O’Romeo (2026) Movie Review : बौलीवुड में अंडरवर्ल्ड पर बनी फिल्मों की कमी नहीं है. शाहिद कपूर की यह फिल्म भी मुंबई के अंडरवर्ल्ड के एक कुख्यात अनुबंधित हत्यारे और ऐयाश उस्तरा (शाहिद कपूर) के इर्दगिर्द घूमती है. विशाल भारद्वाज के साथ शाहिद कपूर की जोड़ी फिल्म ‘कमीने’से बनी. यह फिल्म 2009 में रिलीज हुई थी और दर्शकों का खासा रिस्पौंस फिल्म को मिला था. उस के बाद कई फ्लौप फिल्में देने वाले शाहिद कपूर ने ‘हैदर’ फिल्म में अभिनय के लिए फिल्मफेयर अवार्ड जीता.

‘कबीर सिंह’शाहिद कपूर की एक और चर्चित फिल्म थी जिस में उस ने एक असंतुष्ट प्रेमी का किरदार निभाया. कियारा आडवाणी के साथ की गई इस फिल्म में उस ने वायलैंट प्रेमी का किरदार निभाया. उस की अन्य कर्ई फिल्मों में भी वायलैंट लव दिखाई दिया. विशाल भारद्वाज के साथ ‘कमीने’के बाद अब वह चौथी बार ‘ओ रोमियो’में विशाल भारद्वाज के साथ आया है.

‘ओ रोमियो’ साधारण गैंगस्टर पर बनी फिल्म नहीं है. यह फिल्म शोर नहीं रचाती, मगर धीरेधीरे अपनी पकड़ मजबूत बनाती है. फिल्म पहले किरदारों को करीब लाती है. दूसरे हिस्से में उन के छिपे राज खोलती है.

विशाल भारद्वाज की ‘मकबूल’, ‘ओमकारा’और ‘हैदर’ शेक्सपियर के नाटकों की भारतीय रूपांतर थीं. उस की नई फिल्म ‘ओ रोमियो’हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया औफ मुंबई’से प्रेरित है. इस किताब में मुंबई अंडरवर्ल्ड में सक्रिय रही महिलाओं की दुनिया का जिक्र है.

फिल्म की कहानी बिखरीबिखरी सी है. विशाल भारद्वाज ने फिल्म में कलाकारों की भीड़ इकट्ठी की है. फिल्म की लंबाई ज्यादा है, लगभग 3 घंटे. कहानी 1995 के मुंबई अंडरवर्ल्ड की पृष्ठभूमि पर है. उस्तरा (शाहिद कपूर) एक गैंगस्टर है, जिसे के सिर पर खुफिया विभाग के अधिकारी इस्माइल खान (नाना पाटेकर) का हाथ है. इस्माइल खान अंडरवर्ल्ड सरगना जलाल (अविनाश तिवारी) के ड्रग्स नैटवर्क को खत्म कर देना चाहता है. उस्तरा पहले स्पेन में जलाल के साथ काम कर चुका है. वह स्पेन में अपनी पत्नी राबिया (तमन्ना भाटिया) के साथ रहता है.

वह खूंखार और हैवान है. वहीं से मुंबई में ड्रग्स और अंडरवर्ल्ड के धंधों को कंट्रोल करता है. छोटू (हुसैन दलाल) उस्तरा का खास आदमी है. बार डांसर जूली (दिशा पाटनी) उस्तरा की गर्लफ्रैंड है. एक दिन अफ्शा (तृप्ति डिमरी) अपने पति महबूब (विक्रांत मैसी) की हत्या का बदला लेने के लिए उस्तरा के पास आती है. वह जलाल, इंस्पैक्टर पठारे (राहुल देश पांडे) सहित 4 लोगों की सुपारी देना चाहती है. पहले तो उस्तरा इनकार कर देता है लेकिन फिर उस की हिम्मत देख कर उस की मदद करने को तैयार हो जाता है और इन चारों को मारने में उस की मदद करता है. वह अफ्शा को भी ट्रेंड करता है. इसी दौरान वह अफ्शा को चाहने लगता है.

मध्यांतर से पहले कहानी गैंगस्टर वार और पुलिस के बीच ऐक्शन ड्रामा लगती है. मगर मध्यांतर के बाद कहानी लवस्टोरी और बदले की हो जाती है. लोगों को मिनटों में मौत के घाट उतारने वाला उस्तरा अचानक रोमियो बन जाता है. वह अफ्शा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाता है. इधर उस्तरा, अफ्शा, जलाल और खान सभी की अलगअलग कहानी है जो बीचबीच में आती रहती है.

विशाल भारद्वाज ने शाहिद कपूर को चौकलेटी इमेज से बाहर निकाला है. कई जगह शाहिद सनकी और खूंखार लगा है जैसा वह ‘कमीने’और ‘हैदर’में दिखा था. शाहिद और नाना पाटेकर की नोकझोंक मजेदार है. नाना पाटेकर ने खान के किरदार में खूब मसखरी की है. तृप्ति डिमरी ने खूबसूरत होने के साथसाथ रोमांस और ऐक्शन भी किया है. अविनाश तिवारी ने आश्चर्यचकित किया है. उस की एंट्री ठीक इंटरवल से पहले होती है. विक्रांत मैसी, तमन्ना भाटिया और दिशा पाटनी के रोल ठीक हैं.

‘आशिकों की कालोनी…’गाने में दिशा पाटनी ने अपनी हौट फिगर दिखाई है. उस के बोल्ड स्टैप्स पर शाहिद कपूर ने बढिय़ा डांस किया है. गुलजार के गीत और विशाल भारद्वाज का संगीत बढिय़ा है. गाने कहानी में अखरते नहीं. 90 के दशक के गानों का इस्तेमाल हुआ है. निर्देशन, ऐक्शन सीन बढिय़ा हैं, सिनेमेटोग्राफी भी अच्छी है. O’Romeo (2026) Movie Review

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