेकर एक फिल्म बनाना चाहते थे, मगर फिल्म शुरू होने से पहले ही डिब्बे में बंद हो गयी थी.

संजीव कुमार की प्रशंसक थी विद्या सिन्हा

विद्या सिन्हा बचपन से ही संजीव कुमार की फैन थी. और उनका सपना था कि संजीव कुमार के साथ फिल्म करने का अवसर मिले. उनका यह सपना पूरा हुआ था. विद्या सिन्हा ने ‘‘मुक्ति”,‘‘पति पत्नी और वो’’ तथा ’’तुम्हारे लिए’ फिल्मों में संजीव कुमार के साथ अभिनय किया था. संजीव कुमार का जिक्र छिड़ने पर विद्या ने कहा था- ‘‘संजीव कुमार बहुत ही विनम्र इंसान थे. उन्होंने कभी भी हीरो या स्टार की तरह मेरे साथ व्यवहार नहीं किया था. उनका व्यवहार दोस्ताना होता था. वह हमें जोक्स सुनाकर सेट पर हंसाया करते थे.’’

1987 से 2005 तक अभिनय से दूरी की गलती

सीरियल ‘‘इश्क का रंग सफेद’’ के सेट पर विद्या सिन्हा ने हमसे बातचीत करते हुए कुबूल किया था कि बीच मे जब उनका करियर उंचाई पर था, उस वक्त अभिनय से दूरी बनाना उनकी गलती थी. उन्होंने कहा था- ‘‘जब मेरा करियर उंचाई पर था. तब मुझे लगा कि बहुत काम कर लिया, अब आराम किया जाए. यह मेरी गलती थी. जबकि उन दिनों अभिनय को अलविदा कहने की मेरे पास कोई वजह भी नहीं थी. मुझे बीच में अभिनय को अलविदा कहने का हमेशा गम रहा. बिना काम के घर पर बैठे रहने फ्रस्टेशन भी आने लगा था. इसीलिए मैंने दुबारा टीवी सीरियलों में अभिनय करना शुरू किया था. मैं हर औरत से कहना चाहूंगी कि उन्हे अस्सी साल की उम्र मे भी काम करते रहना चाहिए. ’’शायद यही वजह रही कि वह बाद में अपने अंतिम दिनों तक लगातार अभिनय करती रहीं.

वैसे फिल्म उद्योग को अलविदा कहने से पहले विद्या सिन्हा ने दूरदर्शन के लिए टीवी सीरियल ‘‘सिंहासन बत्तीसी’’और ‘‘दरार’’ के अलावा मराठी भाषा में फिल्म ‘‘बिजली’’ तथा गुजराती भाषा में फिल्म ‘‘जीवी रबरन’ का निर्माण भी किया था.

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नेगेटिव किरदार निभाने का सपना नहीं हुआ पूरा

‘इश्क का रंग सफेद’ के ही सेट पर विद्या सिन्हा ने कहा था कि उनकी तमन्ना नेगेटिव किरदार निभाने की है, पर उनका यह सपना पूरा न हो सका.

1969 में विद्या सिन्हा ने अपने पड़ोसी, प्रेमी और तमिल ब्राम्हण वेंकटेशवरन अय्यर से 19 साल की उम्र में विवाह रचाया. 1986 में उन्होंने जान्हवी को बेटी के तौर पर गोद लिया. जिंदगी में बेटी के आते ही विद्या सिहा ने अभिनय को अलविदा कह दिया. उसके बाद उनकी जिंदगी बेटी जान्हवी की परवरिश और बीमार पति की देखभाल में गुजरी. अंततः 1996 में उनके पति का देहांत हो गया. उसके बाद वह अपनी दत्तकपुत्री जान्हवी के साथ सिडनी, आस्ट्रेलिया चली गयी. 2001 में उनकी औन लाइन डा. नेताजी भीमराव सालुंके से दोस्ती हुई और चंद दिनों में ही दोनों ने शादी कर ली. मगर यह उनकी जिंदगी का दुःखद अध्याय रहा. अपनी दूसरी शादी से खुशी नही मिली. 2004 में वह वापस मुंबई आ गयी. 2005 में उन्होंने पुनः अभिनय की तरफ कदम बढ़ाते हुए टीवी सीरियल ‘‘काव्यांजली’’ से करियर की दूसरी पारी शुरू की. उन्होंने 2011 में सलमान खान व करीना कपूर के  साथ फिल्म ‘बौडीगार्ड’ भी की. यही उनके करियर की अंतिम फिल्म रही. कई अन्य सीरियल किए. 2018 में उन्होंने सीरियल ‘‘कुल्फीकुमार बाजेवाला’ में अभिनय किया, जो कि उनके करियर का अंतिम सीरियल रहा.

अंततः अपने दूसरे पति द्वारा दी जा रही यातनाओ से तंग आकर 9 जनवरी 2009 को विद्या सिन्हा ने अपने पति के खिलाफ पुलिस में शारीरिक और मानसिक यातना की शिकायत दर्ज करायी. मामला अदालत पहुंचा और अंततः दोनों ने तलाक ले लिया. मगर विद्या सिन्हा हर बार अपनी दूसरी शादी और दूसरे पति को लेकर बात करने से इंकार करती रही. तलाक के बाद भी इस बारे में विद्या सिन्हा ने कभी बात नहीं की.

टीवी कलाकारों ने प्रकट किया शोक

टीवी सीरियल निर्माता व निर्देशक राजन साही के अलावा टीवी इंडस्ट्री से जुड़े तमाम कलाकारों ने विद्या सिन्हा के निधन पर दुःख व शोक प्रकट किया है.

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