Movie Review: निर्देशक मुदस्सर अजीज की फिल्में सिटकौम जौनर पर बेज्ड होती हैं. इस से पहले वे ‘मेरे हसबैंड की बीवी’, ‘हैप्पी फिर भाग जाएगी’, ‘दूल्हा मिल गया’ और ‘पति पत्नी और वो’ बना चुके हैं. यह फिल्म इसी फिल्म का स्प्रिचुअल सीक्वल है. अपनी पिछली फिल्मों की तरह ही यह फिल्म भी आईगई जैसी है.
फिल्म में नया कुछ नहीं है. एक शादीशुदा कपल है जिस में पति ऐसी सिचुएशन में फंस जाता है कि गलतफहमियां शुरू हो जाती हैं. गलतफहमियां इतनी बढ़ जाती हैं कि पूरा रायता ही फैल जाता है. फिल्म पूरी ताकत से आप को यकीन दिलाने की कोशिश करती है कि यह सब बेहद मजेदार है मगर इतना मजा आता नहीं है. समस्या सिर्फ इतनी है कि फिल्म जितना खुद पर हंसती है, उतना दर्शक नहीं हंस पाता.
कहानी प्रयागराज के फौरेस्ट औफिसर प्रजापति पांडेय (आयुष्मान खुराना) की है. प्रजापति की पत्नी अपर्णा (वामिका गब्बी) एक पत्रकार है, जो एक बड़े नेता के बेटे (विशाल) की तसवीर छाप देती है. तसवीर में उस के साथ बुर्का पहने एक लड़की चंचल (सारा अली खान) दिखती है. नेता अपनी जातिवादी राजनीति बचाने में लगा है, वह नहीं चाहता कि लड़की की शादी उस के बेटे से हो.
नेता लड़की के पीछे गुंडे लगा देता है. इस डर से लड़की छिपती फिर रही है और प्रजापति चूंकि उस का पुराना दोस्त है तो उस से मदद मांगती है. अब दोनों प्लान बनाते हैं कि वे अगर यह दिखाएं कि वे रिलेशनशिप में हैं तो लड़की पर से नेता का शक खत्म हो जाएगा. इस प्लान के बाद ही समझ आ जाता है कि अब अगले डेढ़ घंटे फिल्म में ऊलजलूल चीजें, झूठ, शक और ओवरऐक्टिंग की दुकान सजने वाली है.
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