Gen Z Awareness: भगवा कपड़े धारण किए किसी भी युवा, अधेड़ या वृद्ध को स्वामी मान उन के पैरों पर गिरने को जो लोग बचपन से जवानी तक और जवानी से अब सत्ता की कुरसियों पर पहुंचने तक अपनी संस्कृति, अपना संस्कार, अपनी शक्ति और अपने जीवन का एकमात्र लक्ष्य मानते रहे हैं, वे जेनजी के जंतरमंतर पर हुए प्रोटैस्ट से भौचक्के हैं, एकदम पंगु हो गए हैं, अवाक रह गए हैं.
कल के छोकरेछोकरियां हमें सबक सिखाएंगी? यह पीढ़ी हमें बताएगी कि देश और समाज कैसे चलता है? हमारी गलतियां निकालेगी? यह पीढ़ी हिंदूमुसलिम, ऊंचनीच का भेदभाव भुला कर, बिना जय श्रीराम का नारा लगाए 33-36 दिन तक धरने पर बैठी रहेगी और आजादी का नारा लाएगी?
जिन के एक हाथ में मनुस्मृति, पौराणिक ग्रंथ, मालाएं, रामायण, महाभारत हैं और दूसरे हाथ में डंडे, पैलेट गन्स, एके 47 और पीछे बैरेकों में बख्तरबंद गाडिय़ों में तैनात पुलिस व अर्धसेना बल उन को ये बताएंगे कि देश व समाज में कहां, कैसे गलत हो रहा है?
ये कीड़े हैं, कौकरोच हैं. इन उद्दंडियों को कुचलने के लिए हमारे पास धर्म की हिट और पेस्टीसाइड है, पुलिस की धमकियां हैं, समाज से उन को निकालने का पुश्तैनी हक है. हमारी संस्कृति तो वह है जिस में एक पिता अपनी एक पत्नी की जिद पर अपनी ही दूसरी पत्नी के बेटे को महलों से निकाल कर वन में भेज देता है, एक पति अपनी पत्नी पर शक में उस के बेटे का सिर काट देता है. उस समय तो जेनजी ने पिता की आज्ञा को मान लिया था. आज की जेन जी में ऐसे क्या सुरखाव के पर लग गए हैं कि वह हमारे सामने सीना तान कर खड़ी हो गई और अपनी मांग रख दी कि उस के भविष्य के साथ खिलवाड़ न करो, चाहे तो छलनी कर दो सीनों को?
संस्कृति, संस्कार, स्मृतियों, प्रवचनों, पूजाओं के कुंडों में नहाती प्रौढ़ और वृद्ध पीढ़ी को यह नहीं मालूम था कि उन के बदन के कपड़े अब उतर चुके हैं और किनारे पर खड़ी पीढ़ी समझ रही है कि मटमैले पानी में बदबू है, सड़ीगली चीजें हैं, कीचड़ है, बीमार करने वाले किटाणु हैं. तट पर खड़ी जेन जी को पिछले 2 दशकों में वह जानकारी मिली है जिसे सदियों से छिपा कर रखा गया था. वह अब तर्क समझ रही है, वह कुछ आगे की सोच पा रही है, देख पा रही है. वह कुछ अच्छे का, कुछ बुरे का प्रयोग करने को तैयार है.
उसे पिछली पीढिय़ों ने पूरी तरह उन कुंडों में डूबोने की कोशिश की है जिन में सबकुछ सड़ा है और बहुत से उस में कूद चुके हैं पर कुछ को समझ आ गया है कि रास्ता गहरे कुंडों में उतरने से नहीं, पहाड़ों की चोटियों को पार करने से बनता है.
भाजपा सरकार ने बौखलाहट में अपने घोर समर्थकों को श्राप देना शुरू कर दिया है. उन के जेनजी के जो युवा इन धरनोंप्रदर्शनों में भाग लेने गए थे उन्हें पुलिस थानों में बुलाया जाने लगा है. भाजपा सरकार भूल रही है कि जिस संस्कृति की वह दुहाई दे रही है उस में प्रौढ़ व वृद्ध पीढ़ी हमेशा भीष्म पितामह की तरह तीरों की शैय्या पर सोई है. यह ढोल पीटने के बावजूद कि हमारे यहां आदरसम्मान रहता है, अनुशासन रहता है जबतब भाईभाई लड़ते रहे हैं और अपने ही विरोधियों से जा मिलते रहे हैं.
राम मंदिर की आड़ में भाजपा आंदोलन, जो बाद में सरकार में आ गया, देश और समाज को जिस ओर धकेल रहा था वहां कांटे ही कांटे हैं, यह जेनजी के आंदोलन ने दिखाया है. फिलहाल भाजपा पैरालिसिस की शिकार है. वह पुलिस बल का इस्तेमाल अवश्य करेगी क्योंकि सदियों से श्राप दे कर राजा को रंक बनाने, अंगभंग करने की कहानियां खूब सुनीसुनाई गई हैं. भाजपा ने इसी हथियार से सत्ता पाई और इसी से वह अपनी सत्ता बचाएगी. Gen Z Awareness





